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स्टेप-बाय-स्टेप Google Maps पर अपने घर का पता ऐसे जोड़ें

नई दिल्ली ऑनलाइन डिलीवरी की गलत लोकेशन, कैब ड्राइवर का सवाल कि कहां आना है? और रिश्तेदारों को घर का पता समझाने के झंझट से अब छुटकारा मिल सकता है। दरअसल आप Google Maps का सही इस्तेमाल करें, तो आपके घर या दुकान के पते को भी मैप्स पर सर्च किया जा सकता है। इसके लिए आपको सिर्फ अपने घर का पता ऐप में जोड़ना होगा। इसके बाद कोई भी आपके घर, दुकान या ऑफिस की लोकेशन को मैप्स पर नेविगेट करके आप तक पहुंच सकता है। इसके लिए आपको एक सिंपल से प्रोसेस को फॉलो करना होगा। चलिए इसके बारे में डिटेल में समझते हैं। ऐसे जोड़ अपना एड्रेस गूगल मैप्स में अपने घर या दुकान का पता जोड़ने के लिए Google Map ऐप को खोल लें।     इसके बाद नीचे दिख रहे Contributeऑप्शन पर टैप करें।     अब Add Place के ऑप्शन पर टैप करें।     अब आपको लोकेशन के बारे में बेसिक जानकारी उपलब्ध करानी होगी। जैसे कि नाम, कैटेगरी, पूरा पता आदि।     इसके बाद मैप पर भी सही लोकेशन को चुन लें।     अगर जगह आपकी दुकान या ऑफिस है तो आप उसमें अतिरिक्त जानकारी भी जोड़ पाएंगे जैसे कि वर्किंग आवर्स या वेबसाइट आदि     इसके अलावा आप चाहें, तो अपने पते के साथ फोटो भी जोड़ सकते हैं। इससे आपके पते पर आने वाले को फोटो की मदद से पहुंचने में ज्यादा आसानी होगी।     इसके बाद Submit पर टैप करके एड्रेस को गूगल मैप पर जोड़ दें।     इस तरह से आप बेहद आसानी से अपने पते को गूगल मैप पर जोड़ सकते हैं। क्या है फायदा वैसे आप इस फीचर का इस्तेमाल किसी भी जरूरी पते को गूगल मैप्स पर जोड़ने के लिए कर सकते हैं। एक बार लोकेशन के सेव हो जाने के बाद आप इसे आसानी से किसी के साथ शेयर भी कर सकते हैं। साथ ही आपका एड्रेस मैप्स पर सर्च किए जाने पर दिखाई भी देने लगेगा। ध्यान रखने वाली बातें अगर आप Google Maps के Contribute फीचर का इस्तेमाल करके अपने घर या किसी दूसरी जगह का पता जोड़ने वाले हैं, तो ध्यान रहे कि उस समय आप उसी लोकेशन पर हों और आपके फोन की लोकेशन सर्विस ऑन हो। इससे आप मैप पर अपनी सही-सही लोकेशन को मार्क कर पाएंगे। इसके अलावा आप मैप पर पॉइंटर को थोड़ा आगे-पीछे करके मैप पर अपने एड्रेस के लिए सही लोकेशन सेट कर सकते हैं।  

भयंकर संकट में गाजा, यूएन ने किया अलर्ट, इजरायल की सुप्रीम कोर्ट भी हुई नाराज

गाजा  गाजा में इजरायली हमलों में अब तक 64 हजार लोगों की जान गई है। वहीं भुखमरी से मरने वालों को कोई आंकड़ा ही सामने नहीं आया है। अंतरराष्ट्रीय संगठन गाजा में अकाल को लेकर बेहद चिंतित हैं। यूएन की एजेंसी का भी कहना है कि अगर इजरायल चाहे तो गाजा अकाल से बच सकता है। ग्लोबल हंगर मॉनीटर के मुताबिक हजारों फिलिस्तीनी अब भी भुखमरी का शिकार हैं। वहीं गाजा सिटी में इजरायली हमला तेज होने के बाद यहां स्थिति काफी खराब हो गई है। इजरायल ने मार्च से मई तक 11 महीने के लिए गाजा में मानवीय सहायता पर भी रोक लगा दी थी। वहीं अब इजरायल का दावा है कि वह आम लोगों तक राशन पहुंचा रहा है। वहीं यूएन की एजेंसी के मुताबिक यह सहायता पर्याप्त नहीं है। यूएन ऐड के चीफ टॉम फ्लेचर ने कहा कि समय तेजी से गुजर रहा है। अगर गाजा को अकाल से बचाना है तो इसके लिए बहुत कम समय बचा है। इजरायल की रक्षा एजेंसी COGAT कहना है कि पिछले सप्ताह गाजा में 1900 ट्रंक भेजे गए हैं। धीरे-धीरे सप्लाई बढ़ाई जा रही है। एजेंसी ने कहा, यह सहायता केवल आम लोगों के लिए है ना कि हमास के लिए। इजरायल का कहना है कि गाजा सिटी की बहुमंजिला इमारतों पर हमास का कब्जा है इसलिए आम लोग इसे खाली कर दें। बीते दिनों इजरायल ने गाजा सिटी की कई हाई राइज को निशाना बनाया है। इन हमलों में कम से कम 14 लोग मारे गए। गाजा के लोगों का कहना है कि गाजा सिटी राफाह बन जाए, इससे पहले हमास को इजरायल के साथ बात करके युद्ध खत्म करना चाहिए। इजरायल में भी आम जनता गाजा के इस युद्ध का समर्थन नहीं करती है। शनिवार को भी हजारों लोगों ने युद्ध खत्म करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। माना जा रहा है कि गाजा में अब भी 48 इजरायली बंधक जिंदा हैं। इजरायली सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार को लताड़ा इजराइल के सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को कहा कि सरकार फलस्तीनी कैदियों को पर्याप्त मात्रा में भोजन उपलब्ध नहीं करा रही। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे कैदियों को पर्याप्त भोजन मुहैया कराएं। यह लगभग ढाई साल में ऐसा दुर्लभ मामला है, जिसमें उच्चतम न्यायालय ने सरकार के खिलाफ कोई फैसला सुनाया है। युद्ध शुरू होने के बाद से इजराइल ने गाजा में हमास से जुड़े होने के संदेह में हजारों लोगों को कैद किया है। हजारों लोगों को महीनों हिरासत में रखने के बाद छोड़ा भी गया है। अधिकार समूहों ने जेलों और हिरासत केंद्रों में कैदियों के साथ बड़े पैमाने पर दुर्व्यवहार होने की जानकारी दी है, जिनमें पर्याप्त मात्रा में भोजन व स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध न कराना और अस्वच्छता जैसी समस्याएं शामिल हैं। मार्च में इजराइली जेल में 17 वर्षीय फलस्तीनी लड़के की मौत हो गई थी, जिसके बाद चिकित्सकों ने कहा था कि मौत का मुख्य कारण भूख हो सकती है।

फेसबुक-यूट्यूब बैन के विरोध में नेपाल में हिंसक प्रदर्शन, गोलीबारी में 1 की मौत, 80 घायल

काठमांडू  सोमवार को नेपाल की राजधानी काठमांडू के न्यू बानेश्वर में मौजूद संसद भवन परिसर में उस समय तनाव फैल गया जब प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए और गेट पार कर संसद के भीतर प्रवेश की कोशिश की. ये प्रदर्शनकारी नई जेनरेशन के वो युवा हैं, जो देश में सोशल मीडिया पर बैन लगने के बाद काफी नाराज हैं. इन युवाओं ने पहले शांतिपूर्ण विरोध की बात कही थी लेकिन प्रदर्शन के उग्र हो गया और वे संसद भवन तक पहुंच गए. नेपाल में हो रहे इन प्रदर्शनों के पीछे वजह मुख्य रूप से सोशल मीडिया पर लगाया गया प्रतिबंध है. इस प्रदर्शन में मौजूद ज्यादातर प्रदर्शनकारी वही युवा हैं, जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करते हैं. जब प्रदर्शनकारी बेकाबू होकर संसद परिसर तक पहुंचने लगे तो काठमांडू डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन ऑफिस की ओर से पूरे न्यू बानेश्वर में कर्फ्यू लगा दिया गया है. मुख्य जिला अधिकारी छाबीलाल रिजाल ने सेक्शन 6 के तहत दोपहर 12 बजकर 30 मिनट से कर्फ्यू लगाया है, जो रात 10 बजे तक लगा रहेगा.  हजारों की संख्या में Gen-Z लड़के और लड़कियां सड़कों पर उतर आए हैं. प्रदर्शनकारी नेपाल के संसद परिसर में घुस गए. इसे देखते हुए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और पानी की बौछार की.  ये प्रदर्शनकारी नेपाल में सोशल मीडिया बैन के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं. इसके मद्देनजर काठमांडू में कर्फ्यू लगा दिया गया है. सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है.  इस घटना से जुड़ी पल-पल की अपडेट यहां पढ़ें:- – काठमांडू में Gen-Z प्रोटेस्ट के उग्र होने के बाद नेपाली सेना की तैनाती के आदेश दिए गए हैं. – नेपाल सरकार ने मौजूदा स्थिति का आकलन करने के लिए इमरजेंसी सुरक्षा बैठक बुलाई है. पुलिस ने रात 10 बजे तक के लिए काठमांडू में कर्फ्यू लगा दिया है.  – काठमांडू में कर्फ्यू का आदेश जारी कर दिया गया है. इसके तहत चार जिलों में किसी के भी प्रवेश या निकास, किसी भी प्रकार की सभा, जुलूस, प्रदर्शन, सभा, बैठक या घेराबंदी करने पर प्रतिबंध है. – इस प्रोटेस्ट में एक शख्स की मौत हो गई जबकि 80 घायल हो गए. – नेपाल में वर्तमान स्थिति को देखते हुए भारत-नेपाल बॉर्डर पर चौकसी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं. सूत्रों के हवाले से खबर है कि SSB ने भारत नेपाल बॉर्डर पर चौकसी बढ़ा दी है. भारत-नेपाल बॉर्डर की सुरक्षा में SSB तैनात है. SSB ने सुरक्षाकर्मियों और सर्विलांस बढ़ा दिया है.  – यह प्रोटेस्ट लगातार उग्र होता जा रहा है. दमाक में पुलिस फायरिंग में कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए हैं. घायलों को अस्पताल ले जाया गया है. – प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हिंसक झड़प हो रही है. प्रदर्शनकारी बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं. प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार के खिलाफ काठमांडू के विभिन्न शहरों में यह Gen-Z रिवोल्यूशन शुरू हुआ है. इस दौरान प्रदर्शनकारी संसद भवन में घुए गए. पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लेने के लिए आंसू गैस के गोले दागे. देश की नई युवा पीढ़ी के द्वारा सरकार के द्वारा सोशल मीडिया बैन किए जाने से लेकर भ्रष्टाचार तक के खिलाफ प्रदर्शन किया जा रहा है.  इस प्रदर्शन में हजारों युवा सड़क पर यात्रा सरकार के खिलाफ नाराबाजी करते दिखाई दे रहे हैं. प्रदर्शन के दौरान सरकार ने घंटों तक फोन और इंटरनेट सेवाएं बाधित कर दी थी.  काठमांडू के मेयर ने युवाओं के इस प्रोटेस्ट को अपना समर्थन पहले ही दे दिया है. वहीं, प्रधानमंत्री ओली का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि युवाओं को ये पता होगा कि कानून का उल्लंघन करने का क्या खामियाजा भुगतना पड़ता है.  नेपाल सरकार ने सोशल मीडिया पर क्यों लगाया बैन? नेपाल सरकार ने चार सितंबर को फेसबुक, X, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप सहित 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाया है क्योंकि इन प्लेटफॉर्म्स ने नेपाल सरकार के साथ रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था. सरकार ने 2024 में एक नया कानून लागू किया था, जिसके तहत सभी सोशल मीडिया कंपनियों को नेपाल में ऑपरेशन के लिए स्थानीय कार्यालय स्थापित करना जरूरी है और टैक्सपेयर के रूप में पंजीकरण करना अनिवार्य था. इस नियम का पालन नहीं करने पर सरकार ने यह कदम उठाया है. इसके पीछे सरकार का तर्क है कि सोशल मीडिया पर अनियंत्रित कंटेंट जैसे फर्जी खबरें, उकसाने वाले कंटेंट और अवैध गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए यह जरूरी था. हालांकि, इस फैसले की व्यापक आलोचना हुई है क्योंकि इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला माना जा रहा है. कई लोगों का मानना है कि यह प्रतिबंध राजतंत्र समर्थकों के प्रदर्शनों और सरकार विरोधी भावनाओं को दबाने का प्रयास हो सकता है, जो हाल के महीनों में बढ़े हैं. नेपाल सरकार के द्वारा फेसबुक, ट्विटर, वाट्सएप और यूट्यूब जैसे 26 सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रतिबंध लगाने से नाराज युवाओं ने आठ सितंबर से Gen-Z रिवोल्यूशन के नाम से प्रदर्शन शुरू किया है. बता दें कि प्रधानमंत्री केपी ओली की सरकार ने चार सितंबर को फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, वॉट्सऐप, रेडिट और X जैसे 26 सोशल मीडिया ऐप्स पर बैन लगा दिया था. सरकार ने कहा है कि सोशल मीडिया पर लगा ये बैन तभी हटेगा, जब ये कंपनियां नेपाल में अपना ऑफिस खोल लें, सरकार के समक्ष पंजीकरण कराएं और गड़बड़ी रोकने के लिए सिस्टम बनाएं. नेपाल में अब तक सिर्फ टिकटॉक, वाइबर, निम्बज, विटक और पोपो लाइव ने ही कंपनी रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्ट्रेशन कराया है. 

पंजाब में PM मोदी की यात्रा से पहले सख्त पाबंदियां, प्रशासन ने जारी किए निर्देश

गुरदासपुर  भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 सितम्बर, 2025 को गुरदासपुर जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने आ रहे हैं। डॉ. हरजिंदर सिंह बेदी, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट, गुरदासपुर ने भारतीय नागरिक सुरक्षा अधिनियम, 2023 की धारा 163 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, माननीय प्रधानमंत्री की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 9 सितम्बर 2025 तक गुरदासपुर जिले की सीमा के भीतर सभी प्रकार के ड्रोन उड़ाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए यह आदेश एकतरफा पारित किया गया।

तूफान Kiko ने बढ़ाया हवाई का संकट, अमेरिकी प्रशासन ने लगाई इमरजेंसी

वाशिंगटन अमेरिका का हवाई राज्य एक शक्तिशाली तूफान का सामना कर सकता है। श्रेणी 4 के तूफान 'किको' (Kiko) के द्वीप समूह के करीब आने के कारण प्रशासन ने आपातकाल की घोषणा कर दी है। 'द हिल' की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय मौसम सेवा (NWS) ने बताया कि  सुबह यह तूफान होनोलूलू से लगभग 1,205 मील पूर्व-दक्षिण-पूर्व में था। इसकी हवाओं की रफ्तार 130 मील प्रति घंटे थी और यह 25 मील प्रति घंटे की गति से पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ रहा था। मौसम विभाग का अनुमान है कि यह तूफान तक बिग आइलैंड और माउई तक पहुंच सकता है। इसके सोमवार देर रात और सप्ताह के मध्य तक पूर्वी हवाई द्वीप समूह पर अपने चरम पर पहुंचने की संभावना है। कार्यवाहक गवर्नर सिल्विया ल्यूक ने आपातकाल की स्थिति घोषित करते हुए निवासियों और पर्यटकों से लगातार अपडेट्स पर नजर रखने और आधिकारिक दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अधिकारी किसी भी क्षति से निपटने के लिए संसाधनों को जुटाने, मलबा हटाने और बुनियादी ढांचे को सुरक्षित करने के लिए तैयार हैं। कमजोर होकर तट से टकराने की उम्मीद हालांकि, वर्तमान में यह तूफान बहुत शक्तिशाली है, लेकिन हवाई के आस-पास का ठंडा पानी इसके तट के करीब आते-आते इसे कमजोर कर सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि बिग आइलैंड पर लैंडफॉल (तट से टकराने) से पहले यह श्रेणी 2 और 1 में बदल जाएगा और संभवतः एक उष्णकटिबंधीय तूफान में परिवर्तित हो जाएगा। तीन दशकों बाद बड़ा खतरा हवाई इमरजेंसी मैनेजमेंट एजेंसी (EMA) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि यदि यह तूफान अपनी ताकत बरकरार रखता है, तो हवाई को तीन दशकों में पहली बार किसी बड़े तूफान का सामना करना पड़ सकता है। इससे पहले सितंबर 1992 में आए तूफान 'इनिकी' ने राज्य में काफी तबाही मचाई थी, जो हवाई के इतिहास का सबसे शक्तिशाली और विनाशकारी तूफान था। उस समय इसकी हवाओं की गति 145 मील प्रति घंटे थी।

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़, एक ढेर, तीन जवान घायल

कुलगाम जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले के गुड्डार इलाके में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई है. जानकारी के अनुसार, सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों पर छिपे आतंकियों ने फायरिंग कर दी, जिसके बाद गोलीबारी तेज हो गई. पहले जानकारी सामने आई थी कि इलाके में 3 से 4 आतंकियों के छिपे होने की आशंका है, लेकिन अब बताया जा रहा है कि मुठभेड़ के दौरान एक आतंकी को मार गिराया गया है. फिलहाल सुरक्षाबलों ने क्षेत्र को घेर लिया है और ऑपरेशन जारी है. आतंकियों की तलाश के दौरान बताया जा रहा है कि सुरक्षाबलों के तीन जवान गोलीबारी के दौरान घायल हो गए हैं, जिसमें एक सेना के अधिकारी हैं. घायल होने के बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है. कुलगाम एनकाउंटर के दौरान अब तक ऑपरेशन में एक आतंकी मारा गया है. वह सेब के बागान से भागने की कोशिश कर रहा था, तभी सुरक्षाबलों ने उसे ढेर कर दिया. कहा जा रहा है कि गुड्डार इलाके में घिरे आतंकी लश्कर-ए-तैयबा के हैं. सर्च ऑपरेशन के दौरान आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग की. उनकी तलाश की जा रही है. भारतीय सेना ने बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस से मिली विशेष खुफिया सूचना के आधार पर संयुक्त सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। वहीं, सीआरपीएफ ने कहा कि सतर्क जवानों ने संदिग्ध गतिविधि देखी और चुनौती देने पर आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद हुई मुठभेड़ में एक आतंकी ढेर हो गया, जबकि एक जूनियर कमीशंड ऑफिसर घायल हो गए। इंटरनेशनल बॉर्डर से पाकिस्तानी नागरिक गिरफ्तार आतंकियों के साथ मुठभेड़ के बीच, जम्मू के आरएस पुरा सेक्टर में बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) ने अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास एक पाकिस्तानी नागरिक को हिरासत में लिया है. जानकारी के मुताबिक, बीएसएफ जवानों ने कल देर शाम सीमा स्तंभ के पास संदिग्ध हलचल देखी थी. तुरंत सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया और इस दौरान एक पाकिस्तानी नागरिक को पकड़ लिया गया. सुरक्षा बलों ने उसे मौके पर ही हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है. फिलहाल उसकी पहचान और सीमा पार से आने के मकसद की जांच की जा रही है. बीएसएफ अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती पूछताछ के बाद ही उसके इरादों और पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी सामने आ सकेगी. सीमा पर सुरक्षा को देखते हुए इलाके में गश्त और सर्चिंग और तेज कर दी गई है.

BJP का हमला: लालू की सुदर्शन रेड्डी से मुलाकात पर उठाए सवाल

नई दिल्ली भाजपा नेता अमित मालवीय ने सोमवार को विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के उम्मीदवार और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी की चारा घोटाले के दोषी लालू प्रसाद से मुलाकात की आलोचना की। उन्होंने इस मुलाकात को एक उच्च संवैधानिक पद के आकांक्षी व्यक्ति की ओर से सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी पर एक चौंकाने वाला बर्ताव बताया। उन्होंने सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की चुप्पी पर भी निशाना साधा और इसे पाखंड कहा। मालवीय ने कहा, 'इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात सेवानिवृत्त न्यायाधीशों और संवैधानिक नैतिकता के स्वयंभू संरक्षकों की चुप्पी है। उनका पाखंड उजागर हो गया है।' भाजपा नेता अमित मालवीय ने ट्वीट किया, 'सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के संयुक्त उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी ने हाल ही में चारा घोटाले के दोषी लालू प्रसाद से मुलाकात की, जो संसद सदस्य भी नहीं हैं और उपराष्ट्रपति चुनाव में उनका कोई वोट नहीं है। यह न केवल एक भयावह दिखावा है, बल्कि एक उच्च संवैधानिक पद की आकांक्षा रखने वाले व्यक्ति की ओर से सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी पर एक चौंकाने वाला रुख है। उनका पाखंड उजागर हो गया है।' रविशंकर प्रसाद ने कही यह बात इस बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा है कि भ्रष्टाचार में दोष सिद्ध एक आरोपी से मुलाकात कर देश के लोकतंत्र को बचाने की बात करना दुर्भाग्यपूर्ण है। सर्वोच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश को गंभीर आरोपों में लिप्त व्यक्ति से मुलाकात कर लोकतंत्र को बचाने की बात कहना किसी भी दृष्टि से सही नहीं है।  भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने सोमवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि उनकी पार्टी वर्तमान और पूर्व के सभी न्यायाधीशों का सम्मान करती है, क्योंकि इस देश के लोकतंत्र को मजबूत बनाने में न्यायपालिका की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रही है, लेकिन कुछ लोगों के बयान उनकी भूमिका को संदेह के घेरे में लाने वाली हैं। उपराष्ट्रपति चुनाव के बारे में जानिए… इस बीच 9 सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के उम्मीदवार न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बी. सुदर्शन रेड्डी और एनडीए के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन के बीच सीधा मुकाबला होगा। मतदान से पहले भारतीय जनता पार्टी ने रविवार को एक 'संसद कार्यशाला' का आयोजन किया। इसमें आज अपने सांसदों को मतदान प्रक्रिया के बारे में मार्गदर्शन देने के लिए एक अभ्यास सत्र का आयोजन किया जाएगा। खरगे विपक्ष को देंगे रात्रिभोज इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान से एक दिन पहले सोमवार शाम को संसद भवन के एनेक्सी में विपक्षी सांसदों के लिए रात्रिभोज का आयोजन करेंगे। यह बैठक विपक्ष की एकता और उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी के समर्थन को मजबूत करने के लिए है, जिन्हें ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का भी समर्थन प्राप्त है। जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद उपराष्ट्रपति का पद रिक्त 21 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद उपराष्ट्रपति का पद रिक्त हो गया था। उपराष्ट्रपति का चुनाव संविधान के अनुच्छेद 64 और 68 के प्रावधानों द्वारा शासित होता है। चुनाव आयोग राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव अधिनियम, 1952 द्वारा उपराष्ट्रपति चुनावों को अधिसूचित करता है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 66(1) के अनुसार, उपराष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली द्वारा एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से होगा। ऐसे चुनाव गुप्त मतदान द्वारा होते हैं।

क्राइम ब्रांच की बड़ी सफलता: लाल किला से चोरी कलश हापुड़ में मिला, आरोपी पकड़ा गया

नई दिल्ली दिल्ली के लाल किला परिसर से चोरी हुए 1 करोड़ के कलश मामले में क्राइम ब्रांच ने कलश समेत आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. CCTV फुटेज के आधार पर उत्तर प्रदेश के हापुड़ से चोर को गिरफ्तार किया गया है. एक नहीं तीन कलश की हुई थी चोरी आरोपी ने पूछताछ में खुलासा किया की एक नहीं 3 कलश चोरी हुए थे जिसमें अभी एक बरामद हुआ है. अन्य आरोपियों और 2 कलश की बरामदगी के लिए छापेमारी जारी है. दरअसल बीते दिनों दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला परिसर के 15 अगस्त पार्क में जैन समाज का धार्मिक अनुष्ठान चल रहा था. इसी दौरान सोने का एक कीमती कलश चोरी हो गया, जिसकी कीमत लगभग एक करोड़ रुपये थी.  धोती पहने शख्स ने की थी चोरी जब जांच शुरू की गई तो सीसीटीवी फुटेज में साफ दिखा कि धोती पहना एक शख्स बड़ी चतुराई से पूजा स्थल तक पहुंचा और मौके का फायदा उठाकर कलश को अपने झोले में डालकर वहां से फरार हो गया था. हीरे और रत्नों से जड़ा हुआ था कलश यह कलश केवल सोने और रत्नों से जड़ा आभूषण नहीं था, बल्कि जैन समाज के धार्मिक आयोजनों में प्रतिदिन होने वाले पूजन का अहम हिस्सा था. इसमें लगभग 760 ग्राम सोना और करीब 150 ग्राम बहुमूल्य रत्न जैसे हीरा, पन्ना और माणिक्य जड़े हुए थे. आयोजन समिति के सदस्य पुनीत जैन ने इस चोरी को लेकर बताया था कि यह कलश लंबे समय से विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में उपयोग किया जा रहा था और हर दिन पूजा-पाठ के दौरान विशेष मंच पर स्थापित किया जाता था. मंच पर केवल परंपरागत परिधान पहने अधिकृत व्यक्तियों को ही प्रवेश की अनुमति होती है.

बस्तर एयरपोर्ट ने पार किया तीन लाख यात्रियों का आंकड़ा, हवाई सेवा से जुड़े बड़े शहर

रायपुर, छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के 25 वर्षों की विकास यात्रा में आवागमन की सुविधाओं का विस्तार महत्वपूर्ण उपलब्धि रही है। जहां राजधानी रायपुर पहले से ही देश के प्रमुख शहरों से वायु मार्ग से जुड़ा था, वहीं अब बस्तर, बिलासपुर और अंबिकापुर जैसे शहर भी विमान सेवाओं से लाभान्वित हो रहे हैं। विशेषकर बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में एयरपोर्ट और नियमित यात्री उड़ानों की सुविधा से क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं खुली हैं। जगदलपुर स्थित माँ दंतेश्वरी हवाई अड्डा का ऐतिहासिक महत्व है। इसका निर्माण वर्ष 1939 में ब्रिटिश शासनकाल में किया गया था और इसे उस समय ‘‘जहाज भाटा’’ नाम से जाना जाता था। वर्ष 2017 में केंद्र सरकार की उड़ान योजना के अंतर्गत भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा हवाई अड्डे के उन्नयन का कार्य प्रारंभ किया गया। वर्ष 2019 में इसे 3-सी श्रेणी में अपग्रेड किया गया, जिससे एटीआर-72 जैसे विमानों का संचालन संभव हुआ। वर्ष 2020 में छत्तीसगढ़ सरकार ने हवाई अड्डे का नामकरण बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के नाम पर किया। सितंबर 2020 में जगदलपुर से रायपुर और हैदराबाद के लिए एलायंस एयर द्वारा नियमित व्यावसायिक उड़ानें शुरू की गईं। इसके बाद दिल्ली, जबलपुर और बिलासपुर के लिए भी उड़ान सेवाएँ प्रारंभ हुईं। मार्च 2024 से इंडिगो एयरलाइंस ने जगदलपुर को हैदराबाद और रायपुर से जोड़ते हुए दैनिक सेवा शुरू की। पैरामिलिट्री बलों के लिए विशेष दिल्ली सेवा का संचालन भी किया जा रहा है। वर्तमान में जगदलपुर एयरपोर्ट से अब तक लगभग तीन लाख यात्री हवाई यात्रा कर चुके हैं। इससे न केवल स्थानीय नागरिकों को सुविधा मिली है, बल्कि व्यापार, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। गंभीर मरीजों को बड़े शहरों तक शीघ्र उपचार हेतु पहुंचाना संभव हो पाया है। विद्यार्थी और युवा रोजगार एवं उच्च शिक्षा के लिए बड़े शहरों तक आसानी से पहुँच रहे हैं। बस्तर के हस्तशिल्प, वनोपज और हर्बल उत्पाद अब देश के बड़े बाजारों तक सरलता से पहुँच रहे हैं। वहीं चित्रकूट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान और ऐतिहासिक बस्तर दशहरा जैसे पर्यटन स्थलों तक देश-विदेश से पर्यटकों की पहुँच भी सहज हुई है। जगदलपुर एयरपोर्ट का संचालन बस्तर अंचल के लिए विकास का नया द्वार सिद्ध हो रहा है। इससे आंतरिक क्षेत्रों तक आधुनिक सुविधाएँ पहुँच रही हैं और बस्तर को राष्ट्रीय परिदृश्य पर नई पहचान मिल रही है। आने वाले समय में यह एयरपोर्ट क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक प्रगति का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।

जानें कौन सी सब्जियां पितरों को नहीं भाती, टालें पितृ असंतोष

पितृ पक्ष के दौरान कुछ विशेष नियम हैं जिनका सख्ती से पालन करने से पितरों की तृप्ति होती है, उनकी आत्मा को शांति मिलती है। साथ ही परिवार पर सुख-समृद्धि बनी रहती है। इसलिए पितृ पक्ष के दौरान इन परंपराओं को गंभीरता से अपनाना अत्यंत आवश्यक है। पितृ पक्ष, जिसे पितृ अमावस्या या पितृ काल भी कहा जाता है, एक महत्वपूर्ण धार्मिक अवधि है जो इस वर्ष 7 सितंबर से 21 सितंबर 2025 तक रहेगी। यह वह समय होता है जब हमारे पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए विशेष पूजा, श्राद्ध कर्म और तर्पण आदि किए जाते हैं। इस पावन अवसर पर लोग अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथियों के अनुसार विशेष श्राद्ध अनुष्ठान करते हैं ताकि उनकी आत्मा को शांति और मुक्ति मिल सके। पितृ पक्ष के दौरान ब्राह्मणों को भोजन कराने की भी विशेष प्रथा है, जिसे पितृ भोजन कहा जाता है। ऐसा करने से माना जाता है कि पूर्वज तृप्त होते हैं और अपने वंशजों की सुख-समृद्धि के लिए आशीर्वाद देते हैं। यह समय परिवार में एकता और परंपराओं के सम्मान का प्रतीक भी होता है। पितृ पक्ष के ये कर्म न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि यह हमें अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान की भावना भी सिखाते हैं। पितरों के भोजन में किन सब्ज़ियों से बचें पितृ पक्ष के दौरान पितरों के लिए बनाए जाने वाले भोजन में कुछ खास सब्जियों को शामिल नहीं किया जाता। खासकर पत्ता गोभी और कुम्हड़ा की सब्जी पितरों के भोजन में बिल्कुल नहीं बनानी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि पुराणों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितर इन सब्जियों को ग्रहण नहीं करते। यदि इन्हें पितरों के लिए बनाए गए भोजन में शामिल किया जाए या ब्राह्मणों को खिलाया जाए, तो माना जाता है कि पितर अतृप्त होकर लौट जाते हैं। इससे न केवल पितरों की शांति बाधित होती है बल्कि परिवार पर भी दोष लगता है। इसलिए यह एक महत्वपूर्ण नियम है कि पितरों के भोजन में इन सब्जियों का पूर्णतः त्याग किया जाए। अश्विन माह में खाने से परहेज करें पितृ पक्ष जो कि अश्विन माह में आता है, इस समय कई प्रकार की जड़ वाली सब्जियों से बचने की सलाह दी जाती है। इस दौरान शकरकंद, मूली, गाजर, शलजम, चुकंदर, अरबी, सूरन जैसी सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए। इन सब्जियों में ठंडी और भारी प्रकृति होती है, जो धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार पवित्र भोजन के लिए उचित नहीं मानी जातीं। पितृ पक्ष के दौरान शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है, इसलिए इस तरह की सब्जियों का परहेज करना जरूरी होता है।  दालों के सेवन पर रोक पितृ पक्ष के समय कुछ विशेष प्रकार की दालों से भी दूर रहना चाहिए। इनमें चना दाल, सत्तू, मसूर और उड़द की दाल शामिल हैं। ये दालें भारी होती हैं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पावन अवधि में इनका सेवन वर्जित माना गया है। श्राद्ध और तर्पण जैसे अनुष्ठानों के समय हल्का और सरल भोजन ही बनाया जाता है, जो पितरों की तृप्ति के लिए उपयुक्त हो। प्याज-लहसुन से बचाव पितृ पक्ष में बनाए जाने वाले भोजन में प्याज और लहसुन का उपयोग पूरी तरह से वर्जित होता है। इन दोनों सामग्रियों को अहिंसा और शुद्धता के सिद्धांतों के विपरीत माना जाता है। श्राद्ध के भोजन में इनका प्रयोग न करने से भोजन की पवित्रता बनी रहती है और पूर्वजों को प्रसन्न किया जा सकता है। इससे अनुष्ठान का प्रभाव भी बढ़ता है। भोजन बनाते समय सावधानी पितृ पक्ष के दौरान भोजन बनाते समय विशेष स्वच्छता और पवित्रता का ध्यान रखना जरूरी है। भोजन बनाने से पहले स्नान अवश्य करें और पूरी सफाई के साथ भोजन तैयार करें। इसके अलावा, अनुष्ठान और भोजन के दौरान चप्पल पहनने से बचना चाहिए, क्योंकि यह असम्मान और अशुद्धि का प्रतीक माना जाता है। इन बातों का ध्यान रखने से अनुष्ठान सफल होते हैं और पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।