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मानसून सत्र में हरियाणा विधानसभा रही बेहद सक्रिय, कार्य उत्पादकता 120% तक पहुँची

चंडीगढ़  हरियाणा विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि मानसून सत्र हर दृष्टि से ऐतिहासिक रहा और इसने संसदीय परंपराओं को नई दिशा दी है। यह सत्र सकारात्मक माहौल में सम्पन्न हो गया। चार दिनों तक चले इस सत्र में 21 घंटे 8 मिनट की कार्यवाही हुई, जो 120.37 प्रतिशत उत्पादकता का प्रतीक रही। सत्र के दौरान कुल 7 विधेयक पारित किए गए और कई महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर विधायकगणों ने चर्चा में भाग लिया। विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने शनिवार को चंडीगढ़ के सेक्टर 3 स्थित हरियाणा निवास में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि सत्र 22 अगस्त से 27 अगस्त तक चला। पहले और दूसरे दिन 71, तीसरे दिन 72 और चौथे दिन 70 विधायक मौजूद रहे। इसमें मुख्यमंत्री, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और मंत्रियों की संख्या शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि अनुशासन और गंभीरता के साथ विधायकगणों ने बहस में हिस्सा लिया और सदन की गरिमा को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। सत्र के समापन पर पहली बार राज्यगीत का वादन हुआ। विस अध्यक्ष ने बताया कि शून्यकाल की कार्यवाही तीन दिन चली, जिसमें 78 सदस्यों ने हिस्सा लिया। भाजपा के 30 सदस्यों ने 99 मिनट, कांग्रेस के 34 सदस्यों ने 129 मिनट, इनेलो के 2 सदस्यों ने 7 मिनट और निर्दलीय 3 विधायकों ने 10 मिनट तक अपनी बात रखी। प्रश्नकाल में भी विधायकों की सक्रियता देखने को मिली। इस दौरान 53 विधायकों से 307 तारांकित प्रश्न प्राप्त हुए, जिनमें से 194 स्वीकार किए गए और 56 प्रश्नों पर सदन में चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त 160 अतारांकित प्रश्नों में से 132 स्वीकृत किए गए। ध्यानाकर्षण सूचनाओं के तहत कुल 40 नोटिस आए, जिनमें से 11 को स्वीकार किया गया। इनमें जलभराव, सीईटी परीक्षा की कार्यप्रणाली, धान में वायरस की समस्या, कलेक्टर रेट में वृद्धि और खिलाड़ियों की समस्याओं जैसे मुद्दे शामिल रहे। स्थगन प्रस्तावों में से एक को स्वीकार कर 26 अगस्त को तीन घंटे 35 मिनट लंबी चर्चा की गई, जिसमें मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी 67 मिनट तक जवाब दिया। इस सत्र में तीन सरकारी प्रस्ताव भी पारित हुए। इनमें गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहादत वर्षगांठ पर प्रस्ताव, मीडिया से अपराध का महिमामंडन रोकने की अपील और एक आपराधिक विधेयक वापसी शामिल हैं। साथ ही सात महत्त्वपूर्ण विधेयक भी पारित किए गए, जिनमें सदस्य वेतन-भत्ता संशोधन, पिछड़ा वर्ग आयोग संशोधन और जीएसटी संशोधन प्रमुख रहे। सत्र के दौरान दर्शकों की भी बड़ी संख्या में भागीदारी रही। कुल 1585 लोग विधान सभा पहुंचे, जिनमें 842 विद्यार्थी, 281 स्पीकर गैलरी और 462 दर्शक दीर्घा से थे। सत्र में कई विशेष पहलें भी हुईं। पहली बार महामहिम राज्यपाल प्रो. अशीम कुमार घोष विधान भवन आए, जिनका भव्य स्वागत किया गया। टीवी चैनलों पर कार्यवाही का सीधा प्रसारण सुनिश्चित करने के लिए गाइडलाइन जारी की गई। वहीं 26 अगस्त को नशा मुक्ति का संदेश देने के लिए मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों की भागीदारी से साइक्लोथॉन आयोजित किया गया। भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए विस अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि अब अधिकारियों को विधायी प्रारूपण की ट्रेनिंग दी जाएगी, लोकसभा की तर्ज पर एआई आधारित रिकॉर्डिंग और अनुवाद व्यवस्था शुरू होगी तथा संविधान के मूल सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए राज्यव्यापी सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। अनुसंधान विंग को सुदृढ़ बनाने, एमएलए हॉस्टल के विस्तार और नई डिस्पेंसरी की योजना भी घोषित की गई है। इस मौके पर विधान सभा अध्यक्ष ने कहा कि वे भविष्य में भी इन व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत हैं। 

सरकार का फोकस: आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों से मजबूत बनेगी खेती

शिमला कृषि एवं पशुपालन मंत्री मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने कहा कि कृषि को सुदृढ़ बनाने के लिए राज्य सरकार वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा दे रही है। कृषि रोड मैप एवं रबी एक्शन प्लान से किसानों को लाभकारी खेती की नई दिशा मिलेगी। उन्होंने बताया कि देश कृषि प्रधान है और इसका 14 प्रतिशत योगदान जीडीपी में है। कृषि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान केंद्रों के खुलने से वैज्ञानिकों के शोध ने कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। प्रो. चंद्र कुमार आज यहां विकसित कृषि संकल्प अभियान (विकेएसए) के तहत भारतीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला में “राज्य कृषि रोड मैप एवं रबी एक्शन प्लान” विषय पर आयोजित एक दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला में अपने विचार साझा कर रहे थे।  इस क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, राज्य सरकार के विभागों और आईसीएआर संस्थानों से "राज्य कृषि प्राथमिकताएँ एवं कार्यान्वित की जाने वाली रणनीतियाँ" विषय पर संस्थागत दृष्टिकोण प्राप्त करने के लिए किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य हिमाचल प्रदेश के लिए आगामी पांच वर्षों (2025-2030) का कृषि रोडमैप तैयार करना और विकसित कृषि संकल्प अभियान-2025 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। यह रोडमैप प्राकृतिक खेती में प्रदेश की अग्रणी भूमिका, कृषि-जलवायु विविधता का लाभ और राष्ट्रीय अभियानों से सामंजस्य स्थापित करने पर केंद्रित होगा, जिससे अगले पांच वर्षों में कृषि क्षेत्र का व्यापक रूपांतरण संभव हो सके। प्राकृतिक खेती के लिए मवेशियों की महत्ता अहम कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश प्राकृतिक खेती की ओर अग्रसर है, परंतु इसके लिए मवेशियों की महत्ता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्राकृतिक खेती मवेशियों पर आधारित है। उन्होंने जोर दिया कि आज के दौर में कृषि क्षेत्र को रिमोट सेंसिंग जैसी आधुनिक तकनीकों से जोड़ने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से अधिकारियों को देहरादून में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया है।   कृषि मंत्री ने बताया कि किसानों की आर्थिकी को सुदृढ़ बनाने के लिए दूध की कीमतों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की गई है। साथ ही, ढगवार में 250 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट का निर्माण किया जा रहा है, जिसका संचालन डेयरी डेवलपमेंट अथॉरिटी करेगी। इस प्लांट में बने उत्पादों पर ट्रेडमार्क हिमाचल का होगा। उन्होंने कहा कि सिंचाई प्रबंधन और विपणन संबंधों को मजबूत करना भी कृषि विकास की प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रदेश में कृषि-जलवायु की पहचान कर विविधता लाने की आवश्यकता है। साथ ही, कीटनाशकों का न्यूनतम प्रयोग किया जाना चाहिए ताकि पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों सुरक्षित रहें। कृषि मंत्री ने सभी विभागीय अधिकारियों से आग्रह किया कि वह आपसी समन्वय से कार्य करें ताकि किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाया जा सके। सचिव, कृषि एवं बागवानी सी. पाल रासु ने विभागीय दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए इस योजना में हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। निदेशक नौणी अनुसंधान केंद्र डॉ. एस.के. चौहान, निदेशक प्रसार शिक्षा सीएसके एचपीकेवी पालमपुर डॉ. विनोद शर्मा और विभागाध्यक्ष सामाजिक विज्ञान विभाग, सीपीआरआई शिमला एवं कार्यक्रम सचिव डॉ. आलोक कुमार ने भी विचार व्यक्त किए। निदेशक आईसीएआर-सीपीआरआई शिमला डॉ. बृजेश सिंह ने स्वागत संबोधन दिया। तकनीकी सत्रों की रूपरेखा पहला सत्र में विश्वविद्यालयों के दृष्टिकोण से कृषि रोड मैप, कृषि प्राथमिकताओं एवं कार्य नीतियों पर चर्चा हुई। पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय एवं नौणी बागवानी विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने राज्य की कृषि चुनौतियों और अवसरों पर प्रस्तुतिकरण दिया। दूसरे सत्र में आईसीएआर से जुड़े विभिन्न अनुसंधान संस्थानों जैसे डीएमआर सोलन, आईआईडब्ल्यूबीआर शिमला, आईएआरआई और एनबीपीजीआर के वैज्ञानिकों ने कृषि रोड मैप के क्रियान्वयन और अनुसंधान-आधारित रणनीतियों पर अपने विचार रखे। तीसरे सत्र में राज्य सरकार के दृष्टिकोण से कृषि रोड मैप एवं कार्य नीतियों पर चर्चा हुई। इसमें कृषि विभाग, बागवानी विभाग, प्राकृतिक खेती, पशुपालन विभाग, राज्य बीज एवं ऑर्गेनिक उत्पाद प्रमाणन एजेंसी और मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (एमआईडीएच) के निदेशकों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने कृषि उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय दोगुनी करने के लिए ठोस सुझाव दिए।  इस अवसर पर कृषि विश्वविद्यालयों, विभिन्न विभागों और आईसीएआर संस्थानों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।  

बिहार में सियासी हलचल, तेजस्वी यादव ने थामा CM पद की दावेदारी का कार्ड

पटना  बिहार में आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले महागठबंधन में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर चल रही अटकलें अब खत्म होती दिख रही हैं। 'वोटर अधिकार यात्रा' के दौरान तेजस्वी यादव ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के सामने ही खुद को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया। वहीं पिछले कई दिनों से राहुल गांधी इस सवाल से बचते रहे हैं और उन्होंने अब तक तेजस्वी को सीएम फेस नहीं बताया था।   तेजस्वी ने संबोधन के दौरान NDA में साधा निशाना- यात्रा के 14वें दिन एक जनसभा को संबोधित करते हुए तेजस्वी यादव ने एनडीए सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने भीड़ से पूछा,"आप ही लोग बताओ, आपको डुप्लीकेट CM चाहिए या ओरिजिनल CM चाहिए?"इस दौरान उन्होंने एनडीए सरकार को 'नकलची सरकार' बताया और कहा कि उनके पास कोई रोडमैप या विजन नहीं है, वे सिर्फ महागठबंधन की नकल कर रहे हैं। चुनाव आयोग पर अखिलेश यादव का हमला इस मौके पर अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव आयोग अब 'जुगाड़ आयोग' बन गया है जो बीजेपी के साथ मिलकर काम कर रहा है। अखिलेश ने तेजस्वी यादव की तारीफ करते हुए कहा कि बिहार में जब तेजस्वी सत्ता में होंगे तो युवाओं का पलायन नहीं होगा, बल्कि भाजपा का पलायन होगा। राहुल गांधी ने कहा- 'बिहार में वोट चोरी नहीं करने देंगे' विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस दौरान कहा, "भाजपा ने महाराष्ट्र, हरियाणा और लोकसभा चुनाव में वोट चोरी किया, लेकिन हम उन्हें बिहार का चुनाव चोरी नहीं करने देंगे।" यह बयान दर्शाता है कि महागठबंधन कथित 'वोट चोरी' के मुद्दे को जोर-शोर से उठा रहा है।

यूक्रेन पर रूस का कहर बरपा, 537 ड्रोन-45 मिसाइलों से अटैक, भारी तबाही

रूस  रूस ने यूक्रेन पर अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला किया। इसमें 537 ड्रोन और 45 मिसाइलें दागी गईं। यूक्रेनी वायुसेना ने दावा किया कि उसने 510 ड्रोन और 38 मिसाइलें मार गिराईं लेकिन फिर भी कई जगह तबाही हुई। इस हमले में  1 व्यक्ति की मौत और 24 लोग घायल हुए हैं, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं।  किन जगहों पर हमला हुआ?      ज़ापोरिज़्झिया : निजी मकान, कैफ़े और औद्योगिक केंद्र तबाह।      ड्नीप्रो और पावलोहराद (Dnipropetrovsk क्षेत्र) : लगातार धमाके, लोगों को शरणस्थलों में जाने का अलर्ट।      राजधानी कीव : दो दिन पहले ही हुए हमले में 25 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें चार बच्चे भी थे। यूक्रेनी सेना ने रूस के क्रास्नोदर और सिज़रान तेल रिफाइनरियों  पर हमला किया। वहाँ जोरदार धमाके और आग लगने की पुष्टि हुई।राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा कि रूस ने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों की आड़ में बड़े हमलों की तैयारी की। उन्होंने पश्चिमी देशों से बैंकिंग और ऊर्जा क्षेत्र में कड़े प्रतिबंध लगाने और रूस को मिलने वाली फंडिंग रोकने की अपील की।   अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया  यूरोपीय संघ ने साफ किया कि जब तक रूस युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई (reparations) नहीं करता, तब तक उसके जमे हुए संपत्ति  (frozen assets) वापस नहीं दी जाएंगी। डेनमार्क में यूरोपीय रक्षा मंत्रियों की बैठक में यूक्रेनी सैनिकों को ट्रेनिंग देने पर सहमति बनी। ज़ेलेंस्की ने कहा कि वह जल्द ही यूरोपीय नेताओं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ सुरक्षा गारंटी पर चर्चा करेंगे। ल्वीव शहर में यूक्रेन के पूर्व संसदीय स्पीकर  आंद्रिय परुबीय  की हत्या कर दी गई। राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने इसकी पुष्टि की और कहा कि आरोपियों की तलाश जारी है।   

मुख्यमंत्री का बड़ा बयान: इस बार 2023 की तुलना में भारी नुकसान

शिमला मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शनिवार को जिला चम्बा के भरमौर, मणिमहेश और अन्य आपदा प्रभावित क्षेत्रों के साथ-साथ कांगड़ा जिले में पौंग बांध से छोड़े गए पानी के कारण बाढ़ प्रभावित फतेहपुर और इंदौरा के मंड क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण किया। मुख्यमंत्री पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन से भरमौर के लिए रवाना हुए, लेकिन खराब मौसम के कारण उनका हेलीकॉप्टर वहां उतर नहीं सका। चम्बा में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार द्वारा समय पर उठाए गए एहतियाती कदमों के कारण जन जीवन की हानि वर्ष 2023 की तुलना में कम हुई है, लेकिन इस बार विनाश का पैमाना कहीं अधिक है। सड़क, बिजली, पानी आपूर्ति और संचार सेवाएं 2023 की तुलना में अधिक प्रभावित हुई हैं। राज्य सरकार के समक्ष लोगों के पुनर्वास की एक बड़ी चुनौती है, जिसे हम प्रदेशवासियों के सहयोग से पार करेंगे। उन्होंने कहा कि आपदा से प्रभावित प्रत्येक परिवार के पुनर्वास के लिए प्रदेश सरकार विशेष राहत पैकेज प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह लगातार जमीनी स्तर पर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। सरकार आपदा प्रभावितों को हर संभव राहत पहुंचाने और चंबा भरमौर मार्ग में संपर्क सुविधा बाधित होने के कारण विभिन्न स्थानों पर फंसे लोगों को सुरक्षित घर पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी चम्बा से पैदल ही भरमौर के लिए रवाना हुए हैं। यह दर्शाता है कि राज्य सरकार मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए संवेदनशीलता के साथ इस संकट का सामना कर रही है। सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार सड़क संपर्क बहाल करने के लिए तेजी से काम कर रही है। इसके लिए पोकलेन, जेसीबी और अन्य भारी मशीनरी तैनात की गई है। जिला प्रशासन को यथाशीघ्र सड़क संपर्क बहाल करने के निर्देश दिए गए हैं, हालांकि खराब मौसम राहत और पुनर्स्थापन कार्यों में बाधा उत्पन्न कर रहा है। भरमौर क्षेत्र में फंसे लोगों की सकुशल वापसी के लिए प्रदेश सरकार ने हेलीकॉप्टर तैनात किए हैं जो मौसम की अनुकूल परिस्थिति होने पर लोगों को एयरलिफ्ट करेंगे। भाजपा नेताओं की आलोचना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे प्रभावित लोगों की मदद करने के बजाय अफवाहें फैला रहे हैं। भाजपा विधानसभा का मानसून सत्र स्थगित करने की मांग कर रही है, जबकि 2023 में यही पार्टी विधानसभा सत्र बढ़ाने की मांग कर रही थी। मणिमहेश यात्रा स्थगित करने का निर्णय मौजूदा मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया है, लेकिन कुछ लोग इस पर भी राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश देवभूमि है। हमें अपनी देव यात्राओं और मणिमहेश यात्रा पर पूर्ण आस्था है, लेकिन भाजपा नेताओं का इस पर राजनीति करना दुर्भाग्यपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रभावित लोगों के साथ खड़ी है और राहत एवं बचाव कार्यों को गति दे रही है। उन्होंने राज्य में बार-बार हो रही बादल फटने की घटनाओं के कारणों का अध्ययन करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री के साथ हुई बैठक में उन्होंने केंद्र सरकार से इस विषय पर अध्ययन करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का आग्रह किया है। वैश्विक ऊष्मीकरण और जलवायु परिवर्तन बड़ी चुनौती बन रहे हैं और व्यापक तबाही मचा रहे हैं, इसलिए इस समस्या का गहन समाधान तलाशना जरूरी है ताकि अनमोल जीवन को बचाया जा सके। सुक्खू ने चम्बा के करियां स्थित एनएचपीसी भवन में जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक कर आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत व बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने फंसे हुए लोगों के लिए भोजन, पानी, आश्रय और अन्य आवश्यक सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था करने के लिए कहा। साथ ही जिला प्रशासन को क्षतिग्रस्त सड़कों को प्राथमिकता पर खोलने, विशेषकर चम्बादृभरमौर एनएच-154ए को बहाल करने और बिजली व पेयजल आपूर्ति योजनाओं को अस्थायी तौर पर बहाल करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कलसुंई क्षेत्र का दौरा भी किया और श्रद्धालुओं से बातचीत की। कलसुंई से श्रद्धालुओं को नूरपुर और पठानकोट भेजने के लिए बसों की व्यवस्था की गई हैं। शुक्रवार को लगभग 5000 श्रद्धालुओं को कलसुंई से नूरपुर और पठानकोट पहुंचाया गया। जम्मूदृकश्मीर की ओर से आए श्रद्धालुओं को सलूणी से आगे छोड़ने के लिए छोटे वाहनों की भी व्यवस्था की गई है। उन्होंने सलूणी-खुंडिमरल सड़क को शीघ्र बहाल करने के भी निर्देश दिए ताकि किश्तवाड़ और डोडा जिलों से आए श्रद्धालु अपने घर सुरक्षित लौट सकें। उन्होंने कहा कि लोगों की सुविधा के लिए एचआरटीसी और निजी संचालकों की अतिरिक्त बसों की व्यवस्था की गई है।  

राजवाड़ा मार्केट इंदौर: सराफा से लेकर अन्य व्यापारी भी रात 10 बजे तक करेंगे कारोबार

इंदौर  राजवाड़ा क्षेत्र के बाजार में अब देर रात तक चहल-पहल रहेगी। सराफा व्यापारियों के साथ आते हुए क्षेत्र के अन्य बाजारों ने भी रात 10 बजे तक दुकानें खुली रखने की घोषणा कर दी है। एक सितंबर से इस पर अमल होगा। राजवाड़ा क्षेत्र के व्यापारियों ने इस मुद्दे पर चर्चा के बाद अपने सदस्य व्यापारियों के लिए सूचना जारी कर दी है। व्यापारी एसोसिएशनों द्वारा जारी किए गए सर्कुलर में त्योहार और क्षेत्र के व्यापार को बढ़ाने को निर्णय का कारण बताया गया है। हालांकि असल कारण फुटपाथ व दुकानों के सामने कब्जे रोकना माना जा रहा है। सराफा में लग रही चाट-चौपाटी के खिलाफ चांदी-सोना जवाहरात व्यापारी एसोसिएशन ने असहयोग आंदोलन छेड़ रखा है। ओटलों पर किराएदारी बंद करने के बाद सराफा बाजार में दुकानें रात 10 बजे तक खोलने का निर्णय लिया गया है। शुक्रवार को इंदौर रिटेल रेडीमेड गारमेंट व्यापारी एसोसिएशन ने बैठक के बाद इस पर सहमति जताई है। एसोसिएशन के सदस्य 600 गारमेंट कारोबारियों के साथ अन्य 300 दुकानदार भी देर रात तक दुकानें खुली रखने के लिए तैयार हो गए हैं। सराफा व्यापारी कैविएट दायर करेंगे सराफा चाट चौपाटी के खिलाफ मुहिम चला रहे चांदी-सोना व्यापारी कानूनी तौर पर भी अपना पक्ष मजबूत करने में लगे हैं। बताया जा रहा है कि व्यापारियों पर कदम पीछे खींचने और दुकानें नौ बजे तक बंद करवाने के लिए राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है। इस बीच व्यापारी गुमाश्ता कानून का हवाला देकर कह रहे हैं कि उन्हें रात 11 बजे तक दुकानें खुली रखने की छूट है, ऐसे में कोई भी जल्द बंद करने का दबाव नहीं बना सकता। चौपाटी वालों के अदालत जाने या ऐसी किसी अन्य याचिका पर एक पक्षीय आदेश से सुरक्षा के लिए सराफा व्यापारियों ने हाई कोर्ट में कैविएट दाखिल करने की तैयारी भी कर ली है। कृष्णपुरा व्यापारी एसोसिएशन भी समर्थन में कृष्णपुरा व्यापारी एसोसिएशन ने इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के साथ समन्वय कर साझा निर्णय लिया है कि आगामी दिनों में त्योहारों का सीजन रहेगा। ऐसे में वो भी रात 10 बजे तक दुकानें खुली रखेंगे। इस दौरान राजवाड़ा-कृष्णपुरा तक क्षेत्र को पूरी तरह व्यवधान मुक्त रखने, यातायात प्रबंधन, महिला सुरक्षाकर्मियों की ड्यूटी और नगर निगम के अतिक्रमण व्यवस्था को चाक-चौबंद पुख्ता प्रबंधन के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को व्यापारी पत्र भी लिखेंगे। दुकानदारों को त्योहारी के लिए तैयारी करनी है     त्योहार का सीजन आ गया है। ऐसे में दुकानदारों को त्योहारी के लिए तैयारी करनी है। हमारा लक्ष्य है कि आम नौकरीपेशा लोग काम से फ्री होकर रात को बाजार में खरीदारी के लिए आ सकें। इसके लिए हम अभी से प्रचार अभियान चलाएंगे। – अक्षय जैन, अध्यक्ष, इंदौर रिटेल रेडीमेड गारमेंट व्यापारी एसोसिएशन एक सितंबर से रात 10 बजे तक खुला रहेगा बाजार     रात तक दुकानें खुली रखने के निर्णय में हमारी एसोसिएशन साथ है। राजवाड़ा के साथ कृष्णपुरा के सभी रेडीमेड गारमेंट्स संस्थान एक सितंबर से रात 10 बजे तक सेवाएं देंगे। – विजेंद्रसिंह चौहान, अध्यक्ष, कृष्णपुरा व्यापारी एसोसिएशन  

यूक्रेन संकट में भारत बना सहारा, डीजल सप्लाई में सबसे आगे

कीव  भारत जुलाई 2025 में यूक्रेन का सबसे बड़ा डीजल आपूर्तिकर्ता बन गया है, जो देश के कुल डीजल आयात का 15.5% हिस्सा प्रदान कर रहा है। यह उपलब्धि वैश्विक ऊर्जा व्यापार में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाती है, विशेष रूप से उस समय जब भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए अमेरिका से 50% के भारी टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है। यूक्रेन के तेल बाजार विश्लेषण फर्म नाफ्टोरिनोक के हालिया आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में भारत से यूक्रेन को प्रतिदिन औसतन 2,700 टन डीजल की सप्लाई की गई, जो इस साल भारत के सबसे अधिक मासिक निर्यात आंकड़ों में से एक है। यह आंकड़ा जुलाई 2024 की तुलना में काफी अधिक है, जब भारत का यूक्रेन के डीजल आयात में हिस्सा केवल 1.9% था। जनवरी से जुलाई 2025 तक, भारत का यूक्रेन के डीजल आपूर्ति में हिस्सा 10.2% तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में पांच गुना अधिक है। आपूर्ति के रास्ते और भू-राजनीतिक चुनौतियां भारतीय डीजल मुख्य रूप से रोमानिया से डेन्यूब नदी के माध्यम से टैंकरों द्वारा और तुर्की के मारमारा एरेग्लिसी बंदरगाह में ओपेट टर्मिनल के जरिए यूक्रेन पहुंच रहा है। हालांकि इस चैनल पर आंशिक प्रतिबंधों का प्रभाव पड़ रहा है। इसके बावजूद, भारत ने अन्य यूरोपीय आपूर्तिकर्ताओं जैसे स्लोवाकिया (15%), ग्रीस (13.5%), तुर्की (12.4%), और लिथुआनिया (11.4%) को पीछे छोड़ते हुए जुलाई में शीर्ष स्थान हासिल किया। हालांकि, भारत का निर्यात वॉल्यूम अभी भी ग्रीस और तुर्की से पीछे है, लेकिन अनुपात के मामले में भारत ने सभी प्रतिस्पर्धियों को मात दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय डीजल का एक हिस्सा रूसी कच्चे तेल से परिष्कृत हो सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह घटनाक्रम उस समय हुआ है जब अमेरिका ने भारत के रूसी तेल खरीदने को लेकर 50% टैरिफ लगाया है। अमेरिका का दावा है कि रूसी तेल खरीदकर भारत उसकी यूक्रेन युद्ध में मदद कर रहा है। लेकिन हालात यह हैं कि खुद भारत द्वारा सप्लाई किया गया डीजल यूक्रेन की युद्धकालीन अर्थव्यवस्था को संबल प्रदान कर रहा है। जुलाई में यूक्रेन के डीजल आयात में अन्य देशों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। स्लोवाकिया ने ग्रीस और तुर्की की तुलना में अधिक मात्रा में डीजल की आपूर्ति की, जबकि पोलैंड और लिथुआनिया के ओरलेन ग्रुप ने मिलकर लगभग 20% आयात में योगदान दिया। स्वीडन के प्रीम सुविधाओं से डीजल निर्यात ने भी रूस के पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के बाद से रिकॉर्ड स्तर हासिल किया, जो जुलाई में कुल आयात का 4% था। वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारत की स्थिति यह उपलब्धि भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत को भी दर्शाती है। हाल के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 7.8% की वृद्धि दर्ज की, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में 6.5% थी। कृषि क्षेत्र में 3.7% की वृद्धि हुई, जो पिछले साल की 1.5% की तुलना में उल्लेखनीय सुधार है।  

वोटर अधिकार यात्रा में राहुल-तेजस्वी के साथ दिखे अखिलेश, विपक्षी एकजुटता से बढ़ी BJP की चिंता

आरा बिहार में एसआईआर के खिलाफ जारी राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा में शनिवार को सपा अध्यक्ष और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव शामिल हुए। यात्रा के 14वें दिन आरा में जनसभा को अखिलेश यादव ने संबोधित करते हुए मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। सपा अध्यक्ष ने बीजेपी, सरकार और अधिकारियों को चुनावी 'तीन तिगाड़ा' बताते हुए कहा कि इन्हें इंडिया गठबंधन तोड़ेगा। अखिलेश ने कहा कि अवध से हम लोगों ने बीजेपी को भगाया है, अब मगध से भाजपा को भगाने की जिम्मेदारी आप लोगों की है। अखिलेश यादव ने इस दौरान एक नारा भी दिया। जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि 'अबकी बार बिहार से बीजेपी बाहर'। इस दौरान लोगों से उन्होने तेजस्वी यादव को सत्ता में लाने की अपील की। वहीं बिहार में जारी एसआईआर (गहन मतदाता पुनरीक्षण) को सिरफिरा फैसला करार दिया। उन्होने कहा कि ये लोग पहले आपके वोट का अधिकार छीनेंगे, फिर राशन और फिर नौकरी का अधिकार छीनेंगे। चुनाव आयोग पर तंज कसते हुए कहा कि ये 'जुगाड़ आयोग' बन गया है। सपा अध्यक्ष ने कहा कि जो हमें डरा रहे थे, वो आज खुद ट्रंप से डरे हुए हैं। अमेरिका ने भारत पर टैरिफ लगाया, लेकिन बीजेपी इस मुद्दे पर बात नहीं कर रही। "क्योंकि अमेरिका ने व्यापारियों पर टैरिफ तो लगाया ही है, लेकिन बीजेपी के मुंह पर भी टैरिफ लगाने का काम किया है। उन्होने कहा कि जिस तरह राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की वोटर अधिकार यात्रा को बिहार के युवाओं और लोगों का समर्थन मिल रहा है, वो बता रहा है कि इस बार सत्ता बदलने वाली है।  

हंसाने वाले कलाकार की दुखभरी कहानी: बचपन में मां की मौत का ग़म

मुंबई आज हम आपको एक ऐसे कॉमेडियन के बारे में बता रहे हैं जिसका बचपन काफी दर्दनाक रहा है। 13 साल की उम्र में इस कॉमेडियन के सिर से उसकी मां का साया उठ गया था। ये कॉमेडियन बिग बॉस का विनर भी रह चुका है। क्या आप पहचान पाए इस विनर का नाम? अगर नहीं तो चलिए हम आपको बताते हैं। ये कॉमेडियन कोई और नहीं मुनव्वर फारूकी हैं। मुनव्वर फारूकी ने एक पुराने रियलिटी शो में बताया था कि उनकी मां ने एसिड पी लिया और उनकी मृत्यु हो गई थी। अब एक पॉडकास्ट में उन पलों को याद करके मुनव्वर फारूकी बहुत ज्यादा इमोशनल हो गए। मां को याद कर इमोशनल हुए मुनव्वर फारूकी प्रखर गुप्ता के पॉडकास्ट में मुनव्वर ने अपने बचपन के दिनों को याद किया। उन्होंने वो दर्दनाक कहानी सुनाई जब उनकी मां ने एसिड पी लिया था। मुनव्वर ने बताया कि उनके पिता उनकी मां को मारते थे। 22 साल तक उनकी मां ने उनके पिता के जुल्मों का सामना किया। मुनव्वर ने कहा कि जितना दर्द उनकी मां ने झेला वो कोई नहीं झेल सकता है। मुनव्वर ने कहा कि वो अपनी मां की मौत के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं मानते हैं। उन्होंने कहा कि शायद उनका जाना ऐसे ही लिखा था। 13 साल की उम्र में उठा मां का साया मां की सुसाइड के बारे में बात करते हुए मुनव्वर ने कहा, “वो 13 साल के थे, और मुझे सुबह किसी ने उठाया और बताया कि मां को अस्पताल ले गए हैं। जब मैं अस्पताल पहुंता, मुझे पता चला कि मेरे परिवार के लोगों ने किसी को नहीं बताया था कि उन्होंने एसिड पी लिया है। मुझे भी लोग कह रहे थे कि किसी को मत बताना क्योंकि मेरे पिता के लिए समस्या हो सकती है। मुझे समझ नहीं आ रहा था। मैं एक नर्स के पास क्या, वो नर्स जान-पहचान की थीं, मेरी मां की तरफ से। मैंने उन्हें बताया कि ये हुआ है। इसके बाद मेरी मां को तुरंत इमरजेंसी में शिफ्ट किया गया, लेकिन उनकी मौत हो गई।” दो साल बाद पिता को लकवा मार गया मां के बारे में बात करते हुए मुनव्वर बहुत ज्यादा इमोशनल हो गए। मुनव्वर से पूछा गया कि क्या मां की मौत के बाद वो किसी से नाराज थे। मुनव्वर ने कहा कि वो अपने पिता और उनके पूरे परिवार से नाराज थे। मुनव्वर ने बताया कि मां के निधन के दो साल बात उनके पिता को लकवा मार गया था और उनका 80 प्रतिशत शरीर काम नहीं कर रहा था। मैं उन्हें विलेन मानता था, लेकिन फिर भी वो मेरे पिता थे। आप खुद को बताने लगते हो कि इस इंसान ने कुछ गलत किया है, लेकिन उसके लिए इनके साथ भी कुछ हो गया है, उन्हें भुगतना पड़ रहा है। इस इंसान से मैं क्या नफरत करूं। आपको लगता है कि आपके सिवा इनका कोई भी नहीं है।" मुनव्वर ने कहा कि उस परिस्थिति ने उन्हें लोगों को माफ करना सिखा दिया।  

‘दहेज प्रताड़ना के आरोप बेबुनियाद’, सुप्रीम कोर्ट ने बहू की सास को दी राहत

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने कथित तौर पर दहेज के लिए बहू के साथ क्रूरता करने के 24 साल पुराने केस में ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट द्वारा दोषी करार दी गई एक सास को बरी कर दिया। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ससुराल वालों द्वारा बहू को दहेज के लिए प्रताड़ित की बातें हवा से भी अधिक तेज फैलती हैं। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ शुक्रवार को एक याचिका पर यह फैसला सुनाया, जिसमें महिला की दोषसिद्धि और तीन साल की सजा बरकरार रखी गई थी। आरोपी सास को आईपीसी की धारा 498ए के तहत इस आधार पर दोषी ठहराया गया था कि उसकी मृत बहू ने अपने मायके वालों को दहेज उत्पीड़न होने की बातें बताई थीं।आईपीसी की धारा 498-ए, विवाहित महिला के प्रति उसके पति या उसके ससुरालवालों द्वारा की गई क्रूरता के अपराध से संबंधित है। सुप्रीम कोर्ट ने पड़ोसन की गवाही को माना अहम सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि ने इस बात पर गौर किया कि केस में गवाह के तौर पर पेश हुई आरोपी महिला की पड़ोसी ने दावा किया कि बहू से कभी दहेज की मांग नहीं की गई थी। बेंच ने कहा, ‘‘सास के साक्ष्य को निचली अदालत और हाईकोर्ट द्वारा इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि वह दहेज की मांग के संबंध में कोई तथ्य पेश नहीं कर सकी थी, क्योंकि यह चारदीवारी के भीतर होता है, जो एक गलत निष्कर्ष है, विशेष रूप से ऐसे मामलों में जब सास-ससुर द्वारा दहेज के लिए बहू को परेशान किए जाने की बातें हवा से भी तेज फैलती हैं।" जून 2001 में दर्ज कराई गई थी शिकायत मृतक बहू के पिता ने जून 2001 में दर्ज कराई अपनी शिकायत में बताया था कि उनकी बेटी ससुराल में मृत पाई गई थी। पिता ने आरोप लगाया था कि मौत के समय उनकी बेटी गर्भवती थी और वह अक्सर मायकेवालों को बताती थी कि उसकी सास दहेज के लिए उसे ताने ताने मारती है। शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि घटना के वक्त उसका दामाद शहर में नहीं था। मृतका के सास-ससुर और देवर को इस मामले में आरोपी बनाया गया था। हालांकि, निचली अदालत ने ससुर और देवर को बरी कर दिया, लेकिन यह माना कि सास के उत्पीड़न के कारण बहू ने जान दी थी। दोषी करार दी गई सास ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया, जिसने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी रूप में दहेज की मांग अपने आप में आईपीसी की धारा 498ए के तहत केस दर्ज करने के लिए काफी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "इसी प्रकार, किसी विवाहित महिला को या उसके रिश्तेदार को किसी अवैध मांग को पूरा करने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से परेशान करना भी 'क्रूरता' की श्रेणी में आएगा।'' बेंच ने आरोपी महिला की अपील स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया और उसे बरी कर दिया।