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इंदौर की युवती का खुलासा: शादी के बाद बच्चे का जबरन खतना और मांस खिलाने का दबाव

इंदौर इंदौर शहर में एक जैन युवती के साथ धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक मुस्लिम युवक ने पहले उससे शादी रचाई और फिर उस पर मुस्लिम धर्म अपनाने का दबाव बनाया। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मुस्लिम युवक और उसकी बहन के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है। जबरन कराया बच्चों का खतना जानकारी के अनुसार, एक हाई प्रोफाइल परिवार की युवती की शिकायत पर मुंबई के यूसुफ खान और उनकी बहन गुलबानो के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। जैन समाज की इस युवती ने बताया कि शादी के बाद यूसुफ ने उसके बच्चों का जबरन खतना करवाया और मांस खाने के लिए मजबूर कर बच्चों का धर्म परिवर्तन कराने का दबाव बनाया। इसके बाद पीड़िता ने इंदौर आकर अपने परिजनों को आपबीती सुनाई और थाने में शिकायत दर्ज कराई। रोमी नाम बताकर की थी दोस्ती पीड़िता ने पुलिस को बताया कि वह इंदौर की एक पॉश कॉलोनी में रहती है। साल 2004 में उसकी दोस्ती यूसुफ से हुई थी, जिसने उस समय अपना नाम रोमी बताया था। उस समय पीड़िता एक विज्ञापन कंपनी में काम करती थी। इसके बाद दोनों ने 2005 में मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर में शादी कर ली। उसी वर्ष पीड़िता को एक टीवी चैनल से जुड़ने का अवसर मिला। मुंबई जाने पर उसे पता चला कि रोमी वास्तव में यूसुफ है और मुस्लिम धर्म से है। इस पर पीड़िता ने रिश्ता तोड़ने की बात कही, लेकिन यूसुफ ने आश्वासन दिया कि वह उसे धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर नहीं करेगा और वह अपने जैन धर्म के अनुसार जीवन जी सकती है। मुस्लिम धर्म अपनाने का बनाया दवाब हालांकि, 2011 में पीड़िता के एक बेटे के जन्म के बाद यूसुफ और उसकी बहन गुलबानो का व्यवहार बदल गया। जन्म के 40 दिन बाद यूसुफ ने चुपके से बच्चे का खतना करवा दिया। इसके बाद यूसुफ ने पीड़िता पर दबाव बनाया कि उनकी बेटी की परवरिश और शिक्षा मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार होगी। गुलबानो ने भी पीड़िता को धमकाते हुए कहा कि वह मुस्लिम धर्म अपनाए, वरना यूसुफ से उसका रिश्ता खत्म कर दिया जाएगा। इसके अलावा, यूसुफ बच्चे को जबरन मांस खिलाता था। जब बच्चा मांस खाने से इनकार करता, तो यूसुफ उसके मुंह में मांस के टुकड़े डालकर मुंह बंद कर देता था। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि यूसुफ और गुलबानो ने कई बार उसके निजी वीडियो बनाए। घर पर आने वाले एक मसाज करने वाले व्यक्ति के साथ यूसुफ ने आपत्तिजनक वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल किया और वीडियो वायरल करने की धमकी दी। कुछ समय पहले पीड़िता एक कार्यक्रम में शामिल होने इंदौर आई और उसने अपनी पूरी आपबीती परिजनों को बताई। इसके बाद देर रात तुकोगंज थाने में यूसुफ और गुलबानो के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया।

CBI स्पेशल कोर्ट का बड़ा फैसला, डाक विभाग के तीन अफसरों को घोटाले में 5 साल की सजा

जबलपुर   सीबीआई की विशेष कोर्ट ने डाक विभाग के तीन अधिकारियों को भ्रष्टाचार व धोखाधड़ी के अपराध में दोषी करार दिया है. सीबीआई कोर्ट ने सागर के डाक विभाग में पदस्थ रहे तीन अधिकारियों को पांच-पांच साल तक के कारावास के साथ अर्थदंड से दंडित किया है. कोर्ट ने 17 नवंबर 2022 को दर्ज हुए मामले की लंबी सुनवाई के बाद ये सजा सुनाई है. क्या है पूरा मामला? अभियोजन की ओर से बताया गया कि सभी आरोपी सागर जिले के बीना एलएसजी उप डाकघर में पदस्थ रहे हैं. डाकघर के तत्कालीन उप डाकपाल विशाल कुमार अहिरवार, हेमंत सिंह और रानू नामदेव पर आरोप था कि तीनों ने 1 जनवरी 2020 से 5 जुलाई 2021 के बीच डाकघर में जमा लोगों के 1 करोड़ 21 लाख रु से ज्यादा की राशि का हेरफेर करते हुए जमाकर्ताओं को फर्जी पासबुक जारी की थी. जब कुछ जमाकर्ता अवधि पूरी होने पर रूपए निकालने पहुंचे, तभी पूरा मामला उजागर हुआ और फिर शिकायत सीबीआई से की गई. शासन को पहुंचाया 1 करोड़ 21 लाख का नुकसान सीबीआई ने जांच के दौरान पाया कि तीनों आरोपियों ने सरकारी पद का दुरुपयोग करते हुए सरकारी खजाने को 1 करोड़ 21 लाख 82 हजार 921 रु नुकसान पहुंचाया. इस राशि को गलत तरीके से निकालकर आरोपियों ने उसका उपयोग खुद को लाभ पहुंचाने के लिए किया था. भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी व जालसाजी के दोषी सीबीआई ने तीनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार,जालसाजी व धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर विशेष न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया था. सीबीआई कोर्ट ने प्रकरण की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत किए गए साक्ष्य व गवाहों के आधार पर तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए कारावास व अर्थदंड की सजा से दंडित किया. सीबीआई की ओर से लोक अभियोजन संजय कुमार उपाध्याय ने पैरवी की. किसे कितनी हुई सजा? सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने तत्कालीन उप डाकपाल विशाल कुमार अहिरवार को 5 साल कारावास की सजा और 39 हजार रु जुर्माना, हेमंत सिंह को 4 साल की सजा और 7 हजार रु जुर्माना और रानू नामदेव को भी 4 साल के कठोर कारावास के साथ 7 हजार रु के अर्थदंड से दंडित किया है.

महिला विश्व कप: शेड्यूल में बड़ा बदलाव, बेंगलुरु की जगह बदला वेन्यू

नई दिल्ली  भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने आगामी महिला वनडे विश्व कप के लिए बेंगलुरु को आयोजन स्थल से हटाने का फैसला किया है। बीसीसीआई की प्रेस रिलीज के मुताबिक एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में होने वाले मैच मुंबई में स्थानांतरित कर दिए गए हैं। कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ (केएससीए) द्वारा मैचों की मेजबानी के लिए पुलिस की मंजूरी प्राप्त करने के लिए बीसीसीआई की बार-बार दी गई समय-सीमा को पूरा ना कर पाने के कारण बेंगलुरु में होने वाले महिला विश्व कप मैचों को मुंबई में स्थानांतरित कर दिया गया है।   आईसीसी के चेयरमैन जय शाह ने कहा, ‘‘हालांकि अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण हमें कार्यक्रम में बदलाव करते एक स्थान बदलना पड़ा, लेकिन अब हमें खुशी है कि हमारे पास पांच विश्वस्तरीय स्थान हैं, जहां महिला क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ मैच देखने को मिलेंगे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मंच तैयार है और मुझे विश्वास है कि यह टूर्नामेंट कल्पनाओं को नए पंख लगाएगा और प्रशंसकों की नई पीढ़ी को प्रेरित करेगा।‘‘ आठ टीमों के इस टूर्नामेंट के अन्य स्थानों में गुवाहाटी, इंदौर, विशाखापत्तनम और कोलंबो शामिल हैं। पाकिस्तान से जुड़े सभी मैचों और पहले सेमीफाइनल की मेजबानी श्रीलंका की राजधानी कोलंबो को मिली है। जून में आईसीसी ने टूर्नामेंट की तारीखों की घोषणा करते हुए बेंगलुरु को पांच आयोजन स्थलों में से एक के रूप में सूचीबद्ध किया था। मेजबान भारत के साथ टूर्नामेंट के पहले मैच के अलावा बेंगलुरु को 30 अक्टूबर को एक सेमीफाइनल और संभवतः 2 नवंबर को फाइनल की मेजबानी भी करनी थी। (अगर पाकिस्तान फाइनलिस्टों में से एक नहीं होता)। बीसीसीआई को यह फैसला इसी साल 4 जून को घरेलू टीम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) द्वारा पहली बार आईपीएल जीतने के बाद स्टेडियम के आसपास मची भगदड़ के कारण इस स्टेडियम को बड़े आयोजनों के लिए 'असुरक्षित' करार दिए जाने के बाद लेना पड़ा है। कर्नाटक सरकार द्वारा नियुक्त एक सदस्यीय समिति ने स्टेडियम को बड़े पैमाने पर होने वाले आयोजनों के लिए "असुरक्षित" माना है। जिसके बाद कर्नाटक पुलिस ने केएससीए को वहां कोई भी मैच आयोजित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इसके कारण केएससीए को महाराजा टी20 को बेंगलुरु से मैसूर स्थानांतरित करना पड़ा था। बीसीसीआई के इस नए फैसले ने अब आईसीसी को संभावित कार्यक्रम में बदलाव के लिए मजबूर कर दिया है।  

कोकिला बेन की तबीयत अचानक बिगड़ी, मुंबई अस्पताल में भर्ती

मुंबई  भारत के दिग्गज उद्योगपति मुकेश अंबानी की मां कोकिला बेन की तबीयत बिगड़ गई है। मुकेश और अनिल अंबानी की मां कोकिलाबेन अंबानी को एयरलिफ्ट करके मुंबई के HN रिलायंस हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया है। उनकी सेहत को लेकर अभी पूरी जानकारी नहीं मिल पाई है। हालांकि, बढ़ती उम्र के चलते स्थिति गंभीर होने की आशंकाएं जताई जा रही हैं। अभी तक, अंबानी परिवार की तरफ से उनकी सेहत को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सोशल मीडिया पर इस दौरान कई तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें अंबानी परिवार के सदस्यों को दक्षिण मुंबई में स्थित रिलायंस हॉस्पिटल पहुंचते हुए नजर आ रहे हैं। इसी के साथ उनकी सेहत को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं। ताया जा रहा है कि वह इस वक्त डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में हैं। गुजरात के जामनगर में हुआ था जन्म 24 फरवरी, 1934 को गुजरात के जामनगर में पैदा हुईं कोकिलाबेन अंबानी को अंबानी परिवार की कुलमाता माना जाता है। उन्हें न केवल रिलायंस इंडस्ट्रीज के फाउंडर दिवंगत धीरूभाई अंबानी की पत्नी के रूप में, बल्कि तेजी से बदलते इस दौर में परिवार का मार्गदर्शन और समर्थन करने में उनकी भूमिका के लिए भी सम्मान दिया जाता है। परिवार को एकजुट रखने में भी उनकी भूमिका है। मुश्किल घड़ी में भी परिवार को संभाला साल 2002 में धीरूभाई अंबानी के निधन के बाद उनके दोनों बेटों मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी के रास्ते अलग हो गए। बिना वसीयत छोड़े धीरूभाई अंबानी दुनिया से चल बसे, तो दोनों भाइयों के रिश्ते में खटास आ गई। जबकि कभी ये दोनों एक-दूसरे जान छिड़कते थे। उस दौरान भी कोकिलाबेन ने स्थिति को संभाला और समाधान निकालते हुए कारोबार का बंटवारा किया। फिर बाद में चलकर दोनों भाइयों के रिश्ते फिर पटरी पर आने लगे। बंटवारे में मुकेश अंबानी के हिस्‍से में पेट्रोकेमिकल्‍स सहित तेल और गैस, रिफाइनिंग और टेक्‍सटाइल्‍स आए। वहीं अनिल अंबानी को फाइनेंशियल सर्विसेज, पावर, एंटरटेनमेंट और टेलीकॉम का कारोबार संभालने के लिए दिया गया। समाज सेवा से जुड़ी कोकिलाबेन कोकिलाबेन बड़े पैमाने पर समाज सेवा के कार्यों से भी जुड़ी हुई हैं। मुंबई स्थित कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल का नाम उनके सम्मान में उनके नाम पर रखा गया है, जो एक मल्टी-स्पेशलिटी हॉस्पिटल है। यह सामाजिक कल्याण के प्रति उनकी जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता का ही एक सबूत है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल-खेल महोत्सव में प्रदेश के खिलाड़ियों की उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की

पहले दिन ही जीते तीन पदक कृष्ण जाट, मयंक और मासूमा यादव को दी बधाई भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कश्मीर की प्रतिष्ठित डल झील में आयोजित देश के पहले 'खेलो इंडिया जल-खेल महोत्सव' के पहले दिन प्रदेश के खिलाड़ियों द्वारा तीन मैडल जीतने पर प्रसन्नता व्यक्त की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कयाकिंग-केनोइंग की पृथक-पृथक श्रेणियों में रजत पदक जीतने वाले कृष्ण जाट, कांस्य पदक जीतने वाले मयंक और मासूमा यादव को बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने तीन दिवसीय महोत्सव की आगामी प्रतियोगिताओं के लिए खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के खिलाड़ी जल-खेल महोत्सव में पदक जीतने का कीर्तिमान स्थापित करेंगे।  

सीएम डॉ. यादव ने शूटिंग चैंपियनशिप के पदक विजेताओं को दी बधाई, कहा- प्रदेश को आप पर गर्व

प्रदेश के शूटिंग स्टार्स को सीएम की बधाई, डॉ. यादव बोले- युवाओं की मेहनत से बढ़ा मध्यप्रदेश का मान मानसी रघुवंशी ने स्वर्ण और ज्योतिरादित्य सिंह सिसोदिया ने जीता कांस्य पदक भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कजाकिस्तान में जारी 16वीं एशियाई शूटिंग शॉटगन चैंपियनशिप में प्रदेश के खिलाड़ियों द्वारा स्वर्ण और कांस्य पदक जीतने पर प्रदेश के विजेता खिलाड़ियों को बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मानसी रघुवंशी और ज्योरादित्य सिंह ने वैश्विक मंच पर देश और प्रदेश को गौरवान्वित किया है। एशियाई शूटिंग शॉटगन चैंपियनशिप के अंतर्गत जूनियर महिला वर्ग में मानसी रघुवंशी ने स्वर्ण पदक और ज्योतिरादित्य सिंह सिसोदिया ने जूनियर पुरुष वर्ग में कांस्य पदक जीते। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि कठिन परिश्रम, अटूट समर्पण और एकनिष्ठ ध्येय के पर्याय प्रदेश के खिलाड़ियों की यह उपलब्धि असंख्य युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दोनों खिलाड़ियों को बधाई दी तथा उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है।

हाईकोर्ट में अफसरों ने मांगी माफी, संस्कृत विद्यालयों के छात्रों के लिए विशेष परीक्षा का आदेश

जबलपुर   मध्य प्रदेश में अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में उपस्थित हुए महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान भोपाल के संचालक प्रभात राज तिवारी एवं असिस्टेंट डायरेक्टर रेशमा लाल ने पूर्व में पारित आदेश का पालन नहीं करने पर बिना शर्त माफी मांगी। उन्होंने हाईकोर्ट में अभिवचन दिया कि संस्कृत विद्यालयों के जो विद्यार्थी परीक्षा में शामिल होने से वंचित हुए हैं, उनके लिए विशेष परीक्षा का आयोजन करवाया जाएगा। छात्रों को परीक्षा के लिए आवेदन करने 7 दिन के लिए पोर्टल खोला जाएगा। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने दोनों अधिकारियों के अधिकारियों के बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए 45 दिन के भीतर प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिये हैं। पुष्पांजली संस्कृत विद्यालय सिंगरौली और अन्य की तरफ से दायर की गई। अवमानना याचिका में कहा गया था कि महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान भोपाल ने पूर्व में एक आदेश जारी कर यह शर्त रखी थी कि उनके संस्थान से संबद्ध जिन विद्यालयों के छात्रों ने माशिमं या सीबीएससी से नौवीं या ग्यारहवीं परीक्षा उत्तीर्ण की है, उन्हें दसवीं और बारहवीं में परीक्षा में शामिल नहीं किया जाएगा। जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने उक्त आदेश को मनमाना मानते हुए निरस्त कर दिया था। हाईकोर्ट द्वारा आदेश निरस्त किये जाने के बावजूद भी संस्थान ने याचिकाकर्ता विद्यालयों के करीब 22 सौ विद्यार्थियों को परीक्षा में शामिल नहीं किया। जिसके कारण उक्त अवमानना याचिका दायर की गई थी। अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए विगत 14 अगस्त को हाईकोर्ट ने उक्त अधिकारियों को नोटिस जारी कर पूछा था कि नियम स्थगित करने के बावजूद याचिकाकर्ता संस्कृत विद्यालयों के विद्यार्थियों को परीक्षा में शामिल क्यों नहीं किया गया। पिछली सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने महर्षि पतंजली संस्कृत संस्थान भोपाल के दोनों अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से तलब किया था। याचिकाकर्ता विद्यालयों की तरफ से अधिवक्ता एनएस रूपराह और मुस्कान आनंद ने पक्ष रखा।  

भोपाल से नहीं मिली अनुमति, ऑफिस में फर्नीचर के बिना चटाई पर काम करने को मजबूर एजीएम

ग्वालियर  सरकारी दफ्तरों में समानता की बात अभी भी सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आती है ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं कि दलित वर्ग से आने वाला एक अधिकारी अपने दफ्तर में चटाई पर बैठ कर काम करने को मजबूर है. पदस्थापना के करीब डेढ़ साल बाद भी ग्वालियर में भवन विकास निगम के सहायक महाप्रबंधक सतीश कुमार डोंगरे को अपने दफ्तर में कुर्सी टेबल तक नहीं मिली है. जातिगत भेदभाव या अनदेखी! ग्वालियर में मध्य प्रदेश भवन विकास निगम के दफ्तर में कभी जाना हो और वहां जमीन पर बैठ कर काम करते एक अधिकारी दिखे तो चौंकियेगा नहीं, क्योंकि ये अधिकारी हैं यहां पदस्थ सहायक महाप्रबंधक सतीश कुमार डोंगरे. इनके अधिकारियों ने ही इनका हाल बेहाल कर रखा है, यह सरकारी अफसर अपने दफ्तर में अन्य अधिकारियों से सिफर जमीन पर बैठकर काम करते हैं. लेकिन ये कोई शौक नहीं है बल्कि ये उनके साथ हो रहे भेदभाव की मिसाल है. सतीश कुमार डोंगरे भी अपने वरिष्ठों के इस व्यवहार से दुखी हैं. चटाई पर बैठ काम निपटा रहे सहायक महाप्रबंधक ग्वालियर के गोविंदपुरी इलाके में स्थित मध्य प्रदेश भवन विकास निगम के दफ्तर में पहुंचा तो पता चला कि यह ऑफिस किराए के भवन में संचालित है. लेकिन चौंकाने वाली बात तब सामने आई जब इस दफ्तर में पदस्थ सहायक महाप्रबंधक अपने केबिन की जगह ऑफिस की जमीन पर चटाई बिछाए फाइलों का काम निपटाते दिखे और जब उनसे इसके पीछे का कारण पूछा तो जवाब बेहद हैरान करने वाला था. जातिगत भेदभाव और षड्यंत्र का आरोप भवन विकास निगम के सहायक महाप्रबंधक सतीश कुमार डोंगरे ने बताया कि "2023 में उनकी पदस्थापना बालाघाट जिले में थी लेकिन उनके उच्च अधिकारियों ने षड्यंत्र के तहत झूठा प्रकरण बनाकर पद से हटवा दिया लेकिन उन्होंने न्यायालय की शरण ली और जीत हासिल हुई. जिसके बाद नाखुश हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें 800 किलोमीटर दूर ग्वालियर में तबादला कर भेज दिया. इतना ही नहीं उन्होंने परेशान करने या उनके मन में जो जातिगत भेदभाव हैं उसके चलते यहां भी ठीक से काम नहीं करने दे रहे हैं." 'साथी अधिकारी को केबिन, मेरे लिए कुर्सी तक नहीं' सहायक महाप्रबंधक सतीश कुमार डोंगरे का कहना है कि, "इस दफ्तर में आए लगभग डेढ़ साल हो चुका है, यहां 3 अधिकारियों को पद के अनुरूप टेबल कुर्सी की पात्रता है. 2 को यह सुविधा उपलब्ध कराई गई है लेकिन आज तक उन्हें पद के अनुरूप पात्रता के हिसाब से बैठने के लिए एक्जीक्यूटिव कुर्सी और एग्जीक्यूटिव टेबल नहीं दिया गया है. जबकि उनके समकक्ष साथी अक्षय गुप्ता हैं जो सामान्य वर्ग से आते हैं उन्हें अटैच लेटबाथ के एक साथ केबिन दिया गया है जिसमें उन्हें पात्रता के हिसाब सभी सुविधाएं दी गई हैं. वहीं मैं अनुसूचित जाति वर्ग से आता हूं और मेरे पास बैठने के लिए कुछ नहीं है. मैं चटाई पर बैठ कर अपना ऑफिस का काम और फाइलें निपटाते हैं." सभी के लिए व्यवस्था, डोंगरे की उपेक्षा! सतीश कुमार डोंगरे का यह भी कहना है कि "उप महाप्रबंधक के द्वारा कई बार कुर्सी टेबल की डिमांड भेजी गई है क्योंकि दफ्तर में 8 अधिकारी कर्मचारी पदस्थ हैं लेकिन यहां सिर्फ 4 टेबल कुर्सी हैं. जिन पर सभी लोग कहीं ना कहीं बैठ जाते हैं लेकिन डोंगरे का आरोप है कि उनके साथ उपेक्षा होती है. उन्हें बैठने के लिए स्थान तक नहीं दिया गया है इसलिए उन्हें मजबूरी में नीचे ही बैठना पड़ता है." भोपाल में बैठे अधिकारियों पर लगाया है आरोप सतीश कुमार डोंगरे का मानना है कि "डिमांड भेजने के बाद भी भोपाल से मानव संसाधन विभाग द्वारा उसे पूरा नहीं किया जा रहा है. ऐसे में उन्हें लगता है कि या तो वहां बैठे अधिकारी उनके प्रति जातिगत भेदभाव रखते हैं या पूर्व से किसी बात को लेकर कुंठित हैं." उच्च अधिकारी बोले-कुर्सी टेबल के लिए नहीं है फंड इन हालातों में एक महत्वपूर्ण सरकारी ऑफिस में काम कर रहे सतीश डोंगरे पिछले लगभग डेढ़ साल से इस तरह से अपमान का घूंट पी रहे हैं. सतीश कुमार डोंगरे कहते हैं कि "जब लोग दफ्तर में आते हैं तो उन्हें जमीन पर बैठा देखते हैं तो वे खुद को उपेक्षित महसूस करते हैं. इस मामले में मध्य प्रदेश भवन विकास निगम ग्वालियर के अतिरिक्त महाप्रबंधक अच्छेलाल अहिरवार से बात की गई तो उनका कहना था कि "कुर्सी टेबल के लिए भोपाल डिमांड भेज दी है जब उसके लिए फंड आएगा तब ही फर्नीचर उपलब्ध करा पाएंगे." इन हालातों से ये बात तो साफ है कि, पढ़ाई लिखाई कर अपनी मेहनत से अधिकारी का पद पाने वाले 2 अफसरों को अलग-अलग व्यवस्थाए दी जाएं तो यह भेदभाव का संकेत है लेकिन ताज्जुब इस बात का है कि जिस प्रदेश में विकास के प्रोजेक्ट्स के नाम पर हजारों करोड़ों रुपये सेंक्शन हो जाते हैं वहां 18 महीने से एक अधिकारी को कुर्सी टेबल के लिए फंड नहीं है. 

ऐतिहासिक असाकुसा मंदिर पहुंचे सीएम साय, प्रदेशवासियों के लिए की मंगलकामना

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज जापान की राजधानी टोक्यो में ऐतिहासिक असाकुसा मंदिर का दर्शन किया। सीएम साय ने ट्वीट कर कहा कि आज टोक्यो में ऐतिहासिक असाकुसा मंदिर दर्शन का अवसर मिला। यह टोक्यो का सबसे प्राचीन और प्रतिष्ठित मंदिर है, जो शांति और सामर्थ्य का प्रतीक है। मंदिर दर्शन कर छत्तीसगढ़ की 3 करोड़ जनता की खुशहाली और समृद्धि की कामना की, जिससे हमारा राज्य शांति और सामर्थ्य से परिपूर्ण बन सके। बता दें कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल जापान और दक्षिण कोरिया के आधिकारिक दौरे पर गया है। इस यात्रा का उद्देश्य छत्तीसगढ़ को वैश्विक निवेश मानचित्र पर स्थापित करना है। टोक्यो (22–24 अगस्त) में प्रतिनिधिमंडल जापानी उद्योगपतियों, व्यापार संघों और निवेशकों के साथ इन्वेस्टर कनेक्ट सेशंस एवं व्यावसायिक बैठकों में भाग लेगा। इसके बाद ओसाका (25–26 अगस्त) में मुख्यमंत्री साय वर्ल्ड एक्सपो 2025 में शामिल होंगे और छत्तीसगढ़ में निवेश अवसरों पर विभिन्न हितधारकों से चर्चा करेंगे। दौरे का अंतिम चरण सियोल (27–29 अगस्त) में होगा, जहां निवेशक गोलमेज बैठकों, कोरिया की शीर्ष कंपनियों और व्यापार संघों से मुलाकात तथा सेक्टर-विशेष संवाद आयोजित किए जाएंगे। वर्ल्ड एक्सपो 2025 में छत्तीसगढ़ पर फोकस ओसाका में आयोजित वर्ल्ड एक्सपो 2025 में भारत मंडपम अंतर्गत छत्तीसगढ़ पवेलियन के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध विरासत, नवाचार की संस्कृति और उभरते भविष्य-उन्मुख क्षेत्रों को वैश्विक दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। पवेलियन को राज्य की अनूठी पहचान को दर्शाने के उद्देश्य से डिज़ाइन किया गया है। इसमें औद्योगिक विकास, नवीकरणीय ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी और सतत विकास जैसे प्रमुख फोकस क्षेत्रों को शामिल किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि यह प्रदर्शनी पूरी दुनिया के लिए छत्तीसगढ़ के परिवर्तन और भविष्य की आकांक्षाओं की झलक प्रस्तुत करेगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जापान और कोरिया के उद्योगपतियों, व्यापार संघों और वैश्विक निवेशकों से सीधे संवाद करेंगे, जिसका उद्देश्य दीर्घकालिक साझेदारियां स्थापित करना, नए व्यापारिक चैनल खोलना तथा प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में ज्ञान आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। विकास और निवेश को नई गति विश्व के सबसे बड़े नवाचार और सहयोग प्लेटफार्मों में से एक में भाग लेकर मुख्यमंत्री साय इस अवसर का उपयोग इस्पात, खनन, स्वच्छ ऊर्जा और स्टार्टअप्स जैसे क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने के लिए करेंगे। यह मिशन राज्य की सक्रिय पहल को दर्शाता है, जिसका उद्देश्य छत्तीसगढ़ को वैश्विक निवेशकों के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बनाना और आर्थिक विकास के नए अवसरों को खोलना है। मुख्यमंत्री साय के साथ मुख्य सचिव अमिताभ जैन, प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, सचिव रजत कुमार, सचिव राहुल भगत, सीएसआईडीसी के एमडी विश्वेश कुमार सहित कई अधिकारी इस दौरे में शामिल हैं।

मानवता को सलाम: इंदौर में देह दान करने वाले को पहली बार गार्ड ऑफ ऑनर

इंदौर  इंदौर अंगदान में देश में पहले स्थान पर है। कई लोग देहदान भी इंदौर में करते है। शुक्रवार को पहला मौका था जब 80 वर्षीय अशोक वर्मा की इच्छा अनुसार उनकी देह एक निजी मेडिकल काॅलेज को सौंपी गई। उससे पहले पुलिस जवानों ने पार्थिव देह को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। अभी तक गार्ड ऑफ ऑनर शहीदों व स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को दिया जाता है। मध्य प्रदेश सरकार ने आदेश जारी किए है कि जो भी व्यक्ति देह दान करता है। उनकी मृत्यु होने पर गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा। इस आदेश के बाद इंदौर में पहला देहदान सम्पन्न हुआ।जवाहर मार्ग निवासी अशोक वर्मा का गुरुवार रात निधन हो गया था। जब वे जीवित थे तो परिजनों से कहा था कि मृत्यु होने पर अंत्येष्टी करने के बजाए उनका देहदान किया जाए। परिजन ने देहदान, नेत्रदान एवं त्वचादान के लिए दधीचि मिशन से संपर्क किया लेकिन तकनीकी कारण से नेत्रदान एवं त्वचादान संभव नहीं हो पाया। शुक्रवार सुबह उनकी अंतिम यात्रा निकली और अरविंदो मेडिकल काॅलेज पहुंची। यहां गार्ड ऑफ ऑनर के लिए पुुलिस जवान पहले से मौजूद थे। शस्त्रों से श्री वर्मा को सलामी दी गई।इसके बाद देह काॅलेज प्रबंधन को सौप दी गई। अंगदान समिति के नंदकिशोर व्यास ने बताया कि श्री वर्मा ने कुछ वर्षों पहले देहदान की स्वीकृति दी थी। उनकी राजवाड़ा पर मेडिकल शाॅप है। वहां भी उन्होंने कई लोगों से देहदान के लिए संकल्प पत्र भरवाए थे। उनके एक बेटे का युवा अवस्था में निधन हो गया था। बेटे का भी उन्होंने देहदान किया था। इसके बाद पुत्रवधू का उन्होंने पुनर्विवाह भी कराया था।