samacharsecretary.com

शिक्षा विभाग ने किया ऐलान, पश्चिम बंगाल के स्कूल रहेंगे बंद, जानिए क्यों!

कोलकाता कोलकाता और दक्षिण बंगाल के अन्य जिलों में भारी बारिश के कारण जन-जीवन ठप्प हो जाने के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने मंगलवार को सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में निर्धारित समय से दो दिन पहले ही दुर्गा पूजा की छुट्टियां घोषित कर दी। बिजली के करंट से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जलभराव वाली सड़कों से दूर रहने और स्कूलों में छुट्टियां करने या ऑनलाइन कक्षाएं शुरू करने के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश के बाद, राज्य के शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने घोषणा की कि सभी सरकारी शिक्षण संस्थान 24 और 25 सितंबर को बंद रहेंगे।   24 और 25 सितंबर को सभी शिक्षण संस्थान बंद शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने एक्स हैंडल पर ट्वीट कर कहा कि राज्य में अभूतपूर्व आपदा जैसी स्थिति बनी हुई है। मौजूदा स्थिति में छात्रों को राहत देने और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए मुख्यमंत्री की सलाह के अनुसार, कल और परसों, यानी 24 और 25 सितंबर को सभी शिक्षण संस्थान बंद रखने का निर्णय लिया गया है। शिक्षा मंत्री ने कही ये बातें मंत्री ने कहा कि अनुरोध है कि इस आपदा के दौरान, शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सभी शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी अपने ज़रूरी और अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए घर से काम करें। मंत्री ने आगे कहा, "चूँकि दुर्गा पूजा की छुट्टियाँ 26 सितंबर से शुरू होने वाली हैं, इसलिए प्रभावी रूप से ये छुट्टियाँ कल (बुधवार) से शुरू होंगी। मैं सभी को पूजा की शुभकामनाएं देता हूं। इस आपदा में अपनी जान गंवाने वाले मेरे साथी नागरिकों के परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदना है। कई इलाकों में भारी बारिश कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों में मंगलवार को सामान्य जनजीवन लगभग ठप्प हो गया क्योंकि रात भर हुई भारी बारिश के कारण बड़े पैमाने पर बाढ़ आ गई, जिससे यातायात, सार्वजनिक परिवहन और दैनिक गतिविधियाँ ठप्प हो गईं। शहर में बिजली का झटका लगने से कम से कम सात लोगों की मौत हो गई। शहर के कुछ हिस्सों में कुछ ही घंटों में 330 मिमी से ज़्यादा बारिश हुई, जबकि शहर और उसके उपनगरों के ज़्यादातर हिस्सों में औसतन 250 मिमी से ज़्यादा बारिश हुई।

नर्सिंग छात्रा की मौत से हड़कंप! बीएमएचआरसी में लापरवाही का आरोप, निदेशक के खिलाफ सख्त कदम की मांग

भोपाल भोपाल मेमोरियल हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (बीएमएचआरसी) में प्रथम वर्ष की नर्सिंग छात्रा की मौत से हड़कंप मच गया है। छात्रा की मृत्यु का कारण अस्पताल प्रशासन और प्रभारी निदेशक मनीषा श्रीवास्तव की गंभीर लापरवाही बताया जा रहा है। इस घटना के बाद छात्रों और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने अस्पताल परिसर में धरना शुरू कर दिया है। गंदा पानी और खराब व्यवस्था नर्सिंग छात्र लगातार हास्टल में गंदे और दूषित पानी, खराब भोजन और साफ-सफाई की समस्याओं की शिकायत करते आ रहे थे। एनएसयूआई जिलाध्यक्ष अक्षय तोमर ने आरोप लगाया कि छात्रा की तबीयत खराब होने के बावजूद उसे क्लिनिकल ड्यूटी के लिए मजबूर किया गया। हालत बिगड़ने पर भी उसे उचित इलाज देने की बजाय छुट्टी देकर घर भेज दिया गया। प्रशासन की इस लापरवाही ने एक होनहार छात्रा की जान ले ली। बीएमएचआरसी में कुप्रबंधन के आरोप एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि बीएमएचआरसी भोपाल का सबसे पुराना और बड़ा अस्पताल है, कुप्रबंधन के कारण बदहाल हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभारी निदेशक मनीषा श्रीवास्तव का ध्यान अस्पताल की व्यवस्थाओं पर नहीं है। वे टेंडरों और अपने पुत्र के निजी डायग्नोस्टिक सेंटर के प्रचार में ज्यादा सक्रिय रहती हैं। यही कारण है कि अस्पताल की सेवाएं लगातार गिर रही हैं। प्रभारी निदेशक को तत्काल पद से हटाया जाए, छात्रा की मौत की उच्च-स्तरीय जांच हो, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और नर्सिंग छात्रों को सुरक्षित वातावरण मिले। एनएसयूआई ने चेतावनी दी कि यदि सरकार और प्रशासन ने जल्द कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। निदेशक ने बयान जारी करके दी यह सफाई बीएमएचआरसी प्रशासन को 22 सितंबर को पता चला कि संस्थान के नर्सिंग कॉलेज के फर्स्ट इयर की छात्रा शुभांगीनी दशहरे का भोपाल के एक अस्पताल में देहांत हो गया है। पूरे बीएमएचआरसी के लिए यह दुख का समय है। बीएमएचआरसी प्रबंधन नर्सिंग कॉलेज की छात्रा शुभांगीनी के असामयिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त करता है। संस्था की पूरी टीम इस दुख की घड़ी में शोकाकुल परिवार के साथ खड़ी है और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करती है। आज प्रातः जब नर्सिंग कॉलेज के कुछ विद्यार्थी प्रशासनिक परिसर में अपनी बात रखने आए, तो बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने स्वयं उनसे मुलाकात की। विद्यार्थियों की समस्त बातों को गंभीरता से सुना गया और त्वरित कार्यवाही का भरोसा भी दिलाया गया। डॉ मनीषा श्रीवास्तव, प्रभारी निदेशक, बीएमएचआरसी ने बताया विद्यार्थियों द्वारा लगाए गए आरोप कि संस्था की कैंटीन में मिलने वाले भोजन और पानी की गुणवत्ता खराब है, पूरी तरह निराधार हैं। संस्थान में पीने के लिए उपयोग होने वाले पानी की समय-समय पर वैज्ञानिक जांच कराई जाती है। हाल ही में 9 सितंबर 2025 को कराई गई जांच में पानी पूरी तरह सुरक्षित पाया गया।  

पराली जलाने के मामले बढ़े, पंजाब में 14 FIR, जानें कौन सा जिला सबसे अधिक प्रभावित

पंजाब  पंजाब में धान की कटाई शुरू होते ही पराली जलाने के मामले एक बार फिर से सामने आने लगे हैं। पंजाब सरकार द्वारा सैटेलाइट मॉनिटरिंग के बाद पराली जलाने की संख्या 62 हो गई है। सोमवार को अमृतसर जिले में पराली जलाने के तीन मामले, कपूरथला में एक और तरनतारन में दो मामले सामने आए हैं। किस जिले में कितने मामले? पंजाब में 15 सितंबर से लेकर अब तक पराली जलाने के कुल 62 मामले सामने आए हैं। इनमें से सबसे अधिक 38 मामले अमृतसर जिले से सामने आए हैं। वहीं बरनाला में दो, बठिंडा में एक, फिरोजपुर, होशियारपुर, जालंधर, कपूरथला, संगरूर, एसएएस नगर व मालेरकोटला में एक-एक, पटियाला में सात और तरनतारन में भी सात मामले हुए हैं। प्रशासन ने क्या कार्रवाई की? पंजाब में अधिकारियों की ओर से पराली जलाने के 27 मामलों में 1 लाख 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस जुर्माना राशि में से 50 हजार रुपये की वसूली भी कर ली गई है। वहीं, पुलिस की ओर से ऐसे 14 मामलों में बीएनएस की धारा 223 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। किसान क्यों जलाते हैं पराली? दरअसल, धान की कटाई के बाद रबी की फसल- गेहूं के बुआई के लिए किसानों के पास में काफी कम समय होता है। इसी कारण से कुछ किसान अगली फसल को बोने के लिए पराली को जल्दी से साफ करने के लिए अपने खेतों में आग लगा देते हैं। अक्टूबर और नवंबर महीने में धान की कटाई के बाद दिल्ली में वायु प्रदूषण काफी बढ़ जाता है। ऐसा होने के लिए अक्सर पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं को जिम्मेदार बताया जाता है। बीते साल पराली जलाने के कितने मामले आए? साल 2024 में, पंजाब में पराली जलाने की कुल 10,909 घटनाएं सामने आई थीं। वहीं, साल 2023 में पराली जलाने की घटनाएं 36,663 थीं। इस हिसाब से पराली जलाने की घटनाओं में 70 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी।

उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में नजर आएगा पृथ्वी के प्रति उत्तर प्रदेश का संकल्प

सस्टेनेबिलिटी की दिशा में अग्रसर यूपी, पानी बचाने से लेकर वनों के विस्तार तक की अनोखी पहल आधुनिक सिंचाई तकनीक, ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान और क्लाइमेट रेज़िलिएंस पर फोकस हॉल नंबर 8 में सिंचाई, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग करेंगे उपलब्धियों का प्रदर्शन  25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में यूपीआईटीएस 2025 का भव्य आयोजन  लखनऊ उत्तर प्रदेश को “नए भारत का ग्रोथ इंजन” बनाने की दिशा में योगी सरकार लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस 2025) राज्य की आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक ताकत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने जा रहा है। 25 से 29 सितंबर तक इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा में आयोजित होने वाले इस भव्य आयोजन का यह तीसरा संस्करण होगा, जिसमें व्यापार, उद्योग, संस्कृति, खानपान, तकनीकी नवाचार के अतिरिक्त इस बार सस्टेनेबिलिटी की अनूठी झलक देखने को मिलेगी। योगी सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ संघर्ष में अपनी प्रतिबद्धता का एक सशक्त संदेश देते हुए यहां 'उत्तर प्रदेश प्लेजेस टू द प्लैनेट' यानी पृथ्वी के प्रति उत्तर प्रदेश का संकल्प भी लिया है। यूपीआईटीएस 2025 का यह पहलू इस बात का सशक्त उदाहरण है कि कैसे उत्तर प्रदेश खुद को भारत के ग्रोथ इंजन के साथ-साथ ग्रीन इंजन के रूप में भी स्थापित कर रहा है। हॉल नंबर 8 में होगा उपलब्धियों का प्रदर्शन इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा में 25 से 29 सितंबर के बीच आयोजित होने जा रहे इस आयोजन में हॉल नंबर 8 का दृश्य कुछ खास होगा, जहां सिंचाई, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग अपनी योजनाओं और उपलब्धियों का प्रदर्शन करेंगे। यहां आगंतुकों को दिखाया जाएगा कि किस तरह यूपी आधुनिक सिंचाई समाधानों के जरिए न केवल किसानों की उपज बढ़ा रहा है, बल्कि पानी की भारी बचत भी कर रहा है। यह पहल भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा और किसानों की समृद्धि सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त कर रही है। इस मौके पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया। इस अभियान ने अब तक प्रदेश में करीब पांच लाख एकड़ तक वन आच्छादन बढ़ाने में सफलता पाई है। यह उपलब्धि न केवल पर्यावरणीय संतुलन की दिशा में क्रांतिकारी कदम है, बल्कि हर नागरिक को हरियाली से जोड़ने का एक सशक्त प्रयास भी है। ग्रीन फ्यूचर की ओर अग्रसर उत्तर प्रदेश  कार्यक्रम में यह भी बताया जाएगा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश ने विकास और पारिस्थितिकी के बीच संतुलन साधने का ठोस मॉडल तैयार किया है। सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को ध्यान में रखते हुए राज्य ग्रीन फ्यूचर की ओर तेजी से अग्रसर है। आयोजन समिति के अनुसार, इस सेक्शन का उद्देश्य आगंतुकों को प्रेरित करना और उन्हें यह विश्वास दिलाना है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि यह मॉडल न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए क्लाइमेट जस्टिस और सतत विकास की दिशा में प्रेरक साबित होगा।  पांच दिनों तक बिजनेस, संस्कृति और क्रिएटिविटी का दिखेगा संगम उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो का मंच सज चुका है, जहां 5 दिनों तक व्यापार, संस्कृति, खानपान और रचनात्मकता का अद्भुत मेल देखने को मिलेगा। इस मेगा इवेंट में उत्तर प्रदेश अपनी ताकत और संभावनाओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेगा। आयोजन का मुख्य उद्देश्य राज्य को ग्लोबल सोर्सिंग हब के रूप में स्थापित करना है, जहां छोटे, मध्यम और बड़े उद्योगों से लेकर पारंपरिक वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) के खजाने, आधुनिक तकनीक, हस्तशिल्प और प्रदेश की विविधतापूर्ण व्यंजन संस्कृति सब एक ही छत के नीचे दिखाई देंगे। इस बार आयोजन में एमएसएमई और स्टार्टअप्स को विशेष प्लेटफार्म दिया गया है, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खरीदारों और निवेशकों से जुड़ सकें। वहीं, मेगा इंडस्ट्री सेक्टर की कंपनियां भी अपने उत्पाद और सेवाओं का प्रदर्शन करेंगी। व्यापारियों, निवेशकों और खरीदारों के लिए यह आयोजन न केवल नए अवसरों का द्वार खोलेगा, बल्कि 'मेक इन यूपी' की अवधारणा को सशक्त भी करेगा। प्रदर्शनी में आने वाले विज़िटर्स को खरीदारी और बिज़नेस डील्स के साथ-साथ यूपी के क्राफ्ट, कल्चर और कुजीन का लुत्फ भी मिलेगा। प्रदेश के पारंपरिक शिल्प, पीतल, जरी-ज़रदोज़ी, बनारसी साड़ी से लेकर आधुनिक तकनीकी नवाचारों तक की झलक यहां देखने को मिलेगी। साथ ही, आगंतुकों को अवध, बुंदेलखंड और पूर्वांचल की पाक विरासत का स्वाद चखने का मौका मिलेगा।

कलश स्थापना के लिए गंगा जल ले जा रहे थे, सड़क हादसे में परिवार के 3 सदस्यों की मौत

झारखंड शारदीय नवरात्र के पहले दिन झारखंड के गोड्डा जिले में एक भीषण सड़क हादसा हो गया. हादसे में कार सवार दंपति सहित तीन लोगों की मौत हो गई. हादसे के बाद मौके पर अफरा तफरी मच गई. घटना की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया. घटना के बाद से मृतकों के परिवार में कोहराम मच गया है. मृतक कलश स्थापना के लिए गांगा स्नान कर जल लेकर वापस लौट रहे थे. इसी दौरान यह हादसा हुआ. घटना जिले के महागामा थाना क्षेत्र की है. घटना के दौरान कार गोड्डा जिला के महागामा-एकचारी मुख्य मार्ग से गुजर रही थी. इस दौरान कार अचानक अनियंत्रित हो गई और सड़क से सीधे खाई में गिर गई. इस भीषण हादसे में कार सवार पति- पत्नी सहित 3 लोगों की मौके पर मौत हो गई. घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ लग गई. कार सवार मृतकों की पहचान महागामा ऊर्जा नगर निवासी जोगेंद्र कुमार यादव , उनकी पत्नी बिंदेश्वरी देवी और एक अन्य की पहचान कौशल्या देवी के रूप में हुई हैं. गांगा जल लेकर लौट रहे थे मृतक भीषण हादसे को लेकर मिली जानकारी के मुताबिक नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना और पूजा संपन्न होना था. इसलिए पति- पत्नी सहित 3 लोग कार पर सवार होकर कहलगांव स्थित गंगा घाट गए थे, जहां स्नान करने के बाद गंगा जल लेकर गोड्डा अपने घर लौट रहे थे. इसी बीच तेज रफ्तार कार अनियंत्रित हो गई और सीधे सड़क किनारे खाई में जा गिरी. हादसा इतना भयानक था की कार पूरी तरह चकनाचूर हो गई. परिवार में मचा कोहराम मौके पर पहुंचे लोगों ने हादसे की सूचना स्थानीय महागामा थाना की पुलिस को दिया. सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने क्रेन की मदद से कार को खाई से बाहर निकाला. इसके साथ ही तीनों मृतकों के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए लिए भेज दिया गया. घटना की सूचना पीड़ित परिवार को दी गई. सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया. मामले में पुलिस घटना को लेकर जांच कर रही है.  

चौंकाने वाली घटना: हरियाणा कैबिनेट मंत्री के बंगले में कांस्टेबल ने लिया खुदकुशी का निर्णय

गुरुग्राम हरियाणा के गुरुग्राम से सनसनीखेज वारदात सामने आई है. यहां कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह के सरकारी बंगले में एक पुलिस कांस्टेबल ने सुसाइड कर लिया. वो यहां गार्ड रूम में तैनात था. घटना का खुलासा तब हुआ, जब उसके एक साथी ने उसे कमरे के अंदर बेहोशी की हालत में पाया. तुरंत मंत्री और पुलिस को जानकारी दी गई. आनन-फानन में कांस्टेबल को अस्पताल पहुंचाया गया. मगर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. मृतक की पहचान 49 वर्षीय कांस्टेबल जगबीर सिंह के रूप में हुई है. वो झज्जर जिले के सुखपुरा गांव का रहने वाला था. पुलिस के मुताबिक, 49 साल के कॉन्स्टेबल जगबीर सिंह राव नरबीर सिंह के बंगले के प्रवेश द्वार पर सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात था. शुरुआती जांच में इसे आत्महत्या माना जा रहा है. हालांकि, मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है. पुलिस इस केस की जांच में जुटी हुई है. घटना सिविल लाइंस इलाके की है. यहां हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह के सरकारी बंगले पर सुरक्षा में तैनात एक सिपाही मृत पाया गया. पुलिस के मुताबिक, यह घटना रात ढाई बजे के वक्त हुई है. क्या बोले मामले में SHO? SHO कृष्ण कुमार ने कहा- हमें शक है कि सिपाही ने कोई जहरीला पदार्थ खाया हो सकता है, जिससे उसकी मौत हुई. हालांकि, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही सच्चाई सामने आएगी.’ पुलिस का कहना है कि अभी तक मृतक के परिवार वालों ने कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं की है और न ही कोई बयान दिया है. परिवार के बयान के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी. कौन था मृतक सिपाही? जानकारी के मुताबिक, मृतक सिपाही एक पूर्व सैनिक था, जिसने 2014 में हरियाणा पुलिस में अपनी सेवाएं शुरू की थीं. जब राव नरबीर सिंह मंत्री बने, तब उनकी सुरक्षा के लिए इस सिपाही को बंगले पर तैनात किया गया था. उसके साथ कई अन्य पुलिसकर्मी भी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा थे.  

71वीं नेशनल फिल्म अवॉर्ड सेरेमनी : मोहनलाल को दादा साहब फाल्के पुरस्कार मिला

शाहरुख खान-विक्रांत मैसी को बेस्ट एक्टर, रानी मुखर्जी बनीं बेस्ट एक्ट्रेस   नई दिल्ली विज्ञान भवन में मंगलवार को आयोजित 71वीं नेशनल फिल्म अवॉर्ड सेरेमनी में भारतीय सिनेमा की प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। . राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विभिन्न श्रेणियों में विजेताओं को अवॉर्ड प्रदान किए। इस अवसर पर शाहरुख खान और विक्रांत मैसी को बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड दिया गया। वहीं, रानी मुखर्जी को बेस्ट एक्ट्रेस का सम्मान मिला। फिल्म रॉकी और रानी की प्रेम कहानी के गीत ढिंढोरा बाजे के लिए वैभवी मर्चेंट को बेस्ट कोरियोग्राफी का अवॉर्ड प्रदान किया गया। इसके अलावा, सान्या मल्होत्रा स्टारर फिल्म कटहल को बेस्ट हिंदी फिल्म घोषित किया गया, जिसे डायरेक्टर यशोवर्धन मिश्रा ने रिसीव किया। गौरतलब है कि नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स की शुरुआत 1954 में हुई थी और तब से यह समारोह लगातार नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित होता आ रहा है। अगस्त 2023 में जिन विजेताओं की घोषणा हुई थी, उन्हें आज औपचारिक रूप से सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत स्वदेशी संकल्प विषयक प्रदेश स्तरीय कार्यशाला को किया संबोधित

2047 में विकसित होगा भारत, स्वदेशी व आत्मनिर्भर संकल्प अभियान के माध्यम से बढ़ेगा इसका रास्ताः सीएम योगी  2017 के पहले बीमारू था यूपी, यदि 8 वर्ष में बीमारी हट सकती है तो 22 वर्ष में यूपी विकसित भी हो सकता हैः मुख्यमंत्री  स्वदेशी व आत्मनिर्भर का सबसे अच्छा मॉडल है यूपीआईटीएस, यहां होगा यूपी की ताकत का अहसासः योगी अयोध्या दीपोत्सव में प्रज्ज्वलित होंगे रिकॉर्डतोड़ दीप, दीप भी भारत का स्वदेशी मॉडलः सीएम  योगी की अपीलः देश का पैसा भारत के कारीगरों, हस्तशिल्पियों व युवाओं के हाथों में ही जाए, यह भारत के अंदर लगेगा तो समृद्धि का कारण बनेगा  बोले-जिन लोगों ने वाद के आधार पर बांटा, वे आज भी समाज को बांट और काट रहे हैं लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनपदों में स्वदेशी मेले लगाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इसमें एमएसएमई विभाग सहयोग करेगा। दीपावली के पहले हर जनपद में 10 से 18 के बीच एक सप्ताह तक ओडीओपी व स्थानीय उत्पादों का मेला लगे। यह कार्यक्रम बहुत अच्छा हो सकता है। इससे स्थानीय उद्यमियों व व्यापारियों को बहुत लाभ होता है और लोग विदेशी उत्पाद खरीदने से भी बचते हैं। सीएम ने कहा कि 2017 से पहले चीन का झालर बाजार में छा जाता था, लेकिन अब लोग मिट्टी के दीप जला रहे हैं। 2017 में दीपोत्सव के आयोजन में 51 हजार दीप अयोध्या मंडल में नहीं मिल पाए थे। इसे पूरे प्रदेश से जुटाना पड़ा था परंतु गत वर्ष जितने दीप प्रज्ज्वलित कराए गए थे, यह सभी अयोध्या में बने थे। इस बार भी दीपोत्सव में रिकॉर्डतोड़ दीप प्रज्ज्वलित होंगे और यह मिट्टी व गाय के गोबर से बनेंगे। लोकल लोगों को तैयार करना होगा। हर घऱ में दीप जले,  दीप भी भारत का स्वदेशी मॉडल है। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को आत्मनिर्भर भारत स्वदेशी संकल्प विषयक प्रदेश स्तरीय कार्यशाला को संबोधित किया।  स्वदेशी व आत्मनिर्भर का सबसे अच्छा मॉडल है यूपीआईटीएस सीएम योगी ने कहा कि 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा में यूपीआईटीएस का आयोजन होगा। 25 को इसके तीसरे चरण का शुभारंभ सुबह 9.30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। यह स्वदेशी और आत्मनिर्भर का सबसे अच्छा मॉडल है। यूपी के अंदर बने उत्पाद को केवल शोकेस ही नहीं किया जाएगा, बल्कि उसे बड़ा भी मंच मिलेगा। 500 विदेशी समेत पूरे देश से व्यापारी भी खरीदारी करने आ रहे हैं। दिल्ली, नोएडा, ग्रेनो, यमुना अथॉरिटी समेत आसपास के सभी होटल फुल हो चुके हैं। पिछले साल चार दिन में 2200 करोड़ की बिक्री हुई थी। इस सफलतम आयोजन से यूपी के कारीगरों, उद्यमियों व हस्तशिल्पियों को प्लेटफॉर्म मिलता है। सभी से अनुरोध किया कि एक दिन आईटीएस का अवलोकन करें। यहां यूपी की ताकत का अहसास होगा। स्वदेशी विकसित भारत की संकल्पना को साकार करने और उसकी आधारशिला को सुदृढ़ करने का अभियान  सीएम ने कहा कि स्वदेशी आत्मनिर्भर भारत के अभियान का हिस्सा बनने वाला है। यह विकसित भारत की संकल्पना को साकार करने और उसकी आधारशिला को सुदृढ़ करने का अभियान है। स्वदेशी केवल नारा नहीं है और न ही यह खादी वस्त्रों तक सीमित है। भाजपा नेतृत्व की सरकार देश में सुई से लेकर समुद्री मालवाहक जहाजों और फाउंटेन पेन से लेकर एरोप्लेन का निर्माण कर रही है। पीएम मोदी ने स्वदेशी की इस अवधारणा को व्यापक व विराट रूप दिया है। जो भारत में निर्मित हो, जिसमें भारत के श्रमिकों का पसीना और यहां के युवा शक्ति की प्रतिभा लगी हो। वह स्वदेशी है। मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड यानी दुनिया के लिए भारत के द्वारा बनाया गया उत्पाद हमारे लिए स्वदेशी है। हम स्वदेशी को जीवन का हिस्सा बनाएं।   भारत का कोई सानी नहीं था सीएम योगी ने सीपी जोशी के वक्तव्य की चर्चा की और कहा कि दो हजार वर्ष पहले दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारत का योगदान 40 फीसदी था। आज से 300 वर्ष पहले दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारत का योगदान 25 फीसदी था। औद्योगिकीकरण से होने वाले उत्पादन में भारत का योगदान नंबर एक (अकेले 25 फीसदी) था। वृहत्तर भारत मतलब आज का भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश। 300 वर्ष तक भारत दुनिया की नंबर एक की आर्थिक ताकत और नंबर एक का उत्पादक राष्ट्र था और कृषि में भारत का कोई सानी नहीं था।  विदेशी शासकों ने स्वार्थ के लिए बंगाल के कारीगरों के हाथ काट दिए थे  मुख्यमंत्री ने कहा कि भौगोलिक दृष्टि से भारत दुनिया में सातवें नंबर पर है। बृहत्तर भारत से पहले रूस, चीन, अमेरिका, कनाडा, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया है। भारत, पाकिस्तान व बांग्लादेश के पास कुल भूभाग साढ़े 42 करोड़ हेक्टेयर का भौगोलिक क्षेत्रफल था, जबकि रूसी संघ के पास 1 अरब 70 करोड़ हेक्टेयर लैंड है। इन देशों में केवल 20 फीसदी भूमि पर कृषि हो सकती है, लेकिन भारत अकेले 60 फीसदी भूभाग पर कृषि करता है। भारत के पास सबसे उर्वरा भूमि और सबसे अच्छा जल संसाधन है। भारत कपड़े का सबसे बड़ा उत्पादक था। भारत दुनिया में कपड़ा बेचता था। मुख्यमंत्री ने बंगाल के इतिहास का जिक्र किया और कहा कि विदेशी शासकों ने स्वार्थ के लिए वहां के कारीगरों के हाथ काट दिए थे। सीएम ने कहा कि होली से दीवाली के बीच हर गांव में गाय, बकरी, भैंस खेतों में बांधे जाते थे। वह उसी हिसाब से खेती को उर्वरक को बनाते थे। हम जितनी खेती का दोहन करते थे, उससे दोगुना रिटर्न करते थे। पीएम मोदी जिसे नेचुरल फॉर्मिंग और सुभाष पालेकर जीरो बजट खेती कहते हैं। हमारा किसान जीरो बजट खेती ही करता था। गाय का गोबर, मूत्र व उससे जुड़े उत्पाद, खुर धऱती को मुलायम करते थे और उर्वरकता को बढ़ाए रखते थे। इससे खूब अन्न उत्पादन होता था।  जिन लोगों ने वाद के आधार पर बांटा, वे आज भी समाज को बांट और काट रहे हैं  सीएम योगी ने कहा कि भारत पर इस्लाम के पहले हमले का जिक्र किया और कहा कि सन 1100 तक भारत में हिंदुओं की आबादी 60 करोड़ थी, लेकिन आजादी के समय 1947 तक यह घटकर सिर्फ 30 करोड़ रह गई। 800-900 वर्ष में हमारी आबादी घटी और खेती के उत्पादन को भी कम कर दिया गया। सिर्फ आक्रांताओं ने ही नहीं मारा, बल्कि भूख, बीमारी, यातनाओं से भी … Read more

सभी 75 जिलों से सरकार को मिल रहे बहुमूल्य सुझाव, ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी भागीदारी

प्रदेशवासियों के लिए शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा, स्वास्थ्य और कृषि समेत कई सेक्टर्स में मिल रहे सुझाव प्रयागराज, गोरखपुर, मेरठ, कानपुर नगर, बस्ती समेत कई जिलों से भारी संख्या में मिले सुझाव प्रदेश में कम्प्यूटर संग्रहालय की स्थापना से लेकर गांव-शहर तक हाई-स्पीड इंटरनेट की मांग  सीसीटीवी नेटवर्क, सुरक्षा ऐप व त्वरित पुलिस रिस्पॉन्स के साथ महिलाओं के कौशल प्रशिक्षण पर जोर  जनता से मिलने वाले अच्छे सुझावों को विजन डॉक्युमेंट में शामिल करेगी योगी सरकार  लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार के “समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @2047 अभियान” के तहत राज्य के सभी 75 जनपदों में नोडल अधिकारियों व प्रबुद्ध जनों द्वारा छात्रों, शिक्षकों, उद्यमियों, कृषकों, मीडिया, श्रमिक संघठनों और आमजन से संवाद किया जा रहा है। विगत 8 वर्षों की विकास यात्रा साझा करने के साथ ही पूरे प्रदेश के सभी नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के साथ भविष्य के रोडमैप पर चर्चा कर सुझाव लिए जा रहे हैं। मंगलवार तक अभियान में करीब पांच लाख सुझाव प्राप्त हो चुके हैं। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों से करीब 4 लाख और नगरीय क्षेत्रों से करीब एक लाख सुझाव प्राप्त हुए हैं। सबसे अधिक भागीदारी 31 से 60 वर्ष आयु वर्ग की दिख रही है, जबकि जेन-ज़ी और वरिष्ठ नागरिकों ने भी सक्रियता दिखाई है।  शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि समेत हर सेक्टर के लिए उपयोगी सुझाव सुझावों में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, नगरीय एवं ग्रामीण विकास, आईटी-टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्री जैसे क्षेत्रों पर जनता का ज्यादा जोर है। खासकर शिक्षा और ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होने वाली नीतियों में पारदर्शिता को लेकर नागरिकों ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।  ये हैं कुछ प्रमुख सुझाव गाजियाबाद के ऋतिक शर्मा ने उत्तर प्रदेश में भारत का सबसे बड़ा कम्प्यूटर संग्रहालय स्थापित करने का सुझाव दिया। इसमें एनालॉग यंत्रों से लेकर आधुनिक मेनफ्रेम तक की यात्रा प्रदर्शित हो। यह तकनीकी पर्यटन और युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा। बलिया के आशुतोष पटेल ने हर गांव-नगर तक हाई-स्पीड इंटरनेट व यूनिवर्सल डिजिटल-आईडी की व्यवस्था, स्कूलों में एआई/एआर/वीआर शिक्षा, हेल्थ-टेक, एग्री-टेक और स्मार्ट सिटी समाधान लागू करने का सुझाव दिया। वाराणसी की आकांक्षा ने सार्वजनिक स्थानों की रोशनी और डिजाइन सुधारने, सीसीटीवी नेटवर्क, सुरक्षा ऐप व त्वरित पुलिस रिस्पॉन्स की व्यवस्था पर बल दिया। साथ ही महिलाओं के लिए कौशल, वित्तीय पहुंच और फास्ट ट्रैक न्यायालयों की सिफारिश की। लखनऊ की महिमा सिंह ने शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण, समान वेतन, स्वास्थ्य व प्रजनन अधिकार, नेतृत्व में भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने बाल विवाह उन्मूलन, घरेलू कार्य की मान्यता और सहायता प्रणालियों की मजबूती को भी जरूरी बताया। अभियान में अब तक फिरोजाबाद, बस्ती, जौनपुर, कानपुर नगर, कानपुर देहात, गोरखपुर, सहारनपुर, शामली, एटा, मेरठ, फर्रुखाबाद, मैनपुरी, महाराजगंज और प्रयागराज से ही 2 लाख से अधिक फीडबैक प्राप्त हुए। सरकार का कहना है कि जनता की इन सुझावों को विकास रोडमैप में शामिल कर उत्तर प्रदेश को 2047 तक विकसित राज्य बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

उत्तराखंड में रेवेन्यू सरप्लस: CM पुष्कर सिंह धामी ने CAG की रिपोर्ट को सराहा

उत्तराखंड  भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड ने वित्तीय वर्ष 2022-23 में ₹5,310 करोड़ का राजस्व अधिशेष दर्ज कर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. इस उपलब्धि के साथ उत्तराखंड उन राज्यों में शामिल हो गया है जिन्होंने इस अवधि में राजस्व अधिशेष दर्ज किया है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर की है. उन्होंने कहा कि सीएजी की रिपोर्ट में दर्ज यह उपलब्धि उत्तराखंड की सुशासन की नीतियों का परिणाम है. हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प से प्रेरणा लेकर राज्य को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं. उत्तराखंड की आर्थिक आत्मनिर्भरता मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह केवल आंकड़ों की उपलब्धि नहीं, बल्कि उत्तराखंड की आर्थिक आत्मनिर्भरता और समृद्ध भविष्य की दिशा में रखा गया एक मजबूत कदम है. सरकार पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन की नीति पर आगे बढ़ते हुए उत्तराखंड को एक विकसित और आत्मनिर्भर राज्य बनाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है. सीएजी रिपोर्ट की प्रमुख बिंदुएं:- राजस्व अधिशेष : वित्तीय वर्ष 2022-23 में उत्तराखंड ने ₹5,310 करोड़ का अधिशेष दर्ज किया. समग्र प्रगति : यह उपलब्धि राज्य की वित्तीय स्थिति में उल्लेखनीय सुधार का संकेत देती है. आर्थिक मजबूती का प्रमाण : कभी बिमारु श्रेणी से जोड़े जाने के बाद अब उत्तराखंड ने सुदृढ़ वित्तीय प्रबंधन का उदाहरण प्रस्तुत किया है. सकारात्मक आर्थिक परिवर्तन : पूर्व में वित्तीय अनुशासन की चुनौतियों के बावजूद सतर्क प्रबंधन व पारदर्शी नीतियों के बल पर राज्य ने यह उपलब्धि हासिल की.