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जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में एनकाउंटर, इलाके में भारी फोर्स तैनात

जम्मू. जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी है। किश्तवाड के दुल इलाके खुफिया जानकारी के आधार पर चल रहे एक अभियान के दौरान जवानों का इन आतंकियों से सामना हुआ। व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी साझा करते हुए लिखा है कि गोलीबारी हुई है, फिलहाल अभियान जारी है। घाटी में चल रहा यह अभियान कुलगाम में जारी ऑपरेशन के बाद शुरू हुआ है। कुलगाम में आतंकियों से जारी मुठभेड़ लांस नायक प्रितपाल सिंह और सिपाही हरमिंदर सिंह को वीरगति प्राप्त हुई है। ऑपरेशन ओखल पिछले नौ दिनों से जारी है। चिनार कोर ने इस अभियान में शहीद हुए सुरक्षाकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखा। पोस्ट में लिखा, "चिनार कोर राष्ट्र के लिए अपने कर्तव्य का पालन करते हुए वीरों, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रितपाल सिंह और सिपाही हरमिंदर सिंह के सर्वोच्च बलिदान का सम्मान करता है। उनका साहस और समर्पण हमें सदैव प्रेरित करता रहेगा। भारतीय सेना गहरी संवेदना व्यक्त करती है और शोक संतप्त परिवारों के साथ एकजुटता से खड़ी है। अभियान जारी है।"

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर संभाग में हो रहा है डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार

रायपुर. बस्तर संभाग में नेक्स्ट जेन ई-हॉस्पिटल, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन तथा आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का प्रभावी क्रियान्वयन क्षेत्र के लिए एक बड़ा परिवर्तन साबित हो रहा है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा बस्तर संभाग में स्वास्थ्य सेवाओं के सशक्त विस्तार की दिशा में लगातार सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के सतत मार्गदर्शन में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं आज तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं।  बस्तर के छ :जिला चिकित्सालयों,  दो सिविल अस्पतालों और 41 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में नेक्स्ट जेन ई-हॉस्पिटल प्रणाली का सफल संचालन किया जा रहा है, जिससे ओपीडी पंजीकरण, परामर्श, जांच, दवा वितरण तथा मरीजों की स्वास्थ्य संबंधी सभी जानकारियां अब एक डिजिटल मंच पर उपलब्ध हो रही हैं। इसके तहत मरीजों को बेहतर और समयबद्ध सेवाएं मिल रही हैं। डिजिटल तकनीक के इस समावेशन ने अस्पतालों में पारदर्शिता, कार्यकुशलता और मरीजों की संतुष्टि में उल्लेखनीय वृद्धि की है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत अस्पतालों का हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्रेशन (HFR) और चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ का हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्रेशन (HPR) सुनिश्चित किया गया है। अस्पताल परिसरों में आभा कियोस्क स्थापित कर मरीजों को आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) बनाने की सुविधा दी जा रही है। स्कैन एंड शेयर एवं आभा आईडी के माध्यम से ऑनलाइन ओपीडी पंजीयन की सुविधा से मरीजों को लम्बी कतारों से राहत मिली है और उन्हें त्वरित सेवाएं मिल रही हैं। डिजिटल नवाचारों का प्रभाव भी स्पष्ट रूप से सामने आया है। जिला चिकित्सालय बस्तर में मई, जून और जुलाई 2025 के दौरान कुल 60,045 ओपीडी पंजीयन दर्ज किए गए, जिनमें से 32,379 पंजीयन आभा लिंक के माध्यम से हुए — जो कि कुल पंजीयनों का 53% है। इसी अवधि में जिला चिकित्सालय दंतेवाड़ा में 33,895 ओपीडी पंजीयन दर्ज हुए, जिनमें से 13,729 पंजीयन आभा से लिंक किए गए — यानी 40% का डिजिटल एकीकरण। यह पूरी प्रक्रिया न केवल समय की बचत सुनिश्चित कर रही है, बल्कि मरीजों के लिए डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड की सुविधा भी प्रदान कर रही है, जिसे वे देश के किसी भी हिस्से में कभी भी देख सकते हैं। इससे स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में पारदर्शिता के साथ-साथ उपचार की निरंतरता और गुणवत्ता में भी वृद्धि हो रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर संभाग में नेक्स्ट जेन ई-हॉस्पिटल और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन जैसी आधुनिक तकनीकों के सफल क्रियान्वयन ने स्वास्थ्य सेवाओं को नई गति और दिशा दी है। डिजिटल पंजीकरण, हेल्थ रिकॉर्ड और पारदर्शी सेवा प्रणाली से मरीजों को समयबद्ध, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल रहा है। यह पहल न केवल बस्तर के लिए, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक अनुकरणीय मॉडल है, जिसे हम शीघ्र ही राज्य के सभी जिलों में लागू कर "स्वस्थ और सशक्त छत्तीसगढ़" के संकल्प को साकार करेंगे। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बस्तर संभाग में स्वास्थ्य सेवाओं का यह तकनीकी उन्नयन न केवल स्थानीय जनता के लिए उपयोगी सिद्ध हो रहा है, बल्कि यह पूरे प्रदेश के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बनकर उभर रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य इस प्रणाली को सभी जिलों में सुदृढ़ रूप से लागू कर "स्वस्थ और सशक्त छत्तीसगढ़" की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ना है। उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में यह पहल केवल स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है। बस्तर में मिले सकारात्मक परिणाम इस बात का प्रमाण हैं कि जब तकनीक, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जनभागीदारी एक साथ आते हैं, तो विकास की रफ्तार कई गुना बढ़ जाती है। यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं में बदलाव लाएगी, बल्कि ‘स्वस्थ भारत’ के निर्माण में भी छत्तीसगढ़ का महत्त्वपूर्ण योगदान सुनिश्चित करेगी।

कांग्रेस में बड़ा फेरबदल संभव, खतरे में मुंबई अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ की कुर्सी

मुंबई. मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर एक बार फिर से पार्टी के स्थानीय नेतृत्व परिवर्तन की मांग तेज हो गई है। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा सांसद वर्षा गायकवाड़ पर संगठन को दिशा देने में विफल रहने और सीमित समूह के सहारे पार्टी चलाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इससे संगठन की स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रभारी रमेश चेन्निथला 12 अगस्त को पुणे में पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति के 10 सदस्यों के साथ व्यक्तिगत मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि इसी बैठक में वर्षा गायकवाड़ के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण फैसला हो सकता है। चेन्निथला 12 और 13 अगस्त को पुणे में आयोजित महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) के दो दिवसीय कार्यशाला में शामिल होंगे। दूसरी बार उठी हटाने की मांग यह पहली बार नहीं है जब गायकवाड़ के खिलाफ असंतोष सामने आया है। 16 जून को भी कई नेताओं ने पार्टी नेतृत्व से उन्हें पद से हटाने की मांग की थी। असंतुष्ट नेताओं का आरोप है कि गायकवाड़ से मिलना मुश्किल होता है। उन्हें कार्यकर्ताओं और नेताओं के सुझाव भी पसंद नहीं आते हैं। इसके अलावा संगठन के कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने में असफल रही हैं। चुनाव से पहले बढ़ी अंदरूनी खींचतान मुंबई में आगामी नगर निगम चुनाव को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि पार्टी संगठन मजबूत और एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरे। लेकिन गायकवाड़ के नेतृत्व में गुटबाजी और असंतोष की खबरें पार्टी की चुनावी तैयारी पर असर डाल सकती हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, 12 अगस्त की बैठक में असंतुष्ट नेताओं को अपनी बात सीधे प्रभारी के सामने रखने का मौका मिलेगा। यदि नेतृत्व परिवर्तन पर सहमति बनती है तो मुंबई कांग्रेस में जल्द ही नया अध्यक्ष देखने को मिल सकता है।

गडकरी का कटाक्ष: दादागिरी के पीछे यही वजह है… टैरिफ विवाद में अमेरिका पर निशाना

नई दिल्ली. अमेरिका से चल रहे टैरिफ तनाव पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने परोक्ष रुप से अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि आज जो देश दुनिया में अपनी दादागिरी चला रहे हैं, वह ऐसा इसलिए कर पा रहे हैं क्योंकि वह आर्थिक रूप से मजबूत हैं। उन देशों के पास टेक्नोलॉजी भी है। हमें अगर भारत की 'विश्व गुरु' की छवि को आगे बढ़ाना है तो हमें भी टेक्नोलॉजी और आर्थिक क्षेत्र में मजबूत होना होगा। नागपुर के विश्वेश्वेरैया नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में अपनी बात रखते हुए केंद्रीय मंत्री ने आयात को कम करने और निर्यात को बढ़ाने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, "अगर हमारे निर्यात और अर्थव्यवस्था की दर बढ़ती है, तो मुझे नहीं लगता कि हमें किसी के पास जाने की जरूरत पड़ेगी। जो लोग ‘दादागिरी’ कर रहे हैं, वे ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वे आर्थिक रूप से मजबूत हैं और उनके पास टेक्नोलॉजी है।" गडकरी ने भारत की संस्कृति और विश्व बंधुत्व की भावना पर जोर देते हुए कहा कि आज अगर हम आर्थिक रूप से सशक्त हो जाएं और टेक्नोलॉजी में भी आगे हो जाएं। इसके बाद भी हम किसी पर धौंस नहीं जमाएंगे क्योंकि हमारी संस्कृति में यह नहीं है। हमारी संस्कृति हमें सिखाती है कि विश्व का कल्याण सबसे महत्वपूर्ण है। गडकरी ने कहा आज दुनिया की सभी समस्याओं का उपाय साइंस, टेक्नोलॉजी और नॉलेज है। अगर हम इन तीनों चीजों का उपयोग करेंगे तो हमें कभी भी दुनिया के सामने झुकना नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि रिसर्च सेंटर्स, आईआईटी और इंजीनियरिंग कॉलेजों को देश की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए शोध करना चाहिए। सभी जिलों, राज्य और क्षेत्रों में अलग-अलग बातें हैं। हमें सभी को ध्यान में रखकर काम करना होगा। अगर हम लगातार ऐसे काम करेंगे तो हमारे देश की अर्थव्यवस्था की विकास दर तीन गुना तक बढ़ जाएगी।

पाकिस्तान को 300 KM दूर से दी मात, भारतीय वायुसेना ने रचा अनोखा रिकॉर्ड

नई दिल्ली. ऑपरेशन सिंदूर के तीन महीने बाद भारतीय वायुसेना (IAF) ने पहली बार सार्वजनिक रूप से उस बड़े हमले का खुलासा किया है, जिसे सैन्य अधिकारी आधुनिक हवाई युद्ध के इतिहास में अभूतपूर्व मानते हैं। शनिवार को बेंगलुरु में एक व्याख्यान के दौरान वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने बताया कि 7 मई को पाकिस्तान का एक बड़ा हवाई प्लेटफार्म लगभग 300 किलोमीटर की दूरी से मार गिराया गया। यह संभवतः इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस (ELINT) या एयरबॉर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) विमान हो सकता है। उन्होंने इसे अब तक का सबसे लंबी दूरी से दर्ज सतह-से-आकाश में मारने वाली घटना बताया है। वायुसेना चीफ ने स्पष्ट किया कि “300 किमी की दूरी पर यह रिकॉर्ड किसी विमान के आकार को लेकर नहीं, बल्कि दूरी के लिहाज से है।” ऐसे हमलों की पुष्टि अक्सर कठिन होती है क्योंकि मलबा दुश्मन देश की सीमा में गिरता है और स्वतंत्र रूप से सत्यापन संभव नहीं होता। इस मामले में, वायुसेना प्रमुख का बयान संभवतः इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग के जरिए पुष्टि के बाद ही दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, “हमारे पास इलेक्ट्रॉनिक तरीके हैं जिससे हम किसी लक्ष्य को गिराने की पुष्टि कर सकते हैं। रडार पर एक ब्लिप दिखाई देता है और फिर गायब हो जाता है।” 300 किमी दूरी क्यों है खास? इतनी लंबी दूरी से किसी हवाई लक्ष्य को गिराने के लिए सिर्फ़ लंबी दूरी के इंटरसेप्टर मिसाइल (Surface-to-Air Missile – SAM) ही नहीं, बल्कि सटीक ट्रैकिंग, स्थिर टार्गेट लॉक और लक्ष्य तक हथियार की निरंतर मार्गदर्शन क्षमता की जरूरत होती है। भारतीय वायुसेना ने यह क्षमता हाल ही में रूसी S-400 प्रणाली के आगमन के साथ हासिल की। अधिकारियों के मुताबिक, S-400 प्रणाली की 400 किमी तक की मारक क्षमता ने पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को इतनी दूरी पर रोक दिया कि वे लंबी दूरी के ग्लाइड बम का भी इस्तेमाल नहीं कर सके। दुनिया में दुर्लभ उदाहरण हाल के संघर्षों में इतनी लंबी दूरी से सतह-से-आकाश मार के मामले बहुत कम सामने आए हैं। फरवरी 2024 में यूक्रेन ने दावा किया कि उसने रूस के A-50 जासूसी विमान को 200 किमी से अधिक दूरी पर गिराया। फरवरी 2022 में यूक्रेन का एक Su-27 लड़ाकू विमान रूसी S-400 से लगभग 150 किमी की दूरी पर गिरा। 300 किमी की दूरी से इस तरह का हमला सार्वजनिक रूप से दर्ज होना अत्यंत दुर्लभ है। भारत को रूस से अब तक 5 में से 3 S-400 यूनिट मिल चुकी हैं, जिन्हें पाकिस्तान और चीन की सीमा पर तैनात किया गया है। बाकी 2 यूनिट 2025–26 तक मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों ने इसकी तुलना ऐसी टॉर्च से की जो सीमा से कई किलोमीटर भीतर तक देख सकती है। ऑपरेशन ‘सिंदूर’ में S-400 के साथ-साथ बराक-8 मीडियम रेंज SAM और स्वदेशी आकाश मिसाइल प्रणाली ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हाल ही में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने S-400 के लिए व्यापक वार्षिक रखरखाव अनुबंध को मंजूरी दी है। CAATSA और S-400 डील भारत ने S-400 सौदा 2018 में रूस के साथ किया था, ठीक एक साल बाद जब अमेरिका ने काउंटरिंग अमेरिका’स एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट (CAATSA) लागू किया था। यह कानून रूस, ईरान या उत्तर कोरिया से बड़े रक्षा सौदे करने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाने की अनुमति देता है।  

एक नाम, दो वोटर कार्ड— तेजस्वी का डिप्टी CM पर गंभीर आरोप

पटना. बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में दो वोटर आईडी कार्ड वाले विवाद को लेकर सियासत काफी गर्म है। दरअसल बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के पास दो ईपिक नंबर होने की जब बात सामने आई थी तब चुनाव आयोग ने तेजस्वी यादव को खत लिख इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा था। अब राजद नेता तेजस्वी यादव ने बिहार के डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा पर बड़ा आरोप लगाया है। तेजस्वी यादव ने कहा कि डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा के नाम से दो वोटर आईकार्ड है। तेजस्वी यादव ने कहा है कि लखीसराय और पटना के वोटर लिस्ट में विजय सिन्हा का नाम है और तो क्या प्रशासन या चुनाव आयोग उन्हें नोटिस भेजेगा? रविवार को अपने सरकारी आवास एक पोलो रोड में पत्रकारों से बातचीत में तेजस्वी ने कहा कि उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के पास दो मतदाता पहचान पत्र है। एक लखीसराय तो दूसरा पटना का मतदाता पहचान पत्र है। अगर विजय सिन्हा ने खुद फॉर्म नहीं भरा तो आयोग बताए कि उनका दो जगह पहचान पत्र कैसे बना। दिलचस्प यह है की दोनों कार्ड में उनकी उम्र भी अलग-अलग है। इससे साफ है कि एसआईआर की पूरी प्रक्रिया फर्जीवाड़ा है।

पहलगाम अटैक के बाद कैसे बदली रणनीति? आर्मी चीफ ने बताई पूरी कहानी

नई दिल्ली.  सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने 22 अप्रैल को हुए पाहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई के बारे में विस्तार से बताया है। उन्होंने बताया कि हमले के अगले ही दिन सशस्त्र बलों को “फ्री हैंड” दे दिया गया था, ताकि वे अपनी रणनीति और विवेक के अनुसार कार्रवाई कर सकें। जनरल द्विवेदी ने कहा कि 23 अप्रैल को हुई बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा- “अब बहुत हो चुका”। इस बैठक में तीनों सेना प्रमुख मौजूद थे और यह सहमति बनी कि निर्णायक कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, “पहली बार हमने इस तरह का राजनीतिक आत्मविश्वास, स्पष्टता और दिशा देखी, जिसने हमारे कमांडरों का मनोबल बढ़ाया।” 25 अप्रैल को सेना प्रमुख ने उत्तरी कमान का दौरा किया, जहां विस्तृत योजना पर काम हुआ। नौ में से सात प्रमुख आतंकी ठिकानों को प्राथमिकता दी गई। लक्ष्य था कि पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में सक्रिय आतंकवादी बुनियादी ढांचे को तबाह करना है। इन सात लक्ष्यों को सटीकता से नष्ट किया गया और बड़ी संख्या में आतंकियों को मार गिराया गया। पाहलगाम हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सेना प्रमुख की पहली बैठक 29 अप्रैल को हुई थी। जनरल द्विवेदी ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक नाम नहीं था, बल्कि यह पूरे राष्ट्र को जोड़ने वाला अभियान था। यही वजह थी कि लोग पूछ रहे थे- आपने क्यों रोका? और इस सवाल का पूरा जवाब दिया गया।” हमले के पंद्रह दिन बाद, 7 मई को भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया। एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह के अनुसार, इस ऑपरेशन में पाकिस्तान के 5 लड़ाकू विमान और एक बड़ा एयरबॉर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) विमान मार गिराया गया। 100 से अधिक आतंकियों को पाकिस्तान और PoK में ढेर किया गया। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को हाल के वर्षों की सबसे सटीक और सफल जवाबी सैन्य कार्रवाई माना जा रहा है। सेना प्रमुख के अनुसार, स्पष्ट राजनीतिक समर्थन और तीनों सेनाओं की संयुक्त योजना ने इसे संभव बनाया।

नई AI तकनीक से PM आवास योजना में धोखाधड़ी पर लगाम, नकली आवेदकों की होगी पहचान

मुरादाबाद मुरादाबाद में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लाभार्थियों का चयन अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिए होगा, जहां जिला प्रशासन ने बताया है कि 44533 नए आवेदनों की जांच एआई के माध्यम से होगी। एआई सैटेलाइट इमेजिंग और लोकेशन ट्रैकिंग से यह परखेगी कि पोर्टल पर डाले गए घरों की तस्वीरें असली हैं या नहीं। सभी आवेदनों की सत्यता जांचने के बाद आखिर में एआई ही यह तय करेगा कि किन लोगों को आवास मिलना चाहिए और किन लोगों को नहीं। इस तरह की जांच से योजना में गड़बड़ी की गुंजाइश ना के बराबर रहेगी, साथ ही झूठा दावा करने वालों की छुट्टी हो जाएगी। एआई का फायदा यह होगा कि अगर किसी ने पक्के मकान में रहते हुए कच्चे मकान की फोटो दिखाकर योजना का लाभ लेने की कोशिश की है, तो यहां एआई तुरंत पकड़ लेगा और उसका आवेदन तुरंत निरस्त कर दिया जाएगा। पूरी तरह निष्पक्ष होगी जांच इसको लेकर परियोजना निदेशक, डीआरडीए, निर्मल कुमार द्विवेदी ने बताया कि जांच में कुछ ऐसे भी मामले सामने आए हैं जिनके पास पहले से पक्का मकान है लेकिन योजना का लाभ लेने की कोशिश की जा रही है। उनके मुताबिक ऐसे लोगों को लिस्ट से बाहर कर दिया जाएगा। यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल व निष्पक्ष होगी और अंतिम सूची https://awaasplus.nic.in पोर्टल पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाएगी। तीन चरणों में होगी जांच एआई की यह जांच तीन चरणों में होगी, जहां पहले चरण में ग्राम स्तर पर बनाई गई टीमें जांच करेंगी। इसमें सहायक विकास अधिकारी, अवर अभियंता और बोरिंग टेक्नीशियन शामिल हैं। इनका काम गांव-गांव जाकर सत्यापन करना है और 31 जुलाई तक अपनी रिपोर्ट देनी है। दूसरे चरण में ब्लॉक रिपोर्ट के आधार पर जिला स्तरीय अधिकारियों की टीम दस्तावेजों और जमीनी तथ्यों का पुनः मूल्यांकन करेगी। तीसरे और आखिरी स्टेज में एआई तकनीक के जरिए फोटो व लोकेशन मिलान के आधार पर गलत सूचनाएं देने वालों को छांटा जाएगा और असली लाभार्थियों को लिस्ट में जोड़ा जाएगा।

अब राज्य कर विभाग के अधिकारी करेंगे ज्यादा काम, आने वाला है बड़ा बदलाव

मथुरा राज्य कर विभाग में सात अधिकारियों के निलंबन के बाद कार्य प्रभावित है। पहले ही अधिकारियों की कमी से जूझ रहे राज्य कर विभाग में अब जिम्मेदारियां वितरित किए जाने की तैयारी है। अवकाश पर गए कुछ अधिकारियों को कार्यभार संभालने के लिए वापस बुलाया जा रहा है। शेष बचे सहायक आयुक्त, उपायुक्त व राज्य कर अधिकारियों को अतिरिक्त चार्ज देने की मंजूरी हाईकमान से मांगी गई है। राज्य कर विभाग में उत्पीड़न के आरोपों पर खंड एक के उपायुक्त कमलेश कुमार के साथ प्रकरण की जांच कर रहे छह और जीएसटी अधिकारियों को निलंबित कर दिया था। निलंबित किए अधिकारियों में चार उपायुक्त, दो सहायक आयुक्त व एक सीटीओ शामिल हैं। बड़ी संख्या में अधिकारियों के निलंबन से राज्य कर विभाग की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है। दो मोबाइल टीमें, एक एसआइबी इकाई व तीन खंड खाली हो गए हैं। कर वसूली के साथ प्रशासनिक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। विभागीय अधिकारी कार्य को सुचारू कराने के लिए रिक्त हुए पदों की जिम्मेदारी अन्य अधिकारियों को दे रहे हैं। अवकाश पर गए अधिकारियों को वापस बुलाया गया है। डीसी प्रशासन सुनील को खंड एक के डीसी कमलेश कुमार का अतिरिक्त चार्ज देने की तैयारी है। खंड पांच के डीसी संजीव कुमार की जिम्मेदारी डीसी प्रद्युम्न गुप्ता को दी जाएगी। एसी पूजा गौतम की जिम्मेदारी नीलेश को दी जा रही। अन्य अधिकारियों को भी खाली हुए पदो पर संयोजित किया जा रहा है। संयुक्त आयुक्त कार्यपालक राज्य कर विभाग रमेश सिंह ने बताया कि जब तक नए अधिकारी नहीं मिल जाते शेष अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी दी जा रही है। अलीगढ़ कार्यायल को अधिकारियों को सूची भेज दी गई है। अनुमति मिलते ही संबंधित अधिकारियों को चार्ज दे दिया जाएगा। 

Golden City सिर्फ अमृतसर नहीं, राजस्थान के इस शहर की भी है सोने जैसी खूबसूरती

नई दिल्ली भारत को व‍िव‍ि‍धताओं का शहर कहा जाता है। यहां खानपान से लेकर घूमने फि‍रने के ल‍िए कई जगहें मौजूद हैं। भारत में जब भी सबसे खूबसूरत राज्‍यों की बात हाेती है तो राजस्‍थान का नाम सबसे पहले ल‍िया जाता है। भारत में ऐसे कई शहर मौजूद हैं जो अपने खास नामों और उपनामों (Nickname) से फेमस हैं। ये नाम न सिर्फ उनकी पहचान बन जाते हैं, बल्कि वहां की संस्कृति, इतिहास और खूबसूरती को भी द‍िखाते हैं। ऐसा ही एक नाम है Golden City। आमतौर पर लोग जब इस नाम को सुनते तो उन्‍हें पंजाब के अमृतसर की ही याद आती है, लेकिन दिलचस्प बात तो ये है कि राजस्थान का एक शहर भी इसी नाम से जाना जाता है। ये शहर अपनी अनोखी पहचान के लिए दुनियाभर में मशहूर है। देश-विदेश से लोग यहां की रौनक और खूबसूरती को देखने के ल‍िए हर साल आते हैं। यहां का माहौल, वास्तुकला और लोक संस्कृति हर किसी को अपना दीवाना बना देती है। ये जगह न सिर्फ घूमने के ल‍िहाज से खास है, बल्कि इसके पीछे एक पुरानी कहानी और विरासत भी जुड़ी हुई है। अगर आपको भी घूमने-फ‍िरने का शौक है और भारत के अलग-अलग शहरों की खासियत को जानना चाहते हैं, तो इस Golden City के बारे में भी आपको जरूर जानना चाह‍िए। आज का हमारा लेख भी इसी व‍िषय पर है। हम आपको इससे जुड़ी द‍िलचस्‍प बातें बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं व‍िस्‍तार से – बलुआ पत्थर के ए‍क टीले पर बसा है शहर आपको बता दें क‍ि जेसलमेर पीले रंग के बलुआ पत्थर के ए‍क टीले पर बसा है। इस पर एक किला है, जिसमें एक महल और कई खूबसूरत जैन मंदिर हैं। यहां के बहुत से घर और मंदिर बहुत ही सुंदर ढंग से तराशे गए हैं। ये शहर Thar Desert के बीचों-बीच बसा हुआ है। अब आप सोच रहे होंगे क‍ि जैसलमेर में ऐसा क्‍या है जो इसे Golden City के नाम से जाना जाता है। तो हम आपको बता दें क‍ि जैसलमेर थार रेगिस्तान में बसा एक शहर है और यहां का रेतिला रेगिस्तान पूरे देश में जाना जाता है। सुनहरे रंग में रंग जाता है पूरा जैसलमेर बताया जाता है क‍ि जब रेग‍िस्‍तानी म‍िट्टी पर सूरज की रोशनी पड़ती है तो पूरा शहर सुनहरे रंग में चमक उठता है। दूर-दूर तक रेग‍िस्‍तान का सुनहरा नजारा देखने को म‍िलता है। कहते हैं क‍ि पीली रेत और सभी इमारतों में इस्तेमाल हुए पीले बलुआ पत्थर पूरे शहर और उसके आस-पास के इलाके को सुनहरे रंग में रंग देते हैं। यही कारण है क‍ि जैसलमेर (Jaisalmer) को गोल्‍डन सि‍टी के नाम से जाना जाता है। जैसलमेर नाम कैसे पड़ा? जैसलमेर शहर का नाम राजपूत राजा राव जैसल के नाम पर रखा गया है। इन्होंने इस शहर को 1156 ईस्वी में बसाया था। जैसलमेर का मतलब है- जैसल का पहाड़ी किला। ये राजस्थान का सबसे बड़ा और देश के सबसे बड़े जिलों में से एक है। जैसलमेर किले को त्रिकूट गढ़ भी कहते हैं। इसे 1156 में भाटी राजपूत शासक राव जैसल ने मेरु पहाड़ी पर बनवाया था। ये किला कई लड़ाइयों का गवाह रहा है। जैसलमेर के हैं कई नाम दिन के समय इसकी बड़ी सी बलुआ पत्थर की दीवारें शेर जैसी भूरी दिखती हैं, और जब सूरज डूबने लगता है, तो वो सुनहरी यानी कि‍ गोल्‍डन हो जाती हैं। आपको बता दें क‍ि इसे गोल्‍डन स‍िटी के अलावा और भी कई नामों से जाना जाता है। इसमें हवेलियों का शहर, म्यूजियम सिटी, पीले पत्थरों का शहर, झरोखों की नगरी जैसे कई नाम शाम‍िल हैं।