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भाजपा ने साधा विपक्ष को, कहा—बस ‘अब्बा-डब्बा-जब्बा’ की बातें करते हैं

नई दिल्ली  भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आज कई राजनीतिक दलों के नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे, लेकिन उनकी विश्वसनीयता और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति उनका रवैया संदिग्ध है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, "आज मैं देख रहा था कि अनेक राजनीतिक पार्टियों के लोग बैठकर प्रेस वार्ता कर रहे थे। मैं पूछना चाहता हूं कि आपकी खंडपीठ बड़ी है, या सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ बड़ी है। जब सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर पर रोक नहीं लगाई है, तो आप कौन सी खंडपीठ हैं जो घोषणा कर रहे हैं कि चोरी हो रही है? ये दिखाता है कि संवैधानिक संस्थाओं के साथ आप खिलवाड़ करते हैं।" उन्होंने कहा, "सिर्फ चुनाव आयोग ही नहीं, देश की ऐसी कोई संवैधानिक संस्था नहीं बची है, जिस पर कांग्रेस परिवार और उनके इर्द-गिर्द घूम रहे परिवारों ने हमला न किया हो। याद कीजिए, ये वही लोग हैं जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट पर उंगली उठा दी थी। ये वही लोग हैं जिन्होंने भारत के आर्मी चीफ को 'सड़क का गुंडा' कहने की हिमाकत की थी। ये वही लोग हैं जो 'सर्जिकल स्ट्राइक', 'एयरस्ट्राइक' और 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद भारतीय सेना पर हमला करने से नहीं कतराते हैं और सबूत मांगते हैं।" भाजपा प्रवक्ता ने विपक्ष को अनाड़ी बताया और कहा कि भारत निर्वाचन आयोग ने रविवार को सभी मुद्दों पर विस्तार से जवाब दिया, लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं जो इसे नहीं समझते हैं। वह (विपक्ष) खुद को खिलाड़ी समझते हैं, लेकिन मैं बताना चाहता हूं कि वह अनाड़ी हैं। वह चाहते हैं कि हिंदुस्तान के अंदर अफरा-तफरी का माहौल बने ताकि वह राजनीतिक लाभ उठा सकें। हर मुद्दे पर विपक्ष का सिर्फ एक ही राग अब्बा-डब्बा-जब्बा है। उन्होंने कहा, "विपक्ष का एकमात्र लक्ष्य घुसपैठियों को बचाना है। इनका (कांग्रेस और उसके सहयोगियों का) मकसद घुसपैठियों को बचाना है। भारत की जनता जानती है कि आप किस प्रकार से वोट बैंक की, तुष्टिकरण की राजनीति और उसमें घुसपैठियों को जोड़कर अपना वोट बैंक बनाकर जीतना चाहते हैं। लेकिन इस देश के संसाधनों पर इस देश की जनता का अधिकार है, किसी घुसपैठिए का अधिकार नहीं है। संबित पात्रा ने विपक्ष पर सवाल उठाते हुए कहा, "सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार, भारत के चुनाव आयोग को चुनाव के लिए मतदाता सूची तैयार करने का अधिकार है। कांग्रेस, राजद, तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का लक्ष्य बांग्लादेश जैसी स्थिति पैदा करना है। वे भारत की सड़कों पर पूरी तरह अराजकता फैलाना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि भारतीय लोग बर्बर बनें और हिंसा का सहारा लें, ताकि विपक्ष इस अस्थिरता का फायदा उठा सके।"

पीड़ित अभिभावक आरटीई में बच्चों के दाखिले के लिए अशोक गहलोत और खाचरियावास से मिले

जयपुर राजस्थान में आरटीई के तहत बच्चों को दाखिला नहीं मिलने का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। पिछले एक माह से अभिभावक सड़कों पर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन सरकार और शिक्षा विभाग की ओर से ठोस कार्रवाई न होने पर अब उन्होंने विपक्षी नेताओं का दरवाजा खटखटाना शुरू कर दिया है। सोमवार को संयुक्त अभिभावक संघ के बैनर तले 50 से अधिक अभिभावक पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास से मिले। अभिभावकों ने बताया कि चार महीने से लगातार शिक्षा विभाग और सरकार के चक्कर काटने के बावजूद बच्चों का दाखिला नहीं हो पा रहा है, जिससे वे अपने आपको ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मौके पर शिक्षा निदेशक सीताराम जाट से फोन पर बात कर पूरे मामले का संज्ञान लेने और कार्रवाई करने के निर्देश दिए। वहीं पूर्व मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास ने अभिभावकों की पीड़ा समझते हुए आंदोलन करने की चेतावनी दी। संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि 10 अगस्त को शिक्षा उपसचिव ने स्पष्ट किया था कि कोर्ट ने दाखिले पर कोई रोक नहीं लगाई है, केवल पुनर्भरण राशि को लेकर स्टे है। इसके बावजूद निजी स्कूल कोर्ट के आदेश का हवाला देकर अभिभावकों को गुमराह कर रहे हैं। सरकार को चाहिए कि चयनित विद्यार्थियों का दाखिला सुनिश्चित करे अन्यथा नियमपूर्वक कार्रवाई की जाए। जैन ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद शिक्षा निदेशक ने तुरंत उन सभी स्कूलों की जानकारी मांगी है, जो दाखिले से इंकार कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने शिक्षा अधिकारियों को कड़े निर्देश देने की बात भी कही। संघ के पदाधिकारी मंगलवार को विपक्ष के नेता टीकाराम जूली से मुलाकात करेंगे और इसके बाद उनके पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट से मिलने की भी संभावना है।

ट्रंप का ऐलान: वोटिंग मशीन पर रोक, जल्द जारी हो सकता आदेश

वॉशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने देश में वोटिंग मशीन से मतदान खत्म करने जा रहे हैं। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर यह बात लिखी है। इसके अलावा उन्होंने ई-मेल से होने वाले मतदान पर भी रोक लगाने की बात कही है। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि वह एक एग्जीक्यूटिव आदेश देने वाले हैं। इसके बाद 2026 के मध्यावधि चुनाव में वोटिंग मशीन और ई-मेल से मतदान पर रोक लग जाएगी। ट्रंप काफी अरसे से मशीन और मेल मतपत्रों का विरोध करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि वोटिंग मशीन से चुनावी धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा सकता है। गड़बड़ी की जताई है आशंका डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार सुबह अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर यह पोस्ट लिखी। उन्होंने मशीन से वोटिंग पर चुनाव में गड़बड़ी की आशंका जताई है। हालांकि अभी तक अमेरिकी चुनाव में ऐसी गड़बड़ी कभी देखने को नहीं मिली है। बता दें कि डेमोक्रेट्स मेल मतपत्रों से वोटिंग का समर्थन करते हैं। उनका मानना है कि इस प्रक्रिया से उन लोगों को मतदान में भाग लेने का मौका मिल जाता है, जो सामान्य तौर पर वोट डालने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे लोगों में बुजुर्ग, दिव्यांग आदि शामिल हैं।  

अमेरिकी चेतावनी: भारत का चीन-रूस के करीब जाना हथियार देने में जोखिम

वाशिंगटन  रूसी तेल की खरीद को लेकर अमेरिका ने एक बार फिर भारत पर निशाना साधा है। अब वाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा है कि भारत ने रूस और चीन से करीबी बढ़ा ली है, जिसके कारण उसे हथियार बेचना जोखिम भरा हो गया है। वहीं, भारत ने साफ किया है कि तेल खरीदने को लेकर उसे अनुचित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने बताया था कि अमेरिका और यूरोपीय संघ भी रूसी सामान के खरीदार हैं। लेख में वाइट हाउस के व्यापारिक मामलों के सलाहकार पीटर नवारो ने लिखा है नई दिल्ली अब 'रूस और चीन दोनों के करीब जा रहा है।' उन्होंने लिखा, 'अगर भारत एक रणनीतिक साझेदार की तरह हमसे व्यवहार चाहता हैं, तो उसे वैसे काम भी करने चाहिए।' इससे पहले कई मौकों पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी रूसी तेल की खरीदी को लेकर भारत पर निशाना साध चुके हैं। नवारो ने लिखा, 'भारत रूसी तेल के सबसे बड़े उपयोगकर्ता के रूप में काम कर रहा है। वह कच्चे तेल को महंगे निर्यात में बदल रहा है और मॉस्को को डॉलर थमा रहा है, जिसे उसकी जरूरत है।' उन्होंने कहा कि रूस और चीन के साथ भारत के करीबी रिश्तों के चलते अमेरिकी सैन्य क्षमताओं को भारत को सौंपना जोखिम भरा है। ट्रंप पहले ही भारत के खिलाफ 25+25 फीसदी टैरिफ लगा चुके हैं। शुरुआती ऐलान में उन्होंने भारत पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाया था और इसकी वजह BRICS देश और अमेरिका को होने वाला घाटा बताया था। साथ ही उस दौरान रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत पर जुर्माना भी लगाया गया था। इसके बाद उन्होंने 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क का ऐलान किया और भारत को रूसी तेल खरीदने पर घेरा था। भारत की तरफ से साफ किया जा चुका है कि उसे देश के आर्थिक हित में जो भी जरूरी होगा, वह फैसला लिया जाएगा। साथ ही अमेरिका को दिए एक जवाब में भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया था कि यूरोपीय संघ के सदस्य कई देश रूस से सामान खरीद रहे हैं। वहीं, ट्रंप से भी जब एक पत्रकार ने रूसी तेल की खरीद के संबंध में सवाल किया, तो वह जवाब देने से बचते नजर आए थे।  

जयशंकर से मुलाकात के बाद चीन का संदेश, सहयोग से बढ़ सकती दोनों देशों की प्रगति

नई दिल्ली  अमेरिका के साथ टैरिफ को लेकर चल रहे विवाद के बीच चीन और भारत के बीच की नजदीकियां बढ़ रही हैं। दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर करने की ओर अग्रसर हो रहे हैं। इस कड़ी में चीन के विदेश मंत्री वांग यी सोमवार को अपने दो दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचे हैं। वांग यी और भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर के बीच अहम बैठक शुरू हो गई है, जहां जयशंकर ने चीनी अधिकारियों का स्वागत किया है। जयशंकर के साथ बैठक में वांग यी ने कहा, "हमने बॉर्डर पर शांति बनाए रखने की कोशिश की है। …हमने सहयोग बढ़ाने और चीन-भारत संबंधों में सुधार और विकास की गति को और मजबूत करने का विश्वास साझा किया है ताकि हम दोनों देशों के विकास के साथ-साथ एक-दूसरे की सफलता में भी योगदान दे सकें। साथ ही एशिया और विश्व में वह स्थिरता लाई जा सके, जिसकी जरूरत है।” मतभेद विवाद का रूप ना ले- एस जयशंकर इससे पहले एस जयशंकर ने कहा है कि चीन और भारत के संबंध कठिन दौर से गुजरे हैं और अब दोनों देशों की साझेदारी से इसे बेहतर बनाने का प्रयास जारी है। जयशंकर ने कहा, “संबंधों में एक कठिन दौर देखने के बाद, दोनों देश अब आगे बढ़ना चाहते हैं। इसके लिए दोनों पक्षों की ओर से एक स्पष्ट और रचनात्मक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। इस प्रयास में, हमें तीन मूल्यों, एक दूसरे का सम्मान, संवेदनशीलता और पारस्परिक हितों को ध्यान में रखना चाहिए।” जयशंकर ने कहा है कि यह ध्यान रखने की जरूरत है कि मतभेद विवाद का रूप ना ले, ना ही प्रतिस्पर्धा संघर्ष में बदले। सीमा पर शांति पर जोर वहीं जयशंकर ने इस दौरान यह भी कहा है कि दोनों देशों के बीच संबंधों में सकारात्मक गति तभी आ सकती है जब सीमा पर शांति स्थापित हो। जयशंकर ने अपनी ओपनिंग स्पीच में कहा, “आप कल हमारे विशेष प्रतिनिधि एनएसए अजीत डोभाल के साथ सीमा संबंधी मुद्दों पर चर्चा करेंगे। यह बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारे संबंधों में किसी भी सकारात्मक गति का आधार बॉर्डर पर संयुक्त रूप से शांति और सौहार्द बनाए रखने की क्षमता है। यह भी जरूरी है कि तनाव कम करने की प्रक्रिया आगे बढ़े।" टैरिफ पर बातचीत की उम्मीद जयशंकर ने इस दौरान टैरिफ से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के भी संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि जब दुनिया के दो सबसे बड़े देश मिलते हैं, तो कि अंतर्राष्ट्रीय स्थिति पर चर्चा स्वाभाविक है। जयशंकर ने कहा, “हम एक मल्टीपोलर एशिया सहित एक निष्पक्ष, संतुलित और मल्टीपोलर वैश्विक व्यवस्था चाहते हैं। वर्तमान परिवेश में, वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाए रखना और उसे बनाए रखना स्पष्ट रूप से जरूरी है।” उन्होंने चीनी विदेश मंत्री संग और भी कई अहम मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद जताई है। PM मोदी जा सकते हैं चीन गौरतलब है कि चीनी विदेश मंत्री दो दिवसीय यात्रा के दौरान मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी मुलाकात करेंगे। इस बीच इस महीने के अंत में पीएम मोदी भी चीन की यात्रा कर सकते हैं। वह 31 अगस्त और 1 सितंबर मे चीन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले सकते हैं। 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसा के बाद यह पीएम मोदी का पहला चीन दौरा होगा।  

सीएम योगी ने मथुरा में बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए किया कार्यवाही आदेश

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मथुरा में आई बाढ़ को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने बाढ़ प्रभावित इलाकों के अधिकारियों को राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बाढ़ के समय राहत और बचाव के लिए बेहतर कोऑर्डिनेशन और क्विक एक्शन जरूरी है। कंट्रोल रूम 24×7 काम करें, यह सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री योगी का स्पष्ट संदेश है। लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हर नागरिक को संभव मदद मिले। बाढ़ के बीच बीमारी बढ़ती है। राहत शिविरों के लिए स्वास्थ्य टीम गठित करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पशुओं का भी इस दौरान ध्यान रखा जाए।  

मातृत्व अवकाश वेतन विवाद सुलझा: हाईकोर्ट फटकार के बाद संविदा कर्मियों को मिला हक

बिलासपुर उच्च न्यायालय में सोमवार को सुनवाई के दौरान शासन ने कोर्ट को अवगत कराया कि जिला अस्पताल कबीरधाम में कार्यरत संविदा स्टाफ नर्स को मातृत्व अवकाश अवधि का पूरा वेतन भुगतान कर दिया गया है. यह फैसला प्रदेश की हजारों महिला संविदा कर्मचारियों के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है, क्योंकि मामला सीधे तौर पर महिला सम्मान और उनके संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा हुआ था. जानकारी के अनुसार, याचिकाकर्ता स्टाफ नर्स ने 16 जनवरी 2024 से 16 जुलाई 2024 तक मातृत्व अवकाश लिया था, जो विधिवत स्वीकृत हुआ. 21 जनवरी को उन्होंने कन्या संतान को जन्म दिया और 14 जुलाई को पुनः कार्यभार ग्रहण किया. मातृत्व अवकाश की अवधि का वेतन शासन द्वारा नहीं दिया गया, जबकि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 2010 में इसका स्पष्ट प्रावधान है. इसी के चलते उन्होंने रिट याचिका और उसके पालन न होने पर अवमानना याचिका दायर की. मामले में न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने पूर्व सुनवाई में ही शासन से कड़े शब्दों में पूछा था कि आदेश के बावजूद वेतन भुगतान क्यों नहीं किया गया. कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की थी कि यह मामला केवल आर्थिक अधिकार का नहीं बल्कि महिलाओं के सम्मान और गरिमा से संबंधित है. आज की सुनवाई में शासन की ओर से यह जानकारी दी गई कि याचिकाकर्ता को अब मातृत्व अवकाश की अवधि का वेतन दे दिया गया है. इसके साथ ही अवमानना याचिका का निष्कर्ष निकल आया. याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता श्रीकांत कौशिक ने कहा- “यह केवल एक महिला स्टाफ नर्स की जीत नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की उन महिला संविदा कर्मियों की जीत है, जिन्हें वर्षों से मातृत्व अवकाश वेतन को लेकर संघर्ष करना पड़ रहा था. न्यायालय ने यह साफ कर दिया है कि मातृत्व अवकाश महिला कर्मचारियों का वैधानिक अधिकार है, चाहे उनकी नियुक्ति नियमित हो या संविदा.”

राजद में इस्तीफों का दौर शुरू, चुनाव से पहले जिलाध्यक्ष और प्रधान महासचिव ने छोड़ा पद

मुंगेर बिहार में विधानसभा चुनाव की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे पार्टियों में उलटफेर भी शुरू हो गया है। इस क्रम में राजद को मुंगेर में बड़ा झटका लगा है। राजद के जिलाध्यक्ष त्रिलोकी नारायण शर्मा तथा प्रधान महासचिव संतोष कुमार यादव ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। पत्र जारी कर इस्तीफा प्रदेश अध्यक्ष को भेजा है। इसे लेकर यह कयास लगाया जा रहा है कि वे इन दिनों राजद में अपनी पूछ को घटता देख खुद को अपमानित महसूस कर रहे थे तथा इसके कारण पार्टी नेतृत्व से खफा चल रहे थे। बताते चलें कि पिछले दो बार से राजद ने मुंगेर जिले में केवल एक समुदाय की पार्टी होने का दाग मिटाने के खयाल से पिछड़ा व अति पिछड़ा वर्ग से आने वाले कार्यकर्ता को जिलाध्यक्ष बनाया था। इसके तहत पहले बरियारपुर प्रखंड निवासी देवकीनंदन सिंह को तथा इस बार सदर प्रखंड निवासी त्रिलोकी नारायण शर्मा को जिलाध्यक्ष बनाया था, पर त्रिलोकी नारायण शर्मा के साथ ही पार्टी के प्रधान महासचिव संतोष कुमार यादव ने भी एक साथ इस्तीफा दिया है। इससे कहीं न कहीं यह जरूर लग रहा है कि शायद पार्टी में उन्हें वह सम्मान नहीं मिल रहा था, जो एक जिलाध्यक्ष तथा प्रधान महासचिव को मिलना चाहिए। हालांकि, अंदरखाने से यह बात सामने आ रही है कि 21 अगस्त को कांग्रेस नेता राहुल गांधी तथा नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव वोट अधिकार यात्रा के तहत मुंगेर आने वाले हैं, तथा इस कार्यक्रम को लेकर दोनों ही नेताओं को इसमें उचित स्थान नहीं दिया गया अथवा उन्हें इस कार्यक्रम से दूर रखा गया है।  

टोल वसूली पर सुप्रीम कोर्ट का फटकारा, खराब रोड पर पैसे लेने पर आपत्ति

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को NHAI यानी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से पूछा कि अगर केरल के त्रिशूर में 65 किलोमीटर लंबे राजमार्ग को तय करने में 12 घंटे लगते हैं, तो किसी यात्री को 150 रुपये के टोल (शुल्क) का भुगतान करने के लिए क्यों कहा जाए। प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई, न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ ने यह टिप्पणी एनएचएआई और टोल वसूलने का अधिकार रखने वाली कंपनी ‘गुरुवायूर इंफ्रास्ट्रक्चर’ द्वारा दायर याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए की। याचिका में त्रिशूर के पलियेक्कारा टोल प्लाजा पर टोल संग्रह पर रोक लगाने के केरल उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई है। सीजेआई ने कहा, 'अगर किसी व्यक्ति को सड़क के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने में 12 घंटे लगते हैं, तो उसे 150 रुपये क्यों देने चाहिए? जिस सड़क पर एक घंटे का समय लगने की उम्मीद है, उसमें 11 घंटे और लगते हैं और उन्हें टोल भी देना पड़ता है।' सुनवाई के दौरान पीठ को सप्ताहांत में इस मार्ग पर लगभग 12 घंटे तक यातायात जाम रहने की जानकारी दी गई। उच्च न्यायालय ने छह अगस्त को राष्ट्रीय राजमार्ग 544 के एडापल्ली-मन्नुथी खंड की खराब स्थिति और निर्माण कार्यों के कारण उत्पन्न गंभीर यातायात जाम के आधार पर टोल निलंबन का आदेश दिया था। एनएचएआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और टोल वसूल करने का अधिकार रखने वाली कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने कहा, 'हम हर पहलू पर विचार करेंगे, आदेश सुरक्षित रखेंगे।' न्यायमूर्ति चंद्रन ने कहा कि जिस दुर्घटना के कारण यह सड़क अवरुद्ध हुई, वह महज 'दैवीय कृत्य' नहीं था, जैसा कि मेहता ने तर्क दिया, बल्कि एक ट्रक के गड्ढे में गिर जाने के कारण हुई थी। मेहता ने कहा कि जहां अंडरपास का निर्माण कार्य चल रहा था, वहां एनएचएआई ने सर्विस रोड उपलब्ध कराई थी, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि मॉनसून की बारिश ने निर्माण कार्य की गति धीमी कर दी है। उन्होंने एक उदाहरण भी दिया जिसमें टोल को निलंबित करने के बजाय आनुपातिक रूप से कम करने का सुझाव दिया गया था। वहीं, गुरुवायूर इंफ्रास्ट्रक्चर ने कहा कि उसने 60 किलोमीटर का क्षेत्र अपने नियंत्रण में रखा है और उसने सर्विस रोड की रुकावटों के लिए ‘पीएसजी इंजीनियरिंग’ सहित तीसरे पक्ष के ठेकेदारों को दोषी ठहराया। दीवान ने उच्च न्यायालय के फैसले को 'बेहद अनुचित' बताते हुए कहा, 'जब मैं दूसरों को सौंपे गए काम के लिए जिम्मेदार नहीं हूं, तो मेरी आय का स्रोत नहीं रोका जा सकता। मुझे सिर्फ 10 दिनों में ही 5-6 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।' पीठ ने कहा कि टोल वसूली का अधिकार रखने वाली कंपनी को उच्च न्यायालय ने एनएचएआई के खिलाफ नुकसान का दावा करने की अनुमति दे दी है। दीवान ने कहा कि यह अपर्याप्त है, क्योंकि दैनिक रखरखाव लागत जारी है और राजस्व वसूली रुक गई है। शीर्ष अदालत ने 14 अगस्त को टोल वसूली पर रोक लगाने संबंधी उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने के प्रति अनिच्छा जताई थी। उच्च न्यायालय ने छह अगस्त को टोल वसूली को चार सप्ताह के लिए स्थगित करने का आदेश दिया था। अदालत ने कहा था कि जब राजमार्ग का रखरखाव ठीक से नहीं हो रहा है और यातायात जाम बहुत अधिक है, तो वाहन चालकों से टोल नहीं वसूला जा सकता। उच्च न्यायालय ने फैसले में कहा था कि जनता और एनएचएआई के बीच संबंध 'जन विश्वास' का है और सुचारू यातायात प्रवाह बनाए रखने में विफलता ने उस विश्वास को भंग किया है।  

राष्ट्रीय शिक्षा नीति चरित्र निर्माण व व्यक्तित्व विकास में सहायक : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के तत्वाधान में तीन दिवसीय कार्यशाला भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि चरित्र निर्माण व व्यक्तित्व विकास में राष्ट्रीय शिक्षा नीति सहायक है। संस्कारित शिक्षा परोपकर का मार्ग प्रशस्ति करती है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नई दिल्ली के संयोजकत्व में आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि हमारी सबसे बड़ी ताकत भारतीय ज्ञान परंपरा है, जिसके पुनरूत्थान का कार्य करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति में समावेश किया गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास कार्यों के साथ सांस्कृतिक व देशहित के महत्वपूर्ण कार्य किये जा रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में समग्र विकास के आयाम निर्धारित किये गये हैं, जो चरित्र निर्माण में अपनी भूमिका निभायेंगे। उन्होंने कहा कि भारत विश्वगुरू बनने के मार्ग पर अग्रसर हैं। तीन दिवसीय कार्यशाला में नैतिक आधार के समावेश के साथ ही भारतीय ज्ञान परंपरा के गहन चिंतन का लाभ रीवा के विद्यार्थी व प्रबुद्धजन ले पायेंगे। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संयोजक अतुल कोठारी ने कहा कि नई शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान परंपरा एवं पंचकोष के सिद्धांत का समावेश किया गया है, जिससे समग्र विकास संभव हो सके। जरूरत है कि विद्यार्थी इसका अध्ययन करें और अपनी भूमिका तय करें। उन्होंने कहा कि शिक्षा का मूल आधार एकाग्रता है। नवीन शिक्षा नीति में समग्र विकास के आयाम, निर्धारित किये गये हैं। कुलगुरू प्रो. राजेन्द्र कुमार कुड़रिया ने कहा कि राष्ट्रीय संस्कृति उत्थान न्यास शिक्षा बचाओ अभियान का नेतृत्व करता है। कार्यशाला में स्मारिका एवं संकल्प पत्र का विमोचन किया गया। विधायक मनगवां इंजी. श्री नरेन्द्र प्रजापति, श्री ओम शर्मा, प्रो. सुनील तिवारी, कुल सचिव श्री सुरेन्द्र सिंह परिहार, श्री अजय तिवारी विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, विद्यार्थी तथा प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।