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कम दाम में बड़ा कमाल: 5000mAh बैटरी के साथ देसी ब्रांड का नया स्मार्टफोन

  नई दिल्ली देसी कंपनी लावा ने एक नया स्‍मार्टफोन सिर्फ 6999 रुपये में लॉन्‍च कर दिया है। इसका नाम Lava SHARK 2 4G है। जैसाकि नाम से ही पता चलता है यह एक 4जी स्‍मार्टफोन है और उन लोगों के लिए बेहतर साबित हो सकता है, जो फीचर फोन से स्‍मार्टफोन में स्‍विच करना चाहते हैं। Lava SHARK 2 4G में 6.75 इंच का बड़ा एचडी प्‍लस डिस्‍प्‍ले, 4 जीबी रैम, 120 हर्त्‍ज का रिफ्रेश रेट दिया गया है। फोन में 50 मेगापिक्‍सल का एआई कैमरा, 5 हजार एमएएच बैटरी दी गई है। यह एंड्रॉयड 15 पर चलता है और कंपनी दावा करती है कि यूजर्स को फालतू के ऐप्‍स इसमें प्रीलोड नहीं मिलेंगे। Lava SHARK 2 4G के प्राइस Lava SHARK 2 4G के दाम 6999 रुपये हैं। यह सिंगल वेरिएंट 4 जीबी रैम और 64 जीबी मॉडल की कीमत है। Lava SHARK 2 4G के फीचर्स, स्‍पेसिफ‍िकेशंस Lava SHARK 2 4G में 6.75 इंच का एचडी प्‍लस नॉच डिस्‍प्‍ले दिया गया है। इसमें 120 हर्त्‍ज का रिफ्रेश रेट है। 4 जीबी रैम वाला यह फोन यूनिसॉक के प्रोसेसर से लैस है और बेसिक टास्‍क आराम से हैंडल कर सकता है। फोन में 5 हजार एमएएच की बैटरी दी गई है, जो टाइप-सी पोर्ट के जरिए 10वॉट की चार्जिंग ऑफर करती है। हालांकि फोन 18 वॉट तक फास्‍ट चार्जिंग के साथ आता है, लेकिन बॉक्‍स में कम पावर का एडप्‍टर मिलता है। Lava SHARK 2 4G में बैक साइड में 50 मेगापिक्‍सल का एआई कैमरा दिया गया है। फ्रंट में 8 मेगापिक्‍सल का शूट है। इसकी 4 जीबी रैम को वर्चुअल 4 जीबी तक और बढ़ाया जा सकता है। स्‍टोरेज 64 जीबी है। फोन डुअल सिम सपोर्ट के साथ आता है और आईपी 54 रेटिंग इसे मिली है यानी धूल और पानी से होने वाले नुकसान से बचा रह सकता है। इसे दो कलर्स- एक्‍ल‍िप्‍स ग्रे, ऑरोरा गोल्‍ड में लाया गया है। 1 साल का एंड्रॉयड अपग्रेड और 2 साल का सिक्‍योरिटी अपडेट कंपनी की साइड से मिलेगा। कंपनी दावा करती है कि यह फोन एंड्रॉयड 15 पर चलेगा और कोई ब्‍लोटवेयर इसमें नहीं है। फालतू के ऐप्‍स या ऐड देखने का झंझट नहीं रहेगा। फोन की सेल डेट का ऐलान अभी नहीं किया गया है। यह जल्‍द ऑनलाइन और ऑफलाइन उपलब्‍ध हो सकता है।

संस्कृति, इतिहास और अध्यात्म का संगम जहां इतिहास बोलता है, संस्कृति मुस्कुराती है और अध्यात्म सांस लेता है

रायपुर, छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्थित सिरपुर (श्रीपुर) केवल एक पुरातात्त्विक स्थल ही नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों का जीवंत प्रतीक है। यह नगर महान सम्राट महाशिवगुप्त बालार्जुन की राजधानी रहा है और अपनी स्थापत्य कला, बौद्ध धरोहरों तथा प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। सिरपुर का उल्लेख प्राचीन भारतीय ग्रंथों और अभिलेखों में मिलता है। यहाँ भगवान शिव, विष्णु, बुद्ध और जैन धर्म के उपासना स्थलों के अवशेष मिले हैं। 7वीं शताब्दी में चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी सिरपुर का उल्लेख अपनी यात्राओं में किया है, जिससे इसकी अंर्तराष्ट्रीय ख्याति सिद्ध होती है। यह नगर धार्मिक सहिष्णुता और कला का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है। यहाँ 22 शिव मंदिर, 5 विष्णु मंदिर, 3 जैन विहार और एक विशाल बौद्ध विहार के अवशेष प्राप्त हुए हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा सिरपुर में लगातार संरक्षण और मरम्मत का कार्य किया जा रहा है जिससे इसकी ऐतिहासिक गरिमा बनी रहे। डिजिटल टूर, क्यूआर कोड आधारित जानकारी और थ्रीडी गाइडेंस सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग हो रहा है। सिरपुर बौद्ध, जैन और हिन्दू स्थापत्य कला का त्रिवेणी संगम है। यहां स्थित लक्ष्मण मंदिर भारत का पहला ईंटों से निर्मित मंदिर है जो वास्तुकला का अनुपम उदाहरण है। आनंदप्रभु कुटीर विहार बौद्ध भिक्षुओं का प्रमुख केंद्र है, जहाँ चीन से आए भिक्षु रह चुके हैं। गंधेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित मंदिर है, जिसमें अनेक मूर्तियाँ और सांस्कृतिक प्रतीक हैं। 1872 में अलेक्जेंडर कनिंघम द्वारा सिरपुर के अवशेषों की खोज की गई थी। इसके बाद यहाँ अनेक उत्खनन कार्य हुए, जिनमें बुद्ध, विष्णु, शिव और जैन परंपराओं के असंख्य साक्ष्य मिले। चीन, जापान और दक्षिण कोरिया के विद्वान भी सिरपुर को एशिया की बौद्ध धरोहरों में महत्वपूर्ण स्थान मानते हैं।     हर वर्ष आयोजित होने वाला सिरपुर महोत्सव छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। इसमें देश-विदेश के कलाकार शास्त्रीय नृत्य, संगीत और नाट्य प्रस्तुतियाँ देते हैं। यहाँ ईको-ट्रेल, हस्तशिल्प बिक्री केंद्र और स्थानीय भोजनालयों की योजनाएँ चलाई जा रही हैं, ताकि स्थानीय समुदाय को रोजगार मिले और पर्यटन को बढ़ावा मिले। विद्यार्थियों के लिए सिरपुर की ऐतिहासिक धरोहरों पर आधारित पाठ्यक्रम भी प्रारंभ किया गया है।     साय सरकार ने सिरपुर को विश्व पर्यटन मानचित्र पर लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। विजन 2047 के तहत आधुनिक बुनियादी ढांचा, सड़क, प्रकाश व्यवस्था और अंर्तराष्ट्रीय स्तर का पर्यटक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। सिरपुर की पुरातात्त्विक संरचनाओं को संरक्षित रखने के लिए अत्याधुनिक तकनीकें अपनाई जा रही हैं। सिरपुर केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक है। यहाँ के मंदिर, विहार, मूर्तियाँ और जीवंत परंपराएँ हमें यह सिखाती हैं कि भारत की संस्कृति, सहिष्णुता, कला और ज्ञान का संगम है। सिरपुर सचमुच वह स्थान है जहाँ इतिहास बोलता है, संस्कृति मुस्कुराती है और अध्यात्म सांस लेता है।

सोशल मीडिया पर साड़ी बेचने के बहाने ठगे 50 करोड़, पुलिस ने साइबर गिरोह का किया भंडाफोड़

खैरागढ़ छत्तीसगढ़ की खैरागढ़ पुलिस ने एक ऐसी सनसनीखेज कार्रवाई को अंजाम दिया है, जिसकी चर्चा अब पूरे प्रदेश में हो रही है. इंस्टाग्राम पर साड़ी बेचने के नाम पर हुई एक छोटी-सी ऑनलाइन ठगी के मामले ने पुलिस को 50 करोड़ रुपए के बड़े साइबर फ्रॉड करने वाले गिरोह तक पहुंचा दिया. छोटी शिकायत, बड़ा खुलासा मामला खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय की छात्रा वसुधा सिन्हा की शिकायत से शुरू हुआ. छात्रा ने पुलिस को बताया था कि उसने इंस्टाग्राम पर एक ऑनलाइन पेज से साड़ी खरीदी और पेमेंट करने के बाद उसके साथ ₹64,000 की ठगी हो गई. पहली नज़र में यह एक छोटा मामला लग रहा था, लेकिन खैरागढ़ साइबर सेल ने जब इंस्टाग्राम पेज, पेमेंट ऐप और बैंक खातों की गहन जांच शुरू की, तो ठगी के एक बड़े जाल का पता चला. ‘100 बुक’ गेमिंग ऐप के जरिए भी ठगी जांच में सामने आया कि इस फ्रॉड के पीछे मुंबई के डोम्बिवली और कल्याण में सक्रिय एक बड़ा गैंग काम कर रहा था. ये शातिर ठग इंस्टाग्राम पर साड़ी बेचने के फर्जी शॉपिंग पेज बनाकर देशभर के लोगों को निशाना बना रहे थे. चौंकाने वाली बात यह है कि ये लोग “100 बुक” नाम का एक ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग ऐप भी चला रहे थे, जिसके जरिए ठगी के इस काले कारोबार को और बड़ा किया जा रहा था. ₹50 करोड़ का ट्रांजेक्शन, 100 से ज्यादा फर्जी खाते साइबर सेल ने जब आरोपियों के बैंक खातों और मोबाइल नंबरों का विश्लेषण किया, तो सामने आया कि गिरोह ने ठगी के लिए 100 से अधिक फर्जी सिम कार्ड और बैंक खाते बना रखे थे. इन खातों के माध्यम से ही करीब ₹50 करोड़ का बड़ा लेन-देन हुआ था. डिलीवरी ब्वॉय बनकर की गई रेकी, फिर छापा गिरोह की धरपकड़ के लिए खैरागढ़ पुलिस की टीम ने 7 दिन तक मुंबई में डेरा डाला. टीम ने आरोपियों की पहचान और ठिकाने की पुष्टि के लिए खुद को ‘डिलीवरी ब्वॉय’ बताकर इलाके में रेकी की. सही मौका देखकर, पुलिस ने डोम्बिवली के दो फ्लैटों में एक साथ छापा मारा और 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. आरोपियों की पहचान गिरफ्तार किए गए आरोपियों में महाराष्ट्र और बिहार के निवासी शामिल हैं, जिनके नाम गौतम पंजाबी, पवन सुरूसे, विनायक मोरे, अमित मोरे, रामचंद्र चौके, अमोल दिवनाने, अभिषेक डंबडे और मनोज मुखिया बताए जा रहे हैं. पुलिस ने इनके पास से 5 लैपटॉप, 14 मोबाइल, 51 बैंक पासबुक, 51 एटीएम कार्ड, 15 चेकबुक और 25 सिम कार्ड जब्त किए हैं. राजनांदगांव रेंज के आईजी अभिषेक शांडिल्य ने बताया कि सभी आरोपियों पर संगठित अपराध और जुआ अधिनियम (Gambling Act) के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेजा जा रहा है. पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके ठगी के तरीकों की और कड़ियां तलाश रही है. खैरागढ़ पुलिस की इस पेशेवर कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी देश के किसी भी कोने में क्यों न छिपे हों, कानून के हाथ उन तक जरूर पहुंचेंगे.

सुरक्षा से विकास तक: नक्सल प्रभावित इलाकों में बदली तस्वीर

बीजापुर बीजापुर जिले के थाना भोपालपटनम क्षेत्रान्तर्गत कैम्प कांडलापर्ती-2 और थाना फरसेगढ़ क्षेत्रान्तर्गत ग्राम पील्लूर में नवीन सुरक्षा और जन-सुविधा कैम्प की स्थापना की गई है. यह पहल छत्तीसगढ़ शासन की “नियद नेल्ला नार” योजना के अंतर्गत ग्रामीणों को मूलभूत सुविधा और सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए की गई है. विपरीत मौसम और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद सुरक्षा बलों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए इन कैम्पों की स्थापना सफलतापूर्वक की. यह कदम न केवल सुरक्षा दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है बल्कि क्षेत्रीय विकास की गति को भी सशक्त करेगा. अंतर्राज्यीय सम्पर्क और आधारभूत संरचना का विस्तार भोपालपटनम् से फरसेगढ़, सेण्ड्रा और गढ़चिरौली को जोड़ने की दिशा में यह एक अहम प्रगति है. आगामी समय में नेशनल पार्क क्षेत्र के ग्रामों को सड़क और अन्य सुविधाओं से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त होगा. सुरक्षा और विकास का समन्वय कैम्प की स्थापना से स्थानीय नागरिकों को स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, पेयजल, पीडीएस दुकानें, मोबाइल नेटवर्क, सड़क और पुल-पुलिया जैसी सुविधाएं सुलभ होंगी. इससे माओवादियों की अंतर्राज्यीय गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा. नक्सल उन्मूलन में उल्लेखनीय उपलब्धियां वर्ष 2024 से अब तक बीजापुर जिले में कुल 21 सुरक्षा कैम्प स्थापित किए गए हैं. इन प्रयासों के फलस्वरूप 599 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है, 196 माओवादी अलग अलग मुठभेड़ में मारे गए हैं तथा 986 माओवादियों को सुरक्षा बलो की कार्यवाही में गिरफ्तारी हुई है. सुरक्षा बलो के द्वारा किये जा रहे प्रयासों के फलस्वरूप बस्तर संभाग मे 210 माओवादियों ने हथियार के साथ आत्मसमर्पण किये है, यह नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी रणनीतिक सफलता है. प्रशासनिक नेतृत्व और सहयोग जिला बीजापुर के सुदूर अंचल क्षेत्रों में नक्सल उन्मूलन अभियान एवं विकासात्मक कार्यो में तेजी लाने के लिए बस्तर रेंज आईजी सुन्दरराज पी., शालिन महानिरीक्षक केरिपु ऑप्स छ.ग. सेक्टर रायपुर, कमलोचन कश्यप पुलिस उप महानिरीक्षक रेंज दंतेवाड़ा, बी0एस0नेगी उप महानिरीक्षक (परि) सीआरपीएफ रेंज बीजापुर के मार्ग-दर्शन एवं डॉ0 जितेन्द्र कुमार यादव पुलिस अधीक्षक जिला बीजापुर, मोहित कुमार कमांडेंट केरिपु 22 बटालियन, के डी जोशी कमांडेंट केरिपु 214 बटालियन, विजेंद्र सिंह कमांडेंट केरिपु 222 बटालियन, अमित कुमार, कमांडेंट 153 सीआरपीएफ अशोक कुमार कमांडेंट कोबरा 210, पुष्पेन्द्र कुमार कमांडेंट कोबरा 206, रविन्द्र कुमार मीणा अति0 पुलिस अधीक्षक ऑप्स बीजापुर, अमन कुमार झा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नक्सल ऑप्स बीजापुर, संजय ध्रुव अति0 पुलिस अधीक्षक, मनोज तिर्की उप पुलिस अधीक्षक, अनुविभागीय अधिकारी भोपालपटनम घनश्याम कामड़े, कुलदीप सिंह डीसी ऑप्स बीजापुर की उपस्थिति में छत्तीसगढ़ शासन की ‘‘नियद नेल्ला नार’’ योजना के तहत जिला बीजापुर थाना भोपालपटनम क्षेत्र के ग्राम कांडलापर्ती-2 में दिनांक 24/10/2025 एवं थाना फरसेगढ़ क्षेत्रअंतर्गत ग्राम पिल्लूर मे दिनांक 27/10/2025 को नवीन सुरक्षा कैम्प स्थापित किया गया. नवीन कैम्प स्थापित होने से क्षेत्र में माओवादियों के अन्तर्राज्यीय गतिविधियों पर अंकुश लगेगा व नक्सल विरोधी अभियान संचालन में तेजी आयेगी एवं आप-पास क्षेत्रों में निवासरत ग्रामीणों को विकासात्मक कार्य एवं मूलभूत सुविधायें जैसे कि सड़क, पुल/पुलिया निर्माण, बिजली, पानी, स्वास्थ्य सुविधा, पीडीएस दुकाने, अच्छी शिक्षा, मोबाईल कनेक्टिविटी का विस्तार आदि की सुविधायें मिल पायेगा. नवीन सुरक्षा कैम्प स्थापित होने से क्षेत्र के आम-जन उत्साहित है. विकास की गति वर्ष 2023-24 और 2024-25 में अब तक जिले में कुल 43 नवीन सुरक्षा कैम्प स्थापित किए जा चुके हैं. “नियद नेल्ला नार” योजना के तहत इन क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, मोबाइल टावर, आंगनबाड़ी और अन्य जन-सुविधाओं का तीव्र विस्तार हुआ है.

भाजपा को घाटशिला में बड़ा झटका, हेमंत साहू ने छोड़े सभी पद

जमशेदपुर घाटशिला उपचुनाव नजदीक है। इसके चलते भाजपा ने तैयारी शुरू कर दी है। भाजपा ने घाटशिला उपचुनाव के लिए आक्रामक अभियान शुरू कर दिया है। वहीं, इसी बीच जमशेदपुर महानगर जिला कार्यसमिति के सदस्य हेमंत साहू ने भाजपा पार्टी की प्राथमिक सदस्यता व सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। साहू ने अपना त्यागपत्र भाजपा जमशेदपुर महानगर के जिलाध्यक्ष सुधांशु ओझा को सौंपा है। पत्र में उन्होंने लिखा है कि वे पार्टी के प्रत्येक दायित्व और प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे रहे हैं और उनके इस्तीफे को स्वीकार किया जाए। हेमंत साहू ने अपने त्यागपत्र में इस्तीफे का कोई विशेष कारण नहीं बताया है। वहीं, पार्टी नेतृत्व की ओर से इस पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। बता दें कि घाटशिला उपचुनाव 11 नवंबर को होगा। ऐसे में हेमंत साहू का सभी पदों से इस्तीफा देना इसके पीछे जरूर कोई बड़ा कारण छुपा हो सकता है। अभी तक पार्टी नेतृत्व की ओर से इस पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।  

घर में तनाव और कलह की वजह बन सकती हैं बाथरूम की ये वस्तुएं

घर में सुख-शांति और समृद्धि बनाए रखना हर किसी की इच्छा होती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के हर हिस्से की सही व्यवस्था जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाती है। खासकर बाथरूम के बारे में कुछ चीजें हैं जिनका ध्यान रखना बेहद जरूरी है, वरना यह घर की सुख-शांति पर असर डाल सकती हैं। तो आइए जानते हैं घर में सुख-शांति और पॉजिटिव एनर्जी बनाएं रखने के लिए बाथरूम की कौन-कौन सी चीजों को तुरंत हटाना चाहिए। टूटे या दरार वाले फिटिंग्स वास्तु के अनुसार, टूटे हुए टॉयलेट सीट, फटी हुई टब या सीटींग्स बाथरूम में नहीं होनी चाहिए। ऐसी चीजें नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं। इसलिए इन्हें बाथरूम से तुरंत हटा देना चाहिए। बाथरूम में अनावश्यक सामान वास्तु के अनुसार, बाथरूम में पुराने टब्स, खाली बोतलें और बेकार सामान जमा करना वास्तु दोष पैदा करता है। घर में पॉजिटिव एनर्जी को बनाएं रखने के लिए चीज़ों को साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखें। बाथरूम में अंधेरा या खराब लाइट वास्तु शास्त्र के अनुसार, कम रोशनी वाला बाथरूम नकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करता है। इसलिए हमेशा पर्याप्त रोशनी और हवादार व्यवस्था रखनी चाहिए। टूटी या घिसे चप्पलें वास्तु के अनुसार, बाथरूम में कभी भी टूटी चप्पलें या घिसे हुए जूते नहीं रखने चाहिए। ऐसे जूते घर की शांति और सुख को प्रभावित कर सकती है। टूटा हुआ शीशा वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर या बाथरूम में कभी भी टूटा हुआ शीशा नहीं लगाना चाहिए। टूटे हुए शीशे से वास्तु दोष पैदा हो सकता है और नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है।

महिला क्रिकेट की न्यूजीलैंड स्टार ऑलराउंडर ने ODI से लिया संन्यास, 19 साल का शानदार करियर पूरा

नई दिल्ली  क्रिकेट की दुनिया में उजली यादों का एक युग अब थमने को है. महिला वर्ल्ड कप 2025 (Women World Cup 2025) में सोफी डिवाइन (Sophie Devine) ने अपना आखिरी वनडे (ODI) मैच खेला और यह सिर्फ एक खेल का अंत नहीं बल्कि एक प्रेरक अध्याय का समापन है. न्यूजीलैंड की महिला टीम में उनकी मौजूदगी ने कई पीढ़ियों को प्रेरित किया. न्यूजीलैंड के लिए यह वर्ल्ड कप बिल्कुल सही नहीं गया. लीग स्टेज में टीम को सिर्फ एक मैच में ही जीत का स्वाद चखने को मिला. इसके साथ ही वह प्वाइंट्स टेबल में छठे स्थान पर रही. कीवी महिला टीम ने अपना आखिरी मैच इंग्लैंड के खिलाफ खेला जहां उन्हें 8 विकेट से हार का सामना करना पड़ा. इसी के न्यूजीलैंड टीम की कप्तान और स्टार ऑलराउंडर सोफी डिवाइन का सफर भी समाप्त हो गया. सोफी को मिला साथियों से सम्मान सोफी डिवाइन ने यह घोषणा पहले ही कर दी थी कि यह उनका आखिरी वर्ल्ड कप होगा, इससे उन्हें मानसिक रूप से तैयार होने का समय मिला. उनके फेयरवेल मैच में उनके साथी खिलाड़ी, विरोधी टीम और फैंस सभी ने उन्हें हौसला दिया. उन्होंने मैदान छोड़ते समय सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर (Guard Of Honour) भी पाया और भावनात्मक रूप से भावुक हो उठे. इस तरह की विदाई केवल एक खत्म नहीं बल्कि सालों के संघर्ष, समर्पण और टीम के प्रति निष्ठा का सम्मान भी है. सोफी इस पूरे वाक्या के समय काफी इमोशनल भी नजर आई.  जीत के साथ विदा चाहती थी मुकाबला खत्म होने के बाद सोफी डिवाइन ने बयान देते हुए कहा कि उनकी कोशिश जीत के साथ इस सफर को खत्म करने और विदा लेने की थी. लेकिन ऐसा नहीं हो सका. इसके साथ ही आगे उन्होंने इमोशनल होने को लेकर कहा कि मैने जितना सोचा था उतना नहीं रोई थी. क्योंकि मैं पहले ही इस बात को बता चुकी थी कि यह मेरा आखिरी वर्ल्ड कप होगा, जिसके चलते मुझे पहले से ही अपनी भवनाओं के बारे में पता था.  करियर का सफर बता दे कि सोफी का इंटरनेशनल करियर लगभग 19 साल का रहा है. उन्होंने महिला क्रिकेट में एक बेहतरीन ऑलराउंडर के रूप में अपनी छाप छोड़ी. सोफी डिवाइन ने अपनी लगन, मेहनत और टीम को आगे बढ़ाने की चाह से यह मुकाम बनाया. उनकी अगुवाई में टीम ने कई कठिनाइयों का सामना किया, बदलावों से जूझा और नए खिलाड़ियों को पंख दिए. इस सफर में उन्होंने न सिर्फ व्यक्तिगत सफलता पाई बल्कि टीम की नींव भी मजबूत की. विरासत और आगे का पथ जब एक महान खिलाड़ी जाता है, तो वह खाली नहीं छोड़ता बल्कि विरासत सौंप जाता है. डिवाइन का जाना केवल एक खिलाड़ी के करियर का अंत नहीं बल्कि उस कथानक का समापन है जिसमें उन्होंने महिलाओं की क्रिकेट को एक नए मुकाम तक पहुंचाया. अब यह जिम्मेदारी उन खिलाड़ियों और टीम की होगी कि उस विरासत को संभालें, आगे बढ़ाएं और नए कीर्तिमानों का निर्माण करें. सोफी की तरह, अब नए सितारे अपनी चमक बिखेरेंगे, लेकिन यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि उन्होंने रास्ता तैयार कर दिया.

साइबर सुरक्षा में मध्यप्रदेश की बड़ी उपलब्धि, MP-CERT बनी राष्ट्रीय स्तर पर आदर्श मॉडल

सायबर सुरक्षा में मध्यप्रदेश ने रचा नया इतिहास : एमपी-सीईआरटी बनी राष्ट्रीय नेतृत्व की मिसाल एमपी-सीईआरटी ने अधिकारियों-कर्मचारियों को दिया प्रशिक्षण भोपाल विश्व में अक्टूबर माह को 'सायबर सिक्योरिटी अवेयरनेस मंथ' के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य जन-सामान्य को इस दिशा में जागरुक बनाने का है कि डिजिटल सुरक्षा केवल विशेषज्ञों की नहीं, बल्कि हर नागरिक और हर संस्था की सामुहिक जिम्मेदारी है। इस अवसर पर मध्यप्रदेश साइबर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (एमपी-सीईआरटी) ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल करते हुए न केवल राज्य, बल्कि देशभर में नई मिसालें कायम की हैं। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया जिसने 'सायबर भारत सेतु, राष्ट्रीय साइबर अभ्यास का सफल आयोजन किया। एमपी-सीईआरटी ने स्थापना के बाद से अब तक 24 से अधिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए हैं। इनमें राज्य शासन के विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए।इन सत्रों का उद्देश्य सरकारी अधिकारियों को सायबर सुरक्षा के व्यावहारिक पहलुओं से जोड़कर उन्हें दैनिक कार्यप्रणाली में डिजिटल सुरक्षा के उपायों के प्रति संवेदनशील बनाना रहा है। एमपी-सीईआरटी ने रायसेन, विदिशा, राजगढ़ और सीहोर जिलों में जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए। यहां कर्मचारियों को संबंधित जिला कलेक्टर्स के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इन कार्यक्रमों का नेतृत्व विज्ञान एवं प्रौ‌द्योगिकी विभाग के अपर मुख्य सचिव एवं एमपी-सीईआरटी के निदेशक संजय दुबे ने किया। एमपी-सीईआरटी ने सितंबर 2025 में 'सायबर भारत सेतु' नामक राष्ट्रीय सायबर अभ्यास का सफल आयोजन किया। सीईआरटी-इंडिया और केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौ‌द्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से हुये इस आयोजन से मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया जिसने इस स्तर का प्रशिक्षण आयोजन किया। इस अभ्यास से सिद्ध हुआ कि मध्यप्रदेश सायबर सुरक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए तैयार है। नीति-निर्माताओं और वरिष्ठ अधिकारियों के लिए विशेष आवासीय प्रशिक्षण एमपी-सीईआरटी अब इस आधार पर आगे बढ़ते हुए समूह-अ और समूह-ब अधिकारियों तथा नीति- निर्माताओं के लिए तीन दिवसीय रेजिडेंशियल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। यह प्रशिक्षण अभ्यास 27 से 29 अक्टूबर 2025 तक नेशनल फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी, (एनएफएसयू), गांधीनगर, गुजरात में आयोजित किया जा रहा है।इसका उद्देश्य प्रतिभागियों को सायबर सुरक्षा की समग्र समझ, वैश्विक प्रवृत्तियों, साइबर रक्षा की सर्वोतम रणनीतियों और नीति निर्माण की संरचनाओं की गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे शासन के हर स्तर पर सुरक्षा संस्कृति को सशक्त किया जा सके। राज्य में सायबर सुरक्षा नेटवर्क के लिये 175 मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारियों की नियुक्ति एमपी-सीआईआरटी की रणनीति का मूल आधार 'विकेन्द्रित सतर्कता' (डीसेंट्रलाइज्ड विजिलेंस) है। राज्य सरकार ने अब तक 175 मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारियों (सीआईएसओ) की नियुक्ति विभागीय और जिलास्तर पर की है। ये अधिकारी सुनिश्चित करेंगे कि सायबर सुरक्षा केवल आईटी इकाइयों तक सीमित न रहे, बल्कि यह हर नीति, प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्यप्रवाह का हिस्सा बने। इस नेटवर्क को और मज़बूत करने के लिए एक एकीकृत सीआईएसओ पोर्टल लॉन्च किया गया है। इससे जोख़िम, घटनाओं, और संबंधित परामर्शों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग में सहायता मिलेगी। जल्द ही जिलों में भी ई-गवर्नेस प्रबंधकों (डी ई-जीएम) का भी नोमिनेशन किया जायेगा। उन्हें भी अपने जिलों के सीआईएसओ के रूप में नामित किया जाएगा। इससे राज्य स्तर पर प्रशिक्षित सायबर सुरक्षा नेतृत्व का एक विस्तृत नेटवर्क तैयार होगा। सॉफ्टवेयर बिल ऑफ मटेरियल (एसबीओएम): कोड सुरक्षा में अभिनव कदम एमपी-सीईआरटी की सबसे प्रभावशाली तकनीकी में से एक सॉफ्टवेयर बिल ऑफ मटेरियल्स पद्धति का उपयोग है। यह प्रणाली सॉफ्टवेयर के घटकों की सूची तैयार करती है। इससे कमजोर या पुराने मॉड्युल्स की पहचान कर उन्हें समय रहते अपडेट किया जा सकता है। इससे नेशनल वल्नरेबिलिटी डेटाबेस (एनवीडी) के साथ समन्वय कर सुरक्षा खामियों की पहचान और समाधान की गति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।अक्टूबर 2025 तक 12 हज़ार से अधिक वल्नरेबिलिटी सफलतापूर्वक ठीक की जा चुकी हैं। साथ ही, नेशनल क्रिटिकल इंफोर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन सेंटर (एनसीआईआईपीसी) के साथ मिलकर 120 से अधिक उच्च-प्राथमिकता वाले मुद्दों का समाधान किया जा चुका है। अनाधिकृत विज्ञापनों और सरकारी पोर्टल सुरक्षा पर कार्रवाई इंडियन सायबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर (आईसीसीसी), गृह मंत्रालय की रिपोर्ट पर एमपी- सीईआरटी ने सरकारी वेबसाइटों पर पाए गए अनाधिकृत ऑनलाइन सट्टेबाज़ी (बेटिंग) विज्ञापनों के मामलों में भी तत्परता दिखाई है। सरकारी पोर्टलों में मिले इन विज्ञापनों में से 40 से अधिक मामलों का निवारण एमपी-सीईआरटी की टीम ने त्वरित रूप से किया है। सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक जन-जागरूकता एमपी-सीईआरटी न केवल तकनीकी मोर्चे पर, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी साइबर सुरक्षा जागरूकता को बढ़ा रहा है। संस्था नियमित रूप से सोशल मीडिया के माध्यम से पासवर्ड सुरक्षा, फिशिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी, डिजिटल लेनदेन सुरक्षा और व्यक्तिगत डेटा संरक्षण जैसे विषयों पर सरल और रोचक सामग्री साझा कर रही है। इससे नागरिकों में साइबर सतर्कता की संस्कृति विकसित हो रही है। सतत निगरानी और राष्ट्रीय सहयोग की दिशा में अग्रसर एमपी-सीईआरटी का तकनीकी दल नियमित रूप से राज्य सरकार के 50 से अधिक पोर्टलों की सुरक्षा स्कैनिंग करता है। इसके माध्यम से कमजोरियों की पहचान कर तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाता है। यह पहल राज्य शासन के सभी विभागों में साइबर सुरक्षा को शासन-प्रक्रिया का अभिन्न अंग बना रही है। सायबर सिक्योरिटी अवेयरनेस मंथ के अवसर पर एमपी-सीईआरटी की ये उपलब्धियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि मध्यप्रदेश सायबर सुरक्षित भारत के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने के लिये तैयार है। प्रशिक्षण, तकनीकी नवाचार, और विकेन्द्रित सतर्कता के माध्यम से राज्य ने दिखाया है कि जब शासन, तकनीक और जागरूकता साथ मिलेंगे, तभी सुरक्षित डिजिटल भविष्य संभव है।  

मुख्यमंत्री साय अग्रसेन भवन कोरबा में पगड़ी रस्म कार्यक्रम में हुए शामिल

रायपुर,  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज कोरबा के अग्रसेन भवन में आयोजित छत्तीसगढ़ के पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष स्वर्गीय बनवारी लाल अग्रवाल की पगड़ी रस्म कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने स्वर्गीय अग्रवाल के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय श्री बनवारी लाल अग्रवाल की धर्मपत्नी श्रीमती पुष्पा अग्रवाल एवं उनके परिवार के लोगों से भेंट कर उन्हें ढाढस बंधाया और अपनी गहरी संवेदना प्रकट की। श्री साय ने कहा कि स्वर्गीय श्री बनवारी लाल अग्रवाल का जीवन जनसेवा और समर्पण का प्रतीक था। उन्होंने सदैव कोरबा जिले के विकास और जनता की भलाई के लिए कार्य किया। उनकी सादगी, विनम्रता और सामाजिक संवेदनशीलता हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत रहेगी। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। सभी ने स्वर्गीय अग्रवाल के योगदान को स्मरण करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। इस दौरान विधायक कटघोरा प्रेमचंद पटेल,  विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, महावीर अग्रवाल,  बजरंग लाल अग्रवाल, बिहारी लाल अग्रवाल, सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण आदि मौजूद रहे।

प्रधानमंत्री मोदी छत्तीसगढ़ में: शांति शिखर में करेंगे ध्यान, प्रशासन ने दौरे को यादगार बनाने की पूरी तैयारी की

रायपुर   छत्तीसगढ़ के लिए 1 नवम्बर को दिन खास होने वाला है। राज्य अपना 25वां रजत जयंत वर्ष मनाएगा। 5 दिन तक अलग-अलग आयोजन होंगे। सबसे खास प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का दौरा रहेगा। वे छत्तीसगढ़ के 5 बड़े कार्यक्रमों में शामिल होंगे। प्रधानमंत्री के दौरे को यादगार बनाने के लिए शासन-प्रशासन ने पूरी ताकत लगा दी है। पीएम के स्वागत के लिए राज्योत्सव स्थल पर 1 किलोमीटर लंबा परिक्रमा पथ बनाया जा रहा है। प्रस्तावित कार्यक्रम के मुताबिक प्रधानमंत्री परिक्रमा पथ में रथ पर सवार होंगे। पीएम का सुबह से शाम तक व्यस्त दौरा प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के मुताबिक छत्तीसगढ़ में सुबह से शाम तक सबसे व्यस्त दौरा रहेगा। वे सुबह 7. 35 मिनट में दिल्ली से रवाना होंगे और शाम 6.35 मिनट में वापस दिल्ली पहुंचेंगे। प्रधानमंत्री छत्तीसगढ़ में 6 घंटे 35 मिनट का समय बिताएंगे। इसके अलावा प्रधानमंत्री प्रजापिता ब्रह्माकुमारी के शांति शिखर भवन का उद्घाटन भी करेंगे। यहां वे दो मिनट का ध्यान भी लगाएंगे। सुबह 7.35 बजे दिल्ली से रवाना होकर 9.40 बजे रायपुर एयरपोर्ट पहुंचेंगे। सुबह 10.00 बजे सत्य साईं अस्पताल पहुंचेंगे। 10.35 बजे तक दिल की बात करेंगे। सफल ऑपरेशन वाले 2500 बच्चों से चर्चा करेंगे। 10.45 से 11.30 बजे तक प्रजापिता ब्रह्माकुमारी के शांति शिखर भवन का लोकार्पण करेंगे। 11.45 से दोपपहर 1.15 बजे तक विधानसभा के नए भवन और अटल जी की प्रतिमा का लोकार्पण। दोपहर 1.30 से 2.15 बजे तक आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का शुभारंभ करेंगे। 2.30 से 4.00 बजे तक राज्योत्सव का शुभारंभ और सभा को संबोधित करेंगे। शाम 4.00 बजे एयरपोर्ट से दिल्ली के लिए रवाना होंगे। साथ में लगाएंगी ध्यान: शांति शिखर के मेडिटेशन हॉल में पीएम मोदी सोफा पर बैठकर दो मिनट तक ध्यान में नजर आएंगे। इस दौरान माउंट आबू से अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका जयंती दीदी, अतिरिक्त महासचिव मृत्युंजय भाई, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश इंचार्ज हेमलता दीदी, जयंती दीदी, आशा दीदी ऊषा दीदी और साविता दीदी पीएम के साथ ध्यान लगाएंगी।