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PF का सारा पैसा निकालना है? जानें स्टेप-बाय-स्टेप आसान तरीका

नई दिल्ली अगर आपकी सैलरी से भी प्रोविडेंट फंड कटता रहा है, तो बता दें कि जरूरत पड़ने पर आप अपने PF अकाउंट से सारा पैसा रिटायमेंट से पहले भी निकाल सकते हैं। ध्यान रहे कि इस तरह के विड्रॉल को फुल एंड फाइनल विड्रॉल कहा जाता हैं क्योंकि इसमें आपका PF, पेंशन और ब्याज का पैसा शामिल होता है। इस तरह के विड्रॉल को नौकरी करते हुए नहीं निकाला जा सकता। नौकरी करते हुए निकाले जाने वाले पैसे को पार्शल विड्रॉल कहते हैं। अगर आपको नौकरी छोड़े हुए दो महीने हो चुके हैं या आपको अगली नौकरी जॉइन करने में दो महीने का समय है, तो आप नीचे बताए जा रहे प्रोसेस के जरिए अपने PF अकाउंट में मौजूद सारा पैसा निकाल सकते हैं। ऐसे निकालें PF से सारा पैसा     अपने PF अकाउंट से सारा पैसा निकालने के लिए आपको सबसे पहले आपको EPFO की ऑफीशियल साइट पर जाना होगा और अपने UAN नंबर और पासवर्ड की मदद से अपने अकाउंट में लॉग-इन करना होगा।     लॉग इन करने के बाद आपको डैश बोर्ड पर दिख रहे Online Services के ऑप्शन पर क्लिक करके Claims ऑप्शन पर क्लिक करना होगा।     इसके बाद आपके सामने एक फॉर्म खुल जाएगा। जहां कुछ फील्ड्स पहले से भरी हुई होंगी और कुछ फील्ड्स में आपको अपनी डिटेल्स भरनी होंगी।     इस फॉर्म पर आपको अपना बैंक अकाउंट नंबर डालना होगा और नियमों और शर्तों को स्वीकार करना होगा।     इसके बाद आपको अपनी आखिरी जॉब की डिटेल्स दिखाई देंगी और साथ ही डेट ऑफ एग्जिट का भी जिक्र उसमें होगा। डेट ऑफ एग्जिट का मतलब आपकी पिछली जॉब के लास्ट वर्किंग डे से होता है।     इसके बाद आपको Proceed For Online Claim पर क्लिक करके आगे बढ़ें।     इसके बाद आपको I want to apply for में Form 19 को चुनना होगा और इसी के साथ आपके सामने एक और फॉर्म खुल जाएगा।     इस ऑप्शन के नीचे आपको Form 15G जमा करने का ऑप्शन मिलेगा। इस फॉर्म को तब भरकर सबमिट किया जाता है जब विड्रॉल की जा रही अमाउंट 50 हजार से ज्यादा हो और आप न चाहते हों कि उस पर आपसे 10% टीडीएस या टैक्स लिया जाए।     इसके बाद आपको अपने आधार कार्ड पर दिया पता भरना होगा और फिर कैंसिल चेक की फोटो को अपलोड करना होगा।     इसके बाद शर्तों को स्वीकार करके Get Aadhaar OTP पर टैप करें और OTP वेरिफाई करके अपने फॉर्म को सबमिट कर दें। ऐसे निकालें पेंशन का पैसा अब पेंशन का पैसा निकालने के लिए आपको एक अलग फॉर्म इसी प्रॉसेस को फॉलो करते हुए भरना होगा।     सबसे पहले डैशबोर्ड पर Online Services पर जाएं और Claims पर क्लिक करें।     इसके बाद अपना बैंक अकाउंट नंबर भरकर Proceed For Online Claim पर क्लिक करके आगे बढ़ें।     अब आपको I want Apply for वाले ऑप्शन में Only Pension Withdrawal Form 10C को चुन लें।     इसके बाद पिछले स्टेप की तरह अपना पता, कैंसल चेक डालकर शर्तों को स्वीकार करना है और आधार OTP वेरिफाई करके फॉर्म सबमिट कर देना है। ऐसे चेक करें सबमिशन अगर आप देखना चाहते हैं आपने जो दो फॉर्म सबमिट किए हैं वो ठीक से सबमिट हुए हैं या नहीं, तो आप EPFO के डैशबोर्ड पर Online Services पर क्लिक करके Track Claim Status पर अपने सबमिट किए हुए फॉर्म और उनका करंट स्टेटस देख सकते हैं। अगले तीन दिन बाद आप यहीं वापिस आकर देख सकते हैं कि आपके क्लेम का स्टेटस क्या है। अगर आपको स्टेटस में Claim Settled लिखा दिखाई देता है, तो इसका मतलब है कि आपका क्लेम EPFO की ओर से अप्रूव कर दिया गया है। इसे कब अप्रूव किया गया है यह देखने के लिए आप अपनी EPFO की पासबुक चेक कर सकते हैं।

इन्वेस्टर्स के लिए बड़ी खबर: फ्यूचर-ऑप्शन में 8 दिसंबर से प्री-ओपन ट्रेडिंग

मुंबई  बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) ने गुरुवार को फ्यूचर्स और ऑप्शंस (एफएंडओ) में प्री-ओपनिंग ट्रेडिंग को 8 दिसंबर से शुरू करने का प्रस्ताव रखा. बीएसई ने बयान जारी कर कहा सोमवार, 8 दिसंबर 2025 से इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट में इंडेक्स और स्टॉक फ्यूचर्स के लिए प्री-ओपन सेशन शुरू करने का प्रस्ताव है. ट्रेडिंग सदस्यों से अनुरोध है कि वे ध्यान दें कि उक्त कार्यक्षमता को शुरू करने के लिए ईटीआई एपीआई या मार्केट डेटा ब्रॉडकास्ट स्ट्रीम में कोई नया बदलाव नहीं होगा.   F&O प्री-ओपनिंग ट्रेडिंग  एक्सचेंज ने बयान में आगे कहा कि बीएसई पहले से ही इक्विटी सेगमेंट में प्री-ओपन सेशन ट्रेडिंग का समर्थन करता है. अब इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट में प्री-ओपन सेशन ट्रेडिंग के लिए समान संदेश संरचनाएं और फील्ड परिभाषाएं लागू होंगी. इक्विटी सेगमेंट में प्री-ओपन सेशन ट्रेडिंग की टेस्टिंग 6 अक्टूबर, 2025 को की जाएगी.  बीएसई ने सदस्यों और थर्ड-पार्टी फ्रंट-एंड ट्रेडिंग एप्लिकेशन वेंडर्स से अनुरोध किया कि वे अपने-अपने एप्लिकेशन में परिवर्तन शुरू करें और सुचारू रोलआउट सुनिश्चित करने के लिए उनका परीक्षण करें.

प्राइवेट बनाम सरकारी स्कूल: खर्च में कई गुना फर्क, चौंका देने वाले आंकड़े

नई दिल्ली  देश में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच, एक ताज़ा सरकारी सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। शिक्षा पर खर्च को लेकर किए गए कॉम्प्रिहेंसिव मॉड्यूल सर्वे: एजुकेशन 2025 से यह पता चला है कि प्राइवेट स्कूलों में बच्चों को पढ़ाना माता-पिता की जेब पर भारी पड़ रहा है। वहीं, सरकारी स्कूलों में नामांकन के बावजूद अधिकांश छात्रों से फीस नहीं ली जा रही है। प्राइवेट स्कूलों में खर्च 8 गुना ज़्यादा इस सर्वे में देशभर से 52,085 परिवारों और 57,742 छात्रों से इंटरव्यू लिए गए। इसके अनुसार, सरकारी स्कूलों में औसतन सालाना खर्च 2,863 रुपए है, जबकि प्राइवेट स्कूलों में यह खर्च 25,002 रुपए तक पहुंच चुका है। यानी प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई कराने का खर्च सरकारी स्कूलों की तुलना में लगभग 8.8 गुना अधिक है। शहरों और गांवों में बड़ा अंतर – शहरी और ग्रामीण इलाकों में भी शिक्षा पर खर्च में बड़ा अंतर देखा गया है। – शहरी छात्रों की औसत कोर्स फीस: ₹15,143 – ग्रामीण छात्रों की औसत कोर्स फीस: ₹3,979 – इसके अलावा, स्टेशनरी और किताबों का औसतन खर्च 2,002 रुपए सामने आया है। कोचिंग ने और बढ़ाया बोझ सिर्फ स्कूल की फीस ही नहीं, कोचिंग का खर्च भी अब माता-पिता की चिंताओं को बढ़ा रहा है। सर्वे में बताया गया कि 27% छात्र कोचिंग ले रहे हैं या ले चुके हैं। – शहरी छात्रों की कोचिंग फीस: ₹3,988 – ग्रामीण छात्रों की कोचिंग फीस: ₹1,739 – शहरों में 12वीं कक्षा के लिए कोचिंग फीस: ₹9,950 – ग्रामीण क्षेत्रों में 12वीं की कोचिंग फीस: ₹4,548 सरकारी स्कूलों में ज्यादा नामांकन, फिर भी कम खर्च सर्वे के मुताबिक, देश के 66% ग्रामीण और 30.1% शहरी छात्रों का नामांकन सरकारी स्कूलों में है। कुल मिलाकर, देशभर में 55.9% छात्रों का नामांकन सरकारी स्कूलों में है। इनमें से केवल 26.7% छात्र ही फीस देते हैं, जबकि प्राइवेट स्कूलों में 95.7% छात्रों से कोर्स फीस ली जाती है। हालांकि शिक्षा मंत्रालय ने यह साफ किया है कि यह आंकड़े अनुमानित हैं और इनमें थोड़ी बहुत त्रुटि की संभावना हो सकती है, लेकिन इससे शिक्षा क्षेत्र में बढ़ते खर्च और माता-पिता पर बढ़ते आर्थिक बोझ की तस्वीर जरूर साफ होती है।  

भारत का सबसे बड़ा स्पेसपोर्ट तैयार, ISRO दिसंबर 2026 से करेगा रॉकेट लॉन्चिंग की शुरुआत

कुलसेकरपट्टिनम  भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम अब नई ऊंचाई की ओर बढ़ रहा है. आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के बाद तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले के कुलसेकरपट्टिनम में देश का दूसरा बड़ा लॉन्च कॉम्प्लेक्स तैयार किया जा रहा है. ISRO प्रमुख वी. नारायणन ने बुधवार को भूमि पूजन के बाद घोषणा की कि दिसंबर 2026 तक यह प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा. इस विशाल कॉम्प्लेक्स को 2,300 एकड़ जमीन पर विकसित किया जा रहा है. यहां से हर साल करीब 20 से 25 रॉकेट लॉन्च होंगे. खास बात यह है कि यहां से छोटे उपग्रह प्रक्षेपण यान (SSLV) छोड़े जाएंगे, जो 500 किलो तक का पेलोड 400 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचा सकते हैं. नारायणन ने कहा, ‘हमारा लक्ष्य दिसंबर 2026 तक सारा काम पूरा करने का है. अगले साल की चौथी तिमाही तक हम यहां से पहला लॉन्च करने की योजना बना रहे हैं. प्रधानमंत्री सही समय पर लॉन्च की तारीख की घोषणा करेंगे.’ इस लॉन्च कॉम्प्लेक्स का शिलान्यास फरवरी 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया था. क्यों जरूरी था नया स्पेसपोर्ट?     अब तक इसरो का मुख्य लॉन्च सेंटर श्रीहरिकोटा रहा है, जहां से 1971 से PSLV और GSLV जैसे बड़े रॉकेट छोड़े जाते हैं. लेकिन छोटे रॉकेट, खासकर SSLV, के लिए वहां से पोलर ऑर्बिट में लॉन्च करना मुश्किल है.     कारण है श्रीलंका. श्रीहरिकोटा से सीधे दक्षिण की ओर लॉन्च करने पर रॉकेट श्रीलंका के ऊपर से गुजरते. इस खतरे से बचने के लिए रॉकेटों को ‘डॉगलेग मैन्युवर’ करना पड़ता है. यानी पहले पूर्व की ओर मुड़ना और फिर दक्षिण की ओर झुकना.     यह घुमाव छोटे रॉकेटों के लिए बेहद महंगा पड़ता है क्योंकि इसमें ज्यादा ईंधन खर्च होता है और पेलोड की क्षमता भी कम हो जाती है. यही वजह है कि कुलसेकरपट्टिनम चुना गया. कुलसेकरपट्टिनम ही क्यों?     कुलसेकरपट्टिनम समुद्र किनारे स्थित है. यहां से सीधे दक्षिण की ओर रॉकेट छोड़े जा सकते हैं, जहां हजारों किलोमीटर तक सिर्फ महासागर है, कोई आबादी नहीं. इसका फायदा यह है कि रॉकेट सीधे पोलर ऑर्बिट की तरफ जाएगा, बिना अतिरिक्त ईंधन खर्च किए.     इसरो वैज्ञानिकों का कहना है कि इस कदम से छोटे उपग्रहों की लॉन्चिंग लागत काफी कम होगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धा और बढ़ेगी.     इस लॉन्च कॉम्प्लेक्स से छोटे उपग्रहों का व्यावसायिक प्रक्षेपण भी होगा. भारत की निजी स्पेस कंपनियों को भी यहां से लॉन्च करने की सुविधा मिलेगी. इससे देश का अंतरिक्ष कार्यक्रम और आत्मनिर्भर होगा. ISRO प्रमुख नारायणन के अनुसार, यह प्रोजेक्ट सिर्फ तकनीकी नहीं बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी अहम है. भारत अब छोटे उपग्रहों की ग्लोबल डिमांड को पूरा करने के लिए बेहतर स्थिति में होगा. श्रीहरिकोटा से बड़े रॉकेट उड़ान भरेंगे और कुलसेकरपट्टिनम से छोटे उपग्रह, इसरो का यही भविष्य का खाका है. दिसंबर 2026 से जब यहां से रॉकेटों की गड़गड़ाहट गूंजेगी, तब भारत की अंतरिक्ष यात्रा का नया अध्याय लिखा जाएगा.

अगले साल तक उपलब्ध होंगी गेहूं की 14 और जौ की 4 नई किस्में

ग्वालियर देश में अगले वर्ष तक किसानों को 18 नई किस्में उपलब्ध कराई जाएंगी, जिनमें 14 किस्में गेहूं की और चार किस्में जौ की शामिल हैं। इन किस्मों की खास बात यह है कि ये न केवल उच्च उत्पादन क्षमता वाली हैं, बल्कि पोषण की दृष्टि से भी अत्यंत समृद्ध हैं। हाल ही में देश में कृषि विज्ञानियों द्वारा अनुसंधान से विकसित की गईं इन किस्मों में जिंक और आयरन की मात्रा 45 पीपीएम और प्रोटीन की मात्रा 13.5 प्रतिशत तक है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन किस्मों के अनाज से खासकर कुपोषण से प्रभावित क्षेत्रों में रहने वालों में पोषण संबंधी कमी को दूर किया जा सकेगा। सेंट्रल वैरायटी रिलीज कमेटी को भेजेंगे जौ की चारों किस्में भी उत्पादन और पोषण के लिहाज से अहम हैं। इनमें डीडब्ल्यूआरबी-223 एक विशेष किस्म है, जो छिलका रहित है। इसे गेहूं में मिलाकर उपयोग किया जा सकता है, जिससे पोषण में और भी वृद्धि होगी। ग्वालियर स्थित राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय 64वीं अखिल भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान कार्यकर्ता गोष्ठी के समापन अवसर बुधवार को इन नई किस्मों को अंतिम परीक्षण और मंजूरी के लिए सेंट्रल वैरायटी रिलीज कमेटी को भेजने की सहमति दी गई। समापन समारोह की अध्यक्षता भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के सहायक महानिदेशक डॉ. एसके प्रधान ने की, जबकि सह-अध्यक्षता भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. रतन तिवारी ने की। डॉ. तिवारी ने जौ की छिलका रहित किस्म को किसानों के लिए उपयोगी बताया। गोष्ठी के समापन सत्र में फसल सुधार, फसल सुरक्षा, गुणवत्ता, मूलभूत और सामाजिक विज्ञान, एवं जौ नेटवर्क की प्रमुख अनुशंसाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। दलहन-तिलहन को मिलेगा बढ़ावा गोष्ठी में यह भी निर्णय लिया गया कि जिन राज्यों में गेहूं का उत्पादन सीमित है, वहां के किसानों को दलहन और तिलहन की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे न केवल पोषण सुरक्षा में वृद्धि होगी बल्कि किसानों की आय भी बढ़ेगी। जल्द ही किसानों को उपलब्ध होंगी ये किस्में गेहूं की किस्में     एनआइएडब्ल्यू – 4114 (निफाड)     डब्ल्यूएच – 1306 (हिसार)     केबी – 2031 (कानपुर)     यूपीबी – 1106 (पंतनगर)     एचडी – 3428 (नई दिल्ली)     डीबीडब्ल्यू – 386, डीबीडब्ल्यू – 443 (करनाल)     पीबीडब्ल्यू – 891 (लुधियाना)     लोक – 79 (सनोसरा)     एनडब्ल्यूएस – 2222 (नुजिवीडु)     एकेएडब्ल्यू – 5100 (अकोला)     जीडब्ल्यू – 543 (विजापुर) जौ की किस्में     डीडब्ल्यूआरबी – 219     डीडब्ल्यूआरबी – 223 (करनाल) इन राज्यों को मिलेगा सीधा लाभ महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, पश्चिम बंगाल, पूर्वी व पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और उत्तराखंड के किसानों को इन नई किस्मों से पोषण और उत्पादन दोनों के स्तर पर लाभ मिलेगा।

26 कॉलोनियां होंगी वैध, इस जिले में मिलेंगी बढ़ी हुई सुविधाएं

चंडीगढ़  करनाल शहर की 26 अनियमित कॉलोनियों को नियमित करने की प्रक्रिया तेज़ हो गई है। विधानसभा सत्र के दौरान निकाय मंत्री विपुल गोयल ने जानकारी दी कि इन कॉलोनियों से संबंधित प्रस्ताव विभाग के पास विचाराधीन हैं और सरकार जल्द ही इस पर निर्णय लेगी। उन्होंने कहा कि दो महीने के भीतर इस मामले में अंतिम फैसला लेकर अधिसूचना जारी की जाएगी। वहीं, करनाल विधायक जगमोहन आनंद ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा था कि पहले से वैध घोषित कॉलोनियों के बीच कुछ खसरा नंबर और 28 नई कॉलोनियां अब भी वैधीकरण से बाहर हैं, जिससे स्थानीय निवासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मंत्री ने आश्वासन दिया कि सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है और लोगों को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। कॉलोनी वैध होने के ये होते हैं फायदे कानूनी सुरक्षा: वैध होने के बाद प्लॉट/मकान की रजिस्ट्री, म्यूटेशन आदि कानूनी रूप से मान्य हो जाते हैं। किसी विवाद की स्थिति में मालिकाना हक मज़बूत होता है।   बैंक से लोन सुविधा: वैध कॉलोनी में बने मकानों पर बैंक या वित्तीय संस्थानों से आसानी से होम लोन और अन्य सुविधाएं मिलती हैं। सरकारी सुविधाएं: बिजली, पानी, सीवर, सड़क, स्ट्रीट लाइट जैसी नगर निगम या सरकारी मूलभूत सुविधाएं आसानी से मिलती हैं। जमीन का मूल्य बढ़ना: अनियमित कॉलोनी में संपत्ति का दाम कम होता है, लेकिन वैध होने के बाद प्लॉट और मकान का मार्केट वैल्यू बढ़ जाता है। भविष्य में विकास कार्य: नगर निगम या विकास प्राधिकरण कॉलोनी में पार्क, स्कूल, सामुदायिक केंद्र और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करते हैं।

महिला समूह को मिली जिम्मेदारी, 23 लाख पौधों का संरक्षण संभालेंगी ‘अमृत मित्र

भोपाल प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में स्वच्छ पर्यावरण के लिये इस वर्ष नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने अमृत हरित महाअभियान चलाया है। अभियान में अब तक 10 संभागों में 23 लाख पौधों का सफलतापूर्वक रोपण किया जा चुका है। नगरीय क्षेत्रों में जन भागीदारी से सामुहिक पौधरोपण के कार्यक्रम अभी भी निरंतर आयोजित किये जा रहे हैं। प्रदेश में अब तक यह पौधरोपण जबलपुर, शहडोल, भोपाल, नर्मदापुरम्, ग्वालियर, चंबल, उज्जैन, इंदौर, सागर एवं रीवा संभाग के नगरीय क्षेत्रो में व्यापक स्तर पर किया गया है। शहरी क्षेत्रों में लगाये गये पौधों की सुरक्षा की जिम्मेदारी “वूमेन्स फॉर ट्री” अमृत मित्र महिला समूह को सौंपी गयी है। प्रदेश में करीब 7 हजार 800 महिलाएं लगाये गये पौधों की 2 वर्ष तक सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाएंगी। अमृत महिला मित्रों को नगरीय निकायों द्वारा प्रशिक्षण के साथ आवश्यक किट भी उपलब्ध कराया गया है। प्रदेश के कुछ नगरीय निकायों ने उनके नगरीय क्षेत्रों के पार्कों के रखरखाव की जिम्मेदारी अमृत मित्र महिला समूह को सौंपी है। प्रदेश में अमृत हरित महाअभियान 5 जून 2025 को पर्यावरण दिवस से नगरीय निकायों की मदद से व्यापक स्तर पर शुरू किया गया था। राज्य में यह अभियान 30 सितंबर तक लगातार जारी रहेगा। सामुहिक पौधरोपण में जनभागीदारी में छात्र-छात्राओं, युवाओं, जनप्रतिनिधियों, विशेषकर महिला जनप्रतिनिधियों की भागीदारी को शामिल किया जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों में भी पौधरोपण प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में पर्यावरण संतुलन के लिये नगरीय निकायों ने सामूहिक‍पौधरोपण के व्यापक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। प्रदेश को हराभरा बनाने तथा शहरी पर्यावरण को संरक्षित करने की दिशा में एक सराहनीय कदम है। पौधरोपण में मुख्य रूप से छायादार और फलदार वृक्षों का चयन किया गया है। आयुक्त की अपील नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने सभी नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों से अपील है कि वृक्षारोपण को जन-अभियान का स्वरूप देते हुए अपने-अपने क्षेत्र में अधिक से अधिक पौधों का रोपण और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी का निर्वहन निष्ठा के साथ करें। ऐसा करके ही हम सब पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा सकते है।  

मध्यप्रदेश: जल जीवन मिशन के तहत नल जल मेंटेनेंस में PHE लगेगा, लागत करीब 1200 करोड़

भोपाल  मध्यप्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत एकल नल जल योजनाओं के मेंटेनेंस का काम अब लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) द्वारा किया जाएगा। इस काम में सालाना करीब 1200 करोड़ रूपए का खर्च आएगा। जिसको लेकर पीएचई के अधिकारियों द्वारा पूरा खाका तैयार कर लिया गया है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक इस प्रस्ताव को आगामी कैबिनेट बैठक में पेश करने की तैयारी है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। बता दें, एकल नल जल योजना उन गांवों के लिए है जहां छोटे जल स्रोत है और जहां स्थानीय स्तर पर पानी की आपूर्ति की जा सकती है। सरकार ने ऐसे 27990 गांवों के लिए एकल नल जल योजनाएं स्वीकृत की हैं। फैक्ट फाइल     27,990 ऐसे गांव जहां एकल नल जल योजनाओं की दी गई स्वीकृति     20,000 करोड़ खर्च कर गांव-गांव सुगम करेंगे पेयजल व्यवस्था जिम्मेदारी को लेकर कई माह से था पेंच एकल नल जल योजनाओं के संचालन एवं संधारण की जिम्मेदारी को लेकर पिछले कई माह से पेंच फंसा हुआ था। पहले मुख्य सचिव और मंत्री स्तर पर कई मर्तबा वार्ता हुई लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकलने के बाद मुख्यमंत्री द्वारा इस मामले पर विस्तार से चर्चा करने के बाद यह फैसला लिया गया कि इसके मेंटेनेंस का काम पीएचई विभाग द्वारा ही देखा जाएगा। 2027 तक प्रदेश में काम पूरा करने का लक्ष्य जल जीवन मिशन के एकल नल जल योजना पर करीब 20 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे है। ताकि गांवों में आने वाले सालों में सुगम रूप से पानी की सप्लाई हो सके। लेकिन मेटेंनेस की जिम्मेदारी तय नहीं होने से यह योजना खटाई में पड़ सकती थी। इसलिए सरकार द्वारा इस मामले को प्राथमिकता पर लेते हुए जिम्मेदारी तय की गई है। बता दें प्रदेश में जल जीवन मिशन का काम पूरा करने का लक्ष्य मार्च 2027 तक का रखा गया है। इमरजेंसी सेवा सेवा के लिए तैनात होंगे वाहन मेंटेनेंस की जिम्मेदारी मिलने के बाद पीएचई विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा आगे की तैयारी शुरू कर दी गई है। विभाग के मुताबिक प्रत्येक गांवों में इमरजेंसी वाहन तैनात किए जाएंगे। जो सभी जरूरी मशीनरी जैसे ट्राईपॉड, चैन-पुल्ली सहित अन्य संयंत्रों से लेस होंगे। किसी इमरजेंसी में फोन आते ही गांवों की तरफ मूवमेंट करेंगे।

अमरबेल पर भोपाल में रिसर्च, पीलिया रोकने के गुणों को मिलेगा वैज्ञानिक आधार

भोपाल  मध्य भारत के वनों और गांवों में बहुतायत से पाई जाने वाली लता अमरबेल पीलिया के इलाज में भी कारगर हो सकती है। भोपाल के पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेदिक संस्थान ने अपने शुरुआती अध्ययन में इसमें पीलियारोधी गुण पाया है। इसको वैज्ञानिक आधार देने के लिए संस्थान ने विस्तृत शोध की योजना तैयार की है। अमरबेल का वनस्पति विज्ञानी नाम कस्कूटा रिफ्लेक्सा है। यह बिना पत्तियों वाली परजीवी लता है जो दूसरे पेड़ों के ऊपर पनपती है। उन्हीं के तने से पोषण लेती है, इसकी वजह से इसमें उस पेड़ से संबंधित रसगुण आ जाते हैं। प्राचीन आयुर्वेद ग्रंथों चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, भावप्रकाश निघंटु आदि में इसके गुणों का विस्तृत वर्णन है। मधुमेह, खांसी, पाचन संबंधी विकारों, व त्वचा रोगों और रक्त दोष के उपचार के लिए इस लता को औषधि के तौर पर उपयोग किया जाता रहा है। कुछ समुदाय इसके काढ़े का उपयोग करते हैं आयुर्वेद संस्थान के अध्ययन में यह बात सामने आई कि कुछ समुदाय पीलिया के उपचार के लिए इसके काढ़े का प्रयोग करते हैं। इसकी पुष्टि के बाद इसके पीलियारोधी गुणों को वैज्ञानिक आधार देने के लिए विस्तृत शोध की योजना बनी है। इनमें इसकी एंटी इंफ्लेमेटरी (सूजन कम करने की क्षमता), एंटी-वायरल (वायरस से लड़ने वाली) और लीवर प्रोटेक्टिव (जिगर की रक्षा करने वाली) क्षमताओं को परखा जाएगा। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि अमरबेल रक्त शुद्धिकरण में किस हद तक मददगार है। संस्थान में द्रव्यगुण विभाग की प्रमुख डॉ. अंजली जैन ने बताया कि रिसर्च की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। ज्ञान को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणिक करना है उद्देश्य     हमारा उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित करना है। शोध के नतीजे सामने आने के बाद अमरबेल आधारित दवाओं को आधुनिक चिकित्सा पद्धति में भी शामिल करने की संभावनाएं बढ़ेंगी। – डॉ. उमेश शुक्ला, प्राचार्य, पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद कॉलेज।  

मेट्रो कॉर्पोरेशन ने जारी किए 1200 नोटिस, ब्लू लाइन निर्माण से प्रभावित होंगे मकान-दुकान

भोपाल   भोपाल में मेट्रो की ब्लू लाइन के लिए एलिवेटेड कॉरिडोर का जमीनी काम शुरू हो गया है। जेके रोड क्षेत्र में पीयर्स के लिए लोहे के जाल बिछने लगे है। पीयर्स पर ही स्लैब बिछेगी और यहां पटरियों का काम होगा। ब्लू लाइन में करीब 13 किमी लंबाई की एलिवेटेड लाइन बनना है। 14 किमी लंबाई की लाइन एम्स से करोद तक की है। मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की ओर से ब्लू लाइन से जुड़े निर्माणों के लिए 1200 नोटिस तैयार किए गए है। एक सप्ताह में ये नोटिस दे दिए जाएंगे। यदि कोई नहीं हटेगा(Demolishe) तो पुलिस और प्रशासनिक क्षरा कार्रवाई की जाएगी। 700 मामलों में चल रही सुनवाई मेट्रो रेल की लाइन में आ रहे निर्माणों में से 700 की प्रशासन ने नियमित सुनवाई शुरू की है। तहसीलदार-एसडीएम कोर्ट में इन्हें सुना जा रहा है। मुआवजे के राशि व विस्थापन की नीति से ये सहमत नहीं है। ब्लू लाइन में तो जहांगीराबाद का बाजार ही पूरा आ रहा है और लगभग सभी दुकानदार इसके विरोध में है। गौरतलब है कि ब्लू लाइन भदभदा से शुरू होकर रत्नागिरी तिराहा तक है। जबकि ओरेंज लाइन एम्स से करोद तक है। ओरेंज लाइन में सुभाष ब्रिज तक 6.22 किमी का काम पूरा हो चुका है और यहां अक्टूबर में कमर्शियल रन शुरू करने की तैयारी है।