samacharsecretary.com

रश्मिका मंदाना की द गर्लफ्रेंड की विजय ने की खूब तारीफ

मुंबई,  फिल्म ‘द गर्लफ्रेंड’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। कई भाषाओं में रिलीज की गई फिल्म एक टॉक्सिक रिश्ते को दिखाती है। फिल्म की एक्टर विजय देवरकोंडा ने जमकर तारीफ की, जिससे खुश रश्मिका ने उन्हें एक प्यारा रिप्लाई किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विजय देवरकोंडा ने फिल्म ‘द गर्लफ्रेंड की तारीफ में एक पोस्ट डाला था, जिसका जवाब देते हुए रश्मिका ने बहुत सारे हार्ट इमोजी पोस्ट किए।  उन्होंने लिखा, ये शब्द बहुत ही पावरफुल हैं, ये मेरे लिए बहुत जरूरी हैं, हालांकि इतनी अच्छी बातों को पचाना मेरे लिए मुश्किल होगा, लेकिन बहुत अच्छी बात कही है आपने। ये फिल्म धीमी गति से जलने वाली कहानी है जो लंबे समय तक चलती रहेगी। उन्होंने आगे लिखा, विजय देवरकोंडा, आप शुरू से ही इस फिल्म का इनडायरेक्ट तरीके से हिस्सा रहे हैं और मुझे उम्मीद है कि आपको इस फिल्म के लिए मुझ पर गर्व होगा। रश्मिका ने चार लाइनों के पोस्ट में चार बार हार्ट इमोजी पोस्ट किया है। दरअसल विजय देवरकोंडा ने फिल्म की तारीफ कर लिखा, मुझे पता है उन्होंने कुछ जबरदस्त बनाया है, कुछ खास बनाया है, कुछ ऐसा जिसे पचाना मुश्किल होगा। मुझे पता है कि सभी कलाकारों का अभिनय बेहतरीन है और हम पर्दे पर फिल्म को देखने के लिए बेताब हैं। आप सभी ने बहुत सारी मेहनत की है।  ये पोस्ट इसलिए भी खास है, क्योंकि बीते साल से ही रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा के डेटिंग की खबरें लगातार आ रही हैं। दोनों के वेकेशन पोस्ट भी सामने आ चुके हैं। खबरें तो यहां तक हैं कि दोनों स्टार्स बीते साल ही गुपचुप तरीके से सगाई कर चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अगले साल फरवरी में वे सात फेरों के बंधन में बंध सकते हैं। दोनों की शादी 26 फरवरी, 2026 को राजस्थान के उदयपुर पैलेस में होने वाली है। रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा दोनों एक साथ कई फिल्मों में नजर आ चुके हैं।  

शमी पर BCCI का बड़ा बयान – इंग्लैंड दौरे पर जाने से मना किया था तेज गेंदबाज ने

नई दिल्ली  मैदान पर गिरती हर पसीने की बूंद इस बात की गवाही दे रही है कि शमी वापसी के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे है , मोहम्मद शमी ने मौजूदा रणजी ट्रॉफी में 93 ओवर गेंदबाजी कर ली है लेकिन भारत के सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाजों में से एक का दोबारा टेस्ट क्रिकेट में खेलना मुश्किल लग रहा है और उनकी वनडे टीम में भी नीली जर्सी पहनने की संभावना कम ही दिख रही है. 35 वर्षीय तेज गेंदबाज ने भारत की तरफ से अपना आखिरी मैच इस साल मार्च में चैंपियंस ट्रॉफी में खेला था लेकिन उसके बाद से उन्हें किसी भी प्रारूप की टीम में नहीं चुना गया. वह 2023 में वनडे विश्व कप के बाद एड़ी की चोट के कारण लंबे समय तक खेल से बाहर रहे थे. उन्हें इस चोट से निजात पाने के लिए सर्जरी करानी पड़ी थी. वर्तमान समय में भारतीय क्रिकेट जिस दिशा में आगे बढ़ रहा है उसे देखते हुए ऐसी संभावना नहीं लगती है कि शमी तीनों प्रारूपों में अब तक खेले गए 197 अंतरराष्ट्रीय मैचों में और मैच जोड़ पाएंगे। क्या शमी ने इंग्लैंड जाने से किया था इंकार?  शमी राष्ट्रीय चयनकर्ताओं से बिल्कुल भी खुश नहीं हैं और उन्होंने खुलकर कहा है कि चयनकर्ताओं ने उनसे कोई बातचीत नहीं की है. हलांकि भारतीय क्रिकेट बोर्ड के सूत्र हालांकि ऐसा नहीं मानते हैं. बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि  ‘‘कई बार ऐसा हुआ है कि राष्ट्रीय चयनकर्ता और बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के सहयोगी स्टाफ ने शमी का हालचाल जानने के लिए फोन किया है.  चयन समिति इंग्लैंड में उनकी सेवाएं लेने के लिए बेताब थी, क्योंकि जसप्रीत बुमराह तीन टेस्ट से ज्यादा नहीं खेल पाए थे. इंग्लैंड की परिस्थितियों में कौन उनके स्तर का गेंदबाज नहीं चाहेगा. उनका इशारा इस साल की शुरुआत में भारत द्वारा 2-2 से ड्रॉ की गई श्रृंखला की ओर था. क्या सच में फिट नहीं है शमी? चयन समिति के एक वरिष्ठ सदस्य ने शमी को कई संदेश भेजकर उनकी फिटनेस के बारे में पूछताछ की और उनसे कैंटरबरी या नॉर्थम्पटन में इंग्लैंड लायंस के खिलाफ भारत ए की तरफ से कम से कम एक मैच खेलने का अनुरोध किया. इसका उद्देश्य यह पता करना था कि शमी इंग्लैंड के खिलाफ श्रृंखला में खेलने के लिए पूरी तरह से फिट हैं या नहीं. ऐसा समझा जाता है कि इस तेज गेंदबाज ने जवाब दिया कि उन्हें अभी भी अपना कार्यभार बढ़ाना है और इंग्लैंड के खिलाफ श्रृंखला के लिए उनके नाम पर विचार नहीं किया जाना चाहिए. वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘इसलिए यह कहना कि शमी से कोई बातचीत नहीं हुई, पूरी तरह सच नहीं है.  चिकित्सा टीम के पास उनकी मेडिकल रिपोर्ट भी है और यह भी देखना है कि उनका शरीर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की कठिनाइयों को झेलने में सक्षम है या नहीं. इस समय शमी को लग सकता है कि वह 50 ओवर के क्रिकेट के लिए तैयार हैं, लेकिन वह इस भूमिका के लिए उपयुक्त हैं या नहीं, इसका फैसला केवल राष्ट्रीय चयनकर्ता ही कर सकते हैं. शीर्ष स्तर की क्रिकेट में खेलने के लिए शमी की फिटनेस को लेकर भी कुछ सवाल हैं क्योंकि उन्हें टेस्ट क्रिकेट में लंबे स्पैल करने पड़ सकते हैं जबकि वर्तमान समय में वह रणजी ट्रॉफी में अधिकतर छोटे स्पैल में गेंदबाजी कर रहे हैं.

गौतम गंभीर का बड़ा बयान: ‘टी20 वर्ल्ड कप से पहले टीम इंडिया को करनी होगी कड़ी मेहनत’

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने स्वीकार किया कि उनकी टीम अगले साल होने वाले टी20 वर्ल्ड कप की तैयारियों के मामले में अभी उस स्थिति में नहीं है जहां वह पहुंचना चाहती है लेकिन उन्होंने इसके साथ ही कहा कि इस मुकाम पर पहुंचने के लिए टीम के पास अभी पर्याप्त समय है। गंभीर ने बीसीसीआई टीवी से बातचीत में फिटनेस के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने 46 सेकंड की क्लिप में कहा, ‘‘यह एक ऐसा ड्रेसिंग रूम है जहां बहुत अधिक पारदर्शिता और ईमानदारी है तथा हम चाहते हैं कि यह ड्रेसिंग रूम आगे भी ऐसा ही बना रहे। मुझे लगता है कि हम अभी भी उस स्थिति में नहीं हैं जहां हम टी20 वर्ल्ड कप तक पहुंचना चाहते हैं।’’ इस क्लिप के बाद पूरा साक्षात्कार बाद में प्रसारित किया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘उम्मीद है कि खिलाड़ियों को फिट रहने का महत्व पता चल जाएगा। हमारे पास उस स्तर पर पहुंचने के लिए अभी भी तीन महीने हैं, जहां हम पहुंचना चाहते हैं।‘‘ टी20 वर्ल्ड कप अगले साल फरवरी-मार्च में भारत और श्रीलंका में खेला जाएगा। भारत इस टूर्नामेंट का मौजूदा चैंपियन है। गंभीर ने इसके साथ ही खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा का अच्छी तरह से अहसास कराने और उन्हें समझने के लिए उनके सामने मुश्किल चुनौतियों को रखने की बात भी दोहराई। उन्होंने कहा, ‘‘हम खिलाड़ियों के सामने जितना संभव हो सके उतनी कड़ी चुनौती रखते हैं। हमने शुभमन (गिल) के साथ भी यही किया था, जब उन्हें टेस्ट कप्तान नियुक्त किया गया था।‘‘ गिल ने कप्तान के रूप में इंग्लैंड के खिलाफ अपनी पहली टेस्ट सीरीज में शानदार बल्लेबाजी की। उनकी अगुवाई में भारतीय टीम ने सीरीज 2-2 से बराबर की। इस सीरीज के सभी मैच रोमांचक रहे और प्रत्येक मैच पांचवें दिन तक खिंचा।  

मुख्यमंत्री ने किया शंकर पांडे की पुस्तक छत्तीसगढ़ अतीत से अब तक’’ का विमोचन

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में वरिष्ठ पत्रकार शंकर पांडे की पुस्तक छत्तीसगढ़ अतीत से अब तक का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने इस पुस्तक में छत्तीसगढ़ के अतीत को समेटने के प्रयास की सराहना करते हुए उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री  साय को श्री पांडे ने बताया कि छत्तीसगढ़ पर केंद्रित यह उनकी 6वीं पुस्तक है जिसमें छत्तीसगढ़ के महापुरुषों, पर्यटन स्थल, प्राचीन इतिहास, राज-परिवार, मंदिरों के इतिहास से सम्बंधित जानकारियां संकलित की गयी हैं। उन्होंने बताया कि पुस्तक में छत्तीसगढ़ के कई अनछुए पहलुओं सहित राज्य के सभी मुख्यमंत्री, राज्यपाल, प्रमुख राजनीतिक घटनाओं, राजनेताओं व साहित्यकारों का भी उल्लेख है। इस अवसर पर  प्रियंका कौशल, विशाल यादव सहित स्नेहा पांडे तथा मास्टर अंश पांडे भी उपस्थित थे।

फरीदाबाद से लखनऊ तक फैला टेरर नेटवर्क, महिला डॉक्टर एके-47 के साथ दबोची गई

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर पुलिस ने लखनऊ की एक महिला डॉक्टर को एक बड़े आतंकी मॉड्यूल में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया है, जो जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ था। अधिकारियों के अनुसार, डॉक्टर की कार से एक एके-47 राइफल बरामद की गई है। डॉ. शाहीन को सात अन्य लोगों के साथ हिरासत में लिया गया है। इनमें कश्मीर के डॉक्टर मुजम्मिल गनई को फरीदाबाद से गिरफ्तार किया गया। डॉ. शाहीन को पूछताछ के लिए हवाई मार्ग से श्रीनगर लाया गया है। पुलिस के अनुसार, आठ आरोपियों में तीन डॉक्टर शामिल हैं और इस कार्रवाई में 2,900 किलोग्राम विस्फोटक बरामद किया गया है। जांच में खुलासा हुआ है कि यह ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद जैसे संगठनों से जुड़ा हुआ था। जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और हरियाणा पुलिस के साथ केंद्रीय एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई में यह बड़ी सफलता मिली है। अधिकारियों ने फिलहाल यह नहीं बताया कि गिरफ्तारियां कब की गईं।

तीस फीसदी आरक्षण तुरंत लागू करने की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगी प्रतिक्रिया

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता जया ठाकुर की ओर से दाखिल याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया, जिसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का कानून तत्काल लागू करने की मांग की गई है। जस्टिस बीवी नागरत्न और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने सरकार से ताजा परिसीमन अभ्यास का इंतजार किए बिना महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए जवाब मांगा। सुनवाई के दौरान बेंच ने टिप्पणी की, 'संविधान की प्रस्तावना कहती है कि सभी नागरिकों को राजनीतिक और सामाजिक समानता का अधिकार है। इस देश में सबसे बड़ी अल्पसंख्यक कौन है? वह महिला है… लगभग 48 प्रतिशत। यह महिलाओं की राजनीतिक समानता का मामला है।' याचिकाकर्ता की ओर से पेश सीनियर वकील शोभा गुप्ता ने कहा कि स्वतंत्रता के 75 साल बाद भी महिलाओं को प्रतिनिधित्व के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है। अधिवक्ता की दलील सुनकर बेंच ने कहा, 'परिसीमन अभ्यास कब होना है? सरकार को नोटिस जारी करें। कानून का प्रवर्तन कार्यपालिका की जिम्मेदारी है। हम कोई आदेश जारी नहीं कर सकते। प्रतिवादियों को नोटिस जारी करें। केंद्र को तामील कराएं।' नारी शक्ति वंदन अधिनियम को राष्ट्रपति की मंजूरी याचिका में उस विशेष प्रावधान को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है, जिसमें जनगणना और उसके बाद परिसीमन को आरक्षण लागू करने की पूर्व शर्त बनाया गया है। याचिकाकर्ता ने तत्काल लागू करने की मांग की है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को 28 सितंबर 2023 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली थी। संसद के विशेष सत्र में यह कानून पारित किया गया था। मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस की महासचिव जया ठाकुर ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने वाले इस कानून को लागू करने की मांग की है। उन्होंने 2023 में ही याचिका दायर की थी और 2024 आम चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करने की गुहार लगाई थी।

मौलाना मदनी का विवादित बयान – वंदे मातरम इस्लाम में जायज नहीं, देवी पूजा मान्य नहीं

सहारनपुर राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की रचना को डेढ़ सौ वर्ष पूरे हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि वंदे मातरम गीत को पूरा का पूरा प्रस्तुत किया जाए और उसके जिन अंशों को पूर्व में हटाया गया था, उन्हें भी उसमें शामिल किया जाए लेकिन प्रधानमंत्री की ये बातें देश के मुस्लिम जनप्रतिनिधियों और उलेमाओं को बहुत अखर रही हैं। वह इस पर खुली आपत्ति भी जता रहे हैं। पूर्व में कई जनप्रतिनिधि मोहम्मद आजम खां, शफीकुर रहमान वर्क और पूर्व केंद्रीय मंत्री रशीद मसूद संसद में भी इसके गायन को लेकर अपना विरोध दर्ज करा चुके हैं। अब फिर से यह मामला सुर्खियों में आ गया है। दूसरे की देवी देवताओं की इबादत नहीं इस बीच, पूर्व सांसद दारूल उलूम की मजलिस-ए-शूरा के सदस्य एवं जमीयत उलमाए हिंद के एक गुट के हाल ही में फिर से चुने गए अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने यूनीवार्ता से बातचीत में मुसलमानों की आपत्ति के बारे में दो टूक कहा कि वंदे मातरम गीत में कुछ पंक्तियां ऐसी है। जिसमें मातृभूमि को देवी दुर्गा के रूप में पेश कर उसकी पूजा वंदना के शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों ईश्वर एक है, इस विश्वास को मानने वाले हैं और उसी की इबादत करते हैं। इसलिए दूसरे की देवी देवताओं की इबादत करना उनके मजहबी विश्वास के खिलाफ है। अनुच्छेद 25 धार्मिक स्वतंत्रता देता है मदनी ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 25 नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान करता है और अनुच्छेद 19 अभिव्यक्ति की आजादी देता है। ऐसी हालत में मुस्लिमों को पूरे वंदे मातरम गीत को गाने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। उच्चतम न्यायालय भी इस संबंध में अपना फैसला दे चुका है। PM मोदी ने क्या कहा? मौलाना महमूद मदनी ने बताया कि 26 अक्टूबर 1937 को गुरूदेव रविंद्र टैगोर ने पंडित जवाहर लाल नेहरू को लिखे पत्र में उनसे अनुरोध किया था कि वंदे मातरम गीत की पहली दो पंक्तियों को राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया जाए। उसके तीन दिन बाद कांग्रेस कार्यसमिति ने टैगोर की सलाह को अपनी मान्यता दे दी थी तभी से यह सिलसिला बदस्तूर जारी है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बात पर जोर दे रहे हैं कि पूरे गीत का ही गायन किया जाए। उसे हिस्सों में तोड़कर ना गाया जाए।

ठंड से बचना पड़ा भारी: कांग्रेस नेता की अलाव से लगी आग में दर्दनाक मौत

भानुप्रतापपुर पूर्व जनपद सदस्य और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पुसऊ राम दुग्गा की जलने से मौत हो गई. आशंका जताई जा रही है कि उन्हें हार्टअटैक आया होगा, जिसके बाद तड़पने से पास में जल रहे अलाव से बिस्तर में आग लगी गई, जिससे बिस्तर में ही उनकी मौत हो गई. जानकारी के अनुसार, पुसऊ राम दुग्गा को बीती रात सीने में दर्द महसूस होने पर उन्होंने परिजनों से मालिश करवाई थी. रात में ठंड से बचाव के लिए बिस्तर के समीप अलाव जलाया गया था. देर रात अचानक घर में सामान जलने की आवाज आने पर अन्य कमरों में सो रहे परिजन मृतक के कमरे में पहुंचे. सामने जो नजारा देखने को मिला उससे सबके होश उड़ गए. पुसऊ राम पूरी तरह से जल चुके थे, और मौत भी हो चुकी थी. परिजनों ने कमरे में लगी आग को आनन-फानन में बुझाया, और उसके बाद शव को कमरे से बाहर निकालकर भानुप्रतापपुर पुलिस को सूचना दी. मौत का कारण पोस्टमार्टम के बाद ही पता चल सकेगा. पुसऊ राम दुग्गा के परिजनों के अलावा जिले में कांग्रेस के नेता-कार्यकर्ताओं में शोक का माहौल है. वरिष्ठ कांग्रेस नेता की मौत पर भानुप्रतापपुर विधायक सावित्री मंडावी ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि पुसऊ राम दुग्गा की मौत कांग्रेस पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति है.

बंदूक की गूंज से फलों और फूलों की महक तक का सफर

बस्तर में साग-सब्जी, फलों की खेती से चमत्कारिक बदलाव         रायपुर,  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की नक्सल उन्मूलन की नीतियों और किसानों की आय बढ़ाने वाली योजनाओं ने बस्तर में विकास की नई इबारत लिख दी है। बस्तर के किसानों ने पारंपरिक धान, सरसों की खेती के साथ-साथ अब साग-सब्जी, फल, फूल की खेती से भी फायदा लेना शुरू कर दिया है। अब बस्तर में गोलियों की गूंज की जगह फलों और फूलों की खुशनुमा महक बिखर रही है। बस्तर में यह बदलाव कोई संयोग नहीं, बल्कि मेहनत, नवाचार और दूरदर्शिता का परिणाम है। वर्ष 2001-02 में सब्जियों की खेती महज 1,839 हेक्टेयर में सिमटी थी और उत्पादन केवल 18,543 मीट्रिक टन था। आज वही इसमें लगातार वृद्धि हुई है जिसका परिणाम है की अब सब्जियों का रकबा 12,340 हेक्टेयर चुका है और उत्पादन 1.90 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच चुका है।     बस्तर विश्व पटल पर एक ऐसा नाम जो कभी नक्सल की काली छाया और पिछड़ेपन की गहरी खाई में डूबा माना जाता था, आज वह बस्तर कृषि के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक परिवर्तन का साक्षी बन रहा है। छत्तीसगढ़ के इस आदिवासी बहुल इलाके में अब पारम्परिक खेती के स्थान पर टमाटर और मिर्च की खेती न केवल आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही है, बल्कि पड़ोसी राज्यों के बाजारों तक अपनी पहुंच भी बना रही है। अब बस्तर की मिट्टी में ड्रैगन फ्रूट की लालिमा, अमरूद की मिठास, चकोतरा की ताजगी, पपीते का रस और मिर्च की तीखापन खेतों में लहलहा रहे हैं। वे फल एवं मसाले जो कभी यहां उत्पादित नहीं हुए अनुकूल वातावरण और वैज्ञानिक सलाह से विकास की नई गाथा लिख रहे हैं।     बस्तर में फलों की बगिया 643 हेक्टेयर से बढ़कर 14,420 हेक्टेयर तक पहुंच गई है एवं उत्पादन 4,457 मीट्रिक टन से बढ़कर 64,712 मीट्रिक टन हो गया। यहां के किसानों द्वारा राज्य निर्माण के पूर्व कभी व्यापारिक स्तर पर फूलों की खेती नहीं की गयी थी आज वहां 207 हेक्टेयर में 13 सौ मीट्रिक टन फूलों का उत्पादन हो रहा है। इसी प्रकार मसाले इस क्षेत्र में सीमित मात्रा में उत्पादित होते थे अब 11 सौ  हेक्टेयर से 9,327 मीट्रिक टन मसालों का उत्पादन यहां हो रहा है। औषधीय एवं सुगंधित पौधे जो कभी सीमित मात्रा में होते थे उनका भी किसानों द्वारा 66 सौ मीट्रिक टन से अधिक का उत्पादन किया जा रहा है।         इस हरित क्रांति में शासन की योजनाओं एवं आधुनिक तकनीक से आमूल चूल परिवर्तन दिखाई दिए हैं। एक ओर जहां किसानों को रियायती दरों पर आदान समाग्री प्राप्त हुई है वहीं शेडनेट योजना, प्रधानमंत्री सूक्ष्म सिंचाई योजना, राष्ट्रीय बागबानी मिशन से किसानों का उद्यानिकी फसलों की ओर रुझान बढ़ा है। जिसका मुख्य कारण लगातार तकनीकी मार्गदर्शन और सहायतासे है। जिससे किसानों ने लाभ लेकर जिले में 3.80 लाख वर्गमीटर क्षेत्र में शेडनेट हाउस लगाए गए हैं, करीब 19 हजार वर्गमीटर में पॉली हाउस, शेडनेट द्वारा 1.47 लाख वर्गमीटर में हाईब्रिड बीज भी तैयार किए जा रहे हैं जिनके लिए उन्हें शासन द्वारा अनुदान भी प्राप्त हुआ है।जगदलपुर के आसना में प्लग टाइप वेजिटेबल सीडलिंग यूनिट भी स्थापित है जो रोग-मुक्त पौधे न्यूनतम कीमत पर किसानों को मुहैय्या करवा रहे हैं।         सिंचाई के क्षेत्र में भी लगभग 3.5 हजार हेक्टेयर में ड्रिप इरिगेशन सिस्टम बिछाकर पानी की हर बूंद को सोना बनाया जा रहा है। ऑयल पाम योजना के तहत 735 हेक्टेयर में 499 किसानों द्वारा आधुनिक तरीकों से पाम की खेती की जा रही है वहीं बास्तानार में 58.64 हेक्टेयर में विशेष रूप से कॉफी एवं 20 हेक्टेयर में ड्रैगन फ्रूट की कृषि की जा रही है।     बस्तर की यह यात्रा आंकड़ों से कहीं आगे है, यह उन सैकड़ों किसानों की मुस्कान है, जो कभी बादलों के रहम पर जीते थे और आज तकनीक, प्रशिक्षण और सरकार की योजनाओं के सहारे अपने सपने बुन रहे हैं। माओवादियों की बंदूकें अब खामोश हैं, और खेतों में नई फसलें गुनगुना रही है। बस्तर के लोग अब आजीविका के समुचित साधनों के जरिए जीवन-यापन को बेहतर करने सहित खिलखिला रह रहे हैं।

8 घंटे की वर्क शिफ्ट पर यामी गौतम ने रखे अपने विचार

मुंबई, बॉलीवुड एक्ट्रेस इमरान हाशमी और यामी गौतम की नई फिल्म हक सिनेमा घरों में रिलीज़ हो चुकी हैं। इस मौके पर डायरेक्टर सुपन वर्मा और एक्ट्रेस यामी ने फिल्म इंडस्ट्री में 8 घंटे की वर्क शिफ्ट को लेकर चल रही बातचीत पर चर्चा की। मातृत्व के महत्व पर ज़ोर देते हुए यामी ने कहा कि एक बार माँ बनने के बाद हमेशा माँ ही रहती है, उन्होंने एक्टर्स और फिल्ममेकर्स के बीच आपसी समझ की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया। हाल ही में यामी गौतम ने शेयर किया, सबसे पहले तो, एक बार माँ बनने के बाद हमेशा माँ ही रहती है। चाहे आप नौकरी करते हों या घर पर रहने वाले माता-पिता हों, हर माँ अनोखी होती है और अपने बच्चे के लिए सब कुछ करती है। एक माँ के लिए उसके बच्चे से ज़्यादा महत्वपूर्ण कोई नहीं होता। मेरे प्रोफेशन की बात करें तो, मैं अपनी स्क्रिप्ट कैसे चुनती हूँ, यह मेरी पर्सनल लाइफ से बिल्कुल अलग है। उन्होंने आगे बताया, हालांकि हम दूसरे प्रोफेशन की तरह एक टाइम लिमिट चाहते हैं, लेकिन हमारी इंडस्ट्री अलग तरह से काम करती है। इसमें लोकेशन, परमिशन और दूसरे एक्टर्स और टेक्नीशियन की भागीदारी जैसे कई फैक्टर होते हैं। इसलिए, टाइम लिमिट का विचार काफी सब्जेक्टिव है और यह एक एक्टर, एक प्रोड्यूसर और एक डायरेक्टर के बीच सहयोग और समझ पर निर्भर करता है। डायरेक्टर सुपन वर्मा ने यामी की टिप्पणियों पर कहा, यह एक लंबे समय से चला आ रहा मुद्दा है। कुछ एक्टर्स दिन में सिर्फ आठ घंटे, हफ्ते में पांच दिन काम करते हैं, और नाइट शूट से बचते हैं। यह व्यवस्था डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और एक्टर द्वारा पहले से ही तय की जाती है। तो फिर जब कोई फीमेल एक्टर यह चिंता उठाती है तो यह समस्या क्यों बन जाती है? आखिरकार, हम सभी इंसान हैं जो मुश्किल हालात में कला का निर्माण कर रहे हैं और भावनाओं को व्यक्त कर रहे हैं। इसलिए, अगर यह प्रोडक्शन की ज़रूरतों के हिसाब से है तो मुझे टाइम की कमी पर चर्चा करने में कोई दिक्कत नहीं दिखती।