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इजरायल को लेकर सीरिया का खुला कबूलनामा, राष्ट्रपति बोले – डरते हैं, समझौते की जरूरत

न्यूयॉर्क संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में संबोधन के लिए अपनी पहली ऐतिहासिक यात्रा पर पहुंचे सीरिया के नए राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने चेतावनी दी कि यदि इजरायल उनकी अंतरिम सरकार के साथ ऐसा सुरक्षा समझौता नहीं करता, जो सीरिया की संप्रभुता को सुरक्षित रखे, तो पूरा मध्य-पूर्व एक नए दौर की उथल-पुथल में घिर सकता है। हालांकि इस दौरान उन्होंने ये भी स्वीकार किया कि उनके देश को इजरायल से डर लगता है और वे इजरायल के लिए कोई खतरा नहीं हैं। लंबे समय तक सत्ता में रहे बशर अल-असद को दिसंबर में उखाड़ फेंकने के बाद शरा ने सीरिया की सत्ता संभाली थी। पूर्व जिहादी रह चुके शरा ने स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता इजरायल के साथ सुरक्षा समझौता है, लेकिन उन्होंने यहूदी देश पर आरोप लगाया कि वह जानबूझकर बातचीत को टाल रहा है और सीरिया की हवाई और जमीनी सीमाओं का उल्लंघन जारी रखे हुए है। शरा ने मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के एक कार्यक्रम में कहा, “हम इजरायल के लिए कोई समस्या खड़ी नहीं कर रहे हैं। हमें इजरायल से डर है, नाकि इजरायल को हम से। इजरायल की तरफ से बातचीत में देरी और हमारी सीमाओं का उल्लंघन कई तरह के जोखिम खड़े कर रहे हैं।” उन्होंने सीरिया के बंटवारे की किसी भी चर्चा को खारिज करते हुए कहा कि उनकी सरकार ड्रूज अल्पसंख्यक के हितों की रक्षा कर रही है। शरा ने कहा ने कहा, “जॉर्डन दबाव में है, और सीरिया के बंटवारे की कोई भी बात इराक और तुर्की को भी नुकसान पहुंचाएगी। इससे हम सभी फिर से वहीं लौट जाएंगे, जहां से शुरुआत हुई थी।” उन्होंने याद दिलाया कि सीरिया अभी-अभी डेढ़ दशक लंबे युद्ध से निकला है। अमेरिका की मध्यस्थता और “डि-एस्केलेशन” समझौता अमेरिका के सीरिया मामलों के विशेष दूत टॉम बरैक ने संकेत दिया कि सीरिया और इजरायल एक “डि-एस्केलेशन” समझौते के करीब हैं। इस समझौते के तहत इजरायल सीरिया पर हवाई हमले और घुसपैठ रोक देगा, जबकि सीरिया इस बात पर सहमत होगा कि वह इजरायल सीमा के पास कोई भारी मशीनरी या सैन्य उपकरण नहीं तैनात करेगा। बरैक के अनुसार, यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापक सुरक्षा समझौते की दिशा में पहला कदम होगा। उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि सभी पक्ष अच्छे विश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं।” गोलान हाइट्स और ड्रूज समुदाय पर तनाव सीरिया की सरकार चाहती है कि इजरायल हवाई हमले रोके और उन सैनिकों को हटाए जो गोलान हाइट्स के बफर जोन पर काबिज हैं। असद के पतन के बाद इजरायल ने लगातार सैन्य ठिकानों पर हमले किए, ताकि सीरियाई क्षमताओं को कमजोर किया जा सके। साथ ही, दक्षिणी सीरिया में ड्रूज समुदाय पर हो रहे हमलों को रोकने के लिए भी इजरायल ने हस्तक्षेप किया। ट्रंप प्रशासन की भूमिका और बाधाएं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दोनों देशों के बीच समझौते की घोषणा इसी हफ्ते करवाना चाहते थे, लेकिन अब तक पर्याप्त प्रगति नहीं हुई है। साथ ही, यहूदी नववर्ष रोश हशाना के चलते प्रक्रिया धीमी हो गई है। ट्रंप प्रशासन के एक अधिकारी ने द टाइम्स ऑफ इजरायल को बताया कि उभरता हुआ सुरक्षा समझौता “99% तैयार” है और अगले दो हफ्तों में इसकी घोषणा की जा सकती है। इजरायल की सतर्क प्रतिक्रिया इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को कहा कि सीरिया और लेबनान दोनों के साथ शांति की संभावना का नया अवसर पैदा हुआ है, खासकर इजरायल की सैन्य कार्रवाई के बाद जब लेबनानी संगठन हिजबुल्लाह को भारी नुकसान हुआ। हालांकि नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि सीरिया के साथ किसी भी समझौते को अंतिम रूप देने में अभी समय लगेगा।

कर्फ्यू की गिरफ्त में लेह: इंटरनेट स्पीड कम, सड़कों पर CRPF और पुलिस का सख्त पहरा

लेह लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर चला शांतिपूर्ण आंदोलन बुधवार को हिंसा में तब्दील हो गया. लेह की सड़कों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई झड़पों ने हालात बिगाड़ दिए. उपद्रव में चार लोगों की मौत हो गई और 80 से ज्यादा घायल हुए. स्थिति काबू से बाहर होती देख प्रशासन ने लेह और करगिल में कर्फ्यू लगा दिया. इंटरनेट स्पीड घटा दी और पुलिस-सीआरपीएफ की भारी तैनाती कर दी. फिलहाल, केंद्र शासित प्रदेश में अब तनावपूर्ण शांति है. लेह पुलिस ने हिंसक प्रदर्शनकारियों पर एक्शन लिया है और 50 लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस का कहना है कि मामले में जांच चल रही है. दोषियों को चिह्नित कर गिरफ्तार किया जाएगा.  इससे पहले बुधवार दोपहर उग्र प्रदर्शनकारियों ने लेह में राजनीतिक दल के कार्यालय और सरकारी इमारतों में आग लगा दी. पुलिस वाहनों को फूंक दिया और सुरक्षा बलों पर हमला कर दिया. घायलों में 40 पुलिस और सीआरपीएफ जवान भी शामिल हैं. फिलहाल, लेह में कर्फ्यू जारी है. प्रशासन की ओर से सख्त निषेधाज्ञा लागू की गई है. लोगों से शांति बहाल करने की अपील की जा रही है. शहर के संवेदनशील इलाकों में पुलिस और सीआरपीएफ की भारी तैनाती है.  जिन इलाकों में बुधवार को हिंसा हुई थी, वहां अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है. प्रशासन ने हिंसा भड़कने के लिए सोनम वांगचुक को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि उनके भड़काऊ बयानों ने युवाओं को उकसाया. ऐहतियात के तौर पर लेह में इंटरनेट स्पीड भी धीमी कर दी गई है. गृह मंत्रालय ने दावा किया है कि आंदोलन के बीच भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरणविद सोनम वांगचुक के भड़काऊ भाषणों ने भीड़ को हिंसा के लिए उकसाया. मंत्रालय ने कहा कि वांगचुक ने 'अरब स्प्रिंग' और नेपाल में Gen-Z विरोध का हवाला देकर लोगों को गुमराह किया. इसी दौरान हिंसा भड़क उठी और वांगचुक ने हड़ताल तोड़ दी. स्थिति को काबू में करने को लेकर प्रयास किए बिना वो एंबुलेंस से अपने गांव लौट गए. सरकार ने कहा कि हम लद्दाख के लोगों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए संवैधानिक सुरक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है. मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि संवाद की प्रक्रिया से अब तक कई महत्वपूर्ण फैसले हुए हैं. इनमें अनुसूचित जनजातियों का आरक्षण 45% से बढ़ाकर 84% किया गया. परिषदों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण सुनिश्चित हुआ. भोटी और पुर्गी भाषाओं को आधिकारिक भाषा घोषित किया गया. 1800 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई. हालांकि, प्रशासन का कहना है कि कुछ राजनीतिक रूप से प्रेरित लोग उच्चाधिकार प्राप्त समिति (HPC) के जरिए हो रही बातचीत को विफल करने में लगे हैं. घटनाओं के बाद लेह और करगिल दोनों जिलों में कर्फ्यू और बीएनएसएस की धारा 163 लागू कर दी गई.  हिंसा के बाद वामपंथी दलों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता की मांगों की अनदेखी ही इस संकट का कारण है. CPI(M) और CPI(ML) ने केंद्र पर संवैधानिक अधिकार छीनने और दमन की राजनीति करने का आरोप लगाया. कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस नेताओं ने भी घटना पर संवेदनशीलता के साथ कदम उठाने की मांग की. वहीं, बीजेपी ने हिंसा को साजिश करार दिया. लद्दाख में 1989 के बाद यह सबसे गंभीर हिंसक घटना बताई जा रही है. प्रशासन ने बुधवार शाम 4 बजे तक स्थिति नियंत्रण में होने का दावा किया, लेकिन इलाके में तनाव अभी भी बरकरार है.

जब मुख्यमंत्री खुद बने ग्राहक : घरेलू सामान की शॉपिंग कर उठाया जीएसटी दरों में कटौती का लाभ

रायपुर : मुख्यमंत्री अचानक पहुंचे मार्ट,ग्राहकों से की मुलाकात,ग्राहक बोले जीएसटी रिफॉर्म्स, बचत क्रांति जब मुख्यमंत्री खुद बने ग्राहक : घरेलू सामान की शॉपिंग कर उठाया जीएसटी दरों में कटौती का लाभ जीएसटी बचत उत्सव को लेकर जनभावनाओं से रूबरू होने "के मार्ट" पहुंचे मुख्यमंत्री मंथली बजट में आई कमी, कम कीमत में लिया ज्यादा सामान, जीएसटी कटौती नहीं यह "बचत क्रांति" है, मोदी जी ही ले सकते हैं ऐसा साहसिक निर्णय – लोगों ने मुख्यमंत्री को दी ऐसी प्रतिक्रिया जीएसटी दरों में हुए ऐतिहासिक सुधार से बाजारों में बढ़ी रौनक जीएसटी दरों में कमी से रोज़मर्रा के सामान हुए सस्ते प्राइस टैग में सूचित की जा रही है जीएसटी दरों में कमी के बाद नई कीमत रायपुर राजधानी रायपुर के सरोना स्थित शुभम "के मार्ट" में रोजमर्रा की ज़रूरत का सामान खरीद रहे लोग उस समय सुखद आश्चर्य से भर उठे, जब उन्होंने देखा कि जीएसटी बचत का लाभ उन्हें मिल रहा है या नहीं उसे देखने स्वयं प्रदेश के मुखिया आए है। दरअसल, आज जीएसटी बचत उत्सव को लेकर जनभावनाओं से रूबरू होने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय "शुभम के मार्ट" पहुंचे। उन्होंने खुद ग्राहक बनकर 1,645 रुपये के घरेलू सामान की शॉपिंग की एवं यूपीआई से भुगतान भी किया।इस दौरान उन्होंने खरीदारी कर रहे लोगों से बातचीत की और जीएसटी दरों में कटौती से घरेलू सामानों के मूल्य में आए फर्क के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने मार्ट पहुंचकर ज़रूरत के सामान खरीदे और जीएसटी दरों में कमी का लाभ लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आत्मीयता से लोगों का हालचाल जाना। उन्होंने खरीदारी कर रही गृहिणियों से घरेलू बजट पर आए असर की जानकारी ली, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों से उनकी दिनचर्या के बारे में पूछताछ की। इस बीच उन्होंने रोजमर्रा का सामना खरीदते हुए अन्य ग्राहकों से आत्मीयतापूर्वक वार्तालाप किया। मुख्यमंत्री का यह आत्मीय व्यवहार देखकर मौजूद लोग गदगद हो उठे और कहा कि प्रदेश का मुखिया आज हमारे बीच एक आम आदमी की तरह शामिल है। इस दौरान उन्होंने खरीददारों से चर्चा करते हुए जीएसटी सुधारों पर लोगों के विचार सुने। लोगों ने बताया कि दवाइयों और राशन की कीमत घटने से उन्हें बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री मुस्कुराते हुए बोले—"यही तो असली मकसद है कि सुधार की गूंज आम जनता तक पहुंचे।" इसके बाद उन्होंने खुद भी सामान खरीदा और नई कीमतें देखकर कहा—"यह सुधार केवल कागज पर नहीं, बल्कि हर परिवार की ज़िंदगी में दिखाई देने वाला परिवर्तन है।" मुख्यमंत्री  साय ने  सभी को स्वदेशी की मुहिम का साथ देने का आग्रह भी किया, जिस पर लोगों ने कहा आप आगे बढ़े ,हम आपके साथ है। जीएसटी कटौती नहीं, यह "बचत क्रांति" है मुख्यमंत्री से चर्चा करते हुए खरीदारी कर रहे रिटायर्ड एयरफोर्स अधिकारी  टी. पी. सिंह ने कहा कि आने वाले समय में जब इस दौर का इतिहास लिखा जाएगा, तब प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुए जीएसटी सुधार को ऐतिहासिक बजट क्रांति के रूप में दर्ज किया जाएगा। उन्होंने कहा—"पहले हम जितने पैसों में 30 दिन का राशन लेते थे, अब उन्हीं पैसों से 40 दिन से अधिक का राशन ले पा रहे हैं। हमारे प्रधानमंत्री ही इतना बड़ा साहसिक निर्णय ले सकते थे, कोई और ऐसा नहीं कर पाता।" स्टेशनरी में 12 प्रतिशत था टैक्स, अब हो गया जीरो राजधानी रायपुर के अवंती विहार निवासी  लद्दाराम नैनवानी ने बताया कि जीएसटी सुधार का सकारात्मक प्रभाव शिक्षा से भी जुड़ा है। शुभम "के मार्ट" में मुख्यमंत्री को नोटबुक दिखाते हुए उन्होंने कहा—"पहले इस पर 12 प्रतिशत टैक्स लगता था, लेकिन अब प्रधानमंत्री मोदी जी ने इसे शून्य कर दिया है। इस ऐतिहासिक कदम से कॉपियाँ और आवश्यक स्टेशनरी सस्ती हो गई हैं। ऐसा निर्णय हमारे प्रधानमंत्री ही कर सकते हैं।" उन्होंने आगे बताया—"पहले मैं बच्चों के लिए सालाना लगभग 2,000 रुपये की स्टेशनरी लेता था और अब इसमें लगभग 240 रुपये की बचत हो रही है।" चार जरूरी समान खरीदने आए, जीएसटी छूट से खरीदा 4 गुना अधिक सामान मार्ट में खरीदारी करने पहुंचे  मुरलीधर ने मुख्यमंत्री से बातचीत में बताया—"मैं आज केवल 4 ज़रूरी सामान खरीदने आया था, लेकिन जीएसटी दरों में कमी देखकर 4 गुना अधिक सामान खरीद लिया। जीएसटी में व्यापक सुधार से रोजमर्रा की सामग्रियाँ सस्ती हुई हैं और हमें सीधा लाभ मिल रहा है।" देवांगन दंपति ने बताया मंथली बजट में 10 प्रतिशत की कमी शुभम "के मार्ट" में खरीदारी करने पहुंचे चंगोराभाटा निवासी दंपति  जितेंद्र और मती पद्मा देवांगन ने कहा—"हमारे मासिक बजट में 10 प्रतिशत की कमी आई है।" गृहिणी मती पद्मा ने नए प्राइस टैग देखकर कहा—"पहले यही डिटर्जेंट और मसाले मैं ज्यादा कीमत में खरीदती थी। अब दरों में कटौती के बाद कम दाम देखकर सचमुच खुशी हो रही है। त्योहारी खरीदारी में काफी बचत हो रही है।" बजट से ज्यादा खरीदारी का मिला मौका मती सविता मौर्य और अनीता साकार नवरात्रि में आयोजित होने वाले कन्या भोज के लिए श्रृंगार सामग्री खरीदने आईं थीं। उन्होंने कहा—"श्रृंगार सामग्री के दाम पहले से कम हो गए हैं। जीएसटी दरों में कटौती ने हमें निर्धारित बजट से अधिक खरीदारी करने का अवसर दिया है। पहली बार लगता है कि त्योहारी सेल केवल विज्ञापन नहीं, बल्कि असल में राहत है।" उल्लखेनीय है कि जीएसटी दरों में हुए ऐतिहासिक सुधारों के बाद बाजारों में रौनक बढ़ी है और लोग लगातार खरीदारी कर रहे हैं। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में त्योहारी सीजन में लोगों को जीएसटी दरों में कटौती का बड़ा उपहार मिला है और इससे रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुएँ सस्ती हुई हैं।

आरक्षण सीमा पार: किन राज्यों ने किया लागू और एमपी में OBC कोटा 27% करने की तैयारी

भोपाल भारत में आरक्षण की अधिकतम सीमा को लेकर लगातार बहस चलती रहती है। मौजूदा दौर में मध्यप्रदेश में OBC आरक्षण को 27% किए जाने का मामला चल रहा है। इस मामले में आज से सुप्रीम कोर्ट में रोजना सुनवाई की जाएगी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि संविधान के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में आरक्षण 50% से ज्यादा नहीं दिया जा सकता। इसके बावजूद कई राज्य 50% से ज्यादा आरक्षण दे रहे हैं। ऐसे में आज बात करेंगे कि ये राज्य आखिर क्यों 50% से ज्यादा आरक्षण दे रहे हैं। दरहअसल सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा साहनी बनाम भारत सरकार (1992) केस में साफ कहा था, कि सामान्य परिस्थितियों में आरक्षण 50% से अधिक नहीं होना चाहिए। इसके बावजूद कई राज्यों ने इस सीमा को पार कर दिया है और अपने सामाजिक ढांचे व राजनीतिक समीकरणों के आधार पर 50% से ऊपर का कोटा लागू कर रखा है। इन राज्यों में 50% से ज्यााद आरक्षण… तमिलनाडु – 69%     1990-94 में कानून बना और इसे संविधान की नौंवीं अनुसूची में शामिल किया गया। तेलंगाना – 67%  शिक्षा और सरकारी नौकरियों में SC/ST/OBC/EWS को मिलाकर कुल आरक्षण। बिहार – 75%     हाल ही में राज्य ने आरक्षण को 65% तक बढ़ाया और EWS मिलाकर कुल लगभग 75% हो गया। गुजरात – 58-60%     EWS को शामिल करने के बाद कुल आरक्षण दर 50% से ऊपर चली गई। केरल – लगभग 60%     राज्य में SC/ST/OBC/EWS को मिलाकर कुल आरक्षण दर 60 %। 50% से ज्यादा आरक्षण देने पर क्या कहता है कानून .. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि 50% से ज्यादा आरक्षण असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर मान्य नहीं होगा। लेकिन कई राज्यों ने सामाजिक न्याय और जातिगत समीकरणों का हवाला देकर इसे बढ़ाया। खासतौर पर तमिलनाडु का 69% आरक्षण इसलिए बचा हुआ है क्योंकि इसे नौंवीं अनुसूची में डाल दिया गया, जिससे अदालत में इसकी वैधता चुनौती देना मुश्किल हो जाता है। भारतीय संविधान और सुप्रीम कोर्ट ने तय किया है कि सामान्य स्थिति में जाति-आधारित आरक्षण 50% से ज़्यादा नहीं हो सकता। लेकिन कुछ राज्यों ने इस सीमा को पार करते हुए 50% से अधिक आरक्षण की नीति लागू कर रखी है। MP में OBC आरक्षण बढ़ने पर क्या होगा समीकरण? आपको बता दें कि मध्यप्रदेश में मौजूदा दौर में आरक्षण कि स्थिति कुछ इस प्रकार है…     SC (अनुसूचित जाति) – 16%     ST (अनुसूचित जनजाति) – 20%     OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) – पहले 14%, जिसे बढ़ाकर 27% करने का प्रस्ताव है​​​ क्या 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण देना संवैधानिक है? ऐसे में अगर 27% आरक्षण लागू होता है तो मध्यप्रदेश में कुल आरक्षण बढ़कर 63% पहुंच जाएगा। लेकिन संवैधानिक रूप से यह तभी टिक पाएगा जब सरकार विशेष परिस्थितियों का ठोस तर्क कोर्ट में साबित करे। वरना इसकी वैधता सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।  

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राष्ट्रीय सेवा योजना के स्थापना दिवस एवं सम्मान समारोह में हुए शामिल

रायपुर व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर किया गया हर कार्य सेवा और राष्ट्र निर्माण का कार्य होता है। राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक राष्ट्रनिर्माण में महत्वपूर्ण भागीदारी निभा रहे हैं। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित राष्ट्रीय सेवा योजना के राज्य स्तरीय स्थापना दिवस एवं सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना के अंतर्गत देशभर में 4 लाख से अधिक विद्यार्थी स्वयंसेवक के रूप में कार्य कर रहे हैं। हमारे प्रदेश में भी एक लाख से अधिक विद्यार्थी सक्रिय रूप से अपनी भूमिका निभा रहे हैं, जो छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। आज जिन स्वयंसेवकों को उनके श्रेष्ठ कार्यों के लिए सम्मानित किया जा रहा है, उन्हें हम हार्दिक बधाई देते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज़ादी की लड़ाई के समय यह माना जाता था कि स्वतंत्रता संग्राम में सहयोग देना ही राष्ट्रसेवा है। आज जब देश स्वतंत्र हो चुका है, तो राष्ट्रसेवा का अर्थ है सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विकास में अपना समग्र योगदान देना। एनएसएस के स्वयंसेवक इस दिशा में बहुमूल्य योगदान दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने स्वयंसेवकों को राष्ट्रसेवा का स्वरूप समझाते हुए कहा कि जब हम एक पेड़ लगाते हैं तो राष्ट्रसेवा करते हैं। जब हम किसी को अस्पताल तक पहुँचाते हैं तो राष्ट्रसेवा करते हैं। किसी की आर्थिक मदद करना, किसी को पढ़ने-लिखने में सहयोग करना भी राष्ट्रसेवा ही है। हर कार्य जो हम अपने व्यक्तिगत स्वार्थ से परे होकर करते हैं, वही सेवा और राष्ट्र निर्माण का कार्य है। उन्होंने कहा कि एनएसएस के स्वयंसेवक पूरे मनोयोग से सेवा करते रहें और शिक्षा के प्रचार-प्रसार में योगदान दें ताकि कोई भी शिक्षा से वंचित न रहे। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हमारी सरकार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। नई औद्योगिक नीति के तहत उद्योगों में रोजगार देने वाले उद्यमियों को सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं। पिछले 10 महीनों में लगभग 7.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इस निवेश से बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री  टंकराम वर्मा ने कहा कि सेवा केवल दूसरों की मदद करना ही नहीं है, बल्कि यह चरित्र, सोच और जिम्मेदारी की भावना को आकार देने का माध्यम भी है। युवाओं की ऊर्जा और उत्साह ही समाज और राष्ट्र की असली पूंजी है। एनएसएस स्वयंसेवक जिस लगन और समर्पण से सेवा कार्य कर रहे हैं, वह हमारी युवा शक्ति का परिचायक है। स्वच्छ भारत अभियान की सफलता में एनएसएस स्वयंसेवकों की सक्रिय भूमिका रही है। उन्होंने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य सहित अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने इस अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना की पत्रिका ‘समर्पण’ और विकसित भारत क्विज कार्यक्रम के पोस्टर का विमोचन किया। उन्होंने राष्ट्रीय सेवा योजना अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य कर रही संस्थाओं, अधिकारियों और स्वयंसेवकों को सम्मानित भी किया। इस अवसर पर सीएसआईडीसी के अध्यक्ष  राजीव अग्रवाल, सचिव उच्च शिक्षा डॉ. एस. भारतीदासन, आयुक्त उच्च शिक्षा  संतोष कुमार देवांगन, एनएसएस उप कार्यक्रम सलाहकार डॉ. अशोक कुमार श्रोती, राज्य एनएसएस अधिकारी डॉ. नीता बाजपेयी, सभी जिलों के एनएसएस कार्यक्रम समन्वयक और प्रदेशभर से बड़ी संख्या में आए स्वयंसेवक उपस्थित थे।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का बयान – GST में कटौती से आम आदमी को सीधा लाभ

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का बयान – GST में कटौती से आम आदमी को सीधा लाभ GST में राहत की घोषणा, मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया जनहित में उठाया कदम सूरजपुर की दुकानों में ग्राहकों से की सीधी बातचीत, जागरूकता के लिए लगाए गए स्टीकर रायपुर   महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने  सूरजपुर जिले के विभिन्न दुकानों का भ्रमण कर ग्राहकों से सीधे संवाद किया। उन्होंने वस्तु एवं सेवा कर (GST) में कमी से आमजन को मिलने वाले प्रत्यक्ष लाभ की जानकारी दी और कहा कि यह कदम लोगों की आर्थिक बोझ को कम करने के लिए उठाया गया है। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार और राज्य सरकार आम जनता के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देती है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए रोजमर्रा की जरूरतों की वस्तुओं पर GST में भारी कमी की है। GST में कमी से लोगों की रोज़मर्रा की आवश्यक वस्तुएँ अब और भी किफायती हो गई हैं। यह पहल गरीब, मध्यम वर्ग और छोटे व्यापारियों के लिए बड़ी राहत साबित होगी। जागरूकता के लिए लगाए गए स्टीकर ग्राहकों ने भी मंत्री से बातचीत करते हुए अपनी संतुष्टि जाहिर की। एक ग्राहक ने कहा कि अब बाजार में सामान की कीमतें पहले से कम हैं, जिससे परिवार की ज़रूरतें पूरी करने में सहूलियत हो रही है। वहीं छोटे व्यापारियों ने भी बताया कि इससे ग्राहकों का रुझान बढ़ा है और बिक्री में सकारात्मक असर देखी जा रही है। जागरूकता अभियान के तहत दुकानों में विशेष स्टीकर लगाए गए, ताकि आम लोग GST में कमी से मिलने वाले फायदों से अवगत हो सकें। मंत्री ने उपस्थित नागरिकों से कहा कि वे भी अपने आस-पास के लोगों को इसके बारे में जानकारी दें, जिससे अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सकें। इस अवसर पर विधायक श्री भुलन सिंह मरावी सहित अन्य जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

बालोद प्रवास के दौरान शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने दिया आश्वासन

रायपुर : बालोद की अधिष्ठात्री देवियों के मंदिर परिसरों का होगा विकास बालोद प्रवास के दौरान शिक्षा मंत्री  गजेन्द्र यादव ने दिया आश्वासन   मंत्री यादव ने गंगा मैय्या झलमला, सियादेवी एवं कंकालिन माता की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख, समृद्धि की कामना की रायपुर प्रदेश के स्कूली शिक्षा, ग्रामोद्योग एवं विधि, विधायी मंत्री  गजेन्द्र यादव ने अपने  बालोद जिले के प्रवास के दौरान जिला मुख्यालय बालोद के समीपस्थ ग्राम झलमला स्थित माँ गंगा मैय्या मंदिर, गुरूर विकासखण्ड के ग्राम नारागांव स्थित सियादेवी मंदिर एवं ग्राम कंकालिन में कंकालिन मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख, समृद्धि की कामना की। नवरात्रि के पावन अवसर पर शिक्षा मंत्री  यादव ने बालोद जिले की प्रमुख तीनों अधिष्ठात्री देवियों का दर्शन करने के उपरांत मंदिर समिति के सदस्यों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने मंदिर समिति के सदस्यों एवं जनप्रतिनिधियों के मांग पर मंदिर परिसर में चल रहे प्रमुख विकास कार्यों को पूरा करने हेतु राशि स्वीकृति करने का आश्वासन भी दिया।   यादव ने गंगा मैय्या झलमला, सियादेवी एवं कंकालिन माता की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख, समृद्धि की कामना की प्रवास के दौरान शिक्षा मंत्री ने ग्राम कंकालिन में कंकालिन मंदिर परिसर के प्रवेश द्वार तथा डोम शेड निर्माण हेतु राशि स्वीकृत करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कंकालिन मंदिर परिसर में सुमधुर छत्तीसगढ़ी पंडवानी गायन का श्रवण भी किया। मंत्री  यादव अतिथियों के साथ सियादेवी मंदिर पहुँचकर मां सियादेवी का विधिवत पूजा-अर्चना किया। उन्होंने मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं एवं आम जनता के सुविधा हेतु निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए हर संभव मदद उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया। ग्राम झलमला स्थित गंगा मैया मंदिर पहुँचकर गंगा मैया का पूजा-अर्चना कर उनसे आशीर्वाद लिया। इस दौरान उन्होंने गंगा मैया मंदिर समिति के पदाधिकारियों से बातचीत कर मंदिर परिसर में सुविधाओं के विस्तार के संबंध में चर्चा की और हर संभव मदद उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया। 

आचार्य चाणक्य बताते हैं: सफलता पाने से पहले खुद से पूछें ये सवाल

जीवन में सफल होने के लिए कड़ी मेहनत के साथ-साथ आत्म मंथन की भी जरूरत होती है। जब तक इंसान को अपनी काबिलियत, हैसियत, और खुद की अहमियत का अंदाजा नहीं होगा, वो सही दिशा में कदम नहीं बढ़ा पाएगा। और बिना सही दिशा जानें तो सफलता की ओर एक पग बढ़ाना भी मुश्किल है। इसलिए अगर जीवन में सफल होना है, तो खुद के बारे में पूरी जानकारी होना जरूरी है और ये आपसे बेहतर भला कौन जानता है। इसलिए आगे बढ़ना है तो थोड़ा सा ठहरना भी जरूरी है। शांत मन से खुद को टटोलना भी जरूरी है और कुछ सवालों के जवाब ढूंढना भी जरूरी है। आचार्य चाणक्य भारत के इतिहास में हुए उन विद्वानों में से एक हैं, जिनकी बातें आज भी लोगों का मार्गदर्शन करने का काम कर रही हैं। उन्होंने जीवन के लगभग हर एक पहलू पर अपने स्पष्ट विचार रखे। जीवन में कोई भी व्यक्ति कैसे सफलता पा सकता है, इसपर तो आचार्य ने खूब लिखा। उन्होंने भी इस बात पर जोर दिया कि व्यक्ति को समय-समय पर खुद से कुछ जरूरी सवाल कर लेने चाहिए ताकि उसके सामने चीजें स्पष्ट हो सकें और वो अपने जीवन की सही राह चुन पाए। आइए जानते हैं आचार्य ने खुद से किन सवालों के जवाब तलाशने की बात कही है। कैसा चल रहा है समय हर इंसान के जीवन में उतार-चढ़ाव तो लगे ही रहते हैं। कभी सुख तो कभी दुख, जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। आपका समय कैसा चल रहा है, इसके बारे में समय-समय पर खुद से सवाल जरूर करते रहें। जीवन के उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय, इस पर आत्ममंथन करें। अगर जीवन में दुख है तो किन कारणों से है, उससे बाहर निकलने का समाधान क्या है; ये आपको तभी पता चलेगा जब आप शांत मन से इस पर विचार करेंगे। कौन है आपका सच्चा मित्र आपका सच्चा मित्र कौन है, इसके बारे में भी इंसान को जानकारी होना बहुत जरूरी है। हर इंसान के जीवन में कई तरह के लोग होते हैं लेकिन सब पर आंख मूंद कर भरोसा कर लेना समझदारी नहीं। अगर आपको जीवन में तरक्की पानी है, तो इंसान की परख होना जरूरी है। कौन सा इंसान आपका सच्चा साथी है और कौन सिर्फ दिखावे के लिए आपके साथ है, इस बात को भी आप तभी समझ पाएंगे जब खुद से एकांत में इसे लेकर सवाल करेंगे। कैसी जगह पर है आपका निवास स्थान इंसान जिस जगह पर रहता है, उस माहौल का उसके जीवन पर गहरा असर पड़ता है। इसलिए अपने माहौल को अच्छा रखना जरूरी है। हर इंसान को खुद से ये सवाल करना चाहिए कि वह जिन लोगों के साथ उठ- बैठ रहा है, क्या वो उसके लिए सही हैं। आपके आसपास के माहौल का आपके जीवन पर पॉजिटिव असर पड़ रहा है या नेगेटिव, इसके बारे में विचार करना जरूरी है। अगर आपके माहौल का आपके जीवन पर नेगेटिव असर पड़ रहा है तो उसे बदलने का प्रयास करें। कितनी है कमाई और कितना है खर्च इंसान अपने जीवन में तरक्की तभी हासिल करता है, जब उसे अपनी कमाई और खर्च के बीच बैलेंस बनाना आता है। वो कहावत तो आप सब ने सुनी होगी 'उतने पैर पसारिए जितनी लंबी सौर', इस कहावत का अर्थ है कि आदमी को अपनी आमदनी को ध्यान में रखकर ही खर्चा करना चाहिए। हर इंसान को इस पर विचार जरूर करना चाहिए कि उसकी कमाई कितनी है और उसका खर्चा कितना है। साथ ही कोशिश करनी चाहिए की जितनी कमाई हो, खर्च उससे कम ही हो और बचत की जा सके। क्या है आपकी काबिलियत हर इंसान में अलग अलग गुण होते हैं। किसी को पढ़ाई में रुचि है तो किसी को संगीत में, कोई अच्छी आर्ट बना सकता है तो कोई स्वादिष्ट खाना। इसके अलावा हर इंसान का इंटरेस्ट ऑफ एरिया भी अलग-अलग होता है। कोई बिजनेस करना चाहता है तो कोई इंजीनियर बनना चाहता है, किसी को डॉक्टर बनना है तो कोई एक्टर बनने के सपने देखता है। ऐसे में जीवन में सफल होने के लिए हर इंसान को अपनी काबिलियत जरूर पहचाननी चाहिए। किस काम में आपका मन लगता है और कौन से काम को आप आसानी से कर सकते हैं, इस पर विचार जरूर करें। अपनी काबिलियत को पहचानकर ही भविष्य की प्लानिंग करें। इसके बाद आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।

जीएसटी सुधारों से बढ़ेगा निवेशकों का विश्वास: रायपुर में बोले वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी

जीएसटी पर कटौती का लाभ आम जनता तक पहुँचाने हेतु राज्य जीएसटी का विशेष अभियान रायपुर छत्तीसगढ़ में जीएसटी दरों में कटौती का लाभ सीधे जनता तक पहुँचे, इसके लिए राज्य सरकार ने विशेष अभियान शुरू किया है। वित्त मंत्री  ओ. पी. चौधरी ने आज राजधानी के विभिन्न बाजारों का दौरा कर दुकानदारों और उपभोक्ताओं से संवाद किया तथा सुधारों का असर ज़मीनी स्तर पर सुनिश्चित करने की बात कही। इस अवसर पर विधायक अनुज शर्मा भी उपस्थित थे। वित्त मंत्री  चौधरी ने कहा कि जीएसटी सुधारों का असर सीधे जनता तक पहुँचना ही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि राज्य जीएसटी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिये गये हैं कि वे प्रत्येक बाजार का नियमित भ्रमण करें और यह सुनिश्चित करें कि कटौती का लाभ केवल कागज़ों तक सीमित न रहे, बल्कि उपभोक्ताओं की जेब तक पहुँचे। उन्होंने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ शासन का दृढ़ संकल्प है कि जीएसटी दरों के सरलीकरण और कटौती से आम जनता को सीधा लाभ मिले। सरकार की प्रतिबद्धता है कि लोगों को आवश्यक वस्तुएँ और भी किफायती दामों पर उपलब्ध हों तथा सुधारों का असर हर घर-परिवार में स्पष्ट रूप से महसूस किया जा सके। वित्त मंत्री ने कहा कि 22 सितंबर 2025 से नवरात्रि के पावन अवसर पर ‘जीएसटी बचत उत्सव’ की शुरुआत की गई है। इस उत्सव के अंतर्गत आमजन के उपयोग की वस्तुओं पर उल्लेखनीय कमी की गई है। इसमें हेयर ऑयल, साबुन, शैम्पू, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक सामान, साइकिल, छोटी कारें, एयर कंडीशनर, टीवी, ट्रैक्टर जैसी कई घरेलू वस्तुएँ शामिल हैं। इन सभी पर आम जनता को सीधी राहत दी जा रही है। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि वे बाजारों में भ्रमण के दौरान व्यापारी बंधुओं को दरों में कमी की पूरी जानकारी दें और उपभोक्ताओं से सीधा संवाद स्थापित करें। उन्हें यह समझाना आवश्यक है कि जीएसटी दरों में कटौती से वस्तुओं के दाम घटे हैं और यह राहत उपभोक्ताओं तक पहुँचना ही इस सुधार का उद्देश्य है। वित्त मंत्री  चौधरी ने कहा कि “जीएसटी बचत उत्सव केवल एक औपचारिक पहल नहीं है, बल्कि यह जनसामान्य के जीवन स्तर को सुधारने का एक ठोस प्रयास है। यह पहल राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देगी, उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ाएगी और व्यापार को भी प्रोत्साहित करेगी।” उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए जीएसटी दरों में कटौती और सरलीकरण की घोषणा की थी। इसके पश्चात् जीएसटी कौंसिल की 56वीं बैठक में लिये गये निर्णय के अनुसार 22 सितंबर 2025 से ये प्रावधान पूरे देश में लागू हो चुके हैं।

अटल पंचायत डिजिटल सुविधा केंद्र से ग्रामीणों को मिल रही बैंकिंग व अन्य सेवाओं का लाभ: मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े

रायपुर : गांव-गांव में डिजिटल सशक्तिकरण: मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े अटल पंचायत डिजिटल सुविधा केंद्र से ग्रामीणों को मिल रही बैंकिंग व अन्य सेवाओं का लाभ: मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े रायपुर महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से जिले में अटल पंचायत डिजिटल सुविधा केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, ताकि ग्रामीण अंचलों को बैंकिंग सहित सभी सीएससी सेवाएं पंचायत स्तर पर ही उपलब्ध हो सकें। मंत्री मती राजवाड़े सूरजपुर जिला पंचायत कार्यालय में आयोजित एक बैठक को संबोधित कर रही थीं। इस बैठक में जिले के सभी सरपंचों एवं सीएससी द्वारा अधिकृत वीएलई (Village Level Entrepreneur) उपस्थित रहे। बैठक में चर्चा की गई कि अटल पंचायत डिजिटल सुविधा केंद्र के माध्यम से ग्रामीणों को बैंकिंग सेवाएं, बिजली बिल भुगतान, पेंशन व बीमा योजनाएं, आधार व अन्य शासकीय योजनाओं की सेवाएं सीधे पंचायत स्तर पर उपलब्ध होंगी। मंत्री मती राजवाड़े ने कहा कि यह केंद्र ग्रामीणों की समय और संसाधन की बचत के साथ-साथ उन्हें डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने सरपंचों और वीएलई से अपील की कि वे पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य करते हुए अधिक से अधिक लोगों तक इन सेवाओं का लाभ पहुँचाएँ। बैठक में विधायक  भुलन सिंह मरावी, जिला पंचायत अध्यक्ष मती चंद्रमणि पैकरा, अन्य जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।