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अज़ीम प्रेमजी छात्रवृत्ति 2025 हेतु आवेदन प्रांरभ इस वर्ष 2.5 लाख छात्राओं को मिलेगी यह छात्रवृत्ति

(वर्ष 2024-25 कुल 25000 छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की गई थी जिसमे मध्यप्रदेश की 18,000 से अधिक छात्राएं लाभान्वित हुई । छात्रवृत्ति के पहले वर्ष की धनराशी को इन छात्राओ के खातों में ट्रांसफर कर दिया गया है) भोपाल अज़ीम प्रेमजी छात्रवृत्ति पायलट के तौर पर शैक्षणिक वर्ष 2024-25 में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और झारखंड के कुछ चुनिन्दा जिलों में लॉन्च किया गया था । इस पायलट कार्यक्रम में 25,000 से अधिक छात्राओ को यह  छात्रवृत्ति दी गई है  मध्य प्रदेश में 18,000 से अधिक छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की गई जिसमे से भोपाल जिले की लगभग 295 छात्राएं लाभान्वित हुई | अज़ीम प्रेमजी छात्रवृत्ति का उद्देश्य स्कूली शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली छात्राओ को वित्तीय सहायता प्रदान करना है एवं यह सुनिश्चित करना है की धन की कमी से कोई  भी छात्रा अपनी पढ़ाई न छोड़े | अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन का अनुमान है कि वह शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में 2.5 लाख छात्राओ को अज़ीम प्रेमजी छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही होगी । यह कार्यक्रम इस साल से देश के 18 राज्यों में शुरू किया जा रहा है   इस वर्ष छात्रवृत्ति हेतु आवेदन 10 सितंबर से प्रारंभ हो रहे है | प्रथम चरण में आवेदन करने की अंतिम तिथि 30 सितम्बर है ।  अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन द्वारा संचालित अज़ीम प्रेमजी छात्रवृत्ति के बारे में मुख्य बातें: पात्रता: ऐसी छात्रायें जिन्होने सरकारी (पब्लिक) स्कूलों से कक्षा 10वी और 12वी की पढ़ाई की हो। किसी प्रामाणिक उच्च शिक्षा संस्थान (HEI) में डिग्री या डिप्लोमा कार्यक्रम में प्रवेश लिया हो। ‘प्रामाणिक’ HEI की सूची में सभी सरकारी (पब्लिक) HEI और चुनिंदा निजी HEI भी शामिल होंगे। उपरोक्त पात्रता  रखने वाली कोई भी छात्रा  इस छात्रवृति  हेतु  ऑनलाइन आवेदन कर सकती है  आवेदन पूर्णतः निःशुल्क है   छात्रवृत्ति: डिग्री या डिप्लोमा कार्यक्रम की अवधि के लिए प्रति वर्ष 30,000 रुपये, जब तक छात्रा सफलतापूर्वक कार्यक्रम में जारी रहती है । उदाहरण के लिए, 4 वर्षीय बीएससी नर्सिंग प्रोग्राम करने वाली छात्राओं को उन 4 वर्षों में 1,20,000( एक लाख बीस हजार) रुपये की छात्रवृत्ति सहायता मिलेगी । यह धनराशि हर साल दो किश्तों में छात्राओ के बैंक खाते में सीधे ट्रांसफर की जाएगी । वह अपनी जरूरत के हिसाब से इस धनराशि का उपयोग कर सकती है । । अठारह राज्यों की सूची इस प्रकार है: अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, राजस्थान, सिक्किम, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड । कार्यक्रम का विवरण और कार्यक्रम के डिजाइन या कवरेज में कोई भी बदलाव आवेदन प्रक्रिया की शुरुआत में अधिसूचित किया जाएगा । आने वाले वर्षों में ये संभावना है की छात्रवृत्ति कार्यक्रम में देश के सभी राज्यो को शामिल किया जाएगा  

सोनी सब के कलाकारों ने साझा किए अपने गुरुओं से मिले सबक

मुंबई,  सोनी सब के कलाकारों ने शिक्षक दिवस के अवसर पर अपने गुरुओं से मिले सबक को प्रशंसकों के साथ साझा किया है। उफ़्फ…ये लव है मुश्किल में कैरी की भूमिका निभा रहीं आशी सिंह ने कहा, “इस शिक्षक दिवस पर, मैं उन सभी की आभारी हूं जिन्होंने मुझे सिखाया कि अभिनय सिर्फ प्रदर्शन नहीं है, बल्कि भीतर से जीवन को जीना और समझना भी है। हर निर्देशक, सह-कलाकार और गुरु जिनके साथ मैंने काम किया, किसी न किसी रूप में मेरे शिक्षक रहे, जिन्होंने मुझे मेरे किरदारों के ज़रिए खुद के नए पहलुओं को खोजने का मार्ग दिखाया। मुझे लगता है कि हम लगातार सीखते और विकसित होते रहते हैं, चाहे सेट पर हों या जीवन में। आज मैं अपने सभी शिक्षकों को धन्यवाद देना चाहती हूं, जिन्होंने मुझे केवल कलाकार ही नहीं बल्कि इंसान के रूप में भी गढ़ा। कैरी जैसे जटिल किरदार को निभाते हुए मैंने धैर्य, संवेदनशीलता और ईमानदारी जैसे अनगिनत सबक सीखे हैं।” उफ़्फ…ये लव है मुश्किल में मायरी की भूमिका निभा रहीं सुप्रिया शुक्ला ने कहा, “कई बरसों से पर्दे पर मां का किरदार निभाना ही धैर्य, करुणा और बिना शर्त प्रेम का एक बड़ा सबक रहा है। मुझे ऐसे अद्भुत कोच और निर्देशक मिले जिन्होंने हमेशा यही कहा,‘इसे सच्चा महसूस करो, इसे मायने दो।’ शिक्षक दिवस पर मुझे याद आता है कि गुरु कई रूपों में आते हैं—कभी शिक्षक बनकर, कभी सह-कलाकार बनकर और कभी उन किरदारों के रूप में जिन्हें हम निभाते हैं। हर किसी ने कोई न कोई सबक दिया है जो मेरे साथ हमेशा जुड़ा रहा, और आज मैं उन सबके प्रति गहरी कृतज्ञता महसूस करती हूं जो मुझे निरंतर मार्गदर्शन और प्रेरणा देते रहे।” इत्ती सी खुशी में विराट की भूमिका निभा रहे रजत वर्मा ने कहा, “चाहे वह मेरा पहला डायलॉग कोच हो या कोई वरिष्ठ सह-कलाकार जिसने मुझे ‘एक बार और कोशिश करो’ कहकर प्रेरित किया, ऐसे हर पल मेरे लिए सीखने का अवसर रहा है। ये सबक सेट तक ही सीमित नहीं रहे बल्कि उन्होंने मेरे काम के प्रति दृष्टिकोण और जीवन जीने के तरीके को भी गढ़ा है। अनुशासन, रचनात्मकता और ईमानदारी ऐसी चीज़ें हैं जिन्हें किताबें पूरी तरह नहीं सिखा सकतीं, बल्कि ये साथ काम करने वाले लोग अपने आचरण से हमें सिखाते हैं। इस शिक्षक दिवस पर मैं उन सभी के प्रति आभार व्यक्त करता हूं जिन्होंने जान-बूझकर या अनजाने में मेरे सफर में शिक्षक की भूमिका निभाई। मेरा हर किरदार उनकी सीख की नींव पर खड़ा है, और इसके लिए मैं हमेशा सम्मान और आभार के साथ उन्हें याद रखूंगा।” वीर हनुमान में केसरी की भूमिका निभा रहे आरव चौधरी ने कहा, “जब एक बच्चा जन्म लेता है, तो उसकी पहली गुरु मां होती है, फिर परिवार के बड़े और निश्चित रूप से स्कूल के शिक्षक। लेकिन मेरा मानना है कि एक सबसे बड़ा शिक्षक, जिसका अक्सर उल्लेख नहीं होता, वह है समय। अच्छे और कठिन दौर से समय जो सिखाता है, वह वास्तव में अनमोल होता है। मैं अपने सभी गुरुओं का आभारी हूं, जिनमें मेरे आध्यात्मिक गुरु तर्नेवजी भी शामिल हैं, और हर वह शिक्षक जिन्होंने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से मुझे गढ़ा है। फिल्मकारों, निर्देशकों, निर्माताओं और दिग्गज कलाकारों से लेकर हर किसी ने मेरे लिए मार्गदर्शक का काम किया है। शिक्षक दिवस पर मैं इन सभी प्रभावों के प्रति गहरी कृतज्ञता महसूस करता हूं, क्योंकि यही मेरे जीवन के सच्चे शिक्षक रहे हैं।”  

मुजफ्फरपुर में राजनीतिक माहौल गरम, चिराग ने एलजेपी-राजद के MY के अंतर को बताया

मुजफ्फरपुर बिहार में विधानसभा चुनाव जल्द होने वाला है। चुनाव ही हमलोगों का भविष्य निर्धारित करेगा। ऐसे में हमसब की जिम्मेदारी है कि इसे गंभीरता से समझें और विस चुनाव की तैयारी में जुट जाएं। अगर चूक हुई तो फिर से हमलोग पिछड़ों में धकेले जाएंगे। मुजफ्फरपुर के एमआइटी इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में आयोजित लोजपा (रा) के नव-संकल्प महासभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री सह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने आरजेडी के एम वाई समीकरण के काट में अपने MY समीकरण का मतलब समझाया चिराग ने कहा कि मेरा समीकरण एम फॉर महिला और वाई फॉर युवा है। लेकिन, उनका समीकरण सांप्रदायिक व जाति पर आधारित है। एम से मुसलमान और वाई से यादव। लेकिन, मैं सबको साथ लेकर चलता हूं। बिहार फस्ट बिहारी फर्स्ट के विजन से चलता हूं। उन्होंने कहा कि यह चुनाव युवा, नई पीढ़ी, महिला, बेरोजगार, किसान, मजदूर सभी वर्ग के लिए महत्वपूर्ण है। अपने संबोधन में चिराग ने राजद और कांग्रेस पर जोरदार प्रहार किया। विकास के मुद्दों पर भी घेरा। कहा कि कांग्रेस ने कई दशक राज किया। राजद भी 90 के दशक में बिहार में शासन किया। दोनों ने बिहार को पिछड़ेपन में धकेलने का काम किया है। उन्होंने कहा कि ‘आप’ (जनता) साथ दें, मैं विकसित बिहार बनाकर दूंगा। इसका मैं वादा करता हूं। संकल्प लेता हूं। मेरी मां व बहन पर भी की थी टिप्पणी पीएम मोदी की मां के अपमान पर चिराग पासवान ने कहा कि मेरा संस्कार महिलाओं का सम्मान करना है। राजद और कांग्रेस की संस्कृति गाली देने की रही है। अभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माता को अपशब्द कहा है। लोकसभा में राजद नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने मेरी मां और बहन को गाली दी थी। यह उनका संस्कार है। लोजपा (रा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अपने संदेश को हर गांव तक पहुचाने का आह्वान किया। चिराग ने कांग्रेस और राजद से कई तीखे सवाल भी किये। उन्होंने पूछा के दशकों शासन करने के बाद बिहार में बेरोजगारी, शिक्षा और चिकित्सा का स्तर निम्न क्यों है? वह अपने पिताजी के अधूरे सपनों को पूरा करने आए हैं। चिराग मुख्यमंत्री का चेहरा पार्टी के तमाम सांसदों ने चिराग पासवान को मुख्यमंत्री का चेहरा बताया। वैशाली की सांसद वीणा देवी ने कहा कि हमलोग बिहार के 243 सीटों की तैयारी कर रहे हैं। चिराग के नेतृत्व में बिहार में शिक्षा व रोजगार के बेहरत अवसर मिलेंगे। खगड़िया के सांसद राजेश वर्मा ने कहा कि चिराग पासवान को बिहार की कमान देनी चाहिए। वे सक्षम हैं। समस्तीपुर सांसद शांभवी ने कहा कि प्रदेश युवा नेतृत्व चाहती है। चूके तो फिर जंगलराज पार्टी के जिलाध्यक्ष विश्व क्रमेन्दो देव उर्फ चुलबुल शाही ने कहा कि चिराग के नेतृत्व में बिहार प्रगति के पथ पर चलेगा। वहीं गायघाट की पूर्व प्रत्याशी कोमल सिंह ने कहा कि चुनाव जनता लड़ती है। इस बार चूके तो जंगलराज फिर से आएगा। चिराग पासवान को बिहार का नेतृत्व करना चाहिए। वहीं वैशाली के पूर्व सांसद रामा किशोर सिंह उर्फ रामा सिंह ने कहा कि आने वाला समय चिराग पासवान का है।  

पाकिस्तान नहीं, भारत पर फोकस जरूरी; ट्रंप को समझाया पूर्व US अधिकारियों ने

वाशिंगटन  भारत और अमेरिका के बीच संबंध इस समय अभूतपूर्व तनाव के दौर से गुजर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय आयात पर भारी टैरिफ लगाने के बाद दोनों देशों के बीच जारी व्यापार वार्ता ठप हो गई है। इस बीच बाइडेन प्रशासन के दौर के पूर्व शीर्ष अमेरिकी अधिकारी- पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जेक सुलिवन और पूर्व उप-विदेश सचिव कर्ट एम. कैंपबेल ने चेतावनी दी है कि अगर मौजूदा स्थिति बनी रही तो वॉशिंगटन एक अहम रणनीतिक साझेदार खो सकता है और चीन को इनोवेशन के क्षेत्र में बढ़त मिल सकती है। उन्होंने ये भी चेतावनी दी कि भारत की तुलना पाकिस्तान के साथ नहीं की जानी चाहिए क्योंकि भारत कहीं ज्यादा जरूरी है। विदेश नीति पर लेख में जताई चिंता ‘फॉरेन अफेयर्स’ मैग्जीन में लिखे अपने संयुक्त संपादकीय में सुलिवन और कैंपबेल ने कहा कि भारत-अमेरिका साझेदारी को लंबे समय से द्विदलीय समर्थन मिला है और इस रिश्ते ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की “लापरवाह आक्रामकता” को हतोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने अमेरिकी सहयोगियों से कहा कि वे भारत को समझाएं कि “राष्ट्रपति ट्रंप की नाटकीय बयानबाजी में अक्सर किसी सौदेबाजी की भूमिका होती है।” भारत को ‘प्रतिद्वंद्वियों की ओर धकेलने’ का खतरा दोनों पूर्व अधिकारियों ने लिखा कि ट्रंप प्रशासन की नीतियों- 50% तक टैरिफ, रूस से तेल खरीद और पाकिस्तान पर बढ़ते तनाव ने दोनों देशों के रिश्तों में तेज गिरावट ला दी है। हाल में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई बैठक का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अगर यही स्थिति रही तो अमेरिका, भारत को प्रतिद्वंद्वियों की ओर धकेल देगा। पाकिस्तान नीति को भारत से अलग रखने की सलाह सुलिवन और कैंपबेल ने अमेरिका को सलाह दी कि वह अपनी विदेश नीति में “भारत-पाकिस्तान” की एक साथ तुलना न करे। उनका कहना था कि पाकिस्तान के साथ आतंकवाद से निपटने और परमाणु हथियार प्रसार को रोकने जैसी अहम चिंताएं हैं, लेकिन ये भारत से जुड़े बहुआयामी और दीर्घकालिक हितों के मुकाबले कहीं कम महत्व रखती हैं। अमेरिका-पाकिस्तान में नजदीकी और भारत पर टैरिफ ट्रंप हाल ही में भारत-पाकिस्तान संघर्ष में संघर्षविराम का श्रेय लेते दिखे थे, जबकि भारत ने इसका खंडन किया था। इसके बाद पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर का वाइट हाउस में स्वागत किया गया और अमेरिका ने पाकिस्तान को व्यापार, आर्थिक विकास और क्रिप्टोकरेंसी सहयोग का आश्वासन दिया। कुछ दिनों बाद ही अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ तेल समझौते की घोषणा की और उसी समय भारत के सामान पर 25% तक का अतिरिक्त शुल्क लगा दिया। नई रणनीतिक संधि का प्रस्ताव सुलिवन और कैंपबेल ने दावा किया कि भारत-अमेरिका के बीच नई रणनीतिक साझेदारी एक संधि के रूप में होनी चाहिए, जिसे अमेरिकी सीनेट की मंजूरी मिले। यह संधि पांच प्रमुख स्तंभों पर आधारित होगी और इसका लक्ष्य दोनों देशों की सुरक्षा, समृद्धि और साझा मूल्यों को मजबूत करना होगा। तकनीकी साझेदारी पर जोर उन्होंने सुझाव दिया कि भारत और अमेरिका को 10 वर्षीय कार्ययोजना पर सहमत होना चाहिए, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, बायोटेक्नोलॉजी, क्वांटम, स्वच्छ ऊर्जा, दूरसंचार और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में तकनीकी साझेदारी शामिल हो। इसका उद्देश्य साझा तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना होगा, ताकि अमेरिका और उसके लोकतांत्रिक सहयोगी चीन जैसे प्रतिद्वंद्वियों को नवाचार के क्षेत्र में बढ़त न लेने दें। संपादकीय में कहा गया है कि दोनों देशों को “प्रमोट” एजेंडा (साझा निवेश, अनुसंधान एवं विकास और प्रतिभा साझेदारी) और “प्रोटेक्ट” एजेंडा (निर्यात नियंत्रण और साइबर सुरक्षा सहयोग) दोनों पर मिलकर काम करना होगा।   रणनीतिक साझेदारी का महत्व पूर्व अमेरिकी अधिकारियों ने याद दिलाया कि भारत पिछले एक पीढ़ी से अमेरिका का सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक साझेदार बनकर उभरा है। उन्होंने भारत-अमेरिका नागरिक परमाणु समझौते (जॉर्ज डब्ल्यू. बुश और मनमोहन सिंह के बीच) और बाइडेन-मोदी के बीच एआई, जैव प्रौद्योगिकी और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में सहयोग का उल्लेख किया। उन्होंने तर्क दिया कि भारत के साथ साझेदारी ने "इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के लापरवाह हरकतों को प्रभावी ढंग से हतोत्साहित किया है।"  

फेसबुक खाता बार-बार बंद, मार्क जुकरबर्ग ने META पर किया कानूनी हमला

वॉशिंगटन अमेरिका में एक वकील ने फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा के खिलाफ केस किया है। अब केस करने की वजह भी बड़ी दिलचस्प है, क्योंकि वकील का नाम मार्क जुकरबर्ग है। उनका कहना है कि फेसबुक बार-बार उनका अकाउंट सस्पेंड कर रहा है, जिसके चलते बिजनेस में हजारों डॉलर का नुकसान हुआ है। खबर है कि मामला कोर्ट पहुंचने के बाद कंपनी ने माफी मांगी है। खास बात है कि फेसबुक को फाउंडर का नाम भी मार्क जुकरबर्ग है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इंडियाना के रहने वाले वकील जुकरबर्ग का कहना है कि कंपनी ने उनका अकाउंट गलत कारणों से ब्लॉक किया है। वह 38 सालों से कानूनी पेशे में हैं। उनका आरोप हैं कि फेसबुक ने बीते 8 सालों में 5 बार उनका खाता ब्लॉक किया है और हर बार उनपर आरोप लगाए गए कि वह किसी और के होने का नाटक करने के आरोप लगाए हैं। वकील के ये भी आरोप हैं कि बार-बार बैन होने के कारण उनकी प्रैक्टिस पर असर पड़ा है। उन्होंने मैरियन सुपीरियर कोर्ट में केस किया और दावा किया है कि मेटा ने 11 हजार डॉलर की कीमत के विज्ञापन हटाकर अपनी एग्रीमेंट का उल्लंघन किया है। जुकरबर्ग का कहना है कि उन्होंने फोटो आईडी, क्रेडिट कार्ड और खुद की कई फोटोज समेत कई पहचान दे दी हैं। उन्होंने कहा, 'उन्होंने मुझसे जो भी कहा मैंने किया। उन्होंने मुझसे कहा कि अगर आपको लगता है कि निलंबन उचित नहीं है तो आप अपील कर सकते हैं, तो मैंने अगले ही दिन अपील की। इसपर मुझे उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला और इस बात को अब 4 महीने हो गए हैं।' वकील ने कहा, 'उन्होंने आखिरी बार जब ऐसा किया था, तब खाता चालू करने में 6 महीने से ज्यादा का समय लग गया था। तो मुझे नहीं पता कि मैं और उनका ध्यान किस तरह आकर्षित करूं।' आखिरी बार उनका खाता मई में बंद किया गया था और केस करने के बाद ही उसे बहाल किया गया था। कंपनी ने इसे गलती बताया था और कहा था, 'हम जुकरबर्ग के धैर्य की सराहना करते हैं और भविष्य में इस तरह की किसी घटना से बचने के लिए काम कर रहे हैं।' वकील ने कहा है कि इस बैन के चलते उनके बिजनेस पर असर हुआ है।  

6 साल पहले की चैंपियन इंग्लैंड, अब वनडे में फिसली फॉर्म का सामना

इंग्लैंड  इंग्लैंड क्रिकेट टीम को  दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज के दूसरे मैच में 5 रन से हार का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही इंग्लैंड का द्विपक्षीय सीरीज हारने का सिलसिला अब भी खत्म नहीं हुआ। 2023 वनडे विश्व कप के बाद से इंग्लैंड ने 6 द्विपक्षीय सीरीज खेले हैं और सिर्फ एक जीत सकी है। इंग्लैंड ने जून में वेस्टइंडीज को तीन मैचों की वनडे सीरीज में 3-0 से रौंदा था लेकिन उसके बाद एक बार फिर इंग्लैंड की टीम ने लय खो दी और सीरीज गंवा दी है। साउथ अफ्रीका ने जारी सीरीज का पहला मैच 7 विकेट से जीता था। इंग्लैंड क्रिकेट टीम ने 2019 में वनडे विश्व कप का खिताब जीता था। उसके बाद से टीम ने अगले वनडे विश्वकप (2023) तक कुल सात वनडे सीरीज जीती लेकिन पिछले वनडे विश्व कप के बाद से इंग्लैंड का वनडे में प्रदर्शन बेहद खराब रहा है। टीम ने 6 द्विपक्षीय सीरीज खेली है और सिर्फ एक में जीत हासिल कर सकी है। इंग्लैंड को वेस्टइंडीज से 2 और भारत से एक बार हार का सामना करना पड़ा है, जबकि ऑस्ट्रेलिया ने उसे एक बार धोया है और अब दक्षिण अफ्रीका ने भी उसे धूल चटाई है। इंग्लैंड की टीम ने 22 वनडे मैच खेलते हुए सिर्फ सात मैच जीते हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ पांच और फिर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टीम ने दो मैच जीते हैं। इसके दौरान उनकी जीत का प्रतिशत 31.8 रहा है। विश्व कप 2023 के बाद से फुल मेंबर टीमों में केवल बांग्लादेश और जिम्बाब्वे का जीत प्रतिशत इंग्लैंड से कम है। साउथ अफ्रीका के खिलाफ इंग्लैंड का प्रदर्शन बेहद खराब है। पिछले चार मुकाबलों में अफ्रीका का दबदबा रहा है और सभी मुकाबले अपने नाम किए हैं। 2023 में मुंबई में अफ्रीका ने इंग्लैंड को 229 रनों से करारी शिकस्त दी। इसके बाद कराची 2025 में साउथ अफ्रीका ने इंग्लैंड को 125 गेंद शेष रहते हराया। लीड्स 2025 में खेले गए मुकाबले में अफ्रीका ने 175 गेंद शेष रहते जीत हासिल की और अब लॉर्ड्स में 5 रन से करीबी मुकाबला जीता।  

‘हर दिन मुस्कुराने की वजह ढूंढे’, जेनेलिया डिसूजा के लुक ने जीता फैंस का दिल

  मुंबई,  एक्ट्रेस जेनेलिया डिसूजा अपनी मासूमियत और सादगी से लोगों के दिलों में खास जगह बनाए रखती हैं। फिल्मों के अलावा, वह अक्सर अपने फैंस से जुड़ने के लिए सोशल मीडिया पर कुछ न कुछ खास पोस्ट करती रहती हैं। गुरुवार को उन्होंने इंस्टाग्राम अकाउंट पर कुछ खूबसूरत तस्वीरें पोस्ट कीं, जिसे लोग काफी पसंद कर रहे हैं। तस्वीरों में जेनेलिया का अंदाज किसी राजकुमारी से कम नहीं लग रहा। उन्होंने डार्क ब्राउन कलर का लहंगा पहना हुआ है, जिसमें गोल्डन कलर की स्ट्राइप्स हैं। इस आउटफिट की खास बात उसका दुपट्टा है, जो लाइट बेज कलर का फ्लोरल प्रिंटेड है। इसमें ब्लू, रेड और ग्रीन कलर के फूलों के डिजाइन हैं। जेनेलिया ने इस लुक के साथ ट्रेडिशनल गहनों को बेहद खूबसूरती से कैरी किया हुआ है। उनके गले में कुंदन चोकर हार है, कानों में भारी झुमके हैं, और हाथों में कंगनों की भरमार है। बालों को उन्होंने हल्का कर्ल कर करके पीछे की ओर बांधा हुआ है, और उसमें सफेद फूलों का एक छोटा सा गजरा है, जो उनके पूरे लुक में चार चांद लगा रहा है। पहली तस्वीर में जेनेलिया नीचे बैठी हैं, उनकी नजरें झुकी हुई हैं और चेहरे पर हल्की मुस्कान है। तस्वीर देखकर ऐसा लग रहा है, मानो वो किसी सुनहरे ख्यालों में डूबी हुई हों। दूसरी तस्वीर क्लोजअप क्लिक है। इसमें वह पलके नीचे झुकाते हुए कैमरे के लिए पोज दे रही हैं। तीसरी तस्वीर में वह खड़ी हैं और कहीं और देख रही हैं। इन तस्वीरों को पोस्ट करते हुए उन्होंने कैप्शन में लिखा, “हर दिन मुस्कुराने की वजह ढूंढे।” जेनेलिया के इस पोस्ट पर फैंस के कमेंट्स की बाढ़ आ गई है। लोग उनके लुक के साथ-साथ आउटफिट की भी जमकर तारीफ कर रहे हैं। एक फैन ने लिखा, “आपकी स्माइल ही तो हमारी मुस्कान की वजह है।” दूसरे फैन ने लिखा, “आपकी खूबसूरती की बात ही अलग है।” अन्य फैंस ने उन्हें ‘एथनिक क्वीन’ का टैग दिया।  

CM मोहन यादव ने शिक्षक दिवस पर दिया गुरुओं को स्पेशल सरप्राइज, जानें क्या था गिफ्ट

भोपाल  ‘भारतीय परंपरा में अनंत काल से ध्यान का आधार गुरु का स्वरूप, पूजा का आधार गुरु के चरण, मंत्र का आधार गुरु के वचन और मोक्ष का आधार गुरु की कृपा है. प्रचीन काल में गुरु ही भविष्य के लिए शासक तैयार करते थे. जिस प्रकार महर्षि विश्वामित्र जी भगवान श्री राम और लक्षमण को अपने साथ ले गए और उन्हें शस्त्र और शास्त्रों का ज्ञान देकर राक्षसों का नाश कराया. इसी प्रकार कंस का वध करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण उज्जैन में महर्षि सांदीपनि आश्रम पहुंचे और अनेक लीलाएं कीं.’ यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर भोपाल में कही. सीएम डॉ. यादव आरसीव्हीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह 2025 को संबोधित कर रहे थे. इस मौके पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल भी मौजूद थे. कार्यक्रम में सीएम डॉ. यादव ने सरकारी स्कूलों के कक्षा 1 से 8 तक के 55 लाख विद्यार्थियों के खातों में स्कूल यूनिफॉर्म के लिए 330 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए. इस मौके पर सीएम डॉ. यादव ने शिक्षकों को चौथे वेतनमान की सौगात भी दी. कार्यक्रम में प्रदेश के शिक्षकों का सम्मान भी किया गया. शिक्षकों के सम्मान का महान दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि एआई के युग में आप मशीनें तो अच्छी से अच्छी बना सकते हैं, लेकिन संस्कार केवल गुरु ही दे सकते हैं. हजारों सालों से भारतीय संस्कृति ने संस्कारों के माध्यम से समाज को दिशा प्रदान की है, शिक्षा के क्षेत्र में तक्षशिला और नालंदा की भूमिका को कौन भूल सकता है. भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने अपने जन्मदिवस को शिक्षक दिवस और उनके सम्मान के रूप में मनाने की बात कही थी, तब से देश में 5 सितंबर को शिक्षकों का सम्मान किया जाता है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आदि शंकराचार्य का जीवन भी मध्यप्रदेश आकर ही बदला था. ओंकारेश्वर की धरती ने उन्हें शंकराचार्य बनाया. बच्चों को बड़ी भूमिका के लिए करें तैयार कार्यक्रम में राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में पारिवारिक माहौल भी बदल रहा है. ऐसे में बच्चों को अनुशासित रखना आवश्यक है. शिक्षक स्कूल में और अभिभावक घर में अनुशासन का ध्यान रखें. इससे बच्चों के मन में बड़ों के प्रति आदर का भाव आएगा. समाज में शिक्षकों का सम्मान होना चाहिए. पिछले दिनों राजधानी में शिक्षकों की एक गोष्ठी हुई. इसमें बच्चों में आत्महत्या की घटनाएं बढ़ने जैसे गंभीर विषय पर विचार-विमर्श हुआ. पति-पत्नी बच्चों के सामने झगड़ा न करें. हमारे शिक्षक और अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि बच्चों को ऐसा माहौल दें, जिससे वे भावनात्मक रूप से मजबूत हों. जीवन में छोटी-मोटी कठिनाइयां आने पर हार न मानें और 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें. स्कूली बच्चों-शिक्षकों के खिले चेहरे गौरतलब है कि मध्यप्रदेश सरकार ने आज 55 लाख बच्चों को स्कूल यूनिफॉर्म के लिए 330 करोड़ रुपये दिए. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में सांदीपनि विद्यालय खोले जा रहे हैं. हमारे सरकारी स्कूलों का परिणाम निजी स्कूलों से बेहतर रहा है. यह परिणाम 15 साल में सबसे अच्छा रहा है. शिक्षकों को चौथे वेतनमान की सौगात मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों को चौथे वेतनमान की सौगात देते हुए कहा कि सरकार शैक्षणिक संवर्ग के सहायक शिक्षक, उच्च शिक्षक, नवीन शैक्षणिक संवर्ग के प्राथमिक शिक्षक, माध्यमिक शिक्षकों को चतुर्थ कार्यमान वेतनमान दिया जाएगा. इससे प्रदेश के 1 लाख 50 हजार शिक्षक लाभान्वित होंगे. इसके लिए कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा और 2025-26 से शिक्षकों को चौथे वेतनमान की सौगात मिलेगी. इससे सरकार पर 117 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार आएगा.  

कॉलेजों को चेतावनी: हरियाणा में वेबसाइट अपडेट नहीं रखने पर मिला नोटिस

हिसार  हरियाणा उच्चतर शिक्षा विभाग की ओर से अपनी वेबसाइट अपडेट नहीं रखने वाले कॉलेजों के खिलाफ सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। ऐसा नहीं करने वाले कॉलेजों के खिलाफ अब विभाग की ओर से एक्शन लिया जाएगा। सभी कॉलेजों को अपनी वेबसाइट 8 सितंबर तक अपडेट करनी होगी। शिक्षा विभाग हर कॉलेज की अपनी वेबसाइट बनवा चुका है। प्रदेश के कॉलेजों में शिक्षा ग्रहण करने वाले स्टूडेंट को हर प्रकार की जानकारी के लिए कोई दिक्कत न आए, इसके चलते ऐसा किया गया है। लेकिन 9 कॉलेज ऐसे हैं, जिन्होंने अभी तक अपना डोमेन भी नहीं खरीदा है। इन्हें विभाग की ओर से नोटिस भेजा गया है। 7 दिन में खरीदना होगा डोमेन वेबसाइट डोमेन नहीं खरीदने वालों में भिवानी के 3, सोनीपत के 2, यमुनानगर, पलवल, कैथल और चरखी दादरी के 1-1 सरकारी कॉलेज शामिल हैं। विभाग की ओर से भेजे गए नोटिस में इन्हें कहा गया है कि ये सभी 7 दिन में ERNET से अपना डोमेन खरीद कर निदेशालय को सूचित करें। अगर ऐसा नहीं किया तो फिर कार्रवाई की जिम्मेदारी संबंधित कालेज की होगी। किसी भी समय हो सकता है निरीक्षण हरियाणा के जो कॉलेज अपनी वेबसाइट को अपडेट नहीं रखते हैं, उन्हें चेतावनी जारी करते हुए कहा गया है कि वेबसाइट को रैंडमली किसी भी समय चेक किया जा सकता है। अगर उस समय वेबसाइट अपडेट नहीं मिली तो कार्रवाई के लिए कॉलेज प्रबंधन की जिम्मेदारी रहेगी। वेबसाइट पर क्या होना चाहिए अपडेट वेबसाइट पर कॉलेज में संचालित किए जा रहे कोर्स से लेकर एडमिशन प्रोसेस, फीस स्ट्रेक्चर, नैक स्टेटस, लाइब्रेरी डिटेल, स्पोर्टस फैसिलिटी, कॉलेज स्टाफ की पूरी सूचना, टाइम टेबल, अकेडमिक कैलेंडर और परीक्षा की स्थिति को अपडेट रखना है। वहीं छात्रों के लिए निकलने वाले दैनिक नोटिस भी वेबसाइट पर होने चाहिए।  

ओबीसी पक्ष तैयार करेगा पैनल, दो वरिष्ठ अधिवक्ताओं के नाम जाएंगे कोर्ट में

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा सर्वदलीय बैठक बुलाए जाने के बाद नई दिल्ली स्थित मध्यप्रदेश भवन में राज्य शासन के अधिवक्ताओं और ओबीसी महासभा के अधिवक्ताओं की संयुक्त बैठक हुई। बैठक में तय किया गया कि मप्र शासन द्वारा नियुक्त वरिष्ठ अधिवक्ता के साथ-साथ अन्य वरिष्ठ अधिवक्ताओं को भी मामले में शामिल किया जाएगा। इस उद्देश्य से ओबीसी महासभा के अधिवक्ताओं ने दो दिनों के भीतर अतिरिक्त वरिष्ठ अधिवक्ताओं के लिए दो नामों का पैनल देने की सहमति दी है। बैठक में आगामी सुनवाई के दौरान ओबीसी वर्ग के हितों की सुरक्षा के लिए साझा पैरवी पर सकारात्मक चर्चा हुई। इसमें मप्र शासन के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह, पूर्व महाधिवक्ता अनूप जॉर्ज चौधरी, वरिष्ठ अधिवक्ता  जून चौधरी, रामेश्वर ठाकुर, वरुण ठाकुर, विनायक शाह,  शशांक रतनू, रामकरण, हनुमत लोधी सहित कई अधिवक्ता उपस्थित रहे। सरकार और ओबीसी महासभा के प्रतिनिधियों का मानना है कि इस समन्वय और साझा पैरवी से आगामी सुनवाई में प्रदेश का पक्ष और अधिक मजबूत होगा। सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है मामला  बता दें मध्य प्रदेश में ओबीसी वर्ग को फिलहाल 14 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिल रहा है। 2019 से 27 प्रतिशत आरक्षण देने का कानून बनने के बाद से सरकारी भर्तियों के 87 प्रतिशत पदों पर ही नियुक्ति दी जा रही है, जबकि 13 प्रतिशत पद कोर्ट का फाइनल निर्णय आने तक होल्ड कर दिए गए हैं। इसके खिलाफ ओबीसी वर्ग के छात्रों और ओबीसी महासभा ने कोर्ट में याचिका दायर की है। यह मामला हाईकोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं।