samacharsecretary.com

मध्यप्रदेश में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता: उच्च शिक्षा विभाग ने किया स्टेट टास्क फोर्स का गठन

एसटीएफ, डीटीएफ व्यवस्था, कोचिंग संस्थानों का अनिवार्य पंजीयन और नोडल अधिकारियों की नियुक्ति तनाव प्रबंध के सुधारात्मक प्रयास भोपाल  विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर देशभर में बढ़ रही चिंता के बीच मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा विभाग ने इस दिशा में ठोस और व्यापक कदम उठाने की शुरुआत कर दी है। राज्य ने सुप्रीम कोर्ट और नेशनल टास्क फोर्स (NTF) के निर्देशों के बाद स्टेट टास्क फोर्स (STF) को पूर्णतः सक्रिय कर दिया है, जो अब पूरे राज्य में विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और कोचिंग संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी उपायों की निगरानी और सुधार की रूपरेखा तय कर रही है। उल्‍लेखनीय है कि NTF द्वारा आयुक्त, उच्च शिक्षा श्री प्रबल सिपाहा को राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार यह पहल केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि “राज्य के विद्यार्थियों के लिए एक सुरक्षित, सहयोगी और दबावमुक्त शैक्षणिक माहौल” तैयार करने की दिशा में सबसे बड़ा प्रशासनिक प्रयास है। एसटीएफ के हाथ में मानसिक स्वास्थ्य सुधार की कमान NTF के निर्देशों के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने एक स्टेट टास्क फोर्स (STF) का गठन किया है । यह राज्य में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, परामर्श सेवाओं और रोकथाम उपायों पर केंद्रित नीतिगत हस्तक्षेपों के लिए योजना एवं निर्देश जारी कर रही है। एसटीएफ के अध्‍यक्ष आयुक्त, उच्च शिक्षा श्री प्रबल सिपाहा है। ओएसडी डॉ. उषा के. नायर को इसका सदस्य सचिव नियुक्‍त किया गया है। एसटीएफ में स्कूल शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, बाल सुरक्षा, सामाजिक न्याय तथा नगरीय प्रशासन विभागों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है । यह एक बहु-विभागीय तंत्र है जो विद्यार्थियों की चुनौतियों को व्यापक दृष्टि से देखेगा। स्टेट टास्क फोर्स (STF) क्या करेगी? राज्य में मानसिक स्वास्थ्य और परामर्श से जुड़े उपायों की निगरानी, NTF के निर्देशों के अनुपालन का मूल्यांकन, कोचिंग व कॉलेज परिसरों का मानसिक स्वास्थ्य ऑडिट, हेल्पलाइन, काउंसलिंग, मनोसामाजिक समर्थन की व्यवस्था को मजबूत करना, जिला स्तरीय DTF को दिशा देना और उनकी रिपोर्ट की समीक्षा, आत्महत्या रोकथाम से जुड़े जोखिम कारकों की पहचान और सुधार को बढ़ावा, राज्य सरकार को नियमित सिफारिशें और नीतिगत सुझाव शैक्षणिक संस्‍थानों में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति सभी सुधारों के समन्वय प्रभावी हो, इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी शासकीय एवं निजी शैक्षणिक संस्‍थानों को नोडल अधिकारी नियुक्‍त करने के निर्देश दिए हैं। इसमें सरकारी विश्वविद्याल, निजी विश्वविद्यालय, क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालकों एवं सभी शासकीय महाविद्यालय शामिल हैं। डीटीएफ से जमीनी निगरानी राज्य स्तर के प्रयास प्रभावी रूप से जिलों तक पहुँचें, इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने प्रत्येक जिले में जिला स्तरीय टास्क फोर्स (DTF) का गठन भी अनिवार्य कर दिया है। डीटीएफ की अध्यक्षता जिला कलेक्टर करेंगे, जबकि अग्रणी महाविद्यालय के प्राचार्य, जिला शिक्षा अधिकारी और तकनीकी, चिकित्सा तथा स्वास्थ्य विभागों के प्रतिनिधि इसके सदस्य होंगे। डीटीएफ को निम्‍न जिम्मेदारी सौंपी गईं हैं। कोचिंग संस्थानों के पंजीयन की निगरानी, परामर्श सेवाओं की उपलब्धता, STF–NTF निर्देशों के क्रियान्वयन, शैक्षणिक परिसरों की सुरक्षा, कोचिंग संस्थानों का अनिवार्य पंजीयन उच्च शिक्षा विभाग ने यह सुनिश्चित किया है कि किसी भी जिले में बिना पंजीयन के कोई भी कोचिंग संस्था संचालित न हो। यह कदम विद्यार्थियों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव, अनियमित प्रबंधन और अनुशासनहीन वातावरण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। क्यों जरूरी थे ये कदम? देशभर में मानसिक तनाव और परीक्षा दबाव से जुड़े मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। उच्च शिक्षा विभाग का मानना है कि समस्या केवल शैक्षणिक नहीं, बल्कि संस्थागत संरचना से भी जुड़ी है—जहाँ गाइडलाइन, परामर्श, निगरानी और संवाद की कमी विद्यार्थियों को अकेला कर देती है। एसटीएफ और डीटीएफ का गठन इसी कमी को दूर करने का प्रयास है।  

उत्तर प्रदेश में अब तक 4.25 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड हो चुके हैं जारी, बरेली बना प्रदेश में नंबर वन

कैंसर, किडनी और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों के निःशुल्क इलाज के लिए वर्ष 2023-24 में 700 करोड़ रुपये से अधिक किए गए खर्च 'वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज' पहल के तहत यूपी में स्थापित हो चुके हैं 80 से अधिक सरकारी या निजी मेडिकल कॉलेज मिशन इंद्रधनुष के तहत यूपी में 10 लाख से अधिक छूटे हुए बच्चों का टीकाकरण सम्पन्न आगरा जिला अस्पताल में संचालित निःशुल्क हीमोडायलिसिस यूनिट, गरीब किडनी रोगियों के लिए बनी वरदान  यूपी में 28,000 से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सुविधा उपलब्ध, ग्रामीणों को मिल रही विशेषज्ञ सलाह लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ गरीब और वंचित वर्गों को प्राथमिकता दी है। सीएम योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में आयुष्मान भारत योजना से लेकर पेंटावैलेंट वैक्सीनेशन जैसी योजनाएं प्रदेश में लाखों परिवारों के लिए संजीवनी साबित हो रही हैं। साथ ही सीएम के विजन के अनरूप चल रही कई राज्य स्तरीय योजनाओं के सफल क्रियान्वयन ने 2017 के बाद प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था के परिदृश्य में अमूलचूल बदलाव लाया है। इसी क्रम में बरेली मंडल ने आयुष्मान योजना में प्रदेश में नंबर वन का रिकॉर्ड कायम किया है, जबकि आगरा के जिला अस्पताल में निशुल्क हीमोडायलिसिस यूनिट गुर्दा रोगियों के लिए वरदान बनी हुई है। आंकड़ों से साफ है कि सरकार का फोकस न केवल उपचार पर, बल्कि रोकथाम और पहुंच पर भी है। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की वर्ष 2017 से प्राथमिकता रही है कि राज्य के  गरीब एवं वंचित वर्ग के मरीजों का न केवल अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो साथ ही इलाज के कारण पड़ने वाले वित्तीय बोझ को न्यूनतम किया जाए। इसी क्रम में सीएम योगी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश में आयुष्मान योजना का सफल क्रियान्वयन हुआ है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) डैशबोर्ड के अनुसार, उत्तर प्रदेश में अब तक 4.25 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी हो चुके हैं, जो राज्य की एक-चौथाई आबादी को 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान करता है। यूपी स्वास्थ्य विभाग की नवंबर 2024 की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023-24 में गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, किडनी और हृदय रोगों के निःशुल्क इलाज पर 700 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए। जिसमें प्रमुख हिस्सा प्रदेश के गरीब परिवारों को इलाज के लिए मिली प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता का है। इसके अलावा सीएम योगी की 'वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज' पहल के तहत 80 जिलों में वर्तमान में 80 से अधिक अब सरकारी या निजी मेडिकल कॉलेज स्थापित हो चुके हैं। यह पहल ग्रामीण और छोटे शहरों के मरीजों को आसानी से सुपर-स्पेशियलिटी इलाज मुहैया करा रही है। बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देते हुए योगी सरकार ने टीकाकरण अभियान में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की है। इस क्रम में राज्य में पेंटावैलेंट वैक्सीन (पेंटा वैक्सीन) का कवरेज राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार 92 प्रतिशत से अधिक तक पहुंच गया है। 2017 में यह 50 प्रतिशत से कम था, लेकिन अब प्रदेश के अधिकांश बच्चों को इस टीकाकरण अभियान से कवर किया जा चुका है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में प्रति माह 20,000 से अधिक नियमित टीकाकरण सत्र आयोजित हो रहे हैं। इसके साथ ही केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार मिशन इंद्रधनुष के तहत यूपी में 10 लाख से अधिक छूटे हुए बच्चों का टीकाकरण भी किया चुका है। सीएम योगी की टीकाकरण की ये आक्रामक नीति के तहत विशेष रूप से वंचित परिवारों के बच्चों को प्राथमिकता दी जा रही है। आयुष्मान योजना में प्रदेश के बरेली मंडल का प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ रहा है। पीएमजेएवाई पोर्टल के अनुसार नवंबर 2025 तक बरेली में योजना के तहत जारी किये गये 900 करोड़ रुपये के क्लेम में से 90 प्रतिशत राशि का भुगतान किया जा चुका है, जो प्रदेश में सर्वोच्च है। कुल 4.53 लाख से अधिक क्लेम सेटल किये जा चुके हैं। बरेली स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार योजना के तहत बरेली में 1 लाख से अधिक गरीब मरीजों को निःशुल्क इलाज हुआ है। तो वहीं लक्ष्य के 95 प्रतिशत से अधिक गोल्डन कार्ड का वितरण किया जा चुका है। इस योजना के तहत  5.14 लाख मरीजों का फ्री इलाज कर बरेली ने प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल किया। 12 लाख से अधिक कार्ड बनाए गए, जिसमें छह सदस्यीय पात्र परिवारों और 60 वर्ष से ऊपर के बुजुर्गों की 100 प्रतिशत कवरेज की गई है। जिसके चलते बरेली अब आयुष्मान का सुपर मॉडल बन चुका है। इसी क्रम में आगरा जिला अस्पताल में पीपीपी मॉडल पर संचालित निःशुल्क हीमोडायलिसिस यूनिट ने जनवरी से अक्टूबर 2025 तक 726 मरीजों को 8,712 बार डायलिसिस की सुविधा प्रदान की है। 10 अत्याधुनिक मशीनों से लैस यह यूनिट गुर्दा रोगियों के लिए जीवन रेखा बन चुकी है। योगी सरकार की यह सुविधा राज्य के गरीब मरीजों को निजी अस्पतालों की महंगी दरों से मुक्ति दिलाती है साथ ही उन्हें अत्याधुनिक और जरूरी इलाज आसानी से उपलब्ध करवा रही है।   सीएम योगी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य ढांचे का तेजी से आधुनिकीकरण किया है। जिसके तहत प्रदेश में वर्तमान में 80 से अधिक सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेज बन चुके हैं। जिनमें 3,500 आईसीयू बेड और 2,000 वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध हैं। साथ ही प्रदेश में 28,000 से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सुविधा ग्रामीणों को विशेषज्ञ सलाह दे रही है।  

किचन सिंक एरिया में ये गलतियाँ न करें, वरना बढ़ सकता है नकारात्मक प्रभाव

वास्तु शास्त्र में घर के हर कोने, विशेषकर रसोई को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि यह स्थान अग्नि और जल के तत्वों का संगम होता है। किचन में सिंक के नीचे की जगह अक्सर नज़रअंदाज़ कर दी जाती है, लेकिन वास्तु के अनुसार, यहां कुछ चीज़ें रखना नकारात्मक ऊर्जा और आर्थिक अस्थिरता का कारण बन सकता है, जिसे वास्तु दोष कहते हैं। तो आइए जानते हैं कि वे मुख्य चीज़ें जिन्हें आपको किचन सिंक के नीचे रखने से बचना चाहिए। कूड़ेदान या डस्टबिन सिंक के नीचे कूड़ेदान रखना सबसे बड़ा वास्तु दोष माना जाता है। सिंक पानी का प्रतिनिधित्व करता है, जो स्वच्छ और बहता हुआ होना चाहिए, जबकि कूड़ेदान गंदगी और स्थिर नकारात्मकता का प्रतिनिधित्व करता है। जल के साथ गंदगी का संयोजन आर्थिक हानि और धन के रुकने का कारण बनता है। यह घर की सकारात्मक ऊर्जा को भी कम कर देता है। कूड़ेदान को सिंक के नीचे से हटाकर किचन के किसी ऐसे कोने में रखें जहां वह कम दिखाई दे और जल तत्व से दूर रहे। बिजली के उपकरण किचन सिंक जल तत्व का क्षेत्र है, जबकि बिजली के उपकरण अग्नि तत्व या ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करते हैं। वास्तु के अनुसार, जल और अग्नि तत्वों का एक साथ आना संघर्ष और असंतुलन पैदा करता है। यह घर के सदस्यों के बीच तनाव बढ़ा सकता है और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ दे सकता है। मिक्सर, टोस्टर या अन्य छोटे उपकरणों को सिंक के नीचे की बजाय कैबिनेट या काउंटर पर रखें। सफाई से जुड़े केमिकल फिनाइल, डिटर्जेंट, एसिड जैसे कठोर केमिकल या सफाई उत्पादों को भी सिंक के नीचे नहीं रखना चाहिए। हालांकि ये सफाई के लिए ज़रूरी हैं, लेकिन इनकी तीव्र रासायनिक प्रकृति सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को बाधित कर सकती है। इसके अलावा, वास्तु के अनुसार, जल तत्व के पास कठोर वस्तुओं को जमा करने से आर्थिक अस्थिरता आ सकती है। इन चीज़ों को सिंक के नीचे रखने के बजाय, किसी बंद अलमारी या बाथरूम/यूटिलिटी एरिया में रखें।

सीएम हेल्पलाइन में योजना आर्थिक सांख्यिकी विभाग प्रथम

भोपाल सीएम हेल्पलाइन में जन शिकायतों का समाधान करने में योजना एवं आर्थिक सांख्यिकी विभाग ने पहला स्थान प्राप्त किया है। विभाग ने ग्रेड ए पाकर 93.2 प्रतिशत स्कोर किया है जबकि ऊर्जा विभाग ने 90.26% के साथ दूसरे स्थान पर एवं नगरीय विकास एवं आवास विभाग 89.35 प्रतिशत के साथ तीसरा स्थान पर है। योजना एवं आर्थिक सांख्यिकी विभाग को 1869 शिकायतें मिली जिसमें संतुष्टि के साथ बंद शिकायतों का प्रतिशत 54.64% रहा और 50 दिन से अधिक शिकायतों का प्रतिशत 8.68 प्रतिशत और गुणवत्ता से बंद शिकायतों का प्रतिशत 10 रहा। नोट अटेंडेंट शिकायतों का प्रतिशत 9.88 रहा। इस प्रकार ए रेटिंग के साथ योजना आर्थिक सांख्यिकी विभाग प्रथम स्थान पर रहा।  

बैंगलुरू टेक समिट में प्रदर्शति हुआ टियर-2 टेक्नोलॉजी इको सिस्टम

फ्यूचर-रेडी इनोवेशन से मध्यप्रदेश बन रहा विश्व स्तरीय कंपनियों का प्रमुख निवेश केंद्र भोपाल राज्य सरकार ने बेंगलुरु इंटरनेशनल एग्जीबिशन सेंटर (बीआईईसी) में आयोजित बेंगलुरु टेक समिट (बीटीसी) 2025 में उल्लेखनीय भागीदारी दर्ज की।बीटीसी- 2025 में विशेष प्रदर्शनी मंडप से राज्य की तेजी से विकसित होती टेक्नोलजी ईकोसिस्टम और भारत के प्रमुख टियर-2 इनोवेशन हब के रूप में मध्यप्रदेश की स्थिति को प्रभावशाली रूप से प्रदर्शित किया गया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने मध्यप्रदेश मंडप हॉल 3, बूथ एचएस 17 में स्थापित किया। मंडप में प्रदेश की समग्र नीति व्यवस्था को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया।मंडप ने वैश्विक कंपनियों, टेक्नोलॉजी लीडर्स और तेजी से बढ़ते स्टार्टअप्स का ध्यान विशेष रूप से आकर्षित किया। प्रदर्शनी में पहुंचे उद्योग प्रतिनिधियों ने राज्य में निवेश अवसरों का आकलन किया और भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के अंतर्गत प्रदेश में नए अवसरों पर विचार विमर्श किया। मंडप में प्रमुख रूप से ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) पॉलिसी 2025, ड्रोन प्रमोशन और उपयोग पॉलिसी 2025, AVGC-XR पॉलिसी 2025, सेमीकंडक्टर पॉलिसी 2025 और IT, ITES & ESDM निवेश संवर्धन पॉलिसी 2023 प्रदर्शित की गईं। इन नीतियों का उद्देश्य राज्य को सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं, ईएसडीएम और सेमीकंडक्टर निर्माण, डेटा सेंटर,जीसीसी, एवीजीसी-एक्सआर स्टूडियोज और ड्रोन तकनीक के लिए एक प्रमुख और आकर्षक निवेश केंद्र बनाना है। इन प्रगतिशील नीतियो की सहायता और मिशन-आधारित प्रशासनिक दृष्टिकोण से मध्यप्रदेश भारत का अग्रणी टेक्नोलॉजी हब बन रहा है। मंडप में मध्यप्रदेश के तेजी से बढ़ते तकनीकी परिदृश्य को भी प्रस्तुत किया गया जो 15 से अधिक आईटी पार्क, 6 आईटी एसईजेड, 2000 से अधिक आईटी और ईएसडीएम इकाइयां, 1200 से अधिक टेक-स्टार्टअप्स और 2 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार से सशक्त है। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में कई बड़ी कंपनियों का विस्तार और 50 से अधिक बड़ी आईटी कंपनियों का संचालन राज्य को एक मजबूत निवेशक-अनुकूल वातावरण प्रदान करता है। मंडप ने इस टियर-2 विकास की कहानी को प्रभावशाली रूप से प्रस्तुत किया, जो उद्योग प्रतिनिधियों के लिए अत्यंत आकर्षक रही। राज्य प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अवंतिका वर्मा, अधिकारी-इन-चार्ज, निवेश संवर्धन, MPSEDC, राजा पंचाल, टीम लीड, एमपीएसईडीसी और निवेश संवर्धन टीम ने किया। समिट के दौरान मंडप ने इंफोसिस, टीसीएस, इम्पेटस, एक्स-ईबिया,हिताची, डीएक्ससी, टेक महिंद्रा, डब्ल्यूएनएस, टास्कयूएस, यश टेक्नोलॉजीज, एजिस, इंफोबीन्स, पर्सिस्टेंट, सिविया, कॉन्साइल, इन्क्चर, आरटेक, रेनेसाँ सॉफ्ट लैब्स, एचएलबी टेक, इंफोग्लोबल, न्यूजटेक फ्यूज और लिमिन्डो जैसी प्रमुख कंपनियों के टेक-लीडर्स के साथ संवाद किया। इन संवादों में डेटा सेंटर विस्तार, सेमीकंडक्टर और ईएसडीएम निर्माण, इंजीनियरिंग आरएंडडी जीसीसी एआई और क्लाउड तकनीक ड्रोन-टेक सॉल्यूसन और एवीजीसी-एक्सआर इनोवेशन हब के रूप में विकसित किये जाने में गहरी रुचि दिखाई दी। इससे यह स्पष्ट हुआ कि उद्योग जगत मध्यप्रदेश को नए निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में देख रहा है। इस अवसर पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे ने कहा कि मध्यप्रदेश एक फ्यूचर रैडी इनोवेशन परिदृश्य तैयार कर रहा है, जिसमें मजबूत बुनियादी ढांचा, प्रगतिशील नीतियां और विश्व स्तर की कंपनियों के लिए भरपूर अवसर मौजूद हैं। बेंगलुरु टेक समिट में हमारी उपस्थिति राज्य की तकनीकी निवेश क्षमता को और मजबूत करती है। बेंगलुरु टेक समिट 2025 में भागीदारी ने राज्य को भारत के सबसे निवेश- योग्य, नवाचार-संचालित और प्रगतिशील तकनीकी हब के रूप में स्थापित किया है। राज्य की प्रदर्शनी ने टियर-2 शहरों की ताकत, नीतिगत उत्कृष्टता और उद्योग सहयोग की क्षमता को उजागर किया, जो मध्यप्रदेश को भारत और वैश्विक स्तर पर निवेश और नवाचार के लिए प्रमुख आकर्षण केंद्र बनाता है।  

Porsche Cayenne Electric की एंट्री: क्या है कीमत और क्या-क्या मिलेंगे नए फीचर्स?

नई दिल्ली पोर्शे ने भले ही अपनी बड़ी ईवी योजनाओं को धीमा कर दिया हो, लेकिन कंपनी ने भारत में अपना तीसरा और अब तक का सबसे पावरफुल इलेक्ट्रिक मॉडल पोर्शे कैयेन इलेक्ट्रिक लॉन्च कर दिया है। Porsche Cayenne Electric की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 1.75 करोड़ रुपये रखी गई है। यह कंपनी की दूसरा इलेक्ट्रिक एसयूवी है। और 1,100 bhp से ज्यादा पावर वाली Turbo (टर्बो) ट्रिम कंपनी का अब तक का सबसे पावरफुल प्रोडक्शन मॉडल भी है। पावरट्रेन और परफॉर्मेंस Cayenne Electric में रेंज के सभी मॉडल्स में डुअल इलेक्ट्रिक मोटर सेटअप मिलता है, यानी ऑल-व्हील ड्राइव स्टैंडर्ड है। स्टैंडर्ड मॉडल 402 bhp देता है, जो लॉन्च कंट्रोल के साथ बढ़कर 435 bhp और 835 Nm तक पहुंच जाता है। इस सेटअप के साथ बेस Cayenne EV 0-100 किमी प्रति घंटा सिर्फ 4.8 सेकंड में पूरा करता है और 230 किमी प्रति घंटा की टॉप स्पीड हासिल करता है। वहीं, सबसे ज्यादा ध्यान खींचती है Cayenne Turbo Electric, जिसकी पावर पोर्शे की Taycan से भी ज्यादा है। इलेक्ट्रिक कार होने के बावजूद टर्बो नाम भले अजीब लगे, लेकिन 845 bhp और पुश-टू-पास फीचर से 173 bhp का अतिरिक्त बूस्ट इसे बेहद खास बनाता है। लॉन्च कंट्रोल एक्टिव होते ही कुल पावर 1,139 bhp और 1,500 Nm तक पहुंचती है। जिससे कार 0-100 किमी प्रति घंटा केवल 2.5 सेकंड में और 0-200 किमी प्रति घंटा सिर्फ 7.4 सेकंड में कर लेती है। इसकी टॉप स्पीड 260 किमी प्रति घंटा है। ब्रेकिंग और हैंडलिंग इतनी पावर को संभालने के लिए ब्रेकिंग भी उसी स्तर की चाहिए। पोर्शे का दावा है कि 97 प्रतिशत तक ब्रेकिंग केवल इलेक्ट्रिक मोटर्स द्वारा ही रिकुपरेटिव ब्रेकिंग से की जा सकती है। यह सिस्टम 600 kW तक ऊर्जा वापस खींच सकता है, लगभग Formula E के स्तर पर। टर्बो मॉडल में ग्राहक चाहें तो सेरामिक कंपोजिट ब्रेक्स भी जोड़ सकते हैं। दोनों वेरिएंट पोर्शे एक्टिव सस्पेंशन मैनेजमेंट (PASM) सिस्टम के साथ आते हैं। टर्बो में अतिरिक्त पोर्शे टॉर्क वेक्टरिंग प्लस लिमिटेड-स्लिप डिफरेंशियल भी मिलता है। साथ ही, दोनों मॉडल्स में रियर-एक्सल स्टीयरिंग और एक्टिव राइड सिस्टम विकल्प के रूप में उपलब्ध हैं। जो तेज एक्सेलेरेशन, ब्रेकिंग या कॉर्नरिंग के दौरान बॉडी रोल, डाइव और लिफ्ट को कम करते हैं। बैटरी, रेंज और चार्जिंग Cayenne EV में 800V आर्किटेक्चर के साथ 113 kWh की हाई-वोल्टेज बैटरी दी गई है, जो 400 kW तक की फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करती है। इसके जरिए बैटरी 10-80 प्रतिशत सिर्फ 16 मिनट से भी कम समय में चार्ज हो सकती है। इस दौरान स्टैंडर्ड मॉडल 325 किमी, जबकि Turbo मॉडल 315 किमी रेंज दोबारा पा लेते हैं। कुल ड्राइविंग रेंज की बात करें तो:     स्टैंडर्ड वेरिएंट – 642 km (WLTP)     Turbo वेरिएंट – 623 km (WLTP) इस एसयूवी की सबसे अनोखी बात यह है कि यह वायरलेस इंडक्टिव चार्जिंग को सपोर्ट करती है। मालिक बस गाड़ी को 11 kW के फ्लोर प्लेट पर पार्क कर दें और बिना किसी केबल के चार्जिंग शुरू हो जाती है। पोर्शे का दावा है कि पैड और रिसीवर के बीच 4 इंच तक का मिसअलाइन्मेंट भी चलेगा। कीमत और बुकिंग डिटेल्स भारत में Cayenne Electric की कीमत स्टैंडर्ड वेरिएंट के लिए 1.75 करोड़ रुपये है। और Cayenne Turbo Electric की कीमत 2.26 करोड़ रुपये रखी गई है। दोनों कीमत एक्स-शोरूम हैं। इस इलेक्ट्रिक एसयूवी की बुकिंग शुरू हो चुकी हैं और डिलीवरी 2026 की दूसरी छमाही से शुरू होने की उम्मीद है।

घर में आई खुशियों की बहार, सीमा हैदर और पाकिस्तानी भाभी ने मनाया जश्न

ग्रेटर नोएडा पाकिस्तानी भाभी के नाम से मशहूर सीमा हैदर इन दिनों बहुत खुश है। वजह ही कुछ ऐसी है। दो साल पहले चार बच्चों को लेकर पड़ोसी मुल्क से भागकर आई सीमा हैदर और सचिन की जिंदगी लगातार बदलती जा रही है। दोनों की चर्चित प्रेम कहानी सोशल मीडिया पर इतनी वायरल हुई कि लाखों लोग अब भी हर दिन उनके बारे में जानना चाहते हैं। और लोगों की इसी उत्सुकता से सीमा और सचिन की बल्ले-बल्ले हो गई है। यूट्यूब की कमाई से कुछ दिन पहले एक कमरा बनवाने वाली सीमा हैदर नया शानदार घर बनवा रही है।   अपने नए घर को बनते देख सीमा हैदर और सचिन मीणा खुशी से झूम रहे हैं। अपने यूट्यूब अकाउंट पर दोनों अपने प्रशंसकों के साथ इस खुशी को साझा भी कर रहे हैं। बीच-बीच में वे वीडियो बनाकर दिखाते हैं कि कंस्ट्रक्शन का काम किस तरह चल रहा है और कितना तैयार हो चुका है। सीमा हैदर एक वीडियो में कहती है कि पुराना घर काफी छोटा था और परिवार में सदस्यों की संख्या अधिक होने की वजह से बहुत दिक्कत होती थी। पांच बच्चों और पति-पत्नी के लिए एक कमरे में गुजारा करना कठिन था। सीमा हैदर ने कहा कि भगवान, प्रशंसकों और यूट्यूब के आशीर्वाद से उन्होंने ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा में ही एक नया प्लॉट खरीदा है और इस पर अब नया मकान बनाया जा रहा है। दो मंजिले में मकान को बेहद खुबसूरती के साथ बनाया जा रहा है। सीमा और सचिन ने यह तो नहीं बताया कि उन्होंने प्लॉट और इस मकान में कितना पैसा खर्च किया है, लेकिन जाहिर एनसीआर में जमीन खरीदने और मकान बनवाने का खर्च का अंदाजा यहां रहने वाले लोग आसानी से लगा सकते हैं। जाहिर है कि यूट्यूब और सोशल मीडिया के अन्य प्लैटफॉर्म से सीमा और सचिन की अच्छी कमाई हो रही है। सीमा के भारत आने के बाद से ही सचिन उस किराने की दुकान में नौकरी छोड़ चुका है जहां वह कभी दिन के 8-10 घंटे बिताकर गुजारा लायक कमा पाता था।  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया जंबूरी स्थल का निरीक्षण, विश्वस्तरीय व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने के दिए आदेश

जंबूरी में ‘एकता में विविधता’ की भावना के साथ लखनऊ की अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा मजबूती 32,000 स्काउट्स और गाइड जुटेंगे लखनऊ में ओडीओपी, नवाचार और संस्कृति का होगा संगम 61 साल बाद यूपी में होने जा रहा 19वां नेशनल जंबूरी; सीएम योगी ने की मेगा तैयारियों की समीक्षा लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार को 19वें भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के जंबूरी की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। यह आयोजन 23 से 29 नवंबर तक वृंदावन कॉलोनी स्थित डिफेंस एक्सपो ग्राउंड में आयोजित होगा। 61 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद उत्तर प्रदेश इस प्रतिष्ठित डायमंड जुबिली संस्करण की मेजबानी कर रहा है, जो राज्य के लिए ऐतिहासिक क्षण है। 300 एकड़ में फैले जंबूरी परिसर को 32,000 प्रतिभागियों और 3,000 स्टाफ सदस्यों के लिए तैयार किया जा रहा है। नेपाल, श्रीलंका, भूटान, अफगानिस्तान सहित एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई देशों के प्रतिनिधि भी इसमें हिस्सा लेंगे, जिससे इसका अंतरराष्ट्रीय महत्व और बढ़ जाता है। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि “विश्वस्तरीय व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही की कोई गुंजाइश न रहे।” उन्होंने आवास, स्वच्छता, सुरक्षा, भोजन, स्वास्थ्य सुविधाओं और डिजिटल कनेक्टिविटी तक हर व्यवस्था को सर्वोत्तम मानक के अनुरूप तैयार करने पर जोर दिया। सीएम ने स्काई साइक्लिंग और ज़िपलाइन एडवेंचर का विशेष प्रदर्शन भी देखा, जिसकी उन्होंने सराहना की। उनके साथ जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, प्रभात कुमार (सेवानिवृत्त IAS), राज्य मुख्य आयुक्त, स्काउट्स एंड गाइड्स, और डीएम लखनऊ विशाख जी मौजूद रहे। सुगम व्यवस्थाओं के लिए परिसर में 16 जर्मन हैंगर, 600 वाटर टैंक, 30 RO प्वाइंट, 2,200 से अधिक शौचालय, 100 किचन और चार केंद्रीय रसोईघर स्थापित किए जा रहे हैं, जो प्रतिदिन हजारों लोगों को भोजन उपलब्ध कराएंगे। 3,500 क्षमता वाला कॉन्फ्रेंस हॉल, अस्थायी पुलिस स्टेशन और 11 फायर टेंडर भी सुरक्षा और अनुशासन सुनिश्चित करेंगे। जंबूरी में देशभर से आए कैडेट ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को प्रदर्शित करते हुए उत्तर प्रदेश की समृद्ध संस्कृति और विविध व्यंजनों का अनुभव करेंगे। यह आयोजन लखनऊ में रोज़गार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जहां हज़ारों श्रमिकों, ठेकेदारों और छोटे विक्रेताओं को अवसर मिल रहे हैं। सांस्कृतिक गौरव और आर्थिक प्रगति का यह संगम जंबूरी को प्रतिभागियों और शहर, दोनों के लिए यादगार बना रहा है। इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण उत्तर प्रदेश की संस्कृति, तकनीक और हस्तशिल्प को प्रदर्शित करने वाला विशाल प्रदर्शनी क्षेत्र होगा। इसमें 100 से अधिक स्टॉल, जिसमें ओडीओपी, रोबोटिक्स व इलेक्ट्रॉनिक्स डिस्प्ले, तथा नेडा का सोलर पवेलियन राज्य के नवाचार और उद्यमशीलता को प्रदर्शित करेंगे। प्लानेटेरियम, एआई जोन, और वाराणसी, बुंदेलखंड व प्रदेश के अन्य क्षेत्रों की सांस्कृतिक झलक और व्यंजन अनुभव को और समृद्ध करेंगे। कैडेट अपने प्रवास के दौरान अपने परिवारों से जुड़े रह सकें, इसके लिए समर्पित मोबाइल टावर भी स्थापित किया जा रहा है।

पानी के दुरुपयोग पर बड़ी सख्ती: नया कानून आएगा, उल्लंघन पर होगी कड़ी सज़ा

चंडीगढ़ सूबे में पानी के दुरुपयोग और बर्बादी करने वालों पर आने वाले वक्त में शिकंजा कसा जाएगा।  हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र में विशेष बिल लाने की तैयारी है, जिसका ड्राफ्ट तैयार हो गया है। विभाग के मंत्री ने साफ कर दिया है कि पानी का दुरुपयोग, बर्बादी व कमर्शियल इस्तेमाल चोरी छिपे करने वालों विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि विधेयक में भारी जुर्माने के साथ साथ सजा तक का प्रावधान रखा गया है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के इस तरह के रवैये के कारण बाकी लोगों को दिक्कत उठानी होती है। मंत्री ने कहा है कि शहरी क्षेत्र में पानी की दिक्कत नहीं है, बल्कि कुछ ग्रामीण इलाकों से हमें इस तरह की शिकायत मिली है, लेकिन उसके तकनीकी कारण भी हैं, क्योंकि इस बार भारी बारिश, जलभराव के कारण कईं तरह की चुनौतियां आन खड़ी हुई हैं। उसके बावजूद भी अधिकारियों को साफ साफ निर्देश हैं कि नियमित कार्यों के लिए ग्रामीण एरिया में भी दिक्कत नहीं होनी चाहिए। हरियाणा में पेयजल बर्बादी रोकने को लेकर जहां सूबे की नायब सैनी सरकार दिसंबर में होने वाले शीतकालीन सत्र में नया बिल लेकर आएगी। जिसमें कड़ी सजा, मोटे जुरमाने जैसे प्रावधान रखे जा रहे हैं। इसके अलावा पानी के इस्तेमाल को लेकर मीटर लगाए जाने के साथ ही बिलों का बकाया समय से जमा हो इसके भी ठोस प्रबंधन किए जा रहे हैं। मंत्री ने साफ कर दिया है कि पेयजल की बर्बादी करने और समय से बिल नहीं जमा करने वालों पर  शिकंजा कसा जाएगा। इस क्रम में लीगल एक्सपर्ट की सलाह लेकर बिजली चोरी की तर्ज पर जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने विधेयक का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। जल संरक्षण को प्रोत्साहित करने के लिए कानून बनाने से आला अफसरों को उम्मीद है कि लोगों की पानी  बर्बाद करने की आदतों पर अंकुश लगेगा। अवैध कट पर भी कार्रवाई  पेयजल लाइन में अवैध कटों पर भी कार्रवाई का प्रावधान होगा। उन्होंने कहा कि पानी के बिलों की शहरों में 60 से 65 फीसदी रिकवरी है, लेकिन गांवों में यह 5 से 7 फीसदी ही है। ऐसे में विभाग पेयजल सप्लाई के मीटर लगाए जाने के  विकल्प पर भी काम कर रहा है। गंगवा ने कहा कि महाग्राम योजना में 10 हजार से अधिक आबादी वाले 148 गांव चिह्नित किए हैं। 17 में पेयजल, सीवरेज और एसटीपी की व्यवस्था पूरी की जा चुकी है जबकि 30 में कार्य प्रगति पर है। दो साल में इन सभी 148 गांवों में शहरों की  तर्ज पर सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी। यहां पर बता दें कि गुरुग्राम नगर निगम ने नई दरें तय कर अधिसूचना भी पूर्व में जारी कर दी गई है।   बाकी नगर निगमों में भी तैयारी हो रही है। अब घरेलू उपभोक्ताओं को पहले से दोगुना भुगतान करना होगा। एक से 20 किलोलीटर पानी की खपत पर दर 3.19 से बढ़ाकर 6.38 रुपये प्रति किलोलीटर कर दी गई है। 20 से 40 किलो लीटर तक की खपत पर अब 10.21 रुपये प्रति किलोलीटर देना होगा, जो पहले की तुलना में लगभग 60% की बढ़ोतरी है। 40 किलोलीटर से अधिक पानी उपयोग करने वालों को 12.76 प्रति किलोलीटर के हिसाब से भुगतान करना होगा। सरकार ने नगर निगमों के वित्तीय बोझ को कम करने के लिए नई पेयजल और सीवरेज दरें लागू करने का निर्णय लिया है। यहां पर यह  भी उल्लेखनीय है कि गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत, पानीपत कई जिलों में एक नवंबर से बिलों में बढ़ोतरी हो गई है। बताया जा रहा है कि खर्चों की भरपाई और नई पेयजल और सीवरेज लाइन बिछाने के क्रम में यह कदम उठाया जा रहा है।  नई पेयजल तथा सीवरेज लाइन बिछाने में खर्च की गई रकम की भरपाई के लिए नया रास्ता निकाला है। गुरुग्राम, फरीदाबाद तथा सोनीपत और पानीपत सहित कई जिलों में नवंबर से पानी के बिलों में डबल बढ़ोतरी होने जा रही है।  

शिंदे की दिल्ली दौड़ पर उद्धव का कटाक्ष: ‘परेशान होकर शाह के पास गए’

मुंबई  महाराष्ट्र के पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे ने एकनाथ शिंदे पर तंज कसा है। उन्होंने गुरुवार को कहा कि एकनाथ शिंदे अब महायुति में मची कलह से परेशान हो गए हैं। इसी के चलते वह बुधवार रात को दिल्ली जाकर अमित शाह से मिले थे। उन्होंने कहा कि एकनाथ शिंदे फिलहाल असहाय नजर आते हैं। शिवसेना-यूबीटी की टीचर्स विंग शिक्षक सेना को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि जब दूसरे दल जनता के लिए कोई कदम उठाते हैं तो ये लोग रेवड़ी बोलते हैं, लेकिन खुद करते हैं तो उसे जनहित में बताते हैं। उन्होंने कहा कि अब तो ये लोग आपस में ही लड़ रहे हैं। कोई दिल्ली भागता है तो कोई किसी और के पास जाता है। आखिर ये लोग इतने असहाय क्यों हो गए हैं।   महायुति में भाजपा, शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी शामिल हैं। शिवसेना के मंत्रियों ने इसी मंगलवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में हिस्सा नहीं लिया था। इस बैठक में अकेले एकनाथ शिंदे ही गए थे और चुपचाप बैठे रहे। अन्य सभी मंत्री मुख्यमंत्री कार्यालय में देवेंद्र फडणवीस का इंतजार कर रहे थे। मीटिंग खत्म होने के बाद फडणवीस जब ऑफिस पहुंचे तो वहां शिवसेना के मंत्री पहले से मौजूद थे। इस दौरान मंत्रियों ने कहा कि भाजपा ने डोंबिवली में हमारे कार्य़कर्ताओं को पार्टी में शामिल किया है। इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। इस पर फडणवीस ने कहा कि आखिर इस तरह के दलबदल अभियान की शुरुआत तो आपने ही की थी। फडणवीस ने कहा था कि कई इलाकों में भाजपा के लोगों को शिवसेना जॉइन कराई गई है। यदि आप लोगों ऐसा करना बंद कर देंगे तो फिर हम भी ऐसा कदम नहीं उठाएंगे। माना जा रहा है कि मंत्रियों ने इस पर सहमति जताई और फिर आपस में समझौता हुआ है कि एक-दूसरे के दलों के नेताओं को शामिल नहीं कराएंगे। इसके बाद बुधवार को ही एकनाथ शिंदे दिल्ली आए और अमित शाह से मिले। मंगल को बहस और बुधवार को शाह से मिले एकनाथ शिंदे कहा जा रहा है कि महाराष्ट्र में चल रही खींचतान को लेकर ही एकनाथ शिंदे ने अमित शाह से मुलाकात की थी। ठाकरे ने कहा कि आज तो रेवड़ी एक नियम जैसा बन गया है। पर इन लोगों की राजनीति यह है कि खुद बांटो तो कल्याण और दूसरा दे तो रेवड़ी कहा जाएगा। बता दें कि कई चुनाव में फ्री वाली स्कीमों की भाजपा ने आलोचना की थी और इसे रेवड़ी कल्चर का नाम दिया गया था।