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जस्टिस जे. निशा बानो का केरल HC ट्रांसफर: राष्ट्रपति के आदेश के साथ जॉइनिंग की डेडलाइन तय

केरल मद्रास हाईकोर्ट की जज जे. निशा बानो को केरल हाईकोर्ट में ट्रांसफर किए जाने के लगभग दो महीने बाद भी उन्होंने पदभार ग्रहण नहीं किया है, जिसके बाद राष्ट्रपति ने उन्हें 20 दिसंबर, 2025 तक केरल हाईकोर्ट में पदभार ग्रहण करने का निर्देश दिया है। कानून मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि, राष्ट्रपति, भारत के चीफ जस्टिस से परामर्श करने के बाद मद्रास हाईकोर्ट की जज न्यायमूर्ति जे. निशा बानो को 20 दिसंबर 2025 को या उससे पहले केरल हाईकोर्ट में अपना पदभार ग्रहण करने का निर्देश देते हुए प्रसन्न हैं। केंद्र सरकार ने जज बानो के मद्रास हाईकोर्ट से केरल हाईकोर्ट में ट्रांसफर की अधिसूचना 14 अक्टूबर, 2025 को जारी की थी। हालांकि, लगभग दो महीने बीत जाने के बाद भी उन्होंने केरल हाईकोर्ट में कार्यभार नहीं संभाला था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस देरी ने केरल हाईकोर्ट बार के सदस्यों के बीच बेचैनी पैदा कर दी थी। बार की प्रतिक्रिया पर प्रतिक्रिया देते हुए, न्यायमूर्ति बानो ने पिछले महीने एक समाचार पत्र को बताया था कि उन्होंने अपने बेटे के विवाह के मद्देनजर मद्रास हाईकोर्ट में अर्जित अवकाश के लिए आवेदन किया था। साथ ही, उन्होंने कहा था कि वह अपने ट्रांसफर पर पुनर्विचार के लिए किए गए अनुरोध के परिणाम का भी इंतजार कर रही थीं। इस बीच कांग्रेस सांसद केएम सुधा आर ने शुक्रवार को लोकसभा में प्रश्न उठाते हुए केंद्रीय कानून मंत्रालय से स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने पूछा कि क्या न्यायमूर्ति बानो अभी भी मद्रास हाईकोर्ट के कॉलेजियम का हिस्सा हैं और क्या उन्होंने जजों के रूप में नियुक्ति के लिए अनुशंसित उम्मीदवारों की किसी सूची पर हस्ताक्षर किए हैं। सांसद ने यह भी पूछा कि क्या जज ने अपने ट्रांसफर पर पुनर्विचार की मांग की थी। इसके जवाब में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सीधे तौर पर इन सवालों का जवाब नहीं दिया। इसके बजाय, उन्होंने न्यायिक नियुक्तियों और ट्रांसफरों को नियंत्रित करने वाले संवैधानिक और प्रक्रियात्मक ढांचे को रेखांकित किया। मंत्री ने संविधान के अनुच्छेद 217 का उल्लेख करते हुए कहा कि एक जज को दूसरे हाईकोर्ट में ट्रांसफर किए जाने पर अपना वर्तमान पद खाली करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति बानो के ट्रांसफर की अधिसूचना 14 अक्टूबर, 2025 को जारी की गई थी और उन्होंने अनुच्छेद 217 (1) (ग) का हवाला दिया, जिसमें प्रावधान है कि राष्ट्रपति द्वारा किसी अन्य हाईकोर्ट में ट्रांसफर किए जाने पर जज का पद रिक्त हो जाएगा।  

जिस VIP नंबर पर लगी थी 1.17 करोड़ की बोली, वही HR 88B 8888 अब 26.71 लाख में बिका

चंडीगढ़  एचआर 88बी8888 नंबर तो आपको याद ही होगा। फैंसी नंबरों की ऑक्शन में इस नंबर की सबसे महंगी नीलामी लगी थी। तब ये 1.17 करोड़ रुपए में नीलाम हुआ था लेकिन इसे खरीदने वाले शख्स ने बोली लगाकर इसकी फीस नहीं चुकाई थी और हरियाणा सरकार ने इसे फिर से ऑक्शन में रखा ​था। अब दूसरी ऑक्शन में इसे कैथल के शख्स ने अपनी पत्नी सुषमा के नाम पर महज 26.71 लाख में खरीदा है। 26 नवंबर को पहली बार इस नंबर की नीलामी हुई थी। हिसार के सुधीर कुमार ने 1.17 करोड़ रुपए लगाकर इसे जीता, लेकिन नीलामी के दो दिन के अंदर पूरी राशि जमा नहीं की। हरियाणा के परिवहन मंत्री अनिल विज ने सुधीर की संपत्ति और आय की जांच के आदेश दे दिए। विज ने कहा कि बोली लगाना शौक नहीं बल्कि जिम्मेदारी है। विज ने ये भी कहा कि आयकर विभाग को एक पत्र भेजा जाएगा और रकम जमा न होने के कारण दोबारा नीलामी की जाएगी। वहीं, पैसे जमा नहीं करने का कारण सुधीर ने तकनीकी दिक्कत बताया था। कल 10 दिसंबर को इस वीआईपी नंबर प्लेट की ऑक्शन में 31 लोगों ने बोली लगाई और शाम 5 बजे तक ऑक्शन चली। इसमें सुधीर ने हिस्सा नहीं लिया था। अंत में इसे सुषमा ने 26.71 लाख में खरीदा। उन्हें भी 3 दिन के अंदर पूरे पैसे जमा करवाने होंगे। पूरी नम्बर प्लेट में लगातार 8 नंबर हरियाणा में फैंसी परिवहन डॉट जीओवी डॉट इन पर प्रत्येक सप्ताह फैंसी नंबर प्लेट की नीलामी होती है। 8888 ये चार अंकों का यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर है, जो वीआईपी नंबरों में सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले पैटर्न में से एक है। एचआर 88बी8888 में बी भी 8 जैसा दिखता है। इस तरह पूरी नम्बर प्लेट में 8 नंबर लगातार दिखाता है, जिससे इसकी प्रीमियम वैल्यू और बढ़ जाती है। यही वजह है कि लोग इस नम्बर के लिए उतावले हुए थे।

गुमगरा खुर्द पीएचसी के नए भवन का उद्घाटन, ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का वादा – मंत्री राजेश अग्रवाल

रायपुर : कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल ने गुमगरा खुर्द पीएचसी के नए भवन का किया लोकार्पण, ग्रामीणों को बेहतर रात्रिकालीन सेवाओं का दिया भरोसा रायपुर छत्तीसगढ़ के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने सरगुजा जिले के लखनपुर ब्लाक के ग्राम पंचायत गुमगरा खुर्द में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) के आधुनिक नए भवन का फीता काटकर औपचारिक लोकार्पण किया। इस नवीन सुविधा का उद्घाटन ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो क्षेत्रीय विकास की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। लोकार्पण समारोह के दौरान मंत्री अग्रवाल ने स्वास्थ्य केंद्र के स्टाफ को स्पष्ट निर्देश दिए कि ग्रामीणजन को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने विशेष रूप से रात्रिकालीन सेवाओं पर जोर देते हुए कहा कि इसमें किसी भी प्रकार की कमी या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्टाफ को कर्तव्यनिष्ठा, सतर्कता और समर्पण के साथ सेवा प्रदान करने का आग्रह किया गया, ताकि दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं सुलभ और विश्वसनीय बनी रहें। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, ग्रामवासियों और स्वास्थ्य कर्मियों की उपस्थिति रही। नए भवन से अब जांच, उपचार और दवा वितरण जैसी सेवाएं अधिक प्रभावी ढंग से उपलब्ध होंगी, जो विशेषकर आपातकालीन स्थितियों में ग्रामीणों के लिए वरदान साबित होगी। मंत्री ने कहा कि सरकार ग्रामीण स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे रही है और ऐसी योजनाओं को निरंतर आगे बढ़ाया जाएगा।

बंटवारे के बाद नया अध्याय: पाकिस्तान में शुरू हुआ संस्कृत कोर्स, पाठ्यक्रम में गीता-महाभारत

इस्लामाबाद  भारत और पाकिस्तान भले ही कभी एक ही रहे हों लेकिन आज दोनों देश के बीच राजनीतिक दूरियां इतनी बढ़ गई हैं कि अंतरराष्ट्रीय पटल पर दोनों देश एक दूसरे के दुश्मन बन गए हैं। वहीं इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि दोनों देशों की संस्कृति एक ही बीजे से उपजे हुए दो पौधों की तरह है जिसमें समानता को कभी खत्म नहीं किया जा सकता है। बंटवारे के बाद पहली बार है जब पाकिस्तान के किसी विश्वविद्यालय में संस्कृति का कोर्स शुरू किया गया है। इतना ही नहीं तैयारी यह भी है कि आने वाले समय में पाकिस्तान में भी भगवद्गीता और महाभारत की शिक्षा दी जाएगी।   लाहौर यनिवर्सिटी ऑफि मैनेजमेंट साइंसेज (LUMS) ने पारंपरिक भाषाओं के चार क्रेडिट कोर्स शुरू किए हैं। इसमें से एक संस्कृत भी है। फोरमैन क्रिश्चियन कॉलेज में समाजशास्त्र के असोसिएट प्रोफेसर डॉ. शाहिद रशीद के प्रयासों से यह सं हो बपाया है। वह खुद भी संस्कृत के विद्वान हैं। द ट्रि्ब्यून से बातचीत में उन्होंने बताया कि पारंपरिक भाषाओं में ज्ञान का सागर छइा है। मैंने पहले अरबी और फारसी पढ़ी और इसके बाद संस्कृत पढ़नी शुरू की। उन्होंने कहा, मुझे संस्कृत का व्याकरण समझने में एक साल लग गया और अब भी मैं कोशिश कर रहा हूं। उन्होंने बताया कि तीन महीने की वीकेंड वर्कशॉप में संस्कृत का कोर्स चलाया गया था। इसके बाद छात्रों में संस्कृति के प्रति रुचि दिखाई दी। एलयूएमएस में गुरमानी सेंटर के डायरेक्टर डॉ. अली उस्मान कासिम ने कहा कि पाकिस्तान के इलाके में भी संस्कृत पर बहुत काम हुआ है। अब भी पंजाब यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में संस्कृति की दुर्लभ पुस्तकें और ग्रंथ उपलब्ध हैं। यहां तक कि संस्कृत में लिखे पत्ते भी लाइब्रेरी में मौजूद हैं जिन्हें बाद में जेसीआर वूलनर ने एकत्रित किया था। इनका इस्तेमाल विदेशी शोधकर्ता ही करते हैं। वहीं पाकिस्तान में संस्कृत की शिक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया। ये हमारी भी भाषा है डॉ. रशीद ने कहा कि बहुत सारे लोगों को लगता है कि यह भाषा हिंदू धार्मक ग्रंथों के लिए ही है। मैं उनको बताना चाहता हूं कि यह पूरे क्षेत्र की भाषा है। संस्कृत के व्याकरण के रचयिता पाणिनि का गांव भी यहीं हुआ करता था। सिंधु सभ्यता के दौरान यहां बहुत ज्यादा लेखन हुआ। संस्कृत एक पर्वत की तरह है जिसमें बहुत सारे खजाने हैं। हमें इनको स्वीकार करना है। यह किसी एक विशेष धर्म से बंधी हुई नहीं है। उन्होंने कहा कि सीमा के दोनों तरफ जब संस्कृत पर काम होगा तो आप कल्पना करिए कि भारत के हिंदू और सिख अरबी पारसी सीखेंगे और पाकिस्तान के मुसलमान संस्कृति सीखेंगे। इससे दक्षिण एशिया में एक भाषा सेतु का निर्माण होगा। उन्होंने कहा कि भाषा की कोई सीमा नहीं होती है। उन्होंने बताया कि उनके पूर्वज हरियाणा के करनाल में रहते थे। वहीं उनकी मां उत्तर प्रदेश के शेखपुरा की रहने वाली हैं। उन्होंने कहा कि देवनागरी लिपि बहुत ही आकर्षक है। गीता और महाभारत पर भी लॉन्च होंगे कोर्स डॉ. कासमी ने कहा कि यूनिवर्सिटी का प्लान महाभारत और भगवद्गीता के कोर्स शुरू करने का भी है। हो सकता है कि 10 से 15 सालों में पाकिस्तान से गीता और महाभारत के भी विद्वान निकलें।  

प्रभारी मंत्री निर्मला भूरिया ने बताया, मंदसौर जिले में दो साल में हुए महत्वपूर्ण विकास कार्य

मंदसौर जिले ने दो वर्षों में किए विकास के नए आयाम स्थापित : प्रभारी मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया पशुपतिनाथ लोक, मेडिकल कॉलेज, चीता प्रोजेक्ट, नगर वन, उद्योग सहित विभिन्न क्षेत्रों में हासिल की उल्लेखनीय उपलब्धियां भावांतर भुगतान योजना में 8,803 किसानों को 10.20 करोड़ रुपए का भुगतान दो वर्षो की उपलब्धियों पर आधारित पुस्तक का किया विमोचन प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक भोपाल महिला एवं बाल विकास विभाग तथा मंदसौर जिले की प्रभारी मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा है कि मंदसौर जिले ने विगत दो वर्षों में विकास के हर क्षेत्र में नये कीर्तिमान स्थापित किए हैं। उन्होने राज्य सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने पर मंदसौर जिले में अब तक किए गए विकास कार्यों, योजनाओं की प्रगति तथा उपलब्धियों की विस्तार से जानकारी दी। प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट कार्यालय स्थित सुशासन भवन सभागार में जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक एवं प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रभारी मंत्री ने 2 वर्ष की उपलब्धियां पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया। सांसद श्री बंशीलाल गुर्जर, कलेक्टर श्रीमती अदिती गर्ग, सुवासरा विधायक श्री हरदीप सिंह डंग, जिला योजना समिति सदस्य श्री राजेश दीक्षित, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती दुर्गा विजय पाटीदार, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती रमादेवी बंशीलाल गुर्जर, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्री बसंत शर्मा सहित पुलिस अधीक्षक श्री विनोद कुमार मीना, अपर कलेक्टर श्रीमती एकता जायसवाल सहित सभी जिलाधिकारी, पत्रकार गण मौजूद थे। प्रभारी मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि विगत दो वर्षों में मंदसौर जिले में धार्मिक, पर्यटन, औद्योगिक, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, नगरीय एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की गई हैं। भगवान श्री पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में लगभग 25 करोड़ रुपए की लागत से पशुपतिनाथ लोक का निर्माण पूर्णता की ओर है। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत जिले में 61.62 करोड़ रुपए की लागत से 5 निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं। जल जीवन मिशन के अंतर्गत जिले के सभी 922 ग्रामों में 2 लाख 40 हजार से अधिक ग्रामीण नल जल कनेक्शन प्रदान किए जा रहे हैं तथा लगभग 1332 करोड़ रुपए की नल जल योजनाओं के कार्य प्रगतिरत हैं। इसके साथ ही गांधीसागर जल विद्युत गृह की 115 मेगावाट क्षमता की इकाइयों के नवीनीकरण एवं आधुनिकीकरण के लिए 418.91 करोड़ रुपए की स्वीकृति शासन द्वारा प्रदान की गई है। स्वास्थ्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में भी जिले ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। मंदसौर जिला मुख्यालय पर श्री सुंदरलाल पटवा शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय अक्टूबर 2024 से 100 सीट्स के साथ प्रारंभ किया गया है, जहां वर्तमान में प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के कुल 200 छात्र अध्ययनरत हैं। इसके अलावा जिले में 13 सांदीपनि विद्यालयों की स्वीकृति प्रदान की गई है, जिनमें से अधिकांश भवनों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। कृषि एवं किसान कल्याण के क्षेत्र में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना एवं मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के अंतर्गत जिले के 2 लाख 19 हजार से अधिक किसानों को 43.96 करोड़ रुपए की राशि वितरित की गई है। सोयाबीन भावांतर भुगतान योजना के अंतर्गत 8,803 किसानों को सिंगल क्लिक के माध्यम से 10.20 करोड़ रुपए की राशि उनके बैंक खातों में जमा कराई गई है। अतिवृष्टि एवं फसल क्षति पर जिले को 267.29 करोड़ रुपए की राहत राशि आवंटित की गई है। औद्योगिक विकास को गति देने जिले में 331.47 हेक्टेयर भूमि पर नवीन औद्योगिक क्षेत्रों का विस्तार किया गया है। कृषि उद्योग समागम 2025 का आयोजन मंदसौर में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की उपस्थिति में किया गया, जिसमें 3,600 करोड़ रुपए का पूंजी निवेश हुआ तथा लगभग 12,500 लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के अंतर्गत विगत दो वर्षों में 487 हितग्राहियों को 35.39 करोड़ रुपए का ऋण प्रदान कर स्वरोजगार से जोड़ा गया है। नगरीय एवं ग्रामीण विकास के अंतर्गत अमृत 2.0 योजना में 194.82 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत 10,166 आवास पूर्ण किए जा चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत भवन, सामुदायिक भवन, ग्राम सड़क, प्रधानमंत्री आवास (ग्रामीण) सहित 50,512 विकास कार्यों के लिए 810.01 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। प्रभारी मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि मंदसौर जिला निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर है तथा आने वाले समय में जिले को विकास के नए शिखर पर पहुंचाया जाएगा।  

रायपुर: जनता की आस्था सरकार की सबसे बड़ी शक्ति, दो वर्षों की सेवा यात्रा समर्पित – CM विष्णुदेव साय

रायपुर : जनता की आस्था ही सरकार की सबसे बड़ी शक्ति: दो वर्ष की सेवा यात्रा छत्तीसगढ़ की जनता को समर्पित – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय छत्तीसगढ़ विश्वास, स्थिरता और सुशासन के नए अध्याय की ओर अग्रसर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रदेशवासियों को किया संबोधित रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपनी सेवायात्रा के दो वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर छत्तीसगढ़ की जनता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा है कि बीते दो वर्ष शासन के नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और जनसहभागिता के वर्ष रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह समय उनके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण वर्षों में से एक रहा, क्योंकि इस दौरान उन्हें प्रदेशवासियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने और उनकी अपेक्षाओं को समझने का अवसर मिला। मुख्यमंत्री साय ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि इन दो वर्षों में राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ के हर कोने तक विकास की रोशनी पहुँचाने का निरंतर प्रयास किया है। किसानों की मेहनत को सम्मान दिलाने के लिए सुविधाओं का विस्तार किया गया, ताकि उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य समय पर प्राप्त हो सके। कृषि को लाभकारी और सम्मानजनक बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य को सुरक्षित और सशक्त बनाने के लिए नई भर्तियों, कौशल प्रशिक्षण और औद्योगिक अवसरों के द्वार खोले गए हैं। रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता को केंद्र में रखकर योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है, ताकि प्रदेश का युवा आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सके। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आदिवासी अंचलों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं का व्यापक विस्तार किया गया है। जिन क्षेत्रों में कभी उम्मीदें धुंधली थीं, वहाँ अब विकास की नई संभावनाएँ आकार ले रही हैं। बहनों की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए भी सरकार ने कई प्रभावी कदम उठाए हैं, जिससे हर परिवार में आत्मविश्वास का वातावरण बना है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इन प्रयासों के बीच सबसे बड़ा परिवर्तन यह है कि आज शासन जनता के और अधिक निकट आया है। प्रशासन और आमजन के बीच की दूरी घटकर सहभागिता में बदल रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि छत्तीसगढ़ आज विश्वास, स्थिरता और सुशासन के एक नए अध्याय की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे इस विकास यात्रा में अपने सुझावों, परिश्रम और विश्वास से सरकार का मार्गदर्शन करते रहें। उन्होंने कहा कि जनता की आस्था ही सरकार की सबसे बड़ी शक्ति है और छत्तीसगढ़ के उज्ज्वल भविष्य की सच्ची गारंटी है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भविष्य के लिए सरकार की प्रतिबद्धता और भी सशक्त है। आने वाले वर्षों में शिक्षा, रोजगार, कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में और तेज़ गति से कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य आत्मनिर्भर और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करना है, जहाँ प्रत्येक युवा को अवसर, किसान को गर्व और हर नागरिक को यह विश्वास हो कि शासन सदैव उसके साथ खड़ा है।

मोहन सरकार के दो वर्षों में छह लाख को मिली नौकरी, तीन साल में 20 लाख को मिलेगी रोजगार की सुविधा

भोपाल   मोहन सरकार अपने दो वर्ष पूरे कर चुकी है और अब शेष तीन वर्षों के लिए सरकार ने विस्तृत रोडमैप तैयार कर लिया है। सरकार ने साफ किया है कि आने वाले वर्षों में उसका मुख्य फोकस रोजगार, शहरी विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर, और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर रहेगा। इन सेक्टरों को राज्य के विकास के लिए निर्णायक माना जा रहा है। रोजगार: सबसे बड़ा फोकस राज्य सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती नए रोजगार अवसरों का सृजन है- चाहे सरकारी क्षेत्र हो या निजी क्षेत्र। सरकार ने आगामी तीन वर्षों में 20 लाख युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्य तय किया है। विभागों में खाली पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया तेज की जा रही है और कई विभागों में भर्ती संबंधी विज्ञप्तियां भी जारी हो चुकी हैं। सरकार का दावा है कि पिछले दो वर्षों में 6 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। स्वरोजगार योजनाओं को भी बढ़ावा दिया जाएगा और 30,000 नए उद्यमियों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित करने की योजना है। 38 शहरों का नया जीआईएस मास्टर प्लान टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग द्वारा प्रदेश के 38 शहरों के जीआईएस आधारित मास्टर प्लान तैयार किए जाएंगे। साथ ही महानगर क्षेत्र कानून लागू किया जाएगा। टीडीआर पोर्टल का विस्तार, टीओडी नीति का क्रियान्वयन और सिंहस्थ 2028 के लिए एकीकृत मास्टर प्लान आधारित विकास किया जाएगा। डीपीडीपी कानून के अनुरूप विभागीय पोर्टल का आधुनिकीकरण किया जाएगा। नक्शाविहीन गांवों का डिजिटलीकरण, भू-अर्जन प्रक्रियाओं को एंड-टू-एंड ऑनलाइन करने और नई आबादी की भूमि का चिन्हांकन भी योजना का हिस्सा है। विश्वास-आधारित डायवर्ज़न प्रक्रिया भी लागू की जाएगी। जनजातीय विकासखंड में सांदीपनि स्कूल हर जनजातीय विकासखंड में सांदीपनि स्कूल, एकलव्य विद्यालय, माता शबरी कन्या शिक्षा परिसर और बालक आदर्श आवासीय विद्यालय की स्थापना की योजना है, जिससे आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का दायरा बढ़ेगा। जल जीवन मिशन- लक्ष्य से पहले पूरा करने का दावा प्रदेश सरकार का कहना है कि केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन की समयसीमा दिसंबर 2028 तय की है, लेकिन मध्य प्रदेश इसे मार्च 2027 तक पूरा कर देश में मिसाल पेश करेगा। मिशन के संचालन और संधारण के लिए मजबूत व्यवस्था तैयार की जाएगी, ताकि जल आपूर्ति किसी भी परिस्थिति में बाधित न हो। 

रायपुर: विशेष लेख – मुख्यमंत्री साय ने जताई समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण के प्रति शासन की प्रतिबद्धता

      रायपुर, छत्तीसगढ़ में समाज के कमजोर, वंचित और विशेष जरूरतों वाले वर्गों को सशक्त बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में बीते दो वर्ष उल्लेखनीय सिद्ध हुए हैं। समाज कल्याण विभाग ने इस अवधि में पेंशन योजनाओं, दिव्यांगजन सहायता, वरिष्ठ नागरिक कल्याण, आश्रय सुविधाओं, उभयलिंगी पुनर्वास और नशा मुक्ति कार्यक्रमों के क्षेत्र में व्यापक सुधारों और नई पहल का नेतृत्व किया है। योजनाओं की पारदर्शिता पहुंच और प्रभावशीलता बढ़ाकर राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि अंतिम व्यक्ति तक सहायता और सुरक्षा पहुँचे। यह कार्यकाल संवेदनशील, जवाबदेह और जनकेंद्रित शासन का वास्तविक उदाहरण प्रस्तुत करता है। पेंशन योजनाओं में क्रांतिकारी सुधार 21.99 लाख हितग्राहियों तक सहायता राज्य सरकार ने सामाजिक सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए पेंशन योजनाओं के संचालन में तकनीकी सुधार किए। छह प्रमुख पेंशन योजनाओं इंदिरा गांधी वृद्धावस्था, विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, सुखद सहारा तथा मुख्यमंत्री पेंशन योजना के माध्यम से 21.99 लाख हितग्राही लाभान्वित हुए। पेंशन वितरण पारदर्शी और समयबद्ध डीबीटी भुगतान 98 प्रतिशत और आधार सीडिंग 96 प्रतिशत तक पहुँचने के साथ पेंशन वितरण प्रणाली अत्यंत पारदर्शी और समयबद्ध बनी। ई-केवायसी प्रक्रिया में मृत हितग्राहियों को हटाकर वास्तविक पात्रों को लाभ सुनिश्चित किया गया। मुख्यमंत्री पेंशन योजना के हितग्राही 7.10 लाख से बढ़कर 7.45 लाख होना राज्य की संवेदनशील नीतियों का महत्वपूर्ण परिणाम है। राष्ट्रीय परिवार सहायता-संकट की घड़ी में बड़ा सहारा गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों के लिए राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना जीवन रक्षक सिद्ध हुई है। दो वर्षों में 5,110 पात्र परिवारों को 20 हजार रुपए की एकमुश्त सहायता प्रदान की गई, जिससे आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में उन्हें राहत मिल सके। दिव्यांगजन सहायता सुविधाओं, पहचान और पुनर्वास में कई गुना वृद्धि दिव्यांगजनों की सहायता और सशक्तिकरण के लिए विभाग द्वारा किए गए प्रयास अत्यंत प्रभावी रहे। यूडीआईडी कार्ड लाभार्थी 2.74 लाख तक पहुँचे। सहायक उपकरण वितरण 1,161 से बढ़कर 3,609 हो गया। सामर्थ्य विकास शिविरों में भी वृद्धि हुई और 4,983 दिव्यांगजनों को सीधा लाभ प्राप्त हुआ। ये सभी प्रयास दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी गरिमा सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाते हैं। विशेष शिक्षा एवं पुनर्वास विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए मजबूत आधार छत्तीसगढ़ ने विशेष शिक्षा और पुनर्वास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण विस्तार किया है। सरकारी विशेष विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़कर 1,342 हुई, जबकि स्वैच्छिक संस्थाओं द्वारा संचालित विद्यालयों में 3,049 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। माना कैम्प स्थित फिजिकल रिफरल रीहैब सेंटर और सेरेब्रल पाल्सी गेट लैब की सेवाएँ लगभग दोगुनी हो गईं। ये उपलब्धियाँ विशेष जरूरत वाले बच्चों और युवाओं के लिए आत्मनिर्भर भविष्य का आधार मजबूत करती हैं। छात्रवृत्तियों से बढ़ा शैक्षणिक आत्मविश्वास राज्य और केंद्र सरकार की छात्रवृत्ति योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से दिव्यांग विद्यार्थियों को शिक्षा जारी रखने में बड़ी मदद मिली। राज्य छात्रवृत्ति 7,807 से बढ़कर 8,726 और केंद्रीय छात्रवृत्ति 390 से बढ़कर 423 हुई। वरिष्ठ नागरिकों के लिए आस्था और सम्मान, मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना पुनः शुरू वरिष्ठ नागरिकों में अत्यधिक लोकप्रिय मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना को आईआरसीटीसी के सहयोग से पुनः प्रारंभ किया गया। अब तक 6 यात्राओं में 4,697 वरिष्ठजन लाभान्वित हुए हैं। वर्ष 2025-26 के लिए 15 करोड़ रुपए और अतिरिक्त 10 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान इस योजना को और व्यापक बनाता है। स्वरोजगार एवं आर्थिक संबल दिव्यांगजनों को नया अवसर दिव्यांगजनों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने हेतु रियायती ब्याज दर पर ऋण एवं उत्थान सब्सिडी योजनाएँ अत्यंत सफल रहीं। 2,435 दिव्यांगजनों को रियायती ऋण और 411 लाभार्थियों को उत्थान सब्सिडी प्रदान की गई। इसके अलावा 24.50 करोड़ रुपये के ऋण माफ किए जाकर दिव्यांगजनों को भारी आर्थिक राहत मिली। आश्रय सुविधाओं में सुधार सुरक्षित जिंदगी की गारंटी घरौंदा, हाफ-वे-होम, अपराजिता और प्रशामक देखभाल गृहों में रहने वाले हितग्राहियों की संख्या बढ़ी है, जो सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार को दर्शाता है। गंभीर और बहुदिव्यांगजन, मानसिक रोग से स्वस्थ हुए व्यक्ति तथा जरूरतमंद वृद्धजन इन सुविधाओं का लाभ उठाकर सम्मानजनक जीवन जी पा रहे हैं। उभयलिंगी व्यक्तियों के पुनर्वास में महत्वपूर्ण प्रगति उभयलिंगी समुदाय के लिए राज्य सरकार का दृष्टिकोण अत्यंत संवेदनशील रहा है। पहचान प्रमाण पत्र 506 से बढ़कर 915 हुए, वहीं एसआरएस ऑपरेशन के लाभार्थी 5 से बढ़कर 9 हुए। यह समुदाय को मुख्यधारा में लाने और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। नशा मुक्ति अभियान नई शुरुआत की राह नशा मुक्ति के क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार करते हुए नशामुक्ति केंद्रों की संख्या 11 से बढ़ाकर 25 कर दी गई। लाभार्थी बढ़कर 4,379 हुए। भारत माता वाहिनी दल गतिविधियों के विस्तार के साथ सक्रिय हुआ, जबकि सियान हेल्पलाइन ने 2.73 लाख कॉल प्राप्त कर राज्य में भरोसेमंद सहायता तंत्र स्थापित किया। नवीन पहल भविष्य के लिए मजबूत नीति ढांचा सुगम्य छत्तीसगढ़ अभियान के तहत सभी सार्वजनिक भवनों का एक्सेस ऑडिट किया गया। नए विशेष विद्यालयों और आवासीय परिसरों के निर्माण हेतु 205 करोड़ रुपए से अधिक का प्रावधान किया गया। दिव्यांग विकास आयोग गठन एवं बढ़े हुए बजट (1504 करोड़ रुपए से 1575 करोड़ रुपए) ने विभागीय कार्यों को नई ऊर्जा प्रदान की है। इन दो वर्षों में समाज कल्याण विभाग की उपलब्धियाँ साबित करती हैं कि संवेदनशील और जनकेंद्रित शासन किस प्रकार समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचकर परिवर्तन ला सकता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सामाजिक सुरक्षा, दिव्यांगजन, सशक्तिकरण, वरिष्ठ नागरिक कल्याण और सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में देश के सामने एक सशक्त और परिणामदायी मॉडल बनकर उभरा है। यह दो वर्ष छत्तीसगढ़ के लिए मानवीय मूल्यों, विकास और संवेदना का मजबूत अध्याय साबित हुए हैं।   डॉ. दानेश्वरी संभाकर, उप संचालक (जनसंपर्क)

किसानों की सेवा को सम्मान, सहकारी बैंकों पर कराधान पर आयोजित कार्यशाला

भोपाल :  अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक श्री मनोज गुप्ता ने सहकारी बैंकों पर लागू कराधान पर एक दिवसीय कार्यशाला कहा कि किसानों की सेवा करने का अवसर मिलना सौभाग्य की बात है। सेवा के लिए ज्ञान अर्जित करें और विशेषज्ञता प्राप्त करें। वे आज अपेक्स बैंक ट्रेनिंग कालेज, भोपाल में प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे। नाबार्ड के महाप्रबंधक श्री सुरेश कुमार साहू, उप महाप्रबंधक नन्दू नायक,अपेक्स बैंक के प्राचार्य श्री पी.एस.तिवारी, वि.क.अ श्री अरुण मिश्र, उप महाप्रबंधक श्री के.टी.सज्जन, सहायक महाप्रबंधक श्री अरविंद बौद्ध, विषय विशेषज्ञ श्री अमूल राहंणेकर, चार्टड अकाउंटंट उपस्थित थे। श्री गुप्ता ने कहा कि हमारा प्रयास इस प्रशिक्षण संस्थान को देश में सर्वश्रेष्ठ बनाने का है। हमारा प्रयास बेहतर माहौल व आधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण वातावरण में सभी को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण प्रदान करना है। इसी कड़ी में आज इस कांफ्रेंस हाल का उद्घाटन हुआ है। नाबार्ड के महाप्रबंधक श्री सुरेश कुमार साहू ने प्रदेश में अल्पकालीन सहकारी संरचना को सुदृढ़ीकरण बनाने के प्रयास करने पर जोर दिया। आरंभ में अपेक्स बैंक ट्रेनिंग कालेज के प्राचार्य श्री पी.एस.तिवारी अतिथियों का स्वागत एवं आयोजन की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए अवगत कराया कि प्रबंध संचालक अपेक्स बैंक के दूरदर्शी व सकारात्मक दृष्टिकोण व नाबार्ड के सहयोग से प्रशिक्षण की गुणवत्ता बेहतर व संख्या दुगनी होने में सफलता प्राप्त हुई है। नाबार्ड के लखनऊ स्थित संस्थान "बर्ड" ने "ए" एक्रिडेशन प्रदान किया है । आभार प्रदर्शन संकाय सदस्य श्री आर.के.दुबे ने किया।  

पंजाब सरकार ने बाढ़ प्रभावित किसानों को दिया ऐतिहासिक राहत पैकेज, अब तक की सबसे बड़ी मदद

चंडीगढ़  इस वर्ष आई बाढ़ ने पंजाब के कई जिलों में व्यापक तबाही मचाई, जिससे किसानों, ग्रामीण परिवारों और खेतिहर मजदूरों को भारी नुकसान झेलना पड़ा। लेकिन संकट की इस घड़ी में पंजाब सरकार ने रिकॉर्ड स्तर का राहत पैकेज जारी किया, जिसे राज्य का अब तक का सबसे बड़ा और सर्वाधिक प्रभावी मुआवजा प्रयास बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने स्पष्ट किया कि “किसानों की मुश्किल में सरकार उनके साथ खड़ी है, सिर्फ कागजों पर नहीं, जमीन पर कार्रवाई के साथ।” “जिसका खेत, उसदी रेत” योजना के तहत बाढ़ के बाद खेतों में आई भारी मात्रा में रेत हटाने के लिए किसानों को 7,200 रुपये प्रति एकड़ की विशेष सहायता दी जा रही है। साथ ही फसल क्षति के मुआवजे को भी नई परिभाषा दी गई है—अब 26–33% नुकसान पर 10,000 रुपये, 33–75% नुकसान पर 10,000 रुपये और 75–100% नुकसान पर 20,000 रुपये प्रति एकड़ सहायता प्रदान की जा रही है। इनमें से 14,900 रुपये प्रति एकड़ राज्य सरकार द्वारा दिए जा रहे हैं, जो देश में सबसे अधिक माना गया है। घर टूटने की स्थिति में भी मुआवजे को कई गुना बढ़ा दिया गया है। पहले सिर्फ 6,500 रुपये मिलते थे, अब पूरी तरह क्षतिग्रस्त घरों के लिए 1.20 लाख रुपये और आंशिक नुकसान के लिए 35,100 रुपये स्वीकृत किए गए हैं। नदी कटाव से प्रभावित किसानों को 47,500 रुपये प्रति हेक्टेयर (18,800 रुपये प्रति एकड़) दिए जाएंगे। इसके अलावा सेम प्रभावित क्षेत्रों के लिए 4.50 करोड़ रुपये का पैकेज भी जारी हुआ है। राज्य सरकार ने केंद्र से सहायता राशि बढ़ाकर 50,000 रुपये प्रति एकड़ करने की मांग की है, जबकि केंद्र द्वारा घोषित 1,600 करोड़ रुपये को राज्य ने अपर्याप्त बताया है। यह राहत पैकेज न केवल तत्काल सहायता उपलब्ध कराता है, बल्कि यह पंजाब में मानवीय और जवाबदेह आपदा प्रबंधन की मिसाल स्थापित कर रहा है।