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कुरुक्षेत्र विवाह समारोह में हड़कंप: CM मौजूद, फिर भी शगुन के लाखों रुपए चोरी

कुरुक्षेत्र  हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले में चोरों ने दूल्हे के शगुन पर हाथ साफ कर दिया। चोर गाड़ी की सीट के नीचे से शगुन से भरा बैग चुरा ले गए। कार्यक्रम में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी नवविवाहित जोड़े काे आशीर्वाद देने पहुंचे थे, उनके जाने के बाद चोरों से वारदात को अंजाम दिया। घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है, जिसमें चोर बैग लेकर आराम से रिसॉर्ट से बाहर जाते दिख रहे हैं।  बताया जा रहा है कि चोरों ने पहले रिसॉर्ट में चल रहे फंक्शन में खाना भी खाया। घटना 1 दिसंबर रात करीब सवा 11 बजे की है। पुलिस ने दूल्हे के पिता की शिकायत पर केस दर्ज किया है। रिसॉर्ट में 2 भाइयों की शादी की रिसेप्शन पार्टी थी। 2 बेटों की शादी का रिसेप्शन सेक्टर-7 के रहने वाले हरदीप सिंह ने बताया कि वे प्रॉपटी डीलर का काम करते हैं। उनके दो बेटे जसविंदर सिंह और सर्वजीत सिंह की शादी थी। शादी के बाद उन्होंने 1 दिसंबर की रात को विर्क रिसॉर्ट में रिसेप्शन पार्टी रखी थी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी उनके बेटे और पुत्रवधुओं को आशीर्वाद देने पहुंचे थे। कार की सीट से उड़ाया बैग मुख्यमंत्री के जाने के बाद वे अपनी रिश्तेदार की कार से मिठाई निकालने के लिए थे। यहां उन्होंने शगुन के पैसों से भरा बैग गाड़ी की सीट के नीचे रख दिया और गाड़ी की डिक्की से मिठाई निकालने में बिजी हो गए। इसी दौरान पार्टी में मेहमान बनकर आए चोर शगुन के पैसे से भरा बैग लेकर भाग गए। बैग में 8 से 10 लाख कैश होने की संभावना है। पार्टी में शगुन रखने की जिम्मेदारी रिश्तेदार को दी थी। रिश्तेदार के अलावा उनके पास भी कई लोगों ने शगुन दिया था। इसको भी उन्होंने बैग में डाल दिया था। फुटेज में चोर बैग चुराकर आराम से जाते दिख रहे हैं। शिकायत के आधार पर पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने घटनास्थल का जायजा भी लिया और सीसीटीवी फुटेज भी देखी। फिलहाल पुलिस चोरों की पहचान और उनकी तलाश में जुटी है।  

पहाड़ों पर बर्फबारी की दस्तक! हिमाचल में Orange Alert, पंजाब में ठंड बढ़ने के संकेत

पंजाब  शिमला मेट्रोलॉजिकल सेंटर ने हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में 4 और 5 दिसंबर को बर्फबारी और बारिश की चेतावनी जारी की है। सर्दी का सीज़न उत्तर भारत में पहले ही अपने पांव पसार चुका है, और अब एक नई पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के असर से हिमाचल के मध्य और ऊंचे इलाकों में हल्की बारिश और बर्फबारी होने की संभावना है। इसके अलावा, इस हफ्ते के बाकी दिन अधिकांश इलाकों में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के अनुसार यह नया सिस्टम फिलहाल उत्तर हरियाणा के ऊपर 1.5 से 3.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित है। ऐसे सिस्टम आमतौर पर आसपास के राज्यों में सर्दी बढ़ा देते हैं। पंजाब में आने वाले दिनों में इसका साफ असर देखने को मिल सकता है। हिमाचल में बर्फबारी के दौरान पंजाब के तापमान में आमतौर पर 2–5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज होती है। इसके साथ ही कोहरा और बढ़ी हुई नमी ठंड को और तीखा महसूस कराती है, भले ही मैदानों में बर्फबारी न हो। आईएमडी चंडीगढ़ ने पहले ही 30 नवंबर से 2 दिसंबर तक जालंधर, मोगा, फरीदकोट, फतेहगढ़ साहिब, बठिंडा, मुक्तसर और फाजिल्का जिलों के लिए कोल्ड वेव (Cold Wave) का यलो अलर्ट जारी किया है। फरीदकोट में राज्य का सबसे कम तापमान 2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अमृतसर, पटियाला, लुधियाना, पठानकोट और बठिंडा में भी ठंड के असर के चलते तापमान में गिरावट आई। हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी की तैयारी के बीच, पंजाब के लोग आने वाले दिनों में ठंडी सुबहों, कोहरे भरी सड़कों और सर्दी के तेज असर के लिए खुद को तैयार रखें। 

इमरजेंसी 108 सेवा संकट में, वेतन न मिलने से रुक सकती हैं एंबुलेंस

जगदलपुर बस्तर जिले में आपातकालीन सेवा 108 एंबुलेंस के पहिए थम सकते हैं। दरअसल, आपातकालीन एंबुलेंस में अपनी सेवा देने वाले कर्मचारियों को संबंधित एजेंसी ने 2 महीने से वेतन का भुगतान नहीं किया है। कर्मचारियों का कहना है कि एजेंसी अक्सर वेतन भुगतान में लेटलतीफी करती है। समय पर वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों को घर चलाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बुधवार को आपातकालीन एंबुलेंस के कर्मचारियों ने बस्तर कलेक्टर, जिला श्रम अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के जिला अधिकारी को वेतन के संबंध में ज्ञापन सौंपा और समय पर वेतन भुगतान कराने की मांग की। कर्मचारियों का कहना है कि बस्तर संभाग सहित प्रदेश के कई जिलों में एजेंसी ने कर्मचारियों को भुगतान नहीं किया है और एजेंसी अलग-अलग बहाने बना रही है। बता दें कि बस्तर जिले में 12 एंबुलेंस अलग-अलग सरकारी अस्पतालों में तैनात हैं। प्रत्येक एंबुलेंस में ड्राइवर और इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन द्वारा सेवा दी जाती है। जिले में तकरीबन 50 कर्मचारियों के जिम्मे आपातकालीन एंबुलेंस सेवा है।

बासमती धान के भाव में तेज बढ़त, गोहाना मंडी में किसानों की फिर लौटी मुस्कान

गोहाना  गोहाना की नई अनाज मंडी में इन दिनों बासमती धान के भाव में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। पिछले कुछ दिनों से बाज़ार में धान की कीमतें तीन सौ से चार सौ रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ी हैं। इस बढ़ोतरी ने किसानों के चेहरों पर फिर से रौनक ला दी है। शुरुआती सीजन में किसानों को उम्मीद के अनुरूप दाम न मिलने के कारण निराशा थी, लेकिन वर्तमान भावों ने उनकी चिंता कम कर दी है। मंडी में बढ़ते भावों के चलते किसानों की आवाजाही में भी इज़ाफा हुआ है। सुबह से ही किसान अपने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और वाहनों में भरकर धान लेकर मंडी पहुँच रहे हैं, ताकि बढ़े हुए दामों का लाभ समय रहते उठाया जा सके।  किसानों का कहना है कि इस बढ़ोतरी से उन्हें राहत मिली है, क्योंकि इस सीजन की लागत पहले ही अधिक थी। चाहे वह खाद हो, डीज़ल हो या मजदूरी हो। ऐसे में बढ़े हुए रेट उनकी मेहनत की भरपाई करने में मदद करेंगे। कई किसान मानते हैं कि अगर भाव कुछ दिनों तक इसी स्तर पर स्थिर रहते हैं, तो इस सीजन को लाभदायक माना जा सकता है। पिछले वर्षों की तुलना में इस बार धान की फसल अच्छी हुई है, लेकिन लागत बढ़ने और अबकी बार फसलों में दाना कम निकलने के कारण किसानों को लगात भी पूरी नहीं हो रही थी। अबकी बार लेबर की कमी के चलते किसान मशीनों से अपनी फसलों की कटाई करवा रहे हैं, जिसके चलते उनकी फसलों में नमी की मात्रा भी अधिक थी और उनकी फसलों के भाव भी कुछ कम मिल रहे थे लेकिन अब किसान हाथ की कटाई से अपनी फसल को सूखा कर ला रहे है जिस के चलते भाव में तीन सौ से चार सौ रुपए की बढ़ोतरी हुई है। धान के भाव में बढ़ोतरी होने से उनको फायदा होगा।  वहीं गोहाना अनाज मंडी में आढ़तियों की मानें तो पिछले तीन से चार दिनों से धान के भाव में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। धान के भाव बढ़ने से किसानों के साथ-साथ आढ़तियों को भी फायदा होगा। उनकी आढ़त में बढ़ोतरी होगी। किसान अब फिर अपना स्टॉक किया हुआ धान मंडी में लेकर पहुंच रहे हैं जिसके चलते मंडी में रोजाना एक लाख बोरी की आवक आ रही है।  

क्यों चुना जाता है शादी में लाल रंग? दुल्हन के लाल जोड़े का खास महत्व

हिंदू धर्म में 16 संस्कारों के बारे में बताया गया है. इन्हीं संस्कारों में एक संस्कार है विवाह. विवाह के बाद गृहस्थ जीवन की शुरुआत हो जाती है. हिंदू विवाह में कई परंपराएं रस्में की जाती हैं, जो बहुत ही विशेष और महत्वपूर्ण होती हैं. विवाह की हर रस्म और हर पंरपरा कोई न कोई गहरी भावना छिपाए हुए होती है. ये परंपराएं सिर्फ धार्मिक दृष्टि से नहीं, बल्कि रिश्तों को मजबूती देने के लिए भी खास मानी जाती हैं. हिंदू धर्म में एक विशेष पंरपरा है दुल्हन को लाल जोड़ा पहनाना. विवाह के दिन दुल्हन को लाल जोड़ा पहनने के लिए कहा जाता है. आइए जानते हैं इस खास परंपरा के बारे में, जो सदियों से चली आ रही है. दुल्हन का लाल जोड़ा पहनने का महत्व विवाह में जब दुल्हन को मंडप में लाकर बिठाया जाता है, तो वो लाल रंग की साड़ी या लाल जोड़े पहनकर आती है. धार्मिक पंरपरा के अनुसार, लाल रंग सुंदरता का प्रतीक माना जाता है. साथ ही हिंदू मान्यताओं के अनुसार, लाल रंग माता लक्ष्मी का भी प्रतीक माना जाता है. विवाह के दिन दुल्हन माता लक्ष्मी का रूप मानी जाती है, इसिलिए उसे लाल वस्त्र पहनाए जाते हैं, ताकि वो जिस घर जा रही है, वहां सुख-समृद्धि और शुभता का आगमन हो. यही कारण है कि दुल्हन घर की लक्ष्मी भी कही जाती है. लाल रंग को अग्नि का प्रतीक भी बताया जाता है. विवाह अग्नि को साक्षी मानकर ही किया जाता है, इसलिए अग्नि के समान लाल केसरिया रंग दुल्हन को पहनाया जाता है. इसके अलावा रंग का को साहस और उर्जा से जोड़ा जाता है. ये रंग नए जीवन को शुरू करने का भी सूचक माना जाता है. विवाह से जीवन का एक नया अध्याय शुरू हो जाता है, इसलिए लाल रंग शुभ माना गया है. ये रंग त्याग और समर्पण का सूचक लाल रंग त्याग और समर्पण का संकेत माना गया है. विवाह के दौरान लड़की मायके को छोड़कर ससुराल जाती है, जहां उसका नया जीवन शुरू होता है. लाल रंग के माध्य्म से लड़की का त्याग और समर्पण दर्शाया जाता है.

एसईसीएल सीएमडी ने वन मंत्री कश्यप से की मुलाकात, विभिन्न मुद्दों पर हुई चर्चा

रायपुर, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप से आज नया रायपुर स्थित उनके निवास, कार्यालय में एसईसीएल के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर (सीएमडी)  हरीश दुहन ने  सौजन्य भेंट की। इस दौरान एसईसीएल के डायरेक्टर (एचआर) बिरंची दास भी उपस्थित थे। भेंट के दौरान वन मंत्री कश्यप को सीएमडी दुहन ने एसईसीएल द्वारा राष्ट्र निर्माण, ऊर्जा सुरक्षा और छत्तीसगढ़ में किए जा रहे सी एस आर आधारित विकास कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने आश्वस्त किया कि एसईसीएल प्रदेश के सर्वांगीण विकास और समुदायों के उत्थान के लिए आगे भी निरंतर कार्य करता रहेगा। मंत्री केदार कश्यप ने एसईसीएल के योगदान की सराहना की और कहा कि कंपनी प्रदेश के सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

राजभवनों के नाम में बदलाव: झारखंड समेत आठ राज्यों में नई पहचान

रांची झारखंड के राजभवन का नाम अब बदलकर 'लोक भवन झारखंड' कर दिया गया है। राज्यपाल संतोष गंगवार ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी मार्गदर्शन में गृह मंत्रालय की पहल के तहत देश के सभी राजभवनों को अब लोक-केंद्रित पहचान दी जा रही है। राजभवन का नाम बदलकर लोक भवन कर दिया गया राज्यपाल ने आगे लिखा कि झारखंड का राजभवन अब “लोक भवन झारखंड” के नाम से जाना जाएगा। बता दें कि यह परिवर्तन झारखंड के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ता है। दरअसल, केंद्र सरकार के निर्देश के बाद देश के आठ राज्यों के राजभवन के नाम बदले गए हैं। इनमें तमिलनाडु, केरल, असम, उत्तराखंड, ओडिशा, गुजरात, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा शामिल हैं। इनके राजभवन का नाम बदलकर लोक भवन कर दिया है। इसी कड़ी में लद्दाख के उपराज्यपाल के निवास-कार्यालय को अब लोक निवास कहा जाएगा।  

पूर्व एएसआई केके मोहम्मद का बयान: मथुरा और ज्ञानवापी में पहले मंदिर थे, मुस्लिम पक्ष का दावा मुश्किल

नई दिल्ली  बाबरी मस्जिद का सर्वे करने वाले एएसआई के पूर्व अफसर के.के मोहम्मद ने काशी और मथुरा को लेकर बड़ा खुलासा किया है. केके मोहम्मद ने कहा कि काशी और मथुरा में पहले से ही मंदिर थे. उन्होंने मुसलमानों को नसीहत दी कि गुड जेस्चर दिखाते हुए मुस्लिमों को काशी और ज्ञानवापी की जमीन को हिंदुओं को दे देना चाहिए, ताकि वहां मंदिर बन सके.  सवाल के जवाब में कि क्या मथुरा और काशी पर मुस्लिम पक्ष का दावा कोर्ट में टिक पाएगा? इस पर केके मोहम्मद ने कहा कि मैं इन दोनों जगहों (मथुरा और काशी) को बहुत करीब से जानता हूं. मैंने दोनों जगहों पर काम कर चुका हूं. इन दोनों जगहों पर पहले मंदिर थे. इस पर कोई शक नहीं है. मथुरा में भी मंदिर था और ज्ञानवापी में भी पहले मंदिर ही था. मुस्लिम पक्ष का दावा कोर्ट में नहीं टिक पाएगा. केके मुहम्मद ने मक्का-मदीना का क्यों किया जिक्र उन्होंने कहा कि मुसलमानों के लिए जितना मक्का और मदीना इंपॉर्टेंट है, उतना ही एक आम हिंदू के लिए ज्ञानवापी (शिवजी का मंदिर) और मथुरा (कृष्ण जन्मभूमि) इंपॉर्टेंट है. अयोध्या (राम मंदिर) तो ऑलरेडी हो गया है. तीन जगहों को मुसलमानों को हिंदुओं को मंदिर बनाने के लिए छोड़ देना चाहिए. उन्होंने हिंदुओं को भी नसीहत दी और कहा कि हर मस्जिद के नीचे उन्हें मंदिर देखना छोड़ देना चाहिए. जो मस्जिदों पर दावे के लिए केस फाइल कर रहे हैं, उन्हें भी छोड़ देना चाहिए. एएसआई के पूर्व सर्वे अफसर के.के मोहम्मद ने क्या-क्या कहा?     अयोध्या, मथुरा और काशी ये तीनों जगह मुसलमानों को हिंदुओं के लिए छोड़ देना चाहिए. अयोध्या हो चुका है.     हिंदुओं को भी हर मस्जिद के पीछे, मस्जिद के नीचे मंदिर का मुद्दे पर आत्मनियंत्रण होना चाहिए.     मुसलमानों को ये तीनों जगह छोड़ने के लिए तैयार होना चाहिए.     लीगल मुद्दे पर मैं कुछ नहीं कह सकता लेकिन सामाजिक तौर पर एक साथ बैठकर सॉल्व करना चाहिए.     मथुरा और ज्ञानवापी… मैं दोनों जगह पर काम कर चुका हूं और अच्छे से जानता हूं. ये दोनों जगह मंदिर थे. इस पर कोई शक नहीं. मुसलमानों को चाहिए कि खुद से छोड़ दें. बहुत सारी चीजें मानने के लिए तैयार हो जाते हैं. कौन हैं केके मुहम्मद? के.के. मुहम्मद एएसआई के पूर्व सर्वेअर रहे हैं. उनका पूरा नाम: करिंगमनु कुजियिल मुहम्मद है. वह एक प्रसिद्ध भारतीय पुरातत्वविद् रहे हैं. उननका जन्म 1 जुलाई 1952 को हुआ.  वे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक (उत्तर) रह चुके हैं. अयोध्या खुदाई में बी.बी. लाल की टीम में शामिल रहे, जहां उन्होंने राम मंदिर के प्रमाण दिए.  चंबल घाटी में बटेश्वर मंदिरों की बहाली में योगदान दिया, जिसे ‘टेम्पल मैन ऑफ इंडिया’ कहा जाता है. वह मथुरा और ज्ञानवापी मामले में भी काम कर चुके हैं.

टिकट खरीदने में बदलाव, रेलवे ने तय किया—विंडो टिकट पर OTP जरूरी

नई दिल्ली रेलवे ने दलालों पर लगाम लगाने के लिए विंडो तत्‍काल टिकट बुकिंग पर बड़ा फैसला किया है.अब बुकिंग के दौरान यात्री के पास ओटीपी आएगा, जिसके बाद टिकट बुकिंग होगी. अगले दिन कुछ दिनों में देशभर में चलने वाली सभी ट्रेनों में यह व्‍यवस्‍था लागू होगी. रेलवे के मुताबिक, अगले कुछ दिनों में सभी ट्रेनों के तत्काल काउंटर टिकटों के लिए ओटीपी आधारित सिस्टम लागू होगा. इसका उद्देश्‍य तत्काल सुविधा का दुरुपयोग और दलालों पर लगाम लगाकर यात्रियों को आसानी से टिकट उपलब्‍ध कराना है. दरअसल, रेलवे ने आम यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के लिए ओटीपी आधारित तत्काल रिजर्वेशन सिस्टम का प्रस्ताव रखा. सबसे पहले जुलाई 2025 में ऑनलाइन तत्काल टिकटों के लिए आधार आधारित प्रमाणीकरण शुरू किया गया. इसके बाद अक्टूबर 2025 में  सभी जनरल रिजर्वेशन की फर्स्ट-डे बुकिंग के लिए OTP आधारित ऑनलाइन सिस्टम लागू हुआ. दोनों सिस्टम आम यात्रियों द्वारा सफलतापूर्वक अपनाए गए और इससे रिजर्वेशन प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुविधा बढ़ी है. पायलट प्रोजेक्‍ट पूरा भारतीय रेलवे ने 17 नवंबर 2025 से इसका पायलट प्रोजेक्‍ट शुरू किया था. अभी केवल 52 ट्रेनों में ओटीपी अनिवार्य किया गया था, जो काफी सफल रहा है. इसी वजह से सभी ट्रेनों में यह व्‍यवस्‍था लागू की जा रही है. जल्‍द ही इसकी डेट का ऐलान किया जाएगा. यह तरह होगी बुकिंग विंडो जाकर रिवर्जेशन कराते समय यात्री रिजर्वेशन फॉर्म में अपना मोबाइल नंबर भरना होगा. अगर वो तत्‍काल टिकट बुक करता है तो उसके मोबाइल पर एक ओटीपी आएगा. विंडो पर बैठा कर्मी आपसे ओटीपी पूछेगा, ओटीपी डालने के बाद ही टिकट कन्फर्म होगा. इस तरह दलालों से मिलेगा छुटकारा इससे दलालों का खेल पूरी तरह बंद हो जाएगा, क्योंकि बिना असली यात्री के मोबाइल के टिकट नहीं बन सकेगा. अगले कुछ दिनों में यह ओटीपी सिस्टम सभी बची हुई ट्रेनों के तत्काल काउंटर टिकटों पर भी लागू हो रहा है. भारतीय रेलवे का मानना है कि यह कदम तत्काल कोटे की टिकटों को वाकई जरूरतमंद यात्रियों तक पहुंचाने में बड़ी मदद करेगा. ऐसे होगा सत्यापन रेलवे ने 17 नवंबर 2025 को रिजर्वेशन काउंटरों से बुक होने वाले तत्काल टिकटों के लिए ओटीपी आधारित प्रणाली का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया. फिलहाल यह व्यवस्था 52 ट्रेनों तक विस्तारित की जा चुकी है. इस सिस्टम के तहत जब यात्री रिजर्वेशन फॉर्म भरकर तत्काल टिकट बुक करते हैं तो उनके द्वारा दिए गए मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी भेजा जाता है. इसमें यात्रियों का टिकट तभी सुनिश्चित हो पाता है जब ओटीपी का सफल सत्यापन हो जाता है. यात्रियों को मिलगी बेहतर सुविधा आने वाले दिनों में यह ओटीपी आधारित तत्काल रिजर्वेशन सिस्टम सभी शेष ट्रेनों पर लागू कर दिया जाएगा. यह कदम रेलवे टिकटिंग में पारदर्शिता, यात्री सुविधा और सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है. अब सभी ट्रेनों में OTP आने वाले कुछ दिनों में, यह OTP आधारित Tatkal टिकट सिस्टम सभी बाकी ट्रेनों के लिए भी लागू कर दिया जाएगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य Tatkal सुविधा के दुरुपयोग को रोकना है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि जरूरतमंद यात्रियों को आसानी से हाई-डिमांड टिकट मिल सकें। रेलवे का कहना है कि टिकट बुकिंग में पारदर्शिता, यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। तत्काल टिकट टाइमिंग क्या है भारतीय रेल के ट्रेनों में तत्काल टिकट की बुकिंग यात्रा की तारीख से एक दिन पहले शुरू होती है। ट्रेन के एसी क्लास के लिए सुबह 10:00 बजे और नॉन-एसी क्लास के लिए सुबह 11:00 बजे बुकिंग शुरू होती है। उदाहरण के लिए, यदि आप 12 दिसंबर को यात्रा करना चाहते हैं, तो एसी क्लास के लिए तत्काल बुकिंग 11 दिसंबर को सुबह 10 बजे से और नॉन-एसी क्लास के लिए 11 दिसंबर को सुबह 11 बजे से शुरू होगी।

दिल का दौरा बिना दर्द! साइलेंट हार्ट अटैक की पहचान इन 7 संकेतों से करें

क्या आप जानते हैं हर बार हार्ट अटैक आने पर सीने में दर्द नहीं होता? जी हां, हार्ट अटैक बिना किसी साफ लक्षण के भी आ सकता है, जिसे साइलेंट हार्ट अटैक कहा जाता है। यह और भी ज्यादा खतरनाक होता है, क्योंकि इसमें व्यक्ति को शुरुआत में समझ ही नहीं आता कि उसे हार्ट अटैक आ रहा है। साइलेंट हार्ट अटैक में लक्षण इतने हल्के या असामान्य होते हैं कि व्यक्ति इसे अक्सर नजरअंदाज कर देता है या दूसरी समस्याओं से जोड़ देता है। लेकिन ऐसा करना स्थिति को और ज्यादा गंभीर बना देता है और जान बचाने की संभावना कम हो जाती है। आइए जानें साइलेंट हार्ट अटैक की पहचान कैसे कर सकते हैं। साइलेंट हार्ट अटैक के लक्षण कैसे होते हैं?     हल्की बेचैनी या दबाव- सीने में हल्की जकड़न, दबाव या असहजता जो कुछ मिनटों तक रहे और फिर चली जाए। इसे अक्सर सीने में गैस या अपच समझ लिया जाता है।     असामान्य थकान- अचानक आने वाली बहुत ज्यादा थकान या कमजोरी, खासकर महिलाओं में, जो आराम करने के बाद भी न जाए।     सांस में हल्की तकलीफ- बिना किसी कारण के सांस फूलना या सांस लेने में हल्की दिक्कत होना।     अस्पष्ट दर्द- सीने के बजाय जबड़े, पीठ, गर्दन, बाजू या पेट में हल्का दर्द या असहजता महसूस होना।     पसीना आना- अचानक ठंडा पसीना आना, जो आमतौर पर तनाव या मौसम से जोड़कर देखा जाता है।     चक्कर आना या मतली- हल्का चक्कर आना, सिर हल्का महसूस होना या बिना कारण मतली आना।     नींद में खलल- रात में अचानक नींद खुल जाना या बेचैनी के साथ उठना। खतरे के कारण और रिस्क फैक्टर साइलेंट हार्ट अटैक उन लोगों में ज्यादा होता है जिन्हें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा या स्मोकिंग की आदत होती है। डायबिटीज के मरीजों में नर्व डैमेज के कारण दर्द का अनुभव कम हो जाता है, जिससे साइलेंट हार्ट अटैक की संभावना बढ़ जाती है। साइलेंट हार्ट अटैक का सबसे बड़ा खतरा इसका सबसे बड़ा खतरा यही है कि व्यक्ति को पता ही नहीं चलता कि उसे हार्ट अटैक आया है। बिना इलाज के, दिल की मांसपेशियों को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है और भविष्य में दिल की गंभीर समस्याओं, हार्ट फेलियर या अचानक कार्डिएक अरेस्ट का खतरा बढ़ जाता है।