samacharsecretary.com

गीता में बताई कृष्ण की परवरिश की सीख: ये 5 जीवन-मंत्र बनाएंगे बच्चे को सफल

पेरेंट्स के लिए बच्चों की परवरिश उनकी लाइफ की सबसे अहम जिम्मेदारियों से एक है। हर पेरेंट्स की चाहत होती है कि उनका बच्चा अच्छा इंसान बने, सच्चाई और अच्छाई के रास्ते पर चले। लेकिन बच्चों को कुछ सिखाने के लिए उन्हें सिर्फ शब्दों में बोल देना ही जरूरी नहीं है, बल्कि आपकी तरफ से एक्शन भी जरूरी है। आसान शब्दों में कहें तो बच्चा अक्सर वही करता है, जो आपको करते हुए देखता है। आपका हर कदम, बच्चों के जीवन पर गहरा असर डालता है। भगवद गीता, जो जीवन का अद्भुत मार्गदर्शन देती है, माता-पिता को भी ऐसे अनमोल विचार देती है, जिनसे वे अपने बच्चों के चरित्र और सोच को पॉजिटिव दिशा दे सकते हैं। आइए, गीता के माध्यम से पॉजिटिव पैरेंटिंग के बारे में जाने। रोल मॉडल बनें, तभी बच्चा सीखेगा गीता के एक श्लोक में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि सच्चा ज्ञान उन्हीं से मिलता है, जिन्होंने जीवन के उद्देश्य को समझा है। पेरेंटिंग के नजरिए से इस श्लोक का अर्थ समझें तो बच्चों के जीवन में एक अच्छा आदर्श होना बेहद जरूरी है। माता-पिता खुद ईमानदारी, दया और विनम्रता अपनाएं, ताकि बच्चे भी इन गुणों को सीखें। जब आप सही उदाहरण पेश करेंगे, तो बच्चा बिना कहे ही उसी रास्ते पर चलने लगेगा। स्वभाव के अनुसार काम करने की शिक्षा 'कर्मणैव हि संसिद्धिमास्थिता जनकादयः लोकसंग्रहमेवापि संपश्यन्कर्तुमर्हसि।' इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं कि हर व्यक्ति अपने स्वभाव के अनुसार ही काम करता है और उसे दबाना बेकार है। बच्चों को भी उनके स्वाभाविक गुणों के साथ ही आगे बढ़ने देना चाहिए। माता-पिता का काम है कि वे बच्चे को हर परिस्थिति में ईमानदारी और सच्चाई से काम करना सिखाएं। जब बच्चा अपने गुणों को सही दिशा में इस्तेमाल करना सीखता है, तो उसका आत्मविश्वास भी बढ़ता है। सही मार्गदर्शन का महत्व गीता के एक श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं कि आत्मज्ञान की प्राप्ति सिर्फ अपने प्रयासों से नहीं, बल्कि एक अच्छे गुरु के मार्गदर्शन से होती है। ऐसे में बच्चों के लिए भी यह जरूरी है कि उनके जीवन में ऐसा गाइड हों जो उन्हें सही रास्ता दिखा सकें। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को धार्मिक और नैतिक सिद्धांतों का महत्व समझाएं, ताकि वे अपने जीवन में सही फैसला ले सकें। मन को दोस्त बनाना सिखाएं 'उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत्। आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः॥' भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि मन इंसान का सबसे अच्छा दोस्त भी हो सकता है और सबसे खतरनाक दुश्मन भी। बच्चों को यह सिखाना जरूरी है कि वे अपने विचारों और आदतों को अच्छा बनाएं। माता-पिता का व्यवहार इसमें अहम भूमिका निभाता है, क्योंकि बच्चा उन्हें देखकर ही सीखता है। अगर माता-पिता ईमानदार और संयमित हैं, तो बच्चा भी वैसे ही बनेगा। मानवीय मूल्यों का विकास करें भगवान कृष्ण ने निर्भयता, दया, क्षमा, सच्चाई, संयम और शांति जैसे गुणों को दिव्य संपत्ति बताया है। माता-पिता को चाहिए कि वे इन गुणों को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। जब बच्चा अपने घर में इन गुणों को रोज देखता है, तो वे उसकी सोच और स्वभाव में गहराई से बस जाते हैं, जिससे उसका चरित्र भी मजबूत बनता है।  

राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में बढ़े वित्तीय अनियमितताओं के आरोप, जांच की मांग तेज

भोपाल  राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) में पिछले पाँच वर्षों के वित्तीय लेन-देन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर विश्वविद्यालय की वर्ष 2019–20 से 2023–24 तक की ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करने और अनियमितताओं की CBI जांच की मांग की गई है। ज्ञापन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) द्वारा सौंपा गया है। ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक न होने से पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं और वित्तीय लेन-देन में बड़े पैमाने पर आरोप सामने आए हैं। उठाए गए प्रमुख मुद्दे – छात्रों से जुड़े कोष के दुरुपयोग की आशंका। – बिना अधिकृत आदेश के भारी वित्तीय लेन-देन। – कई बैंक खातों और एफडी के रिकॉर्ड में गंभीर विसंगतियाँ। – एफडी समय से पहले तुड़वाने और राशि के स्थानांतरण का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं। – बैंक द्वारा पेनल्टी काटे जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं। – 100 करोड़ रुपए से अधिक के कॉरपस फंड के उपलब्ध न होने का आरोप। – वित्तीय लेन-देन पर इंटरनल कंट्रोल और SOP जैसी व्यवस्था प्रभावी नहीं रही। मुख्य मांगें 1. पांच वर्षों की ऑडिट रिपोर्ट तुरंत सार्वजनिक की जाए। 2. सभी आर्थिक अनियमितताओं की CBI से विस्तृत जांच कराई जाए। 3. विश्वविद्यालय में धारा 54 लागू कर प्रशासनिक प्रबंधन राज्य शासन के अधीन किया जाए। 4. संचालन सुचारू रखने के लिए विश्वविद्यालय को तीन क्षेत्रों में विभाजित करने का सुझाव भी दिया गया है।  

इंदौर की मशहूर सराफा बाजार में बदलाव, चौपाटी का आकार घटा

इंदौर  इंदौर सराफा बाजार में लगने वाली रात्रिकालीन चाट-चौपाटी पर नगर निगम ने अंकुश लगाना शुरू कर दिया। मंगलवार शाम मुनादी की गई। इसके बाद बुधवार से कार्रवाई शुरू कर दी गई। नगर निगम ने जो ऐलान किया, उससे 80 दुकानें लगती दिख रही हैं। हालांकि सराफा व्यापारी इससे असहमत और असंतुष्ट नजर आ रहे हैं। सराफा कारोबारियों के अनुसार दुकानों की यह संख्या बाले-बाले कैसे तय कर ली गई। जबकि महापौर की अध्यक्षता में कमेटी बनी थी जिसे इस पर निर्णय लेना था। हालांकि न बैठक हुई न चर्चा, बस सीधे मुनादी करवा दी गई। इधर बुधवार को जब दुकानें हटाने के लिए निगम का अमला पहुंचा तो चौपाटी वाले दुकानदार एकजुट हो गए और सराफा थाने पहुंचे।  हुई इंदौर नगर निगम की मुनादी में चौपाटी पर दुकानें लगाने वालों से कहा गया कि कोई भी सराफा बाजार में रात साढ़े नौ बजे से पहले दुकान नहीं लगाएगा। साथ ही कहा गया कि जो चाट चौपाटी एसोसिएशन का अधिकृत सदस्य है, सिर्फ उसी की दुकान लग सकेगी। दरअसल चाट चौपाटी एसोसिएशन ने अपने 80 सदस्यों की सूची निगम को काफी पहले सौंपी थी। सराफा व्यापारी इसी पर सवाल उठा रहे हैं कि महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा था कि चौपाटी का परंपरागत रूप कायम रखते हुए पुरातन दुकानों को रखा जाएगा। वे दुकानें गिनती की थीं तो 80 दुकानों की संख्या कैसे तय कर ली गई। बिना बैठक कैसे हुआ निर्णय महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने नवरात्र में सराफा चौपाटी को नया स्वरूप देने की घोषणा की थी। इसके लिए कमेटी का दौरा, विमर्श होना था और उन दुकानों की संख्या तय होनी थी, जो पुराने समय से चौपाटी पर व्यंजन परोसती रही हैं। हालांकि महीनों बीतने के बाद भी कोई बैठक नहीं हुई। इंदौर सोना-चांदी जवाहरात व्यापारी एसोसिएशन के अनुसार दो दिन पहले बैठक के लिए संदेश मिला था। बैठक में पहुंचने से पहले दूसरा संदेश आया कि बैठक निरस्त हो गई है। इसके बाद निगम ने खुद ही कैसे तय कर लिया कि 80 दुकानों को लगने दिया जाएगा। एसोसिएशन के अनुसार असल में तो पुराने दौर में खाने-पीने की बमुश्किल 40-50 दुकानें ही सराफा में लगती थीं। संख्या कैसे तय हुई हमें भी नहीं पता     मुनादी में कहा गया कि सदस्यों को दुकान लगाने दी जाएगी। इस लिहाज से 80 दुकानें लगने दी जा रही हैं। यह संख्या कैसे तय हुई हमें भी जानकारी नहीं है। कमेटी की कोई बैठक नहीं हुई। हम निगम की ओर से आधिकारिक आदेश का इंतजार कर रहे हैं। -हुकम सोनी, अध्यक्ष चांदी-सोना जवाहरात व्यापारी एसोसिएशन  

रसोई के नियमों को न करें नजरअंदाज, वरना भुगतने पड़ सकते हैं गंभीर परिणाम

घर का किचन केवल खाना पकाने की जगह नहीं है, बल्कि यह घर की ऊर्जा, समृद्धि और परिवार के स्वास्थ्य का मुख्य केंद्र माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार किचन में की गई कुछ गलतियां अशुभ फल देती हैं। जिससे आर्थिक नुकसान, बीमारी और घर की खुशियों में कमी आ सकती है। आइए जानते हैं वे किचन वास्तु नियम जिन्हें कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। किचन में टूटे बर्तन रखना बन सकता है दरिद्रता का कारण वास्तु शास्त्र के अनुसार टूटे या चटक गए बर्तन किचन में नहीं रखने चाहिए। ये नकारात्मक ऊर्जा का स्रोत होते हैं। इससे घर में समृद्धि रुक जाती है। अचानक आने वाली आर्थिक परेशानियां बढ़ती हैं। पारिवारिक कलह की संभावना भी बढ़ती है। वास्तु उपाय: टूटे बर्तनों को तुरंत बाहर कर दें, चाहे उनका भावनात्मक या आर्थिक मूल्य कुछ भी हो। रसोई में दवाइयां रखना बेहद अशुभ कई घरों में सुविधा के लिए दवाइयां किचन में रख दी जाती हैं लेकिन वास्तु शास्त्र में इसे बड़ा दोष माना गया है। इससे परिवार के लोग बार-बार बीमार पड़ सकते हैं। लंबे समय तक चलने वाली स्वास्थ्य समस्याएं बनी रहती हैं। आर्थिक खर्च और टेंशन बढ़ती है। वास्तु उपाय: दवाइयां हमेशा बेडरूम, स्टडी या अलमारी में रखें लेकिन किचन में कभी नहीं रखें। जूठे बर्तन रात भर किचन में न छोड़ें वास्तु शास्त्र बताता है कि जूठे बर्तन किचन में छोड़ देना घर में दरिद्रता और नकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करता है। माता लक्ष्मी इससे कुपित होती हैं। घर का वातावरण भारी और अशांत होता है। पैसे की तंगी और भाग्य का साथ न मिलना जैसी परेशानियां बढ़ती हैं। वास्तु उपाय: कोशिश करें कि सोने से पहले सिंक पूरी तरह साफ हो। किचन में कूड़ेदान और झाड़ू रखना भारी भूल कई बार जगह की कमी के कारण लोग किचन में कूड़ेदान या झाड़ू रख देते हैं लेकिन वास्तु में यह अत्यंत अशुभ माना जाता है। इससे कर्ज बढ़ने की संभावना होती है। परिवार पर लगातार आर्थिक दबाव रहता है। स्वास्थ्य और मानसिक शांति दोनों प्रभावित होती हैं। वास्तु उपाय: कूड़ेदान को किचन से बाहर रखें। झाड़ू को ऐसी जगह रखें जहां वह नजर न आए, खासकर किचन में नहीं।

व्हाइट हाउस फायरिंग: रहमानुल्लाह लकनवाल का खतरनाक हमला, ट्रंप ने अमेरिका में अफगानों की एंट्री पर रोक लगाई

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास वाइट हाउस के सामने बुधवार को हुई गोलीबारी ने पूरे अमेरिका में सनसनी फैला दी है। शूटर ने वहां पर तैनात दो नेशनल गार्ड के सदस्यों को गंभीर रूप से घायल कर दिया। वाइट हाउस के मुताबिक दोनों सदस्यों को जानलेवा चोटें आई हैं, दोनों ही अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। वहीं,तैनात दूसरे नेशनल गार्ड्स की तरफ से की गई फायरिंग में आरोपी को भी गोली लगी है, हालांकि वह खतरे से बाहर है। उसे कस्टडी में रखा गया है। घटना के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने भी इस पर अपना गुस्सा निकालते हुए आरोपी को जानवर कहा। वॉशिंगटन डीसी में व्हाइट हाउस से कुछ ही दूरी पर बुधवार दोपहर नेशनल गार्ड के दो जवानों को गोली मार दी गई. यह हमला दोपहर फरागट मेट्रो स्टेशन के पास 17वीं और आई स्ट्रीट के कोने पर हुआ. दोनों जवानों की हालत गंभीर बनी हुई है. हमलावर भी मुठभेड़ में घायल हुआ और उसे भारी सुरक्षा के बीच स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है. रहमानुल्लाह लाकनवाल ने चलाई गोली कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अनुसार संदिग्ध की पहचान रहमानुल्लाह लाकनवाल के रूप में हुई है, जो 29 वर्षीय अफगान नागरिक है. वह साल 2021 में अमेरिका में दाखिल हुआ था. शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि उसने अकेले ही इस हमले को अंजाम दिया. हालांकि उसके पहचान संबंधी कुछ पहलुओं की अभी भी पुष्टि की जा रही है. दो नेशनल गार्ड्स सदस्यों के साथ वाइट हाउस के बाहर हुई इस घटना ने पूरे अमेरिका में रोष है। सीबीएस न्यूज के अनुसार शूटर की पहचान अफगान मूल के 29 बर्षीय रहमानुल्लाह लकनवाल के रूप में हुई है। आरोपी 2021 में बाइडन प्रशासन की नीति के तहत अमेरिका आया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए एफबीआई इस मामले की जांच आतंकी हमले के रूप में कर रही है। सोशल मीडिया पर एक तस्वीर की वायरल हो रही है, जिसे कथित तौर पर वाइट हाउस शूटिंग के आरोपी की बताई जा रही है। 'ऑपरेशन एलाइज वेलकम' के तहत ली अमेरिका में एंट्री इस मामले को अब FBI संभावित आतंकी हमले के रूप में जांच रही है. वहीं Department of Homeland Security का कहना है कि संदिग्ध 2021 में अफगानिस्तान से अमेरिका आया था और उसने 'ऑपरेशन एलाइज वेलकम' के तहत एंट्री ली थी, जिसके जरिए अफगान नागरिकों को शरण दी गई थी. ट्रंप ने बताया 'आतंकी हमला' घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे 'आतंकी हमला' करार दिया है. उन्होंने वॉशिंगटन डीसी की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त 500 सैनिकों को तैनात करने का निर्देश दिया है. साथ ही ट्रंप ने कहा है कि 2021 में अफगानिस्तान से जिन लोगों को अमेरिका में प्रवेश दिया गया था, उनकी दोबारा गहन जांच की जानी चाहिए. White House ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर नेशनल गार्ड और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के प्रति समर्थन जताया और घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की है. फिलहाल हमले के पीछे की साजिश, मकसद और आतंकी संबंधों की जांच जारी है. 'अफगानिस्तान धरती पर बना एक नरक' देर रात दिए गए अपने संबोधन में डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पूर्ववर्ती जो बाइडेन पर जमकर हमला बोला. ट्रंप ने दावा किया कि संदिग्ध को सितंबर 2021 में बाइडेन सरकार 'नरक जैसे अफगानिस्तान' से अमेरिका लेकर आई थी. ट्रंप ने कहा, 'डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी को पूरा भरोसा है कि हिरासत में लिया गया संदिग्ध एक विदेशी नागरिक है, जो अफगानिस्तान से अमेरिका आया था. अफगानिस्तान धरती पर बना एक नरक है.' इससे पहले दिन में अपने ट्रुथ सोशल पोस्ट में ट्रंप ने संदिग्ध हमलावर को 'जानवर' बताया और कहा कि उसे इसकी 'बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी'. उन्होंने हमलावर को काबू में करने वाले नेशनल गार्ड के जवानों की सराहना भी की. राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि बाइडेन सरकार के कार्यकाल में अमेरिका में आए सभी अफगान नागरिकों की दोबारा जांच होनी चाहिए. उन्होंने शरणार्थियों को 'हमारे अस्तित्व के लिए जोखिम' बताया. 'अकेले और अचानक किया हमला' मेट्रोपॉलिटन पुलिस डिपार्टमेंट में कार्यकारी सहायक प्रमुख जेफरी कैरोल ने कहा कि यह हमला 'अचानक और पूरी तरह से जानबूझकर किया गया' प्रतीत होता है. उन्होंने कहा, 'ऐसा लगता है कि यह एक अकेला हमलावर था, जिसने अचानक हथियार उठाकर नेशनल गार्ड के जवानों पर घात लगाकर हमला किया.' कैरोल ने बताया कि हमलावर ने पहले गोली चलाई, जिसके बाद पुलिस और गार्ड के जवान हरकत में आए. हमलावर को नेशनल गार्ड, मेट्रोपॉलिटन पुलिस डिपार्टमेंट, सीक्रेट सर्विस और मेट्रो ट्रांजिट पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में जल्दी ही हिरासत में ले लिया गया. इन एजेंसियों के कई जवान घटना के समय पहले से ही मौके के आसपास मौजूद थे, जब गोलियों की आवाज सुनाई दी. अफगान नागरिकों से जुड़े सभी इमिग्रेशन आवेदन सस्पेंड U.S. Citizenship and Immigration Services (USCIS) ने घोषणा की है कि वॉशिंगटन डीसी में नेशनल गार्ड के जवानों पर अफगान नागरिक की ओर से किए गए हमले के बाद, अफगान नागरिकों से जुड़े सभी इमिग्रेशन आवेदनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जा रहा है. यह फैसला वॉशिंगटन डीसी में हुई आज की घटना के बाद लिया गया है. क्या था मकसद? राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास के सामने हुई इस गोलीबारी को लेकर डीसी के मेयर म्यूरिल बाउजर ने जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने बताया कि आरोपी ने यह टार्गेटेड अटैक किया था। घटनास्थल पर मौजूद अधिकारियों के मुताबिक आरोपी वहां ऐसे ही टहलते हुए आकर एक मोड़ पर रुका और उसने हैंडगन निकालर फायरिंग करनी शुरू कर दी। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फायरिंग का शिकार दोनों नेशनल गार्ड्स सदस्यों के सिर में गोली लगी है, जिससे उनकी हालत गंभीर है। इस गोलीबारी के बाद आसपास मौजूद अन्य सदस्यों ने तुरंत ही वहां आकर हालात को काबू में किया। एफबीआई प्रमुख काश पटेल ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर जानकारी ली। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि आरोपी को हिरासत में लिया गया है। मामले की जांच जारी है। उसका क्या मकसद था इसके बारे में फिलहाल जांच के बाद ही पता चलेगा। अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों संग किया काम एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले की जानकारी रखने … Read more

खंडवा :युवती ने जहर खाकर ली जान, आरोपी अरबाज शाह धर्म परिवर्तन के प्रयास में था, ठिकानों पर बुलडोजर चला

खंडवा  हरसूद क्षेत्र में युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद शुरू हुए हंगामे और जनता के आक्रोश के बीच गुरुवार को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की। लव जिहाद के आरोपों में जेल भेजे गए आरोपी अरबाज शाह और उसके चाचा आशिक शाह के मकानों को राजस्व विभाग और हरसूद पुलिस ने जेसीबी से ध्वस्त कर दिया। फोटो और वीडियो के जरिए ब्लैकमेलिंग दरअसल जिले के हरसूद में लव जिहाद के आरोपी अरबाज के घर बुलडोजर की कार्रवाई हुई है। आरोपी अरबाज पर युवती के फोटो और वीडियो के जरिए ब्लैकमेलिंग कर रहा था। इतना ही नहीं धर्म परिवर्तन का भी दबाव बना रहा था। आरोपी जेल में बंद आरोपी अरबाज की प्रताड़ना से तंग आकर युवती ने जहर खा लिया था जिससे उसकी मौत हो गई थी। आरोपी अरबाज पर धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम सहित अन्य धाराओं में जेल में बंद है। कार्रवाई के दौरान हरसूद नगर परिषद और जिला प्रशासन के कई अधिकारी मौके पर मौजूद थे। युवती ने प्रताड़ना से तंग आकर खाया था जहर परिजनों के अनुसार, आरोपी अरबाज शाह लंबे समय से उनकी बेटी पर दोस्ती और शादी के लिए दबाव बना रहा था। परिवार का आरोप है कि अरबाज लगातार फोन और मैसेज के जरिए उसे परेशान करता था। युवती के बालिग होने के बाद यह दबाव और बढ़ गया था। परिवार ने बताया कि अरबाज की प्रताड़ना के कारण जिस युवक से युवती की शादी तय हुई थी, वह रिश्ता भी टूट गया। इससे वह मानसिक रूप से बेहद परेशान रहने लगी थी। 28 अक्टूबर 2025 को विवाद के दौरान आरोपी ने युवती के साथ मारपीट की। घर लौटने पर उसने तनाव में आकर जहर खा लिया। परिजन उसे स्थानीय अस्पताल ले गए, लेकिन 29 अक्टूबर को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मौत के बाद हरसूद में भड़का गुस्सा युवती की मौत की खबर फैलते ही हरसूद में तनावपूर्ण माहौल बन गया था। बड़ी संख्या में लोग हरसूद थाने के बाहर जमा हो गए और आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करने लगे थे। प्रदर्शनकारियों ने शव को सड़क पर रखकर चक्का जाम तक कर दिया था। भीड़ का कहना था कि आरोपी की गिरफ्तारी के बिना अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम और IPC की धाराओं में मामला दर्ज हरसूद थाना पुलिस ने आरोपी अरबाज शाह के खिलाफ मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 के तहत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया। इसके साथ ही आईपीसी की तीन अन्य धाराएं भी जोड़ी गईं। घटना के बाद आरोपी कुछ दिनों तक फरार रहा। पुलिस ने लगातार दबिश देते हुए उसे पकड़ा और जेल भेज दिया। परिवार के अन्य सदस्यों पर भी कार्रवाई की गई और सभी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। हिंदू संगठनों ने की थी बुलडोज़र कार्रवाई की मांग घटना के बाद कई हिंदू संगठनों ने एसपी खंडवा से मिलकर आरोपी के अवैध मकान पर बुलडोजर चलाने की मांग की थी। प्रशासन ने इस संबंध में मकान की वैधता की जांच शुरू की। तहसील कार्यालय की जांच में पाया गया कि अरबाज और उसके चाचा आशिक शाह के मकानों में निर्माण संबंधी कई अनियमितताएँ थीं। अवैध निर्माण पाए जाने पर ध्वस्तीकरण की तैयारी शुरू कर दी गई। इस दौरान मकान में मौजूद सामान पहले ही तहसीलदार की निगरानी में बाहर निकलवाकर तहसील कार्यालय में सुरक्षित रखवा दिया गया था, क्योंकि आरोपी का परिवार जमानत मिलने के बाद इस घर में रहना बंद कर चुका था। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में ढहाए गए दोनों मकान गुरुवार सुबह प्रशासनिक दल, पुलिस और राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरा देकर कार्रवाई शुरू कराई। जेसीबी मशीन से पहले आरोपी अरबाज का मकान ढहाया गया, इसके बाद उसके चाचा आशिक शाह के मकान पर भी कार्रवाई की गई। ध्वस्तीकरण के दौरान पुलिस अधिकारी, तहसीलदार और राजस्व निरीक्षक मौजूद रहे। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम न केवल अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के लिए है, बल्कि अपराधियों को संदेश देने के लिए भी जरूरी है। आरोपी ने बेटी की जिंदगी छीन ली मृत युवती के परिवार के अनुसार, आरोपी अरबाज ने लगातार धमकाकर और मानसिक प्रताड़ना देकर उनकी बेटी को टूटने पर मजबूर किया। परिजनों ने कहा कि हमने कई बार समझाया, पर वह पीछा नहीं छोड़ता था। शादी का रिश्ता टूटने के बाद वह और ज्यादा दबाव बनाने लगा। अंततः हमारी बेटी ने हार मान ली। न्याय की दिशा में मजबूत कदम हरसूद पुलिस का कहना है कि आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है। साथ ही अवैध निर्माण को ध्वस्त करने की यह प्रक्रिया कानूनन थी और सभी आवश्यक कागजी औपचारिकताएं पूरी की गईं। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई की गई है ताकि समाज में भय और अविश्वास का माहौल न बने।

खजुरी क्षेत्र में ट्रक पकड़ा गया, शराब प्लास्टिक दाना बताकर भेजी जा रही थी

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में अवैध शराब को लेकर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। डेढ़ करोड़ की अवैध शराब जब्त की है। 12 सौ पेटी अवैध शराब पकड़ी है। नए साल से पहले पुलिस भोपाल के खजुरी थाना क्षेत्र में रात साढ़े तीन बजे अवैध शराब से भरा ट्रक पकड़ा। ट्रक में बारह सौ पेटी शराब रखी थी। थाने के सामने लगाया स्टॉपर, भागने का प्रयास जानकारी के अनुसार, खजूरी थाना पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि एक बड़ा ट्रक अवैध रूप से शराब लेकर इंदौर की दिशा में जा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस ने थाने के सामने नाकाबंदी की। गुरुवार तड़के 3:00 से 4:00 बजे के बीच ट्रक को रोकने का प्रयास किया तो ड्राइवर ने पुलिस को चकमा देकर भागने की कोशिश की, लेकिन स्टॉपर लगाकर उसे पकड़ लिया गया। पूछताछ में ड्राइवर कोई वैध दस्तावेज दिखाने में असफल रहा। ड्राइवर का कहना है कि उसे भोपाल के बैरागढ़ क्षेत्र में माल भरवाया गया था और इंदौर में एक व्यक्ति माल रिसीव करने वाला था। कंटेनर में शराब को प्लास्टिक दाना दिखाकर भेजा जा रहा था। पुलिस ने प्रथमदृष्टया कागज भी फर्जी पाए हैं। ट्रक ड्राइवर ने पुलिस को चमका देकर भागने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने नाकाबंदी कर ट्रक को पकड़ लिया साथ ही ड्राइवर को हिरासत में ले लिया है। थाना प्रभारी के मुताबिक डेढ़ करोड़ की अवैध शराब भोपाल से गुजरात भेजी जा रही थी। ट्रक में प्लास्टिक दाना बताकर शराब भेजी जा रही थी। ट्रक ड्राइवर के पास जो दस्तावजे मिले वो फर्जी पाए गए। फिलहाल खजुरी पुलिस ने शराब जब्त कर आबकारी विभाग को सूचना दे दी है। आगे की कार्रवाई आबकारी विभाग करेगा। शराब के ये ब्रांड मिले     सिग्नेचर     ओल्ड मंक     बैक पाइपर     रॉयल स्टेज     रॉयल चैलेंज आगे की जांच आबकारी विभाग करेगा सब इंस्पेक्टर संतराम खन्ना के अनुसार, यह अब तक की साल 2025 की सबसे बड़ी कार्रवाई है। पूरी जब्ती कर ट्रक और ड्राइवर को थाने लाया गया है। शराब जब्ती की सूचना आबकारी विभाग को दे दी गई है, जो अब आगे की विधिक कार्रवाई करेगा।

गौतम गंभीर को मिली ‘राहत’! वर्ल्ड कप के चलते BCCI नरम दिखी

नई दिल्ली  दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में शर्मनाक प्रदर्शन के बाद टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर बैकफुट पर हैं। सोशल मीडिया पर उन्हें बर्खास्त करने की मांग हो रही है। सीरीज में भारत का सूपड़ा साफ होने के बाद बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि उनके भविष्य का फैसला बीसीसीआई को करना है। क्रिकेट महत्वपूर्ण हैं, वह नहीं। अब ऐसा लगता है कि बोर्ड से उन्हें अभयदान मिल चुका है। बीसीसीआई करारी हार की समीक्षा जरूर करेगा। चयनकर्ताओं और टीम को तलब किया जाएगा लेकिन अगले साल टी20 वर्ल्ड कप के मद्देनजर गौतम गंभीर पर फिलहाल गाज नहीं गिरेगी।   मीडिया ने बीसीसीआई के एक अधिकारी के हवाले से अपनी एक ऑनलाइन रिपोर्ट में बताया है कि बोर्ड आनन-फानन में गंभीर के भविष्य को लेकर कोई फैसला नहीं लेने वाला है। इसके बजाय बोर्ड आने वाले दिनों में चयनकर्ताओं और टीम मैनेजमेंट से बात करेगा। रिपोर्ट में बीसीसीआई अधिकारी को कोट करते हुए लिखा गया है, ‘बीसीसीआई जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेगा। टीम ट्रांजिशन फेज में है। जहां तक कोच गौतम गंभीर का सवाल है तो हम उन पर कोई फैसला नहीं लेंगे क्योंकि वर्ल्ड कप सिर पर है और उनका कॉन्ट्रैक्ट 2027 तक का है। बीसीसीआई सिलेक्टर्स और टीम मैनेजमेंट से बात करेगी लेकिन आनन-फानन में कोई कार्रवाई नहीं होगी।’ हेड कोच गौतम गंभीर के कार्यकाल में टेस्ट क्रिकेट में भारतीय टीम पतन की राह पर है। पिछले 12 महीने में ही उसे दो बार घर में ही सीरीज हार का सामना करना पड़ा है। दोनों ही सीरीज में टीम का सूपड़ा साफ हो गया। एक अदद जीत के लिए टीम तरस गई। दक्षिण अफ्रीका के हाथों भारत की 0-2 से सीरीज हार पिछले एक साल में टीम की तीसरी टेस्ट सीरीज हार है। इससे पहले न्यूजीलैंड ने भारत को भारतीय सरजमीं पर 3-0 से हराया था। उसके बाद ऑस्ट्रेलिया दौरे पर टीम इंडिया को 3-1 से हार का सामना करना पड़ा था। दक्षिण अफ्रीका के हाथों सीरीज गंवाने के बाद गौतम गंभीर ने अपने भविष्य को लेकर कहा था, 'यह बीसीसीआई के ऊपर है कि वह क्या फैसला लेता है। मैं जब हेड कोच बना था तब अपने पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी कह चुका हूं कि भारतीय क्रिकेट महत्वपूर्ण है, मैं नहीं। और मैं आज भी अपने उन शब्दों पर कायम हूं…।'  

बेंगलुरु से दिल्ली तक हलचल के बीच वोक्कालिगा मठ ने डीके शिवकुमार का खुला समर्थन किया

 बेंगलुरु कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता की लड़ाई जोर पकड़ चुकी है. डीके शिवकुमार बेंगलुरु से दिल्ली तक लॉबिंग में जुटे हैं, वहीं सीएम सिद्धारमैया भी अपनी कुर्सी बचाने के लिए एक्टिव मोड में हैं. सीएम सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार, दोनों ही नेताओं के समर्थकों में जुबानी जंग छिड़ी हुई है. इन सबके बीच इस सत्ता संघर्ष में अब वोक्कालिगा समुदाय के प्रमुख मठ आदिचुंचनगिरी मठ की भी एंट्री हो गई है. आदिचुंचनगिरी मठ के प्रमुख भी अब खुलकर शिवकुमार के पक्ष में उतर आए हैं. आदिचुंचनगिरी मठ के प्रमुख निर्मलानंद नाथ स्वामी ने कहा है कि डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए. उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व को सूबे की सत्ता के शीर्ष पद को लेकर जल्द फैसला लेने का अल्टीमेटम भी दिया. निर्मलानंद नाथ ने कहा कि टीवी पर लगातार राजनीतिक घटनाक्रम देख रहे हैं. उन्होंने कहा कि वोक्कालिगा मठ हमेशा सभी समुदायों का सम्मान और सहयोग करने वाला रहा है. निर्मलानंद नाथ  ने यह भी जोड़ा कि डीके शिवकुमार कई बार मठ आए, लेकिन कभी समर्थन नहीं मांगा या लॉबिंग नहीं की. उन्होंने आगे कहा कि हमने पहले भी डीके शिवकुमार को ही अपना मुख्यमंत्री चुना था, लेकिन बात नहीं बनी. कहा गया था कि दो साल बाद होगा, पर वह भी नहीं हुआ. वोक्कालिगा मठ के प्रमुख ने कहा कि वादा पूरा नहीं हुआ. इससे हमें दुख पहुंचा है. उन्होंने यह भी कहा कि जाति राज्य का कल्याण नहीं कर सकती, लेकिन डीके शिवकुमार योग्य हैं. शिवकुमार को मौका मिलना चाहिए. हालांकि, सीएम को लेकर फैसला कांग्रेस नेतृत्व करेगा. वोक्कालिगा मठ के प्रमुख ने डीके शिवकुमार को कांग्रेस का अनुशासित सिपाही बताते हुए कहा कि तमाम संकटों के बावजूद शिवकुमार ने पार्टी नहीं छोड़ी.  उन्होंने कहा कि डीके शिवकुमार को आधे कार्यकाल का मौका मिलना ही चाहिए. डीके शिवकुमार पर भगवान की कृपा है और कांग्रेस नेतृत्व को चाहिए कि उन्हें जल्द मुख्यमंत्री बना दे. गौरतलब है कि डीके शिवकुमार समर्थक कई नेता पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में हैं. अब चर्चा है कि डीके खुद भी सोनिया गांधी से मिलने 29 नवंबर को दिल्ली जा सकते हैं.

केंद्र सरकार का आदेश: नीलामी से आवंटित खनिज क्षेत्रों का संचालन जल्द शुरू होगा

नीलामी से आवंटित खनिज क्षेत्रों के शीघ्र संचालन हेतु केंद्र सरकार ने दिए महत्वपूर्ण निर्देश; अब सफल बोलीदाता जिला कलेक्टर से सीधे माँग सकेंगे सतही अधिकार  रायपुर  खनन मंत्रालय, भारत सरकार ने खनिज एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 20A के तहत एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है, जिसके माध्यम से राज्यों को सतही अधिकार मुआवज़ा निर्धारण और भूमि उपलब्धता की प्रक्रिया को समयबद्ध करने के निर्देश दिए गए हैं। यह आदेश निजी भूमि खरीद में होने वाली देरी, बिचौलियों की भूमिका और भूमि मूल्य वृद्धि जैसी समस्याओं को समाप्त कर खनिज ब्लॉकों के शीघ्र संचालन का मार्ग प्रशस्त करेगा। मुख्य प्रावधान: जिला कलेक्टर के माध्यम से सीधे सतही अधिकार प्राप्त करने की सुविधा इस आदेश का सबसे बड़ा सुधार यह है कि अब नीलामी में सफल बोलीदाता सीधे जिला कलेक्टर के पास सतही अधिकार के लिए आवेदन कर सकेंगे। पहले कंपनियों को भूमि मालिकों से सीधे भूमि खरीदनी पड़ती थी, जिससे: * लंबी देरी, * दलालों/मध्यस्थों की दखलअंदाजी, * भूमि मूल्य का अनावश्यक बढ़ना, और * परियोजना समय-सीमा में बाधा जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती थीं। अब सतही अधिकार जिला प्रशासन/राजस्व विभाग के माध्यम से दिए जाएँगे, जिससे: प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध होगी, दलालों की भूमिका समाप्त होगी परियोजना शीघ्र शुरू होगी, वास्तविक भूमि मालिक को पूरा और उचित लाभ मिलेगा । राज्यों के लिए अनिवार्य समय-सीमाएँ आदेश के अनुसार:     1.    राज्य 30 दिनों के भीतर मुआवज़ा निर्धारण हेतु अधिकारी नियुक्त करें (नियम 52, MCR-2016)।     2.    नियुक्ति न होने पर जिला कलेक्टर/DM/DC स्वतः अधिकृत अधिकारी माने जाएँगे।     3.    वार्षिक सतही मुआवज़ा प्रत्येक वर्ष 30 जून तक अनिवार्य रूप से देय होगा।     4.    वर्ष के मध्य में खनन शुरू होने पर प्रो-राटा मुआवज़ा अग्रिम रूप से देना होगा।     5.    प्राप्त आवेदन पर मुआवज़ा निर्धारण का निर्णय 90 दिनों में अनिवार्य है।     6.    धारा 24A के अनुसार खनन क्षेत्र में निर्बाध प्रवेश सुनिश्चित किया जाए। सुधार का उद्देश्य सैकड़ों खनिज ब्लॉक नीलाम होने के बावजूद, सतही अधिकार प्राप्त करने में देरी के कारण बहुत कम ब्लॉक चालू हो पाए हैं। यह आदेश: * खनन परियोजनाओं की गति बढ़ाएगा, * उत्पादन में वृद्धि करेगा, * स्थानीय रोजगार सृजित करेगा, और * राज्यों की राजस्व प्राप्ति (प्रीमियम, रॉयल्टी, DMF आदि) बढ़ाएगा। उद्योग जगत, विशेष रूप से नेशनल एम्प्लॉयर्स फेडरेशन (NEF) ने इस कदम का स्वागत किया है और इसे “गेम-चेंजर” बताया है, जो भूमि संबंधी अड़चनों को दूर करके वास्तविक किसानों और भूमि मालिकों को लाभ देगा।