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किसानों को मिली बड़ी राहत: मध्य प्रदेश में बदले नियम, हाईटेंशन लाइन के लिए दोगुना मुआवजा

भोपाल प्रदेश सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए हाईटेंशन लाइन बिछाने के लिए अधिग्रहित भूमि पर मिलने वाले मुआवजे में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब खेतों के ऊपर से 66 केवी या उससे अधिक क्षमता की विद्युत लाइन डाली जाती है, तो भूमि स्वामी को कलेक्टर गाइड लाइन के आधार पर 200 प्रतिशत मुआवजा भुगतान किया जाएगा। पहले यह राशि मात्र 85 प्रतिशत दी जाती थी। राजस्व विभाग द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि हाईटेंशन लाइन के लिए जहां-जहां टावर स्थापित किए जाएंगे, वहां टावर के चारों लेग के भीतर आने वाली भूमि तथा उसके दोनों ओर एक-एक मीटर अतिरिक्त क्षेत्र का पूरा मुआवजा दिया जाएगा। हालांकि यह जमीन किसान के कब्जे में बनी रहेगी।   इसके साथ ही ट्रांसमिशन लाइन के नीचे आने वाले मार्गाधिकार (ROW) क्षेत्र में स्थित भूमि के कारिडोर क्षेत्रफल का कलेक्टर गाइडलाइन मूल्य का 30 प्रतिशत क्षतिपूर्ति के रूप में दिया जाएगा। आदेश के अनुसार, ROW क्षेत्र में किसी भी प्रकार का निर्माण करने की अनुमति नहीं होगी। मुआवजा निर्धारण की जिम्मेदारी जिला कलेक्टर को सौंपी गई है, जो भूमि के बाजार मूल्य और निर्धारित मानकों के आधार पर क्षतिपूर्ति राशि तय करेंगे। सरकार ने विभिन्न क्षमता की हाईटेंशन लाइनों के लिए मार्गाधिकार क्षेत्रफल का निर्धारण भी सार्वजनिक किया है। हाईटेंशन लाइन के नीचे भूमि के क्षतिपूर्ति क्षेत्रफल का निर्धारण केवी हाईटेंशन लाइन- सामान्य मार्ग- वन क्षेत्र- शहरी आबादी क्षेत्र 400 केवी- 46 मीटर- 40 मीटर- 38 मीटर 220 केवी- 32 मीटर- 28 मीटर- 24 मीटर 132 केवी- 25 मीटर- 21 मीटर- 19 मीटर 

नक्सली हमले में शहीद आशीष शर्मा पंचतत्व में विलीन, CM का बड़ा फैसला—छोटे भाई को मिलेगा सब इंस्पेक्टर पद

नरसिंहपुर/बोहानी बालाघाट में माओवादी मुठभेड़ में वीरगति प्राप्त करने वाले इंस्पेक्टर आशीष शर्मा का गुरुवार को उनके गृहग्राम बोहानी (नरसिंहपुर) में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। परिजनों ने उनकी पार्थिव देह को मुखाग्नि दी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल ने शहीद को कंधा दिया, जो उनकी वीरता के प्रति सर्वोच्च सम्मान को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने इस दौरान बड़ा एलान करते हुए कहा कि शहीद इंस्पेक्टर के छोटे भाई को सारे नियमों को शिथिल करते हुए सब इंस्पेक्टर बनाया जाएगा। परिवार को दी जाएगी एक करोड़ रुपये की सम्मान निधि इसके अलावा, परिवार को एक करोड़ रुपए की सम्मान निधि दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि आशीष शर्मा के नाम पर गांव में एक पार्क और एक स्टेडियम बनाया जाएगा। इससे पहले गुरुवार दोपहर को शहीद का पार्थिव शरीर उनके गृहग्राम बोहानी लाया गया, जहां घर पर उन्हें गॉर्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद जब उनकी अंतिम यात्रा मुक्तिधाम के लिए निकली तो लोगों ने घरों की छतों पर खड़े होकर शहीद पर फूल बरसाए। अंतिम विदाई में 5000 से ज्यादा लोग शामिल हुए, जिन्होंने भारत माता की जय और अमर रहे के नारे लगाए।   इस दौरान कैबिनेट मंत्री उदय प्रताप सिंह, मप्र कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी शहीद जवान को श्रद्धांजलि दी। एंटी नक्सल ऑपरेशन डीजी पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि बुधवार को मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ पुलिस ने सीमावर्ती क्षेत्र बोर तालाब के पास एक जॉइंट ऑपरेशन चलाया था, जहाँ नक्सलियों से मुठभेड़ में तीनों टीम को लीड कर रहे इंस्पेक्टर आशीष शर्मा को गोली लग गई थी, जिसके बाद उन्हें शहीद घोषित कर दिया गया। शहीद आशीष शर्मा का करियर शौर्य से भरा रहा 2016 में मध्यप्रदेश पुलिस में भर्ती हुए और 2018 में हॉक फोर्स बालाघाट में पदस्थापना पाई। उन्होंने 18 दिसंबर 2022 को 14 लाख के इनामी नक्सली गोडी को मार गिराया, 22 अप्रैल 2023 को 28 लाख की इनामी एसीएम सुनीता और सरिता को ढेर किया। उनकी वीरता के कारण उन्हें 21 फरवरी 2023 को उपनिरीक्षक से निरीक्षक पद पर आउट ऑफ टर्न प्रमोशन मिला था। उनका अंतिम शौर्य 19 फरवरी 2025 को रौंदा टोला मुठभेड़ में दिखा, जहाँ उन्होंने 62 लाख की कुल इनामी नक्सली कमांडर आशा सहित चार नक्सलियों को मार गिराया था।

मुख्यमंत्री योगी के निर्देशन में AI के जरिये विकास का मॉडल बन रहा उत्तरप्रदेश

एआई में वैश्विक मानक तय कर रहा ‘योगी का यूपी’ यूपी फतेहपुर में भारत का पहला एआई आधारित स्तन कैंसर स्क्रीनिंग केंद्र कृषि में हाईटेक बदलाव: यूपी के 10 लाख से अधिक किसान एआई से जुड़े शिक्षा, सुरक्षा में प्रदेशवासियों के लिए नया मुकाम स्थापित कर रहा एआई उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ बनाई जा रही देश की पहली पूर्ण विकसित एआई सिटी लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश एआई के जरिए हर क्षेत्र में वैश्विक मानक तय कर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा है कि तकनीक के जरिए उत्तर प्रदेश हर क्षेत्र में शीर्ष पर पहुंचे। दुनिया भर में सरकारें एक तरफ जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिए सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रयत्नशील हैं। इसे लेकर अधिकतर देश और राज्य अभी प्रयोग कर रहे हैं, वहीं उत्तर प्रदेश एआई को ऐसे पैमाने पर लागू कर चुका है, जो कई वैश्विक उदाहरणों की बराबरी करता है। यूपी का नेतृत्व करने वाले योगी आदित्यनाथ ने तकनीक को नारे की जगह शासन का सिद्धांत बना दिया है, जिसके जरिए भी यूपी अपने समृद्ध भविष्य को नए सिरे से गढ़ रहा है। रणनीतिक छलांग: भारत के पहले एआई सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को देश की पहला पूर्ण विकसित एआई सिटी बनाई जा रही है। अन्य “स्मार्ट सिटी” मॉडलों की तुलना में यहां तकनीक ढांचों को मजबूत किया जा रहा है। सीएम योगी आदित्यनाथ लखनऊ को केवल राजधानी नहीं, बल्कि एआई आधारित शासन का राष्ट्रीय कमांड सेंटर बना रहे हैं।     •    राज्य समर्थित एआई इनोवेशन हब     •    10,000+ GPUs वाला सुपरकंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर     •    अपनी ही भाषा में बने बहुभाषी एआई मॉडल     •    वैश्विक एआई कंपनियों को आकर्षित करने वाला R&D ढाँचा     •    इंडियाएआई मिशन के अनुरूप नीति ढाँचे स्वास्थ्य में एआईः इस क्षेत्र में बड़ी क्रांति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य क्षेत्र बड़ी क्रांति से गुजर रहा है। यह बदलाव सीएम योगी के उस सोच को प्रदर्शित करता है, जहां स्वास्थ्य केवल इलाज नहीं, बल्कि पूर्वानुमान पर केंद्रित होना चाहिए। एआई इसे संभव बना रहा है।     • यूपी के फतेहपुर में भारत का पहला AI-आधारित स्तन कैंसर स्क्रीनिंग केंद्र बनया गया है, जो अधिक सटीकता और शुरुआती पहचान में सक्षम है।     • सार्वजनिक स्वास्थ्य डेटा मैनुअल रिपोर्टिंग से हटकर प्रेडिक्टिव मॉडलिंग की ओर बढ़ रहा है।     •सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नि:शुल्क एआई और क्लाउड कोर्स, ताकि अगली पीढ़ी के स्वास्थ्य-तकनीक विशेषज्ञ तैयार किए जा सकें। शिक्षा में एआईः अधिक स्मार्ट और स्केलेबल लर्निंग सिस्टम सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यूपी का शिक्षा ढाँचा डिजिटल रूप से नए सिरे से तैयार हो रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तकनीक को ग्रामीण कक्षाओं और वैश्विक शिक्षा मानकों के बीच का संपर्क सेतु मानते हैं। इस सेतु का निर्माण तेज़ गति से हो रहा है।     •माध्यमिक शिक्षा परीक्षाओं में AI bots सहायक भूमिका निभा रहे हैं, जिससे त्रुटियाँ और अनियमितताएँ कम हो रही हैं।     •शिक्षक व छात्र एआई टूल्स में प्रशिक्षित हो रहे हैं, जिससे सीखने के नए मार्ग खुल रहे हैं     • उत्तर प्रदेश एआई आधारित व्यक्तिगत शिक्षा प्रणाली की नींव डाल रहा है। कृषि में हाई-टेक बदलाव: दस लाख से अधिक किसान एआई से जुड़े यूपी कृषि के जरिए यूपी आर्थिक शक्ति बन रहा है। विश्व बैंक समर्थित यूपी एग्रीज के माध्यम से 10 लाख से अधिक किसान अब एआई आधारित सलाह से जुड़ चुके हैं। उपग्रह चित्रों, मिट्टी विश्लेषण, मौसम मॉडल और RFID आधारित संसाधन ट्रैकिंग का उपयोग कर रहे हैं, इसके जरिए…     • फसल उत्पादन में सुधार     • जोखिम का तेज़ पूर्वानुमान     • पानी व खाद का कम से कम उपयोग     • संसाधनों की सटीक निगरानी पारदर्शी व समयबद्ध ढंग से मिल रहा कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कल्याणकारी व्यवस्थाएँ इंटेलिजेंस आधारित प्रणाली बन रही हैं। इसके जरिए कल्याण योजनाएं धीमी सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि रियल-टाइम सार्वजनिक सेवा बन चुका है। एआई समर्थित तंत्र से फायदा :     • वास्तविक लाभार्थी डेटाबेस तैयार कर रहे हैं     • धोखाधड़ी को तुरंत पहचान रहे हैं     • डीबीटी को तेज़ और अधिक सटीक बना रहे हैं     • सही योजना को सही नागरिक से जोड़ रहे हैं सार्वजनिक सुरक्षा में एआईः सुरक्षा का नया मानक राज्य के कई नगर निगमों में एआई आधारित प्रणालियाँ कानून-व्यवस्था को नए स्तर पर ले जा रही हैं। इसके लिए अनेक कार्य हो रहे हैं, जिसके परिणाम भी मिल रहा है।     • फेसियल रिकॉग्निशन नेटवर्क     • वाहन ट्रैकिंग     • पुलिस नियंत्रण कक्षों से जुड़े SOS सिस्टम     • प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स आधारित निगरानी     • जेलों में “Jarvis” जैसे एआई सुरक्षा तंत्र राजस्व और संसाधन प्रबंधन: निष्पक्ष निर्णायक के रूप में एआई भूमि विवादों से लेकर अवैध खनन तक यूपी शासन-प्रशासन एआई और सैटेलाइट विश्लेषण का उपयोग डेटा आधारित, निष्पक्ष निर्णय के लिए कर रहा है। इसके जरिए भ्रष्टाचार कम, समाधान तेज और जवाबदेही मजबूत हो रही है।     • भूमि रिकॉर्ड का डिजिटल मानचित्रण     • अतिक्रमण की स्वत: पहचान     • अवैध खनन की वास्तविक समय में निगरानी     • जिलों के प्रदर्शन की डिजिटल ट्रैकिंग API आधारित शासन: ‘ध्वनि’ बन रहा है यूपी का एआई ऑपरेटिंग सिस्टम एनआईसी द्वारा निर्मित ध्वनि प्लेटफ़ॉर्म उत्तर प्रदेश का आधुनिक शासन इंजन बन रहा है। एआई आधारित APIs सीधे शिकायत निस्तारण से लेकर स्वचालित सेवाओं के क्रियान्वयन तक विभागीय कार्यों के प्रवाह से जुड़ते हैं। साथ ही आधुनिक रूप से मजबूत होते हुए विभाग अलग-अलग नहीं, बल्कि जुड़ी हुई डेटा प्रणाली के रूप में काम करते हैं।

अंचल कार्यालयों में बैठने के लिये सीएससी वीएलई को सर्वे भवन में दिया जा रहा प्रशिक्षण

पटना, राज्य में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ऑनलाइन सेवाओं को आम नागरिकों के और करीब लाने के लिए विभाग द्वारा सीएससी के साथ समन्वय स्थापित कर उनके वीएलई को प्रशिक्षित किया जा रहा है। यह दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण सभी जिलों के वीएलई को विभिन्न बैचों में बांटकर दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के बाद ये वीएलई अंचल कार्यालयों में बैठेंगे तथा नियत दर पर आमलोगों को सभी ऑनलाइन राजस्व सेवाओं की प्राप्ति में मदद करेंगे। कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के ये वीएलई सीधे अंचल कार्यालयों में स्थापित काउंटरों पर बैठकर आम जनता के लिये राजस्व विभाग के सलाहकार के रूप में भी कार्य करेंगे। इसी उद्देश्य से गुरुवार को राजस्व (सर्वे) प्रशिक्षण संस्थान, शास्त्रीनगर में वीएलई के चौथे बैच के दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हुई। राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव ने की चौथे बैच की शुरूआतः वीएलई के चौथे बैच की शुरुआत करते हुए विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने कहा कि ऑनलाइन सेवाएं पूरी तरह उपलब्ध होने के बावजूद शिकायतों का जारी रहना चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि सभी राजस्व सेवाओं को ऑनलाइन करने का उद्देश्य जनता को सुगमता से विभाग की सेवायें पहुंचाना था ताकि उन्हें विभिन्न कार्यालयों तथा पदाधिकारियों के पास चक्कर ना लगाना पड़े। लेकिन आज भी राज्य की बड़ी आबादी राजस्व तथा भूमि संबंधी मामलों में ऑनलाइन प्रक्रिया को लेकर अनिश्चितता और भय से ग्रसित है। आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी न होने से भी समस्या बनी रहती है। इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए वीएलई को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि पहली बार वीएलई को अंचल कार्यालय में बैठने की दी गई जिम्मेदारी विभागीय ऑनलाइन सेवाओं की आसान उपलब्धता की दिशा में एक कदम है। उन्होंने कहा कि अब वीएलई सिर्फ सेवा प्रदाता ही नहीं, विभाग के सलाहकार की भूमिका में रहेंगे। इसलिए उन्हें विभागीय प्रावधानों व प्रक्रियाओं की स्पष्ट समझ होनी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि लोग सीधे आपके पास आएंगे। यदि आप सही सलाह और सटीक कार्य करेंगे तो काम समय पर होगा और शिकायतें स्वतः कम होंगी। इससे विभाग के प्रति विश्वास बढ़ेगा और अंचलों में बेवजह की भीड़ घटेगी। प्रशिक्षण सत्र में विशेष कार्य पदाधिकारी अनुपम प्रकाश ने विभाग की संरचना की जानकारी दी। उन्होंने महत्वपूर्ण सेवा की प्रक्रिया पर भी प्रकाश डाला। निदेशालय के आईटी मैनेजर कुणाल सिंह ने विभागीय ऑनलाइन सेवाओं तथा आवश्यक दस्तावेजों की जरूरत पर प्रस्तुति देकर सभी वीएलई को समझाने की कोशिश की। कार्यक्रम का संचालन राजस्व (सर्वे) प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य दिव्य राज गणेश ने किया। स्वागत-भाषण करते हुए निदेशक जे. प्रियदर्शिनी ने कहा कि विभाग की यह नई व्यवस्था ऑनलाइन सेवाओं की उपलब्धता, दक्षता और पारदर्शिता को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इसके लागू होने से लोगों को अपने ही अंचल कार्यालय में तेज, सरल और भरोसेमंद ऑनलाइन सेवाएं मिल सकेंगी।

यूपी बोर्ड ने बदली परीक्षा तिथि: देखें अपडेटेड डेटशीट और नए बदलाव

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में हाईस्कूल और इंटर की बोर्ड की परीक्षा की तिथि में बदलाव किया गया है। (UP Board Exam Date 2026 ) इसकी जानकारी आधिकारिक वेबसाइट upmsp.edu.in पर जारी कर दी गई है। 10वीं की हिंदी परीक्षा की नई तारीख  बदले गए समयसारणी से के हिसाब से कक्षा 10वीं की हिंदी और प्राथमिक हिंदी की परीक्षा अब 18 फरवरी 2026 को आयोजित की जाएगी. परीक्षा का समय सुबह 8:30 बजे से 11:45 बजे तक तय किया गया है. पहले यह परीक्षा 16 फरवरी 2026 को सुबह 8 बजे से 11:15 बजे तक होनी थी. इस बदलाव के बाद छात्रों को दो दिन अतिरिक्त तैयारी का समय मिल जाएगा. बोर्ड का कहना है कि संशोधित तारीखें वेबसाइट पर उपलब्ध हैं और छात्रों को सलाह दी गई है कि वे नई डेटशीट देखकर अपनी तैयारी की योजना बनाएं। छात्रों से कहा गया है कि केवल नई डेटशीट पर भरोसा करें। अफवाहों पर ध्यान न दें और आधिकारिक वेबसाइट पर अपडेट चेक करते रहें। 55 लाख से अधिक छात्र देंगे परीक्षा  बोर्ड के अनुसार, यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 में करीब 55 लाख छात्र-छात्राएं शामिल होंगे. इनमें 10वीं और 12वीं दोनों कक्षाओं के परीक्षार्थी शामिल हैं. परीक्षा 18 फरवरी से शुरू होकर 12 मार्च 2026 तक चलेगी. इस बार परीक्षा 8,000 से अधिक केंद्रों पर आयोजित की जाएगी।  

कबीरधाम में सहकारी समिति प्रबंधकों और ऑपरेटर्स की हड़ताल स्थगित

कलेक्टर गोपाल वर्मा को संघ ने हड़ताल स्थगन का सौंपा पत्र, 21 नवंबर लौटेंगे काम पर          रायपुर, कबीरधाम जिले में बीते 3 नवंबर से चल रही जिला सहकारी संघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल स्थगित हो गई है।  संघ के पदाधिकारियों ने कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा से मुलाकात कर हड़ताल स्थगन का पत्र सौंपा। जिला सहकारी संघ की ओर से कहा गया कि शासन द्वारा 15 नवंबर से धान खरीदी प्रारंभ कर दी गई है। किसानों के हित को देखते हुए जिला सहकारी संघ के समस्त कर्मचारी अपनी अनिश्चितकालीन हड़ताल को स्थगित करते हैं और 21 नवंबर, शुक्रवार से अपने कार्य पर लौट जाएंगे। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, संयुक्त कलेक्टर श्री आर बी देवांगन, उप पंजीयक सहकारिता श्री जी एस शर्मा, खाद्य अधिकारी श्री सचिन मरकाम, डीएमओ श्री अभिषेक मिश्रा, सीसीबी नोडल श्री आर पी मिश्रा सहित अन्य अधिकारी व जिला सहकारी संघ के सदस्य उपस्थित रहे।

आतंकी खतरे पर सख्त हरियाणा सरकार, 150 अधिकारियों के साथ एंटी-टेररिस्ट सेल की होगी स्थापना

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को नए ढांचे और उच्च स्तर पर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। फरीदाबाद की अल फला यूनिवर्सिटी में संदिग्ध गतिविधि और सामग्री मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे प्रदेश में सतर्कता बढ़ाई है। इसी क्रम में डीजीपी ओपी सिंह ने एंटी टेररिस्ट स्क्वाड अर्थात एटीएस के गठन का विस्तृत प्रस्ताव सरकार को भेज दिया है। इसे हरियाणा की आतंकवाद-रोधी क्षमता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव में एटीएस की आवश्यकता, यूनिट की संरचना, मानव संसाधन और संचालन प्रणाली का पूरा खाका शामिल है। सरकार अब यह तय करेगी कि एटीएस का ढांचा उत्तर प्रदेश की तर्ज पर ऑपरेशन आधारित हो या फिर एनसीआर की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए हरियाणा का अलग मॉडल तैयार किया जाए। अधिकारियों का मानना है कि दिल्ली की सीमा, औद्योगिक क्षेत्रों और संवेदनशील गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए हरियाणा-विशेष मॉडल अधिक प्रभावी साबित हो सकता है। इस विषय पर मुख्यमंत्री स्तर पर निर्णय जल्द होने की संभावना है।   अल फला यूनिवर्सिटी मामले के बाद हरियाणा पुलिस ने एनसीआर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की है। प्रदेश के 150 थानों को विशेष निगरानी चक्र में शामिल किया गया है। प्रत्येक थाने से एक जवान को प्रतिदिन फील्ड रेकी, संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण और इंटेलिजेंस जुटाने की जिम्मेदारी दी गई है। यह रिपोर्ट सीधे वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जा रही है।   प्रस्ताव के अनुसार एटीएस को केवल घटना के बाद कार्रवाई करने वाली यूनिट के रूप में नहीं, बल्कि पूर्व-निवारण आधारित एजेंसी के रूप में विकसित किया जाएगा। यूनिट का मुख्य फोकस प्रीवेंटिव इंटेलिजेंस, संदिग्ध गतिविधियों की शुरुआती पहचान और समय रहते कार्रवाई पर रहेगा। मौजूदा सुरक्षा ढांचा अधिकतर पोस्ट इंसीडेंट रिस्पॉन्स पर आधारित है, जिसे वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप उन्नत करने की जरूरत मानी गई है। एटीएस क्यों जरूरी पिछले महीनों में एनसीआर क्षेत्र में संवेदनशीलता बढ़ी है। सीमावर्ती दबाव, साइबर संदिग्ध गतिविधियां और हालिया घटनाओं ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा ढांचे को प्रीवेंटिव मोड में बदलना आवश्यक है। अल फला यूनिवर्सिटी मामले ने यह जरूरत और अधिक स्पष्ट कर दी है। डीजीप ओपी सिंह ने बताया कि एटीएस गठन का प्रस्ताव भेज दिया गया है और अंतिम निर्णय सरकार पर निर्भर करेगा। उनका कहना है कि एटीएस बनने से हरियाणा नई रणनीति और अधिक गति के साथ आतंकवाद-रोधी प्रयासों को लागू कर सकेगा ।

घेराव की तैयारी में तनाव: पुलिस ने कई युवा कांग्रेस नेताओं को लिया हिरासत में

जयपुर युवा कांग्रेस के मुख्यमंत्री आवास घेराव के दौरान बुधवार को पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच जमकर धक्का-मुक्की हो गई। युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें शहीद स्मारक पर बैरिकेड्स लगाकर रोक दिया। इससे नाराज कार्यकर्ता बैरिकेड्स पर चढ़ गए और मौके पर तनाव बढ़ गया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके बाद युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदयभानु चिब, प्रदेश अध्यक्ष अभिमन्यु पूनिया सहित कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर बसों में भरकर ले जाया गया। युवा कांग्रेस ने वोट चोरी, खराब कानून व्यवस्था और फसल खराबे के मुआवजे सहित कई मुद्दों को उठाते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष अभिमन्यु पूनिया ने कृषि मंत्री किरोड़ी मीणा पर निशाना साधते हुए कहा कि “छापेमारी तो की जा रही है, लेकिन कार्रवाई कहीं नजर नहीं आती।” उन्होंने पूरे राजस्थान में SIR करवाने को अव्यवहारिक बताते हुए हाल ही में हुई BLO की आत्महत्या पर भी सरकार को कठघरे में खड़ा किया। हालांकि इस बार पिछले प्रदर्शनों की तुलना में युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भीड़ कम दिखाई दी। इसका असर प्रदर्शन की अवधि पर भी पड़ा। मुख्यमंत्री आवास कूच का कार्यक्रम महज 8 से 15 मिनट में ही समाप्त हो गया। पुलिस की सख्ती और कम जुटी भीड़ के कारण युवा कांग्रेस का यह घेराव अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो पाया।

सीएम युवा उद्यमी योजना, रोजगार मेला व ओडीओपी योजना की बढ़ी विश्व स्तर पर प्रतिष्ठा

  ओडीओपी योजना के तहत यूपी के परंपरागत एवं स्थानीय शिल्प को आईआईटीएफ 2025 में मिल रही वैश्विक पहचान आईआईटीएफ 2025 में प्रदेश के युवाओं की भागीदारी बन रही युवाओं की रचनात्मकता और उद्यमशीलता के प्रदर्शन का मंच   लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश एक युवा केंद्रित विकास की लहर का साक्षी बन रहा है, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण हमें भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 (आईआईटीएफ) में देखने को मिल रहा है। इस वर्ष आईआईटीएफ 2025 में यूपी की भागीदारी ने न केवल प्रदेश के युवाओं की रचनात्मकता और उद्यमशीलता को उजागर कर रही है, बल्कि योगी सरकार की युवा प्रतिभाओं को नवाचार एवं आत्मनिर्भरता के लिए प्रोत्साहित करने और विकास के अवसर सृजित करने की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित कर रही है। सीएम योगी के विजन में प्रदेश में चलाए जा रहे रोजगार मेला, सीएम युवा कार्यक्रम और ओडीओपी योजना उत्तर प्रदेश के युवाओं को सशक्त बना रही हैं। जो न केवल राज्य के युवाओं को नौकरी के अवसर प्रदान करने, उनके कौशल का विकास करने और उनमें उद्यमिता व नवाचार को बढ़ावा दे रही है। जहां रोजगार मेले युवाओं को रोजगार से जोड़ते हैं, तो वहीं सीएम युवा कार्यक्रम का ध्येय उनके कौशल और क्षमताओं को मजबूती प्रदान करना है। सीएम युवा कार्यक्रम प्रदेश के युवाओं को कौशल, मार्गदर्शन और संसाधनों से लैस करता है ताकि वे अपने उद्यमों को शुरू कर सकें ताकि वे ऐसे उद्यम या व्यवसाय स्थापित कर सकें, जो दूसरों के लिए भी रोजगार सृजित कर सकें। सीएम योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी योजना ओडीओपी, उन्हें उनके अपने ही जनपद में स्थानीय कौशलों को सफल व्यवसायों में बदलने में मदद करता है। सीएम योगी की इस योजना का अनुकरण वर्तमान में देश के अन्य राज्य भी कर रहे हैं। आईआईटीएफ में अपने उत्पादों का प्रदर्शन करने वाले कई युवाओं ने साझा किया कि योगी सरकार की इन योजनाओं ने कैसे उनके स्टार्ट अप आइडिया, उनके परंपरागत व स्थानीय कौशलों को फलते-फूलते उद्यमों में बदलने में मदद की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सपना एक ऐसे भविष्य का है जहां उत्तर प्रदेश के युवा नौकरी तलाशने वाले न होकर नौकरी सृजित करने वाले बनें, जो आने वाले समय में उत्तर प्रदेश में नवाचार और आत्मनिर्भरता को गति दें, साथ ही राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनाएं। योगी सरकार की युवा-अनुकूल नीतियों ने राज्य के विकास को तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कौशल उन्नयन से लेकर स्टार्टअप समर्थन तक राज्य प्रशासन ने एक ऐसा वातावरण तैयार किया है जो युवाओं को अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सशक्त बनाता है। राज्य सरकार की ये पहलें केवल व्यक्तियों की मदद ही नहीं कर रही हैं, बल्कि वे उत्तर प्रदेश के समग्र विकास के आधारभूत ढांचे को मजबूत भी कर रही हैं। जिसमें नई विचारधाराएं, तकनीकी नवाचार और ऊर्जावान भागीदारी मुख्यधारा में आ रही हैं। आईआईटीएफ और यूपीआईटीएस जैसे अंतरराष्ट्रीय व प्रतिष्ठित मंचों में राज्य के युवा उद्यमियों की बढ़ती उपस्थिति योगी सरकार की सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता का मजबूत प्रतिबिंब है। जिस तरह से राज्य के युवा आत्मविश्वास के साथ आगे आ रहे हैं, हैंडीक्राफ्ट से लेकर कृषि-आधारित उद्योगों तक विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार ला रहे हैं, उत्तर प्रदेश अवसरों और उद्यमिता का केंद्र बनकर उभर रहा है। योगी सरकार का युवाओं को सशक्त बनाने पर ध्यान एक मजबूत, आत्मनिर्भर और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी राज्य की राह प्रशस्त कर रहा है।

MP अमृतपाल सिंह की रिहाई पर फैसला करीब, 1–19 दिसंबर के बीच मिल सकती है रिहाई की मंजूरी

चंडीगढ़ खडूर साहिब से लोकसभा सदस्य अमृतपाल सिंह ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में पैरोल की मांग करते हुए एक याचिका दाखिल की है। याचिका में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 की धारा 15 के तहत अस्थायी रिहाई की मांग करते हुए अमृतपाल सिंह ने कहा है कि उन्हें 1 से 19 दिसंबर तक चलने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में शामिल होना है। इसी लिए इस अवधि के दौरान उन्हें पैरोल देने की मांग की गई है, ताकि वह सांसद के रूप में अपने संसदीय कर्तव्यों का पालन कर सकें। फिलहाल यह याचिका हाई कोर्ट की रजिस्ट्री शाखा में जांच (स्क्रूटनी) के लिए पड़ी हुई है। स्क्रूटनी पूरी होने के बाद ही इसे अदालत के समक्ष सूचीबद्ध (लिस्ट) किया जाएगा।