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हाईकोर्ट का सख्त रुख: सजा पूरी होने के बाद 17 दिन तक जेल में रखने पर सागर जेल अधीक्षक पर जुर्माना

जबलपुर  मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सजा पूरी होने के बावजूद एक युवक को जेल में अवैध रूप से रखे जाने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सागर जेल अधीक्षक पर 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है।  जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रामकुमार चौबे की डिवीजन बेंच ने यह आदेश टीकमगढ़ जिले के युवक अरविंद कुशवाहा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता भी दी है कि वह 17 दिनों की अवैध हिरासत के लिए उचित मुआवजा पाने के लिए दावा कर सकता है। चोरी के मामले में हुई थी जेल टीकमगढ़ जिले के डीगोड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मड़वारा निवासी अरविंद कुशवाहा को डीजे वाहन से एम्प्लीफायर चोरी के आरोप में 5 नवंबर 2024 को गिरफ्तार किया गया था। ट्रायल के बाद कोर्ट ने उसे एक साल की सजा सुनाई थी। सजा की अवधि 4 नवंबर 2025 को पूरी हो गई थी, लेकिन इसके बावजूद अरविंद को 20 नवंबर 2025 तक जेल में रखा गया। सजा के बाद हिरासत में रखने को दी थी चुनौती इस अवैध हिरासत को चुनौती देते हुए अरविंद कुशवाहा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता संजना यादव ने कोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किल को अब रिहा कर दिया गया है, लेकिन उसे 17 दिनों तक गैरकानूनी रूप से जेल में रखा गया, जो गंभीर लापरवाही का मामला है।

मिचेल स्टार्क ने बताया T20I से संन्यास का असली कारण, भारत दौरे ने बदली रणनीति

नई दिल्ली  टी20 क्रिकेट के इस दौरा में जहां खिलाड़ी टेस्ट और वनडे जैसे फॉर्मेट से दूरी बनाने लगते हैं, ताकि वह इस फॉर्मेट के लिए हमेशा उपलब्ध रह सके, वहीं ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क ने T20I क्रिकेट से रिटायरमेंट लेकर हर किसी को हैरान कर दिया था। स्टार्क ने सितंबर 2025 में इस फॉर्मेट को अलविदा कह दिया था। उनका फोकस अब सिर्फ वनडे और टेस्ट क्रिकेट पर रहेगा। हाल ही में स्टार्क ने खुलासा किया है कि उन्होंने सिर्फ T20I क्रिकेट से ही क्यों संन्यास लिया है। इसके पीछे भारत दौरे का एक खास कनेक्शन है। मिचेल स्टार्क ने कॉफी विद COGS से कहा, “उम्मीद है कि 2027 में इंडिया और इंग्लैंड का टूर कर पाऊंगा। शायद इसी वजह से मैंने T201 क्रिकेट छोड़ दिया। तो हां, यही प्लान है। ऐसा हो या न हो, मेरा शरीर मुझे बता देगा। लेकिन मैं ज़रूर करना चाहूंगा।” मिचेल स्टार्क टेस्ट और वनडे क्रिकेट में ऑस्ट्रेलिया के प्रीमियम बॉलर हैं। इंग्लैंड के खिलाफ जारी एशेज टेस्ट सीरीज के पहले दो मैचों में प्लेयर ऑफ द मैच का अवॉर्ड जीतकर उन्होंने इस बात को साबित भी किया है।   स्टार्क एशेज 2025 के पहले दो टेस्ट मैचों में ही 18 विकेट चटका चुके हैं, वहीं अन्य कोई गेंदबाज अभी तक 10 विकेट के आंकड़े तक नहीं पहुंचा है। स्टार्क ने पहले टेस्ट में करियर बेस्ट परफॉर्मेंस देते हुए एक पारी में 7 विकेट चटकाने के साथ कुल 10 विकेट लिए थे। वहीं दूसरे मुकाबले में उन्होंने 8 शिकार किए थे। स्टार्क की नजरें 2027 में भारत और इंग्लैंड दौरे के अलावा वनडे वर्ल्ड कप पर भी होगी। यह निश्चित रूप से उनका आखिरी वनडे वर्ल्ड कप हो सकता है।  

GOAT India Tour 2025: मेसी ने भारत में किया प्रवेश, कोलकाता में हजारों फैंस ने दिया शानदार स्वागत

 कोलकाता  अर्जेंटीना के सुपरस्टार फुटबॉलर लियोनेल मेसी अपने तीन दिवसीय भारत के दौरे के लिए कोलकाता पहुंच गए हैं. उनका शानदार स्वागत करने के लिए हजारों प्रशंसकों ने दिसंबर की ठंड का सामना किया और आधी रात तक उनका कोलकाता में जोरदार स्वागत करने के लिए इंतजार किया. मेसी शनिवार 13 दिसंबर को रात 2.26 बजे कोलकाता मं उतरे, जिसकी वजह से एयरपोर्ट झंडों और मोबाइल कैमरों की लाइट के समुद्र में बदल गया, प्रशंसक अपने पसंदीदा स्टार की एक झलक पाने के लिए दौड़ रहे थे. बच्चे कंधों पर बैठे थे और ड्रम बज रहे थे, जब मेसी को भारी सुरक्षा के बीच VIP गेट से बाहर निकाला गया. फिर एक भारी काफिला उन्हें उनके होटल तक ले गया, जहां रात भर एक और बड़ी भीड़ इंतजार कर रही थी. GOAT इंडिया टूर 2025 के नाम से होने वाली ये मेस्सी की भारत यात्रा 2011 के बाद पहली बार है. वो अपने स्ट्राइक पार्टनर लुइस सुआरेज और अर्जेंटीना के टीम के साथी रोड्रिगो डी पॉल के साथ यहां पहुंचे और अगले 72 घंटों में, वह कोलकाता, हैदराबाद, मुंबई और दिल्ली की यात्रा करेंगे. इस दौरान वो मुख्यमंत्रियों, कॉर्पोरेट नेताओं, बॉलीवुड हस्तियों और आखिर में सोमवार 15 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिलेंगे. प्रशंसकों का इंतजार निराशा में खत्म मेसी की एक झलक पाने के लिए पूरी रात जागने के बावजूद, कई प्रशंसकों का लंबा इंतजार उस समय निराशा में बदल गया, जब वे अपने आइकन फुटबॉलक की एक झलक भी नहीं देख पाए. भारी भीड़ होने की वजह से मेसी को हवाई अड्डे से बाहर निकालकर सुबह लगभग 3.30 बजे दूसरे रास्ते उनके होटल ले जाया गया, जिससे सैकड़ों इंतजार कर रहे समर्थकों को निराशा हुई. केवल कुछ भाग्यशाली हवाई अड्डे के कर्मचारियों को ही अर्जेंटीना के सुपरस्टार की एक झलक मिल पाई. 'ये जश्न का मौका है' मेसी के टूर प्रमोटर सताद्रु दत्ता, जिन्होंने एयरपोर्ट पर मेस्सी का स्वागत किया, ने कहा कि यह पल कोलकाता के लिए ऐतिहासिक था. '2011 में, वह कप्तान बनने के बाद भारत आए थे, लेकिन अब वह वर्ल्ड कप और अपना आठवां बैलन डी'ओर जीतने के बाद आ रहे हैं. इसलिए, यह सच में बहुत खास है. मुझे नहीं लगता कि वह फिर कभी आएंगे, इसलिए यह जश्न का मौका है.' उन्होंने कहा कि मेस्सी की मौजूदगी भारतीय फुटबॉल को एक असली बढ़ावा दे सकती है. 'इतने सारे स्पॉन्सर किसी फुटबॉल स्टार के लिए पहले कभी एक साथ नहीं आए हैं, आप कह सकते हैं कि यह मेस्सी के लिए है, लेकिन अगर उस पैसे का 10 प्रतिशत भी भारतीय फुटबॉल के विकास में आता है, तो यह बहुत बड़ी बात होगी. यहां मेसी की मूर्ति जो लगाई गई है और जिसका अनावरण सुबह होगा, वह भी दुनिया में अपनी तरह की पहली है, मेसी इस बार एक विरासत छोड़ने वाले हैं.' मेसी का पूरा शेड्यूल 13 दिसंबर, कोलकाता     1:30am : कोलकाता में आगमन     9:30am से 10:30am तक: मीट-एंड-ग्रीट कार्यक्रम     10:30am से 11:15am तक: मेसी के स्टेचू का वर्चुअल उद्घाटन     11:15am से 11:25am तक: युवा भारती स्टेडियम में आगमन     11:30am: शाहरुख खान युवा भारती में पहुंचेंगे     12:00pm: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सौरव गांगुली स्टेडियम पहुंचेंगे     12:00pm से 12:30pm तक: फ्रेंडली मैच     2:00pm : कोलकाता से हैदराबाद के लिए रवाना 13 दिसंबर, हैदराबाद GOAT इंडिया टूर 2025 के नाम से होने वाली ये मेस्सी की भारत यात्रा 2011 के बाद पहली बार है GOAT इंडिया टूर 2025 के नाम से होने वाली ये मेस्सी की भारत यात्रा 2011 के बाद पहली बार है (PTI)     7:00pm: राजीव गांधी स्टेडियम में मेस्सी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के साथ मैच     शाम में मेस्सी के साथ जश्न मनाने के लिए एक म्यूजिकल कॉन्सर्ट का आयोजन 14 दिसंबर, मुंबई     3:30pm: क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया में पैडल कप में भागीदारी     4:00pm: सेलिब्रिटी फुटबॉल मैच     5:00pm: वानखेड़े स्टेडियम में कार्यक्रम जिसके बाद चैरिटी फैशन शो का आयोजन 15 दिसंबर, नई दिल्ली     पीएम मोदी से मुलाकात     1:30pm: अरुण जेटली स्टेडियम में कार्यक्रम

सागर के थानों की अनियमितता पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को दी राहत, पुलिस कार्रवाई पर रोक

जबलपुर  हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ के समक्ष शुक्रवार को सागर जिले के चार थानों की अनियमितता उजागर करने वाले याचिकाकर्ताओं के मामले की सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से आशंका जताई गई कि पुलिस दुर्भावनावश झूठे प्रकरण पंजीबद्ध कर सकती है। बताया गया कि स्टिंग ऑपरेशन के बाद से उनके कॉल रिकॉर्ड किए जा रहे हैं। इनको जारी किया गया नोटिश मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव विधि विभाग, प्रमुख सचिव गृह विभाग, पुलिस महानिदेशक, आईजी, पुलिस अधीक्षक सागर एवं सीबीआई को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब मांगा है। साथ ही कोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए आगामी आदेश तक याचिकाकर्ताओं के विरुद्ध किसी भी प्रकार की कार्रवाई न करने के निर्देश दिए हैं। राजधानी भोपाल निवासी राहुल शर्मा, दीपक शर्मा एवं सागर निवासी अतुल अग्रवाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ताओं ने सागर के चार थाना बहेरिया, मोतीनगर, मकरोनिया एवं गोपालगंज में पदस्थ पुलिस कर्मियों द्वारा अवैध शराब की बिक्री, छह हजार रुपये प्रति सप्ताह लेकर शहर में जुआ-सट्टा खिलाने की अनुमति, नाबालिगों के माध्यम से ड्रग्स, स्मैक व गांजा विक्रय तथा स्पा सेंटरों में देह व्यापार संचालित करवाने का स्टिंग ऑपरेशन के माध्यम से खुलासा किया था। कार्रवाई के बजाय परेशान इस संबंध में 30 नवंबर को खबर प्रकाशित की गई थी। दलील दी गई कि मामले उजागर होने के बाद पुलिस प्रशासन ने दोषी अधिकारियों के विरुद्ध जांच व कार्रवाई करने के बजाय याचिकाकर्ताओं के कॉल रिकॉर्डिंग और आईपीडीआर निकलवाने शुरू कर दिए। साथ ही याचिकाकर्ताओं के विरुद्ध झूठे प्रकरण दर्ज करने की तैयारी की जा रही है।  

मेस्सी को देखने के लिए लुटे फैंस? महंगी टिकटों पर राज्यपाल बोस का फूटा गुस्सा

कोलकाता  पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस ने शनिवार को कोलकाता में अर्जेंटीना के फुटबॉल स्टार लियोनेल मेस्सी के कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को लेकर राज्य सरकार को पत्र लिखकर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। लोक भवन के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि कई फुटबॉल प्रेमियों ने राज्यपाल से शिकायत की थी कि टिकटों की कीमतें बहुत अधिक होने के कारण उन्हें कोलकाता में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अपने पसंदीदा खिलाड़ी की एक झलक तक देखने का मौका नहीं मिल सका। इन्हीं शिकायतों के बाद राज्यपाल ने रिपोर्ट मांगी है।   राज्यपाल बोस ने मेस्सी की कोलकाता यात्रा में राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि आम लोगों की भावनाओं की कीमत पर धन कमाने की अनुमति क्यों दी जा रही है। लोक भवन के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘लोक भवन को फुटबॉल प्रशंसकों से लगातार फोन कॉल और ई-मेल मिल रहे हैं, जिनमें शिकायत की जा रही है कि मेस्सी के मैच के टिकटों की कीमतें इतनी ज्यादा हैं कि वे चाहकर भी इन्हें खरीद नहीं पा रहे हैं। राज्यपाल यह जानना चाहते हैं कि ऐसा क्यों हो रहा है। जब उनका पसंदीदा सितारा यहां मौजूद है, तो आम लोग उसे क्यों नहीं देख पा रहे हैं?’’ मेस्सी सॉल्ट लेक स्टेडियम में आयोजित एक सम्मान समारोह में शामिल होंगे, जिसमें संगीत, नृत्य के कार्यक्रमों के साथ मोहन बागान ‘मेस्सी’ ऑल स्टार्स और डायमंड हार्बर ‘मेस्सी’ ऑल स्टार्स के बीच एक प्रदर्शनी मुकाबला खेला जाएगा। अधिकारी ने बताया कि राज्यपाल यह जानकर ‘‘हैरान हैं कि केवल टिकटों के लिए बहुत ज्यादा कीमत चुकाने वाले कुछ लोग ही इस मशहूर फुटबॉलर को देख पाएंगे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘राज्यपाल ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर उस व्यक्ति के बारे में भी विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जो मेस्सी के दौरे से लाभ कमा रहा है। आम लोगों को मेस्सी को देखने से क्यों रोका जा रहा है?’’ मेस्सी शनिवार को अपने ‘जीओएटी भारत दौरा-2025’ की शुरुआत प्रायोजकों के साथ अभिनंदन कार्यक्रम से करेंगे, जिसके बाद वह सॉल्ट लेक स्टेडियम में आयोजित सम्मान समारोह में शामिल होंगे। मेस्सी लंबे समय से उनके स्ट्राइक पार्टनर रहे लुइस सुआरेज और अर्जेंटीना के साथी खिलाड़ी रोड्रिगो डी पॉल के साथ पहुंचे। लुइस सुआरेज, रोड्रिगो डी पॉल और फिल्म अभिनेता शाहरुख खान कोलकाता में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में शामिल होंगे। साथ ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अन्य गणमान्य व्यक्तियों को भी कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया गया है।

पंजाब सरकार की ऐतिहासिक पर्यावरणीय पहल, ग्रीनिंग पंजाब मिशन से 12,55,700 वृक्षारोपण और राज्य बनी ग्रीन ज़ोन

चंड़ीगढ़  मान सरकार ने पंजाब के भविष्य के लिए एक ऐसा कदम उठाया है जो न केवल भौतिक है, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक भावनात्मक विरासत भी है। 'ग्रीनिंग पंजाब मिशन' के तहत, वन विभाग ने राज्य को हरा-भरा करने का जो बीड़ा उठाया है, वह सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि पंजाब की मिट्टी के साथ एक नया प्रेम-बंधन है। यह मिशन दिखाता है कि जब सरकार संकल्प लेती है, तो प्रकृति के साथ दिया हमारा रिश्ता कितना गहरा और सुंदर हो सकता है। मान सरकार ने 'ग्रीनिंग पंजाब मिशन' के माध्यम से जो अभूतपूर्व साहस और ईमानदार प्रतिबद्धता दिखाई है, वह वास्तव में प्रशंसा के योग्य है। यह केवल एक योजना नहीं है—यह पंजाब के इतिहास में पर्यावरण संरक्षण की सबसे बड़ी भावनात्मक पहल है! मान सरकार ने यह साबित कर दिया है कि उनके लिए पर्यावरण सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि प्राथमिकता है। लगभग साढ़े बारह लाख पौधे लगाना, वह भी इतनी तेज़ी और समर्पण के साथ, एक प्रशासनिक चमत्कार है। यह दर्शाता है कि वन एवं वन्यजीव संरक्षण विभाग, सरकार के मार्गदर्शन में, दिल से काम कर रहा है। पंजाब के वन विभाग ने अब तक 12,55,700 से अधिक पौधे लगाकर एक नया इतिहास रचा है। यह संख्या केवल पेड़-पौधों की नहीं है, बल्कि यह शुद्ध हवा, शीतल छाया और एक स्वस्थ पर्यावरण के लिए हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। हर एक पौधा एक कहानी कहता है—हमारे शहरों को सांस लेने में मदद करने की, हमारी कृषि भूमि की रक्षा करने की, और गुरुओं के नाम पर स्थापित बागानों की पवित्रता बनाए रखने की। श्रेणी लगाए गए पौधों की संख्या शहरी वानिकी (Urban Forestry) 3,31,000 पॉपुलर/डेक (Poplar/Deak) 2,50,000 सफेद वृक्ष (White Trees) 3,00,000 नानक बाग (Nanak Gardens) 20,800 औद्योगिक क्षेत्र (Industrial Areas) 46,500 स्कूलों में (Schools) 1,44,500 ऊंचे पौधे (Tall Saplings) 1,62,900 कुल पौधे 12,55,700 ये हरियाली हमारे स्कूलों में बच्चों को शुद्ध हवा दे रही है, उद्योगों के प्रदूषण को सोख रही है, और शहरों को शांत व सुंदर बना रही है। 'नानक बाग़ों' में लगाए गए पौधे गुरु साहिब की शिक्षाओं के अनुरूप प्रकृति से प्रेम की भावना को जागृत कर रहे हैं। इसका मतलब है कि हमारे बच्चे अपनी शिक्षा की शुरुआत ही प्रकृति के करीब रहकर कर रहे हैं—वे पेड़ को बढ़ते देखेंगे, उसकी छाँव में खेलेंगे, और 'हरा-भरा पंजाब' उनके जीवन का अभिन्न अंग बन जाएगा। वन्यजीव संरक्षण विभाग इस मिशन को सफल बनाने के लिए पूरी जान लगा रहा है। उनका हर प्रयास यह सुनिश्चित करता है कि ये नन्हे पौधे सिर्फ लगाए न जाएं, बल्कि वे बढ़कर घने, मजबूत वृक्ष बनें। यह सिर्फ सरकारी योजना नहीं है, यह एक जन आंदोलन है, जिसे विभाग हर कदम पर प्रेरित कर रहा है। वन और वन्यजीव संरक्षण विभाग इस हरित मिशन को सफल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। अधिकारियों और कर्मचारियों का यह समर्पण सराहनीय है। इस पहल के तहत, मान सरकार ने पंजाब में अब तक कई हज़ार एकड़ ज़मीन पर पेड़ लगाए हैं। यह दिखाता है कि सरकार केवल बातें नहीं कर रही, बल्कि ठोस ज़मीनी काम कर रही है। पंजाब, जो कभी अपनी हरी-भरी फसलों के लिए जाना जाता था, अब अपनी प्राकृतिक हरियाली को भी वापस पा रहा है। यह मिशन पंजाब को प्रदूषण मुक्त बनाने, जलवायु परिवर्तन से लड़ने और जल स्तर को सुधारने की दिशा में एक मज़बूत नींव है। पंजाब की हवा में बढ़ते प्रदूषण के बीच, ये लाखों पौधे भविष्य में लाखों टन कार्बन डाइऑक्साइड सोखेंगे और हमें शुद्ध प्राणवायु देंगे। यह हमारी अगली पीढ़ी को दिया गया सबसे अमूल्य तोहफा है।ये पेड़ ज़मीन के नीचे के पानी को रिचार्ज करने में मदद करेंगे, जो पंजाब के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। हर पौधा पानी की एक-एक बूँद को बचाने का सैनिक है। स्कूलों (1,44,500 पौधे), औद्योगिक क्षेत्रों (46,500 पौधे) और नानक बाग़ों (20,800 पौधे) में वृक्षारोपण करके, सरकार ने हर नागरिक को इस हरित क्रांति से जोड़ा है। यह एक जन आंदोलन की शुरुआत है। मान सरकार की इस पहल के तहत, पंजाब में अब तक कई हजार एकड़ भूमि पर वृक्षारोपण किया जा चुका है। यह हरित फैलाव न केवल पर्यावरण के लिए आवश्यक है, बल्कि यह पंजाब की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक समृद्धि को भी पुनर्जीवित कर रहा है। यह एक ऐसा निवेश है जिसका लाभ पीढ़ियों तक मिलता रहेगा। यह 'ग्रीनिंग पंजाब मिशन' हमें याद दिलाता है कि सरकार और नागरिक मिलकर कैसे एक बेहतर कल का निर्माण कर सकते हैं। यह सिर्फ विकास नहीं, यह प्रकृति के प्रति हमारा सच्चा और गहरा प्रेम है। आइए, हम सब इस पुनीत कार्य में भागीदार बनें और पंजाब के हरित भविष्य के इस सपने को साकार करें। यह 'ग्रीनिंग पंजाब मिशन' केवल सरकार का नहीं, बल्कि हर पंजाबी का मिशन है। यह हमें यह याद दिलाता है कि हमारा भविष्य हमारे हाथों में है, और जब सरकार और जनता मिलकर एक पवित्र लक्ष्य के लिए काम करते हैं, तो ऐसे ही अविश्वसनीय और भावनात्मक परिणाम सामने आते हैं। मान सरकार ने यह सिद्ध कर दिया है कि वे केवल वर्तमान की समस्याओं पर नहीं, बल्कि आने वाले 50 वर्षों के भविष्य पर नज़र रखे हुए हैं। जिस जज़्बे के साथ यह मिशन आगे बढ़ रहा है, वह बताता है कि पंजाब जल्द ही फिर से अपने पुराने 'लहलहाते' स्वरूप को प्राप्त करेगा। मान सरकार ने पंजाब को केवल अच्छा प्रशासन ही नहीं दिया है, बल्कि उम्मीद की हरियाली दी है। यह एक ऐसा निवेश है जिसका लाभ हर पंजाबी, बिना किसी भेदभाव के, उठाएगा।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 2 साल की उपलब्धियां गिनाईं, मध्य प्रदेश में सरकारी डॉक्टरों को मिलेगा ज्यादा वेतन

भोपाल  ''जिस प्रकार से समय बदला है और समय के साथ उर्जा के क्षेत्र में सबसे सस्ती बिजली मध्य प्रदेश दे रहा है. बिजली में ऐसे-ऐसे नए प्रयोग हुए हैं कि लोग भैंचक्के होकर देख रहे हैं कि ये मध्य प्रदेश में क्या हो रहा है. हमारा सबसे लोएस्ट रेट बिजली में गया.'' यह बात प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कही है. शुक्रवार को राज्य सरकार के दो साल का कार्यकाल पूरा होने पर सीएम मोहन यादव ने राजधानी के कुशाभाऊ इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में सरकार की उपलब्धियां गिनाई है. इस दौरान उन्होंने बीते दो सालों के साथ आने वाले भविष्य को लेकर भी खुलकर चर्चा की. 6-6 महीने एमपी और यूपी को मिलेगी बिजली सीएम ने कहा कि, ''बिजली में ऐसे-ऐसे नए प्रयोग हुए हैं कि लोग भौचक्के होकर देख रहे हैं कि ये मध्य प्रदेश में क्या हो रहा है. हमारा सबसे लोएस्ट रेट बिजली में गया. हमारे प्रदेश में ओंकारेश्वर, आगर और नीमच में सोलर पार्क की स्थापना की गई है. नीमच में 2 हजार मेगावाट का सोलर प्रोजेक्ट लगाया गया है. वो भी कंपोजिट प्रोजेक्ट है. यानि यह प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों के सहयोग से स्थापित किया जा रहा है.'' पानी के बाद अब बिजली की अदला-बदली सीएम मोहन यादव ने कहा, ''इस सोलर प्रोजेक्ट से 6 महीने मध्य प्रदेश और 6 महीने उत्तर प्रदेश को बिजली मिलेगी. पानी की अदला-बदली के साथ हम दूसरे राज्यों के साथ बिजली की साझेदारी भी कर रहे हैं. मुरैना के बीहड़ वाले जंगलों का बेहतर इस्तेमाल उर्जा के क्षेत्र में कैसे किया जा सकता है, इस पर भी विचार किया जा रहा है. उज्जैन में शिप्रा नदी के पानी से होगा स्नान सीएम ने बताया कि "उज्जैन में शिप्रा नदी का पानी पहले उपलब्ध नहीं था. जिससे श्रद्धालुओं को स्नान करने में समस्या होती थी. पिछली बार भी सिंहस्थ के दौरान साधु-संतों ने मटमैले पानी से स्नान किया था. लेकिन इस बार सिंहस्थ की व्यवस्था जल संसाधन विभाग ने कर दी है. 800 करोड़ रुपये की योजना तैयार किया गया है. जिससे शिप्रा का पानी उज्जैन में लाने की तैयारी है. दो राज्यों के बीच आपसी सहमति से नदी जोड़ने का अभियान भी शुरु किया गया है. इसके तहत गंभीर और खान नदी को जोड़ते हुए जमीन के नीचे टनल बनाकर जोड़ने का काम किया गया है. जिसके ऊपर खेती होगी और नीचे जलधारा बहेगी." उन्होंने आगे बताया कि "कुछ दिन पहले स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा की थी. इस दौरान डाक्टरों की कमी को लेकर भी चर्चा हुई थी. जिस रफ्तार से प्रदेश में मेडिकल कालेज बढ़ रहे हैं, उसी तेजी से हमको मैन पावर भी चाहिए. हेल्थ सेक्टर में एक्सपर्ट नहीं मिलने की चुनौती सरकार के सामने है, लेकिन अब हमने तय किया है कि प्राइवेट सेक्टर से अधिक वेतन देकर विशेषज्ञ डॉक्टरों को सरकारी सेवाओं में लिया जाएगा. कार्यकाल के दो साल के भीतर भोपाल और इंदौर को मेट्रोपोलिटन शहर बनाने की घोषणा करने के साथ काम भी शुरू कर दिया है."

मध्यप्रदेश में रिकॉर्ड तोड़ सर्दी, पचमढ़ी जैसी ठंड, इंदौर-भोपाल में पारा 7° तक गिरा

भोपाल  मध्य प्रदेश इस समय कड़क ठंड की चपेट में है। प्रदेश के कई शहरों में तापमान लगातार गिर रहा है और सर्दी ने पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इंदौर में बीती रात न्यूनतम तापमान 5.2°C दर्ज हुआ, जो पिछले दस साल की सबसे ठंडी रात थी। खास बात यह है कि इंदौर का तापमान इस बार पचमढ़ी के बराबर ठंडा रहा। राजधानी भोपाल में भी पारा 7°C से नीचे गया। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में हो रही बर्फबारी और जेट स्ट्रीम की सक्रियता इस बार ठंड बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रही है। जेट स्ट्रीम लगभग 12.6 KM की ऊंचाई पर 200+ किमी प्रति घंटा की रफ्तार से बह रही है। पहाड़ी राज्यों से आने वाली बर्फीली हवाओं और इस ऊंची हवा के मिलने से MP में तापमान काफी कम हो गया। भोपाल में लगातार छह दिन तक कोल्ड वेव (शीतलहर) चलने के बाद गुरुवार को थोड़ी राहत मिली, लेकिन शुक्रवार को दिन फिर सर्द रहा। भोपाल, राजगढ़, इंदौर, सीहोर और शाजापुर में सर्द हवाएं चली। इस वजह से लोग गर्म कपड़ों में लिपटे हुए नजर आए। दिन में धूप तो खिली, लेकिन शाम को ठंड का असर बढ़ा रहा। हालांकि, अगले 3 दिन तक शीतलहर का अलर्ट नहीं है, लेकिन ठंड का असर बरकरार रहेगा। दूसरी ओर, गुरुवार-शुक्रवार की रात कई शहरों में पारा 5 डिग्री के आसपास रहा। इंदौर शहर में 5.2 डिग्री रहा। इतना ही तापमान पचमढ़ी में भी दर्ज किया गया। रात में भोपाल और ग्वालियर में पारे में गिरावट हुई। भोपाल में 6.5 डिग्री, ग्वालियर में 9.1 डिग्री, उज्जैन में 9 डिग्री और जबलपुर में पारा 8.4 डिग्री रहा। मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल अगले तीन दिनों तक शीतलहर का अलर्ट नहीं है, लेकिन ठंड से राहत मिलने की संभावना कम है। रात के तापमान में और गिरावट आ सकती है। गुरुवार-शुक्रवार की रात प्रदेश के कई शहरों में पारा 5 से 10 डिग्री के बीच दर्ज किया गया। भोपाल में न्यूनतम तापमान 6.5 डिग्री, ग्वालियर में 9.1, उज्जैन में 9, जबलपुर में 8.4 डिग्री रहा। वहीं राजगढ़ में 5.2, नौगांव में 6.4, उमरिया में 6.6, रीवा में 7, मलाजखंड में 7.2 और मंडला में 7.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में हो रही बर्फबारी का असर मध्य प्रदेश तक पहुंच रहा है। पहाड़ी राज्यों में कई जगह तापमान शून्य से नीचे चला गया है। इसके अलावा उत्तर भारत के ऊपर सक्रिय जेट स्ट्रीम भी मौसम को प्रभावित कर रही है। करीब 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर 204 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बह रही यह जेट स्ट्रीम मध्य प्रदेश में ठंड बढ़ाने का कारण बन रही है। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में दिन के तापमान में हल्की बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन रातें फिलहाल बेहद सर्द बनी रहेंगी। तापमान में गिरावट जारी  प्रदेश के कई शहरों में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री के आसपास दर्ज किया गया। इंदौर और पचमढ़ी दोनों में पारा 5.2 डिग्री सेल्सियस रहा। भोपाल में न्यूनतम तापमान 6.5 डिग्री, ग्वालियर में 9.1 डिग्री, उज्जैन में 9 डिग्री और जबलपुर में 8.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग के मुताबिक, अधिकांश शहरों में तापमान 10 डिग्री से नीचे रहा। राजगढ़ में 5.2, नौगांव में 6.4, उमरिया में 6.6, रीवा में 7, मलाजखंड में 7.2, मंडला में 7.6, रायसेन, शिवपुरी और नरसिंहपुर में 8, बैतूल में 8.5, छिंदवाड़ा और खजुराहो में 9, सतना में 9.1, टीकमगढ़ और रतलाम में 9.5, दमोह में 9.8 और दतिया में 9.9 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। इसलिए मध्य प्रदेश में बढ़ी ठिठुरन मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में हो रही बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों तक पहुंच रहा है। उत्तराखंड के कई इलाकों में नदी-नाले और झरने तक जम गए हैं। इसके साथ ही उत्तर भारत के ऊपर सक्रिय जेट स्ट्रीम भी ठंड बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है। यह जेट स्ट्रीम जमीन से करीब 12 से 13 किलोमीटर की ऊंचाई पर 200 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से बह रही है, जिसका असर मध्यप्रदेश में भी साफ नजर आ रहा है। लगातार टूट रहे ठंड के रिकॉर्ड मौसम विभाग का कहना है कि पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवाओं और उत्तर भारत के मैदानी इलाकों से आने वाली ठंडी हवाओं के साथ जेट स्ट्रीम के सक्रिय होने से इस बार ठंड का असर दोगुना हो गया है। यही वजह है कि दिसंबर में भी कड़ाके की सर्दी पड़ रही है। भोपाल में नवंबर की ठंड ने 84 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जबकि इंदौर में 25 साल में सबसे ज्यादा सर्दी दर्ज की गई है। दिसंबर में भी इंदौर की ठंड ने बीते 10 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।  बर्फीली हवाओं की वजह से ठंड मौसम विभाग के अनुसार, पहाड़ी राज्य- उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी हुई है। उत्तराखंड में तो नदी-नाले और झरने तक जम गए हैं। कई शहरों में पारा माइनस है। दूसरी ओर, जेट स्ट्रीम भी चल रही है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में जेट स्ट्रीम का असर है। यह जमीन से 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर 204 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से बह रही है। जिसका असर एमपी में भी है। इस कारण शुक्रवार को भी शीतलहर का असर देखा गया। क्या होती है जेट स्ट्रीम? मौसम एक्सपर्ट की माने तो प्रदेश में ठंड बढ़ने की वजह खास वजह जेट स्ट्रीम भी है। यह जमीन से लगभग 12 किमी ऊंचाई पर चलने वाली तेज हवा है। इसकी रफ्तार 222 किमी प्रति घंटा तक पहुंच गई है। यह देश के उत्तरी हिस्से में सक्रिय है। पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवा के अलावा ये ऊंची हवा इस बार सर्दी बढ़ाएगी। उत्तर के मैदानी इलाकों से जब ठंडी हवा और पहाड़ी इलाकों से बर्फीली हवा हमारे यहां आती है, तब तेज ठंड पड़ती है। यह सब उत्तर भारत में पहुंचने वाले मौसमी सिस्टम वेस्टर्न डिस्टरबेंस के कारण होता है। ऐसे में यदि जेट स्ट्रीम भी बन जाए तो सर्दी दोगुनी हो जाती है। इस बार यही होना है। दिसंबर में भी रिकॉर्ड तोड़ … Read more

नवजोत कौर सिद्धू का हमला— ‘भगवंत मान सरकार कर रही बड़ा जमीन घोटाला’, सुरक्षा की उठाई मांग

चंडीगढ़  पंजाब कांग्रेस में भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के बाद नवजोत कौर सिद्धू ने अब आम आदमी पार्टी की सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए सुरक्षा की मांग की है। नवजोत कौर सिद्धू के बयान से पंजाब की राजनीति में भूचाल आ गया था। उन्होंने कहा कि पंजाब में मुख्यमंत्री बनने के लिए 500 करोड़ रुपये का सूटकेस जरूरी होता है। इसके बाद कांग्रेस ने ऐक्शन लेते हुए उन्हें पार्टी से सस्पेंड कर दिया।   अब नवजोत कौर ने भगवंत मान की सरकार पर हमला बोलेत हुए कहा है कि यह सरकार शराब और खनन माफिया की साथी है और इसलिए उन्हें सुरक्षा की जरूरत है। सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर उन्होंने कहा कि उनको खतरा हैऔर इसलिए मुख्यमंत्री को उन्हें सुरक्षा उपलब्ध करवानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले भी कई मुद्दे उन्होंने पंजाब के राज्यपाल के सामने उठाए हैं लेकिन अब तक उनकी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। सिद्धू ने राज्यपाल को लिखे अपने पत्र में कहा कि मौजूदा सरकार बड़ा जमीन घोटाला कर रही है। उन्होने दावा किया है कि शिवालिक बेल्ट और रक्षित वन्य इलाकों की बड़ी जमीन मौजूदा सरकार रेग्युलराइज कर रही है। उन्होंने कहा कि सस्ती कीमतों में इस जमीन को हथिया लिया गया था और अब उन्हें वैध बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब उनके पति नवजोत सिंह सिद्धू स्थानीय निकाय मंत्री थे तब उन्होंने इस फाइल पर साइन करने से ही इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार में राज्य् में अपराध तेजी से पढ़ रहे हैं। इसके अलावा हथियारों का गलत इस्तेमाल करके जनता को डराया धमकाया जा रहा है और पलायन के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था दम तोड़ चुकी है। ऐसे में राज्यपाल को पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाना चाहिए और इन विषयों पर चर्चा करवानी चाहिए। बता दें कि पार्टी से सस्पेंड होने ते बाद भी नवजोत कौर सिद्धू ने कहा कि वह हमेशा पार्टी के साथ ही रहेंगी। उन्होंने पंजाब में कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग पर पार्टी को बर्बाद करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा , हम हमेशा कांग्रेस के साथ हैं। हम अपने राज्य को जीतेंगे और अपने प्रिय और त्याग के प्रतीक गांधी परिवार को उपहार देंगे। अमरिंदर सिंह ने नवजोत कौर पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा था कि कांग्रेस को उन्हें पार्टी से निकाल देना चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि सिद्धू को क्रिकेट कमेंट्री पर ध्यान देना चाहिए जिसमें वह माहिर हैं और यह भी कहा था कि ‘‘राजनीति उनके स्वभाव में नहीं है।’’ कौर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘कैप्टन अमरिंदर सिंह आपको इतने सारे सवालों के जवाब देने हैं जो मेरे 100 ट्वीट में समाहित नहीं हो पाएंगे। चलिए, उन फाइलों से शुरुआत करते हैं जिन्हें आप नवजोत सिद्धू से बंद करवाना चाहते थे, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया था; सिटी सेंटर केस फाइल, प्रतिबंधित शिवालिक पर्वतमाला के आसपास भू-माफियाओं की जमीनों का पंजीकरण।’’ उन्होंने सवाल किया, ‘‘कैप्टन अमरिंदर सिंह, मैं बस इतना कहना चाहती हूं कि आपने नवजोत सिद्धू की उन फाइलों को क्यों नहीं मंजूरी दी जो पंजाब के विकास के लिए इतनी महत्वपूर्ण थीं? खनन नीति, शराब नीति, यात्रा और चिकित्सा पर्यटन, अमृतसर गोंडोला परियोजना, कचरा निपटान परियोजना, राष्ट्रीय स्थलों पर निविदाएं लगाकर स्थानीय निकायों में होने वाली हेराफेरी रोकना, फिल्म सिटी परियोजनाएं, जल क्रीड़ा परियोजनाएं, रणजीत एवेन्यू में खेल पार्क, पंजाब के लिए पाक कला विश्वविद्यालय।’’ सिंह ने कांग्रेस की राज्य इकाई में हुए विवाद के बाद सितंबर 2021 में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। कांग्रेस के चरणजीत सिंह चन्नी के मुख्यमंत्री बनने के बाद सिंह ने पार्टी छोड़ दी थी और एक नयी पार्टी बनाई जिसका 2022 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में विलय हो गया।  

सिद्धीक सैत द्वारा दान की गई भूमि पर 600 परिवारों को बेदखली का खतरा, SC में वक्फ बोर्ड ने की अपील

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने  केरल के एर्नाकुलम जिले की मुनंबम भूमि को वक्फ संपत्ति न मानने संबंधी केरल हाईकोर्ट की टिप्पणी पर अंतरिम रोक लगा दी। न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने इस मामले में अगली सुनवाई तक भूमि की यथास्थिति बनाए रखने का भी आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी, 2026 को होगी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने यह स्पष्ट किया कि केरल सरकार द्वारा गठित जस्टिस सी.एन. रामचंद्रन नायर जांच आयोग के कामकाज पर कोई रोक नहीं लगाई गई है और आयोग अपनी जांच जारी रख सकता है। पीठ ने अपने आदेश में कहा- नोटिस जारी किया जाए, छह हफ्ते में जवाब दाखिल हो। मामले को 27 जनवरी 2026 को सूचीबद्ध किया जाए। तब तक हाईकोर्ट के उस आदेश की घोषणा कि विवादित संपत्ति वक्फ नहीं है, स्थगित रहेगी और यथास्थिति बनाए रखी जाए। यह स्पष्ट किया जाता है कि हमने जांच आयोग के काम पर कोई रोक नहीं लगाई है। अदालत ने यह अंतरिम आदेश केरल वक्फ संरक्षण वेदी की विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर पारित किया। याचिका में केरल हाईकोर्ट की उस डिवीजन बेंच के फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसने राज्य सरकार द्वारा गठित जांच आयोग को वैध ठहराया था और साथ ही यह टिप्पणी की थी कि मुनंबम की जमीन वक्फ संपत्ति नहीं है। क्या है पूरा विवाद? यह मामला मुनंबम की करीब 135 एकड़ भूमि से जुड़ा है, जिसे वर्ष 1950 में सिद्दीक सैत नामक व्यक्ति ने फारूक कॉलेज को दान में दिया था। उस समय इस भूमि पर स्थानीय परिवार पहले से ही रह रहे थे। बाद में कॉलेज ने भूमि के कुछ हिस्से इन्हीं निवासियों को बेच दिए। विवाद तब गहराया जब 2019 में केरल वक्फ बोर्ड ने इस जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में पंजीकृत कर दिया, जिससे पहले की गई बिक्री को अवैध माना गया। इसके चलते 600 से अधिक परिवारों को बेदखली का डर सताने लगा और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। वक्फ बोर्ड के इस फैसले को कोझिकोड वक्फ ट्रिब्यूनल में चुनौती दी गई, जहां मामला अभी लंबित है। हाईकोर्ट में क्या हुआ? भूमि विवाद और बढ़ते तनाव के बीच, नवंबर 2024 में केरल सरकार ने इस मुद्दे का समाधान तलाशने के लिए पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सी.एन. रामचंद्रन नायर की अध्यक्षता में एक जांच आयोग गठित किया। इसके खिलाफ केरल वक्फ संरक्षण वेदी ने हाईकोर्ट का रुख किया और तर्क दिया कि वक्फ अधिनियम के तहत आने वाले मामलों में राज्य सरकार को हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है। हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश ने इस दलील से सहमति जताते हुए आयोग को रद्द कर दिया। हालांकि, अक्टूबर 2025 में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने एकल न्यायाधीश के फैसले को पलट दिया। डिवीजन बेंच ने न केवल राज्य सरकार के आयोग को वैध ठहराया, बल्कि यह भी कहा कि 2019 में वक्फ बोर्ड द्वारा जमीन का पंजीकरण कानून के विपरीत था। अदालत ने यह टिप्पणी भी की कि जमीन को वक्फ घोषित करना एक तरह की जमीन पर कब्जा करने की रणनीति जैसा प्रतीत होता है और 1950 का दस्तावेज वक्फनामा नहीं, बल्कि एक गिफ्ट डीड था। सुप्रीम कोर्ट में याचिका डिवीजन बेंच के इन निष्कर्षों को चुनौती देते हुए वक्फ संरक्षण वेदी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका में कहा गया कि हाईकोर्ट ने यह तय करके कि जमीन वक्फ है या नहीं, अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर फैसला दिया, जबकि यह मुद्दा पहले से ही वक्फ ट्रिब्यूनल में विचाराधीन है। साथ ही, यह भी तर्क दिया गया कि हाईकोर्ट का फैसला कार्यपालिका को ऐसे मामलों में हस्तक्षेप की अनुमति देता है, जहां कानूनन एक अलग वैधानिक प्रक्रिया निर्धारित है। संक्षिप्त सुनवाई के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए भूमि की स्थिति को यथावत रखने का आदेश दिया, लेकिन जांच आयोग को अपना काम जारी रखने की अनुमति दे दी। अब सभी की निगाहें 27 जनवरी, 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस संवेदनशील भूमि विवाद की आगे की दिशा तय होगी।