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घाटशिला उपचुनाव का फैसला कल, जनता के जनादेश से तय होगी 13 उम्मीदवारों की किस्मत

घाटशिला घाटशिला विधानसभा उपचुनाव मंगलवार को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और भयमुक्त मतदान के साथ सम्पन्न हुआ। शाम 5 बजे तक कुल 74.63 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। अब लोगों का कल का इंतजार है क्योंकि कल सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू होगी और यह साफ हो जाएगा कि सीट किसके नाम जाएगी। 15 टेबल पर 20 राउंड में मतगणना की जायेगी सूत्रों के मुताबिक को-ऑपरेटिव कॉलेज में कुल 15 टेबल पर 20 राउंड में मतगणना की जायेगी। सर्विस वोट सुबह 8 बजे से पहले आने वाले मतों में शामिल किए जाएंगे। इसके चलते मतगणना केंद्र पर त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। प्रवेश केवल अधिकृत पासधारी व्यक्तियों को ही मिलेगा और संपूर्ण प्रक्रिया सीसीटीवी निगरानी में होगी। जिला निर्वाचन पदाधिकारी कर्ण सत्यार्थी ने कहा कि मतगणना प्रक्रिया निर्वाचन की विश्वसनीयता का सबसे महत्वपूर्ण चरण है। प्रत्येक कर्मी को आयोग के निर्देशों का हूबहू पालन करना होगा। निष्पक्षता और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी प्रकार की त्रुटि या लापरवाही नहीं हो। बता दें कि घाटशिला विधानसभा सीट पर कुल 73.88 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो राज्य के औसत से अधिक है। इस उपचुनाव में कुल 2,55,823 मतदाता पंजीकृत थे, जिनमें महिलाओं की संख्या 1,30,921 और पुरुष मतदाता 1,24,899 रही। यानी इस बार महिलाओं ने पुरुषों से अधिक मतदान कर लोकतंत्र की मजबूती का संदेश दिया। इस उपचुनाव में 13 प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनकी किस्मत अब EVM (Electronic Voting Machine) में कैद हो चुकी है। अब सभी की निगाहें मतगणना के दिन पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि घाटशिला की जनता ने किसे अपना जनप्रतिनिधि चुना है। मतगणना 14 नवंबर को होगी। झारखंड के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के आकस्मिक निधन से खाली हुई इस सीट पर अब उनके बेटे सोमेश चंद्र सोरेन मैदान में हैं और भाजपा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के पुत्र बाबूलाल सोरेन ताल ठोक रहे हैं। वैसे तो 13 प्रत्याशी घाटशिला विधानसभा उपचुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला फिलहाल सत्तारूढ़ झामुमो के सोमेश चंद्र सोरेन और भाजपा के बाबूलाल सोरेन के बीच बताया जा रहा है।  

प्रेग्नेंसी में मॉडल की हत्या: कस्टडी में कासिम ने बार-बार क्या कहा? आधार कार्ड और पहचान में था बड़ा खेल

भोपाल    भोपाल में मॉडल खुशबू अहिरवार की मौत के बाद परिवार सदमे में है. खुशबू की मौत के बाद सामने आई पुलिस जांच, परिजनों के गंभीर आरोप और आरोपी कासिम अहमद की गिरफ्तारी के बाद कई बातें सामने आई हैं. कासिम जब खुशबू से मिला था, तो राहुल बनकर मिला था. खुशबू को जब असलियत पता चली तो वह दूर रहने लगी. कासिम जेल गया और जब बाहर आया तो फिर खुशबू के संपर्क में आ गया. उसने खुशबू पर धर्म परिवर्तन का दबाव डाला था. खुशबू के आधार कार्ड पर बुर्के वाली तस्वीर भी सामने आई है. दरअसल, 9 नवंबर की रात खुशबू अहिरवार की अचानक मौत हो गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि वह प्रेग्नेंट थी और उसकी फैलोपियन ट्यूब फटने से इंटर्नल ब्लीडिंग हुई, जिससे उसकी मौत हुई. हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं है कि खुशबू की ट्यूब फटने की वजह मेडिकल थी या किसी मारपीट का नतीजा. पुलिस ने इस दिशा में जांच शुरू कर दी है और मृतका का विसरा जांच के लिए भेजा गया है.  आधार कार्ड में अपडेट करवाई 'बुर्के वाली' फोटो, 'राहुल' बन कासिम ने खुशबू को फंसाया मॉडल खुशबू अहिरवार की संदिग्ध मौत के मामले में बुधवार को पुलिस ने उसके बॉयफ्रेंड कासिम अहमद को गिरफ्तार कर लिया है. हालांकि यह गिरफ्तारी मौत के मामले में नहीं, बल्कि खुशबू के साथ मारपीट करने और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने के गंभीर आरोपों के तहत की गई है. इस मामले में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि कासिम ने खुशबू पर धर्म परिवर्तन का इतना दबाव बनाया कि उसने उसका आधार कार्ड भी अपडेट करवा दिया और उसमें खुशबू की बुर्के वाली फोटो लगवा दी थी.   झूठा नाम, मारपीट और धर्म परिवर्तन का दबाव खुशबू का अंतिम संस्कार करने के बाद उसके परिजनों ने पुलिस को दिए बयान में कासिम पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. आरोप है कि कासिम ने खुशबू से दोस्ती करते समय अपना नाम 'राहुल' बताया था. जब खुशबू को उसके मुस्लिम होने का पता चला तो वह उससे अलग होना चाहती थी. खुशबू की बहन तारा बाई के मुताबिक, साल 2022 में खुशबू कॉलेज की पढ़ाई के लिए भोपाल आई थी और भानपुर मल्टी में किराए के मकान में रहती थी. पढ़ाई के साथ वह मॉडलिंग करने लगी थी, ताकि अपने खर्च निकाल सके. इसी दौरान उसकी मुलाकात राहुल नाम के युवक से हुई, जो बाद में असल में कासिम अहमद निकला. जब खुशबू को उसकी असली पहचान पता चली, तो उसने उससे रिश्ता खत्म करना चाहा, लेकिन कासिम ने उस पर धर्म परिवर्तन और निकाह के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया. खुशबू के परिवार का दावा है कि जब उसने इनकार किया, तो कासिम ने उसके साथ मारपीट और गाली-गलौज शुरू कर दी. खुशबू के परिजनों ने जो आरोप लगाए हैं, वे बेहद गंभीर हैं. कासिम ने खुशबू का आधार कार्ड फोटो बदलवा दिया, जिसमें उसे बुर्का पहने दिखाया गया है. परिजनों का आरोप है कि यह कदम कासिम ने जानबूझकर उठाया. पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इसमें किसने और कब बदलाव किया. खुशबू की बहन तारा ने पुलिस को बताया कि 8 नवंबर की रात 11 बजे खुशबू ने उसे फोन किया था. फोन पर उसने कहा कि कासिम मुझे जबरदस्ती उज्जैन ले जा रहा है अपनी मां से मिलाने, मैं नहीं जाना चाहती. इसके कुछ ही देर बाद फोन कट गया. अगले दिन रात 10 बजे खुशबू की बड़ी बहन प्रीति अहिरवार का फोन आया कि खुशबू की बस में मौत हो गई है. प्रीति के मुताबिक, उज्जैन से लौटते वक्त बस में ही खुशबू दम तोड़ चुकी थी. परिवार जब भोपाल पहुंचा तो खुशबू का शव हमीदिया अस्पताल में था. परिजनों की शिकायत के आधार पर भोपाल पुलिस ने कासिम को गिरफ्तार कर लियाहै. पुलिस ने उस पर कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है. इनमें धारा 296, 115(2), 351(2) (भारतीय न्याय संहिता – BNS), मध्य प्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 की धारा 3/5, अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2)(5)(क) शामिल है. कासिम की गिरफ्तारी खुशबू की मौत के मामले में नहीं, बल्कि मारपीट, धोखा और धर्म परिवर्तन के दबाव के आरोपों में की गई है. कासिम ने आरोपों से किया इनकार पुलिस हिरासत में कासिम खुद को निर्दोष बता रहा है. वह पुलिस की कस्टडी में बोल रहा था कि मैंने खुशबू से मारपीट नहीं की, न दबाव बनाया. पुलिस हिरासत में कासिम ने मृतका खुशबू के परिजनों के सभी आरोपों से इनकार किया है. वहीं खुशबू के परिवार का कहना है कि कासिम ने उसे पीटा, था धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया. परिवार अब इस मामले में हत्या की जांच की मांग कर रहा है और इसे 'लव जिहाद' का मामला बता रहा है. वहीं, पुलिस का कहना है कि मौत के असली कारण का पता विसरा रिपोर्ट आने के बाद चलेगा. क्या खुशबू की मौत वाकई एक मेडिकल कॉम्प्लिकेशन थी या फिर उसके साथ कुछ और हुआ? क्या आधार कार्ड में फोटो बदलवाने की कहानी धर्म परिवर्तन की बड़ी साजिश का हिस्सा थी? इन सवालों के जवाब अभी बाकी हैं. कासिम गिरफ्तार, आरोपों से इनकार पुलिस हिरासत में कासिम बार-बार यही बोल रहा है कि उसने खुशबू के साथ कभी मारपीट नहीं की. हालांकि, परिजनों के गंभीर आरोपों के आधार पर पुलिस ने कासिम के खिलाफ बीएनएस की धारा 296 (धोखाधड़ी), 115(2), 351 (2), धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021 की धारा 3/5 और एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(2)5(क) के तहत केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है.

अब बिना FASTag वालों की बढ़ेगी जेब ढील: 15 नवंबर से दोगुना टोल देना होगा

नई दिल्ली अगर आप अक्सर हाइवे पर सफर करते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। केंद्र सरकार ने टोल प्लाज़ा के नियमों में बड़ा बदलाव किया है, जो 15 नवंबर 2025 से लागू होगा। इस बदलाव के बाद अब टोल का भुगतान करने के तरीके के आधार पर शुल्क तय किया जाएगा यानी नकद भुगतान करने पर ज्यादा टोल, जबकि डिजिटल भुगतान करने पर राहत मिलेगी। नया नियम क्या कहता है? केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, 2008 में संशोधन किया है। इसके तहत अब अगर कोई वाहन चालक बिना वैध FASTag के टोल प्लाज़ा में प्रवेश करता है, तो उससे दोगुना शुल्क वसूला जाएगा। लेकिन अगर FASTag फेल हो जाने पर चालक UPI या किसी डिजिटल माध्यम से भुगतान करता है, तो उसे केवल 1.25 गुना टोल शुल्क ही देना होगा। आसान उदाहरण से समझिए मान लीजिए किसी वाहन का सामान्य टोल 100 रुपये है — ➤ अगर FASTag सही काम कर रहा है, तो ड्राइवर को सिर्फ 100 रुपये देने होंगे। ➤ अगर FASTag फेल हो गया और ड्राइवर नकद भुगतान करता है, तो उसे 200 रुपये चुकाने होंगे। ➤ लेकिन अगर डिजिटल माध्यम (जैसे UPI, कार्ड या नेटबैंकिंग) से भुगतान किया जाता है, तो केवल 125 रुपये देने होंगे। ➤ यानी अब डिजिटल भुगतान करने वालों को सीधी छूट मिलेगी, जबकि नकद लेनदेन पर भारी जुर्माना लगेगा। सरकार का मकसद क्या है? मंत्रालय का कहना है कि यह बदलाव टोल प्लाज़ा पर पारदर्शिता बढ़ाने, नकद लेनदेन कम करने और डिजिटल इंडिया मिशन को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। इससे टोल प्लाज़ा पर लगने वाली लंबी कतारों में भी कमी आएगी और यात्रियों को तेज़ और सुगम यात्रा अनुभव मिलेगा। टोल प्रणाली को और आधुनिक बनाने की तैयारी सरकार आने वाले समय में टोल सिस्टम को पूरी तरह ऑटोमैटिक और GPS आधारित बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके तहत भविष्य में गाड़ी के सफर की दूरी के हिसाब से टोल काटा जा सकेगा।  

उत्तर प्रदेश होगा साझीदार राज्य, 343 ओडीओपी स्टॉल एवं 2750 प्रतिभागी लेंगे भाग

भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 उत्तर प्रदेश की विश्व पटल पर नई आर्थिक उड़ान उत्तर प्रदेश होगा साझीदार राज्य, 343 ओडीओपी स्टॉल एवं 2750 प्रतिभागी लेंगे भाग  आगरा का पेठा, बनारसी हस्तशिल्प, भदोही की कार्पेट और मेरठ के खेल सामान जैसे राज्य के ओडीओपी उत्पादों को मिलेगा वैश्विक बाजार 150 से अधिक युवा स्टार्टअप्स और महिला उद्यमी अतंर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में करेंगे उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व उत्तर प्रदेश के ग्रामीण व स्थानीय उत्पादों को मिलेगा वैश्विक मंच, निर्यात को मिलेगा बढ़ावा  लखनऊ  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में “एक भारत श्रेष्ठ भारत” की थीम पर आधारित 44वें अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले 2025 का आयोजन भारत मंडपम, नई दिल्ली में 14 से 27 नवंबर तक किया जा रहा है। इस वर्ष आयोजित किये जा रहे अतंर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के साथ "साझेदार राज्य" के रूप में भाग ले रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन और मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश 44वें अतंर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में अपनी “लोकल टू ग्लोबल” की आर्थिक रणनीति को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करेगा। जिसका मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश को एक वैश्विक व्यापर के केंद्र के तौर पर विकसित करना, साथ ही प्रदेश के स्थानीय उत्पादों की पहुंच वैश्विक बाजार तक स्थापित करना है। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा इस मेले को राज्य की 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ओडीओपी) योजना, युवा स्टार्टअप्स और बढ़ती हुई महिला उद्यमिता को प्रदर्शित करने के लिये भी की जाएगी।  भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 में उत्तर प्रदेश एक साझीदार राज्य के रूप में शामिल हो रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की “लोकल टू ग्लोबल” की मुहीम को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने के उद्देश्य से राज्य के 2,750 से अधिक प्रदर्शक भागीदारी करेंगे। साथ ही इस मेले में 343 स्टॉल ओडीओपी योजना के अंतर्गत स्थापित किए जायेंगे। व्यापार मेले में राज्य की ओर से लगाये जा रहे ओडीओपी स्टॉल्स में आगरा का पेठा, बनारसी हस्तशिल्प, भदोही की कार्पेट, मेरठ के खेल सामान, कानपुर के चमड़े के उत्पाद, फिरोजाबाद के ग्लासवेयर और सहारनपुर की लकड़ी की कलाकृतियों जैसे उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने प्रदर्शित किया जाएगा। आधुनिक पैकेजिंग, डिजिटल मार्केटिंग और सस्टेनेबल प्रैक्टिसेज के साथ पेश किए जा रहे ये उत्पाद अमेरिका, यूरोप, मध्य पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों में प्रवेश करने की क्षमता रखते हैं। मेले के दौरान विदेशी निवेशकों एवं प्रतिनिधिमंडलों के साथ ओडीओपी उत्पादकों की बी टू बी मीटिंगस का भी आयोजन किया जाएगा, जिससे राज्य के स्थानीय उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा। यूपी सरकार विशेष तौर पर राज्य के युवा स्टार्टअप्स और महिला उद्यमियों को प्राथमिकता दे रही है। उत्तर प्रदेश से लगभग 150 से अधिक युवा स्टार्टअप्स और महिला उद्यमी भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला में अपनी नवोन्मेषी पहल पेश करने के लिये भेजे जाएगें। ये स्टार्टअप्स न केवल रोजगार सृजन कर रहे हैं, बल्कि राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रहे हैं। महिला उद्यमियों की भागीदारी न केवल आर्थिक बल्कि सामाजिक परिवर्तन का भी प्रतीक हैं, ये महिलाएं गांवों से निकलकर वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना रही हैं। मेले में उनके लिए विशेष वर्कशॉप्स और नेटवर्किंग सेशन आयोजित किये जाएंगे, जहां वे  निवेशकों और खरीदारों से प्रत्यक्ष जुड़ेंगी। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 के दौरान ओडीओपी उत्पादों के लिए विशेष 'ग्लोबल मार्केट एक्सेस' सेमिनार किए जाएगें साथ ही डिजिटल शोरूम भी निर्मित किये जाएगें , जो भविष्य में निर्यातकों को राज्य की ओर आकर्षित करेंगे। साथ ही ओडीओपी उत्पादों को लेकर विदेशी दूतावासों और व्यापार मंडलों के साथ समझौतों को भी प्राथमिकता दी जाएगी। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 के माध्यम से उत्तर प्रदेश वैश्विक व्यापारिक परिदृश्य में नई ऊंचाइयों को छूने की तैयारी कर रहा है, जहां राज्य के स्थानीय उत्पाद वैश्विक ब्रांड बनेंगे और राज्य की ग्रामीण इकाईयां वैश्विक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनेंगी।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने चुना नया अध्यक्ष: रघुराज किशोर तिवारी को मिली कमान

 रीवा  अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष एजी कॉलेज रीवा के प्रोफसर रघुराज किशोर तिवारी को चुना गया है। यह पहला अवसर है जब विंध्य क्षेत्र से किसी को इस संगठन में राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जैसे ही नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की आधिकारिक घोषणा हुई, उनके आवास पर बधाई देने वाले बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। कृषि विज्ञान में पीएचडी हासिल जिले के सेमरिया क्षेत्र के कपसा के रहने वाले रघुराज किशोर बीते कई वर्षों से विद्यार्थी परिषद सहित अन्य कई संगठनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। शहर के माडल स्कूल से पढ़ाई करने के दौरान ही वे वर्ष 1987 से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े। एक छात्र कार्यकर्ता के रूप में वे कृषि महाविद्यालय रीवा के छात्र संघ के निर्वाचित अध्यक्ष और महाकौशल प्रांत के प्रदेश सचिव भी रहे। कृषि महाविद्यालय से पढ़ाई करने के बाद यहीं अध्यापन कार्य भी वह कई वर्षों से करा रहे हैं। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर से कृषि विज्ञान में पीएचडी भी हासिल की। रघुराज किशोर को मिले कई पुरस्कार एक शिक्षक के रूप में रघुराज किशोर को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा विश्वविद्यालय के सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार (2014) से सम्मानित किया गया था। प्रतिष्ठित त्रिभुवन विश्वविद्यालय नेपाल द्वारा विशिष्ट वैज्ञानिक पुरस्कार (2016) में प्राप्त हुआ। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 125 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं, कृषि विज्ञान पर तीन पुस्तकें लिखी हैं, 50 से अधिक लघु शोध परियोजनाओं का मार्गदर्शन किया है और तीन डॉक्टरेट शोध प्रबंधों का पर्यवेक्षण किया है। प्रधान अन्वेषक के रूप में उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान फिलीपींस में आयोजित एक संयुक्त अनुसंधान परियोजना में अपने विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व किया। इससे पहल विद्यार्थी परिषद में वे महाकौशल प्रांत अध्यक्ष और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (2006-09) के रूप में कार्यरत रहे हैं। शिक्षा नीति समिति के सदस्य भी रहे डॉ. रघुराज किशोर तिवारी मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति की कार्यान्वयन समिति के सदस्य के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नई शिक्षा नीति में पाठ्यक्रम की रूपरेखा तय करने में उनका बड़ा योगदान रहा है। देश में सबसे पहले नई शिक्षा नीति मध्यप्रदेश में लागू हुई, इसमें शिक्षा विशेषज्ञों की मेहनत अहम रही है। इस टीम में रघुराज किशोर तिवारी की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्तमान में वे कृषि छात्र गतिविधियों के प्रमुख सलाहकार और राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद के विशेष आमंत्रित सदस्य हैं।

पंजाब में बड़ी कार्रवाई: पुलिस ने ग्रेनेड अटैक मॉड्यूल पकड़ा, ISI कनेक्शन बेनकाब

लुधियाना/फिरोजपुर  लुधियाना पुलिस ने बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम करने का दावा किया है। लुधियाना पुलिस ने ISI पाकिस्तान समर्थित ग्रेनेड हमले के एक मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। समय पर मिली खुफिया जानकारी और पुलिस की त्वरित कार्रवाई से शहर में संभावित ग्रेनेड हमले को रोका गया। आरोपियों के विदेश-आधारित हैंडलरों, जिनके पाकिस्तान से संभावित संबंध बताए जा रहे हैं। उनकी तलाश जारी है। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि आरोपी मलेशिया स्थित तीन गुर्गों के माध्यम से पाकिस्तान स्थित संचालकों के संपर्क में थे, ताकि एक हथगोले को उठाने और उसकी डिलीवरी में समन्वय स्थापित किया जा सके। लुधियाना के पुलिस आयुक्त स्वप्न शर्मा ने बताया कि खुफिया इनपुट के आधार पर थाना जोधेवाल में कुलदीप सिंह, शेखर सिंह और अजय सिंह (सभी निवासी श्री मुक्तसर साहिब) के खिलाफ एक्सप्लोसिव एक्ट और बीएनएस की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी (इन्वेस्टिगेशन) और डीसीपी (सिटी) की निगरानी में विशेष टीमें गठित की गईं। प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों को पाकिस्तान की आईएसआई (इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस) ने अपने विदेशी हैंडलरों के माध्यम से लुधियाना के घनी आबादी वाले इलाके में ग्रेनेड हमला करने का निर्देश दिया था, ताकि इलाके में दहशत फैलाई जा सके। जांच के दौरान विदेशों में बैठे मास्टरमाइंडों की पहचान भी हुई है इनमें अजय (मलेशिया, मूल निवासी श्रीगंगानगर, राजस्थान), जस बेहबल (वर्तमान में मलेशिया), और पवनदीप (मलेशिया, मूल निवासी श्रीगंगानगर) शामिल हैं।   इसके अलावा, पंजाब में हैंड ग्रेनेड की आपूर्ति से जुड़ा एक स्थानीय नेटवर्क भी सामने आया है। पुलिस ने सुखजीत सिंह उर्फ सुख बराड़, सुखविंदर सिंह (दोनों निवासी फरीदकोट), करणवीर सिंह उर्फ विक्की (निवासी श्रीगंगानगर, राजस्थान) और साजन कुमार उर्फ संजू (निवासी श्री मुक्तसर साहिब) को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से एक चीनी हैंड ग्रेनेड (नंबर 86P 01-03 632), एक किट और दस्ताने बरामद किए गए हैं। कमिश्नर स्वप्न शर्मा ने बताया कि मामले की आगे की जांच जारी है।

लोकायुक्त जबलपुर ने पकड़ा भ्रष्ट सचिव, ग्राम पंचायत उकवा में रिश्वत लेते रंगे हाथ

बालाघाट  लोकायुक्त जबलपुर की टीम ने गुरुवार को एक बड़ी कार्रवाई की है। जनपद पंचायत परसवाड़ा की ग्राम पंचायत खरपड़िया सचिव और ग्राम पंचायत उकवा के प्रभारी सचिव योगेश हिरवाने को ग्राम पंचायत उकवा के सामने में रोड पर अंकुश पिता संतोष चौकसे से 50 हजार रुपये लेते रंगे हाथ दबोचा गया। लोकायुक्त टीम ने सचिव को गिरफ्तार कर बैहर ले जाया गया है। शिकायतकर्ता अंकुर चौकसे की माने तो शासन के द्वारा एक डिसमिल का पट्टा दिया गया है, जो आबादी जमीन का है। मेरे द्वारा भवन निर्माण किया जाना था जिसके लिए मैं ग्राम पंचायत उकवा से एनओसी मांगना चाह तो ग्राम पंचायत उकवा के प्रभारी सचिव योगेश हिरवाने के द्वारा मुझे 200000 लाख रुपये की मांग की गई थीं।  

चलान की बजाय ट्रैफिक टेस्ट! रतलाम में पुलिस दे रही अनोखी सजा, हो रही तारीफ

रतलाम   यातायात पुलिस रतलाम में ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों का चालान नहीं काट रही बल्कि सजा के तौर पर उनसे परीक्षा ले रही है. ट्रैफिक पुलिस द्वारा विशेष परीक्षा का आयोजन शरू किया गया है. यहां ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों को 20 प्रश्नों का एक प्रश्न पत्र थमा दिया जाता है. इस प्रश्न पत्र में ट्रैफिक अवेयरनेस को लेकर प्रश्न प्रतिभागियों से पूछे जाते हैं. पुलिस के सामने होती है परीक्षा प्रश्न पत्र हल करने के बाद इसका मूल्यांकन भी प्रतिभागी के सामने ही किया जाता है. प्रश्न का उत्तर गलत होता है तो उस बारे में प्रतिभागी को समझाइश और सही जानकारी भी दी जाती है. ट्रैफिक पुलिस की इस पहल को आम जनता का भी समर्थन मिल रहा है. वहीं, इस बात की भी जानकारी मिल रही है कि लोग ट्रैफिक नियमों के बारे में कितने अवेयर हैं. चालान काटने की बजाए ज्ञान किया जा रहा चेक रतलाम में ट्रैफिक पुलिस ने रतलाम पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के निर्देश पर ये पहल शुरू की है. ट्रैफिक पुलिस के डीएसपी आनंद स्वरूप सोनी ने बताया, '' इस पहल का उद्देश्य लोगों में ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूकता पैदा करना है. इसके लिए ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों जिसमें तीन सवारी वाले, रॉन्ग साइड चलने वाले, लाइसेंस नहीं बनवाने वाले और हेलमेट नहीं पहनने वाले वाहन चालकों का चालान नहीं काटते हुए यातायात नियमों के प्रति उनका ज्ञान चेक किया जाता है.'' आसान सवालों का भी जवाब नहीं दे पाते लोग डीएसपी ट्रैफिक ने आगे कहा, '' आम लोगों को यातायात के नियमों की कितनी जानकारी है. यह जानना इस पहल का उद्देश्य है. 20 प्रश्नों के प्रश्न पत्र के मूल्यांकन से इसकी जानकारी मिलती है कि लोगों को ट्रैफिक नियमों के बारे में कितनी जगरुकता है.'' डीसीपी ट्रैफिक ने बताया कि 20 सरल प्रश्नों के जवाब भी लोग नहीं दे पाते हैं. खासकर सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद करने, सड़क पर लगे संकेत का मतलब समझने और दुर्घटना होने के समय क्या करना चाहिए इसकी सही जानकारी भी लोगों को नहीं है. यह मुहिम चलाकर रतलाम ट्रैफिक पुलिस द्वारा लोगों को यह मैसेज दिया जा रहा है कि ट्रैफिक नियमों की जानकारी रखना और नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है. बहानेबाजी करने के बजाय देश का जिम्मेदार नागरिक बनना अधिक आवश्यक है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में ढोल-नगाड़ों की थाप से जनजाति भागीदारी उत्सव का शुभारंभ किया

भारत की स्वाधीनता के पक्षधर थे भगवान बिरसा मुंडाः सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में ढोल-नगाड़ों की थाप से जनजाति भागीदारी उत्सव का शुभारंभ किया भगवान बिरसा मुंडा ने दिया नारा, देश हमारा है तो राज भी हमारा ही होना चाहिए, विदेशी हुकूमत भारत में राज न करेः मुख्यमंत्री उत्सव में उत्तर प्रदेश आकर 22 राज्यों के कलाकार बन रहे सहभागी बोले सीएम- जनजातियों को दिया जा रहा विकास की योजनाओं का लाभ सीएम योगी ने विकास कार्यों को भी गिनाया लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि धरती आबा बिरसा मुंडा भारत की स्वाधीनता के पक्षधर थे। इसके लिए उन्होंने अभियान चलाया, जिस पर तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने उन्हें गिरफ्तार किया। मात्र 25 वर्ष की आयु में उन्होंने रांची की जेल में अंतिम सांस ली। उन्होंने जनजाति समुदाय को नारा दिया कि अपना देश-अपना राज। देश हमारा है तो राज भी हमारा ही होना चाहिए, विदेशी हुकूमत भारत में राज न करे। धरती आबा को श्रद्धांजलि देते हुए पीएम मोदी ने 15 नवंबर को जनजाति दिवस के रूप में आयोजित करने की प्रेरणा दी। सीएम योगी ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में गुरुवार को ढोल-नगाड़ों की थाप से जनजाति भागीदारी उत्सव का शुभारंभ किया। सीएम ने यहां लगी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। सीएम ने बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस दौरान मेजबान उत्तर प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों के जनजाति कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति भी दी। सीएम योगी ने इस वर्ष की विशेषता बताते हुए इसे महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि पहली से 15 नवंबर तक देश में जनजाति गौरव पखवाड़ा आयोजित किया जा रहा है। सरकार द्वारा जनजाति समुदाय को समाज व राष्ट्र की मुख्य धारा से जोड़ने व सम्मान के साथ आगे बढ़ने के लिए बेहतर प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया जा रहा है। 22 राज्यों के कलाकार उत्तर प्रदेश आकर बन रहे सहभागी सीएम योगी ने कहा कि सांस्कृतिक समागम में 22 राज्यों के कलाकारों को जुड़ने का अवसर प्राप्त हो रहा है। कलाकार सहभागिता की दृष्टि से अरुणाचल प्रदेश पार्टनर स्टेट है। गुजरात, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, सिक्किम, उड़ीसा, राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, मिजोरम, गोवा, केरल, पश्चिम बंगाल, असम, हिमाचल प्रदेश, असम, त्रिपुरा, झारखंड व पंजाब के कलाकार उत्तर प्रदेश में आकर जनजाति भागीदारी उत्सव में सहभागी बन रहे हैं। यहां हस्तशिल्प व कला प्रदर्शनी, व्यंजन मेला और जनजाति साहित्य को समर्पित साहित्यिक व विकास मंच भी है। जनजाति समुदाय की शिक्षा का बढ़ा स्तर, मिल रहा शासन की योजनाओं का लाभ सीएम योगी ने कहा कि जनजातीय समुदाय की आबादी यूपी में कम है। पहले सरकारी नौकरी के विज्ञापन निकालते थे तो अनुसूचित जाति की पूरी सीटें नहीं भरी पाती थीं। अभी हाल में 60,244 पुलिस की भर्ती की गई तो इसमें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटें उसी समाज के युवाओं से भरी गईं। यह चीजें दिखाती हैं कि उनके शिक्षा का स्तर, भागीदारी बढ़ी है। शासन की योजनाओं का लाभ मिल रहा है। जनजातियों को दिया जा रहा विकास की योजनाओं का लाभ सीएम योगी ने कहा कि सरकार ने तय किया कि उत्तर प्रदेश में जितनी भी जनजातियां हैं, उन्हें अधिकार प्राप्त हो और उन्हें सेचुरेशन के लक्ष्य तक पहुंचाने की दिशा में कार्य हो। थारू, मुसहर, चेरो, बुक्सा, सहरिया, कोल, गौड़ आदि जनजातियों को शासन की सभी योजनाओं से आच्छादित करने के लिए सरकार ने मिशन मोड पर अभियान चलाया। परिणामस्वरूप ज्यादातर जनजातियों को विकास की योजनाओं (कनेक्टिविटी, पेयजल, बिजली, पेंशन, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत) का लाभ दिया जा रहा है। सीएम ने की प्रधानमंत्री आदिवासी न्याय महाभियान की चर्चा सीएम ने कहाकि जनजाति समुदाय के लिए पीएम जनमन योजना के अंतर्गत प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाभियान के माध्यम से अनेक कार्यक्रम प्रारंभ किए गए हैं। बिजनौर में बुक्सा जनजाति को सूची में श्रेणीबद्ध किया गया है। इसके तहत 815 परिवारों को, इसमें बुक्सा जनजाति के 145 पीएम आवास व समस्त घरों के विद्युतीकरण, पेयजल, मोबाइल मेडिकल यूनिट, आंगनबाड़ी सेंटर, पांच बसावटों में मोबाइल टावर, पांच मल्टीपर्पज सेंटर व पांच वनधन केंद्र स्वीकृत किए जा चुके हैं। जनजातीय बाहुल्य 517 गांवों को सभी योजनाओं से जोड़ने का किया गया कार्य मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में जितनी भी अनुसूचित जनजाति की बस्तियां हैं, धरतीआबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत उन्हें सभी सुविधाओं से आच्छादित किया जा रहा है। इसके लिए 26 जनपदों के 47 ब्लॉक व 517 ग्रामों को चिह्नित किया है। इनमें सोनभद्र में सर्वाधिक 176 गांव, बलिया के 61, ललितपुर के 36, देवरिया, लखीमपुर खीरी व कुशीनगर के 34-34, गाजीपुर के 26, मीरजापुर के 20, गोरखपुर के 18, चंदौली के 17, बलरामपुर के 16, पीलीभीत, प्रयागराज व सिद्धार्थनगर के 7-7, बिजनौर के 5, बहराइच व बस्ती के तीन-तीन, बाराबंकी, भदोही, महराजगंज, श्रावस्ती के दो-दो, अंबडेकरनगर, महोबा, संतकबीरनगर, जौनपुर, सीतापुर के एक-एक गांव को आच्छादित करने का कार्य किया गया है। जनजातीय बाहुल्य 517 गांवों की कनेक्टिविटी से लेकर सभी योजनाओं से जोड़ने का कार्य किया गया है। इनका आधार, आयुष्मान कार्ड, पीएम उज्ज्वला योजना, जाति-निवास प्रमाण पत्र, मुद्रा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम जनधन योजना, जीवन ज्योति बीमा योजना, पीएम किसान सम्मान निधि, पीएम विश्वकर्मा योजना, राशन कार्ड आदि की व्यवस्था के साथ ही यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर को डबल इंजन सरकार ने आच्छादित करने की स्वीकृति दी। जनजाति गौरव की पुनर्स्थापना के साथ ही समाज को बढ़ा रही डबल इंजन सरकार सीएम योगी ने अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को मिलने वाली छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति का जिक्र किया। कहा कि हम लोगों ने अब तक 1.50 लाख छात्रों को इन योजनाओं से लाभान्वित किया है। 9 आश्रम पद्धति विद्यालय लखीमपुर खीरी, बलरामपुर, बहराइच, महराजगंज, श्रावस्ती, बिजनौर में संचालित हैं। इनके माध्यम से 2026 जनजाति छात्र-छात्राओं को शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं। जनजाति छात्रों के लिए दो निःशुल्क छात्रावास का संचालन किया जा रहा है। 8 छात्रावास (लखीमपुर खीरी, चंदौली में दो-दो, बलिया, गोरखपुर, मीरजापुर, सोनभद्र में एक-एक) निर्माणाधीन हैं। जनजाति छात्रों के लिए लखीमपुर खीरी, बहराइच व सोनभद्र में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय संचालित है और ललितपुर में निर्माणाधीन है। कक्षा छह, 9 व 11 की वे छात्राएं, जो आवासीय विद्यालय में अध्ययनरत नहीं हैं, उन्हें यूनिफॉर्म, साइकिल योजना से लाभान्वित किया जा रहा है। सीएम ने वनाधिकार अधिनियम की … Read more

517 जनजातीय बहुल गांवों में सैचुरेशन आधारित विकास, धरती आबा अभियान बना बदलाव की धुरी

जनजातीय गौरव को नई पहचान, योगी सरकार ने बदली वंचित समाज की तस्वीर 517 जनजातीय बहुल गांवों में सैचुरेशन आधारित विकास, धरती आबा अभियान बना बदलाव की धुरी थारू, बुक्सा और अन्य जनजातियों के लिए योगी सरकार का सुरक्षा कवच, आवास से आजीविका तक बड़ा विस्तार थारू हस्तशिल्प कंपनी ने खोले राष्ट्रीय बाजार के दरवाजे, 371 समूहों को मिला आर्थिक संबल एकलव्य मॉडल स्कूलों और सर्वोदय छात्रावासों से जनजातीय बच्चों के लिए शिक्षा बनी नई ताकत पीएम जनमन से वन क्षेत्रों में बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और पेयजल की सीधी पहुंच, बुक्सा जनजाति के 815 परिवार हुए संतृप्त परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्र योजना से युवाओं को बड़ा लाभ, सैकड़ों की प्रशासनिक सेवाओं में एंट्री विमुक्त और घुमंतू समुदायों के लिए योगी सरकार का बड़ा हस्तक्षेप, शिक्षा और निवास योजनाओं से जीवन में आया स्थायित्व लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में जनजातीय समाज के जीवन में जो बदलाव आया है, वह सिर्फ योजनाओं का विस्तार नहीं बल्कि सम्मान और अधिकारों की पुनर्स्थापना की एक बड़ी कहानी है। लंबे समय तक उपेक्षित रहे इन समुदायों को योगी सरकार ने न केवल मुख्य धारा में जगह दिलाई बल्कि उनकी परंपराओं, जरूरतों और सपनों को शासन की प्राथमिकता बनाया। मुख्यमंत्री की सोच हमेशा यही रही है कि विकास तभी सार्थक है जब वंचितों को वरीयता मिले और अंत्योदय से सर्वोदय का रास्ता खुले। प्रदेश में थारु, बुक्सा, भोटिया, जौनसारी, राजी, गोंड, बैगा, सहरिया, मुसहर और चेरो जैसी जनजातियों के 11 लाख से अधिक लोगों के जीवन को बदलने के लिए सरकार ने योजनाएं जमीन पर उतारीं। वनाधिकार अधिनियम के तहत आवासीय अधिकार दिए गए, मुख्यमंत्री आवास योजना से वनवासियों को पक्के घर मिले और पीएम जनमन योजना के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, बिजली और दूरसंचार जैसी मूलभूत सुविधाओं को सीधे उनके द्वार तक पहुंचाया गया। खास तौर पर बुक्सा जनजाति के 815 परिवारों को हर सुविधा से संतृप्त कर एक नई मिसाल पेश की गई। 'धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान' और 'धरती आबा जनभागीदारी अभियान' ने जनजातीय इलाकों में विकास की असली तस्वीर बदली। 26 जिलों के 517 गांवों तक पहुंचकर सरकार ने कनेक्टिविटी से लेकर आयुष्मान कार्ड, उज्ज्वला, जनधन, किसान सम्मान निधि और विश्वकर्मा जैसी योजनाओं का सैचुरेशन कराया। सोनभद्र, ललितपुर, कुशीनगर, बलरामपुर से लेकर बिजनौर तक इन गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर लगातार बढ़े हैं। जनजातीय संस्कृति को संजोने पर भी भरपूर जोर दिया गया। बलरामपुर के इमिलिया कोडर में थारू संग्रहालय स्थापित हुआ और मिर्जापुर, सोनभद्र, महराजगंज में नए संग्रहालयों पर तेजी से काम चल रहा है। थारू समुदाय की कला और कौशल को राष्ट्रीय बाजार दिलाने के लिए लखीमपुर खीरी में थारू हस्तशिल्प कंपनी बनाई गई। इसमें जुड़े 371 समूहों को रिवॉल्विंग फंड और कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड देकर आत्मनिर्भरता की राह दिखाई गई। शिक्षा को जनजातीय उन्नति का आधार बनाते हुए एकलव्य मॉडल स्कूल, सर्वोदय छात्रावास और आश्रम पद्धति विद्यालयों में बच्चों को पूरी सुविधा मिल रही है। लखीमपुर खीरी, बहराइच, सोनभद्र और ललितपुर के एकलव्य विद्यालयों ने दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को नई दिशा दी है। ये पहलें साफ बताती हैं कि योगी सरकार जनजातीय बच्चों की शिक्षा को भविष्य निर्माण का सबसे मजबूत आधार मानती है। मुख्यमंत्री ने बार-बार कहा है कि विकास की असली कसौटी भागीदारी है। पुलिस भर्ती में आरक्षित सभी सीटें पूरी तरह भरना इसी परिवर्तन का संकेत है। परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्र योजना से 700 से अधिक अभ्यर्थियों का चयन, साढ़े 06 हजार युवाओं को प्रशिक्षण और आठ उच्चस्तरीय केंद्रों की स्थापना ने अनुसूचित जनजाति वर्ग के युवाओं के लिए नई संभावनाएं खोली हैं। विमुक्त और घुमंतू समुदायों को भी सरकार ने बराबर महत्व दिया। नट, बंजारा, सांसी, कंजर, कालबेलिया जैसे समुदायों के लिए 101 आश्रम पद्धति विद्यालय, 9 सर्वोदय विद्यालय और अनेक छात्रावास संचालित किए जा रहे हैं। इन समुदायों को सामाजिक सुरक्षा, आवास और आजीविका से जोड़कर सरकार ने उन्हें सम्मानजनक जीवन की राह दी है।