samacharsecretary.com

श्याम बाबा की तस्वीर घर में कैसे लगाएं? अपनाएं ये बातें और पाएं अनंत आशीर्वाद

खाटू श्याम बाबा, जिन्हें हारे का सहारा और कलियुग के देव के रूप में पूजा जाता है, की कृपा जिस घर पर होती है, वहां सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। बाबा श्याम को भगवान श्री कृष्ण केशीश दानी रूप के तौर पर जाना जाता है। अगर आपने भी अपने घर को बाबा श्याम की पवित्र उपस्थिति से धन्य किया है, तो आपको उनकी तस्वीर या मूर्ति से जुड़ी वास्तु, पूजा विधि और पवित्रता के कुछ विशेष नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। नियमों की अनदेखी करने से पूजा का फल नहीं मिलता है और वास्तु दोष उत्पन्न हो सकता है। तो आइए, जानते हैं वो कौन सी मुख्य बातें हैं, जिनका ध्यान रखकर आप बाबा श्याम की पूजा से अधिकतम आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं और अपने घर को उनकी कृपा से सदा भरा रख सकते हैं। दिशा और स्थान का विशेष ध्यान रखें खाटू श्याम बाबा की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करते समय वास्तु शास्त्र के नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। वास्तु के अनुसार, पूजा-पाठ के लिए घर का उत्तर-पूर्व कोना सबसे शुभ माना जाता है। बाबा श्याम की फोटो या मूर्ति को इसी दिशा में स्थापित करना चाहिए। यह दिशा सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र होती है। अगर ईशान कोण में संभव न हो, तो आप उन्हें उत्तर या पूर्व दिशा की दीवार पर भी लगा सकते हैं। बाबा श्याम का मुख कभी भी दक्षिण दिशा की ओर नहीं होना चाहिए क्योंकि इस दिशा को शुभ नहीं माना जाता है। पवित्रता: फोटो या मूर्ति को शौचालय, बाथरूम या कूड़ेदान के पास वाली दीवार पर या उनसे सटकर कभी न लगाएं। साथ ही, जिस दीवार पर फोटो लगी हो, उसके ठीक पीछे भी कोई अशुद्ध स्थान नहीं होना चाहिए। उन्हें बेडरूम या रसोई घर में रखने से भी बचना चाहिए, हालांकि यदि अलग से पूजा घर न हो तो साफ़-सफाई का ध्यान रखते हुए रखा जा सकता है। तस्वीर/मूर्ति का स्वरूप घर के लिए बाबा श्याम की ऐसी तस्वीर सबसे अच्छी मानी जाती है जिसमें वे शांत मुद्रा में हों या अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हुए दिखाई दें। अगर तस्वीर खंडित या फटी हुई हो जाए, या मूर्ति में कोई दरार आ जाए, तो उसे तुरंत हटा देना चाहिए। पुरानी या खराब हुई तस्वीर को सम्मान पूर्वक किसी पवित्र नदी में विसर्जित कर देना चाहिए और नई तस्वीर स्थापित करनी चाहिए। यदि आप मूर्ति स्थापित कर रहे हैं, तो घर के मंदिर के लिए 2 से 5 इंच तक की छोटी मूर्ति ही उचित मानी जाती है। बड़ी मूर्तियों की स्थापना केवल मंदिरों में ही की जाती है। नियमित पूजा और देखभाल बाबा श्याम की तस्वीर लगाने के बाद उनकी नियमित पूजा और देखभाल करना अनिवार्य है। उपेक्षा करने से दोष लग सकता है। रोजाना सुबह और शाम को उनकी पूजा, आरती और भोग लगाना चाहिए। बाबा श्याम के सामने नियमित रूप से घी का दीपक और धूप/अगरबत्ती जलानी चाहिए।  उन्हें मिष्ठान, मिश्री, या चूरमा का भोग लगाना शुभ माना जाता है। खासकर एकादशी के दिन उन्हें भोग अवश्य लगाएं। मर्यादा और पवित्रता का पालन बाबा श्याम की कृपा तभी प्राप्त होती है जब उनकी मर्यादा और पवित्रता का पूर्ण रूप से ध्यान रखा जाए। बाबा श्याम की पूजा हमेशा स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर ही करनी चाहिए। केवल बाहरी शुद्धता ही नहीं, बल्कि मन की पवित्रता भी जरूरी है। श्याम भक्त को गलत विचारों और कर्मों से बचना चाहिए।  यदि आप घर में बाबा श्याम की पूजा करते हैं, तो पूजा स्थल के आस-पास या घर में मांस-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए।  

भोपाल में SMD और BLO के लिए खास योजना, टारगेट पूरा करने पर ट्रॉफी-सर्टिफिकेट और हर दिन सम्मान

भोपाल  भोपाल में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) में अब टारगेट पूरा करने पर इनाम भी मिलेंगे। एसडीएम, तहसीलदार और बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) हर दिन 'स्टार ऑफ द डे' भी बनेंगे। बकायदा, उनकी उपलब्धि की जानकारी ऑफिस के सूचना पटल पर लगाई जाएगी।  4 नवंबर से एसआईआर सर्वे शुरू हुआ है। अब तक की स्थिति में भोपाल जिले की स्थिति काफी खराब है। सात विधानसभा सीटों में 21 लाख 25 हजार 908 वोटर हैं। इनमें से 20.87 लाख फॉर्म बांटे जा चुके हैं, लेकिन, वापस 4.15 लाख फॉर्म ही आए हैं। यह 20% से भी कम हैं, जबकि सर्वे को आधा महीना से ज्यादा बीत चुका है। इसलिए अब वोटर्स की सुविधा के लिए नए पोर्टल की लॉन्चिंग हो या सख्ती करना, सब कुछ हो रहा है। अब ईआरओ, एईआरओ और बीएलओ को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसकी शुरुआत शनिवार से ही हो जाएगी। हर रोज का टारगेट तय किया भोपाल में 7 विधानसभा- बैरसिया, भोपाल उत्तर, नरेला, भोपाल दक्षिण-पश्चिम, भोपाल मध्य, गोविंदपुरा और हुजूर है। इनमें कार्य करने वाले 2029 बीएलओ, सभी ईआरओ यानी एसडीएम, एईआरओ यानी तहसीलदारों को प्रोत्साहन के दायरे में शामिल किया गया है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने यह पहल की है। इसके तहत 22 से 28 नवंबर तक हर रोज का टारगेट फिक्स किया गया है। जैसे- 22 नवंबर को बीएलओ को 50% फॉर्म डिजिटाइजेशन करना है तो एसडीएम-तहसीलदारों को प्रति बीएलओ से औसत 75 गणना पत्र डिजिटाइजेशन करवाना होगा। दूसरे-तीसरे दिन यह टारगेट बढ़ेगा। इसके पीछे मकसद यह है कि फॉर्म लेने और फिर उनका डिजिटाइजेशन करने के काम में तेजी आए। हर रोज 10 बजे के आंकड़ों के हिसाब से प्रोत्साहन मिलेगा उप जिला निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता ने बताया, हर रोज सुबह 10 बजे की स्थिति में लक्ष्य प्राप्त करने वालों को ऑनलाइन रिपोर्ट के आधार पर पुरस्कार के रूप में प्रमाण पत्र और प्रतीक चिह्न दिया जाएगा। इसके साथ स्टार ऑफ द डे का नाम संबंधित एसडीएम और तहसीलदार के ऑफिस में चस्पा किया जाएगा। ताकि, अन्य कर्मचारियों को भी प्रोत्साहन मिले और वे भी अच्छा काम करें। भोपाल में डाटा खोजने के लिए पोर्टल भी बना भोपाल में 2003 के डाटा को खोजने के लिए पोर्टल बनाया गया है। इसमें सभी विधानसभा की वोटर लिस्ट अपडेट है। वोटर पोर्टल पर जाकर सूची देख सकेंगे। इससे उन्हें एसआईआर फॉर्म भरने में आसानी होगी। इस पोर्टल के जरिए मतदाता मोहल्ले के नाम के आधार पर भी 2003 की मतदाता सूची खोज सकते हैं। कलेक्टर सिंह ने बताया कि भोपाल के मतदाताओं के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य को सरल एवं सुगम बनाने की सुविधा दी गई है। https://sirbhopal.com पोर्टल के माध्यम से मतदाता साल 2003 की वोटर लिस्ट में अपना नाम खोज सकते हैं। वहीं, मध्यप्रदेश के किसी भी जिले के किसी भी विधानसभा की सूची डाउनलोड कर सकते हैं। मतदान केंद्र BLO की जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं।

जगदीप धनखड़ का पहला सार्वजनिक मंच, RSS की तारीफ के साथ बोले- नैरेटिव के चक्रव्यूह से निकलना मुश्किल

भोपाल जगदीप धनखड़, जो चार महीने पहले स्वास्थ्य कारणों से उपराष्ट्रपति पद से अचानक इस्तीफा दे चुके हैं,  पहली बार सार्वजनिक रूप से एक पुस्तक विमोचन समारोह में भाषण दिया. इस मौके पर उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की दर्शन और भारत को मजबूत बनाने के उनके दृष्टिकोण की भरपूर तारीफ की.  धनखड़ ने यह भाषण "हम और ये विश्व" नामक पुस्तक के लॉन्च पर दिया, जो कि आरएसएस के संयुक्त महासचिव मनमोहन वैद्य ने लिखी है. इस कार्यक्रम में धर्मगुरु, मीडिया के जाने-माने लोग मौजूद थे. धनखड़ ने भाषण की शुरुआत हिंदी में की और कहा कि हम ऐसे दौर में जी रहे हैं जहां लोग अपनी सोच से ही सच को तय कर लेते हैं, भले ही आप उसे नकारते रहें. फिर उन्होंने अंग्रेजी में भाषण जारी रखा ताकि जो लोग उनकी बात को पूरी तरह से समझना चाहते हैं, वे उनकी मंशा को सही ढंग से पकड़ सकें.  उन्होंने कहा कि आरएसएस को लेकर गलतफहमियां और झूठे आरोप लगते रहे हैं, लेकिन ये किताब इन सब मिथकों को तोड़ती है और दिखाती है कि आरएसएस वास्तव में भारत को सशक्त बनाने वाली ताकत है. भारत का सांस्कृतिक और नैतिक आधार धनखड़ ने कहा कि भारत 6000 साल से अधिक की सभ्यताओं का घर है, जो दुनिया को रास्ता दिखाने की ताकत रखता है. वर्तमान विश्व की चुनौतियां जैसे सुरक्षा, आर्थिक दिक्कतें, जलवायु परिवर्तन, तकनीकी बदलाव और सामाजिक विवादों के बीच भारत को अपनी गहरी विरासत से सीख लेकर आगे बढ़ना होगा. उन्होंने बताया कि राष्ट्र का मतलब है सांस्कृतिक एकता, धर्म का मतलब है नैतिक व्यवस्था, न्याय का मतलब है सही प्रशासन और मानव गरिमा हमारे देश की नींव है. ये सभी बातें भारत को दुनिया में एक प्रभावी भूमिका निभाने वाला देश बनाती हैं.  लोकतंत्र और संविधान की अहमियत उन्होंने संस्थागत अखंडता की महत्ता पर बल देते हुए बताया कि यह किसी भी समाज की आधारशिला होती है. साथ ही उन्होंने पांच मुख्य आरएसएस पहलों का जिक्र किया: सामाजिक समरसता, परिवार का विकास, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता और नागरिक कर्तव्य. धनखड़ ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) का समर्थन करते हुए कहा कि इसके विरोध के लिए जो तर्क हैं, वे गलत और बिना सोचे समझे हैं क्योंकि यह कानून उन धार्मिक अल्पसंख्यकों को राहत देने के लिए बनाया गया है जो उत्पीड़ित हैं, और यह किसी भी मौजूदा नागरिक के अधिकारों को प्रभावित नहीं करता. व्यक्तिगत समर्पण और देशभक्ति धनखड़ ने कहा कि जनता के हाथों में भारत का भविष्य है. देश को मजबूत आर्थिक, सुरक्षा और सांस्कृतिक आधार बनाने का काम आम लोगों का है. उन्होंने अपने जीवन और कर्म का उद्देश्य बताया कि उनका लक्ष्य हमेशा देश की सेवा करना है.  व्यक्तिगत अनुभव और उल्लेखनीय बातें धनखड़ ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के आरएसएस मुख्यालय की 2018 में हुई उस यात्रा का जिक्र किया, जब उस पर विवाद हुआ था. लेकिन प्रणब दा ने उस विवाद को समाप्त करते हुए कहा था कि वह यहां माँ भारत के एक महान पुत्र को सम्मान देने आए हैं. धनखड़ का इस कार्यक्रम में आना राजनीतिक रूप से यह संकेत माना जा रहा है कि वे अब भी सत्ता पक्ष की विचारधारा के साथ जुड़े हुए हैं. कार्यक्रम में आरएसएस के कुछ अन्य प्रमुख लोग भी मौजूद थे, लेकिन धनखड़ ने मीडिया के सवालों के जवाब नहीं दिए और कार्यक्रम खत्म होते ही चले गए. जगदीप धनखड़ के इशारों भरे सवाल: नैरेटिव के चक्रव्यूह से निकलना मुश्किल जगदीप धनखड़ ने कहा कि आज सबसे बड़ी दिक्कत ‘नैरेटिव’ का चक्रव्यूह है. “भगवान करे कोई इस चक्रव्यूह में न फंसे… और अगर फंस जाए, तो समझाना मुश्किल है. मैं अपना उदाहरण नहीं दे रहा हूं,” उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहा. उन्होंने यह भी कहा कि आजकल लोग नैतिकता से दूर होते जा रहे हैं. इसके उदाहरण में उन्होंने पूर्व उप-राष्ट्रपति का एक वाकया साझा किया, जब यात्रा के लिए मैसेज आया, पर उन्होंने कहा कि “मैं फ्लाइट की चिंता में अपना कर्तव्य नहीं छोड़ सकता.”

महाकाल मंदिर में भस्म आरती दर्शन के लिए RFID बैंड व्यवस्था समाप्त

 उज्जैन  विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में भस्म आरती दर्शन में लागू रेडिया फ्रीक्वेंसी आइडी (आरएफआइडी) बैंड के माध्यम से मंदिर में प्रवेश की व्यवस्था को बंद कर दिया गया है। 15 नवंबर 2024 को मंदिर में नई पारदर्शी व्यवस्था की शुरुआत हुई थी, मंदिर समिति इसे एक साल भी नहीं चला पाई। यह भस्म आरती में हो रहे भ्रष्टाचार को रोकने में कारगर साबित हुई थी। अफसर प्रोटोकाल दर्शन में भी इसका उपयोग शुरू करने वाले थे, लेकिन बीते करीब एक माह से योजना बंद है। महाकाल मंदिर में  श्री महाकाल महालोक के त्रिनेत्र कंट्रोल रूप में श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की बैठक आयोजित हुई। इसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इनमें मुख्य निर्णय भक्तों के लिए डिजिटल सुविधाओं के विस्तार का था। मंदिर प्रबंध समिति ने जब आम भक्तों की सुविधा के लिए इतना महत्वपूर्ण कदम उठाया तो प्रचलित आधुनिक सुविधाओं की ओर ध्यान जाना लाजिमी था। संध्या आरती और शयन आरती में भी लागू होना था  भस्म आरती दर्शन व्यवस्था के संबंध में पूछताछ की तो पता चला भस्म आरती में लागू आरएफआईडी बैंड से प्रवेश की व्यवस्था को बंद कर दिया गया है। इस व्यवस्था से काफी हद तक भस्म आरती में भ्रष्टाचार रुका था। जब तक यह व्यवस्था चली, भस्म आरती में अनाधिकृत प्रवेश पर काफी हद तक अंकुश लग गया था। भ्रष्टाचार रोकने में कारगर सिद्ध साबित हुई तकनीक को प्रोटोकाल दर्शन तथा संध्या व शयन आरती में भी लागू करने की योजना थी। मामले में मंदिर प्रशासक, उप प्रशासक, सहायक प्रशासक कोई भी जवाब नहीं दे पा रहे हैं।

भारत में बढ़ी iPhone मैन्युफैक्चरिंग, घरेलू बाजार में बिक्री भी रही मजबूत

नई दिल्ली   दुनिया में बनने वाला हर पांच में एक आईफोन भारत में मैन्युफैक्चर किया जा रहा है। साथ ही, कंपनी की ग्लोबल प्रोडक्शन वैल्यू में देश का योगदान 12 प्रतिशत हो गया है। यह जानकारी एप्पल की फाइलिंग में दी गई। फाइलिंग के मुताबिक, एप्पल की भारतीय इकाई (एप्पल इंडिया) की घरेलू बिक्री वित्त वर्ष 25 में बढ़कर 9 अरब डॉलर हो गई है। एनालिस्ट की ओर से कहा गया कि एप्पल की कुल वैश्विक आय 416.1 अरब डॉलर है। इसमें भारत की हिस्सेदारी केवल 2 प्रतिशत के करीब है। हालांकि, आईफोन के उत्पादन में भारत की भूमिका बढ़ रही है। कंपनी की ओर से अब भारत में पहली बार हाई-एंड प्रो और प्रो मैक्स मॉडल का उत्पादन भी शुरू कर दिया है। फाइलिंग में कंपनी ने बताया कि 2025 में अमेरिकियों 178.4 अरब डॉलर के एप्पल प्रोडक्ट्स खरीदे थे, जो कि कंपनी की कुल आय का 43 प्रतिशत है। वहीं, भारत की ओर से यूएस को आईफोन शिपमेंट में भी तेजी से इजाफा हो रहा है। एप्पल की आय में यूरोप 26.7 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ दूसरे और ग्रेटर चीन 15.4 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर है। पिछले दस सालों में कंपनी की भारतीय इकाई की आय लगभग आठ गुना बढ़ी है, जिसमें मुख्य रूप से आईफोन, मैकबुक, आईपैड, एयरपोड्स और एक्सेसरीज का योगदान है, जबकि सर्विसेज का कुल बिक्री में योगदान काफी कम है। वित्त वर्ष 25 में एप्पल के इंडिया-बेस्ड प्रोडक्शन की फ्रेट-ऑन-बोर्ड वैल्यू 22 अरब डॉलर थी, जिसमें से 7.5 अरब डॉलर का एक्सपोर्ट किया गया। लोकल मैन्युफैक्चरिंग पूरी तरह से आयातित फोन पर लगने वाली 16 प्रतिशत की कस्टम ड्यूटी को बचाकर कंपनी की घरेलू बिक्री को बढ़ाने में मदद कर रही है। कंपनी की अर्निंग्स कॉल में, एप्पल के सीईओ टिम कुक ने कहा कि जब रिटेल की बात आती है, तो “हम अपने अब तक के सबसे अच्छे लाइनअप के साथ साल के सबसे बिजी समय में जा रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में, हमने इंडिया और यूएई जैसे इमर्जिंग मार्केट्स में नए स्टोर और यूएस और चीन में नए स्टोर्स खोले हैं।”

धर्म परिवर्तन मामला: हिंदू युवक को गौ मांस खाने और जमात में शामिल होने पर मजबूर किया, 3 पर FIR दर्ज

भोपाल  भोपाल के जहांगीराबाद में एक युवक का बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन कराए जाने का मामला सामने आया है। फरियादी 27 वर्षीय ने शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम सहित अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।पुलिस के मुताबिक पीड़ित युवक ने बताया कि जहांगीराबाद में रहने वाली मुस्लिम युवती से उसका प्रेम प्रसंग था। दोनों एक-दूसरे से शादी करना चाहते थे। लिहाजा वर्ष 2022 में परिजनों की मर्जी के खिलाफ घर से बिना बताए एक साथ रहने चले गए। मामले में युवती के परिजनों ने थाना जहांगीराबाद में बहला फुसलाकर अपहरण और रेप करने की एफआईआर दर्ज करा दी। युवक के खिलाफ रेप का केस कोर्ट में विचाराधीन है। पेशी के दौरान की शादी की बात रेप केस के मामले में युवक की पिछले दिनों पेशी थी, जबकि रेप पीड़िता के पिता और माता की गवाही कोर्ट में होना थी। तभी युवक ने प्रेमिका से शादी के लिए बात की। युवती के कहने पर ही उसके पिता से शादी की बात की। पिता ने स्वयं के मुस्लिम होने का हवाला देते हुए बेटी से शादी करने के ऐवज में युवक को मुस्लिम धर्म अपनाने की पेशकश की। मुस्लिम धर्म अपनाने के बाद उसके खिलाफ चल रहे रेप के केस को खत्म करने और बेटी से शादी करने का वादा किया। शादी की लालच में अपनाया मुस्लिम धर्म युवक ने पूर्व प्रेमिका से शादी की लालच में मुस्लिम धर्म को अपना लिया। तब युवती के भाई ने उसे जमातों में भेजना शुरू कर दिया। युवक ने FIR में बताया कि उसे तीन दिन से लेकर 4 महीने तक की जमातों में विभिन्न प्रदेशों और जिलों में भेजा गया। इसके बाद भी लड़की के परिजनों ने बेटी से उसकी शादी नहीं कराई। कर्नाटक में खिलाया गौ मांस युवक ने पुलिस को यह भी बताया कि एक जमात में उसे कर्नाटक भेजा गया था जहां उसे गौ मांस खाने के लिए मजबूर किया गया। वहां से लौटने के बाद भी लड़की के पिता ने बेटी से उसकी शादी नहीं कराई। लिहाजा युवक हिंदू धर्म में वापस लौट आया है। इसकी शिकायत के आधार पर जहांगीराबाद थाना पुलिस ने धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम लड़की के पिता मां और भाई के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।

अक्टूबर में भारत के बड़े उद्योगों की वृद्धि में कोई खास बदलाव नहीं

नई दिल्ली   वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से  दी गई जानकारी के अनुसार, इस वर्ष अक्टूबर में आठ प्रमुख उद्योगों (आईसीआई) का संयुक्त सूचकांक 162.4 पर पिछले वर्ष अक्टूबर की तुलना में अपरिवर्तित रहा। बीते महीने फर्टिलाइजर, स्टील, सीमेंट और पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पादों के उत्पादन में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई।    कोयले का उत्पादन अक्टूबर 2025 में बीते वर्ष की समान अवधि की तुलना में 8.5 प्रतिशत बढ़ा। बिग-टिकट इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को लेकर बढ़ती मांग के चलते अक्टूबर में स्टील के उत्पादन में बीते वर्ष की समान अवधि की तुलना में 6.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से अक्टूबर अवधि के दौरान इसका संचयी सूचकांक पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 10.3 प्रतिशत बढ़ा। फर्टिलाइजर का उत्पादन अक्टूबर 2025 में अक्टूबर 2024 के मुकाबले 7.4 प्रतिशत बढ़ा। वहीं, अप्रैल से अक्टूबर 2025-26 के दौरान इसका संचयी सूचकांक पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 0.7 प्रतिशत बढ़ा। सीमेंट का उत्पादन इस वर्ष अक्टूबर में बीते वर्ष की समान अवधि की तुलना में 5.3 प्रतिशत बढ़ा। जबकि इस वर्ष अप्रैल से अक्टूबर तक की अवधि में इसका संचयी सूचकांक पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 7.3 प्रतिशत बढ़ा। इसी तरह, पेट्रोलियम रिफाइनरी का उत्पादन भी अक्टूबर 2025 में अक्टूबर 2024 के मुकाबले 4.6 प्रतिशत बढ़ा। अप्रैल से अक्टूबर 2025-26 के दौरान इसका संचयी सूचकांक पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 0.4 प्रतिशत बढ़ा। हालांकि, कोयले, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस और बिजली के उत्पादन में बीते महीने पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में क्रमशः 8.5 प्रतिशत, 1.2 प्रतिशत, 5 प्रतिशत और 7.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। आईसीआई आठ प्रमुख उद्योगों के उत्पादन के संयुक्त और व्यक्तिगत प्रदर्शन को मापता है, जिसमें कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, फर्टिलाइजर, स्टील, सीमेंट और बिजली शामिल है। ये आठ प्रमुख उद्योग औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में शामिल वस्तुओं के भार का 40.27 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। सितंबर 2025 के लिए आठ प्रमुख उद्योगों के सूचकांक की अंतिम वृद्धि दर 3.3 प्रतिशत दर्ज की गई थी।

रायपुर: मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने ओड़गी में सड़क और पुलिया निर्माण का औचक निरीक्षण किया

रायपुर : मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने ओड़गी में सड़क एवं पुलिया निर्माण का किया औचक निरीक्षण गुणवत्ता पर नाराजगी, पुनः निर्माण और कार्य शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश रायपुर महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने सूरजपुर जिले के ओड़गी विकासखंड के धरसेड़ी-कर्री-कुप्पी मार्ग पर लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्मित सड़क और पुलिया का औचक निरीक्षण किया।  निरीक्षण के दौरान मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने नव-निर्मित सड़क की गुणवत्ता, सामग्री के उपयोग तथा संपूर्ण निर्माण प्रक्रिया का सूक्ष्मता से अवलोकन किया। निरीक्षण में यह स्पष्ट हुआ कि सड़क के कई हिस्सों में निर्माण मानकों का समुचित पालन नहीं किया गया है और कार्य अभी भी अधूरा है। इस पर उन्होंने विभागीय अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए तत्काल आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी को पूरे मार्ग का पुनः निर्माण मानक गुणवत्ता के साथ कराने तथा निर्धारित समय सीमा में कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कें आमजन की जीवनरेखा हैं, जिस पर आवागमन, एम्बुलेंस सुविधा, बच्चों की स्कूल पहुँच और आवश्यक सेवाओं की निर्भरता होती है। इसलिए कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी। निरीक्षण के दौरान लोक निर्माण विभाग के अधिकारी, ओड़गी क्षेत्र के स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।

मणिपुर में मोहन भागवत का बयान: ‘हिंदू नहीं रहेगा तो दुनिया नहीं रहेगी’, भारत की सभ्यता की मजबूती पर जोर

 इम्फाल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत मणिपुर के दौरे पर हैं. शुक्रवार को उन्होंने अपने संबोधन में सभ्यता, समाज और राष्ट्र की शक्ति का जिक्र किया. इस दौरान मोहन भागवत ने कहा कि हमने समाज का एक बेसिक नेटवर्क बनाया है, उसके चलते हिंदू समाज रहेगा. 'अगर हिंदू नहीं रहेगा तो दुनिया नहीं रहेगी.' भागवत ने कहा, 'परिस्थिति का विचार तो सबको करना पड़ता है. परिस्थिति आती है और जाती है. दुनिया में सब देशों पर तरह-तरह की परिस्थिति आई, गई. कुछ देश उसमें समाप्त हो गए. यूनान, मिस्र और रोमां सब मिट गए यहां से, कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी.' 'हिंदू नहीं रहेगा तो दुनिया नहीं रहेगी' उन्होंने कहा, 'भारत एक अमर समाज, अमर सिविलाइजेशन का नाम है. बाकी सब आए, चमके और चले गए. लेकिन इन सबका उदय और अस्त हमने ही देखा. हम अभी भी हैं और रहेंगे क्योंकि हमने अपने समाज का एक बेसिक नेटवर्क बनाया है. उसके चलते हिंदू समाज रहेगा. हिंदू नहीं रहेगा तो दुनिया नहीं रहेगी. क्योंकि धर्म का सही अर्थ और मार्गदर्शन दुनिया को समय-समय पर हिंदू समाज ही देता है. यह हमारा ईश्वर प्रदत्त कर्तव्य है.' 'भारत में अस्त हुआ ब्रिटिश साम्राज्य का सूर्य'   भागवत ने कहा कि हर समस्या का अंत संभव है. उन्होंने नक्सलवाद का उदाहरण देते हुए कहा कि जब समाज ने तय किया कि अब यह बर्दाश्त नहीं होगा, तब यह खत्म हो गया. उन्होंने कहा, 'ब्रिटिश साम्राज्य का सूर्य अस्त नहीं होता था. लेकिन भारत में उनके सूर्यास्त की शुरुआत हुई. इसके लिए हमने 90 साल प्रयास किए. 1857 से 1947, उस लंबे समय तक स्वतंत्रता के लिए हम सब लोग लड़ते रहे. वह आवाज कभी हमने दबने नहीं दी. कभी कम हो गई, कभी बढ़ गई, लेकिन दबने कभी नहीं दी.' 'हमारी अर्थव्यवस्था आत्मनिर्भर होनी चाहिए' उन्होंने आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था पर जोर देते हुए कहा कि देश को ऐसा होना चाहिए कि वह किसी पर निर्भर न रहे. भागवत ने कहा, 'हमारी अर्थव्यवस्था पूरी तरह आत्मनिर्भर होनी चाहिए. हम किसी पर डिपेंडेंट नहीं होने चाहिए. हमारे पास इकोनॉमिक एबिलिटी, मिलिट्री एबिलिटी और नॉलेज एबिलिटी होनी चाहिए. यह बढ़नी चाहिए. हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि देश सुरक्षित रहे, समृद्ध रहे और कोई भी नागरिक दुखी, दरिद्र या बेरोजगार न हो. सब लोग देश के लिए काम करें और आनंद से जीवन जिएं.'

कुमार मंगलम बिड़ला को यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन की ओर से मानद डॉक्टरेट की उपाधि

 लंदन देश के दिग्गज उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला को यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन ने मानद उपाधि से सम्मानित किया है. इस उपाधि से नवाजे गए चार अन्य विशिष्ट व्यक्तियों में प्रोफेसर सर हिलरी बेकल्स, सर टेरी वेट, सुज़ाना स्कोफील्ड MBE और रेवरेण्ड फिलिप गोफ के साथ वे भी इस सम्मान की लिस्ट में शामिल हो गए हैं. कुमार मंगलम बिड़ला आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन हैं. यह सौ साल पुराना लीडिंग भारतीय मल्टीनेशनल ग्रुप विदेश में कदम रखने वाला पहला भारतीय बिज़नेस हाउस भी माना जाता है. आज यह समूह छह महाद्वीपों के 41 देशों में सक्रिय है, जिसकी वार्षिक कमाई लगभग 67 अरब डॉलर और मार्केट कैपिटलाइजेशन 110 अरब डॉलर से ज्यादा है. बिड़ला परिवार की छठी पीढ़ी से आने वाले कुमार मंगलम बिड़ला के परदादा जी.डी. बिड़ला महात्मा गांधी के करीबी थे और उन्होंने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी. शिक्षा के बड़े समर्थक बिड़ला, BITS पिलानी के चांसलर हैं और IIM अहमदाबाद व IIT दिल्ली का भी नेतृत्व कर चुके हैं. वह लंदन बिजनेस स्कूल के गवर्निंग बोर्ड में भी शामिल हैं, जहां उन्होंने 15 मिलियन पाउंड की स्कॉलरशिप दी है- जो यूरोप की सबसे बड़ी स्कॉलरशिप में से एक है. इन हस्तियों को मिला सम्मान कुमार मंगलम बिड़ला को Doctor of Science (Economics) की उपाधि प्रदान की गई है. यह पुरस्कार यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन की चांसलर, हर रॉयल हाइनेस द प्रिंसेस रॉयल की ओर से 19 नवंबर को लंदन स्थित सीनेट हाउस में आयोजित फाउंडेशन डे समारोह में प्रदान किया गया. फाउंडेशन डे पर जिन्हें मानद डिग्री और फेलोशिप दी गई, वे हैं- -कुमार मंगलम बिड़ला, चेयरमैन, आदित्य बिड़ला समूह- Doctor of Science (Economics) -प्रोफेसर सर हिलरी बेकल्स, प्रोफेसर ऑफ इकोनॉमिक हिस्ट्री और वाइस-चांसलर, यूनिवर्सिटी ऑफ द वेस्ट इंडीज- Doctor of Science (Social Sciences) -सर टेरी वेट KCMG CBE, ट्रिनिटी हॉल कैंब्रिज के मानद फेलो और मानवीय कार्यों से जुड़े कई चैरिटी संगठनों के संरक्षक- Doctor of Science (Social Sciences) -सुज़ाना स्कोफील्ड MBE, जिन्होंने अपने पति जॉन स्कोफील्ड (जो क्रोएशिया में रिपोर्टिंग करते समय मारे गए) की स्मृति में John Schofield Trust की स्थापना की- Doctor of Literature -रेवरेण्ड फिलिप गोफ, अकादमिक ड्रेस पर विशेषज्ञ- Honorary Fellowship 'उन्होंने लाखों लोगों के जीवन में सुधार किया' यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ की चेयर कविता रेड्डी ने कहा, 'हमें बेहद खुशी है कि हम कुमार मंगलम बिड़ला को उद्योग और परोपकार में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए मानद डिग्री से सम्मानित कर रहे हैं. उनकी सामाजिक पहलों ने लाखों लोगों के जीवन में सुधार किया है. भारत और यूके में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को अधिक लोगों तक पहुंचाने के उनके प्रयास यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के मूल्यों से मेल खाते हैं- दूसरों की मदद करने का जज्बा, शिक्षा का महत्व और विभाजन के बजाय एकता का संदेश.' उन्होंने कहा, 'हमारे सभी सम्मानित व्यक्तियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं और वे इन मूल्यों को आगे बढ़ाते हैं. फाउंडेशन डे पर उन्हें सम्मानित करना हमारे लिए सौभाग्य की बात है.' 'यह मेरे लिए गर्व की बात है' कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा, 'यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से यह सम्मान पाकर मैं बेहद कृतज्ञ महसूस कर रहा हूं. विशेष रूप से यह मेरे लिए गर्व की बात है कि यह सम्मान हर रॉयल हाइनेस, प्रिंसेस ऐन, द प्रिंसेस रॉयल की ओर से प्रदान किया गया. लंदन बिजनेस स्कूल के पूर्व छात्र के रूप में मैंने देखा है कि यह विश्वविद्यालय कैसे महत्वाकांक्षा को उपलब्धियों में बदलता है. मेरा परिवार हमेशा मानता आया है कि शिक्षा प्रगति का सबसे सशक्त साधन है, जो अवसरों का विस्तार करती है और समाज को बदलने की क्षमता रखती है. ऐसी संस्था की ओर से सम्मानित होना, जो इन मूल्यों को जीती है और नई पीढ़ियों को अप्रत्याशित दुनिया का सामना करने के लिए तैयार करती है, मेरे लिए प्रेरणादायक है.' हर साल यूनिवर्सिटी मनाती है फाउंडेशन डे हर साल यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन फाउंडेशन डे मनाती है. यह दिन विश्वविद्यालय के वार्षिक कैलेंडर की एक महत्वपूर्ण तिथि है, जो 28 नवंबर 1836 को किंग विलियम IV की ओर से दिए गए संस्थान के पहले रॉयल चार्टर की याद दिलाती है. इस समारोह का मुख्य हिस्सा मानद उपाधियों और फैलोशिप प्रदान करना होता है. इस परंपरा की शुरुआत 1903 में हुई थी. इसके शुरुआती सम्मानित व्यक्तियों में वेल्स के प्रिंस और प्रिंसेस (जो बाद में किंग जॉर्ज V और क्वीन मैरी बने) शामिल थे. फाउंडेशन डे 2025 के कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के छात्र और स्टाफ, इसकी 17 फेडरेशन मेंबर संस्थाओं के प्रतिनिधि, दुनिया भर में बने इसके रीजनल टीचिंग सेंटर्स के सदस्य और विश्वविद्यालय से लंबे समय से जुड़े लोग शामिल हुए.