samacharsecretary.com

इंदौर का सपना होगा पूरा, 737 करोड़ की केबल कार योजना को मंजूरी का इंतजार

इंदौर  इंदौर में केबल कार से सफर करने का सपना जल्द हकीकत बन सकता है। इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) द्वारा कराए गए फिजिबिलिटी सर्वे की रिपोर्ट नेशनल हाइवे लॉजिस्टिक मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLML) को सौंप दी गई है। NHLML ने इस प्रस्ताव को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, दिल्ली को अनुमोदन और बजट आवंटन के लिए भेज दिया है। इंदौर विकास प्राधिकरण ( IDA ) की स्कीम 171 को लेकर शुक्रवार को हुई बोर्ड बैठक में प्रस्ताव रखा गया। जैसा कि द सूत्र ने बताया था कि इस मामले में रास्ता निकालने की कोशिश की जा रही है और इसके तहत सोसायटी की जमीन मुक्त की जाएगी और निजी जमीन पर नई स्कीम लाई जाएगी। ऐसी बोर्ड बैठक में चर्चा चली और इसी तरह का स्कीम को मोडिफाइ करने का  विस्तृत प्रस्ताव बनाकर आईडीए द्वारा जल्द मप्र शासन को भेजा जाएगा।  यह निकला है रास्ता संभागायुक्त दीपक सिंह की अध्यक्षता में यह बोर्ड बैठक हुई इसमें कलेक्टर आशीष सिंह, सीईओ आरपी अहिरवार सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। इसमें तय किया गया कि सालों से आईडीए स्कीम 171 के पीड़ित परेशान है और वह राशि भी दिसंबर 2024 में पूरी भर चुके हैं तो मप्र शासन के नोटिफिकेशन के तहत इस स्कीम को अप मुक्त करना चाहिए। लेकिन निजी भू स्वामियों की जमीन को लेकर भी बात उठी। तय किया गया कि करीब 171 हेक्टेयर की इस स्कीम में 20 हेक्टेयर सरकारी जमीन है और 38 हेक्टेयर निजी भू स्वामी की जमीन है। ऐेसे में इनस 58 हेक्टेयर जमीन पर अलग से नई स्कीम लागू की जाए और बाकी सोसायटी की जमीन को मुक्त किया जाए। अब इस संबंध में आईडीए द्वारा जमीन का पूरा सर्वे कराकर खसरे नंबर सहित पूरा नक्शा व प्रस्ताव, इस पर होने वाला खर्च, इससे होने वाली आय इन सभी की रिपोर्ट बनाकर मप्र शासन को भेजेगा।  परियोजना की मुख्य बातें कुल लागत: करीब 737 करोड़ रुपये कुल लंबाई: 11 किमी (दो रूट) शुरुआत: 2028 से अनुमानित यात्री: 2028 में प्रतिदिन 29,900, 2068 तक 1.95 लाख पहला रूट: चंदन नगर से शिवाजी वाटिका (6.24 किमी) लागत: 369.32 करोड़ रुपये स्टेशन: चंदन नगर, लाबरिया भेरू, यशवंत निवास रोड गुरुद्वारा, सरवटे, शिवाजी वाटिका यात्री अनुमान (2028): 11,700 प्रतिदिन दूसरा रूट: रेलवे स्टेशन से विजय नगर (4.7 किमी) लागत: 367.68 करोड़ रुपये स्टेशन: रेलवे स्टेशन, मालवा मिल, पाटनीपुरा, विजय नगर यात्री अनुमान (2028): 18,200 प्रतिदिन भविष्य का यात्री अनुमान     2038: 47,400 प्रतिदिन     2048: 78,200 प्रतिदिन     2068: 1.95 लाख प्रतिदिन सेक्शन विवरण     चंदन नगर – शिवाजी वाटिका: 3 सेक्शन (1.74 किमी, 1.93 किमी, 2.59 किमी)     रेलवे स्टेशन – विजय नगर: 2 सेक्शन (2.08 किमी, 2.62 किमी)

दाल-सांभर सहित भारतीय सामानों की कीमतों पर US टैरिफ का प्रभाव क्या रहा?

नई दिल्ली अमेरिका ने भारत पर 7 अगस्‍त से 25 फीसदी टैरिफ लगा दिया है और 25% एक्‍स्‍ट्रा टैरिफ 27 अगस्‍त से लागू करने की बात कही है. भारत पर ये टैरिफ लागू होने से एक्‍सपोर्ट में गिरावट की आशंका है, जबकि भारत से अमेरिका जाने वाले सामानों की कीमतों पर भी इसका असर दिखाई दे सकता है.  भारत से भारी मात्रा में कपड़ा, दवा, इंजीनियरिंग सामान और कृषि उत्‍पाद, अमेरिका भेजे जाते हैं. एक्‍सपर्ट्स बता रहे हैं कि Trump Tariff की वजह से इन सामानों से प्रॉफिट मार्जिन घट सकता है, जिसका असर अमेरिका में भारतीय प्रोडक्‍ट्स खरीदने वाले कस्‍टमर्स पर भी पड़ सकता है.  अमेरिका में भी ट्रंप के टैरिफ को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं और कई जगहों पर विरोध भी हुए हैं. बिजनेस टुडे के मुताबिक, हाल ही में एक NRI ने सोशल प्‍लेटफॉर्म रेडिट पर भारतीय आयात पर 25 से 50 फीसदी टैरिफ के संभावित नतीजों को लेकर सवाल उठाया और पूछा कि क्‍या इससे अमेरिका में स्‍थानीय किराना दुकानें प्रभावित हुई हैं और क्‍या भारतीय सामानों की कीमत बढ़ी है? NRI ने लिखा, 'मैं कहीं पढ़ र‍हा था कि पटेल ब्रदर्स और बड़ी कंपनियां टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए दूसरे साउथ एशियाई देशों से दाल, अनाज और मसाले जैसी चीजें मंगा रही हैं. क्‍या आप अपने शहर की किराने की दुकानों में टैरिफ का कोई खास असर देख रहे हैं?  इस पोस्‍ट के बाद अमेरिका में रहने वाले कई यूजर्स के जवाब आए, जिन्‍होंने जानकारी दी कि अमेरिका के किराना स्‍टोर्स में भारतीय सामानों पर क्‍या असर हुआ है? एक यूजर ने लिखा कि मुझे ज्‍यादा कीमत चुकानी पड़ेगी. मैं बांग्‍लादेश से सांभर या किसी दूसरे देश से दाल नहीं खरीदूंगा. भारत और दूसरे देशों से आने वाले प्रोडक्‍ट्स की क्वालिटी में बहुत फर्क होता है. खासकर एक वेजिटेरियन होने के नाते मैं कभी भी नॉन-इंडियन फूड पर भरोसा नहीं करूंगा कि वे सात्विक है या मेरे परिवार के लिए सही है. लेकिन यह सिर्फ मेरी राय है.  दूसरे यूजर ने बताया कि 7 अगस्‍त से भारत के बंदरगाह से रवाना होने वाले जहाजों के लिए नए टैरिफ लागू होंगे. इसलिए मौजूदा सामान पर कीमतें नहीं बढ़ेंगी. एक तीसरे ने कहा कि ज्यादातर भारतीय किराना दुकानों का मुनाफा मार्जिन काफी अधिक है, इसलिए मुझे लगता है कि शुरुआत में वे इस नुकसान को झेल लेंगे. अगर महीनों तक कोई व्‍यापारिक समझौता नहीं होता है तो यह एक समस्‍या होगी. 

चेतक-चीता हेलिकॉप्टर की जगह नई हल्की मशीनें, इंडियन आर्मी और एयरफोर्स को बड़ा तोहफा

नईदिल्ली  इंडियन आर्मी और एयरफोर्स अपने पुराने चेतक और चीता हेलिकॉप्टरों को हटाकर करीब 200 नए हल्के हेलिकॉप्टर खरीदने की तैयारी कर रही है। इसके लिए रक्षा मंत्रालय ने रिक्वेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन (RFI) जारी किया है। इन नए हेलिकॉप्टरों को रिकॉनेसेन्स और सर्विलांस हेलिकॉप्टर (RSH) के तौर पर बांटा गया है। इनमें से 120 हेलिकॉप्टर भारतीय सेना और 80 हेलिकॉप्टर वायुसेना को दिए जाएंगे। ये हेलिकॉप्टर दिन और रात दोनों समय में काम कर सकेंगे। रक्षा मंत्रालय का उद्देश्य तकनीकी जरूरतें तय करना, खरीद प्रक्रिया पर निर्णय लेना और संभावित आपूर्तिकर्ताओं की पहचान करना है। इसमें भारतीय कंपनियों को भी शामिल किया जाएगा जो विदेशी कंपनियों (OEMs) के साथ साझेदारी करके हेलिकॉप्टर बना सकें। इनका उपयोग कई अन्य कामों के लिए किया जाएगा, जैसे…     दुश्मन की निगरानी और जानकारी जुटाना     कम संख्या में सैनिकों को मिशन पर ले जाना     जरूरत पड़ने पर जल्दी प्रतिक्रिया देने वाली टीमों को ले जाना     जमीन पर लड़ाई में मदद देना     घायल सैनिकों को निकालना और राहत-बचाव कार्य     जरूरत पड़ने पर नागरिक प्रशासन की मदद करना डिफेंस मिनिस्ट्री और भी हेलिकॉप्टर खरीदेगा डिफेंस मिनिस्ट्री ने अन्य प्लेटफॉर्म के साथ और भी यूटिलिटी हेलिकॉप्टर खरीदने की योजना बनाई है। संसद में पेश रक्षा मामलों की स्थायी समिति की रिपोर्ट के अनुसार, निम्न-स्तरीय रडार, हल्के लड़ाकू विमान (LCA), मल्टी-रोल हेलिकॉप्टर, और मिड-एयर रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट भी खरीदे जाएंगे। इसके अलावा, मंत्रिमंडल की सुरक्षा समिति ने हाल ही में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) से 156 हल्के लड़ाकू हेलिकॉप्टर खरीदने की मंजूरी दी है, जिसकी कीमत 45,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है। ये हेलिकॉप्टर भी सेना और वायुसेना में बांटे जाएंगे और चीन-पाकिस्तान सीमा पर तैनात होंगे। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में भी एक बड़ा प्रयास है। भारतीय वायुसेना देश में ही लड़ाकू विमान, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, हेलिकॉप्टर, ट्रेनर विमान, मिसाइल, ड्रोन और रडार बनाने पर जोर दे रही है, ताकि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल की जा सके। भारत ने अमेरिका से हथियार-विमानों की खरीद रोकी, रक्षा मंत्री का अमेरिका दौरा भी रद्द टैरिफ विवाद के बीच भारत ने अमेरिका से नए हथियार और विमान खरीद की योजना रोक दी है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने 3 भारतीय अफसरों के हवाले से यह जानकारी दी है। ट्रम्प के 50% टैरिफ लगाने के बाद इसे भारत की पहली ठोस प्रतिक्रिया माना जा रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय रक्षा मंत्री आने वाले हफ्तों में डिफेंस डील के लिए अमेरिका जाने वाले थे। अब यह दौरा रद्द कर दिया गया है। भारत अमेरिका से P8i निगरानी विमान, स्ट्राइकर कॉम्बैट व्हीकल्स और जैवलिन एंटी टैंक मिसाइल खरीदने वाला था। टैरिफ के चलते यह सौदा भी रोक दिया गया है।

लखनऊ से देहरादून जा रही इंडिगो फ्लाइट पौने दो घंटे लेट, तकनीकी समस्या सामने आई

लखनऊ  रक्षाबंधन वाले दिन यानि शनिवार सुबह लखनऊ से देहरादून जा रही इंडिगो की फ्लाइट तकनीकी खराबी के कारण रोक दी गई। लखनऊ के चौधरी चरण सिंह इंटरनेशनल एयरपोर्ट से यह फ्लाइट कुछ मिनटों में ही टेकऑफ करने वाली थी। इंडिगो की फ्लाइट 6E-515 लखनऊ से सुबह 8:55 बजे रवाना होकर 10:15 बजे देहरादून पहुंचनी थी। विमान में सफर करने वाले एक यात्री के मुताबिक, इस विमान की बोर्डिंग पूरी हो चुकी थी और उसमें क्रू मेंबर सहित 158 यात्री सवार थे। जब विमान उड़ान भरने के लिए टैक्सी वे से रनवे पर जा रहा था, तभी विमान में हल्का झटका लगा, पायलट ने तकनीकी गड़बड़ी पहचान ली। पायलट ने तुरंत एयर ट्रैफिक कंट्रोल को सूचना देते हुए विमान को रोक दिया। इसके बाद विमान को वापस टैक्सीवे पर लाया गया। विमान की खराबी दूर करने के लिए तत्काल इंजीनियरों की टीम बुलाई गई। यहां पर इंजीनियरों की टीम ने लगभग पौने दो घंटे की मेहनत के बाद विमान की खराबी दूर किया। इसके बाद विमान को रवाना किया। 8:55 पर रवाना होने वाला विमान सुबह 10.50 बजे उड़ान भर सका। विमान का देहरादून पहुंचने का समय 10.15 बजे है।

90 घंटे में पाक की हार, AIF चीफ ने उजागर की सीजफायर की वास्तविक कहानी

नई दिल्ली  ऑपरेशन सिंदूर को लेकर वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कई खुलासे किए हैं। उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर की असली कहानी भी बताी। उन्होंने कहा, "यह एक उच्च तकनीक वाला युद्ध था। 80 से 90 घंटे के युद्ध में हम इतना नुकसान कर पाए कि उन्हें साफ पता चल गया था कि अगर वे इसे जारी रखेंगे तो उन्हें इसकी और भी अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी इसलिए वे आगे आए और हमारे DGMO को संदेश भेजा कि वे बात करना चाहते हैं। हमारी ओर से इसे स्वीकार कर लिया गया।" वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को रोकने के निर्णय का समर्थन करते हुए कहा, “युद्ध में लोग अपने अहंकार पर उतर आए। एक बार जब हमने अपना उद्देश्य हासिल कर लिया, तो हमें रुकने के सभी अवसर तलाशने चाहिए थे। मेरे कुछ बहुत करीबी लोगों ने कहा, 'और मरना था'। लेकिन क्या हम युद्ध जारी रख सकते हैं? राष्ट्र ने एक अच्छा निर्णय लिया है।” उन्होंने यह भी कहा, "हमारे पास बहावलपुर स्थित जैश के हेडक्वार्टर में पहुंचाए गए नुकसान की पहले और बाद की तस्वीरें हैं। यहां लगभग कुछ भी बचा नहीं है। आस-पास की इमारतें पूरी तरह सुरक्षित हैं। हमारे पास न केवल उपग्रह चित्र थे, बल्कि स्थानीय मीडिया से भी तस्वीरें थीं, जिनके माध्यम से हम अंदर की तस्वीरें प्राप्त कर सके।" वायुसेना प्रमुख ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कहा कि इस बार भारतीय वायुसेना ने न सिर्फ अपना मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया बल्कि दुनिया को यह भी दिखा दिया कि उसने क्या हासिल किया है। उन्होंने बालाकोट एयर स्ट्राइक का जिक्र करते हुए कहा, “बालाकोट में हम अंदर से कोई ठोस सबूत नहीं ला पाए थे और अपने ही लोगों को यह बताना एक बड़ी चुनौती बन गया था कि हमने क्या हासिल किया है। हमारे पास पुख्ता खुफिया जानकारी थी। मानव स्रोतों के जरिए हमें अंदर की स्पष्ट तस्वीर मिली थी कि भारी नुकसान हुआ है और कई आतंकी मारे गए हैं, लेकिन हम अपने ही लोगों को यह विश्वास नहीं दिला पाए।” उन्होंने आगे कहा, “मैं खुश हूं कि इस बार हम ‘बालाकोट के भूत’ से छुटकारा पाने में सफल रहे। हमने दुनिया को दिखा दिया कि हमने क्या किया है।” पाकिस्तान के अंदर घुसकर मारा एपी सिंह ने बताया कि दुश्मन के विमान भारतीय वायुसेना की मारक सीमा में आने की हिम्मत नहीं कर पाए। उन्होंने कहा, “उनके कोई भी विमान ‘आकाश’ और ‘एमआरएसएएम’ की सीमा के करीब तक नहीं आ सके। सभी विमान ‘एलआरएसएएम’ के निशाने पर आए क्योंकि वे दूर रहने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन कई बार वे हमारी रेंज में आ जाते थे और तभी हमें उन्हें निशाना बनाने का मौका मिला।” एयर चीफ मार्शल ने बताया कि उस रात भारतीय वायुसेना ने पूरी तरह से आक्रामक रुख अपनाया था। उन्होंने कहा, “हमने तय किया कि हम ‘पैन फ्रंट’ पर हमला करेंगे और उनकी संसाधनों को फैला देंगे। मकसद किसी एक एयरफील्ड को तबाह करना नहीं था, बल्कि उन्हें यह संदेश देना था कि हम चाहें तो आपके अंदरूनी इलाकों में, जब और जहां चाहें, हमला कर सकते हैं।”  

रायपुर : प्रदेश में अब तक 655.6 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज

 रायपुर,  छत्तीसगढ़ में 1 जून से अब तक 655.6 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा स्थापित राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश में अब तक बलरामपुर जिले में सर्वाधिक 1100.3 मि.मी. वर्षा रिकार्ड की गई है। बेमेतरा जिले में सबसे कम 334.4 मि.मी. वर्षा दर्ज हुई है। रायपुर संभाग में रायपुर जिले मे 595.7 मि.मी., बलौदाबाजार में 557.6 मि.मी., गरियाबंद में  537.0 मि.मी., महासमुंद में 543.2 मि.मी. और धमतरी में 520.1 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। बिलासपुर संभाग में बिलासपुर जिले में 689.9 मि.मी., मुंगेली में 689.1 मि.मी., रायगढ़ मंे 807.5 मि.मी., जांजगीर-चांपा में 875.1 मि.मी., कोरबा में 723.5 मि.मी., गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही 647.6 मि.मी., सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 597.5 मि.मी., सक्ती में 735.5 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। दुर्ग संभाग में दुर्ग जिले में 522.1 मि.मी., कबीरधाम में 485.9 मि.मी., राजनांदगांव में 563.9 मि.मी., बालोद में 628.2 मि.मी., मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 814.1 मि.मी., खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 464.7 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। सरगुजा संभाग में सरगुजा जिले में 498.5 मि.मी., सूरजपुर में 829.3 मि.मी., जशपुर में 751.7 मि.मी., कोरिया में 768.7 मि.मी. और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 719.3 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। बस्तर संभाग में बस्तर जिले में 775.8 मि.मी., कोंडागांव में 498.6 मि.मी., नारायणपुर में 677.6 मि.मी., बीजापुर में 815.4 मि.मी., सुकमा में 504.7 मि.मी., कांकेर में 661.6 मि.मी., दंतेवाड़ा में 700.3 मि.मी. और औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है।

दिल्ली में बाढ़ की आशंका बढ़ी, प्रशासन ने यमुना किनारे बढ़ाई निगरानी

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। यमुना नदी का जलस्तर शनिवार सुबह 9 बजे ओल्ड रेलवे ब्रिज पर 204.40 मीटर तक पहुंच गया, जो खतरे के निशान 204.50 मीटर से बस थोड़ा ही नीचे है। प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए सभी संबंधित विभागों को बाढ़ जैसी स्थिति से निपटने के लिए सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। क्यों बढ़ रहा है जलस्तर? केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष के एक अधिकारी ने बताया, "यमुना का जलस्तर बढ़ने का मुख्य कारण वजीराबाद और हथिनीकुंड बैराज से हर घंटे बड़ी मात्रा में पानी का छोड़ा जाना है।" इसके अलावा, हरियाणा और उत्तराखंड के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में हुई बारिश ने भी नदी के जलस्तर को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। बैराज से पानी की स्थिति बाढ़ नियंत्रण विभाग के अनुसार, वजीराबाद बैराज से हर घंटे करीब 30,800 क्यूसेक और हथिनीकुंड बैराज से 25,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। यह पानी दिल्ली पहुंचने में आमतौर पर 48 से 50 घंटे का समय लेता है। ऊपरी क्षेत्रों से कम मात्रा में पानी छोड़े जाने के बावजूद, दिल्ली में जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। क्या है खतरे का निशान? दिल्ली में यमुना के लिए चेतावनी स्तर 204.50 मीटर है, जबकि खतरे का निशान 205.30 मीटर पर है। यदि जलस्तर 206 मीटर तक पहुंचता है, तो शहर में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। ओल्ड रेलवे ब्रिज यमुना के प्रवाह और बाढ़ के जोखिम को मापने का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। प्रशासन की तैयारी प्रशासन ने बाढ़ की आशंका को देखते हुए सभी जरूरी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। संबंधित एजेंसियों को नदी के किनारे बसे इलाकों में नजर रखने और आपात स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा गया है। दिल्लीवासियों से भी अपील की गई है कि वे नदी के आसपास सावधानी बरतें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।  

ट्रंप का सीजफायर प्रस्ताव चर्चा में, अजरबैजान-आर्मेनिया ने बताया नोबेल योग्य

वाशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच मं पिछले 37 साल से चली आ रही जंग को खत्म करवा कर समझौता करवा दिया है। दोनों देशों के नेताओं के बीच बैठे डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि दोनों देशों के बीच में विवादित इलाके में ट्रांजिट कॉरिडोर बनाने पर भी सहमति बनी है। इसके अलावा राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर को लेकर एक बार फिर से अपनी पीठ थपथपाई। उन्होंने कहा कि दोनों परमाणु संपन्न देश एक बड़े संघर्ष में उलझे हुए थे। वाइट हाउस में अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव और आर्मेनियाई प्रधानमंत्री निकोल की मेजबानी कर रहे ट्रंप ने दोनों देशों के बीच में शांति और व्यापारिक समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए। इस दौरान कॉरिडोर का नाम ट्रंप रूट फॉर इंटरनेशनल पीस एंड प्रॉस्पेरिटी नाम दिया जाएगा। यह कॉरिडोर आर्मेनिया के इलाके से निकलता हुआ अजरबैजान को उसके नखचिवान इलाके को जोड़ेगा। इस दौरान अजरबैजान और आर्मेनिया दोनों देशों के नेताओं ने इस लंबी और खूनी जंग को खत्म करवाने का श्रेय राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी टीम को दिया। इसके अलावा उन्होंने इजरायल,पाकिस्तान, कंबोडिया की लिस्ट में शामिल होते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए शांति में नोबेल पुरस्कार की भी मांग की। इससे पहले कल ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके दोनों देशों के बीच में शांति समझौते की बात दुनिया के सामने रखी थी। उन्होंने कहा था कि पिछले कई दशकों से कई नेताओं ने इस मुद्दे को हल करने की कोशिश की है लेकिन कोई भी सफल नहीं हुआ है। हमारी टीम ने मिलकर दोनों देशों को शांति समझौते पर आने के लिए मना लिया है। ट्रंप ने अभी तक जितने भी देशों के बीच में मध्यस्थता करवाने की बात कही है वह सभी इसे स्वीकार करते हैं। लेकिन भारत ने ऐसा नहीं किया है। यह पहली बार नहीं है जब राष्ट्रपति ट्रंप इससे पहले भी कई बार भारत और पाकिस्तान का सीजफायर करवाने की बात कह चुके हैं। हालांकि भारत की तरफ से इस बात से साफ इनकार किया जा चुका है कि सीजफायर में किसी तीसरे देश ने मध्यस्थता की है लेकिन पाकिस्तान की तरफ से यह पहले दिन ही स्वीकार किया गया था कि ट्रंप के नेतृत्व में मध्यस्थता हुई है। इसी अनबन के साथ शुरू हुए भारत और अमेरिका के संबंध आज इस मुकाम पर पहुंच चुके हैं कि ट्रंप ने भारत के ऊपर 50 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है।

प्रियंका चोपड़ा की अनदेखी तस्वीरें आईं सामने, मालती और परिवार के संग खास यादें

 मुंबई  ग्लोबल सेंसेशन बन चुकी प्रियंका चोपड़ा इन दिनों अपने परिवार के साथ छुट्टियां मना रही हैं।एक्ट्रेस हॉलीवुड में अपनी पॉवरपैक परफॉर्मेंस के साथ ही अपने मदरहुड यानी मातृत्व को भी पूरी तरह इंजॉय कर रही हैं। उनकी बेटी का नाम मालती मैरी चोपड़ा है।'पीसी' ने सोशल मीडिया पर इसकी कुछ झलक शेयर की हैं। इसमें मालती और निक जोनस भी दिखाई दे रहे हैं।पहली फोटो में मालती अपनी सीट पर बैठी आराम कर रही हैं और साथ में प्रियंका चोपड़ा अपने टैबलेट को लिए बैठी हैं, जिस पर "ममा" लिखा है। इसके बाद एक वीडियो है जिसमें उनकी प्यारी बेटी एक फव्वारे का लुत्फ उठाती दिख रही है। एक अन्य तस्वीर में मालती और उनके दोस्त एक कैंडी शॉप से अपने लिए कैंडीज उठाते दिख रहे हैं। इसके साथ ही एक फोटो में मालती अपने पापा निक के साथ अपनी अगली परफॉर्मेंस के लिए तैयारी करती दिख रही है।प्रियंका ने एक और तस्वीर शेयर की है जिसमें मालती पेंटिंग करते हुए अपने अंदर के आर्टिस्ट को बाहर निकालती दिख रही है। इसमें एक वीडियो भी है जिसमें प्रियंका चोपड़ा और मालती एक हरे-भरे बगीचे में दौड़ती दिख रही हैं।इस पोस्ट के अंत में एक खूबसूरत फोटो निक और मालती की है। इसमें वो समुद्र के तट पर साथ चलते दिख रहे हैं।इसके साथ ही उन्होंने कुछ और तस्वीरें भी शेयर की हैं जिसमें मालती अपने फ्रेंड्स और फैमिली के साथ खूबसूरत पल बिताती दिख रही हैं। इन तस्वीरों को इंस्टाग्राम पर प्रियंका ने शेयर करते हुए लिखा, "ओहाना मतलब फैमिली। परिवार का मतलब कोई किसी को भी भूले नहीं और कोई भी पीछे ना छूटे।" निक और प्रियंका चोपड़ा की शादी 2018 में हुई थी। 2022 में दोनों के घर मालती ने जन्म लिया। उनका जन्म सरोगेसी के जरिए हुआ था। कुछ दिनों पहले मालती को हैदराबाद में अपनी मां प्रियंका के साथ स्पॉट किया गया था। वो यहां पर एस एस राजामौली की फिल्म 'एसएसएमबी 29' की शूटिंग के लिए थीं। इस फिल्म में उनके साथ महेश बाबू भी हैं।

क्या सुरक्षित हैं धनखड़? सिब्बल ने शाह से की सीधी बात

नई दिल्ली  उपराष्ट्रपति के पद से अचानक इस्तीफा देने के बाद से जगदीप धनखड़ सार्वजनिक कार्यक्रम में नहीं दिखे हैं। ना ही उनका कोई बयान सामने आया है। इस बीच राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने एक्स पर देश के गृह मंत्री अमित शाह से उनको लेकर एक बड़ा सवाल पूछा है। उन्होंने पूछा है कि क्या हमें बताया जा सकता है कि जगदीप धनखड़ कहां हैं? उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर पूछा, 'क्या वह सुरक्षित हैं? उनसे संपर्क क्यों नहीं हो पा रहा है?' कपिल सिब्बल आगे लिखते हैं, ''अमित शाह जी को पता होना चाहिए! वह हमारे उपराष्ट्रपति थे। देश को चिंतित होना चाहिए।'' जगदीप धनखड़ के स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अचानक इस्तीफा देने के बाद 21 जुलाई को उपराष्ट्रपति पद रिक्त हो गया था। धनखड़ का कार्यकाल अगस्त 2027 में समाप्त होना था। इसके बाद से नए उपराष्ट्रपति के नाम को लेकर कयासों का दौर शुरू हो चुका है। निर्वाचन आयोग ने भी उपराष्ट्रपति पद के लिए नौ सितंबर को होने वाले चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी है और इसके साथ ही नामांकन प्रक्रिया की शुरुआत हो गई। अधिसूचना के अनुसार, नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 21 अगस्त है और दस्तावेजों की जांच 22 अगस्त को की जाएगी। नामांकन पत्र वापस लेने की अंतिम तिथि 25 अगस्त है।