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दिल दहला देने वाली घटना: पिता को दिखाई बेटी से मारपीट का वीडियो, मौत के बाद भाई की आत्मदाह की कोशिश

कानपुर  कानपुर में एक विवाहिता के साथ ससुरालियों ने जुल्म की इंतहा कर दी। विवाहिता के पिता को कॉल कर बेटी से मारपीट का लाइव वीडियो दिखाया। पिता से यह भी कहा कि बेटी को बचा सको तो बचा लो। परेशान पिता तत्काल बेटी के ससुराल पहुंचे तो देर हो चुकी थी। बेटी का शव फांसी के फंदे पर लटक रहा था। पिता और परिजनों ने ससुरालियों पर हत्या कर शव को लटकाने का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया। केशवपुरम के अशोक वाटिका चौराहे के पास शव रखकर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान बहन की मौत से आहत भाई ने आत्मदाह का भी प्रयास किया। मौके पर मौजूद एडीसीपी वेस्ट ने परिजनों को समझाने का प्रयास किया। इसके बाद भी घंटों लोग सड़क पर ही जमे रहे। पनकी थाने में तैनात होमगार्ड रामप्रसाद ने दो साल पहले अपनी बेटी पूजा की शादी बारासिरोही निवासी हिमांशु तिवारी के साथ की थी। शादी के बाद से ही प्लॉट और बुलेट की मांग को लेकर ससुरालियों ने पूजा को प्रताड़ित कर रहे थे। शुक्रवार को पूजा का शव संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटका मिला। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। विवाहिता के परिजनों ने ससुरालियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाकर शनिवार को केशवपुरम के अशोक वाटिका चौराहे पर शव रखकर सड़क जाम कर दिया। इस दौरान ससुरालियों पर कार्रवाई न होने और बहन की मौत से आहत भाई ने आत्मदाह का प्रयास भी किया। एडीसीपी वेस्ट कपिल देव सिंह ने बताया कि ससुरालियों के खिलाफ परिजनों की तहरीर के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। मौके पर परिजनों को समझा-बुझाकर शांत करने का प्रयास किया जा रहा है। विवाहिता के पिता ने बताया कि शुक्रवार को ससुरालियों ने उन्हें कॉल कर बेटी के साथ मारपीट का लाइव वीडियो दिखाया था। साथ ही धमकी दी थी कि इसे बचा सको तो बचा लो। आनन-फानन में घर पहुंचे पिता को उनकी बेटी फंदे पर लटकी मिली। परिजनों का आरोप है कि उनकी बेटी की हत्या कर उसे लटकाया गया है।  

एशिया कप से पहले BCCI की सर्जरी, 15 साल पुराने सपोर्ट स्टाफ को दिखाया बाहर का रास्ता

नई दिल्ली  भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) का सपोर्ट स्टाफ पर फिर चाबुक चला है। बीसीसीआई ने एशिया कप 2025 से पहले टीम इंडिया के 15 साल पुराने सपोर्ट स्टाफ मेंबर राजीव कुमार को निकाल दिया है। वह टीम के मालिशिए थे। राजीव इंग्लैंड दौरे पर टीम के साथ गए थे लेकिन अब उन्हें नया कॉन्ट्रैक्ट नहीं दिया जाएगा। एशिया कप 9 सितंबर से यूएई में शुरू होगा। गौतम गंभीर के हेड कोच बनने के बाद से बीसीसीआई ने अभिषेक नायर, अरुण कनाडे और सोहम देसाई सहित कई सहयोगी स्टाफ सदस्यों को हटाया है। हालांकि, उपयुक्त रिप्लेसमेंट नहीं मिलने के कारण बोर्ड को फील्डिंग कोच टी दिलीप को फिर से नियुक्त करना पड़ा। मालिशिए राजीव कुमार खिलाड़ियों के साथ बेहतरीन तालमेल के लिए जाने जाते थे, खासकर खासकर तेज गेंदबाजों के साथ। ऐसा माना जा रहा है कि भारतीय टीम के थिंक टैंक के एक प्रभावशाली सदस्य को लगता ​​है कि सपोर्ट स्टाफ के टीम के साथ बहुत लंबे समय तक बने रहने से टीम को मिलने वाला लाभ कम होता है। एक सोच यह भी है कि लंबे समय तक सहयोगी स्टाफ के साथ रहने से सभी खिलाड़ियों के साथ एक निश्चित सहजता का स्तर बढ़ जाता है और यह टीम के विकास के लिए हानिकारक है। मैचों के दौरान राजीव अक्सर बाउंड्री रोप पर गर्मजोशी से मुस्कुराते हुए चलते नजर आते थे। खिलाड़ी अपनी अकड़ती और दर्द भरी मांसपेशियों को आराम दिलाने के लिए सबसे पहले उन्हीं की ओर रुख करते थे। टीम प्रबंधन की सिफारिश के बाद उनकी जगह एक नए मालिशिया को लाया गया है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बोर्ड के एक सूत्र ने बताया, "बीसीसीआई ने राजीव की सेवाएं बंद करने का फैसला किया है। भारतीय टीम के लिए एक मालिशिए की नियुक्ति की जा चुकी है, जिसकी सिफारिश टीम प्रबंधन ने पहले ही कर दी थी।" बता दें कि बीसीसीआई ने हाल ही में एशिया कप के लिए भारतीय टीम की घोषणा की है।स्टार बल्लेबाज श्रेयस अय्यर को शानदार फॉर्म के बावजूद टीम में शामिल नहीं किया गया, जिसने फैंस और क्रिकेट एक्सपर्ट को हैरान कर दिया। शुभमन गिल की भारतीय टी20 टीम में वापसी हुई। उन्हें उपकप्तान बनाया गया है। एशिया कप 2025 के लिए भारतीय स्क्वॉड: सूर्यकुमार यादव (कप्तान), शुबमन गिल, अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा, हार्दिक पंड्या, शिवम दुबे, जितेश शर्मा, अक्षर पटेल, जसप्रित बुमरा, वरुण चक्रवर्ती, अर्शदीप सिंह, कुलदीप यादव, संजू सैमसन, हर्षित राणा, रिंकू सिंह। रिजर्व: प्रसिद्ध कृष्णा, वॉशिंगटन सुंदर, रियान पराग, ध्रुव जुरेल, यशस्वी जायसवाल

अब सहकारी बैंकों में भी क्यूआर कोड से होगा भुगतान, किसानों को खाद वितरण में बढ़ोतरी

लखनऊ  मंत्री जेपीएस राठौर ने सहकारी बैंकों में क्यूआर कोड से भुगतान का शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि इस बार पहले से अधिक खाद बांटी गई है। किसान सहकारी समितियों से खाद ले रहे हैं। राजधानी लखनऊ में शनिवार को सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर ने सहकारी बैंकों में क्यूआर कोड के जरिये भुगतान का शुभारंभ किया। कार्यक्रम महात्मा गांधी मार्ग स्थित यूपी को-आपरेटिव बैंक लिमिटेड में हुआ। इस मौके पर मंत्री ने किसानों को हो रही खाद समस्या से लेकर विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किसान सहकारी समिति पर खाद ले रहे हैं। इस बार पहले से ज्यादा खाद बांटी गई है।  मंत्री ने आगे कहा कि समितियों की मरम्मत भी कराई जा रही है। अब तक 980 सहकारी समिति की मरम्मत की गई। सपा शासनकाल में बंद समिति को चालू किया गया है। सभी को 10 लाख की मदद की गई है। हर जगह इंटरनेट की सुविधा दी जा रही है। बिजली के लिए हम लोग सोलर लाइट लगवा रहे हैं। सभी बंद समितियां खोली जा रही हैं। दूसरी जगह से भी मैन पवार का इंतजाम किया जा रहा है। 

मुहांसे हटाने का ये उपाय पड़ सकता है भारी, चेहरे को पहुंचा सकता है नुकसान

नई द‍िल्‍ली चेहरे पर पिम्पल निकलना किसी को भी परेशान कर सकता है। खासकर तब जब किसी खास मौके या मीटिंग से पहले ये मुहांसों की तरह चेहरे पर उभर जाएं। ऐसे समय में बहुत से लोग खुद से इन्हें दबाकर या फोड़कर खत्म करने की कोशिश करने लगते हैं। शायद आपके साथ भी ऐसा हुआ होगा कि शीशे में चेहरा देखते ही आपका ध्यान सीधा पिम्पल पर गया हो और मन किया हो कि इसे तुरंत हटा दिया जाए। ये एक आम समस्या है, जो उम्र, हार्मोनल बदलाव, खानपान और लाइफस्टाइल के कारण किसी को भी हो सकती है। कभी ये छोटे-छोटे दानों की तरह दिखते हैं तो कभी सूजन के साथ चेहरे पर न‍िकल आते हैं। तब लोग इन्हें हाथ से छूने या फोड़ने की गलती कर बैठते हैं। हालांकि ये कुछ ही दिनों में अपने आप भी ठीक हो जाते हैं। लेक‍िन अगर ब‍िना सोचे समझे आपने इन्‍हें फोड़ने की काेश‍िश की तो इसके गंभीर नुकसान आपको झेलने पड़ सकते हैं। आज हम आपको अपने इस लेख में इससे होने वाले नुकसानों के बारे में बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं व‍िस्‍तार से – इन्‍फेक्‍शन का बढ़ जाता है खतरा आपको बता दें क‍ि अगर आप प‍िम्‍पल को फोड़ने की गलती करते हैं तो इससे इन्‍फेक्‍शन का खतरा बढ़ जाता है। दरअसल, हमारे हाथों और नाखूनों में न जाने क‍ितने बैक्टीरिया होते हैं, जाे घाव में जा सकते हैं। इससे पिम्‍पल और भी बड़ा हो सकता है। चेहरे पर पड़ सकते हैं न‍िशान इन प‍िम्‍पल्‍स को फोड़ने से आपके चेहरे पर निशान भी पड़ सकते हैं। इससे आपका चेहरे का लुक भी ब‍िगड़ सकता है। इसे फोड़ने से स्‍क‍िन के नीचे की ट‍िशू को नुकसान पहुंचता है। इस कारण सूजन की समस्‍या हो सकती है। हो सकता है ब्रेकआउट अगर आप बार-बार प‍िम्‍पल्‍स को फोड़ते हैं ताे इसमें से जो ल‍िक्‍व‍िड न‍िकलता है, वो चेहरे पर कहीं भी लग सकता है। ऐसे में एक मुंहासे को फोड़ने के चक्‍कर में चेहरे पर और भी प‍िम्‍पल्‍स निकल सकते हैं। देर से भरते हैं घाव प‍िम्‍पल्‍स अपने आप से ही ठीक होता है। ऐसे में अगर आप इसे बार-बार छूते हैं या फ‍िर फोड़ने की कोशि‍श करते हैं ताे इससे हील‍िंग प्रॉसेस धीमा हो सकता है। इसे ठीक होने में ज्‍यादा समय लगेगा और सूजन की समस्या भी बढ़ सकती है। क्‍या करें?     गुनगुने पानी से चेहरे को साफ करें।     चेहरे को छूने से पहले अपने हाथों को साफ करना न भूलें।     ऐसे प्रोडक्‍ट्रस का इस्तेमाल करें जो पोर्स को क्लॉग नहीं करते हैं।     कुछ घरेलू नुस्‍खे ट्राई करें।     द‍िक्‍कतें बढ़ने पर डॉक्‍टर से सलाह लें।  

वैध पते के अभाव में नोशनल नंबर से बने थे मतदाता, शिकायत साबित हुई गलत

उदयपुर उदयपुर जिले के गोगुंदा विधानसभा क्षेत्र के बड़गांव से आई मतदाता सूची से जुड़ी शिकायत ने पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना दिया। जनसुनवाई के दौरान बड़गांव पंचायत प्रशासक सहित कुछ लोगों ने जिला कलेक्टर नमित मेहता को जनसुनवाई में बताया कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर फर्जी नाम दर्ज किए गए हैं। शिकायत में कहा गया कि एक ही मकान नंबर पर 700 से अधिक मतदाताओं के नाम अंकित हैं। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर मेहता ने गोगुंदा के उपखंड अधिकारी एवं मतदाता पंजीकरण प्राधिकारी (ईआरओ) को त्वरित जांच के आदेश दिए। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि शिकायत तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक थी। दरअसल जांच में यह स्पष्ट हुआ कि मतदाता सूची में दर्ज अधिकांश लोग आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के हैं, जो उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) की जमीन पर अतिक्रमण करके बसे हुए हैं। उन्होंने अवैध रूप से कच्चे-पक्के मकान बना रखे हैं। चूंकि इन परिवारों के पास कोई वैध घर नंबर या अधिकृत पता नहीं है, इसलिए उन्हें नोशनल नंबर आवंटित कर मतदाता सूची में शामिल किया गया। यही कारण है कि सूची में एक ही मकान नंबर के अंतर्गत सैकड़ों नाम दर्ज दिखाई दिए, जिससे यह संदेह पैदा हुआ कि सूची में बोगस मतदाता जोड़े गए हैं। जिला कलेक्टर नमित मेहता ने बताया कि ईआरओ स्तर की जांच में यह साफ हो गया कि मतदाता सूची में फर्जी या बोगस नाम दर्ज करने का आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। फिर भी एहतियातन विस्तृत जांच कराई जा रही है ताकि किसी प्रकार की त्रुटि न रह जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में प्रत्येक नागरिक को मतदान का अधिकार सुनिश्चित करना जरूरी है। स्थायी पता न होने पर नोशनल नंबर के आधार पर नाम जोड़े जाते हैं, ताकि कोई भी नागरिक मतदान अधिकार से वंचित न हो। राजस्थान में शहरी क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर बसे हजारों परिवारों को किस तरह से व्यवस्थित पते और पहचान से जोड़ा जाए इस बात को लेकर विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक इनके पुनर्वास और वैध आवास की स्थायी व्यवस्था नहीं होती, तब तक प्रशासन द्वारा नोशनल नंबर प्रणाली ही व्यावहारिक विकल्प है। बहरहाल बड़गांव में एक ही मकान नंबर पर 700 मतदाताओं के दर्ज होने की शिकायत मात्र अफवाह साबित हुई। जिला प्रशासन की माने तो सभी वास्तविक लोग हैं, जिन्हें वैध मकान नंबर न होने के कारण नोशनल नंबर से सूचीबद्ध किया गया है। क्या है नोशनल नंबर? यह चुनाव आयोग की एक व्यवस्था है कि जब किसी मतदाता का स्थायी और वैध पता, मकान नंबर या वार्ड की जानकारी उपलब्ध नहीं होती या दस्तावेजों में पूरा विवरण नहीं होता, तब चुनाव आयोग उस मतदाता का नाम सूची में दर्ज करने के लिए एक अस्थायी/ काल्पनिक  नंबर अलॉट कर देता है। इसे ही नोशनल नंबर कहा जाता है।

वेटरनरी UG काउंसलिंग: NEET में 144 नंबर पाने वाले अभ्यर्थियों को भी मिलेगा प्रवेश का अवसर

 जबलपुर  वेटरनरी विश्वविद्यालय ने बैचलर आफ वेटरनरी साइंस यानी यूजी की सीटों पर प्रवेश देने के लिए पहली ऑनलाइन काउंसलिंग शुरू कर दी है। बुधवार से शुरू हुई काउंसलिंग में इस बार नीट में 720 नंबर में से 144 नंबर पाने वाले सामान्य वर्ग के छात्र और छात्राओं को इस काउंसलिंग में भाग लेने का अवसर मिलेगा। ओबीसी में 127 नंबर और एसटी-एससी में 113 नंबर कटआफ रखा है। दरअसल, अभी तक मेरिट के आधार पर कटआफ नंबर अधिक रखा जाता था, लेकिन नीट के जरिए परीक्षा होने के बाद वेटरनरी कौंसिल आफ इंडिया ने सभी वेटरनरी विश्वविद्यालयों और कालेजों को नीट के न्यूनतम आहर्ता मान्य करने को कहा है। इसके बाद वेटरनरी विश्वविद्यालय ने इस बार यूजी की ऑनलाइन काउंसलिंग में कटआफ में नीट की न्यूनतम आहर्ता को रखा है। वहीं मेडिकल की पहली काउंसलिंग का इंतजार कर रहे वेटरनरी विश्वविद्यालय ने भी एमपी आनलाइन के जरिए अपनी यूजी कोर्स की काउंसलिंग शुरू तो कर दी है, लेकिन इस बार भी सेशन सितंबर के अंतिम सप्ताह या फिर अक्टूबर से ही शुरू हो सकेगा। पहले मध्य प्रदेश, फिर दूसरे राज्यों को अवसर पहले चरण की ऑनलाइन काउंसलिंग में एमपी के विद्यार्थियों को फ्री सीट की काउंसलिंग में शामिल होने का अवसर मिलेगा। इसके बाद जो सीट खाली होगी, उसमें दूसरे राज्यों के छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा। वहीं पैमेंट सीट पर मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों के विद्यार्थियों को लिए ओपन रखी गई है। यूजी काउंसलिंग का शेड्यूल     20 से 26 अगस्त तक रजिस्ट्रेशन होगा।     25 अगस्त को सीट आवंटित की जाएंगी।     27 अगस्त को मेरिट के आधार पर लिस्ट जारी होगी।     28 से 31 अगस्त तक च्वाइंस फीलिंग का अवसर होगा।     2 सितंबर को फाइनल रिजल्ट आएगी     3 से 8 सितंबर तक कालेज में दस्तावेजों की जांच करानी होगी। 8 सितंबर तक प्रवेश दिया जाएगा     वेटरनरी की यूजी सीटों पर ऑनलाइन काउंसलिंग शुरू कर दी गई है। इस बार हमने नीट की न्यूनतम आहर्ता को मेरिट लिस्ट बनाकर जारी किया है। काउंसलिंग में प्रवेश लेने वाले छात्रों को आठ सितंबर तक प्रवेश दे दिया जाएगा। – प्रो.मनदीप शर्मा, कुलपति, वेटरनरी विवि जबलपुर।  

चलती ट्रेन में वारदात! कुशीनगर एक्सप्रेस के टॉयलेट से बरामद हुई मासूम की लाश

मुंबई मुंबई-कुशीनगर एक्सप्रेस के AC कोच के बाथरूम में कूड़ेदान के अंदर पांच साल की बच्ची का शव मिला है. जब इस बारे में जानकारी हुई तो ट्रेन में सवार यात्रियों में हड़कंप मच गया. आनन-फानन में सूचना रेलवे अफसरों को दी गई. अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे और जायजा लिया. पुलिस ने ट्रेन के बाथरूम से बच्ची का शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है. इस पूरे मामले की जांच पड़ताल की जा रही है. जानकारी के अनुसार, बच्ची का शव LTT कुशी नगर एक्सप्रेस गाड़ी संख्या 22537 के AC कोच B2 के बाथरूम में कूड़ेदान के अंदर मिला है. बच्ची की उम्र करीब पांच साल बताई जा रही है. दरअसल, ट्रेन के AC कोच B2 के बाथरूम में कूड़ेदान रखा था. इसमें बच्ची का शव था. जब लोगों ने देखा तो वे सन्न रह गए. तुरंत इस मामले की जानकारी रेलवे पुलिस व प्रशासन को दी गई. इस मामले की खबर मिलते ही रेलवे के अफसर व पुलिस मौके पर पहुंचे और जायजा लिया. इस बारे में जब ट्रेन में सवार यात्रियों को पता चला तो सनसनी फैल गई. पुलिस ने ट्रेन के बाथरूम से बच्ची का शव बरामद किया और पोस्टमार्टम के लिए भेजा. शुरुआती जांच में पता चला कि बच्ची को पहले कहीं से किडनैप किया गया था. बच्ची का अपहरण उसके ही रिश्तेदार ने किया था. पुलिस ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच शुरू कर दी है. शुरुआती सुरागों से यह पता चला है कि बच्ची का मौसेरे भाई इस किडनैप में शामिल था. पुलिस ने घटनास्थल पर संबंधित लोगों के बयान दर्ज कर पूरे मामले की पड़ताल शुरू कर दी है. पुलिस का कहना है कि अपहरण और हत्या के दोनों पहलुओं पर पूरी जांच की जा रही है.

हाईकोर्ट का स्पष्ट आदेश, नैतिकता पर नहीं बल्कि कानून पर होगा फैसला

जबलपुर  हाईकोर्ट में दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (हेबियस कॉर्पस) के एक मामले में हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई करते हुए अपने आदेश में कहा कि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि वयस्क युवती को शादीशुदा व्यक्ति के साथ स्वेच्छा से रहने से रोका जा सके. नैतिकता के संबंध में न्यायालय कोई निर्णय नहीं दे सकता है. वयस्क होने के कारण युवती को यह अधिकार है कि उसे किसके साथ रहना है और इस संबंध में वह स्वयं निर्णय ले सकती है. बेटी के घर छोड़ने पर दायर की थी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका नरसिंहपुर निवासी पिता की तरफ से हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई थी. जिसमें कहा गया था कि उसकी बेटी को अनावेदकों ने बंदी बना रखा है. याचिका की सुनवाई के दौरान नरसिंहपुर पुलिस ने युवती को कोर्ट में पेश किया. पेशी के दौरान युवती ने युगलपीठ को बताया कि वह वयस्क है और वह उसी व्यक्ति के साथ रहना चाहती है. इसके कारण उसने स्वेच्छा से माता-पिता का घर छोड़कर उस व्यक्ति के साथ रहने चली गई थी. शादीशुदा व्यक्ति के साथ रह रही युवती याचिकाकर्ता की तरफ से हाईकोर्ट में तर्क दिया गया कि जिस व्यक्ति के साथ युवती रह रही है वह शादीशुदा है. इसलिए युवती को माता-पिता के साथ रहना चाहिए. इस संबंध में पुलिस ने कोर्ट को बताया कि जिस व्यक्ति के साथ युवती रहना चाहती है वह अपनी पहली पत्नी को छोड़ चुका है और तलाक लेने का प्रस्ताव रखा है. 'वयस्क युवती को निर्णय लेने का है अधिकार' हाईकोर्ट जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि "वयस्क होने के कारण उसे यह अधिकार है कि वह निर्णय ले सकती है कि किस व्यक्ति के साथ उसे रहना है. उसके लिए क्या सही है और क्या गलत. वह यह खुद देख सकती है. ऐसा कोई कानून नहीं है कि उसे विवाहित व्यक्ति के साथ रहने से रोका जा सके. लेकिन यदि वह शादीशुदा व्यक्ति से विवाह करती तो यह अपराध की श्रेणी में आता है. ऐसी स्थिति में शादीशुदा व्यक्ति की पत्नी दूसरी शादी के संबंध में प्रकरण दर्ज करवा सकती है." हाईकोर्ट ने डीएसपी को दिए निर्देश युगलपीठ ने कहा कि युवती ने अपने माता-पिता के साथ रहने से इंकार कर दिया है. ऐसे में युगलपीठ ने डीएसपी गोटेगांव को निर्देशित किया कि वह कॉर्पस से इस संबंध में अंडरटेकिंग ले कि वह अपनी मर्जी से उस व्यक्ति के साथ रहना चाहती है. पुलिस संबंधित व्यक्ति से भी कॉर्पस को अपने साथ रखने के संबंध में अंटरटेकिंग ले. युगलपीठ ने अपने आदेश के साथ याचिका का निराकरण कर दिया.

उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा संघ के 42वें अधिवेशन में सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

सुशासन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए न्यायिक व्यवस्था सुगम और त्वरित होना जरूरी- सीएम योगी – उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा संघ के 42वें अधिवेशन में सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ – सीएम योगी ने न्यायिक सेवा संघ के लिए 50 करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड देने की घोषणा की – न्यायपालिका के सुदृढ़ीकरण के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की प्रतिबद्ध है- मुख्यमंत्री – हमारी गति जितनी तेज होगी, आम जनमानस में विश्वास उतना ही मजबूत होगा- मुख्यमंत्री – विकसित उत्तर प्रदेश का सपना तभी साकार होगा, जब न्यायिक व्यवस्था और मजबूत हो- मुख्यमंत्री – समय पर सस्ता और सुगम न्याय मिले, सरकार हर स्तर पर सहयोग करने को तैयार है- सीएम योगी  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सुशासन का लक्ष्य तभी प्राप्त हो सकता है, जब हमारी न्यायिक व्यवस्था सुगम, त्वरित और सुलभ हो। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए विकसित उत्तर प्रदेश का निर्माण आवश्यक है और इसके लिए एक मजबूत और त्वरित न्यायिक व्यवस्था अनिवार्य है। सीएम योगी शनिवार को उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा संघ के 42वें अधिवेशन को संबोधित कर रहे थे। लखनऊ में आयोजित इस भव्य सम्मेलन में सीएम योगी ने न्यायिक अधिकारियों को संबोधित करते हुए न्यायपालिका को सुशासन का रक्षक बताया और कहा कि इसके सुदृढ़ीकरण के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर सीएम ने संघ की स्मारिका का अनावरण भी किया। इस दौरान सीएम योगी ने न्यायिक सेवा संघ के लिए 50 करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड देने की घोषणा भी की। न्यायिक अधिकारियों का महाकुंभ एकता और दक्षता का प्रतीक- सीएम योगी सीएम योगी ने उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा संघ के 42वें अधिवेशन को 'न्यायिक अधिकारियों का महाकुंभ' बताते हुए कहा कि यह आयोजन न केवल एकता और परस्पर सहयोग का प्रतीक है, बल्कि व्यावसायिक दक्षता और बेस्ट प्रैक्टिस को बढ़ावा देने का भी मंच है। सीएम ने इस अवसर पर सभी उपस्थित न्यायमूर्तियों, अवकाश प्राप्त न्यायमूर्तियों और प्रदेश भर से आए न्यायिक अधिकारियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह अधिवेशन ऐसे समय में आयोजित हुआ, जब भारत अपने संविधान के अमृत महोत्सव वर्ष में प्रवेश कर चुका है। सीएम ने कहा कि संविधान की मूल थीम ‘न्याय, स्वतंत्रता और बंधुता’ इस आयोजन का आधार है। उन्होंने प्रयागराज के महाकुंभ का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह महाकुंभ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है, उसी तरह यह अधिवेशन न्यायिक अधिकारियों की एकता और उनकी पेशेवर दक्षता को प्रदर्शित करता है। देश का सबसे बड़ा उच्च न्यायालय उत्तर प्रदेश का गौरव है- मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने गर्व के साथ कहा कि उत्तर प्रदेश में देश का सबसे बड़ा उच्च न्यायालय मौजूद है। प्रयागराज में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ और लखनऊ में इसकी बेंच प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। यह न केवल हमारे लिए, बल्कि देश और दुनिया के सामने उत्तर प्रदेश की छवि को विश्वास के रूप में प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि 102 वर्षों के अपने इस इतिहास में उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा संघ ने अनेक उपलब्धियां हासिल की है और मुझे विश्वास है कि यहां मौजूद सभी न्यायिक अधिकारी न केवल न्यायिक सेवा से जुड़े हुए हैं बल्कि, परस्पर सहयोग, एकता और व्यावसायिक दक्षता का भी एक अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करने में सफल होंगे। एक वर्ष में 72 लाख मामलों का निस्तारण बड़ी उपलब्धि है- सीएम योगी  सीएम योगी ने जोर देकर कहा कि सुशासन का लक्ष्य तभी प्राप्त हो सकता है, जब न्यायिक व्यवस्था समयबद्ध, सस्ती और सुलभ हो। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में जनपद और ट्रायल कोर्ट में 72 लाख मामलों का निस्तारण हुआ, जो एक बड़ी उपलब्धि है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अभी भी 1.15 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं, जो एक चुनौती है। सीएम योगी ने कहा कि हमारी गति जितनी तेज होगी, आम जनमानस में विश्वास उतना ही मजबूत होगा। इसके लिए सरकार हर स्तर पर सहयोग करने को तैयार है। सीएम ने नए आपराधिक कानूनों, भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के लागू होने का उल्लेख किया, जो 1 जुलाई 2024 से प्रभावी हुए। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक आशंकाओं के बावजूद, न्यायिक अधिकारियों ने इन्हें तत्परता से लागू किया, जिससे ये कानून दंड पर आधारित न होकर न्याय की सुदृढ़ व्यवस्था पर केंद्रित साबित हुए। सीएम योगी ने विश्वास जताते हुए कहा कि ये कानून भारत की न्यायपालिका और लोकतंत्र को और मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होंगे। सीएम योगी ने न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए किए गए प्रयासों का विस्तार से किया उल्लेख  मुख्यमंत्री ने योगी सरकार द्वारा न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए किए गए प्रयासों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि सरकार ने उच्च न्यायालय के लिए आवासीय और अन्य सुविधाओं के लिए व्यापक धनराशि स्वीकृत की है। इसमें प्रयागराज में उच्च न्यायालय के न्यायमूर्तियों के आवास के लिए निर्माण 62.41 करोड़ रुपये, लखनऊ बेंच के लिए 117 करोड़ रुपये। उच्च न्यायालय के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए: 99 करोड़ रुपये। प्रयागराज में 896 आवासीय इकाइयों के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति। वाणिज्यिक खंड के निर्माण के लिए 112.06 करोड़ रुपये। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के हेरिटेज भवन के रखरखाव के लिए: 44.91 करोड़ रुपये की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति प्रमुख हैं। इसके अलावा, सरकार ने 10 जनपदों में इंटीग्रेटेड कोर्ट परिसर की स्थापना के लिए 1,645 करोड़ रुपये स्वीकृत किए, जिनमें से 6 जनपदों में कार्य शुरू हो चुका है। ये परिसर जनपद न्यायालयों, मोटर दुर्घटना दावों, परिवार न्यायालयों और वाणिज्यिक अदालतों को एकीकृत सुविधा प्रदान करेंगे। महिलाओं और बच्चों के प्रति अपराधों पर सख्ती महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों के प्रति सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि 381 पॉक्सो और फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा, केंद्र सरकार के सहयोग से कोर्ट रूम और आवासीय निर्माण के लिए 2023-24 में 148 करोड़, 2024-25 में 239 करोड़ और 2025-26 में 75 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि जारी की गई है।  डिजिटल और आधुनिक तकनीक का उपयोग के लिए सरकार प्रयासरत- सीएम योगी सीएम ने डिजिटल बुनियादी ढांचे और आधुनिक तकनीक … Read more

J&K प्रशासन ने संभाला 215 स्कूलों का नियंत्रण, अब जिला मजिस्ट्रेट और डीसी देखेंगे प्रबंधन

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर सरकार ने प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी (जेईआई) और उसके सहयोगी फलाह-ए-आम ट्रस्ट (एफएटी) से कथित रूप से संबद्ध 215 स्कूलों की प्रबंध समितियों को अपने नियंत्रण में लेने का आदेश दिया. सरकारी आदेश संख्या 578-जेके (शिक्षा) 2025 के अनुसार यह निर्णय खुफिया एजेंसियों की प्रतिकूल रिपोर्टों के बाद लिया गया है. इसमें इन संस्थानों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिबंधित संगठन से जुड़ा हुआ बताया गया है. आदेश में कहा गया, 'खुफिया एजेंसियों ने कई स्कूलों की पहचान की है जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी (जेईआई)/फलाह-ए-आम ट्रस्ट (एफएटी) से संबद्ध पाए गए हैं.' इसमें कहा गया, 'ऐसे 215 स्कूलों की प्रबंध समितियों की वैधता समाप्त हो चुकी है या खुफिया एजेंसियों द्वारा उनके बारे में प्रतिकूल रिपोर्ट दी गई है.' प्रशासन ने निर्देश दिया है कि इन स्कूलों का प्रबंधन अब संबंधित जिला मजिस्ट्रेट और उपायुक्तों द्वारा देखा जाएगा. उन्हें उचित सत्यापन के बाद नई समितियों का प्रस्ताव देने का काम सौंपा गया है. आदेश में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि इन स्कूलों में नामांकित छात्रों का शैक्षणिक भविष्य बाधित नहीं होना चाहिए. जिलाधिकारियों को स्कूल शिक्षा विभाग के परामर्श से राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के उपाय करने को कहा गया है. अधिकारियों ने बताया कि यह कदम जम्मू-कश्मीर स्कूल शिक्षा नियम 2010 के प्रावधानों के तहत उठाया गया है. इसे 2018 के एसआरओ 292 और 2022 के एसओ 177 के साथ पढ़ा गया है. 215 स्कूलों में से 53 बारामूला में 37 अनंतनाग में 36 कुपवाड़ा में 22 पुलवामा में 20 बडगाम में 16 कुलगाम में 15 शोपियां में छह-छह गंदेरबल और बांदीपुरा में तथा चार श्रीनगर में स्थित हैं. जमात-ए-इस्लामी को 2019 में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत प्रतिबंधित कर दिया गया था. अधिकारियों ने इस समूह पर क्षेत्र में आतंकवाद का समर्थन करने का आरोप लगाया था. एफएटी जम्मू और कश्मीर में स्कूलों का एक नेटवर्क चलाता है भी संगठन के साथ कथित संबंधों के लिए जांच के दायरे में आ गया है. जमात-ए-इस्लामी के कई नेताओं को गिरफ्तार किया गया, जबकि कई पूर्व सदस्यों ने अलगाववाद के विचार को त्याग दिया और यहाँ तक कि जम्मू-कश्मीर में 2024 के विधानसभा चुनाव भी लड़े. पूर्व जमात नेताओं ने इस साल अप्रैल में एक नई राजनीतिक पार्टी, जस्टिस एंड डेवलपमेंट फ्रंट (जेडीएफ) भी शुरू की.