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शोध में खुलासा: दुबलापन हो सकता है मोटापे से भी ज्यादा घातक

नई दिल्ली अधिक वजन-मोटापा मौजूदा समय की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-5) के आंकड़े के मुताबिक देश में 15-49 वर्ष की आयु के 23% से ज्यादा पुरुष और 24% महिलाएं अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं। ये साल 2000 के दशक की शुरुआत से वयस्कों में क्रमशः 91% और 146% की वृद्धि है। वसा और चीनी वाली चीजों के अधिक सेवन, प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों, शहरीकरण के कारण गतिहीन होती जीवनशैली और बदलते सामाजिक-आर्थिक मानकों को इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है। बढ़ते वजन को डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक और यहां तक कि कुछ कैंसर के खतरे को भी बढ़ाने वाला माना जाता रहा है। अधिक वजन और इसके कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं पर तो अक्सर चर्चा होती रहती है। लेकिन अब यहां ट्विस्ट ये है कि हाल के अध्ययनों में एक चौंकाने वाली बात बताई है। विशेषज्ञों ने अलर्ट किया है कि अधिक वजन तो खतरनाक है ही पर बहुत ज्यादा दुबला-पतला होना उससे भी गंभीर समस्या है। मसलन शरीर को स्वस्थ रखना है कि वजन को सामान्य रखने पर ध्यान देना जरूरी है। बहुत ज्यादा दुबला-पतला होना भी खतरनाक एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला है कि बहुत ज्यादा दुबला-पतला होना, अधिक वजन या मोटापे से ज्यादा घातक हो सकता है। वैज्ञानिकों ने पांच वर्षों में 85,761 व्यक्तियों का अध्ययन किया, जिसके दौरान आठ प्रतिशत प्रतिभागियों (7,555) की मृत्यु हो गई। प्रतिभागियों में से 81.4 प्रतिशत महिलाएं थीं और अध्ययन की शुरुआत में उनकी औसत आयु 66.4 वर्ष थी। डेनिश वैज्ञानिकों ने पाया कि जो लोग बहुत कम बीएमआई वाले थे उनमें गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण असमय मृत्यु का खतरा, मोटे लोगों की तुलना में अधिक देखी गई। अध्ययन में सामने आई चौंकाने वाली बातें साइंसडेली में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, अंडरवेट कैटेगरी (18.5 और उससे कम बीएमआई) वाले लोगों में गंभीर रोगों के खतरे और असमय मृत्यु का जोखिम, अधिक वजन (25-30 बीएमआई) वालों की तुलना में 2.7 गुना अधिक थी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, ये मानते रहना कि सिर्फ अधिक वजन वाले लोगों में गंभीर रोगों का खतरा होता है, ये सही नहीं है। हमने अध्ययन में पाया है कि सामान्य से कम वजन होना आपके लिए अधिक खतरनाक हो सकता है। डेनमार्क स्थित आरहूस यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में प्रोफेसर डॉ. सिग्रिड बर्ज ग्रिबशोल्ट ने बताया कि इन डेटा को देखते समय कई बातों को ध्यान में रखना चाहिए। कुछ लोगों का वजन किसी अंतर्निहित बीमारी के कारण कम हो सकता है। हमने पाया कि दुबले-पतले लोगों को भी घातक हार्ट अटैक होने का खतरा हो सकता है क्योंकि उनके शरीर में छिपी हुई वसा हृदय की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर देती है। ये खतरनाक फैट जिसे विसरल फैट कहा जाता है, शरीर के अंदर गहराई तक जमा हो जाती है। इसके लिवर, पेट और आंतों के चारों ओर जमा होने का खतरा अधिक रहता है।   वजन को लेकर बरतें सावधानी आमतौर पर दुबले-पतले दिखने वाले लोगों में माना जाता है कि इनके शरीर में फैट कम है, हालांकि ये अंदर ही अंदर हानिकारक मात्रा में फैट जमा कर रहे होते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों में इसका स्तर अधिक था, उनके हृदय और रक्त वाहिकाएं तेजी से बूढ़ी हो रही थीं। यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित निष्कर्ष यह भी बताते हैं कि हृदय स्वास्थ्य के मामले में, शरीर का आकार केवल वजन से ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है। विशेषज्ञों ने कहा कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जब भी बात की जाए तो अब सिर्फ बढ़ते वजन को खतरा मानना ठीक नहीं है, कम वजन या दुबले-पतले लोगों को भी अलर्ट रहने की आवश्यकता है।

उत्तर भारत में मौसम बदलेगा रंग, 25 सितंबर तक चलेगी खुश्क हवाएं

चंडीगढ़ हरियाणा से मानसून की विदाई शुरू हो चुकी है। अगले 4-5 दिन तक प्रदेश के तापमान में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। मौसम विभाग का कहना है कि यह स्थिति 25 सितंबर तक बनी रहेगी। मौसम विभाग के मुताबिक इस दौरान प्रदेश के दिन के तापमान में वृद्धि देखने को मिलेगी। प्रदेश में 20 सितंबर तक औसतन 411.7 एमएम बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक 568.4 एमएम बारिश हो चुकी है, जो सामान्य से 43 प्रतिशत ज्यादा है। सबसे ज्यादा बारिश यमुनानगर में 1116.9 एमएम दर्ज की गई है जबकि सबसे कम बारिश सिरसा में 346.6 एमएम दर्ज की गई है। हालांकि रात के तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है। वहीं, कई जिलों में अभी भी खेतों में बरसाती पानी भरा हुआ है, जिसके चलते फसलें खराब हो रही हैं। सरकार के आदेश पर रेवेन्यू पटवारी फील्ड में उतरे हैं और सर्वे कर रहे हैं, ताकि फसलों में हुए नुकसान का आकलन किया जा सके।   हिसार स्थित हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विभाग के अध्यक्ष डॉ. मदनलाल खीचड़ ने बताया कि राजस्थान के ऊपर एक एंटी साइक्लोनिक सर्कुलेशन बनने से उत्तर-पश्चिमी खुश्क हवाएं चलेंगी। इससे हरियाणा में मौसम परिवर्तनशील, लेकिन खुश्क रहने की संभावना है। इस दौरान प्रदेश में दिन के तापमान में हल्की बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिससे बीच-बीच में हल्के बादल आने की भी संभावना है। 25 सितंबर तक मौसम ऐसे ही रहेगा।   शनिवार को हरियाणा में सबसे गर्म जिला पलवल रहा, जहां 36.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। सबसे कम तापमान पानीपत के उझा क्षेत्र के आसपास रहा, जहां 32.4 डिग्री तापमान दर्ज किया गया।उधर, हिसार, भिवानी, मेवात, जींद, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र समेत कई जिलों में बरसाती पानी में फसलें अभी भी डूबी हुई हैं। रेवेन्यू पटवारी खेतों में जाकर सर्वे कर रहे हैं और फसल नुकसान को पोर्टल पर अपलोड कर रहे हैं।  

नवरात्र पर यात्रियों को तोहफ़ा, इतवारी से कोरबा तक MEMU स्पेशल ट्रेन की सुविधा

रायपुर नवरात्र पर्व पर ट्रेनों में यात्रियों की होने वाली अतिरिक्त भीड़ को ध्यान में रखते हुए रेलवे कोरबा-नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी) कोरबा के मध्य नवरात्र फेस्टिवल मेमू स्पेशल ट्रेन चला रही है. 25 सितंबर से तीन अक्टूबर तक चलने वाली इस ट्रेन के परिचालन से उन यात्रियों को राहत मिलेगी, जो डोंगरगढ़ मां बम्बलेश्वरी मंदिर व मड़वारानी मंदिर दर्शन को जाने वाले हैं. मेमू स्पेशल होने के कारण रिजर्वेशन या आरक्षित कोच की समस्या भी नहीं रहेगी.  नेताजी सुभाष चंद्र बोस-कोरबा मेमू 06883 नंबर के साथ नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्टेशन से प्रतिदिन सुबह पांच बजे रवाना होगी और 19:30 बजे कोरबा रेलवे स्टेशन पहुंचेगी. इसी तरह वापसी में कोरबा-नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेमू 06884 से कोरबा स्टेशन से प्रतिदिन सुबह 5:30 बजे छूटकर 19:30 बजे नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्टेशन पहुंचेगी. इस स्पेशल ट्रेन के परिचालन से इस रेल मार्ग पर चलने वाली अन्य ट्रेनों में भीड़ का दबाव कम होगा और यात्री बिना किसी परेशानी के गंतव्य तक पहुंच सकते हैं. ट्रेन का परिचालन समय भी जारी अरेलवे ने ट्रेन का परिचालन समय और जिन स्टेशनों में ट्रेन का ठहराव रहेगा, उससे संबंधित जानकारी जारी कर दी है. इसके तहत नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्टेशन से ट्रेन 5:00 बजे छूटकर कलमना, कन्हान, सलवा, चचेर, रेव्रत, खत, भंडारारोड, कोका, तुमसर रोड, मुंडीकोटा, तिरोरा, काचेवानी, गंगाझारी स्टेशन में ठहरते हुए 7:59 बजे गोंदिया, 9:50 बजे डोंगरगढ़, 10:43 बजे राजनांदगांव पहुंचेगी. 11:40 बजे दुर्ग और भिलाई नगर, भिलाई पावर हाउस, कुम्हारी, सरस्वती नगर स्टेशन में रुकते हुए 13:12 बजे रायपुर रेलवे स्टेशन, 14:29 बजे भाटापारा, 15:50 बजे बिलासपुर पहुंचेगी. बिलासपुर से छूटने के बाद यह ट्रेन गतौरा, जयरामनगर, अकलतरा, जांजगीर-नैला, चांपा, बालपुर स्टेशन में ठहरकर 17:40 बजे मड़वारानी और 19:30 बजे कोरबा रेलवे स्टेशन पहुंचेगी. कोरबा से 5:30 बजे छूटकर 5:54 बजे मड़वारानी, 7:55 बजे बिलासपुर और 19:30 बजे नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्टेशन पहुंचेगी.

स्वदेशी वस्तुओं की खरीदी करेंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जीएसटी की दरों में कटौती के बारे में व्यापारियों को देंगे जानकारी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार (22 सितंबर को) भोपाल के ऐतिहासिक 'चौक बाजार में' नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी के प्रचार अभियान में शामिल होंगे। कार्यक्रम का शुभारंभ दोपहर 2:30 बजे भवानी मंदिर, सोमवारा चौक पर होगा, जहां मुख्यमंत्री डॉ. यादव के जीएसटी प्रचार अभियान का स्वागत किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शारदीय नवरात्र की घट स्थापना अवसर पर यहां कर्फ़्यू वाली माता मंदिर में दर्शन-पूजन कर शुभाशीष प्राप्त करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव चौक बाजार में ही पुलिस चौकी से दीपाली साड़ी प्रतिष्ठान तक पैदल भ्रमण करेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री बाजार में खरीददारी करने आये ग्राहकों और व्यापारियों से जीएसटी के बारे में चर्चा करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव व्यापारियों को जीएसटी रेजोल्यूशन की प्रतियां वितरित करेंगे और व्यापारियों को समझाइश देकर जीएसटी को लेकर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान भी करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रचार अभियान के दौरान स्वदेशी हैंडलूम्स और खादी कपड़े से बने परिधानों की खरीददारी करेंगे। साथ ही विभिन्न भुगतान माध्यमों के बारे में जानकारी देकर आमजन को डिजिटल पेमेंट प्रणाली अपनाने का संदेश भी देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव अपरान्ह 3 बजे श्री मोतीलाल मन्नूलाल धर्मशाला पहुंचेंगे, जहां वे व्यापारिक, वाणिज्यिक एवं सामाजिक संगठनों के करीब 300 प्रतिनिधियों से रूबरू होकर संवाद करेंगे। संवाद के दौरान केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी की दरों में कटौती किए जाने से क्रेता-विक्रेता को होने वाले लाभों की जानकारी दी जायेगी।  

हर दिन अलग भोग, अलग शुभ संकेत: नवरात्रि 2025 में माता को प्रसन्न कैसे करें

नवरात्रि के नौ दिनों में हर दिन माता रानी को अलग-अलग भोग अर्पित करने की परंपरा है. जालोर के ज्योतिषाचार्य पंडित भानुप्रकाश दवे बताते हैं कि मां को घी, शक्कर, दूध, मालपुआ, केला, शहद, पान, नारियल और अंत में हलवा-पूरी-चना चढ़ाने से देवी प्रसन्न होती हैं और घर-परिवार में सुख, समृद्धि व शांति का आशीर्वाद देती हैं. नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है. इस दिन माता को घी का भोग लगाया जाता है. घी पवित्रता और शक्ति का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि घी का नैवेद्य अर्पित करने से जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य और दीर्घायु प्राप्त होती है. यह भोग घर के वातावरण को भी शुद्ध और पवित्र बनाता है. दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना होती है. इस दिन माता को शक्कर का भोग अर्पित किया जाता है. शक्कर जीवन में मिठास और सौभाग्य का प्रतीक है. माना जाता है कि इस दिन शक्कर चढ़ाने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और भक्त की कठिनाइयां दूर होती हैं. तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है. इस दिन माता को दूध का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है. दूध शुद्धता, संतुलन और पोषण का प्रतीक है. इस भोग से माता प्रसन्न होती हैं और भक्त को मानसिक शांति, धैर्य और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं. चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा होती है. इस दिन माता को मालपुआ का भोग अर्पित किया जाता है. मालपुआ वैभव, स्वाद और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. इसे अर्पित करने से जीवन में आर्थिक उन्नति और घर में खुशहाली बनी रहती है. पांचवें दिन मां स्कंदमाता की आराधना की जाती है. इस दिन माता को केले का भोग चढ़ाया जाता है. केला पवित्रता और सादगी का प्रतीक है. इसे अर्पित करने से संतान सुख प्राप्त होता है और परिवार में शांति का वातावरण बना रहता है. छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है. इस दिन माता को शहद का भोग लगाया जाता है. शहद मिठास और सेहत का प्रतीक है. इसे चढ़ाने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, स्वास्थ्य लाभ और रिश्तों में मधुरता आती है. सातवें दिन मां कालरात्रि की उपासना होती है. इस दिन माता को पान का भोग अर्पित किया जाता है. पान शुभता और सौभाग्य का प्रतीक है. इसे अर्पित करने से भक्त को भय से मुक्ति मिलती है और साहस तथा आत्मबल की प्राप्ति होती है. आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है. इस दिन माता को नारियल का भोग चढ़ाया जाता है. नारियल पूर्णता और पवित्रता का प्रतीक है. इसे अर्पित करने से भक्त की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का संचार होता है. नवरात्रि के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है. इस दिन माता को हलवा, पूरी और चने की सब्जी का भोग लगाया जाता है. यह भोग पूर्णता और संतोष का प्रतीक है. इस दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व है. माना जाता है कि इस दिन का भोग माता को प्रसन्न कर जीवन में सफलता और सिद्धि प्रदान करता है.

स्व का जागरण: मातृशक्ति ने दिया आत्मविश्वास और सफलता

ग्वालियर  ग्वालियर में मातृशक्ति में स्व का भाव जगाने के लिए संकल्प से सिद्धी का मूल ध्येय सिद्ध किया है महिलाओं के समूह स्वयं सिद्धा ने। यह संस्था महिलाओं में सांस्कृतिक संवर्द्धन और आंतरिक गुणों की पहचान कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रहा हैं। कोरोना काल में आपदा में अवसर तलाशने के लिए यह संस्था अस्तिव में आई। वर्तमान में संस्था से जुड़कर 350 महिलाएं समाज के नवसृजन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहीं हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह संस्था महिलाओं को स्वयं के उत्पाद निर्मित करने में मदद करने के साथ ही उन्हें बाजार भी उपलब्ध कराती है। इसके बदले में संस्था महिला सदस्यों से कोई कमीशन नही लेती है। इसलिए उत्पादन से लेकर मुनाफे तक सदस्यों का पूर्ण अधिकार होता है। आज समूह की सदस्य आस्ट्रेलिया, जापान, दुबई, इटली,जर्मनी व अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों के बीच अपने उत्पाद पहुंचा रही हैं। इन महिलाओं द्वारा निर्मित महाराष्ट्रीयन, गुजराती, पंजाबी व्यंजनों के साथ-साथ हस्तशिल्प उत्पाद इन देशों में काफी पसंद किए जा रहे हैं। स्वयं सिद्धा संस्था की सूत्रधार महिमा तारे ने बताया कि कोरोना संक्रमण काल में समाज घोर निराशा और हताशा का वातावरण निर्मित था। उस समय नया काम करने की कल्पना करना भी असंभव प्रतीत हो रहा था, क्योंकि बाजार बंद था, नौकरियों पर घनघोर काले बादल छाए हुए थे। कई परिवारों में दो वक्त की रोटी की व्यवस्था करना चुनौती पूर्ण था। जीवन का सरकार पर आश्रित होकर चलना मुश्किल था। ऐसे माहौल में महिलाओं को घर की दहलीज लांघकर स्वयं को सिद्ध करने का संकल्प भी डरावना सा लग रहा था। साहस और हिम्मत के साथ पहला पग किसी तरह से आगे बढ़ाया। श्रीमती तारे कहती हैं कि संस्था का उद्देश्य केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना ही नही हैं, उनका व्यक्तित्व विकास और उनके सपनों को साकार करना मूलध्येय है। आंवले के उत्पादों से की शुरुआत संस्था की महिला सदस्यों को ग्वालियर के राजामाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में आंवले की प्रोसेसिंग कर इसके उत्पाद बनाने का अवसर मिला। सदस्यों को यहां आंवले की धुलाई, छंटाई, कटाई, और फिर विभिन्न तरीकों से गूदा, रस या पाउडर तैयार करने का प्रशिक्षण मिला। इससे उन्होंने आंवला कैंडी, अचार, च्यवनप्राश, जूस, या कास्मेटिक उत्पाद बनाना सीखा इसके साथ सभी सदस्यों को उत्पादों के मानकीकरण और पाश्चुरीकरण का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशासन से मिला आर्डर रद हो गया महिमा तारे बताती हैं कि दीपावली से पहले का समय था। पहला आर्डर जिला प्रशासन से स्वल्पहार का मिला। हम लोग उत्साहित थे। प्रत्येक महिला ने 10-10 किलो की मात्रा में व्यंजन तैयार किये। अचानक कोरोना गाइड लाइन के कारण प्रशासन ने आर्डर यह कहकर रद कर दिया कि केवल पैकेज्ड फूड लेने की अनुमति हैं। सभी महिलाएं निराश होकर सारा सामान मेरे घर पर रख गईं। बैजाताल पर स्टाल लगाकर इन व्यंजनों को बेचने का प्रयास किया, पूरे दिन बैठने के बाद कोई सामान नही बिका। निराशा के बीच आशा की किरण दीपावली के रूप में सामने आई और यह सामान हाथों-हाथों बिक गया। महिलाओं को मना करना पड़ा कि दीदी अब कोई आर्डर मत लेना। ऋतुओं के अनुसार तैयार करती है उत्पाद संस्था से जुड़ी महिलाओं के पास पूरे माह कार्य रहता है, क्योंकि महिला सदस्य ऋतुओं के अनुसार उत्पाद तैयार करती हैं, जिससे उनका माल हाथों-हाथों बिक जाता है। महिलाएं अचार, पापड़ नियमित तौर करती हैं। त्योहारों, होली, दीपावली, रक्षाबंधन, नवरात्र पर परंपरागत पकवान बाखरबड़ी, खमण-ढोकला, गुजिया, मठरी, नमकीन, पूरनपोली, गुड की रोटी बनाती हैं। व्यजनों का निर्माण सभी बहनें एक ही रसोई में एक दूसरे का हाथ बांटते हुए करती हैं।  

बाढ़ से उबरते ही सूखे की मार! देहरादून के लोग अब हर बूंद पानी के लिए तरस रहे

देहरादून कुछ दिन पहले बाढ़ से त्राहीमाम कर रहे देहरादून में अब पानी का 'सूखा' पड़ गया है। आपदा में नदी व स्रोतों से शहर के लिए आने वाली पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होकर बहने के कारण अभी भी करीब एक लाख की आबादी के बीच पेयजल समस्या बरकरार है। छह दिन से लगातार पेयजल आपूर्ति ठप होने से लोगों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। हाल यह है कि कई इलाकों में लोगों को नहाने और खाना बनाने के लिए भी पानी नहीं मिल रहा और वह बूंद-बूंद को तरस रहे हैं। बीते सोमवार-मंगलवार मध्य रात को देहरादून में आई आपदा से शहर में 2.35 लाख की आबादी के लिए बांदल नदी, बीजापुर कैनाल शिखर फाल, ग्लोगी फाल, कार्लीगार्ड स्रोत, केलाघाट स्रोत और कोल्हूखेत स्रोत से आने वाली विभिन्न पाइपलाइनें क्षतिग्रस्त हो गई थी। जिससे शहर के 47 हजार से अधिक घरों में पेयजल संकट खड़ा हो गया था। हालांकि बारिश थमने के बाद जल संस्थान ने पाइपलाइनों के पुनर्स्थापन के कार्य शुरू कर दिए हैं। इससे बांदल नदी से दिलाराम चौक और आसपास के इलाकों की आपूर्ति एक समय के लिए बहाल हो गई है। ग्लोगी फाल से पुरकुल और आसपास के इलाकों को जाने वाला पानी भी एक समय के लिए शुरू हो गया है। अन्य स्रोतों से आने वाली आपूर्ति में मरम्मत कार्य चल रहा है। जल्द ही उनकी भी आपूर्ति शुरू होगी। व्यवस्थित रूप से नहीं बंट रहे टैंकर पेयजल आपूर्ति प्रभावित होने पर जल संस्थान टैंकर से सभी इलाकों में पानी दे रहा है। लेकिन टैंकरों की कमी के चलते वह व्यवस्थित रूप से नहीं बंट पा रहे। जल संस्थान रोजाना प्रभावित इलाकों में टैंकरों के 500 से अधिक चक्कर लगवा रहा है। लेकिन, इसके बावजूद बहुत से लोगों को टैंकर नहीं मिल रहा।मजबूरी में उन्हें फिलिंग स्टेशन पर पहुंचकर खुद टैंकर ले जाना पड़ रहा है। इन इलाकों में समस्या अभी भी बरकरार दून विहार, नयागांव, आर्य नगर, साकेत कालोनी, डीएल रोड, पुरुकुल, चंद्रोटी, हाथी बड़कला, शहंशाही, पुराना राजपुर, डाकपट्टी, जाखन, बाडीगार्ड, अनारवाला, कुठालगेट और आसपास के इलाकों में अभी पेयजल आपूर्ति की भारी किल्लत है। दिलाराम, झंडा बाजार, कालीदास रोड, इंदिरा विहार, पलटन बाजार, चकराता रोड, इसी रोड, ओल्ड डालनवाला, बकरालवाला, मालसी, सिनोला, किरसाली, धोरण, कालागांव, वीर गब्बर सिंह बस्ती, बारीघाट, बामण गांव, खालागांव, भगवंतपुर, सलान गांव, उतड़ी गांव आदि आसपास के इलाकों में एक समय के लिए आपूर्ति शुरू हो गई है।  

धान खरीद सीजन की शुरुआत, पराली जलाने पर बोले मंत्री – किसान समझदारी दिखा रहे

करनाल हरियाणा की मंडियों में आज से किसानों धान की फसल खरीद शुरू होगी। इसकी जानकारी कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने दी। साथ में किसानों द्वारा धान कटाई के बाद पराली जलाने को लेकर कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को पराली प्रबंधन के लिए सहायता के रूप में ₹1200 की अनुदान राशि प्रदान की जा रही है। पराली जलाने के प्रदूषण फैलता है किसान काफी जागरूक हो चुका है इस बार किस पराली नहीं जलाएगा। करनाल पहुंचे हरियाणा के कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों की मांग पर इस बार हरियाणा में एक सप्ताह पहले ही धान की खरीद मंडियों में कल से शुरू कर दी जाएगी। इसके लिए मुख्यमंत्री द्वारा निर्देश जारी कर दिए गए हैं। एक अक्टूबर से शुरू होनी थी धान की खरीद किसानों के लिए सबसे बड़ा तोहफा है। पहले धान की खरीद एक अक्टूबर से शुरू होनी थी. हालातो को देखते हुए अब धान की खरे ई 22 सितंबर से शुरू होगी. उन्होंने कहा प्रदेश की मंडियों में किसानों के लिए सभी तरह के इंतजाम पूरे किए गए हैं किसी भी किसान को कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी। कृषि मंत्री ने किसानों से की ये अपील कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को हमने प्राकृतिक खेती की ओर लेकर जाना है. क्योंकि देश के अंदर कैंसर की बीमारी का काफी प्रकोप बढ़ गया है। अधिक डीएपी यूरिया के कारण ऐसे मामले अधिक हुए हैं। अगर किसान प्रकृति और रासायनिक खेती करेगा तो लोगों का स्वास्थ्य ठीक रहेगा।

लाखों छात्रों के लिए राहत! UP-TET फीस बढ़ोतरी पर CM योगी ने लिया बड़ा कदम

लखनऊ  यूपी-टीईटी (UP-TET) परीक्षा देने की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए एक राहत भरी खबर आई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने साफ कर दिया है कि परीक्षा का आवेदन शुल्क अब नहीं बढ़ेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद इस बारे में सख्त निर्देश दिए हैं। परीक्षा शुल्क बढ़ाने की थी तैयारी मिली जानकारी के मुताबिक, शिक्षा विभाग ने यूपी-टीईटी का आवेदन शुल्क 600 रुपए से बढ़ाकर 1700 रुपए करने का प्रस्ताव तैयार किया था। अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता, तो दोनों स्तरों (प्राथमिक और उच्च प्राथमिक) की परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों को 3400 रुपए देने पड़ते। लेकिन जैसे ही मुख्यमंत्री को इस प्रस्ताव की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत साफ निर्देश दिए कि अभ्यर्थियों पर किसी भी तरह का अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाएगा। योगी जी ने स्पष्ट कहा – 'कोई शुल्क वृद्धि नहीं होगी।' अभ्यर्थियों ने ली राहत की सांस सीएम योगी के फैसले के बाद अभ्यर्थियों ने राहत की सांस ली है। अब यूपी-टीईटी परीक्षा का फॉर्म पुराने शुल्क पर ही भरा जाएगा, यानी कि प्राथमिक स्तर (कक्षा 1–5) – ₹600, उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6–8) – ₹600, दोनों स्तरों के लिए – कुल ₹1200  । 2026 में होगी परीक्षा उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UP-TET) अब 29 और 30 जनवरी 2026 को आयोजित की जाएगी। शिक्षा सेवा चयन आयोग ने परीक्षा की तैयारियां शुरू कर दी हैं। परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। इसी सिलसिले में आयोग ने आवेदन शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था, जिसे अब मुख्यमंत्री ने खारिज कर दिया है।   क्या है UP-TET परीक्षा? यूपी-टीईटी यानी उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा राज्य के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए अनिवार्य परीक्षा है। यह परीक्षा दो स्तरों पर होती है:- – प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5 तक) – उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6 से 8 तक) योग्यता क्या होनी चाहिए? – बी.एड, डी.एल.एड या संबंधित विषय में स्नातक डिग्री होना जरूरी है। परीक्षा में निम्नलिखित विषय पूछे जाते हैं: – बाल विकास और शिक्षाशास्त्र – हिंदी भाषा – गणित – पर्यावरण अध्ययन (प्राथमिक स्तर) – विज्ञान / सामाजिक विज्ञान (उच्च प्राथमिक स्तर)  

राज्य चुनाव अधिकारियों को चुनाव आयोग ने दी SIR तैयारी की अंतिम तारीख

नई दिल्ली  चुनाव आयोग ने अपने राज्य चुनाव अधिकारियों को 30 सितंबर तक विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए तैयार रहने को कहा है। चुनाव आयोग के इस निर्देश से साफ है कि अगले महीने से पूरे देश में मतदाताओं के सत्यापन और मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। चुनाव आयोग अक्टूबर-नवंबर की शुरुआत में मतदाता सूची की सफाई का काम शुरू कर सकता है। अधिकारियों के अनुसार, इस महीने की शुरुआत में राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारियों (सीईओ) के एक सम्मेलन में, चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों ने उन्हें अगले 10 से 15 दिनों में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए तैयार रहने को कहा था। लेकिन अधिक स्पष्टता के लिए, 30 सितंबर की समय सीमा तय की गई थी। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर दिख रही लिस्ट सीईओ को निर्देश दिया गया है कि वे अपने राज्यों की मतदाता सूचियां तैयार रखें। ये वोटर लिस्ट पिछली एसआईआर के बाद प्रकाशित हुई थीं। कई राज्य सीईओ ने अपनी पिछली एसआईआर के बाद प्रकाशित मतदाता सूचियां अपनी वेबसाइटों पर पहले ही डाल दी हैं। दिल्ली के सीईओ की वेबसाइट पर 2008 की मतदाता सूचियां हैं, जब राष्ट्रीय राजधानी में आखिरी बार गहन पुनरीक्षण हुआ था। उत्तराखंड में, पिछली एसआईआर 2006 में हुई थी और उस वर्ष की मतदाता सूची अब राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर उपलब्ध है। बिहार के बाद पूरे देश में SIR राज्यों में अंतिम एसआईआर ही कट-ऑफ तिथि होगी, ठीक उसी तरह जैसे बिहार की 2003 की मतदाता सूची का उपयोग चुनाव आयोग द्वारा गहन पुनरीक्षण के लिए किया जा रहा है। अधिकांश राज्यों में अंतिम एसआईआर 2002 और 2004 के बीच हुई थी और पिछले गहन पुनरीक्षण के अनुसार वर्तमान मतदाताओं का मिलान लगभग पूरा हो चुका है। चुनाव आयोग ने कहा है कि बिहार के बाद, पूरे देश में एसआईआर किया जाएगा। इन राज्यों में अगले साल चुनाव असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 में होने हैं। इस गहन पुनरीक्षण का मुख्य उद्देश्य जन्म स्थान की जांच करके विदेशी अवैध प्रवासियों को बाहर निकालना है। यह कदम बांग्लादेश और म्यांमार सहित विभिन्न राज्यों में अवैध विदेशी प्रवासियों पर कार्रवाई के मद्देनजर महत्वपूर्ण है।