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जानें किस देश ने सबसे पहले किया था EVM का इस्तेमाल और अब वहां कैसी है स्थिति

नई दिल्ली  भारत में अक्सर चुनावी हार के बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर सवाल उठाए जाते हैं। विपक्ष का आरोप होता है कि ईवीएम में हेराफेरी की गई, जिससे उन्हें कम वोट मिले। हालांकि, चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करना किसी भी लोकतंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। बहुत से लोग मानते हैं कि भारत EVM का इस्तेमाल करने वाला पहला देश था, लेकिन सच्चाई कुछ और है। दुनिया में सबसे पहले EVM का प्रयोग अमेरिका में हुआ था। अमेरिका में हुई थी शुरुआत यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि दुनिया में सबसे पहले इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का इस्तेमाल अमेरिका में हुआ था। 1960 के दशक के अंत और 1970 के दशक की शुरुआत में अमेरिका के कुछ राज्यों ने मतदान प्रक्रिया को तेज और सुविधाजनक बनाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम पर प्रयोग शुरू किए। इन प्रयोगों ने ही आधुनिक EVM की नींव रखी। अमेरिका में EVM का विकास अमेरिका में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग का पहला प्रयोग 1964 में ऑटोमैटिक वोटिंग मशीन (AVM) के रूप में हुआ। इसके बाद, 1970 के दशक में डायरेक्ट रिकॉर्डिंग इलेक्ट्रॉनिक (DRE) मशीनों का इस्तेमाल शुरू हुआ, जिसमें मतदाता बटन दबाकर या टचस्क्रीन के जरिए अपना वोट दर्ज करते थे। 1980 के दशक तक, अमेरिका के कई राज्यों ने इन मशीनों को अपना लिया था। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य मतदान की गति और सुविधा बढ़ाना था। वर्तमान स्थिति: पारदर्शिता पर जोर आज अमेरिका पूरी तरह से EVM पर निर्भर नहीं है। साल 2000 के राष्ट्रपति चुनाव में फ्लोरिडा के बैलेट विवाद के बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम पर सवाल उठने लगे। इसके बाद से सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर लगातार बहस जारी है। परिणामस्वरूप, कई राज्यों ने अब पेपर बैलेट और EVM का हाइब्रिड सिस्टम अपनाया है। इस प्रणाली में वोट इलेक्ट्रॉनिक मशीन से दर्ज होते हैं, लेकिन साथ ही एक पेपर रिकॉर्ड भी तैयार होता है, जिसे पेपर ट्रेल कहा जाता है, ताकि जरूरत पड़ने पर वोटों की दोबारा गिनती की जा सके।   वर्तमान में, अमेरिका में लगभग 70% वोटिंग मशीनें इलेक्ट्रॉनिक और पेपर बैकअप सिस्टम पर आधारित हैं, जबकि कुछ राज्य अब भी केवल पेपर बैलेट का उपयोग करते हैं। चुनाव विशेषज्ञों का मानना है कि जहां EVM ने सुविधा दी है, वहीं साइबर सुरक्षा और हैकिंग के खतरों ने इसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। यही कारण है कि अमेरिका में अब EVM और पेपर ट्रेल (जैसे VVPAT सिस्टम) का मिश्रित मॉडल सबसे ज्यादा प्रचलित है। अमेरिका, जिसने सबसे पहले EVM का इस्तेमाल शुरू किया, आज भी इस तकनीक पर पूरी तरह भरोसा नहीं करता है। वहां के चुनावों में सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग के साथ पेपर बैकअप को अनिवार्य बना दिया गया है।  

वाणिज्यिक कर विभाग की बड़ी कार्रवाई कर 9 करोड़ 59 लाख की जीएसटी चोरी पकड़ी

फर्जी चालान व ई-वे बिल से आयरन स्क्रेप की फर्जी खरीद दिखाई   जयपुर राज्य में बोगस, फेक फर्मो द्वारा की जा रही राजस्व क्षति रोकने के लिए राज्य कर विभाग सर्तक है। विभाग के मुख्य आयुक्त श्री कुमार पाल गौतम के निर्देशन में इस सम्बंध निरन्तर की जा रही कार्रवाई की कड़ी में  प्रवर्तन शाखा प्रथम की टीम ने जयपुर स्थित विश्वकर्मा इण्डस्ट्रियल एरिया में  आयरन एवं स्क्रेप का कागजी कारोबार करने वाली दो फर्मों बाबा मैटल्स तथा खण्डेलवाल एण्टरप्राईजेज पर एक साथ सर्च और सर्वे की कार्रवाई की। मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर 29 सितम्बर तक के लिए न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया है।   मुख्य आयुक्त ने बताया कि कार्रवाई से पूर्व विभाग ने जीएसटी पोर्टल पर दोनों फर्मो के खरीद फरोख्त संबंधी आंकड़ो का विश्लेषण किया तथा अपने गुप्त स्त्रोतों से इन फर्मो की व्यापारिक गतिविधियों की सूचना जुटाई । इस दौरान पाया गया कि दोनों फर्मो का संचालन मास्टरमाइंड महेन्द्र खण्डेलवाल द्वारा किया जा रहा है। विभागीय जांच में स्पष्ट हुआ कि महेन्द्र खण्डेलवाल द्वारा अपनी दोनों फर्मो में कूटरचित बोगस बिलों के आधार पर कुल 53 करोड़ 27 लाख रूपये की खरीद दिखाकर 9 करोड़ 59 लाख रूपये की राजस्व हानि की गई है। महेन्द्र खण्डेलवाल ने सुनियोजित तरीके से राज्य के बाहर स्थित आयरन एवं स्क्रेप के बोगस कारोबारियों से संबंध स्थापित किये तथा दिल्ली, उत्तरप्रदेश, आगरा स्थित बोगस फर्मो से बिलों की खरीद कर  आगत कर (आईटीसी) का अनुचित लाभ लेकर राजस्व की हानि की।  श्री गौतम ने बताया कि जब विभाग ने इन फर्मो में माल की खरीद के लिए निर्मित ई-वे बिलों की गहनता से पड़ताल की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आये। ई-वे बिल में जिन वाहनों का नम्बर दर्ज किया गया था, उनका फर्मों के घोषित व्यवसाय स्थल, गोदाम आदि पर आगमन होना नही पाया गया। इनमें से कई वाहनो का संचालन तो राज्य के बाहर होना पाया गया। इस प्रकार मास्टरमाइंड महेन्द्र खण्डेलवाल द्वारा आगत कर दुरूपयोग (आईटीसी मिसयूज) की सोची समझी रणनीति के तहत माल की वास्तविक आपूर्ति प्राप्त किये बिना ही कूटरचित ई-वे बिलों का निर्माण किया गया और केवल कागजी संव्यवहार के द्वारा बोगस बिलों से खरीद दिखाकर मिथ्या आगत कर का लाभ प्राप्त कर राजस्व की क्षति की गई।  श्री गौतम ने बताया कि सर्च कार्यवाही के पश्चात् बोगस कारोबारी महेन्द्र खण्डेलवाल विभाग को चकमा देकर भूमिगत हो गया। मास्टरमांइड ने अपना मोबाइल फोन बन्द कर लिया और रोज नये ठिकाने बदलता रहा। विभाग के बार-बार सम्मन जारी करने पर भी पेशी पर उपस्थित नही हुआ। जिस पर मुख्य आयुक्त के सुपरविजन में प्रवर्तन शाखा प्रथम की टीम गठित की गई और मास्टरमाइंड के सभी संभावित ठिकानों, रिश्तेदारो के घरों पर रैकी करवायी गयी। टीम के कई सदस्य बोगस ग्राहक बनकर आयरन एवं स्क्रेप कारोबारियों से सम्पर्क करते रहे। इसी बीच टीम को अपने गुप्त स्त्रोतो से किसी सामाजिक कार्यक्रम में मास्टरमाइंड के उपस्थित होने के सूचना मिली। जिस पर टीम के दो सदस्य कैटरिंग वाले बनकर कार्यक्रम में शामिल हो गये और बाकी टीम को सूचित कर अभियुक्त महेन्द्र खण्डेलवाल को आरजीएसटी/सीजीएसटी एक्ट 2017 के प्रावधानो के तहत राजस्व चोरी करने के आरोप में गिरफ्तार कर आर्थिक अपराध न्यायालय में पेश किया गया। अभियुक्त को 29 सितंबर तक न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया है। विभाग द्वारा सम्पूर्ण प्रकरण की गहनता से जाँच की जा रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आह्वान: स्वदेशी अपनाएं, MP को समृद्ध और भारत को आत्मनिर्भर बनाएं

स्वेदशी अपना कर मध्यप्रदेश को समृद्ध और देश को आत्मनिर्भर बनाकर बने देशभक्त : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री  मोदी के स्वदेशी अपनाने के आहवान का प्रदेशवासी करें अनुसरण लोगों के रोजगार और जीवनयापन का माध्यम हैं स्वदेशी सामग्री भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 'स्वदेशी अपनाओ-मध्यप्रदेश समृद्ध बनाओ, स्वदेशी अपनाओ-देश को आत्मनिर्भर बनाओ' के संदेश के माध्यम से प्रदेशवासियों को स्वदेशी अपनाने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि हमें गांव-गावं, शहर-शहर स्वदेशी का अभियान चलाना है। प्रदेशवासी स्थानीय स्तर पर बने उत्पादों पर गर्व करें और गर्व से कहें कि हम स्वदेशी हैं। प्रदेश के छोटे दुकानदार, व्यापारी स्वदेशी वस्तुओं के क्रय-विक्रय को प्रोत्साहन दें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री निवास से गुरूवार को जारी अपने संदेश के माध्यम से प्रदेशवासियों से यह विचार साझा किये। मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे स्तर पर वस्तुओं के निर्माता अपने ढंग से अपनी क्षमता, योग्यता और कौशल के आधार पर स्वदेशी वस्तुओं के उत्पादन में अपनी मेहनत लगाते हैं। इससे हमारी हजारों सालों से चली आ रही आत्मनिर्भरता की परम्परा भी जीवित रहती है। स्वदेशी वस्तुओं की सुंगध और प्रभाव ही अलग है, यह सामग्री कई लोगों को रोजगार का अवसर देकर गरीब परिवारों के जीवनयापन का माध्यम बनती है और देश की आर्थिक समृद्धि का मार्ग भी स्वदेशी से ही प्रशस्त होता है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के स्वदेशी अपनाने के आहवान का सभी प्रदेशवासी अनुसरण करें। त्यौहारों के समय होने वाली खरीददारी में भी स्वदेशी वस्तुओं को अपनाया जाए। भारत को विश्व में सबसे शक्तिशाली देश के रूप में स्थापित करने की सामर्थ्य स्वदेशी में ही है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी ने स्वदेशी के माध्यम से ही पूरे देश को एक सूत्र में पिरोया था। आज भी भारत को विश्व में सबसे शक्तिशाली देश के रूप में स्थापित करने की सामर्थ्य स्वदेशी में ही है। इसी आधार पर प्रधानमंत्री  मोदी देशवासियों को स्वदेशी अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वे स्वयं स्वदेशी के अभियान समर्पित हैं। 'स्वदेशी अपनाओ देशभक्त कहलाओ' के भाव के साथ पूरा प्रदेश इस अभियान के साथ है।  

मंगला पशु बीमा योजन से पशुधन सुरक्षित, भविष्य सुनिश्चित ग्रामीण सेवा शिविर में शकुन्तला को मिली पशु बीमा पॉलिसी

जयपुर धौलपुर की बसेड़ी ग्राम पंचायत के झील गांव निवासी शकुन्तला देवी परिवार की अतिरिक्त आय के लिए भैंस पालती है क्योंकि वह और उसका पति पीतम सिंह अपनी छोटी सी जोत के कारण खेती पर निर्भर नहीं रह सकते। किसी भी पशु की मृत्यु उसके परिवार की आर्थिक स्थिति को परेशानी में डाल देती है लेकिन मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा की दूरगामी सोच से राज्यभर में 17 सितम्बर से संचालित ग्रामीण सेवा शिविर अभियान के पहले ही दिन शकुन्तला की दोनों भैंसों का मंगला पशु बीमा किया गया। झील के अटल सेवा केन्द्र में आयोजित शिविर से पहले ही पशुपालन विभाग के कार्मिक शकुन्तला समेत ग्राम पंचायत के प्रत्येक घर पहुंचे तथा उन्होंने सूची बनाई कि किस परिवार को किस योजना का पात्र होने के बावजूद अभी तक लाभ नहीं मिला है।  इस योजना में बीमित गाय, भैंस और ऊंट का 40 हजार रूपये तथा बकरी व भेड़ का 4 हजार रूपये का 1 वर्ष अवधि के लिए निःशुल्क बीमा किया जाता है। शकुन्तला ने राज्य सरकार की इस योजना का निःशुल्क लाभ मिलने पर मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा का आभार व्यक्त किया है।  शकुन्तला को कैंप में मंगला पशु बीमा योजना की पॉलिसी दी गई। इससे यह परिवार प्रसन्न है कि राजस्थान सरकार के इस कार्यक्रम के तहत इन्हें आर्थिक सुरक्षा कवच व गारंटी प्राप्त हुई है।  इसी प्रकार खानपुर में लगे कैम्प में 60 वर्षीय श्री ग्यासीलाल की वृद्धावस्था पेंशन स्वीकृत हो गई और उन्हें पहली बार पीपीओ नम्बर प्राप्त हुआ। ग्यारसीलाल ने इस जनोन्मुखी अभियान के लिए राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया है।

टोक्यो में रोमांचक फाइनल: नीरज चोपड़ा चमके, सचिन यादव से चूका पदक, वालकोट ने फेंका यादगार थ्रो

नई दिल्‍ली गत चैंपियन नीरज चोपड़ा का वर्ल्‍ड चैंपियनशिप में पुरुषों की जेवलिन थ्रो स्‍पर्धा के फाइनल में बेहद निराशाजनक प्रदर्शन रहा। नीरज चोपड़ा आठवें स्‍थान पर रहे। वहीं, वर्ल्‍ड चैंपियनशिप में पहली बार हिस्‍सा लेने वाले एक और भारतीय जेवलिन थ्रोअर सचिन यादव ने अपना निजी सर्वश्रेष्‍ठ प्रदर्शन किया, लेकिन वो भी मेडल नहीं जीत सके। भारत के जेवलिन थ्रोअर सचिन यादव चौथे स्‍थान पर रहे। वालकोट ने जीता गोल्‍ड मेडल बता दें कि वर्ल्‍ड चैंपियनशिप में गुरुवार को कोई भी जेवलिन एथलीट 90 मीटर की दूरी का आंकड़ा पार नहीं कर सका। चोपड़ा पांचवें राउंड में बाहर हुए। उनका सर्वश्रेष्‍ठ थ्रो 84.03 मीटर का रहा। वो आठवें स्‍थान पर रहे। 27 साल के चोपड़ा ने पांचवें प्रयास में फाउल किया, जिसके कारण वो प्रतियोगिता से बाहर हुए। याद दिला दें कि नीरज चोपड़ा ने 2021 में इसी जगह ऐतिहासिक गोल्‍ड मेडल जीता था। त्रिनिदाद एंड टोबेगो के केसहोर्न वालकोट (88.16 मीटर) ने गोल्‍ड मेडल जीता। ग्रेनेडा के एंडरसन पीटर्स दूसरे व अमेरिका के कर्टिस थांपसन (86.67 मीटर) तीसरे स्‍थान पर रहे।   सचिन यादव ने किया प्रभावित बता दें कि नीरज चोपड़ा के साथ भारत के सचिन यादव ने भी वर्ल्‍ड चैंपियनशिप में हिस्‍सा लिया था। यादव ने अपना सर्वश्रेष्‍ठ थ्रो पहले प्रयास में किया, जब उनका भाला 86.27 मीटर की दूरी पर जाकर गिरा। यादव ने न सिर्फ नीरज चोपड़ा बल्‍कि जर्मनी के जूनियन वेबर (86.11 मीटर) और ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम (82.75 मीटर) से भी बेहतर प्रदर्शन किया। नीरज का ऐसा रहा प्रदर्शन बता दें कि अरशद नदीम चौथे राउंड में बाहर हो गए थे। वहीं, दो बार के ओलंपिक मेडलिस्‍ट चोपड़ा ने अपने अभियान की शुरुआत 83.65 मीटर की दूरी के थ्रो के साथ की। अगले प्रयास में नीरज ने प्रदर्शन सुधारा और 84.03 मीटर की दूरी पर भाला फेंका। मगर तीसरे प्रयास में उनसे फाउल हो गया। वो आठवें स्‍थान पर खिसक गए। आधे राउंड खत्‍म हो चुके थे और नीरज चोपड़ा आठवें स्‍थान पर ही रहे। नीरज का चौथा थ्रो 82.86 मीटर का रहा। प्रतियोगिता में बने रहने के लिए नीरज को अगले राउंड में 85.54 मीटर से ज्‍यादा दूरी पर भाला फेंकने की जरुरत थी। मगर पांचवें प्रयास में नीरज से फाउल हुआ और वो आधिकारिक रूप से प्रतियोगिता से बाहर हो गए। नीरज के बाहर होने पर भारतीय फैंस का दिल टूट गया। नीरज का प्रदर्शन     पहला थ्रो: 83.65 मीटर     दूसरा थ्रो: 84.03 मीटर     तीसरा थ्रो: फाउल     चौथा थ्रो: 82.86 मीटर     पांचवां थ्रो: फाउल सचिन का प्रदर्शन     पहला थ्रो: 86.27 मीटर     दूसरा थ्रो: फाउल     तीसरा थ्रो: 85.71 मीटर     चौथा थ्रो: 84.90 मीटर     पांचवां थ्रो: 85.96 मीटर     छठवां थ्रो: 80.95 मीटर  

वोटर अधिकार बनाम घुसपैठिया बचाओ यात्रा: अमित शाह ने राहुल गांधी को घेरा

रोहतास केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर 'वोट चोरी' के आरोपों को लेकर निशाना साधा और उनकी बिहार में निकाली गई वोटर अधिकार यात्रा को घुसपैठिया बचाओ यात्रा बताया। रोहतास जिले के डेहरी में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) कार्यकर्ताओं से बातचीत करते हुए, शाह ने कांग्रेस पार्टी पर विकास के मुद्दों की अनदेखी करने और इसके बजाय बांग्लादेश से आए अवैध घुसपैठियों को बचाने का आरोप लगाया। अमित शाह ने डेहरी में सभा को संबोधित करते हुए कहा, “वे (कांग्रेस) हर बार झूठा प्रचार करते हैं। राहुल गांधी ने यात्रा की। उनकी यात्रा का विषय वोट चोरी नहीं था। मुद्दा अच्छी शिक्षा, रोजगार, बिजली, सड़कें नहीं थीं। उनकी यात्रा का मुद्दा बांग्लादेश से आए घुसपैठियों को बचाना था। क्या आपमें से किसी ने अपना वोट खोया है? यह राहुल गांधी की 'घुसपैठिया बचाओ यात्रा' थी।” कांग्रेस की यात्रा की प्रासंगिकता पर सवाल उठाते हुए शाह ने पूछा, "क्या घुसपैठियों को वोट का अधिकार होना चाहिए? क्या घुसपैठियों को नौकरी, घर, 5 लाख रुपये तक का इलाज और मुफ्त राशन मिलना चाहिए? ये राहुल बाबा एंड कंपनी वोट बैंक के लिए हमारे युवाओं की बजाय घुसपैठियों को नौकरी दे रही है।" अमित शाह ने भाजपा कार्यकर्ताओं से कांग्रेस के सत्ता में आने पर कथित खतरों के बारे में जागरूकता फैलाने का आग्रह करते हुए कहा, “यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम घर-घर जाएं और लोगों को बताएं कि अगर गलती से भी उनकी (महागठबंधन) सरकार बन गई, तो बिहार के हर जिले में सिर्फ घुसपैठिए होंगे।” यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भाजपा और कांग्रेस दोनों ने आगामी विधानसभा चुनावों से पहले बिहार में अपने चुनावी अभियान तेज कर दिए हैं। बिहार में अगले महीने विधानसभा चुनाव की घोषणा संभव है।  

संसदीय कार्य मंत्री ने केरू के बड़ली में ग्रामीण सेवा शिविर का किया अवलोकन

शिविरों के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास एवं सुशासन की पहुंच हुई सुनिश्चित: पटेल शिविर में विभिन्न विभागों की स्टॉल्स का किया निरीक्षण   जयपुर संसदीय कार्य, विधि एवं विधिक कार्य मंत्री श्री जोगाराम पटेल ने गुरुवार को पंचायत समिति केरू की ग्राम पंचायत बड़ली में ग्रामीण सेवा शिविर का अवलोकन किया। श्री पटेल ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का जन्मदिवस को सेवा पखवाड़ा के रूप में मनाया जा रहा है। इस पखवाड़े के तहत आयोजित होने वाले ग्रामीण सेवा शिविर पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के सिद्धांत को धरातल पर उतारने के प्रयासों का हिस्सा हैं। इन शिविरों के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास एवं सुशासन की पहुंच सुनिश्चित हुई है।  शिविरों से आमजन को मिलेगा जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ संसदीय कार्य मंत्री ने कहा ग्रामीण सेवा शिविरों के माध्यम से केन्द्र व राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक जरूरतमंद तक पहुंचाया जाएगा। शिविरों में रास्ते खोलना, आपसी सहमति से विभाजन एवं नामान्तकरण,लम्बित नोटिसों की तामीली एवं फार्मर रजिस्ट्री संबंधी कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मूल निवास, जाति प्रमाण-पत्र एवं स्वामित्व योजना के तहत स्वामित्व पट्टा वितरण और किसान गिरदावरी एप द्वारा गिरदावरी की जा रही है। श्री पटेल ने कहा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीबी मुक्त भारत अभियान से जुड़े कार्य और पीएमजेएवाई कार्ड का वितरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना, पालनहार योजना और मुख्यमंत्री घुमंतू आवास योजना जैसी योजनाओं के लंबित प्रकरणों का निस्तारण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय गरीबी मुक्त गांव योजना के तहत 10 हजार और गांवों का बीपीएल सर्वे किया जा रहा है। संसदीय कार्य मंत्री ने कहा सभी ग्रामवासी इन शिविरों का अधिकाधिक लाभ लें एवं आस-पड़ोस के लोगों को भी प्रेरित करें। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से भी आह्वान किया कि वे इन शिविरों में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएं।  विभागीय अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश शिविर में संसदीय कार्य मंत्री ने फॉर्मर रजिस्ट्री के लक्ष्य शत प्रतिशत प्राप्त करने, एनएफएसए के तहत शत प्रतिशत ई- केवाईसी करने और  बड़ली में स्वीकृत जीएसएस के लिए भूमि आवंटन के संबंध में आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। मंगला पशु बीमा की पॉलिसी का किया वितरण इस दौरान उन्होंने शिविर में विभिन्न विभागों की स्टॉल्स का निरीक्षण किया तथा अधिकारियों से योजनाओं और उनकी क्रियान्विति के संबंध में सम्पूर्ण जानकारी ली।  उन्होंने मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के तहत  लाभार्थी श्रीमती नम्रता और विशना देवी को पॉलिसी वितरित की | टीबी मुक्त भारत के तहत पोषण किट का वितरण किया गया। उन्होंने एक पेड़ मां के नाम अभियान और हरियालो राजस्थान के तहत कार्यक्रम स्थल पर पौधारोपण किया। शिविर में राजस्व संबंधी कार्य हुए संपादित तहसीलदार जोधपुर श्री कृष्णपाल सिंह ने बताया कि राजस्व विभाग द्वारा शिविर में काश्तकारों के शुद्धि पत्र के 10 प्रकरण, सहमति से विभाजन का 1 प्रकरण, रास्ते के 2 प्रकरण,नामांतरण के 10 प्रकरणों पर आवश्यक कार्यवाही कर राहत प्रदान की गई। ये रहे उपस्थित शिविर में सरपंच श्री किशनाराम कटारिया, पंचायत समिति श्री बाबूसिंह राजपुरोहित,श्री गोविंद टाक, श्री सुमेर सिंह राजपुरोहित,श्री महेन्द्र सिंह बेरू,विकास अधिकारी केरू श्री गिरधारीराम, सहायक अभियंता (डिस्कॉम) श्री मनीष रोहड़ीवाल सहित जनप्रतिनिधि एवं ग्रामवासी उपस्थित रहे।

भारत-अमेरिका ट्रेड वार: क्या ट्रंप नवंबर में 25% टैरिफ कम करेंगे?

रूस  रूस से तेल आयात करने की वजह से भारत पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप घुटने टेकने के लिए मजबूर हो सकते हैं। नवंबर के बाद अमेरिका भारत पर लगाए गए अतिरिक्त शुल्क को हटा सकता है। रेसिप्रोकल टैरिफ के नाम पर पहले अमेरिका ने भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया था, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया था। मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने उम्मीद जताई है कि 30 नवंबर के बाद कुछ आयातों पर लगाया गया दंडात्मक शुल्क (25 फीसदी) वापस ले लिया जाएगा। कोलकाता में मर्चेंट्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए, सीईए नागेश्वरन ने कहा, "हम सभी पहले से ही इस पर काम कर रहे हैं, और मैं यहां टैरिफ के बारे में बात करने के लिए कुछ समय लूंगा। हां, 25 फीसदी का मूल पारस्परिक टैरिफ और 25 फीसदी का दंडात्मक टैरिफ, दोनों की उम्मीद नहीं थी। मेरा अब भी मानना ​​है कि भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण दूसरा 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया होगा, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों के हालिया घटनाक्रमों को देखते हुए, मेरा मानना ​​है कि 30 नवंबर के बाद दंडात्मक टैरिफ नहीं लगाया जाएगा।'' भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर भी बातचीत चल रही है। इसका जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि अगले कुछ महीनों में दंडात्मक शुल्क और उम्मीद है कि पारस्परिक शुल्कों पर कोई समाधान निकल आएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत की निर्यात वृद्धि दर, जो वर्तमान में 850 अरब अमेरिकी डॉलर प्रति वर्ष है, एक ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की राह पर है, जो जीडीपी का 25 फीसदी है, जो एक स्वस्थ और खुली इकॉनमी का संकेत है। ट्रंप ने दर्जनों देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (IEEPA) लागू किया था। यह 1977 का एक कानून है जिसे विदेशी आपात स्थितियों के समय प्रतिबंधों और वित्तीय नियंत्रण के लिए बनाया गया था। भारत पर पहले 25 फीसदी टैरिफ लगाया गया, लेकिन बाद में रूस से तेल खरीदने को लेकर एक्स्ट्रा 25 फीसदी टैरिफ लगा दिया गया। इससे भारत से एक्सपोर्ट होने वाले सामानों पर बुरा असर पड़ा है। हालांकि, भारत ने साफ किया है कि भारत राष्ट्र हित की वजह से रूस से तेल आयात कर रहा है। अमेरिकी सीमा शुल्क नोटिफिकेशन में यह भी बताया गया है कि भारत से आने वाले अधिकांश प्रोडक्ट्स पर उच्च शुल्क के साथ-साथ एंटी-डंपिंग या प्रतिपूरक शुल्क जैसे अन्य लागू शुल्क भी लागू होंगे, लेकिन कुछ वस्तुओं को इससे बाहर रखा गया है। इसमें अमेरिकी टैरिफ अनुसूची में अलग से सूचीबद्ध कुछ उत्पाद शामिल हैं। लोहे और इस्पात से बनी वस्तुओं, जिनमें उनके कुछ अन्य उत्पाद भी शामिल हैं, पर अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। यही बात एल्युमीनियम उत्पादों पर भी लागू होती है। सेडान, एसयूवी, क्रॉसओवर, मिनीवैन, कार्गो वैन और हल्के ट्रक जैसे यात्री वाहनों को भी उनके स्पेयर पार्ट्स सहित छूट दी गई है।  

प्रदेश सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ हर समस्या का कर रही समाधान: जोगाराम पटेल

जयपुर संसदीय कार्य, विधि एवं विधिक कार्य मंत्री श्री जोगाराम पटेल ने गुरुवार  को ग्राम पंचायत सांगरिया में सीवरेज के गंदे पानी की निकासी की वैकल्पिक व्यवस्था का जायजा लिया।श्री पटेल ने कहा मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा के कुशल नेतृत्व में प्रदेश सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ हर समस्या का समाधान कर रही है। उन्होंने कहा सांगरिया में सीवरेज के पानी की त्वरित निकास से आमजन को राहत मिली है। उन्होंने कहा नगर निगम द्वारा अस्थाई एवं त्वरित समाधान के लिए हेलीपेड सर्किल से कुड़ी नाले में आवश्यक संसाधन लगाकर गंदे पानी की निकासी की जा रही है और सांगरिया की भावी आवश्यकता को ध्यान में रखकर डीपीआर भी बनाई जा रही है। क्षेत्र में फॉगिंग करने के दिए निर्देश संसदीय कार्य मंत्री ने दूरभाष पर नगर निगम आयुक्त श्री सिद्धार्थ पालानीचामी को गंदे पानी के कारण मच्छरों से बीमारियां फैलने की आशंका के मद्देनजर क्षेत्र में फॉगिंग करने के निर्देश दिए। स्वनिधि योजना से छोटे व्यापारियों का हो रहा आर्थिक सशक्तिकरण संसदीय कार्य मंत्री ने हेलीपेड सर्किल विवेक विहार स्थित सरस मिनी बूथ पर जनसुनवाई की और चाय का आनंद लिया। इस दौरान उन्होंने यूपीआई के माध्यम से डिजिटल पेमेंट कर डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा डबल इंजन की सरकार द्वारा प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन कार्यक्रम, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और मुख्यमंत्री स्वनिधि योजना से छोटे व्यापारियों एवं बेरोजगार युवाओं को सब्सिडी एवं कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध करवाकर उनका आर्थिक सशक्तिकरण सुनिश्चित किया जा रहा है। ग्रामवासियों में जताया मंत्री का आभार सरपंच सांगरिया श्री तेजाराम चौधरी ने कहा 14 सितम्बर को माननीय मंत्री श्री जोगाराम पटेल ने जिला कलक्टर और नगर निगम आयुक्त को मौके पर बुलाकर ग्रामवासियों को आश्वाशन दिया था कि आज ही गंदे पानी की निकासी सुनिश्चित की जाएगी। उसी दिन वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम सीवरेज के गंदे पानी का निकासी शुरू हो गई। इसलिए आज ग्रामवासियों के एक प्रतिनिधि मंडल द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

भारत का डर और इजरायल की चिंता: पाक-सऊदी रक्षा गठबंधन की वजहें

रियाद सऊदी तेल का राजा है, लेकिन सुरक्षा के मामले में कमजोर। सालों से ईरान उसका सबसे बड़ा दुश्मन रहा। वहीं पाकिस्तान हर तरह से भारत के सामने बौना नजर आता है। दोनों ही मुस्लिम देश एक दूसरे को ढाल की तरह इस्तेमाल करना चाहते हैं।  रियाद के यमामा पैलेस में एक ऐतिहासिक डील देखने को मिली। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गले मिलकर 'स्ट्रेटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट' (एसएमडीए) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता साफ कहता है: एक देश पर मतलब दोनों पर हमला। लेकिन यह सिर्फ कागजों का खेल नहीं, बल्कि दो देशों की गहरी मजबूरी का नतीजा है। एक तरफ पाकिस्तान, जो परमाणु शक्ति होने के बावजूद भारत के सामने बेबस महसूस करता है। दूसरी तरफ सऊदी अरब है, जो ईरान की पुरानी दुश्मनी से जूझता था, लेकिन अब इजरायल को सबसे बड़ा खतरा मानने लगा है। खाड़ी के देशों के लिए यह समझौता एक नई ढाल कहा जा रहा है, जो अमेरिकी सुरक्षा गारंटी पर सवाल उठाने के बाद आई। आइए, विस्तार से समझते हैं कि यह समझौता क्यों हुआ, कैसे हुआ, और इसके पीछे की सच्ची कहानी क्या है। पाकिस्तान का भारत डर: परमाणु ताकत, लेकिन कन्वेंशनल कमजोरी पाकिस्तान दुनिया का छठा सबसे बड़ा परमाणु हथियार संपन्न देश है। उसके पास करीब 170 परमाणु हथियार हैं, जो किसी भी हमले का जवाब देने के लिए तैयार हैं। लेकिन कन्वेंशनल यानी पारंपरिक जंग में भारत के सामने यह बौना नजर आता है। ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स 2025 के मुताबिक, भारत की मिलिट्री रैंकिंग दुनिया में चौथी है, जबकि पाकिस्तान 12वीं पर खिसक गया है। सैनिकों की तुलना: भारत के पास 14.6 लाख एक्टिव सैनिक हैं, पाकिस्तान के सिर्फ 6.5 लाख। भारत के रिजर्व फोर्स 11.5 लाख हैं, पाकिस्तान के सिर्फ 5 लाख। हथियारों का फर्क: भारत के पास 4,200 से ज्यादा टैंक, 2,200 से ज्यादा लड़ाकू विमान और 290 से ज्यादा नौसैनिक जहाज हैं (जिनमें 2 एयरक्राफ्ट कैरियर शामिल)। पाकिस्तान के पास 2,600 टैंक, 1,400 विमान और महज 121 जहाज। बजट का अंतर: भारत का डिफेंस बजट 2025-26 के लिए 79 बिलियन डॉलर (करीब 6.8 लाख करोड़ रुपये) है, जो पाकिस्तान के 10 बिलियन डॉलर से 8 गुना ज्यादा। यह फर्क सिर्फ आंकड़ों में नहीं, जमीनी हकीकत में भी दिखा। मई में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया। 7 मई को भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर और पंजाब प्रांत सहित कई इलाकों में 9 ठिकानों पर मिसाइल हमले किए। सकड़ों आतंकी मारे गए। चार दिनों तक चली इस जंग में पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई की, लेकिन फिर भारत ने अपनी ब्रह्मोस मिसाइल से पाकिस्तान के अनेकों एयरबेस उड़ा दिए। मजबूरन पाकिस्तान को 10 मई को सीजफायर की गुहार लगानी पड़ी। इस संघर्ष ने पाकिस्तान को एहसास दिलाया कि कन्वेंशनल ताकत में भारत से मुकाबला मुश्किल है। परमाणु हथियार आखिरी हथियार हैं, लेकिन परमाणु जंग शुरू होते ही सब कुछ तबाह हो सकता है। इसलिए पाकिस्तान को एक मजबूत दोस्त की जरूरत थी, जो भारत के खिलाफ बैलेंस बनाए। सऊदी अरब, जो पाकिस्तान को आर्थिक और मिलिट्री मदद देता रहा है, परफेक्ट चॉइस था। सऊदी का डर: ईरान से इजरायल तक, खतरा बढ़ा सऊदी अरब तेल का राजा है, लेकिन सुरक्षा के मामले में कमजोर। सालों से ईरान उसका सबसे बड़ा दुश्मन रहा। यहां एक बड़ी ही दिलचस्प बात ये है कि इजरायल और ईरान एक दूसरे के सबसे बड़े दुश्मन हैं। लेकिन दोनों की सऊदी अरब से नहीं बनती। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने 2019 में सऊदी के आरामको प्लांट पर ड्रोन हमला किया था। 2025 में भी इजरायल-ईरान से टेंशन बढ़ी। लेकिन असली टर्निंग पॉइंट आया 9 सितंबर 2025 को। कतर की राजधानी दोहा के लीक्तैफिया इलाके में इजरायली एयरस्ट्राइक हुई। हमला हमास के नेताओं पर था, जो कतर सरकार के रेसिडेंशियल कॉम्प्लेक्स में सीजफायर प्रपोजल पर मीटिंग कर रहे थे। हमले में 5 हमास मेंबर, 1 कतरी सिक्योरिटी ऑफिसर और नागरिक मारे गए। कतर ने इसे 'स्टेट टेररिज्म' कहा। अमेरिका ने कतर को मेजर नॉन-नाटो एली बनाया है और दोहा में उसका अल उदेद एयरबेस है जोकि मिडिल ईस्ट का सबसे बड़ा यूएस बेस। फिर भी, इजरायल ने हमला कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें पहले से खबर नहीं थी। यह हमला खाड़ी देशों के लिए बड़ा झटका था। कतर ने इजरायल को अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़ने का दोषी ठहराया। 15 सितंबर को दोहा में अरब-इस्लामिक समिट हुई, जहां सऊदी क्राउन प्रिंस समेत कई लीडर्स ने इजरायल की निंदा की। लेकिन कोई ठोस एक्शन नहीं हुआ। सऊदी को लगा कि अमेरिकी सुरक्षा गारंटी भरोसेमंद नहीं रही। ईरान पुराना खतरा था, लेकिन अब इजरायल ने जगह ले ली। चैथम हाउस के डायरेक्टर सनम वकील कहते हैं, "गल्फ स्टेट्स अब इजरायल को सबसे बड़ा सिक्योरिटी थ्रेट मानते हैं।" इजरायल के हमले ने अरब देशों को भड़का दिया यह समझौता इजरायल के प्रति एक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इजरायल को मध्य पूर्व का एकमात्र परमाणु हथियार संपन्न देश माना जाता है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के इजरायल पर हमले के बाद से इजरायल ने ईरान, लेबनान, फिलिस्तीनी क्षेत्रों, कतर, सीरिया और यमन में व्यापक सैन्य कार्रवाई की है। इस महीने की शुरुआत में कतर पर इजरायल के हमले ने अरब देशों को भड़का दिया। एक वरिष्ठ सऊदी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया, "यह समझौता किसी विशिष्ट देश या घटना के जवाब में नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे गहरे सहयोग को संस्थागत रूप देने का कदम है।" हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षेत्रीय तनावों के बीच सऊदी अरब की सुरक्षा चिंताओं को दर्शाता है।