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IAS ट्रांसफर लिस्ट जारी: आशीष सिंह बने उज्जैन के नए कमिश्नर, इंदौर-जबलपुर समेत 5 जिलों के कलेक्टर बदले

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार ने सोमवार (8 सितंबर) की देर रात प्रशासनिक सेवा में बड़ा फेरबदल किया है. रात में एमपी के 14 आईएएस अफसरों का तबादला कर दिया गया. नए ड्यूटी पर तैनात हुए अफसरों की लिस्ट भी जारी हो गई है. इससे कुछ ही घंटे पहले 20 IPS अफसरों के तबादले किए गए थे.  सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के अनुसार, 5 जिलों के कलेक्टर बदल दिए गए हैं. इनमें इंदौर, जबलपुर, कटनी, बड़वानी और आगर मालवा शामिल हैं. जबलपुर के कलेक्टर अब बने जनसंपर्क आयुक्त सबसे अहम बदलाव जनसंपर्क विभाग में हुआ है. जनसंपर्क आयुक्त डॉ. सुदाम पंढरीनाथ खाड़े को हटा दिया गया है. उनकी जगह जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना को जनसंपर्क आयुक्त बनाया गया है. किसे कहां मिली जिम्मेदारी? डॉ. सुदाम पंढरीनाथ खाड़े को इंदौर संभागा का आयुक्त बनाया गया है. दीपक सिंह मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के सह सचिव बने हैं. अभिषेक सिंह एमपी शासन गृह विभाग के सचिव नियुक्त किए गए हैं. वहीं, आशीष सिंह को उज्जैन संभाग के सह आयुक्त पद की जिम्मेदारी मिली है. इसके अलावा, अतिरिक्त प्रभार के तौर पर उन्हें सिंहस्थ मेला के लिए उज्जैन मेला अधिकारी बनाया गया है. दीपक कुमार सक्सेना को एमपी जनसंपर्क का सह आयुक्त नियुक् किया गया है. एमरी माध्यम के प्रबंध संचालक का अतिरिक्त प्रभार भी मिला है. नए कलेक्टरों की नियुक्ति शिवम वर्मा इंदौर के नए कलेक्टर बने हैं. राघवेंद्र सिंह को जबलपुर का कलेक्टर नियुक्त किया गया है. दिलीप यादव इंगौर नगर पालिक निगम के आयुक्त बनाए गए हैं. साथ ही उन्हें मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कंपनी लिमिटेड इंदौर का अतिरिक्त प्रभार मिला है. आशीष तिवारी को कटनी के कलेक्टर पद की जिम्मेदारी मिली है. जयति सिंह बड़वानी कलेक्टर पद पर नियुक्त हुई हैं. प्रीति यादव आगर मालवा की कलेक्टर बनी हैं. डॉ. परिक्षित संजयराव झाड़े को मुख्य कार्यपालन अधिकारी, इंदौर विकास प्राधिकरण, इंदौर बनाया गया है. रामप्रकाश अहिरवार को जबलपुर नगर पालिक निगम का आयुक्त बनाया गया है. इन 5 जिलों में कलेक्टर बदले इंदौर – शिवम वर्मा को कलेक्टर बनाया गया है। वर्मा अभी इंदौर नगर निगम में कमिश्नर हैं। जबलपुर – राघवेन्द्र सिंह को कलेक्टर बनाया गया हैं। राघवेंद्र सिंह अभी आगर-मालवा जिले के कलेक्टर हैं। कटनी – आशीष तिवारी को कलेक्टर बनाया गया हैं। तिवारी अभी मुख्य सचिव कार्यालय में उपसचिव हैं। बड़वानी – जयति सिंह को कलेक्टर बनाया गया हैं। जयति अभी उज्जैन जिला पंचायत की सीईओ हैं। आगर-मालवा – प्रीति यादव को कलेक्टर बनाया गया हैं। प्रीति अभी जबलपुर नगर निगम में कमिश्रर हैं।

इलेक्ट्रिक वाहन संवर्धन बोर्ड का होगा गठन- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

विश्व ईवी दिवस 9 सितम्बर मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन नीति बनाने वाला देश का पहला राज्य-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इलेक्ट्रिक वाहन संवर्धन बोर्ड का होगा गठन- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ईवी मैन्यूफैक्चरिंग हब बनने की क्षमता है मध्यप्रदेश में- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन परिवहन के भविष्य का प्रतिनिधित्व करने के लिये तैयार हो रहा है। इलेक्ट्रिक वाहन नीति बनाने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है। जलवायु परविर्तन से लड़ने के वैश्विक जनादेश और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश के इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण लक्ष्यों को हासिल करना मध्यप्रदेश की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विश्व ईवी दिवस पर लोगों से कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया है। इलेक्ट्रिक वाहन जनसहयोग से कार्बन उत्सर्जन को कम करने में तेजी लाने के लिए सबसे प्रभावी समाधान हैं। मध्यप्रदेश में जल्दी ही इलेक्ट्रिक वाहन संवर्धन बोर्ड का गठन किया जायेगा। यह अंतर विभागीय समन्वय सुनिश्चित करने और विभिन्न मुददों का समाधान निकालने के लिए जिम्मेदार होगा। मध्यप्रदेश को स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग में आदर्श राज्य बनाने और इस क्षेत्र में उत्कृष्ट उदाहरण स्थापित करने के लिये प्रयास किये जा रहे हैं। मध्यप्रदेश की इलेक्ट्रिक वाहन नीति में रोड टैक्स और पंजीकरण शुल्क में छूट के साथ इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के लिये वित्तीय प्रोत्साहन दिया जायेगा। चार्जिंग और स्वैपिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर लगाने में तेजी लाने के प्रयासों को भी प्रोत्साहन दिया जायेगा। ईवी और ईवी संबंधित पाठयक्रम होंगे शुरू प्रदेश में ईवी उदयोग के लिए आवश्यक कौशल के साथ कार्यबल तैयार करने के लिए नीति में इंजीनयिरिंग कालेजों और आईटीआई में ईवी और ईवी संबंधित पाठयक्रम भी शुरू किये जायेंगे। इसके अलावा भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन को ईवी मॉडल सिटी के रूप में स्थापित किया जायेगा। मध्यप्रदेश का लक्ष्य है कि 2070 तक भारत को अपने शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहयोग करे और स्वयं को कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने वाले राज्यों में पहला स्थान हासिल करे। प्रदेश में वायु गुणवत्ता  के सुधार एवं पेट्रोल, डीजल वाहनों पर निर्भरता को कम करने तथा इलेक्ट्रिक चार्जिंग अधोसंरचना के निर्माण के लिये नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा मध्य्प्रदेश इलेक्ट्रिक व्हीरकल नीति-2025 का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसके अंतर्गत वर्ष 2030 तक प्रदेश में कुल पंजीकृत 02 पहिया, 03 पहिया, चार पहिया वाहन एवं बस के लिये इलेक्ट्रिक वाहनों के पंजीकृत के लिए क्रमश: 40%, 80%, 15% एवं 40% का लक्ष्य रखा गया है। इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टे्शन जैसे:- स्माल, मीडियम और लार्ज चार्जिंग स्टेशन के लिए 10 लाख रूपये तक, अनुसंधान, नवाचार एवं कौशल विकास के लिए 2 करोड़ रूपये, बैटरी स्वैपिंग स्टेशन के लिये 5 लाख रूपये तक और 02 पहिया, 03 पहिया एवं कार के लिए रेट्रोफिटिंग अंतर्गत 25 हजार रूपये तक के वित्तीय प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग तथा मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थांन भोपाल द्वारा 9 सितंबर को विश्व ईवी दिवस पर लोगों में जागरूकता लाने ईवी कार्यशाला विद्युत 25 और इलेक्ट्रि‍क आटो एक्सपो का आयोजन मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भोपाल में किया जा रहा है। ईवी उद्योग के विकास को बढ़ावा देने में मध्यप्रदेश अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार है। ईवी सेगमेंट को बढ़ता देख आम लोगों में उत्साह है कि भविष्य में मध्यप्रदेश ईवी मैन्यूफैक्चरिंग हब बनेगा। मध्यप्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण का केंद्र बनने की क्षमता है। यहां सभी प्रकार की सहयोगी अधोसंरचनाएं मौजूद हैं। निर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत ईवी इन्फ्रास्ट्रक्चर की मौजूदगी जरूरी है, जिसमें बैटरी निर्माण सुविधाएं, असेंबली प्लांट और सप्लाई चैन नेटवर्क शामिल हैं। मध्यप्रदेश में इसकी भरपूर सभावनाएं हैं। भारत में लिथियम खनन का काफी विकास हुआ है। देश के भीतर लिथियम की उपलब्धता से मौजूदा हालात पूरी तरह बदल सकते हैं। यह इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी का सबसे महत्वपूर्ण घटक है। भारत में हाल ही में खोजे गए लिथियम के भंडार से आयात पर निर्भरता में कमी आने के साथ-साथ पूरे ईवी सप्लाई चैन को मजबूती मिलने की संभावना है। इसका सबसे बड़ा लाभ मध्यप्रदेश को होगा। ईवी का उपयोग न केवल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और उपयोग  की लागत को कम करता है बल्कि वितरण दक्षता भी बेहतर बनाता है। प्रदूषण को कम करने और स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण के लिए ईवी को अपनाना प्रासंगिक है। मध्यप्रदेश में इसके रूझान दिख रहे हैं। समुदायों और ग्राहकों में जागरूकता बढ़ रही है। भारत दुनिया में दो पहिये वाले वाहनों का सबसे बड़ा निर्माता हैं। विद्युत वाहन इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ़्टवेयर का मिश्रण है और मध्यप्रदेश का इन दोनों में अच्छा प्रदर्शन है। मध्यप्रदेश में प्रतिभा, अच्छा वातावरण और सरकार के समर्थन से इलेक्ट्रिक वाहन हब बनने को तैयार हो रहा है।  

श्रमिक परिवारों के लिए खुशखबरी, मुख्यमंत्री डॉ. यादव अंतरित करेंगे 175 करोड़ की आर्थिक मदद

CM डॉ. यादव का बड़ा ऐलान: श्रमिक परिवारों को मिलेंगे 175 करोड़ रुपये, सीधे खातों में जाएगी सहायता राशि श्रमिक परिवारों के लिए खुशखबरी, मुख्यमंत्री डॉ. यादव अंतरित करेंगे 175 करोड़ की आर्थिक मदद अनुग्रह सहायता के 7953 प्रकरणों में लाभान्वित होंगे हितग्राही भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 9 सितम्बर को मंत्रालय भोपाल में संबल योजना अंतर्गत, अनुग्रह सहायता के 7953 प्रकरणों में 175 करोड़ रूपये सिंगल क्लिक से हितग्राहियों के खातों में अंतरित करेंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल भी उपस्थित रहेंगे। संबल योजना के अंतर्गत प्रारम्भ से अब तक 7 लाख 60 हजार 866 प्रकरणों में 7046 करोड़ रूपये से अधिक के हितलाभ वितरित किये जा चुके है। संबल योजना, प्रदेश में असंगठित क्षेत्र में कार्यरत लाखों श्रमिकों के लिए महत्वपूर्ण योजना है। अनुग्रह सहायता के अंतर्गत दुघर्टना में मृत्यु होने पर 4 लाख रूपये एवं सामान्य मृत्यु होने पर 2 लाख रूपये प्रदान किये जाते हैं। इसी प्रकार स्थायी अपंगता पर 2 लाख रूपये एवं आंशिक स्थायी अपंगता पर 1 लाख रूपये और अंत्येष्टि सहायता के रूप में 5 हजार रूपये प्रदान किये जाते हैं। संबल योजना में महिला श्रमिक को प्रसूति सहायता के रूप में 16 हजार रूपये, श्रमिकों के बच्चों को महाविद्यालय शिक्षा प्रोत्साहन योजना में उच्च शिक्षा का सम्पूंर्ण शिक्षण शुल्क राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है। गिग एवं प्लेटफार्म वर्कर्स का पंजीयन प्रारंभ भारत सरकार के नीति आयोग की पहल पर प्रदेश के गिग एवं प्लेटफार्म वर्कर्स को भी संबंल योजना में सम्मिलित किया जाकर इनका पंजीयन प्रारम्भ किया गया है। इन्हें भी संबल योजना के सभी लाभ प्रदान किये जा रहे हैं। संबल हितग्राहियों को खाद्यान्न पात्रता पर्ची भी प्राप्त होती है जिससे वे केन्द्र तथा राज्य सरकार द्वारा रियायती दरों पर राशन प्राप्त कर रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के लाखों निर्माण श्रमिकों के लिये निर्माण मंडल के माध्यम से कई योजनाएँ भी संचालित की जाती हैं। इनमें निर्माण श्रमिकों की मृत्यु होने पर अनुग्रह सहायता तथा स्थायी एवं आंशिक अपंगता पर सहायता भी सम्मिलित है। सभी संबल हितग्राहियों को आयुष्मान भारत निरामय योजना अंतर्गत पात्र श्रेणी में चिन्हित किया गया है। अब वे भी 5 लाख रूपये वार्षिक नि:शुल्क चिकित्सा प्राप्त कर रहे है। प्रदेश सरकार द्वारा प्रारंभ से अब तक 1 करोड़ 77 लाख से अधिक श्रमिकों का संबल योजना के अंतर्गत पंजीयन किया गया है, पंजीयन प्रक्रिया निरंतर जारी है।  

दिमागी थकान से परेशान? ये 7 आदतें तुरंत बदलें और पाएं मदद

क्या आपने कभी ऐसा महसूस किया है कि आपका फिजिकल काम ज्यादा नहीं था लेकिन फिर भी आपका मन भारी और थका हुआ लग रहा है? आपका शरीर ठीक है, लेकिन मानसिक थकान आपको लगातार घेर रही है, जैसे कोई अनजाना बोझ आपके मन पर है. अक्सर ऐसा हमारी रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों की वजह से होता है, जिन्हें हम पहचान भी नहीं पाते. आइए हम सात ऐसी आम आदतों पर नज़र डालते हैं, जो आपकी मेंटल एनर्जी को धीरे-धीरे खत्म कर देती हैं. साथ ही लेख के अंत में मैं एक बहुत ही प्रभावी अभ्यास भी बताऊंगा, जो आपकी मानसिक ऊर्जा को फिर से ताजा कर सकता है. पहली आदत: अपनी बातों को बार-बार दूसरों को समझाना. कभी-कभी हम अपने फैसलों, भावनाओं या सीमाओं को बार-बार बताने लगते हैं, सोचते हैं कि अगर पूरी बात न कहें तो लोग क्या सोचेंगे. ऐसा करने से मन में थकावट होती है. इसलिए याद रखें, आपकी पसंद को हर किसी की मंजूरी की जरूरत नहीं होती. जब भी ऐसा महसूस हो, खुद से कहें, "यह मेरे लिए अभी सही लग रहा है." और फिर बात वहीं छोड़ दें. दूसरी आदत: हर किसी की समस्या सुलझाने की कोशिश करना. कभी-कभी हम लोगों की भावनाओं को सुनने की बजाय तुरंत समाधान देने लगते हैं. इससे आप अपने साथ-साथ दूसरों का बोझ भी उठाने लगते हैं और थक जाते हैं. कभी-कभी सिर्फ सुनना ही काफी होता है.  तीसरी आदत: एक साथ कई काम करना या मल्टीटास्किंग. हमारा दिमाग मल्टीटास्किंग के लिए नहीं बना है. जब आप एक से ज्यादा काम करते हैं, तो दिमाग तेजी से काम के बीच स्विच करता है, जिससे बहुत थकावट होती है. इसलिए एक काम पर पूरा ध्यान दें. चौथी आदत: पुराने विवाद या बातों को बार-बार याद करना. ऐसा करने से मन में स्ट्रेस बढ़ता है. जब ऐसा हो, तो खुद से कहें कि "वो समय अब खत्म हो चुका है," और अपने दिमाग को इसे छोड़ने की आदत डालें. पांचवीं आदत: दूसरों की खुशी के लिए बिना मन से "हां" कहना. कई बार हम दूसरों को निराश न करने के लिए चीज़ें बिना सोचे-समझे स्वीकार कर लेते हैं, जिसका असर हमारे मन पर पड़ता है. इससे बचने के लिए थोड़ा सोच-समझ कर जवाब दें. छठी आदत: बहुत ज्यादा शोर, सोशल मीडिया, खबरों और वीडियो में उलझना. यह हमारे नर्वस सिस्टम को थका देता है. रोजाना कम से कम 20 मिनट फोन से दूर बैठें, चाय पिएं या खुली हवा में सैर करें. सातवीं आदत: अपनी भावनाओं को अनदेखा करना. जब आप चिंतित, उदास या चिड़चिड़े महसूस करते हैं तो खुद को कुछ पल दें, उस भावना को समझें और जरूरत पड़ने पर लिखें या बोलें. इससे आपकी भावनाएं कंट्रोल रहती हैं. ये चीजें कर सकती हैं मदद सांसों पर ध्यान देना. रोजाना 2 मिनट शांति से बैठकर अपनी सांसों पर ध्यान दें, बिना उसे बदलने की कोशिश किए.  यह दिमाग और शरीर दोनों को आराम देता है और आपकी मानसिक शांति को बहाल करता है.

उज्जैन और जबलपुर में जू कम रेस्क्यू सेंटर के निर्माण में लाएं गति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

पर्यावरण की स्वच्छता के लिए समाज और सरकार करें साझा प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन और जबलपुर में जू कम रेस्क्यू सेंटर के निर्माण में लाएं गति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वच्छ पर्यावरण से ही स्वस्थ और समृद्ध बनेगा मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल में बॉयो डायवर्सिटी पार्क की स्थापना की तैयारी मुख्यमंत्री ने की पर्यावरण विभाग की गतिविधियों की समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पर्यावरण की शुचिता बनाये रखना हम सभी का सामूहिक दायित्व है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छ पर्यावरण से ही प्रदेश के हर नागरिक का जीवन स्वस्थ और समृद्ध बनेगा। उन्होंने निर्देश दिए कि पर्यावरण संरक्षण के लिए सभी विभाग आपसी सामंजस्य और सहयोग के साथ कारगर कदम उठाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल एवं वायु की शुद्धता पर विशेष ध्यान दिया जाए। इन दो विशेष घटकों की शुद्धता पर ही संपूर्ण पर्यावरण की स्वच्छता निर्भर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को मंत्रालय में पर्यावरण विभाग की गतिविधियों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन और जबलपुर में जू कम रेस्क्यू सेंटर की स्थापना होनी है। इस कार्य में गति लाएं और जल्द से जल्द इस कार्य को अंजाम दिया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि पर्यावरण की शुद्धता से ही हम सबका जीवन सुरक्षित रह सकता है और यह संदेश समाज तक भी पूरी जिम्मेदारी से पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की बेहतरी केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज को भी आगे आना होगा। समाज और सरकार के साझा प्रयास ही पर्यावरण को स्वच्छ और संरक्षित बनाए रख सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़े तालाब में डल झील की तरह शिकारे चलाने की कार्यवाही जल्द से जल्द पूरी की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन एक वृहद विषय है। इसके लिए कार्ययोजना बनाकर लक्ष्य आधारित कार्य किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भोपाल, इंदौर, उज्जैन एवं ग्वालियर के अलावा जबलपुर, रीवा, सागर एवं खजुराहो में भी हीट कंट्रोल के लिए एक्शन प्लान बनाकर उसे क्रियान्वित किया जाए। मुख्यमंत्री ने हर्ष जताते हुए कहा कि प्रदेश में अमरकंटक, पचमढ़ी और पन्ना पहले से ही यूनेस्को बायोस्फियर रिजर्व घोषित हैं। इसके अलावा अब कान्हा, पेंच एवं बांधवगढ़ को भी यूनेस्को बायोस्फियर रिजर्व घोषित कराने के लिए समुचित कार्यवाही की जाए। अपर मुख्य सचिव वन एवं पर्यावरण अशोक वर्णवाल ने भोपाल के शाहपुरा क्षेत्र में करीब 100 हेक्टेयर क्षेत्र में स्टेट ऑफ द आर्ट के सहयोग से बॉयो डायवर्सिटी पार्क की स्थापना करने की विभागीय योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह संभवत: देश का पहला बॉयो डायवर्सिटी पार्क होगा। यह अहम जानकारी मिलने पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसे देश का मॉडल बॉयो डायवर्सिटी पार्क बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भोपाल शहर को जैव विविधता के संरक्षण के मामले में एक नई पहचान देने वाले इस नवाचार के लिए सभी कार्यवाहियां तेजी से पूरी की जाएं। बैठक में अपर मुख्य सचिव वन एवं पर्यावरण वर्णवाल ने बताया कि बड़े तालाब में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही मानसून अवधि के बाद की जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में प्रदूषण फैलाने वाले अर्थात् लाल श्रेणी के उद्योगों की संख्या घट गई है, इससे पर्यावरण और बेहतर हुआ है। उन्होंने बताया कि नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत प्रदेश के पहले से शामिल 7 शहरों के अलावा 3 नए शहरों मंडीदीप, सिंगरौली और पीथमपुर को भी इस प्रोग्राम में शामिल करने के लिए केन्द्र सरकार को प्रस्ताव भेज दिया गया है। इस पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन स्थित विक्रम उद्योगपुरी में भी प्रदूषण नियंत्रण के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाए। उन्होंने बताया कि पिछले छह माह में विभाग द्वारा यूनियन कार्बाइड के अपशिष्ट का सुरक्षित रूप से भस्मीकरण कराया गया। रियल टाइम क्रॉप बर्निंग मॉनीटरिंग के लिए एक सॉफ्टवेयर विकसित कर इसका डाटा पब्लिक पोर्टल पर प्रसारित किया गया। प्रदेश के सभी जिलों के लिए राज्य पर्यावरण योजना एवं जिला पर्यावरण योजना का अपडेट पोर्टल उपलब्ध कराया गया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में प्रदूषणकारी उद्योगों एवं संक्रामक कचरे (बॉयो मेडिकल वेस्ट) के समुचित निपटान के लिए हर माह एक सप्ताह में विशेष अभियान चलाया जाएगा, गड़बड़ी मिलने पर संबंधितों पर कार्यवाही भी की जाएगी। अपर मुख्य सचिव वन एवं पर्यावरण वर्णवाल ने बताया कि मध्यप्रदेश राज्य वेटलैण्ड प्राधिकरण के अंतर्गत जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के माध्यम से प्रदेश की 5 रामसर साइट क्रमश: भोज वेटलैण्ड भोपाल, सिरपुर, यशवंत सागर इंदौर, तवा जलाशय नर्मदापुरम एवं साख्य सागर शिवपुरी में उपलब्ध सभी जैव विविधताओं का सर्वे कर विधिवत दस्तावेजीकरण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हरित मध्यप्रदेश मिशन के तहत विभाग अगले तीन माह में एक मिशन डाक्यूमेंट तैयार कर शासन को प्रस्तुत करेगा। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मिशन में पर्यावरण विभाग के साथ-साथ वन एवं कृषि विभाग को भी जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री ने कहाकि प्रदेश में करीब 247 नदियां हैं, इन सभी नदियों का भी दस्तावेजीकरण कराया जाए। बैठक में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास संजय दुबे, अपर मुख्य सचिव ऊर्जा नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव गृह शिव शेखर शुक्ला सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।  

प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति हमारे लिए प्रेरणा भी है और आनंद भी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रधानमंत्री मोदी 17 सितंबर को धार जिले के भैसोला गांव में देश के पहले पीएम मित्रा पार्क का करेंगे शिलान्यास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति हमारे लिए प्रेरणा भी है और आनंद भी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री का धार प्रवास प्रदेश के विकास में मील का पत्थर सिद्ध होगा स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान का शुभारंभ भी करेंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री के आगमन एवं भैसोला में होने वाले कार्यक्रमों की तैयारियों की समीक्षा बैठक की भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 17 सितंबर को मध्यप्रदेश आएंगे। प्रधानमंत्री मोदी धार जिले की बदनावर तहसील के ग्राम भैसोला में स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान का शुभारंभ, सेवा पखवाड़ा तथा यहां देश के पहले पीएम मित्रा पार्क का शिलान्यास करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा से प्रदेश के जनजातीय बहुल मालवा अंचल में किसानों को एक बहुत बड़ी सौगात मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश का धार, झाबुआ, उज्जैन और निवाड़ का खरगोन, बड़वानी सबसे बड़ा कपास उत्पादक क्षेत्र है। ऐसे में केंद्र सरकार की ओर से मध्यप्रदेश में कॉटन आधारित बड़े इंडस्ट्रियल पार्क की स्थापना होने जा रही है, यह देशभर में मंजूर 7 पीएम मित्रा पार्क में से पहला पार्क है जिसका भूमि-पूजन होने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम मित्रा पार्क से 1 लाख प्रत्यक्ष और 2 लाख से अधिक अप्रत्यक्ष, कुल मिलाकर 3 लाख रोजगार के अवसर सृजित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि धार में पीएम मित्र पार्क का शिलान्यास प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने वाला गौरवशाली क्षण होगा। हम सब प्रदेशवासी मिलकर प्रधानमंत्री मोदी के आत्मीय एवं भव्य स्वागत के लिए तैयारी करें। यह दौरा प्रदेश के विकास के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की देश के पहले पीएम मित्रा पार्क के भूमिपूजन अवसर पर मध्यप्रदेश में उपस्थिति हम सबके प्रेरणा भी और आनंद का अवसर भी है, उनकी उपस्थिति में हमें उत्साह देती है। उनके मार्गदर्शन में हमारी सरकार पीएम मित्रा पार्क को देश का मॉडल पार्क बनाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को मंत्रालय में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के 17 सितंबर को ग्राम भैसोला, बदनावर जिला धार में आगमन सहित वहां आयोजित अन्य कार्यक्रमों की तैयारियों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री स्वस्थ नगरी, सशक्त परिवार अभियान का करेंगे शुभारंभ बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी 17 सितम्बर को 'स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार' अभियान का शुभारंभ 'सुमन सखी' चैटबॉट को लांच करेंगे। पीएम मित्रा पार्क का शिलान्यास करेंगे। जनजातीय स्व-सहायता समूहों से स्वदेशी उत्पादों की खरीद और यूपीआई से भुगतान, सेवा पर्व एवं आदि कर्मयोगी अभियान का शुभारंभ करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी "एक बगिया मां के नाम" अभियान के तहत महिला लाभार्थियों को पौधों का वितरण, एक करोड़ सिकल सेल कार्ड के वितरण सहित स्वदेशी पखवाड़े का शुभारंभ भी करेंगे। कार्यक्रम में लाड़ली बहनें, स्व-सहायता समूह के सदस्य, स्वास्थ्य एवं स्वावलंबन योजना के हितग्राही सहित टेक्सटाइल एवं गारमेंट क्षेत्र के प्रमुख उद्यमी, युवा उद्यमी, महिला उद्यमी एवं हितग्राही उपस्थित रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को कार्यक्रम की रूपरेखा की विस्तार से जानकारी देकर कहा कि सभी अधिकारी आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी तैयारियों को अंतिम रूप दें। आयोजन स्थल पर कैम्प करें और वहीं से आपसी समन्वय एवं सहयोग से व्यवस्थाओं को अंजाम दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदौर एवं उज्जैन संभाग के जिले आवश्यक तैयारी कर लें। महिला प्रतिभागियों को आयोजन स्थल तक पहुंचने में कोई कठिनाई न होने पाए। प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन राघवेन्द्र कुमार सिंह ने कार्यक्रम की समन्वित तैयारियों की सिलसिलेवार जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए 11 विभाग अपनी गतिविधियां प्रारंभ कर चुके हैं। कार्यक्रम स्थल का लेआउट सहित मीडिया प्लान भी तैयार कर लिया गया है। बैठक में कलेक्टर धार ने पीपीटी प्रेजेन्टेशन के जरिए अब तक की तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित कार्यक्रम स्थल ग्राम भैसोला तक पक्की एप्रोच रोड तैयार की जा रही है। चारों दिशाओं से प्रतिभागियों का आगमन होगा, इसलिए परिवहन व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा रहा है। बैठक में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव गृह शिव शेखर शुक्ला, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, सचिव एवं आयुक्त जनसम्पर्क डॉ. सुदाम खाड़े सहित संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव एवं सचिव उपस्थित थे।

आईटीआर फाइलिंग की घड़ी: फॉर्म में दिक्कतों के बीच अब मांग हुई जल्द समाधान की

नई दिल्ली  आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 15 सितंबर, 2025, अब केवल एक हफ्ते दूर है। इस बीच कई संगठनों ने वित्त मंत्रालय से आईटीआर रिटर्न दाखिल करने की तारीख बढ़ाने की अपील की है। कारण है देरी से फॉर्म जारी किया जाना और फिर इसके बाद रिटर्न फाइल होने होने में बार-बार आ रही परेशानी। 2 सितंबर, 2025 को भीलवाड़ा स्थित टैक्स बार एसोसिएशन ने भी केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड को पत्र लिखकर समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया। टैक्स बार एसोसिएशन में कर विशेषज्ञ, चार्टर्ड अकाउंटेंट, कंपनी सचिव, अधिवक्ता और सलाहकार शामिल हैं। संगठन ने अपने पत्र में बताया कि कैसे करदाता और पेशेवर इस वर्ष यूटीलिटीज के देरी से जारी होने, आईटीआर पोर्टल पर चल रही तकनीकी समस्याओं और अतिरिक्त अनुपालन चरणों के कारण रिटर्न दाखिल करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। टैक्स बार एसोसिएशन ने अनुरोध किया है कि आईटीआर दाखिल करने की समय सीमा बढ़ा दी जाए क्योंकि अब रिटर्न सही ढंग से तैयार करने और दाखिल करने के लिए कम समय बचा है। दूसरी ओर, तकनीकी दिक्कतों के कारण भी लोगों को परेशानी हो रही है।  आटीआर दाखिल करने में यूजर्स को किस-किस तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आइए जानते हैं, विस्तार से। 1. यूटिलिटी फॉर्म्स जारी होने में देरी चंडीगढ़ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स टैक्सेशन एसोसिएशन (सीसीएटीएक्स) और गुजरात चैंबर कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (जीसीसीआई) ने भी ऐसी ही चिंता जताई है और समय सीमा को आगे बढ़ाने की मांग की है। आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई, 2025 थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 15 सितंबर, 2025 कर दिया गया। चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का मानना है कि आम तौर पर करदाताओं के पास अपना रिटर्न तैयार करने और दाखिल करने के लिए लगभग 122 दिन (1 अप्रैल से 31 जुलाई) का समय होता है। लेकिन इस साल, यूटीलिटी फॉर्म्स काफी देर से जारी किए गए, इससे रिटर्न दाखिल करने के समय में कमी आ गई है। दूसरी ओर, आईटीआर दाखिल करने में भी यूजर्स और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को तकनीकी दिक्कतों के कारण परेशानी झेलनी पड़ रही है। इसे देखते हुए इसकी समयसीमा बढ़ाने की मांग जोर पकड़ रही है।  2. आयकर रिटर्न दाखिल करने में आ रही तकनीकी दिक्कत  बार एसोसिएशन ने आईटीआर पोर्टल पर आ रही तकनीकी समस्याओं की भी शिकायत की है। उनके अनुसार रिटर्न और ऑडिट रिपोर्ट अपलोड करते समय सिस्टम में बार-बार त्रुटियां आ रही हैं।  फॉर्म 26AS, AIS और TIS में देरी से अपडेट होने के कारण विसंगतियां दिख रही है, जिससे मिलान में अत्यधिक समय लगता है। फाइलिंग के व्यस्त समय के दौरान टाइमआउट होने के कारण भी लोगों को परेशानी हो रही है। चार्टर्ड अकाउंटेंट शुभम सिंघल के अनुसार, आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 54 (Section 54) करदाताओं को बड़ी राहत प्रदान करती है। इसके तहत यदि कोई व्यक्ति या हिन्दू अविभाजित परिवार (HUF) अपना आवासीय मकान बेचता है और उससे प्राप्त दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (Long Term Capital Gain) को नए आवासीय मकान में निवेश करता है, तो उसे कर से छूट मिल सकती है। यह छूट तभी मिलेगी जब पुराना मकान कम से कम 24 महीने तक स्वामित्व में रहा हो और नया मकान भारत में ही खरीदा या बनाया जाए। कुछ करदाताओं ने आईटीआर (ITR) भरते समय इसके तहत छूट क्लेम करने के दौरान त्रुटि की शिकायत की है। आम तौर पर यह समझा जाता है कि समस्या CGAS की डिटेल न भरने से आ रही है, जबकि सच यह है कि यह त्रुटि अधिकतर CGAS से जुड़ी नहीं होती। समस्या प्रायः फॉर्म के अंतिम टैब में आती है, जहां करदाता को पुनः यह बताना होता है कि उसने धारा 54 या धारा 54F के अंतर्गत कितनी छूट का दावा किया है। कई लोग केवल शेड्यूल CG (Capital Gains Schedule) में छूट की राशि भरते हैं, लेकिन अंतिम टैब में इसे दोबारा दर्ज करना भूल जाते हैं। परिणामस्वरूप सिस्टम एरर दिखता है। इसका समाधान भी उतना ही आसान है। करदाता को अंतिम टैब में जाकर वही छूट की राशि फिर से भरनी चाहिए, जो उसने शेड्यूल CG में दिखाई है। जैसे ही यह आंकड़ा दोबारा डाला जाता है, त्रुटि दूर हो जाती है और रिटर्न बिना किसी समस्या के सबमिट हो जाता है। 3. आईसीएआई के प्रारुप में बदलाव के कारण अधिक समय की जरूरत वित्त वर्ष 2024-25 से गैर-कॉर्पोरेट संस्थाओं के लिए संशोधित आईसीएआई प्रारूप भीलवाड़ा टैक्स बार एसोसिएशन ने लिखा है कि इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने बैलेंस शीट और लाभ-हानि खाते के लिए एक नया वर्टिकल फॉर्मेट अनिवार्य कर दिया है। तुलनात्मक आंकड़े, संबंधित पक्ष के लेन-देन, आकस्मिक देनदारियों आदि का विस्तृत खुलासा अब अनिवार्य है। इसमें आगे कहा गया है कि संस्थाओं और पेशेवरों को सही तरीके से अपनाने और मिलान के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है। ऐसे में आईटीआर दाखिल करने की तिथि बढ़ाने की जरूरत है। 4. त्योहारी सीजन से जुड़ी दिक्कतें आईटीआर दाखिल करने की समयसीमा के बीच ही देश में त्योहारी सीजन भी शुरू हो चुका है। गणेश चतुर्थी, नवरात्रि, दुर्गा पूजा, दशहरा और दिवाली सहित कई प्रमुख भारतीय त्योहारों भी आईटीआर दाखिल करने की समयसीमा के बच ही पड़े हैं या पड़ने वाले हैं। इस अवधि के दौरान छुट्टियों और यात्राओं के कारण कार्यालय और फर्म न्यूनतम कर्मचारियों के साथ काम करते हैं, और ग्राहक समन्वय और लेखा परीक्षक समीक्षा बैठकों में देरी होती है। इससे अनुपालन समय-सीमा और भी कम हो जाती है। इससे पेशेवरों पर भारी दबाव पड़ता है। इस लिए भी विभिन्न टैक्स बार एसोसिएशन और चार्टर्ड अकाउंटेंट आईटीआर की समय अवधिक बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, समय विस्तार पर अंतिम फैसला सरकार को ही लेना है। भीलवाड़ा टैक्स बार एसोसिएशन ने तथ्यों और कठिनाइयों देखते हुए आयकर विभाग से आईटीआर की समयसीमा बढ़ाने की अपील की है। आईटीआर रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख बढ़ाने की मांग तेज वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट हरिदास भट ने बताया कि पहले जुलाई से सितंबर तक रिटर्न दाखिल करने तक का समय मिलता था, लेकिन अब इसको घटाकर 15 सितंबर तक कर दिया गया है। जिसकी वजह से रिटर्न दाखिल करने का समय काफी कम हो गया है। वहीं इस साल, यूटीलिटी फॉर्म्स काफी … Read more

भूलकर भी न करें ये खरीदारी! पितृपक्ष में पितृ दोष का खतरा

पितृपक्ष के दिनों में कुछ नियमों का सख्ती से पालन करना होता है, अन्यथा इसके बुरे प्रभाव जीवन में देखने को मिलते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस दिनों किन कार्यों को करने से बचना चाहिेए। हिंदू धर्म में पितृपक्ष को विशेष महत्व दिया जाता है। हर साल पितृपक्ष भाद्रपद मास की शुक्ल पूर्णिमा से आरंभ होकर आश्विन अमावस्या पर समाप्त होते हैं। लगभग पंद्रह दिनों तक चलने वाले इस समय में लोग अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करते हैं। इस दौरान पितरों को याद करने से परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है और सुख-समृद्धि आती है। पितृपक्ष के दिनों में कुछ नियमों का सख्ती से पालन करना होता है, अन्यथा इसके बुरे प्रभाव जीवन में देखने को मिलते हैं। इन दिनों शुभ कार्य, धार्मिक अनुष्ठान या किसी चीज की खरीदारी करने की मनाही होती है। ऐसा करके आप पितरों को अप्रसन्न कर सकते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस दिनों किन कार्यों को करने से बचना चाहिेए।  पितृ दोष क्या है? ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब पूर्वजों की आत्माएं अप्रसन्न होतीं है, तो इससे वंशजों के जीवन में कष्ट और बाधाएं उत्पन्न होने लगती हैं। इस स्थिति को पितृ दोष कहा जाता है। मान्यता है कि पितृपक्ष में पूर्वज धरती पर आते हैं और अपने परिवार को आशीर्वाद देते हैं। इस दौरान अगर उन्हें उचित सम्मान और श्रद्धा न मिले, तो वे नाराज हो जाते हैं। इसलिए इस अवधि में किए गए कर्म अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। पितृपक्ष में क्या न करें पितृपक्ष में कुछ कार्य वर्जित बताए गए हैं जिन्हें इस अवधि में भूलकर भी नहीं करना चाहिए। पितृपक्ष में नए कपड़े, जूते या चप्पल खरीदना अशुभ माना जाता है। इस दौरान विवाह, सगाई या अन्य मांगलिक आयोजन करना वर्जित है। इस समय तामसिक भोजन जैसे मांस, मछली, अंडा, प्याज और लहसुन आदि के सेवन से भी बचें। इस समय सोना-चांदी खरीदना भी अशुभ माना जाता। जितना संभव हो धार्मिक कार्य करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें। दूसरों के प्रति अपमानजनक व्यवहार न रखें और बड़ों का सम्मान करें। पितरों को प्रसन्न करने के लिए करें मंत्र जाप पितृ पक्ष में मंत्रोच्चारण का विशेष महत्व है। इन मंत्रों का जाप करने से पितर प्रसन्न होते हैं। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥ ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय च धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात। ॐ पितृगणाय विद्महे जगत धारिणी धीमहि तन्नो पितृो प्रचोदयात्।

अनाधिकृत रूप से उपस्थिति दर्ज करने वाले अतिथि विद्वानों के प्रकरण शीघ्र किए जाएं निराकृत: मंत्री परमार

भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने सोमवार को मंत्रालय स्थित प्रतिकक्ष में, उच्च शिक्षा विभाग की बैठक लेकर विविध विभागीय गतिविधियों एवं कार्यों के क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की। उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने फॉलन आउट अतिथि विद्वानों को, जो मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित सहायक प्राध्यापकों की पदस्थापना से या स्थानांतरण से प्रभावित हुये है, ऐसे अतिथि विद्वानों के प्रकरणों में विचार करते हुये पृथक से विकल्प भरने का अंतिम अवसर प्रदान करने के निर्देश दिये। परमार ने सार्थक पोर्टल पर अनाधिकृत रूप से उपस्थिति दर्ज करने वाले अतिथि विद्वानों के प्रकरणों में विचार करते हुये, संबंधित द्वारा इस प्रकार की पुनरावृत्ति न होने की प्रतिबद्धता के साथ, शीघ्र निराकृत करने को कहा। मंत्री परमार ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभिन्न महाविद्यालयों में एकल संकाय से बहुसंकाय एवं स्नातक से स्नातकोत्तर किए जाने को लेकर भी विस्तृत चर्चा कर, आवश्यक निर्देश दिए। परमार ने विद्यार्थियों की उपस्थिति को लेकर, परफॉमेंस इंडेक्स तैयार करने की कार्ययोजना पर क्रियान्वयन करने को कहा। मंत्री परमार ने नकल पर नकेल कसने, परीक्षा पद्धति को पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली एवं विधि महाविद्यालय से जुड़े विषयों सहित अन्य बिंदुओं पर व्यापक चर्चा कर, आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन एवं आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।  

NDA का पलड़ा भारी! 427 से ज्यादा सांसदों का समर्थन, उपराष्ट्रपति चुनाव में PM मोदी ने किया मतदान की शुरुआत

नई दिल्ली देश के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद के लिए वैचारिक बनाम संख्यात्मक मुकाबले का मंच तैयार है. मंगलवार को कुल 782 सांसद (लोकसभा और राज्यसभा दोनों से) उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान करने जा रहे हैं. जीत सुनिश्चित करने के लिए, किसी भी उम्मीदवार को 391 वोटों के साधारण बहुमत की जरूरत होती है. वर्तमान राजनीतिक अंकगणित के मुताबिक, सत्तारूढ़ एनडीए को पहले से ही करीब 427 सांसदों का समर्थन हासिल है, जो स्पष्ट रूप से बहुमत के आंकड़े से ज्यादा है. उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग शुरू, पीएम मोदी ने डाला पहला वोट . कुछ दलों ने मतदान से बनाई दूरी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने भी एनडीए उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा की है, जिससे सत्तारूढ़ गठबंधन की संभावनाएं और मज़बूत हो गई हैं. इस बीच, सात सांसदों वाले बीजू जनता दल (बीजेडी) और चार सांसदों वाली भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) और अकाली दल ने मतदान प्रक्रिया से दूर रहने का फैसला किया है. विपक्षी गठबंधन, INDIA ब्लॉक के पास करीब 324 सांसदों का समर्थन है. ऐसे में संख्याबल के आधार पर एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन का अगला उपराष्ट्रपति बनना तय माना जा रहा है. उनके खिलाफ विपक्षी उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी वैचारिक लड़ाई लड़ने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं. दोनों पक्षों की तरफ से किस उम्मीदवार को कितना समर्थन हासिल है, आइए जानते हैं. एनडीए को 427 सांसदों का समर्थन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा): लोकसभा – 240 सांसद राज्यसभा – करीब 100 सांसद तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) लोकसभा – 16 सांसद राज्यसभा – 2 सांसद जनता दल (यूनाइटेड) जेडीयू लोकसभा – 12 सांसद राज्यसभा – 4 सांसद लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास): लोकसभा – 5 सांसद शिवसेना (शिंदे गुट) लोकसभा – 7 सांसद राज्यसभा – करीब 3 सांसद जन सेना पार्टी (जेएसपी) लोकसभा – 2 सांसद जनता दल (सेक्युलर) लोकसभा – 2 सांसद राज्यसभा – 4 सांसद राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) लोकसभा – 2 सांसद अपना दल, एजीपी, एजेएसयू, एचएएम (एस), अजीत पवार का एनसीपी गुट, सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम), यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी (यूपीपी) और चुनिंदा निर्दलीय जैसे अन्य छोटे सहयोगी दल भी एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने वाले हैं.  INDIA ब्लॉक के साथ 324 सांसद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) लोकसभा – 99 सांसद राज्यसभा – 27 सांसद समाजवादी पार्टी (सपा) लोकसभा – 37 सांसद राज्यसभा – 4 सांसद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) लोकसभा – 29 सांसद राज्यसभा – 13 सांसद द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) लोकसभा – 22 सांसद राज्यसभा – 10 सांसद शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) लोकसभा – 9 सांसद राज्यसभा – 2 सांसद एनसीपी (शरद पवार गुट) लोकसभा – 8 सांसद राज्यसभा – 2 सांसद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) लोकसभा – 4 सांसद राज्यसभा – 5 सांसद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) सीपीएम लोकसभा – 4 सांसद राज्यसभा – 4 सांसद जम्मू और कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (जेकेएनसी) लोकसभा – 2 सांसद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) लोकसभा – 2 सांसद राज्यसभा – 2 सांसद अन्य छोटे सहयोगी, जैसे वीसीके (2 सांसद), इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल – 3 सांसद), आरएसपी (1), और अन्य भी INDIA ब्लॉक के उम्मीदवार के पक्ष में वोट करेंगे. संभावित नतीजा एनडीए के पास पहले से ही बहुमत से कहीं ज़्यादा संख्याबल है और वाईएसआर कांग्रेस का भी समर्थन मिल रहा है, इसलिए सत्तारूढ़ गठबंधन अपने उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैयार दिख रहा है. दूसरी ओर, 300 से ज़्यादा सांसदों की मज़बूत संख्या के बावजूद, INDIA ब्लॉक चुनौती से काफ़ी पीछे है.