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गजकेसरी योग 10 नवंबर को: इन 3 राशियों पर बरसेगी धन और सफलता की वर्षा

ज्योतिषविद देवगुरु बृहस्पति के गोचर को बहुत शुभ मानते हैं. देवगुरु बृहस्पति की चाल लोगों के जीवन को प्रभावित करती है. अभी देवगुरु चंद्रमा के स्वामित्व वाली राशि कर्क में अतिचारी अवस्था में गोचर कर रहे हैं. 18 अक्टूबर को देवगुरु का प्रवेश कर्क राशि में अतिचारी अवस्था में ही हुआ था. देवगुरु पांच दिसंबर तक कर्क राशि में रहने वाले हैं. इस परिवर्तन की वजह से देवगुरु हर दिन किसी न किसी ग्रह के साथ मिलकर शुभ-अशुभ राजयोग बनाते हैं. वहीं 10 नवंबर को दोपहर 01 बजकर 02 मिनट पर चंद्रमा अपनी राशि कर्क में प्रवेश करेंगे, जिसके बाद देवगुरु बृहस्पति चंद्रमा के साथ मिलकर गजकेसरी योग बनाएंगे. देवगुरु बृहस्पति कर्क राशि में आकर पहले से ही हंस महापुरुष राजयोग बना चुके हैं. वहीं गजकेसरी योग के बनने से इन तीन राशि के जातकों को जीवन में शुभ फल प्राप्त हो सकते हैं. इनका भाग्य चमक सकता है. मेष राशि गजकेसरी योग मेश राशि के जातकों के लिए बड़ा ही फायदेमंद साबित हो सकता है. इस दौरान मेष राशि के जातकों को भाग्य का साथ मिलना शुरू हो सकता है. इस दौरान बेरोजगार जातकों को रोजगार की प्राप्ति हो सकती है. आय में बढ़ोतरी हो सकती है. पारिवारिक जीवन सुखद रहने वाला है. कर्क राशि कर्क राशि में ही गजकेसरी योग बनने वाला है. ये योग कर्क राशि के जातकों के लिए बहुत शुभ साबित हो सकता है. इस दौरान कर्क राशि के जातक मानसिक रूप से मजबूत हो सकते हैं. इस दौरान महत्वपूर्ण निर्णय ले सकते हैं. करियर से जुड़ी हुई परेशानियां खत्म हो सकती हैं. साथ ही करियर में नई दिशा मिल सकती है. धन-धान्य की स्थिति भी पहले से बेहतर हो सकती है. कन्या राशि गजकेसरी योग कन्या राशि के जातकों के लिए बहुत लाभकारी साबित हो सकता है. इस दौरान कारोबारी जातकों को धन का लाभ हो सकता है. कारोबार में कोई बड़ी डील हाथ लग सकती है. इस दौरान ख्याति बढ़ सकती है. सामाजिक स्तर पर सक्रिय रह सकते हैं.

मौसम में आएगा बदलाव: छत्तीसगढ़ में तापमान 4 डिग्री तक नीचे जाने की संभावना

रायपुर छत्तीसगढ़ में मौसम का मिजाज बदल गया है. बारिश थमने के बाद बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र से आने वाली नमी की मात्रा में कमी होने लगी है. अब लोगों के घरों में एसी-पंखे का स्विच ऑफ हो गए हैं. रजाई और कंबल बाहर निकाल लिए गए हैं. मौसम विभाग ने प्रदेश में अगले चार दिनों में तापमान में 4 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट की संभावना जताई है. पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 31.1 डिग्री सेल्सियस रायपुर में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस अंबिकापुर में रिकॉर्ड हुआ. सिनोप्टिक सिस्टम मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में कहीं भी वर्षा दर्ज नहीं की गई. छत्तीसगढ़ में आगामी दिनों तक मौसम शुष्क बने रहने के आसार हैं. 7 नवंबर को मौसम शुष्क रह सकता है. किसी भी इलाके में बारिश की संभावना नहीं है. दो दिनों के बाद भी मौसम में किसी बड़े परिवर्तन की उम्मीद नहीं है. रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम ? मौसम विभाग ने राजधानी रायपुर में आज आसमान मुख्यतः साफ रहने की संभावना जताई है. अधिकतम तापमान लगभग 31 डिग्री सेल्सिलय और न्यूनतम तापमान करीब 19 डिग्री सेल्सिलय के आसपास रह सकता है.

वोटिंग डे पर बड़ा फैसला: सुप्रीम कोर्ट में SIR के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई

पटना/नई दिल्ली उच्चतम न्यायालय ने पूरे भारत में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कराने के निर्वाचन आयोग के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 11 नवंबर को सुनवाई करने पर शुक्रवार को सहमति जताई। गैर सरकारी संगठन ‘एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ की ओर से पेश हुए अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि यह मुद्दा लोकतंत्र की जड़ों तक जाता है जिसके बाद न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि वह 11 नवंबर से इन याचिकाओं पर सुनवाई शुरू करेगी। पीठ ने कहा कि हालांकि 11 नवंबर से कई महत्वपूर्ण मामले सूचीबद्ध हैं, फिर भी वह SIR मामलों की सुनवाई के लिए अन्य मामलों की सुनवाई को समायोजित करने का प्रयास करेगी। भूषण ने कहा कि मामले की तत्काल सुनवाई इसलिए आवश्यक है क्योंकि विभिन्न राज्यों में SIR प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। शीर्ष अदालत बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण करने के निर्वाचन आयोग के फैसले की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर पहले से ही सुनवाई कर रही है। चुनाव आयोग ने क्या कहा निर्वाचन आयोग ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की कवायद को ‘सटीक’ बताते हुए न्यायालय से 16 अक्टूबर को कहा था कि याचिकाकर्ता राजनीतिक दल और गैर सरकारी संगठन इस प्रक्रिया को केवल बदनाम करने के लिए झूठे आरोप लगाकर संतुष्ट हैं। आयोग ने न्यायालय से यह भी कहा था कि अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद से नाम हटाने के खिलाफ किसी मतदाता ने एक भी अपील दायर नहीं की है। उसने याचिकाकर्ताओं के इस आरोप का खंडन किया था कि महीनों तक चली SIR प्रक्रिया के बाद तैयार की गई राज्य की अंतिम मतदाता सूची में 'मुसलमानों को अनुपातहीन तरीके से बाहर' किया गया। निर्वाचन आयोग ने 30 सितंबर को बिहार की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करते हुए कहा था कि इसमें मतदाताओं की कुल संख्या लगभग 47 लाख घटकर 7.42 करोड़ रह गई है जो निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से पहले 7.89 करोड़ थी। अंतिम संख्या हालांकि एक अगस्त को जारी की गई मसौदा सूची में दर्ज 7.24 करोड़ मतदाताओं से 17.87 लाख अधिक है। मृत्यु, प्रवास और मतदाताओं के दोहराव सहित विभिन्न कारणों से 65 लाख मतदाताओं के नाम मूल सूची से हटा दिए गए थे। मसौदा सूची में 21.53 लाख नए मतदाता जोड़े गए जबकि 3.66 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए जिससे कुल मतदाताओं की संख्या में 17.87 लाख की वृद्धि हुई है। बिहार में 243 सदस्यीय विधानसभा की 121 सीट पर पहले चरण का चुनाव गुरुवार को हो गया, जबकि शेष 122 निर्वाचन क्षेत्रों में 11 नवंबर को मतदान होगा। मतों की गिनती 14 नवंबर को होगी।  

यातायात होगा आसान: 23 करोड़ की लागत से जिले में बनेगा बड़ा फ्लाईओवर

पानीपत  पानीपत शहर के लोगों के लिए खुशखबरी आई है। यहां जाम की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए बड़ी राहत मिलने वाली है। प्रमोद विज के प्रयासों के बाद मुख्यमंत्री नायब सैनी ने शहर में नए फ्लाईओवर के निर्माण की स्वीकृति दे दी है।  बताया जा रहा है कि यह फ्लाईओवर दिल्ली पैरलल नहर के पास, जाटल रोड-रिफाइनरी रोड क्रॉसिंग पर बनाया जाएगा। प्रमोद विज ने बताया कि इस फ्लाईओवर का निर्माण करीब 23 करोड़ रुपये की लागत से होगा। हरियाणा राज्य सड़क विकास निगम ने इसके लिए टेंडर जारी कर दिया है और निर्माण कार्य जल्द ही शुरू किया जाएगा। फ्लाईओवर बन जाने से न केवल ट्रैफिक सुगम होगा, बल्कि लोगों का समय भी बचेगा।

नई तकनीक: सिर्फ फोन टच से पता चलेगा ब्लड शुगर, दर्दनाक जांच नहीं

नई दिल्ली डायबिटीज पेशेंट को अक्सर बार-बार शुगर चेक करने की जरूरत होती है. घर से दूर नौकरी करने वाले लोगों को काफी परेशानी भी होती है. मार्केट में कुछ खास प्रोडक्ट लिस्टेड हैं, जिनका इस्तेमाल करके मोबाइल पर ब्लड शुगर देखा जा सकेगा. इनका नाम स्मार्ट ग्लुकोज मॉनिटर हैं, जिसका मेडिकल नाम कॉन्टीन्युअस ग्लोस मॉनिटरिंग सिस्टम (CGM) है.  इन ग्लूकोज मीटर को बांह या पेट पर चिपकाया जाता है. इसके बाद मोबाइल पर आसानी से ब्लड शुगर को देख सकते हैं. इसके लिए बार-बार उंगली में सुई चुभाने की जरूरत नहीं होगी.  स्टिकर जैसी शेप और कई सेंसर  मार्केट में अलग-अलग ब्रांड और कंपनियां Blood Glucose Meter Sticker लिस्टेड हैं. जहां कुछ ब्लूटूथ का सपोर्ट देती हैं वहीं कुछ कंपनियां NFC का भी सपोर्ट प्रोवाइड कराती हैं. बहुत सी कंपनियां दोनों का सपोर्ट देती हैं.  NFC सपोर्ट वाले पैच पर सिर्फ स्मार्टफोन को टच करना होता है, उसके बाद ब्लड शुगर लेवल मोबाइल स्क्रीन पर पॉपअप करने लगता है. हालांकि ब्लूटूथ सपोर्ट वाले पैच का डेटा देखने के लिए मोबाइल ऐप की जरूरत होती है.  स्मार्ट ग्लूकोज मीटर पैच ऐसे काम करते हैं     स्मार्ट ग्लूकोज मीटर पैच सेंसर को बांह या पेट पर चिपका जाता है.     यह शरीर के अंदर के इंटरस्टिशियल फ्लूइड में ग्लूकोज की लेवल को मांपता है.     Bluetooth या NFC से डेटा स्मार्टफोन में ट्रांसफर किया जाता है.      ऐप में ग्राफ, हाई/लो अलर्ट और रिपोर्ट दिखाई जाती है.  मार्केट में ढेरों ऑप्शन और इतनी है कीमत  ग्लूकोज मीटर स्टिकर के मार्केट में ढेरों ऑप्शन मौजूद हैं. अलग-अलग कंपनियां अलग-अलग फीचर्स और एक्युरेसी का दावा करते हैं. मार्केट में 3-5 हजार रुपये की कीमत में मिल जाते हैं. एक पैज को करीब 15 दिन तक यूज किया जा सकता है.  ग्लूकोज मीटर स्टिकर किन लोगों के यूजफुल  ग्लूकोज मीटर स्टिकर पैच उन लोगों के लिए यूजफुल हैं, जिनका ब्लड शुगर ज्यादा रहता है और फ्लेक्चुएट करता है. शुगर बढ़ने की वजह से अगर तबियत बिगड़ती है तो पेशेंट आसनी से फोन को पैज पर टैप करके शुगर लेवल जांच सकते हैं. इसके बाद शुगर कंट्रोल करने के लिए काम कर सकते हैं.  ग्लूकोज मॉनिटरिंग उपकरण भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी-एम) के शोधकर्ताओं ने मधुमेह रोगियों के लिए एक कम बजट वाला, यूजर फ्रेडली और उपयोग करने में आसान ग्लूकोज मॉनिटरिंग उपकरण विकसित किया है। शोधकर्ताओं की टीम का मानना है कि इसकी मदद से शुगर लेवल को नियमित रूप से जांचने में बिना दर्द के मदद मिल सकती है। यह पेटेंट उपकरण मरीजों को बिना उंगलियों में सुई चुभने के दर्द के भी ग्लूकोज के स्तर को मापने में मददगार हो सकती है।  भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की रिपोर्ट के मुताबिक देश की लगभग 9 प्रतिशत आबादी मधुमेह से पीड़ित है, इनमें से अधिकतर लोगों को डॉक्टर नियमित रूप से शुगर की जांच करते रहने की सलाह देते हैं।  ग्लूकोमीटर से घर पर डायबिटीज की जांच अभी तक घर पर डायबिटीज की जांच के लिए ग्लूकोमीटर का इस्तेमाल किया जाता रहा है। ये एक छोटा-सा डिवाइस होता है जिससे आप घर पर ही अपने ब्लड शुगर की जांच कर सकते हैं। इसके लिए ग्लूकोमीटर में एक नई टेस्ट स्ट्रिप लगाने के बाद, अपनी उंगली में निडिल या सिरिंज की मदद से पिन करके एक ड्रॉप खून को इसी स्ट्रिप पर लगाना होता है।  कुछ सेकंड में डिवाइस आपकी ब्लड शुगर वैल्यू दिखा देती है।   क्या कहते हैं विशेषज्ञ? इलेक्ट्रॉनिक मटेरियल और थिन फिल्म्स लैब के शोधकर्ताओं ने प्रोफेसर परशुरामन स्वामीनाथन के नेतृत्व में इसे विकसित किया है।  इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे आईआईटी मद्रास के डॉ एल. बालामुरुगन कहते हैं, इस तरह का उपकरण वास्तव में बहुत सहायक है। ग्लूकोज की निगरानी को दर्दरहित बनाने के साथ ये किफायती भी है। यह ग्लूकोज के स्तर की नियमित जांच करने, अपने शरीर के पैटर्न को समझने में जांच के लिए अनावश्यक दौड़ भाग को कम करने में मदद करता है। हालांकि ये डिवाइस किस तरह से काम करती है फिलहाल इसकी स्पष्ट जानकारी साझा नहीं की गई है।  

डॉक्टर बेटी और सीए बेटे के भविष्य के लिए माता-पिता ने छोड़ी संपत्ति, संन्यास के लिए तैयार

नरसिंहपुर  नरसिंहपुर शहर के ओसवाल (बच्छावत) परिवार की बेटी अनामिका ओसवाल, अपने पति दिनेश कांकरिया, डॉक्टर बेटी हर्षिता और चार्टर्ड अकाउंटेंट में अध्ययनरत बेटे विधान के साथ सांसारिक मोहमाया त्यागकर सन्यास के मार्ग पर अग्रसर हो रही हैं। यह पूरा परिवार आगामी 9 नवंबर को आचार्य जिन पीयूष सागर के पावन सान्निध्य में जैन दीक्षा ग्रहण करेगा। ​स्वर्गीय टीकमचंद ओसवाल और श्रीमती कमलाबाई ओसवाल की बेटी अनामिका, जिनका विवाह महाराष्ट्र के धूलिया निवासी दिनेश कांकरिया से हुआ था, उनके परिवार के इस त्याग को समाज एक प्रेरणादायी कदम मान रहा है। परिवार के पास करीब 5 करोड़ से अधिक की चल-अचल संपत्ति है, जिसे छोड़कर वे आत्मसाधना में लीन होंगे। गौरतलब है कि इस परिवार की एक और बेटी वर्ष 2022 में ही दीक्षा लेकर साध्वी शाश्वत निधि के रूप में साधना कर रही हैं। ​सकल जैन श्वेतांबर संघ द्वारा इस दीक्षार्थी परिवार के अभिनंदन में 9 नवंबर को भव्य समारोह का आयोजन किया जा रहा है। अभिनंदन समारोह श्री मुनिसुब्रत स्वामी जैन श्वेतांबर मंदिर, गुदरी बाजार में सुबह 10.30 बजे से होगा। इससे पूर्व, दीक्षार्थी परिवार का बरघोड़ा (शोभा यात्रा) समारोहपूर्वक मेन रोड से होते हुए बाहरी रोड तक जाएगा। इस अवसर पर विनम्र सागर, पुण्यवर्धन, गुणवर्धन महाराज के पावन सान्निध्य में कार्यक्रम संपन्न होगा। परिवार के एडवोकेट अखिलेश ओसवाल ने इस ऐतिहासिक दीक्षा के संबंध में जानकारी दी।  

सीईईडब्ल्यू की रिपोर्ट: सौर ऊर्जा के बढ़ते उपयोग से 2047 में खुल सकता है विशाल रीसाइक्लिंग व्यवसाय

नई दिल्ली खराब या प्रयोग से बाहर हो चुके सौर पैनलों से सामग्रियों को निकालना और उन्हें दोबारा इस्तेमाल करना 2047 में 3,700 करोड़ रुपये का बाजार अवसर हो सकता है। यह जानकारी काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) के दो नए स्वतंत्र अध्ययनों से सामने आई है, जिन्हें आज जारी किया गया है। इनमें बताया गया है कि यदि यह संभावित क्षमता हकीकत बनती है तो सौर कचरे से सिलिकॉन, तांबा, एल्यूमीनियम और चांदी जैसी मूल्यवान सामग्रियों को दोबारा निकाला जा सकता है और इससे 2047 तक क्षेत्र की विनिर्माण जरूरतों का 38 प्रतिशत हिस्सा पूरा किया जा सकता है। साथ में, नई सामग्री की जगह पर पुनर्चक्रित सामग्री के उपयोग से 37 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन भी बचाया जा सकता है। भारत का सोलर मॉड्यूल रीसाइक्लिंग मार्केट अभी बहुत प्रारंभिक चरण में है, जिसमें कुछ कमर्शियल रीसाइक्लर्स काम कर रहे हैं। सीईईडब्ल्यू के दोनों अध्ययन एक घरेलू सोलर रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम बनाने के लिए भारत की पहली व्यापक रूपरेखा उपलब्ध कराते हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा और विनिर्माण में आत्मनिर्भरता, दोनों का ही समर्थन करता है।  अनुमान है कि 2047 तक, भारत की स्थापित सौर क्षमता से 11 मिलियन टन से अधिक सौर कचरा निकल सकता है, जिसका अधिकांश हिस्सा क्रिस्टलीन-सिलिकॉन मॉड्यूल से होगा। इसके प्रबंधन के लिए देश भर में लगभग 300 रीसाइक्लिंग प्लांट्स और 4,200 करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत होगी। ऋषभ जैन, फेलो, सीईईडब्ल्यू, ने कहा, “भारत की सौर क्रांति एक नए हरित औद्योगिक अवसर को ताकत दे सकती है। अपनी स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों में सर्कुलैरिटी (चक्रीयता) को शामिल करके, हम महत्वपूर्ण खनिजों को दोबारा हासिल कर सकते हैं, आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बना सकते हैं, और हरित नौकरियां (green jobs) सृजित कर सकते हैं, साथ में, संभावित कचरे को स्थायी मूल्य में बदल सकते हैं। इस सर्कुलर इकोनॉमी (circular economy) का निर्माण भारत के लचीले और जिम्मेदारीपूर्ण विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।” सीईईडब्ल्यू अध्ययन यह भी रेखांकित करता है कि सौर पैनलों की रीसाइक्लिंग (solar recycling) की एक औपचारिक व्यवस्था आज भी अव्यवहार्य है, क्योंकि रीसाइक्लर्स को प्रति टन 10,000-12,000 रुपये का नुकसान हो रहा है। बड़े परिचालन खर्चों में बेकार या प्रयोग से बाहर हो चुके सोलर मॉड्यूल को दोबारा खरीदना है, जो कुल खर्च का लगभग दो-तिहाई (लगभग 600 रुपये प्रति पैनल) होता है। इसके बाद प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग), संग्रहण (कलेक्शन) और निपटान (डिस्पोजल ) की लागत आती है। सौर पैनल रीसाइक्लिंग को लाभदायक बनाने के लिए, खराब मॉड्यूल की कीमत 330 रुपये से कम होनी चाहिए, या रीसाइक्लर्स को ईपीआर सर्टिफिकेट ट्रेडिंग, टैक्स राहत और सिलिकॉन व चांदी की कुशल पुनर्प्राप्ति के लिए शोध एवं विकास निवेश के जरिए मदद दी जानी चाहिए। आकांक्षा त्यागी, प्रोग्राम लीड, सीईईडब्ल्यू, ने कहा, “सोलर रीसाइक्लिंग भारत की स्वच्छ ऊर्जा और विनिर्माण महत्वाकांक्षाओं के बीच पुल बन सकती है। कचरा प्रबंधन से आगे, यह सरलता से सामग्री निकालने के लिए उपयुक्त पैनल डिजाइन करके, सामग्री की शुद्धता में सुधार लाकर और महत्वपूर्ण खनिजों के लिए नई वैल्यू चेन बनाकर, इनोवेशन का अवसर भी देता है। ईपीआर लक्ष्यों को लाने, सर्कुलर उत्पादों के लिए मांग पैदा करने, डेटा पारदर्शिता में सुधार लाने और रीसाइक्लिंग को ध्यान में रखकर उत्पादों को डिजाइन करने जैसे उपायों से भारत की सौर कचरे की चुनौती एक हरित उद्योग अवसर में बदल सकती है।” रिसाइक्लिंग को विस्तार देने के लिए, सीईईडब्ल्यू के अध्ययन पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के नेतृत्व में ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के तहत संग्रहण और पुनर्प्राप्ति (collection and recovery) के लिए ईपीआर लक्ष्यों को लाने, और नीति, वित्त और उद्योग कार्रवाई में समरूपता के लिए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के तहत एक सर्कुलर सोलर टास्कफोर्स बनाने का सुझाव देते हैं। इममें वेस्ट हॉटस्पॉट का पता लगाने के लिए एक केंद्रीकृत सोलर इन्वेंट्री बनाने का भी सुझाव दिया गया है और निर्माताओं से सामग्री के आंकड़े साझा करने और आसानी से रिसाइकिल होने वाले मॉड्यूल बनाने का आग्रह किया गया है। एक साथ मिलकर ये कदम एक मजबूत संग्रह प्रणाली बनाएंगे, सामग्री को दोबाारा हासिल में अनुसंधान व विकास को बढ़ावा देंगे, और भारत के अक्षय ऊर्जा मिशनों में सर्कुलरिटी को भी शामिल करेंगे, ताकि स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन संसाधनों के मामले में लचीला और आत्मनिर्भर बना रहे।

एक कदम जागरूकता का, सागर में बाल विवाह पर सख्त रोक, ज्योति तिवारी बनीं बेटियों की ढाल

एक कदम जागरूकता का, सौ कदम प्रगति की ओर सागर में बाल विवाह पर सख्त कार्रवाई, ज्योति तिवारी बनीं बेटियों की ढाल सफलता की कहानी समाचार भोपाल जब कानून संवेदनशील बनता है, तब इंसाफ़ केवल अदालत में नहीं, समाज के दिलों में उतरता है। सागर जिले के बण्डा क्षेत्र के ग्राम छापरी की तपती दोपहर में गाँव की चौपाल पर शादी की चर्चा जोरों पर थी “आज गोपाल ठाकुर के बेटे रामू की शादी है,” पर कोई नहीं जानता था कि उस दिन यह गाँव एक नई सोच की ओर कदम बढ़ाने वाला है। 17 वर्षीय रामू, जो कक्षा 11वीं में पढ़ता था और चिकित्सक बनने का सपना देखता था, की शादी 14 वर्षीय कुसुम से तय कर दी गई थी। समाज का दबाव था “अब लड़का बड़ा हो गया है, शादी कर दो,” लेकिन रामू का दिल पढ़ाई में था। वह यह नहीं चाहता था कि उसका बचपन यूँ ही समाप्त हो जाए। उसके दोस्त सोहन ने तब हिम्मत दिखाई और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर फोन कर दिया। कुछ ही देर में विशेष किशोर पुलिस इकाई की प्रभारी अधिकारी सु ज्योति तिवारी अपनी टीम और स्थानीय पुलिस के साथ गाँव पहुँचीं। ढोल-नगाड़े बज रहे थे, बारात की तैयारी हो रही थी, लेकिन पुलिस जीप और सायरन की आवाज़ से सब ठहर गया। परिवार के लोग पहले अनजान बने रहे, पर जब ज्योति तिवारी ने शांत और दृढ़ स्वर में कहा कि यह विवाह बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत अपराध है। लड़के की उम्र 21 वर्ष और लड़की की 18 वर्ष से कम है, इसलिए यह विवाह नहीं हो सकता। गाँव में पहले विरोध हुआ, कुछ ने इसे परंपरा बताया। पुलिस अधिकारी ज्योति तिवारी ने कानून की धाराएँ समझाने के साथ मानवीय दृष्टिकोण से भी बात की। उन्होंने कहा बाल विवाह केवल एक परंपरा नहीं, यह एक ऐसा बंधन है जो बच्चों के भविष्य को बाँध देता है।” धीरे-धीरे माहौल बदला, सरपंच देवीसिंह, महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम और स्थानीय शिक्षकों की मदद से परिवार को समझाया गया। परिवार ने अंततः लिखित प्रतिज्ञा ली कि बच्चों की शादी केवल वयस्कता के बाद ही करेंगे। रामू और कुसुम की आँखों में राहत थी, जैसे किसी ने उनकी उम्र को फिर से लौटा दिया हो। गौरझामर की राधा ने दिखाई हिम्मत सागर जिले के ही गौरझामर गाँव में 16 वर्षीय राधा की कहानी ने भी सबका दिल जीत लिया। राधा का सपना पुलिस अधिकारी बनना था। जब पता लगा कि माता-पिता उसकी शादी तय कर चुके हैं, तो उसके सपने डगमगाने लगे, लेकिन उसने हार नहीं मानी। स्कूल में सुनी हुई बात उसे याद आई बाल विवाह अपराध है, मदद के लिए 1098 पर कॉल करें। उसने कॉल किया और पुलिस अधिकारी ज्योति तिवारी पुलिस टीम के साथ गाँव पहुँचीं। बारात जब गाँव की सीमा पर पहुँची, पुलिस सायरन की आवाज़ से सब ठहर गया। राधा की माँ ने कहा “दादी बीमार हैं, बस उसकी आख़िरी इच्छा है कि पोती की शादी देख लें।” यह सुनकर माहौल भावनात्मक हो गया, ज्योति तिवारी ने बड़ी संवेदनशीलता से समझाया माँ, आज अगर आप बेटी को पढ़ने देंगी, तो कल वही बेटी आपके नाम का मान बढ़ाएगी। पुलिस अधिकारी ज्योति तिवारी की समझाईश से धीरे-धीरे परिवार मान गया, और विवाह रोक दिया गया। राधा ने स्कूल लौटते हुए मुस्कुराकर कहा जब समाज और पुलिस साथ खड़े हों, तब कोई भी परंपरा किसी बालिका का भविष्य नहीं छीन सकती।” जागरूकता से परिवर्तन तक – ज्योति तिवारी की पहल इन दोनों घटनाओं के बाद पुलिस अधिकारी ज्योति तिवारी ने महिला एवं बाल विकास विभाग और शिक्षा विभाग के साथ मिलकर ग्राम पंचायतों व स्कूलों में “बाल विवाह रोकथाम एवं शिक्षा प्रोत्साहन अभियान” शुरू किया। अब सागर जिले के कई स्कूलों में हर महीने सत्र होते हैं। जहाँ बच्चे और अभिभावक सीखते हैं कि शादी तब ही, जब शिक्षा पूरी हो। गाँवों में ज्योति तिवारी का नाम अब “बेटियों की प्रहरी” के रूप में जाना जाता है। उनकी पहल ने यह साबित कर दिया कि कानून की सख्ती अगर संवेदनशीलता से जोड़ी जाए, तो बदलाव निश्चित है। हर उस विवाह को रोकना, जो उम्र से पहले हो रहा था किसी बच्चे के भविष्य को जीतने जैसा है।  

कोहली के रिटायरमेंट के बाद RCB बिक सकती है, टेस्ट और टी-20 के बाद IPL पर असर

बेंगलुरु  गत विजेता रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को आईपीएल 2026 में नए मालिक मिलेंगे, और मौजूदा मालिक डियाजियो ने फ्रैंचाइज़ी बेचने में अपनी रुचि की पुष्टि कर दी है. पुरुष और महिला आरसीबी टीमों की बिक्री की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और 31 मार्च, 2026 तक पूरी होने की उम्मीद है. एक रिपोर्ट में अब डियाजियो द्वारा आईपीएल 2026 से पहले आरसीबी को बेचने के फैसले पर प्रकाश डाला गया है और विराट कोहली इसके संभावित कारणों में से एक हो सकते हैं. सूत्रों के अनुसार, एएमपी स्पोर्ट्स एंड एंटरटेनमेंट के संस्थापक इंद्रनील दास ब्लाह ने कहा है कि कोहली की बदौलत आरसीबी 2025 तक कोई खिताब नहीं जीतने के बावजूद शीर्ष तीन ब्रांडों में बनी रही. उन्होंने कहा कि विराट कोहली  का संन्यास, जो जल्द ही होने वाला है, निश्चित रूप से फ्रैंचाइज़ी के मूल्यांकन को प्रभावित करेगा और इसलिए मौजूदा मालिक जल्दी बाहर निकलने की कोशिश कर सकते हैं. वहीं अन्य विशेषज्ञों का कहना है कि विराट अपने संन्यास के बाद भी आरसीबी से जुड़े रहेंगे. RCB बिकने की वजह विराट! टीम के ओनर ने बताया कि विराट की वजह से ही आरसीबी बिना किसी खिताब के भी शीर्ष तीन ब्रांडों में बनी हुई है. उनका संन्यास, चाहे जब भी हो, निश्चित रूप से मूल्यांकन को प्रभावित करेगा. टीम के पूर्व कप्तान विराट, आईपीएल में अपने पदार्पण के बाद से ही आरसीबी के पोस्टर बॉय रहे हैं. उन्होंने कभी किसी अन्य टीम के लिए नहीं खेला है और फ्रैंचाइज़ी के नाम का पर्याय बन गए हैं. विशेषज्ञों ने E4M को बताया कि कोहली के संन्यास की ओर कोई भी कदम आरसीबी की दीर्घकालिक ब्रांड इक्विटी पर अनिश्चितता लाएगा. आईपीएल 2025 में अपनी खिताबी जीत के बाद, आरसीबी सबसे मूल्यवान ब्रांड बन गया, जिसका मूल्य 2024 में $227 मिलियन से 18.5% बढ़कर 2025 में $269 मिलियन हो गया. 17 साल बाद जीता था ट्रॉफी विराट कोहली, जिन्होंने 2024 में टी20I और 2025 में टेस्ट से संन्यास ले लिया था, वर्तमान में केवल वनडे और आईपीएल में ही सक्रिय हैं. वह अपने करियर के अंतिम पड़ाव पर हैं और जल्द ही अपने आईपीएल करियर का अंत कर सकते हैं संभवतः तीन या चार सीज़न में. इसके अलावा, कोहली ने आईपीएल ट्रॉफी पर अपना हाथ रखने के लिए 17 साल के लंबे इंतजार को समाप्त कर दिया क्योंकि वह रजत पाटीदार के नेतृत्व वाली आरसीबी टीम का हिस्सा थे जिसने 2025 में खिताब जीता.  

तुलसी और दीया: शाम के समय क्यों है यह धार्मिक व स्वास्थ्यवर्धक अभ्यास

भारतीय संस्कृति में तुलसी का पौधा शुद्धता, आस्था और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है. शाम के समय तुलसी के पास दीया जलाना, घर में सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने का एक सरल और प्रभावी उपाय है. तुलसी के पौधे में देवी लक्ष्मी का निवास होता है और तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है . इसलिए इसके फायदे और भी बढ़ जाते हैं. जानते हैं शाम के समय तुलसी के पौधे के पास दिया जलाने से क्या-क्या फायदे होते हैं. तुलसी के पास दीया जलाने का महत्व तुलसी का पौधा घर में सकारात्मक ऊर्जा लाता है. जब आप इसके पास रोज दीया जलाते हैं, तो यह घर के माहौल को शुद्ध और पवित्र बनाता है. धीरे-धीरे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है. कहा जाता है कि तुलसी के पास दीया जलाने से घर में शांति बढ़ती है. यह एक सरल उपाय है जो पूरे घर में खुशियां और सकारात्मकता फैलाता है.  देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु का आशीर्वाद शास्त्रों में कहा गया है कि देवी लक्ष्मी तुलसी में निवास करती हैं और भगवान विष्णु को तुलसी बहुत प्रिय है. जब हम तुलसी की पूजा करते हैं और उसके पास दीया जलाते हैं, तो लक्ष्मी जी और विष्णु जी दोनों का आशीर्वाद मिलता है. उनकी कृपा से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और हमारे कामों में सफलता और स्थिरता आती है. इससे घर में धन, शांति और सुख-समृद्धि बनी रहती है.  मन की शांति और तनाव से राहत हर शाम तुलसी के पास दीया जलाने से मन को शांति मिलती है. अगर आप ज्यादा सोचते हैं या परेशान रहते हैं, तो यह उपाय आपको आराम और सुकून देता है.  वास्तु के अनुसार लाभ वास्तु शास्त्र में तुलसी के पौधे को शुभ और पवित्र माना गया है. हर दिन इसके पास दीया जलाने से घर में धन, सौभाग्य और तरक्की आती है. यह घर की ऊर्जा को मजबूत बनाता है.  जिससे अड़चनें और आर्थिक तंगी दूर होती है.