samacharsecretary.com

स्कूल शिक्षा विभाग ने दिखाई सख्ती, MP में प्रिंसिपल-हेड मास्टर को ई-अटेंडेंस लगाने के आदेश

भोपाल  मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग ने स्कूलों में पारदर्शिता और अनुशासन बढ़ाने के उद्देश्य से ई-अटेंडेंस व्यवस्था को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी करते हुए कहा है कि अब सभी शिक्षक और संस्था प्रमुख नियमित रूप से ई-अटेंडेंस दर्ज करेंगे। विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि जिन अधिकारियों और शिक्षकों द्वारा आदेश का पालन नहीं किया जाएगा, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जिला शिक्षा अधिकारियों को ई-अटेंडेंस की निगरानी करने और इसकी प्रगति पर लगातार रिपोर्ट देने के निर्देश भी दिए गए हैं। लोक शिक्षण संचालनालय के संचाल के तरफ से सभी जिलों को निर्देश भेजे गए हैं। इसमें कहा गया है कि मॉनीटरिंग रिपोर्ट में संज्ञान में आया है कि संस्था प्रधान ई-अटेंडेंस नहीं लगा रहे हैं, जिसके चलते शिक्षक भी ई-अटेंडेंस नहीं लगा रहे हैं। आदेश में सभी जिला अधिकारियों को संस्था प्रधान और शिक्षकों की ई-अटेंडेंस लगाने की मॉनीटरिंग करने और रिपोर्ट भेजने को कहा गया है।  बता दें 1 जुलाई से प्रदेश के स्कूलों में ई-अटेंडेंस अनिवार्य कर दी गई है। इसमें शिक्षकों को स्कूल पहुंचने पर एप के माध्यम से अपनी अटेंडेंस लगाना है। इसमें स्कूल से सेल्फी लेकर उसे अपलोड करना हैं। इसी तरह छुट्टी के समय भी सेल्फी लेकर उसे अपलोड करना है। अब छुट्टी के आवेदन भी ऑनलाइन होंगे। इसका शिक्षक विरोध कर रहे हैं।   

तस्वीर बदल रहीं जीविका दीदियां, नशामुक्ति आंदोलन में बनीं नई ताकत

पटना  जीविका दीदियां बिहार की नई ताकत बन कर उभरीं हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में शुरू हुई ‘जीविका’ योजना की वजह से न केवल बिहार की महिलओं को आर्थिक मजबूती मिल रही है बल्कि वो बिहार के विकास की मजबूत कड़ी बन चुकी हैं। इतना ही नहीं जीविका समूहों से जुड़ी महिलाएं सामाजिक बदलाव की भी गाथा लिख रहीं हैं। जिसका नतीजा है कि सीएम नीतीश ने उनके योगदान को सराहते हुए मान देय में बढ़ोतरी की है। सक्रीय जीविका समूहों ने समाज को दिखाई राह बिहार सरकार के आंकड़ों की मालने तो बिहार के गांवों में इनकी भूमिका काफी अहम हो गई है। गांव–गांव में जीविका की सक्रिय 60,000 से ज्यादा ग्राम संगठन हैं। जो आज नशामुक्त का संदेश और उसके अपनी सक्रीय भूमिका निभाकर समाज को राह दिखा रही हैं। जीविका दीदियों के नेतृत्‍व में चलाए जा रहे अभियान जिसका नतीजा है कि अब महिलाओं की अगुवाई में ही जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। जागरूकता रैलियां, नुक्कड़ नाटक और चौपाल पर बैठकें की जा रही हैं। ये सब जीविका से जुड़ी गांव की आम सी दिखने वाली महिलाएं कर रही हैं।  कुरीतियों में सुधार शराब के सेवन और तंबाकू के नुकसान की जो जागरूकता जीविका दीदियों ने फैलाई है। सामजिक व्‍यवहार की कुरीतियों पर काबू पाने में अहम भूमिका निभाई है। जिन इलाकों में कभी नशा आम बात थी, वहां अब सामाजिक दबाव और सामूहिक चेतना से सकारात्मक माहौल दिखाई दे रहा है। शराबबंदी कानून को सफल बनाने और शराब माफियाओं को कमजोर करने में भी इनका महत्‍वपूर्ण योगदान रहा है। समाज सुधार की मिसाल बनीं दीदियां  गौर करने वाली बात ये कि सीएम नीतीश कुमार के विजन से बाल विवाह रोकथाम और शराबबंदी नियमों के अनुपालन में भी जीविका दीदियों की सक्रिय भागीदारी निर्णायक साबित हो रही है। ग्रामीण विकास विभाग का यह अभियान अब समाज सुधार की सबसे बड़ी मिसाल बनता जा रहा है।

महिला क्रिकेट विश्व कप: रीमा मल्होत्रा ने बताया, अब तक की सर्वश्रेष्ठ भारतीय टीम

नई दिल्ली  पूर्व ऑलराउंडर रीमा मल्होत्रा ने भारतीय महिला टीम में अनुभव और युवा खिलाड़ियों के मिश्रण को शानदार करार देते हुए कहा कि यह वर्ल्ड कप में अब तक की सबसे मजबूत और घरेलू परिस्थितियों में चैंपियन बनने की दावेदार टीम है। भारत और श्रीलंका की मेजबानी में आईसीसी महिला वनडे वर्ल्ड कप 2025 का आयोजन 30 सितंबर से दो नवंबर तक होगा। हरमनप्रीत कौर की अगुवाई में भारतीय टीम अपने अभियान का आगाज शुरुआती दिन गुवाहाटी में श्रीलंका के खिलाफ करेगी। भारत की 15 सदस्यीय टीम में युवा और अनुभवी खिलाड़ियों के शानदार मिश्रण का जिक्र करते हुए रीमा ने ‘भाषा’ को दिए साक्षात्कार में कहा, ‘‘ यह किसी भी महिला विश्व कप को देखे तो भारत की सबसे मजबूत टीम है। इसमें हरमनप्रीत (कौर), स्मृति मंधाना, जैमी (जेमिमा रोड्रिग्स), दीप्ति (शर्मा) जैसी अनुभवी खिलाड़ी है तो वहीं अमनजोत कौर, क्रांति गौड़, श्री चरणी और ऋचा घोष जैसे दमखम वाले युवा भी है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘टीम में जोश और होश का अच्छा मिश्रण है। मुझे नहीं लगता कि आपको विश्व कप के लिए इससे अच्छी टीम मिलेगी।’’ आक्रामक बल्लेबाज शेफाली वर्मा टीम में जगह बनाने में नाकाम रही लेकिन रीमा ने उनकी जगह प्रतिका रावल के चयन को सही करार देते हुए कहा कि दिल्ली की इस बल्लेबाज के प्रदर्शन में निरंतरता रही है। प्रतिका ने भारत के लिए 14 एकदिवसीय में 54.07 के औसत से 754 रन (एक शतक और पांच अर्धशतक) रन बनाये हैं। शेफाली के नाम 29 एकदिवसीय में लगभग 23 के औसत से 644 रन (चार अर्धशतक) है। इस दौरान शेफाली का स्ट्राइक रेट 83.20 का रहा है तो वहीं प्रतिका ने इस मामले में भी बेहतर करते हुए 87.43 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए हैं। भारत के लिए 41 एकदिवसीय और 22 टी20 अंतरराष्ट्रीय खेलने वाली रीमा ने कहा, ‘‘शेफाली बड़ा नाम है। वह ऐसा एक्स फैक्टर (अपने दम पर मैच पासा पलटने वाला खिलाड़ी) है जिसे आप अपनी टीम में चाहते हैं। जब एक्स फैक्टर का सामना प्रदर्शन में निरंतरता से होता है तो मुझे लगता है कि कप्तान और चयनकर्ताओं ने नियमित अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी को तरजीह दी है और यह सही भी है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘प्रतिका ने मौकों को भुनाकर टीम में अपनी जगह बनाई है। उन्होंने पिछली कुछ श्रृंखलाओं में खुद को साबित किया है। उन्होंने दिखाया है कि उनके पास वनडे में भारत के प्रतिनिधित्व के लिए जरूरी तकनीक और मानसिकता है।’’ रीमा ने कहा कि भारत की बल्लेबाजी हमेशा मजबूत रही है लेकिन मौजूदा टीम में अब तेजी से रन बनाने वाले बल्लेबाज के साथ गेंदबाजी भी में काफी विविधता है। उन्होंने कहा , ‘‘ इस टीम में तेज गेंदबाजी में रेणुका सिंह ठाकुर, अमनजोत और अरुंधति रेड्डी का विकल्प है तो वहीं स्पिन में दीप्ति और राधा यादव के साथ स्नेह राणा भी है। स्नेह राणा सफेद गेंद के मैचों के लिए काफी परिपक्व हो चुकी है और उन्हें पता है कि वनडे में कैसी गेंदबाजी करनी है। भारतीय परिस्थितियों में यह तिकड़ी काफी कारगर साबित होगी।’’ भारत दो बार फाइनल में पहुंचने के बावजूद महिला क्रिकेट विश्व कप अभी तक नहीं जीत पाया है। 2017 के फाइनल में भारत को इंग्लैंड के खिलाफ नौ रनों से हार का सामना करना पड़ा था, जबकि 2005 के फाइनल में उसे ऑस्ट्रेलिया ने 98 रनों से हराया था। आईसीसी टूर्नामेंटों में भारत के निराशाजनक प्रदर्शन के बारे में पूछे जाने पर रीमा ने कहा, ‘‘ हम कुछ मौकों पर खिताब के करीब पहुंचे लेकिन चैंपियन बनने से दूर रह गए। लेकिन यह अलग टीम है। जब आप अच्छा करके बड़े टूर्नामेंट में जाते है तो आपका आत्मविश्वास काफी बढ़ा होता है। आईसीसी टूर्नामेंट जीतने के लिए आपको मजबूत आत्मविश्वास चाहये। इस टीम के पास विश्व कप जीतने का आत्मविश्वास है।’’ भारतीय टीम ने हाल ही में श्रीलंका दौरे और इंग्लैंड दौरे पर वनडे में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा, ‘‘भारत की टीम यह टीम कागजों पर इस टूर्नामेंट की सबसे मजबूत टीम दिख रही है। टीम ने हाल में काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। ऑस्ट्रेलिया के अलावा न्यूजीलैंड और इंग्लैंड की टीमें भी काफी मजबूत है लेकिन आईसीसी टूर्नामेंटों में खुद पर भरोसा रखना और दबाव को हावी नहीं होने देना जरूरी है।’’ दिल्ली प्रीमियर लीग में कमेंट्री कर रही रीमा ने कहा कि विश्व कप में भारत का प्रदर्शन काफी हद तक कप्तान हरमनप्रीत के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा, ‘‘भारत के लिए हरमनप्रीत कौर का प्रदर्शन काफी अहम होगा। वह ऐसी मैच विजेता है जो दबाव में और बेहतर प्रदर्शन करती है। भारत को अगर विश्व कप जीतना है तो कप्तान को कुछ बड़ी पारियां खेलनी होगी।’’ उन्होंने कहा कि टीम प्रबंधन पिछले कुछ समय से जेमिमा रोड्रिग्स से पांचवें क्रम पर बल्लेबाजी करा रहा है और इससे बल्लेबाजी में गहराई आई है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे पहले भी लगता था कि जेमिमा को तीसरे नंबर पर खेलना चाहिए। उनके पास तेजी से रन बनाने के साथ बड़ी पारी खेलने की क्षमता है। टीम ने हालांकि एक माहौल बनाया है जहां आपको अपनी सुविधा से बाहर निकल कर प्रदर्शन करना होगा और जेमी ने पांचवें नंबर पर भी अच्छा किया है।  

सीएम योगी ने न्यायिक सेवा सम्मेलन में कहा- जनता तक आसान और तेज पहुंचे न्याय

लखनऊ  यूपी न्यायिक सेवा संघ के सम्मेलन में सीएम योगी शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने कहा कि सुशासन का लक्ष्य पाना है तो न्याय को सुगम और त्वरित बनाना होगा।  राजधानी लखनऊ में शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी न्यायिक सेवा संघ के 42वें सम्मेलन में भाग लिया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा संघ ने 102 वर्षों के अपने इतिहास में अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को एक विकसित भारत के संकल्प के साथ जोड़ा है।  सीएम ने कहा कि हम राज्य में कार्य कर रहे हैं, तो विकसित भारत का विकसित उत्तर प्रदेश बनेगा। हम जनपद में कार्य कर रहे हैं, तो विकसित उत्तर प्रदेश का विकसित जनपद बनेगा। यदि हमें सुशासन के लक्ष्य को प्राप्त करना है तो हमें न्याय को सुगम और त्वरित बनाना पड़ेगा।  

48 घंटे से मूसलाधार बरसात, बाढ़ जैसे हालात में सेना और SDRF उतरी

कोटा हाड़ौती में बीते 48 घंटे से मूसलाधार बारिश का दौर लगातार जारी है। कोटा, बूंदी और बारां जिलों में बारिश ने बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। कई कस्बों और गांवों में 8 से 10 फीट तक पानी भर गया है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। गांव, कस्बे और शहर तक इस बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। पिछले दो दिनों में हाड़ौती क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक कच्चे मकान ढह गए, जबकि कई मकानों को नुकसान पहुंचा है। हालात बिगड़ने पर एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के साथ सेना को भी राहत कार्यों में लगाया गया है। अब तक 200 से ज्यादा लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। बाढ़ की वजह से कई गांव और कस्बे टापू में तब्दील हो गए हैं। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए नाव का सहारा लिया जा रहा है। सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र बूंदी जिले का कापरेन और कोटा जिले का सुल्तानपुर बताया जा रहा है। इसके अलावा दीगोद क्षेत्र में भी हालात गंभीर बने हुए हैं। भारी बारिश और जलभराव से कई पुलिया और सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं। 100 से ज्यादा गांवों का संपर्क मुख्य शहरों से टूट गया है। कोटा से मध्यप्रदेश के श्योपुर को जोड़ने वाला मार्ग बंद हो गया है। दीगोद, इटावा, खातोली और सुल्तानपुर जैसे क्षेत्रों का सीधा संपर्क कोटा से कट गया है। इसी तरह कोटा-कैथून और सांगोद मार्ग पर भी यातायात ठप हो गया है, जिससे 20 से ज्यादा गांव अलग-थलग पड़ गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खेत पूरी तरह जलमग्न होकर तालाब जैसे हो गए हैं। आसपास की नदियों और नालों का पानी खेतों में भर गया है, जिससे फसलों को भारी नुकसान हुआ है। वहीं शहरों और कस्बों में दुकानों व मकानों में पानी घुसने से व्यापारियों को भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है।  

अलका उपाध्याय बनीं राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की सचिव, CS पद की दौड़ से बाहर

भोपाल  मुख्य सचिव की दौड़ में मानी जा रही 1990 बैच की IAS अधिकारी अलका उपाध्याय को लूप लाइन भेज दिया गया है। उपाध्याय अब तक केंद्र में पशुपालन एवं डेयरी विभाग में सचिव के पद पर थीं, लेकिन हाल ही में उन्हें राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (National Minority Commission) में सचिव बना दिया गया। जानकार मानते हैं कि किसी आयोग में सचिव पदस्थ होना "लूप लाइन" मानी जाती है और यह अच्छे पदस्थापन की श्रेणी में नहीं आता। इससे साफ है कि मध्यप्रदेश में मुख्य सचिव बनने की उनकी संभावनाओं पर ब्रेक लग गया है। इसी तरह, 1992 बैच के IAS वीएल कांताराव का भी तबादला किया गया है। उन्हें खनिज सचिव से हटाकर जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनर्जीवन विभाग में सचिव बनाया गया।  कांताराव की पदस्थापना मध्य प्रदेश के लिए अहम हैं। अब मध्य प्रदेश की केन बेतवा लिंक प्रोजेक्ट और पार्वती-कालीसिंध और चंबल लिंक प्रोजेक्ट में तेजी आने की संभावना है।  बता दें मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन 31 अगस्त को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। ऐसे में उनको एक्सटेंशन नहीं मिलने की संभावना में कई वरिष्ठ अधिकारी मुख्य सचिव की रेस में हैं। इसमें एक नाम अलका उपाध्याय का भी माना जा रहा हैं।  कांताराव को जल शक्ति का सचिव बनाया केंद्र ने शुक्रवार को 14 सीनियर आईएफएस अफसरों की जिम्मेदारी बदल दी। इनमें मप्र कैडर की 1990 बैच की अलका उपाध्याय को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का सचिव बनाया गया है। वे अब तक पशुपालन, डेयरी और फिशरीज मंत्रालय में सचिव थीं। मप्र कैडर के 1992 बैच के अफसर वीएल कांताराव को जल शक्ति, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का सचिव नियुक्त किया गया है। वे पहले खनिज मंत्रालय में सचिव थे। शुक्रवार को केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय की अपॉइंटिंग कमेटी ऑफ कैबिनेट ने इस बदलाव के आदेश जारी किए। अलका उपाध्याय का तबादला ऐसे समय हुआ, जब उनका नाम मप्र के अगले मुख्य सचिव की रेस में शामिल था। अब वे इस दौड़ से बाहर हो गई हैं। कांताराव की नई जिम्मेदारी मप्र के लिए अहम है। उनकी नियुक्ति से केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट और पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक प्रोजेक्ट को तेजी मिलेगी। साथ ही, महाराष्ट्र के साथ प्रस्तावित ताप्ती मेगा रीचार्ज परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिलाने में भी मप्र को लाभ होगा।    

खास दूत के माध्यम से अमेरिका का भारत को संदेश, जानें ट्रंप की मंशा 6 पॉइंट में

वॉशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक बड़ा ऐलान किया. उन्होंने बताया कि सर्जियो गोर भारत में अमेरिका के अगले राजदूत होंगे. वे भारत और अमेरिका के बीच बिगड़ते रिश्तों की जिम्मेदारी संभालेंगे, जो अगले हफ्ते भारत से आने वाले सामान पर अमेरिकी टैरिफ को दोगुना करने के फैसले के बाद और तनावपूर्ण हो गए हैं. गोर को दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के विशेष दूत की जिम्मेदारी भी दी गई है. ट्रंप ने यह ऐलान अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर किया. उन्होंने गोर को सरकार में हजारों राजनीतिक पदों पर नियुक्तियों में अहम भूमिका निभाने का श्रेय दिया और कहा कि गोर का काम प्रशासन के लक्ष्यों को लागू करने में बेहद महत्वपूर्ण रहा है. ट्रंप ने बताया 'बेहतरीन दोस्त' ट्रंप ने लिखा, 'सर्जियो मेरे बेहतरीन दोस्त हैं, जो कई सालों से मेरे साथ है. उन्होंने मेरे ऐतिहासिक इलेक्शन कैंपेन पर काम किया, मेरी बेस्टसेलिंग किताबें पब्लिश कीं और हमारे आंदोलन का समर्थन करने वाले सबसे बड़े सुपर PACs में से एक चलाया. उन्होंने मेरे दूसरे कार्यकाल के लिए स्टाफ चुनने में अहम योगदान दिया.' एलन मस्क से पुरानी अदावत ट्रंप और टेस्ला के सीईओ एलन मस्क के बीच हुए टकराव में भी सर्जियो गोर की भूमिका काफी अहम थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, मस्क और गोर के बीच महीनों से मतभेद चल रहे थे, जिसके बाद मई में मस्क ने ट्रंप प्रशासन से इस्तीफा दे दिया था. कई रिपोर्ट्स के अनुसार, मार्च में कैबिनेट की एक गरमागरम बैठक के दौरान मस्क और अन्य अधिकारियों में बहस हुई थी. गोर का नाम सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया, लेकिन अंदरखाने कहा गया कि वे मस्क के स्टाफिंग पर प्रभाव के खिलाफ थे.  सर्जियो गोर की छवि ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडा के कट्टर समर्थक और डोनाल्‍ड ट्रंप के भरोसेमंद सहयोगी के रूप में रही है, जिससे यह स्पष्ट है कि अमेरिका अब भारत के साथ अपने रिश्तों को ज्यादा लेन-देन आधारित नजरिए से देखेगा. 1. लेन-देन आधारित कूटनीति का दौर सर्जियो गोर को व्हाइट हाउस का ‘हार्डलाइन लॉयलिस्ट’ माना जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि उनकी नियुक्ति का अर्थ है कि अमेरिकी कूटनीति में लॉन्‍ग टर्म साझेदारी की जगह तात्कालिक अमेरिकी हितों को प्राथमिकता मिलेगी. यह भारत के लिए चुनौती होगी क्योंकि अब वार्ता में सहयोग से ज्यादा दबाव और शर्तें प्रमुख भूमिका निभा सकती हैं. 2. टैरिफ का दबाव और आर्थिक जोखिम अमेरिका ने हाल ही में भारतीय टेक्सटाइल, रत्न-आभूषण और तेल से जुड़े उत्पादों पर 50% टैरिफ लगाने की घोषणा की है. यह निर्णय भारत के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों और लाखों नौकरियों पर खतरा बन गया है. जानकारों के मुताबिक, यह कदम केवल आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक दबाव का हिस्सा है, जिससे भारत को रूस और चीन के साथ उसके बढ़ते व्यापार पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया जा सके. लेकिन इसका उलटा असर भी हो सकता है. भारत ने हाल के महीनों में मॉस्को और बीजिंग के साथ संबंध और मजबूत किए हैं, जो अमेरिकी प्रभाव को कमजोर कर सकते हैं. 3. जियो-पॉलिटिकल बैलेंस पर असर सर्जियो गोर को राजदूत के साथ-साथ विशेष दूत की भूमिका भी सौंपी गई है. इसका मकसद भारत की भू-राजनीतिक दिशा को अमेरिकी हितों के अनुरूप ढालना है. लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि आक्रामक कूटनीतिक रणनीति से उल्टा असर हो सकता है और भारत रूस और चीन की ओर और ज्यादा झुक सकता है. इससे दक्षिण एशिया में अमेरिकी प्रभाव सीमित होने का खतरा है. 4. रक्षा, तकनीक और व्यापार में संभावनाएं इसके बावजूद सर्जियो गोर का कार्यकाल कुछ अवसर भी ला सकता है. भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते को तेज गति मिलने की संभावना है. फार्मास्युटिकल्स, आईटी और रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग गहरा सकता है. साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, ऊर्जा और रक्षा उत्पादन में निवेश व साझेदारी के नए रास्ते खुल सकते हैं. हालांकि, इन संभावनाओं को वास्तविकता में बदलने के लिए दोनों देशों को टकराव और तनाव से बचना होगा. 5. विदेश नीति का सीमित अनुभव सर्जियो गोर की निष्ठा और प्रशासनिक क्षमता पर कोई सवाल नहीं है, लेकिन उनके पास विदेश नीति का प्रत्यक्ष अनुभव बेहद कम है. इससे अमेरिकी कूटनीतिक सर्कल और थिंक टैंकों में असहजता देखी जा रही है. राजनयिकों का मानना है कि यह नियुक्ति भारत के साथ संवाद को और जटिल बना सकती है. 6. निवेशकों और कारोबारी जगत के लिए चेतावनी भारतीय वस्त्र, रत्न और तकनीक से जुड़े कारोबारी क्षेत्रों में निवेशकों के लिए जोखिम बढ़ गया है. क्षेत्र-विशेष टैरिफ और अस्थिर कूटनीतिक वातावरण सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि भारत-अमेरिका रिश्तों में अगले कुछ महीने निवेश और व्यापार जगत के लिए बेहद अनिश्चित रहने वाले हैं. कुल मिलाकर सर्जियो गोर की नियुक्ति भारत-अमेरिका संबंधों में संभावनाओं और जोखिमों दोनों का संकेत है. जहां एक ओर रक्षा और तकनीक में सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं, वहीं लेन-देन आधारित अमेरिकी कूटनीति और ऊंचे टैरिफ भारत के लिए बड़ी चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं.

योगी के शहर की सबसे बड़ी परेशानी दूर करने आ रहा मास्टर प्लान

गोरखपुर  सीएम योगी आदित्यनाथ के शहर गोरखपुर में जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए नगर निगम ने ‘इंटीग्रेटेड अर्बन स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज मास्टर प्लान’ (आईयूएसडब्ल्यूडीएमपी) तैयार कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए निगम ने निविदा आमंत्रित की है। परियोजना को चार महीने में पूरा किया जाना है। यह मास्टर प्लान शहर की मौजूदा जल निकासी व्यवस्था का आधुनिक तकनीक से आकलन कर उसे सुदृढ़ और भविष्य के लिए सक्षम बनाएगा। इसके तहत पूरे महानगर में ड्रेनेज नेटवर्क का सर्वेक्षण, अद्यतन आंकड़े एकत्र करना, चालू परियोजनाओं का नए प्रस्तावों के साथ एकीकरण और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी। योजना के तहत नगर सीमा से बाहर स्थित कैचमेंट एरिया को ध्यान में रखते हुए ड्रेनेज बेसिन मानचित्र तैयार किए जाएंगे। परियोजना प्रभाव क्षेत्र में व्यापक स्थलाकृतिक सर्वेक्षण , हाइड्रोलिक विश्लेषण, ज़ोनिंग तथा कैचमेंट/उप-कैचमेंट क्षेत्रों का विभाजन किया जाएगा। वर्षा की अधिकतम तीव्रता को ध्यान में रखते हुए सिमुलेशन मॉडल तैयार होंगे। अंतिम जल निकासी बिंदु पर प्रभाव का आकलन करते हुए जान-माल की क्षति और प्रमुख सड़कों पर यातायात में व्यवधान को न्यूनतम करने हेतु प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली का प्रस्ताव किया जाएगा। बता दें, 17 दिसंबर 2024 को कैबिनेट बैठक में l सीएम योगी ने इंटीग्रेटेड अर्बन स्ट्रॉम वॉटर ड्रेनेज मास्टर प्लान बनाने का निर्णय लिया था। प्रथम चरण में परियोजना में 17 शहर शामिल किए गए थे, जिसके लिए इसके लिए पूर्व में ही वित्तीय बजट में 1000 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई थी। 6.80 करोड़ से हुआ लेडार सर्वेक्षण, लेकिन इस्तेमाल नहीं महानगर में वर्षा जल निकासी प्रणाली पर अर्बन स्ट्रॉम वॉटर ड्रेनेज मास्टर प्लान पहले से ही उपलब्ध है। नगर निगम और जीडीए ने 6.80 करोड़ रुपये से लेडार सर्वेक्षण कराया था। 16 नवंबर 2023 को फर्म ने अपनी फाइनल रिपोर्ट प्राधिकरण को सौंप दी थी। लेकिन इस सर्वेक्षण का महानगर में हजारों करोड़ रुपये से अधिक के जलनिकासी कार्यो में नगर निगम समेत किसी कार्यदायी एजेंसी ने इस्तेमाल नहीं किया। अब नगर निगम अपने 220 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का सर्वेक्षण करना चाहते हैं। क्या बोले नगर आयुक्त नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने बताया कि इंटीग्रेटेड अर्बन स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज मास्टर प्लान एक समग्र योजना होगी जिसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में वर्षा जल के प्रभावी और टिकाऊ प्रबंधन के लिए व्यवस्थित और दीर्घकालिक रणनीति विकसित करना है। जीडीए द्वारा कराया गया लेडार सर्वेक्षण हमारे पास है, लेकिन इंटीग्रेटेड अर्बन स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज मास्टर प्लान का वह पार्ट है। इससे शहरी बाढ़, जलभराव और जल प्रदूषण की समस्याओं को हल करने में भी मदद करेगी।  

भुवनेश्वर के बराबर पहुंचे ताहिर, 46 की उम्र में रचा इतिहास

साउथ अफ्रीका  साउथ अफ्रीका के पूर्व स्पिनर इमरान ताहिर के लिए उम्र महज एक नंबर है। वह 46 साल के होने के बावजूद क्रिकेट के मैदान पर तहलका मचा रहे हैं। ताहिर इन दिनों कैरेबियन प्रीमियर लीग (सीपीएल) 2025 में गुयाना अमेजन वॉरियर्स की कमान संभाल रहे हैं। उन्होंने टूर्नामेंट के नौवें मैच में एंटीगुआ एंड बारबुडा फाल्कन्स के खिलाफ कातिलाना गेंदबाजी करते हुए 'पंजा' मारा। ताहिर ने अपने चार ओवर के स्पेल में 21 रन देकर पांच विकेट चटकाए और इतिहास रच डाला। उन्होंने ना सिर्फ अपने टी20 करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया बल्कि एक वर्ल्ड रिकॉर्ड भी ध्वस्त कर डाला है। दरअसल, ताहिर टी20 क्रिकेट में पांच विकेट हॉल लेने वाले सबसे उम्रदराज कप्तान बन गए हैं। उन्होंने 46 साल और 148 दिन की उम्र में यह कारनामा अंजाम दिया। ताहिर ने मलावी के कप्तान मोअज्जम अली बेग का रिकॉर्ड तोड़ा है। मोअज्जम ने सितंबर 2024 में कैमरून के खिलाफ 'पंजा' खोला था। उन्होंने 1.5 ओवर में चार रन खर्च करने के बाद पांच विकेट हासिल किए थे। मोअज्जम फिलहाल 40 साल के हैं। वहीं, ताहिर टी20 क्रिकेट इतिहास में फाइफर लेने वाले दूसरे सबसे उम्रदराज खिलाड़ी हैं। ताहिर ने टी20 करियर में पांचवीं बार फाइफर झटका। वह टी20 इतिहास में संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा फाइफर लेने वाले गेंदबाजों की सूची में दूसरे पायदान पर पहुंच गए हैं। उन्होंने भारत के अनुभवी पेसर भुवनेश्वर कुमार की बराबरी कर ली है। ताहिर, भुवी के अलावा श्रीलंका के पूर्व दिग्गज पेसर लसिथ मलिंगा, बांग्लादेश के ऑलराउंडर शाकिब अल हसन और पाकिस्तान के तेज गेंदबाज शाहीन अफरीदी ने भी पांच-पांच फाइफर झटके। टी20 में सर्वाधिक फाइफर का वर्ल्ड रिकॉर्ड नामीबिया के ऑलराउंडर डेविड विसे के नाम दर्ज है। मैच की बात करें तो ताहिर के घातक 'पंजे' की बदौलत गुयाना अमेजन वॉरियर्स ने 82 रनों से धमाकेदार जीत दर्ज की। गुयाना ने 211/3 का स्कोर खड़ा करने के बाद एंटीगुआ एंड बारबुडा फाल्कन्स को 15.2 ओवर में 128 रनों पर ढेर किया। फाल्कन्स के सात प्लेयर 15 का आंकड़ा नहीं छू सके। गुयाना के लिए ड्वेन प्रिटोरियस और रोमारियो शेफर्ड ने दो-दो विकेट लिए। ताहिर को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।  

OBC आरक्षण व परिसीमन मुद्दे पर अटका राजस्थान का पंचायत-निकाय चुनाव

जयपुर राजस्थान में राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकार के विरोध के बावजूद पंचायत व शहरी निकाय चुनावों को लेकर चुनाव कार्यक्रम की प्रक्रिया शुरू कर दी। राज्य निर्वाचन आयुक्त मधुकर गुप्ता ने राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव के सम्बन्ध में हाल में की गई एक टिप्पणी को आधार बनाते हुए कार्यकाल पूरा कर चुकी पंचायतों और नगरीय निकायों में मतदाता सूची तैयार करने के निर्देश शुक्रवार को जारी कर दिए  इधर सरकार बार-बार यह बयान दे रही है कि वह वन स्टेट वन इलेक्शन के तहत सभी पंचायतों और निकायों के चुनाव एक साथ करवाएगी। पर राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकार की बात को अनसुना कर दिया। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार राजस्थान में पंचायत और शहरी निकायों के चुनाव हो पाएंगे या राज्य सरकार अब भी वन स्टेट वन इलेक्शन के तहत चुनाव करवाने की स्थिति में है। 3 नवंबर तक मतदाता सूचियां तैयार करने को कहा- राज्य निर्वाचन आयुक्त ने कलक्टरों से कहा है कि पंचायत चुनाव की मतदाता सूचियां 29 अक्टूबर तक और निकाय चुनाव की मतदाता सूचियां तीन नवम्बर तक तैयार कर लें ताकि इन पंचायतों और नगरीय निकायों में चुनाव कराए जा सकें।  कलक्टरों को निर्देश दिए हैं कि मतदाता सूचियो के लिए एक जनवरी 2025 को आधार बनाया जाए और विधानसभा के लिए तैयार सात जनवरी को 2025 को प्रकाशित सूची को काम में लें। कलक्टरों से कहा गया है कि मतदाता सूची तैयार करने के लिए प्रगणकों की नियुक्ति तुरंत करें और निकाय चुनाव के लिए 11 सितम्बर से यह काम शुरू कर दें, वहीं पंचायतों के लिए दस सितम्बर से काम शुरू कर दें।  गौरतलब है कि  मधुकर गुप्ता ने दो दिन पहले ही राजस्थान उच्च न्यायालय की टिप्पणी को आधार बनाते हुए जल्द प्रक्रिया शुरू करने और चुनाव घोषित करने के संकेत दिए थे। इसके साथ ही उन्होंने सरकार के वन स्टेट वन इलेक्शन के निर्णय पर भी सवाल उठाते हुए इसे अव्यवहारिक बताया था। जानिए क्या कहते हैं निर्वाचन विभाग से जुड़े जानकार कानून अनिवार्यता नहीं-  निर्वाचन विभाग के ही सूत्र कहते हैं कि राज्य निर्वाचन आयुक्त ने भले ही मतदाता सूचियां तैयार करने के लिए कह दिया है लेकिन इस आदेश की कोई कानूनी अनिवार्यता नहीं है और सरकार अब भी अपने हिसाब से ही चुनाव करवा सकती है।  दरअसल राज्य निर्वाचन आयुक्त मधुकर गुप्ता का कार्यकाल इसी साल 17 सितंबर को पूरा हो रहा है। अब इसके बाद सरकार यहां नए निर्वाचन आयुक्त को लगाएगी। नए निर्वाचन आयुक्त चाहें तो फिर से नया चुनाव कार्यक्रम भी जारी कर सकते हैं। परिसीमन अभी शेष: – राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची तैयार करने का निर्णय लेकर कार्यक्रम तो जारी कर दिया है, लेकिन बिना परिसीमन के चुनाव नहीं करवाए जा सकते हैं। अभी परिसीमन की अधिसूचना जारी नहीं हुई है।  सरकार नए  परिसीमन से पंचायतों और निकायेां के चुनाव कराना चाहती है और इसकी प्रक्रिया लगभग पूरी भी हो गई है, लेकिन अधिसूचना जारी नहीं हुई है। हालांकि बताया जा रहा है कि पंचायत परिसीमन की अधिसूचना तो दो-तीन दिन में जारी भी कर दी जाएगी। वहीं निकायों की अधिसूचना भी जल्द जारी होने की सम्भावना है। हाईकोर्ट की खंडपीठ में निर्णय रिजर्व राज्य निर्वाचन आयोग ने उच्च न्यायालय की एकलपीठ द्वारा की गई टिप्पणी को आधार बना कर मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है, लेकिन पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव तथा परिसीमन को लेकर हाईकोर्ट की ही खंडपीठ सुनवाई पूरी कर चुकी है और इस पर अभी फैसला रिजर्व रखा हुआ है। ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट जरूरी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार पंचायतो और निकाय चुनावों ओबीसी आरक्षण के लिए राज्य ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट जरूरी है। इसके बिना चुनाव नहीं कराए जा सकते। राज्य ओबीसी कमीशन हालांकि गठित तो पहले ही कर दिया गया था, लेकिन इसने अपना काम हाल में शुरू किया है और सरकार ने इसका कार्यकाल 31 दिसम्बर तक बढा दिया है। ऐसे में जब तक इसकी रिपोर्ट नहीं आ जाती तब तक चुनाव नहीं कराए जा सकते। बताया जा रहा है कि कमीशन ने इस बारे में राज्य निर्वाचन आयोग को पत्र भी लिखा है।