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रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी, मिजोरम से आनंदविहार तक चलेगी नई राजधानी एक्सप्रेस, भागलपुर को मिलेगा फायदा

भागलपुर भागलपुर जिले वासियों के लिए एक बड़ा तोहफा आने वाला है। मिजोरम की राजधानी आइजोल के पास स्थित एनएफआर रेलवे साइरांग से नई दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल तक एक नई राजधानी एक्सप्रेस का परिचालन शुरू होने जा रहा है। यह भागलपुर के लिए दूसरी राजधानी और तीसरी वीवीआईपी ट्रेन होगी। रेलवे सूत्रों के अनुसार, इस राजधानी एक्सप्रेस को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरी झंडी दिखाकर रवाना कर सकते हैं। यह ट्रेन भागलपुर और जमालपुर के यात्रियों को पूर्वोत्तर भारत और देश की राजधानी से सीधे जोड़ने में मदद करेगी। 13 सितंबर को ट्रायल पूर्व रेलवे, कोलकाता के सीपीआरओ दीप्तिमोय दत्ता ने बताया कि 13 सितंबर को साइरांग से आनंद विहार के लिए ट्रेन का ट्रायल किया जाएगा। नियमित परिचालन की तारीख की घोषणा शीघ्र की जाएगी। मार्ग और समय-सारिणी नई राजधानी एक्सप्रेस साइरांग से चलकर न्यू जलपाईगुड़ी, मालदा टाउन, साहिबगंज, भागलपुर, जमालपुर, किऊल, पटना, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और कानपुर सेंट्रल होते हुए आनंद विहार टर्मिनल पहुंचेगी।     ट्रेन संख्या 20507: साइरांग से हर शुक्रवार को शाम 4.30 बजे रवाना होगी और रविवार को सुबह 10.10 बजे आनंद विहार टर्मिनल पहुंचेगी।     ट्रेन संख्या 20508: आनंद विहार टर्मिनल से रविवार को शाम 7.50 बजे चलेगी और मंगलवार को दोपहर 3.15 बजे साइरांग पहुंचेगी। यह ट्रेन कुल 2,510 किलोमीटर की दूरी 42 घंटे 20 मिनट में तय करेगी। इससे यात्रियों का समय बचेगा और उन्हें सुविधाजनक एवं आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा। नई राजधानी एक्सप्रेस न सिर्फ भागलपुर और जमालपुर के यात्रियों के लिए लाभकारी होगी, बल्कि व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा देगी।

इंदौर और उज्जैन में जल्द शुरू होगी सस्ती सुगम परिवहन सेवा, मार्च से यात्रियों के लिए सुविधा

इंदौर  मध्य प्रदेश में सुगम परिवहन सेवा प्रारंभ करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने डेडलाइन तय कर दी है। अब हर हाल में मार्च के पहले बसों का संचालन प्रारंभ किया जाएगा। सबसे पहले इंदौर और इसके बाद उज्जैन से सेवा प्रारंभ की जाएगी। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को मंत्रालय में परिवहन विभाग के कामकाज की समीक्षा की। यहां अधिकारियों ने बताया कि अब यातायात नियम तोड़ने पर चालानी कार्रवाई का अधिकार प्रधान आरक्षक को भी दिया जाएगा। इस संबंध में शीघ्र ही अधिसूचना जारी होने वाली है। बता दें कि वर्ष 2006 में मप्र राज्य सड़क परिवहन निगम बंद होने के बाद से सार्वजनिक परिवहन की सुविधा नहीं है। परिवहन सचिव मनीष सिंह ने बताया कि उज्जैन जिले में सार्वजनिक बस संचालन का विस्तृत सर्वे पूरा कर लिया गया है। जबलपुर और इंदौर में रूट सर्वे और श्रेणीवार संचालित बसों की संख्या का अनुमान और सर्वे भी लगभग पूरा हो गया है। वाहनों की स्पीड पर नियंत्रण जरूरी मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अंतरविभागीय बैठक नियमित रूप से हो। सड़कों पर सुरक्षा से जुड़ी कमियां पाए जाने पर उन्हें तत्काल दूर किया जाए। बस स्टाप पर नागरिकों को साफ-सफाई के साथ आवश्यक सुविधाएं मिलें। परिवहन विभाग की राजस्व संग्रह निगरानी प्रणाली को और मजबूत करें। वाहनों की गति सीमा पर नियंत्रण बेहद जरूरी है। इसके साथ गाड़ी चलाने वाले व्यक्ति के पास आवश्यक कागजों की वैधता की जांच भी नियमित हो। परिवहन विभाग में बेहतर प्रबंधन के लिए अधिकारी-कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर भी जोर दिया। सुगम परिवहन सेवा में हो कम से कम किराया मुख्यमंत्री ने कहा कि सुगम परिवहन सेवा में यात्रियों की सुविधाओं और कम से कम किराये पर विशेष ध्यान दिया जाए। इसमें इलेक्ट्रिक बसों के उपयोग को प्रोत्साहित करें। परिवहन सेवा के लिए बने नियमों का सख्ती से पालन हो। बसों में शहरों एवं गांवों के नाम सामने के कांच पर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किए जाएं। इसके साथ ही बस स्टाप पर भी गांव और नगरों के नाम लिखे हों। यात्री बसों का बीमा अनिवार्य हो। सभी कार्य नियमों के अंतर्गत हों, पारदर्शिता रहे। दिव्यांग यात्रियों का विशेष ध्यान रखा जाए। बसें फिट हों, स्टाफ का व्यवहार अच्छा हो। अप-डाउनर्स को भी आवश्यक सुविधाएं दी जाएं। इस वर्ष 16 लाख 60 हजार नए वाहन आए, जिनमें 15 प्रतिशत ईव्ही बैठक में बताया गया कि इस वर्ष 16 लाख 60 हजार वाहनों का पंजीयन किया गया है। इसमें 2 लाख 58 हजार यानी 15 प्रतिशत इलेक्ट्रिकल वाहन हैं। प्रदेश में आन रोड वाहनों की संख्या एक करोड़ 80 लाख के करीब है। परिवहन से प्राप्त होने वाली राजस्व में पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग छह प्रतिशत की वृद्धि हुई है। बैठक में राजस्व वृद्धि के किए जाने वाले उपायों पर भी चर्चा की गई।

फार्मेसी पंजीयन पूरी तरह ऑनलाइन होगा, उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने पारदर्शिता पर जोर दिया

मध्यप्रदेश स्टेट फार्मेसी परिषद की बैठक हुई भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि अब ऑनलाइन प्रणाली से घर बैठे पंजीयन प्रमाणपत्र मेल और डिजिलॉकर के माध्यम से उपलब्ध होंगे। इससे पंजीयन प्रक्रिया सुव्यवस्थित हुई है और लंबित मामलों का निपटारा तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लगभग 50 प्रतिशत विद्यार्थियों के आवेदन अपूर्ण हैं, जिन्हें समय पर पूरा करवाना आवश्यक है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल होटल पलाश भोपाल में मध्यप्रदेश स्टेट फार्मेसी परिषद की बैठक में शामिल हुए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्राइवेट विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे सभी विद्यार्थियों की सही जानकारी उपलब्ध कराएँ। यदि गलती छात्रों की है तो उन्हें सुधार के लिये सूचित किया जाए और यदि संस्थान की लापरवाही है तो मान्यता एवं एफिलिएशन पर कार्रवाई करें। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि फार्मासिस्ट, पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं। विकसित और स्वस्थ भारत के लिए गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। बैठक में जून 2025 से अगस्त 2025 तक की कार्यप्रगति की समीक्षा की गई। इसमें 3500 से अधिक नए पंजीयन सफलतापूर्वक पूर्ण हुए, 5800 आवेदन प्रक्रिया में लंबित रहे तथा 1650 आवेदन निजी विश्वविद्यालयों की सूची उपलब्ध न होने के कारण शेष रहे। बताया गया कि संपूर्ण कार्यप्रणाली को अब डिजिटल मोड पर स्थानांतरित कर दिया गया है। इसमें समग्र आईडी, डिजिलॉकर, विवाह एवं निवास प्रमाणपत्र तथा एफडीए का एकीकरण किया गया है। नई प्रणाली से स्लॉट बुकिंग एवं परिषद कार्यालय में उपस्थित होकर सत्यापन कराने की आवश्यकता समाप्त होगी और सिस्टम आधारित ऑटो वेरिफिकेशन से प्रमाणपत्र सीधे डिजिलॉकर पर उपलब्ध होंगे। यह पहल परिषद को डिजिटल गवर्नेंस में देश की अग्रणी परिषद बनाएगी। बैठक में परिषद अध्यक्ष संजय कुमार जैन, सदस्य राजू चतुर्वेदी, गौतमचंद धींग, रामरतन गर्ग, सत्येन्द्र सिंह चौहान, देवेंद्र कुमार बजाजत्य, अशोक जैन एवं डॉ. पवन दुबे सहित दिनेश मौर्य (ड्रग कंट्रोलर, म.प्र.), आत्री मुख्य विश्लेषक और चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि शामिल हुए। परिषद की रजिस्ट्रार श्रीमती भव्या त्रिपाठी ने प्रगति और आगामी योजनाओं का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।

सपा विधायक मनोज पारस की मुश्किलें बढ़ीं: पेश नहीं होने पर कोर्ट ने दी जेल की सजा

बिजनौर  नगीना से समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक मनोज पारस को 2020 के हत्या के प्रयास के एक मामले में जमानत याचिका खारिज होने के बाद जेल भेज दिया गया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता (एडीजीसी) जितेंद्र चौहान ने बताया कि रसीदपुर गढ़ी निवासी छतर सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी कि 29 सितंबर, 2020 को झालू रोड पर उन पर चाकुओं से हमला किया गया था।  समाजवादी पार्टी के कुछ अन्य नेताओं के साथ, पूर्व मंत्री और मौजूदा विधायक पारस को भी इस मामले में आरोपी बनाया गया था। बाद में उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए। चौहान ने बताया कि मंगलवार को पारस न्यायाधीश शांतनु त्यागी की अदालत में पेश हुए, जिन्होंने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी और उन्हें जेल भेज दिया।   

यूरोपीय यूनियन की कड़ी तैयारी: क्या इजरायल पर लगेगा आर्थिक और राजनीतिक शिकंजा?

स्ट्रासबर्ग यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इजरायल को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वह गाजा में चल रहे युद्ध के कारण इजरायल पर प्रतिबंध लगाने और आंशिक व्यापार निलंबन की मांग करने की योजना बना रही हैं। वॉन डेर लेयेन ने आगे बताया कि आयोग 'अगले महीने एक फिलिस्तीनी दानदाता समूह बनाएगा', जिसका एक हिस्सा गाजा के भविष्य के पुनर्निर्माण पर ध्यान देगा। उन्होंने कहा कि गाजा की घटनाओं और बच्चों व परिवारों की पीड़ा ने विश्व की अंतरात्मा को झकझोर दिया है। फ्रांस के स्ट्रासबर्ग में यूरोपीय संसद की बैठक में उन्होंने कहा कि मानव निर्मित अकाल कभी भी युद्ध का हथियार नहीं होना चाहिए। बच्चों और मानवता के लिए इसे रोकना जरूरी है। वॉन डेर लेयेन की यह टिप्पणी उस दिन आई जब इजरायली सेना ने गाजा शहर के निवासियों को चेतावनी दी थी कि वे उस क्षेत्र को खाली करें, जहां इजरायल हमास का अंतिम गढ़ मानता है और जहां लाखों लोग अकाल की स्थिति में हैं। गाजा शहर को पूरी तरह खाली करने की यह चेतावनी पहली बार जारी की गई है। गौरतलब है कि गाजा में युद्ध तब शुरू हुआ जब 7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व वाले उग्रवादियों ने 251 लोगों का अपहरण किया और लगभग 1200 लोगों की हत्या की, जिनमें ज्यादातर इजरायली नागरिक थे। गाजा में अभी भी 48 बंधक हैं, जिनमें से लगभग 20 के जीवित होने की संभावना है। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इजरायल के जवाबी हमलों में कम से कम 64000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए हैं, हालांकि मंत्रालय ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि इनमें कितने नागरिक या लड़ाके थे। मंत्रालय के अनुसार, मारे गए लोगों में लगभग आधे महिलाएं और बच्चे थे। प्रमुख शहरों के बड़े हिस्से पूरी तरह नष्ट हो गए हैं और लगभग 20 लाख फिलिस्तीनियों में से 90 फीसदी विस्थापित हो गए हैं।  

68 लाख के गेहूं का घोटाला! करनाल फूड इंस्पेक्टर की गिरफ्तारी से खुला सच

करनाल  करनाल जिले के कुंजपुरा अनाज केंद्र से 68 लाख रुपये के गेहूं गबन के मामले में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निरीक्षक अशोक शर्मा को पुलिस ने शाहबाद से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के खिलाफ 6 सितंबर को केस दर्ज हुआ था और तब से वह फरार चल रहा था। पुलिस का कहना है कि आरोपी को बुधवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा। जांच में खुलासा हुआ कि अप्रैल और मई 2025 में खरीदे गए गेहूं के बैगों में जानबूझकर वजन में गड़बड़ी की गई। जहां 50 किलो के बैग होने चाहिए थे, वहां 20-25 किलो गेहूं भरकर स्टॉक दिखाया गया। बाकी गेहूं बाजार में बेच दिया गया। विभाग की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि 10 जून तक करीब 2,427 क्विंटल गेहूं, जिसकी कीमत 68 लाख 61 हजार रुपये थी, बाजार में बेचा जा चुका था। मामला तब खुला जब बैगों का वजन कम होने की शिकायत विभाग तक पहुंची। करीब 4902 बैग कम निकले डीएफएससी अनिल कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की टीम ने मौके पर पहुंचकर गड़बड़ी पकड़ी थी। जांच में पाया गया कि बैगों में 10 से 15 किलो तक वजन कम था और करीब 4,902 बैग कम निकले। मुख्यालय से गठित जांच कमेटी ने 12 अगस्त से जांच शुरू की और पांच सितंबर को रिपोर्ट सौंपी।    बैगों पर किया जाता था पानी का छिड़काव इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि खुले में रखे कई बैग आधे भरे हुए और फटे मिले, जिनसे गेहूं निकालकर बेच दिया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि बैगों का वजन सही दिखाने के लिए गेहूं पर पानी का छिड़काव किया जाता था ताकि चोरी का पता न चले। पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है।

पति ने कहा था बेटा करेगा नाम रोशन… 62 साल बाद मां के सामने सच हुई बात

नई दिल्ली  एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन देश के नए उपराष्ट्रपति चुने गए हैं। उन्होंने इंडिया अलायंस के बी सुदर्शन रेड्डी को हराया है। सीपी राधाकृष्णन की जीत से उनकी मां समेत पूरा परिवार काफी खुश हैं। उनकी मां जानकी अम्मल ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे का नाम भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के नाम पर रखा था। उन्होंने बताया कि जब उनके बेटे राधाकृष्णन का जन्म हुआ, तब देश के तत्कालीन राष्ट्रपति राधाकृष्णन पद पर थे और उनकी तरह एक शिक्षक भी थे। उन्होंने अपने बेटे का नाम पूर्व राष्ट्रपति की स्मृति में रखा। '62 साल बाद सच हो गई वो बात' न्यूज एजेंसी 'एएनआई' से बात करते हुए, नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन की मां जानकी अम्मल ने कहा, "जब मेरे बेटे का जन्म हुआ, तब तत्कालीन राष्ट्रपति राधाकृष्णन पद पर थे। वह एक शिक्षक थे, और मैं भी एक शिक्षिका थी। उनकी स्मृति में, मैंने अपने बेटे का नाम उनके नाम पर रखा। उस समय, मेरे पति ने मेरी ओर देखा और पूछा, "क्या तुम यह नाम इसलिए रख रही हो क्योंकि तुम चाहती हो कि तुम्हारा बेटा एक दिन राष्ट्रपति बने?'' 62 साल बाद, जैसा मेरे पति ने कहा था, वह सच हो गया है। मुझे इस पर बहुत खुशी है।" सीपी राधाकृष्णन के भाई ने क्या कहा? मंगलवार को नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के भाई सीपी कुमारेश ने अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि यह बेहद खुशी की बात है कि राधाकृष्णन अब राज्यसभा के प्रबंधन की ज़िम्मेदारी संभालेंगे। सीपी कुमारेश ने कहा, "मैं बहुत-बहुत खुश हूं। यह बेहद खुशी की बात है कि राधाकृष्णन उपराष्ट्रपति चुने गए हैं। उन्हें राज्यसभा के कुशल प्रबंधन की जिम्मेदारी लेनी है और वह इसे सफलतापूर्वक निभाएंगे। वह प्रधानमंत्री मोदी के विश्वास को भी कायम रखेंगे।" राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) समर्थित सीपी राधाकृष्णन मंगलवार को भारत के 15वें उपराष्ट्रपति चुने गए। इंडिया गठबंधन के वोटों में भी लगाई सेंध राधाकृष्णन ने चुनाव में निर्णायक बहुमत हासिल किया, उन्हें न केवल एनडीए सांसदों का, बल्कि विपक्ष के एक वर्ग का भी समर्थन प्राप्त हुआ। मंगलवार को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में राधाकृष्णन ने इंडिया ब्लॉक के उम्मीदवार न्यायमूर्ति बी. सुदर्शन रेड्डी को 152 मतों से हराया। एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन को प्रथम वरीयता के 452 वोट मिले, जबकि इंडिया ब्लॉक के उम्मीदवार न्यायमूर्ति बी. सुदर्शन रेड्डी को प्रथम वरीयता के 300 वोट मिले। 15 वोट अवैध घोषित किए गए।  

बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास में मदद को तैयार शिखर धवन की पहल

नई दिल्ली  भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज शिखर धवन ने पंजाब में बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद से लिए आगे आए हैं। इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक भावुक वीडियो में धवन ने इस कठिन समय में एकता और करुणा का आह्वान किया। धवन ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट में लिखा, 'यह एकजुट होने का समय है। पंजाब को हमारी ताकत, करुणा और समर्थन की जरूरत है.. थोड़ी सी मदद भी बहुत फर्क ला सकती है। आइए हम सब अपना योगदान दें।'  अपनी व्यक्तिगत अपील के साथ धवन का NGO शिखर धवन फाउंडेशन बाढ़ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास प्रयासों में सहायता के लिए जमीनी स्तर पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है। शिखर धवन की मीडिया टीम की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार फाउंडेशन का उद्देश्य जीवन के पुनर्निर्माण में मदद करना और जहां सबसे ज्यादा जरूरत है वहां दीर्घकालिक सहायता प्रदान करना है।  उनके संदेश को प्रशंसकों और साथी क्रिकेटरों का जबरदस्त समर्थन मिला है जिसमें संकट के समय में करुणा और एकता के महत्व पर प्रकाश डाला गया है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए पंजाब के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की। उन्होंने पंजाब को पहले से आवंटित 12,000 करोड़ रुपए के अलावा, राज्य के लिए 1,600 करोड़ रुपए के वित्तीय सहायता पैकेज की घोषणा की। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार केंद्र राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) और पीएम किसान सम्मान निधि योजना की दूसरी किस्त भी अग्रिम रूप से जारी करेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने स्थिति का जमीनी स्तर पर आकलन करने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) के कर्मियों से भी बातचीत की। हाल के दिनों में हुई भारी बारिश के कारण पंजाब में व्यापक तबाही हुई है। राज्य सरकार ने केंद्र द्वारा 'रोके गए' 60,000 करोड़ रुपए की धनराशि तत्काल जारी करने की मांग की है, जो पंजाब की बाढ़ से प्रभावित अर्थव्यवस्था को समग्र रूप से पटरी पर लाने के लिए बेहद जरूरी है। प्रधानमंत्री मोदी ने गुरदासपुर और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में हुए नुकसान का आकलन किया। इसके बाद उन्होंने गुरदासपुर में अधिकारियों और निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ एक आधिकारिक समीक्षा बैठक की। प्रधानमंत्री मोदी ने राहत और पुनर्वास उपायों की समीक्षा की और पंजाब में हुए नुकसान का भी आकलन किया। 

दीपिका चिखलिया राजस्थानी राजपूताना पोशाक में, माथे की बिंदी से नथ तक फैशन का जलवा

मुंबई,  अभिनेत्री दीपिका चिखलिया ने बुधवार को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक खास वीडियो पोस्ट किया। दीपिका का यह पोस्ट उनके फैंस के लिए एक खास तोहफा है, जिसमें उन्होंने अपनी पारंपरिक झलक दिखाई है। उन्होंने इस वीडियो को कई तस्वीरों के साथ तैयार किया है, जहां वे एक ही लुक में अलग-अलग पोज देती नजर आ रही हैं। उनके इस पोस्ट की लोग काफी सराहना कर रहे हैं और पसंद भी कर रहे हैं। इस वीडियो में दीपिका चिखलिया नीले रंग की पारंपरिक राजस्थानी राजपूताना पोशाक में नजर आ रही हैं। वह सुनहरी कढ़ाई वाली ओढ़नी में बेहद आकर्षक लग रही हैं, जिसमें जरी का काम है। उनका मेकअप और गहनों का चयन भी पारंपरिक भारतीय रूप को बखूबी दर्शाता है। उन्होंने गले में हैवी नेकलेस, हाथों में चूड़ियां और कड़े, माथे पर लाल बिंदी और नाक में नथ पहनी हुई है, जो उनकी शाही और रॉयल छवि को निखारता है। अलग-अलग तस्वीरों में उनका हंसता-मुस्कुराता चेहरा उनकी सुंदरता को बढ़ा रहा है। वीडियो में उनका लुक फैंस को पुराने दौर की याद दिलाता है, खासकर जब वे रामायण के किरदार ‘सीता’ के रूप में जानी जाती थीं। इस वीडियो के बैकग्राउंड म्यूजिक के तौर पर दीपिका ने जगजीत सिंह की गजल ‘रुख से पर्दा’ का इस्तेमाल किया है, जो इसे और भी खास बना देता है। जगजीत सिंह को गजलों का सम्राट कहा जाता है। उनकी गजल का इस्तेमाल इस वीडियो में भावनात्मक रंग भर रहा है। बता दें कि इससे पहले भी दीपिका ने राजस्थानी लुक में अपना एक वीडियो पोस्ट किया था। इस वीडियो में वह मांग टीका, चूड़ियां (पोची), और पारंपरिक गहनों से सजी नजर आई थीं। इस वीडियो के बैकग्राउंड में उन्होंने ‘सैयां ले गयी जिया’ गाना जोड़ा था, जो साल 1969 में आई फिल्म ‘एक फूल दो माली’ का है। इस गाने को गायिका आशा भोसले ने गाया और म्यूजिक डायरेक्ट रवि ने किया था। गाने में अभिनेत्री साधना शिवदासानी के साथ संजय खान और बलराज साहनी भी हैं।  

शिक्षा विभाग में हड़कंप, संकुल प्रिंसिपल रिश्वत लेते पकड़ी गईं, लोकायुक्त ने किया कार्रवाई

  सांवेर सांवेर क्षेत्र के कछालिया गांव के शासकीय सांदीपनी स्कूल में रिश्वत का मामला सामने आया है। एक महिला प्रिंसिपल ने दो शिक्षकों के स्थाईकरण की फाइल जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय तक पहुंचाने के एवज में दो हजार रुपए की रिश्वत मांगी। प्रिंसिपल मनीषा पहाड़िया ने शिक्षकों से कहा था कि वह रिश्वत के पैसे लिफाफे में रखकर लाए। फाइल बढ़ाने के लिए दो हजार की रिश्वत मांगने पर दोनों शिक्षक हैरान थे। उन्होंने लोकायुक्त विभाग को इसकी शिकायत की। लोकायुक्त पुलिस ने महिला प्रिंसिपल को रंगे हाथों पकड़ने के लिए जाल बिछाया। केमिकल लगे नोट लिफाफे में रखवा कर शिकायतकर्ता शिक्षकों को दिए।  बुधवार को दोनों शिक्षक प्रिंसिपल मनीषा के केबिन में पहुंचे और लिफाफा टेबल पर रख दिया। प्रिंसिपल ने लिफाफा पर्स में रखकर कहा कि अब फाइल आगे बढ़ा दूंगी।  इस बीच लोकायुक्त की टीम इशारा पाते ही केबिन में पहुंची और महिला प्रिंसिपल को रिश्वत लेते रहेंगे हाथों पकड़ लिया। उन्होंने मनीषा के हाथ धुलवाए तो हाथ केमिकल के कारण पीले हो गए।भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रिंसिपल के खिलाफ केस दर्ज किया और रिश्वत लेने के उपयोग में लाया गया पर्स भी टीम ने जप्त कर लिया है।  पकड़े जाने के बाद प्रिंसिपल मनीषा ने कहा कि उससे गलती हो गई ,उसे रिश्वत के पैसे नहीं लेना चाहिए थे। शिकायतकर्ता शिक्षकों की चार साल पहले स्कूल में नियुक्ति हुई थी। उन्होंने तय नियम के तहत स्थाई करने के लिए प्राचार्य को फाइल जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में भेजने के लिए कहा था। प्रिंसिपल ने दोनों से फाइल आगे बढ़ाने की एवज में दोनों से एक- एक हजार रुपए मांगे थे। अब महिला प्रिंसिपल को निलंबित किया जा सकता है।