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सूर्य और शनि की युति का प्रभाव: 3 राशियों के लिए 4 जनवरी से खुशियों का दौर

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य और शनि को क्रमश: पिता-पुत्र होने के साथ-साथ एक दूसरे का शत्रु भी माना गया है. हालांकि इन दोनों ही शक्तिशाली ग्रहों की जोड़ी नए साल 2026 की शुरुआत में एक बड़ा ही दुर्लभ योग बनाने वाली है. दरअसल, 4 जनवरी 2026 को सू्र्य-शनि एक दूसरे से 72 डिग्री कोण पर स्थित होकर पंचांक योग का निर्माण करेंगे. इस दौरान शनि स्वराशि मीन में होंगे और सूर्य धनु राशि में रहेंगे, जिस पर गुरु बृहस्पति की दृष्टि भी बनी रहेगी. ज्योतिषविदों ने इसे महा 'राजयोग' बताया  है, जो करीब 30 वर्ष बाद बनने जा रहा है. यह दुर्लभ संयोग 2026 की शुरुआत में 3 राशि के जातकों का भाग्योदय कर सकता है. कन्या राशि साल 2026 की शुरुआत में कन्या राशि में नई आर्थिक संभावनाएं पैदा करेगा. आपके धन, करियर, कारोबार से जुड़े जो कार्य लंबित थे, उनमें गति आएगी. नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन और कुछ बड़ी जिम्मेदारियां मिल सकती हैं. कोई बड़ा पद मिलने से आपका मन प्रसन्न रहेगा. विदेश घूमने, पढ़ने या बसने का सपना सच हो सकता है. धनु राशि सूर्य-शनि के इस दुर्लभ संयोग का असर धनु राशि पर भी दिखाई देगा. सफलता के लिए जिस बड़े मौके की तलाश आपको लंबे अरसे से है, वो बहुत जल्द मिलने वाला है. 2026 की शुरुआत में व्यापारियों के हाथ मुनाफे की कोई बड़ी डील लग सकती है. नौकरीपेशा जातकों का भी भाग्य पूरा साथ देगा. समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा. बड़े-बुजुर्गों के आशीर्वाद से खूब मुनाफा बटोरेंगे. मीन राशि सूर्य-शनि का ये संयोग मीन राशि वालों के लिए भी अत्यंत लाभदायक सिद्ध हो सकता है. वित्तीय स्थिति में सुधार होगा. पुराना कर्ज या अटके हुए धन की वापसी होगी. यदि किसी निवेश में लंबे समय से पैसा फंसा हुआ था तो वो भी वापस मिल सकता है. जिन लोगों को काफी समय से रोजगार की तलाश है, उनकी ये खोज बहुत जल्द समाप्त हो सकती है. किसी अच्छी, बड़ी नौकरी का अवसर आपके हाथ लग सकता है. रोग-बीमारियों से भी छुटकारा पाएंगे.

रिव्यू मीटिंग में CM मोहन यादव का निर्देश: कुपोषण पर ज़ीरो टॉलरेंस, लाड़ली लक्ष्मी योजना में ड्रॉप आउट रोकें

भोपाल   मध्य प्रदेश सरकार के दो साल पूरे होने वाले हैं। इससे पहले सीएम मोहन यादव विभागों की समीक्षा कर रहे हैं। बाल विकास विभाग की समीक्षा के दौरान सीएम ने कई निर्देश दिए हैं। मध्य प्रदेश आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की पूर्णत: ऑनलाइन पारदर्शी भर्ती प्रकिया लागू करने में देश का पहला राज्य बन गया है। इसके साथ ही सीएम ने लाडली लक्ष्मी बेटियों के ड्रॉप आउट पर विभागीय अधिकारियों से जानकारी ली। ड्रॉप आउट रोकने के निर्देश सीएम ने अधिकारियों को लाडली लक्ष्मी बेटियों के ड्रॉप आउट रोकने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा कि इस पर सख्त निगरानी रखें। दरअसल, यह खबरें आ रही थीं कि लाडली लक्ष्मी बेटियां पढ़ाई छोड़ रही हैं। इसी के बाद सीएम ने चर्चा की है। ये रहीं विभाग की उपलब्धियां इसके साथ ही टेक होम राशन की एफआरएस प्रक्रिया में मध्य प्रदेश प्रथम स्थान पर है। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई है। साथ ही स्पॉन्सरशिप योजना में 20,243 बच्चों को लाभ देकर एमपी ने देश में दूसरा स्थान हासिल किया है। झाबुआ के ‘मोटी आई’ नवाचार को प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार मिला है। PM JANMAN भवनों की डिजाइन और मॉनिटरिंग मॉड्यूल की भारत सरकार द्वारा विशेष सराहना की गई। भवन निर्माण की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए अत्याधुनिक मॉड्यूल विकसित किया गया। आंगनवाड़ी में गर्म भोजन की व्यवस्था वहीं, सीएम ने तीन वर्ष की तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। 2026 से मध्य प्रदेश के शहरी आंगनवाड़ी केंद्रों में सेंट्रल किचन से गर्म भोजन उपलब्ध करवाने की तैयारी है। साथ ही अगले तीन वर्ष में 9000 नए आंगनवाड़ी केंद्रों के भवन बनाए जाएंगे। महिलाओं को मिली मदद साथ ही PMMVY में 9.70 लाख गर्भवती महिलाओं को ₹512 करोड़ से अधिक की सहायता मिली है। लाडली बहना योजना के तहत जनवरी 2024–नवंबर 2025 में ₹36,778 करोड़ का अंतरण किया गया है। 1.72 लाख महिलाओं को महिला हेल्पलाइन से सहायता मिली है। इसके साथ ही बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के तहत 1.89 लाख पौधारोपण, 6,520 ड्राइविंग लाइसेंस, 8,637 बालिकाओं को प्रतियोगी परीक्षा प्रशिक्षण दी गई। वहीं, सामग्री टेंडर प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए। सीएम ने कहा कि यदि टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी होगी तो वरिष्ठ अधिकारी जिम्मेदार होगें। सीएम ने तीन साल में कुपोषण को समाप्त करने के लिए फुल प्रूफ कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही ब्रेस्ट फीडिंग के लिए जागरूकता बढ़ाने के भी निर्देश दिए हैं।

मध्य प्रदेश: CM मोहन यादव की समीक्षा बैठक, कैबिनेट फेरबदल की उल्टी गिनती शुरू, 3 मंत्री निशाने पर!

भोपाल  सीएम डॉ. मोहन यादव ने राज्य में संभावित कैबिनेट फेरबदल की अटकलों के बीच सभी मंत्रिस्तरीय विभागों की समीक्षा शुरू कर दी है। यह मूल्यांकन 2 दिसंबर से 9 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें प्रत्येक मंत्री के दो साल के प्रदर्शन का आंकलन किया जाएगा और शासन के लिए तीन साल का रोडमैप तैयार किया जाएगा। इस समीक्षा का उद्देश्य जमीनी स्तर पर प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाना और यह सुनिश्चित करना है कि योजनाओं का लाभ अंतिम लाभार्थी तक पहुंचे। पहले दिन इन विभागों की जांच समीक्षा के पहले दिन मुख्यमंत्री यादव ने स्कूल शिक्षा विभाग की जांच की, जिसमें योजनाओं, बुनियादी ढांचे, डिजिटल शिक्षा और शिक्षक प्रबंधन पर विस्तृत प्रतिक्रिया मांगी गई। ग्रामीण विकास, पंचायत और परिवहन विभागों की भी समीक्षा की गई। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने शिक्षा योजनाओं के प्रभाव का गहनता से अध्ययन किया। अधिकारियों ने बताया कि स्कूल छोड़ने वालों की दर में उल्लेखनीय गिरावट आई है और नामांकन में पिछले साल की तुलना में 120% की वृद्धि हुई है, खासकर निजी स्कूलों से। मंत्री प्रह्लाद पटेल क्या बोले? ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि सरकार ग्राम पंचायत कार्यालयों, सामुदायिक हॉल, ग्रामीण सड़कों के निर्माण और पेयजल व्यवस्था में सुधार पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने पारंपरिक जल संरचनाओं को पुनर्जीवित करने और संरक्षित करने के प्रयासों पर जोर दिया और दावा किया कि कई योजनाएं गांवों को आत्मनिर्भरता की ओर धकेल रही हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री ने भी दी रिपोर्ट परिवहन और स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि सरकार शैक्षिक सुविधाओं को मजबूत करने, योग्यता को बढ़ावा देने और परिवहन बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री की विस्तृत समीक्षा से सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। सरकार का कहना है कि ये समीक्षाएं जमीनी स्तर पर प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाएंगी और राज्य की योजनाओं का लाभ अंतिम लाभार्थी तक पहुंचाना सुनिश्चित करेंगी। बदलाव की चर्चा भी तेज 31 सदस्यीय कैबिनेट में चार मंत्रिस्तरीय पद रिक्त होने के साथ, राजनीतिक गलियारों में बड़े बदलावों की चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों के अनुसार, कई वरिष्ठ विधायकों को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। कुछ मौजूदा मंत्रियों को महत्वपूर्ण संगठनात्मक भूमिकाओं में स्थानांतरित किया जा सकता है। दो महिला विधायकों को शामिल किया जा सकता है। खराब प्रदर्शन के कारण कम से कम तीन वर्तमान मंत्रियों को हटाया जा सकता है। कांग्रेस के एक पूर्व विधायक, जिन्होंने भाजपा का दामन थामा है, को भी पद की पेशकश पर विचार किया जा रहा है।  

नॉर्दर्न वर्जीनिया का एशबर्न दुनिया के इंटरनेट ट्रैफिक का 70% संभालता है, AI बिल्डिंग से और तेज़ी

 वर्जीनिया  जैसे ही प्लेन यूएस की राजधानी वॉशिंगटन DC के डलेस एयरपोर्ट के पास पहुंचते हैं, ठीक नीचे एशबर्न है, जिसे डेटा सेंटर एली के नाम से भी जाना जाता है. जहां किसी भी समय दुनिया भर के इंटरनेट ट्रैफिक का लगभग 70 परसेंट आता है. दशकों पहले, उत्तरी वर्जीनिया के इस कोने में खाली प्लॉट, जंगल और खेत अब धीरे-धीरे सबअर्बन डेवलपमेंट से भर गए थे. फिर इंटरनेट आया और डेटा सेंटर बनाने वालों की बाढ़ आ गई. वे टैक्स रेवेन्यू और इन्वेस्टमेंट के वादे के साथ आए, बदले में ऐसे स्ट्रक्चर बनाए गए, जो देखने में भले ही अच्छे न लगें, लेकिन डिजिटली कनेक्टेड दुनिया की रीढ़ थे. यहां क्यों? स्ट्रेटेजिक लोकेशन, मजबूत इंफ्रॉस्ट्रक्चर, बिजनेस के पक्ष में पॉलिसी और सस्ती एनर्जी का कॉम्बिनेशन इसे समझाने में मदद करता है. पेंटागन और अमेरिकी सरकार बस यहीं हैं, साथ ही AOL का हेडक्वॉर्टर भी था, जो शुरुआती वेब जायंट था, जिसने कभी ऑनलाइन होने को डिफाइन किया था. पिछले दो दशकों में इन गुमनाम बिल्डिंगों से एशबर्न को जो फायदे हुए हैं, उन्हें नकारा नहीं जा सकता. डेटा सेंटर के फैलाव के बीच नए स्टोर, रेजिडेंशियल पड़ोस, एक आइस स्केटिंग रिंक और पब्लिक फैसिलिटी है, जो साबित करते हैं कि इस शहर में पैसे की कोई कमी नहीं है. एशबर्न, लाउडाउन काउंटी में है, जो अमेरिका में प्रति व्यक्ति सबसे अमीर काउंटी है. दुनिया भर के शहर वॉशिंगटन के इस उपनगर को भविष्य जीतने के तरीके के तौर पर देख रहे हैं. भले ही दूसरे इसे एक चेतावनी वाली कहानी के तौर पर देखें. अपने 40,000 लोगों में से, अकेले एशबर्न में अभी 40 स्क्वॉयर किलोमीटर (15.4 स्क्वॉयर मील) में 152 डेटा सेंटर चल रहे हैं, और जमीन से और भी बन रहे हैं, यह AI इन्वेस्टमेंट बूम का हिस्सा है, जिससे और भी बड़े स्ट्रक्चर बनाने की होड़ मची हुई है. US सेंसस ब्यूरो के मुताबिक, 2025 में, प्राइवेट कंपनियाँ यूनाइटेड स्टेट्स में डेटा सेंटर बनाने पर हर महीने लगभग $40 बिलियन खर्च कर रही हैं. इसमें से ज़्यादातर बड़े AI प्लेयर्स: Google, Amazon, Microsoft और OpenAI के मेगाप्रोजेक्ट्स पर खर्च हो रहा है. इसकी तुलना में एक दशक पहले यह सिर्फ $1.8 बिलियन था. AFP रिपोर्टर्स को डिजिटल रियल्टी ने एक आम डेटा सेंटर फैसिलिटी का टूर कराया. डिजिटल रियल्टी एक खास रियल एस्टेट कंपनी है जो एशबर्न में 13 डेटा सेंटर चलाती है.     डिजिटल रियल्टी के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर क्रिस शार्प ने कहा, "हम न सिर्फ वह जगह देते हैं जो आप यहां देख रहे हैं, बल्कि पावर, कूलिंग और कनेक्टिविटी भी देते हैं." किसी भी डेटा सेंटर में सर्वर असल में हमारे ऑनलाइन किए जाने वाले हर काम को जिंदा कर देते हैं. यहां के कंप्यूटर रूम, जो बाहर के लोगों के लिए पूरी तरह ऑफ लिमिट्स हैं. एक क्लाइंट के लिए सर्वर के रैक से भरे होते हैं या छोटे क्लाइंट्स को सर्विस देने के लिए अलग-अलग "केज" में बंटे होते हैं. AI के आने से इंडस्ट्री एक अलग ही लेवल पर पहुंच गई है, जिससे नई चुनौतियां पैदा हो रही हैं, क्योंकि टेक की बड़ी कंपनियां, जो AI के बीच कड़ी टक्कर में फंसी हुई हैं, तेजी से AI-कैपेबल डेटा सेंटर बनाने के लिए दुनिया भर में छानबीन कर रही हैं. इन नई जेनरेशन की बिल्डिंग्स को बहुत ज़्यादा पावर, कूलिंग टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग की जरूरत होती है. Nvidia के ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स चलाने वाले सर्वर, जो AI की ट्रेनिंग के लिए जरूरी हैं, बहुत ज़्यादा भारी होते हैं, और इनके लिए बड़े और मजबूत स्ट्रक्चर की ज़रूरत होती है, जिन्हें बहुत ज़्यादा बिजली की जरूरत होती है. सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज में एनर्जी सिक्योरिटी एंड क्लाइमेट चेंज प्रोग्राम की डिप्टी डायरेक्टर लेस्ली अब्राहम्स ने कहा, "अगर हम सिर्फ वर्जीनिया के बारे में सोचें, तो पिछले साल सिर्फ डेटा सेंटर्स ने लगभग उतनी ही बिजली इस्तेमाल की जितनी पूरे न्यूयॉर्क शहर में होती है." ChatGPT जैसी टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करने वाले डेटा सर्वर बहुत गर्म होते हैं और उन्हें नई जेनरेशन की लिक्विड कूलिंग की जरूरत होती है. एयर कंडीशनिंग अब यह काम नहीं करेगी और ज़्यादातर मामलों में इसका मतलब है लोकल पानी तक पहुंच। इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि नई जरूरतों ने नए कंस्ट्रक्शन को बेचना मुश्किल बना दिया है. एशबर्न में पली-बढ़ी 24 साल की मकेला एडमंड्स ने कहा, "बड़े होते हुए, हमने कुछ डेटा सेंटर देखना शुरू किया, लेकिन सच कहूं तो, इतनी तेजी से नहीं, वे बस हर जगह खुल रहे हैं." उनके परिवार का घर एक सबअर्बन डेवलपमेंट का हिस्सा है जो एक बड़े कंस्ट्रक्शन साइट से सटा हुआ है. एक और दिक्कत यह है कि डेटा सेंटर्स में नौकरियां ज़्यादातर कंस्ट्रक्शन के समय मिलती हैं. हार्ड हैट पहनी टीमें अक्सर चौबीसों घंटे साइट्स पर काम करती हैं. लेकिन एक बार चालू होने के बाद, कई साइट्स पर इंसानी एक्टिविटी बहुत कम होती है. अब्राहम्स ने कहा, "डेटा सेंटर के फायदे लोकल से ज़्यादा रीजनल, नेशनल और ग्लोबल होते हैं." एक बड़े बदलाव में, उत्तरी वर्जीनिया के लोकल नेता अब ज़्यादा कंस्ट्रक्शन लाने का वादा करने के बजाय, एक्सपेंशन को धीमा करने के लिए कैंपेन चला रहे हैं. डिजिटल रियल्टी जैसी कंपनियों के लिए, चुनौती कम्युनिटी के साथ मिलकर उन्हें डेटा सेंटर लाने के लिए तैयार करना है. किसी भी शक के बावजूद, डिमांड कम नहीं हो रही है. शार्प ने कहा, "इस मार्केट में ग्रोथ और डिमांड जबरदस्त है."

भारत-रूस संबंधों में नई गति? पुतिन के आगमन से पहले मिले मजबूत आर्थिक संकेत

नई दिल्ली  भारत के दौरे पर आ रहे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पहले ही ये संकेत दे दिए हैं कि भारत के साथ उनके व्यापारिक संबंधों में कमी नहीं आने जा रही है. उनका ये बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को काटता है, जिसमें वे कई बार कह चुके हैं कि भारत अगले कुछ महीनों में रूस के साथ तेल के व्यापार को घटाने वाला है. व्लादिमीर पुतिन की ओर से दिए गए बयान ने साफ कर दिया है कि भारत-रूस के बीच ट्रेड बढ़ने वाला है और इसका फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था को जरुर होगा. रूसी राष्ट्रपति का दौरा ऐसे वक्त में भारत में हो रहा है, जब रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत, अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ की मार झेल रहा है. इस दौरे के जरिये पुतिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ये मैसेज देना चाहते हैं कि भारत-रूस के संबंधों पर किसी भी टैरिफ का असर नहीं पड़ेगा, हालांकि रूस से मानता है कि मौजूदा हालात में भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव झेल रहा है. रूस की ओर से इसकी आलोचना भी की गई है. भारत को मालामाल करने वाले हैं पुतिन व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि वे भारत दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ऊर्जा, उद्योग, अंतरिक्ष, कृषि और कई अन्य क्षेत्रों में चल रहे नए संयुक्त प्रोजेक्ट पर बात करेंगे. वे इस दिशा में चल रहे प्रयासों पर विस्तार से चर्चा करेंगे- खासकर भारतीय सामानों के आयात को बढ़ाने को लेकर. पुतिन की ओर से कहा गया है कि उनका लक्ष्य चीन और भारत दोनों के साथ सहयोग को एक नए और उच्च स्तर तक ले जाना है. उन्होंने कहा है कि पिछले तीन वर्षों में रूस ने भारत और चीन जैसे विश्वसनीय और बड़े साझेदार देशों के साथ व्यापार को काफी बढ़ाया है और वे इसे आगे ले जाना चाहते हैं. पुतिन का ये आत्मविश्वास पश्चिमी देशों को चेताने वाला है. भारत के लिए रूस का निर्यात बाजार और खुल सकता है. उनका यह बयान भारत के साथ ट्रेड रिलेशन को लेकर बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका ने भारतीय सामानों को उसके बाजार में ले जाने पर भारी शुल्क लगा रखा है. पश्चिमी देशों को पुतिन का मैसेज भारत के साथ दोस्ती को लेकर पुतिन ने साफ तौर पर कहा है कि उनके बीच कई वर्षों से गहरी दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी है, जो लगातार मजबूत हो रही है. उन्होंने अपने पश्चिमी देशों की नीतियों की आलोचना पर मुखर होकर कहा है कि आज की दुनिया अत्यधिक उथल-पुथल से गुजर रही है, जिसका कारण है पश्चिम की ओर से कुछ बाजारों पर जबरन एकाधिकार स्थापित करना. उन्होंने भारत के संदर्भ में कहा कि पश्चिम उन देशों पर दबाव डाल रहा है, जो स्वतंत्र और स्वायत्त नीतियां अपनाते हैं. पुतिन के मुताबिक पश्चिम किसी भी तरह की प्रतिस्पर्धा को बाजार से खत्म करना चाहता है.

आरएसएस के हिंदू सम्मेलन में योगी केंद्र में, क्या यूपी 2027 की राजनीतिक तैयारी शुरू?

लखनऊ बिहार विधानसभा चुनाव के बाद अब आरएसएस की निगाहें उत्तर प्रदेश पर केंद्रित हो गई हैं. बीजेपी सत्ता की हैट्रिक लगाने का तानाबाना बुनना शुरू कर दिया है. 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में संघ और बीजेपी हिंदुत्व के एजेंडे को और धार देने की रणनीति पर अभी से काम शुरू कर दिया है ताकि पूरे सूबे में हिंदुत्व का सियासी रंग चढ़ सके. आरएसएस और बीजेपी ने संयुक्त रूप से उत्तर प्रदेश में हिंदुत्व आधारित माहौल को मजबूती देने की रणनीति बनाई. संघ के साथ बीजेपी राम मंदिर के मुद्दे को गांव-गांव पहुंचाने का प्लान बनाया है, तो साथ ही लखनऊ में 'विराट हिंदू सम्मेलन' कराने की तैयारी की है. इस सम्मेलन में सीएम योगी आदित्यनाथ भी शिरकत करेंगे, जिसके मायने साफ हैं कि पार्टी ने उन्हें हिंदुत्व का चेहरा बनाकर पेश करने की रणनीति अपनाई है. आरएसएस-बीजेपी की मंथन से निकलेगा अमृत उत्तर प्रदेश में सवा साल के बाद सोमवार को सरकार, संगठन और संघ की समन्वय बैठक हुई. पहली बैठक संघ की भारती भवन के बंद कमरे में हुई, जिसमें संघ के सरकार्यवाह अरुण कुमार, बीजेपी राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष, अतुल लिमये, पश्चिम क्षेत्र प्रचारक महेंद्र शर्मा, पूर्वी क्षेत्र प्रचारक अनिल सिंह और यूपी बीजेपी के संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह मौजूद रहे. यह बैठक करीब डेढ़ घंटे तक चली. इसके बाद संघ की सरकार और बीजेपी संगठन के साथ मीटिंग हुई. संघ, सरकार और संगठन की बैठक में सीएम योगी आदित्यनाथ, बीएल संतोष, अरुण कुमार, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, बृजेश पाठक, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी सहित संघ के क्षेत्रीय प्रचारकों के बीच बैठक हुई. इस बैठक में मिशन-2027 को लेकर रणनीति बनी और अब उसे अमलीजामा पहनाने का काम शुरू कर दिया गया है. यूपी से फीडबैक लेकर वापस दिल्ली लौटे बीएल संतोष ने प्रदेश अध्यक्ष के नाम को लेकर पीएम मोदी, अमित शाह और जेपी नड्डा के साथ बैठक की. योगी के बहाने हिंदुत्व को धार देने का प्लान संघ के 100 साल पूरे हो गए हैं. संघ अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है. ऐसे में संघ और बीजेपी जनवरी 2026 में लखनऊ में 'विराट हिंदू सम्मेलन' करने जा रहे हैं. इस कार्यक्रम में सीएम योगी भी शिरकत करेंगे. माना जा रहा है कि इस रैली के जरिए योगी आदित्यनाथ की हिंदुत्ववादी छवि को और भी मजबूत कर पेश करने की रणनीति है. सीएम योगी को केंद्र में रखकर विशेष रूप से रणनीति तैयार की जा रही है. इसी बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इन तमाम कार्यक्रमों में मुख्य चेहरे के तौर पर आगे रखने का भी प्लान है और उन्हीं के बहाने हिंदुत्व को धार देने की कोशिश है. योगी आदित्यनाथ सिर्फ अपने काम से ही नहीं बल्कि अपने लिबास से भी हिंदुत्व के रंग में रचे-बसे नजर आते हैं. यूपी में 'विराट हिंदू सम्मेलन' 2027 से पहले संघ के शताब्दी वर्ष के मद्देनजर राज्यभर में बड़े पैमाने पर हिंदू सम्मेलनों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी. इसी क्रम में लखनऊ में होने वाले 'विराट हिंदू सम्मेलन' को शक्तिशाली राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है. बीजेपी और संघ की साझा रणनीति से एक बात साफ है कि यूपी में विकास को आधार बनाकर हिंदुत्व के भावनात्मक मुद्दों को भुनाने की तैयारी है. लखनऊ में होने वाला विराट हिंदू सम्मेलन इस रोडमैप का केंद्रबिंदु माना जा रहा है. मिशन 2027 के हिंदुत्व को धार देने का प्लान जनवरी में राम मंदिर के कैलेंडर और तस्वीर के साथ संघ और बीजेपी के कार्यकर्ता लोगों से जनसंपर्क करते हुए घर-घर पहुंचने की कोशिश करेंगे. इसके बाद 20 फरवरी तक हिंदू सम्मेलन शुरू होंगे, जिसमें हिंदू समाज को एकजुट करने, खासकर दलित, अति पिछड़े और पिछड़े वर्गों तक पहुंच कर संघ और हिंदुत्व को लेकर सभी शहरों में कार्यक्रम करेंगे. एक कार्यक्रम लखनऊ में भी प्लान किया जा रहा है जो विराट हिंदू सम्मेलन के तौर पर होगा. इसमें भाजपा और संघ के कार्यकर्ता जुड़ेंगे और उनकी कोशिश पिछड़े और दलित परिवारों तक पहुंचने की होगी. इस समीक्षा में विराट हिंदू सम्मेलन की तैयारियां और विभिन्न समूहों से मिले फीडबैक शामिल रहे. यूपी में भाजपा–संघ ने राजनीतिक समीकरणों को साधने की कवायद शुरू कर दी है. सपा के पीडीए का क्या काउंटर प्लान संघ और बीजेपी के इन कार्यक्रमों को सपा के पीडीए की काट के तौर पर देखा जा रहा है. इस संबंध में बैठक में पीडीए के काउंटर प्लान पर चर्चा हुई. सपा ने 2024 में पीडीए फॉर्मूले के जरिए बीजेपी को झटका दिया था. 2024 में यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से सपा 37 और कांग्रेस 6 सीटें जीतने में कामयाब रही थी. वहीं, बीजेपी सिर्फ 33 सीट पर सिमट गई थी. 2019 की तुलना में उसे 31 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा था. बीजेपी का सियासी समीकरण बिगड़ गया था, जिसके बाद से योगी आदित्यनाथ लगातार 'बंटोगे तो कटोगे' के नारे के जरिए हिंदुओं को एकजुट करने में लगे हैं. बीजेपी और संघ का प्लान है कि दलित, अति पिछड़े और पिछड़े वर्गों तक अपनी पहुंच बनाई जाए. संघ और हिंदुत्व गांव-गांव ही नहीं बल्कि तमाम शहरों में कार्यक्रम करेंगे. इस तरह बीजेपी अलग-अलग जातियों में बिखरे हिंदू वोटों को फिर से एक छतरी के नीचे लाने के लिए विराट हिंदू सम्मेलन की रूप रेखा तैयार कर रही है. माना जा रहा है कि इस दांव से सपा के विनिंग फॉर्मूला पीडीए को काउंटर करने की रणनीति है.

पुतिन दौरे में भारत में बन सकते हैं 120-140 स्टील्थ जेट, Su-57 डील की उम्मीद

 नई दिल्ली भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए एक ऐतिहासिक मौका आ गया है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के 4-5 दिसंबर के भारत दौरे के दौरान Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट्स की डील हो सकती है. दुबई एयरशो 2025 में रूस ने भारत को पूरी तकनीक ट्रांसफर का वादा किया है, जिसमें इंजन, सेंसर और स्टील्थ मटेरियल सब शामिल हैं.  यह डील न सिर्फ वायुसेना को 5वीं पीढ़ी के जेट देगी, बल्कि फ्रांस के राफेल जेट्स के साथ इसकी जोड़ी (जुगलबंदी) भारत को एशिया का हवाई सुपरपावर बना देगी. इससे आईएएफ की ताकत 50-60% बढ़ जाएगी, खासकर ऑपरेशन सिंदूर (मई 2025) जैसे संघर्षों में.  डील का लेटेस्ट स्टेटस: पुतिन दौरे पर सबकी नजरें पुतिन का यह दौरा महज औपचारिक नहीं, बल्कि रक्षा समझौतों का बड़ा मंच बनेगा. क्रेमलिन स्पोक्सपर्सन दिमित्री पेस्कोव ने कन्फर्म किया कि Su-57 और अतिरिक्त S-400 एयर डिफेंस सिस्टम्स पर बात होगी. रूस की रोस्टेक कंपनी के सीईओ सर्गेई चेमेज़ोव ने दुबई एयरशो में कहा कि भारत को जो चाहिए, हम देंगे—चाहे Su-57 हो या S-400.  Su-57 का प्लान: शुरुआत में 50-60 रेडीमेड जेट्स रूस से आएंगे, फिर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के नासिक प्लांट पर 120-140 जेट्स लोकल प्रोडक्शन होगा. कीमत प्रति जेट 670-800 करोड़ रुपये, जो F-35 ($110 मिलियन) से सस्ता है. फुल टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (टीओटी) से भारत अपना वर्जन बना सकेगा, जिसमें ब्रह्मोस मिसाइल इंटीग्रेशन होगा.    राफेल का एक्सपैंशन: पहले से 36 राफेल हैं, अब 114 और F-4/F-5 वर्जन की डील पर फोकस. नेवी के लिए 26 राफेल-M भी आ रहे हैं. कुल लागत: 1 लाख करोड़ से ज्यादा, लेकिन मेक इन इंडिया से 60% पार्ट्स लोकल.     बैकग्राउंड: ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान ने राफेल को चुनौती दी, जहां चीनी J-10सी ने लंबी रेंज मिसाइल यूज की. इससे IAF के 31 स्क्वाड्रन (अधिकृत 42) का संकट सामने आया. S-500 मिसाइल शील्ड भी डिस्कस होगा, जो हाई-एल्टीट्यूड थ्रेट्स को हैंडल करेगा.   2028 तक 20 जेट्स प्रति साल प्रोडक्शन शुरू होगा, जो भारत को एक्सपोर्ट हब बना सकती है. राफेल: बहुमुखी योद्धा, जो युद्ध के हर मोर्चे पर राज करे राफेल फ्रांस का 4.5 जेनरेशन मल्टी-रोल फाइटर है, जो 2016 से भारतीय वायुसेना में तैनात है. ऑपरेशन सिंदूर में इसने पाकिस्तानी एयरबेस पर ब्रह्मोस स्ट्राइक्स किए. इसके विस्तृत फायदे…       उन्नत सेंसर और रडार: थेल्स आरबीई2 एईएसए रडार 200+ किमी दूर दुश्मन को डिटेक्ट करता है.सेंसर फ्यूजन से पायलट को 360° व्यू मिलता है, जो नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर में कमाल करता है.       मिसाइल पावर: मेटियोर बीवीआर मिसाइल (150-200 किमी रेंज) दुश्मन को दूर से नेस्तनाबूद करता है.  एससीएएलपी क्रूज मिसाइल गहरे हमलों के लिए, जबकि माइका शॉर्ट-रेंज डॉगफाइट में बेस्ट. भारत के अस्त्र और रुद्रम मिसाइल्स भी इंटीग्रेट हो सकते हैं.      लंबी रेंज और एंड्योरेंस: 3700 किमी रेंज, एयर रिफ्यूलिंग से 9000 किमी तक. हिमालय जैसे हाई-एल्टीट्यूड एरिया में परफेक्ट.      इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (ईडब्ल्यू): स्पेक्ट्रा सिस्टम दुश्मन रडार को जाम कर देता है, स्टील्थ जैसी सिक्योरिटी देता है.       भारत-स्पेसिफिक फायदे: मेक इन इंडिया से 60% लोकलाइजेशन, जॉब्स क्रिएशन. नेवी-एयरफोर्स इंटीग्रेशन से एकरूपता. ट्रेनिंग आसान, क्योंकि पहले से 36 जेट्स हैं. कीमत: 1,000 करोड़ प्रति यूनिट, लेकिन मेंटेनेंस कम.     राफेल की स्ट्रेंथ: तुरंत उपलब्धता और कॉम्बैट-प्रूवन परफॉर्मेंस. Su-57: स्टील्थ का राजा, अदृश्य हमलावर जो दुश्मन को सोचने न दे Su-57 (Felon) रूस का 5वीं जेनरेशन स्टील्थ फाइटर है, जो 2020 से रूसी एयरफोर्स में है. भारत के लिए एक्सपोर्ट वर्जन Su-57E. ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह जरूरी हो गया, क्योंकि पाकिस्तान के J-10सी ने लंबी रेंज दिखाई.     स्टील्थ टेक्नोलॉजी: रडार क्रॉस-सेक्शन 0.1 वर्ग मीटर, जो J-20 से बेहतर. इंटरनल वेपन बे से अदृश्य रहते हुए हमला.       सुपर मैन्युवरेबिलिटी: 3डी थ्रस्ट वेक्टरिंग इंजन (एएल-51) से हवा में 180° टर्न, डॉगफाइट में अजेय. सुपरक्रूज (1975 km/hr बिना आफ्टरबर्नर) से तेज पहुंच.       हाइपरसोनिक वेपन्स: आर-37एम मिसाइल (300-400 किमी रेंज) पाक/चीनी जेट्स को दूर से मार गिराएगी. ब्रह्मोस-ए और हाइपरसोनिक मिसाइल्स इंटीग्रेट हो सकती हैं.      एडवांस्ड एवियोनिक्स: एन-036 बेलका एईएसए रडार + आईआरएसटी सेंसर से 400 किमी डिटेक्शन. सेंसर फ्यूजन से एआई-बेस्ड थ्रेट एनालिसिस.       भारत के लिए स्पेशल: Su-30एमकेआई (260 जेट्स) से 70-80% कॉमन पार्ट्स, मेंटेनेंस आसान. फुल सोर्स कोड एक्सेस से अस्त्र, रुद्रम इंटीग्रेशन हो सकता है.      लोकल प्रोडक्शन से एएमसीए प्रोजेक्ट को बूस्ट. कीमत सस्ती, डिलीवरी 2028 तक. Su-57 की ताकत: 5जी टेक और लो कॉस्ट, जो भारत को इंडिपेंडेंट बनाएगा. जुगलबंदी का कमाल: राफेल-Su-57 से वायुसेना बनेगी अजेय दोनों जेट्स की जोड़ी भारतीय वायुसेना को लेयर्ड स्ट्रक्चर देगी—राफेल मीडियम-वेट वर्कहॉर्स, Su-57 लॉन्ग-रेंज स्टील्थ स्ट्राइकर.     तकनीकी एकीकरण: Su-30 से मैच, लॉजिस्टिक्स 50% कम. राफेल का ईडब्ल्यू + Su-57 का स्टील्थ से हाइब्रिड फोर्स. मेटियोर (150 किमी) + आर-37एम (300 किमी) से बीवीआर वॉर में डोमिनेंस.       स्क्वाड्रन बूस्ट: 3-5 नए स्क्वाड्रन (36-54 जेट्स) बनेंगे, मिग-21 जैसे पुराने बाहर. टू-फ्रंट वॉर (चीन-पाक) में राफेल क्विक स्ट्राइक, Su-57 डीप पेनेट्रेशन.       इकोनॉमिक गेन: लोकल मैन्युफैक्चरिंग से 1 लाख जॉब्स, एक्सपोर्ट पोटेंशियल. AMCA को टेक बूस्ट मिलेगा.        ऑपरेशनल एज: हिमालय में Su-57 की मैन्युवरेबिलिटी, इंडियन ओशन में राफेल की एंड्योरेंस काम आएगी. कुल ताकत: 50% इजाफा, हवाई वर्चस्व सुनिश्चित होगी.  विशेषज्ञ कहते हैं यह जोड़ी J-20 और J-35 को काउंटर करेगी.  चीन और पाकिस्तान पर डायरेक्ट इम्पैक्ट: बैलेंस ऑफ पावर शिफ्ट यह डील चीन-पाकिस्तान के लिए रेड अलर्ट है, खासकर ऑपरेशन सिंदूर के बाद जहां पाक ने चीनी हार्डवेयर यूज किया.  चीन पर असर: चीन के 200+ J-20 स्टील्थ जेट्स हैं, लेकिन Su-57 की थ्रस्ट वेक्टरिंग और 300 किमी मिसाइल से एज मिलेगा. लद्दाख बॉर्डर पर दो-मोर्चा वॉर में भारत मजबूत होगा. इंडियन ओशन में चीनी नेवी को चेक करना आसान होगा, जहां Su-57 पैट्रोलिंग करेगा. अगर चीन J-35 एक्सपोर्ट करता है, तो भारत का काउंटर तैयार. रूस-भारत टाई से चीन की स्ट्रैटेजी कमजोर होगी.    पाकिस्तान पर असर: पाक के JF-17 और J-10सी (PL-15 मिसाइल, 200 किमी) पुराने पड़ जाएंगे. 2025 अंत तक पाक को 40 J-35 मिल सकते हैं, लेकिन Su-57 की 300 किमी रेंज से एयरबेस दूर से नष्ट. ऑपरेशन सिंदूर में पाक को झटका लगा; अब यह डील उसे डराएगी. भारत का हवाई बैलेंस शिफ्ट, पाक-चीन अलायंस को चैलेंज मिलेगा. … Read more

शुगर-फ्री प्रोडक्ट्स में मौजूद सोर्बिटोल लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है, स्टडी में चेतावनी

 नई दिल्ली आइसक्रीम, डाइट सोडा, च्युइंग गम और अन्य शुगर-फ्री प्रोडक्ट ऐसे होते हैं जो हर उम्र के लोगों को पसंद होती हैं. मार्केट में हों या फिर मॉल में, ये चीजें काफी आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं. एक नई स्टडी के मुताबिक, इन  शुगर-फ्री आइटम्स में कृत्रिम मिठास के लिए सोर्बिटोल का उपयोग होता है जो लिवर के लिए खतरनाक होता है और फैटी लिवर डिजीज का जोखिम बढ़ा सकता है. इस स्टडी ने इन चीजों का इस्तेमाल करने वाले लोगों के मन में सवाल पैदा कर दिया है. क्या कहती है स्टडी? European Medical Journal में पब्लिश हुई स्टडी के मुताबिक, शुगर-फ्री या डाइट प्रोडक्ट में जो सोर्बिटोल होता है, उस स्वीटनर को छोटी आंत में ठीक से तोड़ नहीं पाती जिससे यह लिवर में जाकर फैट जमने की प्रोसेस को बढ़ा देता है और लिवर की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये स्वीटनर सीधे तौर पर तो नहीं लेकिन लंबे समय तक सेवन करने पर नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) का खतरा बढ़ा सकते हैं. रिसर्च कहती है जो रोजाना लगभग 1 कैन डाइट सोडा या शुगर-स्वीटेड ड्रिंक पीने से नॉन-अल्कोहॉल फैटी लिवर डिजीज को जोखिम बढ़ जाता है. ये खतरा डाइट सोडा से लगभग 60% और शुगर ड्रिंक से 50% अधिक होता है. इसलिए एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि पानी या बिना स्वीटनर वाले लिक्विड्स का सेवन करना अधिक सुरक्षित और हेल्दी होता है. सोर्बिटोल और लिवर डिजीज का संबंध रिसर्च में सामने आया है कि हेल्दी आंतों के बैक्टीरिया सोर्बिटोल को तोड़ते हैं लेकिन जब ये बैक्टीरिया कम हो जाते हैं या संक्रमित हो जाते हैं, तब सोर्बिटोल का शरीर में जमाव होना शुरू हो जाता है. यह सोर्बिटोल सीधे लिवर तक पहुंचकर वहां फैट के जमाव का कारण बनता है जिससे नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज का खतरा बढ़ जाता है. इससे पहले की यह बीमारी आमतौर पर शराब से जुड़ी जानी जाती थी, लेकिन अब यह नॉन-अल्कोहॉल फैटी लिवर डिजीज के रूप में अधिक सामान्य हो गई है. डाइट सोडा और शुगर फ्री चीजों से कैसे खतरा? डाइट सोडा और अन्य कम चीनी या शुगर-फ्री ड्रिंक्स के सेवन से भी लिवर की समस्याएं हो सकती हैं क्योंकि इनमें इस्तेमाल होने वाले आर्टिफिशियल स्वीटनर्स और सोर्बिटोल, आंत के बैक्टीरिया के संतुलन को बिगाड़ सकते हैं. यह न केवल लिवर फैट को बढ़ाता है बल्कि मेटाबोलिक सिंड्रोम, टाइप 2 डायबिटीज और दिल की बीमारियों के जोखिम को भी बढ़ा सकता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि शुगर-फ्री ऑपशंस हमेशा हेल्दी नहीं होते, बल्कि इनसे लिवर डिजीज का जोखिम भी हो सकता है. आइसक्रीम, डाइट सोडा और च्युइंग गम जैसी चीजों में उपयोग हो रहे सोर्बिटोल और अन्य आर्टिफिशियल स्वीटनर्स लिवर की हेल्थ के लिए हानिकारक हो सकते हैं, जिससे इनके सेवन को सीमित करना चाहिए.