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CM सैनी बोले—कांग्रेस और नेताओं से अच्छी भाषा की उम्मीद कैसे करें

हिसार  हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी  जोधपुर पहुंचे. एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कांग्रेस और विपक्ष पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब पूरी तरह से कमजोर हो चुकी है और उसके नेता निराशा व हताशा की स्थिति में हैं. जानकारी के अनुसार, सैनी ने कांग्रेस पर तीखा वार करते हुए कहा कि “कांग्रेस नेताओं का जन्म भ्रष्टाचार की दलदल में हुआ है और राहुल गांधी व तेजस्वी यादव जैसे नेता उसी दलदल में पनपे हैं. इसलिए उनकी भाषा और सोच कभी भी सकारात्मक नहीं हो सकती.” कांग्रेस नेताओं का जन्म भ्रष्टाचार की दलदल में हुआ- CM सैनी  इस मामले में उन्होंने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना कांग्रेस शासन से करते हुए कहा कि आज मोदी जी के नेतृत्व में पूरी दुनिया भारत को सम्मान की दृष्टि से देख रही है, जबकि कांग्रेस के कार्यकाल में देश को भ्रष्टाचार की नजर से देखा जाता था. इसके साथ ही उन्होंने राहुल गांधी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि “राहुल गांधी वोट चोरी की बात करते हैं, लेकिन वोट चोरी तो कांग्रेस के डीएनए में है. जब सरदार वल्लभभाई पटेल को प्रधानमंत्री बनने के लिए 14 वोट मिले और नेहरू जी को मात्र एक वोट, तब भी कांग्रेस ने वोट चोरी कर नेहरू जी को प्रधानमंत्री बना दिया था.”उन्होंने कहा कि गरीब का बेटा बार-बार प्रधानमंत्री बन रहा है, यही कांग्रेस को बर्दाश्त नहीं होता. इसी कारण वे मोदी जी की माता जी तक का अपमान करने वाले बयान देते हैं. हमारी पवित्र धरती को कांग्रेस ने कलंकित किया- CM सैनी  इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसे नेताओं को पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए. कांग्रेस बार-बार संविधान खतरे में होने की बात करती है, लेकिन देश ने हर बार उनके इस झूठ को नकारा है और आगे भी नकारेगा. उन्होंने कांग्रेस पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि “जिस पवित्र धरती से महात्मा बुद्ध और चाणक्य जैसे महान संत हुए, जहां गुरु गोविंद सिंह का प्रकाश पर्व हुआ और जहां मां सीता का जन्म हुआ, उस धरती को कांग्रेस ने कलंकित किया है.” जोधपुर में नायब सिंह का यह दौरा भाजपा कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने और कांग्रेस पर सीधा हमला बोलने के रूप में देखा जा रहा है.

जापानी पीएम के साथ ट्रेन राइड पर निकले PM मोदी, भारतीय ड्राइवरों से बातचीत

टोक्यो  जापान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम शिगेरु इशिबा के साथ बुलेट ट्रेन का भी लुत्फ उठाया। साथ ही उन्होंने बुलेट ट्रेन ड्राइविंग की ट्रेनिंग लेने वाले भारतीयों से भी मुलाकात की। जापानी प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर तस्वीर शेयर करते हुए कहा, प्रधानमंत्री मोदी के साथ सेंदाई की यात्रा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोद ने ALFA-X ट्रेन को भी देखा और जानकारी ली। बता दें कि भारतीय ड्राइवर जेआर ईस्ट के साथ इस समय ट्रेनिंग कर रहे हैं। जेआर ईस्ट जापान की एक रेलवे कंपनी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्लैटफॉर्म पर ही उनसे मुलाकात की और फोटो भी खिंचवाईं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को जापान के मियागी प्रांत के सेंडाई में स्थित एक सेमीकंडक्टर संयंत्र गए। इससे पहले प्रधानमंत्री ने जापान के 16 प्रांतों के गवर्नर से मुलाकात की और भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी के तहत ‘राज्य-प्रांत सहयोग’ को मजबूत किए जाने का आह्वान किया। जापान के विदेश मंत्रालय (एमईए) ने एक बयान में यह जानकारी दी। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘तोक्यो में आज सुबह जापान के 16 प्रांतों के गवर्नर के साथ बातचीत की। राज्य-प्रांत सहयोग भारत-जापान मैत्री का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। यही कारण है कि कल 15वें वार्षिक भारत-जापान शिखर सम्मेलन के दौरान इस पर अलग से एक पहल की गई।’ उन्होंने कहा, ‘व्यापार, नवोन्मेष, उद्यमिता आदि क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। ‘स्टार्टअप’, प्रौद्योगिकी और एआई जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्र भी लाभकारी हो सकते हैं।’ विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, मोदी ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि सदियों पुराने सभ्यतागत संबंधों पर आधारित भारत-जापान संबंध निरंतर मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि तोक्यो और नयी दिल्ली पर परंपरागत रूप से ध्यान केंद्रित करने से आगे बढ़कर राज्य-प्रांत संबंधों को नए सिरे से बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राज्य-प्रांत साझेदारी पहल व्यापार, प्रौद्योगिकी, पर्यटन, कौशल, सुरक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में सहयोग को बढ़ावा देगी। प्रधानमंत्री ने जापान के विभिन्न प्रांतों के गवर्नर और भारतीय राज्य सरकारों से विनिर्माण, गतिशीलता, अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे, नवोन्मेष, ‘स्टार्ट-अप’ और लघु व्यवसायों में सहयोग को मजबूत करने का आह्वान किया। पहलगाम हमले पर क्या बोले पीएम मोदी और जापानी प्रधानमंत्री इशिबा? भारत और जापान ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की है. दोनों देशों ने कहा कि हमले के जिम्मेदार आतंकियों, उनके आयोजकों और फाइनेंसर्स को तुरंत न्याय के कटघरे में लाया जाए. यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के बीच शिखर वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में दिया गया. 'सफल दौरे से मिले शानदार नतीजे', PM मोदी की यात्रा के दौरान भारत-जापान के बीच ये समझौते हुए पीएम मोदी की यात्रा के दौरान भारत और जापान के बीच कई समझौते हुए. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक एक्स पोस्ट में इसकी जानकारी दी जिसे प्रधानमंत्री ने रीपोस्ट किया. प्रधानमंत्री मोदी ने जापान के गवर्नरों से मुलाकात की अपने दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान के अलग-अलग प्रीफेक्चरों (राज्य-स्तर की इकाइयों) के गवर्नरों से मुलाकात की. इस बातचीत में 16 गवर्नरों ने हिस्सा लिया. पीएम मोदी ने कहा कि भारत और जापान के रिश्ते बहुत पुराने सभ्यता से जुड़े हुए हैं और आज भी लगातार मजबूत हो रहे हैं. उन्होंने बताया कि अब जरूरत है कि दिल्ली और टोक्यो तक सीमित रिश्तों को आगे बढ़ाकर भारत के राज्यों और जापान के प्रीफेक्चरों के बीच सीधा सहयोग बढ़ाया जाए. इसके लिए 15वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में 'स्टेट-प्रीफेक्चर पार्टनरशिप' की शुरुआत की गई थी, जो ट्रेड, तकनीक, पर्यटन, सुरक्षा, स्किल और कल्चर जैसे क्षेत्रों में रिश्तों को और मजबूत करेगी. मोदी ने भारतीय राज्यों और जापानी गवर्नरों से कहा कि वे मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, स्टार्टअप्स, छोटे उद्योग और नए इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में साझेदारी करें. उन्होंने कहा कि जैसे जापान के हर प्रीफेक्चर की अपनी खास ताकत है, वैसे ही भारत के हर राज्य की अपनी अलग क्षमता है. अगर दोनों मिलकर काम करें तो बड़ा फायदा होगा. मोदी ने खासतौर पर युवाओं और कौशल विकास के आदान-प्रदान पर जोर दिया और कहा कि जापानी टेक्नोलॉजी और भारतीय टैलेंट साथ आएंगे तो नए अवसर बनेंगे. गवर्नरों ने भी माना कि अगर राज्यों और प्रीफेक्चरों के बीच सीधे रिश्ते बढ़ते हैं तो भारत-जापान के कारोबारी, शैक्षिक, सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंध और मजबूत होंगे.

HC ने तमिलनाडु सरकार को दिया झटका, कहा—मंदिर का पैसा सरकारी नहीं

मदुरै मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को झटका दिया है। कोर्ट की तरफ से कहा गया कि भक्तों द्वारा मंदिर को दान किया गया धन केवल देवता का है। ऐसे में इसका इस्तेमाल केवल मंदिर के किसी काम के लिए या फिर धार्मिक और धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए किया जाना चाहिए। इस फैसले के साथ ही हाई कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा 2023 से 2025 के बीच जारी किए गए उन 5 आदेशों को भी रद्द कर दिया, जिनमें मंदिर के धन का उपयोग करके विवाह मंडपों का निर्माण करने को कहा गया था। मंदिर की संपत्ति और धन को सरकार द्वारा व्यावसायिक रूप से उपयोग करने के खिलाफ दायर याचिका में याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि सरकार के पास मंदिर के धन का उपयोग करने का कोई अधिकार नहीं है। याचिकाकर्ता का तर्क था कि सरकार ने जिन विवाह भवनों का निर्माण मंदिर के पैसे से करवाना चाहती है उसका कोई धार्मिक उद्देश्य नहीं है, क्योंकि इन्हें किराए पर दिया जा रहा है। मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ के न्यायमूर्ति एस.एम सुब्रहमण्यम और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की बेंच ने इस सप्ताह की शुरुआत में यह आदेश पारित किया। पीठ ने कहा कि तमिल नाडु सरकार मंदिर के संसाधनों का उपयोग केवल मंदिरों के रखरखाव और विकास तथा उससे जुड़ी धार्मिक गतिविधियों पर करने के लिए बाध्य है। इसका उपयोग व्यावसायिक रूप से नहीं किया जा सकता। हिंदू विवाह एक संस्कार, धार्मिक उद्देश्य नहीं: मद्रास हाईकोर्ट राज्य सरकार की तरफ से वकील वीरा कथिरावन ने तर्क दिया कि मंदिर के धन का उपयोग समाज के लिए ही किया जा रहा है। जिन भवनों का निर्माण किया गया है, उनमें धार्मिक रीति-रिवाजों के तहत किए जाने वाले हिंदू विवाह को ही अनुमित दी जाएगी। राज्य ने अदालत को आगे बताया कि अभी तक कोई पैसा जारी नहीं किया गया है और सभी प्रस्तावित निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक अनुमति प्राप्त की जाएगी। हालांकि, उच्च न्यायालय ने राज्य के इस तर्क को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसने माना कि हिंदू विवाह को एक संस्कार माना जाता है, लेकिन हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत इसमें संविदात्मक तत्व भी शामिल हैं। इसलिए, हिंदू विवाह एचआर एंड सीई अधिनियम के तहत अपने आप में एक “धार्मिक उद्देश्य” नहीं है कोर्ट ने हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम, 1959 का जिक्र करते हुए कहा कि यह अधिनियम मंदिर के धन को केवल धार्मिक कार्यों या धर्मार्थ उद्देश्यों जैसे की पूजा, अन्नदान, तीर्थ यात्रियों के कल्याण और गरीबों की सहायता के लिए खर्ज करने की अनुमित देता है, न कि किसी ऐसे काम के लिए, जिससे सरकार के राजस्व में वृद्धि हो। संपत्ति पर देवता का अधिकार: HC कोर्ट ने कहा, " भक्तों द्वारा मंदिर या देवता को दान की गई चल और अचल संपत्ति पर देवता का अधिकार होता है। ऐसे में इसका उपयोग केवल मंदिरों में उत्सव मनाने के लिए या मंदिर के रखरखाव के लिए या विकास के लिए इसका उपयोग किया जा सका है। मंदिर के पैसे को सार्वजनिक पैसा या सरकारी पैसा नहीं माना जा सकता। यह पैसा हिंदू धार्मिक लोगों द्वारा दिया जाता है, यह उनके धार्मिक रीति-रिवाजों, प्रथाओं या विचारधाराओं के प्रति उनके भावनात्मक और आध्यात्मिक लगाव के कारण दिया गया है।" अपने इस आदेश के साथ ही अदालत ने चेतावनी भी दी कि मंदिर के धन को स्पष्ट रूस से अनुमति प्राप्त उद्देश्यों के लिए ही खर्च किया जाना चाहिए। अनुमति का दायरा बढ़ाने का प्रयास किया जाता है तो फिर इस धन के दुरुपयोग और गबन का रास्ता खुल जाएगा। अदालत ने कहा कि इस तरह का दुरुपयोग "मंदिर के संसाधनों का दुरुपयोग" होगा और हिंदू श्रद्धालुओं के धार्मिक अधिकारों का भी उल्लंघन होगा, "जो आस्था के साथ मंदिरों में दान करते हैं।"

पूर्व विधायक पेंशन के लिए जगदीप धनखड़ ने दिया आवेदन, विधानसभा में चर्चा

जयपुर. भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने राजस्थान विधानसभा के पूर्व विधायक के रूप में पेंशन के लिए आवेदन दायर किया है. जगदीप धनखड़ 1993 से 1998 तक अजमेर जिले के किशनगढ़ विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक रहे हैं. उन्होंने हाल ही में विधानसभा सचिवालय में पेंशन के लिए आवेदन किया है. सूत्रों के अनुसार, विधानसभा सचिवालय ने उनके आवेदन पर स्वीकृति प्रक्रिया शुरू कर दी है. यदि उनका आवेदन स्वीकृत होता है, तो उन्हें प्रतिमाह 42 हजार रुपये की पेंशन और पूर्व विधायकों को मिलने वाली अन्य सुविधाओं का लाभ प्राप्त हो सकता है. जगदीप धनखड़ का राजनीतिक सफर लंबा और विविध रहा है. वे 1989 से 1991 तक झुंझुनू लोकसभा क्षेत्र से जनता दल के सांसद रहे और चंद्रशेखर सरकार में संसदीय कार्य राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया. इसके बाद 1993 में वे कांग्रेस के टिकट पर किशनगढ़ से विधायक चुने गए. 2019 से 2022 तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल और 2022 से 2025 तक भारत के उपराष्ट्रपति के रूप में उन्होंने अपनी सेवाएं दीं. अब उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने पूर्व विधायक के रूप में पेंशन के लिए आवेदन किया है. पेंशन स्वीकृति की प्रक्रिया राजस्थान विधानसभा सचिवालय ने धनखड़ के आवेदन की जांच शुरू कर दी है. राजस्थान सरकार के नियमों के अनुसार, पूर्व विधायकों को उनके कार्यकाल के आधार पर पेंशन और अन्य सुविधाएं प्रदान की जाती है. धनखड़ के मामले में, उनके 1993-1998 के कार्यकाल को देखते हुए पेंशन की पात्रता निर्धारित की जाएगी. स्वीकृति मिलने पर उन्हें प्रतिमाह 42 हजार रुपये की पेंशन के साथ-साथ चिकित्सा सुविधाएं, यात्रा भत्ता और अन्य लाभ मिल सकते हैं. राजस्थान में पूर्व विधायकों को पेंशन के अलावा कई अन्य सुविधाएं प्रदान की जाती है.जिसमें पूर्व विधायकों और उनके परिवार को मुफ्त चिकित्सा सुविधाएं दी जाती है. इसके अलावा सरकारी कार्यों या विधानसभा से संबंधित यात्राओं के लिए भत्ता दिया जाता है.वहीं विधानसभा द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में भागीदारी और अन्य प्रशासनिक सुविधाएं भी दी जाती है. धनखड़ के आवेदन ने राजस्थान की राजनीति में एक नई चर्चा को जन्म दिया है. उनके इस कदम को उनके लंबे राजनीतिक करियर के एक और अध्याय के रूप में देखा जा रहा है. विधानसभा सचिवालय जल्द ही उनके आवेदन पर अंतिम निर्णय ले सकता है.

पेबल बे फेस 1, बागमुगलिया कटारा हिल्स में आवारा कुत्ते ने बच्चे को काटा

बागमुगलिया बागमुगलिया कटारा हिल्स स्थित पेबल बे फेस 1 में आवारा कुत्तों का आतंक एक बार फिर सामने आया है। ताज़ा घटना में एक बच्चे को आवारा कुत्ते ने काट लिया। स्थानीय निवासियों के अनुसार, निगम की टीम कई बार इन कुत्तों को पकड़ने आती है, लेकिन वहां मौजूद कुछ डॉग लवर्स इन कुत्तों को पकड़ने नहीं देते। निवासियों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं में जिन लोगों ने कुत्तों को पकड़ने से रोका, उन पर भी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

यमन में बड़ा हादसा: इजरायल की एयर स्ट्राइक में हूती नेताओं की मौत का दावा

सना  इजरायल ने यमन राजधानी सना में हूती विद्रोहियों के खिलाफ बड़ा हवाई हमला किया है। इस हमले में हूतियों के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व को बड़ा नुकसान हुआ है। इजरायली टीवी KAN ने यमन के मीडिया का हवाला देते हुए बताया कि इस हमले में हूती प्रधानमंत्री गालिब अल-रहावी और समूह के कई सैन्य अधिकारी मारे गए। इजरायली मीडिया ने इसे यमन के हूतियों पर सबसे बड़ा हमला कहा है। हमला उस वक्त किया गया ये शीर्ष नेता हूती प्रमुख के अल-मलिक हूती का राष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित भाषण देख रहे थे। इस हमले की खबर सबसे पहले हूती समूह से संचालित अल मसीरा टीवी ने दी और फिर रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज और IDF ने भी हमले की पुष्टि की। हालांकि, उन्होंने लक्ष्यों के बारे में नहीं बताया। अपार्टमेंट के अंदर बनाया गया निशाना यमन के अल-जम्हूरिया चैनल ने बताया कि हूती प्रधानमंत्री अल-रहावी अपने कई सहयोगियों के साथ एक अपार्टमेंट में थे, जब उन्हें निशाना बनाया गया। इजरायल के चैनल 12 ने बताया कि हूती रक्षा मंत्री मोहम्मद नासिर अल-अथिफी और चीफ ऑफ स्टाफ मोहम्मद अब्द अल-करीम अल-गमारी के भी इस हमले में मारे जाने की संभावना है। हालांकि, तीनों हूती नेताओं की मौत के बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इजरायली मीडिया ने भी इस बात पर जोर दिया है कि इस समय उनकी स्थिति अज्ञात है। सऊदी अखबार अल-हदथ ने बताया कि इजरायली वायु सेना ने यमनी राजधानी सना में उन घरों को निशाना बनाया, जहां वरिष्ठ अधिकारी छिपे हुए थे। हूती सरकार के रक्षा मंत्री असद अल-शरकाबी की मौत लेकिन यमन की सरकार में रॉयटर के सूत्रों के अनुसार इजरायली हमले में हूती सरकार के रक्षा मंत्री असद अल-शरकाबी की मौत हो गई है। इसी प्रकार से हूती के सैन्य प्रमुख अब्द अल-करीम अल-घामरी भी मारे गए हैं। इजरायल के हमले और उससे हुए नुकसान पर हूती संगठन ने कोई बयान जारी नहीं किया है और न ही इस सिलसिले में पूछे गए सवाल का जवाब दिया है। इजरायल ने किए थे हवाई हमले इजरायली वायुसेना ने कहा है कि लड़ाकू विमानों ने सना के उस परिसर को निशाना बनाया था जहां पर हूती संगठन के प्रमुख लोग एकत्रित थे। खुफिया सूत्रों से जानकारी मिलने के बाद यह हमला किया गया था।  हूती प्रमुख अब्दुल मलिक अल-हाउती का टेलीविजन संबोधन सुनने के लिए कई स्थानों पर एकत्रित संगठन के पदाधिकारियों और लड़ाकों पर हमले किए गए। इसमें मारे गए लोगों के बारे में सूचनाएं एकत्रित की जा रही हैं। हूती गाजा में इजरायली कार्रवाई के विरोध में उल्लेखनीय है कि ईरान समर्थित हूती गाजा में इजरायली कार्रवाई के विरोध में लाल सागर से गुजर रहे जहाजों पर लगातार हमले कर रहे हैं। साथ ही इजरायल पर भी दर्जनों ड्रोन और मिसाइल दाग चुके हैं। अल-हूती का भाषण सुनने के लिए जमा थे नेता इजरायली मीडिया रिपोर्ट में अज्ञात सुरक्षा अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि इजरायल की खुफिया एजेंसियों को पता चला कि रक्षा मंत्री समेत 10 हूती मंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारी समूह के नेता अब्दुल मलिक अल-हूती का एक नियोजित भाषण सुनने के लिए सना के बाहर इकठ्ठा हो रहे थे। इसके बाद इजरायली वायु सेना ने इस बैठक को निशाना बनाकर हमला किया। अल रहावी एक साल से हूतियों के कब्जे वाले यमन के प्रधानमंत्री थे। हालांकि, उन्हें अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं मिली थी।

न उमर, न महबूबा… जम्मू-कश्मीर में हर जगह दिख रहे एकनाथ शिंदे के पोस्टर

श्रीनगर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला हों यो पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, इन दिनों जम्मू-कश्मीर की सड़कों पर इनकी तस्वीर जितनी नहीं दिखती है उससे कहीं शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे की दिख रही है। सीमावर्ती राज्य में शिवसेना अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है। हाल ही में श्रीनगर एयरपोर्ट के पास एक होटल में आयोजित बैठक में करीब 700 लोग शामिल हुए, जिसकी अध्यक्षता खुद महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री एवं शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने की। शिवसेना के स्थानीय नेता याक़ूब कुलगाम के रहने वाले हैं और पहले पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) में थे। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि बैठक से पहले एक रक्तदान शिविर आयोजित किया गया था। उन्होंने कहा, “हमने बहुत सारे होर्डिंग्स लगाए ताकि लोग जान सकें कि शिवसेना कश्मीर में आ गई है। इन होर्डिंग्स के लिए हमने कोई भुगतान नहीं किया। हमारा मकसद था कि लोग इन्हें देखें और चर्चा करें।” कश्मीर में शिंदे की सक्रियता याक़ूब ने कहा कि एकनाथ शिंदे अक्सर घाटी का दौरा करते रहते हैं और यहां पार्टी को मजबूत करने के लिए गंभीर हैं। उन्होंने दावा किया कि, “पहले शिवसेना को लेकर कश्मीर में कई भ्रांतियां थीं, लेकिन शिंदे जी के लगातार दौरों के कारण लोग अब पार्टी को सकारात्मक नजरिए से देखने लगे हैं।” जून 2023 में शिंदे ने श्रीनगर में शिवसेना के 15 राज्यों के पदाधिकारियों के साथ बैठक की थी। यह महाराष्ट्र से बाहर शिवसेना की पहली बड़ी बैठक थी। नवंबर 2023 में शिंदे ने LoC के नजदीक कुपवाड़ा में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा का अनावरण किया था। शिवसेना कश्मीर के अध्यक्ष मोहम्मद शफी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि शिंदे अगले महीने एक बार फिर कश्मीर दौरे पर आएंगे। उन्होंने बताया, “आदिल शाह के परिवार का घर लगभग पूरा हो गया है। शिंदे जी उसे देखना चाहेंगे।” गौरतलब है कि आदिल शाह पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों में शामिल थे।

सीएम शामिल होंगे ग्वालियर रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में, मंत्री लोधी बोले—MP का पर्यटन भविष्य उज्जवल

ग्वालियर ग्वालियर में दो दिवसीय रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव का शुक्रवार को शुभारंभ हुआ। कॉन्क्लेव के अंतिम दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कार्यक्रम में शामिल होंगे। इससे पहले शुभारंभ अवसर पर पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि मध्यप्रदेश आने वाले समय में देश का पर्यटन हब बनेगा। लोधी ने कहा कि मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी पर्यटन राज्य बनाने के लिए सभी ट्रैवल और टूर ऑपरेटर, होटलियर के साथ हितधारकों और विभाग को मिलकर काम करना होगा। ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाले इस रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव के दूसरे दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि केंद्रीय संचार मंत्री और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्याेतिरादित्य सिंधिया, मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  धर्मेंद्र सिंह लोधी होंगे।  “टाइमलेस ग्वालियर: इकोज़ ऑफ़ कल्चर, स्पिरिट ऑफ़ लेगेसी” थीम पर आधारित कॉन्क्लेव में महत्वपूर्ण अनुबंध और साझेदारियां होंगी, नई परियोजनाओं का शुभारंभ होगा।  विरासतों, धरोहरों और अनुभवात्मक पर्यटन की संभावनाओं पर होगा मंथन  रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में दो महत्वपूर्ण सत्र होंगे। “टूरिज़्म ऐज़ अ कल्चरल ब्रिज – ब्रांडिंग ग्वालियर एंड हार्टलैंड ऑफ़ एमपी” औैर “ग्वालियर एंड चंबल राइजिंग – इनबाउंड अपील थ्रू हेरिटेज, लग्ज़री एंड एक्सपीरियंस” विषय पैनल डिस्कशन होंगे।  हितधारक जानेंगे समृद्ध विरासत   ग्वालियर किले पर 30 एवं 31 अगस्त को योग सत्र, हेरीटेज वॉक का आयोजन किया जाएगा। चयनित अतिथियों एवं प्रतिनिधियों के लिए फैमिलियाराइज़ेशन टूर (FAM Tour) का आयोजन किया जाएगा, जिसका उद्देश्य ग्वालियर एवं आसपास के पर्यटन स्थलों की संभावनाओं से प्रतिभागियों को प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना है।   मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा एमपीटी इन्फ्लुएंसर मीट का आयोजन  रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव के अंतर्गत ग्वालियर स्थित इम्पीरियल गोल्फ रिसॉर्ट में ‘एमपीटी इन्फ्लुएंसर मीट’ का आयोजन किया गया। इस आयोजन में मध्य प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने भाग लिया। प्रदेश की कलाओं को पूरे विश्व से देखने आते हैं मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक और पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि हमारी सांस्कृतिक जड़ें गहरी हैं। प्रदेश की पारंपरिक कलाओं को टूरिस्ट पूरे विश्व से देखने आते हैं। अगर आप यहां निवेश करते हैं, हमारे पास सबसे बेहतर पॉलिसी है। हम निवेशकों को अच्छा इंसेंटिव दे रहे हैं। यह निवेश ग्वालियर–चंबल और सागर क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।   एमपी फिल्म निर्माताओं की पहली पसंद बना प्रसिद्ध अभिनेता फैसल मलिक ने कहा कि मध्य प्रदेश की खूबसूरत लोकेशन्स फिल्म निर्माताओं को आकर्षित करती हैं। यहां के लोग फिल्म–फ्रेंडली हैं और शासन–प्रशासन का सहयोग सराहनीय है।  मध्यप्रदेश की विविधतापूर्ण और खूबसूरत लोकेशन्स फिल्म निर्माताओं को लगातार आकर्षित करती रही हैं। यही कारण है कि मध्यप्रदेश आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म निर्माताओं की पहली पसंद बन चुका है।  ग्वालियर की धरोहरें ऐतिहासक  मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड की अपर प्रबंध निदेशक बिदिशा मुखर्जी ने कहा कि इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य ग्वालियर की अमूल्य धरोहरों, संगीत और संस्कृति को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करना है। इस थीम के ज़रिए ग्वालियर को एक ऐसे पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करना है, जहां पर्यटक सिर्फ़ इतिहास और स्थापत्य को देखें ही नहीं, बल्कि यहां की धड़कन, रिवाज़, लोककला और परंपराओं को महसूस भी करें। इसका मक़सद है कि पर्यटन से ग्वालियर की पहचान मज़बूत हो, स्थानीय समुदाय को रोज़गार और नए अवसर मिलें, और आने वाली पीढ़ियां भी इस शहर की धरोहर पर गर्व कर सकें। 

इतिहास रचने का सपना टूटा, पीवी सिंधु वर्ल्ड चैम्पियनशिप से बाहर

पेरिस  भारत की अनुभवी शटलर पीवी सिंधु का वर्ल्ड बैडमिंटन चैम्पियनशिप 2025 में सफर समाप्त हो गया है. पेरिस में खेले जा रहे इस टूर्नामेंट में 29 अगस्त (शुक्रवार) को पीवी सिंधु वूमेन्स सिंगल्स में अपना क्वार्टर फाइनल मुकाबला हार गईं. 15वीं वरीयता प्रात सिंधु को इंडोनेशिया की कुसुमा वर्दानी के हाथों 14-21, 21-13, 16-21 से हार का सामना करना पड़ा. 9वीं वरीयता हासिल वर्दानी ने यह मुकाबला 1 घंटा और 8 मिनट में जीता. देखा जाए तो पीवी सिंधु के लिए साल 2025 कुछ खास नहीं रहा है. पीवी सिंधु ने इस साल 13 मैच हारे हैं, जबकि उन्होंने केवल नौ में जीत हासिल की. सिंधु इस साल केवल दो बार किसी टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने में कामयाब रहीं. वर्ल्ड बैडमिंटन चैम्पियनशिप से पहले सिंधु साल की शुरुआत में इंडिया ओपन के क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने में सफल रही थीं. पीवी सिंधु इंडिया ओपन के बाद इंडिनेशिया मास्टर्स में खेलीं, जहां वो राउंड ऑफ 32 में हारकर बाहर हुईं. इसके बाद ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन चैम्पियनशिप और स्विस ओपन में सिंधु अपने पहले राउंड के मुकाबले गंवा बैठीं. फिर बैडमिंटन एशियन चैम्पियनशिप में सिंधु को राउंड ऑफ 16 में जापान की अकाने यामागुची ने हराया. मलेशिया मास्टर्स में पीवी सिंधु पहले राउंड में हारीं. जबकि सिंगापुर ओपन और इंडोनेशिया ओपन में उन्हें राउंड ऑफ 16 में हार झेलनी पड़ी. पीवी सिंधु ने जापान ओपन में भी भाग लिया, जहां वो पहले ही दौर में हार गईं. जबकि चाइना ओपन में उन्हें हमवतन उन्नति हुड्डा राउंड ऑफ-16 में हरा दिया. … तो इतिहास रच देतीं पीवी सिंधु पीवी सिंधु का विश्व बैडमिंटन चैम्पियनशिप में दमदार रिकॉर्ड रहा है. सिंधु ने साल 2019 में इस टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीता था. इसके अलावा सिंधु इस टूर्नामेंट में दो सिल्वर और दो ब्रॉन्ज मेडल भी जीत चुकी हैं. सिंधु यदि वर्दानी के खिलाफ मुकाबला जीत लेतीं तो वर्ल्ड बैडमिंटन चैम्पिनशिप में उनका ये छठा पदक होता. देखा जाए तो सिंधु वर्ल्ड चैम्पियनशिप में महिला सिंगल्स में छह पदक जीतने वाली पहली खिलाड़ी बनने चूक गईं. पीवी सिंधु ने इस टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल में वर्ल्ड नंबर-2 चीनी खिलाड़ी झी यी वांग के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया था. तब ऐसा लगा था कि वो फॉर्म में लौट आई हैं, लेकिन इंडोनेशियाई खिलाड़ी के खिलाफ वो अपना बेस्ट नहीं दे पाईं. सिंधु ने रियो ओलंपिक (2016) में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीता था. फिर उन्होंने टोक्यो ओलंपिक (2020) में भी ब्रॉन्ज हासिल किया.

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय पहुंचे सीएम योगी, तीसरी बार हुआ परिसर में आगमन

दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए हरसंभव सहयोग देगी प्रदेश सरकार : मुख्यमंत्री संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय पहुंचे सीएम योगी, तीसरी बार हुआ परिसर में आगमन वैदिक मंत्रोच्चार और स्वस्तिवाचन के बीच हुआ मुख्यमंत्री का पारंपरिक स्वागत सीएम योगी ने राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन के तहत संरक्षण कार्यों का किया निरीक्षण पांडुलिपियों के संरक्षण को और तीव्रता से आगे बढ़ाने का निर्देश वाराणसी  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में स्थित राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन के अंतर्गत चल रहे संरक्षण कार्यों के निरीक्षण के लिए पहुंचे। यह उनका विश्वविद्यालय परिसर में तीसरा आगमन था। विश्वविद्यालय परिवार ने मुख्यमंत्री का पारंपरिक स्वागत विद्यार्थियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार और स्वस्तिवाचन के बीच किया। कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा, कुलसचिव राकेश कुमार और वित्त अधिकारी सहित आचार्यों ने उनका अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री योगी ने दुर्लभ पांडुलिपियों एवं उनके संरक्षण कार्यों की प्रगति का सूक्ष्मता से अवलोकन किया और कार्यों की गति और तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की धरोहर इन पांडुलिपियों का संरक्षण एक सराहनीय कार्य है और इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर को संरक्षित करना आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण दायित्व है। मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय के विस्तार भवन में भारत सरकार के सहयोग से राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन द्वारा चल रहे संरक्षण कार्यों की समीक्षा की। साथ ही उन्होंने ऐतिहासिक सरस्वती भवन पुस्तकालय और अन्य निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी भी ली। कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री का तीसरी बार विश्वविद्यालय आगमन होना संस्कृत भाषा, विश्वविद्यालय और देववाणी के लिए गौरव और हर्ष की बात है। उन्होंने आश्वस्त किया कि पांडुलिपियों के संरक्षण के इस अभियान को गति देने में विश्वविद्यालय पूरी तरह से तत्पर है। इस मौके पर विश्वविद्यालय परिवार से कुलसचिव राकेश कुमार, वित्त अधिकारी हरिशंकर मिश्र, प्रो. जितेंद्र कुमार, प्रो. महेंद्र पांडेय, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, प्रो. राजनाथ, अभियंता रामविजय सिंह, जनसंपर्क अधिकारी शशिंद्र मिश्र सहित कई आचार्य और अधिकारी उपस्थित रहे।