samacharsecretary.com

बिहार विधानसभा सत्र 1 दिसंबर से; सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद, राज्यपाल के संबोधन की तारीख भी तय

पटना विधानमंडल के एक दिसंबर से प्रारंभ हो रहे सत्र की तैयारी की समीक्षा में सुरक्षा, ट्रैफिक व्यवस्था, चिकित्सा, सफाई, पार्किंग की व्यवस्था चाक चौबंद रखने का निर्देश दिया गया। शुक्रवार को हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने की। इसमें संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी भी शामिल थे। सभापति ने बताया कि अठारहवीं विधानसभा की यह पहली बैठक होगी। एक दिसंबर को नव निर्वाचित विधायक शपथ ग्रहण करेंगे। दो को नए विधानसभा अध्यक्ष का निर्वाचन होगा। तीन दिसंबर को राज्‍यपाल का संबोधन तीन दिसंबर को सेंट्रल हाल में बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खां संबोधित करेंगे। चार को राज्यपाल के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर वाद–विवाद एवं सरकार का उत्तर होगा। पांच दिसंबर को द्वितीय अनुपूरक व्यय विवरणी पर वाद–विवाद होगा। इससे संबंधी विनियोग विधेयक पेश किया जायेगा। संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि सरकार विधानमंडल के प्रति अपनी जिम्मेवारी के निर्वहन के प्रति मुस्तैद है । सदस्‍यों को न हो कोई कठ‍िनाई यह अठारहवीं विधान सभा का यह पहला सत्र है, इसलिए सत्र के दौरान सभी नवनिर्वाचित सदस्यों को किसी भीप्रकार की कठिनाई न हो, इसका अधिकारी विशेष रूप से ध्यान रखें। बैठक में गृह सचिव प्रणव कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक डा. कमल किशोर सिंह, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक वैभव श्रीवास्तव, भवन निर्माण के संयुक्त सचिव शिव रंजन पटना के जिलाधिकारी डा. त्यागराजन एस एम , वरीय पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के शर्मा, नगर आयुक्त यशपाल मीणा, विधानसभा की प्रभारी सचिव ख्याति सिंह, एवं विधान परिषद के सचिव अखिलेश कुमार झा उपस्थित थे। इधर विधानमंंडल सत्र को लेकर निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। पटना के सदर एसडीओ ने इसका आदेश जारी किया है। इसके तहत 1 से पांच दिसंबर तक विधानसभा के आसपास निषेधाज्ञा प्रभावी रहेगी।   

राजस्थान बनेगा उद्योग हब: सीएम शर्मा ने दिया बड़े बदलावों का संकेत

जयपुर /नई दिल्ली नई दिल्ली के भारत मंडपम में फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एवं इंडस्ट्री (एफआईसीसीआई) के 98वें वार्षिक सम्मेलन का उद्घाटन समारोह हुआ। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे फिक्की के कार्यक्रम में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, निवेशकों और उद्यमियों को संबोधित करते हुए कहा कि राजस्थान अब पूरी तरह व्यापार और उद्योग विस्तार के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप तेज गति से काम कर रही है और नए भारत की औद्योगिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी से पहले भारत के उद्योगपति जिस तरह देश को आगे बढ़ाने की कल्पना करते थे, राजस्थान उसी विरासत को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने उद्योग जगत को स्पष्ट संदेश दिया, "राजस्थान तैयार है… व्यापार के लिए भी और मजबूत साझेदारी के लिए भी।" उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक में भारत ने ऐतिहासिक परिवर्तन देखे हैं, और इसी प्रगति की राह पर राजस्थान भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। सीएम ने बताया कि दिसंबर में उनकी सरकार बनने के बाद से ही राज्य की प्राथमिकता उद्योग, बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र में सुधार रही है। उन्होंने कहा, “हमने सबसे पहले उन बाधाओं को दूर किया जिनसे उद्योग प्रभावित हो रहे थे। आज राज्य में निवेश के लिए स्थिर और पारदर्शी माहौल तैयार किया जा चुका है।” भजनलाल शर्मा ने ऊर्जा क्षेत्र का जिक्र करते हुए बताया कि राजस्थान अब सोलर पावर उत्पादन का राष्ट्रीय केंद्र बन रहा है। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में हम अग्रणी हैं और देश की ऊर्जा सुरक्षा में योगदान कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि ऑटोमोबाइल सेक्टर, विनिर्माण तथा एमएसएमई उद्योगों को मजबूत करने के लिए भी राज्य सरकार लगातार नीतिगत सुधार कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान में सामाजिक बुनियादी ढांचे पर भी तेजी से काम हो रहा है। राज्य में 100 करोड़ रुपए के सामाजिक विकास फंड की शुरुआत की गई है, जिसमें 25 प्रतिशत राशि सीधे जमीनी स्तर के विकास कार्यों में लगाई जा रही है। उन्होंने कहा कि राजस्थान की पहचान उसकी समृद्ध विरासत, संस्कृति और मेहनती जनता से है। यह राज्य अपने सामर्थ्य से देश की आर्थिक वृद्धि में बड़ा योगदान देगा। हमारी सरकार सुशासन, विकास और सामाजिक उत्थान को एक साथ लेकर चल रही है। अंत में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने उद्योग जगत के सहयोग के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि राजस्थान आने वाले वर्षों में उद्योग और निवेश के लिए भारत का प्रमुख गंतव्य बनेगा।

ये सिर्फ कागज़ नहीं!– गवर्नर के फैसले पर कोर्ट की कड़ी टिप्पणी, क्यों सुनाई खरी-खरी?

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केरल के गवर्नर की इस बात के लिए आलोचना की कि वह सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस सुधांशु धुलिया की रिपोर्ट पर कार्रवाई करने में देरी कर रहे हैं। कोर्ट ने पूछा कि राज्य में APJ अब्दुल कलाम टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ डिजिटल साइंसेज इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी के वाइस चांसलर की नियुक्ति में देरी क्यों की जा रही है, जबकि जस्टिस धूलिया ने इस पर अपनी रिपोर्ट बहुत पहले जमा कर दी थी। जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि केरल के राज्यपाल से जस्टिस धूलिया कमेटी की सिफारिशों पर जल्द ही फैसला लेने की उम्मीद है।   दरअसल, शीर्ष अदालत ने अगस्त में, राज्य सरकार और चांसलर (गवर्नर) के बीच चल रहे गतिरोध को देखते हुए कुलपति नियुक्ति के लिए नामों को शॉर्टलिस्ट करने के लिए जस्टिस धूलिया की अगुवाई में एक सर्च कमेटी बनाई थी। जस्टिस धूलिया ने अपनी रिपोर्ट पहले ही जमा कर दी है लेकिन उस पर अभी तक कार्रवाई नहीं हो सकी है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने चांसलर यानी गवर्नर को यह भी निर्देश दिया था कि वे मुख्यमंत्री की सलाह के अनुसार ही कुलपतियों की नियुक्ति करें। मामला क्या? कोर्ट का यह आदेश गवर्नर द्वारा टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के चांसलर के तौर पर दायर एक स्पेशल लीव पिटीशन पर आया था, जिसमें केरल हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें राज्य सरकार की सिफारिश के बिना यूनिवर्सिटी के टेम्पररी वाइस चांसलर की गवर्नर द्वारा नियुक्ति को रद्द कर दिया गया था। इसके बाद, केरल सरकार ने जस्टिस पारदीवाला की बेंच के सामने यह मामला उठाया। राज्य की ओर से सीनियर एडवोकेट जयदीप गुप्ता ने बेंच को बताया कि जस्टिस धूलिया आयोग ने रिपोर्ट सौंप दी है, बावजूद इसके कुलाधिपाति यानी चांसलर (गवर्नर) ने अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया है। क्या चांसलर ने जस्टिस धूलिया की रिपोर्ट देखी है? इस पर जस्टिस पारदीवाला ने पूछा, "क्या चांसलर ने माननीय जस्टिस धूलिया की रिपोर्ट देखी है?" जब गवर्नर के वकील ने 'नहीं' में जवाब दिया, तो जस्टिस पारदीवाला नाराज हो गए। उन्होंने पूछा, "उन्होंने अभी तक इसे क्यों नहीं देखा?" लाइव लॉ के मुताबिक, इसके बाद जस्टिस पारदीवाला ने चांसलर के वकील से कहा कि वे निर्देश लेने के बाद बताएं कि फैसला कब तक लिया जा सकता है। जब वकील ने आगे दलीलें देनी चाहीं, तो जस्टिस पारदीवाला ने उन्हें रोक दिया और कहा, "यह सिर्फ एक साधारण कागज का टुकड़ा नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जज ने इसकी जांच की है। इसलिए आपको रिपोर्ट देखनी है और समय पर सही फैसला लेना है।" जस्टिस पारदीवाला ने कहा, "हमें उम्मीद है कि आप जल्द फैसला लेंगे। जब फैसला हमारे सामने रखा जाएगा, तो हम तय करेंगे कि फैसला सही है या गलत।" इसके बाद उन्होंने मामले को अगले शुक्रवार के लिए टाल दिया।  

भूमि खरीददारों के लिए खुशखबरी! योगी सरकार ने शुरू की घर बैठे सुविधा

जलालपुर, अंबेडकर नगर जमीन खरीदने-बेचने से जुड़े लोगों के लिए बड़ी सुविधा प्रदान की है। सरकार ने दाखिल-खारिज (प्रॉपर्टी म्यूटेशन) की पूरी प्रक्रिया को अब ऑनलाइन कर दिया है। पहले यह काम राजस्व विभाग के दफ्तरों में जाकर ही होता था, जहाँ लंबी लाइनें, कई चक्कर और कागजी औपचारिकताओं के कारण आवेदकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। लेकिन अब यह पूरा सिस्टम डिजिटलाइजेशन होने से लोग घर बैठे ही जमीन को अपने नाम दर्ज करा सकेंगे। दाखिल-खारिज वह कानूनी प्रक्रिया है, जिसके तहत किसी व्यक्ति द्वारा खरीदी गई जमीन को सरकारी अभिलेखों में उसके नाम चढ़ाया जाता है। जमीन की खरीद के बाद नामांतरण बेहद जरूरी माना जाता है, क्योंकि इससे ही व्यक्ति को भूमि पर कानूनी स्वामित्व प्राप्त होता है और आगे किसी विवाद या खतौनी से संबंधित कार्य में सुविधा मिलती है। सरकार ने बताया कि ऑनलाइन दाखिल-खारिज सुविधा शुरू होने के बाद अब न तो किसी को तहसील के चक्कर लगाने होंगे और न ही किसी बिचौलिए पर निर्भर रहना पड़ेगा। आवेदक सरकारी पोर्टल पर जाकर म्यूटेशन के लिए आवेदन कर सकते हैं, दस्तावेज अपलोड कर सकते हैं और अपने आवेदन की स्थिति भी रियल टाइम में देख सकते हैं। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर भी रोक लगेगी। राजस्व विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ऑनलाइन सिस्टम को प्रभावी रूप से लागू किया गया है और आम जनता को इसके बारे में जागरूक किया जा रहा है। नई व्यवस्था से समय, धन और श्रम-तीनों की बचत होगी और लोगों को तेजी से सेवा उपलब्ध कराई जा सकेगी। ऑनलाइन दाखिल-खारिज लागू होने से भूमि संबंधी कार्यों में तेजी आएगी और ग्रामीण तथा शहरी दोनों क्षेत्रों में लोगों को बड़ी सुविधा का लाभ मिलेगा। इसके तहत 45 दिन में खारिश दाखिल हो जाएगा और यदि कोई विवाद है तो उसे 90 दिन में निस्तारित कर दिया जाएगा इस संबंध में तहसीलदार गरिमा भार्गव ने बताया कि ऑनलाइन आवेदन पत्रों को शीघ्रता से निस्तारण किया जा रहा है

ठंड से ठिठुरे पंजाब-चंडीगढ़: IMD की नई चेतावनी ने बढ़ाई चिंता

जालंधर/चंडीगढ़ पंजाब और चंडीगढ़ में शीत लहर देखने को मिल रही है। राज्य के अधिकांश जिलों में ठंडी हवाएं चल रही हैं, जिससे सुबह-शाम के समय लोग मोटे कपड़े पहनने को मजबूर हो गए हैं। पंजाब में इतनी ठंड का मुख्य कारण पहाड़ों में हो रही बर्फबारी है। इसी बीच जिला अमृतसर, गुरदासपुर, पठानकोट, होशियारपुर, फिरोजपुर और पटियाला में रात के समय बहुत ज्यादा ठंड महसूस की गई और ठंडी हवाओं का असर जारी रहा। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ दिसंबर के महीने से सक्रिय हो रहा है। पहाड़ों से आने वाली ठंडी हवाओं के कारण पंजाब और चंडीगढ़ में ठंड महसूस की जा रही है, जिससे बारिश की संभावना भी बन रही है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि नवंबर के अंत या दिसंबर की शुरुआत में बारिश हो सकती है। राज्य में रोज़ाना तापमान में 1-2 डिग्री की गिरावट जारी रह सकती है। यदि इस दौरान पहाड़ों में अच्छी बर्फबारी होती है, तो पंजाब का तापमान और भी कम हो सकता है। इन दिनों ठंड का मुख्य कारण पहाड़ों से मैदानों में चल रही हवाएं हैं, और इसके साथ बारिश की संभावना भी बनी रहेगी। 

उन्नीस दिसंबर को रिलीज़ होगा ‘रात अकेली है’ का सीक्वल

मुंबई,  नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी की फिल्म 'रात अकेली है: द बंसल मर्डर्स' 19 दिसंबर को रिलीज़ होगी। फिल्म के निर्माताओं ने गुरुवार को यह जानकारी दी। नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ होने वाली यह फिल्म 2020 में रिलीज़ हुई 'रात अकेली है' का सीक्वल है। रिलीज़ के ऐलान के साथ-साथ फिल्म का टीज़र भी इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर जारी हुआ। नेटफ्लिक्स ने फिल्म का टीज़र साझा करते हुए इंस्टाग्राम पर लिखा, "इंस्पेक्टर जटिल का रात के अंधेरे से पुराना रिश्ता है, लेकिन बंसल मर्डर्स का केस और भी गहरा है। देखिए 'रात अकेली है : द बंसल मर्डर्स' 19 दिसंबर से नेटफ्लिक्स पर।" कानपुर में आधारित इस फिल्म की कहानी एक ऐसा परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है जिनकी हत्या उन्हीं के बंगले में हुई। फिल्म की पटकथा स्मिता सिंह ने लिखी है जबकि इसका निर्देशन पहली फिल्म की तरह ही हनी त्रेहान ने किया है। फिल्म में नवाज़ुद्दीन के अलावा चित्रांगदा सिंह, रजत कपूर, दीप्ति नवल, इला अरुण, रेवती, अखिलेंद्र मिश्रा, प्रियंका सेतिया, संजय कपूर और राधिका आप्टे नज़र आएंगी। साल 2020 में रिलीज़ हुई फिल्म को अदाकारों के काम और कसी हुई पटकथा के लिए क्रिटिक्स की वाहवाही मिली थी।  

सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषद के कार्यों की समीक्षा

भारत सरकार के दल की मध्यप्रदेश के अधिकारियों से हुई चर्चा भोपाल  सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषद एमएसईएफसी के कार्यों की एमएसएमई मंत्रालय, भारत सरकार की निदेशक श्रीमती अंकिता पांडे एवं विधि विशेषज्ञ सुश्री ईशा अग्रवाल ने गत दिवस समीक्षा की। आयुक्त, एमएसएमई श्री दिलीप कुमार तथा परिषद के अशासकीय सदस्यों श्री राजेश मिश्रा अध्यक्ष, लघु उद्योग भारती, श्री महेश गुप्ता भूतपूर्व अध्यक्ष, लघु उद्योग भारती एवं शासकीय सदस्य सिडबी बैठक में मौजूद थे। बैठक के दौरान एमएसएमई ओडीआर पोर्टल पर दर्ज प्रकरणों के त्वरित निपटारे तथा लंबित मामलों को ओडीआर प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पर विस्तृत चर्चा की गई ताकि सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को समयबद्ध तथा पारदर्शी न्यायिक सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। मध्यप्रदेश एमएसईएफसी के सचिव श्री राजेश अग्रवाल, सहायक संचालक श्री शशिभूषण दुबे एवं सहायक प्रबंधक श्रीमती अनुश्री सक्सेना द्वारा ओडीआर पोर्टल में मध्यप्रदेश की प्रभावी सहभागिता के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी उन्होंने बताया कि वर्तमान में मध्यप्रदेश एमएसईएफसी द्वारा व्हाट्सऐप एवं ई-मेल के माध्यम से नोटिस जारी किए जा रहे हैं, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पक्षकारों को घर बैठे सुनवाई का अवसर प्रदान किया जा रहा है तथा परिषद द्वारा कोई कोर्ट फीस नहीं ली जाती। साथ ही आरआरसी के माध्यम से वसूली की प्रक्रिया से एमएसई इकाइयों को त्वरित राहत मिल रही है। प्रतिनिधिमंडल द्वारा मध्यप्रदेश एमएसईएफसी की सुनवाई बैठक का अवलोकन भी किया गया तथा ओडीआर पोर्टल पर राज्य की सक्रिय सहभागिता एवं प्रभावी कार्य प्रणाली की सराहना की गई। इस अवसर पर श्रीमती पांडे ने ओडीआर प्लेटफॉर्म को एमएसएमई विवाद निवारण के लिए एक सशक्त और उपयोगी डिजिटल पहल बताया। आयुक्त श्री दिलीप कुमार ने कहा कि मध्यप्रदेश एमएसईएफसी, एमएसएमई मंत्रालय के साथ निरंतर समन्वय बनाते हुए कार्य कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि मध्यप्रदेश इस डिजिटल पहल में अग्रणी राज्यों में शामिल है और भविष्य में भी ओडीआर प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए पूर्ण सहयोग प्रदान करता रहेगा।  

मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने गीता जयंती महोत्सव के कार्यक्रमों की जानकारी प्राप्त कर दिए निर्देश

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने आगामी 1 दिसंबर को गीता जयंती पर अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव पर राज्य में हो रहे कार्यक्रमों की तैयारी की जानकारी प्राप्त की और आवश्यक निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभ्युदय मध्य प्रदेश (गवर्नेंस एंड ग्रोथ समिट) निवेश से रोजगार (अटल संकल्प उज्जवल मध्य प्रदेश ) के अंतर्गत 25 दिसंबर को ग्वालियर में हो रहे कार्यक्रम के संबंध में भी अधिकारियों से चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गीता महोत्सव के संबंध में मुख्यमंत्री निवास समत्व भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंस द्वारा जिला कलेक्टर्स और पुलिस अधिकारियों से चर्चा की। बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित संबंधित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि 1 दिसंबर गीता जयंती पर गीता महोत्सव के अंतर्गत होने वाली गतिविधियों में जन सामान्य की अधिक से अधिक सहभागिता सुनिश्चित की जाए। श्रीमद्भागवत गीता के विभिन्न अध्यायों की संस्कृत और हिंदी में, स्कूल कॉलेज के साथ-साथ जन सामान्य को प्रतियां उपलब्ध करवाकर, गीता पर केंद्रित क्विज आदि प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएं। गीता ज्ञान के प्रसार से जन सामान्य की विचार प्रक्रिया और मानसिकता पर सकारात्मक प्रभाव होगा। उल्लेखनीय है कि श्रीमद्भगवतगीता ऑन लाइन ज्ञान प्रतियोगिता में प्रवृष्ठि 28 नवम्बर तक www.geetamahotsav.com पर होगी। जिसमें तीन श्रेणियों में भागीदारी की जा सकती है। सभी श्रेणियों के लिए पृथक -पृथक पुरस्कारों का प्रावधान भी किया गया है। यह पुरस्कार 26 जनवरी 2026 को दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर्स, को निर्देश दिए कि जिला स्तर पर अधिक से अधिक नागरिकों को विभिन्न प्रतियोगिताओं और गीता पाठ में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें। गीता पाठ के कार्यक्रमों में होगी व्यापक सहभागिता मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने गीता पाठ कार्यक्रम की तैयारियों की भी जानकारी प्राप्त की। उल्लेखनीय है कि 1 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती पर मध्यप्रदेश में सभी विकास खंडों, जिला मुख्यालयों, संभागीय मुख्यालयों पर श्रीमद्भगवद्गीता के 15 वें अध्याय का पाठ किया जा रहा है। जन सामान्य द्वारा युगावतार भगवान श्रीकृष्ण के मानव कल्याण के संदेश को आत्मसात किए जाने के उद्देश्य को इस गीता पाठ से सफल बनाया जा सकता है। वीर भारत न्यास द्वारा गीता पाठ के साथ-साथ गीता प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जा रहा है। जिसमें प्रदेश के विद्यार्थी बड़ी संख्या में हिस्सा ले रहे हैं।  

बच्चों के भविष्य को स्वर्णिम बनाने की महती जिम्मेदारी शिक्षा विभाग पर – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 के तहत शिक्षा विभाग की रणनीति पर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक अंजोर विजन के लघु, मध्यम और दीर्घकालीन लक्ष्यों पर व्यापक एवं गहन विमर्श मुख्यमंत्री ने कहा — लक्ष्य बड़े हैं, इसलिए कार्ययोजना ठोस हो और क्रियान्वयन पूरी ईमानदारी से हो रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 के तहत शिक्षा विभाग के लक्ष्यों की प्राप्ति को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में उन्होंने वर्ष 2030 तक के लघु अवधि, 2035 तक के मध्य अवधि तथा दीर्घकालीन लक्ष्यों पर विस्तृत चर्चा की और अधिकारियों को ठोस कार्ययोजना तैयार कर त्वरित एवं प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।  मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा विकसित भारत 2047 का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, और इसी क्रम में ‘अंजोर विजन’ के माध्यम से विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों की प्राप्ति का सबसे सशक्त आधार शिक्षा है, क्योंकि दक्ष, कुशल और स्मार्ट बच्चे ही भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश में शिक्षकों की संख्या राष्ट्रीय औसत से बेहतर है और सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। बैठक के दौरान स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से समस्त जानकारी मुख्यमंत्री के साथ साझा की। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यदि एक शिक्षक अपनी जिम्मेदारी को दृढ़ता से निभा ले, तो बच्चों के भविष्य को स्वर्णिम बनने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने शिक्षकों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने, प्रतिभाशाली शिक्षकों को नेतृत्व के अवसर प्रदान करने और बेहतर अकादमिक माहौल विकसित करने पर बल दिया। उन्होंने आंगनबाड़ी एवं बालवाड़ी के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करने तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ समन्वय को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए। बैठक में अंजोर विजन 2047 के अंतर्गत 1000 मॉडल स्कूलों की स्थापना, स्कूल कॉम्प्लेक्स प्रणाली, अंतर्राष्ट्रीय स्तर के स्कूलों की शुरुआत, एआई-आधारित मूल्यांकन प्रणाली, डिजिटल ऐप के माध्यम से व्यक्तिगत पाठ योजनाएं, शिक्षक प्रशिक्षण के उन्नयन तथा STEM शिक्षा के विस्तार जैसे प्रमुख लक्ष्यों की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने STEM शिक्षा को प्रोत्साहित करने हेतु साइंस सिटी की स्थापना, विज्ञान मेलों के आयोजन और एआई एवं रोबोटिक्स लैब प्रारंभ करने पर विशेष जोर दिया। बैठक में वर्ष 2035 तक ड्रॉपआउट दर को शून्य करने, राज्य स्तरीय ECCE समिति के गठन, शिक्षकों की भर्ती, मूल्यांकन केंद्रों को सुदृढ़ करने और आगामी तीन वर्षों के लक्ष्यों को निर्धारित कर शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित करने संबंधी विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की कार्यप्रणाली — परीक्षार्थियों के डेटा संकलन, प्रश्नपत्र निर्माण, परीक्षा संचालन एवं मूल्यांकन — की समीक्षा की तथा हायर सेकेंडरी स्तर पर अतिरिक्त विषयों के विकल्प, प्रतियोगी परीक्षाओं पर आधारित प्रश्न बैंक, त्रुटिरहित मूल्यांकन व्यवस्था और गोपनीय प्रश्नपत्रों के परिवहन हेतु ट्रैकिंग सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए। बैठक में एनईपी 2020 के तहत नामांकन दर में हुई उल्लेखनीय वृद्धि, बालवाड़ी को स्कूली शिक्षा से जोड़ने, मातृभाषा-आधारित शिक्षण, ‘जादुई पिटारा’ एवं संवाद कार्यक्रम, इको क्लब की गतिविधियाँ, पीएम ई-विद्या के अंतर्गत डिजिटल प्रसारण तथा व्यावसायिक शिक्षा के विस्तार जैसी उपलब्धियाँ भी प्रस्तुत की गईं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अंजोर विजन 2047 के लक्ष्य छत्तीसगढ़ की आने वाली पीढ़ी को सशक्त, आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। बैठक में स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव, मुख्य सचिव श्री विकास शील, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की अध्यक्ष श्रीमती रेणु पिल्लै, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी, महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव श्री रजत कुमार सहित स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

44वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में मध्यप्रदेश मण्डप को रजत पदक

श्री तिवारी ने प्राप्त किया पदक भोपाल  नई दिल्ली स्थित भारत मण्डपम में 14 से 27 नवम्बर तक आयोजित हुए 44वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में मध्यप्रदेश मध्यप्रदेश मण्डप को राज्यों की श्रेणी मे उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए रजत पदक से सम्मानित किया गया। गुरूवार की शाम को भारत मण्डपम में आयोजित एक समारोह में इण्डिया ट्रेड प्रमोशन आर्गनाइजेशन (ITPO) के डॉ. नीरज खैरवाल, प्रबन्ध निदेशक ने यह पुरस्कार मध्यप्रदेश मण्डप के संचालक श्री बी. एन. तिवारी, को प्रदान किया। इस अवसर पर श्री एन. के. नरें, संयुक्त संचालक, डा. राजू राठौर, सुश्री प्रियंका सोनी, श्री देवेन्द्र रघुवशीं, सुश्री कविता बारिया, सहायक संचालक उद्योग एवं श्री जगमोहन सिंह तथा श्री सी. के. प्रिन्स भी उपस्थित थें। इस वर्ष मेले की थीम एक भारत श्रेष्ठ भारत अनुरूप मध्यप्रदेश मण्डप को ग्वालियर किले के रूप में तैयार किया गया था तथा मण्डप के केन्द्र में 64 योगिनी मन्दिर को दर्शाया गया था। लुटियन्स ने जब भारतीय संसद भवन का डिजाइन तैयार किया था तब उन्होने भारत वर्ष की नामी गिरामी इमारतों के डिजायन बुलवाये थे, जिसमें से उन्होने मुरैना जिले के 64 योगिनी मन्दिर का चुनाव किया था। इसके आधार पर ही उन्होंने भारतीय संसद के भवन का निर्माण कराया था। इस स्थान पर सभी देशी विदेशी पर्यटक भ्रमण करने के लिए आते हैं। इससे एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना मजबूत होती है और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा मिलता है। मण्डप में मध्यप्रदेश की विश्व धरोहारों- खजुराहो, सांची स्तूप एवं भीमबेटका के साथ प्रस्तावित धरोहर स्थलों, विभिन्न सांस्कृतिक महोत्सवों, हस्तशिल्प, हाथकरघा, जी.आई. ओ.डी.ओ.पी. उत्पादों को भी सजाया गया। मण्डप में उत्पादों को होलोग्राफिक इमेज से भी प्रदर्शित गया है। इन उत्पादों की विकी भी हुई। प्रदेश शासन की विभिन्न नीतियों एवं उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया है। मण्डप में औधोगिक विकास के साथ साथ पर्यटन की भी पूर्ण जानकारी प्रदर्शित की गयी। मण्डप मे सिंहस्थ-2028 की तैयारी को भी स्थान दिया गया। इन्दौर के जी.आई. उत्पाद, चमड़े के खिलौने एवं टेराकोटा का संजीव प्रदर्शन किया गया है। स्टार्टअप ने भी अपने उत्पादों के प्रचार प्रसार के साथ विकय भी किया। मध्यप्रदेश मण्डप में निर्मित विरासत, सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय विरासत एवं वन्य जीवन को आकर्षक रूप से प्रदर्शित किया। मण्डप ने जहां एक ओर प्रदेश की गौरवशाली विरासत को प्रदर्शित किया वही दूसरी ओर सम्पूर्ण भारत को एक सूत्र में बाधने का संदेश भी दिया है। यही कारण है कि मेले में इस बार फिर मध्यप्रदेश मण्डप लोगों के लिए आर्कषण का केन्द्र बना। यहां अभ्युदय मध्यप्रदेश की झलक साफ देखी गई। मध्यप्रदेश देश का हृदय प्रदेश है। यहां कि एतिहासिक धरोहर, प्रचुर प्राकृतिक संसाधन, धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल, लोक परम्पराओं की समृद्धि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प "एक भारत श्रेष्ठ भारत" को न केवल पूरी कर रही है अपितु विश्व पर्यटन मानचित्र पर इसे अग्रणी स्थान दिला रही है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग, की ओर से म. प्र. लघु उद्योग निगम द्वारा विगत 43 वर्षों से इस मेले में नोडल एजेंसी के रूप में कार्य किया जा रहा है। इस मेले में विगत दो वर्षों से निरन्तर म. प्र. राज्य को विषयतगत प्रस्तुति के लिए स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ है। मेला अवधि के दौरान राज्य दिवस समारोह 21 नवम्बर 2025 को मनाया गया। इस समारोह में विशेष अतिथि के रूप में श्री चैतन्य कुमार काश्यप, मंत्री, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग सम्मलित हुए। उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा कि प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के सपने को साकार करते हुए मध्यप्रदेश के मुख्य मंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अग्रसर है। उन्होंने यह भी कहा था कि राज्य शासन ने 18 नीतियां बनाई जो निवेश मित्र हैं एवं निवेशकों को आकर्षित करती हैं। इस अवसर पर नीमच और मन्दसौर के सांसद श्री सुधीर गुप्ता भी अतिथि के रूप में सम्मलित हुए। म. प्र. मण्डप में 9 शासकीय विभागों / निगम मण्डलों 27 सुक्ष्म, लघु एवं मध्यम इकाईयों 7 स्व सहायता समूहों तथा 03 स्टार्ट-अप द्वारा भाग लिया गया। टेराकोटा एवं चमड़े के खिलौनों का सजीव प्रदर्शन भी मध्यप्रदेश मण्डप में किया गया। मध्यप्रदेश दिवस समारोह में बघेली लोक गायन, मटकी एवं पनिहारी लोक नृत्य प्रस्तुत किया गया।