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हाई ब्लड प्रेशर नियंत्रण: घर पर बीपी मॉनिटरिंग से मिलते हैं बेहतर नतीजे

क्या अस्पताल में जब कोई आपका ब्लड प्रेशर मापता है तो वह अधिक होता है, लेकिन घर में सामान्य रहता है। ऐसी स्थिति को व्हाइट कोट हाइपरटेंशन कहा जाता है। हृदय रोग विशेषज्ञों के एक अंतरराष्ट्रीय समूह होप एशिया नेटवर्क ने नई गाइडलाइन जारी की है, जिसमें क्लीनिक, घर की माप तथा 24 घंटे की निगरानी, तीनों को समान महत्व दिया गया है। यह गाइडलाइन 22 देशों के संस्थानों के सहयोग से हुए शोध के बाद जारी की गई है, जिसमें लखनऊ का किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) भी शामिल है। इस अध्ययन के मुताबिक भारत में 21.1 प्रतिशत लोगों को 'व्हाइट कोट हाइपरटेंशन' है, वहीं 18.9 प्रतिशत को 'मास्क्ड हाइपरटेंशन (यानी क्लीनिक में सामान्य, घर पर हाइ) की समस्या है, जिससे बीपी के गलत आकलन की आशंका रहती है।  42 प्रतिशत मरीजों में गलत आकलन का खतरा रहता है, इससे ब्रेन स्ट्रोक और हार्ट की परेशानी की आशंका रहती है। क्यों है घर पर वीपी मापना जरूरी बीपी के सही आकलन के लिए क्लीनिक, घर और 24 घंटे की निगरानी से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर इलाज तय किया जाना चाहिए। घर पर सुबह-शाम कम से कम चार दिन इसकी माप जरूरी है। इससे सही दवाओं के चयन में मदद मिलती है। रक्तचाप मापने का सही तरीका मापने से पहले पांच मिनट शांत बैठें। कुर्सी पर सीधे बैठें, पैर जमीन पर हों और उन्हें क्रास न करें। हाथ दिल की ऊंचाई पर रहे। मापते समय न बोलें और न हिलें। आस्तीन चढ़ाकर मापने से गलत परिणाम आते हैं। सटीकता के लिए एक-दो मिनट के अंतर से दो बार मापें। ब्लड प्रेशर की निगरानी के लिए 24 घंटे का ब्लड प्रेशर मापने वाली मशीन काइस्तेमाल करना बेहद जरूरी है। इस उपाय से दवाइयों का सही प्रयोग और स्वास्थ्य पर ज्यादा प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। रक्तचाप नियंत्रण के उपाय -दैनिक भोजन में नमक को कम करें। पैक्ड खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें। -आहार में ताजे फल, सब्जियां, दालें, जई, बाजरा, ज्वार, राजमा, चना, बादाम, अखरोट और सलाद शामिल करें। -प्रतिदिन 30 मिनट तेज चलने का प्रयास करें, योग और प्राणायाम करें। -धूमपान, तंबाकू और शराब से दूरी रखें। -तनाव कम करें और पर्याप्त नींद लें। रक्तचाप से जुड़ी भ्रांतियां -केवल बुजुर्गो को होता है- यह गलत है। आधुनिक जीवनशैली, तनाव व मोटापे के कारण युवा भी बड़ी संख्या में प्रभावित हैं। -यह कोई बीमारी नहीं- अत्यधिक कम रक्तचाप भी चक्कर, कमजोरी और बेहोशी का कारण बन सकता है।   -इसकी दवा कभी बंद नहीं होती- यह भ्रांति है। यदि व्यक्ति नमक कम करे, व्यायाम, प्राणायाम करे, वजन कम करे और तनाव नियंत्रित रखे तो रक्तचाप इतना स्थिर हो जाता है कि चिकित्सक धीरे-धीरे दवा कम या पूरी तरह बंद भी कर सकते हैं।  

रेलवे ट्रैक जाम की चेतावनी: पंजाब के किसान आंदोलन ने बढ़ाई सरकार की चिंता

पंजाब  पंजाब में किसान जत्थेबंदियों ने बड़ा ऐलान किया है। संगठनों ने घोषणा की है कि 17 और 18 दिसंबर को वे  DC ऑफिस के बाहर धरना देंगे। वहीं किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं हुई, तो वे 19 दिसंबर को पूरे इलाके में रेलवे ट्रैक जाम कर बड़ा रोष प्रदर्शन करेंगे। बता दें कि नाभा की सरकारी कोठी में ट्राली के पार्ट्स और अन्य चोरी का सामान बरामद होने के बाद विवाद गरमा गया है। किसान नेताओं का कहना है कि इस मामले ने प्रशासनिक लापरवाही को उजागर कर दिया है। किसान जत्थेबंदियों ने साफ किया है कि जब तक उचित कार्रवाई और जवाब नहीं दिया जाता, आंदोलन लगातार जारी रहेगा। 

हुड्डा बोले— रिपोर्ट ने खोली सरकार की पोल, न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल

चंडीगढ़  हरियाणा में कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक माहौल गरम हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि इंडिया जस्टिस रिपोर्ट ने मौजूदा भाजपा सरकार की वास्तविक तस्वीर सामने रख दी है। रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा पुलिस की रैंकिंग पिछले पांच साल में 8वें स्थान से गिरकर 14वें स्थान पर पहुंच गई है। हुड्डा के अनुसार 18 बड़े राज्यों में हरियाणा की यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। तुलना में बिहार चार पायदान ऊपर है और पड़ोसी पंजाब 7वें स्थान पर है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट से यह भी स्पष्ट होता है कि सामाजिक न्याय और समान अवसर देने में सरकार पूरी तरह असफल रही है। पुलिस में एससी अधिकारियों की नियुक्ति के मामले में हरियाणा 18 में से 17वें स्थान पर है। एससी सिपाही और ओबीसी कांस्टेबल भर्ती में भी राज्य पिछड़ता दिख रहा है। हुड्डा ने कहा कि ये आंकड़े बताते हैं कि आरक्षित वर्गों की नियुक्तियां लगभग ठप पड़ी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में 80 से अधिक गैंग सक्रिय हैं, जो हत्या, लूट, फिरौती और डकैती जैसी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। दूसरी तरफ पुलिस विभाग की स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। कांस्टेबल स्तर के 38.9 प्रतिशत पद खाली हैं और महिला अधिकारियों के 17.8 प्रतिशत पद रिक्त पड़े हैं। प्रति व्यक्ति पुलिस खर्च हरियाणा में मात्र 1,908 रुपये है, जबकि पंजाब में यह 2,604 रुपये है। रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में एक थाने पर औसतन 1,09,325 की आबादी का भार है, जबकि केरल में यह संख्या केवल 23,992 है। हुड्डा ने कहा कि हाल ही में एडीजीपी रैंक के एक अधिकारी और एक एएसआई द्वारा की गई आत्महत्या पुलिस विभाग के भीतर बढ़ते तनाव और अव्यवस्था को उजागर करती है। कांग्रेस ने इन घटनाओं की सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग की है, लेकिन उनका आरोप है कि सरकार मामले को लगातार टाल रही है

Google का नया कमाल: बल्ब की रोशनी से चार्ज होने वाला स्मार्ट रिमोट लॉन्च

नई दिल्ली गूगल ने अपने टीवी के लिए एक कमाल का जादुई रिमोट पेश किया है। जादुई इसलिए क्योंकि इस खास टीवी रिमोट की बैटरी कभी भी खत्म नहीं होगी और ना ही इसे चार्ज पर लगाना पड़ेगा। इतना ही नहीं यह आपके कमरे में मौजूद बल्ब की रौशनी से पावर सोंख कर खुद को चालू रखेगा। चलिए इस जादुई रिमोट के बारे में डिटेल में जानते हैं और पता लगाते हैं कि इसके पीछे कौन सी टेक्नोलॉजी काम कर रही है। गूगल ने पेश किया नया रिमोट गूगल ने अपने टीवी के लिए एक नया रिमोट पेश किया है, जो कि सोलर पावर पर चलेंगे। इस नए सोलर-पावर्ड रिमोट का नाम G32 है।इस रिमोट को चलाने के लिए समय-समय पर इसकी बैटरी नहीं बदलनी पड़ेगी। इसे लेकर स्वीडन की कंपनी Epishine ने बताया कि उनकी टेक्नोलॉजी अब Google TV प्लेटफॉर्म के लिए बनाए गए नए रेफरेंस रिमोट में इस्तेमाल हो रही है। बता दें कि Epishine ऐसे सोलर सेल बनाती है जो कि घर के अंदर मौजूद रौशनी से पावर जेनरेट कर सकते हैं। इस खास रिमोट को गूगल के ऑफिशियल सप्लायर Ohsung Electronics बना रहा है। इस रिमोट में दोनो तरफ सोलर सेल लगे हैं जो रिचार्जेबल बैटरी को पावर देते हैं। कैसे काम करता है गूगल का ‘जादुई’ रिमोट गूगल द्वारा पेश किया गया खास टीवी रिमोट रौशनी से चार्ज होगा और इसके लिए सूरज की रौशनी नहीं बल्कि घर में मौजूद बल्ब की रौशनी भी काफी होगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह रिमोट तब तक चार्ज होता रहेगा, जब तक कि यह रौशनी के संपर्क में रहेगा। अगर इसे किसी बंद अंधेरी जगह पर रख दिया जाएगा, तभी इसकी चार्जिंग बंद होगी। इससे लोगों को अपने टीवी रिमोट की बैटरी को समय-समय पर बदलना नहीं पड़ेगा। यह रिमोट लॉन्ग टर्म में ई-कचरे को भी कम करेगा। प्रैक्टिकल हो रहे सोरल-पावर्ड रिमोट ऐसा नहीं है कि सोलर-पावर्ड रिमोट का आइडिया नया है। Hama ने पिछले साल Exeger की Powerfoyle टेक के साथ ऐसा ही एक यूनिवर्सल रिमोट लॉन्च किया था। इसी तरह सैमसंग का ईको रिमोट भी इसी तरह की टेक्नोलॉजी के साथ लंबे समय से मौजूद है और साबित करता है कि घर के अंदर मौजूद रौशनी से चार्जिंग अच्छे से काम कर सकती है। अब क्योंकि गूगल रेफरेंस हार्डवेयर में यह सुविधा दे रहा है इसलिए अन्य कंपनियां भी इसे आसानाी से अपने स्ट्रीमिंग डिवाइसेज में शामिल कर पाएंगीं। बता दें कि बड़ी संख्या में ब्रैंड गूगल के रेडी-मेड रिमोट डिजाइन को इस्तेमाल करते हैं। इससे उनके समय और पैसे दोनों की बचत होती है। फिलहाल यह रिमोट ना ही किसी डिवाइस के साथ आता है और ना ही इसे अलग से खरीदा जा सकता है। इसे अलग-अलग कंपनियों के लिए रेफरेंस डिजाइन के तौर पर बनाया जाता है। अलग-अलग ब्रैंड अक्सर इनके बटन लेआउट को Netflix, YouTube, Prime Video या लोकल ऐप्स के शॉर्टकट से बदल देते हैं।

पंजाब पुलिस का ऑपरेशन सफल: खतरनाक गैंगस्टर हरजिंदर का एनकाउंटर, ISI कनेक्शन का खुलासा

अमृतसर  पंजाब के अमृतसर में पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ हुई. इस मुठभेड़ को लेकर अमृतसर के पुलिस कमिश्नर GPS भुल्लर का बयान सामने आया है. उन्होंने बताया कि ‘देर शाम एंटी-गैंगस्टर ऑपरेशंस सेल को सूचना मिली, जिसमें बताया गया कि ‘पाकिस्तान स्थित ISI और विदेशी गैंगस्टरों से संबंध रखने वाले एक कुख्यात अपराधी और उसका सहयोगी हाल ही में जेल से रिहा हुए थे. रिहाई के बाद उन्होंने एक हत्या की योजना बनाई थी.’ इसके बाद पुलिस एक्शन में आ गई और दोनों अपराधियों को रोकने की कोशिश की. इसी बीच उन्होंने पुलिस पर गोलियां चला दीं. 7 नवंबर को जेल से लौटा था- कमिश्नर पुलिस कमिश्नर ने बताया कि ‘बदमाश की पहचान हरजिंदर हैरी के तौर पर की गई है. वह 7 नवंबर को जेल से लौटा था. इसके विदेशी गैंगस्टरों और ISI से भी संबंध थे. हरजिंदर 7 नवंबर को जेल से रिहा हुआ. हाल ही में दोनों अपराधी मोटरसाइकिल पर वहां पहुंचे. उसी समय पुलिस की टीम भी वहां पर पहुंच गई और उनको रोकने की कोशिश की गई.’ उन्होंने बताया कि ‘बदमाशों ने पुलिस पर गोलियां चला दीं. वहीं पुलिस ने हवा में गोलियां चलाईं और उन्हें आत्मसमर्पण की चेतावनी भी दी थी.   हरजिंदर हैरी एनकाउंटर में ढेर जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने जब आत्मरक्षा के लिए गोलियां चलाईं तो उसमें से एक गोली आरोपी हरजिंदर को लग गई. वहीं, उसका साथी सनी मौके से अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहा. घायल हरजिंदर को पुलिस ने अस्पताल में भर्ती कराया. हालांकि, अस्पताल में हरजिंदर की मौत हो गई. वहीं, फरार सनी का मोबाइल पुलिस ने बरामद किया है. इसमें से पुलिस को विदेशी नंबर मिले हैं, जिससे ISI और विदेशी गैंगस्टरों से संबंधों की जानकारी भी मिली है. इसके अलावा, कुछ हथियार भी बरामद किए गए हैं, जो पाकिस्तान से लाए गए थे.

स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह की पाठ्यक्रम समिति के सदस्यों से हुई चर्चा

प्रदेश के स्कूलों में पढ़ाये जा रहे पाठ्यक्रम पर हो निरंतर रिसर्च- मंत्री  सिंह स्कूल शिक्षा मंत्री  सिंह की पाठ्यक्रम समिति के सदस्यों से हुई चर्चा भोपाल  स्कूल शिक्षा मंत्री  उदय प्रताप सिंह ने प्रदेश के स्कूलों में पढ़ाये जा रहे पाठ्यक्रम पर निरंतर शोध करने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम में प्रदेश की संस्कृति, विरासत, आंचलिक विशेषताओं और जनजातीय गौरव जैसे विषयों को शामिल किये जाने पर विशेष ध्यान दिया जाये। इस प्रक्रिया से बच्चों को मध्यप्रदेश की विशेषताओं को समझने का मौका मिलेगा। स्कूल शिक्षा मंत्री बुधवार को मंत्रालय में पाठ्यक्रम समिति के सदस्यों से चर्चा कर रहे थे‍। उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता में और वृद्धि के लिये शिक्षकों को लगातार प्रशिक्षण दिये जाने पर भी जोर दिया। पाठ्यक्रम समिति के सदस्यों ने राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के सुझाव दिये। बैठक में तय हुआ कि स्कूल पाठ्यक्रम तैयार करने के लिये होने वाली बैठकों और कार्यशाला का निर्धारित कैलेण्डर तैयार किया जाये। बैठक में तय हुआ कि राज्य शिक्षा केन्द्र की लाइब्रेरी में अनुसंधान से जुड़ी पुस्तकों के संग्रह का विस्तार किया जाये। पाठ्यक्रम समिति की बैठकों में एनसीईआरटी के प्रतिनिधियों को आमंत्रित कर उनके भी सुझाव लिये जायें। बैठक में विभाग के टीचर ट्रेनिंग इन्स्टीट्यूट के प्रस्तावित भवन के संबंध में भी चर्चा हुई। बैठक में पाठ्यक्रम समिति के सदस्य डॉ. रविन्द्र कन्हारे, डॉ. अल्केश चतुर्वेदी, डॉ. भागीरथ कुमावत एवं विभागीय अधिकारी मौजूद थे।

SC ने प्रेसिडेंशियल रेफरेंस पर कहा—राज्यपाल विधेयक लंबित नहीं रख सकते, समयसीमा तय नहीं

नई दिल्ली उच्चतम न्यायालय ने प्रेसिडेंशियल रफेरेंस पर फैसला सुनाते हुए कहा गवर्नर द्वारा बिलों को मंज़ूरी देने के लिए टाइमलाइन तय नहीं की जा सकती. "डीम्ड असेंट" का सिद्धांत संविधान की भावना और शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत के खिलाफ है. कोर्ट ने कहा चुनी हुई सरकार कैबिनेट को ड्राइवर की सीट पर होना चाहिए, ड्राइवर की सीट पर दो लोग नहीं हो सकते लेकिन गवर्नर का कोई सिर्फ़ औपचारिक रोल नहीं होता. गवर्नर, प्रेसिडेंट का खास रोल और असर होता है. गवर्नर के पास बिल रोकने और प्रोसेस को रोकने का कोई अधिकार नहीं है. वह मंज़ूरी दे सकता है, बिल को असेंबली में वापस भेज सकता है या प्रेसिडेंट को भेज सकता है. बता दें प्रधान न्यायाधीश बी.आर. गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर की संविधान पीठ ने 10 दिनों तक दलीलें सुनने के बाद 11 सितंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था. गवर्नर या प्रेसिडेंट काम अपने पास लेना न्याय के दायरे में नहीं आता सुप्रीम कोर्ट ने कहा गवर्नर या प्रेसिडेंट काम अपने पास लेना न्याय के दायरे में नहीं आता. ज्यूडिशियल रिव्यू तभी होता है जब बिल एक्ट बन जाता है. तमिलनाडु फैसला  न्याय के दायरे में नहीं आता.  सबसे कठोर सिद्धांत यह है कि बिल के स्टेज पर कोई भी  मंज़ूरी को चुनौती दे सकता है.  हम यह भी साफ़ करते हैं कि जब बिल आर्टिकल 200 के तहत गवर्नर द्वारा रिज़र्व किया जाता है तो प्रेसिडेंट रिव्यू मांगने के लिए बाउंड नहीं हैं. अगर बाहरी विचार में, प्रेसिडेंट रिव्यू मांगना चाहते हैं, तो वह मांग सकते हैं, हालांकि, जो सवाल उठता है वह यह है कि जब गवर्नर मंज़ूरी नहीं देते हैं तो क्या समाधान है. जबकि कार्रवाई की मेरिट्स पर विचार नहीं किया जा सकता. कोर्ट द्वारा जांच किए जाने पर, लंबे समय तक, अनिश्चित, बिना किसी कारण के कार्रवाई न करने पर सीमित न्यायिक जांच होगी. सरकार को ड्राइवर की सीट पर होना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट संविधान पीठ के निर्णय के मुताबिक चुनी हुई सरकार यानी कैबिनेट को ड्राइवर की सीट पर होना चाहिए. ड्राइवर की सीट पर दो लोग नहीं हो सकते. लेकिन गवर्नर का कोई सिर्फ औपचारिक रोल नहीं होता. गवर्नर, प्रेसिडेंट का खास रोल और असर होता है. गवर्नर के पास बिल रोकने और प्रोसेस को रोकने का कोई अधिकार नहीं है. वह मंजूरी दे सकता है. बिल को असेंबली में वापस भेज सकता है या प्रेसिडेंट को भेज सकता है.  विधेयक के अधिनियम बनने के बाद ही न्यायिक समीक्षा लागू की जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट कोर्ट ने कहा कि विधेयक के अधिनियम बनने के बाद ही न्यायिक समीक्षा लागू की जा सकती है. गवर्नर की ओर से बिलों को मंजूरी देने के लिए टाइमलाइन तय नहीं की जा सकती. 'डीम्ड असेंट' का सिद्धांत संविधान की भावना और शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत के खिलाफ है.  SC ने कहा- 'बिना वजह की अनिश्चित देरी न्यायिक जांच के दायरे में आ सकती है' सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में राज्यपाल के लिए समयसीमा तय करना संविधान की ओर से दी गई लचीलेपन की भावना के खिलाफ है. पीठ ने स्पष्ट किया कि राज्यपाल के पास केवल तीन संवैधानिक विकल्प हैं- बिल को मंजूरी देना, बिल को दोबारा विचार के लिए विधानसभा को लौटाना या उसे राष्ट्रपति के पास भेजना. राज्यपाल बिलों को अनिश्चितकाल तक रोककर विधायी प्रक्रिया को बाधित नहीं कर सकते. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि न्यायपालिका कानून बनाने की प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर सकती, लेकिन यह स्पष्ट किया कि- 'बिना वजह की अनिश्चित देरी न्यायिक जांच के दायरे में आ सकती है.' जानें सुुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा राष्ट्रपति और राज्यपाल को अपने पास पेंडिंग बिल पर फैसला लेने के समयसीमा में बांधने के मसले पर राष्ट्रपति द्वारा भेजे गए प्रेसिडेंसियल रेफरेंस पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ का फैसला इस तरह है- 1. SC ने कहा गवर्नर द्वारा बिलों को मंज़ूरी देने के लिए टाइमलाइन तय नहीं की जा सकती.  2. "डीम्ड असेंट" का सिद्धांत संविधान की भावना और शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत के खिलाफ है. 3.SC ने कहा चुनी हुई सरकार- कैबिनेट को ड्राइवर की सीट पर होना चाहिए– ड्राइवर की सीट पर दो लोग नहीं हो सकते…लेकिन गवर्नर का कोई सिर्फ़ औपचारिक रोल नहीं होता. 4. आर्टिकल 142 प्रयोग कर सुप्रीम कोर्ट विधेयकों को मंजूरी नहीं दे सकता। यह राज्यपाल और राष्ट्रपति का अधिकार क्षेत्र में आता है. 5. SC ने कहा कि विधानसभा से पारित विधेयक को राज्यपाल अगर अपने पास रख लेता है, वह संघवाद के खिलाफ होगा. हमारी राय है कि राज्यपाल को विधेयक को दोबारा विचार के लिए लौटाना चाहिए. 6. सामान्य तौर पर राज्यपाल को मंत्रिमण्डल की सलाह पर काम करना होता है. लेकिन विवेकाधिकार से जुड़े मामले में वह खुद भी फैसला ले सकता है. 7. गवर्नर, प्रेसिडेंट का खास रोल और असर होता है 8. गवर्नर के पास बिल रोकने और प्रोसेस को रोकने का कोई अधिकार नहीं है। वह मंज़ूरी दे सकता है, बिल को असेंबली में वापस भेज सकता है या प्रेसिडेंट को भेज सकता है। 9. जब गवर्नर काम न करने का फैसला करते हैं, तो संवैधानिक  कोर्ट ज्यूडिशियल रिव्यू कर सकते हैं। कोर्ट मेरिट पर कुछ भी देखे बिना गवर्नर को काम करने का लिमिटेड निर्देश दे सकते हैं। कोर्ट ने कहा- समयसीमा तय करना शक्तियों के विभाजन को कुचलना होगा कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल विधेयकों को अनिश्चित काल तक रोक कर नहीं रख सकते, लेकिन समयसीमा तय करना शक्तियों के विभाजन को कुचलना होगा।     कोर्ट ने कहा, "राज्यपाल अनंतकाल तक विधेयक रोककर नहीं बैठ सकते। समयसीमा लागू नहीं की जा सकती। संविधान के अनुच्छेद 200 और 201 में लचीलापन रखा गया है। इसलिए किसी समयसीमा को राज्यपाल या राष्ट्रपति पर थोपना संविधान के ढांचे के खिलाफ है। यह शक्तियों के पृथक्करण के खिलाफ है।"      1. 'डीम्ड असेंट' का सिद्धांत संविधान की भावना और शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत के खिलाफ है।     2. चुनी हुई सरकार को ड्राइवर सीट पर होना चाहिए। इस सीट पर 2 लोग नहीं हो सकते। हालांकि, राज्यपाल की भूमिका केवल औपचारिक … Read more

दिल्ली धमाके की जांच में बड़ा खुलासा, चार डॉक्टरों को हिरासत में लिया गया

नई दिल्ली दिल्ली के लाल क‍िले के बाहर 10 नवंबर को हुए धमाके की जांच में एनआईए ने सबसे बड़ा खुलासा करते हुए चार नए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. यह चारों वही लोग हैं जिन्होंने ब्लास्ट में इस्तेमाल हुई i20 कार का इंतजाम, मूवमेंट और सुरक्षित ट्रांसफर कराया था. सबसे हैरान करने वाली बात है क‍ि चारों डॉक्टर हैं. इनमें से एक मुफ्ती का भी काम करता था. एनआईए ने इन चारों को श्रीनगर में गिरफ्तार किया. इनकी गिरफ्तारी के बाद साफ हो गया है कि ब्लास्ट में इनकी भूमिका बेहद प्रमुख थी. एनआईए के मुताबिक, पुलवामा से डॉ. मुजम्मिल शकील गनई, अनंतनाग से डॉ. अदील अहमद राथर, लखनऊ डॉ. शाहीना सईद और शोपियां से मुफ्ती इरफान अहमद वगाय को पकड़ा गया था. इन चारों ने i20 कार को हासिल करने, उसे उपयोग के लिए तैयार रखने, उसकी मूवमेंट तय करने और मॉड्यूल तक पहुंचाने में कोर ऑपरेशन संभाला था. कैसे डॉक्टरों की टीम बनी कार ऑपरेशन की मास्टरमाइंड?     NIA की जांच में सामने आया है कि ये चारों मॉड्यूल की सबसे रणनीतिक टीम थे. इनकी भूमिका सिर्फ “मदद” नहीं, बल्कि कार ऑपरेशन का पूरा प्रबंधन थी. सूत्रों के मुताबिक, कागजी तौर पर कार किसी और के नाम थी, लेकिन असल में कार की खरीद, लाने, छुपाने और सुरक्षित रखवाने का पूरा काम इन्हीं चारों ने संभाला.     कार की मूवमेंट और रूट प्लानिंग इन्‍होंने ही रची. कार को कहां से उठाना है. किस रास्ते से दिल्ली लाना सुरक्षित रहेगा. बीच में कितनी देर कहां रुकना है. कार कब ‘एक्टिवेशन पॉइंट’ पर पहुंचाई जाए. यह पूरा ब्लूप्रिंट डॉक्टर मुजम्मिल और डॉक्टर राथर ने तैयार किया था.     मेडिकल कवर और कम्युनिकेशन सिस्टम इन्‍हीं के हवाले था. सूत्रों के मुताबिक, लखनऊ की डॉक्टर शाहीना ने फंड चेन, मेडिकल विज‍िट की आड़ में मीटिंग की. सुरक्षित कम्युनिकेशन जैसे रणनीतिक काम संभाले.     मॉड्यूल को आइडियोलॉजिकल सपोर्ट मुफ्ती इरफान अहमद वगाय ने दिया. यह सदस्यों को जोड़ता था. उन्हें मानसिक रूप से तैयार करता था और विदेश लिंक के लिए संपर्क सूत्र था. यह गिरफ्तारी क्यों बड़ी है? इससे पहले एनआईए ने दो आरोपी पकड़े थे, जिनका नाम आमिर राशिद अली था. कार इसी के नाम पर रजिस्टर थी. फ‍िर एनआईए ने जासिर बिलाल वानी उर्फ दानिश को दबोचा, जो तकनीकी विस्फोटक सेटअप में मददगार साबित हुआ था. लेकिन कार कैसे आई? किसने लाई? किसने मूव कराई? किसने उसे सुरक्षित रखा? इन चारों डॉक्टरों ने ही वह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा संभाला था. यानी कार के बिना ब्लास्ट हो ही नहीं सकता था. और कार को ऑपरेशन में लाने वाले यही चारों थे. मुजम्मिल और शकील को द‍िल्‍ली लेकर आई पुल‍िस इस बीच एनआईए आतंकी डॉ मुजम्मिल और शकील को दिल्ली लेकर आई. उसे कभी भी पटियाला हाउस कोर्ट में पेश क‍िया जा सकता है. जांच एजेंसी के सूत्र के मुताबिक शाहीन,आदिल समेत चार आरोपियों को कोर्ट में आज थोड़ी देर बाद पेश किया जाएगा.

अपराध पर रांची पुलिस की कड़ी कार्रवाई, एक दिन में 183 आरोपी पकड़े गए

रांची झारखंड की राजधानी रांची में बीते बुधवार देर रात पुलिस ने अभियान चलाया। इस अभियान का उद्देश्य अपराध नियंत्रण एवं सार्वजनिक शांति बनाए रखना था। यह अभियान अड्डेबाजी और सड़क पर शराब पीने वालों के खिलाफ चलाया गया। इस अभियान के तहत जिले के लगभग सभी थाना क्षेत्रों में देर रात तक व्यापक छापेमारी की गई। पुलिस ने अरगोड़ा, बरियातू, नामकुम, कांके, बिरला मैदान, विद्यानगर, नरकोपी, लालपुर, हरमू समेत 70 से अधिक स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। पुलिस की इस कार्रवाई के दौरान 75 से अधिक स्थानों पर छापेमारी करते हुए सड़क व सार्वजनिक स्थलों पर बेवजह जमावड़ा बनाकर अड्डेबाजी, हुड़दंग या शराब पीते 183 लोगों को हिरासत में लिया गया। यह लोग सड़कों या सार्वजनिक जगहों पर बैठकर नशा और अड्डेबाजी कर रहे थे। हालांकि पुलिस ने पूछताछ के बाद इन्हें छोड़ दिया, लेकिन कड़ी हिदायत भी दी गई। अधिक शराब पीने वाले युवकों की मेडिकल जांच कराई गई और उनसे बांड भरवाया गया। एसएसपी राकेश रंजन ने अभियान के बाद कहा कि आगे भी ऐसे प्रयास जारी रहेंगे और अगली बार अड्डेबाजी या सड़क पर शराब पीते पाये गए तो सीधे जेल भेजा जाएगा। राकेश रंजन ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने आसपास की संदिग्ध गतिविधियों, खासकर अड्डेबाजी या अवैध शराब सेवन की सूचना पुलिस को दे।  

तोते की तस्वीर से आएगी खुशहाली: वास्तु के अनुसार इन स्थानों पर लगाना है शुभ

वास्तु शास्त्र और फेंगशुई, दोनों में ही तोते को एक बहुत ही शुभ और शक्तिशाली प्रतीक माना गया है। यह पक्षी केवल सुंदरता का नहीं, बल्कि प्रेम, वफादारी, अच्छा संवाद, लंबी आयु और सौभाग्य का भी प्रतिनिधित्व करता है। मान्यता है कि यदि तोते की तस्वीर को घर में सही स्थान और दिशा पर लगाया जाए, तो यह उस स्थान की ऊर्जा को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। यह न केवल परिवार के सदस्यों के बीच आपसी प्रेम और सद्भाव को बढ़ाता है, बल्कि धन और समृद्धि को भी आकर्षित करता है। तो आइए जानते हैं घर के वो कौन से महत्वपूर्ण स्थान हैं जहां तोते की तस्वीर लगाना आपके जीवन में प्रेम की मिठास घोल सकता है और समृद्धि के द्वार खोल सकता है। बच्चों के कमरे वास्तु के अनुसार, तोते की तस्वीर बच्चों के कमरे में लगना से बच्चों की पढ़ाई में रुचि बढ़ती है, उनकी एकाग्रता और याददाश्त  मजबूत होती है क्योंकि उत्तर दिशा को बुध ग्रह की दिशा माना जाता है, जो बुद्धि, ज्ञान और वाणी का कारक है। हरा रंग और तोता बुध से संबंधित हैं, इसलिए यह दिशा शिक्षा के लिए सर्वोत्तम है। ड्राइंग रूम या लिविंग एरिया घर के ड्राइंग रूम या लिविंग एरिया में तोते की तस्वीर लगाने से घर में खुशी और सौहार्द का माहौल बनता है, परिवार के सदस्यों और मेहमानों के बीच संबंध मधुर होते हैं। रिश्तों में तनाव कम होता है क्योंकि उत्तर और पूर्व दिशाएं सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश द्वार मानी जाती हैं। तोते की रंगीन छवि पंचतत्वों  का संतुलन करती है, जिससे घर की निराशा दूर होती है और सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है। बेडरूम तोते का जोड़ा, खासकर बेडरूम में, प्रेम, रोमांस और वैवाहिक सुख का सबसे शक्तिशाली प्रतीक माना जाता है। यह शुक्र और चंद्र की सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है। इसलिए तोते के तस्वीर को बेडरूम में लगाने से पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और आपसी समझ बढ़ती है। वैवाहिक जीवन में मिठास आती है और आयु में वृद्धि होती है। यह अकेलापन दूर करने में भी सहायक है। दुकान या दफ्तर वास्तु के अनुसार, उत्तर दिशा को धन के देवता भगवान कुबेर की दिशा भी माना जाता है। दुकान या दफ्तरकी उत्तर दिशा  में तोते की तस्वीर लगाने से धन और समृद्धि का आकर्षण होता है। धन और समृद्धि में वृद्धि होती है। करियर और व्यापार में उन्नति के नए अवसर मिलते हैं।