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डिनर पार्टी में मारपीट की नौबत: ट्रंप के सामने भिड़े वित्त मंत्री बेसेंट और वरिष्ठ अफसर

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की डिनर पार्टी में उनके दो टॉप इकोनॉमिक अधिकारी मारपीट की नौबत तक पहुंच गए. स्थिति यहां तक पहुंच गई कि एक अधिकारी ने दूसरे के सामने कहा कि 'तेरा मुंह तोड़ दूंगा… बाहर चल'. यह घटना वाशिंगटन डीसी में एक विशेष क्लब "एक्जीक्यूटिव ब्रांच" के उद्घाटन और एक पॉडकास्ट होस्ट चमथ पालिहपितिया के जन्मदिन समारोह के दौरान हुई. ट्रंप के जिन दो अफसरों के बीच मारपीट की नौबत आई वे हैं सेक्रेटरी ऑफ फाइनेंस यानी कि अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट और फेडरल हाउसिंग फाइनेंस एजेंसी के डायरेक्टर बिल पुल्टे के बीच.  सीएनएन के अनुसार एग्ज़ीक्यूटिव क्लब में एक रात्रिभोज के दौरान स्कॉट बेसेन्ट ने पुल्टे के मुंह पर मुक्का मारने की धमकी दी. सूत्रों के अनुसार बेसेंट  को पता चला कि बिल पुल्टे ट्रंप के सामने उनकी चुगली कर रहे हैं.  इसकी जानकारी मिलते ही स्कॉट बेसेन्ट आपे से बाहर हो गए और उन्होंने बिल पुल्टे के चेहरे पर मुक्का मारने की धमकी दी.  यह घटना 4 सितंबर 2025 को वाशिंगटन डीसी में एक निजी डिनर के दौरान हुई. इस डिनर में कई बड़े नाम मौजूद थे जैसे ट्रांसपोर्टेशन सेक्रेटरी सीन डफी, कॉमर्स सेक्रेटरी हावर्ड लुटनिक, इंटीरियर सेक्रेटरी डग बर्गम, और नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड. लगभग 30 मेहमानों के लिए एक लम्बी मेज सजाई गई थी जिस पर उच्च श्रेणी के क्रिस्टल और चीनी मिट्टी के बर्तन लगे थे.  लेकिन कॉकटेल पार्टी के शोरगुल के बीच बेसेंट ने पुल्टे पर गालियों से भरी तीखी टिप्पणी की. दरअसल खबर यह है कि स्कॉट बेसेन्ट ने कई लोगों से सुना था कि फेडरल हाउसिंग फाइनेंस एजेंसी के निदेशक ट्रंप के सामने उनकी बुराई कर रहे थे.  मौका मिलते ही बेसेंट ने पुल्टे से कहा, "तुम राष्ट्रपति से मेरे बारे में क्यों बात कर रहे हो? भाड़ में जाओ." "मैं तुम्हारे मुंह पर मुक्का मार दूंगा." अमेरिकी राजनीति पर गहरी नजर रखने वाली वेबसाइट पॉलटिको में इस झगड़े की विस्तार से रिपोर्ट छपी है.  बेसेंट की प्रतिक्रिया देख पुल्टे स्तब्ध लग रहा था. चश्मदीदों के अनुसार इस तनावपूर्ण मुठभेड़ के बाद क्लब के सह-मालिक और फाइनेंसर ओमीद मलिक को हस्तक्षेप करना पड़ा. लेकिन बेसेंट को यह मंजूर नहीं था. वह पुल्टे को पार्टी से ही बार निकलवाना चाहता था.  बेसेंट ने क्लब मलिक से कहा, "या तो वो यहां रहेगा या मैं. तुम मुझे बताओ कि यहां से कौन निकलेगा." "या फिर," उसने आगे कहा, "हम बाहर जा सकते हैं." "क्या करने?" पुल्टे ने पूछा. "बात करने?" "नहीं," बेसेंट ने जवाब दिया. "मैं तुम्हारी पिटाई कर दूंगा." स्थिति को शांत करने के लिए मलिक ने उन लोगों को अलग किया और बेसेंट को शांत करने के लिए क्लब के दूसरे हिस्से में ले गए. डिनर के दौरान बेसेंट और पुल्टे को मेज के विपरीत छोर पर बिठाया गया. इस घटना पर बेसेंट, पुल्टे, मलिक और व्हाइट हाउस ने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है.  ट्रंप को उम्मीद थी तीनों साथ मिलकर काम करेंगे ट्रंप ने मई में घोषणा की थी कि बेसेंट, वाणिज्य मंत्री ल्यूटनिक और पुल्टे मिलकर काम करेंगे. लेकिन ट्रंप प्रशासन के सूत्रों के अनुसार इन अफसरों के बीच एक तरह की ज़मीनी जंग छिड़ी हुई है. इस विवाद से परिचित कुछ लोगों का कहना है कि बेसेंट का मानना ​​है कि पुल्टे ने खुद को उन मामलों में शामिल कर लिया है जिसे वित्त मंत्री अपना अधिकार क्षेत्र मानते हैं. ट्रंप से कई सीट दूर बैठे बेसेंट यह पहली बार नहीं है जब बेसेंट का ट्रंप के किसी सलाहकार से झगड़ा हुआ हो. इस साल की शुरुआत में कई सूत्रों ने सीएनएन को बताया कि बेसेंट का एलॉन मस्क से तीखी बहस हुई थी.   बेसेंट रविवार को ट्रंप के साथ यूएस ओपन में शामिल हुए हालांकि उन्हें राष्ट्रपति से कुछ सीटें दूर बैठाया गया था. 

पितृपक्ष में खरीददारी से बचें, अगर करना जरूरी हो तो अपनाएं ये उपाय

पितृपक्ष (श्राद्ध पक्ष) का समय हमारे पितरों को याद करने, तर्पण और दान करने के लिए माना गया है। इस काल में नया सामान खरीदने या नया काम शुरू करने को सामान्यतः अशुभ माना जाता है। इसके पीछे धार्मिक और व्यवहारिक दोनों कारण हैं। पितृपक्ष में नहीं खरीदना चाहिए नया सामान: पितृपक्ष पितरों को समर्पित काल है। यह समय भोग-विलास या नए कार्यों का नहीं बल्कि पितरों के प्रति कृतज्ञता, तर्पण और दान का माना गया है। मान्यता है कि इस दौरान किए गए नए कार्य का फल पितरों को समर्पित हो जाता है। इस अवधि में वातावरण में श्राद्ध संस्कार, तर्पण और प्रेतात्माओं की स्मृति से जुड़ी ऊर्जा मानी जाती है। नया सामान खरीदना या नया कार्य शुरू करना स्थिरता और शुभ फल नहीं देता। लोक मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि पितृपक्ष में खरीदे गए वस्त्र, आभूषण, भूमि या गृह निर्माण कार्य का फल स्थायी नहीं होता, या कार्य में बाधा आती है। पितृपक्ष में अवश्य खरीदना पड़े सामान तो क्या करें: कभी-कभी आवश्यक परिस्थितियों में खरीदारी करनी पड़ जाए तो ये उपाय करने चाहिए- गंगाजल या पवित्र जल छिड़क कर वस्तु को शुद्ध करें। पितरों को समर्पण करें। वस्तु को पितरों को मानसिक रूप से अर्पित करें और उनसे आशीर्वाद लेकर उपयोग करें। गोदान या ब्राह्मण सेवा करें। नए सामान खरीदने पर एक छोटा-सा दान (अन्न, वस्त्र या दक्षिणा) ब्राह्मण या गरीब को देना चाहिए। पितृपक्ष में नए कार्य का शुभारंभ टालें सामान खरीदना यदि अनिवार्य हो तो कर सकते हैं लेकिन उसका प्रथम उपयोग या कार्यारंभ पितृपक्ष के बाद करना श्रेष्ठ माना जाता है। पितृपक्ष में हर कार्य पितरों की तृप्ति के लिए माना जाता है इसलिए इस समय भोग-विलास, उत्सव और नये आरंभ से जुड़े कार्य वर्जित कहे गए हैं। लेकिन दैनिक जीवन की आवश्यकताओं को देखते हुए कुछ वस्तुएं खरीदी जा सकती हैं। पितृपक्ष में न खरीदें ये सामान सुनार का सामान (सोना–चांदी, आभूषण, बहुमूल्य धातुएं) यह शुभ अवसरों के लिए होता है, जबकि पितृपक्ष शोक-श्राद्ध काल माना जाता है। नया मकान, भूमि या वाहन खरीदना इस अवधि में गृह प्रवेश, भूमि पूजन या वाहन क्रय को अशुभ माना जाता है। नए वस्त्र (शुभ अवसर हेतु) खासकर शादी, त्यौहार या मंगल कार्यों के लिए कपड़े खरीदना वर्जित है परंतु रोज़मर्रा के उपयोग हेतु सामान्य कपड़े खरीदे जा सकते हैं। शुभ मांगलिक कार्यों का सामान जैसे शादी का जोड़ा, मंगलसूत्र, सगाई की अंगूठी आदि। नया व्यापार आरंभ करने के उपकरण। यदि नया व्यापार शुरू करने के लिए सामान खरीदा जाए तो माना जाता है कि उसका फल पितरों को चला जाता है। पितृपक्ष में खरीदा जा सकता है ये सामान दैनिक उपयोग की वस्तुएं जैसे अनाज, सब्ज़ी, दालें, फल आदि। घर के लिए आवश्यक सामान जैसे तेल, नमक, मसाले। श्राद्ध व पूजा के लिए सामग्री जैसे कुश, तिल, घी, धूप, पिंडदान हेतु सामग्री, पत्तल, कपड़े (दान हेतु)। आवश्यक जीवनोपयोगी सामान जैसे दवा, बच्चों की ज़रूरत की चीज़ें, किताबें, स्टेशनरी। टूटा-फूटा बर्तन बदलने के लिए नए बर्तन (यदि बहुत ज़रूरी हो)। यदि किसी को कपड़े की तत्काल ज़रूरत है तो साधारण वस्त्र ले सकते हैं पर शुभ अवसर वाले कपड़े नहीं। पितृपक्ष में जरूरी खरीद करने पर करें ये उपाय खरीदे गए सामान पर गंगाजल छिड़कें। पितरों को मानसिक रूप से अर्पित कर दान करें (थोड़ा अन्न, वस्त्र या दक्षिणा)। सामान का प्रथम उपयोग पितृपक्ष के बाद करना श्रेष्ठ माना जाता है।

नेपाल राजनीति में हलचल: दो मंत्रियों के इस्तीफे से ओली सरकार पर संकट, सहयोगी पार्टी ने भी किया किनारा

काठमांडू  नेपाल में Gen-Z प्रदर्शनों के बाद राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है. गृह मंत्री के बाद मंगलवार को कृषि और पशुपालन विकास मंत्री रामनाथ अधिकारी ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने कहा कि सरकार का रवैया लोकतांत्रिक मूल्यों के बजाय सत्तावादी दिशा में जा रहा है. अपने इस्तीफे में नेपाली कांग्रेस के सांसद ने लिखा कि सरकार ने नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों को मान्यता देने के बजाय दमन, हिंसा और बल प्रयोग का रास्ता अपनाया है, और इसलिए वह इस्तीफा दे रहे हैं. नेपाल सरकार के मंत्री ने कहा कि यह तरीका लोकतंत्र की जगह सत्तावाद की ओर देश को ले जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि वह सत्ता में बने रहकर इस सवाल का जवाब नहीं दे सकते कि आखिर क्यों सरकार ने उस पीढ़ी के खिलाफ हिंसा का रास्ता चुना, जिसके साथ मिलकर राष्ट्र का निर्माण होना चाहिए. पहले गृहमंत्री रमेश लेखक ने दिया इस्तीफा रामनाथ अधिकारी का यह कदम सोमवार को गृहमंत्री रमेश लेखक के इस्तीफे के एक दिन बाद सामने आया है. रमेश लेखक ने सोमवार शाम प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को अपना इस्तीफा सौंप दिया था. यह इस्तीफा भी Gen-Z प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और मौतों के बाद आया. केपी ओली से इस्तीफा देने की मांग नेपाली कांग्रेस के महासचिव गगन थापा ने प्रधानमंत्री ओली से इस्तीफा देने की मांग की है. उन्होंने कहा, "निर्दोष युवाओं की मौत अनावश्यक रूप से हुई है. इसके लिए प्रधानमंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए और तुरंत पद छोड़ना चाहिए." नेपाली कांग्रेस की ओली सरकार से अलग होने की तैयारी  थापा ने आगे कहा कि नेपाली कांग्रेस इस स्थिति की केवल गवाह या सहभागी बनकर नहीं रह सकती. उन्होंने साफ किया कि वह इस मुद्दे को पार्टी की बैठक में भी मजबूती से उठाएंगे और पार्टी को सरकार से अलग होने पर जोर देंगे. गौरतलब है कि सोमवार को हुए प्रदर्शनों में कमोबेश 20 लोगों की मौत हुई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे. सरकार की तरफ से सुरक्षा बलों ने कड़ा रुख अपनाया, जिसे विपक्षी दलों और प्रदर्शनकारियों ने दमनकारी करार दिया. अब लगातार दो मंत्रियों के इस्तीफे और नेपाली कांग्रेस महासचिव की सख्त मांग ने प्रधानमंत्री ओली की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.

भोपाल में गणपति जुलूस पर हिंसा, जनता ने पुलिस थाने के बाहर किया प्रदर्शन

भोपाल  भोपाल में गणपति प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान अज्ञात लोगों ने पत्थर फेंके, जिससे माहौल बिगड़ गया. यह घटना नगर से डीआईजी बंगला की तरफ जा रहे जुलूस के दौरान हुई. पथराव से नाराज लोगों ने पत्थरबाजी करने वालों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर गौतम नगर थाने का घेराव कियाइस दौरान अचानक एक अज्ञात व्यक्ति ने जुलूस पर पत्थर फेंक (Stones thrown) दिया. पत्थरबाजी से अफरातफरी मच गई और लोगों में आक्रोश फैल गया. घटना से गुस्साए लोग सीधे गौतम नगर थाने पहुंच गए और वहां विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. बड़ी संख्या में लोग थाने के बाहर जमा होकर आरोपियों की पहचान और तत्काल गिरफ्तारी की मांग करने लगे. माहौल बिगड़ता देख थाने के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई. पत्थरबाजी के बाद विसर्जन जुलूस को रोक दिया गया. इसके बाद मौके पर मौजूद लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी. प्रतिमा विसर्जन का उत्सव तनाव में बदल गया और कई लोग थाने के बाहर डटे रहे. हिंदूवादी संगठनों की भूमिका घटना के बाद हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता भी सक्रिय हो गए. वे बड़ी संख्या में गौतम नगर थाने पहुंचे और पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाते हुए कहा कि दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी की जाए. उनका कहना था कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज होगा. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटना की गंभीरता से जांच की जा रही है. जुलूस पर पत्थर फेंकने वाले की पहचान की जा रही है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है. पुलिस ने आश्वासन दिया है कि दोषियों को जल्द पकड़ा जाएगा. पथराव के बाद गणेश झांकी के लोग और गुस्साए कार्यकर्ता डीआईजी बंगले चौराहे पर पहुंचकर जमकर नारेबाजी करने लगे. उन्होंने हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए धरना शुरू कर दिया था. इस दौरान सड़क पर  भारी जाम लगा रहा. घटना की जानकारी मिलते ही हिंदू उत्‍सव समिति सहित अन्‍य हिंदू संगठन के कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए और यहां तनाव की स्थिति बन गई. घटना की जानकारी मिलते ही कई थानों की पुलिस को इलाके में तैनात करना पड़ा. गौतम नगर थाने के सामने भी भारी भीड़ रही. लोगों की मांग थी कि आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए. रासुका की कार्रवाई हो, हमारी आस्था पर हमला  हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष पंडित चंद्रशेखर तिवारी ने बताया कि प्रशासन से पहले ही सुरक्षा बढ़ाने की मांग की गई थी, लेकिन पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए. उन्होंने कहा, “यह हमारी आस्था पर हमला है. आरोपियों को गिरफ्तार कर उन पर रासुका की कार्रवाई की जाए.” तिवारी ने दावा किया कि साहिल नाम का युवक इसमें शामिल है और उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. उन्‍होंने कहा कि जुलूस को लेकर हमने आरपीएफ की मांग की थी. पुलिस को पहले ही बताया था कि यह इलाका संवेदनशील है और यहां कड़ी सुरक्षा होनी चाहिए. पथराव करने वालों की पहचान कर गिरफ्तारी होगी धरने पर बैठे हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने साफ कहा कि जब तक आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. मौके पर पहुंचे डीआईजी रियाज इकबाल ने संगठन के पदाधिकारियों से मुलाकात कर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया. उन्होंने कहा कि पथराव करने वालों की पहचान कर गिरफ्तारी की जाएगी. इसके बाद पुलिस और प्रशासन की सुरक्षा में सभी झांकियों को विसर्जन स्थल तक भेजा गया. इलाके में तनाव, पुलिस ने चौकसी बढ़ाई  घटना के बाद से इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है. पुलिस ने हालात पर कड़ी नजर रखी है. सुरक्षा बढ़ाने के साथ ही अज्ञात हमलावरों की तलाश शुरू कर दी गई है. भोपाल में विसर्जन जुलूस के दौरान पथराव की इस घटना ने एक बार फिर धार्मिक आयोजनों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय संगठनों का कहना है कि प्रशासन को पहले से सुरक्षा इंतजाम मजबूत करने चाहिए थे, ताकि इस तरह की घटनाएं रोकी जा सकें. माहौल तनावपूर्ण, सुरक्षा कड़ी पत्थरबाजी की इस घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है. प्रशासन लगातार लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है ताकि कोई भी स्थिति बेकाबू न हो.

पर्यटन व संस्कृति विभाग की समीक्षा बैठक रायपुर में, मंत्री राजेश अग्रवाल ने दिए अहम निर्देश

रायपुर : पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने ली विभागीय समीक्षा बैठक पर्यटन व संस्कृति विभाग की समीक्षा बैठक रायपुर में, मंत्री राजेश अग्रवाल ने दिए अहम निर्देश रायपुर: मंत्री राजेश अग्रवाल ने विभागीय समीक्षा बैठक में परखा पर्यटन व संस्कृति योजनाओं का हाल विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु दिए आवश्यक दिशा-निर्देश रायपुर बस्तर और सरगुजा अंचल के युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए होटल मैनेजमेंट का निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने इन अंचलों के युवाओं के प्रशिक्षण में होने वाले व्यय की प्रतिपूर्ति बस्तर तथा सरगुजा विकास प्राधिकरण के माध्यम से किए जाने के लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।  पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने पर्यटन एवं संस्कृति विभाग की समीक्षा बैठक में छत्तीसगढ़ रजत जयंती समारोह की तैयारियों की समीक्षा कर पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने बैठक में रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना की जानकारी ली। उन्होंने बैठक में आगामी चक्रधर समारोह, बस्तर पंडुम, रामगढ़ महोत्सव को और बेहतर ढंग से आयोजित करने के संबंध में अधिकारियों से चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों को विभिन्न विधाओं के स्थानीय कलाकारों का प्रोत्साहन और मंच प्रदान करने तथा उनकी कलाओं को निखारने में आवश्यक सहयोग देने के निर्देश दिए। समीक्षा बैठक में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव रोहित यादव, संचालक संस्कृति विवेक आचार्य सहित पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

रायपुर : आत्मनिर्भरता की मिसाल बनी प्रधानमंत्री सूर्यघर मुक्त बिजली योजना

रायपुर : प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना से आत्मनिर्भरता की ओर ग्रामीण परिवार रायपुर : आत्मनिर्भरता की मिसाल बनी प्रधानमंत्री सूर्यघर मुक्त बिजली योजना रायपुर : प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से लोगों को हो रही है आर्थिक बचत, पर्यावरण संरक्षण को भी मिलेगा बढ़ावा प्रभुदयाल ने छत पर लगवाया 3 किलोवाट का सोलर संयंत्र रायपुर पीएम सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना आम नागरिकों के लिए एक प्रभावी एवं लाभकारी योजना साबित हो रही है। इस योजना के माध्यम से राज्य के नागरिको को न केवल सस्ती और सतत् बिजली मिल रही है, बल्कि लोग बिजली के मामले में आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रहे हैं। योजना का उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को प्रोत्साहित करते हुए घरों की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कराना है, जिससे उपभोक्ताओं को आर्थिक लाभ के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित हो रही है। सक्ति जिले के ग्राम दतौद निवासी श्री प्रभुदयाल चंद्रा ने अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का सोलर रूफटॉप पैनल स्थापित कराया गया है। योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा श्री चंद्रा को 78 हजार रुपये की अनुदान राशि सीधे उनके बैंक खाते में प्रदान की गई है। इस समन्वित सहयोग से नागरिकों पर वित्तीय भार में उल्लेखनीय कमी आई है तथा सौर ऊर्जा को अपनाने हेतु प्रोत्साहन मिला है। श्री चंद्रा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि सौर ऊर्जा के माध्यम से न केवल बिजली की बचत हो रही है, बल्कि यह योजना हर परिवार को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना रही है। आने वाले समय में प्रदेश के प्रत्येक घर की छत पर यह सौर पैनल दिखाई देगा, जिससे महंगे बिजली बिल की चिंता समाप्त हो जाएगी। शासन की इस पहल से प्रदेश में हर वर्ग के नागरिक को सस्ती, सुलभ और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध हो रही है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन कायम रखने में भी सहयोग मिल रहा है।      उल्लेखनीय है कि पीएम सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना के तहत प्रदेश में घरेलू उपभोक्ताओं को सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित करने हेतु तकनीकी मार्गदर्शन, विभागीय सहायता और वित्तीय अनुदान की व्यवस्था की गई है। इससे न केवल विद्युत खपत में कमी आई है, बल्कि उपभोक्ताओं की आय में अप्रत्यक्ष रूप से वृद्धि भी हो रही है। घर का बिजली बिल हुआ शून्य-दिलीप गोयल प्रधानमंत्री सूर्यघर मुक्त बिजली योजना आम जनता के लिए बिजली के मामले में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बनती जा रही है। इस योजना के तहत सरकार की सब्सिडी से आम लोग अब अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगाकर न सिर्फ मुफ्त बिजली प्राप्त कर रहे हैं, बल्कि अतिरिक्त बिजली उत्पादन कर आय का स्रोत भी बना रहे हैं। गौरेला निवासी गोयल ने योजना के लिए केंद्र और राज्य सरकार का आभार जताते हुए कहा कि यह पहल न केवल आर्थिक रूप से लाभकारी है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी अहम भूमिका निभा रही है। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वे भी इस योजना से जुड़कर बिजली के लिए आत्मनिर्भर बनें और हरित ऊर्जा को बढ़ावा दें।  गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के गौरेला नगर के अग्रसेन चौक निवासी दिलीप कुमार गोयल ने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुक्त बिजली योजना के तहत अपने घर की छत पर 5 किलोवाट की क्षमता का रूफटॉप सोलर पैनल स्थापित कराया है। गोयल बताते हैं कि पहले उनके घर में बिजली की खपत अधिक होने के कारण बिल भी ज्यादा आता था, लेकिन योजना की जानकारी मिलते ही उन्होंने इसका लाभ उठाने का निर्णय लिया। इस योजना के तहत उन्हें केंद्र सरकार से 78 हजार रूपये और राज्य सरकार से 30 हजार रूपए तक की सब्सिडी प्राप्त हुई। अब सोलर पैनल से हो रहे बिजली उत्पादन की बदौलत उनका बिजली बिल पूरी तरह शून्य हो चुका है। इतना ही नहीं, वे अब अतिरिक्त बिजली का उत्पादन कर उसे ग्रिड में भी भेज रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक लाभ भी मिल रहा है।  पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के फायदे  सोलर पैनल लगवाने पर केंद्र सरकार की ओर से सब्सिडी दी जाएगीए जो सीधे आपके खाते में आएगी। बिजली बिल शून्य या फिर बहुत ही कम हो जाएगा और बार.बार बिजली गुल होने की टेंशन से मुक्ति मिलेगी। एक बार सोलर पैनल लगा लिया तो समझिए करीब 20.25 साल तक लगभग मुफ्त बिजली का लाभ मिलेगा। स्वच्छ और ग्रीन ऊर्जा की वजह से आप धरती को भी प्रदूषण से बचाने में अपना योगदान दे पाएंगे। अगर सोलर पैनल से जरूरत से ज्यादा बिजली बनती है तो ग्रिड को बेचकर पैसा भी कमाया जा सकता है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाये एवं अधिक जानकारी के लिए पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना आनलाईने पोर्टल पर लॉग ऑन कर विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।            क्या है प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक भारतीय नागरिक होना आवश्यक है। उसके पास सौर पैनल लगाने के लिए उपयुक्त छत वाला घर होना चाहिए। परिवार के पास वैध बिजली कनेक्शन होना चाहिए। परिवार ने सौर पैनलों के लिए किसी अन्य सब्सिडी का लाभ नहीं उठाया हो। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत अपनी छत पर सोलर पैनल लगवाएं और बिजली बिल के झंझट से मुक्त हो जाएं। यही नहीं स्वच्छ ऊर्जा अपनाकर पर्यावरण का भी भला करेंगे।  प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का उद्देश्य देश के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के घरेलू उपभोक्ताओं को सौर ऊर्जा के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना है। योजना के अंतर्गत 300 यूनिट प्रति माह तक मुफ्त बिजली प्रदान की जाती है। इसके अलावा नेट मीटरिंग सिस्टम के माध्यम से उपभोक्ता अपनी खपत से अधिक बिजली ग्रिड को सप्लाई कर सकते हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त होती है। सरकार इस योजना में 30 हजार से लेकर 78 हजार रुपये तक की सब्सिडी प्रदान कर रही है। योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ता  www.pmsuryaghar.gov.in  पोर्टल या पीएम सूर्यघर मोबाइल ऐप के माध्यम से पंजीयन करा सकते हैं। सुभाष मिंज को बिजली बिल में हो रही है भारी बचत प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना आम परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। इस योजना … Read more

SC का बड़ा फैसला, आधार को मतदाता पहचान तक सीमित किया, नागरिकता के लिए मान्यता नहीं

नई दिल्ली/पटना बिहार मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि आधार, मतदाता सूची के लिए वैध पहचान पत्र है, लेकिन इसे नागरिकता का सबूत नहीं माना जा सकता। सोमवार को बिहार मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण मामले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वे आधार कार्ड को 12वां दस्तावेज मानें ताकि मतदाता वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने के लिए आधार कार्ड को भी पेश कर सकें। चुनाव आयोग पहले ही 11 दस्तावेजों की सूची जारी कर चुका है, जिन्हें दिखाकर मतदाता, वोटर लिस्ट में अपना नाम शामिल कर सकते हैं। पहले इन दस्तावेजों में आधार कार्ड शामिल नहीं था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड को बतौर 12वां दस्तावेज मानने का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग से अपने सभी अधिकारियों को निर्देश जारी करने को भी कहा है ताकि आधार कार्ड को स्वीकार किया जा सके। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि आधार कार्ड को नागरिकता का सबूत नहीं माना जा सकता। 'चुनाव आयोग को आधार कार्ड की वैधता जानने का अधिकार' चुनाव आयोग को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग को आधार कार्ड की वैधता जांचने का पूरा अधिकार होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 'केवल वास्तविक नागरिकों को ही वोट देने की अनुमति होगी, जाली दस्तावेजों के आधार पर असली होने का दावा करने वालों को मतदाता सूची से बाहर रखा जाए।' सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 'कोई भी नहीं चाहता कि चुनाव आयोग अवैध प्रवासियों को मतदाता सूची में शामिल करे।' सुप्रीम कोर्ट ने किया साफ- 'आधार कार्ड नागरिकता का सबूत नहीं' चुनाव आयोग की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने सबमिशन दिया कि आधार कार्ड को नागरिकता के सबूत के तौर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। इस पर जस्टिस बागची ने भी साफ किया कि पासपोर्ट और जन्म प्रमाण पत्र को छोड़कर, चुनाव आयोग द्वारा सूचीबद्ध किए गए 11 दस्तावेज भी नागरिकता के सबूत नहीं माने जाएंगे।    चुनाव आयोग ने इन दस्तावेजों को दी मान्यता: 1. केंद्र, राज्य सरकार एवं सार्वजनिक उपक्रमों में कार्यरत कर्मियों के पहचान पत्र, पेंशन भुगतान आदेश 2. एक जुलाई 1987 के पूर्व सरकारी, स्थानीय प्राधिकार, बैंक, पोस्टऑफिस, एलआईसी एवं पब्लिक सेक्टर उपक्रमों से जारी आईकार्ड, दस्तावेज 3. सक्षम प्राधिकार से जारी जन्म प्रमाणपत्र 4. पासपोर्ट 5. मान्यता प्राप्त बोर्ड, विश्वविद्यालय से जारी मैट्रिक व अन्य शैक्षिक प्रमाणपत्र 6. स्थायी आवासीय प्रमाणपत्र 7. वन अधिकार प्रमाणपत्र 8. सक्षम प्राधिकार द्वारा जारी ओबीसी/एससी/एसटी जाति प्रमाणपत्र 9. राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (जहां उपलब्ध हो) 10. राज्य/स्थानीय प्राधिकार द्वारा तैयार पारिवारिक रजिस्टर 11. सरकार का कोई भूमि/मकान आवंटन प्रमाणपत्र    राजद ने लगाए ये आरोप राजद और अन्य याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि आधार कार्ड दिखाने पर लोगों को मतदाता सूची में शामिल किया जाए। इन याचिकाओं पर जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने आदेश जारी किया। राजद की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दावा किया कि पूर्व में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद बूथ लेवल अधिकारी आधार कार्ड को स्वीकार नहीं कर रहे थे। सिब्बल ने कहा कि चुनाव आयोग ने अपने अधिकारियों को इस बारे में निर्देश जारी नहीं किए।

2 अक्टूबर तक मनाया जाएगा सेवा पर्व, CM डॉ. यादव ने कहा- जनता की सेवा ही सच्चा धर्म

नागरिकों की सेवा ही हमारा धर्म, 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक मनाया जाएगा सेवा पर्व : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी करेंगे सेवा पखवाड़ा अभियान का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की तैयारियों की समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में आगामी 17 सितम्बर से सेवा पर्व मनाया जाएगा। सेवा पर्व का समापन 2 अक्टूबर गांधी जयंती को होगा। इस दौरान प्रदेश में नागरिक सेवाओं और सुविधाओं की बेहतरी और इन्हें सहज रूप से नागरिकों तक पहुंचाने के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। सरकार जनहितकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को सेवा पर्व के रूप में मनाकर नागरिकों तक सेवाओं के सुगम प्रदाय की व्यवस्था करेगी। इस दौरान जिलों में भी सेवा गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। पर्व के दौरान सरकार सुशासन का लाभ जन-जन तक पहुंचाने के लिए शासकीय सेवाओं की रिस्पॉन्सिबल डिलेवरी सुनिश्चित करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस अभियान में जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधि, सामाजिक, राजनैतिक एवं धार्मिक संगठन सभी अपनी भागीदारी करेंगे। मुख्यमंत्री ने कलेक्टर्स से कहा कि वे आपसी तालमेल से सेवा पर्व का आयोजन करें और समाज के सभी वर्गों की बेहतरी के लिए जनसामान्य को भी इस अभियान से जोड़ें। उन्होंने कहा कि इस अभियान की थीम 'स्वच्छोत्सव' है। अभियान का केन्द्रीय विषय 'स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा' है, इसलिए पूरे अभियान के दौरान रक्तदान शिविर लगाने सहित स्वच्छता से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मंत्रालय में 17 सितम्बर से प्रदेश में शुरू होने वाले सेवा पखवाड़ा अभियान (सेवा पर्व) के संदर्भ में की जा रही तैयारियों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस अभियान में जनता से जुड़े 7 प्रमुख विभागों की महती जिम्मेदारी है। स्वच्छता ही सेवा पखवाड़े को जन-जन का अभियान बनाने के लिए सभी तैयारियां करें। उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण अभियान के दौरान वे स्वयं जिलों के भ्रमण में रहेंगे और हेलीकॉप्टर से किसी भी जिले में औचक रूप से उतरकर वहां हो रहे सेवा पर्व कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नागरिकों की सेवा ही हमारा मूल धर्म है। प्रदेश में सुशासन हमारा संकल्प है। इस दिशा में हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। 17 सितम्बर से हम अपने इस संकल्प को पर्व के रूप में मनाएंगे। सेवा पर्व को जन-जन का अभियान मनाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी नागरिकों को उनकी जरूरत के अनुसार सेवाओं और सुविधाओं का त्वरित प्रदाय ही सेवा पर्व का परम लक्ष्य है। दो अक्टूबर (गांधी जयंती) को इस पर्व का समापन समारोहपूर्वक किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा पर्व के दौरान 17 से 24 सितम्बर तक रक्तदान शिविर लगाए जाएंगे। इसी दौरान स्वास्थ्य शिविर भी लगेंगे। एक पेड़ मां के नाम एवं मां की बगिया के तहत पौधरोपण भी किया जाएगा। पर्व के दौरान नए नमो पार्क, नमो बाग, नमो वन, नमो उपवन बनाए जाएंगे। 27 सितम्बर को नमो मैराथन आयोजित की जाएगी। पर्व के दौरान विकास मेले एवं प्रदर्शनी के अलावा विद्यार्थियों की प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी। साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जीवन, व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। उन्होंने कहा‍कि सेवा पखवाड़ा आयोजन का उद्देश्य नागरिकों को सुशासन का लाभ दिलाना है। इस दौरान रोजगार आधारित कामों का प्रचार-प्रसार किया जाए और समाज के सभी वर्गों के लोगों के उत्कृष्ट प्रदर्शन को प्रोत्साहित भी किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्व के दौरान ही 22 सितम्बर को नवरात्रि पर्व और 02 अक्टूबर को विजयादशमी पर्व मनाया जाएगा। इसलिए इन पर्वों के दौरान भी सेवा पखवाड़ा अभियान में जनसहभागिता बढ़ाने पर विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित किया जाए। उन्होंने कहा कि पर्व के दौरान किसानों के हित में सरकार द्वारा की जा रही गतिविधियों के बारे में भी बताया जाए। किसानों को खाद वितरण, आपदा राहत वितरण की जानकारी दी जाए। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान का भी व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य गुलशन बामरा ने बताया कि भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशानुसार 17 सितम्बर से 02 अक्टूबर तक पूरे देश में आदि कर्मयोगी अभियान चलाया जायेगा। साथ ही आदि सेवा पर्व भी मनाया जाएगा। आदि सेवा पर्व के दौरान सभी जनजातीय बहुल गांव के लोग अपनी-अपनी ग्राम पंचायत में गांव के विकास के बारे में चर्चा-परिचर्चा करेंगे। गांव की विकास योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशानुसार जनजातीय बहुल ग्राम पंचायतों में आदि सेवा केन्द्र बनाए जाएंगे। इन सेवा केन्द्रों को जनसमस्या/जनशिकायत निवारण केन्द्र के रूप में विकसित किया जाएगा। दो अक्टूबर को ग्राम सभा की बैठक आयोजित कर विकास योजना का अनुमोदन किया जाएगा। बैठक में उपस्थित अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी संपूर्ण सेवा पखवाड़ा अभियान के दौरान उनके विभाग द्वारा की जाने वाली गतिविधियों एवं सेवा कार्यों की विस्तार से जानकारी दी। बैठक में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास संजय दुबे, अपर मुख्य सचिव वन अशोक वर्णवाल, अपर मुख्य सचिव ऊर्जा नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव गृह शिव शेखर शुक्ला, सचिव एवं आयुक्त जनसम्पर्क डॉ. सुदाम खाड़े सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

अज़ीम प्रेमजी छात्रवृत्ति 2025 के लिए आवेदन शुरू, इस बार 2.5 लाख छात्राओं को मिलेगा लाभ

वर्ष 2024-25 कुल 25000 छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की गई थी जिसमे मध्यप्रदेश की 18,000 से अधिक छात्राएं लाभान्वित हुई । छात्रवृत्ति के पहले वर्ष की धनराशी को इन छात्राओ के खातों में ट्रांसफर कर दिया गया है भोपाल  अज़ीम प्रेमजी छात्रवृत्ति पायलट के तौर पर शैक्षणिक वर्ष 2024-25 में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और झारखंड के कुछ चुनिन्दा जिलों में लॉन्च किया गया था । इस पायलट कार्यक्रम में 25,000 से अधिक छात्राओ को यह  छात्रवृत्ति दी गई है  मध्य प्रदेश में 18,000 से अधिक छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की गई जिसमे से भोपाल जिले की लगभग 295 छात्राएं लाभान्वित हुई | अज़ीम प्रेमजी छात्रवृत्ति का उद्देश्य स्कूली शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली छात्राओ को वित्तीय सहायता प्रदान करना है एवं यह सुनिश्चित करना है की धन की कमी से कोई  भी छात्रा अपनी पढ़ाई न छोड़े | अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन का अनुमान है कि वह शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में 2.5 लाख छात्राओ को अज़ीम प्रेमजी छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही होगी । यह कार्यक्रम इस साल से देश के 18 राज्यों में शुरू किया जा रहा है   इस वर्ष छात्रवृत्ति हेतु आवेदन 10 सितंबर से प्रारंभ हो रहे है | प्रथम चरण में आवेदन करने की अंतिम तिथि 30 सितम्बर है ।  अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन द्वारा संचालित अज़ीम प्रेमजी छात्रवृत्ति के बारे में मुख्य बातें: • पात्रता: o ऐसी छात्रायें जिन्होने सरकारी (पब्लिक) स्कूलों से कक्षा 10वी और 12वी की पढ़ाई की हो। o किसी प्रामाणिक उच्च शिक्षा संस्थान (HEI) में डिग्री या डिप्लोमा कार्यक्रम में प्रवेश लिया हो। ‘प्रामाणिक’ HEI की सूची में सभी सरकारी (पब्लिक) HEI और चुनिंदा निजी HEI भी शामिल होंगे। उपरोक्त पात्रता  रखने वाली कोई भी छात्रा  इस छात्रवृति  हेतु  ऑनलाइन आवेदन कर सकती है  आवेदन पूर्णतः निःशुल्क है   • छात्रवृत्ति: डिग्री या डिप्लोमा कार्यक्रम की अवधि के लिए प्रति वर्ष 30,000 रुपये, जब तक छात्रा सफलतापूर्वक कार्यक्रम में जारी रहती है । उदाहरण के लिए, 4 वर्षीय बीएससी नर्सिंग प्रोग्राम करने वाली छात्राओं को उन 4 वर्षों में 1,20,000( एक लाख बीस हजार) रुपये की छात्रवृत्ति सहायता मिलेगी । यह धनराशि हर साल दो किश्तों में छात्राओ के बैंक खाते में सीधे ट्रांसफर की जाएगी । वह अपनी जरूरत के हिसाब से इस धनराशि का उपयोग कर सकती है । । अठारह राज्यों की सूची इस प्रकार है: अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, राजस्थान, सिक्किम, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड । कार्यक्रम का विवरण और कार्यक्रम के डिजाइन या कवरेज में कोई भी बदलाव आवेदन प्रक्रिया की शुरुआत में अधिसूचित किया जाएगा । आने वाले वर्षों में ये संभावना है की छात्रवृत्ति कार्यक्रम में देश के सभी राज्यो को शामिल किया जाएगा  

MP के 16 स्टेट अफसर को मिला IAS का प्रतिष्ठित सम्मान, सरकार ने किया नोटिफिकेशन जारी

भोपाल  मध्य प्रदेश के 16 राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) अफसरों को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में प्रमोशन मिला है। केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने वर्ष 2023 और 2024 में खाली हुए IAS पदों के विरुद्ध यह अवार्ड जारी किया। वर्ष 2023 और 2024 के प्रत्येक आठ-आठ अफसरों को इस अवसर पर राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। मध्य प्रदेश में राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) के 16 अफसरों को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में प्रमोशन दिया गया है। केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने वर्ष 2023 और 2024 में उपलब्ध IAS पदों के लिए यह निर्णय लिया है। इसका  नोटिफिकेशन सोमवार को जारी किया गया। वर्ष 2023 के आठ और 2024 के आठ अधिकारियों को आईएएस अवॉर्ड हुआ है। हालांकि इस आदेश के साथ ही यह भी शर्त जोड़ी गई है कि यह नियुक्तियां मध्य प्रदेश सरकार बनाम कमल नागर और अन्य संबंधित प्रकरणों में जबलपुर हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी।  वर्ष 2023 के IAS अवार्ड प्राप्त अधिकारियों में नारायण प्रसाद, नामदेव, डॉक्टर कैलाश बुंदेला,  नंदा भलावे कुशरे, अनिल कुमार डामोर, सविता झानिया,  सारिका भूरिया, कमल सोलंकी, जितेंद्र सिंह चौहान शामिल है। वहीं, वर्ष 2024 के IAS अवार्ड प्राप्त अधिकारियों में संतोष कुमार टिगोर, निशा डामर, राकेश कुशरे, शैली कनाश, रोहन सक्सेना, कविता बतुला, सपना अनुराग जैन औरआशीष कुमार पाठक है।