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बिहार में बढ़ता मतदान उत्साह — 1 बजे तक 42.30% वोटिंग, देखें क्षेत्रवार आंकड़े

पटना बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 121 सीटों पर मतदान जारी है। मतदान शाम छह बजे तक होगा। वहीं सुरक्षा कारणों से मुंगेर जिले की तीन सीटें तारापुर, मुंगेर और जमालपुर के अलावा सिमरी बख्तिायारपुर, महिषी और सूर्यगढ़ा के 56 मतदान केन्द्रों पर मतदान सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक ही चलेगा। प्रथम चरण में 1314 उम्मीदवार मैदान में हैं, इनमें  सम्राट चौधरी , विजय कुमार सिन्हा , तेजस्वी यादव ,  खेसारी लाल यादव  सहित कई दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। दोपहार 1 बजे तक का मतदान प्रतिशत     बिहार में 1 बजे तक कुल 42.30 % मतदान     मुंगेर में 41.47  % मतदान     नालंदा में 41.87  % मतदान     सहरसा में 44.20 % मतदान     मुजफ्फरपुर में 45.41 % मतदान     पटना में 37.72 % मतदान     सारण में 43.06 % मतदान     सीवान में 41.20 % मतदान     बेगूसराय में 46.02 % मतदान पवन सिंह ने किया मतदान     भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार पवन सिंह ने अपने पैतृक गांव बड़हरा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत जोकहरी पहुंचकर मतदान किया।  मतदान के बाद उन्होंने लोगों से लोकतंत्र को मजबूत बनाने की अपील की।       वोटर लिस्ट से 150 लोगों का नाम गायब     छपरा विधानसभा के ब्रह्मपुर मोहल्ले के 150 लोगों का नाम वोटर लिस्ट से गायब है, जिसके चलते लोगों में भारी आक्रोश है।       सुबह 11 बजे तक का मतदान प्रतिशत     बिहार में 11 बजे तक कुल 27.65 वोटिंग     समस्तीपुर में 25.11 % मतदान     आरा में 21.24 % मतदान     तरारी में 27.1 % मतदान     शाहपुर में 28.94 % मतदान     बेगूसराय में 30.37 % मतदान     गोपालगंज में 30.04  % मतदान  

पहला चरण मतदान जारी: बिहार में अब तक 42% से अधिक वोटिंग, दोपहर तक बढ़ी रफ्तार

पटना  बिहार के 18 जिलों में 121 विधानसभा सीटों पर वोटिंग जा रही है। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में मतदाताओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। दोपहर 1 बजे तक 42.31% मतदान दर्ज किया गया है। पहले चरण में यूं तो कई दिगग्जों की किस्मत दांव पर है लेकिन वैशाली जिले के राघोपुर सीट की काफी चर्चा हो रही है। इस सीट से महागठबंधन के मुख्यमंत्री उम्मीदवार तेजस्वी यादव खुद मैदान में हैं। हालांकि, इस सीट पर उनक मुकाबला सतीश यादव से है।   सतीश यादव बीजेपी के प्रत्याशी हैं औऱ एक बार तेजस्वी यादव की मां राबड़ी देवी को यहां पटखनी भी दे चुके हैं। राघोपुर विधानसभा सीट पर सुबह से ही वोटिंग जारी है। मतदाता अपने-अपने बूथों पर कतार में लग कर मतदान का इस्तेमाल करते नजर आए हैंं। सुबह 9 बजे तक यहां 13.78 फीसदी वोटिंग हुई है। राजद नेता और महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने कहा, "हम सबको मिलकर बिहार को नंबर वन बनाना है, एक नया बिहार बनाना है जहां पढ़ाई, दवाई, कमाई, सिंचाई, सुनवाई और कार्रवाई वाली सरकार हो, भ्रष्टाचार और अपराध मुक्त सरकार हो। हमें ऐसी सरकार बनानी है जो युवाओं पर लाठी न बरसाए और पेपर लीक न करे…" हॉट सीट कहे जाने वाले राघोपुर विधानसभा में तेजस्वी यादव का सीधा मुकाबला बीजेपी के प्रत्याशी सतीश कुमार यादव से है। भले ही सतीश यादव साल 2010 में राबड़ी देवी को इस सीट से हरा चुके हैं लेकिन साल 2015 और 2020 में तेजस्वी यादव ने सतीश यादव को लगातार हार का स्वाद चखाया था। इस बार तेजस्वी यादव हैट्रिक मारने की चाहत रखत हैं। इस बार इस सीट पर मुकाबला कई मायनों में खास है। तेजस्वी यादव पहली बार मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर इस सीट से चुनावी जंग में हैं। तेजस्वी यादव युवा चेहरे हैं और महागठबंधन ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है। वही सतीश याादव के साथ जीत का इतिहास है सत्तारूढ़ गठबंधन की ताकत।  

तीनों दरिंदों के खिलाफ हिम्मत दिखा छात्रा ने खुद को छुड़ाया, ग्वालियर में दिनदहाड़े किडनैपिंग की कोशिश नाकाम

ग्वालियर  ग्वालियर जिले में महिला सुरक्षा को शर्मसार कर देने वाली घटना, लेकिन साथ ही एक छात्रा की बहादुरी ने पूरे शहर को झकझोर दिया। दिनदहाड़े महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज और महिला थाने के बीच तीन बदमाशों ने छात्रा को ऑटो में जबरन बैठाने की कोशिश की। लेकिन छात्रा ने ऐसी हिम्मत दिखाई कि आरोपी भाग खड़े हुए। घटना  सुबह 11 बजे की है जब ऑटो में सवार दो युवकों ने छात्रा का हाथ पकड़ उसे उठाने की कोशिश की। तीसरा ऑटो चालक उसे गाड़ी में बैठाने के लिए कह रहा था। छात्रा ने पूरे दम से विरोध किया और भागकर महिला पुलिस थाने की ओर दौड़ पड़ी। डर के मारे आरोपी ऑटो छोड़कर फरार हो गए। अद्भुत साहस दिखाते हुए, नाबालिग छात्रा ने खुद को उनके चंगुल से छुड़ाया और मदद के लिए महिला पुलिस थाने की ओर दौड़ी। हालांकि, मदद पहुंचने से पहले ही, आरोपी ऑटोरिक्शा छोड़कर पैदल ही भाग गए। दिनदहाड़े हुए इस घटनाक्रम से छात्रा दहशत में है। पुलिस ने केस दर्ज कर तीन आरोपितों बीरेंद्र सिंह, हरेंद्र गुर्जर और गौरव रावत को गिरफ्तार किया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। घटना महिला थाना से चंद कदम की दूरी पर हुई। पड़ाव थाना क्षेत्र में साया होटल के पास रहने वाली 17 वर्षीय बालिका ने बताया कि वह पॉलीटेक्निक गर्ल्स कालेज में पढ़ती है। सुबह पौने 11 बजे कॉलेज जा रही थी। महिला थाने से थोड़ा आगे ऑटो खड़ा था। उसके पीछे वाली सीट पर बैठे दो युवक उसके हाथ-पैर पकड़कर जबरन बैठाने लगे और ड्राइवर को आटो चालू को कहा। पीड़िता जैसे-तैसे खुद को उनके चंगुल से छुड़ाते हुए पड़ाव चौराहे की ओर भागी। कुछ देर बाद ऑटो ड्राइवर और उसमें सवार आरोपित भी भाग गए। पुलिस ने ऑटोरिक्शा जब्त कर लिया है और आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पड़ाव पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर शैलेंद्र भार्गव ने कहा कि हमने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और सीसीटीवी फुटेज के जरिए उनकी पहचान करके तीनों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना महिला थाने से महज 50 कदम की दूरी पर हुई और पूरी वारदात CCTV में कैद है। पुलिस ने ऑटो जब्त कर लिया है और आरोपियों को भी पुलिस ने पकड़ लिया है, जिनसे पूछताछ की जा रही है। 

सीएम योगी ने षोडशोपचार विधि से संपन्न किया भगवान विश्वनाथ का पूजन-अर्चन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीकाशी विश्वनाथ और काल भैरव के किए दर्शन, सतुआ बाबा आश्रम में संतों से की भेंट  सीएम योगी ने षोडशोपचार विधि से संपन्न किया भगवान विश्वनाथ का पूजन-अर्चन  मुख्यमंत्री ने देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की  मणिकर्णिका घाट स्थित सतुआ बाबा आश्रम पहुंचे मुख्यमंत्री योगी – मुख्यमंत्री को देख जनता ने लगाया हर-हर महादेव का जयघोष   वाराणसी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने दो दिवसीय वाराणसी प्रवास के दूसरे दिन गुरुवार की सुबह बाबा काल भैरव मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने शहर के कोतवाल माने जाने वाले भगवान काल भैरव का विधिवत दर्शन-पूजन किया। मंदिर में पूजा अर्चना के बाद मुख्यमंत्री सीधे श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने षोडशोपचार विधि से बाबा विश्वनाथ का पूजन-अर्चन किया और देश एवं प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि, कल्याण तथा शांति की कामना की। पूजन के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ ने 'हर हर महादेव' के जयकारों से वातावरण को गूंजायमान कर दिया। मुख्यमंत्री ने विधिवत अभिषेक के बाद गर्भगृह में विशेष पूजा संपन्न की। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मणिकर्णिका घाट स्थित सतुआ बाबा आश्रम पहुंचे। वहां उन्होंने आश्रम परिसर स्थित शिव मंदिर में दर्शन-पूजन किया और सतुआ बाबा के शिष्य महंत संतोष दास जी महाराज से भेंट की। मुख्यमंत्री ने संतों का आशीर्वाद लिया और वाराणसी सहित पूरे प्रदेश में शांति एवं समृद्धि की प्रार्थना की। इस अवसर पर राज्यमंत्री रविन्द्र जायसवाल, विधायक सौरभ श्रीवास्तव तथा सुशील सिंह भी मौजूद रहे। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री बुधवार की शाम वाराणसी पहुंचे थे। आगमन के बाद उन्होंने नमो घाट पर दीप प्रज्ज्वलित कर देव दीपावली महोत्सव का शुभारंभ किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने क्रूज से गंगा तटों पर जलते दीपों के मनमोहक और भव्य दृश्य का अवलोकन किया। देव दीपावली के अवसर पर उन्होंने कहा कि काशी आज आस्था, संस्कृति और अध्यात्म का जीवंत प्रतीक बन चुकी है।

पीएम मोदी के कार्यक्रम से पहले सीएम योगी ने तैयारियों का लिया जायजा

प्रधानमंत्री के वाराणसी दौरे से पहले मुख्यमंत्री ने बनारस रेलवे स्टेशन पर की तैयारियों की समीक्षा  पीएम मोदी के कार्यक्रम से पहले सीएम योगी ने तैयारियों का लिया जायजा रेलवे और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने दी प्रगति की जानकारी  सीएम ने अफसरों को दिए आवश्यक दिशा-निर्देश   सीएम ने स्टेशन पर सुरक्षा और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर दिए सख्त निर्देश  7 नवंबर को वाराणसी आएंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  8 नवंबर को पीएम करेंगे बनारस से खजुराहो वंदे भारत ट्रेन का शुभारंभ वाराणसी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने वाराणसी प्रवास के दूसरे दिन धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेने के उपरांत गुरुवार को बनारस रेलवे स्टेशन पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी दौरे की तैयारियों का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने रेलवे और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से तैयारियों की विस्तृत जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को स्टेशन परिसर के सुंदरीकरण, सुरक्षा व्यवस्था, यात्री सुविधाओं और प्रधानमंत्री के कार्यक्रम स्थल से जुड़ी व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रधानमंत्री के आगमन के दौरान सभी व्यवस्थाएं सुचारु और व्यवस्थित रहें, इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। उन्होंने स्टेशन पर साफ-सफाई, यातायात प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने के निर्देश भी दिए। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में 7 नवंबर को दो दिवसीय दौरे पर आ रहे हैं। अगले दिन, 8 नवंबर को वह बनारस रेलवे स्टेशन से वाराणसी-खजुराहो वंदे भारत और तीन अन्य ट्रेनों का शुभारंभ करेंगे। प्रधानमंत्री के आगमन से पूर्व मुख्यमंत्री का यह निरीक्षण दौरा तैयारियों को अंतिम रूप देने के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विशप हाउस, ग्वालियर में धर्मांतरण जांच, 23 स्टूडेंट्स में 18 ओडिशा से; फादर का बयान – माता-पिता ईसाई

ग्वालियर ग्वालियर में एक क्रिश्चियन संस्था द्वारा संचालित एक विशप परिसर में कथित तौर पर धर्मांतरण का मामला सुलझ गया है. हिंदूवादी संगठनों ने आरोप लगाया था कि ग्वालियर के   मुरार-बड़ागांव इलाके में ईसाई मिशनरी एक सेंट जोसेफ स्कूल परिसर का संचालन करती है, उसी स्कूल परिसर में बिशप के निवास पर 26 बच्चों का धर्मांतरण कर धार्मिक शिक्षा दी जा रही है.  विश्व हिंदू परिसर (विहिप) नेता पप्पू वर्मा ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि बड़ागांव के पास क्रिश्चियन मिशनरी सेंट जोसेफ स्कूल में कुछ गरीब बच्चों को लाकर उनका धर्मांतरण कराया गया है. वह बच्चे छत्तीसगढ़, झासखंड, केरल, उड़ीसा आदि राज्यों के हैं. दरअसल, सूचना मिली थी कि चर्च के फादर की निगरानी में विशप हाउस के अंदर छात्रों को धर्मगुरु बनने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन छात्रों में ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के निवासी शामिल हैं। जिनमें से कई आदिवासी हैं। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम सक्रिय हुई और तत्काल विशप हाउस पहुंची। अधिकारियों ने बच्चों से संबंधित सभी रिकॉर्ड की जांच की। चर्च प्रबंधन से फंडिंग, भूमि रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई और सभी आवश्यक दस्तावेज लिए गए। इस दौरान यह जानकारी सामने आई कि विशप हाउस में कुल 23 छात्र पढ़ रहे हैं। इनमें से 18 छात्र ओडिशा, 3 मध्य प्रदेश (झाबुआ से 2, मोहना से 1) और 2 छत्तीसगढ़ से हैं। बताया जा रहा है कि प्रारंभिक जांच में धर्मांतरण की बात सामने नहीं आई है। फिर भी मामले की बारीकी से जांच की जा रही है कि कही दूर-दूर तक इसका धर्मांतरण से नाता तो नहीं है। बच्चों से जुड़े कागजात किए चेक हिंदू संगठनों की शिकायत पर जिला प्रशासन और पुलिस की टीम भी मौके पर पहुंच गई. उन्होंने वहां मौजूद विशप, स्टाफ और सभी 26 बच्चों से भी बातचीत की. वहां सभी के डॉक्युमेंट भी चेक किए. टीम को वहां धर्मांतरण जैसा कुछ नहीं मिला. वहां मिले विशप डेनियल फ्रांसिस का कहना था कि यहां सिर्फ कैथोलिक बच्चों की पढ़ाई होती है, जिन्हें भाषा की शिक्षा दी जाती है. धर्मांतरण जैसा कुछ भी नहीं है. उन्होंने हर तरह की जांच में सहयोग करने की बात कही. कई घंटे की जांच पड़ताल के बाद एसडीएम एनसी गुप्ता और मुरार के सीएसपी मनीष यादव ने बताया कि यहां धर्मांतरण के आरोप गलत और भ्रामक हैं. जांच से पता चला कि यहां पढ़ रहे सभी के माता पिता कृश्चियन हैं और ये सब कैथोलिक हैं, जिनकी पुष्टि डॉक्युमेंट से हो गई है. हाई स्कूल के बाद बच्चे अपनी स्किल डेवलपमेंट और भाषा की ट्रेनिंग के लिए पहुंचे थे. यहां बच्चों को ट्रेनिंग के दौरान हिंदी और अंग्रेजी भाषा की पढ़ाई कराते हैं. ग्वालियर अंचल में कुल 18 स्कूल संचालित हो रहे हैं. जांच में पता चला कि बड़ागांव स्थित ईसाई मिशनरी के हॉस्टल में बच्चों के परिजन भी समय-समय पर मिलने आते हैं.

छत्तीसगढ़ राज्य उत्सव में जिंदल स्टील का शानदार स्टाल आकर्षण का केंद्र

 छत्तीसगढ़ राज्य उत्सव में जिंदल स्टील का भव्य स्टाल  छत्तीसगढ़ राज्य उत्सव में जिंदल स्टील का शानदार स्टाल आकर्षण का केंद्र राज्य उत्सव में जिंदल स्टील का भव्य प्रदर्शन, मिली लोगों की बड़ी प्रतिक्रिया रायपुर  छत्तीसगढ़ राज्य के 25वें स्थापना दिवस के अवसर पर नवा रायपुर स्थित मेला स्थल में आयोजित भव्य राज्योत्सव 2025 के दौरान जिंदल स्टील ने एक आकर्षक और जानकारीपूर्ण स्टॉल लगाया, जिसने वहां आने वाले लोगो का ध्यान अपनी ओर खींचा । जिंदल स्टील के इस स्टॉल में कंपनी के विभिन्न उत्पादों, आधुनिक तकनीक, मशीनरी डिवीजन के उन्नत उपकरणों एवं CSR गतिविधियों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई। साथ ही, कंपनी द्वारा पिछले 25 वर्षों में छत्तीसगढ़ राज्य के विकास में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका को भी प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया गया। स्टॉल में जिंदल स्टील के स्टील, स्ट्रक्चरल्स, रेल्स, प्लेट्स, मशीनरी पार्ट्स इत्यादि उत्पादों की जानकारी के साथ-साथ उनकी निर्माण प्रक्रिया और गुणवत्ता मानकों को भी दर्शाया गया। इसके अलावा, कंपनी के CSR  कार्यक्रमों के अंतर्गत शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, पर्यावरण संरक्षण तथा ग्रामीण विकास से जुड़ी गतिविधियों की झलक भी दिखी. राज्योत्सव के दौरान बड़ी संख्या में आये लोग  एवं उद्योग प्रतिनिधियों, विद्यार्थियों एवं सरकारी अधिकारियों ने स्टॉल का भ्रमण किया और जिंदल स्टील के नवाचार एवं उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने बताया कि स्टॉल न केवल जानकारीपूर्ण था, बल्कि छत्तीसगढ़ में जिंदल स्टील की 25 वर्षों की उल्लेखनीय यात्रा और योगदान को गर्व के साथ प्रदर्शित भी करता है। जिंदल स्टील के प्रतिनिधियों ने बताया कि कंपनी आगे भी छत्तीसगढ़ राज्य के सर्वांगीण विकास में अपना योगदान जारी रखेगी और “विकसित छत्तीसगढ़, मजबूत भारत” के विज़न को साकार करने में सक्रिय भूमिका निभाती रहेगी।

दहेज न मिलने पर इंदौर में पत्नी को दिया तीन तलाक, पति ने करवाई जबरन हलाला, फिर भी नहीं रखा साथ

इंदौर  इंदौर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. जहां दहेज की मांग पूरी न होने पर पति ने पत्नी को तीन तलाक दे दिया और फिर जबरन हलाला करवाया. इसके बाद भी आरोपी पति ने महिला को अपने साथ रखने से इंकार कर दिया. पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जिसके बाद पति और सास को हिरासत में ले लिया गया. खजराना थाना क्षेत्र की रहने वाली 29 वर्षीय फरहाना खान की शादी साल 2010 में वसीम पठान से हुई थी. फरहाना ने बताया कि शादी के बाद से ही पति वसीम और सास गुड्डो बी दहेज की मांग को लेकर उसे परेशान करते थे. उनका कहना था कि परिवार चलाने के लिए मायके से पैसे लाकर दो. तीन बच्चे होने के बाद दबाव और बढ़ गया. दहेज की मांग पूरी ना होने पर तीन तलाक  फरहाना के अनुसार अक्टूबर 2024 में वसीम ने मारपीट कर उसे तीन बार तलाक कहा और घर से निकाल दिया. उसने दो बच्चों को अपने पास रख लिया और एक बच्चा फरहाना के साथ रह गया. महिला ने परिवार के माध्यम से सुलह की कोशिश की, तब वसीम ने कहा कि मुस्लिम धर्म के अनुसार हलाला करना होगा. पुलिस ने दो आरोपियों को हिरासत में लिया  दिसंबर 2024 में वसीम ने रिश्तेदार सईद के साथ फरहाना का हलाला करवाया. इसके लिए 500 रुपये के स्टाम्प पर कागज तैयार किए गए. हलाला पूरा होने के बाद भी वसीम ने साथ रखने से साफ इंकार कर दिया. मजबूर होकर महिला ने सोमवार को खजराना थाने में शिकायत दर्ज कराई. थाना प्रभारी के अनुसार मुस्लिम विवाह संरक्षण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है और दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया है.

अंग्रेजों की सत्ता को चुनौती देने से राष्ट्रीय पहचान तक: वंदे मातरम की कहानी और विरोध के कारण

नई दिल्ली भारत की स्वतंत्रता संग्राम की गूंज में एक ऐसा गीत है जो न केवल राष्ट्रप्रेम की भावना जगाता है, बल्कि मातृभूमि को देवी के रूप में पूजने की परंपरा को जीवंत करता है। 'वंदे मातरम'- ये दो शब्द आज भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में गूंजते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह गीत कैसे और कब रचा गया? कैसे यह बंगाल के एक उपन्यास से निकलकर पूरे देश की आवाज बन गया? और कैसे यह स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक बना, जिसने ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी? आइए, इतिहास की उन पन्नों को पलटें जहां राष्ट्रवाद की लौ पहली बार प्रज्वलित हुई। वंदे मातरम की जड़ें 19वीं सदी के बंगाल में हैं, जब भारत ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की जंजीरों में जकड़ा हुआ था। इस गीत के रचयिता थे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय, जिन्हें बंगाली साहित्य का पितामह कहा जाता है। बंकिम चंद्र एक प्रशासनिक अधिकारी थे, लेकिन उनकी रचनाएं राष्ट्रवाद की आग से भरी हुई थीं। गीत की रचना 7 नवंबर 1875 को हुई, जब बंकिम चंद्र अपने घर में बैठे थे। कुछ इतिहासकारों के अनुसार, यह गीत एकाएक प्रेरणा से लिखा गया। बंकिम ने इसे संस्कृत और बंगाली के मिश्रण में रचा, जहां संस्कृत श्लोक मातृभूमि की महिमा गाते हैं और बंगाली हिस्सा भावनात्मक गहराई प्रदान करता है। गीत की पहली पंक्तियां हैं: वंदे मातरम्। सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्। शस्यशामलां मातरम्॥ यह गीत सबसे पहले उनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ में प्रकाशित हुआ, जो 1882 में पूरा हुआ और धारावाहिक रूप में बंगाली पत्रिका बंगदर्शन में छपा। उपन्यास की पृष्ठभूमि 18वीं सदी का संन्यासी विद्रोह है, जहां भूखे संन्यासी ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ विद्रोह करते हैं। 'वंदे मातरम' उपन्यास में संन्यासियों का युद्धगीत है, जो मातृभूमि को दुर्गा देवी के रूप में चित्रित करता है। बंकिम चंद्र ने गीत को संगीतबद्ध करने के लिए अपने भतीजे को प्रेरित किया, लेकिन मूल धुन बाद में जादवपुर विश्वविद्यालय के संगीतकारों द्वारा विकसित की गई। गीत की रचना का उद्देश्य स्पष्ट था – भारतीयों में मातृभूमि के प्रति प्रेम और विदेशी शासन के खिलाफ संघर्ष की भावना जगाना। स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका: ब्रिटिशों की नींद उड़ाने वाला नारा वंदे मातरम महज एक गीत नहीं रहा; यह स्वतंत्रता संग्राम का युद्धघोष बन गया। 1896 में कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार इसे सार्वजनिक रूप से गाया गया, जब रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे अपनी धुन में प्रस्तुत किया। टैगोर की आवाज ने गीत को अमर बना दिया। 1905 के बंगाल विभाजन के दौरान यह गीत स्वदेशी आंदोलन का प्रतीक बना। बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल जैसे नेता इसे रैलियों में गाते थे। ब्रिटिश सरकार इतनी भयभीत हुई कि 1907 में उन्होंने गीत गाने पर प्रतिबंध लगा दिया। फिर भी, क्रांतिकारी जैसे अरविंद घोष और सुभाष चंद्र बोस इसे गुप्त रूप से गाते रहे। महात्मा गांधी ने भी इसे सराहा, लेकिन पूरे गीत को अपनाने में संकोच किया क्योंकि इसमें हिंदू देवी-देवताओं का उल्लेख था, जो मुस्लिम समुदाय को अलग कर सकता था। फिर भी, आंदोलन में इसका प्रभाव असीम था। 1937 में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे ऑर्केस्ट्रा में प्रस्तुत किया, जिसने इसे वैश्विक स्तर पर पहुंचाया। राष्ट्रीय गीत का दर्जा: 1950 की ऐतिहासिक घोषणा स्वतंत्रता के बाद वंदे मातरम को राष्ट्रीय सम्मान मिला। 24 जनवरी 1950 को भारत की संविधान सभा ने इसे राष्ट्रीय गीत घोषित किया। यह निर्णय डॉ. राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में लिया गया। उसी दिन जना गना मन को राष्ट्रीय गान बनाया गया।राष्ट्रीय गीत के रूप में केवल उपन्यास के पहले दो छंदों को अपनाया गया, क्योंकि पूरे गीत में विद्रोही तत्व थे और धार्मिक संदर्भ मुस्लिम लीग की आपत्तियों के कारण विवादास्पद थे। जवाहरलाल नेहरू और मौलाना अबुल कलाम आजाद ने समझौता किया। आज, सरकारी समारोहों में पहले दो छंद गाए जाते हैं। वंदे मातरम विवादों से अछूता नहीं रहा। 2006 में शताब्दी समारोह के दौरान कुछ मुस्लिम संगठनों ने धार्मिक आधार पर विरोध किया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे राष्ट्रप्रेम का प्रतीक माना। गीत की विरासत फिल्मों, स्कूलों और खेल आयोजनों में जीवित है। देश भर में हो रहा आयोजन राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देश भर में 150 महत्वपूर्ण स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम’ गाया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में ऐसे ही एक कार्यक्रम में भाग लेंगे। संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री हिस्सा लेंगे। इसके साथ ही विभिन्न कार्यक्रमों की शुरुआत होगी। इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में होने वाले उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री मोदी मुख्य अतिथि होंगे। समारोह सात नवंबर की सुबह सार्वजनिक स्थानों पर स्कूली बच्चों, कॉलेज के छात्रों, अधिकारियों, निर्वाचित प्रतिनिधियों, पुलिसकर्मियों और डॉक्टरों सहित नागरिकों की भागीदारी के साथ 'वंदे मातरम' के पूर्ण संस्करण के सामूहिक गायन के साथ शुरू होगा। मंत्रालय ने कहा कि गीत के ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व को देखते हुए, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में राष्ट्रव्यापी समारोहों को मंजूरी दी थी। अधिकारियों ने बताया कि उद्घाटन समारोह में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम, 'वंदे मातरम' के 150 वर्षों के इतिहास पर एक प्रदर्शनी, एक लघु वृत्तचित्र फिल्म का प्रदर्शन और एक स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी किया जाएगा। मुत्ताहिदा मजलिस-ए-उलमा ने ‘वंदे मातरम’ कार्यक्रम को बताया गैर-इस्लामिक, सरकार से निर्देश वापस लेने की मांग जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के धार्मिक संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले मुत्ताहिदा मजलिस-ए-उलेमा (MMU) ने बुधवार को केंद्र और जम्मू-कश्मीर सरकार के एक आदेश की कड़ी आलोचना की है। इस आदेश में स्कूलों को ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सांस्कृतिक और संगीत कार्यक्रम आयोजित करने तथा सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों की अनिवार्य भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा गया है। एमएमयू की अगुवाई मीरवाइज उमर फारूक कर रहे हैं। उन्होंने इस निर्देश को 'गैर-इस्लामिक' और 'आरएसएस प्रेरित हिंदू विचारधारा थोपने की कोशिश' करार दिया है। संयुक्त बयान में ग्रैंड मुफ्ती नासिर-उल-इस्लाम और मौलाना रहमतुल्लाह समेत कई धार्मिक नेताओं ने कहा कि यह आदेश इस्लाम की मूल आस्था- तौहीद (अल्लाह की एकता) के सिद्धांत के विरुद्ध है। उन्होंने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से इस … Read more

चेन्नई सुपर किंग्स के मालिक बोले: धोनी का IPL 2026 में खेलना अब अनिश्चित

चेन्नई   इंडियन प्रीमियर लीग 2025 (IPL 2025) के समाप्त होते ही ये चर्चा शुरू हो गई कि चेन्नई सुपर किंग्स के स्टार खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी आईपीएल का अगला सीजन खेलेंगे या नहीं. वहीं इस बात पर जब-जब धोनी से सवाल किया गया, तब-तब माही ने इस सवाल के जवाब को देने के लिए कुछ वक्त मांगा. लेकिन अब सीएसके के मालिक काशी विश्वनाथन ने एमएस धोनी के अगले आईपीएल 2026 में खेलने के बारे में बड़ा अपडेट दिया है. CSK के मालिक ने धोनी पर क्या कहा? महेंद्र सिंह धोनी और सीएसके के लिए आईपीएल 2025 कुछ खास नहीं रहा. इस सीजन चेन्नई सुपर किंग्स की टीम 10वें नंबर पर रही. इसी के साथ धोनी के आईपीएल से रिटायर होने की अटकलें भी लगाई जाने लगीं. लेकिन अब सीएसके के मालिक ने इन सभी चर्चाओं पर विराम लगा दिया है. काशी विश्वनाथन का कहना है कि एमएस धोनी आईपीएल का अगला सीजन जरूर खेलेंगे. प्रोवोक लाइफस्टाइल के यूट्यूब चैनल से एक वीडियो शेयर किया गया है, जिसमें एक बच्चा सीएसके के सीईओ से सवाल करता है कि क्या धोनी जल्दी ही रिटायर हो जाएंगे. तब काशी विश्वनाथन जवाब देते हैं कि 'धोनी रिटायर नहीं होंगे. मैं इस बारे में भी उनसे पूछूंगा और फिर आपको बताता हूं'. सीएसके मालिक ने टीम के अगले सीजन में परफॉर्म करने को लेकर कहा कि 'हम जीतने के लिए स्ट्रेटजी बना रहे हैं, लेकिन जीतेंगे या नहीं, इस बारे में नहीं पता है'. CSK के लिए बेकार रहा IPL 2025 आईपीएल 2025 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की टीम ने अपना पहला टाइटल हासिल किया. वहीं चेन्नई सुपर किंग्स की सबसे आखिर में 10वें नंबर पर रही. इस सीजन एमएस धोनी के बल्ले से भी रन देखने को नहीं मिले. धोनी ने आईपीएल 2025 में खेले 14 मैचों की 13 पारियों में 24.50 की औसत से 196 रन बनाए. धोनी का आईपीएल के 18वें सीजन में बेस्ट स्कोर नाबाद 30 रन रहा.