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भारतीय स्काउट्स एंड गाइड्स को वैश्विक पहचान दिला रहा है 19वां राष्ट्रीय जंबूरी आयोजन

जंबूरी हॉस्पिटल व ब्लड डोनेशन कैम्प का उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने किया उद्घाटन राज्यपाल आनंदी बेन कल करेंगी भारत स्काउट्स एंड गाइड्स की 19वीं राष्ट्रीय जंबूरी का उद्घाटन उद्घाटन समाहरोह के बाद राष्ट्रीय प्रतीकों पर आधारित ड्रोन शो का किया जाएगा आयोजन लखनऊ, भारत स्काउट्स एंड गाइड्स की 19वीं राष्ट्रीय जंबूरी के डायमंड जयंती कार्यक्रम का भव्य उद्घाटन समारोह कल, 24 नवंबर को आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर प्रदेश की राज्यपाल माननीय आनंदी बेन पटेल, राष्ट्रीय जंबूरी का उद्घाटन करेंगी। उद्घाटन अवसर पर ड्रोन शो और स्काउट्स एंड गाइड्स की परेड व सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।19वीं राष्ट्रीय जंबूरी के इस ऐतिहासिक आयोजन की शुरूआत आज देश भर से आये स्काउट्स एंड गाइड्स के रजिस्ट्रेशन, कैम्पिंग और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के साथ हुई। आयोजन के पहले दिन 100 बेड के जंबूरी हॉस्पिटल और ब्लड डोनेशन कैम्प का उद्घाटन भी किया गया। जंबूरी मैदान में सैकड़ों की संख्या में देश के विविध रंग रूप में लगे स्काउट्स के टेंटस् ने पूरे मैदान को स्काउट्स की वैश्विक राजधानी के रूप में बदल दिया है। स्काउट्स एंड गाइड्स की वैश्विक राजधानी बन गया है लखनऊ 19वें राष्ट्रीय जंबूरी की शुरूवात आज देश के कोने-कोने से और अन्य देशों से भी आये स्काउट्स एंड गाइड्स के पंजीकरण और कैम्पिंग की प्रक्रिया के साथ हुई। इस क्रम में स्काउट्स की टेंट की नगरी ने प्रदेश की राजधानी लखनऊ को स्काउट्स एंड गाइड्स की वैश्विक राजधानी के रूप में बदल दिया है। विश्व के अनेक देशों और देश के अलग-अलग भाग से आये स्काउट्स के टेंट उनके सांस्कृतिक रंगों में रंगे नजर आये, जो विविधता में एकता के भाव को प्रतिबिंबित कर रहे हैं। राष्ट्रीय जंबूरी, देश-विदेश से आये स्काउट्स के लिए संस्कृतिक आदान-प्रदान एक का मंच बन गया है। जंबूरी के पहले दिन युवा स्काउट्स जोश, ऊर्जा और उत्साह से भरे हुए नजर आये, ये मंच उन्हें अपनी प्रतिभा को विश्व स्तर पर प्रदर्शित करने का अवसर भी मिला। उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने किया जंबूरी हॉस्पिटल एवं ब्लड डोनेशन कैम्प का उद्घाटन    राष्ट्रीय जंबूरी के पहले दिन प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने 100 बेड के जंबूरी हॉस्पिटल व ब्लड डोनेशन कैम्प का उद्घाटन किया। साथ ही जंबूरी के पहले दिन स्काउट्स ने 24 नवंबर को आयोजित होने वाले भव्य उद्घाटन समारोह की रिहर्सल की और मनोरंजक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी की। यह आयोजन न केवल स्काउट्स एंड गाइड्स में सामजिक सेवा व राष्ट्र निर्माण की भावना जागृत कर रहा है, बल्कि भारतीय स्काउटिंग को वैश्विक पटल पर पहचान भी प्रदान कर रहा है। राज्यपाल आनंदी बेन करेंगी 19वीं राष्ट्रीय जंबूरी का उद्घाटन भारत स्काउट्स एंड गाइड्स की 19वीं राष्ट्रीय जंबूरी का उद्घाटन 24 नवंबर को प्रदेश की माननीय राज्यपाल आनंदी बेन पटेल करेंगी। उद्घाटन समारोह दोपहर 3 बजे से शुरू होगा। जिसमें माननीय राज्यपाल के उद्बोधन के बाद स्काउट्स की परेड व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। उद्घाटन समारोह के बाद रात्रि में राष्ट्रीय प्रतीकों पर आधारित ड्रोन शो का आयोजन किया जाएगा। प्रदेश की राजधानी में चलने वाले इस 19वीं राष्ट्रीय जंबूरी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, 25 नवंबर को सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचेगें। मुख्यमंत्री इस अवसर पर स्काउट्स एंड गाइड्स को प्रोत्साहन एवं मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। 29 नवंबर को समापन के पहले जंबूरी में कई तरह की प्रतिस्पर्धाओं व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाएगा।

उज्जैन कुश्ती में महिला पहलवानों ने जीते 5 पदक

सागर  उच्च शिक्षा विभाग की राज्यस्तरीय पुरुष व महिला कुश्ती प्रतियोगिता उज्जैन में हुई। इसमें रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय की ओर से 3 स्वर्ण, 2 सिल्वर सहित कुल 5 पदक जीते। प्रतियोगिता में महिला वर्ग के 53 किग्रा भार वर्ग में शैली सोनी गोल्ड, 72 किग्रा मेघा कुशवाहा गोल्ड मेडल, 76 किग्रा में विधि यादव गोल्ड, 57 करूणा सेन सिल्वर व 65 किग्रा में शालिनी सिंह ने सिल्वर मेडल जीता। कुश्ती प्रशिक्षक मनीष यादव के निर्देशन में विश्वविद्यालय के पहलवान छात्रा खिलाड़ियों ने पदक जीते हैं। इस उपलब्धि पर स्पोर्ट्स अधिकारी डॉ. मोनिका हार्डिकर, डॉ. आरके जैन, कुश्ती संघ सागर अध्यक्ष आनंद विश्वकर्मा, नरेंद्र सोनी, हरिश्चंद्र चौरसिया व जयश्री राठौर आदि ने बधाई दी।

MP का दमोह-जबलपुर हाइवे जाम! शादी समारोह की अव्यवस्था से ट्रैफिक चरमराया, गंभीर मरीज परेशान

दमोह मध्य-प्रदेश में शनिवार रात दमोह–जबलपुर स्टेट हाईवे पर शादी समारोहों के कारण भारी जाम लग गया, जिससे पूरे क्षेत्र में अव्यवस्था फैल गई। यह स्थिति तब और गंभीर हो गई जब जाम में एक एंबुलेंस फंस गई, जिसमें एक गंभीर मरीज को जबलपुर रेफर किया जा रहा था। सड़क के दोनों ओर वाहनों की अनियंत्रित पार्किंग और मैरिज गार्डन में पर्याप्त पार्किंग स्थान की कमी के कारण लगभग एक किलोमीटर लंबा जाम बन गया। शहर के छह मैरिज गार्डन राधिका पैलेस, दमयंती मैरिज गार्डन, विद्या वाटिका, महावीर पैलेस, वृंदावन पैलेस, कृष्णा पैलेस और पवित्र बंधन मैरिज गार्डन में एक ही रात में विवाह समारोह आयोजित थे। समारोह में पहुंचे मेहमानों ने अपने वाहन सड़क पर खड़े कर दिए, जिससे दमोह–जबलपुर स्टेट हाईवे पूरी तरह ठप हो गया। जाम में फंसे लोगों ने इस स्थिति के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए और पुलिस अधिकारियों को सूचित किया।   जानकारी मिलने पर नगर पुलिस अधीक्षक एच.आर. पांडेय पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। लगभग डेढ़ घंटे की कोशिशों के बाद रास्ता साफ किया गया और एंबुलेंस को आगे बढ़ने का मार्ग मिला। ट्रैफिक सामान्य होने के बाद पुलिस ने मामले की जानकारी पुलिस अधीक्षक श्री सोमवंशी को दी। पार्किंग व्यवस्था की गंभीर लापरवाही को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर छहों मैरिज गार्डन संचालकों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 270 और 285 के तहत मामला दर्ज किया गया। इन सभी को नोटिस जारी किया जा रहा है। गौरतलब है कि ऐसी स्थितियां हर साल शादी के सीजन में लगातार बनती हैं। प्रशासन और पुलिस बार-बार मैरिज गार्डन संचालकों को पार्किंग की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश देते हैं, लेकिन अब तक किसी भी गार्डन में पर्याप्त पार्किंग नहीं बनाई गई। पुलिस और प्रशासन भी इस समस्या पर कठोर कार्रवाई नहीं कर पाए हैं, जिसके कारण हर वर्ष इसी तरह के हालात सामने आते हैं। इस वर्ष भी शादी का सीजन अभी शुरू ही हुआ है, जिससे आने वाले दिनों में इसी तरह की स्थिति बने रहने की आशंका है।

सामाजिक सामंजस्य और संसाधन प्रबंधन के लिए अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान जरूरी

सीएम योगी के निर्देश पर प्रदेशव्यापी सत्यापन शुरू: अवैध घुसपैठ पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी नेपाल बॉर्डर और बड़े शहरों में सख्ती: यूपी में अवैध विदेशी नागरिक पहचान को मिली रफ़्तार लखनऊ,  देश की आंतरिक सुरक्षा, सामाजिक सामंजस्य और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए केंद्र और राज्य सरकारें अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान अभियान को तेज़ी से आगे बढ़ा रही हैं। उत्तर प्रदेश, जो देश का सबसे बड़ा और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य है, इस दिशा में विशेष सतर्कता बरत रहा है। सरकार ने सभी डीएम और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे विदेशी नागरिकों के दस्तावेज़ों की गहन जांच कर अवैध रूप से रह रहे व्यक्तियों की पहचान को प्राथमिकता दें। प्रदेश की भौगोलिक स्थिति—जिसमें आठ राज्यों, एक केंद्र शासित प्रदेश और नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा शामिल है—इस अभियान को और महत्व देती है। हाल के वर्षों में सीमाई जिलों में अस्थिरता, फर्जी पहचान और घुसपैठ की घटनाएँ बढ़ी हैं, जिनका सीधा असर यूपी पर दिखाई देता है। फर्जी पहचान के सहारे विभिन्न शहरों में बस रहे अवैध घुसपैठिए न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती हैं, बल्कि सामाजिक संतुलन और संसाधनों पर भी गंभीर दबाव डालते हैं। इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से सत्यापन और पहचान की प्रक्रिया को तेज़ कर रहे हैं। इसमें निर्दोष व्यक्तियों को किसी भी प्रकार की अनावश्यक परेशानी न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा। वहीं संदिग्ध गतिविधियों में शामिल या फर्जी दस्तावेज़ों का उपयोग करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। राज्य के सभी जिलों में अस्थायी डिटेंशन सेंटर भी स्थापित किए जायेंगे, जहां ऐसे व्यक्तियों को दस्तावेज़ों के सत्यापन पूरा होने तक सुरक्षित रूप से रखा जा सकेगा। यह व्यवस्था प्रशासन को सही तथ्यों की जांच में मदद करेगी, साथ ही स्थानीय जनसुविधाओं पर अतिरिक्त बोझ भी नहीं पड़ेगा। तत्कालीन केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 2016 में संसद को सूचित किया था कि अनुमानित 2 करोड़ अवैध बांग्लादेशी अप्रवासी भारत में निवास कर रहे होंगे। इसके अलावा, अगस्त 2017 में उन्होंने संसद में यह भी कहा था कि भारत में अवैध रोहिंग्या प्रवासियों की संख्या 40,000 से अधिक है। अवैध विदेशी नागरिकों की मौजूदगी से स्थानीय संसाधनों, सरकारी योजनाओं और रोजगार पर असर पड़ता है। कई बार फर्जी पहचान बनाकर ये लोग सरकारी लाभ प्राप्त करने की कोशिश करते हैं, जिसका सीधा नुकसान वास्तविक पात्रों को होता है। तेजी से विकसित हो रहे शहर—जैसे लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद और वाराणसी—इस समस्या का अधिक प्रभाव महसूस करते हैं, जहां जनसंख्या घनत्व पहले से ही अधिक है और संसाधनों पर दबाव भी। विशेषज्ञों के अनुसार नेपाल सीमा से सटे यूपी के जिलों में अवैध प्रवेश, फर्जी पहचान और संदिग्ध गतिविधियों का जोखिम अधिक रहता है, इसलिए समय पर पहचान बेहद आवश्यक है। समग्र रूप से, यह अभियान कानून-व्यवस्था, सामाजिक सदभाव और संसाधन प्रबंधन को मजबूत करने के साथ भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने का महत्वपूर्ण कदम है, जो प्रदेश को अधिक सुरक्षित और स्थिर बनाने में मदद कर रहा है।

1500 किमी दूर मिला लापता डॉग! समुद्र तट से गायब होकर कर दिया सबको हैरान

नई दिल्ली चीन से इमोशनल कहानी सामने आई है, जिसने दुनिया भर के लोगों का दिल छू लिया है। एक लैब्राडोर पपी, जिसका नाम ‘सितंबर’ है। वह तीन महीने पहले अपनी मालकिन से बिछड़ गया था। मालकिन ने हर संभव प्रयास किए, लेकिन सितंबर कहीं नहीं मिला। आखिरकार, वह 1500 किलोमीटर दूर एक दूसरे प्रांत में मिला। दोनों का मिलन किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लगा। समुद्र किनारे से गायब हुआ सितंबर शेडोंग प्रांत की रहने वाली गाओ अपने कुत्ते 'सितंबर' के साथ 13 अगस्त को किंगदाओ बीच पर घूमने गई थीं। भीड़-भाड़ के बीच सितंबर अचानक नजरों से ओझल हो गया। गाओ ने घबराकर सीसीटीवी कैमरे चेक करवाए, जिसमें दिखा कि सितंबर किसी दूसरे कुत्ते और उसके मालिक के साथ चलता हुआ बीच से दूर निकल गया। यह देखकर गाओ ने कुत्ते को खोजने की हर संभव कोशिश की। ऑनलाइन पोस्ट्स डालीं, एनिमल शेल्टर्स में चक्कर लगाए और कई लोगों से मदद मांगी, लेकिन सफलता नहीं मिली। एक अजनबी ने बदली कहानी की दिशा 1500 किलोमीटर दूर हुनान प्रांत के चांग्शा में एक महिला झोउ ने बारिश के दौरान एक कुत्ते को आवारा कुत्तों के साथ भटकते हुए देखा। उसे कुत्ते पर दया आ गई। वह उसको अपने घर ले आई। झोउ ने सोशल मीडिया पर कुत्ते का वीडियो पोस्ट किया। बताया कि यह किसी का खोया हुआ पालतू जानवर है। किस्मत देखिए, यह वीडियो सीधा गाओ तक पहुंचा। वीडियो देखते ही वह भावुक होकर रो पड़ीं, क्योंकि वह सितंबर ही था।   गाओ का साझा किया दर्द गाओ ने कहा कि किसी ने सितंबर को चुरा लिया था या कोई पर्यटक उसे अपने साथ ले गया होगा। तीन महीने की जुदाई ने उसे तोड़ दिया था, लेकिन आखिरकार उसे पता चला कि सितंबर सुरक्षित है, तो वह खुशी से भर उठीं।

सीएम योगी के नेतृत्व में ऊर्जा प्रबंधन के क्षेत्र में यूपी बना अन्य राज्यों के लिए उदाहरण

बढ़ती महंगाई के बीच यूपी की स्थिर बिजली दरें बनी जनता की ताकत सीएम योगी की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, दूरदर्शी योजना और वित्तीय अनुशासन से आम जनता को मिला वास्तविक लाभ राजस्व अधिशेष ने साबित किया, प्रबंधन सही तो व्यवस्था मजबूत ऊर्जा सुधारों ने बनाया यूपी को भरोसेमंद निवेश गंतव्य लखनऊ, उत्तर प्रदेश सरकार ने लगातार छठे वर्ष बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी न करके देश के सामने ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो बताता है कि मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, दूरदर्शी योजना और वित्तीय अनुशासन एक साथ मिलकर जनता को वास्तविक लाभ पहुंचा सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश ने ऊर्जा क्षेत्र में जो सुधार किए हैं, उनकी वजह से आज यूपी देश का पहला राज्य बन गया है, जहां छह वर्षों से बिजली दरें यथावत हैं।      वर्तमान समय में जब देश के कई राज्यों में बढ़ती लागत के कारण बिजली दरें ऊपर जा रही हैं, उसी समय उत्तर प्रदेश ने गरीब, किसान, मजदूर, व्यापारी और मध्यम वर्गीय परिवारों को बड़ी राहत दी है। सरकार का उद्देश्य साफ है कि जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ नहीं पड़े और घरेलू बजट स्थिर रहे।      इस निर्णय के पीछे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक सुव्यवस्थित और दूरदर्शी योजना काम कर रही है। बिजली वितरण कंपनियों ने पिछले वर्षों में ₹15,000 करोड़ से अधिक का राजस्व अधिशेष अर्जित किया है। यह अधिशेष अचानक नहीं आया, बल्कि यह आर्थिक अनुशासन, बिजली चोरी पर नियंत्रण, तकनीक आधारित बिलिंग, लाइन लॉस में कमी, समय पर मेंटेनेंस और बड़े पैमाने पर संरचनात्मक सुधारों का परिणाम है।       प्रदेश में नई विद्युत उत्पादन परियोजनाओं, ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार और नवीकरणीय ऊर्जा पर बढ़ते निवेश ने भी लागत नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बढ़ते माइग्रेशन, उद्योग विस्तार और शहरीकरण के बावजूद सरकार ने सब्सिडी को प्रभावी बनाकर व्यवस्था को संतुलित कर रखा है।     ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में ओवरलोडिंग नियंत्रित करने, केबलिंग को भूमिगत करने, पुराने तारों और ट्रांसफॉर्मरों को बदलने जैसे कार्यों ने बिजली आपूर्ति प्रणाली को मजबूत किया है। ऊर्जा बचत अभियानों और स्मार्ट इलेक्ट्रिक मीटरों के व्यापक क्रियान्वयन ने भी बिलिंग और खपत प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाया, जिससे राजस्व बढ़ा और लीकेज में कमी आई।      बिजली दरों में स्थिरता से उपभोक्ताओं को तुरंत राहत तो मिलती ही है, साथ ही उद्योगों की प्रोडक्शन लागत भी नियंत्रित रहती है। इसका सीधा असर निवेश माहौल पर पड़ता है। निवेशक ऐसे राज्यों को प्राथमिकता देते हैं जहां ऊर्जा की कीमतें स्थिर हों, आपूर्ति सुरक्षित हो और नीतियां पारदर्शी हों। यूपी ने इन तीनों मोर्चों पर भरोसे का वातावरण तैयार किया है। यही कारण है कि आज प्रदेश देश के उभरते औद्योगिक हब्स में अपनी जगह मजबूत कर रहा है।        योगी सरकार का स्थिर बिजली और मजबूत व्यवस्था मॉडल इस बात का प्रमाण है कि जनहित और अर्थव्यवस्था दोनों को साथ-साथ मजबूत किया जा रहा है। गरीब परिवारों की जेब सुरक्षित, किसानों पर सिंचाई लागत का बोझ नहीं, मजदूर और कामगारों पर अतिरिक्त भार नहीं, छोटे व्यापारियों का बजट नियंत्रित और उद्योगों के लिए प्रतिस्पर्धी माहौल को यह संतुलन कर उत्तर प्रदेश में स्थापित किया है।      छह साल से स्थिर बिजली दरें केवल एक घोषणा नहीं, बल्कि सरकार की दूरदर्शिता, प्रबंधन क्षमता और नीतिगत प्रतिबद्धता का जीवंत प्रमाण हैं। उत्तर प्रदेश ने यह दिखा दिया है कि मजबूत इच्छा-शक्ति हो तो जनता को राहत देते हुए भी व्यवस्था को लाभ में रखा जा सकता है।      सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश तेजी से आगे बढ़ा है। खासतौर पर रूफटॉप सोलर और ग्रिड-कनेक्टेड सोलर प्लांट दोनों में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। उत्तर प्रदेश में आज शहर या गांवों की छतों पर चमकते सोलर पैनल न सिर्फ बिजली पैदा कर रहे हैं, बल्कि नए भारत की परिकल्पना को साकार भी कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति के अंतराल बढ़ता औद्योगिक विस्तार और पर्यावरणीय क्षेत्र में सस्ती और टिकाऊ ऊर्जा की जरूरत को बढ़ाया है। सौर ऊर्जा न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण में सहायक है, बल्कि उपभोक्ताओं के बिजली बिल में मददगार साबित हो रही है।      उत्तर प्रदेश में कुल 13,46,040 आवेदन प्राप्त हुए थे। यह स्वयं दिखाता है कि लोग बदलाव के लिए कितने तत्पर थे। मात्र 18 महीनों में 2,81,769 सोलर रूफटॉप संयंत्रों का इंस्टॉलेशन और पिछले 4.5 महीनों में रिकॉर्ड 1,30,000 संयंत्रों की स्थापना ने उत्तर प्रदेश को महाराष्ट्र और गुजरात के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा उत्पादक राज्य बना दिया।    सौर ऊर्जा क्रांति ने सिर्फ रोशनी नहीं फैलाई बल्कि इसने रोजगार के द्वार भी खोले। अकेले उत्तर प्रदेश में 54,000 से अधिक युवाओं को सीधा रोजगार मिला है। देशभर में सोलर मॉड्यूल निर्माण, इन्वर्टर, वायरिंग, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में लाखों नौकरियां सृजित हुईं—यानी यह योजना ऊर्जा के साथ-साथ रोजगार का भी उजाला लेकर आई है।       यूपी बिजली टैरिफ 2025-26 के प्रमुख आंकड़ों के अनुसार, राज्य में लगातार छठे साल बिजली दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जबकि ग्रीन एनर्जी टैरिफ में राहत देते हुए HV कंज्यूमर्स के लिए इसे ₹0.36 से घटाकर ₹0.34 प्रति यूनिट और LV कंज्यूमर्स के लिए ₹0.17 प्रति यूनिट तय किया गया है। डिस्ट्रीब्यूशन लॉस के मामले में मध्यांचल और पश्चिमांचल डिस्कॉम ने FY 24-25 का लक्ष्य पूरा किया, जबकि सबसे कमजोर प्रदर्शन पूर्वांचल का रहा।          आयोग ने FY 2023-24 के लिए 85,082.83 करोड़ रुपये का एआरआर और 1,246.55 करोड़ रुपये का रेगुलेटरी सरप्लस स्वीकृत किया। वहीं FY 2025-26 के लिए 1,10,993.33 करोड़ रुपये का एआरआर और 13.35% डिस्ट्रीब्यूशन लॉस को मंजूरी दी गई है, जिसमें राज्य सरकार 17,100 करोड़ रुपये की सब्सिडी देगी।        इस वर्ष 7,710.04 करोड़ रुपये का रेगुलेटरी गैप दर्ज हुआ है, जबकि 1 अप्रैल 2025 तक यूपीपीसीएल के पास 18,592.38 करोड़ रुपये का जमा रेगुलेटरी सरप्लस उपलब्ध रहेगा। औसत सप्लाई कॉस्ट ₹8.18 और औसत बिलिंग रेट ₹7.61 प्रति यूनिट तय की गई है। आदेश के अनुसार PAN अपडेट, TDS सर्टिफिकेट जारी करने, ओपन एक्सेस क्रॉस-सब्सिडी में तर्कसंगत कमी और TOD टैरिफ को यथावत रखने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि मल्टी स्टोरी बिल्डिंग व टाउनशिप से जुड़े मुद्दों पर जल्द ही अलग कंसल्टेशन पेपर … Read more

इन दिशा-निर्देशों के साथ करें गीता पाठ, बढ़ेगा लाभ और प्रभाव

गीता-पाठ सदैव धर्म, ज्ञान और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करने वाला शुभ कर्म माना गया है। श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया यह दिव्य उपदेश आज भी जीवन की हर उलझन का समाधान देता है। वास्तु-शास्त्र के अनुसार यदि गीता का पाठ सही दिशा, सही आसन और सही वातावरण में किया जाए, तो इसका फल कई गुना बढ़ जाता है। मन, घर और ऊर्जा तीनों पवित्र और सकारात्मक हो जाते हैं। गीता-पाठ के लिए सर्वोत्तम दिशा पूर्व दिशा है। वास्तु शास्त्र में पूर्व दिशा को “ज्ञान, प्रकाश और दिव्यता” की दिशा कहा गया है। सूर्य उदय की दिशा होने के कारण पूर्व दिशा से घर में देवत्व और शुद्ध ऊर्जा का प्रवेश होता है। गीता-पाठ का सर्वोत्तम स्थान: पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूर्व दिशा में बैठकर गीता पाठ करने से बुद्धि तेज होती है, मन एकाग्र होता है और जीवन में ज्ञान का प्रकाश आता है। यह वही दिशा है जिसमें देवताओं का निवास माना गया है। दूसरा उत्तम विकल्प उत्तर दिशा: यदि पूर्व दिशा उपलब्ध न हो तो वास्तु के अनुसार उत्तर दिशा भी गीता-पाठ के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। उत्तर दिशा कुबेर और आध्यात्मिक प्रगति की दिशा है। इस दिशा में पाठ करने से सकारात्मक ऊर्जा, करियर उन्नति और मानसिक शांति प्राप्त होती है। कौन सी दिशा से बचना चाहिए? दक्षिण दिशा: यह दिशा पितृ दिशा मानी जाती है। यहां बैठकर गीता-पाठ करने से मन भारी रहता है और एकाग्रता कम होती है। पश्चिम दिशा: यह दिशा स्थिरता की है पर आध्यात्मिक ग्रंथ पाठ के लिए श्रेष्ठ नहीं है। यहां पाठ करने से ऊर्जा प्रवाह धीमा हो सकता है। गीता-पाठ का वास्तु-अनुसार आसन और स्थान आसन: कुशासन, ऊन का आसन या लाल/पीला आसन श्रेष्ठ माना गया है। जमीन पर सीधे न बैठें ऊर्जा अवशोषित हो जाती है। स्थान: घर का ईशान कोण (उत्तर-पूर्व): पूजा, ध्यान और गीता-पाठ के लिए सर्वश्रेष्ठ है। वहां ऊर्जा अत्यंत शुद्ध और दिव्य होती है। गीता-पाठ का लाभ वास्तु के अनुसार क्यों बढ़ता है ? सही दिशा में बैठने से मन शांत, ध्यान स्थिर और विचार दिव्य होते हैं। घर में सरस्वती, विष्णु और सकारात्मक ब्रह्म ऊर्जा का प्रवेश होता है। नकारात्मकता दूर होती है, वास्तु-दोष कम होता है, जीवन में सुख-समृद्धि और तनाव-मुक्ति आती है।

भ्रष्टाचार पर ACB-EOW का शिकंजा, मुख्यमंत्री साय ने कहा— दोषियों को किसी हाल में नहीं छोड़ा जाएगा

रायपुर छत्तीसगढ़ में रविवार सुबह एसीबी-ईओडब्ल्यू की टीम ने रायपुर, बिलासपुर सहित कई जिलों में एक साथ छापेमारी की। आबकारी और डीएमएफ घोटाले से जुड़े लगभग 18 ठिकानों पर दबिश दी गई है, जहां अधिकारी दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ACB-EOW की इस कार्रवाई पर बयान देते हुए कहा कि हमारी सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। भ्रष्टाचार की शिकायतों पर एजेंसियां जांच कर रही हैं और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई भी होगी। जांच एजेंसी अपना काम कर रही है – अरुण साव उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि दोनों मामलों में लंबे समय से इन्वेस्टिगेशन चल रही है। दोनों ही मामलों की जांच पहले से ही की जा रही है। जांच के आधार पर यह कार्रवाई हो रही है, जांच एजेंसी अपना काम कर रही है। बता दें कि ACB–EOW की टीम ने सुबह से ही कई जिलों में छापा मारा। आबकारी और डीएमएफ घोटाले से जुड़े ठिकानों में रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर, कोंडागांव समेत विभिन्न जिले शामिल हैं। कहां-कहां हुई ACB-EOW की छापेमार कार्रवाई रायपुर – रामा ग्रीन कॉलोनी में पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास और अमलीडीह स्थित ला विस्टा कॉलोनी में कारोबारी हरपाल अरोरा के ठिकानों पर। दुर्ग –  रिटायर्ड आबाकरी अधिकारी निरंजन दास के बेटे डॉ. अभिषेक दास के घर। बिलासपुर – शराब घोटाले से जुड़े अनिल टुटेजा के रिश्तेदार अशोक टुटेजा के घर। कोंडागांव – वर्ष 2019-20 में डीएमफ सप्लाई में शामिल रहे हैं कोणार्क जैन के घर। जगदलपुर – निरंजन दास के भाई चितरंजन दास के मैत्री संघ स्थित आवास। अंबिकापुर – पर्राडांड निवासी डॉक्टर तनवीर अहमद और सत्ती पारा निवासी अमित अग्रवाल के घर। बलरामपुर – कारोबारी मनोज अग्रवाल के घर।

वीसी बैठक: कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने धान उपार्जन केंद्रों के नोडल अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश

रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने आज वीसी के माध्यम से धान उपार्जन केंद्रों के नोडल अधिकारियों की बैठक ली और धान खरीदी की प्रगति तथा व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसानों को धान उपार्जन में कोई समस्या न हो। अवैध धान खरीदी पर कड़ाई से रोक लगाने तथा प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित रखने के निर्देश दिए। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ कुमार बिश्वरंजन, अपर कलेक्टर कीर्तिमान सिंह राठौर, एडीएम उमाशंकर बंदे तथा रायपुर एसडीएम नंदकुमार चौबे सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

‘रूस की योजना, हमारी नहीं’—कनाडा में ट्रंप की गाज़ा पॉलिसी पर अमेरिकी सीनेटरों का जोरदार प्रहार

वाशिंगटन रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दृष्टिकोण के आलोचक कई सीनेटर ने शनिवार को कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बातचीत के दौरान उन्हें बताया कि जिस शांति प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए ट्रंप द्वारा कीव पर दबाव डाला जा रहा है वह असल में अमेरिकी योजना नहीं, बल्कि रूसियों की ‘‘इच्छा सूची'' है। यह 28-बिंदु वाला शांति प्रस्ताव ट्रंप प्रशासन और क्रेमलिन द्वारा तैयार किया गया था, जिसमें यूक्रेन को शामिल नहीं किया गया था। इस प्रस्ताव में कई ऐसे रूसी मांगों को शामिल किया गया है जिन्हें यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दर्जनों बार नकार दिया है। इसमें यूक्रेन द्वारा बड़े भूभागों को छोड़ना भी शामिल है।  ट्रंप का कहना है कि वह चाहते हैं कि यूक्रेन इस प्रस्ताव को अगले सप्ताह के अंत तक स्वीकार कर ले। अमेरिका के कई सीनेटर ने शनिवार को पहले कहा था कि इससे मॉस्को को उसके आक्रामकता के लिए इनाम मिलेगा और ऐसे दूसरे नेताओं को एक संदेश भी देगा जिन्होंने अपने पड़ोसियों को धमकाया है। इन सीनेटर का इस योजना के खिलाफ विरोध अन्य अमेरिकी कानून निर्माताओं की आलोचना के बाद सामने आया है, जिनमें कुछ रिपब्लिकन सीनेटर भी शामिल हैं। हालांकि इनमें से कोई भी इसे रोकने की शक्ति नहीं रखता। ये सीनेटर कनाडा में एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन में बोल रहे थे। इन सीनेटर में एक डेमोक्रेटिक, एक निर्दलीय और एक रिपब्लिकन शामिल थे। मेन के निर्दलीय सीनेटर एंगस किंग ने कनाडा में हैलीफ़ैक्स इंटरनेशनल सिक्योरिटी फोरम में एक पैनल चर्चा के दौरान कहा, ‘‘यह एक तरह से आक्रामकता को पुरस्कृत करने जैसा है। यह बिल्कुल साफ है। रूस द्वारा पूर्वी यूक्रेन पर दावा करने का कोई नैतिक, कानूनी, या राजनीतिक आधार नहीं है।'' सीनेट विदेश संबंध समिति सदस्य किंग ने इस प्रस्ताव की तुलना 1938 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री नेविल चेम्बरलेन के एडॉल्फ हिटलर के साथ हुए म्यूनिख समझौते से की, जो तुष्टीकरण का एक ऐतिहासिक असफल कार्य। किंग और डेमोक्रेटिक सेनेटर जीन शाहीन ने बाद में कहा कि उन्होंने और फोरम में उनके साथी सेनेटर ने रुबियो से बात की।  किंग ने कहा कि रुबियो ने उन्हें बताया कि यह योजना ‘‘प्रशासन की नहीं थी'' बल्कि ‘‘रूस की इच्छा सूची'' थी। शाहीन ने कहा कि रुबियो यूरोपी देशों और यूक्रेन के नेताओं से बातचीत के लिए जिनेवा जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि रुबियो ने उनसे और साउथ डकोटा से रिपब्लिकन सेनेटर माइक राउंड्स से बात की। शाहीन ने कहा, ‘‘यह एक रूसी प्रस्ताव है। इस योजना में कुछ ऐसा है जो पूरी तरह से अस्वीकार्य है।'' राउंड्स ने भी कहा, "यह हमारा शांति प्रस्ताव नहीं है। ऐसा लगता है जैसे इसे रूसी में लिखा गया हो।"