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देशभर में वोटर लिस्ट SIR की प्रक्रिया अक्टूबर से शुरू, बिहार मॉडल को बनाया उदाहरण

नई दिल्ली देशभर में अक्टूबर से मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) शुरू होने की संभावना है. निर्वाचन आयोग (ECI) की ओर से सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ हो रही बैठक में इस पर सहमति बनी है. सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयोग ने सभी राज्यों के CEO से कहा है कि 30 सितंबर तक कागज़ी कार्यवाही और जरूरी तैयारियां पूरी कर ली जाएं. अधिकांश राज्यों ने भरोसा जताया है कि वे सितंबर के अंत तक पूरी तरह तैयार हो जाएंगे. जल्द हो सकता है ऐलान बिहार विधानसभा चुनाव खत्म होने से पहले ही देशव्यापी SIR की औपचारिक घोषणा की जा सकती है. हालांकि, अंतिम तारीखें तभी तय होंगी जब सभी राज्यों के सीईओ अपनी प्रगति रिपोर्ट आयोग को सौंप देंगे. चुनाव आयोग अपडेट करेगा मतदाता सूची निर्वाचन आयोग का मानना है कि SIR के ज़रिए न सिर्फ नई मतदाता सूची अपडेट होगी, बल्कि पारदर्शिता और चुनावी प्रक्रियाओं पर भरोसा भी और मज़बूत होगा. चुनाव आयोग के इस विशिष्ट आयोजन में राज्यों के सीईओ के समक्ष विभिन्न सत्रों में SIR की तैयारियों सहित साढ़े तीन घंटे से अधिक के प्रेजेंटेशन दिए गए. आयोग ने अलग अलग राज्यों के मुख्य निर्वाचन आधिकारियों को वहां होने वाले विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए मतदाताओं की तस्दीक के लिए जमा कराए जाने वाले सनदी प्रमाणपत्रों की सूची बनाने को भी कहा गया है. राज्यों के हिसाब से मांगे जाएंगे दस्तावेज ये सूची राज्य में स्थानीय स्तर पर मान्य सहज उपलब्ध दस्तावेजों पर आधारित होगी. अलग-अलग राज्यों में दस्तावेजों के नाम और प्रकार होंगे. जैसे आदिवासी बहुल राज्यों में, उत्तर पूर्वी समीवर्ती राज्यों में, समुद्र तटीय राज्यों में कई जगह पहचान और आवास के विशिष्ट प्रमाणपत्र भी होते हैं. कई जगह क्षेत्रीय स्वायत्त बोर्ड और निकाय भी ऐसे प्रमाण पत्र जारी करते हैं. चुनाव आयोग द्वारा 25 जून से शुरू हुई SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची को अपडेट करने का कार्य किया. इस प्रक्रिया के पहले चरण में एक अगस्त को मसौदा मतदाता सूची जारी की गई थी, जिसमें 7.24 करोड़ नाम दर्ज थे जो पहले की तुलना में 65 लाख कम थे. एक अगस्त से एक सितंबर तक दावों और आपत्तियों की अवधि के दौरान कुल 16 लाख 56 हजार 886 लोगों ने नए नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया. इसके अलावा 2 लाख 17 हजार 49 लोगों ने नाम हटाने और 36 हजार 475 लोगों ने मतदाता सूची में सुधार के लिए आवेदन जमा किए. बिना नोटिस के नहीं कटेगा किसी का नाम: EC बिहार में SIR प्रकिया चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया था कि जिन मतदाताओं को नोटिस जारी किया गया, उनका पक्ष सुने बिना उनकी मतदाता पात्रता पर ERO कोई अंतिम फैसला नहीं लेंगे. आयोग ने ये भी भरोसा दिलाया था कि किसी भी वैध मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया जाएगा और बिना नोटिस के किसी का नाम नहीं काटा जाएगा. बिहार में कैसे हुआ SIR SIR प्रक्रिया के तहत 24 जून से 25 जुलाई तक पहले चरण (गणना चरण) में बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने घर-घर जाकर मतदाताओं के विवरण सत्यापित किए गए. एक अगस्त को प्रकाशित मसौदा सूची के बाद एक सितंबर तक लोगों को दावे और आपत्तियां दर्ज करने का मौका दिया गया. फिलहाल 2 सितंबर से नए आवेदनों की प्रक्रिया चल रही है, जिसमें नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, सुधार करने और नाम हटाने के आवेदन शामिल होंगे.

विधानसभा में बड़ा बदलाव: अरविंद शर्मा नए प्रमुख सचिव, AP सिंह की ढाई साल बाद सेवानिवृत्ति

भोपाल  लोकसभा से प्रतिनियुक्ति पर मध्य प्रदेश विधानसभा आए सचिव अरविंद शर्मा का संविलियन मध्य प्रदेश विधानसभा में हो चुका है. अब उन्हें इस माह के अंत में मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव के पद पर प्रमोट किया जाएगा. 2 साल सेवा वृद्धि और 6 महीने का संविदा नियुक्ति पूरी करके विधानसभा के मौजूदा मुख्य सचिव एपी सिंह इसी माह रिटायर होने जा रहे हैं. मध्यप्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह इस महीने 30 सितंबर को रिटायर होने वाले हैं और अब उनके पुनर्नियुक्ति की संभावना नहीं है। इसे देखते हुए विधानसभा में सचिव की जिम्मेदारी निभा रहे अरविंद शर्मा को नया प्रमुख सचिव बनाए जाने की संभावना है। प्रमुख सचिव की नियुक्ति का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष को होता है। चूंकि अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ही अरविंद शर्मा को लोकसभा से प्रतिनियुक्ति पर लेकर आए थे, इसलिए उनका प्रमुख सचिव बनना लगभग तय माना जा रहा है। 1 अक्टूबर से मिल सकती है जिम्मेदारी वर्तमान प्रमुख सचिव एपी सिंह को मानसून सत्र के दौरान सदन में स्वयं विधानसभा अध्यक्ष ने विदाई दी थी और विधायकों से शुभकामनाएं दिलाई थीं। इससे यह संकेत स्पष्ट हो गया था कि एपी सिंह का कार्यकाल आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। ऐसे में यह माना जा रहा है कि एपी सिंह का कार्यकाल अब नहीं बढ़ेगा और नया प्रमुख सचिव नियुक्त किया जाएगा। अरविंद शर्मा की दावेदारी सबसे मजबूत विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने विधानसभा चुनाव के बाद अध्यक्ष बनने के बाद अरविंद शर्मा को लोकसभा से प्रतिनियुक्ति पर लाकर विधानसभा सचिव बनाया था। एक साल की प्रतिनियुक्ति के बाद उनका संविलियन विधानसभा में हो गया। वर्तमान में वे 60 साल की उम्र पार कर चुके हैं और विधानसभा नियमों के अनुसार वे 62 साल की उम्र तक सेवा में रह सकते हैं। इस हिसाब से यदि उन्हें प्रमुख सचिव बनाया जाता है, तो वे अगले दो सालों तक इस पद पर कार्यरत रह सकते हैं। चूंकि स्पीकर की पसंद वे स्वयं हैं, इसलिए उनकी नियुक्ति लगभग तय मानी जा रही है। दूसरी बार सेवा हुई वृद्धि विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह ढाई साल पहले सेवानिवृत्ति हो रहे थे. उन्हें साल 2023-24 के लिए एक साल की सेवा वृद्धि दी गई. इसके बाद 2024-25 में दूसरी बार 1 साल की सेवा वृद्धि दी गई. यह कार्यकाल 5 महीने पहले समाप्त हो गया था. इसके बाद 6 महीने की संविधान नियुक्ति प्रमुख सचिव के पद पर दी गई थी. यह अवधि इसी महीने 30 सितंबर को खत्म हो रही है. मध्य प्रदेश विधानसभा में हुआ संविलियन विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने मध्य प्रदेश में विधानसभा के कामों के लिए अरविंद शर्मा को सचिव बनाकर प्रतिनियुक्ति पर मध्य प्रदेश लेकर आए थे. अब उनका संविलियन मध्य प्रदेश विधानसभा में कर दिया गया है. मध्य प्रदेश विधानसभा के मौजूदा प्रमुख सचिव एपी सिंह का इसी महीने 30 सितंबर को कार्यकाल समाप्त हो रहा है. इसके बाद अरविंद शर्मा विधानसभा के प्रमुख सचिव बन जाएंगे. प्यासी का सबसे ज्यादा लंबा रहा कार्यकाल मध्य प्रदेश विधानसभा के पांचवें प्रमुख सचिव के तौर पर अरविंद शर्मा जिम्मेदारी संभालने वाले हैं. इससे पहले अवधेश प्रताप सिंह, भगवान देव इसरानी, राजकुमार पांडे और ए के प्यासी मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव रह चुके हैं. सभी विधानसभा प्रमुख सचिव में सबसे लंबा डॉक्टर एके पयासी का कार्यकाल रहा है साल 2002 से लेकर 2011 तक विधानसभा प्रमुख सचिव की जिम्मेदारी में रहे थे. हालांकि की 9 से 10 साल तक अवधेश प्रताप सिंह भी प्रमुख सचिव विधानसभा की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. एपी सिंह को सेवा विस्तार की उम्मीद नहीं एपी सिंह पहले ही 62 साल की उम्र में रिटायर हो चुके हैं, फिर उन्हें दो साल का विस्तार और फिर 6 महीने की संविदा सेवा दी गई थी, जो 30 सितंबर को समाप्त हो रही है। अब वे 64 साल से ज्यादा के हो चुके हैं और स्पीकर द्वारा उन्हें औपचारिक विदाई दी जा चुकी है, इसलिए सेवा बढ़ाने की संभावना नहीं बची है। हालांकि सिंह ने प्रमुख सचिव के रूप में विधानसभा में लंबा कार्यकाल पूरा किया है। डीजे को पीएस बनाने का स्पीकर को है पावर विधानसभा अधिनियम के तहत स्पीकर के पास यह भी अधिकार है कि वे जिला न्यायाधीश (डीजे) स्तर के अधिकारी को भी प्रमुख सचिव नियुक्त कर सकते हैं। लेकिन सूत्रों के अनुसार फिलहाल इसकी संभावना कम है, क्योंकि अरविंद शर्मा ही स्पीकर की प्राथमिकता में हैं। विधानसभा सचिव पद की स्थिति विधानसभा में सचिव के दो पद होते हैं। फिलहाल एक पद पर अरविंद शर्मा कार्यरत हैं जबकि दूसरा पद रिक्त है। चूंकि प्रमोशन में आरक्षण का मामला कोर्ट में लंबित है, इसलिए अगर शर्मा को प्रमुख सचिव बनाया जाता है, तो सचिव के दोनों पद कुछ समय के लिए रिक्त रखे जा सकते हैं और जिम्मेदारियां प्रभार से संचालित की जा सकती हैं। विधानसभा में अपर सचिव के चार पद हैं, जिनमें से तीन भरे हुए हैं जबकि एक पद रिक्त है।  

बिहार की सियासत में नई चाल: अरुण भारती को मिलेगा टिकट, बहनोई बनेंगे डिप्टी सीएम चेहरा?

पटना ‘बिहार बुला रहा है’ से शुरू होकर ‘उप-मुख्यमंत्री लोक जनशक्ति पार्टी- रामविलास (एलजेपी-आर) से कोई और होगा’ तक पहुंचे केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के सांसद बहनोई अरुण भारती जमुई जिले की सिकंदरा सीट से विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं। सरकार बनने पर डिप्टी सीएम पद के लिए लोजपा कोटा से अरुण का नाम चिराग बढ़ा सकते हैं। अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित सिकंदरा जमुई लोकसभा का हिस्सा है, जहां से अरुण 2024 में पहली बार एमपी बने हैं। चिराग से उलझते रहने वाले केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी की हिन्दुस्तान आवामी मोर्चा (हम) के प्रफुल्ल मांझी अभी सिकंदरा के विधायक हैं। तीन बार बीपीएससी मेंस और एक बार यूपीएससी पीटी पास कर चुके प्रफुल्ल मांझी साधारण परिवार से आते हैं। सूत्रों का कहना है कि चिराग की पार्टी की डिमांड लिस्ट में सिकंदरा के साथ ही जमुई लोकसभा की चकाई सीट भी शामिल है। चकाई से दिवंगत समाजवादी नेता नरेंद्र सिंह के बेटे सुमित सिंह निर्दलीय विधायक और नीतीश कुमार की सरकार में मंत्री हैं। सुमित ने नीतीश को समर्थन दिया है और एनडीए के अंदर जेडीयू के करीब हैं। कभी लोजपा से जुड़े रहे सुमित 2010 में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के टिकट पर चकाई से पहली बार विधायक बने थे। 2015 में निर्दलीय लड़कर वो राजद से हारे थे, लेकिन 2020 में सबको हरा दिया। लोजपा चौथे नंबर पर रही थी। चिराग ने 2 महीने पहले साफ-साफ कह दिया था कि 2025 में एनडीए सरकार बनी तो नीतीश कुमार ही सीएम बनेंगे। डिप्टी सीएम पद पर दावेदारी में चिराग ने कहा था कि लोजपा-आर का कोई अनुभवी कार्यकर्ता इस पद को सुशोभित करे। चिराग के शुरुआती तेवरों से भ्रम हुआ था कि बिहार बुला रहा है बोलकर वो सीएम बनने की रेस में हैं। अब साफ है कि चिराग को सीएम पद से कम मंजूर नहीं है। चिराग ने कुछ दिन पहले एक इंटरव्यू में कहा है कि इस बार एनडीए सरकार में लोजपा-आर की अहम भूमिका होगी। सूत्रों के मुताबिक एनडीए में सीट बंटवारे की मुख्य बातचीत भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के बीच चल रही है। चिराग पासवान, जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टियां सीटों की संख्या और कौन-कौन सी सीट जैसी बातें भाजपा से कर रही हैं। वैसे, सीट बंटवारे से पहले ही नीतीश कुमार सभाओं में जेडीयू उम्मीदवार के नाम घोषित करने लगे हैं। नीतीश ने बक्सर में राजपुर सीट से संतोष निराला को कैंडिडेट बता दिया है।  

जिंदा छूटे हमास के नेता, इजरायल का नया सख्त संदेश

इजरायल  अगर बच गए होंगे तो अगली बार निशाना बनाया जाएगा… ये शब्द अमेरिका में इजरायल के राजदूत येचिएल लीटर के हैं। उन्होंने मंगलवार देर रात फॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा कि कतर पर हवाई हमले में अगर हमास के नेता नहीं मरे, तो अगली बार हम सफल होंगे। उन्होंने आगे कहा कि इस हमले की आलोचना होगी, लेकिन हम इससे उबर जाएंगे। बता दें कि इजरायल ने गाजा में संघर्ष विराम के अमेरिकी प्रस्ताव के बीच मंगलवार को कतर में हमास नेतृत्व को निशाना बनाकर हमला किया। इसके बाद हमास ने बयान जारी कर कहा कि इजरायली हमले में उसके शीर्ष नेता बच गए, लेकिन निचले स्तर के पांच सदस्य मारे गए। हमास ने क्या कहा? हमास ने अपने बयान में कहा कि उसके शीर्ष नेता हमले में बच गए, लेकिन पांच निचले स्तर के सदस्य मारे गए, जिनमें गाजा के लिए हमास के नेता और प्रमुख वार्ताकार खलील अल-हय्या का बेटा भी शामिल है। कतर के गृह मंत्रालय ने बताया कि हमले में कतर के आंतरिक सुरक्षा बल का एक सदस्य मारा गया और कई अन्य घायल हुए। हमास के बयान के बाद इजरायली राजदूत ने कहा कि जो बच गए, वे अगली बार मारे जाएंगे। वाइट हाउस का बयान इस बीच वाइट हाउस ने कहा कि इजरायल ने कतर में हमला करने से पहले अमेरिका को सूचित कर दिया था। अमेरिका ने कतर को भी इसकी जानकारी दी थी। वाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने पत्रकारों से कहा कि पश्चिम एशिया के लिए अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ ने कतर को हमले के बारे में आगाह किया था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसे 'दुर्भाग्यपूर्ण घटना' मानते हैं, जो क्षेत्र में शांति को बढ़ावा नहीं देगी। लेविट ने बताया कि ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात कर अपनी चिंताएं और विचार स्पष्ट रूप से व्यक्त किए हैं। 7 अक्टूबर 2023 से जारी है संघर्ष गौरतलब है कि 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हुए हमले के बाद शुरू हुए युद्ध में हमास को कई बड़े झटके लगे हैं, फिर भी यह संगठन गाजा में मौजूद है। लंबे समय से रुकी हुई युद्धविराम वार्ता का भविष्य अब और अनिश्चित हो गया है, क्योंकि इजरायल गाजा शहर पर कब्जे के लिए बड़े हमले की तैयारी कर रहा है। इस हमले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी निंदा हुई है और इजरायल के भीतर भी उन लोगों ने विरोध किया है, जो शेष बंधकों की जान को खतरे में देख रहे हैं।  

रेलवे का नया कदम: स्टेशनों पर खुलेंगे प्रीमियम ब्रांड स्टोर, कपड़े-जूते से लेकर शिल्पकला तक सब मिलेगा

रायपुर मंडल के रेलवे स्टेशनों में भी अब एयरपोर्ट की तर्ज पर ब्रांडेड कंपनियों की दुकानें खुलेंगी, जहां अच्छी क्वालिटी के कपड़े, जूते, छत्तीसगढ़ के हर्बल उत्पाद, शिल्पकला समेत चीजें स्टेशनों की दुकानों में मिलेंगी. इसके आवदेन मंगाने शुरू कर दिए हैं. मंडल में आउटलेट्स रायपुर, दुर्ग, भाटापारा व भिलाई पावर हाउस रेलवे स्टेशनों पर गैर-किराया राजस्व नीति के अंतर्गत स्थापित किए जाएंगे. रायपुर में बड़ी कंपनियों के स्थापित होने से यात्रियों के लिए स्टेशन में सुविधाएं बढ़ जाएंगी. इसके साथ दुर्ग और भिलाई पावर हाउस में यात्रियों की आवाजाही अधिक होती है. इसीलिए यहां भी कपड़ों और जूतों की दुकान खुलने से आर्थिक लाभ होने की उम्मीद है. रेलवे ने साफ किया है कि इन आउटलेट्स में खाने-पीने का सामान नहीं बेचा जाएगा. सभी दुकानें बोली प्रक्रिया के जरिए तय की जाएंगी. शुरुआत में दुकानों का करार 5 साल के लिए होगा, जिसे अच्छे प्रदर्शन पर 9 साल तक बढ़ाया जा सकता है. इसमें केवल प्रीमियम दुकानों को मौका मिलेगा. स्टेशनों में स्थापित किए जाएंगे रायपुर रेल मंडल के सीनियर DCM अवधेश कुमार त्रिवेदी ने बताया कि रायपुर मंडल के रेलवे स्टेशनों पर प्रतिष्ठित सिंगल ब्रांड रिटेलर्स कंपनियों से प्रीमियम सिंगल ब्रांड आउटलेट्स गैर-खाद्य श्रेणियां स्थापित करने आवेदन आमंत्रित किया गया है. यह आउटलेट्स रायपुर, दुर्ग, भाटापारा एवं भिलाई पावर हाउस रेलवे स्टेशनों पर गैर-किराया राजस्व नीति के अंतर्गत स्थापित किए जाएंगे, जिसमें यात्रा सहायक सामग्री, परिधान और फैशन से संबंधित सामग्री, जूते एवं खेल परिधान और छत्तीसगढ़ के स्थानीय प्रीमियम ब्रांड को प्राथमिकता दी जाएगी. छत्तीसगढ़ के फैशन से जुड़ी स्थानीय प्रीमियम ब्रांड को भी प्राथमिकता इन आउटलेट्स में यात्रियों को यात्रा सहायक सामग्री जैसे सैमसोनाइट, वीआईपी, सफारी, अमेरिकन टूरिस्टर, परिधान एवं फैशन ब्रांड्स जैसे एरो, वैन ह्यूसन, बीबा, पीटर इंग्लैंड, फेबइंडिया, जूते एवं खेल परिधान जैसे नाइकी, एडिडास, प्यूमा, रीबॉक उपलब्ध होंगे. साथ ही छत्तीसगढ़ के स्थानीय प्रीमियम ब्रांड्स जैसे हथकरघा, जनजातीय कला, हर्बल उत्पाद और शिल्पकला को भी विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा. रेलवे का कहना है कि इन दुकानों से यात्रियों को बेहतर विकल्प मिलेंगे और छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कला और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान भी मिलेगी. दुकान खोलने मिलेगी जगह रेलवे चाहता है कि स्टेशन पर सिर्फ बड़े, भरोसेमंद और पहले से स्थापित ब्रांड ही दुकान खोले. अगर किसी ब्रांड के पास एयरपोर्ट या मॉल पर दुकान चलाने का अनुभव है, तो उसे पहले मौका मिलेगा. रायपुर, दुर्ग, भाटापारा और भिलाई पावर हाउस रेलवे स्टेशनों पर जगह उपलब्ध कराई जाएगी. रायपुर रेलवे स्टेशन में अभी तक कपड़े, जूते और फैशन से जुड़ी चीजे नहीं मिलती हैं. एयरपोर्ट की तर्ज पर दुकानों के खुलने से सुविधाएं बढ़ेंगी और राजस्व भी बढ़ेगा. रेलवे स्टेशन में सभी वर्गों के यात्री सफर करते हैं. लोकल और बड़े ब्रांड की दुकानों से राजस्व लाभ भी होगा.

चौंकाने वाला फैसला: अकाली दल करेगा उपराष्ट्रपति चुनाव का बहिष्कार

पंजाब   शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) ने सोमवार शाम को कहा कि वह पंजाब में आई बाढ़ के मद्देनजर आज होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव का बहिष्कार करेगा. अकाली दल ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, जब भी और जहां भी कोई संकट आया है, पंजाब और पंजाबी हमेशा देश के साथ खड़े रहे हैं. लेकिन आज पंजाबियों को बाढ़ के कारण खुद एक बहुत ही गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है. राज्य का लगभग एक-तिहाई हिस्सा पानी में डूबा हुआ है और घर व फसलें पूरी तरह से नष्ट हो गई हैं. सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व वाली पार्टी ने बाढ़ का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि यह आप सरकार की लापरवाही और अक्षमता के कारण हुई एक मानव निर्मित त्रासदी है. बता दें कि पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल बठिंडा से पार्टी की एकमात्र सांसद हैं. राज्य और केंद्र सरकार ने नहीं की मदद पोस्ट में कहा गया, न तो राज्य सरकार और न ही केंद्र सरकार पंजाबियों की किसी भी तरह से मदद के लिए आगे आयी है. शिरोमणि अकाली दल पंजाब की जनता की भावनाओं और आवाज का प्रतिनिधित्व करता है. इसलिए, पार्टी ने उपराष्ट्रपति चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला किया है. पंजाबी हमेशा देश के साथ खड़े अकाली दल ने कहा कि पंजाब और पंजाबी हमेशा राष्ट्र के साथ खड़े रहे हैं, जब भी और जहां भी कोई संकट आया है. लेकिन आज पंजाबियों को बाढ़ के कारण खुद एक बहुत ही गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है. राज्य का लगभग एक-तिहाई हिस्सा पानी में डूबा हुआ है और घर और फसलें पूरी तरह से नष्ट हो गई हैं. यह पंजाब सरकार की लापरवाही और अक्षमता के कारण हुई एक मानव निर्मित त्रासदी है. किसी भी मदद के बिना लड़ रहे लोग इस आपदा में न तो राज्य सरकार और न ही केंद्र सरकार पंजाबियों की किसी भी तरह से मदद के लिए आगे आई है. इस संकट से आम तौर पर पंजाबी और खासकर सिख राज्य या केंद्र सरकार की किसी भी मदद के बिना लड़ रहे हैं. राज्य के ग्रामीण युवा गुरु साहिबान की कृपा और प्रेरणा से प्रेरित होकर, धार्मिक समर्पण की भावना से बाढ़ के खिलाफ इस लड़ाई में सबसे आगे हैं. शिरोमणि अकाली दल उनकी भावना और प्रतिबद्धता के आगे नतमस्तक है. साथ ही अपने लोगों की मदद के लिए पूरी तरह से तत्पर भी है. उपराष्ट्रपति चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला अकाली दल ने कहा कि, जब पंजाब इस त्रासदी से जूझ रहा है, देश आज उपराष्ट्रपति चुनाव में जा रहा है. लेकिन पंजाब के लोग राज्य सरकार और केंद्र सरकार से बेहद परेशान और नाराज़ हैं क्योंकि न तो पंजाब सरकार, न ही केंद्र सरकार और न ही कांग्रेस उनकी मदद के लिए आगे आई है. अकाली दल पंजाब के लोगों की भावनाओं और आवाज का प्रतिनिधित्व करता है. इसलिए, पार्टी ने उपराष्ट्रपति चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला किया है.  

जब दलीप ट्रॉफी फाइनल में सितारे गायब, तो युवा खिलाड़ी दिखाएंगे दमखम

नई दिल्ली  रविचंद्रन स्मरण और दानिश मालेवार जैसे युवा खिलाड़ी गुरुवार से बेंगलुरु में दक्षिण क्षेत्र और मध्य क्षेत्र के बीच शुरू हो रहे दलीप ट्रॉफी फाइनल में अच्छा प्रदर्शन करके चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी तरफ खींचने की कोशिश करेंगे। दोनों टीमों के कुछ खिलाड़ी एशिया कप में भाग ले रहे हैं जबकि कुछ खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ होने वाले मैच के लिए भारत ए की टीम में शामिल हैं जिससे यह मुकाबला कुछ हद तक नीरस बन गया है। मध्य क्षेत्र के कप्तान रजत पाटीदार को छोड़कर कोई भी अन्य स्टार खिलाड़ी इस मैच में भाग नहीं ले रहा है। ऐसे में युवा खिलाड़ियों के पास अपनी चमक बिखरने का यह शानदार मौका है। इन खिलाड़ियों में कर्नाटक के स्मरण प्रमुख हैं जिन्होंने कर्नाटक के लिए सात प्रथम श्रेणी मैचों में 64.50 की औसत से 516 रन बनाए हैं, जिसमें दो शतक शामिल हैं। लिस्ट ए और टी-20 में भी उनका रिकॉर्ड प्रभावशाली है। उन्होंने 50 ओवर के प्रारूप के 10 मैचों में 72.16 की औसत से 433 रन और छह टी-20 मैचों में 170 की स्ट्राइक रेट से रन बनाए हैं । यह 22 वर्षीय खिलाड़ी बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस मैदान पर राष्ट्रीय चयनकर्ताओं के सामने निश्चित रूप से अच्छा प्रदर्शन करने के लिए बेताब होगा। मध्य क्षेत्र के मालेवार ने पहले ही दलीप ट्रॉफी में अपनी छाप छोड़ दी है। उन्होंने क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल में क्रमशः 203 और 76 रन बनाए। विदर्भ के इस 21 वर्षीय बल्लेबाज ने अब तक 11 प्रथम श्रेणी मैचों में 59 की औसत से तीन शतकों के साथ 1077 रन बनाए हैं। तमिलनाडु के 19 वर्षीय आंद्रे सिद्धार्थ के प्रदर्शन पर भी सभी की नजर रहेगी जिन्होंने अपने प्रथम श्रेणी करियर की शुरुआत 612 रन के सत्र (2024-25) से की थी, जिसमें उनका औसत 68 का था। दक्षिण और मध्य क्षेत्र दोनों का बल्लेबाजी विभाग मजबूत है। दोनों टीमों के पास कुछ कुशल गेंदबाज भी हैं जिनमें मध्य क्षेत्र के दीपक चाहर भी शामिल है जो राष्ट्रीय टीम ने वापसी करने के लिए अच्छा प्रदर्शन करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। मध्य क्षेत्र को गेंदबाजी विभाग में स्पिनर हर्ष दुबे, तेज गेंदबाज खलील अहमद और यश ठाकुर की कमी खलेगी, क्योंकि ये तीनों खिलाड़ी लखनऊ में भारत ए टीम में शामिल हो गए हैं। दक्षिण क्षेत्र भी देवदत्त पडिक्कल और नारायण जगदीशन जैसे बल्लेबाजों के बिना खेल रहा है। टीम इस प्रकार हैं: मध्य क्षेत्र: रजत पाटीदार (कप्तान), आयुष पांडे, दानिश मालेवार, शुभम शर्मा, संचित देसाई, यश राठौड़, नचिकेत भुटे, कुमार कार्तिकेय सिंह, आदित्य ठाकरे, उपेंद्र यादव (विकेटकीपर), अजय सिंह कुकना, अक्षय वाडकर (विकेटकीपर), दीपक चाहर, कुलदीप सेन, सारांश जैन। दक्षिण क्षेत्र: मोहम्मद अज़हरुद्दीन (कप्तान और विकेटकीपर), रिकी भुई (उप-कप्तान), रविचंद्रन स्मरण, काले एम, शेख रशीद, तन्मय अग्रवाल, सलमान निज़ार, आंद्रे सिद्दार्थ, तनय त्यागराजन, गुरजापनीत सिंह, एमडी निधिश, वासुकी कौशिक, अंकित शर्मा, टी विजय, बासिल एनपी। स्टैंडबाय: मोहित रेडकर, स्नेहल कौतनकर, ईडन एप्पल टॉम, अजय रोहेरा, जी अनिकेत रेड्डी। समय: मैच सुबह 9:30 बजे शुरू होगा।  

बिहार में विकास को रफ्तार: हाईवे चौड़ा होगा, नई रेल लाइन से बढ़ेगा कनेक्टिविटी

नई दिल्ली मोदी सरकार ने बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भागलपुर-दुमका-रामपुरहाट सिंगल रेलवे लाइन सेक्शन (177 किलोमीटर) के दोहरीकरण को मंजूरी दी है। इसकी कुल लागत 3,169 करोड़ रुपये है। इसके अलावा, बिहार के मोकामा-मुंगेर नेशनल हाईवे को चार लेन करने की परियोजना को भी मंजूरी दी गई है। तीन साल में दोनों प्रोजेक्ट्स पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। बुधवार को पीएम मोदी के नेतृत्व में हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया। कैबिनेट बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, "इसमें 3,169 करोड़ रुपये का निवेश होगा। यह बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाली एक बेहद महत्वपूर्ण परियोजना भी है। अगर हम इस परियोजना को मानचित्र पर देखें, तो यह बिहार से शुरू होकर रामपुरहाट में झारखंड और पश्चिम बंगाल को जोड़ती है। अभी चलने वाली ज्यादातर ट्रेनें भागलपुर से मालदा टाउन और रामपुरहाट होते हुए हावड़ा जाती हैं।'' उन्होंने आगे बताया कि इस दोहरीकरण के बाद, कई ट्रेनें भागलपुर से दुमका और वहां से सीधे रामपुरहाट जा सकेंगी। कई पैसेंजर ट्रेनें, मेल एक्सप्रेस ट्रेनें इससे होकर गुजर सकेंगी और यह देवघर तीर्थस्थल को भी जोड़ती है। एक तरह से, दक्षिण बिहार को कोलकाता से जिस कनेक्टिविटी की ज़रूरत है, वह इस परियोजना से पूरी हो जाती है।  

सई मांजरेकर का कहना: सिनेमा की कोई भाषा नहीं होती, भावनाएं होती हैं प्रमुख

मुंबई, अभिनेत्री सई मांजरेकर का कहना है कि उनके लिए सिनेमा सिर्फ भाषा की बात नहीं, बल्कि अच्छी कहानियों और प्रेरणादायक सहयोग का माध्यम है। सई मांजरेकर, जिन्होंने पहले ही बॉलीवुड और साउथ फिल्मों में अपनी पहचान बनाई है, अपनी प्राथमिकताओं को लेकर साफ हैं। उनके लिए सिनेमा सिर्फ भाषा की बात नहीं, बल्कि अच्छी कहानियों और प्रेरणादायक सहयोग का माध्यम है। सई ने कहा, “मेरा मानना है कि सिनेमा की कोई भाषा नहीं होती।असल मायने रखती है कहानी और उसका दर्शकों से जुड़ाव। अभी मैं बॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री पर ध्यान दे रही हूँ, लेकिन आगे चलकर मैं एक अच्छी मराठी फिल्म जरूर करना चाहूँगी। जब तक स्क्रिप्ट रोमांचक हो और डायरेक्टर का विज़न मज़बूत हो, मैं किसी भी इंडस्ट्री को एक्सप्लोर करने के लिए तैयार हूँ। सई मांजरेकर ने बॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री की तुलना करते हुए कहा,“दोनों जगह काम करने का मौका मिलने के बाद मुझे लगता है कि हर इंडस्ट्री की अपनी अलग पहचान और जादू है। बॉलीवुड में कहानियों को बड़े भावनात्मक अंदाज़ में दिखाया जाता है, जबकि साउथ में मैंने अनुशासन और कला के प्रति गहरा सम्मान देखा, जो मुझे बेहद पसंद आया। दोनों अनुभवों ने मुझे अलग-अलग तरह से गढ़ा है और मैं खुद को खुशनसीब मानती हूँ कि दोनों का हिस्सा हूँ। मेरे लिए यह सफर दोनों की अच्छाइयों को अपनाने और हर प्रोजेक्ट के साथ आगे बढ़ने का है।” सई मांजरेकर की सोच पर घर का भी असर रहा है। उनके पिता, मशहूर फिल्ममेकर और अभिनेता महेश मांजरेकर, आठ अलग-अलग भाषाओं में काम कर चुके हैं और उन्होंने सई को दिखाया कि अच्छी कहानियां सीमाओं को पार कर सकती हैं। उसी से प्रेरित होकर सई भी अपना एक ऐसा बहुभाषी सफर तय करना चाहती हैं जिसमें मुख्यधारा का आकर्षण भी हो और दिल को छूने वाली कहानियाँ भी।  

पंचबलि भोग के नियम: अगर कौवा न खाए तो क्या करें, पूरी जानकारी यहाँ

हिंदू धर्म में पितृपक्ष का समय बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है. इस दौरान अपने पितरों की आत्मा की शांति और उनके आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किए जाते हैं. शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि श्राद्ध का भोजन सबसे पहले कौवे को अर्पित करना चाहिए, क्योंकि कौवा पितरों का दूत माना गया है. लेकिन कई बार ऐसा होता है कि श्राद्ध वाले दिन घर के आंगन या छत पर कौवे दिखाई नहीं देते. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर कौवा न मिलें, या कौवे भोजन ग्रहण नहीं करें तो पितरों का भोजन किसे अर्पित किया जाए? कौवा भोग न लगाएं तो क्या करें? अगर श्राद्ध के दिन आप कौवे को भोजन ग्रहण न करा पाएं तो आप कौवे के हिस्से का भोजन गाय या कुत्ते या चींटी को खिला सकते हैं. गाय में सभी देवी-देवताओं का वास माना जाता है और कुत्ते को यम का प्रतीक माना गया है. इसलिए गाय या कुत्ते को भोजन कराने से पितरों तक आपका भोग पहुंच जाता है. इसके अलावा, आप कौवे के हिस्से का भोजन किसी जलकुंड, नदी, या तालाब में मछलियों को भी डाल सकते हैं. पंचबलि का महत्व और सही तरीका श्राद्ध में पंचबलि भोग का बहुत बड़ा महत्व है. क्योंकि पितरों का भोजन गाय, कुत्ते, कौवे, चींटी और देवताओं को खिलाया जाता है, इसे पंचबलि भोग कहते हैं. यह केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि पितरों के प्रति श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक है. ऐसी मान्यता है कि इन पांचों को भोजन कराने से पितरों को भोजन प्राप्त होता है और वे तृप्त होते हैं. लेकिन इन सभी में कौवे का स्थान सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. पंचबलि भोग निकालते समय इन बातों का ध्यान रखें? पंचबलि के लिए भोजन: पंचबलि के लिए सबसे पहले एक पत्ते पर भोजन रखें. यह भोजन वही होना चाहिए जो आपने श्राद्ध के लिए बनाया है. सही क्रम: पंचबलि हमेशा एक विशेष क्रम में निकाली जाती है. गौ बलि: सबसे पहले एक पत्ते पर भोजन रखकर गाय को खिलाएं. श्वान बलि: इसके बाद दूसरे पत्ते पर भोजन रखकर कुत्ते को खिलाएं. काक बलि: तीसरे पत्ते पर भोजन रखकर कौवे के लिए निकालें. अगर कौवा न मिले तो उसके हिस्से का भोजन गाय या कुत्ते को खिलाएं. देव बलि: चौथे पत्ते पर भोजन देवताओं के लिए रखें. इसे जल में प्रवाहित किया जाता है. पिपीलिका बलि: आखिरी में, पांचवें पत्ते पर भोजन चींटियों के लिए जमीन पर रखें. इन पांचों जीवों को भोजन कराने से न केवल पितरों का आशीर्वाद मिलता है, बल्कि आपके द्वारा किए गए तर्पण और श्राद्ध को भी पूर्णता मिलती है. यह माना जाता है कि इन जीवों के माध्यम से ही पितरों तक हमारा भोग और श्रद्धा पहुंचती है.