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धार में इमामबाड़ा सील, सुरक्षा के कड़े इंतजाम; शहरभर में पुलिस बल की तैनाती

धार   धार शहर के हटवाड़ा इलाके में स्थित इमामबाड़े को लेकर प्रशासन ने अहम कदम उठाते हुए मुस्लिम समाज से खाली करा लिया गया है। बुधवार तड़के 4 बजे कार्रवाई करते हुए भवन पर लोहे का गेट ओर ताला लगाकर इसे सील किया गया। साथ ही, पीडब्ल्यूडी विभाग को सुपुर्द किया गया है। एसडीएम के आदेश पर की गई इस कार्रवाई के दौरान पूरे क्षेत्र में प्रशासनिक सतर्कता है। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी तैनात किये गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की स्थिति से निपटा जा सके। इमामबाड़े का कब्जा दिलवाने के बाद प्रशासन ने इसकी जिम्मेदारी अब पीडब्ल्यूडी विभाग को सौंप दी है। इस कार्रवाई को लेकर शहरभर में चर्चा का माहौल है और लोग पुलिस-प्रशासन की इस सक्रियता की बातें करते नजर आ रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस-प्रशासन लगातार क्षेत्र का भ्रमण कर रहा है और हालात पर नजर बनाए हुए है। साथ ही, प्रशासन सोशल मीडिया पर भी अलर्ट है। अफवाहें या भ्रामक खबरें फैलने से रोकने के लिए विशेष निगरानी रखी जा रही है। PWD विभाग की निगरानी में रहेगा इमामबाड़ा इस मामले में अधिकारी साफ कर चुके हैं कि, सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की गलत जानकारी साझा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब इमामबाड़ा पीडब्ल्यूडी विभाग की देखरेख में रहेगा और पुलिस-प्रशासन लगातार हालात पर पैनी नजर बनाए हुए है।

सरकारी चरागाह भूमि पर आवंटन पर रोक, हाईकोर्ट ने किया स्पष्ट

बिलासपुर छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में एक व्यक्ति ने सरकारी जमीन पर लीज की मांग को लेकर याचिका दायर की थी, जिसे आज हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है. मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय की एकलपीठ ने कहा कि संबंधित भूमि सरकारी भूमि है और इसे चरागाह के रूप में आरक्षित किया गया है. राजस्व प्राधिकारियों ने तथ्यात्मक आधार पर सही निर्णय लिया है और हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है. क्या है मामला बेमेतरा जिले के ग्राम धानगांव निवासी बनवाली दास ने 0.94 हेक्टेयर भूमि पर खेती करने के लिए लीज देने की मांग की थी. याचिकाकर्ता का कहना था कि वह वर्ष 1998 से उक्त भूमि पर काबिज है और उसके पास खेती के लिए कोई अन्य जमीन नहीं है. इसी आधार पर उसने कलेक्टर बेमेतरा को आवेदन दिया था. प्रशासनिक स्तर पर खारिज कलेक्टर ने 2014 में यह आवेदन खारिज कर दिया. इसके बाद याचिकाकर्ता ने अपील आयुक्त दुर्ग और पुनरीक्षण राजस्व मंडल रायपुर के पास भी अपील दायर की, लेकिन दोनों ही स्तर पर उसकी मांग अस्वीकार कर दी गई. हाईकोर्ट का फैसला इन आदेशों को चुनौती देते हुए याचिका हाईकोर्ट में लगाई गई थी. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि संबंधित भूमि सरकारी भूमि है और इसे चरागाह (गाय-भैंस चराई) के लिए आरक्षित किया गया है. इस आधार पर कोर्ट ने राजस्व प्राधिकारियों के आदेश को सही ठहराते हुए हस्तक्षेप से इनकार कर दिया.

जंगली हाथियों के हमले में ग्रामीण घायल, फसल और संपत्ति को भारी नुकसान

मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर मनेंद्रगढ़ वन मंडल के ग्राम पंचायत कछौड़ में हाथियों के दल ने जमकर उत्पात मचाया। करीब 12 हाथियों का झुंड, जिसमें दो शावक भी शामिल हैं, गांव में विचरण कर रहा है। हाथियों के हमले में एक ग्रामीण युवक की मौत हो गई। वहीं गांव के तीन घरों को भी क्षतिग्रस्त किया और फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। इस घटना से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। जानकारी के अनुसार, हाथियों का यह दल वर्तमान में बिहारपुर वन परिक्षेत्र में विचरण कर रहा है। वन विभाग लगातार हाथियों की गतिविधियों पर नज़र रखे हुए है और स्थिति को नियंत्रण में लाने की कोशिश कर रहा है। ग्रामीणों को वन विभाग द्वारा जंगल की ओर न जाने और सतर्क रहने की अपील की गई है। घटना से प्रभावित परिवारों को प्राथमिक स्तर पर सहायता पहुंचाने की कार्रवाई शुरू की जा रही है। यह पूरा मामला मनेंद्रगढ़ वन मंडल का है, जहां हाथियों के दल के कारण ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है।

नाती वायु के जन्मदिन पर अनिल कपूर का छलका प्यार, कहा- ‘तुम हमारे जीवन में खुशियां लेकर आएं’

मुंबई,  बॉलीवुड एक्टर अनिल कपूर ने अपने नाती वायु के जन्मदिन के मौके पर सोशल मीडिया पर प्यार से भरा पोस्ट साझा किया। उन्होंने लिखा कि जब से वायु उनके जीवन में आया है, तब से उनके आसपास प्यार और खुशियां भर गई हैं। अनिल ने इंस्टाग्राम पर कुछ खूबसूरत तस्वीरें पोस्ट की, जिसमें वायु के साथ बिताए गए अनमोल पलों की झलक है। पहली तस्वीर में वायु ने एक प्यारी सी कैप पहन रखी है, जिससे उसका मासूम चेहरा थोड़ा छिप गया है। वह व्हाइट कलर के डेनिम शर्ट में नजर आ रहे हैं। दूसरी फोटो ब्लैक एंड व्हाइट है, जिसमें वायु अपनी मां सोनम कपूर की गोद में हैं और उनका चेहरा नाना अनिल कपूर की तरफ है। वहीं अनिल कपूर भी वायु को देखकर मुस्कुरा रहे हैं, और उनकी आंखों में नाना बनने का गर्व साफ झलक रहा है। तीसरी तस्वीर विदेश की किसी खूबसूरत जगह की है, जहां सोनम और उनके पति आनंद आहूजा वायु की ओर देख रहे हैं। बाकी की तस्वीरों में वायु अपने परिवार के अन्य लोगों के साथ समय बिताते हुए नजर आ रहे हैं। अपने कैप्शन में अनिल कपूर ने परिवार के हर सदस्य को शामिल किया और बताया कि किस तरह सभी वायु को दिल से प्यार करते हैं और उसका ध्यान रखते हैं। उन्होंने कहा कि यह देख कर उन्हें बहुत गर्व होता है। उन्होंने लिखा कि वायु बहुत ही भाग्यशाली है कि उसे इतना प्यारा और सोचने-समझने वाला परिवार मिला है। अनिल ने कैप्शन में लिखा, ”हैप्पी बर्थडे, वायु! जिस पल तुम हमारे जीवन में आए, तुमने हर दिल को खुशी और प्यार से भर दिया। सोनम, आनंद, नानी, दादी, दादा, रिया मासी, करण और अक्की… तुम्हें सबको वायु के चारों ओर एकजुट होते देखना मुझे गर्व से भर देता है। वायु सच में बहुत भाग्यशाली है कि उसे इतने प्यार करने वाले माता-पिता और परिवार का साथ मिला है। जिस तरह से आप सब उसका ख्याल रखते हो, वह इस बात की खूबसूरत याद दिलाता है कि जीवन में वास्तव में क्या मायने रखता है। आने वाले कई साल ऐसे ही प्यार, हंसी और अनमोल यादों के लिए रहें। आप सभी को ढेर सारा प्यार!” बता दें कि सोनम और आनंद आहूजा ने 20 अगस्त 2022 को अपने बेटे वायु का स्वागत किया था। फैंस पोस्ट पर कमेंट्स कर वायु को जन्मदिन की बधाई दे रहे हैं।  

बघेल ने उठाए सवाल: सरकार ने कैसे बनाई 14 मंत्रियों वाली नई टीम?

रायपुर मुख्यमंत्री साय के मंत्रिमंडल का विस्तार आखिरकार हो गया है, लेकिन 14 मंत्रियों की नियुक्ति ने राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे कानून के उल्लंघन का मामला बताया है और सवाल उठाया है कि क्या सरकार को इतनी बड़ी मंत्रिपरिषद बनाने की अनुमति मिली थी। इसको लेकर भूपेश बघेल ने सीएम साय से जवाब भी मांगा है। पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने साय सरकार में 14 मंत्रियों की संख्या पर सवाल उठाते हुए कहा कि 2003 में बने कानून के मुताबिक विधानसभा सदस्यों की संख्या में 15% तक ही मंत्री बन सकते हैं। जब 2018 में कांग्रेस की सरकार बनी थी, तो मैंने भारत सरकार को पत्र लिखा था। छत्तीसगढ़ में मंत्रियों की संख्या 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 20% तक करने की मांग की गई थी। इसके पीछे छत्तीसगढ़ का भौगोलिक रूप से बड़ा होना और विधानसभा परिषद न होने का तर्क दिया था। लेकिन पत्र का कोई जवाब नहीं आया और न ही अनुमति मिली। ऐसे में अब सवाल उठ रहा साय सरकार को अनुमति कब मिली ? बिना अनुमति अगर 14 मंत्री बनाए गए तो यह अवैधानिक है। मुख्यमंत्री साय को इसका जवाब देना चाहिए। हरियाणा की तर्ज पर हुआ मंत्रिमंडल का विस्तार हरियाणा में भी 90 विधायक हैं। हरियाणा में बीजेपी सरकार में मुख्यमंत्री समेत 14 मंत्री हैं। इस लिहाज से हरियाणा के फॉर्मूले को छत्तीसगढ़ में भी लागू करते हुए 3 और मंत्री बनाए गए हैं। हालांकि छत्तीसगढ़ बनने के बाद से 13 मंत्री ही बनते आ रहे थे। नियमों के तहत विधायकों की संख्या के आधार पर 15 प्रतिशत ही मंत्री बन सकते हैं, इसलिए 90 विधायकों में 13.5 मंत्री के तहत मुख्यमंत्री समेत 14 मंत्री बनाए गए हैं। बता दें कि आज राज्यपाल रमेन डेका ने सुबह 10:30 बजे राजभवन में गजेन्द्र यादव, राजेश अग्रवाल एवं गुरू खुशवंत साहेब को मंत्री पद की शपथ दिलाई। गजेंद्र यादव को स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग, विधि एवं विधायी कार्य विभाग सौंपा गया है। गुरु खुशवंत साहेब को कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, अनुसूचित जाति विकास विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं राजेश अग्रवाल को पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग सौंपा गया है।

लोकसभा में ‘दागी नेता हटाओ’ बिल पेश, विपक्षी सांसदों ने कॉपी फाड़ी, शाह पर कागज फेंके

नई दिल्ली प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को अपराध के गंभीर आरोपों के बाद पद से हटाने वाला बिल बुधवार को अमित शाह ने लोकसभा में पेश किया। कांग्रेस, सपा समेत सभी विपक्षी दलों ने बिल का पुरजोर विरोध किया। कांग्रेस ने बिल को पूरी तरह से विनाशकारी बताया, जबकि अमित शाह ने कहा कि बिल को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) में भेजा जाएगा। बिल में प्रस्तावित किया गया है कि अगर कोई मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री या फिर मंत्री पर गंभीर आरोप हैं और उसकी गिरफ्तारी होती है तो 30 दिनों तक जेल में रहने के बाद 31वें दिन उसके इस्तीफा देना पड़ेगा या फिर उसे बर्खास्त कर दिया जाएगा। अमित शाह की तरफ उछाले कागज विपक्ष के कुछ सांसद लोकसभा की वेल में आकर नारेबाजी करने लगे. इस दौरान कुछ विपक्षी सांसदों ने बिल की कॉपी भी फाड़ दी और कागज के टुकड़े अमित शाह की तरफ उछाले. हालांकि अमित शाह ने बिल पेश करने के दौरान कहा कि सरकार इस बिल को जेपीसी को भेजने का प्रस्ताव रखती है. बावजूद इसके बिल को विरोध का सामना करना पड़ा. संविधान के 130वें संशोधन विधेयक पेश होने के दौरान सदन में लगातार नारेबाजी होती रही. विपक्षी सांसदों ने सत्ता पक्ष को घेर लिया और गृह मंत्री का माइक मोड़ने की कोशिश की. इस पर काफी हंगामा हुआ और सदन के अंदर स्थिति तनावपूर्ण हो गई. इस दौरान सत्ता पक्ष के कई सांसद, गृह मंत्री का बचाव करने के लिए आगे आकर विपक्षी सांसदों को रोकने की कोशिश करने लगे. लोकसभा में अमित शाह के बिल पेश करने के बाद विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत समूचे विपक्ष का हंगामा देखने को मिला, जिसके बाद सदन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। अमित शाह ने कहा कि दागी सीएम-पीएम और मंत्रियों को हटाने वाला बिल संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के सामने विचार के लिए भेजा जाएगा। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने बिल को "पूरी तरह से विनाशकारी" बताया। कांग्रेस सांसद ने कहा, ''भारतीय संविधान कहता है कि कानून का शासन होना चाहिए, और इसका आधार यह है कि जब तक दोषी साबित न हो जाए, तब तक आप निर्दोष हैं। यह विधेयक इसमें बदलाव की उम्मीद करता है। यह एक कार्यकारी एजेंसी के अधिकारी को प्रधानमंत्री का बॉस बनाता है।'' बिल का विरोध करते हुए एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, "मैं जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025, केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक 2025 और संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक 2025 को पेश किए जाने का विरोध करता हूं। यह सरकार चुनने के अधिकार को कमजोर करता है। यह कार्यकारी एजेंसियों को तुच्छ आरोपों और संदेह के आधार पर न्यायाधीश और जल्लाद बनने की खुली छूट देता है। सरकार पुलिस राज्य बनाने पर तुली हुई है। यह निर्वाचित सरकार के लिए मौत की कील होगी। इस देश को पुलिस राज्य में बदलने के लिए भारत के संविधान में संशोधन किया जा रहा है।" आम आदमी पार्टी ने भी बिल का विरोध किया है। इंडिया गठबंधन का हिस्सा न होने पर भी आप ने कहा कि वह इसका कड़ा विरोध करती है। 'आप' नेता अनुराग ढांडा ने कहा, “केंद्र सरकार संसद में जो बिल पेश करेगी, उसका 'आप' कड़ा विरोध करती है। यह बिल तानाशाही लागू करने का तरीका है। केंद्र सरकार विपक्षी नेताओं के खिलाफ एजेंसियों का दुरुपयोग करती रही है। कभी मंत्रियों को गिरफ्तार करती है, तो कभी दूसरी पार्टियों के मुख्यमंत्रियों को। सत्येंद्र जैन पर फर्जी केस लगाकर उन्हें डेढ़ साल से ज़्यादा जेल में रखा और कुछ दिन पहले कहा कि उनके पास उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है। इस बिल के मुताबिक, निर्दोष होते हुए भी सत्येंद्र जैन को मंत्री पद से हटाया जा सकता है। इस बिल का इस्तेमाल करके वे पूरी सरकार भी गिरा सकते हैं।” केंद्रीय गृह मंत्री ने लोकसभा में बुधवार को कुल तीन बिल पेश किए। ये तीनों बिल संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक, 2025, केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025, जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक हैं। सरकार ने तीनों बिलों में सख्त प्रावधान किए हैं। वेल में आकर विपक्ष की नारेबाजी सत्ता पक्ष की ओर से रवनीत बिट्टू, कमलेश पासवान, किरेन रिजिजू, सतीश गौतम ने गृह मंत्री के पास नारेबाजी कर रहे आक्रामक सांसदों को रोकने की कोशिश की. लोकसभा की वेल में नारेबाजी की शुरुआत टीएमसी सांसदों ने की और कल्याण बनर्जी ने विधेयक पेश होते ही नारेबाजी शुरू कर दी. बाद में, कांग्रेस सांसद और महासचिव केसी वेणुगोपाल ने अपनी सीट से बिल की कॉपी फाड़कर फेंक दी. इसके बाद सभी कांग्रेस सांसद वेल में आ गए. केसी वेणुगोपाल के बाद सपा के धर्मेंद्र यादव ने भी अपनी सीट से बिल की कॉपी फाड़कर फेंक दी और समाजवादी पार्टी के सभी सदस्य संसद वेल में आ गए. इसके बाद जब गृह मंत्री अमित शाह विधेयक पेश कर रहे थे, तो सभी विपक्षी दल के सदस्य लोकसभा की वेल में आ गए और हंगामा करने लगे. स्थिति बिगड़ती देख लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी. 'जेल जाने पर मैंने दिया था इस्तीफा' अमित शाह बिल पेश करते हुए कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल की आलोचना की और कहा कि मैं जब झूठे मामले में जेल गया था, तब नैतिकता के आधार पर पद से इस्तीफा देकर गया था. उन्होंने कहा कि जब तक अदालत ने मुझे निर्दोष साबित नहीं किया, तब तक किसी भी संवैधानिक पद को ग्रहण नहीं किया. हम इतने बेशर्म नहीं हैं, कि हम पर आरोप लगें और पद पर बने रहें. उन्होंने कहा कि विपक्षी नेता हमें नैतिकता का पाठ नहीं पढ़ा सकते. अमित शाह ने कहा कि मैं चाहता हूं कि ये नैतिकता के मूल्य बढ़ें.   अमित शाह ने बिल पेश करते हुए इसे 21 सदस्यों वाली जेपीसी के पास भेजने का प्रस्ताव पेश किया. इस पर ध्वनिमत से मतदान के दौरान विपक्ष ने वेल से ही विरोध दर्ज किया. लेकिन प्रस्ताव के ध्वनिमत से पारित होने के बाद स्पीकर ओम बिड़ला ने कहा कि कुछ विधेयक राजनीति में शुचिता और नैतिकता के लिए आते हैं, क्योंकि राजनीति में शुचिता और नैतिकता जरूरी है. अब ये बिल जेपीसी के पास चर्चा के लिए भेजे गए … Read more

सुरक्षा एजेंसियों ने उजागर किया जैश-ए-मोहम्मद का योजना, 313 नए ठिकाने तैयार करने की कोशिश

नई दिल्ली आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) ने पाकिस्तान में अपनी गतिविधियों को फैलाने के लिए गुप्त रूप से एक बड़े फंडरेजिंग अभियान की साजिश रची थी. खुफिया सूत्रों के अनुसार, संगठन का मकसद पीकेआर 3.91 अरब रुपये जुटाकर पाकिस्तान भर में 313 नए मार्कज (ट्रेनिंग कैंप और सुरक्षित ठिकाने) स्थापित करना था. जैश सरगना मौलाना मसूद अजहर और उसके भाई तल्हा अल सैफ ने अभियान का नेतृत्व किया और समर्थकों से बढ़-चढ़कर दान करने की अपील की. इसके लिए डिजिटल वॉलेट्स जैसे ईज़ीपैसा और सदापे का इस्तेमाल किया गया, ताकि लेन-देन को FATF (Financial Action Task Force) की निगरानी से बचाया जा सके. जांच में सामने आया कि ये डिजिटल वॉलेट्स मसूद अजहर के परिवार से जुड़े मोबाइल नंबरों पर रजिस्टर्ड थे, जिनमें उसके भाई तल्हा अल सैफ और बेटे अब्दुल्ला अजहर के नंबर भी शामिल थे. इसके अलावा, हर शुक्रवार पाकिस्तान की मस्जिदों में गाजा के लिए चंदा बताकर नकद धन जुटाया गया, जबकि असल में ये रकम जैश की आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हुई. इसी दौरान अल रहमत ट्रस्ट, जो जैश से जुड़ा हुआ संगठन है, बहावलपुर स्थित एक बैंक खाते के जरिए भी धन इकट्ठा कर रहा था. यह ट्रस्ट खुद मसूद अजहर और उसके नजदीकी सहयोगी चलाते हैं. फंडरेजिंग अभियान के आगे बढ़ते ही जैश नेताओं ने खुलासा किया कि नए बनाए जा रहे मार्कज मसूद अजहर और उसके परिवार के लिए सुरक्षित ठिकाने साबित होंगे, जिससे वे अपनी मौजूदगी छिपाकर रख सकें. इन्हीं ठिकानों का इस्तेमाल नए आतंकियों की भर्ती और प्रशिक्षण के लिए भी किया जाना था. सूत्रों के मुताबिक, यह फंडरेजिंग अभियान पूरी तरह सफल रहा और जैश ने पाकिस्तान और विदेशों से भारी मात्रा में धन इकट्ठा कर लिया. इस रकम से संगठन ने मशीन गन, रॉकेट लॉन्चर और मोर्टार जैसी आधुनिक हथियार खरीद लिए. अब अपने नए हथियारों और विस्तारित ढांचे के साथ जैश-ए-मोहम्मद एक नई आतंकी लहर छेड़ने की तैयारी में है. संगठन के नेताओं को भरोसा है कि उनकी परिष्कृत फंडिंग व्यवस्था और गुप्त कम्युनिकेशन चैनल्स की वजह से उनकी गतिविधियां लंबे समय तक नजरों से बची रहेंगी.

गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय और टी.आर.के.सी. के बीच हुआ एमओयू

रायपुर छत्तीसगढ़ के बस्तर और सरगुजा क्षेत्र में निवास करने वाली जनजातियों पर विशेष शोध और अनुसंधान की राह खुल गई है। राज्य की जनजातियों की गौरवशाली परंपरा, उनकी संस्कृति और उनके आर्थिक-समाजिक ताने-बाने को लेकर अब विद्यार्थी उच्च स्तरीय शोध कर पाएंगे। राज्य के गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय और ट्रायबल रिसर्च एण्ड नॉलेज सेंटर नई दिल्ली के बीच इसके लिए महत्वपूर्ण एमओयू हुआ है। टीआरकेसी विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में भारतीय जनजातियों के बारे में शोध कार्याें के लिए महत्वपूर्ण संस्था है। विश्वविद्यालय के ओर से इस एमओयू पर कुलसचिव प्रो. अभय एस रणदिवे और टीआरकेसी की ओर से छतीसगढ़ प्रभारी राजीव शर्मा ने हस्ताक्षर किए। इस एमओयू के तहत् संस्था द्वारा अगले तीन वर्षों तक छत्तीसगढ़ में निवासरत जनजातियों पर शोध कार्य किए जाएंगे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कूलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल, सौराष्ट्र विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. नीलांबरी दवे, वनवासी कल्याण आश्रम के अखिल भारतीय युवा कार्यप्रमुख वैभव सुरंगे सहित अनेक प्राध्यापक, शोधार्थी, विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक भी मौजूद थे। एमओयू के बारे में टीआरकेसी के राज्य प्रभारी राजीव शर्मा ने बताया कि टीआरकेसी देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में जनजातीय विषयों पर शोध कार्यों को बढ़ावा देने की महत्वपूर्ण संस्था है। गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर से एमओयू के बाद छत्तीसगढ़ की विभिन्न जनजातीयों पर रिसर्च तेज होगी। उन्होंने बताया कि राज्य की पुरातन और गौरवशाली जनजातीय के कई अनछुए पहलुओं और उनकी सभ्यता और संस्कृति के बारे में इन शोधों से आम नागरिकों को भी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलेंगी। इन शोध कार्यों से सरगुजा और बस्तर के क्षेत्रों की विभिन्न जनजातियों के आदिकालीन सामाजिक संगठन, उनके अर्थशास्त्र, सुशासन, ग्रामीण उद्यमिता, सतत् विकास और नवाचार के बारे में भी लोगों को जानकारियां मिलेंगी। शर्मा ने बताया कि इससे खुद जनजातीय युवा अपने गौरवशाली अतीत और उसकी व्यवस्थाओं के बारे में जान पाएंगे।  विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने बताया कि संपादित एमओयू के बाद जनजातीयों पर संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं शुरू होंगी। क्षेत्राधारित केस स्टडी और युवाओं, प्रशासकों, जनजातीय हितधारकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, नेतृत्व विकास कार्यशालाएं और प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम भी आयोजित होंगे। युवाओं के लिए सामाजिक प्रभाव आधारित र्स्टाटअप और नवाचारों पर मार्गदर्शन तथा परामर्श सत्र रखे जाएंगे। विशेषज्ञों और प्राघ्यापकों की भागीदारी से जनजातीय वर्ग में जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे। जनजातीय पर आधारित संगोष्ठीयों, व्याख्यानों, सम्मेलनों, गोलमेज चर्चाओं तथा सार्वजनिक संवादों का भी आयोजन होगा। उन्होंने बताया कि रिसर्च वर्क से मिले परिणामों को पुस्तकालयों, अनुसंधान प्रकाशनों तथा डेटाबेस के द्वारा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों पर उपलब्ध कराया जाएगा। इससे राज्य के जनजातीय समुदाय के बारे में अधिक से अधिक जानकारी लोगों तक पहुंच सकेगी। स्वयं जनजातीय समुदायों को भी अपने गौरवशाली अतीत के बारे में पता चलेगा और भविष्य में यह रिसर्च वर्क जनजातीयों के विषयों को शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में शामिल करने का जरिया बनेंगे।

धर्म परिवर्तन विवाद: इंदौर में बहू पर पति को मुस्लिम बनाने का आरोप, परिजनों ने पुलिस में दी शिकायत

इंदौर  इंदौर जिला न्यायालय ने एक बहू के खिलाफ घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम के तहत मंगलवार को मामला दर्ज किया है। आरोप है कि विवाह के बाद महिला ने हिंदू पति और ससुराल पक्ष पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया और मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना दी। शादी के कुछ दिनों बाद ही बढ़ने लगे विवाद मरीमाता क्षेत्र की एक युवती का विवाह अप्रैल 2022 में एरोड्रम इलाके के युवक से हुआ था। ससुराल पक्ष के अनुसार, महिला विवाह के बाद केवल 15–20 दिन ही घर पर रही। इस दौरान वह अपने मुस्लिम मित्रों के प्रभाव में आकर मुस्लिम धर्म की इबादत करने लगी। परिवार का आरोप है कि बहू दरगाह जाकर ताबीज, भभूत और फल लाकर जबरदस्ती पति को खिलाने लगी। जब धर्म परिवर्तन के लिए पति ने मना किया तो महिला ने हाथ की नस काटकर आत्महत्या करने की धमकी दी। पति और सास पर दबाव, 10 लाख की मांग ससुराल वालों ने बताया कि एक दिन बहू ने अपनी अलमारी से सभी जेवर निकाल लिए और कहा कि वह "अल्लाह के सजदे" में जा रही है। उसने पति से भी साथ चलने का दबाव बनाया। 17 मार्च 2024 को महिला अपने मायके वालों और दोस्तों के साथ घर आई और 10 लाख रुपए की मांग की। इसी दौरान उसने पति को धर्म बदलने का दबाव बनाकर धमकाया। ससुराल पक्ष ने पुलिस को बुलाया, लेकिन महिला और उसके साथी मौके से चले गए। पुलिस शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं परिवार ने वर्ष 2024 में ही पुलिस कमिश्नर को शिकायत दी थी। एरोड्रम थाने में मामला दर्ज भी हुआ, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद भी बहू लगातार ससुराल पर दबाव बनाती रही। अदालत ने लिया संज्ञान, बहू को नोटिस थक हारकर परिवार ने एडवोकेट डॉ. रुपाली राठौर और कृष्ण कुमार कुन्हारे के माध्यम से जिला न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत किया। अदालत को दी गई जानकारी में पीड़ित पति और सास ने बहू की धमकियों और जबरदस्ती का पूरा ब्यौरा दिया। महिला एवं बाल विकास अधिकारी की गोपनीय जांच रिपोर्ट में भी बहू द्वारा मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना की पुष्टि हुई। इसके आधार पर अदालत ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत केस दर्ज कर बहू को नोटिस जारी किया है। 

रुक्मिणी वसंत की हुयी कांतारा यूनिवर्स में एंट्री

मुंबई, दक्षिण भारतीय फिल्म अभिनत्री रुक्मिणी वसंत फिल्म 'कंतारा चैप्टर 1' में काम करती नजर आयेंगी। सप्ता सगरदाचे एलो में अपनी परफॉर्मेंस से दर्शकों का दिल जीतने वाली रुक्मिणी अब ऋषभ शेट्टी के साथ कांतारा यूनिवर्स के इस ग्रैंड एक्सपेंशन का हिस्सा बन चुकी हैं। उनके लिए यह मौका किसी सपने से कम नहीं।  रुक्मिणी ने बताया, “मुझे इस फिल्म का ऑफर पिछले साल ही आया था। तभी मेरी मुलाकात ऋषभ सर से हुई। उन्होंने कहानी सुनाई और पूछा कि क्या मैं इस सफर का हिस्सा बनना चाहूंगी। सच कहूं तो उस वक्त लगा कि अरे वाह, सपना तो यहीं पूरा हो गया!” हालांकि खुशखबरी मिलने के बाद भी रुक्मिणी को राज़ छुपाकर रखना पड़ा। उन्होंने कहा, “दिल तो करता था छत पर चढ़कर चिल्ला दूँ , अरे मैं कांतारा में हूँ! लेकिन पता था कि सही वक्त आने पर ही अनाउंस करना है। तो यह एक प्यारा-सा सीक्रेट बन गया जिसे मैंने अपने दिल में छुपाकर रखा।”