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श्रद्धालुओं पर गाड़ी कुचलती चली गई, छत्तीसगढ़ में 3 की मौत, 22 जख्मी

जशपुर  छत्तीसगढ़ में जशपुर जिले के बगीचा में गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान एक वाहन की चपेट में आने से एक महिला सहित तीन लोगों की मौत हो गई और करीब 22 लोग घायल हो गए। हादसा बगीचा चरईडांड स्टेट हाईवे पर मंगलवार देर रात करीब 12 बजे हुआ। एक बोलेरो अनियंत्रित होकर श्रद्धालुओं को कुचलती चली गई। प्रत्यक्षदर्शी केशव यादव ने बताया कि बोलेरो रायकेरा की ओर से आ रही थी। लगभग डेढ़ सौ लोग विसर्जन जुलूस में शामिल थे। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और पूरे इलाके में अफरा तफरी का माहौल व्याप्त हो गया। आक्रोशित भीड़ ने चालक की मौके पर जमकर पिटाई कर दी जबकि बोलेरो में सवार अन्य लोग मौके से फरार हो गए। घटना की सूचना मिलते ही जनपद उपाध्यक्ष अरविंद गुप्ता जनप्रतिनिधि शंकर गुप्ता और बगीचा एसडीओपी दिलीप कोसले व पुलिस की टीम के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे और मिलकर बचाव कार्य में जुट गए। कुछ घायलों को गांव के अन्य लोगों ने अपनी सुविधा से इलाज के लिए रवाना किया। घायलों को तत्काल 108 की मदद से बगीचा अस्पताल लाया गया। कांसाबेल,कुनकुरी, सन्ना समेत जिलों के अन्य अस्पतालों से 108 संजीवनी बुलाया गया और तत्काल घायलों को रेफर किया गया। एसडीओपी दिलीप कोसले, एसडीएम प्रदीप राठिया, तहसीलदार महेश्वर उईके और पुलिस बल मौके पर पहुंचकर राहत-बचाव में सक्रिय रहे, वहीं देर रात एक बजे एसएसपी शशि मोहन सिंह ने भी अस्पताल पहुंचकर घायलों का हालचाल जाना। उन्होंने बताया कि हादसे में लगभग दो दर्जन लोग घायल हुए हैं, जिनमें से कई की स्थिति गंभीर बनी हुई है। जशपुर कलेक्टर रोहित व्यास देर रात दो बजे बगीचा अस्पताल पहुंचे जहां उन्होंने घायलों व मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। उन्होंने बताया कि जो गंभीर हैं उन्हें अंबिकापुर रेफर किया गया है मॉनिटरिंग के लिए दो नायब तहसीलदार व मेडिकल ऑफिसर को अंबिकापुर भेजा गया है,घायलों के इलाज की समुचित व्यवस्था कराई जा रही है। सीएमएचओ जीएस जात्रा ने बगीचा स्वास्थ्य अमले को अलर्ट करते हुए तत्काल घायलों के इलाज की पहल की। उन्होंने बताया कि घटना में 22 लोग घायल हुए हैं जिनका उपचार करते हुए लगभग 20 लोगों को रैफर किया गया है। घायलों में फकीर यादव,नीलू यादव,निरंजन राम पिता अर्जुन राम,संदीप यादव नारायण , देवंती , गुलापी बाई, याहूसु लकड़ा,संतोष प्रजापति,हेमंत यादव,उमा यादव,भुवनेश्वरी यादव,चंदा बाई, पिंकी, लीलावती प्रजापति,डमरूधर यादव,गायत्री यादव,आरती यादव,परमानंद यादव,अभिमन्यु,हेमानंद व चालक सुखसागर समेत अन्य शामिल हैं। मृतकों में अरविंद (19) विपिन कुमार प्रजापति (17) एवं खिरोवती यादव (32) हैं जिनके पोस्टमार्टम की प्रक्रिया आज की जाएगी। जशपुर विधायक रायमुनि भगत देर रात बगीचा अस्पताल पहुंचीं जहां उन्होंने घायलों से मुलाकात कर हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। पुलिस ने बोलेरो वाहन को जब्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

आदि कर्मयोगी अभियान से जनजातीय समाज होगा सशक्त: डॉ. ओम डहरिया

   रायपुर देश की आजादी के बाद यह पहला अवसर है जब किसी सरकार ने जनजातीय समाज के जीवन स्तर को उपर उठाने के लिए देशव्यापी अभियान छेड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनजातीय समाज के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार जैसे मूलभुत सुविधाओं से जोड़ने और इनका लाभ दिलाने के लिए आदि कर्मयोगी अभियान की शुरूआत की है। यह अभियान देशभर के 30 राज्यों में संचालित किया जा रहा है। यह अभियान देश भर के 550 से ज्यादा जिलों और 1 लाख से अधिक आदिवासी बहुल गांवों में बदलाव के लिए काम करेगी।  बता दें कि जब भारत 2047 में अपनी आज़ादी के 100 वर्ष पूरा करेगा। उस समय तक विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए यह जरूरी है कि समाज का कोई भी वर्ग पीछे न छूटे। आदिवासी समाज को आगे बढ़ाए बिना यह सपना अधूरा रहेगा। आदि कर्मयोगी अभियान इस अंतर को भरने के लिए एक ठोस कदम है। यह अभियान शासन और समाज के बीच की दूरी को कम करेगा, पारदर्शिता लाएगा और योजनाओं को ज़मीनी स्तर तक पहुँचाएगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अभियान को सेवा पर्व का रूप दिया है। उनका कहना है कि यह केवल योजनाओं की जानकारी देने का प्रयास नहीं, बल्कि समाज और शासन को जोड़ने वाला पुल है। छत्तीसगढ़ में इस अभियान के लिए वृहद स्तर पर आदिकर्म योगियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ये कर्मयोगी जनजातीय परिवारों से घर-घर संपर्क कर उनकी आवश्यकताओं और जरूरतों को समझेंगे तथा केंद्र और राज्य सरकार  की योजनाओं का लाभ दिलाने में मदद करेंगे, राज्य और जिला स्तर पर इसकी मॉनिटरिंग की जाएगी। राज्य सरकार के सभी विभागों के अधिकारी इस कार्य में संवेदनशीलता के साथ सीधे जुड़ेंगे। आदिकर्मयोगी अभियान का महत्व राष्ट्रीय स्तर पर इसलिए भी है क्योंकि भारत की जनजातीय आबादी लगभग 10 करोड़ से अधिक है। इतने बड़े समुदाय को मुख्यधारा में लाए बिना 2047 तक विकसित भारत का सपना अधूरा रहेगा। यह अभियान प्रधानमंत्री की उस सोच से जुड़ा है, जिसमें हर क्षेत्र, हर समाज और हर नागरिक को विकसित भारत” की यात्रा में समान अवसर देना है। भारत का विकास केवल शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं रह सकता। एक सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र वही कहलाएगा, जहाँ समाज के हर तबके को समान अवसर मिले और उसकी संस्कृति को उचित सम्मान दिया जाए। इसी सोच को मूर्त रूप ‘आदि कर्मयोगी अभियान’ के जरिए दिया जा रहा है। यह वस्तुतः जनजातीय समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है। छत्तीसगढ़ देश का वह राज्य है जहाँ सर्वाधिक जनजातीय जनसंख्या निवास करती है। इसीलिए इस अभियान का यहां विशेष महत्व है। आदिवासी समाज की असली चुनौती यही रही है कि अनेक योजनाएँ होते हुए भी उनकी जानकारी और लाभ ज़रूरतमंदों तक समय पर नहीं पहुँच पाते। ऐसे में लाखों कर्मयोगी स्वयंसेवक योजना और समाज के बीच सेतु बन सकेंगे। यह अभियान राज्य के 28 जिलों और 138 विकासखंडों के 6 हजार 650 गांवों में 1 लाख 33 हजार से अधिक वालंटियर्स तैयार करने का लक्ष्य रखा है। छत्तीसगढ़ में यह अभियान 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक पूरे राज्य में ग्राम पंचायत स्तर पर सेवा पखवाड़ा के रूप में मनाया जाएगा।  आदिम जाति कल्याण मंत्री राम विचार नेताम में अधिकारियों को पंचायतों में आदि सेवा केंद्र स्थापित करने और जनजातीय परिवारों को पेंशन, स्वास्थ्य बीमा, छात्रवृत्ति, रोजगार, कौशल विकास जैसी सुविधाओं के लिए मार्गदर्शन और योजनाओं का लाभ दिलाने में मदद करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा है कि इस अभियान को सेवा पर्व के रूप में मनाया जाए और जनजातीय योजनाओं को घर-घर तक पहुँचाने का ठोस प्रयास किया जाए। आदि कर्मयोगी अभियान के पीछे एक गहरी सामाजिक सोच है। जब कोई स्थानीय युवा, महिला या स्वयंसेवक अपने ही गाँव में जाकर योजनाओं की जानकारी देता है, तो लोग उस पर भरोसा करते हैं और यह विश्वास ही बदलाव की असली ताकत है। अभियान का असर शिक्षा और स्वास्थ्य से लेकर आजीविका तक हर क्षेत्र में दिखेगा। जब एक वालंटियर किसी परिवार को यह बताता है कि उनकी बेटी को छात्रवृत्ति मिल सकती है, या बुजुर्ग को पेंशन का हक़ है, तो यह केवल सूचना नहीं होती, बल्कि उस परिवार की ज़िंदगी बदलने वाला अवसर होता है।

बाढ़ ने छत्तीसगढ़ में मचाई तबाही, डैम टूटने से कई गांव डूबे, 4 की मौत

रायपुर  छत्‍तीसगढ़ में भी लगातार मूसलाधार बारिश हो रही है. इस वजह से नदी-नाले उफान पर हैं. डैम भी पानी से लबालब हो चुके हैं. इस बीच, प्रदेश के बलरामपुर में बांध टूटने से 4 घर बह गए, जिसकी चपेट में 8 लोग आए. इनमें से 4 की लाश बरामद हो गई है. बाकी की तलाश जारी है. बलरामपुर जिले के तातापानी पुलिस चौकी क्षेत्र अंतर्गत स्थित लुतिया डैम मंगलवार की रात करीब 11 बजे टूट गया। बांध टूटने से दो मकान पूरी तरीके से बाढ़ में बह गए, दोनों मकान में 8 लोग सोए थे, जिसमें 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि 5 लोग अब भी लापता हैं। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है। पुलिस और प्रशासन की टीम लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई है। फिलहाल राहत और बचाव कार्य जारी है।  2 लोगों की लाश को मौके से बरामद बलरामपुर जिले में लगातार तेज बारिश होने के कारण लुतिया डेम रात 11 बजे के करीब टूट गया। बताया गया है कि पहाड़ में तीज बारिश होने के कारण पहाड़ की झरने का पानी बांध में आ रहा था और उसके बाद बांध लबालब भर गया। देखते ही देखते पूरा बांध टूट गया, लेकिन इस दौरान पहले से यहां पर कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया था और न ही जल संसाधन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे हुए थे। लगातार बारिश से नदी-नाले उफान पर… केलो डेम के चार गेट खोले गए, IMD ने यलो अलर्ट किया जारी यही वजह है कि यहां पर ऊंचाई में मकान बनाकर रह रहे दो परिवार के लोग गहरी नींद में जब सोए हुए थे, तब बांध के पानी की वजह से आने वाले बाढ़ में वे बह गए, घर का नामोनिशान मिट गया। रात 3 बजे के करीब कलेक्टर राजेंद्र कटारा और पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे और उन्होंने रेस्क्यू टीम के माध्यम से 2 लोगों की लाश को मौके से बरामद किया। इसमें 60 वर्षीय महिला बसतिया और उसकी बहू 26 वर्षीय रजंती शामिल है। 3 अस्पताल में भर्ती प्रशासन द्वारा तीन लोगों को गंभीर हालत में इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। वहीं जब सुबह होने लगी तब एक व्यक्ति का और लाश मिला है, यानी अब तक कुल 3 लोगों की लाश बरामद हो गई है। वही बताया जा रहा है कि अभी 3 लोग लापता है और उनकी तलाश एसडीआरएफ की टीम के द्वारा की जा रही है। निचले इलाके में भरा पानी, बहे ग्रामीण बांध टूटने के कारण पानी निचले इलाके में पहुंच गया। बाढ़ की चपेट में 4 घर आ गए। इन घरों में रहने वाले 8 ग्रामीण तेज पानी में बह गए। घटना की सूचना ग्रामीणों ने जिला पंचायत उपाध्यक्ष धीरज सिंहदेव को दी। उन्होंने कलेक्टर और एसपी को हादसे की जानकारी दी। धीरज सिंहदेव करीब 12.30 बजे घटनास्थल पर पहुंचे। देर रात कलेक्टर राजेंद्र कटारा और एसपी वैभव बैंकर सहित प्रशासनिक अधिकारी, रेस्क्यू टीम के साथ मौके पर पहुंचे। सैकड़ों लोग खोजबीन में जुटे जहां बांध बहा है, वहां से कन्हर नदी की दूरी करीब पांच किलोमीटर है। बाढ़ में बहे लाेगाें की खोजबीन में सैकड़ों लोग जुटे हैं। अब तक लापता लोगों का पता नहीं चला है। अन्य ग्रामीणों के घर बहे, लेकिन इनके सदस्य बच गए। बाढ़ की चपेट में आकर ग्रामीणों की सैकड़ों एकड़ में लगी धान और टमाटर सहित अन्य फसलें भी बर्बाद हो गई हैं। बाढ़ की चपेट में आकर ग्रामीणों के कई मवेशी भी बह गए हैं। कुछ की खूंटे में बंधी हालत में मौत हो गई। कई बांध लबालब, प्रशासन ने किया सतर्क बलरामपुर जिले में इस साल औसत से 59 प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। इसके कारण जिले के सभी बांध लबालब भर गए हैं और नदी, नाले भी उफान पर हैं। इसे देखते हुए पुराने बांध के नीचे रहने वालों को सतर्क भी किया गया है। डेम में रिसाव हो रहा था लेकिन नहीं दिया ध्यान : डेम फूटने से आई बाढ़ में कई मवेशी भी बह गए हैं। दूसरी तरफ स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से डेम में रिसाव हो रहा था लेकिन इसके बाद भी जल संसाधन विभाग के अधिकारी इसका मरम्मत नहीं कर रहे थे जबकि इस साल लगातार पिछले दो महीना से अत्यधिक बारिश हो रही है उसके बावजूद जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने यहां पर पहले से कोई अलर्ट जारी नहीं किया था और न ही मुनादी कराया था अगर ऐसा किया गया होता तो लोगों की जान नहीं गई होती। बताया गया है की डेम का निर्माण पहाड़ी के नीचे किया गया है और इसका निर्माण 50 साल पहले किया गया था लेकिन जल संसाधन विभाग के अधिकारी वास्तविक रूप से इस डेम का मरम्मत नहीं कर रहे थे सिर्फ कागजों में ही हर साल मरम्मत किया जाता था। यही वजह है कि इस साल डेम तेज बारिश के बीच बह गया।

त्योहारों पर घर जा रहे हैं? जान लें ट्रेनों और हवाई यात्रा की जरूरी खबर

लखनऊ इस बार दीपावली पर घर आने के लिए ट्रेनों की रिग्रेट की स्थिति विमान कंपनियों के लिए अवसर बन गई है। विमानों में सीट की मांग बढ़ते ही किराया भी उड़ान भरने लगा है। हालत यह है कि दीपावली के डेढ़ महीने पहले ही किराया सामान्य से तीन गुणा से अधिक तक पहुंच गया है। जानकारों की मानें तो इस बार विमान किराया पहले की अपेक्षा कहीं अधिक बढ़ सकता है। दरअसल दशहरा, दीपावली और छठ पर्व पर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, अमृतसर और दक्षिण भारत के कई शहरों से बड़ी संख्या में यात्री लखनऊ अपने घर पहुंचते हैं। पिछले वर्ष तक रेलवे 120 दिन पहले ट्रेनों के आरक्षण की बुकिंग शुरू करता था। साथ ही अधिक वेटिंग लिस्ट की उपलब्धता भी यात्रियों के पास होती थी। अब रेलवे ने एडवांस रिजर्वेशन की समय सीमा को घटाकर 60 दिन कर दिया है। साथ ही एसी और नान एसी श्रेणी के यात्रियों के लिए वेटिंग कोटा भी कम कर दिया है। इससे ट्रेनों की उपलब्ध सीटों के सापेक्ष 60 प्रतिशत तक वेटिंग होते ही स्थिति रिग्रेट हो रही है। दीपावली पर लखनऊ आने वाली 17 अक्टूबर की ट्रेनों में स्थिति रिग्रेट होने के कारण यात्री बड़ी संख्या में विमान टिकट बुक करा रहे हैँ। इसके चलते पहले जो किराया पर्व के एक सप्ताह पहले महंगा होता था, वह इस बार डेढ़ महीने पहले ही बढ़ गया है। यात्रियों के लिए हर सीट की बुकिंग के साथ महंगे विमान किराए की मुश्किलें और बढ़ेंगी। मुंबई से लखनऊ का किराया इस बार 28 से 30 हजार रुपये तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है।  

हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी में सुधार के लिए शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने दिए निर्देश

हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी में सुधार के लिए शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने दिए निर्देश शिक्षा मंत्री यादव ने कहा: छात्रों के परिणाम सुधार के लिए ठोस प्रयास जरूरी रायपुर में शिक्षा मंत्री ने हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी सुधार को बताया प्राथमिकता स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने लोक शिक्षण संचालनालय के अधिकारियों की ली समीक्षा बैठक रायपुर स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग, विधि एवं विधायी कार्य मंत्री गजेन्द्र यादव ने आज लोक शिक्षण संचालनालय के अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। उन्होंने कहा कि इस वर्ष हाईस्कूल और हायर सेकेण्डरी परीक्षाओं के परिणामों में सुधार लाने के लिए अभी से ठोस और प्रभावी प्रयास किए जाएं। इसके लिए स्कूलों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए तथा पठन-पाठन की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी रखी जाए। मंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि आवश्यकता पड़ने पर शिक्षकों को प्रशिक्षण एवं समुचित सलाह उपलब्ध कराई जाए। बैठक में सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी सचिव स्कूल शिक्षा एवं लोक शिक्षण संचालक ऋतुराज रघुवंशी ने विभागीय संरचना, शासकीय स्कूलों और छात्रों की संख्या, शिक्षकों की स्थिति, शैक्षणिक पद, बजट प्रावधान, अधोसंरचना तथा विद्यार्थियों के लिए संचालित योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। मंत्री यादव ने निःशुल्क गणवेश, निःशुल्क पाठ्यपुस्तक, शिक्षा का अधिकार अधिनियम और निःशुल्क सरस्वती साइकिल योजना की जानकारी लेकर इन योजनाओं को सुचारू रूप से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान को भी पूरी गंभीरता से लागू करने पर जोर दिया। यादव ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधार में सामुदायिक सहयोग बेहद आवश्यक है। इसके लिए स्कूलों में सामाजिक अंकेक्षण आयोजित किए जाएं, ताकि समाज की भागीदारी से शिक्षा व्यवस्था और सुदृढ़ हो सके। उन्होंने राज्य में आयोजित रजत जयंती समारोह के अवसर पर प्रस्तावित गतिविधियों पुस्तक वाचन दिवस, बाल पंचायत, एल्युमिनी मीट, शिक्षक दिवस और प्रदर्शनीक के आयोजन की रूपरेखा पर भी अधिकारियों से चर्चा की। शिक्षा मंत्री ने जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने जिलों से शिक्षकों की संपूर्ण जानकारी, पदस्थापना तथा रिक्त पदों का विवरण संचालनालय को प्रस्तुत करें। इससे स्कूलों की स्थिति में सुधार हेतु आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में सैनिक स्कूलों और केंद्रीय विद्यालयों की संख्या बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। बैठक में लोक शिक्षण संचालनालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

गांधीसागर और कूनो बने ईको-टूरिज्म व साहसिक पर्यटन के केंद्र : मंत्री लोधी

मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा गांधीसागर एवं कूनो फॉरेस्ट रिट्रीट एंड फेस्टिवल का आयोजन भोपाल मध्यप्रदेश अब पर्यटकों को देने जा रहा है ऐसा सफर, जिसकी प्रतीक्षा लंबे समय से थी। जंगल की रोमांचक रातें, नदी और बैकवाटर्स की शांति और आसमान को छूती साहसिक गतिविधियां, ये सब मिलकर जल्द शुरू करने जा रहे हैं पर्यटन का नया अध्याय। मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड, ईको-टूरिज्म और साहसिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से इस वर्ष दो महत्वपूर्ण आयोजनों का शुभारंभ करने जा रहा है। “गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट” का चतुर्थ संस्करण 12 सितंबर 2025 से मंदसौर जिले के गांधीसागर डैम पर और “कूनो फॉरेस्ट रिट्रीट” का द्वितीय संस्करण 5 अक्टूबर 2025 से श्योपुर जिले के कूनो राष्ट्रीय उद्यान के समीप आयोजित होगा। पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि गांधीसागर और कूनो जैसे फॉरेस्ट रिट्रीट केवल पर्यटन आयोजन नहीं हैं, बल्कि ये हमारे प्रदेश की प्राकृतिक धरोहर, सांस्कृतिक समृद्धि और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ने का प्रयास हैं। गांधीसागर और कूनो ईको-टूरिज्म व साहसिक पर्यटन के केंद्र के रूप में उभरे हैं। गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट का उद्देश्य प्रदेश को एडवेंचर टूरिज्म के मानचित्र पर विशेष पहचान दिलाना है, वहीं कूनो फॉरेस्ट रिट्रीट हमारे लिए वेलनेस और वन्यजीव पर्यटन का हब है। इन आयोजनों से न केवल देश-विदेश से पर्यटक आकर्षित होंगे बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।    अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति, गृह और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व तथा प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड श्री शिव शेखर शुक्ला ने कहा गांधीसागर और कूनो फॉरेस्ट रिट्रीट, अनुभव-आधारित पर्यटन के उदाहरण हैं। इन आयोजनों में आने वाले मेहमान उच्च स्तरीय और सर्व सुविधा युक्त ग्लेम्पिंग का आनंद उठाएंगे और जल, थल एवं वायु आधारित साहसिक गतिविधियों जैसे पैरासेलिंग, पैरामोटरिंग, जेट स्की, हॉट एयर बैलूनिंग, जंगल सफारी, नाइट वॉक और स्टार गेज़िंग का रोमांचक अनुभव प्राप्त करेंगे। ऑल सीजन टेंट सिटी के साथ ही बोट सफारी, बोट स्पा, योग एवं वेलनेस- सत्र, स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प प्रदर्शन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां पर्यटकों को प्रदेश की संस्कृति और जीवन शैली से निकटता से जोड़ेंगी। इन आयोजनों को हमने इस तरह से आयोजित किया है कि पर्यटन के साथ पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और सतत विकास को प्राथमिकता दी जाए।  गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट एंड फेस्टिवल (12 सितंबर 2025 से) चंबल नदी पर बने गांधीसागर डैम के मनोहारी बैकवाटर क्षेत्र को एडवेंचर हब बनाने की दिशा में मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा यह आयोजन शुरू किया गया था, जो अब देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। मुख्य आकर्षण: प्राकृतिक सौंदर्य से घिरी ग्लेम्पिंग साइट (50 लग्जरी ऑल सीजन टेंट सिटी) जल, थल और वायु आधारित साहसिक गतिविधियां पैरासेलिंग, पैरामोटरिंग, जेट स्की, ज़ोरबिंग आदि बोट सफारी एवं बोट स्पा जंगल सफारी स्थानीय व्यंजन, इनडोर स्पोर्ट्स एवं मनोरंजन सुविधाएं प्रकृति संरक्षण और स्थानीय हस्तशिल्प पर केंद्रित कार्यशालाएं बटरफ्लाई गार्डन रॉक गार्डन। उद्देश्य एवं लाभ : मध्यप्रदेश में पर्यटन को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के साथ ही यह पहल क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। इन आयोजनों के माध्यम से नेचर एवं एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोमांचक गतिविधियों का अनुभव करने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। साथ ही, स्थानीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के साथ नई पीढ़ी में अपनी धरोहर और प्राकृतिक संपदा के प्रति जागरूकता भी विकसित होगी। कूनो फॉरेस्ट रिट्रीट एंड फेस्टिवल (5 अक्टूबर 2025 से) चीतों की वापसी के ऐतिहासिक क्षण का साक्षी रहा कूनो राष्ट्रीय उद्यान अब इको-टूरिज्म और सांस्कृतिक धरोहर का संगम प्रस्तुत करने जा रहा है। यह आयोजन पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी के साथ पर्यटन को नई पहचान देगा। मुख्य आकर्षण : जल, थल और वायु आधारित साहसिक गतिविधियां, कला, शिल्प, लोक संगीत और नृत्य का आयोजन, प्राकृतिक सौंदर्य के बीच ग्लेम्पिंग साइट (25 लग्जरी ऑल सीजन टेंट सिटी), रोमांचक जंगल सफारी एवं नाइट वॉक, योग, ध्यान एवं वेलनेस सत्र, विलेज टूर और विभिन्न कार्यशालाएं, हॉट एयर बैलूनिंग, स्टार गेजिंग का अनुभव एवं चीता इंटरप्रिटेशन सेंटर आदि हैं। उद्देश्य एवं लाभ : मध्यप्रदेश में आयोजित होने वाला कूनो फॉरेस्ट रिट्रीट प्रदेश के पर्यटन को नई दिशा देने वाला है। यह आयोजन वन्यजीवन, इको-टूरिज्म और साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देता है और चीता पुनर्वास जैसे ऐतिहासिक प्रयास को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करता है। इसके माध्यम से स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर निर्मित होंगे। साथ ही यह पहल पर्यावरण संरक्षण और सतत पर्यटन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी, जो प्रदेश को अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर विशेष पहचान दिलाएगी।

किसानों को सस्ता खाद और जल जीवन मिशन में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

रायपुर : किसानों को उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराने और जल जीवन मिशन के कार्यों में गुणवत्ता लाने के दिए गए निर्देश किसानों को सस्ता खाद और जल जीवन मिशन में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के दिए निर्देश रायपुर: कृषि और जल योजनाओं में सुधार पर अधिकारियों को शिक्षा मिली स्वास्थ्य और शिक्षा सहित जिले के विकास में हो डीएमएफ की राशि का सदुपयोग दिशा समिति और डीएमएफ के शासी समिति की बैठक संपन्न रायपुर जिला खनिज संस्थान न्यास और जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति की बैठक आज जिला कार्यालय कोंडागांव के सभाकक्ष में संपन्न हुई, जिसमें बस्तर सांसद महेश कश्यप, कांकेर सांसद भोजराज नाग, बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष और कोंडागांव विधायक सुलता उसेंडी और विभिन्न जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे। बैठक में डी एम एफ की राशि का समुचित उपयोग जिले के निवासियों के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य सहित क्षेत्र के विकास कार्य में व्यय पर जोर दिया गया। वहीं किसानों को उचित मूल्य पर खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने और जल जीवन मिशन के कार्यों में गुणवत्ता लाने हेतु संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया गया। इस दौरान कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना, पुलिस अधीक्षक वाय अक्षय कुमार सहित जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रीता शोरी सहित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण मौजूद रहे।  सांसद महेश कश्यप ने कहा कि जिले में स्कूल आंगनबाड़ी भवन के मरम्मत या नए भवनों के कार्यों को प्राथमिकता दें। बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए यह बहुत जरूरी है। उन्होंने धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत शीघ्र सभी विभागों से प्रस्ताव तैयार करने हेतु निर्देशित किया। साथ ही आदि कर्म योगी अभियान के क्रियान्वयन के निर्देश दिए। उन्होंने सांसद खेल महोत्सव के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंशानुरूप खेलो इंडिया और फिट इंडिया अभियान के तहत राष्ट्रीय स्तर पर खेल प्रतियोगिता का आयोजन शुरू किया जा रहा है, जो कि तीन माह तक चलेगा। सांसद भोजराज नाग ने कहा कि डीएफएम की राशि का समुचित उपयोग सुनिश्चित करें। दुरूपयोग न हो जिले के शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में सदुपयोग करें।  कोंडागांव विधायक सु लता उसेंडी ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए गए प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई का समुचित उपयोग के निर्देश दिए। किसानों को नर्सरी विकसित करने हेतु प्रशिक्षण दिलाएं। केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम ने प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण  की समीक्षा दौरान कहा कि आवास निर्माण में प्रगति लाने जनप्रतिनिधि भी आगे आएं। साथ माओवाद पीड़ित और प्रभावितों के लिए स्वीकृत आवासों को प्राथमिकता से पूर्ण कराएं। बैठक में कृषि विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया गया कि किसानों को खाद उचित मूल्य पर उपलब्ध हो यह सुनिश्चित करें। जिले में जल जीवन मिशन के प्रगति की विस्तृत समीक्षा करते हुए लोक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया गया कि जल जीवन मिशन के कार्यों में गुणवत्ता लाएं और गांव के शत प्रतिशत घरों में शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करें।  महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए जिले में कुपोषण को दूर करने हेतु स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सहभागिता से अभियान चलाने की बात कही गई। स्वास्थ्य विभाग के कार्यों की समीक्षा के दौरान जिले में स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति की जानकारी लेते हुए मलेरिया मुक्त अभियान के लिए जनजागरुकता अभियान चलाने के निर्देश दिए।  जिले में शिक्षा विभाग के स्कूल भवनों की स्थिति की गहन समीक्षा की गई और मरम्मत और नए भवन हेतु प्रस्ताव भेजने को कहा गया। साथ आश्रम छात्रावासों में सभी व्यवस्था दुरुस्त करने तथा कन्या छात्रावासों में सीसीटीवी और महिला सुरक्षा गार्ड एवं स्वास्थ्य कर्मी की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। जनप्रतिनिधि भी आश्रम छात्रावासों का नियमित निरीक्षण करें। बैठक में इसके अलावा मनरेगा, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन,  लखपति दीदी, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, संसद आदर्श ग्राम, राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान,  भारत नेट, राष्ट्रीय सामाजिक सहायता योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, ग्राम सड़क योजना, केशकाल बायपास  सहित विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन और निर्माण कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई।

सबसे सस्ती मार्केट: हरियाणा में यहां मिलते हैं कपड़े किलो के भाव में

हरियाणा  आजकल फैशन की दुनिया में तेजी से बदलाव आया है। हर कोई नए और ब्रांडेड कपड़े खरीदना पसंद करता है। लेकिन महंगाई के इस दौर में अच्छी क्वालिटी के कपड़े खरीदना हर किसी के लिए आसान नहीं रहता। जेबें ढीली हो जाती हैं और खरीदारी का मज़ा कम हो जाता है। ऐसे में हम आपको हरियाणा की एक खास मार्केट के बारे में बताने जा रहे हैं, जो दिल्ली के मशहूर चोर बाजार से भी सस्ती है। यह मार्केट पानीपत में स्थित है, जहां आप किलो के हिसाब से बेहद कम दामों में बेहतरीन कपड़े खरीद सकते हैं। पानीपत की ये मार्केट क्यों है खास? जब भी सस्ते कपड़ों की बात होती है, तो हमारे दिमाग में दिल्ली के सरोजिनी नगर, चांदनी चौक या चोर बाजार जैसे नाम आते हैं। लेकिन पानीपत की यह मार्केट इन सब से बेहतर साबित होती है। यहां न केवल सस्ते, बल्कि ब्रांडेड कपड़े भी बहुत कम दामों में उपलब्ध होते हैं। पानीपत के साथ-साथ आसपास के इलाकों के लोग भी यहां खरीदारी करने आते हैं। किलो के हिसाब से कपड़े इस मार्केट की सबसे अनोखी बात यह है कि यहां कपड़े पीस के हिसाब से नहीं बल्कि किलो के हिसाब से बेचे जाते हैं। दुनियाभर से यहां पुराने, लेकिन अच्छे हालत वाले कपड़े आते हैं। उन्हें उनकी गुणवत्ता के अनुसार श्रेणियों में बांटा जाता है और फिर उचित दाम पर बेचा जाता है। यही वजह है कि कई व्यापारी यहां से कपड़े खरीदकर दिल्ली के लाजपत नगर, सरोजिनी नगर और अन्य जगहों पर बेचते हैं।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मेडिकल कॉलेज जबलपुर एवं ग्वालियर के उन्नयन की योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय भोपाल में नेताजी सुभाषचन्द्र बोस मेडिकल कॉलेज जबलपुर तथा गजरा राजा मेडिकल कॉलेज ग्वालियर एवं जय आरोग्य अस्पताल के उन्नयन एवं विस्तार योजना की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि चिकित्सकीय आवश्यकताओं और भविष्य की मांग को ध्यान में रखते हुए मेडिकल कॉलेजों और संबद्ध अस्पतालों का विस्तार एवं उन्नयन आवश्यक है। इसके लिए ठोस और व्यवहारिक योजना शीघ्र तैयार की जाये, ताकि जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा सकें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने वर्तमान आधारभूत संरचनाओं की स्थिति का आकलन करने के लिए निर्माण एजेंसी और पीडब्ल्यूडी की संयुक्त टीम गठित कर विस्तृत निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर प्रस्ताव को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाये। ग्वालियर के गजरा राजा मेडिकल कॉलेज और जय आरोग्य हॉस्पिटल की समीक्षा के दौरान उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सीसीएचबी का उन्नयन कर इसे 200 बेड क्षमता का बनाया जाये। उन्होंने निर्देश दिए कि छात्रावास एक ही परिसर में निर्मित हों और उपलब्ध स्पेस का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित किया जाये। उन्होंने एमपीबीडीसी द्वारा तैयार किए गए विस्तार और पुनर्विकास मॉडल का अवलोकन भी किया और आवश्यक सुझाव दिए। जबलपुर स्थित नेताजी सुभाषचन्द्र बोस मेडिकल कॉलेज की समीक्षा के दौरान उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक की क्षमता 240 से बढ़ाकर 400 बेड की जाये। उन्होंने अस्पताल की कुल क्षमता को 1000 बेड तक विस्तार करने के निर्देश दिए। साथ ही चिकित्सकों और कार्मिकों के लिए आवासीय ब्लॉकों के निर्माण को भी योजना में शामिल करने को कहा। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि अधोसंरचना विकास के साथ उसके रख-रखाव की व्यवस्था को भी प्रस्तावित योजना में सुनिश्चित किया जाये। बैठक में संचालक (प्रोजेक्ट) लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा नीरज कुमार सिंह, एमडी एमपीबीडीसी सिबी चक्रवर्ती सहित पीआईयू और एमपीबीडीसी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

सेमीकंडक्टर में भारत की बड़ी छलांग, 2047 से पहले बन सकता है ग्लोबल लीडर

नई दिल्ली भारत तेजी से घरेलू स्तर पर सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण कर रहा है और मंगलवार को सेमीकॉन इंडिया 2025 में इंडस्ट्री लीडर्स ने कहा कि देश 2047 से पहले दुनिया का सेमीकंडक्टर पावरहाउस बन सकता है। सेमीकॉन इंडिया के साइडलाइन में समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए इंडस्ट्री लीडर्स ने कहा कि भारत की मजबूत प्रतिभा, सहायक नीतियां और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां इस परिवर्तन को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख कारक हैं। एसईएमआई (सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट एंड मटेरियल्स इंटरनेशनल) के सीईओ और प्रेसिडेंट ने कहा कि भारत का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तेज वृद्धि के रास्ते पर है। उन्होंने आईएएनएस से कहा, "अगर भारत की मौजूदा रफ्तार जारी रहती है, तो देश 2047 तक सेमीकंडक्टर का पावरहाउस बना सकता है।" चिप निर्माण में वैश्विक परस्पर निर्भरता के महत्व पर जोर देते हुए, मनोचा ने कहा कि भारत को वैल्यू चेन में अपना सही स्थान खोजना होगा, जिसकी शुरुआत असेंबली और परीक्षण से होगी, जबकि आने वाले वर्षों में बड़े वेफर फैब आने की उम्मीद है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण "भारत की सबसे छोटी चिप सबसे बड़ा बदलाव लाएगी" का भी समर्थन किया और बताया कि सेमीकंडक्टर अब आधुनिक जीवन का आधार हैं। मीडियाटेक इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर अंकु जैन ने कहा कि सेमीकॉन इंडिया 2025 देश के लिए एक मील का पत्थर है। इससे सेमीकंडक्टर क्षेत्र में देश को घरेलू स्तर पर क्षमताएं विकसित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, "भारत में घरेलू स्तर पर बनी चिप्स 2025 के अंत तक बाजार में आ जाएंगी और 1.60 लाख करोड़ रुपए की वैल्यू के 10 फेब्रिकेशन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी गई है। सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री विकसित करके भारत केवल एक इंडस्ट्री का निर्माण नहीं कर रहा, बल्कि अरबों लोगों तक टेक्नोलॉजी को पहुंचा रहा है।" जैन ने कहा कि भारत एक तेजी से बढ़ता हुआ बाजार है। अधिक रिसर्च एंड डेवलपमेंट टैलेंट का विशाल पूल, सपोर्टिव इकोसिस्टम, देश को मीडियाटेक के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार बनाते हैं। गति शक्ति विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनोज चौधरी ने कहा कि भारत अभी सेमीकंडक्टर निर्माण के शुरुआती चरण में है, लेकिन प्रगति तेजी से हो रही है। उन्होंने कहा, "अगले 10-20 वर्षों में, भारत वैश्विक स्तर पर अपनी एक मजबूत पहचान बनाएगा। दुनिया की 20 प्रतिशत डिजाइन टैलेंट पहले से ही यहां मौजूद हैं और डीएलआई जैसी योजनाओं से मिलने वाले समर्थन के साथ, स्वदेशी चिप डिजाइन और निर्माण को काफी बढ़ावा मिलेगा।" एमर्सन के कंट्री हेड और डायरेक्टर शीतेंद्र भट्टाचार्य ने कहा कि सरकार सही नीति बनाकर इंडस्ट्री को सपोर्ट कर रही है और स्थानीय कंपनियां इनोवेशन पर फोकस कर रही है। मुझे लगता है कि अगले 10 वर्षों में देश इनोवेशन में काफी आगे बढ़ सकता है। इससे आत्मनिर्भरता में मदद मिलेगी। उन्होंने आगे कहा कि देश के पास एक बड़ा बाजार है। हर इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद में सेमीकंडक्टर का उपयोग होता है। इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद हर व्यक्ति की जरूरत है ऐसे में आने वाले समय में सेमीकंडक्टर सेक्टर देश की जीडीपी में बढ़ा योगदान देगा। कायन्स सेमीकॉन प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ रघु पैनिकर ने कहा कि यह इवेंट बहुत बड़ा मौका है। इससे उत्पादकों को इंडस्ट्री के लोगों से मिलने और अपना प्रोडक्ट दिखाने का अवसर मिलता है, जिससे विकास के नए अवसर खुलते हैं। उन्होंने आगे कहा कि देश में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का विकसित करने पर सरकार का फोकस होना बहुत अच्छा संकेत है, क्योंकि आज के समय में सीलिंग फैन से लेकर कार और रेलवे आदि में सेमीकंडक्टर का उपयोग हो रहा है। ऐसे में अगर इनका उत्पादन स्थानीय स्तर पर होता है तो प्रोडक्ट्स की लागत में कमी आएगी। डेल्टा इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के बिजनेस हेड- इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन एसबीपी डॉ. संजीव श्रीवास्तव ने बताया कि आज के समय में हर इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट में सेमीकंडक्टर का उपयोग किया जा रहा है। भारत भी एक बड़ा बाजार है। ऐसे में यह इंडस्ट्री 2047 तक विकसित भारत बनाने में काफी योगदान देगी।