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यमन में बंदी बनाए गए रवींद्रन की घर वापसी, भारत ने सहयोग के लिए जताया आभार

यमन  यमन में करीब पांच महीने से कैद भारतीय क्रू मेंबर अनिलकुमार रवींद्रन को आखिरकार रिहा कर दिया गया है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को यह जानकारी दी है। मंत्रालय के बयान के मुताबिक रवींद्रन लाइबेरिया झंडे वाली ग्रीक के एक बल्क कैरियर शिप MV Eternity C के क्रू का हिस्सा थे। इस जहाज पर बीते जुलाई महीने में हूती विद्रोहियों ने हमला किया था।   विदेश मंत्रालय के मुताबिक हमले के बाद रवींद्रन को पकड़ लिया गया था और वह 7 जुलाई 2025 से हिरासत में थे। मंत्रालय ने बताया कि रवींद्रन बुधवार को ओमान के मस्कट पहुंच गए हैं और जल्द ही भारत लौटने की उम्मीद है। इससे पहले सरकार लंबे समय से उनकी सुरक्षित रिहाई और वापसी सुनिश्चित करने के लिए कई पक्षों के साथ लगातार समन्वय कर रही थी। विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा, “भारत सरकार, MV Eternity C के भारतीय क्रू मेंबर अनिलकुमार रवींद्रन की रिहाई का स्वागत करती है। वह 7 जुलाई 2025 से यमन में हिरासत में थे। रवींद्रन मस्कट पहुंच गए हैं और जल्द ही भारत लौटेंगे। सरकार इस मामले में कई पक्षों के साथ समन्वय कर रही थी।” ओमान के प्रति आभार भारत ने रवींद्रन की रिहाई में सहयोग के लिए ओमान सरकार का आभार जताया है। हूती समर्थित मीडिया अल-मसीरा ने बताया है कि इस रिहाई में ओमान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई और क्रू को सुरक्षित तरीके से सना से मस्कट पहुंचाया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक हूती विद्रोहियों द्वारा जुलाई में निशाना बनाए गए Eternity C जहाज के सभी 10 क्रू मेंबरों को रिहा कर सना से ओमान ट्रांसफर किया गया है।  

श्री हरमंदिर साहिब नतमस्तक हुए डेरा ब्यास प्रमुख गुरिंदर सिंह ढिल्लों

पंजाब  डेरा राधा स्वामी सत्संग ब्यास के प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों ने आज श्री हरमंदिर साहिब नतमस्तक हुए। इस मौके पर उनके साथ सुरक्षा अधिकारी भी थे। उन्होंने परिक्रमा करने के बाद गुरु घर में मत्था टेका। उन्होंने गुरबानी कीर्तन सुना और सभी की भलाई के लिए अरदास भी की। इस मौके पर उन्होंने मीडिया से दूरी बनाए रखी।

महिलाओं के खातों में पहुंची बड़ी राहत, महतारी वंदन योजना की 22वीं किस्त जारी

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को गति देने वाली राज्य सरकार की प्रमुख योजना महतारी वंदन के तहत आज 22वीं किस्त का भुगतान मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में आयोजित कार्यक्रम में बटन दबाकर किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर अपने उद्बोधन में कहा कि महतारी वंदन योजना हमारी माताओं और बहनों के सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक स्वावलंबन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का जीवंत उदाहरण है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की महिलाएँ परिवार, समाज और राज्य की उन्नति की आधारशिला हैं, और उनका सशक्त होना एक सशक्त प्रदेश की अनिवार्य शर्त है। मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि प्रति माह सीधे बैंक खातों में राशि अंतरण होने से माताओं को न केवल आर्थिक संबल मिलता है, बल्कि परिवार की पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा संबंधी ज़रूरतों को पूरा करने में भी सुनिश्चित सहयोग मिलता है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र हितग्राही इस सहायता से वंचित न रहे तथा पूरी पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ योजना का लाभ निरंतर मिलता रहे। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि महतारी वंदन योजना आने वाले समय में लाखों परिवारों के जीवन में स्थायी सकारात्मक बदलाव का मार्ग प्रशस्त करेगी और छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा को नई ऊर्जा देगी। गौरतलब है कि महतारी वंदन योजना 1 मार्च 2024 से प्रारंभ होने के बाद अब तक 21 किस्तों में कुल 13,671.68 करोड़ रुपये की सहायता राशि लाभार्थियों को प्रदान की जा चुकी है। इस माह 67,78,674 पात्र हितग्राहियों के बैंक खातों में राशि डीबीटी के माध्यम से अंतरित की गई। इसमें 67,71,012 हितग्राहियों को 633.89 करोड़ रुपये तथा नयड नेल्ला नार क्षेत्र की 7,662 महिलाओं को 76.30 लाख रुपये प्रदान किए गए। इस प्रकार महतारी वंदन योजना की 22वीं किस्त अंतर्गत कुल 634.65 करोड़ रुपये की राशि पात्र हितग्राहियों को अंतरित की गई।

बिक्रम सिंह मजीठिया की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

पंजाब  अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की जमानत याचिका को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने मजीठिया को बड़ा झटका देते हुए उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया और उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। बिक्रम मजीठिया इस समय आय से अधिक संपत्ति मामले में नाभा जेल में बंद हैं। गौरतलब है कि अदालत ने 20 नवंबर को मजीठिया की जमानत याचिका पर निर्णय सुरक्षित रख लिया था, जिसका फैसला आज सुना दिया गया है।  

2009 का एसिड अटैक… अब तक ट्रायल जारी! CJI ने दिखाई कड़ी नाराज़गी, अदालत में लगाई फटकार

नई दिल्ली  साल 2009 में महिला पर हुए एसिड अटैक मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है। जब याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि 16 साल पहले 2009 में उस पर एसिड से हमला हुआ था और अब तक मामले का ट्रायल चल रहा है तो इस पर सीजेआई सूर्यकांत भड़क उठे और जमकर क्लास लगाई। उन्होंने कहा कि अगर राष्ट्रीय राजधानी ऐसे हालात को हैंडल नहीं कर सकती है तो फिर कौन संभालेगा? यह तो शर्म की बात है। सिस्टम का मजाक है।   सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सभी हाई कोर्ट से एसिड अटैक केस में पेंडिंग ट्रायल के बारे में डेटा मांगा। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सभी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पेंडिंग एसिड अटैक केस के बारे में डेटा जमा करने का निर्देश दिया है। बार एंड बेंच के अनुसार, मामले की याचिकाकर्ता ने कोर्ट में कहा, ''मेरे ऊपर 2009 में एसिड अटैक हुआ था, अभी तक ट्रायल चल रहा है। 2013 तक केस में कुछ नहीं हुआ और ट्रायल, जो अब दिल्ली के रोहिणी में हो रहा है, अब आखिरी सुनवाई के स्टेज में है।'' सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ''यह जुर्म 2009 का है और ट्रायल अब तक पूरा नहीं हुआ। अगर नेशनल कैपिटल ऐसी चुनौतियों को हैंडल नहीं कर पाएगी तो कौन करेगा? यह सिस्टम के लिए शर्म की बात है।'' याचिकाकर्ता ने बताया कि वह अपना केस लड़ने के साथ-साथ दूसरे एसिड अटैक सर्वाइवर्स की मदद के लिए भी काम कर रही हैं। सीजेआई ने याचिकाकर्ता से ट्रायल में तेजी लाने के लिए एक ऐप्लीकेशन फाइल करने के लिए कहा। साथ ही कहा कि इस मामले का ट्रायल रोज होना चाहिए। बेंच ने सभी हाई कोर्ट की रजिस्ट्री से चार हफ्ते के अंदर डिटेल मांगी। सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता ने उन पीड़ितों की बुरी हालत पर रोशनी डाली जिन्हें एसिड पीने के लिए मजबूर किया जाता है, अक्सर आर्टिफिशियल फीडिंग ट्यूब और गंभीर विकलांगता के सहारे जिंदा रहते हैं। बेंच ने उनकी इस अर्जी पर भी केंद्र से जवाब मांगा कि एसिड अटैक सर्वाइवर्स को दिव्यांगों की कैटेगरी में रखा जाए ताकि वेलफेयर स्कीम्स तक उनकी पहुंच पक्की हो सके।  

1.20 करोड़ का साइबर फ्रॉड खुलासा: बंधन बैंक के 27 फर्जी खातों का इस्तेमाल, आठ गिरफ्तार

दुर्ग सायबर फ्रॉड के मामले में दुर्ग पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। ठगी के पैसों को रखने के लिए अपने बैंक खाते को किराए पर देने वाले 08 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें भिलाई के ख़ुर्शीपार, सुपेला, सेक्टर 4 और दुर्ग के आरोपी शामिल हैं। दरअसल ये सभी आरोपी सुपेला के बंधन बैंक के ब्रांच में खाता खोलकर अपने अकाउंट को म्युल अकाउंट बनाकर किराए पर दे दिया था। भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित समन्वय पोर्टल से म्युल अकाउंट होने का अलर्ट आया, जिसमें सायबर धोखाधड़ी से प्राप्त की गई राशि को इन खातों में जमा कराया गया था। लगभग 27 खातों में धोखाधड़ी से प्राप्त एक करोड़ 20 लाख 57 हजार रुपए जमा कराए गए हैं। इतना ही नहीं इन पैसों का लेनदेन भी किया गया है। अलर्ट आने पर दुर्ग पुलिस ने साइबर फ्रॉड से संबंधित सभी खातों को होल्ड पर रखवाकर खाता धारकों के खिलाफ मामला दर्ज कर सभी को गिरफ्तार किया है। फिलहाल आगे की कार्रवाई की जा रही है। 27 म्युल अकाउंट धारकों में सुपेला के रावणभाटा निवासी रनजीत महानंद, ख़ुर्शीपार निवासी प्रमिला जंघेल, सेक्टर 32 निवासी के आकाश राव, रिसाली सेक्टर निवासी विपिन कुमार सिरसाम, सेक्टर 5 निवासी मानवी बेरी, जुनवानी निवासी आशीष गुप्ता, पिंकी कुर्रे कोहका, सुपेला निवासी रमाकान्त बंसोड़ को गिरफ्तार किया गया है।

रचिन रविंद्र–लैथम का तूफ़ान! कीवी टीम ने वेस्टइंडीज को 481 रन से दबाव में झोंका

नई दिल्ली रचिन रविंद्र और टॉम लैथम के शतकों की मदद से न्यूजीलैंड ने वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टेस्ट क्रिकेट मैच के तीसरे दिन गुरुवार को क्राइस्टचर्च में 481 रन की बढ़त हासिल करके मैच पर अपना शिकंजा मजबूत कस दिया। रविंद्र ने 176 रन की लाजवाब पारी खेली जबकि सलामी बल्लेबाज लैथम ने 145 रन बनाए। इन दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 279 रन की साझेदारी की जिससे न्यूजीलैंड ने तीसरे दिन का खेल समाप्त होने तक अपनी दूसरी पारी में चार विकेट पर 417 रन बनाए। न्यूजीलैंड ने अपनी पहली पारी में 231 रन बनाने के बाद वेस्टइंडीज को 167 रन पर आउट करके 64 रन की बढ़त हासिल की थी। न्यूजीलैंड की दूसरी पारी के 417 रन में से 200 रन 50 चौकों से आए, जिनमें से 27 चौके रविंद्र ने लगाए। दिन का खेल समाप्त होने के समय विल यंग 20 और माइकल ब्रेसवेल छह रन बनाकर खेल रहे थे। लैथम ने 179 गेंदों में नौ चौकों की मदद से अपना शतक पूरा किया। रविंद्र ने अपना चौथा टेस्ट शतक 108 गेंदों में 16 चौकों और एक छक्के की मदद से पूरा किया। लैथम ने अपनी पारी में 250 गेंद का सामना किया और 12 चौके लगाए जबकि रविंद्र ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी की। उन्होंने 185 गेंद का सामना किया और अपनी पारी में 27 चौके लगाने के अलावा एक छक्का भी जड़ा। इन दोनों के अलावा डेवोन कॉनवे ने 37 रन का योगदान दिया। स्टार बल्लेबाज केन विलियमसन केवल नौ रन ही बना सके। उनके आउट होने से न्यूजीलैंड का स्कोर दो विकेट पर 100 रन हो गया था। इसके बाद रविंद्र और लैथम ने बड़ी साझेदारी निभाई।  

मंदिर में दीपक न जलाने पर हाईकोर्ट नाराज़, दरगाह विवाद फिर सुर्खियों में

चेन्नई  मद्रास हाई कोर्ट की मदुरई बेंच ने बुधवार को एक तीखे शब्दों वाला अवमानना आदेश जारी किया। यह आदेश इसलिए जारी किया गया क्योंकि अधिकारियों ने तिरुप्परंकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित विवादित पत्थर स्तंभ- दीपथून पर कार्तिगई दीपम त्योहार का दीपक जलाने के उसके पहले के निर्देश का पालन नहीं किया। यह स्थान लंबे समय से हिंदू मंदिर प्रशासन और बगल में स्थित मुस्लिम दरगाह के बीच विवाद का केंद्र रहा है। थिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर भगवान सुब्रमण्य स्वामी का मंदिर और सिकंदर बधूसाह दरगाह स्थित है। सोमवार को न्यायमूर्ति जी. आर. स्वामिनाथन ने मंदिर प्रशासन को निर्देश दिया था कि दीपथून पर परंपरा के अनुसार दीपक जलाया जाए। यह स्थान दरगाह के पास स्थित पहाड़ी का निचला शिखर है। बुधवार शाम 6 बजे इस आदेश के पालन न होने पर न्यायाधीश ने अधिकारियों को जानबूझकर अवमानना का दोषी ठहराते हुए कहा कि आदेश स्पष्ट था और इसे लागू न करना न्यायालय की प्रतिष्ठा को चुनौती देना है। अवमानना की कार्रवाई के तहत न्यायालय ने याचिकाकर्ता और उनके साथ दस लोगों को CISF सुरक्षा में दीपथून पर चढ़कर दीपक जलाने की अनुमति दी। अदालत ने इसे प्रतीकात्मक लेकिन आवश्यक कदम बताया। ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख अपने सोमवार के आदेश में न्यायमूर्ति स्वामिनाथन ने 1920 के एक दीवानी वाद और प्रिवी काउंसिल के पुराने फैसलों का हवाला दिया था। उन्होंने कहा कि विवादित स्तंभ मंदिर की भूमि पर स्थित है, न कि दरगाह के नियंत्रण क्षेत्र में। अदालत के अनुसार पहाड़ी दो शिखरों में विभाजित है- ऊपरी शिखर पर दरगाह और निचले शिखर पर दीपथून है। न्यायाधीश ने लिखा था कि निचले शिखर पर दीप जलाने से दरगाह या मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। CISF की तैनाती से बढ़ी संवेदनशीलता श्रद्धालुओं के एक वर्ग और तिरुप्परनकुंद्रम मंदिर प्रबंधन के बीच गतिरोध के बाद मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरई पीठ ने बुधवार को याचिकाकर्ता को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की सुरक्षा घेरे में पहाड़ी के प्राचीन स्तंभ पर दीप जलाने का निर्देश दिया। अदालत के पूर्व के निर्देश के बावजूद, बुधवार शाम ‘कार्तिगई दीपम’ के अवसर पर यहां तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर दरगाह के पास प्राचीन स्तंभ पर दीप नहीं जलाया गया, जिसके कारण दक्षिणपंथी संगठन हिंदू मुन्नानी के कार्यकर्ताओं और श्रद्धालुओं के एक वर्ग ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि दीप को प्राचीन स्तंभ ‘दीपथून’ पर जलाया जाए जैसा कि पीठ ने निर्देश दिया था। एक याचिका के बाद, अदालत ने उच्च न्यायालय पीठ से संबद्ध सीआईएसएफ कमांडेंट को याचिकाकर्ता की सहायता के लिए पर्याप्त संख्या में कर्मियों को तैनात करने का निर्देश दिया, जिन्हें आदेश का कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए 10 अन्य कर्मियों को साथ ले जाने की अनुमति दी गई। इसके बाद, सीआईएसएफ सुरक्षा के साथ तिरुप्परनकुंद्रम आए याचिकाकर्ता राम रविकुमार और अन्य लोगों को पुलिस ने पहाड़ी की ओर बढ़ने से रोक दिया, क्योंकि मदुरै जिलाधिकारी ने मौजूदा कानून और व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए भारतीय नागरिक सुरक्ष संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा जारी की थी। तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई तिरुप्परनकुंद्रम में उस समय तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई जब कुछ लोगों ने पुलिस अवरोधक तोड़कर पहाड़ी पर चढ़ने की कोशिश की। लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इस धक्का-मुक्की में एक पुलिसकर्मी घायल हो गया। न्यायमूर्ति जी आर स्वामीनाथन ने एक दिसंबर को अपने आदेश में कहा था कि सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर के प्रबंधन को तीन दिसंबर को ‘कार्तिगई दीपम’ पर दीप जलाने की सुविधा प्रदान करनी चाहिए। अदालत के निर्देश के बावजूद, तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर दीप नहीं जलाया गया। इसे तमिल महीने कार्तिगई (नवंबर-दिसंबर) में मनाए जाने वाले ‘कार्तिगई दीपम’ उत्सव के तहत, हमेशा की तरह उच्ची पिल्लैयार मंदिर के मंडपम में जलाया गया। कुछ प्रदर्शनकारी दीप जलाने के लिए पहाड़ी पर चढ़ने लगे लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस ने उन्हें पहाड़ी पर चढ़ने से रोक दिया। मंदिर प्रबंधन ने शाम छह बजे होने वाले बहुप्रतीक्षित कार्यक्रम से कुछ घंटे पहले अदालत में अपील दायर की, जिसमें दावा किया गया कि इस कदम से सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है। याचिकाकर्ता रामा रविकुमार ने अदालत से मंदिर प्रबंधन के खिलाफ अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू करने की मांग की थी। पहाड़ी के आसपास के क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू न्यायमूर्ति जी आर स्वामीनाथन ने निर्देश दिया कि शाम छह बजे तक दीप प्रज्वलित कर दिए जाएं, अन्यथा शाम 6.05 बजे अदालत की अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू की जाएगी, और मामले की सुनवाई स्थगित कर दी। अदालत की अवमानना ​​की कार्रवाई की अपील स्वीकार करते हुए न्यायाधीश ने मंदिर के कार्यकारी अधिकारी और मदुरई पुलिस आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया।  

मौसम ने बदली करवट: छत्तीसगढ़ में पारे के नीचे आने के आसार

रायपुर छत्तीसगढ़ में तापमान और गिरने के संकेत हैं। मौसम विज्ञान केंद्र रायपुर के अनुसार अगले 24 घंटों में न्यूनतम तापमान में कोई खास बदलाव नहीं होगा, लेकिन इसके बाद प्रदेश में रात और सुबह की ठंड बढ़ सकती है। विभाग ने अनुमान जताया है कि आने वाले दिनों में न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। फिलहाल पूरे प्रदेश में मौसम शुष्क है और कहीं भी वर्षा की संभावना नहीं है। मौसम सारांश बुधवार को प्रदेश का मौसम पूरी तरह शुष्क रहा। दिन का सबसे अधिक तापमान 29.9°C दुर्ग में दर्ज किया गया, जबकि रात का सबसे कम तापमान 7.8°C अंबिकापुर में रिकॉर्ड हुआ। बारिश के सभी आंकड़े निरंक (शून्य) रहे। रायपुर के लिए स्थानीय पूर्वानुमान आज सुबह कोहरा छाए रहने की संभावना है। इसके बाद दिनभर आकाश सामान्यतः साफ़ रहेगा। अधिकतम तापमान करीब 29°C और न्यूनतम तापमान लगभग 14°C रहने का अनुमान है।

पहली बार SMS अस्पताल में CRS व HIPEC सर्जरी सफल, कैंसर मरीजों के लिए बड़ी राहत

जयपुर राजस्थान के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान एसएमएस मेडिकल कॉलेज, जयपुर ने कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। कॉलेज के शल्य ऑन्कोलॉजी विभाग ने पहली बार साइटोरिडक्शन सर्जरी (CRS) और हाइपरथर्मिक इंट्रापेरिटोनियल कीमोथेरेपी (HIPEC) प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न की गई। यह अत्याधुनिक तकनीक अब राज्य के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र में भी उपलब्ध हो गई है, जिससे उन्नत पेरिटोनियल कैंसर से जूझ रहे मरीजों को जीवनदायी उपचार मिल सकेगा। इस अवसर पर विभाग की ओर से एक लाइव सर्जिकल वर्कशॉप भी आयोजित की गई, जिसमें प्रदेशभर से आए चिकित्सकों, सर्जनों और ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञों ने भाग लिया। वर्कशॉप का टाइम वर्कशॉप सुबह 7:30 बजे शुरू होकर शाम 3:30 बजे तक चली, जहां प्रतिभागियों को CRS और HIPEC की जटिल प्रक्रिया के हर चरण का लाइव अवलोकन कराया गया। कार्यक्रम का संचालन एसएमएस मेडिकल कॉलेज के शल्य ऑन्कोलॉजी विभागाध्यक्ष और आयोजन सचिव डॉ. सुरेश सिंह ने किया। ये मरीजों का जीवनकाल बढ़ाने कारगर कदम-डॉ. सुरेश सिंह डॉ. सुरेश सिंह ने बताया कि CRS+HIPEC उन्नत कैंसर उपचार की एक विशेष तकनीक है, जो उन मरीजों के लिए अत्यधिक प्रभावी मानी जाती है जिनमें कैंसर पेट की झिल्ली (पेरिटोनियम) तक फैल चुका हो। उन्होंने कहा, “यह उपचार पेरिटोनियल कार्सिनोमैटोसिस वाले चुनिंदा मरीजों में जीवनकाल बढ़ाने और बीमारी नियंत्रण में बेहद कारगर सिद्ध होता है। अब इस सुविधा का सरकारी स्तर पर उपलब्ध होना राजस्थान के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।” अत्यधिक महंगी सर्जरी है, लेकिन चिंता की बात नहीं सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि राज्य सरकार ने इस जटिल और अत्यधिक महंगी सर्जरी को मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना में शामिल कर दिया है। यानी AYUSHMAN कार्ड रखने वाले पात्र मरीजों को CRS और HIPEC का पूरा इलाज बिल्कुल निशुल्क मिलेगा। सामान्यतः इस प्रक्रिया का खर्च निजी अस्पतालों में कई लाख रुपये तक आता है, ऐसे में गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों को इससे बड़ा लाभ मिलेगा। क्या है CRS + HIPEC तकनीक? साइटोरिडक्शन सर्जरी (CRS) एक अत्यधिक जटिल ऑपरेशन है, जिसमें पेट के अंदर फैले हर दृश्य ट्यूमर को सावधानीपूर्वक हटाया जाता है। कई मामलों में ओमेंटम, पेरिटोनियम और प्रभावित आंत के हिस्सों को भी निकाला जाता है ताकि कैंसर के बोझ को अधिकतम रूप से कम किया जा सके। सूक्ष्म कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में मदद करती है इसके बाद उसी ऑपरेशन में HIPEC किया जाता है। इसमें गर्म कीमोथेरेपी दवा (लगभग 42°C) को एक विशेष HIPEC मशीन की सहायता से 60-90 मिनट तक पेट की गुहा में प्रवाहित किया जाता है। यह दवा सीधे कैंसरग्रस्त क्षेत्र पर प्रभाव डालती है और बचे हुए सूक्ष्म कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में मदद करती है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि दवा पूरे शरीर में नहीं जाती, जिससे दुष्प्रभाव कम होते हैं और उपचार अधिक असरदार बनता है। किन मरीजों को सबसे अधिक लाभ? CRS + HIPEC तकनीक मुख्य रूप से उन्नत ओवरी कैंसर अपेंडिक्स कैंसर कोलन कैंसर पेरिटोनियल मेसोथेलियोमा पेट की झिल्ली में फैले अन्य कैंसरों में उपयोगी मानी जाती है। इस प्रक्रिया ने कई अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में सिद्ध किया है कि यह चुनिंदा मरीजों के जीवनकाल को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाती है। राजस्थान के लिए बड़ी उपलब्धि इस अत्याधुनिक सर्जरी के सरकारी अस्पताल में शुरू होने से राज्य के कैंसर उपचार ढांचे को बड़ा मजबूत आधार मिलेगा। अब मरीजों को महंगे निजी अस्पतालों के बजाय एसएमएस जैसे उच्चस्तरीय सरकारी संस्थान में उत्कृष्ट और सुलभ उपचार की सुविधा मिलेगी।