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रायपुर में इनोवेशन का धमाका: टेकस्टार्स स्टार्टअप वीकेंड ने बदला युवाओं का भविष्य

रायपुर छत्तीसगढ़ में युवाओं के नवाचार, उद्यमिता और स्टार्टअप संस्कृति को मजबूत आधार देने की दिशा में धमतरी जिले ने ऐतिहासिक पहल की है। विश्वस्तरीय स्टार्टअप एक्सीलरेटर टेकस्टार्स के सहयोग से जिला प्रशासन धमतरी तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा 28 से 30 नवंबर 2025 तक तीन दिवसीय टेकस्टार्स स्टार्टअप वीकेंड धमतरी का सफल आयोजन किया गया। यह आयोजन पहली बार प्रदेश के किसी गैर-महानगरीय जिले में आयोजित हुआ, जिसने धमतरी को उभरते स्टार्टअप हब के रूप में नई पहचान दिलाई है। स्टार्टअप वीकेंड में 100 से अधिक युवा प्रतिभागियों, 50 संभावित स्टार्टअप टीमों, 20 अनुभवी मेंटर्स और 10 से अधिक निवेशकों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों को 54 घंटों तक सतत कार्य करते हुए अपने विचारों को निवेश योग्य मॉडल में बदलने, बिजनेस मॉडल बनाने, प्रोडक्ट डेवलपमेंट, मार्केट एनालिसिस, पिच डेक निर्माण और स्केलिंग तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। मेंटर्स ने टेक्नोलॉजी, फूड प्रोसेसिंग, एग्री-इनोवेशन, हेल्थकेयर, ई-कॉमर्स, पर्यटन, डिजिटलीकरण और एंटरटेनमेंट सेक्टर के स्टार्टअप आइडियाज पर विशेष मार्गदर्शन दिया। कई अभिनव विचार निवेशकों की विशेष रुचि का केंद्र बने। जिला प्रशासन की पहल—धमतरी को स्टार्टअप मैप पर स्थापित करने का लक्ष्य जिला कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने आयोजन को धमतरी के नवाचार तंत्र के लिए मील का पत्थर बताते हुए कहा कि हमारा  उद्देश्य है कि धमतरी के युवाओं को बड़े शहरों जैसी सभी स्टार्टअप सुविधाएँ और अवसर यहीं मिलें। स्टार्टअप वीकेंड ने सिद्ध किया कि यहां के युवा न केवल रचनात्मक हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता रखते हैं। यह आयोजन आगे भी प्रत्येक वर्ष जारी रहेगा, जिससे जिले में उद्यमिता का मजबूत इकोसिस्टम स्थापित होगा  एआईसी महिंद्रा के सीईओ और कार्यक्रम फैसिलिटेटर श्री इस्माइल अकबानी ने इसे छत्तीसगढ़ में अब तक का सबसे बड़ा और सुव्यवस्थित स्टार्टअप वीकेंड बताया। ग्लोबल एक्सीलरेटर टेकस्टार्स से स्थानीय प्रतिभाओं को लाभ टेकस्टार्स के बारे में जानकारी देते हुए विकासगढ़ के संस्थापक श्री मेराज मीर ने बताया कि 2006 से विश्वभर में स्टार्टअप्स को गति देने वाले इस प्लेटफॉर्म की विशेषज्ञता अब सीधे धमतरी के युवाओं तक पहुंच रही है, जिससे उन्हें व्यापक नेटवर्किंग और निवेश अवसर मिलेंगे। जिला प्रशासन ने बताया कि   स्टार्टअप संस्कृति को संस्थागत रूप देने के लिए धमतरी में आगे भी ऐसे आयोजन नियमित रूप से होते रहेंगे। इससे युवाओं को निरंतर मेंटरशिप, फंडिंग एक्सपोज़र और बिजनेस नेटवर्क प्राप्त होंगे।

बार्सा और एटलेटिको का जलवा बरकरार, चैंपियंस लीग में शानदार जीत से बढ़ाया कदम

बार्सिलोना  बार्सिलोना ने जूल्स कोंडे के हेडर से लगाए दो गोल की मदद से आइंट्राच्ट फ्रैंकफर्ट को 2-1 से हराकर चैंपियंस लीग में अहम जीत हासिल की। जीत के साथ बार्सिलोना 36 टीमों के लीग फेज में 13वें नंबर पर आ गया है। शीर्ष 8 में जगह बनाने के लिए बार्सिलोना को दो और मैचों में जीत हासिल करनी होगी। एटलेटिको मैड्रिड ने एक गोल से पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए पीएसवी के खिलाफ 3-2 से जीत हासिल की। गुस टिल ने 10वें मिनट में मैच का पहला गोल किया। अलेक्जेंडर सोरलोथ ने 37वें मिनट में जूलियन अल्वारेज को बराबरी का गोल करने का मौका दिया। इससे पहले डेविड हैंको ने 52वें मिनट में मातेज कोवर के नाहुएल मोलिना के लॉन्ग-रेंज शॉट को बाहर धकेलने के बाद रिबाउंड पर गोल किया, और सोरलोथ ने चार मिनट बाद तीसरा गोल किया। रिकार्डो पेपी ने 85वें मिनट में दूर के पोस्ट पर गोल किया और आखिरी मिनटों में अरमांडो ओबिस्पो ने पास से एक सुनहरा मौका गंवा दिया, जिससे एटलेटिको ने 3-2 से अहम जीत हासिल की। इंटर मिलान के खिलाफ लिवरपूल के लिए इब्राहिमा कोनाटे के पहले हाफ के हेडर को हैंडबॉल के लिए खारिज करने के लिए चार मिनट के वीएआर रिव्यू की जरूरत थी। अधिकारियों ने प्रीमियर लीग चैंपियन का पक्ष लिया और पांच मिनट बाकी रहते पेनल्टी दी। डोमिनिक सोबोस्जलाई ने स्पॉट से गोल करके लिवरपूल की टीम को 1-0 से जीत दिलाई, जो मोहम्मद सलाह के बिना खेली थी। टॉटेनहैम ने स्लाविया प्राग पर 3-0 से आसान जीत हासिल की, जिसमें डेविड जिमा ने 26वें मिनट के बाद गेंद को अपने ही नेट में डाल दिया और मोहम्मद कुदुस ने 50वें मिनट में पेड्रो पोरो पर फाउल के बाद पेनल्टी स्पॉट से बढ़त दोगुनी कर दी। मैच खत्म होने से 10 मिनट पहले जेवी सिमंस ने एक और पेनल्टी को गोल में बदलकर मैच अपने नाम कर लिया। मेसन ग्रीनवुड ने शानदार खेल दिखाया जिससे मार्सिले ने पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए यूनियन सेंट-गिलोइस को 3-2 से हराया। अनन खलैली ने मेजबान टीम को आगे कर दिया, लेकिन इगोर पैक्साओ ने 15 मिनट बाद बराबरी कर ली और ग्रीनवुड ने 41वें और 58वें मिनट में गोल करके मैच का रुख बदल दिया। खलैली ने गोल करके यूनियन को मुकाबले में बनाए रखा। बायर्न म्यूनिख ने जोशुआ किमिच के अपने गोल से वापसी करते हुए स्पोर्टिंग सीपी को अपने घर में 3-1 से हराया।

200 मीटर ज़ोन में अब पूरा नियंत्रण! पंचायत चुनाव 2025 को लेकर नए आदेश जारी

गुरदासपुर राज्य चुनाव आयोग, पंजाब द्वारा राज्य में जिला परिषद् और पंचायत समितियों के चुनाव 14 दिसंबर, 2025 को करवाने के आदेश जारी किए गए हैं। जिला मजिस्ट्रेट गुरदासपुर आदित्य उप्पल ने चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और निर्विघ्न संपन्न कराने तथा अमन-कानून की व्यवस्था बनाए रखने के लिए, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत यह आदेश जारी किए हैं। चुनाव आयोग की हिदायतों के मद्देनजर, यह आशंका जताई गई है कि चुनाव वाले दिन पोलिंग बूथों के 200 मीटर के दायरे के अंदर प्रचार, सेल्युलर फोन/वायरलेस सेट/लाउड स्पीकर, मेगाफोन आदि का प्रयोग, या प्रचार से संबंधित पोस्टर/बैनर लगाने से अमन-शांति भंग हो सकती है। इससे सुरक्षा बलों के काम में बाधा आ सकती है, अमन-कानून की स्थिति बिगड़ सकती है और निजी/सरकारी संपत्ति तथा मानव जीवन को हानि पहुंच सकती है। इसलिए, चुनावों को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए तुरंत ज़रूरी उपाय किए गए हैं। जारी आदेशों के अनुसार, चुनाव वाले दिन 14 दिसंबर, 2025 को जिला गुरदासपुर के अंदर बने पोलिंग बूथों के 200 मीटर के दायरे में कई महत्वपूर्ण प्रतिबंध लागू रहेंगे। इन प्रतिबंधों के तहत पोलिंग बूथों या आस-पास की सार्वजनिक/निजी जगह पर किसी भी उम्मीदवार/व्यक्ति/समर्थक द्वारा प्रचार नहीं किया जाएगा। पोलिंग बूथों के नजदीक किसी भी व्यक्ति द्वारा शोर शराबा या हुल्लड़बाज़ी नहीं की जाएगी। पोलिंग बूथों के 200 मीटर के दायरे के अंदर किसी भी व्यक्ति द्वारा लाउड स्पीकर, वायरलेस सेट, कॉर्डलेस/सेल्युलर फोन, मेगाटोन आदि का प्रयोग नहीं किया जाएगा, न ही प्रचार से संबंधित किसी भी किस्म का पोस्टर/बैनर लगाया जाएगा। साथ ही, कोई भी राजनीतिक पार्टी या उम्मीदवार पोलिंग बूथ के 200 मीटर के दायरे के अंदर अपना पोलिंग बूथ/टेंट नहीं लगाएगा। चुनाव आयोग या संबंधित अधिकारियों द्वारा अधिकृत व्यक्ति के सिवाय, कोई भी व्यक्ति पोलिंग बूथ के 200 मीटर के दायरे के अंदर अपना प्राइवेट वाहन नहीं ले जाएगा। ये आदेश चुनाव ड्यूटी पर तैनात ऑब्ज़र्वर, प्रशासनिक/पुलिस अधिकारी, सुरक्षा कर्मचारी, और पोलिंग/काउंटिंग से संबंधित सरकारी कर्मचारियों पर लागू नहीं होंगे। 

हरियाणा के इस जिले में मौजूद है दूसरा ‘ताजमहल’, इतिहास ऐसा कि सोचने पर मजबूर कर दे

चंडीगढ़  हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के थानेसर शहर में स्थित शेख चिल्ली का मकबरा एक प्रमुख ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थल है। इसकी बनावट और स्थापत्य कला इतनी सुंदर है कि इसे अक्सर "हरियाणा का ताजमहल" कहा जाता है। मकबरे के निर्माण में प्रयुक्त पत्थर और स्थापत्य शैली आगरा के ताजमहल से मिलती-जुलती मानी जाती है। इस मकबरे का निर्माण मुगल राजकुमार दाराशिकोह ने प्रसिद्ध सूफी संत शेख चिल्ली की याद में करवाया था। इसका निर्माण कार्य लगभग 1650 ई. के आसपास पूरा हुआ। दाराशिकोह, जो बादशाह शाहजहाँ का बड़ा बेटा था, शेख चिल्ली को अपना आध्यात्मिक गुरु मानता था। यह मकबरा उसकी श्रद्धा और सूफी परंपरा के प्रति सम्मान का प्रतीक है। मकबरा हर्ष के टीले के पूर्वी किनारे पर स्थित है, जो स्वयं एक प्राचीन ऐतिहासिक स्थल रहा है।   इतिहासकारों के अनुसार, शेख चिल्ली मूल रूप से ईरान से आए थे और भारत आकर उन्होंने कुरुक्षेत्र में जलालुद्दीन साहब साबरी से भेंट की। जलालुद्दीन की आध्यात्मिक प्रसिद्धि से प्रभावित होकर शेख चिल्ली ने यहीं रहना प्रारंभ कर दिया और यहीं उनका जीवन भी समाप्त हुआ। उनकी मृत्यु के बाद, उनके शिष्य ने उनकी याद में इस भव्य मकबरे का निर्माण करवाया। समय के साथ यह ऐतिहासिक स्थल गुमनामी की ओर बढ़ने लगा, लेकिन बाद में इसे भारतीय पुरातत्व विभाग (ASI) द्वारा संरक्षित किया गया। विभाग ने इसकी मरम्मत और संरक्षण का कार्य कर इसे दोबारा जीवित किया। आज यह न केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है, बल्कि इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के लिए भी अध्ययन का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत बन गया है।   शेख चिल्ली का मकबरा हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। इसकी अद्वितीय मुग़ल शैली की वास्तुकला, सुंदर नक़्क़ाशी, और धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व इसे एक अनमोल ऐतिहासिक धरोहर बनाते हैं। घूमने की सलाह     स्थान: थानेसर, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)     प्रसिद्धि: मुग़ल स्थापत्य, सूफी विरासत, पुरातत्वीय महत्व     खुलने का समय: सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक     प्रवेश: पुरातत्व विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार  

दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ये ऐतिहासिक फैसला – नरेंद्र कश्यप

दिव्यांगजन सशक्तिकरण और समावेशी विकास में अग्रणी राज्य होगा उत्तर प्रदेश लखनऊ दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और समावेशी विकास को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 02 दिसंबर को प्रदेश कैबिनेट ने प्रदेश के सभी मंडल मुख्यालयों पर दिव्यांगजन सशक्तिकरण केंद्र (डीडीआरसी) स्थापित करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री, नरेंद्र कश्यप ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश के दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने के लिए योगी सरकार की कैबिनेट ने ऐतिहासिक फैसला लिया है, जो कि दिव्यांगजनों के जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने और उनके सशक्तिकरण के लिए सरकार की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता की परिचायक है।  डीडीआरसी केंद्रों की स्थापना के लिए रूपरेखा निर्माण शुरू  पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री, नरेंद्र कश्यप ने बताया कि कैबिनेट के फैसले को अमल में लाने के लिए विभाग के अधिकारियों ने कार्ययोजना की रूपरेखा तैयार करने का कार्य शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि इस क्रम मई विचार किया जा रहा है की प्रत्येक डीडीआरसी केंद्र पर कम से कम 8 तकनीकी अधिकारी व कर्मचारी नियुक्त किए जाएंगे। ये अधिकारी दिव्यांगजनों की समस्याओं का समाधान, परामर्श, उपचार एवं पुनर्वास का कार्य करेंगे। साथ ही डीडीआरसी केंद्रों के माध्यम से बचपन से किसी भी उम्र तक के दिव्यांगजन की दिव्यांगता का पता लगाकर उसका समाधान कराया जाएगा। डीडीआरसी केंद्रों के पारर्दर्शी क्रियान्वयन के लिए डिजिटल पंजीकरण प्रणाली और ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम को भी लागू किया जाएगा। जिससे दिव्यांगजनों की समस्या का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।  अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त होंगे डीडीआरसी केंद्र कैबिनेट निर्णय का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के सभी 18 मंडलों पर दिव्यांगजनों को एक ही छत के नीचे चिकित्सा, शिक्षा, मनोवैज्ञानिक परामर्श, व्यावसायिक प्रशिक्षण तथा कृत्रिम अंग व सहायक उपकरण जैसी सुविधाएं उपलब्ध करना है। वर्तमान में प्रदेश के 11 मंडल मुख्यालयों पर डीडीआरसी पहले से ही संचालित हैं। इस निर्णय के तहत मौजूदा केंद्रों को अत्याधुनिक बनाया जाएगा एवं शेष मंडल मुख्यालयों पर नये पुनर्वास केंद्र खोले जाएगें। प्रत्येक डीडीआरसी केंद्र में दिव्यांगजनों के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, मनोवैज्ञानिक परामर्श, कृत्रिम अंग व ऑर्थोटिक सहायता, उपकरण वितरण तथा यूडीआईडी (यूनिक डिसेबिलिटी आईडी) कार्ड निर्माण जैसी सेवाएं प्रदान की जाएंगी। डीडीआरसी केंद्रों में न केवल दिव्यांगजनों की जरूरी सुविधांए उपलब्ध करवाई जाएगी, साथ ही उन्हें व्यावसायिक कौशल सिखाकर रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रदेश सरकार की ये पहल सीएम योगी आदित्यनाथ के समावेशी विकास के विजन को साकार करने और दिव्यांग सशक्तिकरण के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की अग्रणी भूमिका निभाने में मील का पत्थर साबित होगी।

रायपुर: रक्षक पाठ्यक्रम छात्रों के सुरक्षित भविष्य के लिए सहायक होगा – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर : रक्षक पाठ्यक्रम छात्रों के सुरक्षित भविष्य गढ़ने में सहायक होगा – मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने प्रदेश के 6 विश्वविद्यालयों के साथ किया एमओयू देश का पहला पाठ्यक्रम:छात्रों को मिलेगी बाल अधिकार एवं संरक्षण की  जानकारी रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की उपस्थिति में राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग एवं प्रदेश के छह विश्वविद्यालयों के मध्य “रक्षक पाठ्यक्रम” के लिए एमओयू संपन्न हुआ। बाल अधिकार एवं संरक्षण पर आधारित यह अनूठा पाठ्यक्रम देश में अपनी तरह का पहला शैक्षणिक नवाचार है।  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि “रक्षक पाठ्यक्रम छात्रों के सुरक्षित और जिम्मेदार भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।” उन्होंने कहा कि यह पाठ्यक्रम युवाओं को न केवल रोजगार के अवसर प्रदान करेगा, बल्कि बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में आवश्यक विशेषज्ञता भी विकसित करेगा। उन्होंने कहा कि कई बार बच्चे भूलवश या भ्रमित होकर गलत दिशा में चले जाते हैं क्योंकि वे अबोध होते हैं। ऐसे बच्चों को सही मार्ग पर लाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी की गारंटी के अधिकांश वादों को पूरा कर लिया है। किसानों के बकाया बोनस, महिलाओं के लिए महतारी वंदन योजना और सबके लिए आवास जैसे महत्वपूर्ण संकल्पों को साकार किया गया है। उन्होंने कहा कि 350 से अधिक प्रशासनिक सुधार लागू कर छत्तीसगढ़ सुशासन के मार्ग पर तेजी से अग्रसर है और इसी उद्देश्य से सुशासन एवं अभिसरण विभाग की स्थापना भी की गई है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने रक्षक पाठ्यक्रम को रिकॉर्ड समय में तैयार करने और विश्वविद्यालयों में इसे लागू करने के लिए आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा और उनकी पूरी टीम को बधाई दी। महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी रजवाड़े ने कहा कि बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में व्यापक प्रयासों की आवश्यकता है। बच्चों से भिक्षावृत्ति कराना, परित्यक्त बच्चों का पुनर्वास, और संवेदनशील मामलों का समाधान—ये सभी अत्यंत चुनौतीपूर्ण विषय हैं। उन्होंने कहा कि “यह पाठ्यक्रम संवेदनशील, सजग और सेवा-भावयुक्त युवा तैयार करने में मील का पत्थर साबित होगा।” उन्होंने इसे राष्ट्रीय स्तर का नवाचार बताते हुए कहा कि भविष्य में छत्तीसगढ़ इस क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में पहचाना जाएगा। उच्च शिक्षा मंत्री  टंक राम वर्मा ने पाठ्यक्रम को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने आयोग और सभी छह विश्वविद्यालयों को पाठ्यक्रम लागू करने हेतु बधाई दी। यह एक वर्षीय स्नातकोत्तर “पीजी डिप्लोमा इन चाइल्ड राइट्स एंड प्रोटेक्शन”  पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर, आंजनेय विश्वविद्यालय, रायपुर, एमिटी विश्वविद्यालय, रायपुर और  शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, भिलाई-दुर्ग में प्रारम्भ होगा। क्या है रक्षक पाठ्यक्रम प्रदेश के किसी भी विश्वविद्यालय में अब तक ऐसा पाठ्यक्रम उपलब्ध नहीं था, जो युवाओं को बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में प्रशिक्षित करते हुए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। इस आवश्यकता को देखते हुए आयोग द्वारा “रक्षक – बाल अधिकार संरक्षण पर एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम” को विकसित किया गया है। इस पाठ्यक्रम से युवाओं को सैद्धांतिक एवं विधिक ज्ञान, विभागीय योजनाओं, संस्थाओं और प्रायोगिक प्रक्रियाओं की गहरी समझ, बाल संरक्षण इकाइयों आदि के सम्बन्ध में जानकारी उपलब्ध होगी।संवेदनशीलता, जागरूकता और बाल-अधिकारों की आत्मिक समझ विकसित करने वाला यह पाठ्यक्रम युवाओं को इस क्षेत्र में कुशल, समर्पित और प्रभावी मानव संसाधन के रूप में तैयार करेगा। आयोग द्वारा पाठ्यक्रम के संचालन, प्रशिक्षण, परामर्श और मार्गदर्शन की संपूर्ण सुविधा विश्वविद्यालयों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा, ,पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर से कुलसचिव प्रो शैलेंद्र पटेल,प्रो ए के वास्तव,संत गहिरा गुरु विश्विद्यालय सरगुजा कुलपति  प्रो राजेंद्र लाकपाले, कुलसचिव  शारदा प्रसाद त्रिपाठी, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति एवं रायपुर संभाग आयुक्त  महादेव कावरे, कुलसचिव  सुनील कुमार शर्मा,आंजनेय विश्वविद्यालय रायपुर कुलपति डॉ. टी.रामाराव कुलसचिव डॉ. रूपाली चौधरी, एमिटी विश्वविद्यालय रायपुर कुलपति डॉ. पीयूष कांत पाण्डेय, कुलसचिव डॉ. सुरेश ध्यानी, शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी भिलाई दुर्ग चांसलर डॉ.आई.पी. मिश्रा, कुलपति डॉ ए. के झा एवं डॉ जया मिश्रा, आयोग के सचिव प्रतीक खरे सहित अन्य विभागीय अधिकारीगण उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ कैबिनेट की बैठक में अहम प्रस्तावों पर मंजूरी, नक्सल मामलों की वापसी और 14 अधिनियमों में संशोधन

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में बुधवार को सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री निवास में मंत्रिपरिषद की महत्वपूर्ण बैठक में नक्सल उन्मूलन, प्रशासनिक सुधार और बजटीय प्रबंधन से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक के बाद उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने पत्रकारों को कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी। बैठक में नक्सल उन्मूलन, प्रशासनिक सुधार और बजटीय प्रबंधन से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने आत्मसमर्पित नक्सलियों के विरुद्ध दर्ज आपराधिक प्रकरणों की समीक्षा और परीक्षण के बाद उन्हें न्यायालय से वापस लेने की प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी। इसके लिए मंत्रिपरिषद उप समिति का गठन किया जाएगा, जो प्रत्येक प्रकरण का परीक्षण कर कैबिनेट के समक्ष अनुशंसा प्रस्तुत करेगी। यह प्रक्रिया छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ति राहत पुनर्वास नीति-2025 के अनुरूप होगी, जिसमें आत्मसमर्पित नक्सलियों के अच्छे आचरण और उनके योगदान को देखते हुए उनके विरुद्ध दर्ज प्रकरणों के निराकरण का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त, जिला स्तरीय समिति भी प्रकरणों की रिपोटर् तैयार कर पुलिस मुख्यालय को भेजेगी। विधि विभाग की राय के बाद मामलों को मंजूरी के लिए कैबिनेट उप समिति के समक्ष भेजा जाएगा। केंद्र सरकार से जुड़े मामलों में आवश्यक अनुमति ली जाएगी। कैबिनेट ने 11 विभागों के 14 अधिनियमों में संशोधन के लिए जन विश्वास विधेयक-2025 (द्वितीय संस्करण) के प्रारूप को मंजूरी दी। इसका उद्देश्य पुराने और जटिल दंडात्मक प्रावधानों को सरल बनाना, छोटे उल्लंघनों पर प्रशासकीय दंड का प्रावधान लाना, न्यायालयों पर भार कम करनाऔर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस तथा ईज ऑफ लिविंग को बढ़ावा देना है। यह निर्णय सुशासन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है जो जन विश्वास विधेयक का दूसरा संस्करण ला रहा है। बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के प्रथम अनुपूरक अनुमान को विधानसभा में प्रस्तुत करने के लिए छत्तीसगढ़ विनियोग विधेयक, 2025 को भी कैबिनेट से मंजूरी मिल गई।  

MP पुलिस में बदलाव, वर्दी पहनकर सोशल मीडिया पर ‘हीरो’ बनने पर रोक, DGP ने जारी की नई SOP

भोपाल मध्य प्रदेश में अब पुलिसकर्मियों का वर्दी पहनकर सोशल मीडिया पर रील्स, वीडियो या फोटो डालकर ‘हीरो’ बनने का दौर खत्म हो गया है। पुलिस महानिदेशक (DGP) ने सख्त रुख अपनाते हुए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी कर दी है, जिसके बाद वर्दी में कोई भी निजी कंटेंट सोशल मीडिया पर पोस्ट करना पूरी तरह बैन कर दिया गया है। नई SOP के अनुसार, पुलिस कर्मी फेसबुक, इंस्टाग्राम, X (ट्विटर), यूट्यूब या व्हाट्सएप पर वर्दी में रहते हुए केवल आधिकारिक कामों से जुड़े पोस्ट ही कर सकेंगे। निजी फोटोशूट, डांस रील्स, ड्यूटी के वीडियो, संवेदनशील जगहों की तस्वीरें या ऐसा कोई भी कंटेंट जो पुलिस विभाग की छवि को चोट पहुंचाए—अब सख्त रूप से प्रतिबंधित है। नई SOP के अहम नियम वर्दी में कोई भी फोटो, वीडियो, रील, स्टोरी पोस्ट करना पूरी तरह प्रतिबंधित। ड्यूटी से जुड़ी संवेदनशील जानकारी/फोटो शेयर करना वर्जित। विभाग की छवि, अनुशासन और जनता का विश्वास बनाए रखने पर जोर। केंद्रीय सिविल सेवा आचरण नियम और संबंधित पुलिस अधिनियमों का पालन अनिवार्य। नियम तोड़े तो होगी कड़ी कार्रवाई विभागीय जांच निलंबन वेतन वृद्धि रोकना पदावनति सेवा से बर्खास्तगी तक पुलिस मुख्यालय का कहना है कि हाल के समय में कुछ पुलिसकर्मी सोशल मीडिया पर वर्दी का दुरुपयोग कर अनचाही चर्चा बटोर रहे थे। इससे विभाग की गरिमा प्रभावित हो रही थी। नई SOP का उद्देश्य पुलिस की छवि को मजबूत करना और बल में अनुशासन कायम रखना है। अब देखने वाली बात यह है कि सोशल मीडिया पर ‘हीरो’ बनने के शौकीन पुलिसकर्मी इस नए नियम का कितनी ईमानदारी से पालन करते हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जयस्तंभ चौक में किया शहीद वीर नारायण सिंह के त्याग और संघर्ष का स्मरण

रायपुर छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और जननायक अमर शहीद वीर नारायण सिंह की पुण्यतिथि पर आज मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित जयस्तंभ चौक पहुँचकर उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह का जीवन त्याग, साहस और न्याय की अनुपम मिसाल है। अंग्रेजी शासन के अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध शहीद वीर नारायण सिंह ने जिस अदम्य साहस के साथ संघर्ष किया, वह छत्तीसगढ़ की गौरवमयी विरासत का स्वर्णिम अध्याय है। मातृभूमि की रक्षा और समाज के वंचित वर्गों के प्रति उनकी निष्ठा हमारे लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सोनाखान के ज़मींदार परिवार में जन्म लेने के बाद भी शहीद वीर नारायण सिंह का हृदय सदैव आदिवासियों, किसानों और गरीब परिवारों के दुःख-संघर्ष से जुड़ा रहा। वर्ष 1856 के विकट अकाल में जब आमजन भूख से व्याकुल थे, तब उन्होंने मानवता को सर्वोपरि मानते हुए अनाज गोदाम का अनाज ज़रूरतमंदों में बाँटकर करुणा, त्याग और साहस का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। यह कदम केवल विद्रोह नहीं था, बल्कि सामाजिक अन्याय, शोषण और असमानताओं के विरुद्ध एक ऐतिहासिक उद्घोष था। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह छत्तीसगढ़ की अस्मिता, स्वाभिमान और जनप्रतिरोध की जीवंत प्रेरणा हैं। गरीबों, किसानों और वंचितों के अधिकारों की रक्षा के लिए उनका जीवन-संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को सदैव न्याय, मानवता और राष्ट्रभक्ति के मार्ग पर अग्रसर करता रहेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शहीद वीर नारायण सिंह के आदर्शों और उनके सपनों के अनुरूप छत्तीसगढ़ के विकास के लिए पूरी निष्ठा से कार्य कर रही है। इस अवसर पर आदिम जाति कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, विधायक श्री पुरन्दर मिश्रा, छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री रूपसिंह मंडावी, छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष श्री रामसेवक पैकरा एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

अमित शाह का विपक्ष पर वार: SIR मुद्दे पर झूठ की राजनीति बंद करें

नई दिल्ली  सांसद में शीतकालीन सत्र के दौरान केंद्रीय मंत्री अमित शाह विपक्ष पर गरजे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष SIR को लेकर झूठ फैला रहा है। EC एक संवैधानिक संस्था है और यह तब बनी थी, जब BJP नहीं बनी थी। अपनी बात को जारी रखते हुए शाह ने कहा कि विपक्ष के सदस्य बार- बार इस मुद्दे पर अपने विचार रख रहे थे, इसलिए उन्हें जवाब देना था। उन्होंने पहले के सभी एसआईआर (SIR) का गहन अध्ययन किया है और कांग्रेस की ओर से फैलाए गए "झूठ" का अपने तर्कों के आधार पर जवाब देना चाहते हैं। SIR पर चर्चा से इनकार का कारण अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि बीते दो दिनों तक संसद की कार्यवाही ठीक से नहीं चल सकी और विपक्ष ने यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकार चर्चा नहीं चाहती। इस पर उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट की। गृह मंत्री ने कहा, "हमने चर्चा के लिए 'ना' कहा, इसके पीछे कारण थे। विपक्ष की मांग थी SIR पर चर्चा की।" उन्होंने तर्क दिया, "यह (एसआईआर) चुनाव आयोग का काम है। अगर इस पर चर्चा होगी, तो जवाब कौन देगा?" शाह ने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है।   इसके अलावा शाह ने  बुधवार को लोकसभा में चुनाव सुधारों पर हो रही चर्चा का जवाब देते हुए, सदन की कार्यवाही बाधित होने और चर्चा से इनकार करने के आरोपों पर विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने साफ किया कि बीजेपी और एनडीए के लोग कभी भी बहस से पीछे नहीं हटते। उन्होंने बताया कि उन्होंने SIR पर चर्चा करने से मना क्यों किया था। चुनाव सुधार पर चर्चा को मिली सहमति गृह मंत्री ने बताया कि जब विपक्ष चुनाव सुधार के व्यापक मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हुआ, तब सरकार ने सहमति दी। अमित शाह ने कहा कि चर्चा चुनाव सुधार पर तय हुई थी, लेकिन विपक्ष के सदस्यों ने बार-बार SIR पर ही अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जवाब तो उन्हें देना ही था।  अमित शाह ने यह स्पष्ट किया कि सरकार संसद को देश की सबसे बड़ी पंचायत मानती है और चर्चा के लिए हमेशा तैयार है, लेकिन विषय संवैधानिक सीमाओं के भीतर होना चाहिए।