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थैले में फेंकी गई नवजात: समय पर मदद से अस्पताल पहुंचाया गया शिशु

मनेन्द्रगढ़ मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम पंचायत चनवारीडांड स्थित वन विभाग डिपो के पास शुक्रवार सुबह थैले में नवजात शिशु लावारिस हालत में मिली. सुबह टहलने निकले लोगों को रोने की आवाज सुनाई दी, जिसके बाद उसे अस्पताल लाया गया. फिलाहाल शिशु का स्वास्थ स्थिर बताया जा रहा है. उसे मेडिकल टीम की विशेष निगरानी में रखा गया है. जानकारी के मुताबिक, ग्राम पंचायत चनवारीडांड क्षेत्र में शुक्रवार सुबह किसी ने एक नवजात शिशु को झोले में डालकर सड़क किनारे छोड़ दिया. स्थानीय लोगों ने शिशु को तत्काल चिकित्सीय सहायता के लिए अस्पताल लाया, जहां डॉक्टरों ने उसकी स्थिति को “स्वस्थ्य और स्थिर” बताया है. अस्पताल में डॉक्टरों और स्टाफ ने तत्परता दिखाते हुए बच्चे को प्राथमिक उपचार दिया. नन्हीं जान सुरक्षित बताई जा रही है और उसे मेडिकल टीम की विशेष निगरानी में रखा गया है. वहीं सूचना पर कोतवाली मनेंद्रगढ़ पुलिस भी अस्पताल पहुंच गई. पूरी घटना की जांच शुरू कर दी गई है.

बावुमा की भारत से बड़ी सीरीज की मांग, कहा– एशेज जैसी प्रतिद्वंद्विता हम भी डिजर्व करते हैं

नई दिल्ली  भारत और साउथ अफ्रीका के बीच चल रही दो-टेस्ट की छोटी सीरीज ने प्रोटियाज कप्तान टेम्बा बावुमा की नाराजगी को खुलकर उजागर कर दिया है। WTC चैंपियन बनने के बावजूद साउथ अफ्रीका को भारत जैसे दिग्गज के खिलाफ सिर्फ दो टेस्ट खेलने पड़ रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ इंग्लैंड–ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमें एशेज़ में पाँच मैचों की लंबी भिड़ंत का आनंद ले रही हैं। बावुमा का मानना है कि दो सबसे मजबूत रेड-बॉल टीमों के बीच इतनी छोटी सीरीज़ न तो खिलाड़ियों के साथ न्याय है, न फैंस के साथ। यह मुद्दा फिर से क्रिकेट शेड्यूलिंग और कमर्शियल प्राथमिकताओं पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। एशेज देखकर बढ़ी ‘जलन’ : बावुमा की साफ टिप्पणी गुवाहाटी में मीडिया से बातचीत के दौरान बावुमा ने बताया कि उन्होंने सुबह ऑस्ट्रेलिया में चल रहा एशेज़ टेस्ट देखा और इस दौरान “थोड़ी जलन” महसूस की। उन्होंने कहा, “आज सुबह उठकर एशेज देखा। पाँच टेस्ट खेलते देख थोड़ा जलन हुई। वे एक-दूसरे पर हावी होंगे, और हमें सिर्फ दो मैच मिले हैं।” यह बयान साफ दिखाता है कि कप्तान इस छोटी सीरीज से खुश नहीं हैं, खासकर तब जब उनकी टीम मौजूदा वर्ल्ड टेस्ट चैंपियन है। “हम इंडिया के खिलाफ बड़ी सीरीज डिजर्व करते हैं”  बावुमा ने उम्मीद जताई कि निकट भविष्य में साउथ अफ्रीका को भारत के खिलाफ चार या 5 टेस्ट की सीरीज मिलेगी। उन्होंने कहा, “उम्मीद है कि जल्द ही हम इंडिया के खिलाफ चार टेस्ट खेलने के लिए लौटेंगे।” बावुमा के अनुसार, मजबूत टीमों के बीच लंबी सीरीज ही फैन्स को असली रोमांच देती है और खिलाड़ियों को अपनी क्षमता दिखाने का मौका भी। शेड्यूल खिलाड़ियों के हाथ में नहीं  प्रोटियाज कप्तान ने स्पष्ट किया कि टेस्ट सीरीज़ के मैचों की संख्या खिलाड़ी तय नहीं करते। यह पूरा मामला बोर्ड्स की कमर्शियल प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है। एशेज, बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी (भारत–ऑस्ट्रेलिया), एंडरसन–तेंदुलकर ट्रॉफी (भारत–इंग्लैंड) इन सीरीज को 5 टेस्ट इसलिए मिलते हैं क्योंकि वे आर्थिक दृष्टि से सबसे ‘लाभकारी’ मानी जाती हैं। इसके विपरीत भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका, न्यूजीलैंड, वेस्ट इंडीज या बांग्लादेश अधिकतर सीरीज केवल दो टेस्ट की होती हैं। दो-टेस्ट सीरीज क्यों “अधूरी” लगती है? बावुमा ने तर्क दिया कि दो मैचों की सीरीज में अक्सर परिणाम अधूरा रह जाता है, ड्रॉ सीरीज होने के चांस बढ़ते हैं और एक टीम को जीतने का वास्तविक मौका कम मिलता है। उन्होंने कहा, “चाहे सीरीज 1-1 रहे, 2-0 या 0-2, तीन टेस्ट की सीरीज हमेशा बेहतर होती है। एक टीम हावी होती है, दूसरी वापसी करती है—फैंस को असली टेस्ट क्रिकेट मिलता है।” “हम मैदान पर अच्छा खेलेंगे, तभी चीज़ें बदलेंगी” बावुमा ने कहा कि साउथ अफ्रीका अपनी नाराज़गी दर्शा सकता है, लेकिन असली बदलाव तभी आएगा जब वे मैदान पर शीर्ष टीमों को लगातार चुनौती देंगे। उन्होंने कहा, “हम बस अच्छा क्रिकेट खेल सकते हैं। यही दूसरे देशों को हमारे साथ ज्यादा टेस्ट खेलने के लिए आकर्षित करेगा।”

AQI रिपोर्ट में गाजियाबाद ने Delhi को छोड़ा पीछे, वैज्ञानिक ने बताई प्रदूषण की वजह

गाजियाबाद गाजियाबाद एक बार फिर देश का सबसे प्रदूषित शहर बन गया है. सीपीसीबी के हालिया आंकड़े बताते हैं कि इस शहर ने दुनिया में सबसे प्रदूषित शहर का तमगा हासिल कर चुके दिल्ली को भी खराब एक्यूआई के मामले में पीछे छोड़ दिया है. गाजियाबाद की हवा इस कदर जहरीली हो चुकी है कि यहां रहने वाले स्वस्थ लोग भी इस हवा में सांस लेने के बाद बीमार हो रहे हैं, जिसके चलते अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ रही है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़े बताते हैं कि 20 नवंबर को एक बार फिर गाजियाबाद का एक्यूआई बेहद खराब श्रेणी में पहुंचकर 430 हो गया. जो कि दिल्ली और नोएडा से कहीं ज्यादा रहा. इससे पहले गाजियाबाद 17 और 19 नवंबर को भी प्रदूषित शहरों की लिस्ट में टॉप पर पहुंच गया था. 17 नवंबर को प्राइवेट एक्यूआई मॉनीटर एजेंसियों ने यहां का एयर क्वालिटी इंडेक्स 800 से भी ऊपर दर्ज किया था. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि यह शहर सबसे प्रदूषित शहर क्यों बन गया. गाज‍ियाबाद में सड़कों पर धूल और वाहनों से प्रदूषण स्‍तर लगातार बढ़ रहा है. इस बारे में भारतीय मौसम विभाग के पूर्व डीजीएम और दिल्ली के जाने-माने वैज्ञानिक के जे रमेश ने बताया कि गाजियाबाद का हाल बेहद खराब है. तीन दिन पहले भी यह प्रदूषित शहरों में टॉप पर था, एक बार फिर यहां प्रदूषण स्तर सबसे ज्यादा रिकॉर्ड हुआ है. यहां पीएम 2.5 और पीएम 10 की मात्रा हवा में बहुत ज्यादा है. इसके सबसे प्रदूषित शहर बनने की कई वजहें हैं. धूल है सबसे बड़ा प्रदूषक गाजियाबाद में धूल सबसे प्रमुख प्रदूषक है. इस शहर के किसी भी इलाके, यहां तक कि मेट्रो स्टेशनों के अंदर तक धूल का अंबार लगा होता है. यहां बड़ी संख्या में सड़कें टूटी हुई हैं. चाहे रिहाइशी हो या कमर्शियल यहां लगातार कंस्ट्रक्शन चलता रहता है. पूरे दिन बड़े और छोटे वाहन सड़कों पर दौड़ते हैं और धूल उड़ाते हैं. बारिश न होने और हवा की गति सर्दियों में सुस्त पड़ने के चलते ये धूल हवा में घूमती रहती है, जो प्रदूषण स्तर को बढ़ाती है. औद्योगिक इलाके और उनसे उत्सर्जन गाजियाबाद में बड़ी संख्या में फैक्ट्रीज हैं. इसके साहिबाबाद, भोपुरा और लोनी जैसे इलाकों पूरी तरह इंस्ट्रीज के लिए ही बने हैं. यहां कारखानों से खतरनाक गैसों का उत्सर्जन होता रहता है. ग्रैप की पाबंदिया लागू जरूर होती हैं लेकिन कितनी सफलता से ये काम करती हैं, इसका कोई व्हाइट पेपर कभी नहीं आया है. वाहनों और कूड़े को जलाने से निकलने वाला धुआं गाज‍ियाबाद में खुले में कूड़ा जलाने से हवा की गुणवत्‍ता पर असर पड़ रहा है. इस शहर में छोट से लेकर बड़े वाहनों की संख्या बहुत ज्यादा है. इलेक्ट्रिक के मुकाबले पेट्रोल और डीजल की गाड़ियां काफी हैं, साथ ही प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की मॉनिटरिंग और उन पर सख्ती भी कम है, लिहाजा ये हवा की गुणवत्ता में जहर घोलते रहते हैं. इस शहर में खुले में कूड़ा जलाने से धुआं होने के भी मामले देखे गए हैं, जिनसे हवा में जहरीली गैसें बढ़ती हैं. दिल्ली से नजदीकी और उपायों की कमी गाजियाबाद दिल्ली और नोएडा के नजदीक है, जिसका असर भी इसकी जलवायु पर पड़ता है. इन शहरों में जब प्रदूषण का स्तर बढ़ता है तो वह आगे बढ़कर गाजियाबाद को भी गिरफ्त में लेता है. इसके अलावा इस शहर में प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए स्थाई तो दूर अस्थाई उपाय भी नहीं किए जाते हैं, जैसे सड़कों पर पानी का छिड़काव, पेड़-पौधों की संख्या बढ़ाना, ग्रैप को सख्ती से लागू करना आदि. वैज्ञानिक के जे रमेश कहते हैं कि जब तक गाजियाबाद के स्थानीय कारणों को जानकर वहां के लिए अलग नियम नहीं बनाए जाएंगे, सभी अथॉरिटीज मिलकर प्रदूषण से निपटने के लिए सामूहिक रूप से काम नहीं करेंगी, गाजियाबाद क्या किसी भी शहर की हवा को साफ कर पाना मुश्किल है. इस शहर में फैक्ट्री और कारखानों से उत्सर्जन पर तत्काल रोक लगनी चाहिए. यहां कूड़ा जलाने को भी प्रतिबंधित करने की जरूरत है, साथ ही सड़कों की मरम्मत एक बड़ा मुद्दा है.

राष्ट्रपति–राज्यपाल विवाद पर SC का फैसला, CM स्टालिन का तीखा बयान — क्या कहा?

तमिलनाडु  तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने राष्ट्रपति संदर्भ पर सुप्रीम कोर्ट की राय को लेकर शुक्रवार को कहा कि राज्य के अधिकारों और वास्तविक संघीय ढांचे के लिए उनकी लड़ाई जारी रहेगी। स्टालिन का यह बयान सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के एक दिन बाद आया है जिसमें उसने कहा था कि अदालत राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी देने के लिए राज्यपालों और राष्ट्रपति पर कोई समयसीमा नहीं थोप सकती, लेकिन राज्यपालों के पास विधेयकों को अनिश्चितकाल तक रोककर रखने की “असीम” शक्तियां भी नहीं हैं।   राष्ट्रपति द्वारा इस विषय पर सलाह मांगे जाने पर, सीजेआई बी. आर. गवई की अगुवाई वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने अपनी सर्वसम्मति वाली राय में कहा कि राज्यपालों द्वारा “अनिश्चितकालीन विलंब” की सीमित न्यायिक समीक्षा का विकल्प खुला रहेगा। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने एक बयान में कहा कि राज्यपालों के पास लंबित विधेयकों की मंजूरी के लिए समयसीमा तय करने के वास्ते संविधान में संशोधन होने तक उनका प्रयास जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत की यह राय तमिलनाडु बनाम राज्यपाल मामले में अप्रैल 2025 में दिए गए फैसले को प्रभावित नहीं करेगी। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की राय इस बात की पुष्टि करती है कि राज्य में निर्वाचित सरकार ही मुख्य भूमिका में होनी चाहिए और सत्ता के दो केंद्र नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि न्यायालय की राय स्पष्ट करती है कि राज्यपाल किसी विधेयक पर फैसला लेने में अनिश्चितकाल तक देरी नहीं कर सकते और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को संविधान की मर्यादाओं में रहकर ही काम करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अदालत ने यह भी साफ कर दिया है कि राज्यपाल के पास किसी विधेयक को रद्द करने या ‘पॉकेट वीटो’ लगाने जैसा कोई चौथा विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें अदालत का रुख कर सकती हैं और राज्यपाल की जानबूझकर की गई देरी या निर्णय न लेने के लिए उन्हें जवाबदेह ठहरा सकती हैं। स्टालिन ने 1974 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि यह परामर्श उतना ही प्रभावी है जितनी कानून अधिकारियों की राय होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कानूनी लड़ाई के जरिए “हमने उन राज्यपालों को भी सरकार के अनुरूप काम करने पर मजबूर किया, जो निर्वााचित सरकारों से अलग कार्य कर रहे थे। उन्होंने कहा, “कोई भी संवैधानिक अधिकारी संविधान से ऊपर नहीं हो सकता।” स्टालिन ने कहा, “जब कोई उच्च पद धारी संविधान का उल्लंघन करता है, तो संवैधानिक न्यायालय ही एकमात्र उपाय होते हैं। अदालतों के दरवाजे बंद नहीं होने चाहिए।” मुख्यमंत्री ने कहा, “हम सुनिश्चित करेंगे कि हर संवैधानिक संस्थान संविधान के अनुसार ही काम करे।” उन्होंने यह भी कहा कि उच्चतम न्यायालय ने एक बार फिर राज्यपाल के ‘पॉकेट वीटो’ के सिद्धांत और यह दावा खारिज कर दिया है कि राजभवन किसी विधेयक को रोककर रद्द कर सकता है  

इंटरसिटी ट्रेन 21 दिन प्रभावित: जयपुर तक नहीं जाएगी, वैकल्पिक व्यवस्था की मांग तेज

उदयपुर जयपुर रेलवे स्टेशन के स्टेशन यार्ड में एयर कंकॉर फेज-2 का निर्माण शुरू होने के बाद रेलवे ने कई दिनों का ब्लॉक किया गया है। इस ब्लॉक का सीधा असर उदयपुर से चलने वाली उदयपुर सिटी-जयपुर इंटरसिटी पर पड़ा है। रेलवे ने इस ट्रेन को 21 दिनों के लिए आंशिक रूप से रद्द कर दिया है। अब यह ट्रेन जयपुर तक नहीं जाएगी। तय अवधि में सिर्फ अजमेर तक चलेगी। गाड़ी संख्या 12991 और 12992 को 21 नवंबर से 10 दिसंबर तक और 13 दिसंबर को जयपुर की जगह अजमेर से ही संचालित होगी। इंटरसिटी के आंशिक रद्द होने के बाद यात्रियों को अब सीधे जयपुर पहुंचने के लिए अलग व्यवस्था करनी पड़ रही है। ट्रेन अजमेर तक ही जाती है, जिससे आगे की यात्रा के लिए बस या दूसरी ट्रेन पकड़ना मजबूरी बन गया है। कई यात्रियों का कहना है कि अजमेर पहुंचने के बाद कनेक्शन ट्रेनें समय पर नहीं मिल रहीं, जबकि कुछ लोग बस स्टैंड तक पहुंचने में ही देर होने की शिकायत कर रहे हैं। रोजाना जयपुर आने-जाने वाले डेली पैसेंजर्स के लिए यह बदलाव सबसे ज्यादा परेशानी भरा साबित होगा। मौजूदा हालात इसलिए भी चुनौतीपूर्ण हैं, क्योंकि नवंबर-दिसंबर में शादियों का भारी सीजन शुरू हो रहा है। इन महीनों में बड़ी संख्या में विवाह मुहूर्त होते हैं और शादी से जुड़े कामों के लिए भी लोग जयपुर की ओर यात्रा करते हैं। उदयपुर से कई परिवार रिश्तेदारी, शॉपिंग, डॉक्यूमेंट वर्क और होटल बुकिंग आदि के लिए जयपुर जाते हैं। इंटरसिटी उनकी पहली पसंद थी, लेकिन अब उन्हें दूसरी ट्रेनों या रोड ट्रांसपोर्ट का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे समय भी ज्यादा लग रहा है और खर्च भी बढ़ रहा है। फिलहाल उदयपुर से जयपुर जाने वाले यात्रियों को अजमेर के बाद आगे की यात्रा के लिए अन्य साधनों पर निर्भर रहना होगा। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि दिसंबर के पहले हफ्ते के बाद इंटरसिटी अपनी नियमित सेवा में जल्द लौटेगी, ताकि रोजाना आने-जाने वाले यात्रियों को फिर से राहत मिल सके।

बिहार में बदल रहा मौसम: सुबह कोहरा लौटेगा, पारा होगा और नीचे

पटना बिहार में ठंड बढ़ने लगी है। पारा गिरकर 13 डिग्री तक पहुंच चुका है। मौसम विभाग ने स्पष्ट कहा है कि 4 से 5 दिन तक पछुआ हवा के कारण मौसम शुष्क बना रहेगा सुबह और शाम हल्की ठंड रहेगी। पटना समेत कई इलाकों में कोहरा छाया रहेगा। मौसम विभाग ने कहा है कि पटना समेत राज्य के लगभग सभी जिलों में अगले दो दिन तक तापमान में कोई विशेष परिवर्तन की संभावना नहीं है लेकिन इसके बाद न्यूनतम तापमान में गिरावट होगी। आम लोग सावधान रहें। गर्म कपड़े पहनकर ही सुबह और शाम में बाहर निकलें। इधर, आज के मौसम की बात करें तो पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, गोपालगंज, दरभंगा समेत कुछ जिलों में सुबह से ही हल्का कोहरा देखने को मिला। हालांकि नौ बजे तक पटना, पूर्णिया, मुजफ्फरपुर भागलपुर गया मुंगेर समेत कई जगह धूप निकलने से लोगों ने राहत की सांस ली। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 48 घंटों के दौरान राज्य के अधिकांश भागों के न्यूनतम तापमान मे कोई विशेष परिवर्तन नहीं होने की संभावना है। इसके बिहार राज्य के अनेक भागों के न्यूनतम तापमान में दो से चार डिग्री तक की गिरावट का पूर्वानुमान है। मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटों के दौरान बिहार का मौसम शुष्क बना रहा। सर्वाधिक अधिकतम तापमान 30.8 डिग्री सेल्सियस पूर्णिया का दर्ज किया गया। वहीं राज्य का अधिकतम तापमान 26.9 से 30.8 सेल्सियस के बीच रहा। पिछले 24 घंटों के दौरान बिहार राज्य के अनेक भागों के अधिकतम तापमान में कोई विशेष परिवर्तन नहीं दर्ज की गयी। वहीं कम न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस पूसा (समस्तीपुर) में दर्ज किया गया। राज्य का न्यूनतम तापमान 13 डिग्री से 20 डिग्री के बीच रहा। सबसे कम न्यूनतम दृश्यता 1000 मीटर पटना एवं पूर्णिया में दर्ज किया गया। हालांकि इन दोनों जगहों पर विमान सेवा प्रभावित नहीं हुई। 

ऐतिहासिक शहीदी दिवस पर बढ़ी सतर्कता, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए होंगे खास प्रबंध

चंडीगढ़  पंजाब सरकार ने नौवें गुरु, धन धन श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहादत को समर्पित 350वीं शहीदी वर्षगांठ के जश्न के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम किए हैं। चीफ सेक्रेटरी के.ए.पी. सिन्हा और डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस गौरव यादव ने समागम की तैयारियों का रिव्यू किया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। चीफ सेक्रेटरी ने कहा कि सभी अधिकारी सेवा की भावना से काम करें और श्रद्धालुओं को पूरी सुविधाएं देना अपनी प्राथमिकता बनाएं।    चीफ सेक्रेटरी ने कहा कि 22 नवंबर को चार अलौकिक नगर कीर्तन श्री आनंदपुर साहिब पहुंचेंगे, जबकि 23 नवंबर को गुरु का बाग बुड्ढा दल छावनी में श्री अखंड पाठ साहिब शुरू होगा। 23 नवंबर को होने वाले सर्वधर्म सम्मेलन में देश-विदेश से बड़े-बड़े धार्मिक लोग और संत-महापुरूष शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि 24 नवंबर को भाई जैता जी मेमोरियल में पंजाब विधानसभा का स्पेशल सेशन होगा, जबकि 25 नवंबर को श्री अखंड पाठ साहिब के भोग डाले जाएंगे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान भी अलग-अलग धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होंगे। चीफ सेक्रेटरी ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सरकार ने टेंट सिटी में करीब 10 हजार श्रद्धालुओं के रहने का इंतजाम किया है। इसके साथ ही, 500 फ्री ई-रिक्शा और शटल बसों से श्रद्धालुओं को कार्यक्रम स्थल तक आने-जाने में आसानी होगी। उन्होंने बताया कि गाड़ियों के लिए 100 एकड़ में 30 मॉडर्न पार्किंग बनाई गई हैं।    श्री आनंदपुर साहिब को साफ-सुथरा और हरा-भरा बनाने के लिए एक खास पेड़ लगाने की मुहिम भी शुरू की जा रही है, जिसमें बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स, सेवादार और सामाजिक संगठन हिस्सा लेंगे। प्रशासन लगातार मीटिंग कर रहा है और इंतजामों को फाइनल करने के लिए अलग-अलग लेवल पर मौकों का रिव्यू कर रहा है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि आने वाले हर भक्त को एक आसान और सुरक्षित अनुभव दिया जाएगा।  सरकार का मुख्य मकसद है कि यह ऐतिहासिक कार्यक्रम भक्ति, अनुशासन और सेवा के सबसे ऊंचे स्टैंडर्ड पर हो। सुरक्षा व्यवस्था के बारे में डी.जी.पी. गौरव यादव ने कहा कि 8000 से ज़्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं, जो 25 अलग-अलग सेक्टर में निगरानी कर रहे हैं। 500 से ज़्यादा सी.सी.टी.वी. कैमरे पूरे इलाके पर नजर रखेंगे, ताकि किसी भी असामाजिक तत्व को तुरंत कंट्रोल किया जा सके। ए.डी.जी.पी. नौनिहाल सिंह विधानसभा के स्पेशल सेशन की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार होंगे।  इस मौके पर एडिशनल चीफ सेक्रेटरी पार्लियामेंट्री अफेयर्स डी.के. तिवारी, प्रिंसिपल सेक्रेटरी वाटर सप्लाई एंड सैनिटेशन नील कंठ अवहक, सेक्रेटरी टूरिज्म डॉ. अभिनव, सेक्रेटरी पंजाब मंडी बोर्ड और इन्फॉर्मेशन एंड पब्लिक रिलेशन्स रामवीर, स्पेशल डी.जी.पी. अर्पित शुक्ला, ए.डी.जी.पी. परमार, ए.डी.जी.पी. नौनिहाल सिंह, गमाडा के सी.ए. साक्षी साहनी, हरगुनजीत कौर, डिप्टी कमिश्नर रूपनगर वरजीत वालिया, अभिमन्यु मलिक, नानक सिंह, डिप्टी कमिश्नर जालंधर हिमांशु अग्रवाल, डिप्टी कमिश्नर लुधियाना हिमांशु जैन, अमरदीप संधू डी.सी. फाजिल्का, एडीए संदीप गढ़ा, एडीसी पूजा सियाल और अन्य अधिकारी मौजूद थे।

लाल किला धमाका केस में नया मोड़: फरीदाबाद से मिली आतंकियों की खतरनाक मशीन

नई दिल्ली/फरीदाबाद लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए कार धमाके में एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ है। दिल्ली से सटे फरीदाबाद में आतंकियों की 'बम बनाने वाली मशीन' बरामद की गई है। धमाके के आरोपी डॉ. मुजम्मिल ने आटा पीसने वाली चक्की को केमिकल वर्कशॉप में बदल दिया था। फरीदाबाद के एक टैक्सी ड्राइवर के घर से इन मशीनों को बरामद किया गया है, जिनका इस्तेमाल बम के लिए सामग्री तैयार करने में किया जाता था। सूत्रों के मुताबिक मुजम्मिल शकील गनई एक आटा चक्की का इस्तेमाल विस्फोटकों के लिए केमिकल तैयार करने में करता था। आटा चक्की, ग्राइंडर और कुछ इलेक्ट्रॉनिक मशीनों की तस्वीरें भी सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि एक टैक्सी ड्राइवर के घर से इन सामानों को बरामद किया गया है। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा का रहने वाले गई को लाल किले धमाके से ठीक पहले गिरफ्तार किया गया था। वह इन मशीनों का इस्तेमाल अपने किराये के कमरे में किया करता था, जहां से पुलिस ने 9 नवंबर को 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट और अन्य विस्फटकों को बरामद किया था। जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक मुजम्मिल आटा चक्की का इस्तेमाल यूरिया पीसने और केमिकल तैयार करने के लिए करता था। फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी में डॉक्टर रहे गनई ने पूछताछ में बताया है कि वह लंबे समय से इन मशीनों का इस्तेमाल विस्फोटक तैयार करने में कर रहा था। वह पहले मशीनों को यह कहते हुए ड्राइवर के घर ले गया कि यह उसकी बहन की शादी के लिए तोहफा है। बाद में वह उन्हें अपने किराये वाले घर में ले गया। एनआईए की टीम ने टैक्सी ड्राइवर को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। ड्राइवर ने बताया कि गनई से उसकी मुलाकात पहली बार तब हुई जब वह चार साल पहले अपने बेटे को इलाज के लिए अल-फलाह मेडिकल कॉलेज ले गया। गनई और उसके साथ गिरफ्तार दो अन्य डॉक्टर शाहीन सईद और अदील अहमद राथर भी यहीं डॉक्टर थे। लाल किले के पास धमाका करने वाला उमर नबी भी अल फलाह का ही डॉक्टर था।  

रिश्वतखोरी का भंडाफोड़: ACB ने इंजीनियर को 30 हजार लेते पकड़ा

गरियाबंद नगर पालिका गरियाबंद में पदस्थ इंजीनियर संजय मोटवानी को एसीबी की टीम ने 30 हजार रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। ठेकेदार अजय गायकवाड़ ने रिश्वत मांगने की शिकायत एसीबी से की थी, जिस पर एसबी की टीम ने ट्रैप प्लान किया और रिश्वत लेते इंजीनियर को रंगे हाथों धर दबोचा। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। ठेकदार ने शिकायत में बताया था कि उसके निर्माण कार्य के बिल पास करने के एवज में इंजीनियर संजय मोटवानी ने एक लाख रुपए की मांग की थी। तय समय में इंजीनियर ने आज ठेकेदार को रकम लेने साईं गार्डन के पास बुलाया था। अपने कार के डेस्क बोर्ड में आरोपी इंजीनियर ने जैसे ही रकम रखवाया। पहले से तैनात एसीबी की टीम ने उसे दबोच लिया। फिलहाल टीम उसे पालिका लेकर गई है। एसबी की टीम पड़ताल कर रही है कि आखिर किन-किन काम के एवज में रिश्वत ली गई थी।

कैबिनेट पोर्टफोलियो पर मंथन तेज: नीतीश के पास होम, BJP को हाउस मिलने की चर्चा गर्म

पटना बिहार के 10वीं बार सीएम बने नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल के 26 मंत्रियों के बीच विभाग और मंत्रालय के बंटवारे का इंतजार चल रहा है। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी (एलएनएमयू) के दीक्षांत समारोह में शामिल होने सुबह दरभंगा गए थे और दोपहर बाद पटना लौट आए हैं। अब सीएम हाउस और राजभवन के बीच औपचारिकता पूरी होने के बाद मंत्रियों के विभागों का ऐलान कभी भी हो सकता है। संभावना है कि आज शाम तक मिनिस्टर के मंत्रालय सामने आ जाएं। इस बीच चर्चा है कि पहले की तरह होम यानी गृह मंत्रालय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास ही रहेगा। बीजेपी को पहले की तरह हाउस यानी विधानसभा में स्पीकर का पद मिलेगा। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने गया टाउन सीट से 1990 से लगातार जीत रहे प्रेम कुमार को इस बार मंत्री नहीं बनाया है। सुशील मोदी और नंद किशोर यादव के जमाने से भाजपा के बड़े नेता रहे प्रेम कुमार विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए एक पसंद हो सकते हैं। मंत्रालयों में वित्त मंत्रालय समेत कई बड़े विभाग भाजपा कोटे के मंत्रियों को मिलने की अटकलें है, जिसमें उद्योग, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यटन, खान, पथ निर्माण और सहकारिता जैसे मंत्रालय शामिल हैं। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) कोटे के मंत्रियों को संसदीय कार्य, शिक्षा, परिवहन, जल संसाधन, ग्रामीण विकास, भवन निर्माण जैसे मंत्रालय मिलने की चर्चा है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की 8वीं सरकार का गुरुवार को शपथ ग्रहण हुआ था, जिसमें पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री आए थे। सरकार में नीतीश के अलावा 26 मंत्री बनाए गए हैं। नीतीश ने जेडीयू की बैठक में कहा था कि खरमास के बाद एक कैबिनेट विस्तार होगा। मौजूदा मंत्रिमंडल में सीएम समेत बीजेपी के 14, जेडीयू के 9, लोजपा-रा के 2, हम और रालोमो के 1-1 मंत्री शामिल किए गए हैं। कैबिनेट में 9 और मंत्री बनाने की जगह है, जिसमें जेडीयू की सबसे ज्यादा हिस्सेदारी होगी। नीतीश कैबिनेट के मंत्रियों के विभाग और मंत्रालय की लिस्ट- जब सरकार घोषणा करेगी तब यह लिस्ट अपडेट की जाएगी। अभी आप मंत्रियों के नाम, पद और उनकी पार्टी देख सकते हैं।