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हर ग्राम पंचायत में बनेंगे सुव्यवस्थित एवं निर्बाध पहुँच वाले श्मशानघाट

5वें राज्य वित्त आयोग मद में प्राप्त राशि से होगा विकास पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा दिशा-निर्देश जारी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संकल्प के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में 5वें राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत अधोसंरचना विकास अनुदान मद की राशि से प्रदेश में सुव्यवस्थित श्मशान घाटों का विकास किया जायेगा। श्मशान घाटों के विकास कार्यों के संबंध में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा दिशा-निर्देश जारी कर दिये गये हैं। सभी जिला कलेक्टर एवं जिला पंचायत के सीईओ को कार्यवाही करने के निर्देश दिए गये हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने बताया कि मध्यप्रदेश शासन आमजन के लिये प्रत्येक ग्राम पंचायत मुख्यालय एवं प्रत्येक आश्रित ग्राम में वित्तीय वर्ष 2025-26 तक न्यूनतम एक सुव्यवस्थित, सुरक्षित एवं सहज तथा बारहमासी निर्बाध पहुँच वाले श्मशान घाट की उपलब्धता के लिये प्रतिबद्ध है। ग्रामों में श्मशान घाटों के विकास के लिये त्रिस्तरीय पंचायत राज प्रशासन से न्यूनतम आधारभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराये जाने की अपेक्षा की गई है। इसके लिए आवश्यक है कि प्रत्येक ग्राम में "श्मशान मद" के लिये आवश्यक भूमि आरक्षित हो। आरक्षित भूमि की संपूर्ण रूप से फेंसिंग की गई हो। स्थल पर पहुँचने के लिये साल के बारहों महीने निर्बाध एवं सहज पहुँच मार्ग उपलब्ध हो। श्मशान मद में आरक्षित भूमि अतिक्रमण से मुक्त हो। इन मापदण्डों की अनुपलब्धता की स्थिति में प्रत्येक ग्राम पंचायत को राजस्व अभिलेखों से यह ज्ञात करना होगा कि ग्राम पंचायत के किस ग्राम में पहले से श्मशान घाट के लिये भूमि आरक्षित होकर श्मशान घाट है और किस ग्राम में नहीं है। प्रत्येक ग्राम पंचायत को प्रत्येक ग्राम में, जिसमें श्मशान के लिये भूमि उपलब्ध नहीं है, आवश्यक उपयुक्त भूमि आरक्षित कराने के लिये मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता के अंतर्गत संबंधित जिला कलेक्टर को आवेदन कर भूमि आरक्षित करानी होगी। जहां पहले से श्मशान घाट है और आरक्षित भूमि की यदि समुचित फेंसिंग नहीं है, तो उस भूमि की फेंसिंग प्रमुख अभियंता ग्रामीण यांत्रिकी सेवा द्वारा तैयार किये गये मानकों के आधार पर कराई जाये। चेन लिंक के लिये प्राक्क्लन के अनुसार अथवा स्थानीय बोल्डरों, पत्थरों से निर्मित खखरी के द्वारा की जा सकेगी। श्मशान घाट तक निरापद रूप से पहुँचने के लिये समुचित मार्ग उपलब्ध नहीं हो अथवा मार्गों में पुलिया/रपटा नहीं होने के कारण बरसात के दिनों में आवागमन दुष्कर होता है, ऐसे स्थलों पर निर्बाध पहुँच के लिये आवश्यकतानुसार समीपवर्ती मार्ग से श्मशान स्थल तक 3.75 मीटर (लगभग) चौड़ाई की सी.सी. रोड और यथाआवश्यक पुलिया/रपटा भी बनाया जाये। आवश्यक भूमि की अनुपलब्धता की स्थिति में जिला कलेक्टर से निर्धारित प्रक्रिया से मार्ग निर्धारण कराये जाने की कार्यवाही की जाये। श्मशान घाट के लिये पूर्व से आरक्षित भूमि पर यदि किसी भी प्रकार का अतिक्रमण है तो संबंधित सीईओ जिला पंचायत द्वारा राजस्व एवं पंचायत अमले के सहयोग से तत्काल अतिक्रमण हटाये जाने की कार्यवाही करायी जाकर आरक्षित भूमि पर फेंसिंग की जाये। ये समस्त कार्य ग्राम पंचायतों को 5वें राज्य वित्त आयोग अंतर्गत अधोसंरचना विकास अनुदान मद के तहत प्रदाय की जाने वाली राशि से किये जायेंगे। इसके बाद अवशेष राशि का व्यय किसी अन्य कार्य पर किया जा सकेगा। आवश्यकता होने पर अन्य योजनाओं की राशि से नियमानुसार अभिसरण अनुमत्य होगा। इसके लिये आवश्यक जनभागीदारी एवं जनसहयोग भी प्राप्त किया जा सकता है। यदि ग्राम पंचायत के खाते में पूर्व से 5वें वित्त मद की राशि उपलब्ध है तो उस राशि से कार्य तत्काल प्रारंभ कराये जायेंगे। ग्राम पंचायत स्तर पर पंचायत सचिव, रोजगार सहायक, पंचायत समन्वय अधिकारी तथा उपयंत्री उत्तरदायी रहेंगे। इसी प्रकार जनपद स्तर पर सहायक यंत्री, कार्यक्रम अधिकारी/सीईओ जनपद पंचायत, खण्ड पंचायत अधिकारी और जिला स्तर कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, अतिरिक्त सीईओ जिला पंचायत/परियोजना अधिकारी तथा पंचायत सेल उत्तरदायी होंगे।  

राहत शिविर का दौरा करने पहुंचे केजरीवाल, लोगों ने जताई असंतोष की भावना

नई दिल्ली  दिल्ली में बाढ़ और जलभराव ने एक बार फिर राजधानी की तैयारियों की पोल खोल दी है। जिन इलाकों में पहले राहत शिविरों में समय पर टेंट लगते थे, मच्छरदानी, खाना, पीने का पानी और डॉक्टरों की व्यवस्था रहती थी, आज उन्हीं शिविरों में बदइंतज़ामी और लापरवाही साफ देखी जा सकती है। बढ़ते संकट के बीच लोग खुद यह कहते नजर आ रहे हैं कि जब अरविंद केजरीवाल की सरकार थी, तो राहत का इंतज़ाम तेज़ और मानवीय होता था। कहीं पानी भरने से पहले पंप लगाए जाते थे, नाले समय से साफ होते थे, और राहत शिविरों में व्यवस्था का पूरा ध्यान रखा जाता था। अब जबकि दिल्ली की सत्ता में आम आदमी पार्टी नहीं है, और MCD व केंद्र दोनों जगह बीजेपी की सरकार है, ऐसे में हालात काबू से बाहर होते दिख रहे हैं। टेंट समय पर नहीं लगे, लोगों को खाना नहीं मिला, पीने का साफ पानी नहीं है और मच्छरों से परेशान लोग खुद दवाइयां खरीदने को मजबूर हैं। लोगों की नाराज़गी इस बात से भी है कि जिन समस्याओं को पहले खुद मुख्यमंत्री और मंत्री मौके पर पहुंचकर हल करते थे, अब उन पर ध्यान देने वाला कोई नहीं दिखता। न तो कोई ज़िम्मेदार मंत्री हालात का जायज़ा लेने आया, न कोई ठोस कार्रवाई की गई। हर ओर एक किस्म की ‘प्रशासनिक चुप्पी’ पसरी हुई है।   केजरीवाल ने राहत शिविरों में जाकर जो हालात देखे, वो बताने के लिए काफी हैं कि आज की सरकारें सिर्फ बयानबाज़ी में व्यस्त हैं, ज़मीन पर कुछ नहीं कर पा रहीं। उन्होंने सरकारों से अपील की कि राहत व्यवस्था को राजनीति से ऊपर रखकर देखें, क्योंकि यह मानवीय संकट है, और इसमें देरी का मतलब है जनता को और तकलीफ़ देना। दिल्ली के लोगों को अब वो दिन याद आ रहे हैं जब अरविंद केजरीवाल की अगुवाई में हर संकट को तुरंत जवाब मिलता था। अब जबकि सत्ता में वे नहीं हैं, तो लोग कह रहे हैं, "आज के हालात देखकर समझ आता है कि पहले अरविंद केजरीवाल की सरकार वाकई हमारे लिए काम करती थी।  

टैक्स विवाद के चलते ब्रिटेन की उप-प्रधानमंत्री एंजेला रेनर ने छोड़ा पद

ब्रिटेन  ब्रिटेन की उप-प्रधानमंत्री एंजेला रेनर ने संपत्ति कर यानी टैक्स से जुड़ी गलती स्वीकार करने के बाद शुक्रवार को अपना इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की लेबर सरकार के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ है। रेनर ने कहा कि उन्होंने एक स्वतंत्र जाँच की रिपोर्ट मिलने के बाद इस्तीफा देने का फैसला किया है। इस रिपोर्ट में यह पाया गया कि उन्होंने कानूनी सलाह की पूरी सावधानी नहीं बरती और मंत्रिस्तरीय संहिता का उल्लंघन किया। क्या है मामला एंजेला रेनर पर यह आरोप था कि उन्होंने संपत्ति कर का भुगतान सही तरीके से नहीं किया। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने कई बार सफाई दी थी, लेकिन स्वतंत्र जांच में उनके खिलाफ पाया गया कि उन्होंने प्राप्त कानूनी सलाह को ठीक से नहीं समझा और उसका पालन नहीं किया। इस कारण वे मंत्रिस्तरीय संहिता के नियमों के उल्लंघन में शामिल मानी गईं। लेबर सरकार के लिए बड़ा झटका रेनर का इस्तीफा ब्रिटेन की लेबर सरकार के लिए बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है। वे सरकार की दूसरी सबसे बड़ी नेता थीं और उनके इस्तीफे से सरकार की छवि पर असर पड़ा है। प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने भी इस मुद्दे पर बयान दिया है और कहा है कि वे स्थिति को संभालने के लिए पूरी कोशिश करेंगे। 

SDRF की बहादुरी: पार्वती नदी के कारण ठप हाईवे से सुरक्षित निकाले गए 15 लोग, गर्भवती महिला भी शामिल

श्योपुर जिले की वीरपुर तहसील का दीमरछा गांव शुक्रवार को चंबल और कूनो नदी की लहरों से घिर गया। इसके बाद प्रशासन को एक गर्भवती महिला समेत 15 ग्रामीणें का रेस्क्यू करना पड़ा। दो घंटे के ऑपरेशन में सभी ग्रामीण रेस्क्यू किए जा सके। गर्भवती महिला को नजदीक के अस्पताल में पहुंचाया गया है। रुक-रुक कर हो रही बारिश से जनजीवन प्रभावित हो रहा है। उधर पार्वती नदी में आए उफान के कारण कुहांजापुर पुल पर सुबह 11 बजे तक तीन फीट के आसपास पानी रहा। दोपहर बाद पार्वती नदी का पानी उतरने पर 24 घंटे से बंद श्योपुर-बारां हाईवे पर आवागमन शुरू हो सका।   गुजरे तीन-चार दिन से रुक-रुक कर हो रही बारिश की वजह से जलस्तर बढ़ने के कारण वीरपुर क्षेत्र के दिमरछा गांव का मुख्य रास्ता चंबल और कूनो नदी की लहरों के बीच समा गया। गांव के पास कूनो और चंबल का संगम होने से स्थिति और विकट हो गई। इसी दौरान गांव की रहने वाली नीलम पत्नी कुलदीप रावत 24 साल की डिलीवरी होनी थी। जिला प्रशासन को इस बारे में सुबह सूचना मिली। इसके बाद एसडीआरएफ टीम को मौके पर बुलाया गया। मौके पर हालातों को देखते हुए एसडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू चलाने का निर्णय लिया। एसडीआरएफ ने प्रशासन और पुलिस की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।। टीम ने महिला को सुरक्षित निकालकर एंबुलेंस से वीरपुर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। रेस्क्यू के दौरान पता चला कि गांव में 15 अन्य लोग भी फंसे हैं। इनमें बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं शामिल थे। एसडीआरएफ की टीम ने सभी को बारी-बारी से बाहर निकाला। इनमें से कुछ लोगों को बीमार होने पर नजदीक के अस्पताल भेजा गया है। टीआई वीरपुर भारत सिंह गुर्जर के अनुसार नदी के तेज बहाव के कारण एसडीआरएफ टीम को नाव और रस्सियों का सहारा लेना पड़ा। दो घंटे के रेस्क्यू अभियान में सभी को सुरक्षित निकाल लिया गया। रेस्क्यू दल में नवदीप शर्मा, पवन नामदेव, सुनील भूरिया और स्थानीय वीरपुर थाने के पुलिसकर्मी शामिल थे। ग्रामीणों ने प्रशासन और रेस्क्यू दल का आभार जताया। पिछले दिनों से हो रही बारिश के कारण नदियां उफान पर है। निचले इलाकों के गांवों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा है। प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों के किनारे न जाने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है। 24 घंटे बाद श्योपुर-बारां हाईवे पर शुरू हो सका आवागमन प्रदेश के कई हिस्सों के साथ ही मालवा अंचल में हो रही भारी बारिश का असर श्योपुर जिले की चंबल और पार्वती नदियों पर पड़ रहा है। पार्वती नदी के कुहांजापुर के सूरथाग पुल पर गुरूवार दोपहर 3 फीट के ऊपर पानी छलांगे मारने लगा। यही वजह है कि श्योपुर का बारां से सड़क संपर्क पूरी तरह कट गया था। ऐसे में सैकड़ों वाहन फंस गए। जिला प्रशासन ने पार्वती नदी किनारे बसे गांवों में निगरानी बढ़ाते हुए लोगों को सतर्क रहने की हिदायत दी। गुरूवार को सुबह 11 बजे तक पार्वती उफन रही थी। दोपहर में धीरे-धीरे नदी का जलस्तर कम होने लगा। कुहांजापुर पुल के पास नदी के उतरने के बाद पुल पर पुलिस ने आवागमन खोला। 24 घंटे के लगभग बारां हाईवे से आवागमन बंद रहा।

मुख्यमंत्री ने पन्ना जिले के अमानगंज में महिला सम्मेलन में हितलाभ वितरित किये

पन्ना में शीघ्र होगा मेडिकल कॉलेज का भूमिपूजन भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पन्ना हीरा और महावीरों की धरती है। ईश्वर ने पन्ना को विशेष आशीर्वाद दिया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश के हर वर्ग के कल्याण के लिए हमारी सरकार कार्य कर रही है। राज्य सरकार ने रक्षाबंधन के पावन पर्व पर सभी बहनों को अनेक योजनाओं की सौगात दीं। लाड़ली बहनों को 250 रुपए राखी का शगुन अलग से भेजा गया है। अब लाड़ली बहनों को दीपावली के बाद भाई-दूज से हर माह 1500 रुपए प्रति माह मिलेंगे। धीरे-धीरे वर्ष 2028 तक लाड़ली बहनों को 3000 रुपए देंगे। लाड़ली बहनों के लिए सरकार के खजाने में कोई कमी नहीं है। कुछ दिन पहले एक सर्वे आया है कि जहां-जहां लाड़ली बहना योजना लागू की गई हैं। वहां घरों में सुख-समृद्धि आई है। प्रदेश सरकार हर कीमत पर माताओं-बहनों के सम्मान की रक्षा करेगी और उन्हें आर्थिक समृद्धि प्रदान करने के लिए संकल्पित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को पन्ना जिले के अमानगंज में आयोजित महिला सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पन्ना जिले को 106 करोड़ लागत के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पन्ना और बुंदेलखंड में आज भी महाराज छत्रसाल और आल्हा-ऊदल की वीरता की गाथाएं गाई जाती हैं। बुंदेलखंड क्षेत्र त्याग और बलिदान में कभी पीछे नहीं रहा। इसी प्रकार प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से भारतीय सेना ने पराक्रम दिखाया और बहनों के सिंदूर उजाड़ने वालों को सबक सिखाकर बदला लिया। पाकिस्तानी आतंकियों ने पहलगाम में निर्दोष पर्यटकों की बड़ी निर्ममता से हत्या की थी। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में सेना दुश्मन देश में घुसी और आतंकियों को मिट्टी में मिला दिया। कृषि उत्पादन में पंजाब और हरियाणा को पीछे छोड़ेगा बुंदेलखंड मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार हर जिले में उद्योगों को बढ़ावा दे रही है और युवाओं को रोजगार-स्वरोजगार उपलब्ध कराने के लिए हर संभव कार्य कर रही है। प्रदेश में पुलिस के 22 हजार 500 पदों पर भर्ती की जा रही है। सालभर में कुल 1 लाख से अधिक सरकारी पदों पर भर्तियां होंगी। अब मध्यप्रदेश के युवाओं को रोजगार के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने प्रदेश को 1 लाख करोड़ की नदी जोड़ो परियोजनाओं की सौगात दी है। केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से पन्ना सहित पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र को सिंचाई का लाभ मिलेगा। बुंदेलखंड के किसान अपनी जमीन न बेचें। भविष्य में बुंदेलखंड कृषि उत्पादन में पंजाब और हरियाणा को पीछे छोड़ेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत सरकार ने गरीब-जरूरतमंदों को पक्के मकान दिए हैं। नल जल योजना के माध्यम से घर-घर स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जा रहा है। आयुष्मान योजना से 5 लाख रुपए तक का इलाज मुफ्त हो रहा है। राज्य सरकार भी स्कूली बच्चों को स्कूटी, लैपटॉप, छात्रवृत्ति, गणवेश, साइकिल, कॉपी-किताब सहित अनेक सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की विकास कार्यों की घोषणाएँ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वे जल्द ही मेडिकल कॉलेज का भूमि-पूजन करने के लिए पन्ना आएंगे। पन्ना को खजुराहो से रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाएगी। पन्ना में एक स्टेडियम और स्थाई हेलीपैड बनाया जाएगा। अमानगंज में अस्पताल के उन्नयन सहित विधानसभा क्षेत्र गुनौर में सात उप स्वास्थ्य केन्द्र खोलने, सलेहा में नवीन महाविद्यालय की स्थापना, देवेन्द्रनगर के शासकीय महाविद्यालय में नवीन संकाय प्रारंभ करने एवं स्कूल उन्नयन, अगस्त्य मुनि आश्रम के सौंदर्यीकरण, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के तहत बरगी नहर सिंचाई प्रणाली की उद्वहन सिंचाई परियोजना की घोषणा की। इस परियोजना के क्रियान्वयन से क्षेत्र के 114 गांव लाभांवित होंगे और 25 हजार हेक्टेयर जमीन सिंचित होगी। मुख्यमंत्री ने गढ़ीपडरिया के वृन्दावन बांध की क्षमता बढोत्तरी कर नहरों के जीर्णोद्धार कार्य सहित गुनूसागर सिंचाई परियोजना की भी घोषणा की। सांसद श्री वी.डी. शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए प्रयासरत हैं। 12 हजार 500 करोड़ के जल जीवन मिशन में पन्ना जिले की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। पन्ना और गुनौर विधानसभा क्षेत्र में अस्पताल, नदी के पुल, खेल मैदान, सड़क जैसे अनेक विकास कार्य प्रगति पर हैं। पन्ना विधायक एवं पूर्व मंत्री श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह और विधायक गुनौर श्री राजेश वर्मा ने भी संबोधित किया। विकास प्रदर्शनी का अवलोकन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों की योजनाओं पर केन्द्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया और विभिन्न स्टालों पर प्रदर्शित सामग्री देखी। कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री श्री दिलीप अहिरवार, अध्यक्ष पिछड़ा वर्ग आयोग श्री रामकृष्ण कुसमरिया, विधायक पवई श्री प्रहलाद लोधी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मीना राजे परमार, नगर पालिका अध्यक्ष पन्ना श्रीमती मीना पाण्डेय, कमिश्नर सागर संभाग श्री अनिल सुचारी, पुलिस महानिरीक्षक श्रीमती हिमानी खन्ना, पुलिस उपमहानिरीक्षक श्री ललित शाक्यवार, कलेक्टर श्री सुरेश कुमार, पुलिस अधीक्षक श्री साईं कृष्ण एस थोटा सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक एवं माताएं-बहनें उपस्थित थीं।  

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने ब्रह्मचारी महर्षि गिरीश से की सौजन्य भेंट

भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने भोपाल में ब्रह्मचारी महर्षि गिरीश से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने आध्यात्म एवं स्वास्थ्य विषयों पर चर्चा कर मार्गदर्शन प्राप्त किया।  

शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिये सम्मानित हुए हैं प्रदेश के 2 शिक्षक

भोपाल  राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने शिक्षक दिवस पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में मध्यप्रदेश के 2 शिक्षकों को शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय कार्य के लिये राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रदान किया। इस मौके पर केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान भी मौजूद थे। पुरस्कार स्वरूप सम्मानित शिक्षकों को शॉल-श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। प्राथमिक शिक्षक श्रीमती शीला पटेल श्रीमती शीला पटेल दमोह जिले की शासकीय प्राथमिक शाला देवरान टपरिया में पदस्थ हैं। श्रीमती पटेल ने अपनी शाला में बच्चों को खेल-खेल में आनंदमयी शिक्षा दी है। उन्होंने गीत, कविता, कहानी और अभिनय के माध्यम से फाउण्डेशन लिटरेसी मिशन (एफएलएन) का क्रियान्वयन किया है। इसी के साथ उन्होंने अवकाश के दिनों में महिला साक्षरता को बढ़ावा देने के लिये विशेष कक्षाओं का संचालन किया। श्रीमती शीला पटेल ने अवकाश के दिनों में समर कैम्प एवं विंटर कैम्प का आयोजन किया। उन्होंने अपनी पदस्थापना के शाला के गाँव की हर गली व मोहल्लों में जगह-जगह पर बच्चों को सिखाने के उद्देश्य से शैक्षिक पटल व लर्निंग प्लेस तैयार करवाया। शिक्षिका श्रीमती पटेल ने बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा करने के लिये शून्य लागत पर टीचिंग लर्निंग मटेरियल (टीएलएम) तैयार किया। बच्चों में समझ को बढ़ावा देने के लिये समूह में आपस में चर्चा और उनकी सहभागिता को बढ़ाने का काम प्रमुख रूप से किया। प्राथमिक शिक्षक भेरूलाल ओसारा प्राथमिक शिक्षक श्री भेरूलाल ओसारा आगर-मालवा जिले के शासकीय ईपीईएस माध्यमिक शाला में पदस्थ हैं। ने अपनी पदस्थ शाला में विषय-वस्तु की गहन समझ के साथ शिक्षण कार्य किया और बच्चों में नैतिकता और सृजनात्मकता को प्रोत्साहित किया। विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिये ईको क्लब और क्लैप क्लब के संयोजन से ठोस कार्य किया। बच्चों को स्वच्छता, जल संरक्षण, पौधरोपण, प्लास्टिक उन्मूलन और हरित जीवन-शैली के बारे में नवाचार करते हुए शिक्षा दी। शिक्षक श्री भेरूलाल ने बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा करने के लिये नुक्कड़ नाटक, रैलियों, पोस्टर, निबंध प्रतियोगिता के साथ लेखन की वर्कशॉप भी निरंतर आयोजित की। उन्होंने डिजिटल युग की महत्ता को समझते हुए विद्यार्थियों में ऑनलाइन सुरक्षा जागरूकता फैलाने के लिये महत्वपूर्ण काम किया। बच्चों को साइबर अपराध के खतरों, सोशल मीडिया का सुरक्षित रूप से उपयोग, पासवर्ड की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर जानकारी दी। उनके इस कार्य से आसपास के अनेक शिक्षकों ने भी प्रेरणा ली है।

अमेरिकी टैरिफ के बीच भारत का अचूक खेल, दुनिया ने देखा चौंकाने वाला मोड़

नई दिल्ली  भारत ने अमेरिकी टैरिफ की परवाह किए बिना ऐसा गेम खेला कि पूरी दुनिया देखती रह गई। रूस से सस्ते दाम पर तेल खरीदकर भारत ने न सिर्फ अमेरिका के 25% अतिरिक्त टैक्स को ठेंगा दिखाया, बल्कि उस तेल को प्रोसेस करके अंतरराष्ट्रीय बाजार में जमकर बेचा और भारी मुनाफा भी कमाया। अब भारत का डीजल यूरोप तक में धड़ल्ले से बिक रहा है। आंकड़े बताते हैं कि भारत ने अगस्त 2025 में डीजल शिपमेंट के मामले में यूरोप को चौंका दिया है। भारत की तेल नीति से बदला ग्लोबल गेमप्लान रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते जब पश्चिमी देशों ने रूसी तेल और ऊर्जा संसाधनों पर सख्त प्रतिबंध लगाए, तब भारत ने रणनीतिक चतुराई दिखाते हुए रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना शुरू कर दिया। इसे घरेलू रिफाइनरियों में प्रोसेस कर भारत ने वैश्विक बाजार, खासकर यूरोप, में डीजल की आपूर्ति तेज कर दी। एक्सपोर्ट में ऐतिहासिक उछाल आंकड़ों की बात करें तो भारत का डीजल निर्यात अगस्त 2025 में सालाना आधार पर 137% की जबरदस्त बढ़ोतरी के साथ प्रतिदिन 2,42,000 बैरल तक पहुंच गया। ग्लोबल रियल टाइम डेटा एंड एनालिटिक्स प्रोवाइडर Kpler के अनुसार, सिर्फ यूरोप को भारत ने अगस्त में 73% अधिक डीजल भेजा, जबकि सालाना आंकड़ा 124% की ग्रोथ दिखाता है। वहीं, Vortexa की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगस्त में यूरोप को भारत का डीजल एक्सपोर्ट 228,316 बैरल प्रतिदिन रहा, जो पिछले साल की तुलना में 166% अधिक है और जुलाई 2025 के मुकाबले 36% ज्यादा। रिलायंस जैसी कंपनियों को झटका लग सकता है भले ही फिलहाल भारत की ऊर्जा नीति फायदेमंद नजर आ रही हो, लेकिन 2026 की शुरुआत में यूरोपीय यूनियन के प्रस्तावित प्रतिबंधों के चलते रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी प्रमुख कंपनियों को बड़ा धक्का लग सकता है, जो रूस के तेल पर आधारित रिफाइनिंग करती हैं और यूरोप को सप्लाई देती हैं।   क्यों बढ़ा भारत का डीजल निर्यात? इस बूम के पीछे कई कारण हैं:- -यूरोप में शीतकालीन मांग (Winter Demand) की तेजी। -रिफाइनरियों द्वारा की गई अन्यतम मेंटेनेंस। -रूस पर प्रतिबंधों से उत्पन्न आपूर्ति की कमी। -भारत की गंभीर सप्लाई चेन क्षमताएं और लो-कोस्ट रिफाइनिंग। -इन सभी कारकों ने भारत को यूरोपीय ऊर्जा संकट के बीच एक प्रमुख सप्लायर बना दिया है। पश्चिमी आलोचना और भारत का जवाब भारत की इस ऊर्जा रणनीति पर अमेरिका और उसके सहयोगी तीखी आलोचना कर रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया है कि भारत, रूस से सस्ता तेल खरीदकर उसे प्रोसेस करने के बाद यूरोप को ऊंचे दाम पर बेच रहा है- और ऐसा करके मॉस्को को यूक्रेन युद्ध के लिए अप्रत्यक्ष फंडिंग मिल रही है। भारत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए साफ कहा है: “हम बाजार से खरीदते हैं और उसे वैश्विक बाजार में बेचते हैं। यदि किसी देश को इससे आपत्ति है, तो वे खरीद बंद करने के लिए स्वतंत्र हैं।” क्या डीजल की मांग बनी रहेगी? ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि 2025 के अंत तक डीजल की वैश्विक मांग मजबूत बनी रहेगी। विशेषकर यूरोप जैसे बाजार, जो वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तलाश में हैं, फिलहाल भारतीय सप्लायर्स पर निर्भर रह सकते हैं।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को प्राकृतिक आपदा प्रभावितों को वितरण करेंगे राहत राशि

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार 6 सितम्बर को प्रात: 11 बजे प्राकृतिक आपदा से हुई फसल क्षति के प्रभावित किसानों के खाते में राहत राशि का अंतरण करेंगे। मुख्यमंत्री निवास समत्व भवन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मुख्यमंत्री डॉ. यादव किसान हितग्राहियों से चर्चा भी करेंगे। संबंधित जिले के कलेक्टर और संबंधित विभाग के अधिकारी भी वर्चुअली शामिल होंगे।  

Tesla का रिकॉर्ड वेतन पैकेज: Elon Musk के हाथ में दुनिया का पहला खरबपति बनने का मौका

नई दिल्ली  टेस्ला के शेयरधारकों के सामने रखा गया एक नया प्रस्ताव एलोन मस्क को दुनिया का पहला ट्रिलियनेयर बना सकता है। इस प्रस्ताव में कहा गया है कि यदि कंपनी भविष्य में कुछ महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को हासिल कर लेती है, तो मस्क को अभूतपूर्व मात्रा में टेस्ला के शेयर मिल सकते हैं। इस प्रस्तावित वेतन पैकेज के तहत मस्क को 423.7 मिलियन अतिरिक्त टेस्ला शेयर दिए जा सकते हैं, जिनकी वर्तमान बाजार कीमत के अनुसार कुल वैल्यू $143.5 अरब डॉलर है। हालांकि, ये शेयर तभी मिलेंगे जब कंपनी की मार्केट वैल्यू में जबरदस्त वृद्धि होगी। मस्क को शेयर कब मिलेंगे? एलोन मस्क को यह पूरा शेयर पैकेज तभी मिलेगा, जब टेस्ला का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन $8.5 ट्रिलियन तक पहुंच जाएगा। वर्तमान में टेस्ला की वैल्यू $1.1 ट्रिलियन है, यानी उसे सात गुना से अधिक की छलांग लगानी होगी। यह आंकड़ा एनवीडिया (Nvidia) की मौजूदा मार्केट वैल्यू से करीब दोगुना है, जो इस समय दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी है। xAI और ट्विटर से जुड़ी नई योजनाएं टेस्ला के इस प्रस्ताव के साथ एक और सुझाव सामने आया है- कि कंपनी xAI में निवेश करे। xAI एलोन मस्क की निजी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी है। अगर यह प्रस्ताव पारित होता है, तो मस्क को अपने व्यापारिक साम्राज्य को और मजबूत करने का मौका मिल सकता है। बता दें कि हाल ही में xAI ने X (पूर्व में ट्विटर) को खरीद लिया है — वही प्लेटफॉर्म जिसे मस्क ने 2022 में $44 अरब डॉलर की निजी राशि से खरीदा था। हालांकि, टेस्ला ने xAI में निवेश के प्रस्ताव पर अभी कोई स्पष्ट पक्ष नहीं लिया है। शेयरधारकों के इस प्रस्ताव में यह भी नहीं बताया गया है कि टेस्ला को xAI में कितनी हिस्सेदारी लेनी चाहिए या उसका मूल्यांकन क्या होगा। बाजार की शुरुआती प्रतिक्रिया इस खबर के सामने आने के बाद टेस्ला के शेयरों में प्री-मार्केट ट्रेडिंग में हल्की तेजी देखी गई है।