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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेजर ध्यानचंद की जयंती पर उनकी स्मृतियों को किया नमन

  हर कमिश्नरी में स्पोर्ट्स कॉलेज और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की हो रही स्थापनाः सीएम ग्राम पंचायत से जनपद स्तर तक प्रदेश सरकार कर रही खेल अवसंरचना का विस्तारः मुख्यमंत्री खेल दिवस पर सीएम योगी ने 88 पदक विजेता खिलाड़ियों का किया सम्मान कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सहायक खेल प्रशिक्षकों को प्रदान किया नियुक्ति पत्र विभिन्न जनपदों में खेल अवस्थापना सुविधाओं के निर्माण का किया लोकार्पण लखनऊ, राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद जी को नमन करते हुए कहा कि हर खिलाड़ी अपने आप में समाज के लिए एक हीरो होता है। हर नागरिक को एक खिलाड़ी की तरह अपने राष्ट्र के प्रति समर्पण भाव से आगे बढ़ने, खेल जीवन के अनुशासन को बनाए रखने, समन्वय स्थापित करने और जीवन में उत्कृष्टता के लक्ष्य को प्राप्त करने के प्रयासों का हिस्सा होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक विजेता उत्तर प्रदेश के 88 खिलाड़ियों को पुरस्कार राशि प्रदान की और सहायक खेल प्रशिक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। समारोह में खेल मंत्री ने मुख्यमंत्री को अंगवस्त्र पहनाकर और मोमेंटो देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पूर्व ओलंपियन और अर्जुन पुरस्कार प्राप्त खिलाड़ियों सहित नेशनल गेम्स में मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों का सम्मान किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न जनपदों में खेल अवस्थापना सुविधाओं के निर्माण का लोकार्पण भी किया। मेजर ध्यानचंद को नमन मुख्यमंत्री ने कहा कि जब मेजर ध्यानचंद जी की बात आती है तो हर भारतीय के मन में हॉकी की स्टिक नजर आने लगती है। 1928, 1932 और 1936—तीन ओलंपिक में स्वर्ण पदक दिलाकर उन्होंने भारत की हॉकी को वैश्विक पहचान दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश का सबसे प्रतिष्ठित खेल रत्न पुरस्कार किसी नेता नहीं, बल्कि मेजर ध्यानचंद के नाम पर समर्पित किया गया। उत्तर प्रदेश के लिए यह इसलिए भी गौरव की बात है क्योंकि यह उनकी जन्मभूमि है। उनकी स्मृति में मेरठ में प्रदेश की पहली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी का नामकरण मेजर ध्यानचंद जी के नाम पर किया गया है और इस सत्र से वहां पाठ्यक्रम प्रारंभ हो गया है। खेलों में नई क्रांति की शुरुआत मुख्यमंत्री ने विजयंत खंड स्थित मोहम्मद शाहिद हॉकी स्टेडियम में स्पोर्ट्स हॉस्टल बनाम स्पोर्ट्स कॉलेज का रोमांचक हॉकी मैच भी देखा। उन्होंने कहा कि यह खेल कितना फास्ट है, कितनी ऊर्जा और टीमवर्क मांगता है। यह मैच इसका जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में खेलो इंडिया से फिट इंडिया मूवमेंट तक, सांसद एवं विधायक स्तर की प्रतियोगिताओं तक, देश में खेलों की एक नई क्रांति आई है। प्रदेश सरकार ने नई खेल नीति लागू की है, जिससे खिलाड़ियों को मंच, कोच और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध हो रहा है। ग्राम से जनपद तक खेल ढांचा मुख्यमंत्री ने कहा कि हर कमिश्नरी में एक स्पोर्ट्स कॉलेज की स्थापना की जा रही है। विभिन्न खेलों के लिए इन कॉलेजों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किए जाएंगे। पूर्व ओलंपियन/कॉमनवेल्थ/एशियाड/नेशनल गेम्स मेडलिस्टों को कोच बनाकर नई प्रतिभाओं को तराशा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर ग्राम पंचायत में खेल का मैदान, हर विकासखंड पर मिनी स्टेडियम और हर जनपद में एक स्टेडियम निर्माण की कार्यवाही युद्धस्तर पर जारी है। ओपन जिम के निर्माण व युवा कल्याण विभाग के माध्यम से युवक मंगल दल और महिला मंगल दल को स्पोर्ट्स किट उपलब्ध कराई जा रही हैं। यूपी की हॉकी विरासत को किया याद मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने हॉकी में अनेक दिग्गज दिए हैं। मेजर ध्यानचंद, के. डी. सिंह ‘बाबू’, मोहम्मद शाहिद, रवींद्र पाल, सैयद अली, डॉ. आर. पी. सिंह, सुजीत कुमार, रजनीश मिश्रा, मोहम्मद शकील, देवेश चौहान, एम. पी. सिंह, जगवीर सिंह, विवेक सिंह, राहुल सिंह, तुषार खांडेकर, दानिश मुर्तजा, ललित उपाध्याय, राजकुमार पाल, रंजना श्रीवास्तव, मंजू बिष्ट, पुष्पा श्रीवास्तव, रजनी जोशी, वंदना कटारिया, रितुषा कुमारी आर्या जैसे हॉकी खिलाड़ियों प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाया। पेरिस ओलंपिक में भारतीय टीम को मेडल दिलाने वाले ललित उपाध्याय और राजकुमार पाल उत्तर प्रदेश की ही देन हैं। खेल से बनता है सशक्त भारत सीएम ने कहा कि खाली दिमाग शैतान का घर होता है। व्यक्ति यदि खेलकूद से जुड़ेगा तो राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव विकसित होगा। शरीर के साथ मन भी तंदुरुस्त रहेगा और वह स्वस्थ शरीर-स्वस्थ मस्तिष्क के साथ सशक्त भारत के निर्माण में योगदान देगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खेल दिवस के उपरांत 17 सितंबर से 2 अक्टूबर के बीच देशभर में सांसद खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इससे पूर्व विधायक खेलकूद प्रतियोगिताएं खेल एवं युवा कल्याण विभाग आयोजित कराएगा। खिलाड़ियों को मिल रहा रोजगार मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में सरकारी नौकरियों में खिलाड़ियों के लिए 2 प्रतिशत हॉरिजेंटल आरक्षण लागू किया गया है। अब तक 500 खिलाड़ियों को उत्तर प्रदेश पुलिस बल और अन्य विभागों में समाहित किया जा चुका है। उत्तर प्रदेश के खेल सचिव सुहास एल. वाई. का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने कहा कि वह स्वयं पैरालंपिक में मेडल जीत चुके खिलाड़ी हैं, जो खिलाड़ियों के हित में नीतिगत सुधार कर रहे हैं। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री गिरीश चंद्र यादव, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, सांसद ब्रजलाल, संजय सेठ, विधायक जय देवी, योगेश शुक्ला, इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह समेत अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।   सीएम योगी ने हॉकी स्टिक उठाई, शॉट लगाया और फिटनेस की शपथ दिलाई सीएम योगी ने कार्यक्रम के दौरान हॉकी स्टिक से गेंद को हिट करके स्टेट हॉकी प्रतियोगिता का भी शुभारंभ किया। यही नहीं, उन्होंने कुछ देर तक हॉकी मैच भी देखा। इससे पहले मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों को खेल गतिविधियों में सम्मिलित होने और फिटनेस के प्रति जागरूक रहने की शपथ भी दिलाई। उन्होंने शपथ दिलाई, 'मैं शपथ लेता हूं कि मैं खुद को सार्वजनिक रूप से फिट, मानसिक रूप से मजबूत और भावनात्मक रूप से संतुलित बनाऊंगा। मैं अपने परिवार और दोस्तों को हर दिन एक खेल और फिटनेस गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करूंगा। मैं हर खेल में उत्कृष्टता, सम्मान और खेल के अलौकिक मूल्यों को आत्मसात करने का प्रयास करूंगा।' मुख्यमंत्री ने सभी खिलाड़ियों का परिचय भी प्राप्त किया और उनके खेल और पढ़ाई के विषय में भी बात की। मैच के अंत … Read more

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का दावा- बंगाल में सुनियोजित घुसपैठ का खेल

कोलकाता  पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीते कुछ सप्ताह में लगातार यह आरोप लगाए हैं कि केंद्र सरकार के द्वारा बंगाली भाषाओं को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने इसे ‘भाषाई आतंकवाद’ का नाम भी दिया है। इस बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बड़ा दावा किया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को कहा है कि पश्चिम बंगाल और आस-पास के कुछ क्षेत्रों में व्यवस्थित तरीके से घुसपैठ करवाया जा रहा है और इस काम के लिए कई एजेंट भी सक्रिय हैं। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में भारत के नागरिक ना होने के संदेह में बंगाली भाषी मुस्लिम प्रवासियों को हिरासत में लिए जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई चल रही थी। इस दौरान केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शुक्रवार को कहा कि सिर्फ बंगाल में ही नहीं बल्कि कई इलाकों में घुसपैठ हो रहा है। उन्होंने रोहिंग्याओं का भी जिक्र किया। तुषार मेहता ने आगे बताया," रोहिंग्याओं के साथ-साथ एक व्यवस्थित गिरोह भी है। कई आतंकवादी भी घुसपैठ कर रहे हैं।" वहीं याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने सुनवाई के दौरान कहा कि एक महिला को बिना जांच किए देश से बाहर निकाल दिया गया। उन्होंने कहा, “वह गर्भवती है। सिर्फ इसलिए कि वह बंगाली बोलती है, सरकार कह रही है कि वह एक बांग्लादेशी है। इस देश में कोई भी अधिकारी किसी व्यक्ति को बिना यह जांच किए सीमा पार कैसे धकेल सकता है कि वह विदेशी है या नहीं? ऐसा करना अंतर्राष्ट्रीय कानून के खिलाफ है।” केंद्र सरकार से सवाल इसके बाद जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की पीठ ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि क्या लोगों को भाषा के आधार पर उठाया जा रहा है। पर एसजी मेहता ने जवाब दिया कि भाषा के आधार पर किसी को निशाना नहीं बनाया जा रहा है। कोर्ट ने केंद्र से पूछा, "दो महत्वपूर्ण मसले हैं। एक राष्ट्र की सुरक्षा और अखंडता, और यह सर्वोपरि है। दूसरा प्रश्न विरासत और संस्कृति का है। पंजाब और बंगाल दोनों जगह भाषा एक ही है पर सीमा पर विभाजन है। हम चाहते हैं कि आप अपना रुख स्पष्ट करें।" इस पर जवाब देते हुए SG मेहता ने कहा कि फिर प्रभावित लोगों के बजाय कोई समूह ही सुप्रीम कोर्ट क्यों आते हैं? लोग व्यक्तिगत रूप से लोग क्यों नहीं आते? यह एक समस्या है। भारत दुनिया के अवैध प्रवासियों की जगह नहीं है। एक व्यवस्था होती है। उन्हें बताना होगा कि वे भारत में क्यों रह रहे हैं।"  

अंबानी का नया दांव! जानिए किस बिजनेस में उतरी नई कंपनी

मुंबई  मुकेश अंबानी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज की वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में नई कंपनी का ऐलान किया है। मुकेश अंबानी ने रिलायंस इंटेलिजेंस (Reliance Intelligence) नामक एक पूरी तरह से रिलायंस की स्वामित्व वाली नई सब्सिडियरी की घोषणा की। इसका लक्ष्य है भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व के केंद्र में स्थापित करना है। मुकेश अंबानी ने क्या कहा रिलायंस देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडियरी कंपनी ‘रिलायंस इंटेलिजेंस’ स्थापित करेगी। मुकेश अंबानी ने कहा, 'मुझे गर्व है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पहले से ही रिलायंस के डीप-टेक बिजनेस में बदलने की ओर है। इस एजेंडे को और भी अधिक फोकस और गति प्रदान करने के लिए आज मुझे रिलायंस इंटेलिजेंस नामक एक नई पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी के गठन की घोषणा करते हुए अधिक खुशी और सम्मान का अनुभव हो रहा है। इन 4 बातों पर कंपनी का फोकस 1. AI-Ready डेटा सेंटर: बड़े पैमाने पर (gigawatt-scale) एआई तैयार डेटा सेंटर बनाना, जो ग्रीन एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) से चलेंगे, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर AI ट्रेनिंग और इनफरेंस हो सके। इन सेंटरों का निर्माण पहले से ही गुजरात के जामनगर में शुरू हो चुका है। 2. वैश्विक साझेदारी: रिलायंस इंटेलिजेंस दुनिया की प्रमुख टेक कंपनियों और ओपन-सोर्स कम्युनिटीज़ के साथ मिलकर काम करेगा। इसका मकसद है AI सिस्टम्स में विश्वसनीयता, भारत के मानकों और मजबूत सप्लाई चेन लाना। 3. AI सेवाएं : रिलायंस इंटेलिजेंस का नए यूनिट का लक्ष्य होगा कि आम जनता, छोटे व्यवसाय और बड़े उद्योगों को आसान और भरोसेमंद AI-सक्रिय सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही शिक्षा, कृषि जैसे राष्ट्रीय महत्व वाले क्षेत्रों के लिए विशेष AI-आधारित समाधान तैयार किए जाएं। 4. टैलेंट को आगे बढ़ाना: रिलायंस इंटेलिजेंस एक ऐसा मंच भी होगा जहां दुनिया भर के रिसचर्स, इंजीनियर्स, डिजाइनर और प्रोडक्ट्स बिल्डर मिलकर काम करें, ताकि विचार नए उत्पादों और इनोवेशन में बदल सकें। भारत और दुनिया के लिए उपयोगी समाधान बन सकें।  

बरसाना में प्रेमानंद महाराज ने लगाई गहबर वन की परिक्रमा, राधा अष्टमी की तैयारियां शुरू

मथुरा  प्रेमानंद महाराज शुक्रवार को सुबह राधारानी के धाम बरसाना पहुंचे और गहबर वन की परिक्रमा लगाई। उन्होंने राधारानी के मंदिर में जाकर दर्शन कर लाडली जू का आशीर्वाद लिया। प्रेमानंद महाराज के आने की खबर लगते ही स्थानीय लोग और राधा जनमोत्सव का दर्शन करने पहुंचे भक्त उनके दर्शनों के लिए उमड़ पड़े। चारों तरफ राधारानी के जयकारे गुंजायमान हो उठे। प्रेमानंद महाराज ने भी राधा रानी के खूब जय कार्य लगाए। बता दें कि राधा अष्टमी से पहले प्रेमानंद महाराज बरसाना पहुंचे हैं। राधा अष्टमी महोत्सव के लिए 16 घंटे खुला रहेगा मंदिर बरसाना में श्री राधाष्टमी महोत्सव मनाया जा रहा है। इस दौरान अभिषेक के दर्शन करीब एक घंटे तक श्रद्धालुओं को कराए जाएंगे। करीब सोलह घंटे तक राधारानी मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खुला रहेगा। जिला प्रशासन कि व्यवस्था के अनुरूप इस बार एकल मार्ग के चलते श्रद्धालुओं की भीड़ को राधारानी मंदिर की सुदामा चौक की सीढ़ीयों से प्रवेश कराया जाएगा। वहीं जयपुर मंदिर मार्ग से श्रद्धालुओं को उतारा जाएगा। सखी ललिताजी का जन्मोत्सव आज श्रीराधारानी की नगरी बरसाना में राधाजी की अष्ट सखियों में प्रमुख सखी ललिता जी का जन्मोत्सव ऊंचागांव स्थित ललिता मंदिर सहित बरसाना में भी धूमधाम से 29 अगस्त को मनाया जा रहा है। कस्बे से दो किमी दूर स्थित ऊंचागांव के ललिताजी मंदिर में मंदिर के पीठाधीश्वर कृष्णानंद तैलंग उर्फ सूसठ महाराज के निर्देशन में राधा जी की प्रधानसखी ललिता जी का जन्मोत्सव 29 अगस्त को मनाया जा रहा है। इसके अलावा राधाजी के गांव बरसाना में सुदामा चौक स्थित अष्टसखी मंदिर और लाडलीजी मंदिर में मध्याह्न 12 बजे ललिताजी का जन्मोत्सव मनाया। इस अवसर पर ऊंचागांव व बरसाना के मंदिरों में जन्माभिषेक और मंगल गीत गायन हुआ।  

ट्रंप की भारत से खुन्नस की असली वजह का खुलासा, पाकिस्तान भी आ गया बीच में

वाशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत पर भारी टैरिफ की वजह रूसी तेल बताते हैं। हालांकि, इसके और भी कई कारण सामने आ रहे हैं। हाल ही में आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस मामले में ट्रंप की व्यक्तिगत नाराजगी है और इसके तार भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष विराम से जुड़े हैं। हालांकि, इसे लेकर भारत या अमेरिका की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। वित्तीय सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनी जैफरी की एक रिपोर्ट में कहा गया है, 'टैरिफ मुख्य रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति की व्यक्तिगत नाराजगी का नतीजा हैं कि उन्हें भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी को खत्म करने में भूमिका निभाने का मौका नहीं मिला।' इसमें कहा गया है कि ट्रंप कथित तौर पर उम्मीद लगाए बैठे थे कि उन्हें मध्यस्थ बनने का मौका मिलेगा। भारत ने लगातार कहा है कि संघर्ष विराम में किसी तीसरे देश की भूमिका नहीं थी और वो द्विपक्षीय था। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारी आर्थिक लागत के बाद भी इस रेखा को बनाए रखा गया, जिसके कारण अमेरिका के राष्ट्रपति को अपनी प्रतिष्ठा मजबूत करने का मौका नहीं मिल पाया। साथ ही रिपोर्ट में कहा गया है कि मौका नहीं मिलने के कारण उन्हें संभावित रूप से नोबेल पुरस्कार जैसी मान्यता का मौका नहीं मिला। 22 अप्रैल को जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारतीय सेना ने 7 मई पाकिस्तान में घुसकर ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया था। इसके तहत पड़ोसी मुल्क में मौजूद आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया था। जवाब में पाकिस्तान ने भी कार्रवाई की और दोनों पक्षों के बीच जल्द ही संघर्ष विराम हो गया था। भारत ने साफ किया था कि पाकिस्तान के डीजीएमओ के अनुरोध पर सीजफायर किया गया था। जबकि, ट्रंप दावा करते हैं कि उन्होंने व्यापार के जरिए भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम कराया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद में भी साफ कर चुके हैं इस प्रक्रिया में किसी तीसरे देश की भूमिका नहीं रही है। कृषि भी है वजह रिपोर्ट में कृषि क्षेत्र का भी जिक्र है। इसमें कहा गया है कि कोई भी भारतीय सरकार आयात के लिए कृषि क्षेत्र से समझौता नहीं करेगा, क्योंकि इसके कई दुष्परिणाम होंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि 25 करोड़ किसान और मजदूर खेती पर निर्भर है। इसमें कहा गया है कि भारत का 40 फीसदी वर्कफोर्स कृषि क्षेत्र में हैं। खबरें थीं कि अमेरिका भारतीय बाजार में अपने कृषि और डेयरी उत्पादों के लिए जगह चाह रहा था। हालांकि, इसे लेकर सरकार ने आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल भी साफ कर चुके हैं देश के हित को पहले रखा जाएगा। वहीं, पीएम मोदी ने भी एक कार्यक्रम में कहा था कि भारतीय किसानों और मछुआरों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।  

महाकुंभ में अनुपस्थित रहने पर मोहन भागवत का बड़ा खुलासा

नई दिल्ली साल की शुरुआत में प्रयागराज में आयोजित हुए महाकुंभ में करोड़ों भक्तों ने संगम में स्नान किया। इसमें राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक शामिल थे, लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत महाकुंभ में स्नान के लिए नहीं पहुंचे। ऐसे में उस समय लोगों ने सवाल भी किया कि आखिर मोहन भागवत महाकुंभ क्यों नहीं गए। अब आरएसएस चीफ भागवत ने खुद इसकी वजह बताई है। उन्होंने कहा है कि हम लोगों को जहां बताया जाता है, वहां जाते हैं। हमें बताया गया था कि वहां बहुत भीड़ होगी। वहां संघ के लोग थे और कोलकाता में संगम का जल मंगवाकर स्नान किया था। आरएसएस के 100 साल पूरे होने पर दिल्ली के विज्ञान भवन में तीन दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन मोहन भागवत से सवाल किया गया, ''पूरा भारत कुंभ में उमड़ा, लेकिन आप इससे दूर रहे, ऐसा क्यों?'' इस पर भागवत ने कहा, ''ऐसा इसलिए, क्योंकि हम लोगों को जहां बताया जाता है, वहां जाते हैं। मैं यहां इसलिए हूं और आपसे बात कर रहा हूं, क्योंकि हमारे लोगों ने तय किया कि यहां कार्यक्रम होना है और आपको बोलना है। मैंने यह भी कहा कि पिछली बार मैंने बोला था तो किसी अन्य लोगों से कहो। लेकिन वे नहीं माने तो मुझे करना पड़ा। ऐसे ही कुंभ में मैंने डेट निकाली थी आने की। वहां हमारे सभी अधिकारी गए थे। वहां संघ था, लेकिन मैं नहीं था। क्योंकि हमको बताया गया कि उस समय बहुत भीड़ रहेगी।'' उन्होंने आगे कहा, ''अन्य कार्यक्रम जो आगे-पीछे तारीख में हैं, उसमें डिस्टर्ब हो सकता है, आप मत आइए। मैंने कहा कि पुण्य सबलोग ले रहे हैं, मुझे आप वंचित कर रहे हो। कम से कम मुझे पानी भेज दो कोलकाता में। ऐसे में कृष्णगोपाल जी ने मेरे लिए कुंभ का जल भेजा और मौनी अमावस्या के दिन उस जल से स्नान किया। संघ अगर कहेगा कि नर्क में जाओगे तो मैं जाऊंगा।'' बता दें कि इस साल जनवरी-फरवरी में यूपी के प्रयागराज में संगम के तट पर महाकुंभ आयोजित किया गया था। यूपी सरकार न दावा किया था कि इसमें देश-दुनिया से 66 करोड़ से ज्यादा भक्तों ने पवित्र संगम के जल से स्नान किया था।  

कांग्रेस ऑफिस पर BJP का हल्ला बोल, मारपीट-तोड़फोड़ का आरोप

पटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दरभंगा में कांग्रेस नेता मोहम्मद नौशाद के मंच से मां की गाली देने से भड़के भाजपा कार्यकर्ता शुक्रवार की सुबह पटना में सड़कों पर उतर आए और बिहार कांग्रेस के दफ्तर सदाकत आश्रम पर हमला बोल दिया। नीतीश कुमार की सरकार में बीजेपी के मंत्री नितिन नबीन और संजय सरावगी के नेतृत्व में कांग्रेस दफ्तर तक मार्च गया था, जो वहां उग्र हो गया। भाजपा के कार्यकर्ता सदाकत आश्रम के अंदर घुस गए। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा वालों ने दफ्तर में मौजूद लोगों से मारपीट की और कई गाड़ियों में तोड़फोड़ की है। कांग्रेस का आरोप है कि मंत्री और उनके बॉडीगार्ड हमले में शामिल थे जबकि पुलिस मिली हुई थी। विपक्षी दलों के महागठबंधन की वोटर अधिकार यात्रा के दौरान बुधवार को दरभंगा में राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के स्वागत में कांग्रेस नेता नौशाद के मंच से पीएम को मां की गाली दी गई थी। गुरुवार देर रात आरोपी रिजवी को गिरफ्तार कर लिया गया है। शुक्रवार को इसी बात को लेकर पटना में कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। बीजेपी नेता और कार्यकर्ता पटना के कुर्जी अस्पताल से सदाकत आश्रम तक विरोध मार्च निकाला। कांग्रेस दफ्तर पहुंचने के बाद कांग्रेस और बीजेपी के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। फिर मार्च में शामिल भाजपा कार्यकर्ता सदाकत आश्रम में ही घुस गए। इस पर कांग्रेस वर्कर भी उग्र हो गए। दोनों ओर से लाठी और डंडे चले हैं। सदाकत आश्रम में खड़ी गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए गए हैं। झंडे वाले डंडे से मारपीट में दोनों और से कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। पटना जिला के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष परवेज अहमद ने आरोप लगाया कि पुलिस भाजपा वालों के साथ मिली हुई थी। मंत्री के बॉडीगार्ड भी मारपीट कर रहे थे। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा वालों ने सदाकत आश्रम में खड़े एक ट्रक और तीन कार का शीशा फोड़ दिया। उस समय कांग्रेस मुख्यालय में करीब 15 कर्मचारी थी। इन्होंने अंदर घुसे भाजपाइयों का विरोध किया तब भिड़ंत हुई। प्रदर्शनकारियों के पत्थर और डंडे से सेवादल के कार्यालय मंत्री विपिन झा और पूर्व जिलाध्यक्ष परवेज अहमद का माथा फट गया। कांग्रेस ने कहा है कि दफ्तर के स्टाफ विपिन और दिनेश शंकर दास समेत अन्य कर्मचारियों को भी पीटा गया है। पुलिस इस झड़प के बाद पहुंची, तब भाजपा कार्यकर्ता वहां से हटे। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि वहां पहले से चार-पांच पुलिसकर्मी थे लेकिन मूकदर्शक बने रहे। प्रदर्शनकारियों ने बस को क्षतिग्रस्त किया मार्च में शामिल मंत्री संजय सरावगी ने कहा कि पीएम की दिवंगत माता को गालियां दी गईं और विरोध पर कांग्रेस के गुंडों ने भाजपा के जुलूस पर हमला कर दिया। सदाकत आश्रम के अंदर से पत्थर चलाए गए, जिसमें हमारे कई कार्यकर्ता जख्मी हो गए हैं। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मंत्री नितिन नबीन ने कहा कि देश का अपमान करना कांग्रेस का चरित्र है। पहले राहुल गांधी ने पीएम के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग किया और उसके बाद उनके कार्यकर्ता भी गाली देने लगे। यह देश का अपमान है, जिसे कोई सहन नहीं करेगा। नितिन नबीन ने कहा कि कांग्रेस ऑफिस में पहले से पत्थर रखे गए थे। हमारे कई कार्यकर्ता जख्मी हैं। लेकिन सही समय पर वोट के चोट से उन्हें जवाब दिया जाएगा।

क्रिकेट का कुख्यात ‘थप्पड़ कांड’ 17 साल बाद आया सामने, हरभजन-श्रीसंत चर्चा में

नई दिल्ली  आईपीएल के इतिहास की सबसे बड़ी कॉन्ट्रोवर्सी की बात हो और उसमें हरभजन सिंह और श्रीसंत का 'थप्पड़ कांड' शामिल ना हो ऐसा हो ही नहीं सकता। यह घटना आईपीएल के पहले सीजन के दौरान घटी थी जब मुंबई इंडियंस को पंजाब किंग्स के हाथों मोहाली के मैदान पर करारी हार का सामना करना पड़ा था। 25 अप्रैल 2008 को हुए इस मुकाबले में मुंबई की कप्तान हरभजन सिंह कर रहे थे। पंजाब ने उन्हें 66 रनों से धूल चटाई थी। मैच खत्म होने के कुछ ही देर बाद, कैमरों ने श्रीसंत को रोते हुए देखा। फिर पता चला था कि हरभजन सिंह ने श्रीसंत को थप्पड़ लगाया है। मगर कभी उस थप्पड़ का वीडियो किसी ने नहीं देखा।   मगर अब इस घटना के 17 साल बाद सोशल मीडिया हरभजन सिंह के थप्पड़ कांड का वीडियो सामने आया है। फैंस इस वीडियो को देखकर काफी हैरान है। वीडियो में देखने को मिल रहा है, मैच खत्म होने के बाद जब दोनों टीमों के खिलाड़ी आपस में हाथ मिला रहे हैं तो हरभजन सिंह ने श्रीसंत को थप्पड़ लगाया। पहले कुछ सेकंड श्रीसंत समझ नहीं पाए उनके साथ क्या हुआ है, मगर फिर जब बाकी खिलाड़ी पास आए तो वह गुस्से में भज्जी की ओर बढ़ने लगे। फिर साथी खिलाड़ियों ने मिलकर मामले को शांत कराया। इस थप्पड़ कांड के बाद हरभजन सिंह को पूरे सीजन के लिए बैन कर दिया गया था और उन पर 5 वनडे मैचों के लिए भी बैन लगाया गया था। हालांकि हरभजन सिंह को आज तक इस बात का पछतावा है। हरभजन सिंह कई बार बड़े मंच पर अपनी गलती स्वीकार कर चुके हैं, मगर श्रीसंत की बेटी की कही हुई एक बात उन्हें आज भी परेशान करती है। ‘मैं आपसे बात नहीं करना चाहती, आपने मेरे पापा को मारा था।’ ये वो लाइन है जो श्रीसंत की बेटी ने हरभजन सिंह से कही थी। भज्जी का मानना है कि वो श्रीसंत की बेटी की नजरों में एक बुरे इंसान है और वह अपनी इमेज सुधारने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जब श्रीसंत की बेटी ने उन्हें ऐसा कहा तो वह रोने लगे थे। भज्जी ने अश्विन के यूट्यूब चैनल पर कहा था, “एक चीज जो मैं अपने जीवन में बदलना चाहता हूं, वह है श्रीसंत के साथ हुई घटना। मैं उस घटना को अपने करियर से हटाना चाहता हूं। यही वह घटना है जिसे मैं अपनी सूची से बदलना चाहता हूं। जो हुआ वह गलत था और मुझे वह नहीं करना चाहिए था जो मैंने किया। मैंने 200 बार माफी मांगी। मुझे सबसे बुरा यह लगा कि उस घटना के सालों बाद भी, मैं हर अवसर या मंच पर माफी मांगता रहा हूं।"

HC का आदेश: हिन्दू शादी को धार्मिक अनुष्ठान नहीं मानेंगे, मंदिरों के पैसे से नहीं होगा निर्माण

चेन्नई  मद्रास हाई कोर्ट ने हाल ही में दिए एक फैसले में कहा है कि हिन्दू विवाह कोई धार्मिक उद्देश्य के लिए किया गया कार्य नहीं है, जिसके लिए मंदिरों के फंड का इस्तेमाल किया जा सके। कोर्ट ने इसके साथ ही राज्य सरकार के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसके तहत सरकार ने पांच मंदिरों को पांच अलग-अलग स्थानों पर मंदिर का फंड इस्तेमाल कर पांच मैरिज हॉल बनाने की अनुमति दी थी। जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम और जस्टिस जी अरुल मुरुगन की पीठ ने कहा कि राज्य सरकार का आदेश हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम, 1959 के नियमों और प्रावधानों का उल्लंघन है और यह 'धार्मिक उद्देश्य' की परिभाषा के तहत नहीं आता है। पीठ ने कहा कि मंदिरों का फंड सिर्फ धार्मिक उद्देश्यों या चैरिटी के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकता है, सामाजिक कल्याण के काम के लिए नहीं। सरकार का फैसला नियमों का उल्लंघन लाइव लॉ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पीठ ने कहा, “इस न्यायालय को इस निष्कर्ष पर पहुंचने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि विवाह समारोहों के लिए किराए पर देने के उद्देश्य से मैरिज हॉल का निर्माण कराया जा रहा है और सरकार का यह फैसला हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम, 1959 के नियमों और प्रावधानों के अंतर्गत नहीं आता है।” मंदिर के पैसे से व्यावसायिक कार्य नहीं कर सकते हाई कोर्ट ने कहा कि इस अधिनियम की धारा 66 के अनुसार, मंदिर अपने सरप्लस फंड का इस्तेमाल व्यावसायिक या लाभ कमाने वाले कामों में नहीं कर सकता बल्कि उसे सिर्फ धार्मिक या धर्मार्थ (चैरिटी) उद्देश्यों तक ही सीमित रखा जाना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि हिंदू विवाह, सिर्फ एक संस्कार है, धार्मिक कार्यकलाप नहीं। कोर्ट ने कहा कि यह एक ऐसा रीति-रिवाज है जो कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों से बंधा होता है, इसलिए इसे धार्मिक उद्देश्य नहीं माना जा सकता। बिना भवन योजना मंजूरी के जारी किया गया फंड याचिकाकर्ता ने सरकारी आदेशों को चुनौती देते हुए कहा था कि मंदिर के धन का उपयोग व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकता और यह निर्णय तमिलनाडु हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम, 1959 की धारा 35, 36 और 66 का उल्लंघन है। याचिका में यह भी तर्क दिया गया था कि विवाह हॉल के निर्माण के लिए कोई भवन योजना मंजूर नहीं की गई थी, बावजूद इसके मंदिर फंड से धनराशि जारी कर दी गई थी। दूसरी ओर, अतिरिक्त महाधिवक्ता ने तर्क दिया कि हिंदू विवाह एक धार्मिक कार्यकलाप है और यह निर्णय हिंदुओं को कम खर्च में विवाह संपन्न कराने में सहायता करने के लिए लिया गया था। यह भी तर्क दिया गया कि विवाह हॉल का निर्माण मंदिर गतिविधि के लिए भवन निर्माण के अंतर्गत आता है और अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत है लेकिन हाई कोर्ट ने उन दलीलों को खारिज कर दिया।  

हरियाणा सरकार की नई योजना, हर परिवार की 3 महिलाएं भी सभी लाभार्थी, एज-इनकम की शर्त से कुछ महिलाएं बाहर

चंडीगढ़  हरियाणा में लाडे लक्ष्मी योजना के तहत 2100 रुपये कब मिलेंगे? आखिरकार हरियाणा की लाखों महिलाओं के इस सवाल का जवाब आज 28 अगस्त गुरुवार को मिल गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने ऐलान करते हुए बता दिया है कि लाडो लक्ष्मी योजना कब से शुरू होगी। सीएम ने कैबिनेट मीटिंग के फैसले की जानकारी देते हुए ताया कि पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जयंती के मौके पर 25 सितंबर, 2025 को इस योजना को लॉन्च कर दिया जाएगा। इस योजना के तहत महिलाओं के खाते में हर महीने 2100 रुपये भेजे जाएंगे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस योजना का ऐलान करते हुए कहा कि 25 सितंबर, 2025 से राज्य की सभी 23 साल से ज्‍यादा उम्र की लड़कियों व महिलाओं को इस योजना का लाभ मिलेगा। महिलाएं चाहें शादीशुदा हों या फिर अविवाहित, सभी के खाते में 2100-2100 रुपये भेजे जाएंगे। उन्होंने कहा कि कैबिनेट ने दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना को मंजूरी दे दी है। इन महिलाओं के खाते में आएंगे पैसे मुख्यमंत्री ने बताया कि पहले चरण में उन महिलाओं को शामिल किया जाएगा, जिनके परिवार की सालाना कमाई 1 लाख रुपये से कम है। आगे चलकर अन्य आय वर्ग वाले परिवारों को भी इस योजना में शामिल किया जाएगा। क्या होगी पात्रता योजना का फायदा लेने के लिए पात्रता की कुछ शर्तें हैं। सीएम नायब सिंह सैनी ने बताया कि अगर महिला अविवाहित है और अगर विवाहित है तो वह कम से कम 15 साल से हरियाणा की नागरिक होनी चाहिए। इसी तरह विवाहित आवेदक महिला का पति भी 15 साल से हरियाणा का नागरिक होना चाहिए। इस योजना की अच्छी बात है कि एक परिवार से जितनी मर्जी महिलाएं इस योजना का फायदा उठा सकती हैं। इस पर कोई सीमा नहीं है। सीएम ने कहा कि एक परिवार की जितनी भी महिलाएं पात्रता की शर्तें पूरी करेंगी, उन सभी को दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना का फायदा मिलेगा। इन योजनाओं का लाभ मिल रहा है तो नहीं मिलेंगे 2100 रुपये मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि अगर राज्य में चल रही ऐसी 9 योजनाओं का लाभ महिलाओं को पहले से मिल रहा है, जिसमें उन्हें 2100 रुपये प्रति महीने से ज्यादा पैसा मिल रहा है तो उन्हें लाडो लक्ष्मी योजना का लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि मंत्रिमंडल ने फैसला किया है कि अगर कोई स्टेज-3 कैंसर से पीड़ित है, या थैलीसीमिया समेत 54 से ज्यादा दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित हैं, उन्हें अलग से लाडो लक्ष्मी योजना के तहत 2100 रुपये मिलेंगे। उम्र-आय शर्त से बाहर 1 लाख महिलाएं, 20 लाख लाभार्थियों में कौन शामिल हरियाणा की नायब सैनी सरकार ने महिलाओं को 25 सितंबर से 2100 रुपए हर महीने देने की घोषणा की है। सरकार ने दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना के लिए इस बजट में 5 हजार करोड़ का फंड रखा है। योजना का फायदा देने के लिए 23 से 60 की उम्र की शर्त रखी है। ऐसे में योजना के पहले चरण में अभी उम्र व आय की शर्त से हरियाणा में लाभार्थी महिलाओं की संख्या घट गई है। हरियाणा में इनकम की स्लैब बनी हुई हैं। इनमें एक लाख से 1.40 लाख का स्लैब है। स्लैब का लोअर पार्ट गिना जाता है। ऐसे में इस स्लैब की लाभार्थी महिलाओं की संख्या करीब 20 लाख बन रही है। परिवार पहचान पत्र के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में इस इनकम स्लैब में 23 से 60 साल तक की 17 लाख 25 हजार विवाहित महिलाएं हैं। जबकि 23 से 45 साल की 2.75 लाख कुंवारी यानी अविवाहित हैं। सीएम नायब सैनी ने भी कहा कि पहले चरण में करीब 19-20 लाख लाभार्थी होंगी। इनकम कम होने के बावजूद 1 लाख महिलाएं लाभपात्र नहीं एक लाख इनकम की शर्त को पूरा करने के बावजूद करीब 1 लाख महिलाओं को 2100 रुपए का लाभ नहीं मिल पाएगा। क्योंकि इनमें से करीब 45 हजार विधवाएं, 11 हजार निराश्रित, 14 हजार दिव्यांग पेंशन ले रही हैं। इसके अलावा 2500 महिलाएं संविदा कर्मी और 2500 महिलाएं लाडली योजना का पहले से ही लाभ ले रही हैं। 1 लाख से कम की शर्त से सिर्फ 8 लाख ही लाभार्थी बनती अगर प्रदेश सरकार एक लाख रुपए से कम इनकम का दायरा तय करती तो हरियाणा की करीब 8 लाख महिलाएं ही योजना की लाभार्थी बन पातीं। एक लाख रुपए करने से लाभपात्र महिलाओं की संख्या 20 लाख पहुंच गई। CM नायब सैनी ने कहा कि योजना के अगले चरण में इनकम का दायरा बढ़ाया जाएगा। यदि इसे 1.80 लाख किया जाता है तो करीब 10 लाख लाभार्थी बढ़ जाएंगी। दिल्ली में 18 साल तो बाकी राज्यों में 21 साल की महिलाओं को लाभ उम्र के मामले में हरियाणा की शर्त अन्य राज्यों के मुकाबले टफ मानी जा सकती है। पड़ोसी दिल्ली में भाजपा सरकार ने 18 साल से अधिक आयु की युवतियों को डायरेक्टर कैश बेनिफिट योजना का पात्र माना है। हालांकि वहां अभी योजना का लाभ मिलना शुरू नहीं हुआ है। महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, ओडिसा, झारखंड, छत्तीसगढ़ में योजना के लाभ के लिए न्यूनतम उम्र 21 साल रखी गई है। आय की टफ शर्त ने भी हरियाणा में घटाए लाभार्थी हरियाणा में 1 लाख वार्षिक आय वाले परिवारों की महिलाओं को लाभ मिलेगा। जबकि महाराष्ट्र व मध्य प्रदेश में 2.5 लाख रुपए वार्षिक आय वाली परिवारों की महिलाओं को भी लाभ मिल रहा है। कर्नाटक में राशन कार्ड में सिर्फ परिवार की मुखिया महिला को लाभ मिलता है। जबकि हरियाणा में एक परिवार से 3 महिलाओं तक को लाभ मिलेगा। हरियाणा में यदि सभी BPL परिवारों को योजना का लाभपात्र माना जाता तो करीब 42 लाख परिवारों की महिलाएं लाभार्थी होतीं। हरियाणा में लाडो लक्ष्मी योजना क्या है हरियाणा में विधानसभा चुनावों से पहले बीजेपी ने ऐलान किया था कि लाडो लक्ष्मी योजना के तहत राज्य की पात्र महिलाओं के खाते में हर महीने 2100-2100 रुपये भेजे जाएंगे। इसके लिए बजट का भी ऐलान कर दिया गया था। माना जा रहा है कि राज्य की करीब 50 लाख महिलाओं को इस योजना का लाभ मिलेगा। लाडो लक्ष्मी योजना 2025 का बजट कितना है हरियाणा सरकार ने 2025 के बजट में लाडो लक्ष्मी योजना के लिए अलग से बजट का भी … Read more