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IPL 2026: ये 5 ओवरसीज मैच-विनर रह सकते हैं अनसोल्ड, जानें क्यों गिरा उनका मार्केट

नई दिल्ली  IPL 2026 Auction में अब ज्यादा दिन का समय नहीं बचा है। अबू धाबी में 16 दिसंबर को आईपीएल के आने वाले सीजन के लिए ऑक्शन होना है। ऑक्शन को लेकर तमाम प्रिडिक्शन हो रहे हैं, लेकिन आज आप स्टोरी में जानेंगे कि ऐसे कौन से पांच विदेशी स्टार प्लेयर हैं, जो इस ऑक्शन में अनसोल्ड रह सकते हैं। इनमें एक से एक दिग्गज खिलाड़ी शामिल है। 3 ऑस्ट्रेलियाई प्लेयर और एक-एक न्यूजीलैंडर और इंग्लिश प्लेयर इस लिस्ट का हिस्सा है, जिन्हें शायद ही कोई आईपीएल टीम खरीदेगी। 1. स्टीव स्मिथ ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज स्टीव स्मिथ भी आईपीएल 2026 के मिनी ऑक्शन की फाइनल लिस्ट में हैं, लेकिन उन्होंने आखिरी मुकाबला इस लीग में 2021 में खेला था। इसके बाद से वे कई बार अनसोल्ड रहे हैं। आईपीएल में वे कमेंटेटर के तौर पर भी नजर आ चुके हैं, लेकिन इस बार उनका टी20 फॉर्म अच्छा है, लेकिन फिर भी उनके अनसोल्ड रहने के चांस हैं, क्योंकि स्टीव स्मिथ पारी को एंकर करने के लिए जाने जाते हैं, लेकिन आईपीएल में इम्पैक्ट प्लेयर रूल है तो यहां इस रोल की जरूरत नहीं पड़ती। यही कारण है कि शायद उनको कोई खरीदार नहीं मिलेगा। 2. जैक फ्रेजर मैकगर्क आईपीएल 2024 में तूफानी खेलकर दिखाकर उन्होंने दुनियाभर के क्रिकेट फैंस का ध्यान अपनी ओर खींचा था, लेकिन अब वे आउट ऑफ फॉर्म हैं। 2025 के आईपीएल सीजन में भी उनका प्रदर्शन घटिया था। 2024 में उनका स्ट्राइक रेट 234 से ज्यादा का था, लेकिन 2025 में उनका औसत 106 से भी कम का था। 20 के आसपास का औसत उनका अब टी20 क्रिकेट में है। खराब फॉर्म, अल्ट्रा एग्रेसिव अप्रोच उनके लिए अभिशाप साबित हो सकती है। 3. जोश इंग्लिस लिस्ट में तीसरे ऑस्ट्रेलियाई प्लेयर जोश इंग्लिस हैं। ऑस्ट्रेलिया के लिए तीनों फॉर्मेट में खेलने वाले जोश इंग्लिस ने पिछले सीजन अच्छी बल्लेबाजी की थी। विकेटकीपर का ऑप्शन भी वे देते हैं, लेकिन इस बार उन्होंने साफ कर दिया है कि वे सिर्फ चार मैचों के लिए उपलब्ध रहेंगे। यही कारण है कि उनको कोई भी टीम खरीदना नहीं चाहेगी। कोई भी टीम उनको खरीदकर अपने एक ओवरशीज प्लेयर के स्लॉट को ब्लॉक नहीं करना चाहेगी। 4. गस एटकिंसन इंग्लैंड के पेसर गस एटकिंसन को IPL 2024 से पहले KKR ने चुना था, लेकिन वह उस सीजन नहीं खेले थे, क्योंकि ECB ने उनके वर्कलोड को मैनेज करने के लिए उनसे आईपीएल का कॉन्ट्रैक्ट छुड़वा दिया था। इसके बाद से वे इंग्लैंड के लिए टेस्ट क्रिकेट खेल रहे हैं। व्हाइट बॉल क्रिकेट भी वे खेले हैं, लेकिन आंकड़े सीमित ओवरों की क्रिकेट में अच्छे नहीं हैं। दूसरा कारण ये है कि कई और पेसर्स ऑक्शन पूल में हैं। ऐसे में उनको नजरअंदाज किया जा सकता है। 5. डेवन कॉनवे न्यूजीलैंड के इस टॉप ऑर्डर बैटर के लिए इस बार ऑक्शन में बोली नहीं लगने के पीछे का कारण ये हो सकता है कि उनकी टी20 फॉर्मे में गिरावट आई है। वे उस तेजी के साथ नहीं खेल पा रहे हैं और रन भी नहीं बना पा रहे हैं, जिसकी जरूरत आज के क्रिकेट को सूट करती है। खासकर आईपीएल में इम्पैक्ट प्लेयर को ध्यान में रखते हुए बात की बल्लेबाजी की होगी तो वहां एंकर रोल वाले ओपनर कम दिखेंगे। वह भी विदेशी ओपनर तो इस बार उनको खरीदार मिलना मुश्किल है।

GCA की बड़ी कार्रवाई: इंडिगो विवाद के बीच चार इंस्पेक्टर निलंबित

नई दिल्ली  देश की विमानन व्यवस्था में जारी उथल-पुथल के बीच डीजीसीए (DGCA) ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए अपने चार फ्लाइट ऑपरेशन इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया। ये अधिकारी एयरलाइन की सुरक्षा, पायलट प्रशिक्षण और परिचालन अनुपालन जैसे महत्वपूर्ण कामों की निगरानी करते हैं। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब इंडिगो के CEO पीटर एल्बर्स आज डीजीसीए के सामने पेश हो सकते हैं। बीते दिनों इंडिगो की भारी संख्या में उड़ानें रद्द होने का संकट गहराता गया था। पिछले सप्ताह शुक्रवार को भारत भर में इंडिगो ने 1,600 से अधिक उड़ानें रद्द की थीं, जो अब तक का सबसे बड़ा व्यवधान साबित हुआ। इस संकट का मुख्य कारण Flight Duty Time Limitations फेज-2 को सही तरीके से लागू करने में इंडिगो की विफलता के साथ-साथ क्रू रोस्टर और स्टाफ प्रबंधन में एयरलाइन का कुप्रबंधन था। सरकार ने भी एयरलाइन की योजना और प्रबंधन को इस स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया। जैसे-जैसे रद्द उड़ानों ने यात्रियों की यात्रा योजनाएं बिगाड़ीं, सरकार ने कई कदम उठाए। समय पर रिफंड सुनिश्चित करने के लिए सख्त समयसीमा तय की गई। अन्य एयरलाइनों को टिकट कीमतें नियंत्रित रखने का आदेश दिया गया। इसके अलावा इंडिगो को अपनी दैनिक उड़ानें 10% कम करने का निर्देश दिया गया। पीटीआई के अनुसार, कटौती के बाद इंडिगो 1,950 उड़ानें संचालित करेगा, जिनमें लगभग 3 लाख यात्री सफर करेंगे। सामान्यत: एयरलाइन सर्दियों में करीब 2,300 उड़ानें प्रतिदिन संचालित करती है। इससे पहले गुरुवार को DGCA अधिकारियों को सीधे इंडिगो के मुख्यालय भेजा गया ताकि वे स्थिति की लाइव निगरानी कर सकें। उसी दिन दिल्ली और बेंगलुरु हवाईअड्डों पर 200 से अधिक उड़ानें रद्द हो गईं। नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने संसद को बताया कि इंडिगो ने 1 दिसंबर को हुई बैठक में किसी भी समस्या का संकेत तक नहीं दिया था, जो इस संकट को और गंभीर बनाता है।

MP को नक्सलमुक्त करने का दावा, CM मोहन यादव बोले- लाल सलाम को मिली आखिरी सलामी

 बालाघाट मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्य को नक्सली खतरे से पूरी तरह मुक्त होने का दावा किया. यह घोषणा तब की गई जब बालाघाट जिले में दो इनामी नक्सलियों दीपक और रोहित ने सरेंडर कर दिया. उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में 2026 तक देश से नक्सलवाद को खत्म करने के पक्के इरादे की वजह से मुमकिन हुआ है. CM यादव भोपाल से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बालाघाट में नक्सलियों के सरेंडर से जुड़े 'रिहैबिलिटेशन टू रिजुविनेशन' कैंपेन के तहत आयोजित एक प्रोग्राम को संबोधित कर रहे थे. मध्‍य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नक्‍सलवाद मुक्‍त एमपी का ऐलान करने के साथ कहा कि यह सफलता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में तैयार रणनीति का परिणाम है. सीएम ने बताया क‍ि हमारी नीति स्पष्ट थी या तो नक्सलियों को आत्मसमर्पण करवाया जाएगा या उन्हें खत्म किया जाएगा. आज वही नीति सफल हुई.  नक्सली दीपक और रोहित ने दिन में बालाघाट जिले के बिरसा थाना इलाके के कोरका में सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) कैंप में सरेंडर कर दिया. नक्सली दीपक बालाघाट व रोहित छत्तीसगढ़ का निवासी  11 द‍िसंबर 2025 को मध्‍य प्रदेश के बालाघाट पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में आईजी संजयकुमार, सीआरपीएफ आईजी नीतू भट्टाचार्य, कलेक्टर मृणाल मीना और एसपी आदित्य मिश्रा मौजूद रहे. आईजी संजय कुमार ने बताया कि नक्सली दीपक बालाघाट जिले के पालागोंदी का रहने वाला है  जबकि रोहित छत्तीसगढ़ का निवासी है. सरेंडर के समय दीपक ने कार्बाइन गन और कारतूस भी समर्पित किए हैं. बालाघाट ज‍िला कलेक्टर मृणाल मीना ने बताया कि बालाघाट जिले में नक्सल गतिविधियों के कारण लगभग सौ गांवों के आदिवासी ग्रामीणों तक सरकारी योजनाओं और अन्य मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने में दिक्कत आ रही थी. चूंकि अब जिला नक्सल मुक्त हो चुका है ऐसे में उपरोक्त प्रभावित गांवों में विकास की धारा बहेगी.  पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दीपक और रोहित पर क्रम से 29 लाख रुपए और 14 लाख रुपए का इनाम घोषित किया गया था, और दोनों ने मुख्यधारा में लौटने की इच्छा जताते हुए सरेंडर कर दिया. बालाघाट के एसपी आदित्य मिश्रा ने कहा कि जिले में अब कोई हार्डकोर नक्सली एक्टिव नहीं है. उन्होंने कहा कि दीपक बालाघाट जिले के पलागांवडी का रहने वाला है और दोनों लंबे समय से इलाके में नक्सल गतिविधियों में एक्टिव थे. उन्होंने कहा कि सिक्योरिटी एजेंसियां ​​लंबे समय से उनकी तलाश में थीं और यह एक बड़ी सफलता है. पुलिस अधिकारी ने कहा, "यह सरेंडर CRPF और लोकल पुलिस की जॉइंट कार्रवाई, लगातार दबाव और असरदार स्ट्रैटेजी की वजह से मुमकिन हुआ. इससे इलाके में नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका लगेगा." गुरुवार देर शाम मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि पुलिस अधिकारियों और जवानों की अदम्य हिम्मत और कुर्बानी की वजह से बालाघाट के लाल सलाम को आखिरी सलामी दी गई है. CM यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह के गाइडेंस में आजादी के बाद पहली बार नक्सलियों के खिलाफ कोऑर्डिनेटेड तरीके से एक शानदार और ऐतिहासिक कैंपेन शुरू किया गया. उन्होंने एक ऑफिशियल बयान में कहा, "सेंट्रल लीडरशिप ने नक्सलवाद के खत्म होने के लिए 26 जनवरी 2026 की डेडलाइन घोषित की है." मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलियों के पास सिर्फ दो ऑप्शन हैं, नई जिंदगी का मौका या जिंदगी खत्म. उन्होंने आगे कहा, "सेंट्रल आर्म्ड फोर्सेज और मध्य प्रदेश पुलिस के बहादुर जवानों की मिली-जुली कोशिशों की वजह से 11 दिसंबर को आखिरी दो नक्सलियों के सरेंडर के साथ राज्य नक्सल-फ्री हो गया." CM यादव ने कहा कि राज्य में नक्सलवाद के खत्म होने से मंडला, डिंडोरी और बालाघाट के विकास में आने वाली रुकावटें दूर हो गई हैं. उन्होंने कहा, "हम इस इलाके को विकास के रास्ते पर आगे ले जाने के लिए सबके साथ मिलकर काम करेंगे. हम माओवाद को पनपने नहीं देंगे." साथ ही उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में अपनी जान कुर्बान करने वाले सभी शहीदों को श्रद्धांजलि भी दी. 10 हार्डकोर नक्सलियों ने एक साथ डाले थे हथियार बता दें क‍ि मध्य प्रदेश के बालाघाट में 7 दिसंबर की अपराह्न साढ़े तीन बजे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने 10 हार्डकोर नक्सलियों ने हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया था. मध्य प्रदेश में "पुनर्वास से पुनर्जीवन" के तहत नक्सलियों का यह कोई साधारण सरेंडर नहीं था, क्योंकि इनमें से कई नक्‍सली कैडर KB और MMC ज़ोन में वर्षों तक खूनी वारदातों का हिस्सा रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरेंडर करने वाले कैडर को राज्य की पॉलिसी के तहत नई जिंदगी दी जाएगी और सरकार उन्हें सुरक्षा देने के लिए पूरी तरह तैयार है.

रायपुर: 02 सालों में छत्तीसगढ़ ने बनाई नई पहचान, अब भारत का ग्रोथ इंजन बन गया राज्य”

रायपुर : राज्य सरकार के 02 वर्ष पर विशेष : छत्तीसगढ़ बना भारत का ग्रोथ इंजन    रायपुर विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य अनुरूप छत्तीसगढ़ में न केवल तेजी से अधोसंरचनाएं विकसित हो रही है, बल्कि सस्टेनबल डेवलपमेंट गोल के लक्ष्य को भी हासिल किया जा रहा है। विगत दो वर्षों में छत्तीसगढ़ भारत के विकास इंजन के रूप में भी तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। प्रदेश की नवीन औद्योगिक नीति में डिफेंस, आईटी, एआई, ग्रीन एनर्जी जैसे नए क्षेत्रों को विशेष पैकेज दिया जा रहा है। राज्य में अब तक 7.69 लाख रूपए के निवेश के प्रस्ताव मिल चुके हैं। राज्य में विकास, विश्वास और सुरक्षा का नया वातावरण बना है। राज्य की प्रगति में माओवाद आतंक हमेशा से ही बाधक रही है। अब यह बाधा दूर होने जा रही है। माओवाद अब अंतिम सांसें ले रहा है।  मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सुशासन, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक सुदृढ़ एवं परिणाम आधारित बनाने के लिए सुशासन एवं अभिसरण विभाग का गठन किया है। शासन व्यवस्था में अनुशासन और समयबद्धता सुनिश्चित करने हेतु 01 दिसम्बर 2025 से मंत्रालय महानदी भवन में अधिकारियों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू कर दी गई है, जिससे कार्य संस्कृति और जवाबदेही को नई पहचान मिल रही है। प्रदेश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण जुड़ा है नवा रायपुर अटल नगर में छत्तीसगढ़ के नए भव्य विधानसभा भवन का लोकार्पण प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा किया गया। यह विधानसभा भवन नई ऊर्जा, नई सोच और विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प का प्रतीक है। पिछले 2 वर्षों में बस्तर और सरगुजा अंचल के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए वहां सड़क, रेल, स्वास्थ्य और संचार सहित कई नई परियोजनाएं भी शुरू की गई। नई औद्योगिक नीति में पर्यटन को उद्योग का दर्जा  दिया गया है। बस्तर में पर्यटन सुविधाओं को बढ़ाने का प्रयास किए जा रह हैं। इसके लिए नई होम स्टे पॉलिसी और इको टूरिज्म के लिए विशेष प्रावधान रखे है। बस्तर और सरगुजा अंचल में उद्योगों की स्थापना पर विशेष सुविधाएं, छूट और रियायतें दी जा रही है। इसके अलावा उद्योगों को विशेष पैकेज के अंतर्गत सस्ती जमीन उपलब्ध कराई जा रही है।  नियद नेल्ला नार योजना के अंतर्गत माओवाद आतंक से प्रभावित क्षेत्रों में स्थापित 69 सुरक्षा कैम्पों के माध्यम से मूलभूत सुविधाओं के साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। बस्तर की बदलती फिजा को सबके सामने लाने में बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे बड़े आयोजनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बस्तर के युवा अब विकास से जुड़ना चाहते है, इसकी बानगी यहां चलाए जा रहे हैं। स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रमों में देखी जा सकती है। बस्तर की युवाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए और उन्हें रोजगार से जोड़ने के लिए पर्यटन ऑटोमोबाईल, पायलट, आईटी आदि क्षेत्रों में स्किल डेवलपमेंट के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है।  राज्य में सस्टेनबल डेवलपमेंट गोल को हासिल करने के लिए सामाजिक, आर्थिक गतिशीलता के लिए शुरू की गई कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत 40 लाख घरों में पीने का स्वच्छ जल मुहैया कराया जा रहा है। इसी प्रकार 26 लाख से अधिक परिवारों के लिए पीएम आवास स्वीकृत किए गए हैं। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने और समाज में उनकी भूमिका बढ़ाने के लिए महतारी वंदन योजना में 70 लाख से अधिक महिलाओं के बैंक खाते में एक-एक हजार रूपए की राशि दी जा रही है। इस योजना के अंतर्गत लगभग 14 हजार करोड़ रूपए की राशि जारी की जा चुकी है। आयुष्मान भारत योजना के दायरे में राज्य की 98 प्रतिशत आबादी को लाया जा चुका है।  छत्तीसगढ़ में धान की पैदावार और समर्थन मूल्य में खरीदी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मुख्य धुरी है। किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए मोदी की गारंटी के अंतर्गत किसानों को देश में सर्वाधिक धान का मूल्य दिया जा रहा है। राज्य के 2300 से अधिक धान उपार्जन केंद्रों में सफलतापूर्वक धान की खरीदी की जा रही है। किसानों से धान प्रति एकड़ 21 क्विंटल के मान से तथा 3100 रूपए प्रति क्विंटल की कीमत दी जा रही है। किसान हितैषी फैसलों के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ में किसानों के खाते में एक लाख करोड़ रूपए से अधिक की राशि अंतरित की जा चुकी है। किसान इस राशि का खेती किसानी में भरपूर निवेश कर रहे हैं और इससे बाजार भी गुलजार हुए हैं जिससे शहरी अर्थव्यवस्था पर सीधा असर दिख रहा है। ट्रैक्टर आदि की बिक्री ने रिकार्ड आंकड़ा छू लिया है।  छगन लोन्हारे उप संचालक (जनसंपर्क) 

डोनाल्ड ट्रंप ने तीसरे विश्वयुद्ध का खतरा जताया, मीटिंग पर मीटिंग से झुंझलाए, रूस पर यूक्रेन का दबाव

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब रूस और यूक्रेन की शांति बातचीत से लगभग ऊब चुके हैं. कई दौर की मीटिंग चली, कई प्रस्ताव दिए गए, कई दखल भी हुए, लेकिन जमीन पर कोई बदलाव नहीं हुआ. यही वजह है कि डोनाल्ड ट्रंप ने पहली बार साफ शब्दों में कहा है कि वह ‘अब समय बर्बाद नहीं करना चाहते’.ट्रंप की नाराजगी सिर्फ रूस पर नहीं है. वह खुलकर यूरोपीय देशों और यूक्रेन से भी खफा दिखे. NBC की रिपोर्ट के मुताबिक यूरोप लंबे समय से ट्रंप के प्रस्तावों से बचने की कोशिश कर रहा है, खासकर उस मांग से जिसमें यूक्रेन को रूस को जमीन सौंपने की बात कही गई है. यूरोप ने कहा है कि यह प्लान अस्वीकार्य है, जबकि ट्रंप इसे ‘तुरंत लागू होने वाला समाधान’ बताते रहे हैं. वहीं ट्रंप ने रूस-यूक्रेन की लड़ाई को तीसरे विश्वयुद्ध तक पहुंचने की बात कही है. ट्रंप ने कहा, ‘मैंने उन्हें कुछ दिन पहले बताया था. मैंने कहा था कि अगर हर कोई इसी तरह के खेल खेलता रहा, तो अंततः तीसरा विश्व युद्ध छिड़ जाएगा.’ यह उन सभी देशों को संदेश है जो या तो रूस या यूक्रेन के पक्ष में खड़े हैं. ट्रंप क्यों हुए परेशान? एक बिजनेस राउंडटेबल में ट्रंप ने कहा, ‘वे लोग चाहते हैं कि हम वीकेंड में यूरोप मीटिंग के लिए आएं. हम तभी आएंगे जब कुछ ठोस लेकर वापस आएंगे. हम समय बर्बाद करने नहीं बैठे.’ उन्होंने यहां तक कह दिया, ‘कई बार आपको लोगों को आपस में लड़ने देना पड़ता है, कई बार नहीं.’ यह बयान बताता है कि ट्रंप अब खुद को इस डिप्लोमेसी से दूर करने की तैयारी में हैं. उधर जेलेंस्की ने भी पहली बार माना कि अमेरिका उन पर ‘बड़े भूभाग छोड़ने’ का दबाव बना रहा है. प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने खुलासा किया कि विवाद की सबसे बड़ी वजह डोनेत्स्क क्षेत्र और जापोरिज्ज्या न्यूक्लियर प्लांट पर नियंत्रण है. ज़ेलेंस्की ने कहा, ‘वे चाहते हैं कि यूक्रेन डोनेत्स्क छोड़ दे और रूस वहां न घुसे. वे इसे फ्री इकोनॉमिक जोन कह रहे हैं.’ रूस में कहां हुआ हमला? इसी तनाव के बीच यूक्रेन ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने रूस को पूरी तरह चौंका दिया है. यूक्रेन ने पहली बार कैस्पियन सागर में रूस के ऑफशोर तेल प्लेटफॉर्म पर लंबी दूरी के ड्रोन से वार किया है. यह मिशन पहले कभी सार्वजनिक नहीं हुआ था. CNN की रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन की सिक्योरिटी सर्विस के सूत्रों ने बताया, ‘यह पहली बार है जब यूक्रेन ने कैस्पियन सागर में रूस की तेल फैसिलिटी को निशाना बनाया है. जो भी यूनिट्स रूसी युद्ध मशीन को फंड करती हैं, वे सब वैध लक्ष्य हैं.’ यह हमला रूस की बड़ी ऊर्जा कंपनियों पर दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है. पिछले कुछ महीनों में यूक्रेन ने रूस की रिफाइनरी, तेल पाइपलाइन, टर्मिनल और यहां तक कि टैंकरों पर भी हमले तेज कर दिए हैं. सिर्फ अगस्त से नवंबर के बीच यूक्रेन ने रूस की 77 एनर्जी फैसिलिटी हिट की हैं, जो साल के पहले सात महीनों की तुलना में लगभग दोगुना है. बड़ी बात यह है कि अब यूक्रेन एक ही रिफाइनरी को बार-बार टारगेट कर रहा है ताकि वह कभी पूरी तरह चालू न हो सके. सारातोव रिफाइनरी को अगस्त से अब तक आठ बार निशाना बनाया जा चुका है. क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स? विशेषज्ञों का कहना है कि रूस तेल की कमाई से सेना में भर्ती और वेतन बढ़ाकर अपना युद्ध तंत्र मजबूत कर रहा है. इसलिए यूक्रेन अब सीधा उस ‘एनर्जी ATM’ पर वार कर रहा है जिससे रूस को सबसे ज्यादा पैसा मिलता है. परिणाम साफ हैं कि रूस की मरम्मत की रफ्तार काफी धीमी हो चुकी है और कई जगहों पर लंबे समय तक भारी नुकसान हुआ है. दूसरी तरफ, मोर्चे पर रूस धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है और बातचीत का हर दौर रूस की मांगों को और मजबूत कर रहा है.

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा: मोबिलिटी और नई तकनीक क्षेत्रीय विकास के लिए महत्वपूर्ण

मोबिलिटी और नई तकनीक क्षेत्रीय विकास के लिए आवश्यक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने उज्जैन के ग्राम नलवा में मोबिलिटी स्टेशन का भोपाल से वर्चुअली किया शुभारंभ  उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन के ग्राम नलवा स्थित  गायत्री पेट्रोलियम- मोबिलिटी स्टेशन का मुख्यमंत्री निवास से वर्चुअली शुभारंभ किया। उन्होंने प्रतिष्ठान के संचालक  गोविंद सिंह आंजना को शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वर्चुअली संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष-2028 के सिहंस्थ और उज्जैन-इंदौर-देवास के सम्मिलित रूप से मेट्रोपॉलिटन एरिया के रूप में विकास से भविष्य का पश्चिमी मध्य प्रदेश आकर ले रहा है। क्षेत्र में रोड नेटवर्क और औद्योगिक गतिविधियों का तेजी से विकास और विस्तार हो रहा है। क्षेत्र की गतिशीलता को सुनिश्चित करने में फ्यूल और मोबिलिटी तथा नई तकनीक का महत्वपूर्ण योगदान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास व्यक्त किया कि  गायत्री मोबिलिटी स्टेशन, गुणवत्ता और सेवा भाव के साथ क्षेत्र की प्रगति में योगदान देगा। ग्राम नलवा में हुए कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय जन उपस्थित थे।  

शिलांग कोर्ट में सोनम रघुवंशी की सहेलियों की ऑनलाइन पेशी, राज कुशवाह के बारे में पूछे गए सवाल

इंदौर  ट्रांसपोर्टर राजा रघुवंशी हत्याकांड में गुरुवार को सोनम रघुवंशी की दो सहेलियों के कथन हुए। दोनों युवतियों की ई-सेवा कक्ष से शिलांग कोर्ट में पेशी हुई। दोनों ही युवतियां सोनम की कर्मचारी बताई जा रही है। पेशी के दौरान वकील भी मौजूद थे। जानकारी के मुताबिक शिलांग पुलिस ने विवेचना के दौरान दीपांशी और प्रियांशी के भी कथन लिए थे। देश के चर्चित केस में अब शिलांग कोर्ट में ट्रायल शुरू हो चुका है। राजा के बड़े भाई विपिन के कथन दर्ज होने के बाद कोर्ट ने दीपांशी और प्रियांशी को समंस जारी किया था। दोनों की जिला कोर्ट में ई-सेवा कक्ष के माध्यम से पेशी हुई। सोनम को भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जोड़ा गया था। सरकारी वकील ने दीपांशी और सोनम का ऑनलाइन सामना करवाया। इसके बाद सोनम के संबंध में सवाल हुए। वकील ने सोनम के ऑफिस आने-जाने और राज कुशवाह (आरोपित) के संबंध में भी पूछा। सरकारी वकील के अनुसार दोनों युवतियों को दो समंस मिल चुके थे। शिलांग न जाने के कारण ऑनलाइन पेशी करवाई गई है। उधर, राजा के भाई विपिन का आरोप है कि दोनों युवतियां गोविंद के ऑफिस की कर्मचारी है और उन्हें समझा-बुझाकर कोर्ट लाया गया।  

6 घंटे की नींद से शरीर पर पड़ रहे हैं गंभीर असर, डॉक्टरों ने दी चेतावनी- नींद है शरीर का रीसेट बटन

इंदौर  बॉलीवुड अभिनेता आयुष्मान खुराना का एक वीडियो इन दिनों खूब वायरल हो रहा है, जिसमें वह बताते हैं कि उनकी नींद अधिकतम छह घंटे ही हो पाती है। यह बात भले ही सामान्य लगे, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञ औसतन छह घंटे की नींद युवाओं के लिए गंभीर खतरे का संकेत मान रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि छह घंटे की नींद को सामान्य मानना एक भ्रम है। कम नींद दिमाग और शरीर पर धीमे जहर की तरह असर डालती है। इसका तात्कालिक प्रभाव एकाग्रता में कमी, कमजोर निर्णय क्षमता, मूड में बदलाव और धीमे रिएक्शन टाइम के रूप में दिखता है, जबकि भीतर ही भीतर इम्यून सिस्टम कमजोर और हार्मोनल संतुलन बिगड़ता जाता है। इसी वजह से आगे चलकर अल्जाइमर, डिमेंशिया और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इंदौर में आयोजित न्यूरोलॉजिकल सोसाइटी आफ इंडिया की 73वीं राष्ट्रीय कान्फ्रेंस ‘एनएसआइकान-2025’ में सम्मिलित हुए विशेषज्ञों ने कम नींद को चिंताजनक बताया। उनका सुझाव सात से आठ घंटे की औसत नींद का है। शरीर और दिमाग के मरम्मत का समय रात की नींद बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान में 33 वर्ष सेवाएं दे चुके प्रोफेसर सुरेश्वर मोहंती ने एनएसआईकान में कहा कि शरीर और दिमाग दोनों की मरम्मत का असली समय रात की नींद ही होता है। जब व्यक्ति लगातार छह घंटे से कम या केवल छह घंटे की नींद पर निर्भर रहता है, तो हृदय व मस्तिष्क संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं। उनका मानना है कि एक स्वस्थ आदमी को सात से आठ घंटे की नींद अवश्य लेनी ही चाहिए, ताकि उसका ब्रेन अपनी पूरी क्षमता से काम कर सके और मेटाबालिज्म संतुलित रहे। नींद शरीर का रीसेट बटन फोर्टिस मोहाली में न्यूरोसर्जरी विभाग के निदेशक डॉ. वीके खोसला के अनुसार, लोग समझते हैं कि कम सोने से प्रोडक्टिविटी बढ़ती है, लेकिन यह बिल्कुल गलत है। नींद शरीर का रीसेट बटन है। अगर इसे कम कर देंगे, तो सेहत को नुकसान ही होगा। वह सुझाव देते हैं कि प्रतिदिन सात से नौ घंटे की अच्छी नींद से सेहत भी ठीक रहती है और काम करने की क्षमता भी बेहतर होती है। ऐसे नुकसान पहुंचाती है सिर्फ छह घंटे की नींद     दिमाग में टॉक्सिन : ग्लिम्फेटिक सिस्टम पूरी सफाई नहीं कर पाता।     कमजोर याददाश्त : प्रीफ्रंटल कार्टेक्स की गतिविधि घटती है। इसका असर सोचने-समझने पर पड़ता है। स्मरणशक्ति और निर्णय क्षमता कमजोर हो जाती है।     स्ट्रोक-हार्ट का खतरा : कम नींद लेने वालों में स्ट्रोक का जोखिम कई गुना अधिक होता है।     मूड स्विंग व तनाव : सेरोटोनिन-डोपामिन गड़बड़ाते हैं, एंग्जायटी-डिप्रेशन बढ़ता है।     इम्यून सिस्टम कमजोर : साइटोकाइन्स कम बनते हैं, संक्रमण जल्दी पकड़ता है।     दिमाग जल्दी बूढ़ा होता है : न्यूरान डैमेज और ग्रे मैटर लास तेज होता है। आदर्श नींद कितनी होनी चाहिए?     सामान्य व्यक्ति (18-60 वर्ष): सात से नौ घंटे प्रतिदिन     वरिष्ठ नागरिक (60+): सात से आठ घंटे     किशोर (13-18 वर्ष): आठ से 10 घंटे (स्रोत- भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद) जिससे प्यार करते हो, उसे सोने दो…     मुझे सोना पसंद है। अगर आप किसी से वाकई प्यार करते हो, तो उसे सोने दो। नींद से उठाने वाला आपका सबसे बड़ा दुश्मन हो सकता है। मैं छह घंटे से ज्यादा नहीं सो पाता हूं। – आयुष्मान खुराना, अभिनेता का कथन  

भोपाल में मर्चुरी के बाहर मिले दो नवजातों के अधजले शव, नाल नहीं कटी, पुलिस ने शुरू की जांच

 भोपाल  हमीदिया अस्पताल परिसर में मर्चुरी के सामने मिले जुड़वा नवजात शिशुओं के अधजले शवों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई है, लेकिन मामला और भी उलझ गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार पीएम रिपोर्ट में डॉक्टरों के हवाले से शिशुओं की मौत का कोई स्पष्ट कारण नहीं दिया गया है। बीते बुधवार दोपहर को हमीदिया अस्पताल परिसर में मर्चूरी के सामने एक पन्नी में लिपटे हुए दो नवजात शिशुओं के अधजले शव मिले थे। दोनों शिशु जुड़वा थे और हैरान करने वाली बात यह थी कि उनकी नाल नहीं काटी गई थी। एक नवजात का शव बुरी तरह जला हुआ था, जबकि दूसरे पर भी जले होने के निशान थे। अस्पताल की मर्चुरी कर्मचारियों की सूचना पर कोहेफिजा पुलिस ने शवों को जब्त कर लिया था। कोहेफिजा थाना प्रभारी केजी शुक्ला ने बताया कि नवजात शिशुओं की पीएम रिपोर्ट मिल गई है, लेकिन मृत्यु का सही कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। अवैध प्रसव की आशंका, क्या शिशुओं को मरने के लिए छोड़ा पुलिस ने आशंका जताई है कि या तो किसी ने अवैध रूप से प्रसव कराने के बाद शिशुओं को मरने के लिए छोड़ दिया और फिर शव को जलाने की कोशिश की गई या फिर अस्पताल से जुड़े किसी कर्मचारी ने प्रसव के बाद उनका अवैध निपटान करने का प्रयास किया। पुलिस घटनास्थल के आसपास के सभी सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और हमीदिया अस्पताल में हाल में हुए बच्चों के जन्म से संबंधित जानकारी जुटाई जा रही है ताकि शिशुओं के माता-पिता तक पहुंचा जा सके। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने विक्रम अवार्ड-2023 पर अंतरिम रोक लगाई, कोर्ट ने दूसरी दावेदार से मांगा जवाब

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने साहसिक खेलों के लिए दिए जाने वाले विक्रम अवार्ड-2023 का आयोजन करने पर अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट ने दूसरी दावेदार भावना डेहरिया को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही मामले की अगली सुनवाई पांच जनवरी, 2026 को निर्धारित की। कहा कि तब तक विक्रम अवार्ड-2023 आयोजन न किया जाए। सीहोर निवासी पर्वतारोही मेघा परमार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कृष्ण तन्खा व अधिवक्ता अतुल जैन ने पक्ष रखा। दलील दी कि याचिकाकर्ता इस अवार्ड की सही दावेदार है, इसलिए अंतिम निराकरण तक उक्त अवार्ड किसी अन्य को नहीं दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि मप्र शासन ने साहसिक खेलों के लिए विक्रम अवार्ड 2023 की घोषणा की है। इसके लिए छिंदवाड़ा की पर्वतारोही भावना डेहरिया का चयन किया गया है। याचिकाकर्ता को भावना के चयन पर कोई आपत्ति नहीं है। उसका कहना है कि 22 मई 2019 को दुनिया की सबसे ऊंची छोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने वालों में वह अग्रणी थीं। भावना डेहरिया से पहले तिरंगा फहराया था। दोनों के बीच पांच घंटे का अंतराल था। मेघा सुबह पांच बजे चोटी पर पहुंच गई थीं, जबकि भावना पौने 10 बजे पहुंची थीं। इस लिहाज से भावना की भांति मेघा का भी विक्रम अवार्ड पर हक है। नियम शिथिल करें विगत सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता तन्खा ने दलील दी थी कि 2022 में विक्रम अवार्ड के चयन की प्रक्रिया में नियमों को शिथिल करते हुए प्रदेश के दो पुरुष खिलाड़ियों पर्वतारोही भगवान सिंह और रत्नेश पांडेय के नामों पर मुहर लगाई थी। दोनों के बीच लक्ष्य हासिल करने में एक घंटे का अंतराल था। एक वर्ष में सिर्फ एक खिलाड़ी को अवार्ड देने का नियम बदलने का दृष्टांत सामने है। याचिकाकर्ता मेघा के लिए विक्रम अवार्ड पाने का नामांकन प्रक्रिया के अनुसार यह अंतिम अवसर है। कोर्ट को बताया गया कि प्रदेश में संचालित बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान में याचिकाकर्ता मेघा परमार को ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त किया गया था और भावना को यह अवसर मेघा के बाद हासिल हुआ।