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साल 2026 में महालक्ष्मी राजयोग से इन 3 राशियों की किस्मत चमकेगी

 कुछ की वक्त में नए साल का आगाज हो जाएगा. ज्योतिषियों के अनुसार, यह नया साल बहुत ही खास माना जा रहा है क्योंकि इसकी शुरुआत में 18 जनवरी को मंगल-चंद्र की युति से महालक्ष्मी राजयोग बनेगा. दरअसल, मंगल 16 जनवरी 2026 को मकर राशि में चले जाएंगे और 18 जनवरी को चंद्रमा भी इसी राशि में चले जाएंगे. इससे मकर राशि में महालक्ष्मी राजयोग बनेगा. ज्योतिष शास्त्र में महालक्ष्मी राजयोग बहुत ही दुर्लभ राजयोग माना जाता है. जिसकी कुंडली में इस योग का निर्माण होता है, उस जातक को धन, सौभाग्य, आत्मविश्वास और सुख-समृद्धि की प्राप्त होती है. मंगल जब भी अपनी उच्च राशि मकर में जाते हैं तो अच्छे परिणामों की प्राप्ति होती है. तो चलिए जानते हैं कि महालक्ष्मी राजयोग से किन राशियों को फायदा होगा.  मेष  इस राजयोग का सबसे गहरा असर मेष राशि वालों पर देखने को मिलेगा. महालक्ष्मी राजयोग से रुकी हुई कमाई के रास्ते खुलेंगे. आय में निरंतरता आएगी. आर्थिक सहायता मिलने के संकेत बन रहे हैं. प्रॉपर्टी, सेविंग्स और इन्वेस्टमेंट से बड़ा लाभ मिल सकता है. वित्तीय सुरक्षा बढ़ने से आत्मविश्वास भी मजबूत होगा. रिश्तों में मिठास बढ़ेगी और मानसिक शांति मिलेगी.  तुला तुला राशि वालों को महालक्ष्मी राजयोग करियर को मजबूती दिलाएगा. नौकरी में नई जिम्मेदारियां मिलेंगी जो भविष्य में प्रमोशन दिला सकती हैं. बिजनेस वालों के लिए यह समय बेहद फायदेमंद रहेगा. नया कॉन्ट्रैक्ट, बड़े क्लाइंट या अचानक मुनाफे के योग बनेंगे. किसी अधूरे प्लान में भी सफलता के संकेत हैं. मकर मकर राशि वालों के लिए यह योग भाग्य को पूरी तरह सक्रिय रहेगा. विदेश से जुड़ा कोई बड़ा अवसर, यात्रा या कार्य लाभ दे सकता है. पढ़ाई, प्रतियोगिता या आध्यात्मिक कार्यों में शुभ परिणाम मिलेंगे. परिवार का माहौल भी सहयोगी रहेगा. किसी बड़े व्यक्ति की मदद से आर्थिक बढ़त मिलेगी. प्रॉपर्टी या जमीन से भी लाभ मिल सकता है. 

धान किसानों को 4500 करोड़ से अधिक का भुगतान

धान खरीद (2025-26) : 3.15 लाख से अधिक किसानों से हुई 19.14 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद  योगी आदित्यनाथ सरकार का किसानों की ‘आर्थिक समृद्धि’ पर जोर  धान किसानों को 4500 करोड़ से अधिक का भुगतान  धान खरीद सत्र में पंजीकृत हुए 7.83 लाख से अधिक किसान  धान बिक्री के लिए पूरे प्रदेश में स्थापित किए जा चुके हैं 4645 धान क्रय केंद्र  35 हजार से अधिक किसानों से हुई बाजरा खरीद, 421.39 करोड़ रुपये हुआ भुगतान  लखनऊ  योगी आदित्यनाथ सरकार का अन्नदाता किसानों की ‘आर्थिक समृद्धि’ पर विशेष जोर है। योगी सरकार एक तरफ न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान बिक्री के लिए 4645 क्रय केंद्र स्थापित कर सभी सुविधाएं उपलब्ध करा रही है तो वहीं दूसरी ओर डीबीटी के माध्यम से किसानों को सीधे अकाउंट में पैसे भी भेज रही है। आंकड़ों पर ध्यान दें तो 3.15 लाख से अधिक किसानों से 19.14 लाख मीट्रिक टन धान खरीद हो चुकी है। इसके एवज में किसानों को 4500 करोड़ से अधिक का भुगतान भी किया जा चुका है। यही नहीं, बाजरा बिक्री करने वाले 35 हजार से अधिक किसानों को 421.39 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उत्तर प्रदेश में ‘श्रीअन्न’ की खरीद पहली अक्टूबर से हो रही है। पहली अक्टूबर से पश्चिम उत्तर प्रदेश व पहली नवंबर से पूर्वी उत्तर प्रदेश में धान खरीद हो रही है।  पिछले सत्र से अधिक किसानों ने कराया पंजीकरण  योगी सरकार साल दर साल अपने ही रिकॉर्ड तोड़ रही है। खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में 13 दिसंबर तक 6.70 लाख किसानों ने धान बिक्री के लिए पंजीकरण कराया था, जबकि 2025-26 में अब तक यह आंकड़ा 7.83 लाख से अधिक है। बाजरा बिक्री के लिए पिछले वर्ष इस अवधि तक 21630 किसानों का पंजीकरण हुआ था, जो इस वर्ष में 80 हजार से अधिक हो गया है। वहीं ज्वार व मक्का में भी पंजीकरण बढ़ गया। ज्वार बिक्री के लिए पिछले साल 12 हजार किसानों ने पंजीकरण कराया था, इस साल 16 हजार से अधिक किसानों का पंजीकरण हो चुका है। बाजरा खरीद 33 व ज्वार खरीद 11 जनपदों में हो रही है।  धान किसानों को 4500 व बाजरा किसानों को 421 करोड़ से अधिक का भुगतान खाद्य व रसद विभाग के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ धान की बिक्री, किसानों को भुगतान, क्रय केंद्र की व्यवस्था आदि को लेकर निरंतर समीक्षा बैठक कर रहे हैं। उन्होंने किसानों को समय से भुगतान करने का निर्देश दिया है। शनिवार दोपहर 12 बजे तक 3.15 लाख किसानों से 19.14 लाख मीट्रिक टन धान खरीद हो चुकी है। इस एवज में यूपी के किसानों को 4541.94 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। अब तक 4645 क्रय केंद्र भी स्थापित हो चुके हैं। वहीं ‘श्रीअन्न’ की बात करें तो बाजरा किसानों को 421.39 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है, पिछले वर्ष इस अवधि तक 187.98 करोड़ रुपये भुगतान हुआ था। सीएम योगी की मॉनीटरिंग से इस वर्ष किसानों को तेजी से भुगतान किया जा रहा है।  31 दिसंबर तक होगी ‘श्रीअन्न’ की खरीद  ‘श्रीअन्न’ की खरीद पहली अक्टूबर से शुरू हुई थी, जो 31 दिसंबर तक चलेगी। श्रीअन्न के अंतर्गत बाजरा 33, मक्का 25 व ज्वार खरीद 11 जनपदों में हो रही है। पश्चिम उत्तर प्रदेश में 31 जनवरी व पूर्वी उत्तर प्रदेश में 28 फरवरी तक धान खरीद होगी। धान (कॉमन) का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2369 व (ग्रेड ए) का 2389 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित किया गया है। ज्वार का न्यूनतम समर्थन मूल्य (मालदांडी) 3749, ज्वार (हाईब्रिड) 3699 रुपये प्रति कुंतल, बाजरा का 2775 व मक्का का 2400 रुपये प्रति कुंतल न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है।

Hero VIDA ने लॉन्च की बच्चों के लिए इलेक्ट्रिक ऑफ-रोड मोटरसाइकिल VIDA DIRT.E K3, शुरुआती कीमत 69,990 रुपये

मुंबई   इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी Hero VIDA ने अपनी पहली ऑफ-रोड मोटरसाइकिल VIDA DIRT.E K3 को लॉन्च कर दिया है. इस मोटरसाइकिल को खास तौर पर 4 से 10 साल के युवा राइडर्स के लिए डिज़ाइन किया गया है. इसका मकसद बच्चों को बड़ी और ज़्यादा पावरफुल मशीनों पर जाने से पहले, मोटरसाइकिलिंग में एक सुरक्षित, काबिल और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला एंट्री पॉइंट देना है. Vida DIRT.E K3 मोटरसाइकिल की खास चीजों की बात करें तो, इसमें एक थ्री-पोज़िशन एडजस्टमेंट मैकेनिज्म दिया गया है, जिससे आप सिर्फ़ एक एलन-की की मदद से छोटे, मीडियम और बड़े साइज़ के बीच स्विच कर सकते हैं. यह सिस्टम सीट की हाइट और व्हीलबेस दोनों को एडजस्ट करता है, जिससे यह पक्का होता है कि बाइक बच्चे की हाइट के साथ बढ़ाई या कम की जा सकती है और कई सालों तक इस्तेमाल करने के लायक रहती है, बजाय इसके कि वह जल्दी छोटी पड़ जाए. कंपनी ने बाइक को लेकर बताया कि जब बच्चा ऐसे स्किल लेवल पर पहुंच जाता है, जहां फ्रंट और रियर सस्पेंशन की ज़रूरत होती है, तो उन्हें ऑप्शनल एक्सेसरीज़ के तौर पर खरीदा जा सकता है. Vida DIRT.E K3 की बैटरी नई DIRT.E K3 में कंपनी ने 500W की मोटर इस्तेमाल की है, जिससे यह 23-25 ​​किलोमीटर प्रति घंटे की टॉप स्पीड तक पहुंच सकती है. इसकी रिमूवेबल बैटरी को 0 से 100 प्रतिशत चार्ज होने में लगभग तीन घंटे का समय लगता है और यह इलाके और राइडर के चलाने के तरीके के आधार पर तीन घंटे तक चलती है. इस मोटरसाइकिल में तीन राइड मोड – बिगिनर, अमेच्योर और प्रो – दिए गए हैं, जो स्पीड को क्रमशः 8 किलोमीटर प्रति घंटे, 16 किलोमीटर प्रति घंटे और 25 किलोमीटर प्रति घंटे तक सीमित करते हैं. माता-पिता एक खास ऐप के ज़रिए इन सेटिंग्स को एक्सेस कर सकते हैं, जिससे वे स्पीड लिमिट सेट कर सकते हैं, कुछ मोड लॉक कर सकते हैं और अपने बच्चे के राइडिंग सेशन पर नज़र रख सकते हैं. चूंकि यह मोटरसाइकिल बच्चों के लिए है, इसलिए VIDA ने इसमें कई सेफ्टी-फोकस्ड एलिमेंट भी शामिल किए हैं. इनमें मज़बूत वायरिंग, छोटे हाथों के लिए ब्रेक लीवर, खास इम्पैक्ट वाली जगहों पर एनर्जी-एब्जॉर्बिंग मटीरियल और एक इमरजेंसी कटऑफ टेदर भी शामिल है, जो राइडर के गिरने पर मोटर को बंद कर देता है. कीमत की बात करें तो VIDA DIRT.E K3 की शुरुआती कीमत 69,990 रुपये रखी गई है, और इसे आंध्र प्रदेश में VIDA के तिरुपति प्लांट में बनाया जाएगा. शुरुआती फेस में इस मोटरसाइकिल की डिलीवरी दिल्ली, बेंगलुरु, पुणे, जयपुर और कालीकट में शुरू की जाएगी.

पंकज चौधरी ने भरा यूपी बीजेपी अध्यक्ष पद का नामांकन, योगी–केशव का मिला समर्थन

लखनऊ   उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 18वें अध्यक्ष के चुनाव के लिए चल रही अटकलों पर आज उस वक्त विराम लग गया, जब केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने पंकज चौधरी के नाम का प्रस्ताव किया। संगठन चुनाव प्रभारी महेंद्र नाथ पांडेय ने बताया कि पंकज चौधरी ने चार सेट में अपना नामाकन पत्र दाखिल किया है। इन पर योगी आदित्यनाथ और कैशव मौर्य के अलावा डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, स्मृति ईरानी, स्वतंत्र देव सिंह, सूर्य प्रताप शाही, सुरेश खन्ना और बेबी रानी मौर्य बतौर प्रस्तावक हस्ताक्षर किए हैं। पार्टी के घोषित कार्यक्रम के अनुसार, शनिवार को नामांकन पत्र दाखिल करने का दिन था। सुबह से ही लखनऊ स्थित बीजेपी मुख्यालय पर गहमागहमी रही। शनिवार सुबह तक दिल्ली में रहे पंकज चौधरी लखनऊ पहुंचे और वहां से पार्टी कार्यालय पहुंचकर अपना नामांकन पत्र भरा। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के अलावा पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री और केंद्रीय चुनाव पर्यवेक्षक विनोद तावड़े और महेंद्र नाथ पांडेय पहले से मौजूद रहे। विनोद तावड़े की उपस्थिति में नामांकन प्रक्रिया पूरी होने और मुख्यमंत्री तथा उपमुख्यमंत्री जैसे शीर्ष नेताओं के प्रस्तावक बनने से यह साफ हो गया है कि पंकज चौधरी का नाम केंद्रीय नेतृत्व द्वारा सर्वसम्मति से तय किया गया है। पंकज चौधरी की ताजपोशी क्यों अहम पंकज चौधरी महाराजगंज से सात बार के अनुभवी सांसद हैं और कुर्मी (OBC) समुदाय से आते हैं। उनकी ताजपोशी के पीछे पार्टी की गहरी राजनीतिक रणनीति है। पंकज चौधरी को अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने विपक्ष खासकर सपा के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण की काट करेगी और प्रदेश में ओबीसी वोट बैंक पर अपनी पकड़ और मजबूत करेगी। ओबीसी नेता को सौंपकर पार्टी ने सत्ता और संगठन के बीच जातीय संतुलन को प्रभावी ढंग से साध लिया है। पूर्वांचल पर फोकस पंकज चौधरी का मजबूत आधार पूर्वांचल है, जो आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए निर्णायक क्षेत्र है। पूर्वांचल में ही लोकसभा चुनाव के दौरान सपा को बड़ी जीत मिली थी। ऐसे में पंकज चौधरी के जरिए सपा बड़ा दांव खेला गया है। कल होगी औपचारिक घोषणा संगठन चुनाव प्रभारी डॉ. महेंद्रनाथ पाण्डेय द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब 14 दिसंबर को नए प्रदेश अध्यक्ष के निर्वाचन की औपचारिक घोषणा की जाएगी। चूंकि नामांकन केवल पंकज चौधरी ने ही किया है और उन्हें शीर्ष नेतृत्व का समर्थन प्राप्त है, इसलिए उनका निर्विरोध निर्वाचन होना तय है। पंकज चौधरी की ताजपोशी से प्रदेश भाजपा में एक नए युग की शुरुआत होगी, जिसकी सीधी चुनौती 2027 के विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के लिए बड़ी जीत हासिल करना होगा।  

अमेरिकी संसद में बगावत: ट्रंप के भारत पर 50% टैरिफ के खिलाफ डेमोक्रेट सांसदों ने उठाया विरोध

वॉशिंगटन  अमेरिका में भारत से आयात होने वाले उत्पादों पर लगाए गए भारी टैरिफ को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत तक शुल्क लगाने के लिए राष्ट्रीय आपातकाल का हवाला दिया था. अब हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की तीन डेमोक्रेट सांसदों—डेबोरा रॉस (नॉर्थ कैरोलिना), मार्क वीजी (टेक्सास) और भारतीय मूल के राजा कृष्णमूर्ति (इलिनॉय)—ने इस फैसले को चुनौती देते हुए एक प्रस्ताव पेश किया है. सांसदों ने कहा कि यह टैरिफ न केवल अवैध हैं, बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों के हितों के खिलाफ हैं. तीनों सांसदों ने साझा बयान में कहा, “ये टैरिफ आम लोगों की जेब पर भार डाल रहे हैं और अमेरिकी व्यवसायों को नुकसान पहुंचा रहे हैं. इसे हटाना अमेरिका-भारत संबंधों के लिए भी महत्वपूर्ण है.” ट्रंप प्रशासन ने 1 अगस्त 2025 को भारत से आने वाले उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था. इसके बाद 27 अगस्त 2025 को भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत सेकेंडरी टैरिफ की घोषणा की गई. इससे कुल शुल्क 50 प्रतिशत तक पहुंच गया. प्रशासन का तर्क था कि भारत अब भी रूस से तेल खरीद रहा है, जिससे मॉस्को को यूक्रेन युद्ध के लिए वित्तीय सहायता मिल रही है. सांसदों की प्रतिक्रिया डेबोरा रॉस ने कहा कि नॉर्थ कैरोलिना की अर्थव्यवस्था भारत से जुड़े निवेश पर निर्भर है. उन्होंने बताया कि भारतीय कंपनियों ने वहां अरबों डॉलर का निवेश किया है और हजारों नौकरियां पैदा की हैं. ऐसे में टैरिफ इस आर्थिक संबंध को नुकसान पहुँचा रहे हैं. मार्क वीजी ने कहा, “ये टैरिफ आम अमेरिकी परिवारों के लिए महंगाई बढ़ाने जैसा है. भारत हमारा महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक सहयोगी है, और ऐसे कदम द्विपक्षीय रिश्तों को कमजोर करते हैं.” राजा कृष्णमूर्ति ने कहा कि टैरिफ अमेरिकी सप्लाई चेन में रुकावट डाल रहे हैं और अमेरिकी मजदूरों को नुकसान पहुँचा रहे हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि टैरिफ हटाने से अमेरिका-भारत के आर्थिक और सुरक्षा संबंध मजबूत होंगे. कांग्रेस बनाम राष्ट्रपति यह प्रस्ताव अमेरिकी कांग्रेस में उस बड़े प्रयास का हिस्सा है, जिसमें डेमोक्रेट्स और कुछ रिपब्लिकन राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों के दुरुपयोग पर अंकुश लगाना चाहते हैं. सांसदों का कहना है कि व्यापार नीति बनाने का अधिकार संविधान के तहत केवल कांग्रेस के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं. वर्तमान में यह प्रस्ताव हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में पेश किया गया है. यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो इसे सीनेट में भी पेश किया जाएगा. विशेष बहुमत मिलने पर राष्ट्रपति के वीटो को भी ओवरराइड किया जा सकता है. प्रस्ताव पारित होने पर भारत पर लगे 50 प्रतिशत टैरिफ हट सकते हैं और दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में सुधार की संभावना बढ़ सकती है.

पुष्य मित्र भार्गव बने अखिल भारतीय महापौर परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, सूरत में पद ग्रहण

इंदौर  मध्य प्रदेश मेयर काउंसिल के प्रदेशाध्यक्ष इंदौर मेयर पुष्य मित्र भार्गव को राष्ट्रीय स्तर पर अखिल भारतीय महापौर परिषद में महत्पूर्ण पद मिला है। वे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने है।उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सर्वानुमति से सौंपी गई है। वे शनिवार को गुजरात के सूरत में होने वाली राष्ट्रीय बैठक में इस पद की शपथ लेंगे।अखिल भारतीय महापौर परिषद की 116वीं कार्यकारिणी बैठक 13 व 14 दिसम्बर को सूरत में आयोजित की जा रही है। इस बैठक में देशभर के महापौर हिस्सा लेने सूरत पहुंचे है।इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी इसमें शामिल के लिए सूरत पहुंचे है। भार्गव मध्य प्रदेश से अकेले मेयर है, जो राष्ट्रीय स्तर की कार्यकारिणी में शामिल हुए है। बैठक के दौरान राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय संगठन को सुदृढ़ करने पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके साथ ही परिषद के प्रशिक्षण केंद्र के निर्माण और आगे महापौरों के लिए प्रशिक्षण वर्ग आयोजित करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। कार्यक्रम में देशभर के वरिष्ठ जनप्रतिनिधि शामिल होंगे।जिनमें पूर्व मंत्री एवं परिषद के पूर्व पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय वर्ष 2003 में भारतीय महापौर परिषद के अध्यक्ष रह चुके है। इंदौर में दो बार राष्ट्रीय स्तर का मेयर सम्मेलन भी हो चुका है।  

महासमुंद : धान खरीदी केंद्रों में अव्यवस्था पर तीन प्राधिकृत अधिकारी पद से पृथक

महासमुंद जिला महासमुंद में धान खरीदी व्यवस्था को लेकर कलेक्टर विनय कुमार लंगेह द्वारा लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। इसी क्रम में 12 दिसंबर को कलेक्टर लंगेह द्वारा धान खरीदी केंद्र मोंगरापाली एवं धान खरीदी केंद्र गांजर का निरीक्षण किया गया। वहीं 11 दिसंबर को धान खरीदी केंद्र केवां का भी निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के दौरान तीनों धान खरीदी केंद्रों में गंभीर अव्यवस्था पाई गई। धान की स्टेकिंग सुव्यवस्थित तरीके से नहीं की गई थी, जिससे खरीदी व्यवस्था प्रभावित हो रही थी। इसके साथ ही नए एवं पुराने बारदानों में समिति का मार्का एवं स्टेंसिल भी निर्धारित मानकों के अनुसार सही तरीके से अंकित नहीं पाया गया। मिलर द्वारा प्रदाय किए गए बारदानों की गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं पाई गई। इन अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित समितियों के प्राधिकृत अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की। प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति मर्यादित मोंगरापाली के प्राधिकृत अधिकारी गुलशन बघेल, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति मर्यादित गांजर के प्राधिकृत अधिकारी पुनितराम सिन्हा तथा प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति मर्यादित रिसीकेला के प्राधिकृत अधिकारी नेपाल साहू को उनके पद से पृथक करने की कार्यवाही की गई। कलेक्टर ने निर्देश दिए है कि धान खरीदी केंद्रों में शासन के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। धान की स्टेकिंग, बारदानों की गुणवत्ता एवं मार्किंग में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निरीक्षण आगे भी जारी रहेगा तथा अनियमितता पाए जाने पर संबंधितों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बीजेपी ने केरल निकाय चुनाव में कांग्रेस को पछाड़ा, लेफ्ट को भी लगा बड़ा झटका

तिरुवनंतपुरम केरल में सत्ता का सेमिफाइनल माने जा रहे अहम स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे अब काफी हद तक साफ हो गए हैं. राज्य में कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन किया है. वहीं सत्ताधारी सीपीएम नीत एलडीएफ को इन चुनावों में झटका लगा है. वहीं इन निकाय चुनावों में बीजेपी ने चौंकाने वाला प्रदर्शन किया है. भगवा दल ने तिरुवनंतपुरम सहित कई जिला पंचायतों में जीत दर्ज की है. केरल के 6 नगर निगम, 14 जिला पंचायत, 87 नगर पालिका, 152 ब्लॉक पंचायत और 941 ग्राम पंचायत के लिए चुनाव हुए थे. राज्य के 244 केंद्रों और 14 जिला कलेक्ट्रेट में वोटों की गिनती चल रही है. यहां सभी की नजरें इन नतीजों पर हैं, क्योंकि इससे 2026 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर जनता का रुझान पता चलेगा. स्थानीय निकाय चुनाव इस बार केवल सीटों की गणित तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने राज्य की राजनीति में कुछ ऐसे मुद्दों को भी केंद्र में ला दिया, जो आने वाले विधानसभा चुनावों की दिशा तय कर सकते हैं. लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) का परंपरागत दबदबा बरकरार है, कांग्रेस भी कई इलाकों में मजबूती से लड़ती दिखी, लेकिन बीजेपी के लिए यह चुनाव खास तौर पर अहम माना जा रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह है एर्नाकुलम जिले का मुनंबम इलाका, जहां NDA की जीत को बीजेपी एक "राजनीतिक और सामाजिक टर्निंग पॉइंट" के रूप में पेश कर रही है. बीजेपी के केरल महासचिव अनूप एंटनी जोसेफ ने मुनंबम वार्ड में NDA की जीत को "ऐतिहासिक" बताया है. बीजेपी नेता का दावा है कि मुनंबम में करीब 500 ईसाई परिवार वक्फ बोर्ड के कथित अवैध दावों की वजह से अपने घरों से बेदखली के खतरे का सामना कर रहे थे. अनूप एंटनी के मुताबिक, मोदी सरकार और बीजेपी ने इस मुद्दे पर खुलकर इन परिवारों का साथ दिया, उसी का नतीजा है कि लोगों ने स्थानीय चुनाव में बीजेपी को अपना समर्थन दिया. सात दशक पुराना है वक्फ विवाद की जड़ मुनंबम वक्फ विवाद की जड़ें आज से करीब सात दशक पुरानी हैं. 1950 में सिद्दीकी सैत नामक व्यक्ति ने यह जमीन फरीद कॉलेज को दान की थी. इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने इस भूमि के कुछ हिस्से स्थानीय निवासियों को बेच दिए, जबकि इन इलाकों में लोग पहले से रह रहे थे. साल 2019 में केरल वक्फ बोर्ड ने इस पूरी जमीन को वक्फ संपत्ति के तौर पर रजिस्टर कर दिया, जिससे पहले हुए सभी सौदे अमान्य माने जाने लगे. इसके बाद सैकड़ों परिवारों के सामने बेदखली का संकट खड़ा हो गया. 410 परिवारों के बेदखली का डर इस फैसले के खिलाफ मुनंबम और चेराई इलाकों में 410 दिनों से भी ज्यादा समय तक आंदोलन चला. प्रभावित परिवारों ने कोझिकोड वक्फ ट्रिब्यूनल में चुनौती दी, वहीं राज्य सरकार ने जमीन के स्वामित्व की जांच के लिए सीएन रामचंद्रन नायर आयोग का गठन किया. 2025 में केरल हाई कोर्ट के एकल पीठ ने इस आयोग को रद्द कर दिया था, लेकिन बाद में डिवीजन बेंच ने आयोग को बहाल करते हुए 2019 के वक्फ रजिस्ट्रेशन को "कानून के अनुरूप नहीं" बताया. सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक  रिपोर्ट के मुताबिक, 12 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के "नॉट वक्फ" वाले फैसले पर रोक लगा दी और जनवरी 2026 तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया. इससे फिलहाल किसी भी परिवार की बेदखली पर रोक है. मुख्यमंत्री पिनराई विजयन भी पहले ही भरोसा दिला चुके हैं कि किसी को जबरन नहीं हटाया जाएगा. मुनंबम की जीत को ईसाई समर्थन का संकेत मान रही बीजेपी बीजेपी अब इस पूरे विवाद को "न्याय बनाम अन्याय" की लड़ाई के रूप में पेश कर रही है. मुनंबम में मिली जीत को पार्टी केरल में ईसाई समुदाय के बीच बढ़ते भरोसे का संकेत मान रही है. मसलन, भले ही यह जीत प्रतीकात्मक हो, लेकिन वक्फ जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बीजेपी की आक्रामक राजनीति आने वाले समय में राज्य की चुनावी बहस को और तेज कर सकती है.  

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का संदेश: दो वर्षों में छत्तीसगढ़ ने देखा विकास और स्थिरता का नया दौर

रायपुर  छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपनी सेवायात्रा के दो वर्ष पूरे होने पर जनता को संबोधित करते हुए कहा कि यह समय केवल शासन का नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण का रहा। उन्होंने बताया कि इन दो वर्षों में सरकार ने हर वर्ग और क्षेत्र के लोगों तक विकास की किरण पहुँचाने का प्रयास किया है। मुख्यमंत्री का संदेश:  प्रिय छत्तीसगढ़वासी भाइयों और बहनों, जय जोहार आज जब मैं सेवायात्रा के दो वर्ष पूरे कर रहा हूँ, तो मन अपार भावनाओं से भर गया है। यह दो वर्ष मेरे जीवन के सबसे महत्वपूर्ण वर्ष रहे , क्योंकि यह समय केवल शासन का नहीं, सेवा और समर्पण का था। आपके साथ चलने का, आपकी मुस्कान में अपने दायित्व का प्रतिबिंब देखने का अवसर मिला। इन दो वर्षों में हमने छत्तीसगढ़ के हर कोने में विकास का दीप जलाने की कोशिश की है। हमने किसानों की मेहनत को सम्मान देने के लिए सुविधाएँ बढ़ाईं, जिससे उनकी उपज का पूरा मूल्य समय पर मिल सके। युवाओं के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए नई भर्तियों, प्रशिक्षण और औद्योगिक अवसरों के द्वार खोले गए। आदिवासी अंचलों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़कों का ऐसा जाल बिछाया गया जिससे विकास की रोशनी उन इलाकों तक पहुँचे जहाँ पहले उम्मीदें धुंधली थीं। हमारी बहनों के लिए सुरक्षा और सम्मान की दिशा में नए कदम उठाए गए ताकि हर घर में आत्मविश्वास और स्वावलंबन का वातावरण बने। इन सभी प्रयासों के बीच सबसे बड़ा परिवर्तन यह हुआ कि शासन अब जनता के द्वार पर है। प्रशासन और लोगों के बीच जो दूरी कभी रही, वह अब सहभागिता में बदल रही है। मुझे गर्व है कि छत्तीसगढ़ आज विश्वास और स्थिरता के एक नए अध्याय की ओर बढ़ रहा है। भविष्य के लिए हमारी प्रतिबद्धता और भी सशक्त है। आने वाले वर्षों में हम शिक्षा, रोजगार, कृषि और ग्रामीण विकास पर और तीव्र गति से काम करेंगे। हमारा लक्ष्य है ऐसा छत्तीसगढ़, जो आत्मनिर्भर हो, जहाँ हर युवा को अवसर मिले, किसान को गर्व हो और हर नागरिक को यह विश्वास हो कि उसका शासन उसके साथ खड़ा है।* प्रिय जनों, यह यात्रा अभी लंबी है और मंज़िल बड़ी। मैं आप सबसे यही अपेक्षा करता हूँ कि इस विकास यात्रा में अपने सुझावों, अपने परिश्रम और अपने विश्वास से हमारा मार्ग रोशन करते रहें। आपकी आस्था ही हमारी शक्ति है, और आपका सहयोग ही छत्तीसगढ़ के सुनहरे भविष्य की गारंटी। – विष्णु देव साय मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन

सूरजपुर : समग्र शिक्षा एवं पीएमश्री निर्माण कार्य की समीक्षा संपन्न, सीईओ ने लापरवाह एजेंसी को दी सख्त चेतावनी

सूरजपुर कलेक्टर श्री एस जयवर्धन के निर्देश पर जिले के पीएमश्री एवं समग्र शिक्षा के निर्माण कार्यों की समीक्षा बैठक जिला पंचायत सीईओ श्री विजेन्द्र सिंह पाटले के अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभा कक्ष में संपन्न हुई। सभी निर्माण एजेंसी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, क्रेड़ा, गृह निर्माण मंडल, जनपद पंचायत, नगर पालिका के अधिकारी  एवं बीआरसीसी उपस्थित हुए। समग्र के 65प्रगतिरत एवं 15 नॉट स्टार्ट निर्माण कार्य, पीएम श्री के 40 ले आउट/प्रगतिरत निर्माण कार्य स्कूलवार, जनपद पंचायतवार एवं एजेंसीवाइस एक एक कार्यों की समीक्षा की गई। सीईओ ने स्कूलों के बायो, फिजिक्स एवं केमेस्ट्री लैब का अभी तक पूर्ण नहीं होने पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए निर्माण की गति धीमी होना पाए जाने पर  गहरी नाराजगी जताया। उन्होंने निर्माण एजेंसियों को सख्त लहजे में चेतावनी  देते हुए कहा कि समय सीमा पर कार्य नहीं करने वाले संबंधित ठेकेदारों को काम से हटाने एवं ब्लेक लिस्ट करें। डीएमसी समग्र शिक्षा सूरजपुर ने बताया कि छः माह पूर्व ही संबंधित एजेंसियों को 40से 50 प्रतिशत राशि दिया जा चुका है।विदित हो कि राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा से स्कूलों के सभी निर्माण कार्यों को पूर्ण करने के लिए जिलों की मॉनिटरिंग की जा रही है ताकि इसका लाभ छात्रों को जल्द से जल्द मिल सके।