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छत्तीसगढ़ के पांचों संभागीय मुख्यालय में लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की भव्य प्रतिमा होगी स्थापित : डिप्टी सीएम अरुण साव

लौह पुरुष सरदार पटेल की 150 वीं जयंती पर मुख्यमंत्री साय की उपस्थिति में डिप्टी सीएम अरुण साव की बड़ी घोषणा छत्तीसगढ़ के पांचों संभागीय मुख्यालय में लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की भव्य प्रतिमा होगी स्थापित रायपुर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने आज राष्ट्रीय एकता दिवस भारत रत्न सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की 150वीं जन्म जयंती पर आयोजित रन फॉर यूनिटी कार्यक्रम में प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी की उपस्थिति में बड़ी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि, प्रदेश के पांचों संभाग मुख्यालय में स्थित नगर पालिक निगमों में सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की भव्य प्रतिमा स्थापना एवं सौंदर्यीकरण कार्य किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी और डिप्टी सीएम अरुण साव जी आज रन फॉर यूनिटी दौड़ में शामिल हुए और इसी दौरान उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने बड़ी घोषणा करते हुए सभी संभागों में सरदार पटेल की मूर्ति स्थापित करने की घोषणा करते हुए लौह पुरुष को साय सरकार की सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की है। इस घोषणा के बाद विभाग ने तत्काल पांच शहरों रायपुर, दुर्ग, जगदलपुर, बिलासपुर और अंबिकापुर के लिए 50-50 लाख रुपए जारी कर दिया है। आदेश के मुताबिक, 5 संभाग के 5 नगर निगमों के लिए अधोसंरचना मद से नगर पालिक निगमों को 2 करोड़ 50 लाख रुपए की स्वीकृति प्रदान की है। साव ने रायपुर के सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में कहा कि, लौह पुरुष सरदार पटेल जी ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष कर मां भारती को स्वतंत्र कराया और आजादी के बाद खंड खंड में बंटे देश के 562 रियासतों को एक सूत्र में पिरोकर भारत को अखंड बनाया है, एक भारत, श्रेष्ठ भारत बनाया है। उनके इस योगदान को देश कभी नहीं भूल सकता। साव ने कहा कि, माननीय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी की मार्गदर्शन में नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी संभागीय मुख्यालय में सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की भव्य प्रतिमा का लगाने का निर्णय लिया है। इसके लिए 50-50 लाख की स्वीकृति प्रदान कर दी है।

राष्ट्रीय एकता दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री: स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों का किया सम्मान

सभी संभागीय मुख्यालयों में स्थापित की जाएगी सरदार पटेल की भव्य प्रतिमा खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा ‘रन फॉर यूनिटी’ सहित विविध प्रतियोगिताओं का आयोजन रायपुर,  देश के प्रथम उप प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल अपनी कर्मठता और दृढ़ इच्छाशक्ति से लौहपुरुष बने। आज़ादी के बाद के कठिन हालातों में उन्होंने अपनी सूझबूझ और फौलादी इरादों से 562 रियासतों का भारत में विलय कर अखंड भारत का निर्माण किया। किसानों के संघर्ष और स्वतंत्रता आंदोलन में उनका योगदान अमूल्य रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस कार्यक्रम में यह बात कही। यह कार्यक्रम खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा रायपुर स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में आयोजित किया गया।इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब तथा विधायक राजेश मूणत उपस्थित थे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर उनके महान योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि “सरदार पटेल ने अपनी विराट सोच और अटूट इच्छाशक्ति से टुकड़ों में बंटी रियासतों को एक सूत्र में पिरोकर अखंड भारत का निर्माण किया।” सरदार पटेल का जीवन राष्ट्र की एकता, अखंडता और समर्पण का प्रतीक है। उनकी 150वीं जयंती पर आज पूरे देश में अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।  मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गुजरात के केवड़िया में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य को भी आमंत्रित किया गया है, जहाँ राज्य का विशेष स्टॉल भी लगाया गया है। उन्होंने कहा कि ‘रन फॉर यूनिटी’ केवल देश की एकता और अखंडता का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह फिटनेस और सामूहिक ऊर्जा का भी संदेश देता है। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने राष्ट्रीय एकता दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि “सरदार वल्लभभाई पटेल ने देश की आज़ादी और किसानों के अधिकारों के लिए ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध कठोर संघर्ष किया।” उनके योगदान को रेखांकित करने के लिए ही उनकी जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने स्वतंत्र भारत के प्रथम उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के रूप में ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की अवधारणा को साकार किया। उप मुख्यमंत्री साव ने घोषणा की कि राज्य के सभी संभागीय मुख्यालयों में सरदार पटेल की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। इसके लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा संबंधित नगरीय निकायों को 50-50 लाख रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री  साय ने कार्यक्रम में स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों को शाल एवं श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया। उन्होंने प्रतिभागियों द्वारा बनाए गए रंगोली और चित्रों का अवलोकन किया तथा उपस्थित जनों को स्वदेशी अपनाने और भारत में निर्मित वस्तुओं के उपयोग की शपथ दिलाई। राष्ट्रीय एकता दिवस के उपलक्ष्य में खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा रन फॉर यूनिटी के साथ ही महाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं के लिए रंगोली, चित्रकला, भाषण एवं काव्य पाठ प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।मुख्यमंत्री श्री साय ने रंगोली, चित्रकला, भाषण और काव्य पाठ प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किया तथा रन फॉर यूनिटी के प्रतिभागियों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने ‘बस्तर ओलंपिक’ के प्रचार रथ को भी हरी झंडी दिखाई। यह प्रचार रथ बस्तर संभाग के सभी जिलों में पहुंचकर बस्तर ओलंपिक का प्रचार-प्रसार करेगा। कार्यक्रम में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार ने अपने स्वागत भाषण में सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर आयोजित ‘सरदार@150 यूनिटी मार्च’ के तहत आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ये कार्यक्रम आगामी डेढ़ महीनों तक निरंतर जारी रहेंगे। इस अवसर पर खेल एवं युवा कल्याण विभाग की संचालक तनूजा सलाम, स्वतंत्रता सेनानियों के परिजन, विभागीय अधिकारी, खिलाड़ी तथा महाविद्यालयीन छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

NOC नियमों में बदलाव और स्वास्थ्य केंद्रों में ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ की मूर्ति लगाने की मांग

रायपुर छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन (CGDF) के प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जयसवाल से भेंट कर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वजनिक हित से जुड़ी दो प्रमुख मांगें रखी गईं, जिस पर मंत्री ने त्वरित कार्यवाही का आश्वासन दिया। ज्ञापन में CGDF ने मांग की है कि चिकित्सकों के लिए, उच्च शिक्षा अध्यन के लिए संपत्ति गिरवी रखने वाले नियम को शिथिल किया जाए एवं नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) की वर्तमान अनिवार्यता को समाप्त किया जाए। एक नवंबर को राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ की प्रतिमाओं की स्थापना की जाए। साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी का स्मरण एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाए। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य संस्थानों में एक सकारात्मक, सांस्कृतिक वातावरण का निर्माण करना और राज्य की सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देना है। स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने CGDF के प्रतिनिधिमंडल द्वारा उठाए गए इन मुद्दों को गंभीरता से सुना और दोनों मांगों पर उचित कार्यवाही करने का आश्वासन दिया। CGDF के प्रवक्ता डॉ. गंधर्व पांडे ने कहा, “हम मंत्री द्वारा दिए गए आश्वासन का स्वागत करते हैं। हमें उम्मीद है कि इन दोनों महत्वपूर्ण मुद्दों पर शीघ्र ही सकारात्मक कार्यवाही होगी, जिससे राज्य के चिकित्सकों को लाभ मिलेगा।”

देवउठनी एकादशी पर करें ये खास उपाय, भगवान शिव देंगे हर संकट से मुक्ति

  देवउठनी एकादशी बहुत ही विशेष मानी जाती है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है. देवउठनी एकादशी के दिन ही भगवान विष्णु चार माह की योगनिद्रा से उठते हैं और फिर से सृष्टि का कार्यभार संभाल लेते हैं. भगवान विष्णु के उठने के साथ ही चातुर्मास समाप्त हो जाता है. इसके बाद विवाह समेत तमाम मांगलिक काम फिर से शुरू कर दिए जाते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन सच्चे मन से व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी पापों से छुटकारा मिल जाता है. प्रभु की कृपा से जीवन में सुख-शांति रहती है. देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की अराधना के साथ-साथ शिवलिंग का अभिषेक करना शुभ होता है. ऐसा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं.देवउठनी एकादशी के दिन शिवलिंग पर कुछ विशेष चीजें अर्पित करने से कष्टों से छुटकारा मिलता है. जीवन में खुशहाली आती है. देवउठनी एकादशी कब है? हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की तिथि 01 नवंबर को सुबह 09 बजकर 11 मिनट पर शुरू हो रही है. वहीं, इस तिथि का समापन 02 नवंबर को सुबह 07 बजकर 31 मिनट पर हो जाएगा. ऐसे में देवउठनी एकादशी का व्रत 01 नवंबर को रखा जाएगा. देवउठनी एकादशी के दिन शिवलिंग पर चढ़ाएं ये चीजें     देवउठनी के दिन शिवलिंग पर गंगाजल और दूध चढ़ाना चाहिए. ऐसा करने से मानसिक तनाव की समस्या से मुक्ति मिलती है. जीवन में खुख-शांति रहती है.     इस दिन शिवलिंग पर दही और शहद चढ़ाना चाहिए. ऐसा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और सभी मनोरथ पूर्ण करते हैं.     इस दिन शिवलिंग पर शमी के फूल चढ़ाने चाहिए. ऐसा करने से शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं.     इस दिन शिवलिंग पर चावल चढ़ाने चाहिए. साथ ही शिव मंत्रों का जप करना चाहिए. ऐसा करने से महादेव प्रसन्न होते हैं और आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है.  

हरदीप सिंह पुरी ने 1984 दंगों की याद में कहा — आज भी दिल दहल जाता है

नई दिल्ली  केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करके कहा कि वे उन दिनों को याद कर अब भी सिहर उठते हैं, जब निर्दोष सिख पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की निर्मम हत्या की गई और उनकी संपत्तियों व पूजा स्थलों को लूटा गया। पुरी ने कहा कि दंगे को कांग्रेस नेताओं और उनके सहयोगियों की ओर से निर्देशित हिंसक भीड़ ने अंजाम दिया, जो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या का बदला लेने के नाम पर शुरू हुआ।   हरदीप सिंह पुरी ने पोस्ट में लिखा, 'पुलिस को मूक दर्शक बनने के लिए मजबूर किया गया, जबकि सिखों को उनके घरों, वाहनों और गुरुद्वारों से खींचकर जिंदा जलाया जा रहा था। राज्य मशीनरी पूरी तरह उलट-पुलट हो गई थी, जहां रक्षक ही अपराधी बन गए थे।' उन्होंने आरोप लगाया कि सिखों के घरों और संपत्तियों की पहचान के लिए मतदाता सूचियों का इस्तेमाल किया गया। कई दिनों तक भीड़ को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया गया। राजीव गांधी के बयान का भी जिक्र भाजपा नेता ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अपने बयान 'जब एक बड़ा पेड़ गिरता है, तो धरती हिलती है' से सिखों की हत्या को खुला समर्थन दिया। हरदीप पुरी ने आगे कहा कि कांग्रेस नेता गुरुद्वारों के बाहर भीड़ का नेतृत्व करते नजर आ रहे थे, जबकि पुलिस चुपचाप तमाशा देखती रही। कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली संस्थाएं अपनी अंतरात्मा को त्यागकर इन नेताओं को खुली छूट दे रही थीं। यह बयान 1984 के दंगों की बरसी पर आया है, जो इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के थे और जिसमें हजारों सिखों की जान गई थी।

डॉ. मोहन यादव बोले: मध्यप्रदेश में निवेश, नवाचार और रोज़गार के संकल्प का अभ्युदय

सीएम ब्लॉग भोपाल मध्यप्रदेश आज अपनी स्थापना के 70वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। एक नवंबर 1956 को अस्तित्व में आये मध्यप्रदेश में विकास की नई यात्रा विगत दो दशकों से आरंभ हुई, जो प्रदेश को देश में अग्रणी राज्य बनाने की संभावनाओं तक पहुंच गई है। यह सुखद संयोग है कि आज देवउठनी ग्यारस के पावन अवसर पर राज्योत्सव का आयोजन किया जा रहा है। हमारे तीज, त्यौहार और परंपराएं हमारी संस्कृति का आधार हैं। उत्सव के आनंद से ही भविष्य निर्माण के भाव निर्मित होते हैं। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि प्रदेश में सभी त्यौहारों को व्यापक स्वरूप में मनाया जा रहा है। अपने त्यौहारों का सांस्कृतिक संदर्भ ही हमें पुरातन से नूतन की प्रेरणा देता है। हमारे लिए गर्व की बात है कि भारत का ह्दय मध्यप्रदेश वन, जल, अन्न, खनिज, शिल्प, कला, संस्कृति, उत्सव और परंपराओं से समृद्ध है। हमें मां नर्मदा, चंबल, पार्वती, शिप्रा नदियों का सान्निध्य और बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त है। यह भगवान परशुराम की जन्मस्थली, भगवान कृष्ण की शिक्षास्थली और आदि शंकराचार्य जी की तपोस्थली है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने चित्रकूट में लंबा समय व्यतीत किया है। इतिहास प्रसिद्ध राजा नल, भर्तृहरि, विक्रमादित्य की जन्म स्थली भी मध्यप्रदेश रही है। सम्राट विक्रमादित्य ने ही शकों के आतंक से भारत को मुक्त किया था। संसार की पहली वैज्ञानिक कालगणना "विक्रम संवत्" का आरंभ भी मध्यप्रदेश के उज्जैन से हुआ था। मुझे बताते हुए प्रसन्नता है कि हम अपने ऐतिहासिक गौरव की दिव्यता और प्राकृतिक भव्यता के साथ विरासत से विकास की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने भारत को विश्व में सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए विकसित भारत निर्माण का संकल्प दिया है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में हमारा देश विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। प्रधानमंत्री जी के इस संकल्प को साकार करने और विकसित भारत निर्माण के लिए मध्यप्रदेश में निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। प्रदेश में उद्योग वर्ष मनाने के साथ राज्योत्सव की थीम 'उद्योग और रोज़गार' रखी गई है। इसमें प्रदेश के सतत विकास, सांस्कृतिक समृद्धि और जनभागीदारी का भाव है। यशस्वी प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से हमें निवेश और औद्योगिक विकास की यात्रा को परिणाम में बदलने का अवसर प्राप्त हो रहा है। विविधता से समृद्ध मध्यप्रदेश के हर क्षेत्र की अपनी विशेषता, क्षमता और दक्षता है, जिसमें अनंत संभावनाएं हैं। इसी को केन्द्र में रखकर हमने प्रदेश में रीजनल इन्वेस्टर्स समिट का नवाचार किया। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि प्रदेश के हर क्षेत्र का कौशल और उद्योग इसमें शामिल हुआ है। व्यापार को सरल बनाने और निवेशकों से सीधे संवाद के लिए हमने मार्च 2024 से उज्जैन से निवेश यात्रा शुरू की और फिर जबलपुर, ग्वालियर, सागर, रीवा, शहडोल, नर्मदापुरम, मुंबई, कोयंबटूर, बेंगलुरु, पुणे, दिल्ली, यूके, जर्मनी, जापान, दुबई तक इसे विस्तार दिया। विभिन्न सम्मेलनों, राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय रोड-शो के माध्यम से मध्यप्रदेश के निवेश में कई गुना वृद्धि हुई है। निवेशकों को एक सक्षम, सरल और सुरक्षित वातावरण प्रदान किया गया है। प्रदेश में इनोवेशन हब, स्टार्टअप पॉलिसी, फंडिंग सपोर्ट और इन्क्यूबेशन नेटवर्क स्थापित कर देश की स्टार्टअप क्रांति को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है। मुझे यह बताते हुए खुशी है कि मध्यप्रदेश ने पिछले एक वर्ष में औद्योगिक निवेश के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां प्राप्त की हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों ने प्रदेश में निवेश के प्रति गहरी रुचि दिखाई है। खनिज कॉन्क्लेव में प्रदेश को 56 हजार करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले, जो खनिज नीति और प्रशासनिक सरलता का परिणाम हैं। आईटी पार्क, इलेक्ट्रॉनिक निर्माण इकाइयां और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भी निवेश को प्रोत्साहन मिला है। मुझे यह बताते हुए हर्ष है कि प्रदेश एक ऐसे परिवर्तनकाल से गुजर रहा है जहां निवेश, नवाचार और रोज़गार आधार स्तंभ हैं। लगभग दो वर्षों में प्रदेश ने उद्योग, कृषि, दुग्ध उत्पादन, पर्यावरण, ऊर्जा और सामाजिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में अनेक ऐतिहासिक उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। भारत के समग्र विकास के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने हमें गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी (GYAN) के सम्मान का मंत्र दिया है। विकास के इन आधार स्तंभ के अनुरूप प्रदेश विकास और कल्याण के लिए युवा शक्ति, गरीब कल्याण, किसान कल्याण और नारी सशक्तिकरण मिशन के तहत कार्य किया जा रहा है। गरीब कल्याण मिशन में स्वरोज़गार और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, आवास, शिक्षा एवं स्वास्थ्य की सुविधा आदि की दिशा में कार्य किया जा रहा है। मध्यप्रदेश कौशल विकास मिशन और स्टार्टअप नीति 2025 ने युवाओं को जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर में परिवर्तित किया है। कौशल विकास मिशन के माध्यम से युवाओं को उद्योग-आधारित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। रोज़गार मेले, अप्रेंटिसशिप कार्यक्रम और डिजिटल स्किल सर्टिफिकेशन जैसे प्रयास युवाओं को रोज़गार से जोड़ रहे हैं। रोज़गार सृजन हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। शासकीय और निजी क्षेत्रों में युवाओं के लिए स्थायी, कुशल और सम्मानजनक अवसर उपलब्ध किये जा रहे हैं। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने शासकीय भर्ती का कैलेण्डर जारी किया और उसके अनुरूप भर्ती प्रक्रिया भी आरंभ हो गई है। कृषि क्षेत्र को नवाचार के साथ सशक्त बनाने की दिशा में एक नई क्रांति का सूत्रपात हुआ है। प्रदेश सरकार ने ड्रोन आधारित फसल निरीक्षण, स्मार्ट सिंचाई प्रणाली और कृषि उत्पाद मूल्य संवर्धन पर विशेष फोकस किया है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और मुख्यमंत्री खेत-तालाब योजना सहित अन्य प्रयासों से किसानों के लिए सिंचाई क्षेत्र बढ़ाने का लगातार प्रयत्न किया जा रहा है। केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना से प्रदेश के किसानों को सिंचाई और पानी की सुविधा व्यापक स्तर पर उपलब्ध होगी। प्रदेश में सिंचाई का रकबा 52 लाख हेक्टेयर से अधिक हो चुका है। इसे दोगुना करने का लक्ष्य है। आगामी 3 वर्षों में सिंचाई क्षेत्र का रकबा 100 लाख हेक्टेयर करने की योजना है। कृषि उपज का प्रत्यक्ष भुगतान, ऑनलाइन मंडी व्यवस्था और जैविक खेती के प्रोत्साहन ने अन्नदाताओं की आय में वृद्धि की है। मध्यप्रदेश गेहूं, सोयाबीन, चना और मसालों के उत्पादन में अग्रणी प्रदेश हैं। महिला सशक्तिकरण को आर्थिक स्वावलंबन से जोड़ने की दिशा में नारी शक्ति मिशन परिवर्तनकारी सिद्ध हो रहा है। लाड़ली बहना योजना के माध्यम से लाखों … Read more

जब 2017 में टूटा था भारत का सपना… अब महिला टीम के पास बदला लेने का मौका

नई दिल्ली  हरमनप्रीत कौर की अगुआई में भारतीय टीम महिला एकदिवसीय विश्व कप के फाइनल में पहुंच चुकी है। गुरुवार को सेमीफाइनल में उसने 7 बार की चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को रिकॉर्ड रनों का पीछा करते हुए हराया। अब हरमनप्रीत कौर आर्मी भारतीय महिला क्रिकेट की वो गौरवशाली गाथा लिखने की दहलीज पर खड़ी है जो अतीत में लिखते-लिखते रह गई थी। कौर के जेहन में 2017 की वो दिल तोड़ने वाली फाइनल की हार ताजा होगी और उनकी अगुआई में टीम इस बार वो कसर पूरी करने के लिए जी जान लगाएगी। 2017 में भारत के विश्व कप जीतने का सपना टूटा था। तब सेमीफाइनल में भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया को ही शिकस्त देकर फाइनल में जगह बनाई थी। सेमी में हरमनप्रीत कौर ने 115 गेंदों में 171 रनों की बेमिसाल तूफानी पारी खेली थी और भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 36 रन से हराया था। उसके बाद लगा कि 2017 महिला क्रिकेट के लिए 1983 बनने वाला है जब पुरुष टीम ने पहली बार विश्व विजय हासिल की थी। लेकिन वो हो न सका। फाइनल में भारत को मेजबान इंग्लैंड के हाथों 9 रन से शिकस्त झेलनी पड़ी। 8 गेंदें बाकी थीं लेकिन पूरी भारतीय टीम आउट हो चुकी थी। तब इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 50 ओवरों में 7 विकेट के नुकसान पर 228 रन का स्कोर खड़ा किया था। जीत के लिए 229 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। 5 रन के टीम स्कोर पर स्मृति मंधाना बिना खाता खोले आउट हो गईं। 43 रन पर भारत को दूसरा झटका लग गया और कप्तान मिताली राज दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से रन आउट हो गईं। उसके बाद हरमनप्रीत कौर और पूनम राउत ने तीसरे विकेट के लिए 95 रनों की साझेदारी की। हरमनप्रीत 51 रन बनाकर आउट हुईं। भारत को चौथा झटका पूनम राउत के रूप में लगा जो शतक की तरफ बढ़ रही थीं। उन्होंने 86 रन की शानदार पारी खेली। भारत तब भी जीत की स्थिति में था। तब भारत का स्कोर 191 रन था और जीत के लिए 43 गेंदों में सिर्फ 38 रन चाहिए थे और हाथ में बचे थे 6 विकेट। स्कोर बोर्ड में अभी 5 रन ही जुड़े थे कि भारत को सुषमा वर्मा के रूप में पांचवां झटका लगा। 45वें ओवर में एक समय भारत का स्कोर 6 विकेट के नुकसान पर 201 रन था। तब भी जीत मुट्ठी में लग रही थी। लेकिन तभी झूलन गोस्वामी के रूप में सातवां झटका लगा। 47.2 ओवर में स्कोर था 7 विकेट के नुकसान पर 218 रन। तब 20 गेंद में सिर्फ 11 रन चाहिए थे। लेकिन 2 रन के अंतराल पर ही भारत के आखिरी 3 विकेट गिर गए और एक नया इतिहास रचते-रचते रह गया। करोड़ों दिल टूट गए। मेजबान इंग्लैंड ने विश्व कप अपने नाम कर लिया था। अब भारत के पास उस टीस को खत्म करने, उस कसर को पूरा करने का सुनहरा मौका है। 2 नवंबर को फाइनल में दक्षिण अफ्रीका के सामने उस अधूरी कहानी को पूरा करने का मौका है। सेमीफाइनल में भारतीय टीम ने जिस विलक्षण जज्बे, जुनून और हौसले का मुजाहिरा किया है, वो उम्मीद जगाता है- अबकी बार 2017 वाली कसर पूरी होकर रहेगी।  

‘नचनिया’ टिप्पणी पर रोहिणी का पलटवार, बोलीं – खेसारी के साथ ऐसा कहना अपमानजनक

पटना बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के नेता एक दूसरे को को भला बुरा करने कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। छपरा से राष्ट्रीय जनता दल के प्रत्याशी और भोजपुरी सुपरस्टार खेसारी लाल यादव को भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा 'नचनिया' कहने के मामले पर सियासत गरमा गई है। अब राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने इस मामले को लेकर भाजपा नेताओं पर हमला बोला है। पटना में पत्रकारों से बातचीत करने के दौरान उन्होंने कहा की सम्राट चौधरी दूसरों को तो नचनिया बोलेंगे ही क्योंकि उनके पास है ही कौन? भाजपा में मनोज तिवारी, रवि किशन, निरहुआ, पवन सिंह, हेमा मालिनी, कंगना रनौत सभी नचनिया ही तो हैं। यह लोग तो तो नचनिया ही है। एनडीए वाले इन लोगों को लेकर घूम रहे हैं लेकिन तब इन्हें शर्म नहीं आती है। रोहिणी आचार्य ने आरोप लगाया कि एनडीए वाले भीड़ इकट्ठा करने के लिए नचनिया लोगों को लेकर घूम रहे हैं। लेकिन, भाजपा वाले कलाकारों को नचनिया कहकर उन्हें जलील करते हैं। उनकी पार्टी में भी कई कलाकार हैं। उन्होंने नचनिया शब्द पर विरोध क्यों नहीं किया। उन्हें शर्म नहीं आती है। 20 साल में इन लोगों ने कोई काम नहीं किया रोहिणी आचार्य ने कहा कि जितने भी हमारे कलाकार लोग हैं, उनकी कई अच्छी-अच्छी फिल्में बन रही है। भारत के विकास में उनका भी योगदानहै। लेकिन, जो भाजपा में चले गए वह अच्छे हो गए। भाजपा वाले कलाकारों को नचनिया बोलकर जलील करते हैं। उनकी पार्टी में भी तो कई कलाकार हैं लेकिन, उन्हें नचनिया क्यों नहीं बोलते हैं। भाजपा में कोई आ नहीं रहा है। इसलिए इस तरह के आप शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं। 20 साल में उन्होंने कोई काम नहीं किया है। इसलिए कभी जंगलराज तो कभी नचनिया शब्द का इस्तेमाल कर लोगों को भरमाने का काम करते हैं। बिहार की जनता ने इस बार मन बना लिया है कि इन लोगों को करारा जवाब देगी।

राष्ट्रनायकों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़े हमारी भावी पीढ़ी – मुख्यमंत्री साय

  राष्ट्रीय एकता दिवस पर मुख्यमंत्री ने सरदार पटेल की प्रतिमा पर किया माल्यार्पण रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर आज राजधानी रायपुर के देवेंद्र नगर स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल केवल स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि वे राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोने वाले ऐसे युगपुरुष थे जिन्होंने अपने अदम्य साहस और दृढ़ निष्ठा से देश की रियासतों का एकीकरण कर अखंड भारत की नींव रखी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने स्कूली बच्चों, जनप्रतिनिधियों और आमजनों के साथ राजधानी रायपुर के शास्त्री चौक से शारदा चौक तक आयोजित ‘एकता दौड़’ में शामिल होकर ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का संदेश दिया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरदार पटेल को उनकी दूरदृष्टि और अद्भुत नेतृत्व क्षमता के कारण ही ‘भारत का लौह पुरुष’ कहा जाता है। राष्ट्र को एकजुट करने के उनके प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के आह्वान पर आज पूरे देश में ‘रन फॉर यूनिटी’ का आयोजन किया जा रहा है, जो राष्ट्रीय एकता और अखंडता का प्रतीक है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भारत विविधताओं से परिपूर्ण देश है, और  'विविधता में एकता' की भावना हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल सभी प्रतिभागियों के उत्साह और अनुशासन की सराहना करते हुए कहा कि उनका यह जोश सरदार पटेल के प्रति श्रद्धा और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने सभी को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा दिए गए ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को साकार करने का प्रण लेने का आह्वान किया और सभी को राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाई। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम, वन मंत्री केदार कश्यप, विधायककिरण देव, विधायक पुरंदर मिश्रा तथा छत्तीसगढ़ लौह शिल्पकार विकास बोर्ड के अध्यक्ष प्रफुल्ल विश्वकर्मा सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी,  जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर में शनिवार से शुरू होगा प्रथम गोरखपुर पुस्तक महोत्सव, 9 नवंबर तक चलेगा

गोरखपुर में ‘साहित्यिक महाकुंभ’ का मुख्यमंत्री करेंगे शुभारंभ गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर में शनिवार से शुरू होगा प्रथम गोरखपुर पुस्तक महोत्सव, 9 नवंबर तक चलेगा नेशनल बुक ट्रस्ट कर रहा आयोजन, पुस्तकों के स्टाल के साथ ही सजेंगे बाल मंडप और साहित्यिक मंच गोरखपुर  प्रयागराज में धर्म, अध्यात्म और संस्कृति के अद्वितीय महाकुंभ का भव्य और दिव्य आयोजन सबकी स्मृतियों में रच-बस गया है। अब बारी ‘साहित्यिक महाकुंभ’ की है। साहित्यिक महाकुंभ का यह आयोजन गोरखपुर पुस्तक महोत्सव के रूप में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के परिसर में होने जा रहा है। 1 नवंबर से 9 नवंबर तक चलने वाले इस आयोजन का शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को करेंगे। गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर में ‘प्रथम गोरखपुर पुस्तक महोत्सव’ का आयोजन नेशनल बुक ट्रस्ट (राष्ट्रीय पुस्तक न्यास) की तरफ से किया जा रहा है। यह आयोजन नगर की गहरी आध्यात्मिक, कलात्मक और साहित्यिक विरासत का एक भव्य उत्सव होगा। पुस्तक महोत्सव में आमजन प्रतिदिन पूर्वाह्न 11 बजे से रात 8 बजे तक शामिल हो सकेंगे। इसमें सभी के लिए प्रवेश निशुल्क होगा। पुस्तक महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ नेशनल बुक ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे, गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन सहित कई गणमान्यजन उपस्थित रहेंगे।  नेशनल बुक ट्रस्ट के निदेशक युवराज मलिक के अनुसार प्रथम पुस्तक महोत्सव में 100 से अधिक प्रकाशकों के 200 से भी अधिक पुस्तकों के स्टॉल लगेंगे, जहां हिंदी, अंग्रेजी और अनेक भारतीय भाषाओं की हजारों पुस्तकें प्रदर्शित की जाएंगी। साथ ही, बाल मंडप और साहित्यिक मंच पर नामचीन लेखकों-वक्ताओं के साथ संवाद, कार्यशालाएं और चर्चाएं भी आयोजित होंगी। बच्चों के लिए होंगी आकर्षक गतिविधियां बाल मंडप में बच्चों के लिए आकर्षक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसमें कहानी सत्र, कठपुतली शो, आर्ट एंड क्राफ्ट वर्कशॉप, चित्रांकन और डूडलिंग प्रतियोगिताएं, ओरिगेमी और क्ले आर्ट, सुलेख और रंगमंच कार्यशालाएं तथा म्यूजिकल स्टोरीज सेशन शामिल होंगे। ताकि बच्चे पुस्तकों की दुनिया से आनंदपूर्वक तरीके से जुड़ सकें। जानी-मानी साहित्यिक हस्तियों को सुनने का मिलेगा अवसर साहित्यिक मंच पर गोरखपुर और प्रदेश के अन्य हिस्सों से जुड़ी अनेक जानी-मानी साहित्यिक हस्तियाें को सुनने का अवसर मिलेगा। जिनमें अवध संस्कार : लोकाचार और लोकगीत की लेखिका डाॅ. मनोरमा मिश्रा, विद्वान साहित्यकार डाॅ. रामदेव शुक्ल, प्रसिद्ध कवि-आलोचक व्यमोश शुक्ल (प्रधानमंत्री, नागरी प्रचारिणी सभा), वरिष्ठ लेखिका एवं अनुवादक आशा प्रभात, युवा लेखिका डाॅ. निधि अग्रवाल,  पत्रकार-उपन्यासकार उमा, वरिष्ठ कवि अष्टभुजा शुक्ल, पूर्व पुलिस अधिकारी एवं विविध पुस्तकों की लेखिका डाॅ. सत्या सिंह, अरविंद त्रिपाठी, अमित कुमार, कवयित्री सुनीता अबाबील तथा गोरखपुर के प्रतिष्ठित लेखक सुभाष यादव आदि शामिल हैं। सांस्कृतिक संध्या में होंगे समृद्ध विरासत को दर्शाने वाले कार्यक्रम सांस्कृतिक संध्याओं में भारत की समृद्ध कलात्मक विरासत को दर्शाने वाले कार्यक्रम होंगे, जिनमें बिरजू महाराज कथक संस्थान (लखनऊ) के कलाकारों द्वारा शास्त्रीय नृत्य एवं गायन, कव्वाली प्रस्तुति, तथा ‘फोक क्वीन ऑफ इंडिया’ मालिनी अवस्थी की एक विशेष प्रस्तुति शामिल है। इनके अलावा राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) का नाटक, सूफी एवं बॉलीवुड फ्यूजन म्यूजिक, कवि सम्मेलन, और ‘द युवाम प्रोजेक्ट’ के साथ एक विशेष म्यूजिकल ईवनिंग आयोजित की जाएगी। जिससे यह आयोजन साहित्य, कला और संस्कृति का एक भव्य महोत्सव बन जाएगा। ई-लाइब्रेरी का भी ले सकेंगे अनुभव दर्शक यहां ‘राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय (नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया)’ का अनुभव भी ले सकेंगे, जहां 3,000 से अधिक ई-पुस्तकों तक निशुल्क पहुंचा जा सकता है। यह पारंपरिक पढ़ने की आदत का डिजिटल ज्ञान की दुनिया के साथ सुंदर समन्वय होगा।