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लखनऊ में योगी सरकार के तहत स्थापित हुआ सर्वाधिक रूफटॉप सोलर, हरित ऊर्जा के क्षेत्र में अहम कदम

योगी सरकार के नेतृत्व में लखनऊ में सर्वाधिक रूफटॉप सोलर किया गया स्थापित लखनऊ में 62 हजार से ज्यादा इंस्टॉलेशन लखनऊ के बाद वाराणसी और कानपुर नगर शीर्ष 3 में शामिल 43 दिनों में 50 हजार इंस्टॉलेशन से समृद्ध हो रहा सीएम योगी के हरित यूपी का विजन लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना (PMSGY) के तहत लखनऊ में अब तक 62,271 रूफटॉप सोलर (RTS) इंस्टॉलेशन पूरे हो चुके हैं। यह राज्य के किसी भी जिले से सबसे अधिक है। लखनऊ की इस अगुवाई ने पूरे उत्तर प्रदेश को 3 लाख से अधिक इंस्टॉलेशन का मुकाम छू लिया है, जो योगी सरकार की कुशल मॉनिटरिंग और जनकेंद्रित नीतियों का जीता-जागता प्रमाण है। राजधानी बनी टॉपर योगी सरकार के निर्देश पर लखनऊ जिला प्रशासन, यूपीनेडा और डिस्कॉम की टीम ने दिन-रात मेहनत कर 62,271 इंस्टॉलेशन पूरे किए। लखनऊ की यह सफलता अन्य जिलों के लिए प्रेरणा बन रही है और सौर ऊर्जा को घर-घर पहुंचाने में मील का पत्थर साबित हो रही है। अन्य प्रमुख जिलों ने भी दिखाई ताकत लखनऊ के बाद वाराणसी ने 26,208, कानपुर नगर ने 18,562, बरेली ने 12,952 और आगरा ने 11,033 इंस्टॉलेशन कर शानदार प्रदर्शन किया। प्रयागराज (9,719), रायबरेली (8,616), झांसी (7,674), बाराबंकी (6,477) और गोरखपुर (6,262) जैसे जिलों ने भी योगी सरकार की योजना को मजबूती प्रदान की। सभी 75 जिलों में PO नियुक्त कर और 23 जिलों की मासिक दर दोगुनी करने से समावेशी विकास सुनिश्चित हुआ। 43 दिनों में 50,000 इंस्टॉलेशन योगी सरकार के मार्गदर्शन में इंस्टॉलेशन की गति छह गुना बढ़ी है। प्रदेश भर में पहले ढ़ाई लाख इंस्टॉलेशन में 270 दिन लगे जबकि आखिरी 50,000 मात्र 43 दिन में पूरे हुए। यह तेजी लाखों परिवारों को मुफ्त बिजली, कम बिल और अतिरिक्त आय का लाभ दे रही है। उत्तर प्रदेश अब सौर ऊर्जा में टॉप-3 राज्यों में शामिल है। यह सीएम योगी के हरित विकास मॉडल के संकल्प को साकार कर रहा है।

अटलजी के बताए मार्ग पर आगे बढ़ रही है सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

अटलजी भाषा से, भाषण से और व्यक्तित्व से गंगा-यमुना की तरह पवित्र थे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव अटलजी के बताए मार्ग पर आगे बढ़ रही है सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आंध्रप्रदेश के धर्मावरम में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी की प्रतिमा पर किया माल्यार्पण मुख्यमंत्री अटल ज्योति संदेश यात्रा में हुए शामिल भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारत रत्न से सम्मानित पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने राष्ट्र सेवा के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। वे हिमालय के समान विराट व्यक्तित्व के धनी थे। पूरी दुनिया में उनका एक अलग ही सम्मान है। वे भाषा से, भाषण से और व्यक्तित्व से गंगा-यमुना की तरह पवित्र थे। आज आंध्र प्रदेश में उनके जन्मशताब्दी वर्ष में 15 दिवसीय अटल ज्योति संदेश यात्रा की शुरुआत हुई है। यह यात्रा आंध्र प्रदेश के 20 जिलों तक पहुंचेगी और 25 दिसंबर को स्व. वाजपेयी की जयंती के अवसर पर यात्रा का समापन होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आंध्र प्रदेश के सत्य साईं जिले के धर्मावरम में स्व. वाजपेयी की प्रतिमा का अनावरण भी हुआ है। स्व. वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1923 को ग्वालियर के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। उन्होंने देश-दुनिया में अपनी प्रतिभा के बल पर नाम कमाया। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री  एन. चंद्रबाबू नायडू के साथ  वाजपेयी के घनिष्ठ संबंध रहे। उनके कार्यकाल में ही  नायडू एनडीए के प्रेसिडेंट बने थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को धर्मावरम में अटल ज्योति संदेश यात्रा में सहभागिता की एवं स्व. वाजपेयी की विशाल प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अटलजी ने लगातार तीन बार प्रधानमंत्री बनकर देश की जनता की सेवा की। पोखरण में परमाणु परीक्षण किया। कारगिल में पाकिस्तान को सबक सिखाया। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सौगात दी। आज प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी के बताए मार्ग पर देश की सरकार चल रही है। प्रधानमंत्री  मोदी और मुख्यमंत्री  नायडू की दोस्ती पक्की है।  चंद्रबाबू नायडू आंध्र प्रदेश में एनडीए सरकार में मुख्यमंत्री हैं। वे आंध्र प्रदेश को हर क्षेत्र में आगे बढ़ा रहे हैं। प्रधानमंत्री  मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश भी विकास के पथ पर अग्रसर है। एनडीए ने भगवान कृष्ण के वंशज को मध्यप्रदेश की कमान सौंपी है। आंध्र प्रदेश में  नायडू ने सत्या जी को आगे बढ़ाया है। यही सबका साथ-सबका विकास का संकल्प है। जनता के चेहरे के भाव देखकर ऐसा लग रहा है कि आंध्र प्रदेश और मध्यप्रदेश दो बिछड़े भाइयों के समान हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने देशवासियों को आयुष्मान योजना से मुफ्त इलाज, सागर माला, भारत माला, स्टैंड-अप इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया जैसी योजनाएं दी हैं। आज हम प्रधाममंत्री  मोदी और  नायडू के नेतृत्व में आंध्र प्रदेश और देश को आगे बढ़ते हुए देख रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आंध्र प्रदेश के पार्टी अध्यक्ष  टीवीएन माधव को अटल ज्योति संदेश यात्रा के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि अटल ज्योति संदेश यात्रा से आंध्र प्रदेश की जनता को स्व. वाजपेयी के जीवन के विविध पहलुओं से परिचित होने का अवसर मिलेगा। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी कहते थे कि अपना हृदय विशाल बनाओ। सबके साथ, सबके लिए काम और विकास करो। स्व. वाजपेयी की पंक्तियां याद आती हैं- छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता और टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता। कार्यक्रम में विधायक  मधुसूदन रेड्डी, स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में स्थानीयजन उपस्थित थे।  

यह सम्मान हमारी सनातन परंपरा, राम के आदर्शों और छत्तीसगढ़ की विशिष्ट ‘भांचा’ संस्कृति की वैश्विक पहचान है: मंत्री अग्रवाल

रायपुर : संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने दीपावली पर्व के यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल होने पर प्रदेश एवं देशवासियों को दी बधाई एवं शुभकामनाएं यह सम्मान हमारी सनातन परंपरा, राम के आदर्शों और छत्तीसगढ़ की विशिष्ट ‘भांचा’ संस्कृति की वैश्विक पहचान है:  मंत्री अग्रवाल रायपुर खुशियों और प्रकाश का पर्व दीपावली अब विश्व स्तर पर भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता प्राप्त कर चुका है। यूनेस्को की इंटरगवर्नमेंटल कमेटी ने नई दिल्ली स्थित लाल किला परिसर में चल रही बैठक के दौरान ‘दीपावली, द फेस्टिवल ऑफ लाइट्स’ को प्रतिनिधि सूची में शामिल करने का निर्णय लिया, जिससे यह भारत की 16वीं अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर बन गई है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने प्रदेशवासियों और देशवासियों को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं प्रेषित की है। उन्होंने कहा कि अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देने वाली दीपावली को वैश्विक मान्यता मिलना भारत की आध्यात्मिक परंपरा, सांस्कृतिक विविधता और साझा उत्सवधर्मिता की स्वीकृति है। संस्कृति मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि प्रभु राम के वनवास का बड़ा हिस्सा आज के छत्तीसगढ़ क्षेत्र के घने वनों और आश्रमों में व्यतीत हुआ, जिससे यह धरती स्वयं राम की पावन चरण-पथ से अभिमंडित है। ऐतिहासिक और पौराणिक संदर्भों में छत्तीसगढ़ को प्रभु  राम का ननिहाल माना जाता है, क्योंकि माता कौशल्या की जन्मस्थली मानी जाने वाली चंदखुरी में उनका प्राचीन मंदिर स्थित है, जो  राम-कौशल्या संबंध का सजीव प्रतीक स्थल है। उन्होंने कहा कि इसी भावनात्मक रिश्ते के कारण छत्तीसगढ़ की जनता प्रभु राम को स्नेहपूर्वक ‘भांचा राम’ कहकर संबोधित करती है। भांचा के प्रति विशेष सम्मान की अभिव्यक्ति के रूप में यहां चरण स्पर्श करने की लोकपरंपरा प्रचलित है, जो छत्तीसगढ़ी समाज में राम के प्रति अपनत्व, भक्ति और पारिवारिक निकटता की अनूठी मिसाल प्रस्तुत करती है।  अग्रवाल ने कहा कि दीपावली का यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल होना छत्तीसगढ़ के लिए भी गर्व का क्षण है, क्योंकि यह वही त्योहार है जो राम के अयोध्या लौटने की स्मृति में गांव-गांव में लोकोत्सव और पारिवारिक परंपराओं के रूप में यहां विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह मान्यता दीपावली को केवल धार्मिक पर्व न मानकर एक सांस्कृतिक, सामाजिक समरसता, पारिवारिक मिलन, लोककला, दीप सज्जा, रंगोली, गीत-संगीत और पारंपरिक हस्तशिल्प के व्यापक उत्सव के रूप में स्वीकार करती है। उन्होंने रेखांकित किया कि सूची में शामिल होने के बाद भारत और छत्तीसगढ़ की साझा जिम्मेदारी है कि दीपावली से जुड़ी लोकपरंपराओं, शिल्पकला, पर्यावरण-संवेदनशील आचरण और सामूहिक उत्सव संस्कृति को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित और सशक्त रूप से पहुँचाया जाए। संस्कृति मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-संस्कृति, त्यौहारों, नृत्यों, गीतों और आस्थाओं की जड़ें गहराई से रामकथा और ग्रामीण जीवन से जुड़ी हैं। दीपावली को मिली वैश्विक मान्यता इस बात की प्रतीक है कि गाँव की चौपाल से लेकर शहरों की सड़कों तक जलने वाला हर दीया अब विश्व विरासत के आलोक में जगमगा रहा है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के प्रत्येक घरों में सायंकाल दिए जलाकर इस अवसर को उत्सव के रूप में मनाने का आह्वान किया।   अग्रवाल ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे भारतीय संस्कृति के मूल मंत्र सद्भाव, सेवा, साझा आनंद और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राम के आदर्शों, माता कौशल्या की करुणा और ‘भांचा राम’ के प्रति छत्तीसगढ़ की आत्मीय श्रद्धा से प्रेरित होकर प्रदेश सामाजिक व आध्यात्मिक प्रगति के नए आयाम स्थापित करेगा।  राजेश अग्रवाल ने कहा कि यह वर्ष हर घर में सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और नई ऊर्जा लेकर आए। उन्होंने कामना की कि यूनेस्को की यह मान्यता भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को नया आयाम दे, विश्व समुदाय में भारतीय त्योहारों के प्रति जिज्ञासा और सम्मान बढ़ाए, तथा छत्तीसगढ़ को राम के वनगमन पथ और कौशल्या धाम के रूप में देखने आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में सकारात्मक वृद्धि हो। उन्होंने अंत में सभी छत्तीसगढ़ वासियों, भारतीयों और प्रवासी भारतीय समुदाय को दीपावली पर्व के यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल होने पर हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए इसे “विश्व को भारत के सांस्कृतिक प्रकाश से आलोकित करने वाला पर्व” बताया।

रूस-जापान विवाद पर चीन की सीख: बीजिंग ने कहा— बात का बतंगड़ मत बनाओ

जापान  चीन और रूस द्वारा की गई पेट्रोलिंग पर जापान के रिएक्शन पर अब ड्रैगन ने नई नसीहत दी है। चीनी विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि टोक्यो को चीन और रूस की सेनाओं द्वारा की गई इस पेट्रोलिंग से परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह उनके वार्षिक साझा कार्यक्रम का हिस्सा है। गौरतलब है कि चीन और रूस की साझा पेट्रोलिंग के बाद जापान ने भी गुरुवार को इस बात की घोषणा की थी कि उसने अमेरिका के साथ मिलकर एक संयुक्त हवाई अभ्यास किया है। जापानी प्रधानमंत्री के ताइवान पर दिए बयान के बाद चीन और जापान के बीच कूटनीतिक तनाव अपने चरम पर है।   रूस और चीन द्वारा की गई इस पेट्रोलिंग पर चिंता जाहिर करते हुए जापान के संयुक्त चीफ्स ऑफ डिफेंस स्टाफ ने बुधवार को कहा कि इससे क्षेत्र में तनाव का माहौल बढ़ता है। जापान ने आरोप लगाया कि एक दिन पहले दो रूसी Tu-95 परमाणु क्षमता वाले बॉम्बर जापान सागर से उड़कर दो चीनी H-6 बॉम्बर्स से पूर्वी चीन सागर में मिले और फिर दोनों देशों ने जापान के चारों ओर संयुक्त उड़ान भरी। जापान की तरफ से कहा गया कि इसी तनाव को कम करने के लिए जापानी सेना ने भी अमेरिकी सेना के साथ एक संयुक्त अभ्यास किया है। चीन के विमानों ने जापानी फाइटर जेट को किया रडार लॉक इससे पहले भी जापान द्वारा चीन के ऊपर आरोप लगाया गया था कि बीजिंग ने इंटरनेशनल वॉटर्स में दो बार जापानी फाइटर जेट्स को रडॉर लॉक कर दिया था। इसके बाद उसे अपने जहाजों को स्क्रैंबल (तेजी से उड़ान भरकर खतरे की जांच करने) का आदेश देना पड़ा। इसके बाद जापान ने चीनी राजदूत को तलब किया। हालांकि, इस घटना के बाद दोनों पक्षों ने अपने-अपने तरीकों से बयान जारी किया। चीन की तरफ से कहा गया कि जापानी जहाजों ने बिना अनुमति के चीनी क्षेत्र में प्रवेश करके जासूसी करने की कोशिश की थी, इसके बाद तनाव पैदा हुआ। क्या है हालिया विवाद? जापान और चीन के बीच में वैसे तो विवाद काफी पुराना है लेकिन हाल ही में जापान की नई नवेली प्रधानमंत्री तकाइची के एक बयान के बाद विवाद बढ़ गया है। दरअसल, उन्होंने खुले तौर पर ताइवान की तरफदारी करते हुए कहा कि अगर चीन ताइवान की और सैन्य खतरा पैदा करता है या सैन्य कार्रवाई करने की कोशिश करता है तो जापान इसमें हस्तक्षेप करेगा। ताइवान को अपना अभिन्न अंग मानने वाले बीजिंग ने इस बयान के प्रति कड़ी प्रतिक्रिया जताई। कूटनीतिक ही नहीं सैन्य तरीके से भी जापान को परेशान करने के लिए चीन ने अंतर्राष्ट्रीय समंदर में दादागिरी दिखानी शुरू कर दी। इसके बाद से ही दोनों देशों के बीच में लगातार तनाव बढ़ा हुआ है।  

CJI सूर्यकांत की कड़ी टिप्पणी: ‘ऐसी याचिकाएं लेना बंद कीजिए’, आखिर क्या था मामला?

नई दिल्ली  देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच आज भी मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इस मामले में लगातार दायर हो रही याचिकाओं पर सीजेआई ने नाराजगी जताते हुए कहा कि ये सब पब्लिसिटी पाने के लिए किया जा रहा है। CJI सूर्यकांत ने कहा कि हमें सिर्फ SIR जैसे बड़े मामलों पर फोकस न रहकर बल्कि आम आदमी से जुड़े मुकदमों पर भी ध्यान देने की जरूरत है। इस दौरान उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा, “रेलवे एक्सीडेंट का मामला देख लीजिए… एक व्यक्ति की ट्रैक पर मौत हो गई… हमने कुछ मुआवजा दिया फिर भी वारिसों को कुछ नहीं मिला। मुआवजा न मिलने पर वे कहीं गायब हो गए। अब हमने उन्हें ढूँढ़ निकाला और फिर पक्का किया कि उन्हें पैसे मिलें.. सोचिए उस विधवा के चेहरे पर मुस्कान कैसी होगी?”   इसी बीच, CJI सूर्यकांत ने कहा, "अब हर मामले में बार के सदस्यों को एक टाइमलाइन देनी होगी क्योंकि कुछ मामले जो ज़रूरी लगते हैं, वे कोर्ट का सारा समय ले लेते हैं और कई जरूरी खासकर MACT मामले में याचिकाकर्ताओं को समय नहीं मिल पाता है।" उन्होंने कहा, “मैं इस कोर्ट में सभी मामलों के लिए समय का बराबर बंटवारा चाहता हूँ, SIR जैसे जरूरी मामलों में पूरा दिन लग जाता है, जो पिटीशनर मुआवज़े के मामलों वगैरह के लिए आते हैं, वे आखिरी लाइन में बैठे रहते हैं और शाम 4 बजे बिना सुनवाई के घर वापस चले जाते हैं, वे नहीं जानते कि उनका नंबर कब आएगा?”   इसके बाद CJI सूर्यकांत ने कहा, "मैं रजिस्ट्री को इस मामले में (SIR केस में) कोई और नई याचिका स्वीकार न करने का निर्देश दे रहा हूँ। कई लोग अब सिर्फ़ पब्लिसिटी के लिए आ रहे हैं। अब किसी नए मामले की ज़रूरत नहीं है। मुझे ऐसा कहते अफसोस हो रहा है।" इसके बाद जस्टिस सूर्यकांत ने SIR के मुद्दे पर दायर अलग-अलग राज्यों के मामलों की अलग-अलग सुनवाई करने का फैसला करते हुए सभी राज्यों के लिए अलग-अलग तारीखें भी तय कर दीं। UP, केरल के मामले 18 दिसंबर को सुने जाएंगे CJI ने कहा कि तमिलनाडू का मामला 16 तारीख को सुना जाएगा। इस बीच सिब्बल बोले, पश्चिम बंगाल का मामला 17 तारीख तक के लिए टाल दिया गया है। CJI ने बिना उस पर ध्यान देते हुए आगे कहा कि बिहार के सभी मामले आज सुने जाएंगे, जबकि असम के मामले 16 को, WB के मामले भी 16 को और UP, केरल के मामले 18 दिसंबर को सुने जाएंगे।  

सिमरजीत बैंस को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा, FIR रद्द करने से किया इनकार

पंजाब  सिमरजीत बैंस को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। मिली जानकारी के अनुसार हाईकोर्ट ने FIR रद्द करने से इनकार कर दिया है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बरगाड़ी बेअदबी की घटना से जुड़े विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में पूर्व MLA सिमरजीत सिंह बैंस और दूसरों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से इनकार कर दिया है।  IPC कोर्ट को खास अपराधों, खासकर पब्लिक जस्टिस के खिलाफ अपराधों (जैसे झूठी गवाही, कोर्ट में जालसाजी) या कानूनी अथारिटी के अधिकार का संज्ञान लेने से रोकता है, जब तक कि संबंधित पब्लिक सर्वेंट या कोर्ट द्वारा शिकायत दर्ज न की गई हो ताकि फालतू प्राइवेट केस को रोका जा सके और न्यायिक ईमानदारी बनी रहे। कोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 195 के तहत रोक सिर्फ मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेने के स्टेज पर लागू होती है, FIR या जांच के स्टेज पर नहीं। जस्टिस त्रिभुवन दहिया ने कहा कि मजिस्ट्रेट द्वारा अपराधों का संज्ञान लेते समय कानून की सही प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए और वह स्टेज अभी नहीं आया है। इसलिए, इस सेक्शन के नियमों का कथित उल्लंघन इस स्टेज पर संबंधित FIR को रद्द करने की मांग का आधार नहीं है। 

सरकार की नई पहल: घर-घर किचन फार्मिंग से हरियाणा बनेगा हरा-भरा

चंडीगढ़  हरियाणा बीज विकास निगम द्वारा प्रदेश में जल्द ही अपनी सब्जी-अपना फल' योजना की शुरूआत की जाएगी। इस महत्वाकांक्षी योजना का शुभारंभ मुख्यमंत्री नायब सैनी के कर कमलों द्वारा किया जाएगा। यह निर्णय निगम के चेयरमैन देव कुमार शर्मा की अध्यक्षता में पंचकूला में आयोजित हरियाणा बीज विकास निगम की 51वीं वार्षिक आम बैठक में लिया गया। बैठक में निगम के प्रबंध निदेशक राज नारायण कौशिक, निदेशक मनोज बबली, निदेशक दारा सिंह, एन.एस.सी. से डायरैक्टर नानू राम यादव, कंपनी सचिव एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। सबसे पहले बैठक में बड़ी संख्या में पहुंचे शेयर धारकों (किसान) का स्वागत किया गया। अपनी सब्जी-अपना फल योजना के तहत वे लोग भी अपने परिवार के लिए ताजी और शुद्ध सब्जियां व फल उगा सकेंगे, जिनके पास खेत या पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं है।

रायपुर: प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत ग्राम पिपलाकछार में आयोजित हुआ शिविर

रायपुर खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई जिले के अंतर्गत पाण्डादाह वितरण केंद्र अंतर्गत ग्राम पिपलाकछार में प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के प्रचार-प्रसार एवं जनजागरूकता के उद्देश्य से  ग्राम स्तरीय शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में ग्राम सरपंच, पंचगण तथा स्थानीय ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए।     कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों को योजना के अंतर्गत मिलने वाले लाभों, आवेदन की प्रक्रिया, पात्रता तथा सोलर रूफटॉप प्रणाली की स्थापना से संबंधित तकनीकी जानकारी विस्तारपूर्वक दी गई। साथ ही सब्सिडी एवं वित्तीय सहायता संरचना के बारे में भी बताया गया, जिससे आमजन सही तरीके से योजना का लाभ उठा सकें।     शिविर के दौरान ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और बिजली बचत एवं सौर ऊर्जा के उपयोग की दिशा में रुचि प्रकट की। कई ग्रामीणों ने मौके पर ही पंजीयन के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। आयोजन के सफल संचालन के साथ कार्यक्रम सकारात्मक संदेश छोड़ते हुए संपन्न हुआ, जिससे गांव में नवीकरणीय ऊर्जा को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

तलाक में पत्नी ने छोड़ी हर मांग, सुप्रीम कोर्ट बोला— अनोखा समझौता, जीवन में खुशियां मिलें

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक आपसी सहमति से तलाक के मामले में महिला की जमकर तारीफ की। दअसल महिला ने तलाक लेते समय किसी तरह का गुजारा भत्ता यानी एलिमनी नहीं मांगी। इतना ही नहीं, विवाह के समय पति की मां द्वारा उपहार में दिए गए सोने के कंगन भी वापस कर दिए। अदालत ने इसे अत्यंत दुर्लभ समझौता बताते हुए अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत विवाह को भंग कर दिया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई हेतु सूचीबद्ध था। सुनवाई की शुरुआत में ही महिला की ओर से पेश वकील ने अदालत को सूचित किया कि उनकी मुवक्किल किसी प्रकार का भरण-पोषण या अन्य आर्थिक प्रतिपूर्ति की मांग नहीं कर रही हैं। अदालत को बताया गया कि केवल सोने के कंगन लौटाना शेष है। पीठ ने पहले गलतफहमी में यह समझा कि पत्नी अपना स्त्री-धन वापस मांग रही है, लेकिन जैसे ही वकील ने स्पष्ट किया कि ये कंगन तो महिला खुद लौटा रही है, जो शादी के समय पति की मां ने उन्हें भेंट किए थे, तो न्यायमूर्ति पारदीवाला मुस्कुरा उठे। उन्होंने कहा- यह बहुत ही दुर्लभ समझौता है जो हमने देखा है। आजकल ऐसे उदाहरण कम ही देखने को मिलते हैं। अदालत ने अपने आदेश में लिखा- यह उन विरले मामलों में से एक है, जहां किसी भी प्रकार की मांग नहीं की गई। उलटे पत्नी ने विवाह के समय मिले सोने के कंगन लौटा दिए। हमें बताया गया कि ये कंगन पति की मां के हैं। हम इस कदम की सराहना करते हैं, क्योंकि ऐसा आजकल कम ही देखने को मिलता है। सुनवाई के दौरान जैसे ही पत्नी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जुड़ीं, तो न्यायमूर्ति पारदीवाला ने उनसे कहा- हमने इस बात का उल्लेख किया है कि यह उन दुर्लभ मामलों में से है जहां किसी प्रकार का लेन-देन नहीं हुआ। हम आपकी सराहना करते हैं। अतीत को भूलकर खुशहाल जीवन बिताइए। इसके बाद अदालत ने अंतिम आदेश पारित करते हुए कहा- उपरोक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, हम अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेषाधिकार का उपयोग करते हुए दोनों पक्षों के बीच विवाह संबंध को समाप्त करते हैं। यदि पक्षकारों के बीच कोई अन्य कार्यवाही लंबित है, तो वह भी यहीं समाप्त की जाती है। यह निर्णय ऐसे समय आया है जब अक्सर तलाक मामलों में संपत्ति, भरण-पोषण और अन्य आर्थिक दावों को लेकर लंबी कानूनी प्रक्रिया देखने को मिलती है। इस मामले में महिला द्वारा किसी भी दावे से परहेज करना और उपहार वापस करना अदालत के अनुसार असाधारण और सराहनीय कदम है।

पंजाब कांग्रेस एक्शन मोड में: नवजोत कौर-सिद्धू विवाद की रिपोर्ट पार्टी प्रभारी के पास

चंडीगढ़  पंजाब कांग्रेस में फिर से तनाव की स्थिति बनती दिख रही है. पंजाब के पूर्व अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री रहे नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर की ओर से प्रदेश कांग्रेस संगठन और पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ की जा रही बयानबाजी ने तूल पकड़ लिया है. पंजाब कांग्रेस की ओर से सिद्धू दंपति की बयानबाजी और उससे पार्टी को हो रहे नुकसान की एक रिपोर्ट पार्टी के प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल को भेजी गई है. बघेल को भेजी गई इस रिपोर्ट में हाल ही में डॉक्टर नवजोत कौर सिद्धू की बयानबाजी और पिछले 4 सालों में पार्टी के कार्यक्रमों में सिद्धू दंपति की सक्रियता और पार्टी के कार्यक्रमों में हिस्सा नहीं लेने जैसी बातों का जिक्र किया गया है. रिपोर्ट में साल 2022 के तकरार का जिक्र रिपोर्ट में साल 2022 में तत्कालीन प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी द्वारा नवजोत सिंह सिद्धू को लेकर पार्टी आलाकमान को लिखे गए एक पत्र का भी जिक्र किया गया है. इस पत्र में यह बताया गया था कि उस दौरान नवजोत सिंह सिद्धू और चरणजीत सिंह चन्नी के बीच जारी तकरार और भ्रम की स्थिति की वजह से कांग्रेस को तब के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था. उस दौरान जो रिपोर्ट और चिट्ठी प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी की ओर से पार्टी आलाकमान को भेजी गई थी वो भी एक बार फिर से इस ताजा रिपोर्ट का हिस्सा बनाई गई है. ‘सिद्धू दंपति की वजह से हो रहा नुकसान’ पंजाब कांग्रेस की ओर से अब जो रिपोर्ट पार्टी प्रभारी को दी गई है, उसमें सीधे तौर पर लिखा गया है कि सिद्धू की पत्नी डॉक्टर नवजोत कौर सिद्धू के बयानों से पार्टी को खासा नुकसान हुआ है. पिछले कुछ सालों में नवजोत सिंह सिद्धू भी पार्टी लाइन से हटकर या पंजाब कांग्रेस के नेताओं के खिलाफ बयान देते रहे हैं, उनके इस तरह के बयानों से भी पार्टी को लगातार नुकसान ही हुआ है. रिपोर्ट में यह भी सलाह दी गई है कि बागी तेवर दिखा रहे सिद्धू दंपति को अनुशासन में रखना बेहद आवश्यक है, नहीं तो पंजाब में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की छवि और प्रदेश संगठन की छवि को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ नवजोत ने खोला मोर्चा पंजाब कांग्रेस में पिछले दिनों तब हलचल मची थी, जब नवजोत कौर ने सोशल मीडिया के जरिए पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के बारे में बड़ा आरोप लगाया और कहा कि वह उन्हें पंजाब का कांग्रेस अध्यक्ष नहीं मानती हैं. वह एक बेपरवाह, गैर-जिम्मेदार, नैतिक रूप से बेईमान और भ्रष्ट अध्यक्ष हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पंजाब कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के कई दावेदार हैं, लेकिन यह पद उसे ही मिलता है जो 500 करोड़ रुपये की अटैची देता है. उनके इस बयान के बाद प्रदेश इकाई ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया.