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पीएम मोदी की सराहना करते हुए हसीना के बेटे ने कहा—भारत ने मेरी मां को सुरक्षित रखा

नई दिल्ली / ढाका बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने भारत और पीएम मोदी की तारीफ की है. सजीब वाजेद ने पिछले साल बांग्लादेश में हुए राजनीतिक उथल-पुथल के दौरान अपनी मां शेख हसीना की हत्या के प्रयास को रोकने का क्रेडिट भारत को दिया है. शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने कहा कि भारत की वजह से उनकी मां की जान बची है. उन्होंने यूनूस सरकार और उनकी बांग्लादेशी न्यायिक प्रक्रिया की आलोचना की है. बांग्लादेश में शेख हसीना को मौत की सजा सुनाई गई है. अमेरिका के वर्जीनिया में समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने बांग्लादेश की मौजूदा यूनूस सरकार पर कानूनों में हेरफेर करने, जजों को बर्खास्त करने और शेख हसीना को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ‘भारत हमेशा एक अच्छा दोस्त रहा है. संकट के समय भारत ने मूल रूप से मेरी मां की जान बचाई है. अगर वह बांग्लादेश नहीं छोड़तीं, तो आतंकवादियों ने उन्हें मारने की योजना बनाई थी.’ ‘मोदी सरकार का आभारी’     उन्होंने शेख हसीना के अगस्त 2024 में भारत भागने का जिक्र करते हुए कहा कि मैं प्रधानमंत्री मोदी की सरकार का हमेशा आभारी रहूंगा कि उन्होंने मेरी मां की जान बचाई. बता दें कि 5 अगस्त को शेख हसीना को बांग्लादेश छोड़कर भागना पड़ा था. उस वक्त प्रदर्शनकारी उनके आवास तक घुस गए थे. आनन-फानन में वो जान बचाकर भारत आई थीं. तब से वह भारत में ही रह रही हैं. यूनुस पर खूब बरसे हसीना के बेटे शेख हसीना को मौत की सजा वाली कार्यवाही को बेटे वाजेद ने एक राजनीतिक नाटक बताते हुए खारिज कर दिया. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने हर चरण में उचित प्रक्रिया को दरकिनार किया है. उन्होंने कहा, ‘प्रत्यर्पण के लिए न्यायिक प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है. बांग्लादेश में एक सरकार है जो निर्वाचित नहीं है, असंवैधानिक और अवैध है. मेरी मां को दोषी ठहराने के लिए उन्होंने कानूनों में संशोधन किया ताकि उनके मुकदमे को तेजी से निपटाया जा सके. इसलिए ये कानून अवैध रूप से संशोधित किए गए.’ ‘जजों को बदला गया’ उन्होंने आगे कहा, ‘मेरी मां को अपने बचाव के वकीलों को नियुक्त करने की अनुमति नहीं दी गई. उनके वकीलों को अदालतों में भी प्रवेश नहीं करने दिया गया.’ उन्होंने आगे दावा किया कि न्यायाधिकरण की संरचना को एक पूर्वनिर्धारित फैसले को सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया गया था. शेख हसीना के बेटे ने कहा, ‘मुकदमे से पहले अदालत में सत्रह जजों को बर्खास्त कर दिया गया, नए न्यायाधीश नियुक्त किए गए, जिनमें से कुछ को बेंच पर कोई अनुभव नहीं था और वे राजनीतिक रूप से जुड़े हुए थे. इसलिए कोई उचित प्रक्रिया नहीं थी. प्रत्यर्पण के लिए उचित प्रक्रिया होनी चाहिए.’

कौन था रावण अपने पिछले जन्म में, और क्यों मिला असुर योनि का श्राप?

त्रेता युग में रावण का वध प्रभु श्रीराम ने किया था. रावण लंका का राजा और सबसे बड़ा शिव जी का भक्त था. उसने तीनों लोकों पर विजय प्राप्त कर ली थी, इसीलिए उसको त्रिलोक विजेता कहा जाता था. रावण बहुत ज्ञानी था, लेकिन धर्म शास्त्रों के अनुसार, अपने पिछले जन्म में रावण राक्षस नहीं था. धर्म शास्त्रों और मान्यताओं के अनुसार, चलिए जानते हैं कि रावण अपने पूर्व जन्म में कौन था और उसे असुर योनि कैसे प्राप्त हुई? पौराणिक कथाओंं और मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु के दो द्वारपाल थे. एक का नाम था जय और दूसरे का विजय. दोनों हमेशा बैकुंठ के द्वार पर खड़े रहते थे. एक बार सनकादि मुनि श्री हरि विष्णु के दर्शन के लिए पधारे, लेकिन जय-विजय ने उनको रोक लिया. इससे सनकादि मुनि क्रोध में आए और उन दोनों को राक्षस योनि में जन्म लेने का श्राप दे दिया. इस तरह मिली तीन जन्म तक राक्षस योनि उसी समय वहां विष्णु आ गए और उन्होंने मुनि से जय-विजय को क्षमा दान देने और श्राप से मुक्त करने की प्रार्थना की. तब मुनि ने श्री हरि से कहा कि इन दोनों के कारण मुझे आपके दर्शन के लिए तीन क्षण देर हुई है, इसलिए इन दोनों को तीन जन्म तक राक्षस योनि मिलेगी. साथ ही मुनि ने कहा कि तीनों जन्म में इन दोनों का अंत भगवान विष्णु के हाथों ही होगा. तीनों ही बार श्री हरि के हाथों हुआ अंत इसके बाद जय-विजय अपने पहले जन्म में हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यपु के रूप में मृत्यु लोक में आए. भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर हिरण्याक्ष का अंत किया. इसके बाद नरसिंह अवतार लेकर हिरण्यकश्यपु का वध किया. इसके बाद जय और विजय अपने दूसरे जन्म में त्रेता युग में रावण- कुंभकरण नाम के असुर बने. उस समय भगवान विष्णु ने श्रीराम अवतार में दोनों का वध किया. आखिर में द्वापर युग में जय और विजय दंत और शिशुपाल नाम के रूप में जन्मे. बताया जाता है कि जाता है कि शिशुपाल और दंतवक्र दोनों ही भगवान श्रीकृष्ण की बुआ के पुत्र थे. इनकी बुराइयों के चलते इस युग में इनका अंत श्री हरि के अवतार श्रीकृष्ण ने किया.

DK का बड़ा आरोप: गंभीर इस प्लेयर को सही ट्रीट नहीं कर रहे, टीम मैनेजमेंट पर उठे सवाल

नई दिल्ली  साउथ अफ्रीका के खिलाफ कोलकाता टेस्ट मैच हारने के बाद टीम इंडिया के मैनेजमेंट पर कई सवाल उठ रहे हैं, जिनमें एक मुद्दा ये भी है कि नंबर तीन पर साई सुदर्शन की जगह वॉशिंगटन सुंदर को मौका क्यों दिया गया? भले ही वॉशिंगटन सुंदर ने भारतीय टीम के लिए टेस्ट मैचों में बल्ले से कुछ सार्थक योगदान दिया है। यहां तक कोलकाता टेस्ट मैच में भी कुछ रन बनाए, लेकिन वे इससे पहले कर निचले क्रम में खेले थे। इसको लेकर पूर्व भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज दिनेश कार्तिक ने हेड कोच गौतम गंभीर से कुछ सवाल किए हैं। भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर को ऑलराउंडर्स से बहुत लगाव है और वे वॉशिंगटन सुंदर को बहुत ज्यादा रेट करते हैं, लेकिन एकाएक बल्लेबाजी क्रम में इतना ऊपर भेजने का फैसला वाकई चौंकाने वाला था। सुंदर ने कोलकाता टेस्ट मैच में पहली पारी में 29 और दूसरी पारी में 31 रन बनाए। इस मैच में उनके ही सबसे ज्यादा रन भारत के लिए थे, लेकिन कार्तिक का मानना ​​है कि इस भूमिका के लिए सुंदर को अत्यधिक बल्लेबाजी अभ्यास करना होगा, जिसका उनकी गेंदबाजी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। दिनेश कार्तिक ने क्रिकबज के एक वीडियो में कहा, "टेस्ट खिलाड़ी वॉशिंगटन सुंदर को आप किस तरह देखते हैं? क्या वो गेंदबाज हैं और बल्लेबाजी भी कर सकते हैं? अब अगर आप उन्हें तीसरे नंबर पर भेज रहे हैं, तो आप उन्हें यही बता रहे हैं कि उन्हें बल्लेबाजी पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। जैसे ही वह अभ्यास में लंबे समय तक बल्लेबाजी करने लगते हैं तो आप महसूस करेंगे कि उनका गेंदबाजी का अभ्यास कम हो गया, क्योंकि दोनों में अच्छा होना शारीरिक रूप से असंभव है।" 'बड़ी पारी की उम्मीद सुंदर से है' कार्तिक ने वॉशिंगटन सुंदर की इस पोजिशन को पेचीदा बताया, क्योंकि सुंदर की तीसरे नंबर पर भूमिका केवल एक अस्थायी समाधान लगती है। तमिलनाडु के इस क्रिकेटर को मुख्य रूप से एक गेंदबाज के रूप में देखा जाता है जो बल्ले से भी उपयोगी साबित हो सकता है, लेकिन गौतम गंभीर ने उनकी भूमिका को एक नया आयाम देने का काम किया है। कार्तिक ने कहा, "ऐसे में कहा जा सकता है कि संदेश बिल्कुल स्पष्ट है कि हम आपसे बड़ी पारी की उम्मीद कर रहे हैं। इससे आगे चलकर उनकी गेंदबाजी पर असर पड़ सकता है। यह बहुत पेचीदा मामला है।"

भोपाल:मुंह पर गमछा बांधकर कैफे में टूटे 20 बदमाश, तलवार-डंडों से मचाई दहशत

 भोपाल राजधानी भोपाल में एक बार फिर बदमाशों के हौसले बुलंद हो गए हैं. शहर के होशंगाबाद रोड स्थित मैजिक स्पॉट कैफे में बदमाशों ने जमकर तोड़फोड़ की. पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है.  मिसरोद थाना इलाके में मैजिक स्पॉट कैफे संचालक सक्षम गोस्वामी ने बताया कि मंगलवार शाम 7:00 बजे करीब 20 से 25 बदमाश मुंह पर कपड़ा बांध अपने हाथों में डंडे, तलवार, बेसबॉल डंडा लेकर आए और दुकान का फर्नीचर, कांच का सामान फोड़कर चले गए. एक कर्मचारी को हाथ में तलवार भी लगी है. साथ ही एक ग्राहक को डंडा मारा था, जिससे उसकी उंगली फैक्चर हो गई.  कैफे संचालक ने बताया, ''मेरा कभी किसी से कोई भी विवाद नहीं हुआ. पुलिस में FIR दर्ज कराई है, जिसमें पुलिस ने बलवा, तोड़फोड़ मारपीट की धाराएं लगाकर हमको मदद का आश्वासन दिया है. ये गुंडे हाथों में तलवारें, डंडे और अन्य हथियार लेकर कैफे के अंदर घुस आए. उन्होंने वहां जमकर तोड़फोड़ शुरू कर दी. कैफे का काउंटर तोड़ दिया, कांच के शीशे चकनाचूर कर दिए, फर्नीचर को तहस-नहस कर दिया. डिस्प्ले में रखी चीजें और मशीनें भी नहीं बख्शीं. सब कुछ तोड़ते-फोड़ते हुए ये बदमाश चिल्ला रहे थे और डर का माहौल बना रहे थे. कैफे में मौजूद कर्मचारियों को भी इन गुंडों ने नहीं छोड़ा. उन्होंने स्टाफ के साथ मारपीट की. डंडों और तलवारों से हमला किया, जिससे कई कर्मचारी घायल हो गए. कैफे में उस समय कुछ ग्राहक भी मौजूद थे. जैसे ही तोड़फोड़ शुरू हुई, ग्राहक अपनी जान बचाकर इधर-उधर भागने लगे. कोई बाहर की ओर भागा, तो कोई छिपने की कोशिश करने लगा. पूरा कैफे अफरा-तफरी से भर गया. यह पूरी घटना कैफे में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई. वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे नकाबपोश बदमाश एक-एक करके चीजें तोड़ रहे हैं. काउंटर पर कूदकर सामान फेंक रहे हैं, ग्लास फोड़ रहे हैं और फर्नीचर पर डंडे बरसा रहे हैं. यह फुटेज सामने आने के बाद इलाके में दहशत फैल गई. लोग सहम गए कि इतनी बड़ी संख्या में गुंडे दिनदहाड़े कैसे हमला कर सकते हैं. कैफे के मालिक बहुत डर गए. उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत की. मिसरोद थाने में जाकर उन्होंने एफआईआर दर्ज करवाई. मालिक ने बताया कि यह हमला किसी पुरानी रंजिश या फिर जबरन वसूली की वजह से हो सकता है. उन्होंने कुछ नामों का जिक्र किया. एफआईआर में योगी, निखिल, अभिषेक और कई अन्य लोगों के नाम शामिल किए गए. पुलिस ने इन नामों पर मुकदमा दर्ज कर लिया है. अब पुलिस जांच कर रही है. सीसीटीवी फुटेज की मदद से बदमाशों की पहचान करने की कोशिश हो रही है. इलाके में लोगों का कहना है कि गुंडागर्दी बढ़ रही है, पुलिस को सख्ती दिखानी चाहिए. नया कैफे खुला था, लोग खुशी-खुशी आते थे, लेकिन इस घटना ने सबको डरा दिया. उम्मीद है कि जल्दी ही सभी आरोपी पकड़े जाएंगे और कैफे मालिक को न्याय मिलेगा.यह घटना बताती है कि शहर में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है. आम लोग सुरक्षित महसूस करें, इसके लिए पुलिस को सक्रिय रहना होगा. दो संदेही उठाए, पूछताछ कर रही पुलिस डीसीपी विवेक सिंह ने बताया कि एफआईआर में जिन नामों का जिक्र था, उनमें से दो को राउंड अप कर लिया गया है और उनसे पूछताछ जारी है। हमने 2 संदेहियों को उठाया है। उनके बयान लिए जा रहे हैं। अभी वजह स्पष्ट नहीं है, रंजिश थी या कोई पुराना विवाद, इसकी पड़ताल की जा रही है। तीन थानों की संयुक्त टीमें लगीं हमले की गंभीरता देखते हुए पुलिस ने तीन थानों की संयुक्त टीमें लगाई हैं। जिसमें मिसरोद, बागसेवनिया और कटारा हिल्स शामिल हैं विवेक सिंह ने बताया, तीनों थानों की टीमें अलग-अलग एंगल पर जांच कर रही हैं। फुटेज, शक के आधार, रूट मैप, और संभावित विवादों को लेकर जांच की जा रही है। हमलावरों ने अपने चेहरे बांध रखे थे, जिससे पहचान में दिक्कत हो रही है। लेकिन पुलिस को कुछ क्लू मिले हैं, जिन पर टीमें काम कर रही हैं। कैफे संचालक सक्षम गिरि ने योगी, निखिल, अभिषेक समेत पांच नामजद और अज्ञात पर एफआईआर दर्ज कराई है।   डीसीपी जोन 2 विवेक सिंह ने बताया कि मैजिक स्पॉट कैफे में कुछ बदमाशों ने तोड़फोड़ की है. कैफे संचालक शुभम गोस्वामी ने थाने जाकर FIR दर्ज कराई है. तत्काल पुलिस ने मारपीट, बलवा, आर्म्स एक्ट की धारा लगाकर जांच शुरू कर दी है.  पुलिस अफसर ने बताया कि कई थानों की टीम बदमाशों को पकड़ने के लिए लगाई हुई है. कैफे मालिक की तरफ से अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उसकी किसी से पुरानी रंजिश है या नहीं. कैफे संचालक ने कुछ संदेहियों के फोटो दिए हैं, उसी के आधार पर दो से तीन लोगों को पुलिस ने राउंडअप किया है और उनसे पूछताछ की जा रही है.

LoC के पास उरी में आतंकवादियों पर सेना की कार्रवाई, एनकाउंटर अभी भी जारी

उरी  आतंकी साजिश का पर्दाफाश होने के बाद अब जम्मू पुलिस जल्द ही किरायेदारों को लेकर नया मुहिम शुरू करने जा रही है. किरायेदार सत्यापन प्रक्रिया को सुगम बनाने और लोगों की थाने आने-जाने की आवश्यकता को कम करने के लिए एक विशेष वेब पोर्टल शुरू करने जा रही है. जम्मू के एसएसपी जोगिंदर सिंह ने कहा कि वर्तमान मैनुअल प्रणाली में हर किरायेदार और मकान मालिक को थाने में फिजिकली उपस्थित होना पड़ता है, जिससे अक्सर असुविधा होती है. उन्होंने आगे बताया कि हम इस भौतिक संपर्क को खत्म करने पर काम कर रहे हैं. एक उपयोगकर्ता-अनुकूल किरायेदार सत्यापन पोर्टल विकसित किया जा रहा है और जल्द ही शुरू किया जाएगा. एसएसपी जोगिंदर सिंह ने बताया कि पोर्टल शुरू होने के बाद न तो किरायेदार और न ही मकान मालिक को पुलिस स्टेशन आने की आवश्यकता होगी. सत्यापन फार्म ऑनलाइन जमा किए जा सकेंगे और पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करेगी. बता दें क‍ि अक्‍सर ऐसे मामले सामने आते रहे हैं कि आतंकवादी किरायेदार के रूप में रह रहे हैं, लेकिन उनके बारे में समय रहते पता नहीं चल पाता है. एसएसपी ने यह भी कहा कि दुकानदारों और कंपनियों द्वारा कर्मचारियों का सत्यापन करना डीसीपी के आदेशों के तहत अनिवार्य है. उन्होंने कहा कि हर दुकानदार या कंपनी को अपने कर्मचारियों का सत्यापन सुनिश्चित करना होगा. यह अनिवार्य है. सोशल मीडिया पर गलत सूचना के प्रसार पर एसएसपी ने कहा कि पुलिस ने सरकार से आवश्यक नियम लागू करने का आग्रह किया है. कैसे विस्‍तार करता गया अल-फलाह ट्रस्‍ट प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जवाद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार किया है. यह गिरफ्तारी पीएमएलए-2002 की धारा 19 के तहत की गई. ईडी ने इस मामले में अपनी जांच की शुरुआत दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की ओर से दर्ज की गई दो एफआईआर के आधार पर की थी. एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि अल-फलाह विश्वविद्यालय, फरीदाबाद ने छात्रों और अभिभावकों को धोखा देने के लिए धोखाधड़ीपूर्ण तरीके से एनएएसी मान्यता का दावा किया था, जबकि विश्वविद्यालय को यूजीसी मान्यता प्राप्त नहीं थी. ईडी की जांच में यह सामने आया कि अल-फलाह ट्रस्ट (जो 1995 में स्थापित हुआ था) के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधनों का अभाव था, लेकिन इसके बावजूद इसने 1990 के दशक से लेकर अब तक जबरदस्त विस्तार किया. जांच में यह भी पाया गया कि ट्रस्ट ने अपनी आय को पारिवारिक संस्थाओं में ट्रांसफर किया और इसके लिए निर्माण तथा खानपान के ठेके अपने परिवार के सदस्य संस्थाओं को दिए.

अनमोल विश्नोई को अमेरिका से रिफ्रेड किया भारत, दिल्ली कोर्ट में होगी पेशी

 नई दिल्ली कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का भाई और NIA की मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल अनमोल बिश्नोई आखिरकार भारत लौट आया है. अमेरिका से डिपोर्ट किए गए अनमोल को बुधवार सुबह दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतारा गया. एयरपोर्ट पर लैंड होते ही NIA की टीम ने उसे हिरासत में ले लिया, जहां से उसे सीधे पटिलाया हाउस कोर्ट ले जाया जाएगा. अनमोल पर बाबा सिद्दीकी हत्याकांड, सिद्धू मूसे वाला मर्डर और सलमान खान के घर पर फायरिंग जैसे कई हाई-प्रोफाइल केसों में आरोप हैं. बता दें कि अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट ने मंगलवार (18 नवंबर 2025) को अनमोल बिश्नोई को डिपोर्ट किया है. एयरपोर्ट पर NIA की टीम ने अनमोल को हिरासत में ले लिया. सूत्रों के अनुसार, पटियाला हाउस कोर्ट में पेशी के बाद NIA उसकी कस्टडी लेगी. उसके खिलाफ 18 से ज्यादा केस दर्ज हैं, जिनमें हथियारों की आपूर्ति और लॉजिस्टिक सपोर्ट का आरोप हैं. NIA अधिकारी ने कहा, 'अनमोल लॉरेंस बिश्नोई का मुख्य ओवरसीज हैंडलर था. वह एक्सटॉर्शन, थ्रेट्स और असाइनमेंट्स को एन्क्रिप्टेड चैनलों से कंट्रोल करता था. अब उसकी कस्टडी में कई राज खुलेंगे.' अनमोल को अमेरिका ने निकाला बाहर गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के भाई अनमोल बिश्नोई को अमेरिका ने देश से बाहर निकाल दिया है. सूत्रों के मुताबिक उसे अमेरिका से भारत प्रत्यर्पित किया जा रहा है. सेंट्रल एजेसियों और दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के लिए यह बड़ी कामयाबी मानी जा रही है. अनमोल बिश्नोई के खिलाफ देश भर के कई राज्यों में कई आपराधिक मामले दर्ज हैं. अनमोल पर घोषित था 10 लाख का इनाम एनआईए ने अनमोल बिश्नोई पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित किया हुआ था। 2022 में हुई पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या मामले में भी अनमोल बिश्नोई का नाम सामने आया था। इसके अलावा, एनसीपी नेता नेता बाबा सिद्दीकी के बेटे जीशान सिद्दीकी ने बताया कि उन्हें एक ईमेल मिला था जिसमें बताया गया कि अनमोल बिश्नोई को अमेरिका से "निकाल" दिया गया। कैसे दिया था बाबा सिद्दीकी मर्डर को अंजाम? जान लें कि महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी को 12 अक्टूबर, 2024 की रात को उनके बेटे जीशान के बांद्रा वाले दफ्तर के सामने मार दिया गया था। बाइक सवार बदमाशों ने बाबा सिद्दीकी को गोली मार दी थी। इस हत्याकांड में अनमोल के बड़े भाई लॉरेंस बिश्नोई के गैंग से जुड़े कई लोगों को अरेस्ट किया गया था। कौन है अनमोल बिश्नोई?     अनमोल बिश्नोई गैंगस्टर लॉरेंस का छोटा भाई है.     अमेरिका में बैठकर वह भारत में आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे रहा था.     .अनमोल के खिलाफ 18 मामले दर्ज हैं, जिनमें मूसेवाला की हत्या के लिए हथियार और रसद मुहैया कराना भी शामिल है.     मुंबई के बांद्रा में सलमान खान के घर के बाहर हुई गोलीबारी की ज़िम्मेदारी अनमोल बिश्नोई ने ली थी     बाबा सिद्दीकी की 12 अक्टूबर, 2024 को उनके बेटे के दफ्तर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, अनमोल उन शूटरों के भबी संपर्क में था.  अनमोल को भारत लाना लॉरेंस पर बड़ी चोट बीते सालों में विदेश में पंजाबी सिंगर करन औजला के साथ एक नाइट पार्टी में अनमोल बिश्नोई भी नजर आया था. 2024 में उसे अमेरिका में हिरासत में भी ले लिया गया था. जानकारी के मुताबिक, तब से ही अनमोल अमेरिका की पुलिस और एजेसियों की कस्टडी मे था. अनमोल बिश्नोई के भारत डिपोर्ट होने के बहुत बड़े मायने हैं. क्योंकि अनमोल बिश्नोई गुजरात की साबरमती जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेन्स बिश्नोई का सगा भाई है. लॉरेश गैंग के हर ऑपरेशन का ज़िम्मा भी अनमोल पर हुआ करता था. उसको भारत वापस लाया जाना लॉरेंस के लिए बड़ी चोट से कम नहीं है. बाबा सिद्दीकी हत्याकांड का मास्टरमाइंड है अनमोल  भारत सरकार लंबे समय से अमेरिका से अनमोल के प्रत्यर्पण की कोशिश में लगी हुई थी. अब जाकर उसे कामयाबी हाथ लगी है. अनमोल न सिर्फ बाबा सिद्धीकी हत्या मामले का साजिशकर्ता है, बल्कि अप्रैल में एक्टर सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग और 12 अक्टूबर को एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या में भी उसका अहम रोल रहा है. एनआईए ने तो अनमोल को मोस्ट वांटेड बताते हुए उस पर 10 लाख रुपये के इनाम घोषित किया हुआ है. वहीं मुंबई पुलिस ने उसके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी कर रखा है.  

20 को शपथ समारोह: BJP-JDU के बराबर मंत्री, चिराग–मांझी–कुशवाहा की पार्टियों को मिला प्रतिनिधित्व

पटना बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के नेतृत्व में नई सरकार की प्रक्रिया तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज कैबिनेट की बैठक के बाद राज्यपाल इस्तीफा सौंपेंगे और इसके बाद नई सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी। 20 नवंबर को शपथ ग्रहण समारोह होगा। नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। उनके समेत कुल 36 मंत्री नई सरकार में मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। इसका फॉर्मूला तय हो चुका है। एनडीए के सभी घटक दल के नेता नीतीश कुमार से मुख्यमंत्री आवास पर जाकर मिल चुके हैं। नई सरकार में भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाईटेड से 16, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से दो, हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा से एक-एक मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। 24 से 48 घंटे में सभी पार्टियां अपने-अपने मंत्रियों की सूची फाइनल कर लेगी।   दिल्ली में हुई थी एनडीए के वरिष्ठ नेताओं की बैठक दरअसल, रविवार को पीएम नरेंद्र मोदी के एनडीए के वरिष्ठ नेताओं के साथ हुई थी। इसमें नई सरकार के रूपरेखा पर बातचीत हुई। इससे पहले गृह मंत्री अमित शाह के साथ जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की बैठक में किस पार्टी के कितने मंत्री होंगे? यह तय हो चुका है। इधर, एनडीए के घटक दल अपने-अपने विधायक दल के नेता चुनने की कवायत में लगे हैं। चिराग पासवान ने अपने दल का नेता राजू तिवारी को चुना है। जानिए, क्या है फॉर्मूला मंत्री बनाने का दिल्ली में पीएम मोदी के साथ हुई बैठक में छह विधायकों पर एक मंत्री बनाने का फॉर्मूला तय हुआ है। इसके आधार पर जदयू के खाते में सीएम नीतीश कुमार समेत 16 मंत्री, भाजपा के खाते में दो डिप्टी सीएम समेत 16 मंत्री, लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के खाते में दो मंत्री पद देने की बात सामने आ रही है। हालांकि, चिराग की पार्टी के नेता अपने खाते में तीन मंत्री चाहते हैं। उनका कहना है कि अगर छह विधायकों के फॉर्मूले को मनाना है तो उस हिसाब से उनके 19 विधायक हैं। इसलिए तीन मंत्री का पद देना ज्यादा बेहतर होगा। राजनीतिक पंडितो का कहना है कि विधायकों की संख्या के आधार पर भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है। इसलिए वह दो सीएम सीएम समेत 16 मंत्री को शपथ दिला सकती है। वहीं जदयू को सीएम पद के साथ 15 मंत्री शपथ दिला सकते हैं। अगर जदयू 15 पर मान लेती है तो इसका फायदा चिराग को मिलेगा। इस स्थिति में चिराग की पार्टी में तीन मंत्री शपथ ले पाएंगे। जानिए किस पार्टी के कितने विधायक एनडीए ने 243 सदस्यीय विधानसभा में 200 से अधिक सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया। इसमें भाजपा ने अधिकतम 89 सीटें जीतीं, उसके बाद जदयू ने 85 सीटें जीतीं, जबकि केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास) ने 19 सीटें हासिल की। वहीं जीतन राम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तान आवाम मोर्चा से पांच और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा से चार विधायक बने। 

स्वास्थ्य विभाग में उथल-पुथल: प्राइवेट प्रैक्टिस को लेकर विवाद बढ़ा, मंत्री ने दी प्रतिक्रिया

जयपुर सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज से संबद्ध सभी अस्पतालों के अधीक्षकों ने सोमवार को सामूहिक रूप से अपने इस्तीफ़े कॉलेज प्रिंसिपल को सौंप दिए। यह कदम चिकित्सा शिक्षा विभाग के हालिया आदेश के विरोध में उठाया गया, जिसमें कहा गया था कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों के प्रिंसिपल, नियंत्रक और संबद्ध अस्पतालों के अधीक्षक निजी प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे। इस आदेश का चिकित्सकों ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया। अधीक्षकों का कहना है कि यह निर्णय वरिष्ठ चिकित्सकों के अधिकारों का हनन है। आदेश के बाद राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन (RMCTA) भी खुलकर विरोध में उतर आया है। एसोसिएशन ने सवाल उठाया है कि इस तरह का आदेश क्यों जारी किया गया और इसके पीछे सरकार का उद्देश्य क्या है, इसकी स्पष्टता नहीं है। मंत्री बोले- अभी इस्तीफ़े नहीं मिले, मांगें हुईं थीं… मामले पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि उन्हें अब तक किसी अधीक्षक का इस्तीफ़ा प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि चिकित्सकों ने कुछ मांगें रखी थीं, जिन पर सरकार विचार कर रही है। मंत्री ने संकेत दिया कि यदि मांगें उचित लगती हैं तो उन पर निर्णय लिया जाएगा। चिकित्सा मंत्री ने यह भी कहा कि प्राचार्य और अधीक्षक जैसे पद पूर्णकालिक प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाने के लिए होते हैं। यदि ये अधिकारी OPD चलाने और निजी तौर पर मरीज देखने में व्यस्त रहेंगे तो अस्पताल के प्रशासनिक कामकाज पर असर पड़ सकता है। इसी आधार पर सरकार ने यह आदेश जारी किया है। अलग से प्रशासक नियुक्त करने के संकेत मंत्री खींवसर ने कहा कि यदि प्राचार्य और अधीक्षक केवल मरीज देखना चाहते हैं और प्रशासनिक दायित्व निभाने में रुचि नहीं रखते, तो सरकार मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में अलग से एडमिनिस्ट्रेटिव अधिकारी नियुक्त करने पर विचार कर सकती है। क्या है विवादित आदेश? 11 नवंबर को जारी आदेश में कई महत्वपूर्ण बदलाव शामिल हैं—     मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल और अधीक्षक निजी प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे।     डॉक्टर सीधे प्रिंसिपल नहीं बनाए जा सकेंगे।     प्रिंसिपल पद के लिए 3 वर्ष अधीक्षक/अतिरिक्त प्रिंसिपल और 2 वर्ष HOD का अनुभव अनिवार्य।     प्रिंसिपल चयन के लिए 4 सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी बनाई गई।     प्रिंसिपल और अधीक्षक को क्लीनिकल कार्य सिर्फ 25% तक सीमित किया गया।     दोनों पदाधिकारियों को यूनिट हेड या HOD नहीं बनाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के इस परिवर्तनकारी निर्णय के बाद पूरे राज्य में चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था को लेकर बहस छिड़ गई है।

सही फैसलों के लिए अपनाएँ चाणक्य के ये 7 उपाय, जीवन में मिलेगा लाभ

कई बार व्यक्ति के काम सिर्फ इसलिए नहीं बन पाते क्योंकि वह सही समय पर सही निर्णय नहीं ले पाता है। सही समय पर लिया गया सही निर्णय व्यक्ति की सफलता की राह को आसान बना देता है। हर निर्णय लेने के लिए एक सही समय होता है। लेकिन आप अगर सही समय पर सही निर्णय नहीं ले पाते हैं, तो आप अच्छे अवसर खो सकते हैं या गलत दिशा में जाने लगते हैं। जबकि सही समय पर लिया गया सही निर्णय आपका समय और प्रयास दोनों को बचाने में मदद करता है। यह आपको अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी मदद करता है। अगर आपको भी लगता है कि आपके साथ यह समस्या है तो चाणक्य नीति के ये 7 उपाय आपकी हर उलझन को दूर करने वाले हैं। चाणक्य नीति के ये 5 उपाय व्यक्ति को बताते हैं कि कैसे कोई व्यक्ति सही समय पर सही निर्णय लेकर अपने लिए सफलता की राह को आसान बना सकता है। सफलता की राह आसान बना देंगे चाणक्य नीति के ये 7 उपाय विवेकपूर्ण विश्लेषण करें चाणक्य के अनुसार, किसी भी निर्णय को लेने से पहले स्थिति का गहन विश्लेषण करें। तथ्यों, परिणामों, और संभावित जोखिमों का आकलन करने के बाद ही किसी निर्णय पर पहुंचें। अनुभवी लोगों से लें सलाह बुद्धिमान और अनुभवी व्यक्तियों की सलाह आपको हमेशा जीवन में सही निर्णय लेने में मदद करती है। चाणक्य कहते हैं कि दूसरों का अनुभव आपका मार्गदर्शन कर सकता है। भावनाओं पर रखें नियंत्रण व्यक्ति को हमेशा भावना या आवेग में किसी तरह का कोई निर्णय लेने से बचना चाहिए। सफलता पाने के लिए व्यक्ति को अपने शांत मन से सोच-विचार करने के बाद ही कोई फैसला लेना चाहिए। याद रखें, क्रोध या उत्साह में लिए गए निर्णय अक्सर बाद में गलत साबित होते हैं। दूर की सोचकर कोई कार्य करें चाणक्य नीति के अनुसार व्यक्ति को हमेशा तात्कालिक लाभ की जगह दीर्घकालिक परिणामों को देखते हुए ही किसी कार्य को प्राथमिकता देनी चाहिए। आत्मविश्वास चाणक्य नीति के अनुसार, कोई भी निर्णय लेने के बाद उस पर हमेशा अडिग रहें और आत्मविश्वास के साथ उसे लागू करें। चाणक्य कहते हैं कि संकोच करने से कई बार अवसर खो जाते हैं। नैतिकता को दें प्राथमिकता चाणक्य नीति के अनुसार, सही निर्णय वही है जो नैतिक और धर्म के अनुरूप हो। अनैतिक फैसले भविष्य में परेशानी ला सकते हैं। सही समय का इंतजार करें चाणक्य नीति के अनुसार, सही समय पर लिया गया निर्णय सफलता की कुंजी है। जल्दबाजी करने से बचें और उचित समय का आकलन करने के बाद ही कोई फैसला करें।

फर्जी RAW अफसर ने जज को छल किया, ग्रेटर नोएडा में हुआ गिरफ्तार

ग्रेटर नोएडा उत्तर प्रदेश विशेष कार्य बल (एसटीएफ)की टीम ने बुधवार तड़के एक फर्जी रॉ अधिकारी को गिरफ्तार किया है। वह कहीं खुद को रॉ अधिकारी और कहीं पर खुद को आर्मी का मेजर बताकर रहता था। इसने खुद को रॉ अधिकारी बताकर एक महिला जज को झांसे में ले लिया और उनसे सादी कर ली। पत्नी बिहार के छपरा में तैनात हैं। वहीं आरोपी एक कंपनी बनाकर लोगों से करोड़ों रुपए की ठगी करने की योजना बना रहा था। कंपनी से संबंधित दस्तावेज भी एसटीएफ ने बरामद किया है। फर्जी अफसर के पास से भारी मात्रा में फेक आईडी, चेक बुक, फर्जी पुलिस वेरिफिकेशन पत्र, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, पैन कार्ड ,आधार कार्ड, वोटर आई कार्ड आदि बरामद हुआ है। एसटीएफ और गुप्तचर एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी इससे गहनता से पूछताछ कर रहे हैं। इसके टैब में दिल्ली ब्लास्ट से संबंधित वीडियो भी बरामद हुई है। अपर पुलिस अधीक्षक एसटीएफ (नोएडा यूनिट) राजकुमार मिश्रा ने बताया कि बीती रात को उप निरीक्षक अक्षय परमवीर कुमार त्यागी और उनकी टीम को सूचना मिली कि एक व्यक्ति जो कि कभी स्वयं को मेजर अमित और कभी खुद को डायरेक्टर रॉ बताकर अलग-अलग सोसाइटी में रहता है। वह संदिग्ध है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में हुए बम ब्लास्ट की वजह से इस सूचना को गंभीरता से ली गई। एक टीम बनाकर पैरामाउंट गोल्फ फॉरेस्ट सोसायटी ग्रेटर नोएडा में छापेमारी की गई। जब टीम सोसाइटी के उस फ्लैट में पहुंची जहां पर कथित रॉ अधिकारी रहता था तो दरवाजा एक महिला ने खोला। इसी बीच एक व्यक्ति वहां पर आ गया। उसने अपना नाम सुनीत कुमार पुत्र स्वर्गीय बृजनंदन शाह बताया। उसके हाथ में पकड़े हुए पर्स की तलाशी ली गई तो उसमें एक आई कार्ड केबिनेट सेक्रेट्रिएट गवर्नमेंट ऑफ इंडिया का मिला। जिसपर सुमित कुमार आईसी 7623 बी, रैंक जॉइंट सेक्रेटरी, डेजिग्नेशन डायरेक्टर (ऑपरेशन), जेआईसी नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल, पुश्त पर सर्विस रिसर्च एंड एनेलसिस सर्विस, ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव, जन्मतिथि 25 मार्च 1988, पिता का नाम बृजनंदन शाह अंकित है। शक होने पर एसटीएफ ने रॉ के वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया। जब वे लोग मौके पर आए तो उन्होंने जांच किया। पता चला कि इस नाम का कोई भी व्यक्ति उनके विभाग में कार्यरत नहीं है। जो आई कार्ड उसके पास से बरामद हुआ है वह फर्जी है। उन्होंने बताया कि जिस फ्लैट में उक्त व्यक्ति रह रहा था उसके मकान मालकिन मंजू गुप्ता से जब संपर्क किया गया तो, उन्होंने कहा कि उनके यहां किराएदार मेजर अमित कुमार हैं। उन्होंने अपना पुलिस वेरिफिकेशन दिल्ली पुलिस के डिप्टी कमिश्नर के लेटर हेड पर मेजर अमित कुमार के नाम से करवाकर उपलब्ध करवाया है। उन्होंने बताया कि मंजू गुप्ता ने उन्हें दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए वेरिफिकेशन की कॉपी वॉट्सऐप के माध्यम से भेजी। उन्होंने बताया कि उक्त सुनीत की पत्नी छपरा बिहार में न्यायिक मजिस्ट्रेट है, उनसे फोन करके जानकारी की गई तो उन्होंने बताया कि उनके पति गृह मंत्रालय में कार्यरत हैं, और गोपनीय नियुक्ति पर हैं। उन्होंने बताया कि उक्त व्यक्ति के पास से काफी फर्जी अभिलेख बरामद हुए हैं। जिनमें मुख्य रूप से दो फर्जी आईडी, 20 चेक बुक, दिल्ली पुलिस की फर्जी वेरीफिकेशन लेटर,8 क्रेडिट/ डेबिट कार्ड, एक डायरी, 17 एग्रीमेंट, 5 पैन कार्ड, दो आधार कार्ड, तीन वोटर आईडी कार्ड, दो फार्म वोटर आईडी कार्ड, दो कंपनी संबंधित रजिस्ट्रेशन कागजात, आईटीआर के कागजात, बैंक स्टेटमेंट, 3 लैपटॉप, दो टेबलेट आदि बरामद हुआ है। उन्होंने बताया कि उक्त आरोपी के टैब से दिल्ली ब्लास्ट से संबंधित वीडियो भी बरामद हुई है। उन्होंने बताया कि अभियुक्त सुमित कुमार को एसटीएफ ने आज सुबह गिरफ्तार कर लिया। इसके खिलाफ थाना सूरजपुर मे भारतीय न्याय संहिता की धारा 319(2),318(4),338,336(3), 340, 66 डी (सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन अधिनियम 2008, के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि आरोपी को न्यायालय में पेश किया जा रहा है।