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भारत ने एशियन आर्चरी चैंपियनशिप में जीते पांच मेडल

ढाका एशियन आर्चरी चैंपियनशिप 2025 में भारत ने गुरुवार को कंपाउंड वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल पांच पदक जीते। इनमें तीन स्वर्ण और दो रजत पदक शामिल हैं। यह टूर्नामेंट बांग्लादेश के ढाका में जारी है। भारत की स्टार तीरंदाज ज्योति सुरेखा वेन्नम ने व्यक्तिगत और टीम दोनों वर्गों में स्वर्ण पदक जीतकर अभियान की अगुवाई की। पिछले संस्करण 2023, बैंकॉक में व्यक्तिगत स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाली ज्योति ने इस बार एक कदम आगे बढ़ते हुए 17 वर्षीय प्रीथिका प्रदीप को 147-145 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। दिन की शुरुआत में ही ज्योति और प्रीथिका ने दीपशिखा के साथ मिलकर महिला कंपाउंड तीरंदाजी टीम इवेंट में स्वर्ण पदक जीता था। भारतीय टीम ने रिपब्लिक ऑफ कोरिया की पार्क येरिन, ओ यूह्युन और जंगयून पार्क की तिकड़ी को 236-234 से मात दी। मुकाबले के मध्य में बढ़त बनाने के बाद भारतीय तिकड़ी ने अंतिम दौर तक संयम बनाए रखते हुए जीत पक्की की। कंपाउंड मिक्स्ड टीम इवेंट जो एलए 2028 ओलंपिक में डेब्यू करेगा, जिसमें भारत की जोड़ी अभिषेक वर्मा और दीपशिखा ने बंगलादेश की बोन्ना आक्तर और हिमू बच्चर को 153-151 से हराकर स्वर्ण जीता। यह भारत का इस वर्ग में लगातार दूसरा स्वर्ण पदक है। पिछली बार अदिति स्वामी और प्रियांश ने बैंकॉक में स्वर्ण पदक जीता था। वहीं, कंपाउंड पुरुष टीम फाइनल में भारत को कजाकिस्तान से 230-229 के करीबी अंतर से हार का सामना करना पड़ा। अभिषेक वर्मा, साहिल जाधव और प्रथमेश फुगे की तिकड़ी अंतिम चरण में एक अंक से आगे थी, लेकिन आखिरी पलों में कजाकिस्तान ने बाजी मार ली। पुरुष कंपाउंड व्यक्तिगत वर्ग में भारतीय तीरंदाज पदक से चूक गए। अभिषेक वर्मा ने पिछली बार बैंकॉक में व्यक्तिगत कांस्य पदक जीता था। अब भारत की नजरें शुक्रवार को होने वाले रिकर्व वर्ग के मुकाबलों पर हैं, जहां और पदक जीतने की उम्मीद है। चार बार की ओलंपियन दीपिका कुमारी का सामना सेमीफाइनल में अंकिता भकत से होगा, जबकि संगीता का मुकाबला दक्षिण कोरिया की नाम सुह्योन से होगा। पुरुष रिकर्व वर्ग में धीरज बोम्मदेवरा और राहुल अलग-अलग सेमीफाइनल में उतरेंगे। टीम इवेंट में, भारतीय पुरुष टीम यशदीप भोगे, अतानु दास और राहुल की तिकड़ी दक्षिण कोरिया से स्वर्ण पदक मुकाबले में भिड़ेगी, जबकि मिक्स्ड टीम में अंशिका कुमारी और यशदीप संजय भोगे की जोड़ी कांस्य पदक मुकाबले में कोरिया से टकराएगी।  

आधी आबादी ने बदला समीकरण—नीतीश कुमार को मिला महिला वोटरों का ज़बरदस्त साथ

  नई दिल्ली बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के रुझानों में एनडीए बहुमत के आंकड़े से काफी आगे निकल चुका है। तमाम एग्जिट पोल ने साफ इशारा किया था कि एनडीए को महिलाओं, ओबीसी और ईबीसी वर्ग का बंपर समर्थन मिला है। रुझान भी इस बात पर मुहर लगा रहे हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार बिहार में दोनों चरणों में कुल मतदान 66.91 फीसदी रहा था। मतदान के दोनों ही चरणों में पुरुषों के मुकाबले में महिलाओं ने ज्यादा वोटिंग की। आंकड़ों के मुताबिक महिलाओं का मतदान प्रतिशत 71.6 फीसदी रहा था। वहीं पुरुषों का मतदान प्रतिशत 62.8 फीसदी ही रहा। इन आंकड़ों से साफ हो जाता है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं ने करीब 10 फीसदी ज्यादा मतदान किया। रुझानों में एनडीए को 190, महागठबंधन को 49 और अन्य के खाते में 4 सीटें जाने के संकेत मिल रहे हैं। अगर ये रुझान नतीजों में बदलते हैं तो एनडीए बिहार में इतिहास रच देगा। जीविका दीदी योजना ने बदल डाला सियासी माहौल बिहार विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार की सरकार ने राज्य में जीविका दीदी योजना के तहत 1.30 करोड़ महिलाओं को दस-दस हजार रूपये दिए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 सितंबर को नीतीश सरकार की इस योजना की शुरुआत महिलाओं को दस-दस हजार रुपये देकर की थी। तीन अक्तूबर को 25 लाख नई महिलाओं को दस-दस हजार रुपये दिए गए। शराबबंदी के फैसले ने नीतीश को बनाया महिलाओं का 'लाडला' मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में शराबबंदी लागू करने का फैसला लिया। इसकी वजह से महिलाओं में नीतीश कुमार को काफी लोकप्रियता मिली। 2006 की ये योजना भी बनी भविष्य की गेमचेंजर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2006 में मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत लड़कियों को साइकिल और स्कूल की पोशाक दी जाती है। इस योजना ने बिहार की उन बेटियों को काफी मजबूत किया, जो स्कूल दूर होने की वजह से पढ़ाई छोड़ देती थीं।  

व्यापार मेले के दौरान प्रशासन की चेतावनी, नियम तोड़ा तो आवंटन रद्द और भारी जुर्माना

ग्वालियर  100 साल से भी ज्यादा पुराना रियासतकालीन ग्वालियर व्यापार मेला जल्दी ही शुरू होने वाला है, प्रशासनिक स्तर पर इसकी तैयारियां शुरू हो गई है, दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया चल रही है, मेला प्राधिकरण दुकानों को व्यवस्थित करने में लगा है, इस बीच प्रशासन ने मेले की शेष बची दुकानों के आवंटन के लिए एक बार फिर पोर्टल खोलने का निर्णय लिया हैं वहीं दुकान ब्लैक करने पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाने का फैसला लिया है। श्रीमंत माधवराव सिंधिया ग्वालियर व्यापार मेले में वर्ष 2025-26 में दुकानों के आवंटन के लिये दुकान आवंटन का कार्य एमपी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से 14 अक्टूबर से शुरू किया गया था। निर्धारित तिथि 10 नवम्बर 2025 तक मेले में केवल 60 प्रतिशत दुकानों का आवंटन ऑनलाइन हुआ है। इसलिए प्रशासन ने एक बार फिर पोर्टल ओपन करने के निर्णय लिया है। 14 से 21 नवम्बर तक खुलेगा एमपी ऑनलाइन पोर्टल  मेला प्रशासन ने तय किया है कि मेले की शेष 40 प्रतिशत दुकानों के आवंटन के लिये 14 नवम्बर से 21 नवम्बर 2025 तक एमपी ऑनलाइन पोर्टल खोला जायेगा। इस अवधि मेले में दुकान लगाने के इच्छुक दुकानदार एमपी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवंटन के लिये आवेदन कर सकते हैं। स्वच्छता में लापरवाही: 5 कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी, 5 निलंबित, 4 आउटसोर्स सफाई श्रमिकों की सेवा समाप्त दुकान ब्लैक की तो लगेगा 1 लाख रुपये जुर्माना  ग्वालियर संभाग आयुक्त/मेला प्राधिकरण अध्यक्ष  मनोज खत्री ने गुरुवार को ग्वालियर व्यापार मेला के संचालन के संबंध में समीक्षा करते हुए निर्देशित किया कि मेले की दुकानों के लिये अंतिम बार 21 नवम्बर तक की अवधि निर्धारित की गई है। इसके बाद ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया समाप्त हो जायेगी। संभाग आयुक्त ने बैठक में यह भी निर्देश दिए हैं कि मेले की दुकानों को ब्लैक करने की शिकायत भी प्राप्त होती है। किसी भी दुकानदार द्वारा अगर दुकान अन्य किसी को ब्लैक में या किराए पर दी जाती है तो आवंटित दुकानदार पर एक लाख रुपए की पैनल्टी लगाई जायेगी। साथ ही 5 वर्ष के लिये दुकान आवंटन ब्लैक लिस्ट में दर्ज किया जायेगा। इन व्यवस्थाओं को भी दुरुस्त रखने के निर्देश  संभाग आयुक्त ने मेले की व्यवस्थाओं के संबंध में विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने मेले की साफ-सफाई के संबंध में नगर निगम के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि तत्परता के साथ साफ-सफाई का कार्य किया जाए। इसके साथ ही प्रचार-प्रसार, विद्युत व्यवस्था, ऑटोमोबाइल सेक्टर, झूला सेक्टर की व्यवस्थाओं के संबंध में भी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

बुमराह की तूफानी गेंदबाज़ी: अश्विन का रिकॉर्ड टूटा, अगले निशाने पर कपिल देव और अनिल कुंबले

नई दिल्ली इंडिया वर्सेस साउथ अफ्रीका दो टेस्ट मैच की सीरीज का पहला मुकाबला कोलकाता के ईडन गार्डन्स मैदान पर खेला जा रहा है। इस मैच में मेहमान टीम के कप्तान टेंबा बावूमा ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया है। एडन मार्करम और रायन रिकल्टन की सलामी जोड़ी ने साउथ अफ्रीका को तूफानी शुरुआत दी और पहले 10 ओवर के अंदर स्कोरबोर्ड को 50 के पार पहुंचा दिया। इस जोड़ी को जसप्रीत बुमराह ने 11वें ओवर में रायन रिकल्टन को बोल्ड करके तोड़ा। इस विकेट के साथ बुमराह पूर्व स्पिनर आर अश्विन का एक गजब का रिकॉर्ड तोड़ने में कामयाब रहे। यह रिकॉर्ड है भारतीय गेंदबाज द्वारा करियर में बोल्ड के रूप में सबसे ज्यादा विकेट लेने का। जसप्रीत बुमराह के करियर में यह 152वां मौका था, जब उन्होंने किसी बल्लेबाज को बोल्ड किया हो। वहीं अश्विन ने यह कारनामा 151 बार किया था। अब जसप्रीत बुमराह इस लिस्ट में तीसरे पायदान पर पहुंच गए हैं। उनके आगे दो दिग्गज कपिल देव और अनिल कुंबले हैं। कुंबले ने अपने करियर में सबसे अधिक 186 विकेट बोल्ड करके लिए। भारतीयों द्वारा लिए गए सबसे अधिक बोल्ड विकेट- 186 – अनिल कुंबले 167 – कपिल देव 152 – जसप्रीत बुमराह* 151 – आर अश्विन 145 – रवींद्र जडेजा 142 – जहीर खान 136 – मोहम्मद शमी 125 – जवागल श्रीनाथ

एकादशी व्रत पर तुलसी की विशेष महिमा: इन गलतियों से रहें दूर, वरना रुष्ठ हो सकती हैं मां लक्ष्मी

हर माह में कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत रखा जाता है. हर माह में दो एकादशी व्रत पड़ते हैं. मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी उत्पन्ना एकादशी कहलाती है, क्योंकि मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी पर ही जगपालक भगवान विष्णु के शरीर से एकादशी देवी उत्पन्न हुईं थीं. इसके बाद उन्होंने मुर नाम के दैत्य का सिर काट दिया था. उत्पन्ना एकदशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के पूजन और व्रत का विधान है. इस दिन एकादशी देवी की भी पूजा होती है. इस दिन व्रत और पूजन से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं. जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं. इस दिन तुलसी से जुड़े नियमों का पालन का पालन भी अवश्य करना चाहिए. मान्यता है कि इस दिन अगर तुलसी से जुड़े इन नियमों का पालन नहीं किया जाता तो मां लक्ष्मी रूठ जाती हैं. उत्पन्ना एकादशी कब है? इस साल मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 15 नवंबर को सुबह 12 बजकर 49 मिनट पर शुरू हो रही है. इस तिथि का समापन अगले दिन 16 नवंबर को 02 बजकर 37 मिनट पर होगा. चूंकि 15 नवंबर को सूर्योदय के समय एकादशी तिथि की शुरुआत हो रही है, इसलिए उत्पन्ना एकादशी का व्रत इस बार 15 नवंबर यानी कल रखा जाएगा. उत्पन्ना एकदशी पर तुलसी से जुड़ी इन बातों का रखें ध्यान तुलसी को जल न दें हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ये कहा जाता है कि तुलसी माता एकादशी के दिन भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. धर्म शास्त्रों में इस दिन तुलसी माता को जल देना वर्जित है, क्योंकि इस दिन जल देने से तुलसी माता का व्रत खंडित होता है. तुलसी के पत्ते न तोड़ें और सफाई का ध्यान दें एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने के लिए भी मना किया जाता है. साथ ही एकादशी के दिन तुलसी के पौधे के पास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखाना चाहिए. मान्यता है कि तुलसी के पास गंदगी होने से घर में मां लक्ष्मी वास नहीं करतीं. तुलसी को गंदे या जूठे हाथ से न छुएं एकादशी के दिन भूलकर भी तुलसी को गंदे या जूठे हाथों से नहीं छूना चाहिए. माना जाता है कि गंदे या फिर जूठे हाथों से अगर तुलसी को छुआ जाता है, तो इससे अशुभ फलों की प्राप्ति होती है.

T20 ट्राई सीरीज पर संकट? पाकिस्तान ने BCB को दिया करारा झटका

कराची  पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड यानी पीसीबी ने दिसंबर में श्रीलंका के साथ त्रिकोणीय टी20 सीरीज में हिस्सा लेने के बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) के निमंत्रण को ठुकरा दिया है। इसके पीछे का कारण भी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने बताया है। पीसीबी के एक अधिकारी ने बताया कि बीसीबी अगले साल की शुरुआत में होने वाले टी20 विश्व कप की तैयारी के लिए पाकिस्तान और श्रीलंका के साथ त्रिकोणीय सीरीज की मेजबानी करना चाहता था, लेकिन खिलाड़ियों के कार्यभार को नियंत्रित करने के लिए पीसीबी को इस प्रस्ताव को ठुकराना पड़ा।   पीसीबी के अधिकारी ने कहा, ‘‘ हमने पहले ही बाबर आजम, मोहम्मद रिजवान, शाहीन शाह अफरीदी, हारिस रऊफ, शादाब खान को दिसंबर-जनवरी में ऑस्ट्रेलिया में बिग बैश लीग में भाग लेने के लिए एनओसी की अनुमति दे दी है, जबकि फखर जमां जैसे कुछ अन्य खिलाड़ी इंटरनेशनल लीग टी20 में खेल रहे हैं।’’ हालांकि, उन्होंने कहा कि दिसंबर और जनवरी में पाकिस्तान की कोई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता नहीं थी, लेकिन कुछ खिलाड़ियों को खासकर बिग बैश में भाग लेने की अनुमति देने का निर्णय पहले ही लिया जा चुका है। बता दें कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को हाल ही में श्रीलंका का साथ मिला है, क्योंकि इस्लामाबाद कोर्ट परिसर में हुए फिदायीन हमले के बाद खिलाड़ियों ने सीरीज छोड़ने का फैसला किया था। हालांकि, श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने खिलाड़ियों से पाकिस्तान में ही रहने के लिए और सीरीज खेलने के लिए कहा है। बांग्लादेश के साथ ट्राई सीरीज के लिए पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को इनकार नहीं करना चाहिए था। जो खिलाड़ी इस समय टीम से बाहर हैं या जो युवा हैं, उन्हें मौका दिया जा सकता था, लेकिन पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड इस तरह से सोचता ही नहीं है। पाकिस्तान को अभी जिम्बाब्वे और श्रीलंका के साथ त्रिकोणीय सीरीज खेलनी है। दिसंबर के महीने में पाकिस्तान में कोई क्रिकेट देखने को नहीं मिलेगी।  

हरियाणा की रिया को गूगल में मिला 57 लाख रुपये का पैकेज

चंडीगढ़  भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी की प्रतिभाशाली छात्रा रिया अरोड़ा ने अपनी मेहनत व लगन से नया मुकाम हासिल किया है। हरियाणा के सोनीपत की रहने वाली रिया गूगल में साफ्टवेयर इंजीनियर हैं। 22 साल की उम्र में रिया को 57 लाख रुपये का वार्षिक पैकेज मिला है। खास बात यह है कि रिया का चयन डिग्री पूरी होने से चार महीने पहले हो गया था। वीरवार को आयोजित 13वें दीक्षा समारोह में रिया को राष्ट्रपति स्वर्ण पदक व संस्थान रजत पदक से सम्मानित किया गया। उनकी यह उपलब्धि न केवल संस्थान के लिए गर्व का विषय है, बल्कि देशभर की बेटियों के लिए प्रेरणा भी बनी है।  रिया की आरंभिक शिक्षा शिवा शिक्षा सदन, सोनीपत में हुई। 12वीं के बाद उन्हें आइआइटी मंडी में प्रवेश मिला था। अपनी सफलता पर रिया ने कहा कि संस्थान में उनका सफर शानदार रहा। जो कुछ सीखा, यहीं आकर सीखा। राष्ट्रपति पदक पाना एक सपने जैसा लगता है। मेहनत व आत्मविश्वास से हर कोई इस मुकाम तक पहुंच सकता है। उन्होंने जूनियर्स को संदेश दिया कि अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें, मेहनत करें और खुद पर भरोसा रखें।  रिया के पिता डा. हरिंद्र पाल व माता गुंजन अरोड़ा ने बेटी की उपलब्धि पर गर्व जताते हुए कहा कि रिया ने परिवार व देश का नाम रोशन किया है। उसकी मेहनत और समर्पण ने यह मुकाम दिलाया है।    

प्रचंड बहुमत पर मीठा जश्न: सीएम सैनी बोले— जलेबी की तरह बनी रहे जीत की मिठास

सोनीपत  सोनीपत के राई स्थित राजीव गांधी एजुकेशन सिटी में राज्य स्तरीय बलिदान दिवस पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया और इस मौके पर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। इस मौके पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंच से दादा कुशाल सिंह के बलिदान दिवस पर शत-शत नमन किया। इसके साथ बिहार चुनाव में एनडीए का प्रचंड बहुमत मिलने पर सीएम सैनी ने जलेबी बांटकर मुंह मिठा किया।   इसके साथ सोनीपत के राई में उन्होंने धर्म और देश की रक्षा के लिए अनेकों शहीदों ने अपने बलिदान दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुशाल सिंह की शहादत हरियाणा की पहचान बनी है। कुशाल सिंह के जीवन पर बनी फिल्म बनाने का मुख्य उद्देश्य उनके जीवन के बारे में सबको बताना है। मुगलों के राज में धर्मपरिवर्तन के खिलाफ गुरु तेग बहादुर ने हमेशा से ही लड़ाई लड़ी थी। नायब सिंह सैनी ने गुरू तेग बहादुर और बाबा कुशाल सिंह के बलिदान पर प्रकाश डाला और कहा कि जब मानवता पर संकट आएगा तब हरियाणा का जवान बलिदान देने से पीछे नहीं हटता हैं। वो बलिदान केवल धर्म नहीं बल्कि राष्ट्रीय चेतना के लिए भी था। 25 तारीख को गुरु तेग बहादुर पर कुरुक्षेत्र में एक कार्यक्रम आयोजित हो रहा है, जिसमें देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिरकत करेंगे।हिंद की चादर कार्यक्रम के तहत चार यात्राएं चल रही है, जिनका समापन 25 को कुरुक्षेत्र में होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि 1984 के दंगों में पीड़ित 121 परिवारों के एक सदस्य को मिलेगी सरकारी नौकरी देने का हमारी सरकार का निर्णय है। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि यमुनानगर में बना रहे मेडिकल कॉलेज का नाम हिंद की चादर श्री गुरु तेग बहादुर जी के नाम पर रखा गया हैं। दादा कुशाल सिंह दहिया जी ने जिस धर्म, निष्ठा और देशभक्ति का परिचय दिया वह हर दिल के लिए बन प्रेरणा चुका है। जीटी रोड से बड़खालसा जाने वाली रोड का नाम दादा कुशाल सिंह दहिया मार्ग किया जाएगा। बड़खालसा सामुदायिक केंद्र का नाम बदलकर अमर शहीद दादा कुशाल सिंह दहिया किया जाएगा। गांव बड़खालसा में दादा कुशाल सिंह दहिया के शहीदी स्मारक का जीर्णोधार भी किया जाएगा। गांव दिपालपुर में ग्राम पंचायत द्वारा उपलब्ध कराई गई भूमि पर महिलाओं एवं युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट पार्क भी बनाया जाएगा।  इस पार्क के निर्माण के लिए एक करोड़ रुपये की राशि का खर्च आएगा। गांव दिपालपुर में कम्युनिटी सेंटर का भी निर्माण करवाया जाएगा, जिस पर आएगी 65 लाख रुपये की लागत आएगी। राई विधानसभा के 25 किलोमीटर के रास्तों को खेत खलिहान योजना के तहत पक्का करवाया जाएगा। पौंड अथॉरिटी द्वारा निरीक्षण के बाद तालाबों का विस्तारीकरण एवं सौंदर्यकरण करवाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बड़खालसा में विकास कार्यों के लिए 31 लाख रुपए देने घोषणा भी की है।  

PK का आगे क्या होगा राजनीतिक सफ़र? उनकी हार के 5 बड़े कारण हुए उजागर

पटना बिहार विधानसभा चुनावों में प्रशांत किशोर की नई पार्टी जनसुराज पार्टी (जेएसपी) की उम्मीदें धराशायी हो गईं। शुरुआती रुझानों में न केवल उन्हें कोई सीट नहीं मिली, बल्कि उनके सबसे मजबूत उम्मीदवार भी किसी मुकाबले में दिखाई नहीं दिए। चुनावी मैदान में किशोर न तो एनडीए को चुनौती दे पाए, न ही महागठबंधन को प्रभावित कर पाए -मतलब कि वे उम्मीद के मुताबिक वोटकटवा भी नहीं बन सके। अब सवाल यह उठता है कि जो उन्होंने जोर-शोर से कहा था- अगर जनता दल यूनाइटेड 25 से अधिक सीटें जीत गया तो मैं संन्यास ले लूंगा- क्या किशोर उस वादे पर कायम रहेंगे? बिहार विधानसभा चुनावों के नतीजों ने प्रशांत किशोर और उनकी नई राजनीतिक मुहिम जनसुराज पार्टी (जेएसपी) के लिए उम्मीदों के बुलंद पंखों को तोड़ दिया है। शुरुआती रुझानों में पार्टी एक भी सीट हासिल नहीं कर सकी, जबकि एग्जिट पोल्स ने 0-5 सीटों का अनुमान लगाया था। खास बात यह रही कि पार्टी के सबसे मजबूत उम्मीदवार भी किसी मुकाबले में नजर नहीं आए। जनसुराज पार्टी के जमावड़े और सभाओं में उमड़ने वाली भीड़ ने शुरुआती तौर पर यह भरोसा दिया था कि किशोर किसी न किसी रूप में बिहार की राजनीति में सेंध लगाने में सक्षम हैं। लेकिन चुनाव परिणाम यह साबित करते हैं कि जमीन पर उनकी पकड़ लगभग शून्य रही। अब सवाल उठता है कि प्रशांत किशोर अपने चुनाव प्रचार के दौरान किए गए वादों पर खरे उतरेंगे या नहीं। संन्यास का वादा और विफलता चुनाव प्रचार के दौरान किशोर ने नेशनल टीवी पर दावा किया था कि अगर जनता दल यूनाइटेड 25 से अधिक सीटें जीतता है तो वह राजनीति से संन्यास ले लेंगे। यह वादा इतनी आत्मविश्वास के साथ किया गया था कि उन्होंने पत्रकार से कहा कि यह रिकॉर्डिंग रख लें। अब परिणाम सामने हैं और किशोर के वादे के पालन पर राजनीतिक दबाव बढ़ गया है। हार के पीछे पांच प्रमुख कारण:- 1 तेजस्वी यादव को चुनौती देने से पीछे हटना जेएसपी की हार का सबसे बड़ा कारण प्रशांत किशोर का तेजस्वी यादव को चुनौती न देना रहा। शुरुआती घोषणा में उन्होंने राघोपुर से मैदान में उतरकर तेजस्वी की ‘परिवारवाद’ और वादों की पोल खोलने की बात कही थी। लेकिन आखिरकार यह मुकाबला नहीं हुआ, जिससे उनका वैकल्पिक नेता बनने का मौका गंवा गया। 2- मोदी और शाह के खिलाफ खुलकर नहीं बोले किशोर ने केंद्रीय नेताओं नरेंद्र मोदी और अमित शाह के खिलाफ सीधे तौर पर हमला नहीं किया। विपक्ष के कई नेता चुनावी मुद्दों पर उनके विरोध में जहर उगल रहे थे, लेकिन किशोर इस लहर का हिस्सा नहीं बने। जनता ने यह महसूस किया कि जेएसपी बीजेपी की ‘बी टीम’ जैसी भूमिका निभा रही है। 3 – शराबबंदी के खिलाफ विवादास्पद रुख किशोर ने शराबबंदी समाप्त करने की घोषणा कर महिलाओं और परिवारों की नाराजगी झेली। बिहार में महिलाओं के लिए यह नीति सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता का प्रतीक मानी जाती है। किशोर का यह कदम युवाओं को लुभाने की कोशिश में महिलाओं के विरोध को जन्म देने वाला साबित हुआ। 4- जाति और धर्म के आधार पर टिकट वितरण किशोर ने चुनाव से पहले घोषणा की थी कि उनकी पार्टी जाति और धर्म से ऊपर उठकर राजनीति करेगी। लेकिन टिकट वितरण में वही पैटर्न अपनाया गया, जिससे उनकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा हुआ। 5- NDA नेताओं के खिलाफ माहौल नहीं बना पाए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और मंत्री अशोक चौधरी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के बावजूद किशोर ने इसे केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित रखा। जनता तक इस मुद्दे का प्रभाव नहीं पहुंच पाया।

बिहार चुनाव परिणाम: BJP को मिला नया रास्ता, नीतीश पर निर्भरता खत्म!

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों ने सारे एग्जिट पोल्स को फेल कर दिया है। कुल 11 एग्जिट पोल आए थे, जिनमें से एक पोल डायरी ने ही एनडीए को 184 से 206 तक सीटें मिलने का अनुमान जताया था। अब आंकड़ा 200 पहुंच गया है तो इस एग्जिट पोल की चर्चा है। इस बीच सबसे ज्यादा चर्चा भाजपा के प्रदर्शन को लेकर है। भाजपा ने कुल 101 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 91 पर जीत हासिल हो गई है। इस आंकड़े के साथ भाजपा बिहार में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। भाजपा ने 2010 में इतनी ही सीटें पाई थीं, लेकिन तब सबसे बड़ी पार्टी जेडीयू थी। इस बार हालात अलग हैं।   जेडीयू ने भी शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन 79 सीटें लेकर भाजपा से 12 सीट पीछे है। इस तरह भाजपा की स्थिति ऐसी बन रही है कि उसके लिए जेडीयू के बिना भी बिहार की सत्ता में पहुंचने के रास्ते खुल रहे हैं। यह रास्ता चिराग पासवान की लोजपा-आर, जीतनराम मांझी की HAM और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोकमोर्चा को साथ लेकर बनता है। दरअसल बिहार विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 122 है। अब अकेले भाजपा के पास 91 है तो खुद को पीएम मोदी का हनुमान कहने वाले चिराग पासवान के पास भी 21 सीटें हैं। दोनों मिलकर 112 हो जाते हैं। फिर HAM की 5 और RLM की 4 सीटों को मिलाकर 121 नंबर होते हैं। बसपा का भी एक कैंडिडेट जीतता दिख रहा है। यदि बसपा का समर्थन मिल जाए तो बहुमत ही हासिल हो जाएगा। यही नहीं दूसरे दलों के कुछ विधायकों को सदन से गैर-हाजिर कराकर भी बहुमत के नंबर हासिल किए जा सकते हैं। हालांकि यह सिर्फ एक विकल्प है और भाजपा शायद ही ऐसा करना चाहेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि नीतीश कुमार अब भी बिहार में एक फैक्टर हैं। इसके अलावा यदि वह चाहें तो वह भी सरकार बनाने का दम रखते हैं। यही नहीं ऐसी सरकार में वह कंफर्ट में भी होंगे क्योंकि यदि भाजपा को छोड़कर वह निकले तो कम ताकत वाली आरजेडी उनके साथ होगी। नीतीश कुमार के पास क्या हैं रास्ते, क्या कहता है आंकड़ा उनकी सीटों के साथ यदि आरजेडी की 28, कांग्रेस की 5, ओवैसी की 5 और अन्य की 9 सीटों को मिला लिया जाए तो वह भी अलग होकर सरकार बना सकते हैं। इस तरह यह नतीजा बेहद रोचक है और आंकड़ा मजेदार हो गया है। हालांकि फर्क यह है कि नीतीश कुमार को कई ऐसे दलों को साधना होगा, जो अतिवादी हैं और नीतीश की उदार विचारधारा से मेल नहीं खाते, जैसे असदुद्दीन ओवैसी।