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बिक्स-मुलाकात: गुरिंदर ढिल्लों से 35 मिनट की बातचीत के बाद मची चर्चा

चंडीगढ़  पंजाब की राजनीति और धार्मिक जगत का संगम मंगलवार को नाभा जेल में देखने को मिला। आय से अधिक संपत्ति मामले में बंद शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया से मुलाकात करने राधा स्वामी सत्संग ब्यास डेरा प्रमुख गुरिंदर सिंह ढिल्लों पहुंचे। यह मुलाकात जेल परिसर में करीब 35 मिनट तक चली। सुबह करीब 11 बजे डेरा प्रमुख अपनी निजी कार से जेल पहुंचे। सुरक्षा जांच औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद उन्हें मजीठिया से मिलने की इजाजत दी गई। मुलाकात को परिवारिक रिश्तेदारी की श्रेणी में रखा गया है। उल्लेखनीय है कि मजीठिया की पत्नी गनीव कौर की रिश्तेदारी डेरा प्रमुख ढिल्लों से जुड़ी हुई है। हालांकि मंगलवार की मुलाकात को केवल पारिवारिक बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं भी उठ खड़ी हुई हैं। अकाली राजनीति के दिग्गज माने जाने वाले मजीठिया और धार्मिक दुनिया में अहम स्थान रखने वाले डेरा प्रमुख की यह भेंट कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। करीब आधे घंटे से अधिक चली इस मुलाकात के बाद डेरा प्रमुख बिना किसी सार्वजनिक बयान के जेल से रवाना हो गए। वहीं जेल सूत्रों का कहना है कि मुलाकात शांतिपूर्ण माहौल में हुई और इसे सिर्फ पारिवारिक रिश्ता मानकर अनुमति दी गई थी। चार्जशीट में 40 हजार पन्ने, 200 गवाह और 400 बैंक खाते विजिलेंस ब्यूरो ने बीते जून में मजीठिया को गिरफ्तार किया था। उन पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का गंभीर आरोप है। जांच एजेंसी ने 22 अगस्त को अदालत में 40 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें 200 से ज्यादा गवाहों के बयान शामिल किए गए हैं, जबकि 400 से अधिक बैंक खातों की लेन-देन जांची गई। मजीठिया द्वारा जेल प्रशासन को दिए गए 10 मुलाकातियों की सूची में डेरा प्रमुख गुरिंद्र ढिल्लों का नाम भी दर्ज था। इसी सूची के आधार पर यह मुलाकात संभव हो पाई। पहले भी पहुंचे परिवार के सदस्य मजीठिया की गिरफ्तारी के बाद से उनके परिवारजन समय-समय पर उनसे मुलाकात करते रहे हैं। हाल ही में उनकी पत्नी गनीव कौर और बहन सांसद हरसिमरत कौर बादल नाभा जेल पहुंची थीं। राखी के त्योहार पर हरसिमरत कौर ने अपने भाई को जेल में राखी भी बांधी थी।

पीएम-जनमन क्षेत्रों में विशेष शिविरों के माध्यम से हजारों जनजातीय हितग्राही हुए लाभान्वित

महिलाओं के लिए बड़ी पहल: रायपुर में दूरदराज अंचलों तक पहुंची विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं रायपुर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की महत्त्वाकांक्षी पहल “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान” के अंतर्गत आज प्रदेशभर के प्रधानमंत्री जनजातीय न्याय मिशन (PM JANMAN) क्षेत्रों में विशेष जनजातीय स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों के माध्यम से पिछड़ी जनजातीय समूहों (PVTGs) सहित हजारों लोगों को समर्पित स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की गईं, जो प्रदेश सरकार की जनजातीय स्वास्थ्य सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। छत्तीसगढ़ राज्य में ‘‘स्वस्थ्य नारी, सशक्त परिवार‘‘ अभियान के आज के थीम के अनुरूप विशेष रूप से पीवीटीजी (विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह) क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने हेतु मोबाइल मेडिकल यूनिट्स (MMU) के माध्यम से व्यापक स्तर पर सेवाएं प्रदान की गई, जिसमें राज्य के 24 ज़िलों में कुल 85 स्वास्थ्य शिविरों का संचालन किया गया। प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में 51 मोबाइल मेडिकल यूनिट्स की सक्रिय भागीदारी से पिछड़ी जनजातीय समूह के 1,815 सहित कुल 7,825 लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया।  दूरस्थ अंचलों में बसे जनजातीय समुदायों को ध्यान में रखते हुए इन शिविरों में विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा समग्र स्वास्थ्य जांच एवं परामर्श सेवाएँ प्रदान की गईं। सेवाओं के अंतर्गत सामान्य ओपीडी उपचार के अंतर्गत 2,118 लोगों का इलाज किया गया, वहीं 1,020 लोगों की हाईपरटेंशन (बीपी) जांच और 1108 लोगों की मधुमेह स्क्रीनिंग की गई। महिलाओं के स्वास्थ्य को केंद्र में रखते हुए एनीमिया की जांच 878 महिलाओं में की गई, जबकि मातृत्व सेवाओं के तहत 260 महिलाओं की एएनसी/पीएनसी जांच की गई। साथ ही, 210 मलेरिया, 340 सिकल सेल, और 112 टीबी जांचें की गईं। कैंसर स्क्रीनिंग (मुख, स्तन व ग्रीवा) के माध्यम से 150 महिलाओं की जांच की गई। बच्चों को टीकाकरण सेवाएं भी दी गईं, जिससे 185 बच्चों को लाभ मिला, जबकि परिवार नियोजन सेवाओं का लाभ 145 महिलाओं ने उठाया। मानसिक स्वास्थ्य परामर्श के तहत 80 लोगों को परामर्श दिया गया और आयुष एवं वेलनेस सेवाओं से 60 लोगों को लाभ मिला। इसके साथ ही, मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर भी विशेष रूप से जागरूकता सत्र आयोजित किए गए, जिसमें किशोरियों और महिलाओं को स्वच्छता प्रबंधन, सैनिटरी नैपकिन के उपयोग, संक्रमण से बचाव जैसे विषयों पर जानकारी दी गई। यह प्रयास स्वास्थ्य सेवाओं से आगे बढ़कर, महिलाओं के स्वस्थ जीवन की दिशा में एक सशक्त पहल सिद्ध हो रहा है। स्वास्थ्य सेवा वितरण के साथ-साथ समुदाय में जागरूकता और विश्वास का संचार भी इन शिविरों की एक विशेष उपलब्धि रही। शिविरों में आए हितग्राहियों को न केवल जांच और उपचार प्रदान किया गया, बल्कि उन्हें पोषण, जीवनशैली में सुधार, नियमित जांच की महत्ता आदि विषयों पर भी मार्गदर्शन दिया गया। यह अभियान राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग की एक महत्वपूर्ण पहल है, जो दूरस्थ और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में रह रहे समुदायों तक मूलभूत स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में एक प्रभावशाली कदम है। महिलाओं के स्वास्थ्य को केंद्र में रखकर चलाया गया यह कार्यक्रम सम्पूर्ण परिवार की सशक्तता और समग्र स्वास्थ्य सुधार की दिशा में उल्लेखनीय भूमिका निभा रहा है।

प्रशांत किशोर का हमला: जानिए कैसे कॉलेज के क्लर्क बने दिलीप, मंगल और सम्राट के मालिक

पटना  जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर लगातार बिहार के बड़े नेताओं पर निशाना साध रहे हैं, उन्होंने एक बार फिर राज्य के तीन प्रमुख बीजेपी नेताओं स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, उपमुख्यमत्री सम्राट चौधरी और पूर्व मंत्री दिलीप जायसवाल पर गंभीर आरोप लगाए हैं. प्रशांत किशोर का कहना है कि इन नेताओं के पास जवाब देने का समय है तो वो मीडिया में आएं और उन पर केस करें. प्रशांत किशोर ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने 86 लाख रुपये में एक फ्लैट खरीदा है. इसमें से 25 लाख रुपये उनकी पत्नी के खाते से दिए गए, जिसका पूरा ब्योरा उनके पास है, उन्होंने आरोप लगाया कि यह पैसा दिलीप जायसवाल के खाते से पांडे के पिता के खाते में गया और फिर उनकी पत्नी के खाते में जमा हुआ. उन्होंने कहा कि मंगल पांडे ने स्वीकार किया कि उन्होंने पैसा लिया था, लेकिन बाद में लौटा दिया. इस पर प्रशांत किशोर ने सवाल उठाया कि अगर पैसा लौटा दिया तो फ्लैट खरीदने के बाकी पैसे कहां से आए, उन्होंने यह भी दावा किया कि पांडे की पत्नी के खाते में सवा दो करोड़ रुपये जमा किए गए हैं. सम्राट चौधरी की डिग्री पर सवाल प्रशांत किशोर ने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी बड़ा आरोप लगाया, उन्होंने कहा कि 1998 के शपथ पत्र में सम्राट चौधरी ने खुद को सातवीं पास बताया था, लेकिन बाद के हलफनामों में उन्होंने ग्रेजुएट और फिर पीएचडी होने का दावा किया. प्रशांत किशोर ने सुप्रीम कोर्ट के दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि सम्राट चौधरी, जिनका नाम उस समय सम्राट कुमार मौर्य था वो परीक्षा में फेल हो गए थे और उन्हें केवल 234 अंक मिले थे. ऐसे में उनकी डिग्री और पीएचडी पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं. दिलीप जायसवाल पर कब्जे और हत्या का आरोप प्रशांत किशोर ने पूर्व मंत्री दिलीप जायसवाल पर भी निशाना साधा, उनका कहना है कि जायसवाल ने सिख समुदाय के अल्पसंख्यक कॉलेज पर कब्जा कर लिया है. ऐसे कॉलेज का प्रबंधन हमेशा सिख समाज के पास होना चाहिए, लेकिन अब यह जायसवाल के हाथ में है. किशोर ने पूछा कि आखिर एक क्लर्क या चपरासी कॉलेज का मालिक कैसे बन सकता है? इसके अलावा उन्होंने दावा किया कि जायसवाल पर एक व्यक्ति की हत्या का भी आरोप है. मृतक राजेश शाह के परिवार ने भी यह बात कही है. पीके ने कहा कि अगर जायसवाल निर्दोष हैं तो मीडिया में आकर इसका खुलकर जवाब दें.  

Paytm ने लॉन्च किया Postpaid सर्विस, UPI यूजर्स को मिलेंगे बड़े लाभ

 नई दिल्ली फिनटेक कंपनी पेटीएम (Paytm) ने अपने यूजर्स के लिए एक शानदार नई सुविधा 'पेटीएम पोस्टपेड' (Paytm Postpaid) लॉन्च की है। अब आप यूपीआई (UPI) पेमेंट के लिए क्रेडिट लाइन का इस्तेमाल कर सकेंगे, जिससे छोटी-मोटी खरीदारी करना और भी आसान हो जाएगा। इस सुविधा का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप अभी खर्च कर सकते हैं और इसका भुगतान अगले महीने आराम से कर सकते हैं। कैसे काम करती है यह सुविधा? 'पेटीएम पोस्टपेड' सेवा नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक (SSFB) के साथ मिलकर शुरू की गई है। इस सेवा का उद्देश्य लोगों को उनके रोजमर्रा के खर्चों में तुरंत क्रेडिट देना है। पेमेंट का तरीका: आप किसी भी यूपीआई क्यूआर कोड को स्कैन करके पेमेंट कर सकते हैं, चाहे वह ऑनलाइन शॉपिंग हो, मोबाइल रिचार्ज हो, बिल भुगतान हो या कोई बुकिंग हो। क्रेडिट की अवधि: इस सेवा में आपको 30 दिनों तक की शॉर्ट-टर्म क्रेडिट मिलती है, जिससे आप अपनी जरूरतों के हिसाब से तुरंत खर्च कर सकें। चयनित यूजर्स: फिलहाल, यह सुविधा सीमित यूजर्स के लिए शुरू की गई है, जिन्हें उनके खर्च करने के तरीके के आधार पर चुना गया है। आने वाले समय में इसे और ज्यादा लोगों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। यूजर्स और मर्चेंट्स को क्या मिलेगा फायदा? पेटीएम के सीओओ अविजीत जैन ने बताया कि यह सेवा भारतीय लोगों को उनके रोजमर्रा के खर्चों में वित्तीय लचीलापन देगी। यह न केवल यूजर्स के लिए भुगतान को आसान बनाती है, बल्कि व्यापारियों (मर्चेंट्स) को भी तुरंत पैसा मिलने और यूनिवर्सल स्वीकृति सुनिश्चित करती है।

दिवाली-छठ पर बढ़ाई गई 12,000 स्पेशल ट्रेनें, अब हर मार्ग पर सफर होगा तेज़ और सुविधाजनक

नई दिल्ली देश में दिवाली की तैयारियां जोरों पर हैं और साथ ही लोग छठ पूजा पर भी अपने घर जाने के लिए निकलने की के लिए ट्रेन-बस बुकिंग करने में लगे हैं. इन त्योहारों लोग अपने घर आराम से और सुरक्षित पहुंचें इसके लिए भारतीय रेलवे ने भी बड़ी तैयारी की है और इसके तहत पिछले साल के मुकाबले इस साल और ज्यादा स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी. केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी इससे जुड़ी जानकारी शेयर की है.  पिछले साल से 4500 ट्रेनें ज्यादा छठ और दिवाली के लिए ट्रेन संचालन पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि इन पर्वों पर पिछले साल हमने 7,500 स्पेशल ट्रेनें संचालित की थीं और इस बार हम अपनी क्षमता को और भी बढ़ा रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस बार छठ और दिवाली पर यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए इंडियन रेलवे का लक्ष्य करीब 12000 स्पेशल ट्रेनें चलाने का है. गौरतलब है कि दिवाली और छठ पूजा के मौके पर दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े मेट्रो शहरों से उत्तर प्रदेश और बिहार समेत अन्य राज्यों में बड़ी संख्या में लोग जाते हैं और इस दौरान ट्रेनों में भारी भीड़ नजर आती है. स्टेशनों पर उमड़ने वाली इस भीड़ को देखते हुए ही रेलवे ने इस साल बीते साल से ज्यादा ट्रेनें चलाने की तैयारी की है.  1 अक्टूबर से 15 नवंबर तक चलेंगी ट्रेनें अश्विनी वैष्णव ने आगे इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि इंडियन रेलवे की ओर से अभी तक 10,000 स्पेशल ट्रेनों की अधिसूचना जारी की जा चुकी है. छठ-दिवाली के लिए चलाई जाने वाली इन स्पेशल ट्रेनों में 150 ट्रेनें पूरी तरह से अनारक्षित कैटेगरी की होंगी और ये ट्रेनें अंतिम समय में चलाई जाएंगी. टाइमलाइन के बारे में बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इन स्पेशल ट्रेनों का संचालन अगले महीने की पहली तारीख यानी 1 अक्टूबर से शुरू होगा और 15 नवंबर तक किया जाएगा. वंदे भारत स्लीपर पर बड़ा अपडेट रेल मंत्री ने देश भर में भारतीय रेलवे के संचालन में तमाम प्रयासों के चलते आए सुधारों के बारे में बात करते हुए बताया कि अब देश के 70 में से 29 डिवीजनों में हमारी समयपालनता 90% से ज्यादा है. इसके साथ ही उन्होंने वंदे भारत स्लीपर ट्रेन पर भी बड़ा अपडेट दिया है और बताया कि इसे लेकर काम कहां तक आगे बढ़ा है.  अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, वंदे भारत स्लीपर तैयार है और उसका परीक्षण भी पूरा हो चुका है. उन्होंने आगे कहा कि हम एक साथ दो Vande Bharat Sleeper रेक शुरू करेंगे और हम दूसरे रेक का ही इंतजार कर रहे हैं, जो 15 अक्टूबर तक आ जाएगा. इन रूट पर वंदे भारत और अमृत भारत रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने एक्स अकाउंट पर लखनऊ जंक्शन और सहारनपुर के बीच नई वंदे भारत एक्सप्रेस को लेकर कहा कि ये यात्रा के समय को कम करेगी और यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं भी प्रदान करेगी, जिससे यात्रा अधिक सुविधाजनक और आरामदायक होगी. इसके अलावा मदार जंक्शन (अजमेर) और दरभंगा के बीच नई साप्ताहिक अमृत भारत एक्सप्रेस को लेकर उन्होंने कहा कि ये निम्न और मध्यम आय वाले परिवारों के लिए सहायक होगी.

राम मंदिर के बदले मिलने वाली जमीन पर मस्जिद निर्माण की योजना रद्द, RTI में खुलासा

अयोध्या  अयोध्या में सदियों पुराने मंदिर-मस्जिद विवाद खत्म हो चुका है। विवादित स्थल पर राम मंदिर बन चुका है, जिसे लगातार भव्य रूप दिया जा रहा है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में मुस्लिम पक्ष को जहां मस्जिद के लिए जमीन दी गई, वहां विकास की एक ईंट तक नहीं रखी गई है। और अब तो आरटीआई आवेदन के तहत निर्माण योजना ही खारिज होने की जानकारी मिली है, जो चौंकाने वाली है। हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक RTI (सूचना का अधिकार) के जवाब से पता चला है कि अयोध्या विकास प्राधिकरण (एडीए) ने सोहावल तहसील के धन्नीपुर गांव में बनने वाले मस्जिद के लेआउट प्लान को खारिज कर दिया है। ऐसा इसलिए क्योंकि विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा अनिवार्य अनापत्ति प्रमाणपत्र (NoC) जारी नहीं किए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर, 2019 को अयोध्या के अहम फैसले में मस्जिद और अन्य सुविधाओं के निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ जमीन आवंटित करने का आदेश दिया था। 3 अगस्त, 2020 को तत्कालीन अयोध्या डीएम अनुज कुमार झा ने अयोध्या के पास धन्नीपुर गांव में पांच एकड़ जमीन सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को हस्तांतरित कर दी। मस्जिद ट्रस्ट ने 23 जून, 2021 को योजना की मंजूरी के लिए आवेदन किया था। तब से, मंजूरी पर कोई अपडेट नहीं आया है। विभाग ने बताया ये है दिक्कत अखबार ने आरटीआई कार्यकर्ता के हवाले से लिखा है कि मस्जिद के लेआउट प्लान को मंजूरी न मिलने का कारण विभिन्न सरकारी विभागों से आवश्यक एनओसी का नहीं मिलना है. इन प्रमाणपत्रों के बिना प्राधिकरण ने योजना को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया. यह खुलासा उस समय हुआ है जब अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण तेजी से चल रहा है, जिसे सुप्रीम कोर्ट के उसी फैसले के तहत मंजूरी दी गई थी. सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और मस्जिद ट्रस्ट की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. अयोध्या विकास प्राधिकरण ने इस मामले में आगे की प्रक्रिया या समयसीमा के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की है. यह स्थिति तब और जटिल हो जाती है, जब यह देखा जाता है कि राम मंदिर निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है, जबकि मस्जिद परियोजना अभी तक प्रारंभिक चरण में ही अटकी हुई है. इस खुलासे के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और संबंधित पक्ष इस मामले में आवश्यक कदम उठाएंगे ताकि परियोजना को गति मिल सके. मस्जिद ट्रस्ट ने कही ये बात अखबार ने मस्जिद ट्रस्ट के सचिव अतहर हुसैन के हवाले से लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद के लिए जमीन आवंटित करने का आदेश दिया था और उत्तर प्रदेश सरकार ने हमें वह भूखंड आवंटित किया. मैं हैरान हूं कि सरकारी विभागों ने एनओसी क्यों नहीं दी और प्राधिकरण ने मस्जिद के लेआउट प्लान को क्यों खारिज कर दिया. उन्होंने आगे कहा कि हालांकि, अग्निशमन विभाग द्वारा की गई साइट जांच के दौरान यह पाया गया कि मस्जिद और अस्पताल भवन की ऊंचाई के अनुसार अप्रोच रोड की चौड़ाई 12 मीटर होनी चाहिए. लेकिन मौके पर दोनों अप्रोच मार्ग 6 मीटर से अधिक नहीं थे और मुख्य अप्रोच मार्ग की चौड़ाई केवल लगभग 4 मीटर थी. ट्रस्ट सचिव ने बताया कि उन्हें एनओसी या खारिज किए जाने के बारे में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है. अग्निशमन विभाग की आपत्ति के अलावा मुझे किसी अन्य विभाग द्वारा उठाई गई किसी भी आपत्ति की जानकारी नहीं है. NOC आवेदन पर कोई आपत्ति नहीं मिली? 16 सितंबर 2025 को स्थानीय पत्रकार ओम प्रकाश सिंह की तरफ से दायर आरटीआई आवेदन के जवाब में एडीए ने स्वीकार किया कि मस्जिद ट्रस्ट ने आवेदन और जांच शुल्क के रूप में 4 लाख रुपये का भुगतान किया था। एडीए की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार- पीडब्ल्यूडी, प्रदूषण नियंत्रण, नागरिक उड्डयन, सिंचाई और राजस्व विभाग और नगर निगम, जिला मजिस्ट्रेट और अग्निशमन सेवा से एनओसी मांगी गई थी। मस्जिद ट्रस्ट के सचिव अतहर हुसैन ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद के लिए जमीन अनिवार्य कर दी है और उत्तर प्रदेश सरकार ने हमें भूखंड आवंटित किया है। मैं इस बात से अवाक हूं कि सरकारी विभागों ने अपनी एनओसी क्यों नहीं दी और प्राधिकरण ने मस्जिद के लेआउट प्लान को क्यों खारिज कर दिया।" उन्होंने बताया कि "हालांकि अग्निशमन विभाग द्वारा किए गए स्थल निरीक्षण के दौरान यह पाया कि मस्जिद और अस्पताल की इमारत की ऊंचाई के अनुसार यह जरूरी था कि पहुंच मार्ग 12 मीटर चौड़ा होना चाहिए। जबकि मौके पर दोनों पहुंच मार्ग छह मीटर से अधिक नहीं थे। और मुख्य पहुंच मार्ग की चौड़ाई केवल चार मीटर थी। ट्रस्ट सचिव ने कहा कि उन्हें किसी एनओसी या अस्वीकृति के बारे में कोई सूचना नहीं मिली है। उन्होंने कहा, "अग्निशमन विभाग की आपत्ति के अलावा, मुझे किसी अन्य विभाग की आपत्ति के बारे में कोई जानकारी नहीं है।" उन्होंने कहा, "अब जब आरटीआई जवाब से हमें स्थिति स्पष्ट हो गई है, तो हम अपनी आगे की कार्रवाई तय करेंगे।"

सिनेमा प्रेमियों के लिए राहत या झटका? हाई कोर्ट ने कर्नाटक के टिकट दाम नियम पर लगाया ब्रेक

बेंगलुरु  मूवी टिकट के दाम अधिकतम 200 रुपये तक सीमित करने के कर्नाटक सरकार के फैसले पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। जस्टिस रवि वी होसमानी ने एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए मल्टीप्लेक्स के मालिकों को राहत दी है। मल्टीप्लेक्स असोसिएशन ने एक याचिका फाइल कर कर्नाटक सिनेमा रेग्युलेशन रूसल 2025 को चुनौती दी थी। इस नियम में कहा गया था कि फिल्म के टिकट की कीमत 200 रुपये से ज्यादा नहीं बढ़ाई जा सकती। फिल्म प्रड्यूसर्स, मल्टीप्लेकस एसोसिएशन ऑफ इंडिया औ पीवीआर आईनॉक्स के शेयरहोल्डर्स ने मिलकर हाई कोर्ट में अपील की थी। याचिका में कहा गया था कि सभी थिएटर में इस तरह से टिकट की कीमतों को सीमित कर देने से नुकसान होगा। याचिका में कहा गया कि सिंगल स्क्रीन थिएटर के मुकाबले मल्टीप्लेक्सेज में सुविधाएं ज्यादा होती हैं। ऐसे में वहां फिल्म दिखाने का खर्च भी ज्यादा आता है। याचिका में कहा गया था कि कि ओटीटी प्लैटफॉर्म, सैटलाइट टीवी और मनोरंजन के अन्य साधनों पर कड़े नियम नहीं हैं। वहीं इस तरह के नियम केवल थिएटर पर ही लगाए जा रहे हैं। एसोसिएशन ने कहा कि सरकार के ये नियम संविधान के आर्टिकल 19 (1) (g) का उल्लंघन करते हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि मल्टीप्लेक्स में टेक्नॉलजी, इनवेस्टमेंट, फॉर्मेट पर ज्यादा खर्च होता है और इसका बिना ध्यान दिए ही नियम बनाना गलत है। नियम में 75 सीट या उससे कम सीट वाले मल्टी स्क्रीन प्रीमियम सिनेमा को छूट दी गई थी। हालांकि इसको पारिभाषित नहीं किया गया था। राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि सभी को मनोरंजन का अधिकार है और ऐसे में जनता के हित में यह फैसला लिया गया है। एसोसिएशन की तरफ से पेश हुए वकील अदया होला ने कहा कि इस तरह से 200 रुपये का कैप निर्धारित कर देना मनमाना रवैया है। उन्होंने कहा कि ग्राहक ज्यादा पैसे खर्च करके भी लग्जरी सिनेमा देखना चाहता है। ऐसे में एग्जिबिटर्स को भी लग्जरी चीजें उपलब्ध करवाने के लिए कीमत निर्धारित करने की छूट मिलनी चाहिए। कोर्ट में याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि इसी तरह का मामला एक अन्य राज्य में भी था। कर्ट में जाने के बाद नियम बदलना पड़ा था। एक अन्य वकील ने कहा कि इस मामले में राज्य सरकार को पड़ना ही नहीं चाहिए। यह मामला ग्राहकों और थिएटर मालिकों के बीच का है।  

सेवा पखवाड़ा के तहत आज जनकपुर में रक्तदान

जनकपुर   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा पूरे देश में सेवा पखवाड़ा की शुरुआत की गई है। इसी क्रम में भाजपा मंडल जनकपुर द्वारा आज दिनांक 22 सितंबर 2025 को जनकपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता शामिल हुए, वहीं क्षेत्र के युवाओं ने भी बढ़-चढक़र हिस्सा लिया। जहां कार्यकर्ताओं द्वारा कुल 9 यूनिट रक्तदान किया गया। जिसमें जनकपुर मंडल के मंडल अध्यक्ष नरेश यादव, जिला मंत्री पवन शुक्ला, नगर पंचायत के उपाध्यक्ष निलेश मिश्रा, रामनरेश यादव , गणेश तिवारी,अमित गुप्ता,ओम प्रकाश सोनी, अंकुश सिंह, रमेश बैगा ने रक्तदान किया।

क्रिकेट का काला सच: युवराज सिंह समेत स्टार खिलाड़ियों से ED की पूछताछ जारी

नई दिल्ली  भारत के पूर्व स्टार क्रिकेटर युवराज सिंह आज ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप से जुड़े एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी के सामने पेश हुए। ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप ‘वनxबेट’ से जुड़े धन शोधन के मामले में युवराज सिंह को पूछताछ के लिए ईडी ने पेश होने के लिए कहा था। 43 वर्ष के युवराज दोपहर बारह बजे एजेंसी के दफ्तर पहुंचे। आने वाले समय में कई और लोगों से भी इस मामले में पूछताछ होनी है। कुछ क्रिकेटरों के बयान भी ईडी ने दर्ज कर लिए हैं। युवराज समेत तमाम क्रिकेटरों ने इस ऐप का प्रचार अलग-अलग तरीकों से किया था। पीटीआई न्यूज के अनुसार अधिकारियों ने बताया कि एजेंसी ने इस हरफनमौला से पूछताछ की और धन शोधन निरोधक अधिनियम के तहत उनके बयान दर्ज किये। एक इन्फ्लुएंसर अन्वेशी जैन भी इसी मामले में पूछताछ के लिए ईडी के समक्ष पेश हुई। ईडी इससे पहले क्रिकेटर सुरेश रैना, शिखर धवन, रॉबिन उथप्पा, टीएमसी की पूर्व सांसद और बांग्ला अभिनेत्री मिमि चक्रवर्ती, अभिनेता अंकुश हाजरा से भी पूछताछ कर चुका है। अभिनेता सोनू सूद को बुधवार को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। इस सट्टेबाजी ऐप के संचालन की जांच ईडी की ऐसे प्लेटफार्मों के खिलाफ व्यापक जांच का हिस्सा है, जिन पर करोड़ों रुपये की ठगी करने और कथित तौर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों की भारी मात्रा में चोरी करने के आरोप हैं। इस जांच के तहत आने वाले दिनों में एजेंसी द्वारा कुछ अन्य खिलाड़ियों, फिल्म अभिनेताओं, ऑनलाइन प्रभावशाली व्यक्तियों और मशहूर हस्तियों से पूछताछ किए जाने की संभावना है। सभी से घंटों पूछताछ की जा रही है। हालांकि, अभी तक कोई बड़ा खुलासा नहीं हुआ है। लगभग आधा दर्जन के करीब बड़ी हस्तियों से ईडी ने पूछताछ की हुई है, लेकिन कोई ठोस सबूत या खुलासा धन शोधन मामले में नहीं हुआ है। हालांकि, अब इस तरह के ऐप हमेशा के लिए प्रतिबंधित कर दिए गए हैं।  

वास्तु के अनुसार घर में कौन-सा स्थान कैसा होना चाहिए

कहा जाता है कि वास्तु नियमों का ध्यान रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है और व्यक्ति को नेगेटिव एनर्जी से छुटकारा मिलता है। ऐसे में चलिए जानते हैं कि वास्तु के मुताबिक घर की किस दिशा में कौन-सी चीजें रखनी चाहिए।  उत्तर दिशा में रखें ये चीजें वास्तु शास्त्र में उत्तर दिशा में पानी से संबंधित चीजें रखना शुभ माना जाता है। ऐसे में आप इस दिशा में पानी के स्त्रोत जैसे बोरिंग, छोटा-सा फाउंटेन या फिर पानी की टंकी रख सकते हैं। उत्तर दिशा में मंदिर रखना भी शुभ होता है। इसी के साथ इस दिशा में धन या तिजोरी आदि रखने से भी आपको लाभ मिल सकता है। पूर्व दिशा के नियम वास्तु के मुताबिक इस दिशा को जितना हो सके हमेशा खाली रखना चाहिए। ऐसा करने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है। इसके साथ ही वास्तु के अनुसार इस दिशा में खिड़की होना बेहतर होता है। वहीं घर का दरवाजा भी पूर्व दिशा में होना भी वास्तु की दृष्टि से ठीक माना गया है। इन चीजों को रखने से मिलेगा लाभ वास्तु शास्त्र के अनुसार, पश्चिम दिशा में किचन का निर्माण करवाना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही इस दिशा में आप अपने घर का टॉयलेट भी बनवा सकते हैं, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि किचन और टॉयलेट पास-पास नहीं होना चाहिए। दक्षिण दिशा के वास्तु नियम दक्षिण दिशा में भारी सामान जैसे तिजोरी, मशीनें, आदि रखी जा सकती हैं। इसके साथ ही वास्तु शास्त्र में यह माना गया है कि यह दिशा जितनी ढकी हुई होती है उतना अच्छा होता है। इस दिशा में दीवार होना भी बेहतर माना जाता है। रखें इन दिशाओं का भी रखें ध्यान इसके साथ ही वास्तु शास्त्र में आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व दिशा), वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम दिशा), ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) और नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम) के नियम भी बताए गए हैं। ईशान कोण में पूजा घर, वाटर टैंक या बोरिंग रखना शुभ होता है। वहीं आग्नेय कोण में इलेक्ट्रॉनिक सामान रखा जा सकता है। वास्तु के अनुसार, वायव्य कोण में बेडरूम या गैरेज होना शुभ माना जाता है। वहीं अगर नैऋत्य कोण की बात करें, तो इस दिशा में कैश काउंटर, या मशीनें रखी जा सकती हैं।