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SSP कार्तिकेय शर्मा का सख्त संदेश: ‘ऑपरेशन क्लीन’ के तहत 12 SHO लाइन हाजिर, 46 थानों में नई तैनाती

पटना कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने के उद्देश्य से पटना जिले में पुलिस प्रशासन ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है. शुक्रवार (12 दिसंबर) को जिले के 46 थानों में नए थानाध्यक्षों की तैनाती की गई है, जबकि 12 थानाध्यक्षों को लाइन हाजिर कर दिया गया. हवाई अड्डा, कोतवाली, कदमकुआं, सचिवालय और श्रीकृष्णापुरी जैसे अहम थानों में भी नए प्रभारी भेजे गए हैं. यह कार्रवाई एसएसपी कार्तिकेय के शर्मा की सख्त पहल के रूप में देखी जा रही है. दरअसल, पुलिस विभाग का मानना है कि लंबे समय से जमे अधिकारियों और कमजोर कार्यप्रणाली के कारण पुलिसिंग प्रभावित हो रही थी जिसे सुधारने के लिए यह कदम जरूरी था. कानून-व्यवस्था सुधार के नाम पर एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने एक साथ दर्जनों थानों में बदलाव कर सख्त संदेश दिया है. एसएसपी की अनुशंसा पर लगी अंतिम मुहर बता दें कि एसएसपी कार्तिकेय के शर्मा ने 12 दिसंबर को पुलिस महानिरीक्षक, केंद्रीय क्षेत्र पटना को पत्र भेजकर थानाध्यक्षों के तबादले और लाइन हाजिरी की अनुशंसा की थी. शुक्रवार शाम इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई. पटना पुलिस सूत्रों के अनुसार, जिन अधिकारियों को लाइन हाजिर किया गया है, उनमें कई लंबे समय से एक ही थाने में पदस्थ थे, जबकि कुछ के खिलाफ कर्तव्य पालन में गंभीर खामियां और शिकायतें सामने आई थीं. इन 12 थानाध्यक्षों पर गिरी गाज लाइन हाजिर किए गए थानाध्यक्षों में खगौल के राजकुमार सिंह, मोकामा के संतोष कुमार शर्मा, सचिवालय के बलरामलाल देव, मेहदीगंज के किशोर कुणाल झा, महिला थाना की राजरंजनी कुमारी, एससी-एसटी थाना के राजकुमार, अगमकुआं के नीरज कुमार पांडेय, मसौढ़ी के अनिल कुमार, धनरुआ के आलोक कुमार, बेलछी के अनिल कुमार सिंह, बिक्रम के विनोद कुमार और आईआईटी अमहरा के शिवशंकर शामिल हैं। सभी अधिकारियों को पटना पुलिस केंद्र में योगदान देने का निर्देश दिया गया है.

जापान से लोग हो रहे गायब! एक ही साल में दर्ज हुई जनसंख्या की सबसे बड़ी कमी

टोक्यो अमेरिका भले भी सी-5 ग्रुप में जापान को शामिल करने की तरफ देख रहा हो, लेकिन कभी अपने तकनीक के दम पर दुनिया पर राज करने का सपना देखने वाला यह देश आज घरेलू स्तर पर जूझ रहा है। जापान के लिए उसकी गिरती हुई जनसंख्या एक बड़ा सिरदर्द बन गई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक साल में जापान की जनसंख्या में से करीब 9 लाख लोग कम हो गए हैं। मतलब पैदा होने वाले और मरने वालों के बीच का फासला करीब 9 लाख के आसपास है। ऐतिहासिक रूप से यह जापान की आबादी की सबसे बड़ी गिरावट है।   करीब 12.5 करोड़ की आबादी वाले जापान के लिए एक साल में 9 लाख लोगों को खोना एक बड़ा झटका है। यह जापान की आबादी का करीब 0.7 फीसदी है, जो कि उसने केवल एक साल में खो दिया है। अरब से ज्यादा आबादी वाले भारत के लिए यह आंकड़ा बेहद कम लगे लेकिन जापान के लिए यह एक बहुत बड़ी और चिंताजनक बात है। जापान पिछले कई वर्षों से लगातार जनसंख्या की गिरावट का सामना कर रहा है। घटती जन्म दर और आबादी की बढ़ती उम्र जापान की आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक विकास को भी धीमा कर रही है। जापान की आबादी में युवाओं की आबादी लगातार घट रही है, जबकि बुजुर्गों का अनुपात लगातार बढ़ रहा है। अर्थव्यवस्था पर असर जनसंख्या में लगातार युवाओं आबादी का कम होना जापान के विकास के लिए लगातार परेशानी बढ़ा रहा है। कामकाजी युवाओं की कमी की वजह से आर्थिक विकास मंद पड़ गया है, वहीं दूसरी ओर सरकार के ऊपर लगातार बुजुर्गों को पेंशन और स्वास्थ्य सेवाओं किया जाने वाला खर्च बढ़ाना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक मोर्चे पर दोहरा दबाव पड़ रहा है। सरकार के प्रयास नाकाफी जापानी सरकार इस जनसंख्या संकट के उबरने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन उसके प्रयास अभी तक नाकाफी ही साबित हुए हैं। हाल के वर्षों में सरकार की तरफ से बच्चों के जन्म पर आर्थिक सहायता, वर्क लाइफ बैलेंस सुधार और महिलाओं को भागीदारी को बढ़ाने की कोशिश की गई है, लेकिन अभी तक इनका असर जनसंख्या पर देखने को नहीं मिला है। वह लगातार कमी के रिकॉर्ड बनाती जा रही है। जनसंख्या मामले के विशेषज्ञों के मुताबिक अगर जापान अपनी आबादी को बढ़ाने और स्थाई करने का कोई रास्ता जल्दी ही नहीं ढूंढ़ता है, तो आने वाले दशकों में यह एक बड़ा संकट होगा। उस समय पर जनसंख्या का कम होना जापान के लिए केवल आंकड़ों का संकट नहीं रह जाएगा, बल्कि यह भविष्य में देश की दिशा तय करने वाला मुद्दा बन जाएगा।

सड़क सुरक्षा को लेकर सीएम भजनलाल शर्मा ने आम जनता से लिया शपथ

जयपुर  मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शनिवार को जयपुर के जनपथ स्थित अमर जवान ज्योति पर आयोजित सड़क सुरक्षा अभियान के राज्य स्तरीय समारोह में शिरकत की। उन्होंने इस दौरान सड़क सुरक्षा अभियान से संबंधित पोस्टर का विमोचन किया तथा उपस्थित लोगों को सड़क सुरक्षा की शपथ दिलाते हुए यातायात नियमों का पालन करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने घायलों की जान बचाने वालों को किया सम्मानित मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में सड़क दुर्घटनाओं में घायलों की जान बचाने वाले नागरिकों को सम्मानित किया। शर्मा ने इन जीवन रक्षकों का हौसला बढ़ाते हुए उनके नेक कार्य की सराहना की। सम्मानित होने वालों में संदीप गुप्ता, नितेश यादव, सुनील सिरवी, संजय कुमार एवं सुरता देवी शामिल रहे। शर्मा ने कार्यक्रम में सड़क सुरक्षा जन-जागृति रथों को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने 500 ऑटोरिक्शा को भी फ्लैग ऑफ किया। ये सभी वाहन विभिन्न क्षेत्रों में जाकर आमजन को सड़क सुरक्षा के लिए जागरूक करेंगे। शर्मा ने इस अवसर पर दिव्यांगजनों को हेलमेट वितरण किया तथा व्यवसायिक वाहनों पर रिफ्लेक्टिव टेप लगाई। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में सड़क सुरक्षा का संदेश देने वाले गुब्बारे हवा में छोड़कर आमजन को जागरूक किया। इस दौरान उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचन्द बैरवा,मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास सहित विभिन्न विभागों के उच्चाधिकारी, बड़ी संख्या में स्कूल, कॉलेज के छात्र-छात्राएं एवं आमजन उपस्थित रहे।

टैक्सी मालिकों के लिए खुशखबरी, हरियाणा सरकार के नए नियमों से 28 हजार को फायदा

फरीदाबाद  हरियाणा सरकार ने टैक्सी चलाने की अनुमति अवधि बढ़ाकर जिला फरीदाबाद के करीब 28 हजार टैक्सी मालिकों को बड़ी राहत दी है। अब पेट्रोल और सीएनजी टैक्सी 9 के बजाय 12 साल तक चल सकेंगी, जबकि डीजल टैक्सी 10 साल तक ही चलाई जाएंगी। कैबिनेट की 8 दिसंबर को हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। आरटीओ अधिकारी ने कहा कि आदेश का इंतजार है, लिखित निर्देश मिलते ही लागू किया जाएगा। नॉन-एनसीआर क्षेत्र में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी पर चलने वाली ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट वाली गाड़ियां 12 साल तक चलाई जा सकेंगी। इससे दूर-दराज जिलों में टैक्सी सेवाओं का विस्तार होगा। सरकार का मानना है कि टैक्सी संचालन की अवधि बढ़ने से परिवहन ढांचे में मजबूती आएगी। वाहन मालिकों का आर्थिक दबाव कम होगा और सवारियों को भी बेहतर सुविधा मिलेगी। स्कूल बसों के लिए 15 साल की अवधि : एनसीआर में स्टेज कैरिज, कांटेक्ट कैरिज, गुड्स कैरिज और स्कूल बसों की उम्र बढ़ाकर 15 साल कर दी गई है। यह नियम पेट्रोल, सीएनजी, इलेक्ट्रिक और अन्य इंजन वाली गाड़ियों पर लागू होगा, जबकि डीजल बसें 10 साल तक ही चल सकेंगी। यह निर्णय स्कूलों और परिवहन कंपनियों को बड़ी राहत देगा। बसों को बदलने में भारी खर्च आता है। एनसीआर में टूरिस्ट परमिट गाड़ियों को बड़ी राहत हरियाणा मोटर व्हीकल एक्ट 1993 के तहत ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट श्रेणी की वाहनों के लिए चलाने की अधिकतम अवधि तय की गई है। एनसीआर क्षेत्र में पेट्रोल, सीएनजी और इलेक्ट्रिक टैक्सी 12 साल तक चल सकेंगी, जबकि डीजल टैक्सी को 10 साल की सीमा में रखा गया है। यह फैसला ड्राइवरों और पर्यटन से जुड़े लोगों के लिए बड़ा लाभ साबित होगा। इससे टैक्सी मालिकों को नया वाहन खरीदने के बोझ से राहत मिलेगी और रोजगार भी सुरक्षित रहेगा। फरीदाबाद आरटीओ को आदेश का इंतजार फरीदाबाद आरटीओ मनीष सहगल ने बताया कि सरकार द्वारा समय सीमा बढ़ाने के निर्णय की जानकारी है, लेकिन अभी विभाग को लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं। आदेश आते ही नई व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। वर्तमान में फरीदाबाद में 28000 टैक्सी रजिस्टर्ड हैं, जिनमें लगभग 20,950 पेट्रोल व सीएनजी, 6 केवल सीएनजी और 4,279 डीजल टैक्सियां शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बाहरी राज्यों की टैक्सियां भी इस नियम से लाभ उठा सकेंगी, जिससे टैक्सी बाजार में सुगमता आएगी।  

भारत की नजरें ऐतिहासिक रिकॉर्ड पर: 1000 इंटरनेशनल मैच जीतने से कितनी दूर टीम इंडिया?

नई दिल्ली  आईसीसी वनडे और टी20 रैंकिंग में नंबर-1 टीम इंडिया का सपना अब इंटरनेशनल क्रिकेट में 1000 मैच जीतना है। 1932 में भारत ने अपना पहला इंटरनेशल मैच खेला था, मगर उन्हें पहली जीत दर्ज करने के लिए 20 साल की कड़ी मेहनत करनी पड़ी थी। भारत को इंटरनेशनल क्रिकेट में पहली जीत 1952 में इंग्लैंड के खिलाफ मदरास में मिली थी। भारतीय क्रिकेट को इंटरनेशनल क्रिकेट में पहचान तब मिली जब टीम इंडिया ने कपिल देव की अगुवाई में 1983 का वर्ल्ड कप जीता। इसके बाद भारतीय क्रिकेट ने नई ऊंचाइयों को छूना शुरू कर दिया था। इस दौरान कई उतार चढ़ाव आए, मगर धीरे-धीरे भारत ने वर्ल्ड कप क्रिकेट पर अपनी बादशाहत कायम की। टीम इंडिया अभी तक 2 वनडे वर्ल्ड कप, 2 टी20 वर्ल्ड कप और 3 आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी जीत चुका है। भारत का अब सपना 1000 इंटरनेशनल मैच जीतने का है। 1932 से टीम इंडिया ने अभी तक टेस्ट, वनडे और टी20 मिलाकर 1931 मैच खेले हैं जिसमें 928 में जीत मिली है, 709 मैच हारे हैं, 18 टाई रहे हैं, 224 ड्रॉ रहे हैं, वहीं 52 मुकाबलों के नतीजे नहीं निकल पाए हैं। भारत को 1000 मैच जीतने का आंकड़ा छूने के लिए अभी और मेहनत करनी पड़ेगी क्योंकि अभी फासला 72 जीत का है। भारत ने 1 जनवरी 2023 से अभी तक 153 मैच खेले हैं, जिसमें 103 मैचों में उन्हें जीत मिली है। टीम इंडिया साल में औसतन जितने मैच खेलती और जीतती है उससे अंदाजा लगाया जाए तो अगले 2 से 3 साल में भारत इस 1000 जीत के जादुई आंकड़े को छू सकता है। बता दें, भारत इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज्यादा मैच जीतने वाली दूसरी टीम है। इस लिस्ट में ऑस्ट्रेलिया पहले पायदान पर हैं, जो एकमात्र ऐसी टीम है जिन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट में 1000 से अधिक मैच जीते हैं। ऑस्ट्रेलिया अभी तक टेस्ट, वनडे और टी20 मिलाकर 1163 मैच जीत चुका है। टीम इंडिया के टेस्ट, वनडे और टी20 आंकड़ों की बात करें तो भारत को सबसे ज्यादा सफलता ‘क्रिकेट के सबसे छोटे फॉर्मेट’ टी20 में मिली है। भारत इस फॉर्मेट में सबसे ज्यादा 173 मैच जीतने वाली टीम है, वहीं पाकिस्तान 165 जीत के साथ दूसरे पायदान पर है। वहीं वनडे में भारत ने वर्ल्ड क्रिकेट में सबसे अधिक 1072 मैच खेले हैं जिसमें उन्हें 570 मुकाबलों में जीत मिली है। सबसे ज्यादा वनडे मैच जीतने वाली टीमों की लिस्ट में भारत ऑस्ट्रेलिया के बाद दूसरे पायदान पर है। ऑस्ट्रेलिया ने इस फॉर्मेट में 1019 में सर्वाधिक 617 मैच जीते हैं। वहीं बात टेस्ट क्रिकेट की करें तो टीम इंडिया इस फॉर्मेट में सबसे ज्यादा मैच जीतने वाली टीमों की लिस्ट में 185 जीत के साथ चौथे पायदान पर है। भारत के ऊपर ऑस्ट्रेलिया 424, इंग्लैंड 403 और साउथ अफ्रीका 191 जीत के साथ मौजूद हैं।

यूपी बीजेपी का बड़ा दांव: नए अध्यक्ष के सहारे 2024 की भरपाई, अखिलेश यादव की रणनीति पर सीधा वार

लखनऊ   दो साल के इंतजार के बाद उत्तर प्रदेश को जल्द ही नया बीजेपी अध्यक्ष मिलने वाला है। शनिवार यानी आज चुनाव का ऐलान और नामांकन की प्रक्रिया हो सकती है। वहीं रविवार को नए अध्यक्ष के नाम की घोषणा की संभावना है। इस बीच बड़े नेताओं के लखनऊ पहुंचने का सिलसिला शूरू हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक बड़े कार्यक्रम और धूमधाम के साथ नए अध्यक्ष का ऐलान हो सकता है। हालांकि यूपी बीजेपी की कमान किसे मिलने वाली है इसपर सस्पेंस अभी खत्म नहीं हुआ है। जमीनी रिपोर्ट्स की मानें तो बीजेपी इस बार सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को साधते हुए ऐसे नेता को पार्टी की कमान दे सकती है जो कि अखिलेश यादव के पीडीए फार्मुले का तोड़ बन जाए। ऐसे में संभावना किसी ओबीसी नेता को यह बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। सूत्रों की मानें तो ओबीसी और ब्राह्मण समुदाय के नेता इस रेस में हैं। बताया जा रहा है कि ओबीसी समाज से आने वाले केंद्यीर राज्य मंत्री पंकज चौधरी के नामांकन का पूरा प्लान है। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री धर्मपाल लोधी और बीएल वर्मा के नाम पर भी चर्चा की गई है। कयास बहुत लगाए जाते हैं पर बीजेपी ऐसी पार्टी है जो कि हर फैसले में लोगों को चौंका देती है। ऐसे में यूपी में बीजेपी की दशा और दिशा तय करने की अहम जिम्मेदारी किसे दी जाएगी इसपर स्पष्टता से कुछ नहीं कहा जा सकता। बीजेपी निकालेगी एसपी के पीडीए की काट? 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने कुर्मी चेहरों को ज्यादा तवज्जो दी थी। इस वजह से बीजेपी को कुर्मी वोटों को नुकसान उठाना पड़ा था। 2022 तक यह वोट बीजेपी के ही साथ था। बीजेपी चाहती है कि यह वोटबैंक फिर से पार्टी के साथ आ जाए। पूर्वांचल के करीब 20 जिलों में कुर्मी वोटों को खूब दबदबा है। इनकी आबादी करीब 9 फीसदी बताई जाती है। यादवों के बाद सबसे ज्यादा कुर्मियों की आबादी है। इसके अलावा बीजेपी अपना दल के दबाव को भी कम करना चाहती है। बीजेपी चाहती है कि वह संदेश दे कि वह सभी वर्गों का खयाल रखती है। इस रेस में धर्मपाल लोधी का नाम भी आगे है। कल्याण सिंह के बाद उत्तर प्रदेश में लोधी समाज से कोई बड़ा चेहरा आगे नहीं आया। जबकि यह समाज बीजेपी के साथ ही खड़ा है। पश्चिम और मध्य यूपी में लोधी समाज का अच्छा दखल है। ऐसे में इसमें भी अश्चर्य नहीं होगा कि बीजेपी को लोध समाज से नया अध्यक्ष मिल जाए। बात निषाद समाज की हो तो बीजेपी की पकड़ इस समाज पर कमजोर है। इस वजह से बीजेपी को गठबंधन का सहारा लेना पड़ता है। इसमें आश्चर्च नहीं होगा अगर बीजेपी इस समाज से अपना अध्यक्ष चुनती है। बिहार चुनाव में निरंजन ज्योति को बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी। वहीं ब्राह्मण चेहरे की बात करें तो पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी और यूपी बीजेपी महामंत्री गोविंद शुक्ला को संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है। हालांकि इसमें कोई शक नहीं है कि 2027 के चुनाव को ध्यान में रखकर ही यूपी बीजेपी अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा।  

रायपुर: स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने द्वितीय नेशनल होम्योपैथिक सेमिनार का शुभारंभ किया

रायपुर : स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने द्वितीय नेशनल होम्योपैथिक सेमिनार का किया शुभारंभ देश भर से आए विशेषज्ञ कैंसर तथा अन्य बीमारियों के उपचार पर करेंगे दो दिनों तक मंथन रायपुर होम्योपैथिक रिसर्च एंड डेवलपमेंट एसोसिएशन रायपुर द्वारा आयोजित द्वितीय नेशनल होम्योपैथिक सेमिनार का आयोजन 13 से 14 दिसंबर तक रायपुर में किया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने शनिवार को इस सेमिनार का शुभारंभ किया। सेमिनार में होम्योपैथी के माध्यम से कैंसर उपचार की संभावनाओं सहित विभिन्न विषयों पर दो दिनों तक गहन चर्चा होगी। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने द्वितीय नेशनल होम्योपैथिक सेमिनार का किया शुभारंभ कार्यक्रम में डायरेक्टर आयुष सुसंतन देवी जांगड़े, आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी.के. पात्रे, एम.ए.आर.बी.एच. के प्रेसिडेंट डॉ. आनंद चतुर्वेदी, रजिस्ट्रार आयुष डॉ. संजय शुक्ला, डॉ. विजय शंकर मिश्र, डॉ. जे. पी. शर्मा सहित प्रदेश और देश के वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक एवं विशेषज्ञ शामिल हुए। सेमिनार को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा के क्षेत्र में होम्योपैथी का भविष्य में बड़ा योगदान होने वाला है। अनुभव और ज्ञान से ही मनुष्य ताकतवर बनता है, इसलिए होम्योपैथी के युवा चिकित्सकों को अपने वरिष्ठ और अनुभवी चिकित्सकों से सीख लेकर इस विद्या को आगे बढ़ाना चाहिए। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़े केंद्र के रूप में उभर रहा है। पहले लोग इलाज के लिए राज्य से बाहर जाते थे, लेकिन अब प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों का भरोसा बढ़ा है। आसपास के राज्यों से भी मरीज इलाज के लिए छत्तीसगढ़ आ रहे हैं। यहां मेडिकल टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं और रायपुर विश्व की टॉप 10 संभावनाशील शहरों में शामिल हो रहा है। उन्होंने बताया कि रायपुर में योग एवं नेचुरोपैथी कॉलेज खोला जा रहा है। साथ ही नव रायपुर में 5 हजार बेड की मेडिसिटी स्थापित करने की योजना पर भी कार्य चल रहा है। सरकार का उद्देश्य लोगों का विश्वास जीतना है और सभी चिकित्सा पद्धतियों को समान महत्व दिया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में होम्योपैथी का भविष्य उज्ज्वल है। सरकार आपके सुझावों को सुनेगी और उन्हें लागू करने का हरसंभव प्रयास करेगी।

भोपाल मेट्रो का पहला चरण: एम्स से सुभाष नगर तक सिर्फ 10 मिनट, पहले सप्ताह यात्रा निःशुल्क

 भोपाल  भोपाल मेट्रो पटरियों पर 70 से 80 की रफ्तार से दौड़ेगी। चूंकि स्टेशन एक-एक किलोमीटर की दूरी पर हैं, इसलिए मेट्रो अपनी निर्धारित 90 की रफ्तार से नहीं चल पाएगी। एम्स से सुभाष नगर मेट्रो स्टेशन तक की दूरी मेट्रो मात्र 10 मिनट पूरी करेगी। हर स्टेशन पर मेट्रो एक मिनट का हाल्ट लेगी। यही दूरी यदि दो पहिया वाहन से तय करने में कम से कम आधा घंटा लगाता है। वहीं चार पहिया वाहन से यह दूरी तय करने में 20 मिनट लगते हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो मेट्रो से सफर करने में यात्री मात्र 10 मिनट में सुभाष नगर से एम्स तक पहुंच जाएंगे। इससे यात्रियों को समय भी बचेगा और ट्रैफिक जाम से निजात मिलेगी। पहले सप्ताह जनता के लिए फ्री रहेगी मेट्रो शहर के नागरिकों को लोकार्पण के बाद पहले सप्ताह फ्री में यात्रा करने को मौका मिलेगा । इसके बाद यात्री मैन्युअली टिकट खरीदकर मेट्रो में यात्रा कर सकें। ज्ञात हो कि तुर्किए से हुआ अनुबंध के समाप्त होने के बाद से ऑन लाइन टिकट सिस्टम शुरू नहीं हुआ है। मंथली पास और स्कीम पर हो रहा मंथन मेट्रो का किराया 20 रुपये से शुरू होगा, जो अधिकतम 30 रुपये तक जाएगा। यात्री 30 रुपये में सुभाष नगर से एम्स तक पहुंचेंगे। मंथली पास और स्कीम पर मंथन चल रहा है। इसकी जानकारी मेट्रो प्रबंधन सोमवार यानी 14 दिसंबर को आधिकारिक रूप से जारी करेगा। जानकारी के अनुसार महिलाएं, विद्यार्थी और सीनियर सिटीजन के लिए स्कीम लगा सकता है। पहले चरण में एम्स से सुभाष नगर तक चलेगी मेट्रो भोपाल मेट्रो प्रायोरिटी कारिडोर के पहले चरण में तैयार किए गए एम्स मेट्रो स्टेशन से सुभाष नगर मेट्रो स्टेशन तक चलेगी। यह रूट 7.5 किलोमीटर का है। इसमें आठ मेट्रो स्टेशन हैं, जो इस प्रकार हैं, एम्स, अलकापुरी, डीआरएम आफिस, रानी कमलापति रेलवे स्टेशन, एमपी नगर, बोर्ड आफिस चौराहा, केंद्रीय विद्यालय, सुभाष नगर। दूसरे चरण में पुल बोगदा से करोंद तक चलेगी मेट्रो आरेंज लाइन कारिडाेर के दूसरे चरण में करीब 9.24 किलोमीटर का रूट तैयार किया जा रहा है। इस रूट पर भी आठ मेट्रो स्टेशन हैं। जब यह रूट तैयार हो जाएगा, तब मेट्रो पुल बोगदा, ऐशबाग, रेलवे स्टेशन, नादरा बस स्टैंड, सिंधी कालोनी, डीआइजी बंगला, कृषि उपज मंडी, करोंद चौराहा मेट्रो स्टेशन तक चलेगी। इन दिनों रूट की कुल लंबाई 16.74 किलोमीटर है। ब्लू लाइन का भी शुरू हुआ काम आरेंज लाइन के साथ-साथ ब्लू लाइन पर भी मेट्रो का काम शुरू हो चुका है। भदभदा से रत्नागिरी तक बनाए जाने वाले इस कॉरिडोर पर करीब 14 मेट्रो स्टेशन रहेंगे। मेट्रो स्टेशन बनाने के लिए मिट्टी की टेस्टिंग हो चुकी है। पिलर बनाए जाने के लिए स्थान का चयन हो चुका है। कुछ स्थानों पर बेरिकेड्स कर खोदने का काम शुरू हो गया है। आरेंज और ब्लू लाइन कारिडोर की कुल लंबाई करीब 30.95 किलोमीटर है। इन दोनों कारिडोर को वर्ष 2030 तक पूरा किया जाना प्रस्तावित है। एस कृष्ण चैतन्य, एमडी, एमपी मेट्रो कारर्पोरेशन का कहना है मेट्रो के आपरेशन से जुड़ी समस्त जानकारी आधिकारिक रूप से 14 दिसंबर को जारी की जाएगी । फिलहाल सिर्फ लोकार्पण की तारीख और कार्यक्रम स्थल का तय हुआ है।

भोपाल में एसआइआर प्रक्रिया में 39 दिनों में 4.43 लाख मतदाताओं के नाम कटने का खतरा, चुनाव आयोग ने दिए निर्देश

 भोपाल  राजधानी में पिछले 39 दिनों से जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआइआर) प्रक्रिया के दौरान अब तक 4 लाख 43 हजार 633 मतदाताओं के नाम कटना तय हो गया है। ये नाम मृत, शिफ्टेड, अनुपस्थित, डबल एंट्री और अन्य श्रेणियों में पाए गए हैं। वहीं नो-मैपिंग वाले मतदाताओं की संख्या घटकर 1 लाख 35 हजार 765 रह गई है। जिले में सीधे तौर पर नाम काटने के आंकड़े को लेकर शुक्रवार को भारत निर्वाचन आयोग के आब्जर्वर और ज्वाइंट सेकेटरी ब्रजमोहन मिश्रा ने राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों से बात की। उन्होंने सभी प्रमुख राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों से कहा कि भोपाल में काटे जा रहे मतदाताओं के नामों को लेकर बीएलओ से वेरिफाई करा लिया जाए। जिसके बाद आब्जर्वर उत्तर के खानूगांव और दक्षिण पश्चिम के पालेटेक्निक मतदान केंद्र पर बीएलओ का काम देखने पहुंचे। हालांकि उन्हें नरेला, मध्य, गोविंदपुरा और हुजूर की विधानसभाओं में भी बीएलओ का काम देखने जाना था, लेकिन वह छत्तीसगढ़ के लिए रवाना हो गए। 35 हजार से अधिक बढ़े नाम काटने के मामले 7 दिसंबर को राजधानी की 7 विधानसभा क्षेत्रों में एसआइआर का कार्य 100 प्रतिशत पूरा घोषित किया गया था। उस समय अनकलेक्टेबल श्रेणी में 4 लाख 8 हजार 106 मतदाताओं के नाम हटाने प्रस्तावित थे, लेकिन नो-मैपिंग के बाद यह संख्या बढ़कर 4 लाख 43 हजार 634 हो गई। इस प्रकार पांच दिनों में 35 हजार 528 नए नाम हटाने की सूची में जुड़ गए। 18 दिसंबर तक जमा कर सकेंगे गणना पत्रक आब्जर्वर ने बताया कि चुनाव आयोग के संशोधित कार्यक्रम के अनुसार अब मतदाता अपने गणना पत्रक 18 दिसंबर तक जमा कर सकेंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नाम हटाने की कार्रवाई पूरी पारदर्शिता और सही वेरिफिकेशन के साथ की जाए, ताकि किसी भी मतदाता को अनावश्यक परेशानी न हो।

हरियाणा में डॉक्टरों की हड़ताल पर सरकार का कड़ा एक्शन, ESMA के साथ ‘नो वर्क नो पे’ लागू

चंडीगढ़  हरियाणा में सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के डॉक्टरों की दो दिन की हड़ताल को अब अनिश्चितकाल तक बढ़ाने के ऐलान पर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। सरकार ने राज्य में आवश्यक सेवा संरक्षण अधिनियम (एस्मा) लागू कर दिया है। आदेश में कहा गया है कि गंभीर रूप से बीमार मरीजों और अन्य लोगों की देखभाल के लिए स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों व कर्मचारियों को बिना किसी रुकावट के अपनी ड्यूटी जारी रखनी होगी, क्योंकि हड़ताल से जनता के स्वास्थ्य और जीवन पर गंभीर खतरा है। राज्यपाल ने धारा 4(क)(1) के तहत स्पष्ट किया है कि अगले छह महीनों तक स्वास्थ्य विभाग के सभी डॉक्टर और कर्मचारी किसी भी तरह की हड़ताल नहीं कर सकेंगे।   इधर, स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने वीडियो संदेश जारी कर कहा कि हरियाणा सिविल मेडिकल एसोसिएशन ने दो दिन की हड़ताल का ऐलान किया था और उनकी कई मांगों पर सरकार विचार कर रही है। हड़ताल के बावजूद स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह बाधित नहीं हुईं और आम आदमी पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ा। ज्यादातर अस्पतालों में डॉक्टरों की ड्यूटी लगी रही और बड़ी संख्या में बाहर से डॉक्टर बुलाए गए थे। नो वर्क नो पे का आदेश स्वास्थ्य विभाग ने हड़ताली डॉक्टरों पर सख्ती करते हुए 'नो वर्क नो पे' का आदेश जारी किया है। हड़ताल में शामिल डॉक्टरों को इन दिनों का वेतन नहीं मिलेगा। इस फैसले पर डॉक्टर एसोसिएशन ने तीव्र विरोध जताया है। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ राजेश ख्यालिया ने बताया कि सरकार को कई बार वार्ता के लिए अनुरोध भेजा गया, लेकिन कोई ठोस प्रस्ताव नहीं आया। राज्य कार्यकारिणी की बैठक में फैसला लिया गया कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, सभी डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रखेंगे। बता दें कि एसएमओ की सीधी भर्ती समेत कई मांगों को लेकर दो दिन से हड़ताल पर चल रहे डॉक्टरों ने आज बैठक की और 10 दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला लिया। एसोसिएशन ने बुधवार से आमरण अनशन शुरू करने की भी घोषणा की है। डॉक्टरों का कहना है कि वर्तमान नीति के तहत 75% एसएमओ पद प्रमोशन से और केवल 25% पद सीधी भर्ती से भरे जाते हैं। सीधी भर्ती वाले डॉक्टर करियर में बहुत ऊंचे पदों (कई तो महानिदेशक तक) तक पहुंच जाते हैं, जबकि नौकरी में पहले से कार्यरत डॉक्टरों को पूरे करियर में मुश्किल से एक ही प्रमोशन मिलता है और वे वहीं के वहीं अटके रहते हैं। बच्ची का पोस्टमॉर्टम नहीं हो सका, ओपीडी में लंबी कतारें हड़ताल के कारण यमुनानगर, पानीपत, फतेहाबाद, जींद, कैथल, हिसार, झज्जर और चरखी दादरी जिलों में सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं। कई सरकारी अस्पतालों में ओपीडी में मरीजों की लंबी-लंबी कतारें लगी रहीं और गंभीर मरीजों को अन्य अस्पतालों में रेफर करना पड़ा। महेंद्रगढ़ में एक छह साल की बच्ची का पोस्टमॉर्टम नहीं हो सका, शव को नारनौल भेजना पड़ा। पंचकूला सिविल अस्पताल में मरीज घंटों डॉक्टर का इंतजार करते रहे। हिसार में सड़क हादसे में घायल एक युवक को समय पर इलाज नहीं मिल सका।